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क्रॉप कटिंग नहीं होने का बहाना पड़ा महंगा, बीमा कंपनी किसान को देगी 88,788 रुपये

पटना बाढ़ में पूरी फसल बर्बाद हो जाने के बाद क्राप कटिंग एक्सपेरिमेंट (सीसीई) नहीं होने का हवाला दे प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का दावा रोकना बीमा कंपनी को महंगा पड़ा। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने इसे सेवा में कमी व अनुचित व्यापार व्यवहार माना है। आयोग ने एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड को किसान राजेंद्र शर्मा को 88,788 रुपये फसल क्षतिपूर्ति, आठ प्रतिशत के बजाय 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज, मानसिक प्रताड़ना के लिए 40 हजार और मुकदमे के खर्च के लिए 20 हजार रुपये देने का आदेश दिया है। तीन माह में भुगतान नहीं करने पर पूरी राशि पर 15 प्रतिशत वार्षिक दंडात्मक ब्याज के साथ 10 हजार रुपये अतिरिक्त निष्पादन खर्च भी देना होगा। 8 सितंबर 2026 को अध्यक्ष प्रेम रंजन मिश्रा और सदस्य राजनिश कुमार की पीठ ने फैसला सुनाया। पुनपुन थाना क्षेत्र के पुनाढ़ी गांव निवासी वरिष्ठ नागरिक किसान राजेंद्र शर्मा ने खरीफ 2016 में धान की फसल का प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा कराया था। किसान क्रेडिट कार्ड से 887.88 रुपये प्रीमियम जमा किया था। बाढ़ में पुनाढ़ी व सबलपुर पंचायत की पूरी फसल नष्ट हो गई। जिला कृषि पदाधिकारी समेत संबंधित विभागों की रिपोर्ट में भी बाढ़ से फसल बर्बाद होने की पुष्टि की गई थी। बावजूद इसके बीमा कंपनी ने यह कहते हुए भुगतान करने से मना कर दिया कि संबंधित क्षेत्र का वैध क्राप कटिंग डाटा उपलब्ध नहीं है। किसान ने 19 नवंबर 2018 को जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दाखिल की थी। उन्होंने 4.79 लाख रुपये फसल नुकसान का दावा किया था। सुनवाई में बीमा कंपनी ने सीसीई के आधार पर दावा निस्तारित करने की शर्त का हवाला दिया। इस पर आयोग ने स्पष्ट किया कि जब फसल पूरी तरह पानी में डूबकर नष्ट हो गई हो तो क्राप कटिंग करना व्यावहारिक ही नहीं है। ऐसी स्थिति में केवल सीसीई डाटा नहीं होने से किसान का दावा रोकना फसल बीमा योजना के उद्देश्य को ही निष्फल कर देगा। आयोग ने किसान द्वारा जमा 887.88 रुपये प्रीमियम के 100 गुना यानी 88,788 रुपये को फसल क्षतिपूर्ति के रूप में निर्धारित किया। डूबी फसल की क्राप कटिंग संभव नहीं आयोग ने कहा कि किसान की फसल बाढ़ में पूरी तरह नष्ट हो गई थी। सरकारी अधिकारियों की रिपोर्ट से भी इसकी पुष्टि हुई। ऐसे में खेत में फसल बची ही नहीं थी तो क्राप कटिंग कराकर नुकसान का आकलन करना संभव नहीं था।  

झारखंड मतदाता सूची SIR में 75 बूथों पर एक भी Form-6 नहीं, रांची के 62 केंद्र शामिल

रांची  राज्य में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत 15 सितंबर को दावा-आपत्ति चरण पूरा हो जाएगा। इसके बाद मतदाता सूची में पंजीकरण के लिए फॉर्म-6 नहीं लिया जाएगा। पूरे राज्य में शनिवार तक मतदाता सूची में पंजीकरण के लिए कुल 4,54,189 आवेदन (फॉर्म-6) प्राप्त हुए हैं। वहीं, मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 के माध्यम से कुल 5,302 आवेदन प्राप्त हुए हैं। मतदाता सूची में नाम, पता आदि में संशोधन के लिए कुल 2,88,090 आवेदन फॉर्म-8 के माध्यम से प्राप्त हुए हैं। 15 सितंबर के बाद इन आवेदनों का निष्पादन शुरू होगा राज्य के कुल 31,892 मतदान केंद्रों में से अभी भी 75 मतदान केंद्र ऐसे हैं, जहां पर एक भी फॉर्म-6 मतदाता पंजीकरण के लिए प्राप्त नहीं हुआ है। वहीं, 5,591 मतदान केंद्रों पर महज एक से पांच की संख्या में ही ऐसे आवेदन प्राप्त हुए हैं। कुल 8,618 मतदान केंद्रों पर छह से 10, 11,329 पर 11 से 20 की संख्या में ही फॉर्म-6 प्राप्त हुए हैं। इसी तरह, 4,076 मतदान केंद्रों पर 21 से 30 तथा 2,203 मतदान केंद्रों पर 30 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं। रांची में सर्वाधिक 62 मतदान केंद्र, जहां एक भी फॉर्म-6 नहीं मिला पूरे राज्य में जिन 75 मतदान केंद्रों पर एक भी फॉर्म-6 प्राप्त नहीं हुआ है, उनमें 62 केंद्र सिर्फ रांची के हैं। इसके अलावा देवघर, गोड्डा, हजारीबाग, धनबाद तथा गुमला में ऐसे महज एक-एक केंद्र ही है। साहिबगंज में ऐसे तीन तथा दुमका में चार केंद्र हैं, जहां एक भी आवेदन मतदाता पंजीकरण के लिए प्राप्त नहीं हुआ है। अन्य जिलों में ऐसा कोई मतदान केंद्र नहीं है, जहां एक भी फॉर्म-6 प्राप्त नहीं हुआ है। विधानसभावार स्थिति की बात करें तो कांके विधानसभा क्षेत्र में सर्वाधिक 52 मतदान केंद्र हैं, जहां एक भी आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने की युवाओं से अपील राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने राज्य के सभी पात्र भारतीय नागरिकों विशेषकर युवाओं से अनुरोध किया है कि जो अभी भी मतदाता सूची के ड्राफ्ट सूची में सम्मिलित नहीं हैं, वे ईसीनेट अथवा बीएलओ से संपर्क कर फॉर्म 6 एवं घोषणा पत्र अवश्य भरें। वैसे सभी पात्र भारतीय नागरिक जो अर्हता तिथि एक अक्टूबर 2026 को 18 वर्ष पूरे कर चुके हैं वे 15 सितंबर तक अवश्य फॉर्म 6 भरकर अपना नाम एसआईआर की मतदाता सूची में जुड़वाना सुनिश्चित करें। क्यों महत्वपूर्ण है एसआईआर से मतदाता सूची में पंजीकरण एसआईआर द्वारा बने मतदाता सूची को स्थायी दस्तावेज के रूप में सुरक्षित रहता है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के अनुसार, वर्तमान में अर्हता तिथि को 18 वर्ष पूरे किए हुए मतदाताओं द्वारा यदि फॉर्म 6 भरकर नहीं दिया जाएगा तो वर्तमान एसआईआर की मतदाता सूची में उनका नाम सम्मिलित नहीं किया जा सकेगा। उन्होंने कहा जिस प्रकार वर्तमान एसआईआर में वर्ष 2003 के एसआईआर के दस्तावेज से मैपिंग कर मतदाताओं और उनके बेटा या बेटी को अन्य दस्तावेज में छूट प्राप्त हो रही है। उसी प्रकार आने वाले भविष्य में बच्चों को इसका लाभ प्राप्त होगा।

सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD की बड़ी कार्रवाई, 11 प्रॉपर्टी पर बुलडोजर और 4 सील

नई दिल्ली  सत्य निकेतन पीजी हादसे को रविवार को एक हफ्ते पूरे हो गए। यहां अब अधिकतर दुकानें फिर से खुल गई हैं। सड़कों पर लोग भी नजर आ रहे हैं। पर लोगों के मन से हादसे का खौफ नहीं हट रहा। चिह्नित की गई इमारतों में अब भी तोड़फोड़ का काम चल रहा है। बाजार में दुकानदार दुकान खोलकर तो बैठे हैं, लेकिन चिंता उनके चेहरे पर साफ नजर आ रही है। 'कोरोना से भी बुरा हाल' किताबों की दुकान चलाने वाले आकाश ने बताया कि दुकान खोलना मजबूरी है, लेकिन समझ नहीं आ रहा कि ग्राहक कहां से आएंगे? पहले दिनभर चहल-पहल रहती थी। अब कई स्टूडेंट्स घर लौट गए हैं। कुछ ने दूसरे इलाकों में पीजी ले लिया है। सीधे दुकानदारों की कमाई पर असर पड़ा है। कोरोना के समय भी कारोबार इतना खराब नहीं हुआ था, जितना अभी है। मजदूरों पर भी हो रहा असर मार्केट और आसपास के पीजी में सामान पहुंचाने, खान ले जाने, निर्माण और छोटे-मोटे काम करने वाले मजदूरों को यहां लगातार काम मिलता था, लेकिन अब काम अचानक कम हो गया है। मजदूर रमेश ने बताया कि पहले दिनभर कोई न कोई काम मिल जाता था, लेकिन अब पहले जैसी स्थिति नहीं है। 'जख्म ताजा है, इसलिए सबको याद है…'     मार्केट में खाना खाने आए मोतीलाल नेहरू कॉलेज के स्टूडेंट अमन के चेहरे पर गुस्सा और मायूसी दोनों दिख रही थी। उन्होंने कहा कि पिछले एक सप्ताह से पूरा इलाका छावनी जैसा बना है। अगर हादसे के बाद इतनी बड़ी पुलिस और प्रशासनिक मशीनरी यहां लग सकती है तो पहले क्यों नहीं लगी? अगर समय रहते कार्रवाई हुई होती तो शायद आज हालात कुछ और होते।     वहीं, सुभाष और शुभम त्यागी को पटियाला हाउस कोर्ट में संडे को पेश किया गया। कोर्ट ने दोनों को 12 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। स्थानीय लोगों की नजर जांच पर है कि सिर्फ पीजी संचालकों की भूमिका सामने आती है या इमारत की स्थिति, निर्माण में हुए बदलाव और विभागों की जिम्मेदारी की भी जांच होगी। 11 प्रॉपर्टी तोड़ीं, 4 को किया सील सभी 12 ज़ोनों में अवैध और बिल्डिंग बायलॉज की धज्जियां उड़ाकर बनी प्रॉपर्टीज के खिलाफ संडे को भी एमसीडी की कार्रवाई जारी रही। रविवार को साउथ ज़ोन के तहत आने वाले गौतम नगर इलाके में दो प्रॉपर्टीज सहित 11 प्रॉपर्टी पर डिमोलिशन एक्शन लिया गया। इसके अलावा 4 प्रॉपर्टी को सील किया गया। पीतमपुरा इलाके में एक बिल्डिंग को खतरनाक घोषित करते हुए उसे खाली कराया गया। इस बिल्डिंग में 16 फ्लैट बने हुए हैं। एमसीडी के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि सत्य निकेतन में ध्वस्त हुई बिल्डिंग के बराबर वाली जिस बिल्डिंग को मैनुअली तोड़ा जा रहा है, उस बिल्डिंग की अभी तक डेढ़ मंजिल ही टूट पाई है।     सोमवार को पूरी दो मंजिलों को तोड़ दिया जाएगा। इसके बाद एक ही दिन में पूरी बिल्डिंग को जमीन से मिला दिया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि इसी बिल्डिंग के आसपास बिल्डिंग नंबर 74 से लेकर बिल्डिंग नंबर 76 को भी खतरनाक घोषित कर दिया गया है।     इसके बाद इन बिल्डिंग को तोड़ने की कार्रवाई शुरू की जाएगी। इन बिल्डिंग को तोड़ने से पहले एहतियात के तौर पर बिल्डिंग नंबर 73 और बिल्डिंग नंबर 77 को खाली कराया जाएगा।     ध्यान रहे कि एनबीटी ने सबसे पहले इन खतरनाक बिल्डिंग को हाइलाइट किया था। अधिकारी ने बताया रविवार को सैदुल्लाजाब में जिस बिल्डिंग को तोड़ा जा रहा था, उसके ऊपर रविवार को भी कार्रवाई जारी रही। एक बिल्डिंग को खतरनाक घोषित किया     4 मंजिला इमारत झुकी, दो परिवारों को निकाला     मालिक को खुद ही बिल्डिंग गिराने को कहा गया है बाजार हुआ वीरान सत्य निकेतन में एमसीडी की ओर से चिह्नित की गई इमारतों में तोड़फोड़ का काम लगातार जारी है बिल्डिंग में नोटिस लगा दिया गया है गांधी नगर स्थित चांद मोहल्ले में रविवार को चार मंजिला इमारत अचानक झुक गई। सूचना के बाद पुलिस तुरंत टीम मौके पर पहुंची और इमारत में रहने वाले दो परिवार को सुरक्षित बाहर निकाला। पूरी इमारत को खाली करा लिया गया है। साथ ही, दिल्ली नगर निगम ने इसके मालिक को इमारत खुद गिराने का निर्देश दिया है।     एमसीडी के एक अधिकारी ने बताया कि मकान मालिक से रविवार को ही इमारत गिराने को कहा है। ऐसा न करने पर एमसीडी जरूरी नियमों के तहत कार्रवाई करेगी।     पुलिस अधिकारी ने बताया कि रविवार दोपहर पुलिस को सूचना मिली थी। इसके बाद पुलिस वाले मौके पर पहुंचे और दो परिवारों को सुरक्षित निकाला गया।

