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पानी संकट से निपटने को पंजाब सरकार का बड़ा कदम, DSR तकनीक अपनाएंगे किसान

चंडीगढ़  देश के सबसे अधिक भूजल संकट झेल रहे राज्यों में शामिल पंजाब में गिरते भूजल स्तर को रोकने के लिए राज्य सरकार ने डायरेक्ट सीडिंग ऑफ राइस (डीएसआर) तकनीक को बड़े स्तर पर बढ़ावा देने का फैसला किया है। जल संरक्षण को ध्यान में रखते हुए सरकार ने वर्ष 2026-27 के फसल सीजन में राज्यभर में पांच लाख एकड़ भूमि को डीएसआर तकनीक के तहत लाने का लक्ष्य तय किया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार पंजाब अपने वार्षिक भूजल पुनर्भरण (ग्राउंडवॉटर रिचार्ज) का 156.36 प्रतिशत तक दोहन कर रहा है। राज्य के 153 प्रशासनिक ब्लॉकों में से 111 ब्लॉक ‘ओवर एक्सप्लॉइटेड’ श्रेणी में आ चुके हैं। इसका अर्थ है कि इन क्षेत्रों में भूजल का इस्तेमाल उसकी प्राकृतिक भरपाई से कहीं अधिक हो रहा है। इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए पंजाब सरकार ने डीएसआर तकनीक को प्रोत्साहित करने की नीति अपनाई है। इस योजना के तहत डीएसआर अपनाने वाले किसानों को ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से प्रति एकड़ 1500 रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी। आगामी वित्तीय वर्ष में डीएसआर कार्यक्रम के लिए सरकार ने 40 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2025-26 में 23,410 किसानों ने डीएसआर तकनीक अपनाई थी। इन किसानों को कुल 35.38 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई। डीएसआर तकनीक पंजाब सरकार की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य भूजल संरक्षण, पारंपरिक धान रोपाई पर निर्भरता कम करना और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि डीएसआर तकनीक पारंपरिक धान खेती की तुलना में पानी, बिजली और श्रम लागत में उल्लेखनीय कमी लाती है। ऐसे में यह तकनीक पंजाब के कृषि और पर्यावरण संबंधी संकट से निपटने में अहम भूमिका निभा सकती है।

Women Become Owner: जिले में 65% संपत्ति हिस्सेदारी महिलाओं के नाम, रोज हो रहे 75 पंजीयन

भोपाल  मौजूदा वित्तवर्ष में हुई रजिस्ट्री में आधी आबादी की संपत्ति की हिस्सेदारी 65 फीसदी तक हो गई है। हर साल 7 फीसदी की दर से ये बढ़ोतरी हो रही है। हालांकि, कुल संपत्तियों में महिलाओं का हिस्सा 19 फीसदी ही है। मध्य प्रदेश के भोपाल जिले में पंजीयन को लेकर सामने आ रही रोजाना की रिपोर्ट से ये स्थिति सामने आ रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह महिलाओं को रजिस्ट्री में दो फीसदी तक मिलने वाली छूट को बताया जा रहा है। संपत्ति के क्रय विक्रय को लेकर हो रहे पंजीयन में रोजाना महिलाओं के नाम जिले में औसतन 75 नए पंजीयन किए जा रहे हैं। ये क्रय विक्रय के औसत पंजीयन का 65 फीसदी है। बीते साल महिलाओं के नाम 38 हजार करोड़ रुपए की संपत्ति हुई भोपाल की शहरी संपत्ति में महिलाओं की हिस्सेदारी साल दर साल बढ़ोतरी कर रही है। बीते वित्तीय वर्ष 2025-26 की बात करें तो प्रदेश भर में महिलाओं के नाम 38 हजार करोड़ रुपए की संपत्ति खरीदी गई थी। इसमें भोपाल में 5900 करोड़ रुपए की संपत्ति महिलाओं के नाम पर दर्ज हुई थी। वित्त वर्ष 2024-25 की तुलना में ये दो फीसदी ज्यादा था। जिले में महिलाओं के नाम पर संपत्ति खरीदकर छूट का लाभ नियम से 128 करोड़ रुपए की स्टांप ड्यूटी बचाई जा सकी थी। पंद्रह दिन में महिलाओं के नाम 9000 संपत्तियां इस संबंध में जिला पंजीयक स्वप्नेश शर्मा का कहना है कि, पंजीयन विभाग के आंकड़े बताते हैं कि, हर पंद्रह दिन में प्रदेश भर में महिलाओं के नाम पर 9400 संपत्तियां रजिस्टर्ड हो रही है। जबकि पुरुषों के नाम 7700 संपत्तियां दर्ज हो रही हैं। जाहिर है कि, महिलाओं के नाम 626 संपत्तियां रोजाना रजिस्टर्ड हो रही है। शासन के तय नियमों के अनुसार, संपदा 2.0 से पंजीयन की प्रक्रिया की जा रही है। अब पोर्टल पर किसी प्रकार की दिक्कत नहीं आ रही है। हर तरह की प्रॉपर्टी की डिमांड ज्यादा खास बात ये है कि, मौजूदा समय में जिलेभर में फ्लैट, प्लॉट, डुप्लेक्स, फार्म हाउस और कृषि भूमि हर श्रेणी की प्रॉपर्टी की खरीदारी हो रही है। खासकर शहर के विस्तार वाले इलाकों में निवेशकों की रुचि सबसे ज्यादा देखी जा रही है। रजिस्ट्री कार्यालय के अफसरों का कहना है कि, ज्यादा संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। हालांकि, उनका ये भी कहना कि, भारतीय कल्चर के के चलते यहां आम दिनों के मुकाबले त्योहारी सीजन में लोग प्रॉपर्टी की खरीदी ज्यादा करते हैं।

