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किसानों की बल्ले-बल्ले! बिहार में सिंचाई के लिए मिलेगी मुफ्त बिजली

पटना बिहार के किसानों को सिंचाई के लिए मुफ्त बिजली देने की तैयारी है। ऊर्जा विभाग ने इससे संबंधित योजना का प्रस्ताव तैयार कर लिया है। जल्द ही इसे कैबिनेट की मंजूरी मिलने के आसार हैं। इससे राज्य के एक करोड़ से अधिक किसानों को फायदा होगा। अभी सरकार किसानों को 55 पैसे प्रति यूनिट की दर से सिंचाई के लिए बिजली दे रही है। अगले तीन वर्षों में खेती के लिए सोलर के माध्यम से 2560 फीडर से 2585 मेगावाट बिजली तैयार होगी। इसके लिए सरकार 2714 करोड़ खर्च करेगी। सोलर के माध्यम से मिलने वाली हरित ऊर्जा की खरीद के लिए ऊर्जा कंपनियों को कम खर्च करना पड़ेगा। अभी कृषि के लिए ऊर्जा खरीद पर प्रति यूनिट लगभग 6 रुपये 19 पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। कृषि फीडर सोलराइजेशन करने वाली एजेंसियों को सरकार प्रति मेगावाट एक करोड़ 5 लाख रुपये अनुदान देगी। तीन वर्षों में 2585 मेगावाट बिजली उत्पादन होने से किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली की उपलब्धता होगी। विभाग ने यह प्रस्ताव पीएम कुसुम योजना 0.2 को ध्यान में रख कर तैयार किया है। योजना के लाभ ● किसानों की खेती में लागत घटेगी ● किसानों की आमदनी बढ़ेगी ● सौर ऊर्जा उत्पादन भी बढ़ेगा ● प्रदूषण में भी कमी आएगी सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य वर्ष – फीडर – बिजली (मेगावाट) 2027 – 640 – 646 2028 – 896 – 905 2029 – 1024 – 1034 सोलर प्लांट के लिए भूमि बैंक बनेगा किसानों को मुफ्त बिजली देने वाले राज्यों के मॉडल का अध्ययन कराया गया है। इस आधार पर सोलर प्लांट लगाने के लिए भूमि बैंक स्थापित होगा। सोलर प्लांट के लिए जमीन देने वाले किसानों सहित अन्य व्यक्तियों को निर्धारित राशि मिलेगी।

जालंधर में अमित शाह की आज बड़ी रैली, 28 एकड़ में तैयार पंडाल; 4 यात्राओं का होगा समापन