7 लाख की रिश्वत का मामला, पंजाब पुलिस के दो SHO पर आरोप; एक गिरफ्तार

तरनतारन. डी.जी.पी. गौरव यादव के आदेश पर तरनतारन पुलिस ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस पॉलिसी के तहत सख्त कार्रवाई करते हुए 2 एस.एच.ओ. और दो बिचौलियों के खिलाफ भ्रष्टाचार का केस दर्ज किया है। यह कार्रवाई एन.डी.पी.एस. एक्ट के तहत दर्ज मामलों में एक आरोपी के परिवार वालों से जांच के दौरान गैर-कानूनी फायदे पहुंचाने के लिए कुल 7 लाख रुपये रिश्वत लेने के मामले में की गई है। इस बारे में जानकारी देते हुए एस.एस.पी. सुरिंदर लांबा ने बताया कि थाना वल्टोहा के एस.एच.ओ. एस.आई. बलजिंदर सिंह द्वारा गुरमीत सिंह उर्फ गीतू को मामले की जांच के दौरान गैर-कानूनी फायदे पहुंचाने के बदले उसके परिवार वालों से रॉबिन सिंह के जरिए 3 लाख रुपये की रिश्वत ली। इसी तरह, थाना कच्चा-पक्का के एस.एच.ओ. एस.आई. किरपाल सिंह, जिन्होंने कुछ दिन पहले चार्ज संभाला था, पर पूरन सिंह के जरिए उक्त आरोपी के परिवार वालों से 4 लाख रुपये की रिश्वत लेने का आरोप है। रॉबिन सिंह और पूरन सिंह पर इन कथित लेन-देन में बिचौलिए की भूमिका निभाने का आरोप है। एस.एस.पी. ने बताया कि मामले में कार्रवाई करते हुए एस.आई. कृपाल सिंह, एस.एच.ओ. पुलिस स्टेशन कच्चा-पक्का को गिरफ्तार कर लिया गया है और बाकी तीन आरोपी एस.आई. बलजिंदर सिंह, रॉबिन सिंह और पूरन सिंह फरार हैं। एस.एस.पी. ने बताया कि गुरमीत सिंह उर्फ गीतू के खिलाफ एन.डी.पी.एस. एक्ट के तहत 2 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें से तारीख 01.09.2026 का मामला पुलिस स्टेशन वल्टोहा से जुड़ा है, जिसमें 14 किलो 110 ग्राम अफीम बरामद की गई थी। इसी तरह 02.09.2026 को पुलिस स्टेशन कच्चा पक्का में एक मामला दर्ज किया गया है, जिसमें 2 किलो अफीम बरामद की गई थी। मामले की आगे की जांच डी.एस.पी. भिखीविंड अतुल सोनी कर रहे हैं। गिरफ्तार आरोपी को माननीय कोर्ट में पेश करके रिमांड पर लिया जा रहा है।

गणेश चतुर्थी पर इंदौर-उज्जैन में भव्य आयोजन, खजराना गणेश पहनेंगे 7 करोड़ के गहने; महाकाल का गणेश स्वरूप में श्रृंगार

