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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया जंबूरी स्थल का निरीक्षण, विश्वस्तरीय व्यवस्थाओं को सुनिश्चित करने के दिए आदेश

जंबूरी में ‘एकता में विविधता’ की भावना के साथ लखनऊ की अर्थव्यवस्था को भी मिलेगा मजबूती 32,000 स्काउट्स और गाइड जुटेंगे लखनऊ में ओडीओपी, नवाचार और संस्कृति का होगा संगम 61 साल बाद यूपी में होने जा रहा 19वां नेशनल जंबूरी; सीएम योगी ने की मेगा तैयारियों की समीक्षा लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बृहस्पतिवार को 19वें भारत स्काउट्स एंड गाइड्स के जंबूरी की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। यह आयोजन 23 से 29 नवंबर तक वृंदावन कॉलोनी स्थित डिफेंस एक्सपो ग्राउंड में आयोजित होगा। 61 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद उत्तर प्रदेश इस प्रतिष्ठित डायमंड जुबिली संस्करण की मेजबानी कर रहा है, जो राज्य के लिए ऐतिहासिक क्षण है। 300 एकड़ में फैले जंबूरी परिसर को 32,000 प्रतिभागियों और 3,000 स्टाफ सदस्यों के लिए तैयार किया जा रहा है। नेपाल, श्रीलंका, भूटान, अफगानिस्तान सहित एशिया-प्रशांत क्षेत्र के कई देशों के प्रतिनिधि भी इसमें हिस्सा लेंगे, जिससे इसका अंतरराष्ट्रीय महत्व और बढ़ जाता है। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि “विश्वस्तरीय व्यवस्था सुनिश्चित की जाए और किसी भी स्तर पर लापरवाही की कोई गुंजाइश न रहे।” उन्होंने आवास, स्वच्छता, सुरक्षा, भोजन, स्वास्थ्य सुविधाओं और डिजिटल कनेक्टिविटी तक हर व्यवस्था को सर्वोत्तम मानक के अनुरूप तैयार करने पर जोर दिया। सीएम ने स्काई साइक्लिंग और ज़िपलाइन एडवेंचर का विशेष प्रदर्शन भी देखा, जिसकी उन्होंने सराहना की। उनके साथ जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह, प्रभात कुमार (सेवानिवृत्त IAS), राज्य मुख्य आयुक्त, स्काउट्स एंड गाइड्स, और डीएम लखनऊ विशाख जी मौजूद रहे। सुगम व्यवस्थाओं के लिए परिसर में 16 जर्मन हैंगर, 600 वाटर टैंक, 30 RO प्वाइंट, 2,200 से अधिक शौचालय, 100 किचन और चार केंद्रीय रसोईघर स्थापित किए जा रहे हैं, जो प्रतिदिन हजारों लोगों को भोजन उपलब्ध कराएंगे। 3,500 क्षमता वाला कॉन्फ्रेंस हॉल, अस्थायी पुलिस स्टेशन और 11 फायर टेंडर भी सुरक्षा और अनुशासन सुनिश्चित करेंगे। जंबूरी में देशभर से आए कैडेट ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना को प्रदर्शित करते हुए उत्तर प्रदेश की समृद्ध संस्कृति और विविध व्यंजनों का अनुभव करेंगे। यह आयोजन लखनऊ में रोज़गार सृजन और स्थानीय अर्थव्यवस्था के सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, जहां हज़ारों श्रमिकों, ठेकेदारों और छोटे विक्रेताओं को अवसर मिल रहे हैं। सांस्कृतिक गौरव और आर्थिक प्रगति का यह संगम जंबूरी को प्रतिभागियों और शहर, दोनों के लिए यादगार बना रहा है। इस आयोजन का प्रमुख आकर्षण उत्तर प्रदेश की संस्कृति, तकनीक और हस्तशिल्प को प्रदर्शित करने वाला विशाल प्रदर्शनी क्षेत्र होगा। इसमें 100 से अधिक स्टॉल, जिसमें ओडीओपी, रोबोटिक्स व इलेक्ट्रॉनिक्स डिस्प्ले, तथा नेडा का सोलर पवेलियन राज्य के नवाचार और उद्यमशीलता को प्रदर्शित करेंगे। प्लानेटेरियम, एआई जोन, और वाराणसी, बुंदेलखंड व प्रदेश के अन्य क्षेत्रों की सांस्कृतिक झलक और व्यंजन अनुभव को और समृद्ध करेंगे। कैडेट अपने प्रवास के दौरान अपने परिवारों से जुड़े रह सकें, इसके लिए समर्पित मोबाइल टावर भी स्थापित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री योगी के निर्देशन में AI के जरिये विकास का मॉडल बन रहा उत्तरप्रदेश