 जालंधर  केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज, बुधवार, 30 सितंबर को पंजाब के जालंधर पहुंचेंगे। यहां परागपुर के पास NH-44 के किनारे भाजपा की ओर से नशा विरोधी महारैली आयोजित की जा रही है। आयोजन के लिए करीब 63 एकड़ जमीन तैयार की गई है। इसमें अकेले 28 एकड़ में विशाल पंडाल बनाया गया है। रैली का स्थल पहले 40 एकड़ में तय किया गया था। बाद में इसे 50 एकड़ तक बढ़ाया गया और लोगों के आने का अनुमान बढ़ने के बाद क्षेत्रफल करीब 63 एकड़ किया गया। ताजा रिपोर्टों में भी आयोजन स्थल को 60 से 65 एकड़ के बीच बताया गया है। भाजपा की ओर से पंजाब में निकाली जा रही चार नशा मुक्ति यात्राओं का समापन भी इसी रैली में होगा। ये यात्राएं प्रदेश की सभी 117 विधानसभा सीटों से होकर करीब चार हजार किलोमीटर की दूरी तय कर जालंधर पहुंच रही हैं। बुधवार को चारों यात्राओं के कार्यकर्ता रैली स्थल पर जुटेंगे। दो साल में नशामुक्त पंजाब का दावा कर चुके शाह शाह इसी साल 14 मार्च को मोगा के किली चाहलां में बदलाव रैली को संबोधित करने पहुंचे थे। यह भाजपा के 2027 विधानसभा चुनाव अभियान की शुरुआत थी। शाह ने पंजाब में भाजपा की सरकार बनने का मौका देने की अपील करते हुए दावा किया था कि दो साल के भीतर पंजाब को नशामुक्त कर देंगे और नशे के कारोबार को जड़ से उखाड़ देंगे। इस दौरान उन्होंने अपराध, नशे और भ्रष्टाचार को लेकर आम आदमी पार्टी सरकार पर भी निशाना साधा था। नशा : सियासी ही नहीं, सामाजिक मुद्दा भी पंजाब में नशा एक दशक से ज्यादा समय से बड़ा सियासी और सामाजिक मुद्दा बना हुआ है। साल 2012 के विधानसभा चुनाव से इसे प्रमुखता से उठाया जा रहा है। 2014 के लोकसभा और 2017 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने इसे अपनी सियासत का केंद्र बनाया। 2017 में कांग्रेस ने कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में नशा खत्म करने के लिए चार सप्ताह का वादा किया, जबकि आप ने भी ड्रग माफिया पर कार्रवाई का मुद्दा उठाया था। 2022 में आप ने फिर नशे के खिलाफ अभियान चलाया था।   शाह दें सवालों का जवाब : रंधावा कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने भाजपा की नशामुक्त पंजाब यात्रा को विफल बताते हुए कहा कि पठानकोट जैसे भाजपा के गढ़ में भी यात्रा प्रभावी भीड़ नहीं जुटा सकी। उन्होंने कहा कि पंजाब में नशा, गैंगस्टरवाद, ड्रोन और हथियारों से जुड़े गंभीर सुरक्षा सवालों पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को जवाब देना चाहिए। रंधावा ने कहा, सीमा पर बीएसएफ तैनात है और इसका दायरा करीब 50 किलोमीटर तक है। बीएसएफ के रहते सीमा पार से नशा कैसे पहुंच रहा है। इसके बाद पंजाब में नशा वितरित हो रहा, इसे रोकने में पंजाब पुलिस भी फेल है।  25 हजार से अधिक कुर्सियां लगीं आयोजकों के अनुसार रैली के लिए बनाए गए विशाल पंडाल में 25 हजार से अधिक कुर्सियां लगाई गई हैं। पंडाल को पूरी तरह वातानुकूलित रखने की व्यवस्था की गई है। भीड़ का अनुमान एक लाख से अधिक लगाया जा रहा है, जबकि पार्टी स्तर पर इससे काफी अधिक लोगों के पहुंचने की संभावना भी जताई गई है। इससे पहले तैयारियों से जुड़ी रिपोर्टों में करीब दो लाख लोगों के पहुंचने का अनुमान सामने आया था। रैली में दूर बैठे कार्यकर्ताओं को मंच साफ दिखाई दे और भाषण सुनने में परेशानी न हो, इसके लिए पंडाल के भीतर कई स्थानों पर बड़ी एलईडी स्क्रीन लगाई जा रही हैं। पंडाल के बाहर भी स्क्रीन की व्यवस्था होगी। इसका उद्देश्य यह है कि पंडाल भरने के बाद बाहर मौजूद कार्यकर्ता भी मंच की गतिविधियां और अमित शाह का संबोधन देख और सुन सकें। तीन हजार बसें पहुंचने का अनुमान रैली में पंजाब के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ताओं के पहुंचने की संभावना है। इसके लिए पार्किंग की विशेष व्यवस्था की गई है। वाहनों के लिए चार अलग-अलग पार्किंग स्थल तैयार किए गए हैं। पंडाल के नजदीक वीआईपी वाहनों के लिए अलग पार्किंग होगी। इसके अलावा दोआबा, माझा और मालवा से आने वाले लोगों के रूट के अनुसार अलग-अलग दिशाओं में पार्किंग बनाई गई है। आयोजकों के अनुसार रैली में तीन हजार से अधिक बसों और करीब दो हजार छोटे वाहनों के पहुंचने का अनुमान है। इससे रैली स्थल के आसपास यातायात पर दबाव बढ़ने की संभावना है। इसी को देखते हुए पार्किंग और यातायात व्यवस्था को अलग-अलग रूट के हिसाब से तैयार किया जा रहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी रैली के कारण यातायात व्यवस्था में बदलाव रहेगा। पुलिस की ओर से विस्तृत यातायात योजना जारी की जानी है। दोपहर सवा दो बजे पहुंच सकते हैं शाह प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार अमित शाह दोपहर करीब 12 बजे आदमपुर हवाई अड्डे पहुंचेंगे। इसके बाद दोपहर करीब 1:15 बजे वह श्री देवी तालाब मंदिर में माथा टेकने जाएंगे। इसके बाद दोपहर 2:15 से 2:30 बजे के बीच परागपुर स्थित रैली स्थल पर पहुंचकर कार्यकर्ताओं को संबोधित करने का कार्यक्रम है। भाजपा की चारों नशा मुक्ति यात्राएं मंगलवार शाम करीब छह बजे रैली स्थल पर पहुंचेंगी। वहां प्रदेश प्रभारी सतीश पूनिया, प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों और पार्टी के वरिष्ठ नेता यात्राओं का स्वागत करेंगे। चारों यात्राएं 18 सितंबर से अलग-अलग मार्गों से शुरू हुई थीं और प्रदेश की सभी 117 विधानसभा सीटों को कवर करने के बाद जालंधर पहुंच रही हैं। नशे के मुद्दे पर केंद्रित है आयोजन भाजपा ने इन यात्राओं और जालंधर की रैली को नशे के खिलाफ अपने अभियान से जोड़ा है। पार्टी के अनुसार यात्राओं का उद्देश्य नशे के खिलाफ जनजागरूकता बढ़ाना है। रैली में अमित शाह के संबोधन के साथ अभियान का समापन होगा। आयोजन को लेकर भाजपा की ओर से प्रदेशभर में कार्यकर्ताओं को जुटाने की तैयारी की गई है। रैली स्थल पर तैयारियों के बढ़ते दायरे से साफ है कि आयोजकों ने बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने को ध्यान में रखकर व्यवस्था की है। अब सभी की नजर बुधवार को होने वाली महारैली पर है, जहां चारों यात्राओं के समापन के साथ अमित शाह कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे। जानें अमित शाह की नशा मुक्ति महारैली का शेड्यूल     कार्यक्रम का … Read more

जालंधर में धमकी भरा ईमेल, स्कूल-मंदिर उड़ाने की धमकी; अमित शाह की रैली से पहले हड़कंप