इंदौर / उज्जैन  गणेश चतुर्थी पर आज गणपति बप्पा की स्थापना होगी। घरों से लेकर बड़े गणेश मंदिरों और पंडालों तक उत्सव की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। इंदौर के खजराना गणेश, उज्जैन के चिंतामन गणेश समेत प्रदेश के प्रमुख मंदिरों में विशेष पूजन, श्रृंगार और दर्शन की तैयारिया में जुटे।  इंदौर के खजराना गणेश मंदिर में करीब 7 करोड़ के स्वर्ण आभूषण भगवान को धारण कराए जाएंगे। इससे पहले रविवार को ब्रह्ममुहूर्त में भगवान को हीरे जड़ित नेत्र धारण करा दिए गए। बड़ा गणपति मंदिर में भी भगवान का आकर्षक श्रृंगार होगा। 25 फीट ऊंचे गणपति की रोजाना एक घंटे संगीतमय आरती होगी। उज्जैन के चिंतामन गणेश मंदिर की खास परंपराओं में से एक मंदिर के पीछे उल्टा स्वास्तिक बनाना है। श्रद्धालु भगवान की पीठ की ओर उल्टा स्वास्तिक बनाकर अपनी मनोकामना मांगते हैं। मान्यता पूरी होने के बाद श्रद्धालु अनाज, लड्डुओं या अन्य प्रसाद से तुलादान करते हैं। भस्म आरती में बाबा महाकाल को रजत आभूषण के साथ भांग-चंदन अर्पित उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में सोमवार तड़के चार बजे भस्म आरती के दौरान मंदिर के पट खुले। पंडे-पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित सभी देव प्रतिमाओं का पूजन कर भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया। इसके बाद दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से पूजन-अभिषेक किया गया। गणेश चतुर्थी के अवसर पर भगवान महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया। बाबा को रजत आभूषण धारण कराकर भांग, चंदन और त्रिपुंड अर्पित किया गया, जिसके बाद भगवान गणेश के स्वरूप में श्रृंगार किया गया। प्रथम घंटाल बजाकर भगवान का ध्यान और मंत्रोच्चार किया गया। हरिओम का जल अर्पित करने के बाद कपूर आरती हुई। श्रृंगार पूरा होने पर ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंककर भस्म अर्पित की गई। इसके बाद भगवान महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुंडमाला, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्पों की माला धारण कराई गई। मोगरे और गुलाब के फूलों से बाबा का विशेष श्रृंगार किया गया। भगवान महाकाल को फल और मिष्ठान का भोग लगाया गया। भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और बाबा महाकाल के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में दर्शन देते हैं। ईको-फ्रेंडली मूर्तियों की बढ़ी मांग पर्यावरण के प्रति जागरूकता के चलते इस बार बाजारों में मिट्टी और प्राकृतिक रंगों से बनी ईको-फ्रेंडली मूर्तियों का क्रेज सबसे ज्यादा देखने को मिल रहा है। मूर्तिकारों ने पौधे वाले गणेश (प्लांट गणेश) भी तैयार किए हैं, जिनमें बीज मिलाए गए हैं ताकि विसर्जन के बाद गमले में पौधा उग सके। श्रद्धालुओं का कहना है कि वे पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना बप्पा की भक्ति करना चाहते हैं। गणेशोत्सव में वृंदावन के किशोरी शरण बांधेंगे समां शहर स्थित अग्रवाल धर्मशाला में मराठा एसोसिएशन एवं श्री गणेश मराठा मंडल के तत्वावधान में भव्य श्री गणेश महोत्सव का शुभारंभ आज से हो रहा है। अपनी भव्यता और वैदिक परंपराओं के लिए प्रसिद्ध इस उत्सव में प्रात: 11 बजे श्री गणेश मूर्ति की स्थापना की जाएगी तथा रात्रि 11:30 बजे महाआरती संपन्न होगी। कार्यक्रम का विशेष आकर्षण वृंदावन से पधार रहे सुप्रसिद्ध भजन गायक किशोरी शरण होंगे, जो अपनी सुमधुर भजनों से समां बांधेंगे। मंडल के अध्यक्ष श्रितोष पाटील, उपाध्यक्ष कार्तिक मराठा, महामंत्री सूरज मराठा और कोषाध्यक्ष सुमित मराठा ने बताया कि बप्पा के भव्य श्रृंगार, दर्शन व सेवा कार्य को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इस अवसर पर प्रणय मराठा, रितिक, श्रेयश, किशोर, अरविंद, संतोष, संजय, तानाजी, सुरेश, अण्णा, राजकुमार, दिनकर राव, नथुलाल, नंदकुमार, किशन, सोमनाथ, देवांग गुप्ता, सुमित अग्रवाल और कमल शर्मा सहित समस्त मराठा मंडल के सदस्य व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।

