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नोएडा एयरपोर्ट: लखनऊ की पहली उड़ान, टिकट बुकिंग शुरू और किराया जानें

 ग्रेटर नोएडा पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली-NCR के करोड़ों लोगों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है. जेवर में बने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ानों की शुरुआत की आधिकारिक तारीख और रूट फाइनल हो गया है. IndiGo आज से अपनी उड़ानों के लिए टिकटों की बिक्री शुरू करने जा रही है।  एयरपोर्ट से पहली कमर्शियल फ्लाइट 15 जून को उड़ान भरेगी. यह न सिर्फ जेवर एयरपोर्ट के लिए बल्कि देश के एविएशन सेक्टर के लिए एक बड़ा मील का पत्थर होगा. इंडिगो इस एयरपोर्ट से ऑपरेशन शुरू करने वाली पहली एयरलाइन बन गई है।  लखनऊ-नोएडा के बीच पहला रूट शुरुआती जानकारी के मुताबिक, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से पहली उड़ान लखनऊ से नोएडा के लिए संचालित की जाएगी. यह रूट उत्तर प्रदेश की राजधानी और उभरते हुए औद्योगिक हब नोएडा और ग्रेटर नोएडा के बीच कनेक्टिविटी को कई गुना मजबूत कर देगा. किराए की बात करें तो 10 हजार रुपये से शुरू होगा।  15 जून की स्पेशल फ्लाइट्स डिटेल:-  लखनऊ से नोएडा, नोएडा से लखनऊ नोएडा से बेंगलुरु, बेंगलुरु से नोएडा 16 जून से नोएडा से लखनऊ के अलावा जम्मू, श्रीनगर, धर्मशाला सहित 16 मंजिलों के लिए फ्लाइट्स चलेंगी।  1 जुलाई से उड़ानों के शेड्यूल का विस्तार होगा. दरअसल, 1 जुलाई से नोएडा पर हर दिन लगभग 28 उड़ानें उतरेंगी और उड़ान भरेंगी. इसके अलावा, कुछ स्पेशल डेस्टिनेशन के लिए स्पेशल उड़ानें भी होंगी।  बिजनेस और टूरिज्म को मिलेगा बूस्ट जेवर एयरपोर्ट को भारत के सबसे बड़े एविएशन हब के रूप में विकसित किया जा रहा है.  इसके शुरू होने से दिल्ली-NCR और पश्चिमी यूपी के यात्रियों को अब फ्लाइट पकड़ने के लिए दिल्ली (IGI) एयरपोर्ट जाने की मजबूरी नहीं होगी।  इसके अलावा, एयर कनेक्टिविटी मजबूत होने से इलाके में नए इन्वेस्टमेंट और व्यापारिक अवसरों के द्वार खुलेंगे. साथ ही आगरा और मथुरा जैसे पर्यटन केंद्रों के करीब होने के कारण विदेशी पर्यटकों के लिए भी यह पसंदीदा विकल्प बनेगा। 

रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर आपदा से निपटने के लिए DRDO का नया सेंटर, बुराड़ी में हुआ उद्घाटन

नई दिल्ली रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर इमरजेंसी के लिए तैयारी को बेहतर बनाने के मकसद से, डीआरडीओ ने दिल्ली के बुराड़ी मैदान में खास सेंटर खोला है। डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (डीआरडीओ) ने केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर (CBRN) फील्ड ट्रेनिंग और डेमोंस्ट्रेशन सेंटर खोला। डीआरडीओ के चेयरमैन समीर वी. कामत ने इसका उद्घाटन किया। यह ट्रेनिंग और डेमोंस्ट्रेशन सेंटर, DRDO का एक अनोखा CBRN सेंटर ऑफ एक्सीलेंस होगा, जिसमें कई अत्याधुनिक सुविधाएं मौजूद होंगी। डीआरडीओ का ये सेंटर क्यों है खास     इस सेंटर में एक खास रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर टेस्ट-बेड सुविधा और हेवी-आयन रिसर्च सुविधाएं शामिल हैं।     इसके साथ ही इमरजेंसी मेडिकल रिस्पॉन्स और रियल-टाइम फील्ड रिस्पॉन्स यूनिट्स भी हैं।     रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर टेस्ट-बेड सुविधा एक खास, नियंत्रित माहौल होता है।     इसे न्यूक्लियर एनर्जी, रेडिएशन का पता लगाने और खतरनाक पदार्थों के मैनेजमेंट से जुड़ी टेक्नोलॉजी को टेस्ट करने, उनकी पुष्टि करने और उन्हें प्रदर्शित करने के लिए डिजाइन किया गया है।     ऐसी सुविधाएं न्यूक्लियर साइंस, मटीरियल टेस्टिंग और इमरजेंसी रिस्पॉन्स ट्रेनिंग में R&D के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर मुहैया कराती हैं।     ये सुविधा, गैर-पारंपरिक खतरों से निपटने के लिए जरूरी सैद्धांतिक ज्ञान और व्यावहारिक ट्रेनिंग के बीच के अंतर को पाटती है।     यह सेंटर, इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड एलाइड साइंसेज (INMAS) के तहत बनने वाले CBRN सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का एक हिस्सा है। इसलिए खास है ये सेंट्रर, दी जाएगी प्रभावी ट्रेनिंग यह सेंटर, रक्षा मंत्रालय, गृह मंत्रालय, NDMA और CBRN इमरजेंसी की तैयारी और संकट से निपटने के काम में शामिल अन्य विभिन्न एजेंसियों के रिस्पॉन्डर्स को प्रभावी ट्रेनिंग देने के लिए समर्पित है। ट्रेनिंग और वर्कशॉप के जरिए, INMAS विशेषज्ञों की अगली पीढ़ी को तैयार करेगा, ताकि वे इस काम को फ्रंटलाइन तक आगे बढ़ा सकें और नई तकनीकों और टेक्नोलॉजी को अपनाकर इस क्षेत्र को और समृद्ध बना सकें।  

