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बलौदाबाजार में मरीन ड्राइव की तर्ज पर चौपाटी की शुरुआत

बलौदा बाजार. बलौदाबाजार में राजधानी रायपुर के मरीन ड्राइव की तर्ज पर चौपाटी की शुरआत हुईं जो इसे शहरी पहचान दिलाएगी। राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने सोमवार को विधिवत पूजा -अर्चना कर बलौदाबाजार चौपाटी का लोकार्पण किया। साथ ही फीता काट कर चौपाटी का उद्घाटन किया गया और आमजनों के लिये खोल दिया गया। शहर के हृदय स्थल स्वामी विवेकानंद सरोवर के किनारे नगर पालिका परिषद द्वारा सुन्दर और आकर्षक चौपाटी विकसित किया गया है। इसके साथ ही सरोवर का सौन्दर्यीकरण एवं अन्य विकास कार्य भी किए गए हैं। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए मंत्री वर्मा ने कहा कि नगर पालिका परिषद बलौदाबाजार द्वारा सकारात्मक सोच के साथ चौपाटी विकसित किया गया है जो शहर के लिये उपलब्धि है। इस चौपाटी में शहरवासी मनोरंजन के साथ स्वादिष्ट व्यंजनों का लुत्फ़ ले सकेंगे। चौपाटी को बहुत ही सुंदर बनाया गया है लेकिन इसकी सुंदरता बनाए रखने के लिये साफ- सफाई का ध्यान रखना होगा। उन्होंने कहा कि आज बलौदाबाजार विकास के पथ पर तेजी से अग्रसर है। विकास के लिये सरकार कोई कसर नहीं छोड़ेगी। राजस्व मंत्री ने इस अवसर पर अपने चिर परिचित अंदाज में प्रसिद्ध छत्तीसगढी गीत गाकर लोगों को मंत्र मुग्ध किया।तकनिकी शिक्षा मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि रायपुर की तर्ज पर बहुत ही सुंदर चौपाटी विकसित की गई है जहां एक ही स्थान पर मनोरंजन व अनेक व्यंजन उपलब्ध होग़ा। बलौदाबाजार नगर तेजी से विकास हो रहा है जिसमें सभी का सहयोग मिल रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द मोदी के 2047 तक विकसित भारत संकल्प के साथ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ को विकसित प्रदेश बनाने सबका सहयोग जरुरी है। इसके पूर्व मंत्री द्वय ने चौपाटी का भ्रमण कर स्टॉलो और दुकानों का अवलोकन किया और लोगों की प्रतिक्रिया भी जानी। उन्होंने लोगों से चौपाटी का आनंद लेने और स्वच्छ और सुंदर बनाए रखने की अपील की। फूड जोन और चिल्ड्रेन प्ले एरिया*-चौपाटी में एक आधुनिक फूड स्टॉल और रेस्टोरेंट विकसित किए गए हैं जिसमें एक दर्जन से अधिक स्टॉल है। इसके अलावा, बच्चों के लिए चिल्ड्रन प्ले एरिया में झूले और अन्य मनोरंजन साधन उपलब्ध कराए गए हैं।चौपाटी में सुरक्षा और सुव्यवस्था के लिए पार्किंग की व्यवस्था, फ्लोटिंग फाउंटेन, सेल्फी प्वाइंट और फ्लोटिंग जेट्टी जैसी सुविधाएं भी दी गई हैं। इसके अलावा, चौपाटी में कांक्रीट सड़क और लॉन जैसी सुविधाएं भी विकसित की गई है। इस चौपाटी के शुरू ही जाने से शहरवासियो को मनोरंजन का एक नया केन्द्र मिल गया है। युवा और बच्चे मनोरंजन के लिये वहीं बुजुर्ग सरोवार के चारों तरफ बने पाथ-वे में वाकिंग के लिये आ सकते हैं। इस अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष अशोक जैन,जनपद अध्यक्ष सुलोचना यादव, पूर्व विधायक डॉ. सनम जांगड़े, प्रमोद शर्मा,लक्ष्मी बघेल, जिला अध्यक्ष आनंद यादव,भारत स्काउट गाइड के राज्य उपाध्यक्ष विजय केशरवानी,नगर पालिका उपाध्यक्ष जितेंद्र महाले सहित पार्षदगण एवं बड़ी संख्या में नगरवासी उपस्थित थे।

तेंदूपत्ता संग्राहकों में खुशियों की लहर, छत्तीसगढ़ सरकार ने फिर शुरू की चरणपादुका योजना, 12.40 लाख वनवासियों को मिला लाभ