एआई में वैश्विक मानक तय कर रहा ‘योगी का यूपी’ यूपी फतेहपुर में भारत का पहला एआई आधारित स्तन कैंसर स्क्रीनिंग केंद्र कृषि में हाईटेक बदलाव: यूपी के 10 लाख से अधिक किसान एआई से जुड़े शिक्षा, सुरक्षा में प्रदेशवासियों के लिए नया मुकाम स्थापित कर रहा एआई उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ बनाई जा रही देश की पहली पूर्ण विकसित एआई सिटी लखनऊ,   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश एआई के जरिए हर क्षेत्र में वैश्विक मानक तय कर रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा है कि तकनीक के जरिए उत्तर प्रदेश हर क्षेत्र में शीर्ष पर पहुंचे। दुनिया भर में सरकारें एक तरफ जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के जरिए सार्वजनिक सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रयत्नशील हैं। इसे लेकर अधिकतर देश और राज्य अभी प्रयोग कर रहे हैं, वहीं उत्तर प्रदेश एआई को ऐसे पैमाने पर लागू कर चुका है, जो कई वैश्विक उदाहरणों की बराबरी करता है। यूपी का नेतृत्व करने वाले योगी आदित्यनाथ ने तकनीक को नारे की जगह शासन का सिद्धांत बना दिया है, जिसके जरिए भी यूपी अपने समृद्ध भविष्य को नए सिरे से गढ़ रहा है। रणनीतिक छलांग: भारत के पहले एआई सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को देश की पहला पूर्ण विकसित एआई सिटी बनाई जा रही है। अन्य “स्मार्ट सिटी” मॉडलों की तुलना में यहां तकनीक ढांचों को मजबूत किया जा रहा है। सीएम योगी आदित्यनाथ लखनऊ को केवल राजधानी नहीं, बल्कि एआई आधारित शासन का राष्ट्रीय कमांड सेंटर बना रहे हैं।     •    राज्य समर्थित एआई इनोवेशन हब     •    10,000+ GPUs वाला सुपरकंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर     •    अपनी ही भाषा में बने बहुभाषी एआई मॉडल     •    वैश्विक एआई कंपनियों को आकर्षित करने वाला R&D ढाँचा     •    इंडियाएआई मिशन के अनुरूप नीति ढाँचे स्वास्थ्य में एआईः इस क्षेत्र में बड़ी क्रांति मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश का स्वास्थ्य क्षेत्र बड़ी क्रांति से गुजर रहा है। यह बदलाव सीएम योगी के उस सोच को प्रदर्शित करता है, जहां स्वास्थ्य केवल इलाज नहीं, बल्कि पूर्वानुमान पर केंद्रित होना चाहिए। एआई इसे संभव बना रहा है।     • यूपी के फतेहपुर में भारत का पहला AI-आधारित स्तन कैंसर स्क्रीनिंग केंद्र बनया गया है, जो अधिक सटीकता और शुरुआती पहचान में सक्षम है।     • सार्वजनिक स्वास्थ्य डेटा मैनुअल रिपोर्टिंग से हटकर प्रेडिक्टिव मॉडलिंग की ओर बढ़ रहा है।     •सरकारी मेडिकल कॉलेजों में नि:शुल्क एआई और क्लाउड कोर्स, ताकि अगली पीढ़ी के स्वास्थ्य-तकनीक विशेषज्ञ तैयार किए जा सकें। शिक्षा में एआईः अधिक स्मार्ट और स्केलेबल लर्निंग सिस्टम सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में यूपी का शिक्षा ढाँचा डिजिटल रूप से नए सिरे से तैयार हो रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तकनीक को ग्रामीण कक्षाओं और वैश्विक शिक्षा मानकों के बीच का संपर्क सेतु मानते हैं। इस सेतु का निर्माण तेज़ गति से हो रहा है।     •माध्यमिक शिक्षा परीक्षाओं में AI bots सहायक भूमिका निभा रहे हैं, जिससे त्रुटियाँ और अनियमितताएँ कम हो रही हैं।     •शिक्षक व छात्र एआई टूल्स में प्रशिक्षित हो रहे हैं, जिससे सीखने के नए मार्ग खुल रहे हैं     • उत्तर प्रदेश एआई आधारित व्यक्तिगत शिक्षा प्रणाली की नींव डाल रहा है। कृषि में हाई-टेक बदलाव: दस लाख से अधिक किसान एआई से जुड़े यूपी कृषि के जरिए यूपी आर्थिक शक्ति बन रहा है। विश्व बैंक समर्थित यूपी एग्रीज के माध्यम से 10 लाख से अधिक किसान अब एआई आधारित सलाह से जुड़ चुके हैं। उपग्रह चित्रों, मिट्टी विश्लेषण, मौसम मॉडल और RFID आधारित संसाधन ट्रैकिंग का उपयोग कर रहे हैं, इसके जरिए…     • फसल उत्पादन में सुधार     • जोखिम का तेज़ पूर्वानुमान     • पानी व खाद का कम से कम उपयोग     • संसाधनों की सटीक निगरानी पारदर्शी व समयबद्ध ढंग से मिल रहा कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में कल्याणकारी व्यवस्थाएँ इंटेलिजेंस आधारित प्रणाली बन रही हैं। इसके जरिए कल्याण योजनाएं धीमी सरकारी प्रक्रिया नहीं, बल्कि रियल-टाइम सार्वजनिक सेवा बन चुका है। एआई समर्थित तंत्र से फायदा :     • वास्तविक लाभार्थी डेटाबेस तैयार कर रहे हैं     • धोखाधड़ी को तुरंत पहचान रहे हैं     • डीबीटी को तेज़ और अधिक सटीक बना रहे हैं     • सही योजना को सही नागरिक से जोड़ रहे हैं सार्वजनिक सुरक्षा में एआईः सुरक्षा का नया मानक राज्य के कई नगर निगमों में एआई आधारित प्रणालियाँ कानून-व्यवस्था को नए स्तर पर ले जा रही हैं। इसके लिए अनेक कार्य हो रहे हैं, जिसके परिणाम भी मिल रहा है।     • फेसियल रिकॉग्निशन नेटवर्क     • वाहन ट्रैकिंग     • पुलिस नियंत्रण कक्षों से जुड़े SOS सिस्टम     • प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स आधारित निगरानी     • जेलों में “Jarvis” जैसे एआई सुरक्षा तंत्र राजस्व और संसाधन प्रबंधन: निष्पक्ष निर्णायक के रूप में एआई भूमि विवादों से लेकर अवैध खनन तक यूपी शासन-प्रशासन एआई और सैटेलाइट विश्लेषण का उपयोग डेटा आधारित, निष्पक्ष निर्णय के लिए कर रहा है। इसके जरिए भ्रष्टाचार कम, समाधान तेज और जवाबदेही मजबूत हो रही है।     • भूमि रिकॉर्ड का डिजिटल मानचित्रण     • अतिक्रमण की स्वत: पहचान     • अवैध खनन की वास्तविक समय में निगरानी     • जिलों के प्रदर्शन की डिजिटल ट्रैकिंग API आधारित शासन: ‘ध्वनि’ बन रहा है यूपी का एआई ऑपरेटिंग सिस्टम एनआईसी द्वारा निर्मित ध्वनि प्लेटफ़ॉर्म उत्तर प्रदेश का आधुनिक शासन इंजन बन रहा है। एआई आधारित APIs सीधे शिकायत निस्तारण से लेकर स्वचालित सेवाओं के क्रियान्वयन तक विभागीय कार्यों के प्रवाह से जुड़ते हैं। साथ ही आधुनिक रूप से मजबूत होते हुए विभाग अलग-अलग नहीं, बल्कि जुड़ी हुई डेटा प्रणाली के रूप में काम करते हैं।

