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मोहन ने ममता के गढ़ में किया जोरदार प्रदर्शन, कहा- वेस्ट बंगाल में कमल खिलने से कोई ताकत नहीं रोक सकती

भोपाल  पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की रणभेरी बज चुकी है। इस बीच मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 18 अप्रैल को कोलकाता की दो विधानसभाओं में धुआंधार प्रचार किया। उन्होंने कोलकाता जिले की कमरहाटी विधानसभा में भाजपा प्रत्याशी अरुप चौधरी और मेदिनीपुर जिले के खड़गपुर सदर विधानसभा में भाजपा प्रत्याशी दिलीप घोष के समर्थन में जनता से समर्थन मांगा। दोनों विधानसभाओं में उन्होंने कहा कि दुनिया की कोई ताकत बंगाल में कमल खिलने से नहीं रोक सकती। पश्चिम बंगाल की जनता जंगलराज और तृणमूल कांग्रेस से त्रस्त हो चुकी है। जनता को अब विकास चाहिए। पश्चिम बंगाल में दहाड़े सीएम मोहन यादव 18 अप्रैल की सुबह सबसे पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कमरहाटी विधानसभा पहुंचे। यहां उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता अब ठहराव नहीं, परिवर्तन और प्रगति की ओर बढ़ने को तैयार है। कई सालों से विकास की दौड़ में पीछे छूटा पश्चिम बंगाल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार में नई ऊर्जा, नई दिशा और तेज प्रगति के साथ आगे बढ़ेगा। यहां के हर वर्ग के जीवन में जमीनी स्तर पर बदलाव नजर आएगा। कोलकाता के अंदरुनी इलाकों में बहुत गरीबी है और हालात बेहतर दयनीय हैं। यहां युवाओं के पास रोजगार नहीं है, मजबूरी में लोगों को परिवार का पालन पोषण करने के लिए पलायन करना पड़ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पश्चिम बंगाल में हर क्षेत्र में विकास की असीमित संभावनाएं हैं। अब बंगाल की जनता टीएमसी के कुशासन और जंगलराज से मुक्ति चाहती है। बंगाल लगातार गर्त में जा रहा है, इसके उत्थान के लिए खिलता कमल और भाजपा की सरकार चाहिए। गौरतलब है कि 18 अप्रैल की सुबह सबसे पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कमरहाटी विधानसभा पहुंचे। यहां उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता अब ठहराव नहीं, परिवर्तन और प्रगति की ओर बढ़ने को तैयार है। कई सालों से विकास की दौड़ में पीछे छूटा पश्चिम बंगाल,  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार में नई ऊर्जा, नई दिशा और तेज प्रगति के साथ आगे बढ़ेगा। यहां के हर वर्ग के जीवन में जमीनी स्तर पर बदलाव नजर आएगा। कोलकाता के अंदरुनी इलाकों में बहुत गरीबी है और हालात बेहतर दयनीय हैं। यहां युवाओं के पास रोजगार नहीं है, मजबूरी में लोगों को परिवार का पालन पोषण करने के लिए पलायन करना पड़ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पश्चिम बंगाल में हर क्षेत्र में विकास की असीमित संभावनाएं हैं। अब बंगाल की जनता टीएमसी के कुशासन और जंगलराज से मुक्ति चाहती है। बंगाल लगातार गर्त में जा रहा है, इसके उत्थान के लिए खिलता कमल और भाजपा की सरकार चाहिए। 'बांग्लादेशी घुसपैठियों को रोकने के लिए SIR जरूरी' मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सहित जहां हर राज्य तेजी से प्रगति कर रहा है, तो वही बंगाल पिछड़ रहा है। बंगाल की जनता प्रचंड बहुमत से राज्य में बीजेपी की सरकार बनाकर विकास की एक नई इबारत लिखना चाहती है। बंगाल चुनाव में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी है। प्रधानमंत्री मोदी देश की युवा शक्ति, नारी शक्ति, गरीब और अन्नदाताओं के कल्याण के लिए पूर्ण समर्पण भाव से कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सभी राज्यों में चुनाव आयोग के निर्देश पर एसआईआर कराया गया है। इस प्रक्रिया में सही मतदाताओं की पहचान की गई। बंगाल की प्रगति और बांग्लादेशी घुसपैठियों को रोकने के लिए एसआईआर जरूरी है। 'जनता चाहती है बीजेपी का शासन' दूसरी ओर, शाम को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मेदिनीपुर जिले के खड़गपुर सदर विधानसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी दिलीप घोष के समर्थन में प्रचार किया। यहां उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता की चेहरे की चमक बता रही है कि दुनिया की कोई ताकत यहां कमल खिलने से नहीं रोक सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी आज विश्व की सबसे बड़ी पार्टी बन चुकी है और बंगाल में भी भाजपा चुनाव जीतेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भाजपा प्रत्याशी दिलीप घोष को बंगाल में भाजपा का शुभंकर बताया। उन्होंने कहा कि जैसे लोहा पारस के संपर्क में आने पर सोना बन जाता है। उसी प्रकार अगर कोई कार्यकर्ता दिलीप के संपर्क में आए तो वह भाजपा का बन जाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिलीप घोष के समर्थन में भव्य रोड शो भी किया। इस रोड शो में कार्यकर्ताओं के साथ स्थानीय जनता उमड़ पड़ी। रोड शो में उपस्थित लोगों ने भारत माता की जय और जय श्रीराम के नारे लगाए। तेजी से करेंगे विकास मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कमरहाटी विधानसभा क्षेत्र की गलियों में घूमकर जनता से बीजेपी के पक्ष में मतदान करने की अपील की। उन्होंने स्थानीय लोगों की समस्याएं सुनीं और भरोसा दिलाया कि राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जनकल्याण के कार्यों को तेज गति से आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि बंगाल देश के साथ कदम से कदम मिलाकर चलेगा तो विकास की राह पर बहुत आगे बढ़ेगा। पश्चिम बंगाल कभी देश का सबसे अच्छा राज्य था। लेकिन पहले कम्युनिस्ट पार्टी और बाद में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सरकारों ने बंगाल का पूरा बेड़ा गर्क कर दिया। बांग्लादेशी घुसपैठियों को रोकने के लिए एसआईआर जरूरी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सहित जहां हर राज्य तेजी से प्रगति कर रहा है, तो वही बंगाल पिछड़ रहा है। बंगाल की जनता प्रचंड बहुमत से राज्य में बीजेपी की सरकार बनाकर विकास की एक नई इबारत लिखना चाहती है। बंगाल चुनाव में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी है। प्रधानमंत्री मोदी देश की युवा शक्ति, नारी शक्ति, गरीब और अन्नदाताओं के कल्याण के लिए पूर्ण समर्पण भाव से कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सभी राज्यों में चुनाव आयोग के निर्देश पर एसआईआर कराया गया है। इस प्रक्रिया में सही मतदाताओं की पहचान की गई। बंगाल की प्रगति और बांग्लादेशी घुसपैठियों को रोकने के लिए एसआईआर जरूरी है। जनता चाहती है बीजेपी का शासन दूसरी ओर, शाम को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मेदिनीपुर जिले के खड़गपुर सदर विधानसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी दिलीप घोष के समर्थन में प्रचार किया। यहां उन्होंने कहा कि पश्चिम … Read more

