samacharsecretary.com

आरपीएफ की बड़ी कार्रवाई, 2.50 लाख के 6 मोबाइल बरामद

मुजफ्फरपुर रेल पुलिस की आरपीएफ टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मुजफ्फरपुर जंक्शन से यात्रियों के मोबाइल चोरी करने वाले एक बड़े गैंग का पर्दाफाश किया है। रेल पुलिस द्वारा चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन यात्री सुरक्षा’ अभियान के दौरान दो शातिरों को गिरफ्तार किया गया। पकड़े गए आरोपियों में एक अररिया और दूसरा पश्चिम बंगाल का रहने वाला है। आरपीएफ टीम ने इनके पास से करीब 2.50 लाख रुपये कीमत के 6 महंगे मोबाइल फोन बरामद किए हैं। इस दौरान मुख्य आरोपी रिंकू कुमार को गिरफ्तार किया गया, जिसके खिलाफ कई जिलों में आपराधिक मामले दर्ज हैं। प्लेटफॉर्म नंबर-1 पर हुई संयुक्त कार्रवाई दरअसल, यह कार्रवाई आरपीएफ और सीआईबी की संयुक्त टीम ने मुजफ्फरपुर जंक्शन के प्लेटफॉर्म संख्या-1 पर की। टीम ने एक शातिर अपराधी और उसके साथ एक किशोर को पकड़ा। तलाशी के दौरान उनके पास से कुल 6 मोबाइल फोन बरामद किए गए, जिनमें 5 महंगे टचस्क्रीन मोबाइल और 1 कीपैड फोन शामिल है। बरामद मोबाइलों की कुल कीमत लगभग 2.50 लाख रुपये आंकी गई है। भीड़ का फायदा उठाकर उड़ाते थे मोबाइल पूछताछ में दोनों आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे जंक्शन पर भीड़ का फायदा उठाकर यात्रियों के मोबाइल चोरी करते थे। पुलिस को आशंका है कि यह गैंग लंबे समय से रेलवे स्टेशन और ट्रेनों में सक्रिय था और यात्रियों को निशाना बना रहा था। कई जिलों में दर्ज हैं मुख्य आरोपी पर मामले पूरे मामले को लेकर आरपीएफ मुजफ्फरपुर के इंचार्ज मनीष कुमार ने बताया कि रेल पुलिस की टीम ने यात्रियों के मोबाइल चोरी करने वाले गैंग के दो सदस्यों को पकड़ा है। जांच और पूछताछ में सामने आया है कि गिरफ्तार अररिया निवासी रिंकू कुमार एक शातिर पेशेवर अपराधी है। उसके खिलाफ बेगूसराय, कटिहार और पटना जीआरपी में चोरी के अलावा एनडीपीएस एक्ट के तहत कई गंभीर मामले पहले से दर्ज हैं। गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी रेल पुलिस की टीम अब इस गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुट गई है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जाएगा और बाकी आरोपियों को भी गिरफ्तार कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

राजेश्वर महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए नई सुविधाएं

 आगरा आगरा के राजपुर चुंगी स्थित प्राचीन राजेश्वर महादेव मंदिर में प्रदेश सरकार 1.42 करोड़ रुपये की लागत से काम कराएगी। इसमें मुख्य मार्ग पर भव्य प्रवेश द्वार का निर्माण होने के साथ मंदिर परिसर में फ्लोरिंग और स्टोन क्लैडिंग का काम किया जाएगा। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बेंच, पानी की सुविधाएं होंगी तथा मंदिर परिसर में ड्रेनेज की व्यवस्था की जाएगी। राजेश्वर महादेव मंदिर शहर के चार प्रमुख शिवालयों में से एक माना जाता है। यहां सावन में और महाशिवरात्रि पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु उमड़ते हैं। सौंदर्यीकरण के तहत मंदिर प्रांगण में श्रद्धालुओं के बैठने के लिए बेंच, दिशा-निर्देश के लिए साइनेज, शुद्ध पेयजल की व्यवस्था, विश्राम स्थल और बेहतर प्रकाश व्यवस्था की जा रही है, ताकि दर्शनार्थियों को कोई परेशानी न हो। प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि राजेश्वर महादेव मंदिर का पर्यटन विकास क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को मजबूती देगा। जो काम होंगे, उससे श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। प्रदेश सरकार का उद्देश्य धार्मिक स्थलों को केवल आस्था तक सीमित न रखकर उन्हें स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार से भी जोड़ना है। इससे स्थानीय व्यापार, हस्तशिल्प, छोटे व्यवसाय और युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। दिन में तीन बार रंग बदलता है शिवलिंग राजेश्वर मंदिर के बारे में मान्यता है कि शिवलिंग दिन में तीन बार अपना रंग बदलता है। सुबह मंगला आरती के दौरान सफेद रंग, दोपहर की आरती के दौरान हल्का नीला और शाम की आरती के दौरान गुलाबी नजर आता है। 900 साल पुराने मंदिर की स्थापना के बारे मेंं किंवदंती प्रचलित है, जिसके अनुसार राजाखेड़ा निवासी सेठ नर्मदा नदी के पास से बैलगाड़ी से शिवलिंग स्थापित करने के लिए ले जा रहे थे। मंदिर के नजदीक ही एक कुआं था, आराम करने के दौरान सेठ को शिवजी ने स्वप्न दिया कि शिवलिंग को यहीं स्थापित कर दिया जाए। सेठ ने इसकी अनदेखी की और शिवलिंग को ले जाने की कोशिश करने लगे, लेकिन शिवलिंग वहीं स्थिर हो गया। तभी से यहां शिवलिंग स्थापित है।  