यूपी बोर्ड ने बदली परीक्षा तिथि: देखें अपडेटेड डेटशीट और नए बदलाव

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में हाईस्कूल और इंटर की बोर्ड की परीक्षा की तिथि में बदलाव किया गया है। (UP Board Exam Date 2026 ) इसकी जानकारी आधिकारिक वेबसाइट upmsp.edu.in पर जारी कर दी गई है। 10वीं की हिंदी परीक्षा की नई तारीख  बदले गए समयसारणी से के हिसाब से कक्षा 10वीं की हिंदी और प्राथमिक हिंदी की परीक्षा अब 18 फरवरी 2026 को आयोजित की जाएगी. परीक्षा का समय सुबह 8:30 बजे से 11:45 बजे तक तय किया गया है. पहले यह परीक्षा 16 फरवरी 2026 को सुबह 8 बजे से 11:15 बजे तक होनी थी. इस बदलाव के बाद छात्रों को दो दिन अतिरिक्त तैयारी का समय मिल जाएगा. बोर्ड का कहना है कि संशोधित तारीखें वेबसाइट पर उपलब्ध हैं और छात्रों को सलाह दी गई है कि वे नई डेटशीट देखकर अपनी तैयारी की योजना बनाएं। छात्रों से कहा गया है कि केवल नई डेटशीट पर भरोसा करें। अफवाहों पर ध्यान न दें और आधिकारिक वेबसाइट पर अपडेट चेक करते रहें। 55 लाख से अधिक छात्र देंगे परीक्षा  बोर्ड के अनुसार, यूपी बोर्ड परीक्षा 2026 में करीब 55 लाख छात्र-छात्राएं शामिल होंगे. इनमें 10वीं और 12वीं दोनों कक्षाओं के परीक्षार्थी शामिल हैं. परीक्षा 18 फरवरी से शुरू होकर 12 मार्च 2026 तक चलेगी. इस बार परीक्षा 8,000 से अधिक केंद्रों पर आयोजित की जाएगी।  

सीएम युवा उद्यमी योजना, रोजगार मेला व ओडीओपी योजना की बढ़ी विश्व स्तर पर प्रतिष्ठा