गैस सिलेंडर के लिए अब शादी कार्ड नहीं, गारंटी के आधार पर मिलेगा, कंपनियों के नए नियम

भोपाल   एक तरफ जहां अक्षय तृतीया के साथ साथ देशभर में शादियों का सीजन चल रहा है तो वहीं दूसरी तरफ मध्य प्रदेश के भोपाल जिले में शादी समारोह में भोजन के लिए उपयोग होने वाले कमर्शियल सिलेंडर के नियम में गैंस कंपनियों के साथ-साथ खाद्य विभाग ने एक बार फिर बड़ा बदलाव कर दिया है। दो दिन पहले ही कंपनियों द्वारा तय किए गए शादी कार्ड के नियम को निरस्त करते हुए अब कैटर्स की शादी पर बुकिंग के आधार पर उन्हीं के हवाले से कमर्शियल सिलेंडरों की आपूर्ति करने का फैसला लिया गया है। मुख्य तौर पर खाद्य विभाग ने पिछली व्यवस्था में बदलाव करते हुए नई व्यवस्था को प्रभावी किया है। आपको बता दें कि, दो दिन पहले ही गैस कंपनियों ने शादी कार्ड दिखाने के साथ सिलेंडर की गारंटी के तौर पर 4400 रुपए जमा करने पर कमर्शियल गैस सिलेंडर आपूर्ति करने के नियम जारी किए थे। बावजूद इसके एजेंसियों पर स्टॉक की समस्या आने लगी, जिससे लोगों को अधिक परेशान होना पड़ा, जिसके चलते शनिवार को एक बार फिर व्यवस्था में बदलाव किया गया है। पहले गैस कंपनियों ने जारी किया था ये नियम बता दें कि, गैस कंपनियों ने पहले एजेंसियों को निर्देश दिए थे कि, सभी संचालक विवाह समारोह के लिए उपभोक्ताओं द्वारा शादी कार्ड दिखाने पर दो कमर्शियल सिलिंडर दे सकते हैं। इसके लिए उपभोक्ता को दो सिलेंडरों का रिफिलिंग शुल्क 3700 रुपए देने के साथ-साथ सिलेंडरों की गारंटी के तौर पर 4400 रुपए शुल्क जमा करना होगा। साथ ही, ये निर्देश भी दिए कि, आयोजन के अगले दिन तक सिलेंडर एजेंसी में जमा कराने होंगे, इसके बाद गारंटी शुल्क लौटा दिया जाएगा। उपभोक्ता के पत्र पर खाद्य विभाग का एक्शन लेकिन शुक्रवार को ही जब उपभोक्ता एजेंसियों पर पहुंचे तो उन्हें सिलेंडरों की आपूर्ति नहीं हो सकी। इसके चलते किसी उपभोक्ता द्वारा खाद्य विभाग में पत्र लिखकर सिलेंडर की व्यवस्था कराने की मांग की थी। इस पर विभाग में अधिकारियों ने चर्चा कर गैस एजेंसियों को समस्या से अवगत कराया। इसके बाद खाद्य विभाग और गैस कंपनियों ने मिलकर सिलेंडरों की सुलभ आपूर्ति के लिए संयुक्त नियम बनाया है। अब कैटर्स के जरिए होगी कमर्शियल सिलेंडर की बुकिंग बताया जा रहा है कि, अब शादी समारोह के लिए व्यावसायिक सिलेंडर एजेंसी से कैटर्स द्वारा ही लिए जा सकेंगे। इसके लिए शादी समारोह के लिए कैटर्स की बुकिंग करने पर वो अपने कनेक्शन पर एजेंसी से सिलेंडर बुक कर सकेंगे। इससे खाली सिलिंडर के बदले में एजेंसी उसे तय समय पर आपूर्ति करेगी, जिससे लोगों को परेशान नहीं होना पड़ेगा। कैटर्स ही बुक करेंगे सिलेंडर मामले को लेकर जिला आपूर्ति नियंत्रक चंद्रभान सिंह जादौन का कहना है कि, अब शादी समारोह में भोजन व्यवस्था में इस्तेमाल होने वाले कमर्शियल सिलेंडर शादी कार्ड के बजाए कैटर्स की प्रोग्राम बुकिंग की गारंटी लगानी होगी। इसके बाद आयोजनकर्ता के बजाए सिलेंडर कैटर्स के नाम से बुक कराना होगा।

अक्षय तृतीया पर इंदौर और जबलपुर में 4 बाल विवाह रोके, 15-16 साल की बेटियों के विवाह भी समझाइश से टले