जालंधर जालंधर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की रैली से पहले कई स्कूलों को एक धमकी भरा ईमेल भेजे जाने का मामला सामने आया है। ईमेल में रैली स्थल, बसों और श्री देवी तालाब मंदिर समेत अलग-अलग स्थानों पर आईईडी/बम धमाके करने जैसी धमकियां दी गई हैं। वहीं अमृतसर के स्कूलों को भी उड़ाने की धमकी आई है। संदेश में बच्चों को स्कूल भेजने और रैली में जाने को लेकर भी चेतावनी दी गई है। ई-मेल में लिखा है कि रैली के स्टेज के नीचे आईईडी रखा है। स्कूल-मंदिर और कोर्ट को उड़ा देंगे। 100 बसों में से 2-3 बसों में बम फिट किए हैं। पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी है। ईमेल बुधवार तड़के 7:50 पर आया, जिसकी सुरक्षा एजेंसियां जांच कर रही है।  ईमेल में अलगाववादी और हिंसक भाषा के साथ कई संगठनों व व्यक्तियों के नाम भी लिखे गए हैं। ई-मेल कैंब्रिज इनोवेटिव और सीटी स्कूल को आए हैं जिसमें खालिस्तान नेशनल आर्मी और बब्बर खालसा (परमार कनाडा) ग्रुप के नाम हैं। हालांकि, ईमेल में किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गई हैं।  अमित शाह की रैली के मद्देनजर सुरक्षा अलर्ट केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की जालंधर रैली के मद्देनजर पुलिस पहले से ही सुरक्षा को लेकर अलर्ट है। दोआबा की 23 विधानसभा सीटों को साधने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जालंधर-लुधियाना हाईवे से सटे परागपुर में रैली को संबोधित करेंगे। इसी रैली में भाजपा की ओर से निकाली गई नशामुक्त पंजाब की 4 यात्राओं का समापन होगा। नशा मुक्त यात्रा का जालंधर में होगा समापन गृह मंत्री के दौरे से पहले पंजाब बीजेपी की तरफ से निकाली जा रही नशा मुक्त पंजाब यात्रा का जालंधर में स्वागत के साथ समापन होगा। पंजाब में बीजेपी की नशा मुक्त पंजाब यात्रा की शुरुआत पठानकोट जिले के माधोपुर से 18 सितंबर 2026 को हुई थी। यात्रा ने लगभग 4000 किलोमीटर का सफर तय किया भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने इस यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। इस यात्रा ने लगभग 4000 किलोमीटर का सफर तय किया और राज्य की सभी 117 विधानसभा सीटों को कवर किया। दूसरी तरफ पुलिस अधिकारियों ने कहा कि लोगों से अपील है कि किसी भी संदिग्ध संदेश या अफवाह को आगे शेयर न करें और केवल पुलिस/प्रशासन की आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें। अमित शाह की जालंधर में नशा-मुक्त पंजाब यात्रा के समापन कार्यक्रम के तहत रैली प्रस्तावित है और उनके श्री देवी तालाब मंदिर जाने की भी सूचना है। स्टेज और धार्मिक स्थल पर हमले की चेतावनी ईमेल भेजने वाले ने खौफनाक दावा करते हुए कहा है कि जहां गृहमंत्री का मुख्य कार्यक्रम आयोजित होना है, वहां स्टेज पर बम लगा दिए गए हैं। इसके साथ ही शहर के प्रसिद्ध और पवित्र देवी तालाब मंदिर परिसर को भी अत्याधुनिक डिवाइस या आईफोन की मदद से उड़ाने की धमकी दी गई है। इस तरह की गंभीर चेतावनी मिलने के बाद से धार्मिक स्थल और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। यह धमकी भरा मेल कैंब्रिज गर्ल्स स्कूल (अर्बन एस्टेट), कैंब्रिज इनोवेटिव स्कूल और एमजीएम स्कूल समेत कई अन्य शैक्षणिक संस्थानों को प्राप्त हुआ है। मेल में साफ तौर पर चेतावनी दी गई है कि इस आयोजन के दौरान किसी भी बच्चे को न भेजा जाए। दौरे से ठीक पहले आए इस तरह के धमकी भरे संदेश को पुलिस और जांच एजेंसियां बेहद गंभीरता से ले रही हैं। साइबर टीम को तुरंत सक्रिय कर दिया गया है ताकि ईमेल के आईपी एड्रेस और इसे भेजने वाले की पहचान की जा सके। इसके साथ ही कार्यक्रम स्थल और मंदिर परिसर में बम निरोधक दस्तों की मदद से सघन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है।    

CM यादव का निर्देश- हॉट स्पॉट पर बढ़ाएं निगरानी, युवाओं को नशे से बचाएं

युवाओं को नशे से बचाएं, जो हॉट स्पॉट हैं वहां रखें निगरानी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि युवाओं को हर हाल में नशे से बचाएं। विशेष रूप से शहरों में जो हॉट स्पॉट हैं वहां निगरानी रखी जाए। जिला स्तर पर प्रत्येक माह बैठक होना चाहिए जिसमें नशा मुक्त भारत पर विचार हो और इसके क्रियान्वयन की दिशा में भी आगे बढ़ा जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंत्रालय में नशा मुक्त भारत के संबंध में वीडियो कांफ्रेंस द्वारा कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत सरकार द्वारा नशा मुक्त भारत अभियान की नियमित समीक्षा की जा रही है। प्रदेश में निरंतर समीक्षा के साथ दोषियों के विरूद्ध सख्त कदम भी उठाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पुलिस और आबकारी विभाग आवश्यकतानुसार संयुक्त कार्यवाही में पीछे न हटें। बैठक में प्रजेंटेशन में बताया गया कि नशीली दवा, मादक पदार्थों में उत्पादन, व्यापार, सेवन और तस्करी पर रोक लगाने के लिए एनडीपीएस एक्ट लागू है। इस कड़े काननू के तहत इस वर्ष प्रदेश में 2706 प्रकरण पंजीबद्ध किए गए हैं। कुल 3690 आरोपियों से अगस्त 2026 तक 46 हजार 313 किलो मादक पदार्थ जब्त किए गए हैं। प्रतिबंधित कफ सीरप जप्त करने, शिक्षण संस्थानों की 500 मीटर परिधि में ड्रग्स फ्री परिसर बनाने, नशा मुक्त मित्रों का सहयोग प्राप्त करने और जिलों में नशा मुक्त केंद्रों की भूमिका सक्रिय बनाने के कार्य निरंतर किए जा रहे हैं। नशा मुक्त हेल्पलाइन 14446 की व्यवस्था भी लागू की गई है। मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा, एडीजी नार्कोटिक्स डी श्रीनिवास वर्मा सहित संबंधित अधिकारी बैठक में उपस्थित थे।  

उप मुख्यमंत्री अरुण साव चयन ट्रायल के दोनों दिन पहुंचे हॉकी स्टेडियम, खिलाड़ियों की हौसला अफजाई की

