samacharsecretary.com

उप मुख्यमंत्री अरुण साव चयन ट्रायल के दोनों दिन पहुंचे हॉकी स्टेडियम, खिलाड़ियों की हौसला अफजाई की

चयन ट्रायल के बाद छत्तीसगढ़ हॉकी लीग के लिए 130 खिलाड़ी शॉर्टलिस्टेड फ्रेंचाइजी टीमों के खिलाड़ियों के चयन के लिए 8 अक्टूबर को रायपुर में होगा प्लेयर ड्राफ्ट उप मुख्यमंत्री अरुण साव चयन ट्रायल के दोनों दिन पहुंचे हॉकी स्टेडियम, खिलाड़ियों की हौसला अफजाई की रायपुर.  छत्तीसगढ़ हॉकी लीग (सीएचएल) के पहले सीजन के लिए आयोजित दो दिवसीय चयन ट्रायल आज रायपुर स्थित सरदार वल्लभ भाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम में संपन्न हआ। ट्रायल के लिए कुल 373 खिलाड़ियों ने पंजीकरण कराया था, जिनमें से 223 खिलाड़ियों ने भाग लिया। दो दिवसीय चयन प्रक्रिया और खिलाड़ियों के प्रदर्शन के मूल्यांकन के बाद 130 खिलाड़ियों को शॉर्टलिस्ट किया गया है। प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए खिलाड़ियों ने चयन ट्रायल में हिस्सा लिया और लीग के पहले सीजन में जगह बनाने के लिए अपना दमखम दिखाया। चयन प्रक्रिया के दौरान खिलाड़ियों के खेल कौशल, प्रदर्शन और निर्धारित मानकों के आधार पर मूल्यांकन किया गया। उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव लगातार दूसरे दिन ट्रायल स्थल पहुंचे। उन्होंने मैदान पर खिलाड़ियों का खेल देखा, उनसे मुलाकात की और उन्हें अपने खेल को और निखारने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने खिलाड़ियों की हौसला अफजाई करते हुए कहा कि निरंतर अभ्यास और मेहनत के माध्यम से अपने खेल को बेहतर बनाते रहें। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा, "छत्तीसगढ़ हॉकी लीग के लिए आयोजित चयन ट्रायल का सफल समापन राज्य की हॉकी प्रतिभाओं के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। 373 खिलाड़ियों का पंजीकरण और प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से खिलाड़ियों की भागीदारी यह दर्शाती है कि राज्य में हॉकी को लेकर उत्साह और प्रतिभा दोनों मौजूद हैं। 130 खिलाड़ियों का शॉर्टलिस्ट होना इस प्रक्रिया का एक अहम परिणाम है। अब इन खिलाड़ियों को प्लेयर ड्राफ्ट के माध्यम से लीग की छह टीमों का हिस्सा बनने का अवसर मिलेगा। हमारी सरकार का उ‌द्देश्य है कि छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों को बेहतर प्रतिस्पर्धी माहौल, आवश्यक अनुभव और आगे बढ़ने के अवसर मिलें।" उन्होंने सभी शॉर्टलिस्टेड खिलाड़ियों को आगामी ड्राफ्ट और लीग के लिए शुभकामनाएँ दीं। खेल एवं युवा कल्याण विभाग की संचालक श्रीमती आकांक्षा शिक्षा खलखो, छत्तीसगढ़ हॉकी संघ के अध्यक्ष मनीष श्रीवास्तव और सचिव फिरोज अंसारी भी इस दौरान मौजूद थे।   चयन ट्रायल के बाद अब लीग के पहले सीजन के लिए टीम गठन की दिशा में अगला महत्वपूर्ण चरण सीएचएल प्लेयर ड्राफ्ट होगा। 8 अक्टूबर को रायपुर में आयोजित होने वाले इस ड्राफ्ट में शॉर्टलिस्ट किए गए 130 खिलाड़ी शामिल होंगे। इन खिलाड़ियों में से छह फ्रेंचाइज़ी टीमें अपने-अपने खिलाड़ी दल का चयन करेंगी। इसके बाद लीग के पहले सीजन के लिए टीमों को अंतिम रूप दिया जाएगा।