मध्य प्रदेश में टाउनशिप परियोजनाओं पर बड़ा फैसला, अब नियमों के तहत होगा विकास

भोपाल  मध्यप्रदेश में टाउनशिप और बड़े आवासीय प्रोजेक्ट्स के विकास को लेकर सरकार ने महत्वपूर्ण बदलाव कर दिए हैं। अब मास्टर प्लान में लैंड यूज परिवर्तन करवाकर छोटे क्षेत्र में टाउनशिप विकसित करना आसान नहीं रहेगा। नगरीय विकास विभाग ने नगर तथा ग्राम निवेश नियम 2012 में संशोधन करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि टाउनशिप विकास के मामलों में अब इंटीग्रेटेड टाउनशिप पॉलिसी के प्रावधान प्रभावी होंगे। इसके बाद प्रदेश में 10 हेक्टेयर से कम क्षेत्र में टाउनशिप विकसित नहीं की जा सकेगी। अब नहीं टाउनशिप के लिए इंटीग्रेटेड नियम ही मान्य अभी तक एमपी के कई शहरों में मास्टर प्लान के तहत लैंड यूज बदलवाकर 2 हेक्टेयर जैसी छोटी जमीन पर भी आवासीय कॉलोनियां और टाउनशिप विकसित की जा रही थीं। सरकार ने फरवरी 2026 में इस संशोधन का प्रारूप जारी किया था। दावे-आपत्तियों के निराकरण के बाद मई से इसे अधिसूचित कर प्रभावी कर दिया गया है। संशोधन में नई धारा जोड़कर यह स्पष्ट किया है कि मास्टर प्लान या लैंड यूज परिवर्तन संबंधी प्रावधानों के बावजूद टाउनशिप के लिए इंटीग्रेटेड नियम ही मान्य होंगे। इंटीग्रेटेड टाउनशिप प्लान में ये संशोधन     अब इंटीग्रेटेड टाउनशिप पॉलिसी के नियम प्रभावी होंगे     5 लाख से कम आबादी वाले शहरों में न्यूनतम 10 हेक्टेयर तो इससे अधिक आबादी वाले शहरों में न्यूनतम 20 हेक्टेयर जमीन अनिवार्य।     नगरीय सीमा या प्लानिंग एरिया के बाहर कम से कम 40 हेक्टेयर में ही टाउनशिप विकसित होगी।     24 से 30 मीटर चौड़ी सड़क से कनेक्टिविटी जरूरी     सड़क, पेयजल, सीवेज, बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था डेवलपर को स्वयं ही करनी होगी।     डेवलपर के लिए 5 करोड़ नेटवर्थ और 6 करोड़ टर्नओवर अनिवार्य।     लैंड यूज परिवर्तन के लिए अब 10 फीसदी राशि जमा करनी होगी।     प्रस्तावों पर सचिव नगरीय विकास या कलेक्टर की अध्यक्षता वाली समिति निर्णय लेगी। ये होंगे फायदे     बड़े और नियोजित टाउनशिप विकास को बढ़ावा मिलेगा।     अव्यवस्थित कॉलोनियों पर नियंत्रण लगेगा।     सड़क, पानी, बिजली और सीवेज जैसी सुविधाएं बेहतर होंगी।     पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित हो सकेगा और शहरी विकास अधिक व्यवस्थित और दीर्घकालिक होगा। ये नुकसान भी     छोटे और मझोले डेवलपर्स बाजार से बाहर हो सकते हैं     एफॉर्डेबल हाउसिंग प्रोजेक्ट्स कम होने की आशंका     मध्यमवर्गीय लोगों के लिए सस्ते घरों की उपलब्धता घट सकती है     बड़े भूखंड जुटाना कठिन होने से प्रोजेक्ट्स की लागत बढ़ सकती है     भोपाल-इंदौर में आवासीय प्रोजेक्ट्स की रगतार कम होगी एफॉर्डेबल हाउसिंग पर पड़ सकता है असर नए नियमों से छोटे और मझोले डेवलपर्स की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इसका सबसे ज्यादा असर भोपाल और इंदौर जैसे शहरों में होगा। यहां 10 हेक्टेयर क्षेत्र जुटाना छोटे डेवलपर्स के लिए आसान नहीं होगा। वहीं पॉलिसी के तहत डेवलपर के लिए न्यूनतम 5 करोड़ की नेटवर्थ और 6 करोड़ रुपए का औसत वार्षिक टर्नओवर भी प्रभाव डालेगा। साथ ही टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग में पंजीयन के लिए 50 हजार रुपए खर्च करने होंगे, वहीं पांच साल बाद नवीनीकरण के लिए भी 25 हजार देना होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे और मझोले डेवलपर्स मध्यमवर्गीय और किफायती आवासीय योजनाएं विकसित करते हैं। ऐसे डेवलपर्स बाजार से बाहर होंगे तो एफॉर्डेबल हाउसिंग प्रोजेक्ट्स की संख्या घटने की आशंका है। साधिकार समितियां करेंगी अनुमोदन अब टाउनशिप संबंधी प्रस्तावों पर संचालक टाउन एंड कंट्री प्लानिंग की अध्यक्षता वाली समिति विचार नहीं करेगी। इसके स्थान पर नई साधिकार समितियां गठित की गई हैं। 5 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में सचिव नगरीय विकास की अध्यक्षता में समिति प्रस्तावों का परीक्षण-अनुमोदन करेगी। वहीं जिलों में अधिकार कलेक्टर की अध्यक्षता वाली समिति को है।

Bhopal City Bus Service में बड़ा बदलाव, स्मार्ट सिटी CEO को मिला संचालन का जिम्मा