इंदौर-जबलपुर में अक्षय तृतीया पर 4 बाल विवाह रोके गए, 17 साल की बालिका की बारात उज्जैन से रुकवाई अक्षय तृतीया पर इंदौर और जबलपुर में 4 बाल विवाह रोके, 15-16 साल की बेटियों के विवाह भी समझाइश से टले इंदौर और जबलपुर में अक्षय तृतीया पर बाल विवाह रोके गए, 17 साल की बालिका की बारात उज्जैन से रोकी गई इंदौर/जबलपुर  अक्षय तृतीया के चलते मध्य प्रदेश के आर्थिक शहर इंदौर में बाल विवाह रोकने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग की अलग-अलग गठित टीमें लगातार कार्रवाई में जुटी हैं। इसी कड़ी में  नाबालिग विवाह के शहर में दो अजीबो गरीब मामले सामने आए। इनमें से एक मामले में दुल्हन ने तो वैवाहिक नियानुसार 18 साल पूरे कर लिए थे, पर दोनों ही मामलों में दूल्हा की उम्र महज 13 साल थी। मामले में कलेक्टर ने शुक्रवार को प्रतिबंधात्मक आदेश भी जारी किया है। एक मामले में लड़की के पिता शादी की उम्र 16 वर्ष होने का दावा करते हुए वैवाहिक रस्में आगे बढ़ाने पर अड़ गए। वहीं, दूसरे मामले में दुल्हन के परिजन बेटी की उम्र 21 साल बता रहे थे, लेकिन यहां उसकी उम्र 18 साल ही निकली। लेकिन दोनों ही मामलों में दूल्हा दोनों दुल्हनों से पांच साल छोटा था। फिलहाल, विभाग की टीम द्वारा समझाने के बाद बच्चों के बालिग होने तक परिजन ने विवाह निरस्त करने की सहमति दे दी है। खजराना क्षेत्र में 17 वर्षीय बालिका का विवाह रोका खजराना थाना क्षेत्र की कॉलेज कॉलोनी में शनिवार को एक बालिका की शादी की सूचना पर टीम मौके पर पहुंची। दस्तावेजों की जांच में बालिका की उम्र 17 साल 4 महीने पाई गई। अधिकारियों ने परिवार को समझाइश दी, जिसके बाद विवाह टाल दिया गया। उज्जैन के दूल्हे पक्ष को सूचना देने पर बारात भी कैंसिल कराई गई। न्यू गोविंद कॉलोनी में 15 वर्षीय बालिका की शादी टली न्यू गोविंद कॉलोनी में 15 वर्षीय बालिका की शादी की तैयारी की शिकायत पर टीम पहुंची। परिवार ने शुरुआत में इंकार किया, लेकिन जांच में सगाई की पुष्टि हुई। समझाइश के बाद परिजनों ने बालिग होने तक विवाह टालने की सहमति दी। भमोरी क्षेत्र में 16 वर्षीय बालिका का विवाह निरस्त भमोरी क्षेत्र में हेल्पलाइन पर मिली सूचना के आधार पर टीम ने कार्रवाई की। जांच में बालिका की उम्र 16 साल पाई गई। माता-पिता को कानूनी प्रावधान समझाने के बाद विवाह निरस्त कर दिया गया। देर रात तक चली जांच कार्रवाई कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देश पर गठित टीमों ने दिनभर विभिन्न विवाह स्थलों पर दस्तावेजों की जांच की। उड़नदस्ता टीम ने शनिवार रात 12 बजे तक आयु प्रमाणों का परीक्षण किया। अधिकारियों ने कहा कि बाल विवाह कानूनन अपराध है। लोगों से अपील की गई है कि नाबालिग विवाह की सूचना तुरंत संबंधित विभाग या हेल्पलाइन को दें। जबलपुर में भी नाबालिक की शादी टली जबलपुर के बरेला थाना क्षेत्र के जुनवानी कंचनपुर टोला में 10वीं कक्षा में पढ़ रही 15 साल की बालिका का विवाह समय रहते रुकवा दिया गया। महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम ने 20 अप्रैल को प्रस्तावित विवाह को कार्रवाई कर निरस्त कराया। सेक्टर पर्यवेक्षक नीरजा वर्मा को बाल विवाह की सूचना मिलने पर शनिवार को टीम गांव पहुंची। जांच में आधार कार्ड में जन्मतिथि 1 जनवरी 2012 और जन्म प्रमाण पत्र में 29 जनवरी 2011 दर्ज मिली, जिससे बालिका की उम्र करीब 15 साल पाई गई।  

बिहार की राजनीति में नई चाल: Nitish Kumar साध रहे ‘लव-कुश’ समीकरण, सम्राट पर बड़ा भरोसा

पटना. नीतीश कुमार की एक-एक गतिविधि राजनीतिक गलियारे में चर्चा का विषय बनती रही है। वह अनायस कोई बात आगे नहीं बढ़ाते। बिहार की राजनीति में इन दिनों वह पूरी सोची-समझी नीति के तहत लव-कुश समीकरण को आगे कर रहे। पिछले दिनों अपनी समृद्धि यात्रा के दौरान जब वे चंपारण के इलाके में थे, तब वह लव-कुश पार्क गए थे। उस समय सम्राट चौधरी भी बतौर उपमुख्यमंत्री उनके साथ थे। दोनों ने पार्क में अपनी तस्वीर भी करायी। वह अनायास ही नहीं था। यहां से भी लव-कुश समीकरण को आगे किए जाने का साफ संदेश था। नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा के दौरान नियमित रूप से सम्राट चौधरी साथ में रहे। इस दौरान नीतीश कुमार ने सम्राट चौधरी के बारे में कई बार कहा कि अब यही लोग आगे संभालेंगे। कई तरह से उन्होंने इशारे में यह साफ किया था कि सम्राट को वह अपना उत्तराधिकारी बनाने की चाहत रखते हैं। जिस समय नीतीश कुमार समृद्धि यात्रा को लेकर सक्रिय थे, उस समय उनके एग्जिट प्लान पर विशेष चर्चा नहीं थी। बाद के चरण में जब वह निकले तो राज्यसभा के लिए उनका नाम तय हो गया था। उस समय भी सम्राट चौधरी के साथ उनकी यात्राएं हुईं। बाद में यह चर्चा हुई कि सम्राट चौधरी ही मुख्यमंत्री पद के लिए नीतीश कुमार की पसंद हैं। शपथ ग्रहण के दिन सम्राट चौधरी ने जिस तरह से नीतीश कुमार का लोकभवन में अभिवादन किया, उस पर लोगों ने गौर किया। उपेंद्र कुशवाहा पर लगा चुके हैं दांव लव-कुश समीकरण को लेकर नीतीश कुमार अपने आरंभिक दिनों से ही सक्रिय दिखते रहे हैं। आरंभिक दिनों में उन्होंने उपेंद्र कुशवाहा को आगे किया था। उन्हीं की पहल पर पहली बार विधानसभा चुनाव जीतकर आए उपेंद्र कुशवाहा को नीतीश कुमार ने नेता प्रतिपक्ष बनाया। बाद के दिनों में कुशवाहा समाज से आने वाले उमेश कुशवाहा को उन्होंने जदयू का प्रदेश अध्यक्ष बनाया। जदयू के एक राष्ट्रीय महासचिव भी कुशवाहा समाज से बनाए गए। मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद शनिवार को नीतीश सबुह 10.30 बजे के करीब सम्राट चौधरी के सरकारी आवास पर पहुंच गए। उनके साथ नीतीश कुमार के विश्वस्त व उप मुख्यमंत्री विजय चौधरी भी थे। यह भी अनायास नहीं था। जिस तरह से नीतीश कुमार ने सम्राट चौधरी के साथ कई फ्रेम में तस्वीर करायी, उसमें उनका लव-कुश समीकरण स्पष्ट तौर पर झलक रहा था।