संकुल समन्वयक और शिक्षक निकले शराब तस्कर, 7 गिरफ्तार; 40 पेटियां बरामद

आरंग/रायपुर. सरकारी तंत्र को चूना लगाकर शराब तस्करी करने वाले एक बड़े नेटवर्क का आरंग पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। हैरान कर देने वाले इस मामले में शराब दुकान के सुपरवाइजर, सेल्समैन और मल्टी-वर्कर के साथ ही अमोदी में पदस्थ शासकीय शिक्षक व संकुल समन्वयक तिरीत राम बांधे भी तस्करी के इस काले कारोबार में संलिप्त पाया गया है। एसएसपी रायपुर, एएसपी एवं डीएसपी माना के निर्देश पर थाना प्रभारी आरंग निरीक्षक नरेश साहू के नेतृत्व में गश्त पर निकली पुलिस टीम को मुखबिर से सटीक सूचना मिली कि सफेद रंग की लग्जरी आर्टिका कार (CG 04 QB 5200) में ग्राम गुल्लू शराब भट्ठी से भारी मात्रा में अवैध शराब भरकर रानीसागर की ओर ले जाई जा रही है। मंदिर के पास घेराबंदी कर दबोचा सूचना मिलते ही सउनि अनिल चंद्रवंशी, प्रशिक्षु उपनिरीक्षक सुरेश बंधन, आरक्षक नियाज खान और सैनिक दुर्गेश चंद्राकर की टीम ने रानीसागर हनुमान मंदिर के पास घेराबंदी कर कार को रोका। कार की तलाशी लेने पर 160 नग पाव देशी मसाला शराब (कुल 28.800 बल्क लीटर, कीमत ₹16,000) बरामद हुई। पुलिस ने तस्करी में प्रयुक्त 8 लाख की कार सहित कुल ₹8,16,000 का सामान जब्त किया है। गिरफ्तार आरोपियों में शामिल गिरफ्तार आरोपियों में परसवानी, ग्राम अमोदी निवासी शिक्षक एवं संकुल समन्वयक तिरीत राम बांधे (45 वर्ष) गुल्लू निवासी , शराब दुकान सुपरवाइजर उबारन दास पुरेना (34 वर्ष), कोडापार निवासी शराब दुकान सेल्समैन राजेश काटले (31 वर्ष), शराब दुकान मल्टी वर्कर परसवानी निवासी सुरेश बांधे (36 वर्ष), परसवानी निवासी वाहन चालक भरत रात्रे (38 वर्ष), अमोदी निवासी दिलीप कुमार कुर्रे (50 वर्ष), अमोदी निवासी भागवत बारले (38 वर्ष) शामिल हैं। आबकारी एक्ट के तहत मामला दर्ज थाना प्रभारी नरेश साहू ने बताया कि सरकारी शराब दुकान के कर्मचारी खुद कोचियों की भूमिका निभा रहे थे, जिसमें संकुल समन्वयक शिक्षक की संलिप्तता ने शिक्षा विभाग को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। सभी 7 आरोपियों के खिलाफ आबकारी एक्ट की धारा 34(2) के तहत केस दर्ज कर लिया गया है। नेटवर्क से जुड़े अन्य चेहरों का पता लगाने जांच जारी है।

खाद-बीज में अनियमितता का खुलासा, तीन के खिलाफ FIR; तीन गोदाम सील

रायपुर. किसानों तक पहुंचने वाले खाद, बीज और कीटनाशक सामाग्री में अनियमितता पाए जाने पर खाद्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है. बिना प्राधिकार के कारोबार किया जा रहा था. वहीं कुछ संस्थानों में एक्सपायरी कीटनाशक मिली. औचक निरीक्षण के दौरान गोदामों से भंडारण संबंधी बॉक्स, स्टीकर और सील जैसी सामान बरामद किया गया है. कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई है. जांच के बाद तीन व्यापारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. वहीं 9 संस्थानों के विक्रय पर प्रतिबंध और 3 गोदाम को सील कर दिया गया है. वहीं एक को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है. राज्य और जिला स्तरीय संयुक्त जांच दल ने प्रतिष्ठानों के औचक निरीक्षण किया. रायपुर जिले में मेसर्स पुलकित बायोफर्टिलाइजर, हरियाणा और रविन्द्र कुमार मित्तल को बिना प्राधिकार पत्र के बीज और उर्वरक का व्यापार किए जाने पर एफआईआर दर्ज की गई. इसके अलावा एकॉन क्रॉप साइंसेस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, एमिरॉन ओवरसीज प्राइवेट लिमिटेड, डेक्सीस एग्रो सॉल्यूशन, भास्कर कृषि केंद्र, अभनपुर कृषि केंद्र और सोपन एग्री केयर प्राइवेट लिमिटेड समेत अन्य प्रतिष्ठानों पर भी अलग-अलग अनियमितताओं के चलते बिक्री प्रतिबंध और नोटिस की कार्रवाई की गई है. वहीं निधि मार्केटिंग सीएंडएफ, उरकुरा से जुड़े कुछ प्रतिष्ठानों में कृषि उत्पादों के भंडारण में गड़बड़ी मिलने पर नोटिस जारी किया गया. गोदाम से बॉक्स-स्टीकर बरामद जांच के दौरान भंडारण से संबंधित बॉक्स, स्टीकर और सील जैसी सामग्री मिलने पर गोदाम सील कर दिया गया. इसके अलावा निरीक्षण में सहयोग नहीं करने पर आरडी इंटरप्राइजेस और डीसी इंटरप्राइजेस के विक्रय केंद्र भी सील किए गए हैं. उप संचालक कृषि ने बताया कि स्पष्टीकरण पर संबंधितों द्वारा पक्ष रखे जाने के बाद उर्वरक में अनियमितता पर उर्वरक (नियंत्रण) आदेश 1985 एंव आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 और कीटनाशी उत्पादों में अनियमितता पर कीटनाशी अधिनियम 1968 एवं नियम 1971 के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी.

पंजाब में बढ़ी बिजली की डिमांड, 2173 MW उत्पादन ठप; मंत्री बोले- कल से लंबे कट नहीं