सीएम योगी बोले- सनातन के बिना भारत की कल्पना अधूरी

लखनऊ  युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज व राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की पुण्यस्मृति के उपलक्ष्य में श्रीमद्भागवत कथा के विराम पर बोले मुख्यमंत्री  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा के विराम सत्र को संबोधित करते हुए सनातन धर्म और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं को लेकर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि सनातन भारत का मूल धर्म है और देश की पहचान उसकी धर्मनगरी अयोध्या, काशी, मथुरा-वृंदावन और प्रयागराज की परंपराओं से जुड़ी है। मुख्यमंत्री ने इस दौरान गोवंश संरक्षण, प्राकृतिक खेती और पर्यावरण संरक्षण पर भी जोर दिया तथा प्रदेश में गोशालाओं के संचालन और गोवंश संरक्षण के लिए सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। अयोध्या, काशी, मथुरा-वृंदावन और प्रयागराज का किया उल्लेख दिग्विजयनाथ स्मृति भवन सभागार में कथा श्रवण और व्यासपीठ के समक्ष श्रद्धावनत होने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि जो लोग उत्तर प्रदेश की सनातन धर्मनगरियों के मर्म को नहीं पहचानते, वे उत्तर प्रदेश और भारत को नहीं समझ पाएंगे। उन्होंने कहा कि अयोध्या की मर्यादा, काशी की चेतना, मथुरा-वृंदावन की भक्ति और कुंभनगरी प्रयागराज की सामाजिक समरसता को समझे बिना उत्तर प्रदेश और भारत को समझना संभव नहीं है। गोमाता में सनातन धर्म की पहचान: योगी मुख्यमंत्री ने सनातन धर्म में गोमाता की प्रतिष्ठा का उल्लेख करते हुए कहा कि सनातन की पहचान गोमाता में है। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में पहला ग्रास गोमाता का माना गया है। उनके अनुसार, यदि हर सनातनी इस परंपरा का पालन करता तो गोमाता सड़कों पर नहीं विचरतीं। उन्होंने कहा कि इसी तरह अंतिम ग्रास श्वान का माना गया है। यदि इस परंपरा का पालन किया जाता तो सड़क पर निराश्रित कुत्ते राहगीरों को शिकार नहीं बनाते। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मामले में लोगों ने अपने ऋषि-मुनियों की परंपरा का अनुसरण नहीं किया। गोमाता के संरक्षण पर दिया जोर सीएम योगी ने कहा कि धरती माता का एक नाम गोमाता भी है और धरती माता को बचाने के लिए गोमाता को भी बचाना होगा। उन्होंने कहा कि गोमाता के संरक्षण और संवर्धन के लिए सरकार अपने स्तर से प्रयास कर रही है, लेकिन नागरिकों को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में सात हजार से अधिक गोशालाओं के माध्यम से 16 लाख से अधिक गोवंश का लालन-पालन किया जा रहा है। उन्होंने गोवंश संरक्षण के लिए नागरिकों की सहभागिता पर भी जोर दिया। भारतीय नस्ल की गोमाता का दूध अमृततुल्य मुख्यमंत्री ने बताया कि गोमाता और गोवंश के संरक्षण के लिए सरकार निराश्रित गोवंश को रखने पर किसानों को प्रति गोवंश प्रतिमाह 1500 रुपये की आर्थिक सहायता भी देती है। इसी तरह निराश्रित गोआश्रय स्थलों से कुपोषित परिवारों के लिए बियाही गाय और उसके भरण पोषण की धनराशि दी जाती है। सीएम ने कहा कि देसी भारतीय नस्ल की गोमाता का दूध अमृततुल्य होता है। आमजन भी गोशाला के संचालन में भागीदार बनकर पुण्य लाभ ले सकते हैं। उन्होंने आह्वान किया कि गोशाला में गोवंश को गोद लीजिए। उसके अनुरूप व्यवस्था करिए और गोपाष्टमी पर तिलक लगाकर उनका पूजन करिए। ऐसा करने पर आपका घर धन-धान्य से पूर्ण होगा, जीवन सुखमय होगा, सभी प्रकार की आरोग्यता की प्राप्ति होगी और गोमाता के आशीर्वाद से दुख, दरिद्रता नहीं रहेगी। हर बीमारी का रामबाण उपचार है देसी गाय मुख्यमंत्री ने कैंसर, किडनी और लिवर की खराबी जैसी बीमारियों पर चिंता जताते हुए कहा कि यह सब सिस्टम की गलती का नतीजा है, जिसने रासायनिक उर्वरकों और खतरनाक दवाओं के इस्तेमाल से हर खाद्यान्न को प्रभावित कर दिया है। इसका समाधान सिर्फ उपचार नहीं है। इस समस्या का समाधान भारतीय गोमाता आधारित प्राकृतिक खेती में है। गाय के गोबर से की गई प्राकृतिक खेती से उपजा अन्न उपयोग किया जाएगा तो कैंसर, किडनी व लीवर की खराबी, डायबिटीज जैसी बीमारियां नहीं होगी और तनाव भी नहीं होगा। गंभीर बीमारियों का रामबाण उपचार भारतीय नस्ल की गोमाता हैं, इसलिए हमें गोवंश का संरक्षण और संवर्धन करना होगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि आयुष्मान कार्ड से इलाज के अतिरिक्त, गरीबों की गंभीर बीमारियों के इलाज में उन्होंने अपने विवेकाधीन कोष से 1400 करोड रुपये अलग से दिए हैं। कथा व्यास की मुक्त कंठ से सराहना की सीएम योगी ने कथा व्यास मलूकपीठाधीश्वर, वृंदावन से पधारे स्वामी श्री राजेंद्रदास द्वाराचार्य की मुक्त कंठ से सराहना करते हुए सीएम योगी ने कहा कि स्वामी जी ने अत्यंत सरलता और सहजता से श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कराया। इस कथा के मध्य में देश के कई राज्यों में भीषण आपदा ने जन जीवन को प्रभावित किया। पर, गोरखपुर में शिवावतार महायोगी गोरखनाथ की पावन भूमि पर कथा व्यास के मुखारविंद से पावन कथा अनवरत श्रद्धाभाव से चलती रही। आपदा भी इसके मार्ग में बाधक नहीं बनी और यही भारत की पहचान है। आपदाओं का सामना करके भी कथा अनवरत ससमय प्रारंभ होती रही और सभी श्रद्धालुओं ने मर्यादा, समता, भक्ति और जीवंतता से कथा का आनंद लिया। कथा के विराम पर मुख्यमंत्री, संतजन व यजमानगण ने श्रीमद्भागवत महापुराण और व्यासपीठ की आरती उतारी। इस अवसर पर प्रदेश सरकार के जलशक्तमंत्री स्वतंत्र देव सिंह, मस्तनाथ पीठ अस्थल बोहर रोहतक हरियाणा के महंत एवं राजस्थान विधानसभा के विधायक बालकनाथ, वाराणसी से आए डॉ. रामकमल दास वेदांती, अयोध्या से आए स्वामी रामदिनेशाचार्य, गोरखनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ, कालीबाड़ी के महंत रविंद्रदास सहित कई साधु संत, यजमानगण और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सहभागिता रही। निराश्रित गोवंश के लिए 1500 रुपये की सहायता मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार निराश्रित गोवंश को रखने वाले किसानों को प्रति गोवंश प्रतिमाह 1500 रुपये की आर्थिक सहायता देती है। इसी तरह निराश्रित गोआश्रय स्थलों से कुपोषित परिवारों के लिए बियाही गाय और उसके भरण-पोषण की धनराशि दी जाती है। सीएम ने कहा कि देसी भारतीय नस्ल की गोमाता का दूध अमृततुल्य होता है। उन्होंने आमजन से गोशालाओं के संचालन में भागीदार बनने और गोवंश को गोद लेने का आह्वान किया। प्राकृतिक खेती को बताया समाधान मुख्यमंत्री ने कैंसर, किडनी और लिवर की खराबी जैसी बीमारियों पर चिंता जताते हुए कहा कि रासायनिक उर्वरकों और खतरनाक दवाओं के इस्तेमाल से खाद्यान्न प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि इसका समाधान केवल उपचार नहीं, बल्कि भारतीय गोमाता आधारित प्राकृतिक खेती में है। … Read more