चयन ट्रायल के बाद छत्तीसगढ़ हॉकी लीग के लिए 130 खिलाड़ी शॉर्टलिस्टेड फ्रेंचाइजी टीमों के खिलाड़ियों के चयन के लिए 8 अक्टूबर को रायपुर में होगा प्लेयर ड्राफ्ट उप मुख्यमंत्री अरुण साव चयन ट्रायल के दोनों दिन पहुंचे हॉकी स्टेडियम, खिलाड़ियों की हौसला अफजाई की रायपुर.  छत्तीसगढ़ हॉकी लीग (सीएचएल) के पहले सीजन के लिए आयोजित दो दिवसीय चयन ट्रायल आज रायपुर स्थित सरदार वल्लभ भाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम में संपन्न हआ। ट्रायल के लिए कुल 373 खिलाड़ियों ने पंजीकरण कराया था, जिनमें से 223 खिलाड़ियों ने भाग लिया। दो दिवसीय चयन प्रक्रिया और खिलाड़ियों के प्रदर्शन के मूल्यांकन के बाद 130 खिलाड़ियों को शॉर्टलिस्ट किया गया है। प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए खिलाड़ियों ने चयन ट्रायल में हिस्सा लिया और लीग के पहले सीजन में जगह बनाने के लिए अपना दमखम दिखाया। चयन प्रक्रिया के दौरान खिलाड़ियों के खेल कौशल, प्रदर्शन और निर्धारित मानकों के आधार पर मूल्यांकन किया गया। उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव लगातार दूसरे दिन ट्रायल स्थल पहुंचे। उन्होंने मैदान पर खिलाड़ियों का खेल देखा, उनसे मुलाकात की और उन्हें अपने खेल को और निखारने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने खिलाड़ियों की हौसला अफजाई करते हुए कहा कि निरंतर अभ्यास और मेहनत के माध्यम से अपने खेल को बेहतर बनाते रहें। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा, "छत्तीसगढ़ हॉकी लीग के लिए आयोजित चयन ट्रायल का सफल समापन राज्य की हॉकी प्रतिभाओं के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। 373 खिलाड़ियों का पंजीकरण और प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से खिलाड़ियों की भागीदारी यह दर्शाती है कि राज्य में हॉकी को लेकर उत्साह और प्रतिभा दोनों मौजूद हैं। 130 खिलाड़ियों का शॉर्टलिस्ट होना इस प्रक्रिया का एक अहम परिणाम है। अब इन खिलाड़ियों को प्लेयर ड्राफ्ट के माध्यम से लीग की छह टीमों का हिस्सा बनने का अवसर मिलेगा। हमारी सरकार का उ‌द्देश्य है कि छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों को बेहतर प्रतिस्पर्धी माहौल, आवश्यक अनुभव और आगे बढ़ने के अवसर मिलें।" उन्होंने सभी शॉर्टलिस्टेड खिलाड़ियों को आगामी ड्राफ्ट और लीग के लिए शुभकामनाएँ दीं। खेल एवं युवा कल्याण विभाग की संचालक श्रीमती आकांक्षा शिक्षा खलखो, छत्तीसगढ़ हॉकी संघ के अध्यक्ष मनीष श्रीवास्तव और सचिव फिरोज अंसारी भी इस दौरान मौजूद थे।   चयन ट्रायल के बाद अब लीग के पहले सीजन के लिए टीम गठन की दिशा में अगला महत्वपूर्ण चरण सीएचएल प्लेयर ड्राफ्ट होगा। 8 अक्टूबर को रायपुर में आयोजित होने वाले इस ड्राफ्ट में शॉर्टलिस्ट किए गए 130 खिलाड़ी शामिल होंगे। इन खिलाड़ियों में से छह फ्रेंचाइज़ी टीमें अपने-अपने खिलाड़ी दल का चयन करेंगी। इसके बाद लीग के पहले सीजन के लिए टीमों को अंतिम रूप दिया जाएगा।