रायपुर तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों को सरकार द्वारा कई योजनाओं के माध्यम से आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा मिलती है, जिसमें संग्रहण लाभ का 80% हिस्सा, बच्चों की शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति, स्वास्थ्य सहायता, बीमा कवर (दुर्घटना मृत्यु या विकलांगता पर), और विभिन्न वनोपज पर न्यूनतम समर्थन मूल्य शामिल हैं, जिससे उनकी आय और जीवन स्तर में सुधार होता है l छत्तीसगढ़ में 5500 सौ रुपए प्रति मानक बोरा पारिश्रमिक और राजमोहिनी देवी योजना के तहत लाभ दिए जा रहे हैं l छत्तीसगढ़ सरकार ने वनवासियों और तेंदूपत्ता संग्राहकों के हित में एक बड़ा कदम उठाते हुए चरणपादुका योजना को पुनः शुरू किया है। पूर्ववर्ती सरकार द्वारा बंद की गई यह जनहितैषी योजना अब मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और उनकी संवेदनशीलता के कारण फिर से शुरू की गई है। यह निर्णय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की "गारंटी" के अनुरूप गरीब हितैषी शासन की स्पष्ट तस्वीर पेश करता है। वन मंत्री श्री केदार कश्यप के कुशल मार्गदर्शन में वन विभाग ने इस योजना को तेज गति और पारदर्शिता के साथ धरातल पर लागू किया है। 12.40 लाख तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों को लाभ  वितरित हुई उच्च गुणवत्ता की चरणपादुकाएं        वर्ष 2024-25 में प्रदेश के 12.40 लाख तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों की महिला मुखिया को उच्च गुणवत्ता वाली चरणपादुकाएं प्रदान की गईं। इसके लिए सरकार ने 40 करोड़ रुपये व्यय किए। इस कदम से जंगलों में कठिन परिस्थितियों में कार्य करने वाली महिलाओं को सुरक्षा और सुविधा दोनों मिली हैं। वर्ष 2026 में पुरुष संग्राहकों को भी मिलेगा लाभ            वन मंत्री श्री कश्यप के विशेष प्रयासों से सरकार ने इस योजना का विस्तार करते हुए वर्ष 2026 में पुरुष संग्राहकों को भी चरणपादुका प्रदान करने का निर्णय लिया है। इसके लिए 50 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। यह निर्णय संग्राहक परिवारों के लिए ऐतिहासिक और लाभकारी सिद्ध होगा। पारदर्शी प्रक्रिया — खरीदी जेम पोर्टल से                सरकार ने चरणपादुकाओं की खरीदी जेम पोर्टल के माध्यम से की है, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और भ्रष्टाचार-मुक्त रहे। तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों को वितरित की जा रही चरणपादुकाएं उच्च गुणवत्ता पूर्ण हैं और उन पर एक वर्ष की वारंटी भी दी जा रही है। यह सरकार की गुणवत्ता और लाभार्थी हितों के प्रति गंभीरता को दर्शाता है।           वनांचल क्षेत्रों में उमंग, सुरक्षा और सम्मान की भावना मजबूत मुख्यमंत्री श्री साय और वन मंत्री श्री कश्यप के इस निर्णय से वनांचल क्षेत्रों में खुशी और उत्साह का माहौल है। चरणपादुका योजना सीधे उन मेहनतकश तेंदूपत्ता संग्राहकों तक राहत पहुँचा रही है, जो कठिन परिस्थितियों में जंगलों में कार्य करते हैं और अपनी आजीविका जुटाते हैं।          यह योजना न केवल सुरक्षा और सुविधा प्रदान कर रही है, बल्कि वनवासियों को सम्मान और आत्मविश्वास भी दे रही है जो सुशासन और अंत्योदय की दिशा में राज्य सरकार की महत्वपूर्ण पहल बन गई है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जन-हितैषी पहल, ‘मिशन कनेक्ट’ से चौपाल तक पहुँचा प्रशासन