भोपाल भोपाल सिटी बसों से अब राजनीतिक दखल खत्म होने वाला है। यह सेवा अब मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के अधीन हो गई है। इसका प्रभार अब महापौर या एमआईसी की जगह स्मार्ट सिटी सीईओ के पास रहेगा। भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड‎(बीसीएलएल) ‎राज्य सरकार की नई 'मुख्यमंत्री सुगम‎परिवहन सेवा' का हिस्सा बन गई है। ‎इसका आधिकारिक पत्र भोपाल नगर निगम ‎को सौंप दिया गया है। अब तक बीसीएलएल में महापौर‎और एमआईसी (मेयर इन काउंसिल)‎ सदस्यों (पार्षदों) का सीधा दखल होता ‎था, लेकिन अब कमान पूरी तरह ‎प्रशासनिक अफसरों के हाथ में होगी। जब तक नया कार्यकारी बोर्ड पूरी ‎तरह आकार नहीं ले लेता, तब तक वर्तमान ‎व्यवस्था के तहत सीईओ के पद पर अंजू‎ अरुण ही प्रभारी बनी रहेंगी।‎ नई नीति में प्रदेश को सात जोन में बांटा नई नीति के तहत पूरे प्रदेश को 7 जोन ‎में बांटा गया है। इसमें भोपाल क्षेत्र के साथ ‎नर्मदापुरम संभाग को भी जोड़ा गया है।‎दोनों संभागों के कलेक्टर इसके बोर्ड में‎ होंगे, जो बस सेवा को नियंत्रित करेंगे।‎ सिफारिशें नहीं चलेंगी जानकारी के अनुसार, रूट्स तय करने, बसों के स्टॉपेज या‎नई बसें चलाने में अब पार्षदों या ‎एमआईसी की सिफारिशें नहीं चलेंगी। पूरा‎ नियंत्रण क्षेत्रीय कंपनी के पास होगा। इससे ‎सेवा के संबंध में फैसले तेजी से और‎ व्यावहारिक आधार पर लिए जाएंगे।‎ भोपाल क्षेत्रीय कंपनी ही अब तय करेगी ‎कि शहर और उप नगरीय इलाकों में कौन‎ से रूट पर कितनी बसें चलेंगी। किराया‎ निर्धारण और परमिट की पूरी व्यवस्था भी ‎यही कंपनी संभालेगी। जिससे नगर निगम‎पर निर्भरता खत्म होगी।‎ बीसीएलएल की बसों में अक्सर आने‎ वाली शिकायतों (जैसे चालकों की‎मनमानी, समय पर बस न मिलना) को‎दूर करने के लिए इसे टेलिजेंट ट्रांसपोर्ट‎ मैनेजमेंट सिस्टम से लैस किया जाएगा। ‎इससे बसों की लाइव ट्रैकिंग और सुचारू‎ मॉनिटरिंग सीधे मुख्यालय से होगी।‎ कार्रवाई भी समय पर हो सकेगी।‎ भोपाल क्लस्टर में चलेंगी 398 बसें‎ योजना के पहले चरण में भोपाल क्षेत्र के 104 ‎मार्गों पर कुल 398 बसें चलाने का खाका तैयार ‎किया गया है। ये बसें भोपाल शहर के मुख्य‎ मार्गों से लेकर उपनगरीय क्षेत्रों और नर्मदापुरम ‎संभाग के प्रमुख रूट्स को आपस में जोड़ेंगी।‎ सरकार खुद बसें खरीदने के बजाय निजी‎ ऑपरेटरों के जरिए इन 398 बसों का संचालन‎ पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल‎पर कराएगी। जिससे बीसीएलएल की तरह नगर‎ निगम पर वित्तीय बोझ नहीं बढ़ेगा।‎ बता दें कि पहले साढ़े तीन सौ से ज्यादा सिटी बसें भोपाल शहर में दौड़ती थी, लेकिन इनकी संख्या लगातार घटती गई। वर्तमान में करीब 70 बसें ही सड़कों पर दौड़ रही है। इस वजह से टैक्सी, ऑटो पर यात्रियों की निर्भरता बढ़ गई है।  

2027 मिशन के लिए BJP-RSS की सियासी कवायद तेज, भागवत का दौरा क्यों अहम?