सीएम योगी बोले- सनातन के बिना भारत की कल्पना अधूरी

लखनऊ  युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज व राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की पुण्यस्मृति के उपलक्ष्य में श्रीमद्भागवत कथा के विराम पर बोले मुख्यमंत्री  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा के विराम सत्र को संबोधित करते हुए सनातन धर्म और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं को लेकर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि सनातन भारत का मूल धर्म है और देश की पहचान उसकी धर्मनगरी अयोध्या, काशी, मथुरा-वृंदावन और प्रयागराज की परंपराओं से जुड़ी है। मुख्यमंत्री ने इस दौरान गोवंश संरक्षण, प्राकृतिक खेती और पर्यावरण संरक्षण पर भी जोर दिया तथा प्रदेश में गोशालाओं के संचालन और गोवंश संरक्षण के लिए सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। अयोध्या, काशी, मथुरा-वृंदावन और प्रयागराज का किया उल्लेख दिग्विजयनाथ स्मृति भवन सभागार में कथा श्रवण और व्यासपीठ के समक्ष श्रद्धावनत होने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि जो लोग उत्तर प्रदेश की सनातन धर्मनगरियों के मर्म को नहीं पहचानते, वे उत्तर प्रदेश और भारत को नहीं समझ पाएंगे। उन्होंने कहा कि अयोध्या की मर्यादा, काशी की चेतना, मथुरा-वृंदावन की भक्ति और कुंभनगरी प्रयागराज की सामाजिक समरसता को समझे बिना उत्तर प्रदेश और भारत को समझना संभव नहीं है। गोमाता में सनातन धर्म की पहचान: योगी मुख्यमंत्री ने सनातन धर्म में गोमाता की प्रतिष्ठा का उल्लेख करते हुए कहा कि सनातन की पहचान गोमाता में है। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में पहला ग्रास गोमाता का माना गया है। उनके अनुसार, यदि हर सनातनी इस परंपरा का पालन करता तो गोमाता सड़कों पर नहीं विचरतीं। उन्होंने कहा कि इसी तरह अंतिम ग्रास श्वान का माना गया है। यदि इस परंपरा का पालन किया जाता तो सड़क पर निराश्रित कुत्ते राहगीरों को शिकार नहीं बनाते। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मामले में लोगों ने अपने ऋषि-मुनियों की परंपरा का अनुसरण नहीं किया। गोमाता के संरक्षण पर दिया जोर सीएम योगी ने कहा कि धरती माता का एक नाम गोमाता भी है और धरती माता को बचाने के लिए गोमाता को भी बचाना होगा। उन्होंने कहा कि गोमाता के संरक्षण और संवर्धन के लिए सरकार अपने स्तर से प्रयास कर रही है, लेकिन नागरिकों को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में सात हजार से अधिक गोशालाओं के माध्यम से 16 लाख से अधिक गोवंश का लालन-पालन किया जा रहा है। उन्होंने गोवंश संरक्षण के लिए नागरिकों की सहभागिता पर भी जोर दिया। भारतीय नस्ल की गोमाता का दूध अमृततुल्य मुख्यमंत्री ने बताया कि गोमाता और गोवंश के संरक्षण के लिए सरकार निराश्रित गोवंश को रखने पर किसानों को प्रति गोवंश प्रतिमाह 1500 रुपये की आर्थिक सहायता भी देती है। इसी तरह निराश्रित गोआश्रय स्थलों से कुपोषित परिवारों के लिए बियाही गाय और उसके भरण पोषण की धनराशि दी जाती है। सीएम ने कहा कि देसी भारतीय नस्ल की गोमाता का दूध अमृततुल्य होता है। आमजन भी गोशाला के संचालन में भागीदार बनकर पुण्य लाभ ले सकते हैं। उन्होंने आह्वान किया कि गोशाला में गोवंश को गोद लीजिए। उसके अनुरूप व्यवस्था करिए और गोपाष्टमी पर तिलक लगाकर उनका पूजन करिए। ऐसा करने पर आपका घर धन-धान्य से पूर्ण होगा, जीवन सुखमय होगा, सभी प्रकार की आरोग्यता की प्राप्ति होगी और गोमाता के आशीर्वाद से दुख, दरिद्रता नहीं रहेगी। हर बीमारी का रामबाण उपचार है देसी गाय मुख्यमंत्री ने कैंसर, किडनी और लिवर की खराबी जैसी बीमारियों पर चिंता जताते हुए कहा कि यह सब सिस्टम की गलती का नतीजा है, जिसने रासायनिक उर्वरकों और खतरनाक दवाओं के इस्तेमाल से हर खाद्यान्न को प्रभावित कर दिया है। इसका समाधान सिर्फ उपचार नहीं है। इस समस्या का समाधान भारतीय गोमाता आधारित प्राकृतिक खेती में है। गाय के गोबर से की गई प्राकृतिक खेती से उपजा अन्न उपयोग किया जाएगा तो कैंसर, किडनी व लीवर की खराबी, डायबिटीज जैसी बीमारियां नहीं होगी और तनाव भी नहीं होगा। गंभीर बीमारियों का रामबाण उपचार भारतीय नस्ल की गोमाता हैं, इसलिए हमें गोवंश का संरक्षण और संवर्धन करना होगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि आयुष्मान कार्ड से इलाज के अतिरिक्त, गरीबों की गंभीर बीमारियों के इलाज में उन्होंने अपने विवेकाधीन कोष से 1400 करोड रुपये अलग से दिए हैं। कथा व्यास की मुक्त कंठ से सराहना की सीएम योगी ने कथा व्यास मलूकपीठाधीश्वर, वृंदावन से पधारे स्वामी श्री राजेंद्रदास द्वाराचार्य की मुक्त कंठ से सराहना करते हुए सीएम योगी ने कहा कि स्वामी जी ने अत्यंत सरलता और सहजता से श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कराया। इस कथा के मध्य में देश के कई राज्यों में भीषण आपदा ने जन जीवन को प्रभावित किया। पर, गोरखपुर में शिवावतार महायोगी गोरखनाथ की पावन भूमि पर कथा व्यास के मुखारविंद से पावन कथा अनवरत श्रद्धाभाव से चलती रही। आपदा भी इसके मार्ग में बाधक नहीं बनी और यही भारत की पहचान है। आपदाओं का सामना करके भी कथा अनवरत ससमय प्रारंभ होती रही और सभी श्रद्धालुओं ने मर्यादा, समता, भक्ति और जीवंतता से कथा का आनंद लिया। कथा के विराम पर मुख्यमंत्री, संतजन व यजमानगण ने श्रीमद्भागवत महापुराण और व्यासपीठ की आरती उतारी। इस अवसर पर प्रदेश सरकार के जलशक्तमंत्री स्वतंत्र देव सिंह, मस्तनाथ पीठ अस्थल बोहर रोहतक हरियाणा के महंत एवं राजस्थान विधानसभा के विधायक बालकनाथ, वाराणसी से आए डॉ. रामकमल दास वेदांती, अयोध्या से आए स्वामी रामदिनेशाचार्य, गोरखनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ, कालीबाड़ी के महंत रविंद्रदास सहित कई साधु संत, यजमानगण और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सहभागिता रही। निराश्रित गोवंश के लिए 1500 रुपये की सहायता मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार निराश्रित गोवंश को रखने वाले किसानों को प्रति गोवंश प्रतिमाह 1500 रुपये की आर्थिक सहायता देती है। इसी तरह निराश्रित गोआश्रय स्थलों से कुपोषित परिवारों के लिए बियाही गाय और उसके भरण-पोषण की धनराशि दी जाती है। सीएम ने कहा कि देसी भारतीय नस्ल की गोमाता का दूध अमृततुल्य होता है। उन्होंने आमजन से गोशालाओं के संचालन में भागीदार बनने और गोवंश को गोद लेने का आह्वान किया। प्राकृतिक खेती को बताया समाधान मुख्यमंत्री ने कैंसर, किडनी और लिवर की खराबी जैसी बीमारियों पर चिंता जताते हुए कहा कि रासायनिक उर्वरकों और खतरनाक दवाओं के इस्तेमाल से खाद्यान्न प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि इसका समाधान केवल उपचार नहीं, बल्कि भारतीय गोमाता आधारित प्राकृतिक खेती में है। … Read more