लुधियाना लुधियाना में बिजली मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने कहा कि किसानों को 10 घंटे बिजली मिल रही।लुधियाना में बिजली मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने दावा किया कि पंजाब में अब बिजली के लंबे कट नहीं लगेंगे, कल यानी 15 सितंबर से कट लगने बंद हो जाएंगे। प्राइवेट बिजली प्लांट भी सरकार ने ठीक करवाए हैं। इसके लिए करीब 200 सरकारी मुलाजिम लगाए। मंत्री ने कहा कि किसानों को पहले की तुलना में ज्यादा बिजली दी जा रही है। अब 8 घंटे की बजाय किसानों को 10 घंटे बिजली मिल रही है। उन्होंने बताया कि इस साल पिछले साल की तुलना में बिजली की डिमांड 3,500 मेगावाट ज्यादा है। इधर, बिजली की डिमांड लगातार 16 हजार मेगावाट के पार बनी हुई है। पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) इस समय अलग-अलग स्रोतों से अधिकतम स्तर पर बिजली पैदा करवा रहा है। कायले की कमी के चलते बिजली की कुल जनरेशन 5,743 मेगावाट तक ही पहुंची है। पिछले दिनों के मुकाबले पंजाब में बिजली की जनरेशन तो बढ़ी है, लेकिन डिमांड कम नहीं हो रही है। डिमांड पूरी करने के लिए PSPCL को सीधे केंद्रीय पूल पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जिससे बिजली कट लग रहे हैं। अघोषित बिजली कटों से परेशान लुधियाना के डाइंग उद्यमियों ने आज चंडीगढ़ रोड के वर्धमान चौक पर धरना देने का ऐलान किया है। वहीं, दूसरी तरफ बिजली कटों को लेकर कांग्रेस पटियाला में PSPCL मुख्यालय के बाहर धरना देगी।   बिजली उत्पादन कहां से कितना हो रहा, जानिए… सरकारी थर्मल प्लांट: पंजाब में तीन सरकारी थर्मल प्लांटों के 10 यूनिट हैं। पहला सरकारी प्लांट रोपड़ में है और यहां चार यूनिट हैं। इन चार यूनिटों की बिजली उत्पादन की कुल क्षमता 840 मेगावाट है, जबकि इनमें 487 मेगावाट ही बिजली पैदा हो रही है। दूसरा प्लांट लहरा मोहब्बत में है। इस प्लांट में भी चार यूनिट हैं। इसकी कुल क्षमता 920 मेगावाट है, जबकि यहां 801 मेगावाट बिजली बनाई जा रही है। तीसरा प्लांट गोइंदवाल में है और इसमें दो यूनिट हैं। इस प्लांट की कुल उत्पादन क्षमता 540 मेगावाट है, जबकि इसमें 501 मेगावाट बिजली पैदा हो रही है। इस तरह सरकारी प्लांटों से कुल उत्पादन 1,786 मेगावाट है। सरकारी दो प्लांट लगभग पूरी क्षमता से चल रहे हैं, जबकि रोपड़ प्लांट में अभी भी उत्पादन क्षमता से काफी कम है। प्राइवेट थर्मल प्लांट: पंजाब में दो प्राइवेट थर्मल प्लांट हैं, जिनकी कुल क्षमता 3,380 मेगावाट बिजली पैदा करने की है। तलवंडी साबो में तीन यूनिट हैं, जिनकी कुल क्षमता 1,980 मेगावाट है। सोमवार को तीनों यूनिट ऑपरेशनल हैं और इनसे 1,701 मेगावाट बिजली पैदा की जा रही है। वहीं, दूसरा प्लांट राजपुरा में है और इसमें दो यूनिट हैं। दोनों की कुल क्षमता 1,400 मेगावाट है। इन दोनों यूनिटों में आज कुल 1,321 मेगावाट बिजली पैदा की जा रही है। दोनों प्राइवेट प्लांटों को मिलाकर 3,022 मेगावाट बिजली पैदा की जा रही है। हाइड्रो प्रोजेक्ट्स: पंजाब के पास रणजीत सागर डैम इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के अलावा चार और हाइड्रो प्रोजेक्ट हैं। रणजीत सागर डैम की क्षमता 600 मेगावाट बिजली पैदा करने की है, जिसमें दिन के समय कम बिजली पैदा की जा रही है। सोमवार सुबह 9 बजे के करीब चार में से दो टरबाइन चलाई जा रही हैं, जिनसे 240 मेगावाट बिजली बनाई जा रही है। शानन प्रोजेक्ट से 50 मेगावाट बिजली तैयार: यू.बी.डी.सी. हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर हाउस से 44 मेगावाट, मुकेरियन हाइडल प्रोजेक्ट के अलग-अलग यूनिटों से 193 मेगावाट, आनंदपुर साहिब हाइडल प्रोजेक्ट से 112 मेगावाट व शानन प्रोजेक्ट से 50 मेगावाट बिजली तैयार की जा रही है। इस तरह हाइड्रो प्रोजेक्टों से कुल 639 मेगावाट बिजली पैदा की जा रही है। रात के समय हाइड्रो प्रोजेक्ट्स से उत्पादन 830 मेगावाट तक किया जा रहा है। सोलर व अन्य प्लांट: पंजाब में बड़ी संख्या में सोलर प्लांट लगे हैं। इनसे बिजली का उत्पादन काफी मात्रा में हो रहा है। दिन के समय सोलर प्लांट व अन्य स्रोतों से 350 से 400 मेगावाट बिजली पैदा हो रही है। हालांकि, रात के समय इन प्लांटों से जनरेशन शून्य हो जाती है। सुबह 9 बजे के करीब सोलर प्लांट व अन्य स्रोतों से कुल 341 मेगावाट के करीब बिजली उत्पादन हो रहा है। केंद्रीय पूल: पंजाब में बिजली की डिमांड पूरी करने के लिए पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड सीधे तौर पर केंद्रीय पूल पर निर्भर है। पंजाब में जितनी जनरेशन होती है, उसके बाद डिमांड और सप्लाई में जो गैप रहता है, उसे पूरा करने के लिए केंद्रीय पूल से बिजली खरीदी जाती है। सोमवार को केंद्रीय पूल से करीब 11 हजार मेगावाट के करीब बिजली खरीदी जा रही है। पंजाब में बढ़ी बिजली की मांग पंजाब में बिजली संकट लगातार गहराता जा रहा है। थर्मल प्लांटों में कोयले की कमी और यूनिटों में तकनीकी खराबी से उत्पादन प्रभावित है। मानसून की बारिश कम होने से खेतों में ट्यूबवेल पर निर्भरता बढ़ी है।  उमस भरी गर्मी के कारण घरेलू बिजली की मांग भी रिकॉर्ड स्तर पर है। मांग और उपलब्धता में बड़े अंतर के कारण उद्योगों से लेकर खेतीबाड़ी क्षेत्र और शहरों व गांवों में लंबे कट लगाए जा रहे हैं। इससे उद्योगपतियों किसानों और आम लोगों की परेशानी बढ़ गई है। सितंबर में लगातार 16 हजार मेगावाट से ज्यादा मांग छह सितंबर को छोड़कर सितंबर में बिजली की मांग लगातार 16 हजार मेगावाट से अधिक रही। एक सितंबर को 16116 मेगावाट, दो को 16530, तीन को 16485, चार को 16182, पांच को 16254, सात को 16219, आठ और नौ को 16505, 10 को 16432, 11 को 16619 और 12 सितंबर को 16519 मेगावाट मांग रही। शनिवार को 16519 मेगावाट की रिकॉर्ड मांग के मुकाबले पावरकाम को सभी स्रोतों से केवल 4503 मेगावाट बिजली उपलब्ध हुई। करीब 2173 मेगावाट उत्पादन प्रभावित रहा। तकनीकी खराबी से राजपुरा का 700 मेगावाट का एक नंबर और तलवंडी साबो का 660 मेगावाट का दो नंबर यूनिट बंद रहा। 840 मेगावाट क्षमता वाले रोपड़ थर्मल से केवल 488 मेगावाट बिजली मिली। 920 मेगावाट क्षमता वाले लहरा मुहब्बत प्लांट से 804 मेगावाट उत्पादन हुआ। पावरकाम अधिकारियों के अनुसार सर्दियों में रोपड़ और लहरा मुहब्बत थर्मलों का सालाना रखरखाव नहीं हुआ था। अब तकनीकी खराबी के कारण यूनिट … Read more