चूल्हे-चौके से व्यवसाय तक: गायत्री समूह की 12 महिलाओं ने टेंट हाउस से बनाई सफलता की नई कहानी

सफलता की कहानी  चूल्हे-चौके से बिजनेस तक गायत्री समूह की 12 महिलाओं ने टेंट हाउस के जरिए लिखी सफलता की नई दास्तां आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण की मिसाल बना गायत्री महिला स्व-सहायता समूह रायपुर आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण की जीवंत मिसाल स्वयं सहायता समूहों  और सरकारी योजनाओं से जुड़कर अपने भाग्य को बदलने वाली ग्रामीण महिलाएं हैं। महिलाओं की संघर्ष यह दर्शाती है कि आत्मनिर्भरता से न केवल आर्थिक स्थिति सुधरती है, बल्कि उन्हें समाज में सम्मान और निर्णय लेने का अधिकार भी मिलता है। जहाँ महिलाएं घर से निकलकर उद्यमी बन रही हैं, आत्मनिर्भर भारत का आदर्श उदाहरण प्रस्तुत करती हैं।                 छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के सीपत क्षेत्र स्थित ग्राम कर्रा (हि.) की महिलाओं ने साबित कर दिया है कि यदि इरादे फौलादी हों, तो सफलता कदम चूमती है। बिहान योजना से जुड़कर गायत्री महिला स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने सामूहिक प्रयास और दृढ़ आत्मविश्वास के बल पर न केवल आर्थिक स्वावलंबन प्राप्त किया है, बल्कि समाज के सामने सशक्तिकरण का एक जीवंत उदाहरण भी पेश किया है।  ये मिसालें साबित करती हैं कि कौशल विकास, आत्मविश्वास, और वित्तीय स्वतंत्रता जैसे मुद्रा ऋण से महिलाएं न केवल अपने परिवार को बल्कि समाज को भी मजबूत कर रही हैं।  कुशल नेतृत्व और सरकारी योजनाओं का संगम              श्रीमती गौरी यादव (अध्यक्ष) और श्रीमती पांचो श्रीवास (सचिव) के कुशल नेतृत्व में संचालित इस 12 सदस्यीय समूह को शासन की योजनाओं से संबल मिला । बिहान योजना से  6 लाख रुपये का ऋण और एकीकृत महिला एवं बाल विकास विभाग से 4 लाख रुपये का ऋण। कुल निवेश 10 लाख रुपये की राशि से महिलाओं ने “श्री राम टेंट हाउस” के नाम से अपने उद्यम की शुरुआत की। विस्तार और सेवाएँ- एक सफल बिजनेस मॉडल              वर्ष 2025 में रामनवमी के अवसर पर शुरू हुआ यह व्यवसाय आज एक विशाल रूप ले चुका है। वर्तमान में समूह के पास निम्नलिखित संसाधन उपलब्ध हैं। 30×30 फीट का मंच, 60×120 फीट का विशाल पंडाल, 60 टेबल, 500 कुर्सियां और 10 जम्बो कूलर है। वैवाहिक कार्यक्रम, सामाजिक आयोजन, शोक सभा और शासकीय शिविरों (जैसे- श्सुशासन तिहारश् और जनसमस्या निवारण शिविर) में टेंट व बर्तन आपूर्ति। *लाभ के साथ सेवा भी और बर्तन बैंक का संचालन *            समूह केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि अपनी सामाजिक जिम्मेदारी भी बखूबी निभा रहा है। गरीब और जरूरतमंद परिवारों को सामाजिक कार्यों हेतु बर्तन निःशुल्क उपलब्ध कराए जाते हैं। ग्रामीणों के लिए बर्तन बैंक का संचालन किया जा रहा है, जहाँ बेहद कम दरों पर सामग्री उपलब्ध है। बिहान योजना से जुड़कर गायत्री महिला स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने सामूहिक प्रयास और दृढ़ आत्मविश्वास के माध्यम से टेंट हाउस की सेवा गाँव.गाँव पहुँचाकर आर्थिक आत्मनिर्भरता का नया अध्याय लिखा है। 10 लाख रुपये तक पहुंची वार्षिक आय           बेहतर प्रबंधन और कड़ी मेहनत का परिणाम यह है कि समूह की वार्षिक आय अब 10 लाख रुपये के करीब पहुंच गई है। स्थानीय प्रशासन के कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी ने इनकी आय और प्रतिष्ठा दोनों में वृद्धि की है। समूह की महिलाओं ने आर्थिक सशक्तिकरण की इस राह को सुगम बनाने के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और प्रदेश सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया है। आज गायत्री महिला स्व-सहायता समूह की ये महिलाएं न केवल आत्मनिर्भर हैं, बल्कि जिले में अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनकर उभरी हैं।