वन भूमि पर जल संरक्षण का बड़ा कदम, भूजल रिचार्ज के लिए बनाए जाएंगे चेकडैम

 रांची  वन भूमि पर जल स्तर बरकरार रखने के लिए करीब छह हजार कच्चे चेकडैम बनाए जाएंगे। पहाड़ियों से उतरने वाली नलिकाओं को जगह-जगह बांधकर ये चेकडैम तैयार किए जाएंगे। इससे भूमि के ऊपर तो जल मौजूद रहेगा ही, भूगर्भ जल भी रिचार्ज होगा। बांधवगढ़ वन क्षेत्र में यह प्रयोग करने वाले केंद्रीय पर्यावरण विशेषज्ञ दिनेश त्रिवेदी ने बताया कि गर्मी में वन्यजीवों के लिए यह आसानी से उपलब्ध होने वाला जलस्रोत होगा। मिट्टी में नमी रहने से हरियाली बढ़ेगी और राज्य के जंगलों में बायोमास की वृद्धि दर्ज की जाएगी। बरसात से पहले ये चेकडैम तैयार कर लिए जाएंगे। त्रिवेदी ने बताया कि राज्य के वन क्षेत्र में पहले से हजारों की संख्या में ऐसे चेकडैम बने हुए हैं। इनकी पहचान कर मरम्मत भी कराई जाएगी। एक लाख मिलियन जल भंडार बढ़ेगा पर्यावरणविद और रांची विश्वविद्यालय में भूगर्भ शास्त्र के अध्यापक नीतिश प्रियदर्शी ने बताया कि राज्य में इस तरह के प्रयोग से एक लाख मिलियन लीटर जल की उपलब्धता बढ़ेगी। वाटर रिचार्ज की वजह से यह जल स्थायी तौर पर जमीन के ऊपर मौजूद रहेगा। नीतिश प्रियदर्शी ने कहा कि जंगलों की प्राकृतिक वाटर रिचार्ज संरचना अतिक्रमण या वृक्ष कटाई की वजह से नष्ट हो गई है। नए तरीके से कच्चे चेकडैम बनाकर इस कमी को पूरा किया जा सकता है। आजीविका का भी बनेगा साधन जंगलों में बने ये वाटर रिचार्ज पिट मछली पालन के लिए भी उपयोगी होंगे। इससे ग्राम समितियों को जोड़कर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं। वन क्षेत्र में पहले से बड़े बांध बने हुए हैं और वहां मछली पालन हो रहा है। अब कच्चे चेकडैम में भी जल्द विकसित होने वाली मछली की प्रजाति डाली जाएगी।  