पंजाब में बेअदबी कानून पर बड़ा बयान: Bhagwant Mann बोले—यह फैसला ऐतिहासिक

चंडीगढ़. श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की साजिश की या बेअदबी की तो अब दोषी को 10 वर्ष से लेकर उम्र कैद की सजा हो सकती है। क्योंकि 13 अप्रैल को पंजाब सरकार द्वारा विधानसभा में सर्वसम्मति से पास किया गया 'जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) विधेयक, 2026 को राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने मंजूरी दे दी है। इस संबंधी जानकारी मुख्यमंत्री भगवंत मान ने खुद दी है। नीदरलैंड दौरे पर गए मुख्यमंत्री राज्यपाल द्वारा बिल को मंजूरी देने पर धन्यवाद किया है। विधान सभा में बिल पेश करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने गारंटी दी थी अब कोई पांचवां बिल नहीं आएगा। बता दें कि इस बिल से पहले तीन बार पहले ही बेअदबी की सजा का बिल पेश हो चुका था। इस बिल में बेअदबी के लिए कम से कम सात साल की कैद (जिसे बढ़ाकर 20 साल तक किया जा सकता है) और 2 लाख से 10 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान करता है। वहीं, सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की साज़िश के तहत की गई बेअदबी के लिए और भी कड़ी सज़ाएं तय की गई हैं, जिनमें उम्रकैद (ता-उम्र) और 25 लाख रुपये तक का जुर्माना शामिल है। विधेयक सर्वसम्मति से पारित हुआ था। बिल को राष्ट्रपति के पास भेजने की जरूरत नहीं पंजाब सरकार ने दावा किया था कि यह स्टेट बिल है। इसलिए इसे राज्यपाल को राष्ट्रपति के पास भेजने की जरूरत नहीं होगी। क्योंकि विपक्षीय पार्टियां इस बात की आशंका जता रही थी की राज्यपाल इस बिल को राष्ट्रपति को भेज सकते हैं। क्या हैं संशोधन इस संशोधन के ज़रिए प्रस्तावना के शुरुआती पैराग्राफ़ को बदला गया है। इसका मकसद इस बात पर जोर देना है कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) या उसके द्वारा अधिकृत किसी अन्य संस्था के अलावा, कोई भी अन्य संस्था स्वरूपों की छपाई, प्रकाशन, भंडारण, वितरण या आपूर्ति न करे। यह सिख रहत मर्यादा (सिख आचार संहिता और रीति-रिवाजों) के अनुसार पवित्रता सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर देता है, साथ ही यह अपवित्रीकरण को परिभाषित करता है, उसके लिए दंड का प्रावधान करता है, और एक ऐसा "निवारक ढांचा" तैयार करता है। अपवित्रता की परिभाषा यह रिकॉर्ड को प्रिंटिंग, स्टोरेज और वितरण से संबंधित मैनुअल और इलेक्ट्रॉनिक, दोनों तरह के दस्तावेज़ों के रूप में भी परिभाषित करता है। साथ ही, यह ‘अपवित्रता’ को किसी भी जान-बूझकर और सोची-समझी गई अपमानजनक कार्रवाई के रूप में विस्तार से बताता है। जिसमें अंग को जलाने, फाड़ने या चोरी करने जैसे भौतिक नुकसान से लेकर, बोलने, लिखने, प्रतीकात्मक या इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से की गई ऐसी हरकतें शामिल हैं जो सिखों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाती हों। एक नई धारा 3A एसजीपीसी को सभी स्वरूपों का एक केंद्रीय रजिस्टर रखने का आदेश देती है। इस रजिस्टर में हर स्वरूप को एक खास पहचान संख्या दी जाएगी और प्रिंटिंग की तारीख, आपूर्ति की जगह, स्टोरेज की जगह और संरक्षक की पहचान जैसे विवरण दर्ज किए जाएंगे। इस रजिस्टर को भौतिक और इलेक्ट्रॉनिक, दोनों रूपों में रखा जाना है। अधिनियम के लागू होने के 45 दिनों के भीतर इसे एसजीपीसी की वेबसाइट पर उपलब्ध कराया जाना चाहिए, और हर महीने इसमें अनिवार्य रूप से अपडेट किए जाने चाहिए, जिन्हें किसी अधिकृत अधिकारी द्वारा विधिवत प्रमाणित किया गया हो। संरक्षकों के कर्तव्यों और दंड की परिभाषा धारा 3B के माध्यम से, इस संशोधन ने संरक्षकों के कर्तव्यों को परिभाषित किया है। इसके तहत संरक्षकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि स्वरूप सुरक्षित अभिरक्षा में रहें, उनका दुरुपयोग या उन्हें नुकसान न पहुंचे, और वे 'सिख रहत मर्यादा' का सख्ती से पालन करें। नुकसान, गायब होने या अपवित्रता के किसी भी संदिग्ध मामले की सूचना तुरंत पुलिस अधिकारियों और संबंधित प्रबंधन निकाय को दी जानी चाहिए। कोई भी व्यक्ति जो इस अधिनियम के तहत गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूपों की अपवित्रता का अपराध करता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दंडित किया जाएगा। इस कारावास की अवधि 7 वर्ष से कम नहीं होगी, लेकिन इसे बढ़ाकर 20 वर्ष तक किया जा सकता है। साथ ही, उस पर जुर्माना भी लगाया जाएगा, जो 2 लाख रुपये से कम नहीं होगा, लेकिन इसे बढ़ाकर 10 लाख रुपये तक किया जा सकता है। कोई भी व्यक्ति जो आपराधिक षड्यंत्र के तहत, शांति या सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने के इरादे से, इस अधिनियम के तहत गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूपों की अपवित्रता का अपराध करता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दंडित किया जाएगा। इस कारावास की अवधि 10 वर्ष से कम नहीं होगी, लेकिन इसे बढ़ाकर आजीवन कारावास तक किया जा सकता है। साथ ही, उस पर जुर्माना भी लगाया जाएगा, जो 5 लाख रुपये से कम नहीं होगा, लेकिन इसे बढ़ाकर 25 लाख रुपये तक किया जा सकता है। कोई भी व्यक्ति जो इस अधिनियम के तहत किसी अपराध को करने में सहायता करता है, उसे उसी दंड का भागीदार माना जाएगा जो उस अपराध के लिए निर्धारित है, जिसमें उसने सहायता की है। कोई भी व्यक्ति जो इस एक्ट के तहत कोई अपराध करने की कोशिश करता है, उसे किसी भी तरह की जेल की सज़ा दी जाएगी, जो तीन साल से कम नहीं होगी, लेकिन पांच साल तक बढ़ सकती है। उस पर जुर्माना भी लगाया जाएगा, जो 1 लाख रुपये से कम नहीं होगा, लेकिन 3 लाख रुपये तक बढ़ सकता है। वहीं, बेअदबी करने वाला अगर मनोरोगी या मानसिक स्थिति ठीक होने की बात कहता हैं तो उसकी बाकायदा जांच होगी। ऑफिशियल गैजेट में नोटिफिकेशन के बाद लागू होगा यह कानून तब लागू होगा जब सरकार इसे ऑफिशियल गैजेट में नोटिफाई करेगी। 2008 के कानून को पूरी तरह से बदलने के बजाय उसमें संशोधन करके, सरकार ने गुरु ग्रंथ साहिब की सुरक्षा, कस्टडी और पवित्रता के लिए एक ज़्यादा सख़्त और व्यवस्थित कानूनी ढांचा बनाने की कोशिश की है। बेअदबी पर तीसरा बिल पंजाब में पहले भी 2016 और 2018 में अपमान से जुड़े दो बिल पेश किए जा चुके हैं। 2016 के प्रस्ताव में गुरु ग्रंथ साहिब के अपमान के लिए उम्रकैद और दूसरे धार्मिक ग्रंथों के लिए 10 साल की सज़ा का प्रावधान था। इसे केंद्र सरकार ने कुछ आपत्तियों के साथ … Read more