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ  (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत रविवार की शाम तीन दिवसीय दौरे पर लखनऊ पहुंचे. संघ प्रमुख आरएसएस भले ही पूर्वी क्षेत्र के प्रशिक्षण वर्ग में शामिल होने के लिए आए हों, लेकिन विधानसभा चुनाव से पहले उनके इस दौरे के सियासी मायने निकाले जा रहे हैं।  मोहन भागवत के तीन के लखनऊ प्रवास को विशुद्ध रूप से आरएसएस के कार्यक्रम से जुड़ा बताया जा रहा है. प्रशिक्षण वर्ग में बौद्धिक निर्देशन के साथ ही संघ के शताब्दी वर्ष और विभिन्न अभियानों की समीक्षा करेंगे, लेकिन संघ प्रमुख की इस यात्रा ने प्रदेश की सियासी सरगर्मी को बढ़ा दी है।  उत्तर प्रदेश को देश की 'सत्ता का प्रवेश द्वार' कहा जाता है. यूपी की सियासत में आरएसएस की भूमिका हमेशा से एक 'साइलेंट किंगमेकर' और 'ग्राउंड इंजीनियर' की रही है. भले ही संघ खुद को एक सांस्कृतिक संगठन कहता है, लेकिन बीजेपी के लिए जनसंघ के दौर से ही सियासी रण में वो मददगार बनता रहा है. 2017 और 2022 में बीजेपी को मिली जीत में संघ का रोल काफी अहम रहा है. ऐसे में 2027 से पहले मोहन भागवत एक बार फिर से यूपी पहुंचे हैं।  लखनऊ के दौरे पर मोहन भागवत संघ प्रमुख मोहन भागवत तीन दिन के लखनऊ दौरे पर हैं और निराला नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में ठहरे हैं. वो मंगलवार तक लखनऊ में रहेंगे. लखनऊ में संघ का अवध, गोरक्ष, काशी और कानपुर प्रांत के स्वयंसेवकों का प्रशिक्षण वर्ग चल रहा है. इस दौरान मोहन भागवत  प्रशिक्षण वर्ग में बौद्धिक निर्देशन के साथ ही संघ के शताब्दी वर्ष और विभिन्न अभियानों की समीक्षा करेंगे।  मोहन भागवत पूर्वी क्षेत्र के पदाधिकारियों के साथ बैठकों में वह शताब्दी वर्ष के तहत चल रहे गृह संपर्क अभियान, हिंदू सम्मेलनों सहित विभिन्न अभियानों के अलावा शाखा विस्तार पर चर्चा करेंगे और आगे के अभियानों और कार्यक्रमों को लेकर निर्देश देंगे. हालांकि संघ प्रमुख अपने प्रवास के दौरान किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे, लेकिन आरएसएस के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ बीजेपी के प्रमुख पदाधिकारियों, सरकार के प्रतिनिधियों और संघ के प्रशिक्षण वर्ग में शामिल हो सकते हैं।  सीएम से डिप्टीसीएम से होगी मुलाकात? संघ प्रमुख मोहन भागवत से  लखनऊ प्रवास के दौरान सरकार और बीजेपी नेता मुलाकात करने से भी पहुंच सकते हैं. सीएम योगी आदित्यनाथ से लेकर डिप्टीसीएम केशव प्रसाद मौर्य और बृजेश पाठक सहित यूपी सरकार के कई बड़े मंत्री मुलाकात कर सकते हैं. इसके अलावा बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष पकंज चौधरी भी दिल्ली से लखनऊ पहुंच गए हैं. सरकार और बीजेपी संगठन के तमाम अहम लोग  संघ प्रमुख से मिलने के लिए निराला नगर जा सकते हैं।  उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव है. ऐसे में सरकार के कामकाज और 2027 विधानसभा चुनाव तैयारियों को लेकर भी चर्चा हो सकती है. ऐसे में वह प्रदेश के राजनीतिक हालात की भी जानकारी ले सकते हैं और जमीनी हकीकत को समझने की कोशिश करेंगे. इससे पहले भी देखा गया है कि संघ प्रमुख लखनऊ पहुंचे हैं तो सरकार से लेकर संगठन तक के लोग उनसे मिलने पहुंचते रहे हैं।  ट्रिपल एस मॉडल' से सत्ता की हैट्रिक यूपी में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिहाज से संघ प्रमुख मोहन भागवत प्रचारकों और प्रमुख पदाधिकारियों से प्रदेश की समाजिक और राजनीतिक स्थितियों के संबंध में भी फीडबैक लेंगे. बीजेपी संगठन और सरकार के प्रमुख पदाधिकारियों से मुलाकात में संगठन और सरकार के बीच समन्वय के मुद्दों पर भी बात हो सकती है. इसे ट्रिपल एस मॉडल के रूप में देखा जाता है. यह मॉडल पूरी तरह सरकार, संगठन और संघ के तीन स्तंभों पर आधारित माना जाता है।  संघ विचारधारा और अनुशासित कैडर नेटवर्क देता है. बीजेपी का संगठन चुनावी लामबंदी और राजनीतिक रणनीति संभालता है. जबकि सरकार अपने कामकाज और योजनाओं के आधार पर जनता के बीच संदेश पहुंचाती है. ये तीनों जब एक ही दिशा में काम करते हैं तो बीजेपी की चुनावी मशीनरी काफी प्रभावी मानी जाती है.  2014 के बाद बीजेपी की चुनावी जीत में इस मॉडल की भूमिका को लेकर चर्चा होती रही है।  2027 की चुनावी जंग जीतने का प्लान 2027 चुनाव से पहले फिर के एक बार ट्रिपल एस के बीच तालमेल बैठकर सत्ता की हैट्रिक लगाने का प्लान है. इसीलिए होली के बाद से यूपी के अलग-अलग क्षेत्रों में संघ और बीजेपी के बीच समन्वय बैठकों की एक पूरी श्रृंखला चली. इन बैठकों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और पार्टी के प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह हिस्सा लिए थे, जबकि संघ के क्षेत्रीय और प्रांत स्तर के प्रचारक भी बैठक में शिरकत करते थे।  राजनीतिक विश्लेषक इन बैठकों को सिर्फ नियमित संगठनात्मक संवाद नहीं मानते, बल्कि 2027 के चुनावों से पहले बीजेपी की चुनावी रणनीति का शुरुआती खाका खींचने की कवायद बताते हैं. हालांकि, यह है कि बीजेपी और संघ के बीच इस तरह की समन्वय बैठकें नई नहीं हैं.  2019 के लोकसभा चुनाव से एक साल पहले भी इसी तरह का संवाद अभियान चलाया गया था. इसके बाद 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले जमीन पर सियासी माहौल बनाने के लिए यह रणनीति अपनाई गई थी. संघ और बीजेपी के सियासी तालेमल से ही चुनावी जंग जीतने में सफल रही है।  यूपी संघ-BJP की सियासी प्रयोगशाला उत्तर प्रदेश संघ की सियासी प्रयोगशाला रही है. 1984 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी पूरे देश में महज 2 सीटों पर सिमट गई थी. इसके बाद संघ के तत्कालीन सरसंघचालक बालासाहब देवरस की रणनीति के तहत संघ परिवार (विशेषकर विश्व हिंदू परिषद) ने राम मंदिर आंदोलन की कमान संभाली. संघ ने इस आंदोलन के जरिए उत्तर प्रदेश के बिखरे हुए हिंदू समाज को एक वैचारिक सूत्र में पिरोया।  संघ के कार्यकर्ता 'शिला पूजन' और गांवों में 'राम ज्योति' यात्राओं के जरिए घर-घर दस्तक दी. इस वैचारिक जमीन का राजनीतिक फायदा बीजेपी को मिला, लालकृष्ण आडवाणी की रथयात्रा और कल्याण सिंह के उभार के साथ 1991 में पहली बार हबयूपी में सरकार बनी. 2002 से 2012 के बीच यूपी में भाजपा लगातार कमजोर हो रही थी और तीसरे-चौथे नंबर की पार्टी बन चुकी थी। इसके बाद 2014 के … Read more

पंजाब में वोटिंग का दिन! निकाय चुनाव के लिए सुरक्षा कड़ी, बूथों पर CCTV से निगरानी

