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CM विष्णुदेव साय का सिंगापुर दौरा, भारत-सिंगापुर बिजनेस सम्मेलन में होंगे शामिल

रायपुर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय 2 से 7 अक्टूबर तक सिंगापुर प्रवास पर रहेंगे। इस दौरान वे वहां होने वाले भारत-सिंगापुर विकास एवं कारोबार सम्मेलन में शामिल होंगे। यह सम्मेलन भारत और सिंगापुर के बीच व्यापार, निवेश और औद्योगिक साझेदारी बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। हालांकि अभी इस कार्यक्रम का आधिकारिक ब्योरा जारी नहीं किया गया है। उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री की इस विदेश यात्रा के कार्यक्रम को अंतिम रूप दिया जा रहा है।  बताया गया है कि,  सम्मेलन में श्री साय 4 से 6 अक्टूबर के बीच शामिल होंगे। उनके साथ सीएम सचिवालय के अधिकारियों के साथ उद्योग विभाग के वरिष्ट अधिकारी भी शामिल होंगे। सिंगापुर व्यापार महासंघ की ओर से आयोजित इस सम्मेलन में भारत के विभिन्न राज्यों की आर्थिक और औद्योगिक संभावनाओं को अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों के सामने रख जाएगा। सम्मेलन में निवेश के अवसर, नए कारोबार बाजार तक पहुंच, औद्योगिक साझेदारी और दोन देशों की कंपनियों के बीच सहयोग पर चर्चा होगी। उद्योग, परिवहन और नई तकनीक पर रहेगा जोर मुख्यमंत्री के सिंगापुर कार्यक्रम में उद्योग, परिवहन और नई तकनीक से जुड़े क्षेत्रों पर विशेष जोर रहेगा।संभावित निवेशकों के साथ नई परियोजनाओं की स्थापना, तकनीकी सहयोग और उद्योगों के विस्तार से संबंधित मुद्दों पर चर्चा प्रस्तावित है। तकनीकी क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों और निवेशकों के प्रतिनिधियों के साथ भी संवाद होने की संभावना है। निवेशकों के सामने रखेंगे छत्तीसगढ़ की औद्योगिक क्षमता सिंगापुर प्रवास के दौरान होने वाली बैठकों में छत्तीसगढ़ की औद्योगिक क्षमता और विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध परियोजना संभावनाओं को प्रमुखता से प्रस्तुत किया जाएगा।सरकार का उद्देश्य प्रदेश में नए निवेश को आकर्षित करने के साथ औद्योगिक गतिविधियों और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देना है। इसके लिए निवेशकों को राज्य में उपलब्ध संसाधनों और उद्योगों के विस्तार की संभावनाओं की जानकारी दी जाएगी। विदेशी निवेश आकर्षित करने पर फोकस मुख्यमंत्री के इस प्रस्तावित दौरे में निवेशकों के साथ सीधे संवाद को प्रमुखता दी गई है। बैठकों में उद्योग स्थापना, नई परियोजनाओं, तकनीकी सहयोग और निवेश के उपलब्ध अवसरों पर बातचीत होगी।दौरे के दौरान छत्तीसगढ़ की औद्योगिक क्षमता, नई तकनीक और विभिन्न क्षेत्रों में परियोजनाओं की संभावनाओं को अंतरराष्ट्रीय कारोबारी प्रतिनिधियों के सामने रखने की योजना है। हरियाणा-सिंगापुर बिजनेस फोरम और निवेश सम्मेलन हरियाणा के मुख्यमंत्री भी होंगे शामिल सूत्रों के अनुसार, इसी सम्मेलन में हरियाणा के मुख्यमंत्र नायब सिंह सैनी भी शामिल होंगे। सिंगापुर की ओर से वहां के मंत्री स्तर के प्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे सम्मेलन में भारत और सिंगापुर के कारोबारी प्रतिनिधियों के बीच निवेश और औद्योगिक साझेदार की संभावनाओं पर चर्चा होगी। छत्तीसगढ़ पर रहेगी नजर मुख्यमंत्री श्री साय के लिए यह दौरा छत्तीसगढ़ को अंतर्राष्ट्रीय निवेश के नए केंद्र के रूप में प्रस्तुत करने का अवसर होगा। राज्य सरकार की ओर से छत्तीसगढ़ की औद्योगिक क्षमता, प्राकृतिक संसाधन, खनिज संपदा, बिजली उपलब्धता, अधोसंरचना और निवेश के लिए बनाई गई नीतियों की जानकारी निवेशकों को दी जा सकती है। राज्य की कोशिश केवल कच्चे खनिज के दोहन तक सीमित न रहकर खनिज आधारित उद्योगों में अधिक से अधिक मूल्य संवर्धन, विनिर्माण, परिवहन एवं भंडारण, निर्यात और नई तकनीक आधारित उद्योगों को आकर्षित करने की है। सिंगापुर जैसे अंतर्राष्ट्रीय कारोबारी केंद्र में मुख्यमंत्री की मौजूदगी इस दिशा में महत्वपूर्ण अवसर मानी जा रही है। सम्मेलन में छत्तीसगढ़ की संभावनाएं रखेंगे भारत-सिंगापुर विकास और कारोबार सम्मेलन में व्यापार, निवेश और औद्योगिक सहयोग से जुड़े विषयों पर चर्चा होगी। मुख्यमंत्री यहां छत्तीसगढ़ में निवेश के अवसरों और उद्योगों के लिए उपलब्ध संभावनाओं की जानकारी देंगे। सरकार का उद्देश्य नए निवेश के साथ प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देना है। सिंगापुर प्रवास के दौरान निवेशकों के साथ होने वाली बैठकों में छत्तीसगढ़ की औद्योगिक क्षमता, नई तकनीक और विभिन्न क्षेत्रों में परियोजनाओं की संभावनाओं को प्रमुखता से रखा जाएगा। दौरे के जरिए प्रदेश में विदेशी निवेश की संभावनाओं को बढ़ाने और निवेशकों को छत्तीसगढ़ की ओर आकर्षित करने पर जोर रहेगा। सीधे संवाद का अवसर बताया गया है कि,  सम्मेलन में निवेशकों, उद्योगपतियों और विभिन्न कारोबारी संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ संवाद होगा। इसके जरिए छत्तीसगढ़ में निवेश की संभावनाओं और राज्य में उद्योग लगाने के लिए उपलब्ध सुविधाओं को सीधे अंतर्राष्ट्रीय कारोबार समुदाय तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा।