IED धमाकों के बाद पंजाब में हाई अलर्ट, हलवारा एयरफोर्स स्टेशन पर सुरक्षा बढ़ाई गई

जालंधर/अमृतसर जालंधर और अमृतसर में हुए आईईडी धमाकों के बाद भारतीय वायु सेना केंद्र हलवारा में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। सेना केंद्र के मुख्य द्वार के बाहर जिला लुधियाना ग्रामीण पुलिस के दर्जनों सुरक्षाकर्मी तैनात किए गये हैं। गुरुवार रात 10 बजे के करीब एसएसपी डॉ अंकुर गुप्ता खुद नाकेबंदी की कमान संभाले नजर आये और सभी वाहनों की गहन तलाशी ली जा रही है।  लुधियाना बठिंडा राजमार्ग पर भारतीय वायु सेना केंद्र हलवारा कस्बा सुधार बाजार और आसपास के इलाके में पुलिस की गश्त हो रही है और हूटर बजाते सुरक्षा वाहन लगातार पेट्रोलिंग कर रहे हैं। जिला लुधियाना ग्रामीण पुलिस के अधीन सभी थाना चौकियों से आए कई अधिकारी और मुलाजिम वायु सेना केंद्र के आसपास सभी जगहों की कड़ी निगरानी कर रहे हैं और हर एक संदिग्ध से इलाके में होने के बारे में पूछताछ की जा रही है। गौरतलब है कि भारत के अहम लड़ाकू विमानों के बेस हलवारा वायु सेना केंद्र में पहले से थ्री लेयर सुरक्षा प्रणाली तैनात है जिसके चलते अंदर तो परिंदा भी पर नहीं मार सकता लेकिन किसी संभावित थ्रेट के मद्देनजर स्टेशन परिसर के बाहर राज मार्ग और सभी लिंक सड़क पर सिविल पुलिस की गश्त तेज कर दी गई है। एसएसपी डॉ. अंकुर गुप्ता के अलावा ग्रामीण पुलिस के अन्य बड़े अधिकारी भी पॉइंट टू पॉइंट नाकेबंदियों की समीक्षा कर रहे हैं। सिविल कपड़ों में खुफिया विभागों के अधिकारी और मुलाजिम भी नजर बनाए हुए हैं। वायु सेना केंद्र के चारों तरफ बनी मजारों और अन्य स्थानों पर बैठने वाले लोगों समेत पंचायतों से भी कहा गया है कि किसी भी संदिग्ध के बारे में पुलिस को तुरंत जानकारी दी जाए। गौरतलब है कि एक दशक पहले भारतीय वायु सेना केंद्र हलवारा स्थित सेना के सीवी गोले इंडोर ऑडिटोरियम के बाहर एक मारुती कार में आईईडी बम लगाया गया था जिसे समय रहते डीफ्यूज कर दिया गया था।  

सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश मंत्री विजय शाह को फटकारा, कहा- ‘बस बहुत हो गया, आदेश मानें’