चंडीगढ़  पंजाब में नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत चुनावों के लिए आज  यानि मंगलवार को मतदान हो रहा । राज्य की 8 नगर निगमों, 75 नगर परिषदों और 21 नगर पंचायतों के लिए आज  वोट डाले जा रहे , जबकि चुनावी नतीजों की घोषणा 29 मई को होगी।  वहीं, इस बार बैलेट पेपर के माध्यम से वोटिंग होगी। 3977 बूथ हैं। 36 हजार मुलाजिम चुनावी प्रक्रिया में शामिल हैं। 35500 पुलिस मुलाजिम व होमगार्ड जवान तैनात किए गए हैं। जबकि, हर बूथ पर 5 मुलाजिम तैनात रहेंगे। आईएएस व पीसीएस अफसर जिलों में तैनात किए गए हैं। 36.72 लाख मतदाता डालेंगे वोट इस बार बठिंडा, अबोहर, बटाला, बरनाला, कपूरथला, मोगा, पठानकोट और मोहाली नगर निगम के चुनाव सभी राजनीतिक दलों के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बने हुए हैं। विशेष बात यह है कि बरनाला नगर निगम के लिए पहली बार चुनाव करवाए जा रहे हैं। राज्य चुनाव आयोग के मुताबिक इस चुनाव में कुल 36,72,932 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेंगे। इसमें 18 लाख 990 पुरुष, 7,73,716 महिलाएं और 226 अन्य हैं। आप से सबसे अधिक उम्मीदवार मैदान में बता दें, पंजाब भर के निकाय चुनावों की घोषणा के बाद 10,809 उम्मीदवारों ने शुरुआती नामांकन भरा था। जिसमें से 2393 उम्मीदवारों ने अपना नाम वापस ले लिया था। 79 उम्मीदवारों को निर्विरोध चुन लिया गया है। अब चुनाव के लिए 7555 उम्मीदवार मैदान में हैं। इनमें सबसे अधिक उम्मीदवार सत्तापक्ष आम आदमी पार्टी (आप) के चुनाव लड़ रहे हैं जिनकी संख्या 1801 हैं। दूसरे नंबर पर कांग्रेस के 1550, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के 1316, शिरोमणि अकाली दल के 1251, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के 96, 1528 निर्दलीय और 13 अन्य उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। निकाय चुनाव सभी दलों के लिए अहम हैं, क्योंकि इसे 2027 में विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा है। सभी पोलिंग बूथों के अंदर और बाहर सीसीटीवी पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए राज्य के सभी पोलिंग बूथों के अंदर और बाहर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं और उनकी रिकॉर्डिंग कम से कम एक वर्ष तक सुरक्षित रखी जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी स्थिति में संबंधित फुटेज को बिना अनुमति नष्ट नहीं किया जाएगा। जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस दीपक मंचंदा की खंडपीठ ने नगर निकाय चुनावों से जुड़ी विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान ये निर्देश जारी किए। 26 मई को पंजाब में सरकारी छुट्टी का एलान पंजाब सरकार ने स्थानीय निकाय चुनावों के मद्देनजर सुचारू मतदान सुनिश्चित करने के लिए 26 मई को राज्य में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है। इस दौरान चंडीगढ़ सहित पंजाब सरकार के सभी सरकारी दफ्तर, बोर्ड, कॉर्पोरेशन, शैक्षणिक संस्थान और अन्य सरकारी प्रतिष्ठान इस दिन बंद रहेंगे। इसके अलावा, पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने भी अपने सभी अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए 26 मई को विशेष आकस्मिक अवकाश की घोषणा की है। 5-6 दिन में ही निपटा प्रचार आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले इन स्थानीय निकाय चुनावों को शहरी मतदाताओं के राजनीतिक मिजाज का लिटमस टेस्ट माना जा रहा है। बता दें, पंजाब राज्य चुनाव आयोग ने 11 मई को इन चुनावों का एलान किया था। 19 मई को नामांकन वापस लेने की प्रक्रिया के बाद उम्मीदवारों को प्रचार के लिए केवल 5-6 दिनों का ही समय मिल सका। जिसमें उम्मीदवारों ही नहीं, राजनीतिक पार्टियों के धुरंधरों नें इसमें पूरी ताकत झोंक दी। विधायकों मंत्रियों की परफॉर्मेंस का रिपोर्ट कार्ड होंगे नतीजे बता दें, सत्तारूढ़ 'आप' के विधायकों और मंत्रियों ने आज प्रचार में अपनी पूरी ताकत लगा दी, क्योंकि इन चुनावों के नतीजे उनकी परफॉर्मेंस का रिपोर्ट कार्ड तय करेंगे। इसके साथ ही, इन चुनावों से भाजपा का ग्राफ भी साफ हो जाएगा, जो इस बार काफी आक्रामक तरीके से चुनावी मैदान में उतरी है। राज्य चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार, पोलिंग स्टेशनों के आसपास किसी भी तरह की प्रचार सामग्री प्रदर्शित करने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। अकाली दल ने की मतदान का समय बढ़ाने की मांग शिरोमणि अकाली दल ने राज्य चुनाव आयोग से मतदान का समय बढ़ाने की मांग की है। अकाली नेता डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि मतदान का समय सुबह 8 से 5 बजे की जगह सुबह 7 से शाम 6 बजे तक बढ़ाया जाना चाहिए। चीमा ने कहा कि प्रदेश में इस समय भीषण गर्मी का प्रकोप है जिसका असर मतदान प्रतिशत पर पड़ सकता है। अगर सुबह और शाम के चलते मतदान का समय दो घंटे बढ़ा दिया जाए तो उससे मतदान प्रतिशत में वृद्धि होगी। मौजूदा समय मजदूरों के लिए भी उपयुक्त नहीं है क्योंकि वो काम के कारण अपने मताधिकार का उपयोग नहीं कर पाएंगे।  