30 साल पुराने नजूल भूमि विवाद का हुआ समाधान, मंडलायुक्त की निगरानी से आया बड़ा मोड़

योगी सरकार की प्रशासनिक दक्षता से 30 साल पुराना नजूल भूमि विवाद सुलझा -मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल की लगातार समीक्षा, निगरानी और प्रभावी पैरवी से मामले में आया बड़ा मोड़ -वादी ने न्यायालय में आगे पैरवी न करने का दिया शपथ-पत्र, मौके से भी हटाया 30 साल पुराना कब्जा -आयुक्त कार्यालय एवं भवन के लिए आरक्षित चार नजूल भूखंड अब सुरक्षित रखने की दिशा में कार्रवाई तेज लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की संवेदनशील प्रशासनिक सोच और शासकीय भूमि के संरक्षण को लेकर स्पष्ट नीति का असर अब पुराने लंबित मामलों में भी दिखाई दे रहा है। देवीपाटन मंडल में करीब 30 वर्ष से लंबित नजूल भूमि का एक प्रकरण प्रशासन की सक्रियता और प्रभावी निगरानी से नए मोड़ पर पहुंचा है। मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल की लगातार समीक्षा, निगरानी और प्रभावी पैरवी के बीच मामले के वादी ने न्यायालय में शपथ-पत्र देकर आगे पैरवी न करने और कार्यवाही समाप्त किए जाने का अनुरोध किया है। इसके साथ ही संबंधित पक्ष ने सरकारी भूमि से अपना करीब 30 वर्ष पुराना कब्जा भी स्वयं हटा लिया है।  यह मामला गोंडा में मंडलायुक्त कार्यालय एवं भवन के लिए आरक्षित नजूल भूखंड संख्या 514, 515, 524 और 525 से जुड़ा है। प्रकरण वर्ष 1997 से न्यायालय में लंबित था। वर्ष 2008 में स्थगन आदेश पारित होने के बाद भी मामले में विधिक पैरवी जारी रही। सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराने के अभियान के दौरान यह पुराना प्रकरण प्रशासन के संज्ञान में आया, जिसके बाद देवीपाटन मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल ने दोबारा समीक्षा शुरू की। अवैध संचालित विद्यालय में नहीं मिला कोई विद्यार्थी और शिक्षक  पुराने नजूल भूमि प्रकरण की जानकारी सामने आने के बाद मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल ने मामले की लगातार समीक्षा की। अभिलेखों और न्यायालयीन स्थिति की पड़ताल कराई गई। साथ ही संबंधित अधिकारियों को सरकारी पक्ष मजबूती से रखने और शासकीय हितों की रक्षा के लिए प्रभावी विधिक पैरवी के निर्देश दिए गए। जांच के दौरान भूमि पर अवैध विद्यालय संचालित होने की बात भी सामने आई। प्रशासन ने मौके की स्थिति की पड़ताल कराई तो वहां वर्तमान में कोई विद्यार्थी या शिक्षक नहीं मिला। इसके बाद जमीन की वास्तविक स्थिति की निगरानी भी की गई। वादी/अतिक्रमणकारी कोर्ट में पीछे हटे, मौके से भी कब्जा हटाया प्रकरण में वादी/अतिक्रमणकारी दयानन्द मिश्र की ओर से न्यायालय में शपथ-पत्र प्रस्तुत किया गया। इसमें उन्होंने वाद में आगे पैरवी न करने और कार्यवाही समाप्त किए जाने का अनुरोध किया है। मामले की अहम बात यह है कि संबंधित पक्ष ने न्यायालय में कानूनी पैरवी से पीछे हटने के साथ ही मौके से अपना कब्जा भी हटा लिया। इस तरह करीब तीन दशक से लंबित विवाद में एक ओर न्यायिक प्रक्रिया के स्तर पर बदलाव आया, वहीं दूसरी ओर जमीन की भौतिक स्थिति भी बदल गई। 1997 में शुरू हुआ मामला, अब कब्जामुक्त हुई जमीन वर्ष 1997 में शुरू हुए विवाद को न्यायिक प्रक्रिया में करीब तीन दशक हो चुके थे। वर्ष 2008 के स्थगन आदेश के बाद भी मामला लंबित रहा। अब वर्ष 2026 में वादी के शपथ-पत्र और मौके से कब्जा हटने के बाद प्रशासन के सामने इन भूखंडों को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी है। मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल ने बताया कि देवीपाटन आयुक्त कार्यालय एवं भवन के लिए आरक्षित इन भूखंडों को सुरक्षित रखते हुए निर्धारित शासकीय प्रयोजन में उपयोग सुनिश्चित करने की दिशा में कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि योगी सरकार की प्रशासनिक दक्षता और शासकीय संपत्तियों के संरक्षण की प्राथमिकता के तहत पुराने और लंबित मामलों की भी समीक्षा की जा रही है। इसी क्रम में तीन दशक पुराने इस नजूल भूमि प्रकरण की फाइल दोबारा खुली और न्यायिक स्थिति के साथ मौके की वास्तविक स्थिति भी परखी गई। मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल की निगरानी में हुई कार्रवाई के बाद अब प्रशासन का फोकस इन भूखंडों की सुरक्षा और निर्धारित शासकीय उपयोग सुनिश्चित करने पर है। यह प्रकरण बताता है कि लंबे समय से लंबित मामलों की नियमित समीक्षा, मजबूत पैरवी और प्रशासनिक निगरानी के जरिए शासकीय हितों की रक्षा की जा सकती है। वर्जन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप शासकीय भूमि का संरक्षण और जनहित में उसका उपयोग सर्वोच्च प्राथमिकता है। करीब 30 वर्षों से लंबित इस प्रकरण में संबंधित पक्ष ने न्यायालय में आगे पैरवी न करने का अनुरोध किया है और मौके से भी कब्जा हटा लिया है। अब भूमि को सुरक्षित रखते हुए निर्धारित शासकीय प्रयोजन में उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा। दुर्गा शक्ति नागपाल, मंडलायुक्त, देवीपाटन