  ओडीओपी योजना के तहत यूपी के परंपरागत एवं स्थानीय शिल्प को आईआईटीएफ 2025 में मिल रही वैश्विक पहचान आईआईटीएफ 2025 में प्रदेश के युवाओं की भागीदारी बन रही युवाओं की रचनात्मकता और उद्यमशीलता के प्रदर्शन का मंच   लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दूरदर्शी नेतृत्व में उत्तर प्रदेश एक युवा केंद्रित विकास की लहर का साक्षी बन रहा है, जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण हमें भारत अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला 2025 (आईआईटीएफ) में देखने को मिल रहा है। इस वर्ष आईआईटीएफ 2025 में यूपी की भागीदारी ने न केवल प्रदेश के युवाओं की रचनात्मकता और उद्यमशीलता को उजागर कर रही है, बल्कि योगी सरकार की युवा प्रतिभाओं को नवाचार एवं आत्मनिर्भरता के लिए प्रोत्साहित करने और विकास के अवसर सृजित करने की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित कर रही है। सीएम योगी के विजन में प्रदेश में चलाए जा रहे रोजगार मेला, सीएम युवा कार्यक्रम और ओडीओपी योजना उत्तर प्रदेश के युवाओं को सशक्त बना रही हैं। जो न केवल राज्य के युवाओं को नौकरी के अवसर प्रदान करने, उनके कौशल का विकास करने और उनमें उद्यमिता व नवाचार को बढ़ावा दे रही है। जहां रोजगार मेले युवाओं को रोजगार से जोड़ते हैं, तो वहीं सीएम युवा कार्यक्रम का ध्येय उनके कौशल और क्षमताओं को मजबूती प्रदान करना है। सीएम युवा कार्यक्रम प्रदेश के युवाओं को कौशल, मार्गदर्शन और संसाधनों से लैस करता है ताकि वे अपने उद्यमों को शुरू कर सकें ताकि वे ऐसे उद्यम या व्यवसाय स्थापित कर सकें, जो दूसरों के लिए भी रोजगार सृजित कर सकें। सीएम योगी आदित्यनाथ की महत्वाकांक्षी योजना ओडीओपी, उन्हें उनके अपने ही जनपद में स्थानीय कौशलों को सफल व्यवसायों में बदलने में मदद करता है। सीएम योगी की इस योजना का अनुकरण वर्तमान में देश के अन्य राज्य भी कर रहे हैं। आईआईटीएफ में अपने उत्पादों का प्रदर्शन करने वाले कई युवाओं ने साझा किया कि योगी सरकार की इन योजनाओं ने कैसे उनके स्टार्ट अप आइडिया, उनके परंपरागत व स्थानीय कौशलों को फलते-फूलते उद्यमों में बदलने में मदद की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सपना एक ऐसे भविष्य का है जहां उत्तर प्रदेश के युवा नौकरी तलाशने वाले न होकर नौकरी सृजित करने वाले बनें, जो आने वाले समय में उत्तर प्रदेश में नवाचार और आत्मनिर्भरता को गति दें, साथ ही राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत बनाएं। योगी सरकार की युवा-अनुकूल नीतियों ने राज्य के विकास को तेज करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कौशल उन्नयन से लेकर स्टार्टअप समर्थन तक राज्य प्रशासन ने एक ऐसा वातावरण तैयार किया है जो युवाओं को अपनी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए सशक्त बनाता है। राज्य सरकार की ये पहलें केवल व्यक्तियों की मदद ही नहीं कर रही हैं, बल्कि वे उत्तर प्रदेश के समग्र विकास के आधारभूत ढांचे को मजबूत भी कर रही हैं। जिसमें नई विचारधाराएं, तकनीकी नवाचार और ऊर्जावान भागीदारी मुख्यधारा में आ रही हैं। आईआईटीएफ और यूपीआईटीएस जैसे अंतरराष्ट्रीय व प्रतिष्ठित मंचों में राज्य के युवा उद्यमियों की बढ़ती उपस्थिति योगी सरकार की सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता का मजबूत प्रतिबिंब है। जिस तरह से राज्य के युवा आत्मविश्वास के साथ आगे आ रहे हैं, हैंडीक्राफ्ट से लेकर कृषि-आधारित उद्योगों तक विभिन्न क्षेत्रों में नवाचार ला रहे हैं, उत्तर प्रदेश अवसरों और उद्यमिता का केंद्र बनकर उभर रहा है। योगी सरकार का युवाओं को सशक्त बनाने पर ध्यान एक मजबूत, आत्मनिर्भर और वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी राज्य की राह प्रशस्त कर रहा है।