भोपाल   मध्यप्रदेश सरकार के मंत्री विजय शाह की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। भारतीय सेना की महिला अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाई है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को इस मामले में अभियोजन स्वीकृति देने में हो रही देरी को लेकर मध्यप्रदेश सरकार को फटकार लगाई है और कड़े शब्दों में कहा है कि यह सिर्फ दुर्भाग्यपूर्ण नहीं, बल्कि बेहद दुर्भाग्यपूर्ण था। बस बहुत हुआ, अब हमारे आदेश का पालन कीजिए। 'बस बहुत हो गया, अब हमारे आदेश का पालन करें' शुक्रवार को मामले की सुनवाई के दौरान CJI सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि विशेष जांच दल (SIT) द्वारा अभियोजन की मंजूरी के लिए भेजा गया प्रस्ताव दो सप्ताह पहले ही निपटाया जाना चाहिए था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर SIT ने मामले की जांच की थी और मंत्री के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए सरकार से अनुमति मांगी थी। इसके बाद CJI सूर्य कांत ने कहा, 'बस बहुत हो गया, अब हमारे आदेश का पालन करें, सबसे पहले माफी मांगनी चाहिए थी। यह तब हुआ जब हमने स्वतः संज्ञान लिया। इस मामले को चार सप्ताह बाद सूचीबद्ध करें।' कोर्ट की तरफ से यह टिप्पणी तब की गई, जब सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने कहा कि मंत्री पर मुकदमा चलाने की मंजूरी पर फैसला अभी लंबित है। मंत्री को इस तरह के कमेंट करने की आदत है- सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मंत्री विजय शाह का बचाव करते हुए कहा कि शायद उनके बयान को गलत समझा गया है वो महिला अधिकारी की प्रशंसा करना चाहते थे। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने इसे सिरे से खारिज करते हुए कहा कि ये दुर्भाग्यपूर्ण नहीं बल्कि अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। एक राजनेता के तौर पर उन्हें ये अच्छे से पता है कि महिला अधिकारी की तारीफ कैसे की जाती है। इसके साथ ही कोर्ट ने एसआईटी की स्टेटस रिपोर्ट का हवाला देते हुए ये भी कहा कि मंत्री को इस तरह के कमेंट्स करने की आदत है। मंत्री विजय शाह ने ये कहा था.. पिछले साल भारत के द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ की गई सैन्य कार्रवाई ऑपरेशन सिंदूर के बाद कर्नल सोफिया कुरैशी ने इस ऑपरेशन की मीडिया ब्रीफिंग की थी। इस के बाद मध्यप्रदेश के इंदौर जिले के महू में एक कार्यक्रम के दौरान मंत्री विजय शाह ने कहा था- 'जिन्होंने हमारी बेटियों को विधवा किया, हमने उन्हें सबक सिखाने के लिए उनकी ही एक बहन को भेजा।' मंत्री विजय शाह के इस बयान को कर्नल कुरैशी के धर्म से जोड़कर देखा गया और हर तरफ इसकी निंदा हुई थी। यहां ये भी बता दें कि मंत्री विजय शाह इससे पहले भी विवादित और आपत्तिजनक बयान दे चुके हैं। विजय शाह के विवादित बयान     साल 2013 के विधानसभा चुनावों से पहले विजय शाह ने तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान की पत्नी साधना सिंह को लेकर अभद्र टिप्पणी की थी और ये मामला गर्माने और विवाद बढ़ने के बाद उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा भी देना पड़ा था।     सितंबर 2022 में राहुल गांधी के अविवाहित होने के पर भी उन्होंने विवादित टिप्पणी की थी। तब उन्होंने कहा था कि 50-55 साल की उम्र में भी शादी न हो तो लोग पूछने लगते हैं लड़के में कुछ कमी है क्या?     साल 2023 में बालाघाट में फिल्म शूटिंग के दौरान मंत्री विजय शाह ने अभिनेत्री विद्या बालन से रात में मिलने की इच्छा जताई थी जिस पर विद्या बालन ने आपत्ति की तो विजय शाह ने वन विभाग के जरिए फिल्म की शूटिंग रुकवा दी थी और तब ये मामला भी काफी सुर्खियों में रहा था।

ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर झांसा, युवक से करीब 2 लाख की साइबर ठगी