योगी सरकार की पहल: ओबीसी युवाओं को फ्री कंप्यूटर ट्रेनिंग, बदल रही जिंदगी

योगी सरकार में ओबीसी युवाओं को मिल रही फ्री कम्प्यूटर ट्रेनिंग, बदल रही जिंदगी साल 2025-26 में 29 हजार से ज्यादा युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया आर्थिक कमजोर परिवारों के इंटर पास युवाओं को मिल रहा प्रशिक्षण का अवसर   लाभार्थी का चयन जिला स्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली समिति कर रही योजना का उद्देश्य गरीब व पिछड़े वर्ग के युवाओं को डिजिटल रूप से सशक्त बनाना लखनऊ उत्तर प्रदेश की योगी सरकार प्रदेश के युवाओं को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने के लिए लगातार ठोस कदम उठा रही है। इसी क्रम में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के युवक-युवतियों के लिए कम्प्यूटर प्रशिक्षण योजना एक महत्वपूर्ण पहल बनकर उभरी है। इस योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 में 29 हजार से ज्यादा युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है। डिजिटल युग में यह योजना आत्मनिर्भरता की दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है। सबसे ज्यादा 22,407 युवाओं ने ओ लेवल कोर्स किया इस योजना के तहत इंटरमीडिएट पास ओबीसी वर्ग के ऐसे युवक-युवतियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिनके माता-पिता या अभिभावकों की वार्षिक आय 1 लाख रुपये या उससे कम है। सरकार द्वारा यह प्रशिक्षण भारत सरकार की नीलिट से मान्यता प्राप्त संस्थानों के माध्यम से कराया जाता है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में इस योजना के अंतर्गत कुल 29,191 युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है। इनमें 22,407 युवाओं ने ओ लेवल और 6,784 युवाओं ने सीसीसी कोर्स पूरा किया है। ये आंकड़े इस योजना की सफलता और युवाओं में इसकी बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाते हैं। सरकार कर रही प्रशिक्षण शुल्क का भुगतान, लाभार्थियों को बड़ी राहत प्रदेश में वर्तमान समय में कुल 299 संस्थाएं इस योजना के तहत चयनित हैं। इनमें 52 संस्थान केवल ओ लेवल, 43 संस्थान केवल सीसीसी और 204 संस्थान दोनों कोर्स संचालित कर रहे हैं। यह व्यापक नेटवर्क राज्य के विभिन्न जिलों में युवाओं को आसानी से प्रशिक्षण उपलब्ध कराने में सहायक है। ओ लेवल कोर्स की अवधि एक वर्ष होती है, जबकि सीसीसी कोर्स मात्र तीन महीने में पूरा होता है। ओ लेवल प्रशिक्षण के लिए सरकार अधिकतम 15,000 रुपये प्रति प्रशिक्षार्थी और सीसीसी कोर्स के लिए 3,500 रुपये तक की राशि सीधे संस्थान को भुगतान करती है।  जिला स्तर पर समिति के जरिए होता है लाभार्थियों का चयन अगर कोई लाभार्थी पहले ही फीस जमा कर देता है, तो सत्यापन के बाद यह राशि सीधे उसके खाते में भेज दी जाती है। यह व्यवस्था योजना को और अधिक पारदर्शी और लाभार्थी-हितैषी बनाती है। प्रशिक्षण के लिए इच्छुक अभ्यर्थी और संस्थाएं निर्धारित वेबसाइट https://obcoomputertraining. upsdc.gov.in के माध्यम से आवेदन करते हैं, जिससे चयन प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहती है। वहीं संस्थाओं के चयन की प्रक्रिया भी व्यवस्थित और पारदर्शी है। प्रशिक्षण संस्थानों का चयन निदेशक की अध्यक्षता में किया जाता है, जबकि लाभार्थियों का चयन जनपद स्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा किया जाता है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि योजना का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचे। पूरी पारदर्शिता के साथ संचालित की जा रही योजनाः निदेशक पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के निदेशक उमेश प्रताप सिंह ने कहा कि इस योजना का उद्देश्य अन्य पिछड़ा वर्ग के युवाओं को तकनीकी रूप से सक्षम बनाकर उन्हें रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में यह योजना पूरी पारदर्शिता के साथ संचालित की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बड़ी संख्या में चयनित संस्थानों के माध्यम से युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है और हर साल बड़ी संख्या में युवक-युवतियां इस योजना से लाभान्वित हो रहे हैं। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वह इस योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाकर अपने भविष्य को मजबूत बनाएं और डिजिटल युग में अपनी पहचान स्थापित करें।