गया में सिर्फ पिंडदान नहीं, ये 15 जगहें भी हैं घूमने लायक; देखें पूरी लिस्ट

गया  बिहार का Gaya Ji जिला  केवल पितृपक्ष में पिंडदान और मोक्ष पाने के लिए ही नहीं जाना जाता, बल्कि यह प्राचीन इतिहास, स्थापत्य कला (Architecture) और प्राकृतिक सुंदरता का एक अद्भुत संगम है। पहाड़ियां, कलकल बहती नदियां और घने जंगलों के बीच बसे गया में हिंदू, बौद्ध और सूफी संस्कृति की एक गहरी छाप देखने को मिलती है। अगर आप पिंडदान के साथ-साथ गया जी घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो केवल Vishnupad Temple या बोधगया तक ही सीमित न रहें। आइए आपको बताते हैं गया की उन 15 खास जगहों के बारे में, जहां आस्था के साथ-साथ आपको प्रकृति के शानदार सीन भी देखने को मिलेंगे: 1. सीता कुंड: जहां माता सीता ने किया था बालू से पिंडदान फल्गु नदी के पूर्वी तट पर स्थित सीता कुंड पौराणिक और धार्मिक रूप से बेहद पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि वनवास के दौरान माता सीता ने राजा दशरथ की आत्मा की शांति के लिए यहीं फल्गु की रेत से पिंडदान किया था। यह विष्णुपाद मंदिर के ठीक सामने स्थित है और पितृ पक्ष के दौरान पिंडदान करने के लिए विशेष महत्व रखता है। 2. तपोवन कुंड: औषधीय गुणों वाले गर्म पानी के झरने तपोवन पहाड़ियों के बीच स्थित यह स्थल ऋषि कण्व और रामायण काल से जुड़ा हुआ है। यहां प्रकृति की गोद में गर्म पानी के कुंड (गंडक युक्त जल) हैं। मान्यता है कि इस पानी में नहाने से त्वचा सम्बन्धी बीमारियां (Skin Diseases) ठीक होती हैं। 3. ब्रह्मयोनि पहाड़ी: पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति का द्वार गया शहर के दक्षिण में स्थित ब्रह्मयोनि पहाड़ी की चोटी पर एक प्राचीन मंदिर है। यहां 'ब्रह्मयोनि' नामक प्राकृतिक गुफा है, जिसे भगवान ब्रह्मा का प्रतीक माना जाता है। ऐसी आस्था है कि इस गुफा रूपी द्वार से गुजरने पर व्यक्ति को पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति मिल जाती है। 4. दुखरनी मंदिर: सांप्रदायिक सद्भाव की अनोखी मिसाल लगभग 450 वर्ष पूर्व टिकारी महाराजा मोदक सिंह द्वारा बनाया गया यह मंदिर बेहद खास है। इसकी एक दीवार गया की जामा मस्जिद से सटी हुई है, जो हिंदू-मुस्लिम एकता का बड़ा संदेश देती है। माना जाता है कि यहां आने वाले हर भक्त के दुख-दर्द दूर होते हैं। 5. डुंगेश्वरी हिल्स: जहां बुद्ध ने की थी 6 वर्षों की कठिन तपस्या बोधगया से करीब 12-15 किलोमीटर दूर फल्गु नदी के किनारे स्थित ये पहाड़ियां आंखों के सुकून के साथ आत्मीय शांति का भी अहसास कराती हैं। ज्ञान प्राप्ति से पहले सिद्धार्थ गौतम ने इन्हीं गुफाओं में कठिन तपस्या की थी। 6. बाबा बैजुधाम मंदिर: बाढ़ में मिला विशाल शिवलिंग मोरहार नदी के किनारे, पहाड़ियों और जंगलों से घिरा बैजुधाम मंदिर बेहद घूमने लायक जगह है। सितंबर 2000 में आई भीषण बाढ़ के दौरान यहां एक विशाल काला शिवलिंग मिला था। सावन और महाशिवरात्रि में यहां भारी भीड़ उमड़ती है। 7. भूरा साइट (दुर्वासा नगर): ऋषि दुर्वासा की तपोभूमि यह स्थल हिंदू और बौद्ध दोनों धर्मों का संगम है। मान्यता है कि यहां ऋषि दुर्वासा ने ध्यान लगाया था। यहां प्राचीन बुद्ध प्रतिमाएं, स्तूप के अवशेष, दुब्बा किला और प्राकृतिक जल स्रोत मौजूद हैं। पुराने सिक्के, मुहरें और मिट्टी के बर्तन जैसी पुरातात्विक खोजें इस स्थल के ऐतिहासिक महत्व को साबित करती हैं। 8. कोंचेश्वर महादेव मंदिर: 105 फीट ऊंचा ईंटों का अजूबा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित यह मंदिर उत्तर भारत के दुर्लभ मंदिरों में से एक है। गुप्त काल के बाद की वास्तुकला से बना यह मंदिर विशेष आकार की ईंटों से निर्मित है। मंदिर का शिखर लगभग 105 फीट ऊंचा है। मंदिर की बाहरी दीवारें ऊपर से नीचे तक सीधी नहीं हैं, बल्कि घुमावदार हैं यहां भगवान विष्णु, गणेश, सूर्य और बुद्ध की 85 से अधिक प्राचीन मूर्तियां संरक्षित हैं बोधगया के प्रमुख आकर्षण (Bodh Gaya Attractions) 9. 80 फुट की बुद्ध प्रतिमा: भारत की सबसे ऊंची बुद्ध प्रतिमाओं में से एक है। यहां भगवान बुद्ध ध्यान मुद्रा में कमल पर विराजमान हैं। इसे भारत और जापान की सांस्कृतिक दोस्ती का प्रतीक माना जाता है, क्योंकि इसका निर्माण जापानी बौद्ध संगठन दाइजोक्यो के सहयोग से किया गया था। 10. सुजाता गढ़: बकराउर गांव में स्थित यह गढ़ गौतम बुद्ध से जुड़ा है। मान्यता के अनुसार, ज्ञान प्राप्ति से पहले सिद्धार्थ गौतम ने कठोर तपस्या की थी, जिससे उनका शरीर अत्यंत दुर्बल हो गया था। उस समय बकराउर गांव की सुजाता नामक एक महिला ने उन्हें मिट्टी के कटोरे में खीर भेंट की थी। 11. मुचलिंडा सरोवर: महाबोधि मंदिर के पास स्थित यह सरोवर उस कथा से जुड़ा है, जब नागराज मुचलिंडा ने भीषण बारिश में अपने फन से भगवान बुद्ध की रक्षा की थी। परंपरा के अनुसार, भगवान बुद्ध ने निर्वाण प्राप्त करने के छठे सप्ताह में यहां ध्यान किया था। आस्था और शक्ति के अन्य पवित्र स्थल 12. मां तारा देवी मंदिर (केसपा): पाल कालीन मूर्तियों और पुरातात्विक अवशेषों से घिरा यह मंदिर बौद्ध और हिंदू संस्कृति का सुंदर संगम प्रस्तुत करता है। 13. गुरुपसी माता मंदिर (गुरपा): 'कुक्कुटपाद गिरि' पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर प्राकृतिक सुंदरता से भरा है। यहीं बुद्ध के शिष्य महाकश्यप की गुफा भी स्थित है। 14. बंगला स्थान मंदिर: गया शहर के केंद्र में स्थित यह शिव मंदिर अपनी शांत वास्तुकला और आध्यात्मिक वातावरण के लिए जाना जाता है। 15. रेवाई गांव (सूर्य व जौहर मंदिर): टिकारी का यह गांव अपने सदियों पुराने प्राचीन सूर्य मंदिर (छठ पूजा का प्रमुख केंद्र) और जौहर मंदिर (सती स्थान) की ऐतिहासिक लोककथाओं के लिए जाना जाता है।