खुली मिठाइयों पर भी होगी ‘यूज बाई डेट’, यूपी में 15 अक्टूबर से नया नियम

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में मिठाई खरीदने वाले उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और हितों को ध्यान में रखते हुए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने नई व्यवस्था लागू किया है। अब राज्य में 15 अक्टूबर से विक्रय के लिए प्रदर्शित एवं भंडारित मिठाइयों पर ‘यूज बाई डेट’ यानी उपयोग की अंतिम तिथि प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा। यह व्यवस्था विशेष रूप से खुली मिठाइयों को लेकर महत्वपूर्ण है, जिनके संबंध में अब तक उपयोग की अंतिम तिथि प्रदर्शित करने का कोई अनिवार्य प्रविधान नहीं था। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की आयुक्त रोशन जैकब द्वारा जारी आदेश के अनुसार अलग-अलग मिठाइयों की उपयोग अवधि एक दिन से लेकर 30 दिन तक हो सकती है। विभाग का मानना है कि मिठाई की यूज बाई डेट स्पष्ट रूप से प्रदर्शित होने से उपभोक्ता को यह जानकारी मिल सकेगी कि संबंधित खाद्य पदार्थ का सेवन किस अवधि तक किया जाना उचित है। इससे खाद्य पदार्थ की ताजगी और गुणवत्ता को लेकर उपभोक्ता अधिक जागरूक निर्णय ले सकेगा। वर्तमान व्यवस्था के तहत पैक्ड मिठाइयों पर अवसान तिथि अथवा ‘यूज बाई डेट’ अंकित किया जाना अनिवार्य है। हालांकि, खुली मिठाइयों के संबंध में इस प्रकार की जानकारी प्रदर्शित करने का कोई स्पष्ट अनिवार्य प्रविधान नहीं था। दूध प्रसंस्करण में एथिलीन ग्लाइकोल के इस्तेमाल पर रोक उत्तर प्रदेश में दुग्ध एवं दुग्ध उत्पादों की प्रसंस्करण इकाइयों में एथिलीन ग्लाइकोल और डाई एथिलीन ग्लाइकोल के प्रयोग पर रोक लगा दी गई है। निरीक्षण में पता चला कि कुछ दुग्ध प्रसंस्करण प्रतिष्ठानों में पाश्च्युरीकरण, प्रशीतन आदि प्रक्रियाओं में एथिलीन ग्लाइकोल अथवा डाई एथिलीन ग्लाइकोल का इस्तेमाल कूलेंट के रूप में किया जा रहा है। ये रसायन स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हैं। प्रसंस्करण उपकरणों में लीकेज होने पर इनके दूध में मिल जाने की आशंका को देखते हुए इनके इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है। इसके स्थान पर प्रोपिलीन ग्लाइकोल का इस्तेमाल किया जा सकता है, जिसका उपयोग कई दुग्ध प्रसंस्करण इकाइयों द्वारा पहले से किया जा रहा है।