 रांची  शहर में साइबर ठगी के दो अलग-अलग मामले सामने आए हैं। एक मामले में लिंक ओपन करते ही युवक के दो बैंक खातों से 1.93 लाख रुपये की निकासी कर ली गई, जबकि दूसरे मामले में ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर करीब दो लाख रुपये की ठगी कर ली गई। दोनों मामलों में साइबर अपराध थाना में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पहला मामला ओरमांझी निवासी बबन वर्मा से जुड़ा है। वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के रहने वाले हैं। उन्होंने पुलिस को बताया कि उनके मोबाइल नंबर पर आरटीओ के नाम से एक लिंक आया था। गलती से लिंक ओपन करते ही उनके एक्सिस बैंक और पंजाब नेशनल बैंक खाते से कुल 1 लाख 93 हजार रुपये की अवैध निकासी कर ली गई। वहीं दूसरा मामला गुमला निवासी चंदन कुमार से संबंधित है, जो वर्तमान में सीआरपीएफ झारखंड सेक्टर कार्यालय, धुर्वा में कार्यरत हैं। चंदन कुमार ने पुलिस को बताया कि उन्हें टेलीग्राम ग्रुप के माध्यम से ऑनलाइन ट्रेडिंग का ऑफर दिया गया था। इसके बाद उन्हें एक व्हाट्सएप नंबर से जोड़कर मोटे मुनाफे का लालच दिया गया। पीड़ित के अनुसार उन्होंने पहले 50 हजार रुपये भेजे। बाद में अधिक मुनाफा दिखाकर अलग-अलग चरणों में 70 हजार और फिर 80 हजार रुपये जमा कराए गए। आरोपितों ने ट्रेडिंग फीस और प्रोसेसिंग चार्ज के नाम पर रुपये लिए, लेकिन रकम वापस नहीं की। इसके बाद उन्हें एहसास हुआ कि वह साइबर ठगी का शिकार हो गए हैं।

बिहार पर्यटन को वैश्विक पहचान दिलाने का मंत्री का संकल्प

पटना बिहार सरकार के नवनियुक्त पर्यटन मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता ने शुक्रवार को मुख्य सचिवालय स्थित कार्यालय कक्ष में पर्यटन विभाग का कार्यभार ग्रहण किया। पदभार संभालने के बाद उन्होंने बिहार को देश और दुनिया के प्रमुख पर्यटन राज्यों में शामिल करने की प्रतिबद्धता जताई। इस दौरान विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया। कार्यभार ग्रहण समारोह में पर्यटन विभाग के सचिव (अतिरिक्त प्रभार) अभय कुमार सिंह, बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम के प्रबंध निदेशक नंद किशोर, पर्यटन निदेशक उदयन मिश्रा, संयुक्त सचिव इंदु कुमारी, संयुक्त निदेशक राजेश रौशन समेत विभाग के कई अधिकारी उपस्थित रहे। बिहार की सांस्कृतिक विरासत को विश्व पटल पर लाने की बात पदभार ग्रहण करने के बाद पत्रकारों से बातचीत में मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता ने कहा कि यह उनके जीवन का बेहद महत्वपूर्ण और भावुक क्षण है। उन्होंने कहा कि पर्यटन मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभालना केवल एक पद नहीं, बल्कि बिहार की सेवा का बड़ा अवसर है। उन्होंने कहा कि बिहार भारत की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत का केंद्र रहा है। भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति, गुरु गोविंद सिंह का जन्म, भगवान महावीर की तपोभूमि और माता जानकी की पावन स्मृतियां बिहार को विशेष पहचान देती हैं। बिहार की मिट्टी में इतिहास, संस्कृति और अध्यात्म की ऐसी शक्ति है, जो दुनिया भर के लोगों को आकर्षित करती है। पर्यटन स्थलों के विकास और सौंदर्यीकरण पर जोर पर्यटन मंत्री ने कहा कि आने वाले समय में राज्य के धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पर्यटन स्थलों का व्यापक विकास कराया जाएगा। प्रमुख पर्यटन स्थलों के सौंदर्यीकरण के साथ वहां आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। सड़क, प्रकाश व्यवस्था, स्वच्छता, सुरक्षा और पर्यटकों की सुविधाओं को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होगा प्रचार-प्रसार उन्होंने कहा कि बिहार के पर्यटन स्थलों का राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा ताकि अधिक से अधिक देशी और विदेशी पर्यटक बिहार आएं। सरकार का उद्देश्य है कि बिहार की पहचान केवल इतिहास तक सीमित न रहे, बल्कि आधुनिक पर्यटन के क्षेत्र में भी राज्य नई मिसाल कायम करे। पर्यटन से रोजगार और व्यापार को मिलेगा बढ़ावा केदार प्रसाद गुप्ता ने कहा कि पर्यटन केवल घूमने-फिरने का माध्यम नहीं, बल्कि रोजगार, व्यापार और आर्थिक विकास का मजबूत आधार भी है। पर्यटन को बढ़ावा देकर युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा किए जाएंगे। साथ ही स्थानीय कलाकारों, हस्तशिल्प से जुड़े लोगों, संस्कृतिकर्मियों और छोटे व्यापारियों को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा। अधिकारियों से टीम भावना के साथ काम करने की अपील मंत्री ने विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों से टीम भावना के साथ कार्य करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सभी को पूरी प्रतिबद्धता के साथ बिहार के पर्यटन क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए काम करना होगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पर्यटन विभाग जनता की आकांक्षाओं के अनुरूप कार्य करेगा और हर निर्णय में जनता का हित सर्वोपरि रखा जाएगा।