जिउतिया की थाली में छिपा देसी पोषण, मड़ुआ-नोनी साग से जुड़ी खास परंपरा

 उदवंतनगर (भोजपुर) संतान की सुख-समृद्धि और दीर्घायु की कामना से रखा जाने वाला जिउतिया पर्व इसी सप्ताह शनिवार को है। यह व्रत केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण जीवन, कृषि और पारंपरिक पोषण ज्ञान से भी गहराई से जुड़ा है। तीन दिनों तक चलने वाले इस पर्व में नहाय-खाय से लेकर निर्जला उपवास और फिर पारणा तक खान-पान की अपनी विशेष परंपरा है। मड़ुआ से नोनी साग तक, थाली में देसी पोषण शाहाबाद क्षेत्र में जिउतिया की थाली में ऐसे कई खाद्य पदार्थ शामिल होते हैं, जो आज आधुनिक रसोई में कम दिखाई देते हैं। मड़ुआ यानी रागी की घी लगी रोटी, नोनी का साग, सतपुतिया की सब्जी, पोई साग की पकौड़ी, कढ़ी, कंद या अरबी की सब्जी, नेनुआ-चना का तोड़ा, खीरे का रायता और कोहड़े की सब्जी जैसे व्यंजन पीढ़ियों से इस पर्व की खाद्य परंपरा का हिस्सा रहे हैं। मोटे अनाज और स्थानीय सब्जियों में सेहत का राज मड़ुआ फाइबर और कैल्शियम से भरपूर मोटा अनाज है, जो ग्लूटन मुक्त होता है। आयुष चिकित्सक डा. विभेष कुमार बताते हैं कि यह डायबिटीज को नियंत्रित रखने, वजन कम करने व हड्डियों को मजबूत बनाने में सहायक होता है। अरबी पाचनतंत्र व रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है। नोनी ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर है और हृदय स्वास्थ्य के लिए उपयोगी मानी जाती है सतपुतिया में संतान वृद्धि की लोक आस्था जिउतिया में सतपुतिया का विशेष महत्व है। लोकमान्यता के अनुसार एक बेल पर एक साथ कई फल लगने के कारण इसे संतान वृद्धि और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। उदवंतनगर के पंडित रामावतार ओझा कहते हैं कि पुराने समय में चेचक, हैजा और प्लेग जैसी महामारियों का व्यापक प्रभाव था। ऐसे दौर में बच्चों के सुरक्षित जीवन और दीर्घायु की कामना से जुड़ी लोक परंपराओं को विशेष महत्व मिला। व्रत से आगे लोक ज्ञान को सहेजने का पर्व जिउतिया पर्व के बहाने उन अनाजों, साग-सब्जियों और पारंपरिक व्यंजनों का इस्तेमाल होता है, जो कभी ग्रामीण रसोई की पहचान हुआ करते थे। सनातन सेवा अभियान से जुड़े यशवंत सिंह कहते हैं कि आज जब मोटे अनाज और स्थानीय खाद्य पदार्थों को फिर से भोजन में शामिल करने पर जोर दिया जा रहा है, ऐसे में जिउतिया की परंपरा बताती है कि हमारी लोक संस्कृति में भोजन को मौसम, प्रकृति और उपलब्ध संसाधनों से जोड़कर देखने की समझ पहले से मौजूद रही है। आस्था के साथ विरासत भी आगे बढ़ाती है जिउतिया यही कारण है कि जिउतिया मां की ममता और संतान की मंगलकामना के साथ लोक संस्कृति और पारंपरिक खान-पान की समृद्ध विरासत को भी पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने वाला पर्व माना जाता है।  

हांगकांग-वियतनाम के रास्ते आए 10 प्रोफेशनल ड्रोन, दिल्ली एयरपोर्ट पर बड़ा खुलासा

नई दिल्ली  दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट पर तीन भारतीय पैसेंजर को 10 मिलिट्री-ग्रेड ड्रोन के साथ पकड़ा गया है। छानबीन के बाद इन्हें प्रोफेशनल ग्रेड ड्रोन बताया जा रहा है, जो थर्मल इमेजिंग और लेजर रेंज फाइंडर से लैस है। मंगलवार को अधिकारियों ने हांगकांग से वियतनाम के रास्ते भारत लाए गए इन अनमैन्ड एरियल व्हीकल की जानकारी दी है। दिल्ली कस्टम्स (एयरपोर्ट एंड जेनरल) ने एक्स पोस्ट के माध्यम से 10 मिलिट्री-ग्रेड ड्रोन की इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से इस बरामदगी की जानकारी दी है। जब्त किए गए ड्रोन की कीमत 1 करोड़ रुपये से अधिक जब्त किए गए 10 ड्रोन की कीमत 1,03,55,900 रुपये बताया जा रहा है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार ये ड्रोन 25 सितंबर को वियतनाम के रास्ते हांगकांग से टर्मिनल-3 पहुंचा था। कस्टम अधिकारियों ने खुफिया सूचना के आधार पर ग्रीन चैनल पार करने के दौरान संदिग्ध पैसेंजरों को रोक लिया। हालांकि, इस मामले की जानकारी मंगलवार को सार्वजनिक की गई। जब सामान की विस्तृत जांच की गई तो उसमें से बरामद हुए 10 मिलिट्री-ग्रेड ड्रोन के साथ उससे जुड़े उपकरण भी लाए गए हैं, जिनमें कंट्रोलर, गिम्बल के साथ कैमरे, केबल, प्रोपेलर और जॉयस्टिक्स शामिल हैं। क्यों कहा जा रहा है मिलिट्री-ग्रेड ड्रोन एक चार्टर्ड इंजीनियर के मूल्यांकन से इस बात की पुष्टि हुई है कि ये ड्रोन प्रोफेशनल-ग्रेड के हैं, जिसमें थर्मल इमेजिंग और लेजर रेंज फाइंडर की सुविधा उपलब्ध है। आधिकारिक बयान के अनुसार इन ड्रोनों को मिलिट्री या डिफेंस-ग्रेड का यूएवी माना गया है, जिनके लिए डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन के पास रजिस्ट्रेशन होना जरूरी है। कस्टम्स एक्ट, 1962 के तहत यात्रियों को हिरासत में ले लिया गया है और लाए गए सामानों की आगे की जांच जारी है। मिलिट्री-ग्रेड लोन लाने का मकसद साफ नहीं हालांकि, अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि विदेश से इस रह के ड्रोन तस्करी करके लाने का मकसद क्या है। यह भी साफ नहीं है कि इस ड्रोन को कहीं और सप्लाई किया जाना था या धरे गए पैसेंजर इसे अपने इस्तेमाल के लिए लेकर आ रहे थे।  