आलमगीर आलम कमीशन घोटाला: ईडी ने इंजीनियरों पर कसा शिकंजा, संपत्ति जांच तेज

रांची  ग्रामीण कार्य विभाग के पूर्व मंत्री आलमगीर आलम से जुड़े टेंडर आवंटन में कमीशन घोटाला केस में ईडी अब मार्च महीने में चार्जशीटेड इंजीनियरों की भी चल-अचल संपत्ति जब्त करेगी। इनपर ग्रामीण कार्य विभाग में टेंडर आवंटन के बदले में कमीशन वसूलने व उस राशि के बंटवारे में शामिल होने का आरोप है। आरोपितों में सेवानिवृत्त मुख्य इंजीनियर, कार्यपालक अभियंता व सहायक अभियंता स्तर के इंजीनियर शामिल हैं। पीएमएल अधिनियम के तहत जांच में ईडी ने जानकारी जुटाई है कि इंजीनियरों ने कमीशन की वसूली कर अपने से ऊपर के अधिकारियों व विभागीय मंत्री तक पहुंचाया। ये टेंडर झारखंड सरकार के ग्रामीण कार्य विभाग, ग्रामीण विकास विशेष क्षेत्र व झारखंड राज्य ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण से संबंधित थे, जिससे ये सभी इंजीनियर जुड़े हुए थे ईडी ने इन 14 इंजीनियर, पूर्व मंत्री आलमगीर आलम, उनके आप्त सचिव संजीव लाल, पूर्व मुख्य अभियंता वीरेंद्र राम सहित कुल 36 आरोपितों के विरुद्ध अब तक चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। एसीबी जमशेदपुर में 2019 में दर्ज कांड के आधार पर ईडी ने ईसीआइआर किया था। पूरा मामला जूनियर इंजीनियर सुरेश प्रसाद वर्मा की दस हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार होने से संबंधित था। इसके बाद एसीबी जमशेदपुर ने ही तत्कालीन मुख्य अभियंता वीरेंद्र राम के ठिकाने से 2.67 करोड़ रुपये की नकदी की बरामदगी की थी। ईडी ने उक्त केस में ईसीआइआर करने के बाद वीरेंद्र राम को गिरफ्तार किया और टेंडर आवंटन में कमीशन घोटाले के एक बड़े रैकेट का खुलासा किया। जांच के क्रम में तत्कालीन मंत्री आलमगीर आलम व उनके निजी सचिव संजीव कुमार लाल सहित अन्य आरोपित पकड़े गए थे। पूर्व मंत्री आलमगीर आलम, उनके निजी सचिव संजीव कुमार लाल सहित कई आरोपित अब भी जेल में हैं। ईडी अब तक 44 करोड़ रुपये की संपत्ति व 38 करोड़ रुपये नकदी जब्त कर चुकी है। अब इंजीनियरों की संपत्ति जब्ती की तैयारी है। ये हैं 14 इंजीनियर, जिनकी चल-अचल संपत्ति खंगाल रही है ईडी सेवानिवृत्त मुख्य इंजीनियर सिंगराई टुटी, राजीव लोचन, सुरेंद्र कुमार व प्रमोद कुमार, कार्यपालक अभियंता संतोष कुमार, अजय कुमार, अजय तिर्की, राज कुमार टोप्पो, अशोक कुमार गुप्ता, सिद्धांत कुमार व अनिल कुमार (सेवानिवृत्त), सहायक अभियंता राम पुकार राम व रमेश ओझा (दोनों सेवानिवृत्त) और पूर्व अधीक्षण अभियंता/मुख्य अभियंता उमेश कुमार (सेवानिवृत्त)। कमीशन की राशि से अर्जित की है संपत्ति ईडी ने जांच में पाया है कि ग्रामीण विकास विभाग से जुड़ी इकाइयों में कमीशन व रिश्वत का एक संगठित गिरोह सक्रिय था। इसमें ठेका लेने वाले ठेकेदारों को कुल टेंडर मूल्य का तीन प्रतिशत कमीशन देना पड़ता था। इस कमीशन का बंटवारा भी होता था, जिसमें 1.35 प्रतिशत राशि तत्कालीन मंत्री आलमगीर आलम तक उनके निजी सचिव संजीव लाल के माध्यम से जाता था। वहीं, 0.65 प्रतिशत से एक प्रतिशत राशि विभागीय सचिव व शेष राशि मुख्य इंजीनियरों तथा उनके नीचे के अभियंताओं तक पहुंचती थी।

सुरक्षा बलों की बड़ी कामयाबी, माओवादियों के ठिकाने से करोड़ों रुपये और सोना मिला

जगदलपुर. बस्तर में माओवादी नेटवर्क के कमजोर पड़ने के साथ अब उनके आर्थिक ढांचे की परतें खुलने लगी है। सुरक्षा बलों की लगातार सर्चिंग में ऐसे डंप सामने आ रहे हैं, जो इस बात की गवाही दे रहे हैं कि संगठन सिर्फ बंदूक के दम पर नहीं बल्कि मजबूत आर्थिक जाल पर भी टिका था। बीते तीन महीनों में जवानों ने करीब 6 करोड़ 75 लाख रुपए नगद और 8 किलो सोना बरामद किया है, जो इस छिपे खजाने की एक झलक भर है। आईजी सुंदरराज पी के मुताबिक, यह बरामदगी अंदरूनी इलाकों में छिपाकर रखे गए डंप से हुई है, जिनकी तलाश अभी भी जारी है। जानकार बताते हैं कि नोटबंदी के बाद माओवादियों ने रणनीति बदली और नगद की जगह सोने में निवेश करना शुरू किया, ताकि जोखिम कम रहे। बरामद 8 किलो सोने की कीमत ही करीब 13 करोड़ रुपए आंकी गई है, जिससे संगठन की आर्थिक ताकत का अंदाजा लगाया जा सकता है। यह पैसा तेंदूपत्ता संग्राहकों, ठेकेदारों और विकास कार्यों में लगे लोगों से लेवी के रूप में वसूला जाता था, जो साल दर साल करोड़ों में पहुंचता था। 50 करोड़ से ज्यादा हो सकती है माओवादियों की छिपी पूंजी वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र तिवारी मानते हैं कि अब तक मिली रकम सिर्फ सतह है, असल में बस्तर में ही माओवादियों की छिपी पूंजी 50 करोड़ से ज्यादा हो सकती है। यानी जैसे-जैसे माओवादी नेटवर्क खत्म हो रहा है, वैसे-वैसे उनका आर्थिक साम्राज्य भी उजागर हो रहा है। हालांकि खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है, क्योंकि जंगलों में छिपे ऐसे कई डंप अब भी सुरक्षा बलों के निशाने पर हैं। फिलहाल बस्तर में जारी सर्च ऑपरेशन सिर्फ हथियारों की तलाश नहीं, बल्कि माओवादियों की उस आर्थिक रीढ़ को तोड़ने की कोशिश भी है, जिस पर उनका पूरा नेटवर्क खड़ा था।