झारखंड में 79.2% सड़क हादसे गंभीर, लगातार दूसरे साल देश में तीसरा स्थान

रांची सड़क दुर्घटनाओं की गंभीरता के मामले में झारखंड लगातार दूसरे वर्ष देश में तीसरे स्थान पर रहा है. सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की रिपोर्ट 'Road Accidents in India 2023-24' के अनुसार वर्ष 2023 में झारखंड में 78.5 प्रतिशत सड़क हादसे गंभीर श्रेणी के रहे. वर्ष 2024 में यह आंकड़ा 79.2 प्रतिशत रहा. मिजोरम पहले स्थान पर और बिहार दूसरे स्थान पर रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2023 में 90.6 प्रतिशत गंभीर सड़क हादसों के साथ मिजोरम पहले स्थान पर और 80.6 प्रतिशत के साथ बिहार दूसरे स्थान पर रहा. वर्ष 2024 में मिजोरम 93.2 प्रतिशत के साथ पहले, बिहार 80.5 प्रतिशत के साथ दूसरे और झारखंड 79.2 प्रतिशत के साथ तीसरे स्थान पर रहा. 2024 में देश में 1.77 लाख से अधिक मौतें रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2023 में देशभर में सड़क हादसों में 1,72,890 लोगों की मौत हुई थी. वर्ष 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर 1,77,175 हो गया. झारखंड में वर्ष 2023 में सड़क हादसों में 4,173 लोगों की मौत हुई, जबकि वर्ष 2024 में 4,114 लोगों की जान गयी. सबसे अधिक युवा हादसों की चपेट में आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023-24 में सड़क हादसों में मरने वालों में 18 वर्ष से कम उम्र के लोगों की हिस्सेदारी 5.7 प्रतिशत रही. 18 से 25 वर्ष आयु वर्ग की हिस्सेदारी 19.3 प्रतिशत, 25 से 35 वर्ष की 23.2 प्रतिशत, 35 से 45 वर्ष की 21.6 प्रतिशत और 45 से 60 वर्ष की 17.2 प्रतिशत रही. सड़क सुरक्षा संगठनों ने परिवहन सचिव को लिखा पत्र राज्य में सड़क दुर्घटनाओं की गंभीरता पर चिंता जताते हुए सड़क सुरक्षा से जुड़े संगठनों 'राइजअप' और 'लाइफ सेवर्स, रांची' ने परिवहन विभाग के सचिव राजीव रंजन को पत्र लिखा है. पत्र पर राइजअप के सदस्य ऋषभ आनंद तथा लाइफ सेवर्स, रांची के सदस्य विशाल एच शाह, मोहित चोपड़ा, पराग श्रीवास्तव और अतुल गेरा के हस्ताक्षर हैं. सड़क सुरक्षा समिति बनाने का निर्देश पत्र में मार्च 2022 में गठित सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी के निर्देशों का उल्लेख किया गया है. संगठनों के अनुसार प्रत्येक जिले में जिला सड़क सुरक्षा समिति बनाने का निर्देश दिया गया था. सीमित समीक्षा में राज्य के कई जिलों में इन निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं होने की बात कही गयी है. पत्र में यह भी बताया गया है कि 26 मार्च 2017 की अधिसूचना के तहत सड़क सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों के क्रियान्वयन के लिए परिवहन विभाग में लीड एजेंसी का गठन किया गया था. संगठनों ने सड़क सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाने की मांग की है.

छत्तीसगढ़ कोल घोटाले में बड़ा अपडेट, 35 आरोपियों पर दाखिल होगी फाइनल चार्जशीट

रायपुर. छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोल घोटाला मामले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) अब फाइनल चार्जशीट पेश करने की तैयारी में जुट गया है। 3 अक्टूबर को विशेष कोर्ट में मामले की फाइनल चार्जशीट पेश की जाएगी। इसे अंतिम रूप देने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। बताया जा रहा है कि कोल घोटाला मामले में करीब 35 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट पेश की जाएगी। वहीं, अग्रिम जमानत हासिल कर चुके आरोपियों से भी EOW की पूछताछ का सिलसिला तेज हो गया है। इसी कड़ी में कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव से भी EOW ने पूछताछ की है। उन्हें पूछताछ के लिए EOW कार्यालय बुलाया गया था, जहां करीब दो घंटे तक उनसे सवाल-जवाब किए गए। छत्तीसगढ़ के चर्चित कोल घोटाला मामले की जांच EOW के साथ प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी कर रहा है। अब EOW की ओर से विशेष कोर्ट में फाइनल चार्जशीट पेश किए जाने की तैयारी है। फाइनल चार्जशीट पेश होने के बाद इस मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है। ऐसे खड़ा हुआ लेवी वसूली का सिंडिकेट जांच एजेंसियों के मुताबिक, जुलाई 2020 से जून 2022 के बीच कोयला व्यापारियों और ट्रांसपोर्टरों से हर टन कोयला परिवहन पर 25 रुपए की अवैध लेवी वसूली जाती थी। इसके लिए खनन विभाग के नियमों में बदलाव कर ऑनलाइन मिलने वाले कोल परमिट को ऑफलाइन किया गया। आरोप है कि इसके बाद एक सिंडिकेट ने परमिट व्यवस्था पर नियंत्रण कर अवैध वसूली का तंत्र खड़ा किया। ईडी और ईओडब्लू की जांच के अनुसार, इस व्यवस्था के जरिए करीब 540 करोड़ रुपए से अधिक की अवैध वसूली की गई।