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वेलनेस डेस्टिनेशन के रूप में विकसित होगा उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वेलनेस डेस्टिनेशन के रूप में विकसित होगा उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री प्रदेश में शीघ्र लागू होगी आयुष हेल्थ एंड वेलनेस नीति, मुख्यमंत्री ने दिए दिशा-निर्देश प्रमुख धार्मिक स्थलों के आसपास वेलनेस और हीलिंग आधारित पर्यटन विकास की अपार संभावनाएं: मुख्यमंत्री आयुष संस्थानों को समग्र वेलनेस, प्रशिक्षण, अनुसंधान और रोजगार सृजन के केंद्र के रूप में विकसित करने की आवश्यकता: मुख्यमंत्री पीपीपी मॉडल पर विकसित होंगे आधुनिक आयुष वेलनेस सेंटर, 100 शैय्या वाले एकीकृत आयुष चिकित्सा एवं प्रशिक्षण केंद्र मीरजापुर, गोंडा, मेरठ, आगरा एवं बस्ती मंडलों में होगी एकीकृत आयुष महाविद्यालयों की स्थापना लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को आयुष विभाग की समीक्षा बैठक में प्रदेश में ‘आयुष हेल्थ एंड वेलनेस नीति-2026’ को लागू करने की दिशा में प्रभावी कार्यवाही करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश को केवल उपचार आधारित व्यवस्था तक सीमित न रखते हुए आयुष, योग, पंचकर्म, प्राकृतिक चिकित्सा और वेलनेस सेवाओं के समन्वय से राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक प्रमुख वेलनेस डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जाए। उन्होंने कहा कि आयुष सेवाओं को आधुनिक प्रबंधन, गुणवत्ता मानकों और पर्यटन से जोड़ते हुए ऐसा मॉडल तैयार किया जाना चाहिए, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं के साथ रोजगार और निवेश को भी नई गति मिले। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत, आयुर्वेद एवं योग की परंपरा तथा धार्मिक पर्यटन सर्किट को आयुष वेलनेस सेक्टर से जोड़ा जाए। वाराणसी, अयोध्या और मथुरा जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों के आसपास वेलनेस और हीलिंग आधारित पर्यटन विकसित किए जाने की व्यापक संभावनाएं हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि आयुष संस्थानों को उपचार केंद्रों के साथ-साथ वेलनेस, प्रशिक्षण, अनुसंधान और रोजगार सृजन के केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में वर्तमान में 3,953 आयुष स्वास्थ्य इकाइयां, 1,034 आयुष्मान आरोग्य मंदिर, 225 योग वेलनेस सेंटर और 19 आयुष चिकित्सा महाविद्यालय संचालित हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि आयुष सेवाओं का विस्तार गुणवत्तापूर्ण और मानकीकृत स्वरूप में किया जाए। इसके लिए पीपीपी मॉडल के माध्यम से आधुनिक आयुष वेलनेस सेंटर, 100 शैय्या वाले एकीकृत आयुष चिकित्सा एवं प्रशिक्षण केंद्र तथा आयुष कॉलेजों के उन्नयन की दिशा में चरणबद्ध कार्रवाई की जाए। बैठक में प्रस्तावित नीति के विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा हुई। नीति के अंतर्गत एकीकृत सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, आयुष वेलनेस एवं चिकित्सा केंद्र, प्रशिक्षण युक्त एकीकृत संस्थान तथा आयुष कॉलेज आधारित मॉडल विकसित किए जाने का प्रस्ताव है। इन केंद्रों में पंचकर्म, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, डिजिटल हेल्थ सेवाएं तथा अनुसंधान एवं नवाचार गतिविधियों को भी शामिल किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि आयुष आधारित वेलनेस इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए निजी क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने निवेशकों को एकल खिड़की प्रणाली के माध्यम से त्वरित स्वीकृतियां उपलब्ध कराने तथा परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए स्पष्ट समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि प्रस्तावित नीति में निवेश आधारित सब्सिडी, संचालन संबंधी प्रोत्साहन, ब्याज सब्सिडी, स्टाम्प ड्यूटी में छूट तथा रोजगार सृजन आधारित प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है। आयुष शोध, नवाचार तथा पर्यावरण अनुकूल परियोजनाओं के लिए भी विशेष प्रोत्साहन प्रस्तावित हैं। मुख्यमंत्री ने मीरजापुर, गोंडा, मेरठ, आगरा एवं बस्ती मंडलों में एकीकृत आयुष महाविद्यालयों की स्थापना की दिशा में तेजी से कार्यवाही करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन संस्थानों को आधुनिक आयुष चिकित्सा, प्रशिक्षण और अनुसंधान के उत्कृष्ट केंद्रों के रूप में विकसित किया जाए। विभागीय कार्यों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने आयुष चिकित्सा संस्थानों में ओपीडी सेवाओं को बेहतर बनाने, दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा पंचकर्म जैसी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आयुष सेवाओं को जनविश्वास और गुणवत्ता से जोड़ते हुए मरीजों को बेहतर उपचार एवं वेलनेस सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।  मुख्यमंत्री ने महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय, गोरखपुर में शोध एवं नवाचार गतिविधियों को गति देने पर बल दिया। उन्होंने विश्वविद्यालय में स्थायी फैकल्टी की नियुक्ति प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने तथा आयुष की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के क्षेत्र में विश्वविद्यालय को उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए।

समय से पहले आएगा मानसून? 26 मई को केरल पहुंचने के आसार, 10 दिन में बस्तर में एंट्री संभव