तीन साल बाद रांची में जल शुल्क विवादों पर सुनवाई की प्रक्रिया फिर शुरू

रांची  तीन साल के लंबे इंतजार के बाद रांची नगर निगम अब सप्लाई पानी बिल से जुड़ी शिकायतों की सुनवाई करने जा रहा है। नगर निगम की जलापूर्ति शाखा ने वार्ड संख्या 1 से 53 तक के उन उपभोक्ताओं के लिए आम सूचना जारी की है, जिनके पास निगम से स्वीकृत जल संयोजन है। निगम ने कहा है कि जल शुल्क से संबंधित किसी भी प्रकार की समस्या होने पर उपभोक्ता अगले सात दिनों के भीतर आवेदन जमा कर सकते हैं। जारी सूचना के अनुसार, उपभोक्ताओं को जलापूर्ति शाखा में जल शुल्क विपत्र, जल संयोजन स्वीकृति पत्र एवं अन्य संबंधित दस्तावेजों के साथ आवेदन देना होगा। निगम प्रशासन का कहना है कि प्राप्त आवेदनों पर यथाशीघ्र कार्रवाई करते हुए समस्याओं का समाधान किया जाएगा। वेबर्स कमेटी नहीं बनने से तीन साल तक अटकी रही सुनवाई दरअसल, रांची नगर निगम चुनाव नहीं होने के कारण पिछले तीन वर्षों से वेबर्स कमेटी का गठन नहीं हो पा रहा था। इस कमेटी में नगर आयुक्त, मेयर, पार्षद और जलापूर्ति शाखा के इंजीनियर सदस्य होते हैं। मेयर और पार्षद नहीं रहने से कमेटी के गठन के लिए आवश्यक कोरम पूरा नहीं हो पा रहा था। इसी वजह से पानी बिल, नए जल कनेक्शन और अन्य शिकायतों से जुड़े सैकड़ों मामलों की सुनवाई लंबित पड़ी रही। लोगों द्वारा आवेदन देने के बावजूद मामलों का निपटारा नहीं हो सका। बिना कनेक्शन के भेजा जा रहा था पानी बिल नगर निगम में सबसे अधिक शिकायतें उन उपभोक्ताओं की हैं, जिनका कहना है कि उनके घरों में पानी का कनेक्शन ही नहीं है, इसके बावजूद हर महीने पानी का बिल भेजा जा रहा है। वहीं कई उपभोक्ताओं ने शिकायत की है कि उनके यहां वर्षों पुराना कनेक्शन तो है, लेकिन आज तक सप्लाई पानी नहीं पहुंचा। इसके बावजूद नियमित रूप से जलशुल्क वसूला जा रहा है। अब घर-घर जाकर होगी जांच जलापूर्ति शाखा में आने वाली शिकायतों की जांच के लिए नगर निगम की इंजीनियरों की टीम संबंधित उपभोक्ताओं के घर-घर जाएगी। जांच के दौरान संबंधित वार्ड के पार्षद भी मौजूद रहेंगे। शिकायतों की जांच रिपोर्ट तैयार कर वेबर्स कमेटी के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। इसके बाद कमेटी मामले की सुनवाई कर अंतिम निर्णय लेगी।  