माघ मेले की तैयारी पर बड़ा ऐक्शन: प्रयागराज पहुंचेंगे सीएम योगी

प्रयागराज उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को प्रयागराज दौरे पर रहेंगे और माघ मेले की तैयारी को लेकर आई ट्रिपलसी सभागार में अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करेंगे, तथा सभी अधिकारियों के साथ मेले को भव्य और दिव्य बनाने की चर्चा करेंगे। योगी शनिवार को एक विवाह समारोह में भी शामिल होने के लिए प्रयागराज पहुंचेंगे। इन कार्यक्रमों में शामिल होंगे सीएम  सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री आई ट्रिपल सी सभागार में अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करेंगे। उसके उपरांत गंगा पूजन करने के बाद एक शादी समारोह में शामिल होने के बाद वह लखनऊ के लिए प्रयागराज से प्रस्थान करेंगे, जिसको लेकर प्रशासन तैयारी में लगा हुआ है। वहीं, सीएम योगी के दौरे को लेकर प्रशासनिक तैयारियां तेज कर दी गई है। उनकी सुरक्षा व्यवस्था के भी पुख्ता इंतजाम किए गए है।  बैठक में करेंगे इन मुद्दों पर चर्चा  गौरतलब है कि अगले वर्ष लगने वाले माघ मेले को भव्य और दिव्य बनाने के लिए मुख्यमंत्री योगी प्रयागराज दौरे पर रहेंगे। साथ ही साथ 2024 और 2025 में महाकुंभ के तर्ज पर इस बार का माघ मेला रहेगा। योगी माघ मेले को लेकर पुलिस प्रशासन के साथ भी बैठक करेंगे और श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए किस तरीके का इंतजाम किए गए हैं इस पर भी चर्चा कर सकते हैं।  

अगले 48 घंटे स्पर्श दर्शन पर रोक: काशी विश्वनाथ पहुंचे भक्तों के लिए अहम सूचना

काशी  काशी विश्वनाथ मंदिर के गर्भगृह में पत्थर (संगमरमर) बदलने का कार्य के चलते अगले दो दिनों तक स्पर्श दर्शन पर रोक जारी रहेगी। इसलिए मंदिर प्रशासन ने कार्य जारी रहने तक स्पर्श दर्शन पर रोक बढ़ा दिया है। मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं से प्रशासन ने अनुरोध किया है कि वे असुविधा को देखते हुए सहयोग बनाए रखें।   जानकारी मुताबिक, मंदिर गर्भगृह के फर्श पर पुराने संगमरमर की जगह नया पत्थर लगाने का कार्य बुधवार को शुरू किया गया था। प्रारंभिक योजना के अनुसार, यह कार्य गुरुवार तक पूरा होना था, लेकिन श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या और पांचों पहर की आरती के दौरान अतिरिक्त भीड़ के कारण मजदूरों और तकनीकी कर्मचारियों का काम प्रभावित हुआ। इस वजह से काशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन ने कार्य की अवधि बढ़ाकर शुक्रवार और शनिवार तक बढ़ाने का फैसला लिया। मंदिर के डिप्टी कलेक्टर शंभु शरण ने बताया कि संगमरमर परिवर्तन का यह कार्य मंदिर की समय-समय पर होने वाली नियमित रखरखाव प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि गर्भगृह में अत्यधिक भीड़ और संकुल वातावरण को देखते हुए सुरक्षा को प्राथमिकता देना आवश्यक था। इसी कारण कार्य पूरा होने तक स्पर्श दर्शन को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा है। मंदिर में आम दर्शन जारी रहेंगे उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि काशी मंदिर में आम दर्शन जारी रहेंगे और भक्त दूर से विश्वनाथ बाबा के दर्शन कर सकेंगे। केवल मंदिर गर्भगृह में प्रवेश और स्पर्श दर्शन ही प्रतिबंधित रहेंगे। मंदिर प्रशासन ने बताया कि संगमरमर बदलने का काम बेहद सावधानी से किया जा रहा है ताकि गर्भगृह की पवित्रता और संरचना सुरक्षित रहे। विश्वनाथ मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे भीड़भाड़ के समय धैर्य रखें और सुरक्षा व व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें। अधिकारियों का कहना है कि जैसे ही कार्य पूरा होगा, स्पर्श दर्शन सामान्य रूप से शुरू कर दिए जाएंगे।  