छत्तीसगढ़ के Gariaband में चिंता बढ़ी: 3 युवाओं की आत्महत्या के बाद पुलिस का बड़ा कदम, लगेगा गाइडेंस कैंप

गरियाबंद. जहां 15 दिनों में 3 युवाओं ने आत्महत्या कर ली, उसी थाना क्षेत्र में प्रभारी एसपी ने थाना कैम्पस में करियर गाइडेंस कैंप लगाया. कैंप के जरिए 100 से ज्यादा ग्रामीण युवकों को बताया कि मुश्किल की घड़ी में मोबाइल नहीं, परिवार को सहारा बनाएं. सफलता का पैमाना संपत्ति नहीं, संतुष्टि है. नशा से दूर रहेंगे तो सफलता कदम चूमेगी। प्रभारी एसपी नीरज चंद्राकर ने देवभोग थाना कैम्पस में करियर गाइडेंस कैंप का आयोजन किया, जिसमें नगर एवं ग्रामीण क्षेत्र से 100 से ज्यादा युवा पहुंचे। चंद्राकर ने मार्गदर्शन की शुरुआत एक ऐसे छात्र के किस्से से शुरू किया, जिसने इंटर की पढ़ाई में अधिकतम 44 प्रतिशत अंक प्राप्त किया, समाज और परिवार के नजरिए वो असफल था, पर अपनी अन्य सकारात्मक रुचियों के चलते छात्र पढ़ाई क्षेत्र में अपने आप को सफल मानता रहा। समय के साथ लक्ष्य निर्धारित किया, विषम परिस्थितियों का डट कर मुकाबला किया पिता के बताए आदर्शों का पालन किया और पहली प्रयास में यूपीएसी एक्जाम में सफल हो गया। कहानी के अंत में बताया कि वो छात्र कोई और नहीं बल्कि स्वयं हैं। प्रभारी एसपी ने कहा कि सफलता का पैमाना संपत्ति नहीं बल्कि संतुष्टि से है।सफलता के मूल मंत्र को बताते हुए कहा कि सबसे पहले अपने सबसे प्रिय वस्तु का त्याग करना है जो आज के परिवेश में मोबाइल है।नशा पान से दूर रहना,जरूरत पूरा करने के लिए गलत रस्ते पर नहीं चलना, परेशानी में पड़े तो परिवार को समाधान का माध्यम बनाने की सलाह दिया ।ग्रुप स्टडी, डिस्कशन,डाइट,गाइड और स्वास्थ्य कैरियर की सफलता के लिए जरूरी है। युवाओं से सार्थक संवाद कर एसपी चंद्राकर ने कहा कि हर काम में सकारात्मक सोच के साथ मन की संतुष्टि लाए तो सफल पीछे पीछे भाग आएगी।आयोजन में मंचस्थ नगर पंचायत अध्यक्ष राजेश तिवारी, उपाध्यक्ष सुशील यादव, आप नेता मनोज मिश्रा ने पुलिस की इस पहल की सराहना किया।पत्रकार जयविलास शर्मा ने मंच का संचालन किया।थाना प्रभारी फैजुल हुदा शाह ने आयोजन को सफल बनाने उपस्थिति कॉलेज प्रोफेसर,गणमान्य नागरिक एवं मौजूद युवाओं का आभार व्यक्त किया। युवाओं की आत्महत्या पर कहा… 31 मार्च से 16 अप्रैल तक खुटगांव पंचायत में ही तीन युवकों ने फांसी पर लटक आत्महत्या कर लिया, तीनों की उम्र 17 से 21 साल के बीच थी। इससे पहले भी दिसंबर में इसी पंचायत से एक युवक ने आत्महत्या किया था। संवाद के दरम्यान एक युवक ने इन पर सवाल केंद्रित किया। प्रभारी एसपी ने कहा कि सभी मौत के पीछे लगभग एक ही कारण कॉमन पाए गए। मौत को गले लगाने वाले युवाओं पर परिवार ने कोई लक्ष्य तय कर नहीं दिया था। मोबाइल में व्यस्तता भी कॉमन थी। यही अगर परेशान होने की स्थिति में अपनी बाते मोबाइल के बजाए परिवार का सहयोग लेकर मन हल्का करते तो ये नौबत नहीं आती। युवाओं को इन घटनाओं से सबक लेकर सदैव परिवार के मार्गदर्शन में आगे बढ़ने की सलाह भी अफसर ने दिया। निशुल्क पीएससी कोचिंग की ली जिम्मेदारी प्रभारी एसपी ने संवाद के दरम्यान ही मंच से ऐलान किया कि अगर कोई रायपुर में पीएससी कोचिंग ज्वाइन करना चाहे तो उन्हें मै निःशुल्क कोचिंग दिलाने की जवाबदारी लूंगा। युवाओं से भरे मंच में पीएससी करने के सवाल पर कोई हाथ नहीं खड़ा किया। तभी उन्हें मोटिव कर बढ़ावा देने प्रभारी एसपी ने यह ऐलान किया है। छात्रों ने भी जल्द मन बना कर संपर्क करने की बात कही। पुलिस भर्ती में जाने के इच्छुक छात्र को पुलिस परीक्षा की तैयारी, फिजिकल तैयारी कराने के लिए थाना प्रभारी को निर्देशित किया।