रायपुर  रायपुर मौसम केंद्र के मौसम वैज्ञानिक बीके चिंधालोरे ने बताया कि केरल में हर साल 1 या 2 जून को मानसून पहुंचता है लेकिन इस बार दक्षिण पश्चिम मानसून 26 मई को ही केरल पहुंच जाएगा. केरल में मानसून के पहुंचते ही नमीयुक्त हवाएं भी आएंगी, जिससे नौतपा में भी लोगों को गर्मी से राहत मिल सकती है।  छत्तीसगढ़ में कब पहुंचेगा मानसून केरल में मानसून पहुंचने के बाद लगभग 10 से 12 दिनों में मानसून छत्तीसगढ़ में पहुंचता है. यानी प्रदेश में मानसून पहुंचने की संभावित तिथि 5 मई से 7 मई के आसपास है।  छत्तीसगढ़ में 25 मई का मौसम: कुछ इलाकों में लू चलने की संभावना है. छत्तीसगढ़ में 26 मई का मौसम: कुछ इलाकों में लू चलने की संभावना है. कुछ इलाकों में गरज के साथ बारिश और तेज हवाएं (40-50 किमी प्रति घंटा) चलने की संभावना है।  छत्तीसगढ़ में 27 मई से 29 मई का मौसम: कुछ इलाकों में लू चलने की संभावना है. कुछ स्थानों पर बिजली कड़कने और तेज हवाओं (40-50 किमी प्रति घंटा) के साथ आंधी आने की संभावना है।  छत्तीसगढ़ में अगले 5 दिनों के लिए तापमान का पूर्वानुमान छत्तीसगढ़ में अगले 4 दिनों में अधिकतम तापमान में कोई खास बदलाव होने की संभावना नहीं है. इसके बाद इसमें 1-3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आ सकती है. साउथ वेस्ट मानसून का अग्रिम आगमन 2026 राष्ट्रीय मौसम पूर्वानुमान केंद्र भारत मौसम विज्ञान विभाग के सुबह 8 बजे जारी बुलेटिन के अनुसार इस बार मानसून का अग्रिम आगमन हो रहा है. मानसून की उत्तरी सीमा 7°N/60°E, 7°N/70°E, 7°N/75°E, 8°N/80°E, 10°N/85°E, 13.5°N/90°E और 17°N/95°E से होकर गुजर रही है. अगले दो से तीन दिनों में दक्षिण पश्चिम और दक्षिण पूर्व अरब सागर, कोमोरिन क्षेत्र, दक्षिण पश्चिम, दक्षिण पूर्व और पूर्व मध्य बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर में मानसून आगे बढ़ने के लिए परिस्थतियां अनुकूल है।  पूर्वोत्तर भारत में मौसम पूर्वानुमान और चेतावनी 25 मई को असम और मेघालय में गरज, बिजली और तेज हवाएं (40-50 किमी प्रति घंटा की गति तक) के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है. 25 और 26 मई को अरुणाचल प्रदेश में, 25 से 29 मई के दौरान असम और मेघालय में, और 25, 29 और 30 मई को नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश होने की संभावना है. 25 से 27 मई के दौरान अरुणाचल प्रदेश में, असम और मेघालय में अलग अलग स्थानों पर बहुत भारी बारिश होने की संभावना है।  दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत 25 से 28 मई के दौरान केरल, माहे और लक्षद्वीप में गरज, बिजली और तेज़ हवाओं (40-50 किमी प्रति घंटा की गति तक) के साथ व्यापक हल्की से मध्यम वर्षा की संभावना है. 25 से 28 मई के दौरान तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल और आंतरिक कर्नाटक में गरज, बिजली और तेज हवाओं (40-50 किमी प्रति घंटा की गति तक) के साथ छिटपुट से लेकर मध्यम वर्षा की संभावना है. तटीय आंध्र प्रदेश, यनम, रायलसीमा में 25 से 27 मई के दौरान और तेलंगाना में 25 से 30 मई के दौरान भी 40 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है।  25 और 26 मई को उत्तरी आंतरिक कर्नाटक में गरज के साथ आंधी (हवा की गति 50-60 किमी प्रति घंटा और 70 किमी प्रति घंटा तक के झोंके) की संभावना है. 25 और 26 मई को तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में छिटपुट भारी वर्षा की भी संभावना है. केरल और माहे में 25 से 28 मई के दौरान भी यही संभावना है।  पूर्वी भारत में मौसम पूर्वानुमान और चेतावनी 25 और 26 मई को उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में गरज, बिजली और तेज हवाओं (40-50 किमी प्रति घंटा की गति तक) के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है. 25 से 30 मई के दौरान गंगा के मैदानी पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा में और 25 से 28 मई के दौरान बिहार में गरज, बिजली और तेज हवाओं (40-50 किमी प्रति घंटा की गति तक) के साथ छिटपुट से लेकर मध्यम बारिश होने की संभावना है. 27 से 29 मई के दौरान गंगा के मैदानी पश्चिम बंगाल में, 26 से 28 मई के दौरान बिहार में और 25 मई को झारखंड और ओडिशा में गरज के साथ आंधी (हवा की गति 50-60 किमी प्रति घंटा और 70 किमी प्रति घंटा तक हवाएं) आने की संभावना है. 25 से 27 मई के दौरान उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम और बिहार में छिटपुट भारी बारिश होने की संभावना है।  उत्तरपश्चिम भारत में मौसम पूर्वानुमान और चेतावनी 25 मई और 28-30 मई के दौरान जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में छिटपुट से लेकर मध्यम दर्जे की बारिश, गरज, बिजली और तेज़ हवाएं (40-50 किमी प्रति घंटा तक) चलने की संभावना है. उत्तराखंड में 25, 29 और 30 मई को भी यही स्थिति रहेगी. 28-30 मई के दौरान पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में छिटपुट से लेकर मध्यम दर्जे की बारिश, गरज, बिजली और तेज़ हवाएं (40-50 किमी प्रति घंटा तक) चलने की संभावना है. 25-29 मई के दौरान पूर्वी उत्तर प्रदेश में और 30 मई को राजस्थान में भी यही स्थिति रहेगी. 28 और 29 मई को पूर्वी उत्तर प्रदेश में और 29 और 30 मई को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गरज के साथ आंधी (हवा की गति 50-60 किमी प्रति घंटा और 70 किमी प्रति घंटा तक) चलने की संभावना है। 

राज्य स्तरीय समारोह में 850 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति, CM ने शिक्षा पर दिया बड़ा संदेश