बेटियों के नए बिजनेस आइडिया को मिलेगा बढ़ावा, बिहार लाएगा ‘बेटी स्टार्टअप चैलेंज’

 पटना  राज्य सरकार पहली बार बेटियों के लिए नए आइडिया के आधार पर स्टार्टअप स्कीम लांच करने की तैयारी में है। इसकी जवाबदेही उच्च शिक्षा विभाग को दी गई है और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निर्देश पर विभाग ने बेटी स्टार्टअप चैलेंज योजना का प्रस्ताव तैयार किया है। प्रस्ताव में नए और इनोवेटिव बिजनेस आइडिया के आधार पर सरकार की ओर से 50 हजार से लेकर दो लाख रुपये तक का अनुदान प्रविधान किया गया है। भविष्य में अनुदान में बढ़ोतरी का भी प्रस्ताव है। प्रस्तावित योजना पर वित्त विभाग से सहमति लेने के बाद उसे राज्य मंत्रिमंडल के पास स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। इसके बाद चालू वित्तीय वर्ष में ही इस नई योजना को लागू किया जाएगा। बता दें कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रक्षाबंधन के मौके पर बेटियों को उद्यमी बनाने के लिए नई पहल करते हुए बेटी स्टार्टअप योजना शुरू करने की घोषणा की थी। शिक्षा विभाग ने तैयार किया प्लान उच्च शिक्षा विभाग के एक बजट अधिकारी ने बताया कि बेटी स्टार्टअप चैलेंज योजना का प्रारुप तैयार है। इसे बिल्कुल नए और इनोवेटिव बिजनेस आइडिया को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसकी पात्रता/योग्यता भी निर्धारित की गई है। आवेदक बिहार की स्थायी निवासी होनी चाहिए। उसकी आयु न्यूनतम 18 वर्ष होनी चाहिए। नई योजना के तहत मुख्य रूप से उन आइडियाज को प्राथमिकता दी जाएगी जो व्यावहारिक हों और बाजार में रोजगार के नए अवसर पैदा कर सकें। नई योजना का क्रियान्वयन उच्च शिक्षा विभाग और उद्योग विभाग मिलकर करेगा। महत्वपूर्ण बात यह कि राज्य में उच्च शिक्षा विभाग द्वारा शुरू की जाने वाली स्टार्टअप की यह पहली योजना होगी। इतना ही नहीं, राज्य में केवल बालिकाओं के लिए भी स्टार्टअप की यह पहली योजना होगी। इससे बेटियों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, यह पहल बेटियों को केवल रोजगार तलाशने वाली नहीं, बल्कि नवाचार, आत्मविश्वास और आर्थिक स्वावलंबन के माध्यम से प्रदेश के विकास में नई भूमिका निभाएंगी। नया आइडिया और नवाचार संबंधी प्रस्ताव को चयन में प्राथमिकता मिलेगी योजना का मानदंड कुछ इस तरह तैयार किया गया है, जिसमें स्टार्टअप के लिए बिल्कुल नया आइडिया और नवाचार संबंधी प्रस्ताव को चयन में प्राथमिकता मिलेगी। इस प्रकार स्टार्टअप शुरू करने की इच्छुक बेटियों के लिए अपना प्रस्ताव तैयार करने में चैलेंज भी होगा। इसमें चुनौती यह होगी कि उनके स्टार्टअप का प्रस्ताव वास्तविक जिंदगी से जुड़ा हो। क्योंकि, योजना का उद्देश्य बेटियों को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें केवल नौकरी तलाशने के बजाय रोजगार देने वाला (उद्यमी) बनाना भी है। बेटियों द्वारा जमा किए जाने वाले स्टार्टअप प्रोजेक्ट प्रस्ताव के मूल्यांकन के लिए कमेटी होगी। इसमें उच्च शिक्षा विभाग को उद्योग विभाग का सहयोग होगा।

मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल की लगातार समीक्षा, निगरानी और प्रभावी पैरवी से मामले में आया बड़ा मोड़