गया में सिर्फ पिंडदान नहीं, ये 15 जगहें भी हैं घूमने लायक; देखें पूरी लिस्ट

गया  बिहार का Gaya Ji जिला  केवल पितृपक्ष में पिंडदान और मोक्ष पाने के लिए ही नहीं जाना जाता, बल्कि यह प्राचीन इतिहास, स्थापत्य कला (Architecture) और प्राकृतिक सुंदरता का एक अद्भुत संगम है। पहाड़ियां, कलकल बहती नदियां और घने जंगलों के बीच बसे गया में हिंदू, बौद्ध और सूफी संस्कृति की एक गहरी छाप देखने को मिलती है। अगर आप पिंडदान के साथ-साथ गया जी घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो केवल Vishnupad Temple या बोधगया तक ही सीमित न रहें। आइए आपको बताते हैं गया की उन 15 खास जगहों के बारे में, जहां आस्था के साथ-साथ आपको प्रकृति के शानदार सीन भी देखने को मिलेंगे: 1. सीता कुंड: जहां माता सीता ने किया था बालू से पिंडदान फल्गु नदी के पूर्वी तट पर स्थित सीता कुंड पौराणिक और धार्मिक रूप से बेहद पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि वनवास के दौरान माता सीता ने राजा दशरथ की आत्मा की शांति के लिए यहीं फल्गु की रेत से पिंडदान किया था। यह विष्णुपाद मंदिर के ठीक सामने स्थित है और पितृ पक्ष के दौरान पिंडदान करने के लिए विशेष महत्व रखता है। 2. तपोवन कुंड: औषधीय गुणों वाले गर्म पानी के झरने तपोवन पहाड़ियों के बीच स्थित यह स्थल ऋषि कण्व और रामायण काल से जुड़ा हुआ है। यहां प्रकृति की गोद में गर्म पानी के कुंड (गंडक युक्त जल) हैं। मान्यता है कि इस पानी में नहाने से त्वचा सम्बन्धी बीमारियां (Skin Diseases) ठीक होती हैं। 3. ब्रह्मयोनि पहाड़ी: पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति का द्वार गया शहर के दक्षिण में स्थित ब्रह्मयोनि पहाड़ी की चोटी पर एक प्राचीन मंदिर है। यहां 'ब्रह्मयोनि' नामक प्राकृतिक गुफा है, जिसे भगवान ब्रह्मा का प्रतीक माना जाता है। ऐसी आस्था है कि इस गुफा रूपी द्वार से गुजरने पर व्यक्ति को पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति मिल जाती है। 4. दुखरनी मंदिर: सांप्रदायिक सद्भाव की अनोखी मिसाल लगभग 450 वर्ष पूर्व टिकारी महाराजा मोदक सिंह द्वारा बनाया गया यह मंदिर बेहद खास है। इसकी एक दीवार गया की जामा मस्जिद से सटी हुई है, जो हिंदू-मुस्लिम एकता का बड़ा संदेश देती है। माना जाता है कि यहां आने वाले हर भक्त के दुख-दर्द दूर होते हैं। 5. डुंगेश्वरी हिल्स: जहां बुद्ध ने की थी 6 वर्षों की कठिन तपस्या बोधगया से करीब 12-15 किलोमीटर दूर फल्गु नदी के किनारे स्थित ये पहाड़ियां आंखों के सुकून के साथ आत्मीय शांति का भी अहसास कराती हैं। ज्ञान प्राप्ति से पहले सिद्धार्थ गौतम ने इन्हीं गुफाओं में कठिन तपस्या की थी। 6. बाबा बैजुधाम मंदिर: बाढ़ में मिला विशाल शिवलिंग मोरहार नदी के किनारे, पहाड़ियों और जंगलों से घिरा बैजुधाम मंदिर बेहद घूमने लायक जगह है। सितंबर 2000 में आई भीषण बाढ़ के दौरान यहां एक विशाल काला शिवलिंग मिला था। सावन और महाशिवरात्रि में यहां भारी भीड़ उमड़ती है। 7. भूरा साइट (दुर्वासा नगर): ऋषि दुर्वासा की तपोभूमि यह स्थल हिंदू और बौद्ध दोनों धर्मों का संगम है। मान्यता है कि यहां ऋषि दुर्वासा ने ध्यान लगाया था। यहां प्राचीन बुद्ध प्रतिमाएं, स्तूप के अवशेष, दुब्बा किला और प्राकृतिक जल स्रोत मौजूद हैं। पुराने सिक्के, मुहरें और मिट्टी के बर्तन जैसी पुरातात्विक खोजें इस स्थल के ऐतिहासिक महत्व को साबित करती हैं। 8. कोंचेश्वर महादेव मंदिर: 105 फीट ऊंचा ईंटों का अजूबा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित यह मंदिर उत्तर भारत के दुर्लभ मंदिरों में से एक है। गुप्त काल के बाद की वास्तुकला से बना यह मंदिर विशेष आकार की ईंटों से निर्मित है। मंदिर का शिखर लगभग 105 फीट ऊंचा है। मंदिर की बाहरी दीवारें ऊपर से नीचे तक सीधी नहीं हैं, बल्कि घुमावदार हैं यहां भगवान विष्णु, गणेश, सूर्य और बुद्ध की 85 से अधिक प्राचीन मूर्तियां संरक्षित हैं बोधगया के प्रमुख आकर्षण (Bodh Gaya Attractions) 9. 80 फुट की बुद्ध प्रतिमा: भारत की सबसे ऊंची बुद्ध प्रतिमाओं में से एक है। यहां भगवान बुद्ध ध्यान मुद्रा में कमल पर विराजमान हैं। इसे भारत और जापान की सांस्कृतिक दोस्ती का प्रतीक माना जाता है, क्योंकि इसका निर्माण जापानी बौद्ध संगठन दाइजोक्यो के सहयोग से किया गया था। 10. सुजाता गढ़: बकराउर गांव में स्थित यह गढ़ गौतम बुद्ध से जुड़ा है। मान्यता के अनुसार, ज्ञान प्राप्ति से पहले सिद्धार्थ गौतम ने कठोर तपस्या की थी, जिससे उनका शरीर अत्यंत दुर्बल हो गया था। उस समय बकराउर गांव की सुजाता नामक एक महिला ने उन्हें मिट्टी के कटोरे में खीर भेंट की थी। 11. मुचलिंडा सरोवर: महाबोधि मंदिर के पास स्थित यह सरोवर उस कथा से जुड़ा है, जब नागराज मुचलिंडा ने भीषण बारिश में अपने फन से भगवान बुद्ध की रक्षा की थी। परंपरा के अनुसार, भगवान बुद्ध ने निर्वाण प्राप्त करने के छठे सप्ताह में यहां ध्यान किया था। आस्था और शक्ति के अन्य पवित्र स्थल 12. मां तारा देवी मंदिर (केसपा): पाल कालीन मूर्तियों और पुरातात्विक अवशेषों से घिरा यह मंदिर बौद्ध और हिंदू संस्कृति का सुंदर संगम प्रस्तुत करता है। 13. गुरुपसी माता मंदिर (गुरपा): 'कुक्कुटपाद गिरि' पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर प्राकृतिक सुंदरता से भरा है। यहीं बुद्ध के शिष्य महाकश्यप की गुफा भी स्थित है। 14. बंगला स्थान मंदिर: गया शहर के केंद्र में स्थित यह शिव मंदिर अपनी शांत वास्तुकला और आध्यात्मिक वातावरण के लिए जाना जाता है। 15. रेवाई गांव (सूर्य व जौहर मंदिर): टिकारी का यह गांव अपने सदियों पुराने प्राचीन सूर्य मंदिर (छठ पूजा का प्रमुख केंद्र) और जौहर मंदिर (सती स्थान) की ऐतिहासिक लोककथाओं के लिए जाना जाता है।