स्कूल में खाना खाते ही बिगड़ी बच्चों की तबीयत, स्वास्थ्य केंद्र में मचा हड़कंप

 सहरसा बिहार के सहरसा जिले में गुरुवार को एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। जिले के महिषी प्रखंड स्थित राजकीय मध्य विद्यालय बलुआहा में मिड-डे मील खाने के बाद 250 से अधिक बच्चे अचानक बीमार पड़ गए। खाना खाने के कुछ देर बाद ही बच्चों ने पेट दर्द, उल्टी, चक्कर और बेचैनी की शिकायत की, जिसके बाद स्कूल परिसर में भारी हड़कंप मच गया। आनन-फानन में सभी बीमार बच्चों को इलाज के लिए महिषी स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। एक साथ इतनी बड़ी संख्या में बीमार बच्चों के पहुंचने से स्वास्थ्य केंद्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और भीड़ जमा हो गई। डॉक्टरों की टीम लगातार बच्चों की जांच और उपचार में जुटी हुई है। छात्रों ने बताई आपबीती पांचवीं कक्षा के छात्र रोहित कुमार ने बताया कि सुबह करीब 10 बजे स्कूल में भोजन में चावल-दाल दिया गया था। इसे खाने के कुछ ही देर बाद तबीयत खराब होने लगी। पेट में तेज दर्द के साथ उल्टी और चक्कर आने लगे। वहीं, सातवीं कक्षा की छात्रा शिवानी ने भी बताया कि भोजन के तुरंत बाद एक-एक कर कई बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी थी। कई बच्चे सदर अस्पताल रेफर घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। सहरसा के सिविल सर्जन डॉ. राजनारायण प्रसाद स्वास्थ्य अधिकारियों की टीम के साथ तुरंत महिषी पहुंचे और बच्चों के इलाज की व्यवस्था का जायजा लिया। सिविल सर्जन डॉ. राजनारायण प्रसाद ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह फूड प्वाइजनिंग का मामला लग रहा है। सभी बच्चों का तुरंत इलाज किया जा रहा है। एहतियात के तौर पर जिन बच्चों की तबीयत ज्यादा खराब थी, उन्हें सहरसा सदर अस्पताल रेफर किया गया है। उन्होंने बताया कि फिलहाल सभी बच्चों का उपचार जारी है। स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और सभी बच्चे खतरे से बाहर हैं। घबराने की कोई बात नहीं है। लैब भेजे जाएंगे खाने के नमूने इस घटना के बाद से स्कूली बच्चों के अभिभावकों में प्रशासन और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ काफी आक्रोश देखा जा रहा है। जिला प्रशासन ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों ने बताया कि मिड-डे मील के भोजन के नमूने इकट्ठा कर लिए गए हैं और उन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा। जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ 09 मई 2026 को, आपसी सहमति से सुलझेंगे लंबित मामले

नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ 09 मई 2026 को, आपसी सहमति से सुलझेंगे लंबित मामले सुप्रीम कोर्ट की विशेष पहलः समाधान समारोह के जरिए घर बैठे आभासी (Virtual) माध्यम से भी जुड़ सकेंगे पक्षकार रायपुर आम जनता को त्वरित और सुलभ न्याय दिलाने तथा आपसी सहमति से विवादों के निपटारे को बढ़ावा देने के लिए भारत के सर्वाेच्च न्यायालय द्वारा समाधान समारोह विशेष लोक अदालत 2026 का आयोजन किया जा रहा है। इसकी शुरुआत आगामी 09 मई 2026 को नेशनल लोक अदालत से होगी, जिसका समापन अगस्त माह में विशेष लोक अदालत के वृहद आयोजनों के साथ होगा। महत्वपूर्ण तिथियाँ और कार्यक्रम           नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ 09 मई 2026 को किया जाएगा। विशेष लोक अदालत (सुप्रीम कोर्ट परिसर) 21, 22 एवं 23 अगस्त 2026 का किया जाएगा। पूर्व सुलह वार्ता (Pre-Litigation) इसकी प्रक्रिया 21 अप्रैल 2026 से ही प्रारंभ हो चुकी है। घर बैठे जुड़ने की सुविधा         इस बार की लोक अदालत की विशेषता यह है कि पक्षकार भैतिक (शारीरिक) उपस्थिति के साथ-साथ आभासी (Virtual)  माध्यम से भी जुड़ सकते हैं। प्रशिक्षित मध्यस्थ और विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकारी आपसी सुलह कराने में सहयोग करेंगे। पंजीयन की प्रक्रिया         अपने लंबित मामलों को इस विशेष लोक अदालत में शामिल करने के लिए पक्षकारों को सर्वाेच्च न्यायालय की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध गूगल फॉर्म भरना होगा। आवेदन की अंतिम तिथि 31 मई 2026 तक भर सकेंगे। यहाँ करें संपर्क (सहायता केंद्र)        किसी भी प्रकार की जानकारी या तकनीकी सहायता के लिए पक्षकार निम्नलिखित केंद्रों और नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं 1. सर्वाेच्च न्यायालय (वन स्टॉप सेंटर/वार रूम) में संपर्क नंबर 011-2311565652, 011-23116464 ईमेल-speciallokadalat2026@sci.in पता कक्ष क्रमांक 806 एवं 808, बी ब्लॉक, अतिरिक्त भवन परिसर, सुप्रीम कोर्ट में संपर्क किया जा सकता है। 2. जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, रायपुर का पता जिला न्यायालय परिसर, रायपुर 0771-2425944, 91-8301508992 में  नंबर संपर्क किया जा सकता है।          विधिक सेवा प्राधिकरण ने सभी अधिवक्ताओं, वादीगणों और संबंधित पक्षों से अपील की है कि वे इस समाधान समारोह में सक्रिय रूप से भाग लें। यह लंबित मामलों को बिना किसी कटुता के, आपसी समझौते के माध्यम से समाप्त करने का एक सुनहरा अवसर है।