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की संवेदनशील प्रशासनिक सोच और शासकीय भूमि के संरक्षण को लेकर स्पष्ट नीति का असर अब पुराने लंबित मामलों में भी दिखाई दे रहा है। देवीपाटन मंडल में करीब 30 वर्ष से लंबित नजूल भूमि का एक प्रकरण प्रशासन की सक्रियता और प्रभावी निगरानी से नए मोड़ पर पहुंचा है। मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल की लगातार समीक्षा, निगरानी और प्रभावी पैरवी के बीच मामले के वादी ने न्यायालय में शपथ-पत्र देकर आगे पैरवी न करने और कार्यवाही समाप्त किए जाने का अनुरोध किया है। इसके साथ ही संबंधित पक्ष ने सरकारी भूमि से अपना करीब 30 वर्ष पुराना कब्जा भी स्वयं हटा लिया है।  यह मामला गोंडा में मंडलायुक्त कार्यालय एवं भवन के लिए आरक्षित नजूल भूखंड संख्या 514, 515, 524 और 525 से जुड़ा है। प्रकरण वर्ष 1997 से न्यायालय में लंबित था। वर्ष 2008 में स्थगन आदेश पारित होने के बाद भी मामले में विधिक पैरवी जारी रही। सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराने के अभियान के दौरान यह पुराना प्रकरण प्रशासन के संज्ञान में आया, जिसके बाद देवीपाटन मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल ने दोबारा समीक्षा शुरू की। अवैध संचालित विद्यालय में नहीं मिला कोई विद्यार्थी और शिक्षक पुराने नजूल भूमि प्रकरण की जानकारी सामने आने के बाद मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल ने मामले की लगातार समीक्षा की। अभिलेखों और न्यायालयीन स्थिति की पड़ताल कराई गई। साथ ही संबंधित अधिकारियों को सरकारी पक्ष मजबूती से रखने और शासकीय हितों की रक्षा के लिए प्रभावी विधिक पैरवी के निर्देश दिए गए। जांच के दौरान भूमि पर अवैध विद्यालय संचालित होने की बात भी सामने आई। प्रशासन ने मौके की स्थिति की पड़ताल कराई तो वहां वर्तमान में कोई विद्यार्थी या शिक्षक नहीं मिला। इसके बाद जमीन की वास्तविक स्थिति की निगरानी भी की गई। वादी/अतिक्रमणकारी कोर्ट में पीछे हटे, मौके से भी कब्जा हटाया प्रकरण में वादी/अतिक्रमणकारी दयानन्द मिश्र की ओर से न्यायालय में शपथ-पत्र प्रस्तुत किया गया। इसमें उन्होंने वाद में आगे पैरवी न करने और कार्यवाही समाप्त किए जाने का अनुरोध किया है। मामले की अहम बात यह है कि संबंधित पक्ष ने न्यायालय में कानूनी पैरवी से पीछे हटने के साथ ही मौके से अपना कब्जा भी हटा लिया। इस तरह करीब तीन दशक से लंबित विवाद में एक ओर न्यायिक प्रक्रिया के स्तर पर बदलाव आया, वहीं दूसरी ओर जमीन की भौतिक स्थिति भी बदल गई। 1997 में शुरू हुआ मामला, अब कब्जामुक्त हुई जमीन वर्ष 1997 में शुरू हुए विवाद को न्यायिक प्रक्रिया में करीब तीन दशक हो चुके थे। वर्ष 2008 के स्थगन आदेश के बाद भी मामला लंबित रहा। अब वर्ष 2026 में वादी के शपथ-पत्र और मौके से कब्जा हटने के बाद प्रशासन के सामने इन भूखंडों को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी है। मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल ने बताया कि देवीपाटन आयुक्त कार्यालय एवं भवन के लिए आरक्षित इन भूखंडों को सुरक्षित रखते हुए निर्धारित शासकीय प्रयोजन में उपयोग सुनिश्चित करने की दिशा में कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि योगी सरकार की प्रशासनिक दक्षता और शासकीय संपत्तियों के संरक्षण की प्राथमिकता के तहत पुराने और लंबित मामलों की भी समीक्षा की जा रही है। इसी क्रम में तीन दशक पुराने इस नजूल भूमि प्रकरण की फाइल दोबारा खुली और न्यायिक स्थिति के साथ मौके की वास्तविक स्थिति भी परखी गई। मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल की निगरानी में हुई कार्रवाई के बाद अब प्रशासन का फोकस इन भूखंडों की सुरक्षा और निर्धारित शासकीय उपयोग सुनिश्चित करने पर है। यह प्रकरण बताता है कि लंबे समय से लंबित मामलों की नियमित समीक्षा, मजबूत पैरवी और प्रशासनिक निगरानी के जरिए शासकीय हितों की रक्षा की जा सकती है। वर्जन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप शासकीय भूमि का संरक्षण और जनहित में उसका उपयोग सर्वोच्च प्राथमिकता है। करीब 30 वर्षों से लंबित इस प्रकरण में संबंधित पक्ष ने न्यायालय में आगे पैरवी न करने का अनुरोध किया है और मौके से भी कब्जा हटा लिया है। अब भूमि को सुरक्षित रखते हुए निर्धारित शासकीय प्रयोजन में उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा। दुर्गा शक्ति नागपाल, मंडलायुक्त, देवीपाटन