26 साल बाद न्याय, कोर्ट ने CBI के जॉइंट डायरेक्टर और रिटायर्ड DP एसीपी को दोषी करार दिया

नई दिल्ली दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने 26 साल बाद दो बड़े अधिकारियों को एक मामले में दोषी ठहराया है। इनमें सीबीआई के मौजूदा जॉइंट डायरेक्टर और दिल्ली पुलिस के एक रिटायर्ड एसीपी शामिल हैं। दोनों को मारपीट, आपराधिक घुसपैठ और शरारत के मामलों में दोषी ठहराया गया है। कोर्ट ने सजा पर दलीलें सुनने के लिए मामले को 27 अप्रैल को सूचीबद्ध किया है। ऊंचे पदों पर बैठे अधिकारियों द्वारा शक्तियों के दुरुपयोग से जुड़े एक अहम फैसले में तीस हजारी कोर्ट ने शनिवार को सीबीआई के मौजूदा जॉइंट डायरेक्टर और दिल्ली पुलिस के एक रिटायर्ड असिस्टेंट कमिश्नर (एसीपी) को मारपीट, आपराधिक घुसपैठ और शरारत के मामलों में दोषी ठहराया। यह मामला लगभग 26 साल पहले पूर्व आईआरएस अधिकारी अशोक कुमार अग्रवाल के खिलाफ तड़के की गई एक छापेमारी से जुड़ा है। कोर्ट ने इसे न्यायिक आदेशों को दरकिनार करने की एक बदनीयत कोशिश बताया। दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने सीबीआई के जॉइंट डायरेक्टर रामनीश और दिल्ली पुलिस के एक रिटायर्ड असिस्टेंट कमिश्नर वीके पांडे को मारपीट, आपराधिक घुसपैठ और शरारत के एक मामले में दोषी ठहराया। यह मामला साल 2000 में किए गए अपराध से जुड़ा है। सजा पर 27 को होगी बहस प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट शशांक नंदन भट्ट ने रामनीश (वर्तमान में सीबीआई में संयुक्त निदेशक के पद पर कार्यरत हैं) और वीके पांडे (दिल्ली पुलिस के रिटायर्ड एसीपी) को भारतीय दंड संहिता की धारा 323, 427, 448 और 34 के तहत हमला, आपराधिक घुसपैठ और शरारत करने के अपराध में दोषी ठहराया है। रामनीश साल 2000 में सीबीआई में पुलिस उपाधीक्षक और वीके पांडे सीबीआई में इंस्पेक्टर के पद पर तैनात थे। कोर्ट ने सजा पर दलीलें सुनने के लिए इस मामले को 27 अप्रैल को सूचीबद्ध किया है। शिकायतकर्ता भी आईआरएस अधिकारी शिकायतकर्ता अशोक कुमार अग्रवाल 1985 बैच के आईआरएस अधिकारी हैं। उस समय वह ईडी में दिल्ली जोन के उप निदेशक के पद पर कार्यरत थे। कोर्ट ने उनके खिलाफ चल रहे सीबीआई के दोनों मामलों से बरी कर दिया। आरोपियों को दोषी ठहराते हुए कोर्ट ने माना कि 19 अक्तूबर 2000 को की गई तलाशी और गिरफ्तारी की कार्रवाई दुर्भावनापूर्ण तरीके से की गई थी। इसका एकमात्र उद्देश्य 28 सितंबर 2000 के कैट के उस आदेश को निष्प्रभावी करना था, जिसमें शिकायतकर्ता के 'मानित निलंबन' (डीम्ड सस्पेंशन) की चार सप्ताह के भीतर समीक्षा करने का निर्देश दिया गया था। कोर्ट ने शक्तियों का घोर उल्लंघन बताया कोर्ट ने यह भी माना कि आरोपियों ने कानून द्वारा उन्हें प्रदत्त शक्तियों का घोर उल्लंघन किया। उनके कृत्य सरकारी कर्तव्य के निर्वहन के दायरे में नहीं आते हैं। इसलिए वे सीआरपीसी की धारा 197 या दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 140 के तहत मिलने वाली सुरक्षा के हकदार नहीं हैं। कोर्ट ने पाया कि आरोपी ने शिकायतकर्ता के घर का मुख्य स्लाइडिंग दरवाजा तोड़ दिया था जो कि नुकसान पहुंचाने और आपराधिक घुसपैठ का मामला बनता है। इस बात की पुष्टि तो आरोपी द्वारा दिल्ली हाई कोर्ट में पेश की गई अपनी खुद की सर्च लिस्ट से भी होती