₹4,613 करोड़ का एक्सप्रेसवे बदलेगा सफर, आगरा से ग्वालियर सिर्फ 1 घंटे में

आगरा  आगरा से ग्वालियर का सफर मात्र 60 मिनट में पूरा होने वाला है। 88 किलोमीटर लंबा, छह लेन का एक्सप्रेसवे तीन राज्यों को जोड़ेगा। यानि उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश को कनेक्टिविटी मिलेगी। आगरा ग्वालियर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे ईधन और समय दोनों की बचत करेगा। अभी यह सफर तय करने में तीन घंटे से अधिक का समय लगता है। चंबल नदी पर 1600 मीटर लंबा हैंगिंग पुल बनेगा। आगरा के 14, धौलपुर राजस्थान और मुरैना मध्य प्रदेश के 30 गांवों से गुजरेगा। आगरा से ग्वालियर की दूरी 33 किमी कम हो जाएगी। सिर्फ एक घंटे के अंदर ग्वालियर पहुंचा जा सकेगा। आगरा से ग्वालियर की दूरी 121 किमी है। चार लेन की रोड से इस दूरी को तय करने में अभी दो से ढाई घंटे लगते हैं। आगरा में अवंतीबाई चौराहा से मधुनगर होते हुए ग्वालियर हाईवे मुरैना और धौलपुर के आबादी क्षेत्रों से होता हुआ निकलता है, जिसके कारण जाम के हालात बने रहते हैं। आगरा-ग्वालियर ग्रीनफील्ड-एक्सप्रेसवे तीन तहसीलों से गुजरेगा। 47 पुलिया, चार छोटे और पांच बड़े पुल बनेंगे आगरा-ग्वालियर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे जिले की तीन तहसीलों से होकर गुजरेगा। तहसील सदर, फतेहाबाद और खेरागढ़ के 15 गांवों की 117.83 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण होगा। ग्वालियर स्थित सुसेरा गांव में वर्तमान ग्वालियर हाईवे से जोड़ा जाएगा। एक्सप्रेस-वे में 47 पुलिया, चार छोटे और पांच बड़े पुल बनेंगे। आगरा में तहसील सदर के तीन, फतेहाबाद के पांच और खेरागढ़ के सात गांवों की कुल 117.83 हेक्टेयर भूमि इस प्रोजेक्ट में ली गई है। आगरा में एक्सप्रेस-वे की लंबाई 22 किमी प्रस्तावित है और इसे ऊंचाई पर बनाया जाएगा। दो से तीन मीटर की दीवार भी बनाई जाएगी। इससे जानवर सीधे एक्सप्रेस-वे पर नहीं पहुंच सकेंगे। 1.24 लाख पौधे भी लगाए जाएंगे पर्यावरण के नजरिए से 1.24 लाख पौधे भी लगाए जाएंगे और उनकी ठीक तरीके से देखभाल की जाएगी। एक्सप्रेसवे का निर्माण खत्म होने से पूर्व चार औद्योगिक जोन चिन्हित कर विकसित किया जाएगा। जोन को एक्सप्रेसवे की सर्विस रोड से जोड़ा जाएगा। इससे वाहनों का आवागमन आसानी से हो सकेगा। जोन बनने से फैक्ट्री लगेंगी और इससे रोजगार के अवसर विकसित होंगे। यह जोन उप्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान में बनेंगे। रास्ते में मुसाफिरों के रुकने और स्वल्पाहार आदि के लिए दो ट्रंपेट भी तैयार किए जाएंगे यानी कि मुख्य एक्सप्रेसवे से अलग रोड निकालकर साइड में शौचालय और रेस्टोरेंट-कैफे जैसी सुविधा रहेगी। छह बड़े जंक्शन रहेंगे इस ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे में छह बड़े जंक्शन रहेंगे। यानी जहां से वाहन चढ़ और उतर सकेंगे। इसमें मुरैना, धौलपुर सिटी, धौलपुर में स्टेट हाईवे क्रमांक दो, धौलपुर बाइपास रोड पर महाराजपुरा गांव, आगरा के जाजऊ और आगरा बाइपास की ओर बाद में रहेगा। इसके अलावा, 131 छोटे जंक्शन भी चिह्नित किए गए हैं, जो एक्सप्रेस वे के आसपास के गांवों से गुजरने वाली सड़कें हैं, लेकिन इन सड़कों का प्रवेश एक्सप्रेस वे पर नहीं रहेगा। ये भी जानिए     4613 करोड़ रुपये से बन रहा है ग्वालियर-आगरा एक्सप्रेसवे     88 किमी लंबा है एक्सप्रेसवे     121 किमी है वर्तमान फोरलेन हाईवे की लंबाई     33 किमी कम हो जाएगी आगरा से ग्वालियर की दूरी     60 मिनट आगरा से ग्वालियर पहुंचने में लगेंगे     88.400 किमी लंबे एक्सप्रेस वे पर 36 बस स्टॉप भी तैयार किए जाएंगे।     माल ढुलाई करने वाले ट्रकों के रुकने के लिए अलग से तीन लंबाई रोड का भी प्रस्ताव आगरा ही नहीं दिल्ली और देहरादून भी अभी ग्वालियर-आगरा फोरलेन हाईवे की लंबाई 121 किमी है। इस नए एक्सप्रेसवे के जरिये आगरा से यमुना एक्सप्रेस-वे पर जा सकेंगे। यमुना एक्सप्रेस वे पर जेवर के पास इंटरचेंज से ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस-वे पर पहुंच सकते हैं। इससे हरिद्वार-देहरादून तक की दूरी कम हो सकेगी। अभी सड़क मार्ग से जाने वाले लोगों को नोएडा, गाजियाबाद होकर ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस-वे पर पहुंचना पड़ता है। ग्वालियर से 564 किलोमीटर की दूर है देहरादून ग्वालियर से देहरादून तक की दूरी 564 किमी है, लेकिन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे तैयार होने से आगरा की दूरी जहां 33 किलोमीटर कम होगी, तो वहीं ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस-वे होते हुए दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का इस्तेमाल करने पर देहरादून तक की दूरी 39 किमी कम हो जाएगी। दिल्ली से देहरादून की दूरी 249 किमी है, लेकिन ट्रैफिक के चलते देहरादून तक पहुंचने में छह घंटे लगते हैं। इकोनॉमिक कॉरिडोर से घट गया समय इकोनॉमिक कॉरिडोर से यह दूरी जहां 210 किमी रह गई है। देहरादून तक पहुंचने में सिर्फ ढाई घंटे का समय लगता है। ग्वालियर से देहरादून तक पहुंचने में जहां 10:45 घंटे लगते हैं। ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे बनने से जहां दिल्ली तक तीन घंटे, तो वहीं दिल्ली से देहरादून तक सिर्फ ढाई से तीन घंटे में पहुंच सकेंगे।