अंबाला में भवन ढहने से 6 मजदूरों की मौत, मलबे में 30 श्रमिक दबे

अंबाला. हरियाणा के अंबाला शहर के पास धूलकोट गांव में रविवार को निर्माणाधीन तीन मंजिला इमारत ढहने से चार लोगों की मौत हो गई जबकि 10 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं. न्यूज एजेंसी के मुताबिक, अधिकारियों ने बताया कि हादसा शाम से ठीक पहले हुआ, जब इमारत का निर्माण कार्य जारी था. अधिकारियों के मुताबिक, स्थानीय लोगों ने राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया और पुलिस को हादसे की जानकारी दी गई. एक घायल मजदूर ने बताया कि कुछ मजदूर ग्राउंड फ्लोर पर काम कर रहे थे, जबकि अन्य ऊपर निर्माण कार्य में लगे थे. अंबाला की सिविल सर्जन रेणु बेरी ने संवाददाताओं को बताया कि 12 घायल मजदूरों को अस्पताल लाया गया था, जिनमें से पांच का अभी इलाज चल रहा है. उन्होंने बताया, ‘‘शाम को चार लोगों को मृत अवस्था में अस्पताल लाया गया था. उनके शवों को शवगृह में रखवा दिया गया है.'' हालांकि, न्यूज एजेंसी ने सोमवार सुबह बताया कि हादसे में मरने वालों की तादाद बढ़कर 6 हो गई है. सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है.  अंबाला के पुलिस अधीक्षक अजीत सिंह शेखावत ने शाम को संवाददाताओं से बातचीत में घटना में चार लोगों की मौत होने की पुष्टि की. उन्होंने बताया कि हादसे के बाद एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस और प्रशासन की टीम राहत एवं बचाव अभियान में जुटी हुई हैं. यह पूछे जाने पर कि क्या मलबे के नीचे और लोग फंसे हैं, पुलिस अधीक्षक ने कहा, "दो-तीन लोगों का पता लगा लिया गया है और उन्हें बाहर निकालने की कोशिश की जा रही है." मौके पर मौजूद थे 25 मजदूर… अधिकारियों के मुताबिक, यह घटना तब हुई जब अंबाला के एक जाने-माने बिजनेसमैन और प्रॉपर्टी डीलर की तीन मंजिला इमारत की छत के लिए कंक्रीट स्लैब (लिंटल) डाली जा रही थी. घटना के वक्त साइट पर करीब 25 मजदूर मौजूद थे. इनमें से करीब 15 मजदूर तीसरी मंजिल पर लिंटल डालने का काम कर रहे थे, जबकि बाकी ग्राउंड फ्लोर पर थे. इसी दौरान इमारत का एक बड़ा हिस्सा ढह गया और कई मजदूर मलबे के नीचे दब गए. अंबाला शहर के नागरिक हॉस्पिटल के सीएमओ रेनू पांजनी ने कहा, "हादसे की जानकारी मिलते ही अंबाला के पुलिस अधीक्षक अजीत सिंह शेखावत मौके पर पहुंचे और हादसे का जायजा लिया. मीडिया से बातचीत में एसपी ने बताया कि इस हादसे में 4 लोगों की मौत हो चुकी है और 13 से 14 मजदूरों को मलबे से सुरक्षित निकाला जा चुका है. सूचना मिलते ही एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं और पूरा जिला प्रशासन मदद में जुटा हुआ है, जिससे मलबे में फंसे किसी भी मजदूर को बचाया जा सके." बिल्डिंग अवैध तो नहीं थी? अंबाला एसपी ने कहा कि यह निर्माणाधीन बिल्डिंग थी, इसके मालिक और अन्य जानकारियां रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा होने के बाद जांच में सामने आएंगी. इस हादसे में मौतें और घायल दोनों हुए हैं, इसलिए इसमें लीगल एक्शन जरूर लिया जाएगा. चाहे यह अवैध निर्माण हो या फिर निर्माण में लापरवाही बरती गई हो, हर एंगल से जांच की जाएगी. उन्होंने बताया कि यहां काम करने वाले ज्यादातर मजदूर जंडली और आसपास के रहने वाले हैं, कुछ प्रवासी मजदूर भी हो सकते हैं. अवैध निर्माण के सवाल पर उन्होंने कहा कि नगर निगम अंबाला से बिल्डिंग का नक्शा लेकर जांच की जाएगी कि नक्शा पास था या नहीं.