CM मोहन यादव ने भोपाल से रवाना की ‘सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा 2026’

भोपाल  धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामूहिक स्मृति, इन तीनों के संगम के रूप में ‘सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा 2026' ने भोपाल से अपनी पहली यात्रा शुरू की. रानी कमलापति रेलवे स्टेशन से रवाना हुई यह विशेष तीर्थ यात्रा केवल एक धार्मिक भ्रमण नहीं, बल्कि हजार वर्षों की आस्था, संघर्ष और सांस्कृतिक चेतना की यात्रा के रूप में देखी जा रही है. मध्यप्रदेश से पहली बार रेल मार्ग के जरिए शुरू हुई इस यात्रा में प्रदेश के अलग-अलग अंचलों से आए श्रद्धालु शामिल हैं. सोमनाथ मंदिर, जो भारतीय इतिहास और सनातन परंपरा का सशक्त प्रतीक माना जाता है, इस यात्रा का केंद्र बिंदु है।  रानी कमलापति स्टेशन से दिखाई हरी झंडी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल के रानी कमलापति रेलवे स्टेशन से ‘सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा 2026' को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. इस अवसर पर उन्होंने कहा कि सरकार धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयासरत है. हेली सेवा के बाद अब रेल मार्ग से इस तरह की विशेष तीर्थ यात्रा श्रद्धालुओं की सुविधा और पहुंच को और आसान बनाएगी. मुख्यमंत्री ने सोमनाथ मंदिर को स्वाभिमान, आस्था और सांस्कृतिक वैभव का प्रतीक बताते हुए इसे द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रथम स्थान पर प्रतिष्ठित बताया।  गंगोत्री से गंगा सागर तक बिखर रहा आनंद : CM मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंधु जिनके चरण पखारता है, मस्तक पर जिनके चंद्र देव बिराजे हैं, अक्षय स्वाभिमान के ज्योतिर्लिंग, भगवान सोमनाथ के चरणों में कोटि-कोटि वंदन. सोमनाथ का संबंध देश के स्वाभिमान के साथ है. द्वारकाधीश भगवान श्री कृष्ण ने जब अधर्म के खिलाफ लड़ाई लड़ी, तब पूरा समय चक्र ही बदल गया. हम सभी जानते हैं कि एक हजार साल पहले भारत को काली छाया का ग्रहण लग गया था. उस समय बाबा सोमनाथ ने इस ग्रहण को नष्ट किया था. सोमनाथ हमारे विकास का पर्याय भी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विरासत से विकास की यात्रा प्रारंभ हुई.  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर, रेल, पुल, पुलिया, सड़क, नगर, कारखाने के साथ-साथ सनातन संस्कृति को भी लेकर चल रही है. इस सनातन संस्कृति पर हमें गर्व है. प्रधानमंत्री मोदी के मन में भी सनातन धर्म के साथ सबको लेकर चलने की भावना है. यह भावना स्पष्ट रूप से दिखाई देती है. हमें अयोध्या और मथुरा में जो आनंद आता है, वही आनंद पश्चिम बंगाल के काली घाट पर आता है. आज भगवान की दया से गंगोत्री से गंगा सागर तक आनंद बिखर रहा है. लोकतंत्र की नई बयार पूरे देश को उत्साह-उमंग से भर रही है।  हमले के बाद भी लहराती रही सनातन संस्कृति की ध्वजा : मोहन यादव सीएम डॉ. यादव ने लोगों से कहा कि इस यात्रा के जरिये आपको बाबा सोमनाथ के दर्शन का लाभ मिलेगा. मेरी ओर से सभी यात्रियों को बधाई. वहीं, पास में चार पीठों में से एक द्वारका पीठ भी है. यहां भगवान कृष्ण ने लीलाएं कर हमारे हृदय में छवि बनाई. सोमनाथ मंदिर पर दुश्मनों ने 17 बार आक्रमण किए थे. लेकिन, हमारी सनातन संस्कृति की ध्वजा लहराती रही. एक हजार साल बाद सोमनाथ का शिखर आसमान से बात कर रहा है. दुश्मन लाख चाहे तो क्या होता है, वही होता है जो बाबा सोमनाथ चाहें. उन्होंने तीर्थयात्रियों से कहा कि आप बाबा सोमनाथ से आशीर्वाद लेना कि दुनिया में चारों ओर खुशहाली हो. यह सांस्कृतिक जानगरण राष्ट्रीय एकता को और सुदृढ़ करे. उन्होंने कहा कि जीवन भी एक यात्रा है. जीवन की इस यात्रा में हम आते हैं और शरीर छोड़ते हैं. लेकिन, इस बीच परमात्मा ने हमें जो मौका दिया है, इस मौके का उपयोग हम परोपकार में करें।  