गाँव-गाँव जाकर अधिकारियों ने सुनी समस्याएँ, मौके पर हुआ समाधान रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अंत्योदय और सुशासन की सोच को साकार करने के लिए सुकमा जिले में 'मिशन कनेक्ट' की शुरुआत की गई है। संभागायुक्त बस्तर श्री डोमन सिंह के निर्देशन और कलेक्टर के मार्गदर्शन में शुरू हुए इस अभियान का उद्देश्य प्रशासन और जनता के बीच की दूरी को खत्म कर सरकारी सेवाओं को लोगों के घर-घर तक पहुँचाना है। गाँव-गाँव पहुँचे अधिकारी, मौके पर हुआ समाधान          विगत दिनों मिशन कनेक्ट के तहत छिंदगढ़ विकासखंड की लगभग 60 पंचायतों में जिला स्तरीय अधिकारी पहुँचे। यह केवल निरीक्षण नहीं था, बल्कि ग्रामीणों की समस्याओं को समझकर मौके पर उनका समाधान करने की एक नई पहल थी। सुबह 10 बजे से ही अधिकारी स्कूलों, आंगनबाड़ियों, आश्रम-छात्रावासों, ग्राम पंचायतों और स्वास्थ्य केंद्रों में सक्रिय दिखाई दिए। गुणवत्ता और पारदर्शिता पर विशेष ध्यान            निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने मध्यान्ह भोजन और पूरक पोषण आहार की गुणवत्ता की स्वयं जांच की। स्वास्थ्य केंद्रों में दवाइयों की उपलब्धता, स्वच्छता और अन्य व्यवस्थाओं की गंभीरता से जाँच की गई। ग्राम पंचायतों में चल रहे निर्माण कार्यों की प्रगति और गुणवत्ता की भी समीक्षा की गई, ताकि सरकारी राशि का सही उपयोग सुनिश्चित हो सके। अधिकारियों ने ग्रामीणों के बीच बैठकर उनकी समस्याएँ और सुझाव सुने, जिससे शासन और जनता के बीच विश्वास और मजबूत हुआ। कलेक्टर और सीईओ ने की विस्तृत समीक्षा           निरीक्षण के बाद जनपद पंचायत छिंदगढ़ में उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। कलेक्टर श्री अमित कुमार और जिला पंचायत सीईओ ने सभी पंचायतों की रिपोर्ट का गहन विश्लेषण किया। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि जिला स्तर की समस्याओं का समाधान तुरंत किया जाए, जबकि राज्य स्तर के विषयों को संबंधित विभागों को तत्काल भेजा जाए। कलेक्टर श्री अमित कुमार ने बताया कि मिशन कनेक्ट का उद्देश्य केवल निरीक्षण करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि शासन की सभी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे। प्रशासन को अधिक पारदर्शी और जिम्मेदार बनाना हमारी प्राथमिकता है।         सुशासन की ओर मजबूत कदम 'मिशन कनेक्ट' ने यह संदेश स्पष्ट कर दिया है कि अब योजनाएँ सिर्फ कागजों पर नहीं रहेंगी, बल्कि वास्तव में ग्रामीणों के जीवन में बदलाव लाएँगी। अधिकारियों की सक्रियता से क्षेत्र में लोगों में उत्साह और भरोसा बढ़ा है।

अमिताभ जैन मुख्य सूचना आयुक्त नियुक्त, अग्रवाल और मिश्रा ने भी ली शपथ

रायपुर, राज्यपाल रमेन डेका ने आज यहां लोकभवन के छत्तीसगढ़ मण्डपम् में आयोजित समारोह में छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग के नवनियुक्त मुख्य सूचना आयुक्त अमिताभ जैन एवं राज्य सूचना आयुक्त उमेश कुमार अग्रवाल एवं शिरीष चंद्र मिश्रा को राज्य सूचना आयुक्त के पद की शपथ दिलाई। मुख्य सचिव विकास शील ने शपथ प्रक्रिया पूर्ण कराई। शपथ ग्रहण समारोह में राजस्व, खेल एवं युवा कल्याण, आपदा प्रबंधन मंत्री टंकराम वर्मा, कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार, और अनुसूचित जाति विकास मंत्री गुरू खुशवंत साहेब, विधायक पुरंदर मिश्रा, पुलिस महानिदेशक अरूण देव गौतम, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर.प्रसन्ना, मुख्यमंत्री के सचिव सुबोध सिंह, राज्य शासन के विभिन्न विभागों के प्रमुख सचिव एवं सचिव, छत्तीसगढ़ मानव अधिकार आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष गिरिधारी नायक, राज्य सूचना आयोग के आयुक्त आलोक चंद्रवंशी, राज्य सूचना आयोग के पूर्व आयुक्त मनोज त्रिवेदी, अशोक अग्रवाल, धनवेंद्र जयसवाल, राज्य सूचना आयोग के सचिव नीलम नागदेव एक्का सहित गणमान्य नागरिक एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे। ज्ञात हो कि नवनियुक्त मुख्य सूचना आयुक्त अमिताभ जैन सेवानिवृत्त आईएएस पूर्व मुख्य सचिव रहे हैं। राज्य सूचना आयुक्त उमेश अग्रवाल सेवानिवृत्त आईएएस हैं तथा शिरीष चंद्र मिश्रा पत्रकारिता से जुड़े हुए है।  