है। छापेमारी के दौरान शिकायतकर्ता के दाहिने हाथ में चोट लगी थी। इस बात की पुष्टि प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही, शिकायतकर्ता की एमएलसी रिपोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट में आरोपी वीके पांडे द्वारा दायर किए गए जवाबी हलफनामे से भी होती है। सीबीआई अधिकारियों ने गुप्त बैठक की कोर्ट ने यह भी पाया कि कैट के निर्देशानुसार 18 अक्तूबर 2000 तक इनकम टैक्स विजिलेंस डायरेक्टोरेट को जरूरी जवाब भेजने के बजाय सीबीआई अधिकारी ने 18 अक्टूबर 2000 की शाम को एक गुप्त बैठक की और ठीक अगली सुबह ही शिकायतकर्ता के घर पर छापा मारने और उसे गिरफ्तार करने का फैसला कर लिया। मिलीभगत करके शिकायत दर्ज कराई शिकायतकर्ता की ओर से पेश एडवोकेट शुभम आसरी ने दलील दी कि प्रभावशाली लोगों से जुड़े संवेदनशील फेरा मामलों की जांच करते समय उन्हें अपने वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से लगातार दबाव का सामना करना पड़ा। उन्होंने 1998 और 1999 के बीच अपनी जांच में हो रहे हस्तक्षेप के संबंध में राजस्व सचिव को सात बार अपनी बात रखी। वकील ने दलील दी कि कथित बदले की भावना से अभिषेक वर्मा नाम के एक व्यक्ति ने (जिसकी जांच शिकायतकर्ता कर रहे थे) सीबीआई अधिकारियों के साथ मिलीभगत करके उनके खिलाफ शिकायत दर्ज करा दी। बाउंड्री वॉल फांदकर घर में घुसे आरोप लगाया गया था कि 19 अक्टूबर 2000 को सुबह लगभग 5 बजे सीबीआई अधिकारियों की एक टीम शिकायतकर्ता के घर पहुंची। जब सुरक्षा गार्ड ने पहचान का सबूत मांगा तो उसे पीटा गया। टीम ने बाउंड्री वॉल फांदकर घर में प्रवेश किया, मुख्य स्लाइडिंग दरवाजा तोड़ दिया, परिवार के सदस्यों को एक कमरे में बंद कर दिया और शिकायतकर्ता को उसके बेडरूम से उसके अंतर्वस्त्रों में ही घसीटकर बाहर निकाल लिया। सीढ़ियों पर धक्का दिया गया यह भी आरोप लगाया गया था कि शिकायतकर्ता के साथ जोर-जबरदस्ती की गई और उसे सीढ़ियों पर धक्का दिया गया, जिससे उसकी दाहिनी बांह में चोटें आईं। उसे सुबह 8:45 बजे डीडीयू अस्पताल में पेश किए जाने से पहले पीरागढ़ी चौक के पास किसी अज्ञात स्थान पर ले जाया गया था। उसे धमकी दी गई थी कि यदि उसने सीबीआई कोर्ट के समक्ष यह मुद्दा उठाया तो उसके परिवार के सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। बचाव पक्ष की दलीलें खारिज कीं आरोपियों को दोषी ठहराते हुए कोर्ट ने बचाव पक्ष की दलीलों को विरोधाभासों से भरा बताते हुए खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि आरोपी की अपनी तलाशी सूची (जो दिल्ली हाई कोर्ट में दायर की गई थी) से यह पुष्टि हुई कि मुख्य दरवाजा टूटा हुआ था। जबकि ट्रायल के दौरान बचाव पक्ष के गवाहों ने दावा किया था कि सिर्फ एक कुंडी अपनी जगह से हट गई थी। कोर्ट ने इस दलील को भी खारिज कर दिया कि मेडिको-लीगल केस साबित नहीं हुआ था। कोर्ट ने कहा कि आरोपी वीके पांडे ने खुद इसे स्वीकार किया था और यह दिल्ली हाई कोर्ट में उनके अपने हलफनामे का हिस्सा था। इसमें शिकायतकर्ता के शरीर पर मामूली चोटों का जिक्र था। शिकायत दर्ज करने में हुई देरी के मामले में कोर्ट ने कहा कि शिकायत दर्ज करने … Read more

उप मुख्यमंत्री अरुण साव से डॉ वर्णिका शर्मा आयोग की भेंट, उप मुख्यमंत्री की मानवीय संवेदनशीलता पर आभार