देवलोक बनने से बदल जाती है अर्थव्यवस्था : मुख्यमंत्री सीएम डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने धार्मिक स्थानों पर हेलीकॉप्टर सेवा भी शुरू की है. हमारी सरकार कई देवलोक बनवा रही है. महाकाल लोक बनने के बाद आर्थिक रूप से पूरा इको-सिस्टम बदल गया. साल 2022 से पहले उज्जैन में एक वर्ष में 25-30 हजार लोग आते थे, आज रोज डेढ़ लाख लोग दर्शन करने उज्जैन आ रहे हैं. इस तरह पूरा माहौल बदल रहा है. उन्होंने कहा कि इस तरह के देवलोक बनने के बाद होटल वालों, ठेले वालों, ऑटो वालों, दुकान वालों के जीवन में बदलाव आता है. भारतवासी जब एक-दूसरे के क्षेत्र में जाते हैं, तो एक-दूसरे को अपनी-अपनी संस्कृति से परिचित कराते हैं. इससे आंतरिक एकता का निर्माण होता है. यही एकता एकात्मवाद में परिवर्तित होती है।  मेरी अपनी ओर से सभी तीर्थयात्रियों को बधाई श्रद्धालुओं का बड़ा कारवां मध्यप्रदेश से पहली बार निकल रही इस यात्रा में 1,100 श्रद्धालुओं का दल शामिल है. यह विशेष रेलगाड़ी भोपाल के साथ-साथ उज्जैन रेलवे स्टेशन से भी यात्रियों को लेकर सोमनाथ के लिए रवाना हुई. यात्रा के दौरान श्रद्धालु सोमनाथ पहुंचेकर दर्शन, पूजा-अर्चना और आध्यात्मिक अनुष्ठानों में भाग लेंगे. साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से सोमनाथ से जुड़ी ऐतिहासिक और धार्मिक कथाओं को साझा किया जाएग।  धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक जुड़ाव सरकार और संस्कृति विभाग के अनुसार, इस यात्रा का उद्देश्य केवल दर्शन तक सीमित नहीं है. यह पहल धार्मिक पर्यटन के साथ सांस्कृतिक जुड़ाव को भी मजबूत करने का प्रयास है. रेलवे के माध्यम से सामूहिक तीर्थ यात्रा ने बुजुर्गों, परिवारों और दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यात्रा को सरल बनाया है. यात्रा के दौरान व्यवस्थाओं, आवास और कार्यक्रमों का समन्वय संस्कृति विभाग द्वारा किया जा रहा है।  ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' की पृष्ठभूमि संस्कृति संचालनालय के निदेशक एन.पी. नामदेव के अनुसार, ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' का मूल उद्देश्य देशभर में भारत के सांस्कृतिक पुनरुत्थान, आस्था और ऐतिहासिक संघर्षों की स्मृति को जीवंत करना है. यह पर्व राष्ट्र की गौरवमयी विरासत के उत्सव के रूप में आयोजित किया जा रहा है. उनका कहना है कि यह सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय अस्मिता का प्रतीकात्मक महाकुंभ है, जो नई पीढ़ी को अपनी विरासत से जोड़ने का कार्य करता है।  इतिहास से भविष्य तक की यात्रा सोमनाथ मंदिर को भारत की सांस्कृतिक दृढ़ता और अटूट श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है. हजार वर्षों के उतार-चढ़ाव के बावजूद इस मंदिर का पुनर्निर्माण और उसकी निरंतर परंपरा भारतीय सांस्कृतिक जीवटता को दर्शाती है. ‘सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा' … Read more

सीसीटीवी से खुला रेलवे मोबाइल चोरी गैंग का राज, 9 साल के बच्चे ने बताया पूरा नेटवर्क