गंगा का जलस्तर घटा, लेकिन पुनपुन-बागमती में बढ़ोतरी ने बढ़ाई चिंता

पटना बिहार में गंगा समेत कई प्रमुख नदियों का जलस्तर सोमवार सुबह तक खतरे के निशान से ऊपर बना हुआ है, हालांकि गंगा के अधिकांश घाटों और जलमापक केंद्रों पर पानी में कमी दर्ज की गयी है, जबकि पुनपुन और बागमती में बढ़त ने निचले इलाकों की चिंता बढ़ा दी है। जाहिर है ऐसे में अभी बिहार में बाढ़ का खतरा टला नहीं है। जल संसाधन विभाग के आज सुबह छह बजे के जारी आंकड़ों के अनुसार गंगा पटना के दीघा में 50.81 मीटर, गांधी घाट पर 49.61 मीटर, हथिदह में 42.82 मीटर, मुंगेर में 39.38 मीटर, भागलपुर में 34.18 मीटर और कहलगांव में 32.49 मीटर पर बह रही है और इन सभी स्थानों पर जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर है। एहतियात की बात है कि गंगा के जलस्तर में कमी का रुख इन प्रमुख केंद्रों पर बना हुआ है। पटना के दीघा में नदी खतरे के निशान 50.45 मीटर से 0.36 मीटर ऊपर है, जबकि गांधी घाट पर 48.60 मीटर के खतरे के निशान से 1.01 मीटर, हथिदह में 41.76 मीटर से 1.06 मीटर, मुंगेर में 39.33 मीटर से 0.05 मीटर, भागलपुर में 33.68 मीटर से 0.50 मीटर और कहलगांव में 31.09 मीटर से 1.40 मीटर ऊपर है। फरक्का में भी गंगा 23.80 मीटर पर खतरे के निशान 22.25 मीटर से 1.55 मीटर ऊपर है। पटना शहर और आसपास के घाटों की स्थिति भी अभी सामान्य नहीं हुई है। बाढ़ प्रबंधन सुधार सहायता केंद्र के छह बजे के आंकड़ों में गांधीघाट पर गंगा 49.61 मीटर, दीघाघाट पर 50.81 मीटर, बांकाघाट पर 48.59 मीटर और पंडारक में 43.08 मीटर दर्ज की गयी। इनमें गांधीघाट, दीघाघाट और बांकाघाट समेत कई केंद्रों पर पानी खतरे के निशान से ऊपर है। हथिदह में जलस्तर 42.82 मीटर, मुंगेर में 39.38 मीटर, सुल्तानगंज में 36.21 मीटर, भागलपुर में 34.18 मीटर, कहलगांव में 32.49 मीटर और साहेबगंज में 28.63 मीटर दर्ज किया गया। गंगा के बक्सर केंद्र पर जलस्तर 59.42 मीटर रहा, जो खतरे के निशान 60.32 मीटर से 0.90 मीटर नीचे है, हालांकि यह चेतावनी स्तर से ऊपर है। वाराणसी में जलस्तर 68.47 मीटर और प्रयागराज में 80.01 मीटर दर्ज किया गया, जहां जलस्तर खतरे के निशान से नीचे है। विभागीय आंकड़ों में गंगा के इन दोनों ऊपरी केंद्रों पर पानी घटने का रुख है जो आने वाले दिनों के लिए बेहतर संकेत है। उधर, अन्य नदियों में स्थिति मिश्रित बनी हुई है। कोसी बलतारा में 35.01 मीटर और कुरसेला में 31.32 मीटर पर है तथा दोनों स्थानों पर नदी खतरे के निशान से क्रमश: 1.16 और 1.32 मीटर ऊपर है। बूढ़ी गंडक खगड़िया में 37.96 मीटर पर खतरे के निशान से 1.38 मीटर ऊपर है। घाघरा दरौली में 61.30 मीटर पर है, जो खतरे के निशान से 0.48 मीटर ऊपर है। पुनपुन और बागमती की स्थिति विशेष रूप से निगरानी वाली बनी हुई है। पुनपुन श्रीपालपुर में 51.94 मीटर पर बह रही है और खतरे के निशान 50.60 मीटर से 1.34 मीटर ऊपर है। यहां जलस्तर बढ़ने का रुख दर्ज किया गया है। बागमती बेनीबाद में 49.20 मीटर पर है, जो खतरे के निशान 48.68 मीटर से 0.52 मीटर ऊपर है और इसमें भी बढ़त दर्ज की गयी है। इसके विपरीत कोसी, बूढ़ी गंडक और गंगा के अधिकांश केंद्रों पर जलस्तर घट रहा है। बराजों से पानी छोड़े जाने की स्थिति भी महत्वपूर्ण है। कोसी नदी के वीरपुर बराज से सोमवार सुबह आठ बजे 1,55,710 क्यूसेक पानी डाउनस्ट्रीम छोड़ा जा रहा था और इसमें बढ़ोतरी का रुख दर्ज किया गया। गंडक नदी के वाल्मीकिनगर बराज से 86,000 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था और प्रवाह स्थिर रहा। सोन नदी के इंद्रपुरी बराज से 52,097 क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जिसमें कमी का रुख दर्ज किया गया।