जिउतिया की थाली में छिपा देसी पोषण, मड़ुआ-नोनी साग से जुड़ी खास परंपरा

 उदवंतनगर (भोजपुर) संतान की सुख-समृद्धि और दीर्घायु की कामना से रखा जाने वाला जिउतिया पर्व इसी सप्ताह शनिवार को है। यह व्रत केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण जीवन, कृषि और पारंपरिक पोषण ज्ञान से भी गहराई से जुड़ा है। तीन दिनों तक चलने वाले इस पर्व में नहाय-खाय से लेकर निर्जला उपवास और फिर पारणा तक खान-पान की अपनी विशेष परंपरा है। मड़ुआ से नोनी साग तक, थाली में देसी पोषण शाहाबाद क्षेत्र में जिउतिया की थाली में ऐसे कई खाद्य पदार्थ शामिल होते हैं, जो आज आधुनिक रसोई में कम दिखाई देते हैं। मड़ुआ यानी रागी की घी लगी रोटी, नोनी का साग, सतपुतिया की सब्जी, पोई साग की पकौड़ी, कढ़ी, कंद या अरबी की सब्जी, नेनुआ-चना का तोड़ा, खीरे का रायता और कोहड़े की सब्जी जैसे व्यंजन पीढ़ियों से इस पर्व की खाद्य परंपरा का हिस्सा रहे हैं। मोटे अनाज और स्थानीय सब्जियों में सेहत का राज मड़ुआ फाइबर और कैल्शियम से भरपूर मोटा अनाज है, जो ग्लूटन मुक्त होता है। आयुष चिकित्सक डा. विभेष कुमार बताते हैं कि यह डायबिटीज को नियंत्रित रखने, वजन कम करने व हड्डियों को मजबूत बनाने में सहायक होता है। अरबी पाचनतंत्र व रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है। नोनी ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर है और हृदय स्वास्थ्य के लिए उपयोगी मानी जाती है सतपुतिया में संतान वृद्धि की लोक आस्था जिउतिया में सतपुतिया का विशेष महत्व है। लोकमान्यता के अनुसार एक बेल पर एक साथ कई फल लगने के कारण इसे संतान वृद्धि और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। उदवंतनगर के पंडित रामावतार ओझा कहते हैं कि पुराने समय में चेचक, हैजा और प्लेग जैसी महामारियों का व्यापक प्रभाव था। ऐसे दौर में बच्चों के सुरक्षित जीवन और दीर्घायु की कामना से जुड़ी लोक परंपराओं को विशेष महत्व मिला। व्रत से आगे लोक ज्ञान को सहेजने का पर्व जिउतिया पर्व के बहाने उन अनाजों, साग-सब्जियों और पारंपरिक व्यंजनों का इस्तेमाल होता है, जो कभी ग्रामीण रसोई की पहचान हुआ करते थे। सनातन सेवा अभियान से जुड़े यशवंत सिंह कहते हैं कि आज जब मोटे अनाज और स्थानीय खाद्य पदार्थों को फिर से भोजन में शामिल करने पर जोर दिया जा रहा है, ऐसे में जिउतिया की परंपरा बताती है कि हमारी लोक संस्कृति में भोजन को मौसम, प्रकृति और उपलब्ध संसाधनों से जोड़कर देखने की समझ पहले से मौजूद रही है। आस्था के साथ विरासत भी आगे बढ़ाती है जिउतिया यही कारण है कि जिउतिया मां की ममता और संतान की मंगलकामना के साथ लोक संस्कृति और पारंपरिक खान-पान की समृद्ध विरासत को भी पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने वाला पर्व माना जाता है।  