 रांची  रांची रेलवे स्टेशन पर सक्रिय एक अंतरराज्यीय मोबाइल चोर गिरोह का खुलासा करते हुए आरपीएफ ने बड़ी कार्रवाई की है। इस गिरोह में शामिल 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें 4 नाबालिग भी शामिल हैं। चौंकाने वाली बात यह रही कि पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश एक 9 साल के बच्चे से हुआ, जिसे सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पकड़ा गया। मंगलवार को राहुल कुमार नामक यात्री ने जीआरपीएस रांची में मोबाइल चोरी की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत मिलते ही आरपीएफ हरकत में आई और स्टेशन पर लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच शुरू की गई। फुटेज में साफ दिखा कि एक नाबालिग लड़का लगेज स्कैनर के पास खड़ा होकर बड़ी सफाई से यात्री की जेब से मोबाइल निकालकर भाग गया। प्लेटफार्म से पकड़ा गया बच्चा, पूछताछ में उगला पूरा नेटवर्क सीसीटीवी के आधार पर संदिग्ध नाबालिग को प्लेटफार्म नंबर 3 से हिरासत में लिया गया। जब उसे फुटेज दिखाया गया, तो उसने न सिर्फ चोरी की बात कबूल की, बल्कि पूरे गिरोह का खुलासा कर दिया। उसने बताया कि वह अकेला नहीं है, बल्कि संगठित तरीके से 8–10 लोगों के गैंग में काम करता है। ये लोग झारखंड के साहिबगंज (तीन पहाड़ क्षेत्र) और अन्य इलाकों से रांची आते हैं। एक टीम में 4–5 लोग स्टेशन पर सक्रिय रहते हैं, जिनमें छोटे बच्चे भी शामिल होते हैं ताकि किसी को शक न हो। ऐसे करते थे चोरी गिरोह का तरीका बेहद सुनियोजित था। नाबालिग बच्चों को आगे कर भीड़भाड़ वाले स्थानों जैसे लगेज स्कैनर, टिकट काउंटर और प्लेटफार्म पर लगाया जाता था। ये बच्चे यात्रियों के पास खड़े होकर मौका मिलते ही मोबाइल निकाल लेते थे। चोरी के बाद मोबाइल तुरंत गैंग के बड़े सदस्यों को दे दिया जाता था, जो उसे सुरक्षित ठिकानों तक पहुंचाते थे। इसके बाद इन मोबाइल को झारखंड के तीन पहाड़ इलाके और पश्चिम बंगाल के आसनसोल में ऊंचे दामों पर बेच दिया जाता था। पूछताछ में यह भी सामने आया कि गिरोह का एक सदस्य विकास कुमार चोरी के मोबाइल खरीदने और खपाने का काम करता था, हालांकि उसका वर्तमान ठिकाना पता नहीं चल सका है। न्यू पुंदाग और कठल मोड़ में छापेमारी, रातभर चली कार्रवाई नाबालिग के खुलासे के बाद आरपीएफ ने तुरंत जाल बिछाया। सीआईबी रांची की टीम के साथ मिलकर न्यू पुंदाग और कठल मोड़ इलाके में छापेमारी की गई। इस कार्रवाई में कुल 8 लोगों को पकड़ा गया, जिनमें 4 नाबालिग शामिल हैं। इनके पास से 9 मोबाइल फोन बरामद किए गए, जिनकी कुल कीमत करीब 3.40 लाख रुपये आंकी गई है। बरामद मोबाइल में इनफिनिक्स, वनप्लस, वीवो, रियलमी, ओप्पो, रेडमी और आईफोन जैसे ब्रांड शामिल हैं। दो मई को ही रांची पहुंचा था नया गैंग, पहले भी कर चुके हैं वारदात जांच में यह भी सामने आया है कि यह गिरोह 2 मई को ही रांची पहुंचा था और लगातार स्टेशन व आसपास के इलाकों में सक्रिय था। इससे पहले भी ये कई यात्रियों को निशाना बना चुके हैं। पुलिस के अनुसार, ऐसे कई और गैंग सक्रिय हैं, जो अलग-अलग राज्यों से आकर रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में चोरी की घटनाओं को अंजाम देते हैं। केस दर्ज, सभी आरोपित जीआरपी को सौंपे गए पूरी कार्रवाई के बाद सभी गिरफ्तार और हिरासत में लिए गए आरोपितों को जीआरपीएस रांची को सौंप दिया गया है। इस मामले में कांड संख्या 23/26, दिनांक 6 मई 2026 के तहत बीएनएस की धारा 303(2) और 317(5) के तहत मामला दर्ज किया गया है। आरपीएफ की इस कार्रवाई में एसआई सूरज पांडेय के नेतृत्व में पूरी टीम ने अहम भूमिका निभाई। लगातार सक्रिय हैं गिरोह, आरपीएफ की सख्ती जारी इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि रेलवे स्टेशन पर मोबाइल चोर गिरोह सुनियोजित तरीके से सक्रिय हैं। हालांकि, सीसीटीवी और सतर्कता के चलते ऐसे गिरोह अब लगातार पकड़े जा रहे हैं। आरपीएफ ने संकेत दिया है कि आगे भी इसी तरह अभियान जारी रहेगा और अन्य सक्रिय गैंगों पर भी जल्द कार्रवाई की जाएगी।