योगी सरकार की सौर क्रांति, गांव-गांव पहुंची रोशनी, बदल गई ऊर्जा की तस्वीर

ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता उत्तर प्रदेश, योगी सरकार का रिकॉर्ड प्रदर्शन सौर क्रांति ऊर्जा के साथ-साथ रोजगार का उजाला लेकर भी आयी लखनऊ,  कभी उत्तर प्रदेश के गांवों में शाम ढलते ही अंधेरा तेजी से फैल जाता था। घरों में टिमटिमाती रोशनी, बढ़ते बिजली बिल और अनिश्चित सप्लाई लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा थे। लेकिन योगी सरकार ने राज्य की ऊर्जा कहानी को बदलने का दृढ़ निश्चय किया। लक्ष्य सिर्फ बिजली देना नहीं था बल्कि प्रदेश के हर घर तक एक नई रोशनी, नई उम्मीद और नई समृद्धि पहुंचाना था। यही सोच आगे चलकर एक ऐसी क्रांति बनी, जिसने उत्तर प्रदेश को सौर ऊर्जा उत्पादन में राष्ट्रीय पटल पर तीसरे स्थान पर ला खड़ा किया। आज गांवों की छतों पर चमकते सोलर पैनल न सिर्फ बिजली पैदा कर रहे हैं, बल्कि नए भारत की परिकल्पना को साकार भी कर रहे हैं। जब योजना शुरू हुई तो अंदाजा नहीं था कि जनता का इतना जबरदस्त समर्थन मिलेगा। लेकिन रिकॉर्ड बताते हैं कि उत्तर प्रदेश में कुल 13,46,040 आवेदन प्राप्त हुए। यह स्वयं दिखाता है कि लोग बदलाव के लिए कितने तत्पर थे। मात्र 18 महीनों में 2,81,769 सोलर रूफटॉप संयंत्रों का इंस्टॉलेशन और पिछले 4.5 महीनों में रिकॉर्ड 1,30,000 संयंत्रों की स्थापना ने उत्तर प्रदेश को महाराष्ट्र और गुजरात के बाद देश का तीसरा सबसे बड़ा सौर ऊर्जा उत्पादक राज्य बना दिया। प्रदेश में 976.21 मेगावॉट रूफटॉप सोलर कैपेसिटी स्थापित हो चुकी है। यह उपलब्धि न सिर्फ तकनीकी है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक रूप से भी परिवर्तनकारी है। सौर ऊर्जा योजना अब तक 2,85,025 उपभोक्ताओं के लिए वरदान साबित हुई है। जहां पहले प्रति घर 1500 रुपये तक का बिजली बिल आता था, वहीं अब सोलर रूफटॉप की वजह से हर महीने काफी बचत हो रही है। ऐसे में इससे एक साधारण परिवार के लिए आर्थिक स्थिरता और भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। ग्रामीण क्षेत्रों में यह बचत खेती-किसानी में सहारा बन रही है, जबकि शहरी इलाकों में बिजली पर निर्भर छोटे उद्यमों को नया जीवन मिल गया है। सौर ऊर्जा क्रांति ने सिर्फ रोशनी नहीं फैलाई बल्कि इसने रोजगार के विशाल द्वार भी खोले। अकेले उत्तर प्रदेश में 54,000 से अधिक युवाओं को सीधा रोजगार मिला है। देशभर में सोलर मॉड्यूल निर्माण, इन्वर्टर, वायरिंग, लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में लाखों नौकरियां सृजित हुईं। साफ है कि यह योजना ऊर्जा के साथ-साथ रोजगार का भी उजाला लेकर आई है। मुफ्त बिजली, घरेलू बचत और रोजगार, इन तीन स्तंभों पर आधारित यह योजना अगले 25 वर्षों में प्रदेश की GDP में हजारों करोड़ रुपये का अतिरिक्त योगदान देगी। ऊर्जा लागत में कमी ने छोटे व्यापारों और स्टार्टअप्स को प्रतिस्पर्धा में और मजबूत बना दिया है। रोजाना 40 लाख यूनिट से अधिक बिजली का उत्पादन हो रहा है। यह सालाना करोड़ों यूनिट ऊर्जा उत्पादन के बराबर है और कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी लाता है। जितनी कमी कई करोड़ पेड़ों के बराबर पर्यावरणीय लाभ देती है। वाराणासी के रहने वाले श्वसन रोग विशेषज्ञ और पीएम सूर्य घर के तहत सोलर संयंत्र का उपयोग कर रहें डॉ एस के श्रीवास्तव का कहना है कि बिजली और पैसों की बचत के साथ सोलर लगाने पर सरकार द्वारा मिल रही सब्सिडी सोने पर सुहागा है। राज्य सरकार की ये योजना ऐसे ही चलती रही तो आने वाले समय में पर्यावरण सुरक्षा के साथ ही श्वास के रोगियों की संख्या में भी कमी आएगी। वहीं दनियालपुर के रहने वाले इम्तियाज़ अहमद ने बताया कि योगी सरकार इस पर सब्सिडी नहीं देती तो सोलर संयंत्र लगवा पाना मुश्किल था।   सौर पार्क बनाने के लिए जहां 4000 एकड़ भूमि की आवश्यकता थी, उसे संरक्षित रख कर बड़ा कदम उठाया गया। यह भूमि कृषि, जल संरक्षण, उद्योग और अन्य सार्वजनिक हितों के लिए सुरक्षित रहेगी। जाहिर है कि ये  विकास और पर्यावरण का संतुलित मॉडल है।