हांगकांग-वियतनाम के रास्ते आए 10 प्रोफेशनल ड्रोन, दिल्ली एयरपोर्ट पर बड़ा खुलासा

नई दिल्ली  दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट पर तीन भारतीय पैसेंजर को 10 मिलिट्री-ग्रेड ड्रोन के साथ पकड़ा गया है। छानबीन के बाद इन्हें प्रोफेशनल ग्रेड ड्रोन बताया जा रहा है, जो थर्मल इमेजिंग और लेजर रेंज फाइंडर से लैस है। मंगलवार को अधिकारियों ने हांगकांग से वियतनाम के रास्ते भारत लाए गए इन अनमैन्ड एरियल व्हीकल की जानकारी दी है। दिल्ली कस्टम्स (एयरपोर्ट एंड जेनरल) ने एक्स पोस्ट के माध्यम से 10 मिलिट्री-ग्रेड ड्रोन की इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से इस बरामदगी की जानकारी दी है। जब्त किए गए ड्रोन की कीमत 1 करोड़ रुपये से अधिक जब्त किए गए 10 ड्रोन की कीमत 1,03,55,900 रुपये बताया जा रहा है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार ये ड्रोन 25 सितंबर को वियतनाम के रास्ते हांगकांग से टर्मिनल-3 पहुंचा था। कस्टम अधिकारियों ने खुफिया सूचना के आधार पर ग्रीन चैनल पार करने के दौरान संदिग्ध पैसेंजरों को रोक लिया। हालांकि, इस मामले की जानकारी मंगलवार को सार्वजनिक की गई। जब सामान की विस्तृत जांच की गई तो उसमें से बरामद हुए 10 मिलिट्री-ग्रेड ड्रोन के साथ उससे जुड़े उपकरण भी लाए गए हैं, जिनमें कंट्रोलर, गिम्बल के साथ कैमरे, केबल, प्रोपेलर और जॉयस्टिक्स शामिल हैं। क्यों कहा जा रहा है मिलिट्री-ग्रेड ड्रोन एक चार्टर्ड इंजीनियर के मूल्यांकन से इस बात की पुष्टि हुई है कि ये ड्रोन प्रोफेशनल-ग्रेड के हैं, जिसमें थर्मल इमेजिंग और लेजर रेंज फाइंडर की सुविधा उपलब्ध है। आधिकारिक बयान के अनुसार इन ड्रोनों को मिलिट्री या डिफेंस-ग्रेड का यूएवी माना गया है, जिनके लिए डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन के पास रजिस्ट्रेशन होना जरूरी है। कस्टम्स एक्ट, 1962 के तहत यात्रियों को हिरासत में ले लिया गया है और लाए गए सामानों की आगे की जांच जारी है। मिलिट्री-ग्रेड लोन लाने का मकसद साफ नहीं हालांकि, अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि विदेश से इस रह के ड्रोन तस्करी करके लाने का मकसद क्या है। यह भी साफ नहीं है कि इस ड्रोन को कहीं और सप्लाई किया जाना था या धरे गए पैसेंजर इसे अपने इस्तेमाल के लिए लेकर आ रहे थे।  