रायपुर   माननीय उप मुख्यमंत्री अरुण साव जी से आयोग की अध्यक्ष डॉ वर्णिका शर्मा ने भेंट की । उन्होंने छत्तीसगढ़ के बाल गृह कोंडागांव की पूर्व छात्रा कु रंजीता कुरैठी के बारे में बताया कि उसने जूडो में राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड जीते हैं और भारतीय दल में शामिल रही है । डॉ वर्णिका शर्मा ने माननीय अरुण साव जी को बताया कि इस बच्ची को प्रशिक्षण हेतु जापान भेजने और मासिक रूप से अतिरिक्त पोषक आहार के लिए राशि की जरूरत है । ननीय अरुण साव उपमुख्यमंत्री एवं खेल एवं युवा कल्याण मंत्री ने फौरन अपनी संवेदनशीलता दिखाई और बच्ची से तुरंत वीडियो कॉल पर बात की । उन्होंने खेल विभाग के अधिकारियों को तत्काल आवश्यक सहायता देने की व्यवस्था के निर्देश दिए । डॉ वर्णिका शर्मा ने बताया कि आयोग द्वारा आरम्भ किए गए सार्थक अभियान के तहत पिछले बाल देखरेख संस्थाओं को छोड़कर जाने वाले अट्ठारह वर्ष की आयु के बालक बालिकाओं के भविष्य निर्माण के लिए आयोग द्वारा ठोस कदम उठाए जा रहे हैं । इसी कड़ी में ये प्रयास भी शामिल है । डॉ वर्णिका शर्मा ने आयोग की ओर से माननीय उपमुख्यमंत्री जी की इस सार्थक और संवेदनशील  पहल के लिए उनका हृदय से आभार व्यक्त किया है । इस अवसर पर डॉ वर्णिका शर्मा ने बच्चों के खेल मैदानों को सुरक्षित करने ,आवारा कुत्तों से बच्चों के बचाव और नगरीय क्षेत्र में खुले गड्ढे के चारों ओर बाड़ी लगाकर बच्चों को बचाने के संबंध में भी बातचीत की । उपमुख्यमंत्री जी ने इन विषयों को तत्काल आगामी विभागीय बैठक में शामिल करते हुए ठोस कार्यवाही का आश्वासन दिया ।

भिवानी की बेटी Preeti Pawar ने किया कमाल, एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप में जीता गोल्ड

भिवानी. मुक्केबाजी के रिंग में भिवानी की बेटी 54 किलोग्राम भार वर्ग में प्रीति पंवार ने ऐसा पंच लगाया, जिसकी गूंज एशिया तक सुनाई दी। भारतीय सेना में नायब सूबेदार बनने के बाद पहली ही अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में उन्होंने स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि सेना में भर्ती के बाद इतना बड़ा मुकाम हासिल करना हर खिलाड़ी के लिए सपना होता है। प्रीति ने न सिर्फ उस सपने को पूरा किया, बल्कि देश का मान भी बढ़ाया। भारतीय थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने अप्रैल 2026 में मंगोलिया में आयोजित एशियन बाक्सिंग चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करने वाले भारतीय सेना के मुक्केबाजों को सम्मानित किया। टीम के कोच सूबेदार मोहम्मद ऐतेशामुद्दीन को भी खिलाड़ियों के उत्कृष्ट मार्गदर्शन और अहम योगदान के लिए सम्मानित किया गया। पदक विजेता को 75 हजार रुपये की सम्मान राशि भी प्रदान की गई। परिवार का साथ, चाचा से मिली राह गांव बड़ेसरा की रहने वाली प्रीति की सफलता के पीछे परिवार का बड़ा योगदान है। पिता सोमबीर सिंह हरियाणा पुलिस में एएसआइ हैं और मां सलीन देवी गृहिणी हैं। 2017 में आठवीं कक्षा के दौरान चाचा व कोच विनोद पंवार से प्रेरित होकर उन्होंने बाक्सिंग शुरू की। बेटी के सपनों को उड़ान देने के लिए परिवार महम शिफ्ट हो गया। यही समर्पण आज उनकी सफलता की मजबूत नींव बना। प्रीति रोजाना करीब पांच घंटे कड़ी ट्रेनिंग करती हैं। सुबह और शाम दोनों समय रिंग में अभ्यास करते हुए वे अपनी तकनीक को निखारती हैं। हर दिन अपनी कमजोरियों को दूर करना और बेहतर बनना ही उनका लक्ष्य रहता है। यही मेहनत और अनुशासन उन्हें दूसरों से अलग बनाता है और इंटरनेशनल स्तर पर जीत दिलाता है। जुलाई में कामनवेल्थ और बाद में एशियन गेम्स प्रीति अब जुलाई में स्काटलैंड के ग्लासगो में होने वाले कामनवेल्थ गेम्स और इसके बाद जापान में एशियन गेम्स की तैयारी में जुटी हैं। उनका लक्ष्य साफ है कि हर बड़े मंच पर गोल्ड जीतना। उनकी इस उपलब्धि से भिवानी के युवा खिलाड़ियों में नई ऊर्जा आई है और खेलों के प्रति उत्साह बढ़ा है। खेल प्रेरक व अधिवक्ता राजनारायण पंघाल ने कहा कि प्रीति पंवार ने दिखा दिया कि अगर जुनून और मेहनत हो तो कोई भी लक्ष्य दूर नहीं। उनकी जीत पूरे भिवानी और हरियाणा के लिए गर्व की बात है। वे आने वाले समय में देश के लिए और बड़े पदक जीतेंगी।

लाइव कैमरे में खुलासा: Ludhiana में पार्षद ने महिला को ड्रग्स के साथ रंगे हाथों पकड़ा

लुधियाना. संजय गांधी कालोनी में शुक्रवार देर रात पार्षद और स्थानीय लोगों ने इंटरनेट मीडिया पर लाइव होकर एक महिला को नशीले पदार्थ के साथ पकड़ा। अकाली दल के पार्षद छतरवीर सिंह ने आरोप लगाया कि महिला लंबे समय से इलाके में नशे का कारोबार कर रही थी। कई बार समझाने के बावजूद वह अपनी गतिविधियों से बाज नहीं आई। इसी के चलते शुक्रवार रात मोहल्ला निवासियों के सहयोग से उसे रंगे हाथ पकड़ा गया। पार्षद और लोगों का दावा है कि महिला के पास से एक प्लास्टिक डिब्बी में 5 से 7 संदिग्ध पैकेट बरामद हुए और पुलिस को बुलाकर हवाले कर दिया गया। घटना के दौरान मौजूद लोगों ने महिला को पकड़कर उससे पूछताछ भी की। वीडियो में महिला खुद को ताजपुर रोड क्षेत्र की निवासी बता रही है। हालांकि, पुलिस की प्राथमिक जांच में अलग तथ्य सामने आए। थाना डिवीजन नंबर सात की पुलिस के अनुसार, महिला नशा तस्कर नहीं बल्कि नशे की आदी है। महिला की स्वास्थ्य स्थिति भी ठीक नहीं है और उसे इलाज की जरूरत है। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि महिला को जल्द नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती करवाया जाएगा। फिलहाल मामले की जांच जारी है और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।