नितीश कुमार के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए सीएम योगी

लखनऊ  बिहार में नई सरकार के गठन के अवसर पर आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शामिल हुए। नितीश कुमार के शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत एनडीए के तमाम मुख्यमंत्रियों को आमंत्रित किया गया था। मुख्यमंत्री योगी जैसे ही पटना एयरपोर्ट पर पहुंचे तो समर्थकों के बीच अद्भुत उत्साह देखने को मिला। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को देखते ही लोगों ने जय श्री राम के नारे लगाए। बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार ने गुरुवार को 10वीं बार शपथ ली। मुख्यमंत्री योगी की यह उपस्थिति न सिर्फ दोनों राज्यों के बीच बढ़ते राजनीतिक और विकासात्मक संबंधों को मजबूत करती है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर सहयोग और समन्वय को नई दिशा प्रदान करती है। हाल ही में संपन्न हुए बिहार विधानसभा चुनाव में उन्होंने एनडीए के पक्ष में सक्रिय भूमिका निभाई थी। चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री योगी ने बिहार के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में अनेक जनसभाओं को संबोधित किया था। उनके प्रभावशाली वक्तव्यों, जनसंपर्क शैली और जनता के बीच उनकी लोकप्रियता ने पार्टी के पक्ष में सकारात्मक माहौल तैयार करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में चलाए गए चुनाव अभियान के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति ने पार्टी और कार्यकर्ताओं में नया उत्साह और ऊर्जा भरी थी। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में विकसित भारत के लिए सुरक्षा, विकास, सुशासन और सांस्कृतिक पहचान जैसे मुद्दों पर जनता के बीच स्पष्ट और सशक्त संदेश दिए। बिहार की जनता के प्रति उनकी आत्मीयता और भरोसेमंद नेतृत्व शैली ने न केवल मतदाताओं को प्रभावित किया बल्कि भाजपा संगठन को भी मजबूत आधार प्रदान किया। शपथ ग्रहण समारोह में उनकी उपस्थिति इस बात का भी प्रतीक है कि भारतीय जनता पार्टी केवल राजनीतिक दृष्टिकोण से ही नहीं बल्कि विकासात्मक और सामाजिक सहयोग के दृष्टिकोण से भी दोनों राज्यों के बीच संबंधों को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। उत्तर प्रदेश और बिहार, दोनों राज्यों के बीच सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक रिश्ते सदियों से जुड़े रहे हैं। ऐसे में दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों का एक साथ आना भविष्य में आपसी सहयोग की संभावनाओं को और व्यापक बनाता है।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश: आजम खान को रामपुर जेल में विशेष सुविधा, मेडिकल और क्लास अपग्रेड

 रामपुर समाजवादी पार्टी के नेता मोहम्मद आजम खान को अदालत से बड़ी राहत मिली है. अदालत से सजा सुनाए जाने के बाद मोहम्मद आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्लाह आजम को रामपुर जेल भेज दिया गया था. पूर्व में भी आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्लाह आजम दो बार जेल जा चुके हैं. पहली बार 27 महीने तक दोनों सीतापुर जेल में रहे और उसके बाद जब 23 महीने जेल में रहे तो दोनों को अलग-अलग रखा गया. आजम खान सीतापुर जेल में और उनके बेटे अब्दुल्लाह आजम हरदोई जेल में रहे. इस बार 17 नवंबर 2025 को सजा सुनाए जाने के बाद आजम खान ने वकीलों द्वारा अदालत में अर्जी लगाई थी कि उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं है और उनके विरुद्ध 100 से अधिक मामले दर्ज हैं, 45 मुकदमे उनके बेटे अब्दुल्लाह आजम खान के खिलाफ हैं, जिनमें से अधिकतर की सुनवाई रामपुर जिला अदालत में हो रही है. ऐसे में उन्हें रामपुर जिला जेल में ही रखा जाए और उनके साथ में उनके बेटे अब्दुल्लाह आजम को भी रखा जाए, क्योंकि स्वास्थ्य खराब होने के चलते उन्हें एक मददगार की जरूरत है. आजम खान की दरखास्त का अभियोजन पक्ष ने विरोध किया. उनका कहना था कि अभियुक्त ने जानबूझकर अलग-अलग केस में अलग-अलग बीमारियां बताईं, उसका कोई प्रमाण भी पेश नहीं किया. जेल से ट्रांसफर प्रशासनिक व्यवस्था है. ऐसे में न्यायालय में उनकी यह दरखास्त चलने योग्य नहीं है. रामपुर एमपी एमएलए विशेष न्यायाधीश शोभित बंसल ने दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद फैसला सुनाते हुए रामपुर जेल अधीक्षक को आदेश दिया कि आजम खान के विरुद्ध अनेकों मामलों की सुनवाई रामपुर में होनी है. इसलिए आजम खान को और उनके बेटे अब्दुल्लाह आजम खान को रामपुर जेल में ही रखा जाए.  कोर्ट ने कहा कि बिना न्यायालय की अनुमति के उनको रामपुर से बाहर दूसरे जिले की जेल में नहीं ट्रांसफर किया जाए, साथ ही कोर्ट ने यह भी निर्देश दिए कि आजम खान को सुपीरियर क्लास जेल उपलब्ध कराई जाए, यानी क्लास वन की सुविधाएं दी जाएं. स्वास्थ्य को देखते हुए समुचित मेडिकल सुविधा भी उपलब्ध कराई जाए. अदालत का आदेश आजम खान के लिए राहत भरा माना जा रहा है, क्योंकि रामपुर जेल उनके घर से नजदीक है.