₹4,613 करोड़ का एक्सप्रेसवे बदलेगा सफर, आगरा से ग्वालियर सिर्फ 1 घंटे में

आगरा  आगरा से ग्वालियर का सफर मात्र 60 मिनट में पूरा होने वाला है। 88 किलोमीटर लंबा, छह लेन का एक्सप्रेसवे तीन राज्यों को जोड़ेगा। यानि उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश को कनेक्टिविटी मिलेगी। आगरा ग्वालियर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे ईधन और समय दोनों की बचत करेगा। अभी यह सफर तय करने में तीन घंटे से अधिक का समय लगता है। चंबल नदी पर 1600 मीटर लंबा हैंगिंग पुल बनेगा। आगरा के 14, धौलपुर राजस्थान और मुरैना मध्य प्रदेश के 30 गांवों से गुजरेगा। आगरा से ग्वालियर की दूरी 33 किमी कम हो जाएगी। सिर्फ एक घंटे के अंदर ग्वालियर पहुंचा जा सकेगा। आगरा से ग्वालियर की दूरी 121 किमी है। चार लेन की रोड से इस दूरी को तय करने में अभी दो से ढाई घंटे लगते हैं। आगरा में अवंतीबाई चौराहा से मधुनगर होते हुए ग्वालियर हाईवे मुरैना और धौलपुर के आबादी क्षेत्रों से होता हुआ निकलता है, जिसके कारण जाम के हालात बने रहते हैं। आगरा-ग्वालियर ग्रीनफील्ड-एक्सप्रेसवे तीन तहसीलों से गुजरेगा। 47 पुलिया, चार छोटे और पांच बड़े पुल बनेंगे आगरा-ग्वालियर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे जिले की तीन तहसीलों से होकर गुजरेगा। तहसील सदर, फतेहाबाद और खेरागढ़ के 15 गांवों की 117.83 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण होगा। ग्वालियर स्थित सुसेरा गांव में वर्तमान ग्वालियर हाईवे से जोड़ा जाएगा। एक्सप्रेस-वे में 47 पुलिया, चार छोटे और पांच बड़े पुल बनेंगे। आगरा में तहसील सदर के तीन, फतेहाबाद के पांच और खेरागढ़ के सात गांवों की कुल 117.83 हेक्टेयर भूमि इस प्रोजेक्ट में ली गई है। आगरा में एक्सप्रेस-वे की लंबाई 22 किमी प्रस्तावित है और इसे ऊंचाई पर बनाया जाएगा। दो से तीन मीटर की दीवार भी बनाई जाएगी। इससे जानवर सीधे एक्सप्रेस-वे पर नहीं पहुंच सकेंगे। 1.24 लाख पौधे भी लगाए जाएंगे पर्यावरण के नजरिए से 1.24 लाख पौधे भी लगाए जाएंगे और उनकी ठीक तरीके से देखभाल की जाएगी। एक्सप्रेसवे का निर्माण खत्म होने से पूर्व चार औद्योगिक जोन चिन्हित कर विकसित किया जाएगा। जोन को एक्सप्रेसवे की सर्विस रोड से जोड़ा जाएगा। इससे वाहनों का आवागमन आसानी से हो सकेगा। जोन बनने से फैक्ट्री लगेंगी और इससे रोजगार के अवसर विकसित होंगे। यह जोन उप्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान में बनेंगे। रास्ते में मुसाफिरों के रुकने और स्वल्पाहार आदि के लिए दो ट्रंपेट भी तैयार किए जाएंगे यानी कि मुख्य एक्सप्रेसवे से अलग रोड निकालकर साइड में शौचालय और रेस्टोरेंट-कैफे जैसी सुविधा रहेगी। छह बड़े जंक्शन रहेंगे इस ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे में छह बड़े जंक्शन रहेंगे। यानी जहां से वाहन चढ़ और उतर सकेंगे। इसमें मुरैना, धौलपुर सिटी, धौलपुर में स्टेट हाईवे क्रमांक दो, धौलपुर बाइपास रोड पर महाराजपुरा गांव, आगरा के जाजऊ और आगरा बाइपास की ओर बाद में रहेगा। इसके अलावा, 131 छोटे जंक्शन भी चिह्नित किए गए हैं, जो एक्सप्रेस वे के आसपास के गांवों से गुजरने वाली सड़कें हैं, लेकिन इन सड़कों का प्रवेश एक्सप्रेस वे पर नहीं रहेगा। ये भी जानिए     4613 करोड़ रुपये से बन रहा है ग्वालियर-आगरा एक्सप्रेसवे     88 किमी लंबा है एक्सप्रेसवे     121 किमी है वर्तमान फोरलेन हाईवे की लंबाई     33 किमी कम हो जाएगी आगरा से ग्वालियर की दूरी     60 मिनट आगरा से ग्वालियर पहुंचने में लगेंगे     88.400 किमी लंबे एक्सप्रेस वे पर 36 बस स्टॉप भी तैयार किए जाएंगे।     माल ढुलाई करने वाले ट्रकों के रुकने के लिए अलग से तीन लंबाई रोड का भी प्रस्ताव आगरा ही नहीं दिल्ली और देहरादून भी अभी ग्वालियर-आगरा फोरलेन हाईवे की लंबाई 121 किमी है। इस नए एक्सप्रेसवे के जरिये आगरा से यमुना एक्सप्रेस-वे पर जा सकेंगे। यमुना एक्सप्रेस वे पर जेवर के पास इंटरचेंज से ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस-वे पर पहुंच सकते हैं। इससे हरिद्वार-देहरादून तक की दूरी कम हो सकेगी। अभी सड़क मार्ग से जाने वाले लोगों को नोएडा, गाजियाबाद होकर ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस-वे पर पहुंचना पड़ता है। ग्वालियर से 564 किलोमीटर की दूर है देहरादून ग्वालियर से देहरादून तक की दूरी 564 किमी है, लेकिन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे तैयार होने से आगरा की दूरी जहां 33 किलोमीटर कम होगी, तो वहीं ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस-वे होते हुए दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का इस्तेमाल करने पर देहरादून तक की दूरी 39 किमी कम हो जाएगी। दिल्ली से देहरादून की दूरी 249 किमी है, लेकिन ट्रैफिक के चलते देहरादून तक पहुंचने में छह घंटे लगते हैं। इकोनॉमिक कॉरिडोर से घट गया समय इकोनॉमिक कॉरिडोर से यह दूरी जहां 210 किमी रह गई है। देहरादून तक पहुंचने में सिर्फ ढाई घंटे का समय लगता है। ग्वालियर से देहरादून तक पहुंचने में जहां 10:45 घंटे लगते हैं। ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे बनने से जहां दिल्ली तक तीन घंटे, तो वहीं दिल्ली से देहरादून तक सिर्फ ढाई से तीन घंटे में पहुंच सकेंगे।  

सुशांत गोल्फ सिटी में 846 बड़े भूखंडों पर संकट, बैनामे रद्द कराने की तैयारी

लखनऊ यूपी की राजधानी लखनऊ में सुशांत गोल्फ सिटी में कंसोर्टियम की 1000 करोड़ की जमीन खरीदने वाले 846 प्रभावशाली लोगों की रजिस्ट्री अब निरस्त होगी। कंसोर्टियम के नियमों का उल्लंघन कर करीब 19-19 हजार वर्ग फुट के बड़े भूखंड खरीदने वालों के आवंटन और बैनामे निरस्त कराने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। खास बात यह है कि इन खरीदारों को एलडीए की ओर से किसी तरह का मुआवजा भी नहीं दिया जाएगा। प्रमुख सचिव आवास पी गुरुप्रसाद ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है। अवैध बैनामों को ‘विधि शून्य’ घोषित कराने के लिए सक्षम न्यायालय में कानूनी चुनौती देने को भी कहा है। इन प्रभावशाली लोगों में आईएएस अधिकारियों, कारोबारियों, पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों, राजनेताओं और जनप्रतिनिधियों के शामिल हैं। 149.459 हेक्टेयर जमीन की बिक्री जांच के घेरे में: कंसोर्टियम की कुल 163.18 हेक्टेयर जमीन में से करीब 149.459 हेक्टेयर जमीन की बिक्री को लेकर सवाल उठे हैं। एलडीए को योजना का हैंडओवर मिलने के बाद इस जमीन की बिक्री और इससे जुड़े बैनामों की जांच कराई जाएगी। कंसोर्टियम से बेचे गए 846 भूखंडों का औसत आकार करीब 19 हजार आठ वर्ग फुट है। इतने बड़े भूखंडों का इस्तेमाल फार्महाउस या निवेश के लिए किए जाने की बात सामने आई है। एलडीए सक्षम न्यायालय में उचित प्रक्रिया के तहत बैनामों को चुनौती देकर निरस्त कराने की कार्रवाई करेगा। शासन ने ट्रांजेक्शन एडवाइजर रखने का दिया आदेश: एलडीए अब आईआरपी अथवा एनसीएलटी के माध्यम से परियोजना की देनदारियों और संपत्तियों को हासिल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगा। इसके लिए पेशेवर ट्रांजेक्शन एडवाइजर की मदद से संपत्तियों और देनदारियों का अध्ययन कराया जाएगा। इसके बाद परियोजना के टेकओवर की कार्ययोजना तैयार होगी। 12 गांवों के विवादित भूखंड हैं शामिल 846 भूखंड लखनऊ के 12 गांवों में हैं। यह सभी सुशांत गोल्फ सिटी टाउनशिप के भीतर हैं। इनमें बरौना में 243, पहाड़नगर टिकरिया में 156, सोनेई कजेहरा में 131, हसनपुर खेवली में 66, दाउदनगर में 64, निजामपुर मजिगांव में 59, माढर मऊ कला में 51, अहमामऊ में 24, मुजफ्फरनगर घुसवल में 22, यूसुफनगर बगियामऊ में 17, हरिहरपुर में आठ और देवामऊ में पांच भूखंड शामिल हैं। आईएएस, कारोबारी और नेताओं की खरीद फंसी इन 846 बड़े भूखंडों को खरीदने वालों में आईएएस अधिकारियों, कारोबारियों, पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों, राजनेताओं और जनप्रतिनिधियों के शामिल होने की बात सामने आई है। यही वजह है कि शासन ने कड़ा रुख अपनाया है। प्रमुख सचिव आवास ने एलडीए को आईआरपी व एनसीएलटी के समक्ष मजबूती से पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं। मामला कंसोर्टियम एग्रीमेंट के उल्लंघन और डबल सेलिंग से जुड़ा है। हाईटेक टाउनशिप नीति के तहत अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के भूमिधरों की जमीन को कंसोर्टियम व्यवस्था में शामिल किया गया था। व्यवस्था के अनुसार भूमिधर कंसोर्टियम के सदस्य रहते और परियोजना से मिलने वाले लाभ में हिस्सेदार होते। आरोप है कि अंसल बिल्डर की ओर से कंसोर्टियम सदस्यों को जमीन का भुगतान किए जाने के बाद भी कुछ सदस्यों ने उसी जमीन के हिस्से दूसरे लोगों को बेच दिए।