पेंशनरों के लिए खुशखबरी: छत्तीसगढ़ HC ने बकाया एरियर देने का आदेश जारी किया

 रायपुर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य के पेंशनरों के हित में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए सरकार को उनके बकाया एरियर का भुगतान 120 दिनों के भीतर करने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश मध्यप्रदेश पुनर्गठन अधिनियम-2000 की धारा 49 के तहत दिया गया है। यह मामला छत्तीसगढ़ पेंशनर्स समाज के प्रांताध्यक्ष चेतन भारती द्वारा 12 अगस्त 2021 को दायर याचिका से जुड़ा है। उन्होंने लंबे समय तक मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ शासन के मुख्यमंत्रियों और मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर पेंशनरों की समस्याओं से अवगत कराया था। शासन स्तर पर समाधान नहीं मिलने के बाद उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। अदालत ने स्पष्ट की धारा 49 की व्याख्या न्यायालय ने मध्यप्रदेश पुनर्गठन अधिनियम-2000 की धारा 49(6) की व्याख्या करते हुए कहा कि वित्तीय भुगतान को लेकर राज्यों के बीच सहमति की अनिवार्यता पेंशनरों के अधिकारों में बाधा नहीं बन सकती। अदालत ने डॉ. सुरेंद्र नारायण गुप्ता के मामले का हवाला देते हुए छठे और सातवें वेतनमान (7th Pay commission) के एरियर भुगतान का मार्ग प्रशस्त किया। इन कर्मचारियों को मिलेगा लाभ न्यायालय के फैसले के अनुसार, एक जनवरी 2006 से पहले सेवानिवृत्त कर्मचारियों को 32 माह का एरियर दिया जाएगा। यह एरियर 01 जनवरी 2006 से 31 अगस्त 2008 तक की अवधि का होगा। वहीं, एक जनवरी 2016 से पहले सेवानिवृत्त कर्मचारियों को 27 माह का एरियर मिलेगा, जो 01 जनवरी 2016 से 31 मार्च 2018 तक की अवधि के लिए निर्धारित किया गया है। चार माह में भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश हाई कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा है कि मध्यप्रदेश पुनर्गठन अधिनियम की धारा 49(8) के तहत यह पूरा भुगतान चार माह के भीतर सुनिश्चित किया जाए। इस फैसले के बाद राज्य के हजारों पेंशनरों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

डबरीपानी में कार्रवाई शुरू: बुलडोजर से महामाया पहाड़ के अतिक्रमण हटाए जाएंगे, पुलिस बल मौजूद