भोपाल  भोपाल के रवींद्र भवन में सोमवार को मध्यप्रदेश राज्य वक्फ बोर्ड का राज्य स्तरीय स्कॉलरशिप वितरण समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 850 मेधावी विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति प्रदान की। इस दौरान उन्होंने कहा कि शिक्षा ही युवाओं को आगे बढ़ाने और समाज की तस्वीर बदलने का सबसे बड़ा माध्यम है। कार्यक्रम में पढ़ो-पढ़ाओ, राष्ट्र निर्माण में भागीदार बनें का संदेश भी दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा से ही समाज मजबूत होगा और युवा देश की प्रगति में अहम भूमिका निभाएंगे।  पहली बार राज्य स्तर पर दिया गया स्कॉलरशिप वितरण वक्फ बोर्ड के गठन के बाद पहली बार प्रदेश स्तर पर इतने बड़े पैमाने पर स्कॉलरशिप वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बताया गया कि बोर्ड अब तक 1452 बच्चों को दोबारा शिक्षा से जोड़ चुका है। इनमें ऐसे छात्र भी शामिल हैं, जिन्होंने आर्थिक तंगी या सामाजिक परिस्थितियों के कारण पढ़ाई बीच में छोड़ दी थी। समारोह में मध्यप्रदेश राज्य वक्फ बोर्ड, कमेटी इंजामिया औकाफ-ए-अम्मा, औकाफ-ए-खास भोपाल और ताजुल मसाजिद से जुड़े पदाधिकारी भी मौजूद रहे। स्कॉलरशिप सिर्फ मदद नहीं, सपनों की उड़ान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि छात्रवृत्ति केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि बच्चों के सपनों को पूरा करने का जरिया है। उन्होंने विद्यार्थियों से पढ़-लिखकर डॉक्टर, इंजीनियर और दूसरे क्षेत्रों में आगे बढ़ने की अपील की। सीएम ने कहा कि शिक्षा इंसान को नई दिशा देती है और समाज को मजबूत बनाती है। उन्होंने रहीम के दोहे का उल्लेख करते हुए शिक्षा को जीवन की सबसे बड़ी ताकत बताया। सरकार भी देगी बराबर की सहायता राशि मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि जिन विद्यार्थियों को वक्फ बोर्ड की ओर से स्कॉलरशिप दी गई है, उन्हें राज्य सरकार भी उतनी ही सहायता राशि उपलब्ध कराएगी। उन्होंने कहा कि सरकार हर वर्ग के युवाओं को शिक्षा और रोजगार से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। वक्फ संपत्तियों से बढ़ेगी शिक्षा की मदद मुख्यमंत्री ने कहा कि नए वक्फ कानून लागू होने के बाद व्यवस्थाओं में सुधार आया है। वक्फ संपत्तियों का रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है और अवैध कब्जे हटाने की कार्रवाई भी चल रही है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और सुधार के मामले में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो चुका है। सरकार का लक्ष्य है कि इन संपत्तियों की आय बढ़ाकर गरीब और जरूरतमंद बच्चों, खासकर बेटियों की शिक्षा में इस्तेमाल किया जाए। माफियाओं से संपत्तियां छुड़ाकर समाजहित में करेंगे उपयोग सीएम ने कहा कि वक्फ की जमीनों और संपत्तियों को अवैध कब्जों से मुक्त कराया जा रहा है। इन संपत्तियों से मिलने वाली आय को शिक्षा, स्कॉलरशिप और समाज कल्याण के कार्यों में लगाया जाएगा ताकि ज्यादा से ज्यादा विद्यार्थियों को लाभ मिल सके।  

Twisha Death Case में नई तारीख तय, सास की बेल याचिका पर 27 मई को होगी सुनवाई

भोपाल  भोपाल के बहुचर्चित त्विषा शर्मा की दहेज हत्या के अपराध में आरोपी सास तथा पूर्व भोपाल जिला व सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह को मिली अग्रिम जमानत के खिलाफ प्रदेश सरकार के साथ त्विषा शर्मा के पिता ने भी हाईकोर्ट की शरण ली है। हाईकोर्ट जस्टिस देवनारायण मिश्रा की एकलपीठ द्वारा दोनों याचिकाओं पर सोमवार को संयुक्त रूप से सुनवाई की गई।   याचिका की सुनवाई के दौरान गिरिबाला सिंह के अधिवक्ता की तरफ से बताया गया कि शिकायतकर्ता की तरफ से दायर याचिका की कॉपी उन्हें नहीं मिली है। एकलपीठ ने अनावेदिका गिरिबाला सिंह को याचिका की कॉपी उपलब्ध करवाने के निर्देश जारी करते हुए याचिका पर अगली सुनवाई 27 मई को निर्धारित की है। गौरतलब है कि प्रदेश सरकार की तरफ से भोपाल की पूर्व जिला व सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह को दहेज हत्या के अपराध में मिली अग्रिम जमानत याचिका निरस्त करने हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका में कहा गया था कि वह जांच में सहयोग नहीं कर रही हैं। इसके अलावा जमानत का मिलने पर वह साक्ष्यों को प्रभावित कर सकती हैं। सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता ने एकलपीठ को बताया कि भोपाल की पूर्व सत्र व जिला न्यायाधीश की बहू त्विषा शर्मा की 12 मई को रात में संदिग्ध अवस्था में मौत हो गई थी। इसका पोस्टमार्टम 13 मई को हुआ था। उन्होने 14 मई को अग्रिम जमानत के लिए आवेदन किया था। उन्हें अगले दिन न्यायालय ने अग्रिम जमानत का लाभ मिल गया। सोमवार को याचिका की सुनवाई के दौरान अनावेदिका की तरफ से बताया गया कि प्रदेश सरकार की तरफ से दायर याचिका की कॉपी उन्हें मिल गई है। शिकायतकर्ता की तरफ से दायर याचिका की कॉपी उन्हें नहीं मिली है। एकलपीठ ने उक्त आदेश जारी करते हुए याचिका पर अगली सुनवाई बुधवार को निर्धारित की है। प्रदेश सरकार की तरफ से सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता व महाधिवक्ता प्रशांत सिंह, याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लुथरा तथा अनावेदिका की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोरा पैरवी के लिए उपस्थित हुईं।