रायपुर में जूनियर डॉक्टरों का प्रदर्शन जारी, 17 सूत्रीय मांगों पर अड़े; OPD बंद

रायपुर  MBBS इंटर्न और पीजी डॉक्टरों के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी के बाद भी जूनियर डॉक्टरों का आंदोलन खत्म नहीं हुआ है। पीजी डॉक्टरों का कहना है कि उनकी 17 सूत्रीय मांगों में स्टाइपेंड के अलावा कई महत्वपूर्ण मांगें लंबित हैं। इन्हीं मांगों को लेकर डॉक्टर चार दिन से आंदोलन कर रहे हैं और आज आंदोलन का पांचवा दिन है। आंदोलन के कारण अंबेडकर अस्पताल समेत मेडिकल कॉलेज से जुड़ी स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ा है और ओपीडी में मरीजों की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में आधी रह गई है। स्टाइपेंड में 26 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी शासन ने एमबीबीएस इंटर्न का स्टाइपेंड बढ़ाकर 25 हजार रुपये प्रतिमाह किया है। इसके बाद अब पीजी मेडिकल डॉक्टरों के स्टाइपेंड में भी करीब 26 प्रतिशत तक वृद्धि का आदेश जारी किया है। नई दरों के अनुसार पीजी प्रथम वर्ष का स्टाइपेंड 67,500 से बढ़कर 85,050 रुपये, द्वितीय वर्ष का 71,450 से 90,027 रुपये और तृतीय वर्ष का 74,600 से 93,996 रुपये किया गया है। नई दरें 1 अक्टूबर से लागू होंगी। इसके बावजूद डॉक्टरों का कहना है कि केवल स्टाइपेंड बढ़ाने से आंदोलन खत्म नहीं होगा। बांड की अवधि और राशि घटाना प्रमुख मांग जूनियर डॉक्टरों की प्रमुख मांग एमबीबीएस और पीजी के बाद लागू बांड व्यवस्था में बदलाव की है। डॉक्टरों के अनुसार एमबीबीएस और पीजी के बाद दो-दो वर्ष की बांड सेवा की व्यवस्था है। वे इसकी अवधि कम करने की मांग कर रहे हैं। साथ ही बांड की राशि भी घटाने की मांग है। डॉक्टरों के अनुसार पीजी के लिए बांड राशि 50 लाख और एमबीबीएस के लिए 25 लाख रुपये है। एसोसिएशन बांड को खत्म करने या इसकी अवधि कम करने की मांग कर रहा है। सुपर स्पेशियलिटी कैडर बनाने की भी मांग इसके अलावा पोस्ट-पीजी स्टाइपेंड, पीजी रेजिडेंट, बांडेड जूनियर रेजिडेंट और सीनियर रेजिडेंट के मानदेय में संशोधन, डीएम और एमसीएच सुपर स्पेशियलिटी रेजिडेंट के स्टाइपेंड में बदलाव और सुपर स्पेशियलिटी कैडर बनाने जैसी मांगें भी शामिल हैं। डॉक्टरों का कहना है कि सुपर स्पेशियलिटी कैडर बनने से प्रदेश में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ सकती है। आज मंत्री से होगी चर्चा, नहीं तो इमरजेंसी भी प्रभावित जूनियर डॉक्टरों को 29 सितंबर को सुबह 11:30 बजे स्वास्थ्य मंत्री ने चर्चा के लिए बुलाया है। डॉक्टरों को उम्मीद है कि बैठक में लंबित मांगों पर ठोस निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल ओपीडी का बहिष्कार जारी है। यदि समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी पहले ही दी जा चुकी है। 28 सितंबर से इमरजेंसी समेत अन्य स्वास्थ्य सेवाओं के बहिष्कार की चेतावनी भी एसोसिएशन दे चुका है। ऐसे में आंदोलन लंबा खिंचने पर मरीजों को इलाज के लिए अधिक इंतजार करना पड़ सकता है और मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में नियमित सेवाओं का दबाव बढ़ सकता है।

चितकारा यूनिवर्सिटी छात्रा मामले में महिला आयोग ने लिया संज्ञान, पुलिस-प्रबंधन से जवाब तलब

पटियाला. पटियाला के राजपुरा स्थित चितकारा यूनिवर्सिटी में छात्राओं से जुड़ी सोशल मीडिया पर वायरल खबरों और छात्रों के विरोध प्रदर्शन के मामले में पंजाब राज्य महिला आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने पटियाला के डिप्टी कमिश्नर (DC) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को नोटिस जारी कर 30 सितंबर 2026 तक पूरे मामले की स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। महिला आयोग ने 4 बिंदुओं पर मांगी रिपोर्ट – 1. शिकायत मिली तो क्या कार्रवाई की? आयोग ने पूछा है कि यूनिवर्सिटी के कैंपस या हॉस्टल से किसी छात्रा के लापता होने, घायल होने या किसी अप्रिय घटना की पुलिस शिकायत मिली है या नहीं। यदि शिकायत मिली है, तो उसकी कॉपी और अब तक की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट देनी होगी। 2. कैंपस और हॉस्टल में सुरक्षा के क्या इंतजाम? छात्रों ने विरोध प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा को लेकर चिंताएं जताई थीं। आयोग ने पूछा है कि इन चिंताओं को दूर करने के लिए यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कैंपस और हॉस्टल में सुरक्षा के क्या इंतजाम किए हैं। 3. वायरल खबरों और अफवाहों की जांच कहां तक पहुंची? सोशल मीडिया पर वायरल हो रही अपुष्ट खबरों, वीडियो और अफवाहों की सच्चाई का पता लगाने के लिए पुलिस क्या कार्रवाई कर रही है। आयोग ने जांच की मौजूदा स्थिति और अफवाहों के स्रोत से जुड़ी जानकारी मांगी है। 4. भविष्य में ऐसी स्थिति रोकने के लिए क्या योजना? आयोग ने छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने और परिसर में दोबारा ऐसी स्थिति पैदा होने से रोकने के लिए उठाए जा रहे ठोस कदमों की जानकारी मांगी है। भविष्य की सुरक्षा व्यवस्था और सुरक्षा संबंधी चिंताओं को दूर करने के उपायों का ब्योरा देना होगा। क्या था पूरा मामला? राजपुरा स्थित चितकारा यूनिवर्सिटी में 25-26 सितंबर 2026 की रात सोशल मीडिया पर हॉस्टल में भूत होने, छात्राओं के सुसाइड करने और कुछ छात्राओं के लापता होने की अफवाहें वायरल हुई थीं। खबरों से घबराकर सैकड़ों छात्र-छात्राएं आधी रात को हॉस्टल से बाहर निकल आए और कैंपस में विरोध प्रदर्शन करने लगे। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने छात्राओं की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। वहीं, यूनिवर्सिटी प्रशासन ने छात्रा की मृत्यु और आत्महत्या से जुड़े दावों को खारिज कर अफवाह बताया