 अंबिकापुर  अंबिकापुर के महामाया मंदिर (Mahamaya Temple) और महामाया पहाड़ से लगे डबरीपानी के संरक्षित वन क्षेत्र में वन विभाग ने अवैध कब्जे हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी है। शुक्रवार सुबह चार एक्सीवेटर और भारी पुलिस बल की मौजूदगी में मकानों को तोड़ा जाने लगा। पहले दिन 20 से अधिक मकानों को हटाने की तैयारी की गई है।मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारी और कर्मचारी तैनात किए गए हैं ताकि किसी प्रकार के विरोध या तनाव की स्थिति को रोका जा सके। कई वर्षों से जारी था कब्जे का खेल वन विभाग के अनुसार, अंबिकापुर शहर से लगे डबरीपानी, श्रीगढ़, खैरबार, नवागढ़ और बधियाचुआ क्षेत्र में लंबे समय से वनभूमि पर अवैध कब्जे किए जा रहे थे। ये क्षेत्र धीरे-धीरे नए आवासीय इलाकों के रूप में विकसित हो गए, जहां सड़क, पानी और बिजली जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध करा दी गई थीं। पिछले वर्ष वन विभाग ने श्रीगढ़ और चोरकाकछार क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की थी, लेकिन बाद में अभियान धीमा पड़ गया। विभाग ने कब्जाधारियों को नोटिस जारी कर दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर भी दिया था, लेकिन किसी ने वैध दस्तावेज पेश नहीं किए। रात को चस्पा किया नोटिस, सुबह पहुंचा बुलडोजर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई डबरीपानी से शुरू की गई है। यहां के 54 लोगों को अंतिम बेदखली का नोटिस जारी किया गया था। कुछ अतिक्रमणकारियों ने अंतिम बेदखली का नोटिस जारी होने के बाद हाईकोर्ट से स्टे ले लिया है। गुरुवार रात वन विभाग के कर्मचारी डबरीपानी पहुंचे और घरों को खाली करने का नोटिस चस्पा किया। शुक्रवार सुबह फारेस्ट एसडीओ श्वेता कम्बोज के नेतृत्व में वन विभाग और पुलिस जवानों का अमला बुलडोजर लेकर डबरीपानी पहुंचा और कार्रवाई शुरू की गई। पार्षद बोले- वन विभाग ने कार्रवाई में की देरी पार्षद आलोक दुबे ने बताया कि मार्च 2026 में ही रिजर्व फारेस्ट से 157 लोगों को अवैध कब्जा हटाने के लिए अंतिम बेदखली नोटिस की अवधि समाप्त हो गई थी। पुलिस बल दिए जाने के बाद भी डीएफओ अभिषेक जोगावत ने कार्रवाई नहीं की, तो इसकी शिकायत मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से की गई थी। आलोक दुबे ने कहा कि यहां दूसरे राज्यों से आए समुदाय विशेष के लोगों ने अवैध कब्जा किया हुआ है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर आज से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू हो गई है। सभी चिन्हित अतिक्रमण हटाए जाएंगे- एसडीओ एसडीओ फारेस्ट श्वेता कम्बोज ने कहा कि 157 लोगों को अंतिम बेदखली नोटिस जारी हुआ है। इनमें महामाया पहाड़, नवागढ़, डबरीपानी के अतिक्रमणकारी शामिल हैं। डबरीपानी में 54 अतिक्रमणकारियों में जिन लोगों को हाईकोर्ट से स्टे मिला है, उनका अतिक्रमण नहीं हटाया जा रहा है। शेष लोगों को चिन्हित कर उनका कब्जा तोड़ने की कार्रवाई की जा रही है। श्वेता कम्बोज ने कहा कि सभी चिन्हित अतिक्रमणकारियों को अवैध कब्जा हटाया जाएगा। आज से यह कार्रवाई शुरू हो गई है। 27 मार्च को जारी हुआ था अंतिम नोटिस वन विभाग ने 27 मार्च 2026 को अतिक्रमणकारियों को अंतिम बेदखली नोटिस जारी कर 24 घंटे के भीतर वनभूमि खाली करने को कहा था। इसके बावजूद कब्जाधारियों ने जमीन खाली नहीं की। कार्रवाई में देरी होने के कारण कई कब्जाधारी हाईकोर्ट पहुंच गए और उन्हें स्थगन आदेश मिल गया। भाजपा पार्षद आलोक दूबे ने इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय (CM Vishnu Deo Sai) से की थी। इसके बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने वनभूमि से नियमानुसार कब्जा हटाने के निर्देश दिए। रातभर रही हलचल, लोग हटाने लगे सामान गुरुवार देर शाम वन विभाग की टीम डबरीपानी पहुंची और शुक्रवार से कार्रवाई शुरू करने की मुनादी कराई गई। क्षेत्र में नोटिस भी चस्पा किए गए। इसके बाद से इलाके में हलचल बढ़ गई। कई अतिक्रमणकारियों ने रात में ही अपना सामान हटाना शुरू कर दिया था। शुक्रवार सुबह वन और राजस्व विभाग की टीम पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची। कार्रवाई शुरू करने से पहले लोगों को एक बार फिर सामान हटाने का समय दिया गया, जिसके बाद तोड़फोड़ शुरू हुई। 54 अतिक्रमणकारी डबरीपानी में चिन्हित भारतीय वन सेवा की प्रशिक्षु अधिकारी और अंबिकापुर एसडीओ फॉरेस्ट श्वेता काम्बोज ने बताया कि केवल डबरीपानी क्षेत्र में 54 अतिक्रमणकारियों को चिन्हित किया गया है। इनमें से कुछ लोगों को न्यायालय से स्थगन आदेश मिला है, जबकि कुछ के आवेदन FRA के तहत लंबित हैं। ऐसे मामलों को छोड़कर बाकी कब्जाधारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि पूरी कार्रवाई न्यायालय के आदेश और मानवीय दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए की जा रही है। 157 अतिक्रमणकारी चिन्हित वन विभाग के अनुसार, महामाया पहाड़ से लगे डबरीपानी, नवागढ़ और घुटरापारा के संरक्षित वन क्षेत्रों में कुल 157 अतिक्रमणकारी चिन्हित किए गए हैं। इन सभी को 27 मार्च 2026 को अंतिम नोटिस जारी किया गया था और 29 मार्च 2026 तक अतिक्रमण हटाने की समयसीमा तय की गई थी। सूत्रों के मुताबिक, उस दौरान सरगुजा कलेक्टर अवकाश पर थे, जिसके कारण विभागीय स्तर पर कार्रवाई में देरी हुई। बाद में भाजपा पार्षद आलोक दुबे ने आरोप लगाया कि झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल से आए लोगों ने वनभूमि पर कब्जा किया है। शिकायत के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। राजनीतिक मुद्दा बना वनभूमि अतिक्रमण महामाया पहाड़ से लगे वन क्षेत्रों में अवैध कब्जे का मामला राजनीतिक मुद्दा भी बन गया है। भाजपा लगातार कांग्रेस पर वोट बैंक की राजनीति के तहत अतिक्रमण को बढ़ावा देने का आरोप लगाती रही है। वहीं कांग्रेस इन आरोपों को खारिज करते हुए कार्रवाई में पक्षपात का आरोप लगाती रही है।