योगी सरकार का नया विकास खाका, मेरठ-कानपुर-मथुरा होंगे विशेष शहरों की तर्ज पर विकसित

 लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को मेरठ, कानपुर और मथुरा-वृंदावन के समग्र शहरी विकास की समीक्षा करते हुए कहा कि तीनों शहरों का विकास केवल निर्माण-कार्य पर आधारित न हो, बल्कि उसमें स्थानीय पहचान, सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक शहरी सुविधाओं का संतुलन साफ दिखाई दे. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजनाओं को चरणबद्ध ढंग से लागू किया जाए और काम समयसीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा हो. बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए तीनों मंडलों के मंडलायुक्त मौजूद रहे. बताया गया कि अयोध्या, वाराणसी, गोरखपुर और प्रयागराज की तर्ज पर अब मेरठ, कानपुर और मथुरा-वृंदावन में समेकित विकास मॉडल लागू किया जा रहा है. इसके तहत कुल 478 परियोजनाओं को चिन्हित किया गया है, जिनमें मेरठ में 111, कानपुर में 109 और मथुरा-वृंदावन में 258 परियोजनाएं शामिल हैं. सभी परियोजनाओं को अल्पकालिक, मध्यमकालिक और दीर्घकालिक श्रेणियों में विभाजित किया गया है. पहले चरण के रूप में वर्ष 2025-26 में तीनों शहरों की 38 प्राथमिक परियोजनाओं पर काम प्रस्तावित है. इनमें यातायात सुधार, चौराहों का पुनर्विकास, मल्टीलेवल पार्किंग निर्माण, हरित क्षेत्र विस्तार, सड़क और पेवमेंट सुधार, बिजली लाइनों को भूमिगत करने, जल प्रबंधन और पर्यटन सुविधाओं को उन्नत करने से जुड़े कार्य शामिल हैं. मेरठ: ग्रीन कॉरिडोर मॉडल पर बिजली बम्बा बाईपास टेड इन लेगेसी, राइजिंग टू टुमॉरो” की अवधारणा पर आधारित है. योजना का फोकस औद्योगिक पहचान को बनाए रखते हुए शहर को आधुनिक ट्रैफिक, सार्वजनिक परिवहन और हरित ढांचे से जोड़ना है. प्रमुख प्रस्तावों में मैनावती मार्ग चौड़ीकरण, मल्टीलेवल पार्किंग निर्माण, मास्टर प्लान की प्रमुख सड़कों का विकास, ग्रीन पार्क क्षेत्र का अर्बन डिजाइन सुधार, मकसूदाबाद में सिटी फॉरेस्ट और बोटैनिकल गार्डन, वीआईपी रोड सुधार, रिवरफ्रंट लिंक, ग्रीनफील्ड कॉरिडोर और मेट्रो विस्तार शामिल है. ग्रेटर कानपुर के रूप में नए विस्तार क्षेत्र का मॉडल भी प्रस्तुत किया गया. मथुरा-वृंदावन: विजन-2030 के तहत धार्मिक पर्यटन मॉडल मथुरा-वृंदावन के लिए मास्टर प्लान को “विजन-2030” के रूप में प्रस्तुत किया गया. योजना का फोकस धार्मिक पर्यटन, यात्री सुविधाओं और शहर की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करना है. प्रमुख प्रस्तावों में स्ट्रीट फसाड डेवलपमेंट, मल्टीलेवल पार्किंग, बस पार्किंग, शहर के प्रमुख प्रवेश द्वारों का सौंदर्यीकरण, नए मार्गों का निर्माण, बरसाना–गोवर्धन–राधाकुंड कॉरिडोर सुधार, परिक्रमा मार्ग पर आधुनिक सुविधाएं, तथा नगर सीमा से धार्मिक स्थलों तक संकेतक और प्रकाश व्यवस्था शामिल है. निजी निवेश पर जोर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि परियोजनाओं को लागू करने में नवाचार और आधुनिक प्रबंधन को प्राथमिकता दी जाए. जहां संभव हो, पीपीपी मॉडल अपनाया जाए और निजी क्षेत्र के सहयोग से रेवेन्यू शेयरिंग की व्यवस्था विकसित की जाए. उन्होंने कहा कि शहरों के विकास का उद्देश्य ऐसा ढांचा तैयार करना है जो यातायात को सुगम बनाए, सार्वजनिक परिवहन और पैदल यात्रियों को प्राथमिकता दे तथा शहर अधिक हरित और स्वच्छ बने. मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि आवश्यक होने पर परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त बजट उपलब्ध कराया जाएगा.