योगी सरकार के ₹9.99 लाख करोड़ बजट में सितंबर तक खर्च हुए सिर्फ ₹2.27 लाख करोड़

लखनऊ  बजट पास हुए पांच महीने बीत चुके हैं, लेकिन विभागों के रकम खर्च करने की रफ्तार बेहद सुस्त है। यह हाल तब है जब अगले साल की शुरुआत में यूपी विधान सभा चुनाव प्रस्तावित है। सरकार अधिसूचना लगने के पहले ही बजट का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करके परियोजनाओं को जमीन पर उतारना चाहती है। अगले साल जनवरी में अधिसूचना संभावित है। योगी सरकार ने इस साल फरवरी में 9.12 लाख करोड़ रुपये का मूल बजट पास किया था। इसके बाद अनुपूरक बजट लाई थी। कोषवाणी के आंकड़ों के मुताबिक सरकार के प्रस्तावित बजट 9.99 लाख करोड़ रुपये से सापेक्ष अगस्त तक 2.08 लाख करोड़ रुपये का वास्तविक खर्च किया गया। सितंबर तक के आंकड़े देखें तो यह खर्च 2.27 लाख करोड़ रुपये है। इस लिहाज से सितंबर तक खर्च की गई रकम बजट के सापेक्ष 22.78% है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बजट और अनुपूरक बजट पास होने के बाद मंत्रियों को नवंबर तक ज्यादा से ज्यादा वित्तीय स्वीकृतियां जारी करवाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा था कि इसी वित्तीय वर्ष चुनाव होने की वजह से रकम का इस्तेमाल करने के लिए कम वक्त मिलेगा, लिहाजा इसमें तेजी रखी जाए। शुरुआती दिनों में विभागों ने तेजी दिखाई, लेकिन बाद में सुस्त हो गई। कोषवाणी के आंकड़ों के मुताबिक अब तक कुल बजट के सापेक्ष विभागों को 4.46 लाख करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृतियां जारी हुई हैं। बजट के सापेक्ष वित्तीय स्वीकृति का आंकड़ा 44.64% है। वित्तीय स्वीकृति के सापेक्ष विभागों को 3.40 लाख करोड़ रुपये की रकम आवंटित की गई है। यहां के आंकड़े राहत भरे बजट के सापेक्ष रकम खर्च करने के आंकड़ों में भले ही सुस्ती दिखाई दे रही है, लेकिन आवंटित रकम की सापेक्ष खर्च के आंकड़े फिर भी राहत भरे हैं। मसलन आवास विभाग ने आवंटित बजट का 95% खर्च किया है। लघु उद्योग एवं निर्यात प्रोत्साहन ने आवंटित बजट का 65.40% खर्च किया है। हथकरघा उद्योग ने आवंटित बजट का 99.25% बजट इस्तेमाल किया है। कई विभागों का वास्तविक खर्च 10% से भी कम तमाम विभाग ऐसे हैं, जिनका वास्तविक बजट खर्च 10% से भी कम है। स्टांप एवं पंजीकरण 7.61%, समाज कल्याण के अधीन आने वाला जनजाति कल्याण विभाग 4.48%, विकलांग एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण 9.38%, वित्त विभाग के अधीन सामूहिक बीमा 6.59%, लोक निर्माण के अधीन भवन निर्माण मद में 9.18%, राष्ट्रीय एकीकरण विभाग 5.62%, आपदा राहत में 3.03%, पर्यटन में 2.82%, नियोजन में 5.34% है। नागरिक उड्डयन 2.14%, मत्स्य 5.62%, पंचायतीराज 9.76% और लघु उद्योग एवं निर्यात प्रोत्साहन में 8.54% है। विभागों के अब तक बजट खर्च की स्थिति (प्रतिशत में) विभाग    खर्च आबकारी    27.73 आवास    27.86 खनन    28.27 ऊर्जा    32.74 कृषि    24.87 ग्राम्य विकास    13.99 सहकारिता    36.60 खाद्य तथा रसद    18.07 खेल    17.67 गृह (पुलिस)    33.12 चिकित्सा (सार्वजनिक स्वास्थ्य)    16.98 नगर विकास    11.94 परिवहन    20.40 महिला एवं बाल कल्याण    16.24 लोक निर्माण (सड़कें)    15.97 बेसिक शिक्षा     38.78 माध्यमिक शिक्षा    32.14