राजस्थान सरकार का नया बैंकिंग पैकेज, कर्मचारियों-पेंशनर्स को ₹3.50 करोड़ तक दुर्घटना बीमा

जयपुर राजस्थान सरकार ने राजकीय कार्मिकों, 70 वर्ष तक की आयु के पात्र पेंशनर्स तथा राज्य स्वायत्तशासी निकायों एवं सार्वजनिक उपक्रमों के कर्मचारियों के लिए कम्पोजिट सैलरी अकाउंट पैकेज (सीएसएपी) लागू किया है। इस पैकेज के माध्यम से लाभार्थियों को एकीकृत एवं सुगम बैंकिंग सेवाओं के साथ वित्तीय एवं बीमा सुरक्षा उपलब्ध होगी। इस पैकेज के माध्यम से लाभार्थियों को एकीकृत एवं सुगम बैंकिंग सेवाओं के साथ वित्तीय एवं बीमा सुरक्षा उपलब्ध होगी। सीएसएपी के लिए 12 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को सूचीबद्ध किया गया है। राजस्थान सरकार का महत्वपूर्ण कदम पात्र कार्मिक एवं पेंशनर्स अपनी सुविधा और पसंद के अनुरूप एम्पैनल्ड बैंकों में से किसी एक का चयन कर सकते हैं। इसके लिए वे अपने मौजूदा बैंक खाते को सीएसएपी खाते में परिवर्तित करा सकते हैं अथवा नया खाता खुलवाकर पैकेज का लाभ ले सकते हैं। राजस्थान सरकार की यह पहल कार्मिकों एवं पात्र पेंशनर्स के वित्तीय कल्याण, सामाजिक सुरक्षा तथा सुविधाजनक बैंकिंग सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। जीरो बैलेंस खाते से लेकर रियायती ऋण तक की सुविधाएं वित्त विभाग के संयुक्त शासन सचिव हरीश लड्ढा ने कहा कि सीएसएपी के तहत उन्नत बैंकिंग सुविधाओं से युक्त जीरो बैलेंस सैलरी अकाउंट उपलब्ध होगा। एनईएफटी, आरटीजीएस, आईएमपीएस एवं यूपीआई के माध्यम से धन हस्तांतरण की सुविधा निःशुल्क रहेगी। इसके अतिरिक्त आवास, शिक्षा, वाहन एवं व्यक्तिगत आवश्यकताओं के लिए ऋण पर रियायती ब्याज दर, ऋण प्रसंस्करण शुल्क में छूट तथा लॉकर किराए में रियायत जैसी सुविधाएँ भी उपलब्ध होंगी। पारिवारिक बैंकिंग सहित अन्य बैंकिंग सुविधाओं का लाभ भी पैकेज के अंतर्गत मिलेगा। दुर्घटना एवं जीवन बीमा के साथ स्वास्थ्य सुरक्षा वित्त विभाग के संयुक्त शासन सचिव हरीश लड्ढा ने कहा कि पैकेज में लाभार्थियों के लिए व्यापक बीमा सुरक्षा का प्रावधान किया गया है। इसके तहत 3.50 करोड़ रुपए तक का व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा, 4.00 करोड़ रुपए तक का एयर दुर्घटना बीमा तथा 20 लाख रुपए तक का टर्म लाइफ इंश्योरेंस उपलब्ध होगा। इसके साथ ही स्वयं एवं परिवार के लिए हेल्थ इंश्योरेंस तथा अतिरिक्त टॉप-अप सुविधा भी प्रदान की जाएगी। उन्होंने बताया कि सीएसएपी के अंतर्गत उन्नत सुविधाओं वाले डेबिट एवं क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराए जाएँगे। लाभार्थियों को एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस, रिवॉर्ड प्रोग्राम एवं कैशबैक जैसी सुविधाओं का लाभ भी मिलेगा। इसके साथ कार्ड से संबंधित बेहतर डिजिटल सेवाएँ और अन्य बैंकिंग सुविधाएं भी पैकेज का हिस्सा होंगी। सूचीबद्ध बैंकों के नाम जानिए हरीश लड्ढा ने बताया कि इस कार्य के लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, कैनरा बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक, यूको बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र एवं पंजाब एंड सिंध बैंक को सूचीबद्ध किया गया है।

झारखंड के जंगलों में सफारी का रोमांच शुरू, 2028 तक बनेगी टाइगर सफारी

रांची झारखंड के जंगलों में रोमांच और वन्यजीवों के करीब जाने का इंतजार अब खत्म होने वाला है। मौसम और तैयारियों ने इस बार सफारी का रास्ता समय पर साफ कर दिया है। वहीं, जंगल पर्यटन को लेकर वन विभाग की तैयारियां सिर्फ सफारी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आने वाले वर्षों के लिए भी कई योजनाओं पर काम तेज हो गया है। राज्य के जंगलों में होने वाली सफारी एक अक्टूबर से प्रारंभ हो जाएगी। पिछले साल पीटीआर और दलमा में सफारी अक्टूबर के तीसरे सप्ताह से शुरु की गई थी, लेकिन इस साल मौसम साफ रहने और कच्ची मिट्टी के ट्रैक की समय पर मरम्मत हो जाने की वजह से सही समय पर सफारी प्रारंभ हो रही है। इसके लिए आनलाइन बुकिंग भी हो रही है। मुख्य वन संरक्षक, वन्य प्राणी एसआर नटेश ने बताया कि जंगल सफारी में वन प्रबंधन ने खुले वाहन से सफारी का रोमांचक प्रयोग किया है। इस साल भी पर्यटकों को बैटरी आधारित नए वाहन से जंगलों का सौंदर्य देखने को मिलेगा। मानसून ब्रेक के दौरान वन विभाग वन्यजीवों के आंकड़े जुटाता है। अक्टूबर के दूसरे सप्ताह कर इसकी जानकारी केंद्रीय वन्यजीव प्रबंधन संस्थान को दी जाएगी। दिसंबर में केंद्र सरकार की तरफ से ये आंंकड़े जारी किए जाते हैं। नए सफारी पर तेजी से चल रहा काम राज्य सरकार ने लातेहार जिले में टाइगर सफारी बनाने की घोषणा की है। इसके लिए वन विभाग की उपलब्ध जमीन को चिह्नित कर लिया गया है। वर्ष 2028 के पहले टाइगर सफारी को प्रारंभ करने की योजना है। नवंबर में केंद्रीय वन्य जीव संस्थान की टीम प्रस्तावित स्थल का दौरा करने आएगी। इसके साथ ही गिरिडीह और दुमका में बनने वाले चिड़ियाघर के लिए भी डीपीआर तैयार की जा रही है।  

तेलीबाग चौराहे पर जाम से मिलेगी राहत, 858 मीटर लंबा फ्लाईओवर मंजूर

लखनऊ यूपी की राजधानी लखनऊ में तेलीबाग चौराहे पर रोजाना जाम झेलने वालों को अब राहत मिलने वाली है। यहां चार लेन वाले 858.06 मीटर लंबा फ्लाईओवर बनने जा रहा है। इस फ्लाईओवर के निर्माण को मंजूरी मिल गई है। इसे 145.99 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जाएगा। फ्लाईओवर बन जाने से पांच लाख से अधिक लोगों को जाम से निजात मिलेगी। लखनऊ-रायबरेली मार्ग पर स्थित तेलीबाग चौराहा शहर के व्यस्तम चौराहों में से एक है। यहां पर सुबह और शाम पीक ऑवर में लोगों को भीषण जाम का सामना करना पड़ता है। तीज-त्योहारों में तो चौराहे से वाहनों को निकालने में ट्रैफिक पुलिसकर्मियों के पसीने तक छूट जाते हैं। लोगों को आधा-आधा घंटा तक चौराहे पर ही जाम से जूझना पड़ता है। घंटों जाम में जूझने की वजह से बच्चों को स्कूल और बड़ों को आफिस पहुंचने में देरी होती है। इस समस्या को देखते हुए सरोजनीनगर के विधायक राजेश्वर सिंह ने यहां पर फ्लाईओवर बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा था। शासन के निर्देश पर सेतु निगम ने इसका खाका तैयार कर अनुमोदन के लिए भेजा। व्यय वित्त समिति की हुई बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लगा दी गई है। सेतु निगम के अधिकारियों ने बताया कि अब शासन से धनराशि स्वीकृति का इंतजार है। आगरा एवं कानपुर से आने वाले वाहन निर्बाध निकल सकेंगे : तेलीबाग चौराहे पर फ्लाईओवर बन जाने से आगरा और कानपुर एक्सप्रेस-वे की तरफ से आने वाले वाहन बिना बाधा के चौराहे से निकल सकेंगे। रायबरेली रोड, आलमबाग रोड पर स्थित और पीजीआई की कॉलोनियों सहित कैंटोनमेंट, वृंदावन योजना से रोजाना आने-जाने वालों को सुविधा हो जाएगी। दो साल में मिलने लगेगी फ्लाईओवर की सुविधा सेतु निगम के अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा वित्तीय वर्ष में निर्माण के लिए शासन से धनराशि आवंटित होगी। धनराशि मिलते ही निर्माण कार्य के लिए निविदाएं आमंत्रित करने सहित अन्य औपचारिकताएं पूरी करने के बाद निर्माण कार्य शुरू होगा। संभावना है कि डेढ़ से दो साल में लोगों को इस फ्लाईओवर की सुविधा मिलने लगेगी। पीजीआई के मरीजों को भी राहत मिलेगी कानपुर, आगरा के अलावा शहर में आलमबाग, कृष्णा नगर, कैंटोनमेंट आदि क्षेत्रों से पीजीआई जाने वाले मरीजों को राहत मिलेगी। कैंटोनमेंट से रायबरेली रोड और आलबाग व पीजीआई रोड से शहीद पथ तक सीधे निर्बाध रूप से वाहनों का आवागमन सुलभ हो सकेगा। प्रस्ताव में निर्माण के दौरान लखनऊ शहर के पालोहरुखेड़ा, इमलिया बाग समेत आसपास के क्षेत्रों से जुड़े यातायात को भी ध्यान में रखा गया है।