वीबी-जी राम-जी का सकारात्मक प्रभाव- आदिवासी एवं वनांचल बहुल गांवों में आजीविका का सशक्त नया अध्याय

रायपुर वीबी-जी राम-जी (VB-G RAM G) योजना (विकसित भारत-रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन-ग्रामीण) का सकारात्मक प्रभाव ग्रामीण रोजगार और आजीविका को सशक्त बनाना, मनरेगा का स्थान लेकर 125 दिन के रोजगार की गारंटी देना है।  बुनियादी ढांचे (जैसे जल संरक्षण, गाँव का विकास, स्वयं सहायता समूह) में सुधार करना, और पारदर्शिता व जवाबदेही (बायोमेट्रिक हाजिरी, जियो-टैगिंग, त्वरित भुगतान) बढ़ाकर भ्रष्टाचार कम करना है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में सशक्तिकरण और विकास को बढ़ावा मिलेगा।   मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिला छत्तीसगढ़ के उन विशिष्ट अंचलों में शामिल है जहाँ घने वन क्षेत्र, पहाड़ी भू-आकृति और आदिवासी बहुल आबादी ने विकास को सदैव प्रकृति- अनुकूल और समावेशी स्वरूप प्रदान किया है। यहाँ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था परंपरागत रूप से वर्षा आधारित कृषि, वनोपज संग्रह और मौसमी श्रम पर आधारित रही है। ऐसे परिदृश्य में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम ने वर्ष 2006 से जिले के हजारों ग्रामीण परिवारों के लिए आजीविका सुरक्षा की एक मजबूत आधारशिला रखी। मनरेगा ने न केवल न्यूनतम आय का भरोसा दिया, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में ग्रामीणों को उनके गांव में ही सम्मानजनक रोजगार उपलब्ध कराकर सामाजिक स्थिरता को भी मजबूती दी। समय के साथ यह अनुभव सामने आया कि रोजगार उपलब्ध कराने के साथ-साथ यदि उसे स्थायी परिसंपत्तियों और दीर्घकालिक आजीविका से जोड़ा जाए, तो उसका प्रभाव कई गुना बढ़ सकता है। इसी सोच के विस्तार के रूप में विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) अर्थात वीबी-जी राम-जी सामने आया है, जिसने मनरेगा को एक नए, परिणामोन्मुख और भविष्यदृष्टा स्वरूप में ढालने का मार्ग प्रशस्त किया है। एमसीबी जैसे जिले के लिए यह पहल इसलिए भी विशेष महत्व रखती है क्योंकि यहाँ रोजगार की आवश्यकता के साथ-साथ टिकाऊ आजीविका और सुदृढ़ ग्रामीण परिसंपत्तियों की संभावना भी प्रचुर मात्रा में विद्यमान है। जमीनी अनुभवों से सीख और सशक्त भविष्य की दिशा जिले में मनरेगा के तहत बीते वर्षों में बड़ी संख्या में परिवारों को रोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं। औसतन रोजगार दिवस भले ही 50 के आसपास रहे हों, किंतु इसने यह स्पष्ट कर दिया कि जिले में श्रम की उपलब्धता, कार्य करने की इच्छा और योजना के प्रति विश्वास मजबूत है। यह स्थिति भविष्य में रोजगार दिवसों के विस्तार और गुणवत्ता सुधार के लिए एक सकारात्मक आधार प्रदान करती है। मजदूरी भुगतान प्रणाली, कार्य स्वीकृति और योजना निर्माण में हुए अनुभवों ने प्रशासन को अधिक पारदर्शी, समयबद्ध और उत्तरदायी तंत्र विकसित करने की दिशा में प्रेरित किया है। मनरेगा के माध्यम से जिले में जल संरक्षण, ग्रामीण सड़क, भूमि सुधार और अन्य आधारभूत कार्यों ने गांवों के भौतिक स्वरूप को बदला है। अब वीबी-जी राम-जी इन कार्यों को आगे बढ़ाते हुए उन्हें प्रत्यक्ष आजीविका और उत्पादकता से जोड़ने का अवसर प्रदान करता है, जिससे पलायन जैसी समस्याओं का समाधान स्वाभाविक रूप से संभव हो सके। वीबी-जी राम-जीरू वित्तीय स्थिरता और सुव्यवस्थित क्रियान्वयन वीबी-जी राम-जी के अंतर्गत केंद्र और राज्य के बीच 60-40 की स्पष्ट वित्तीय साझेदारी ने ग्रामीण रोजगार योजनाओं को नई स्थिरता प्रदान की है। यह व्यवस्था जिला प्रशासन और ग्राम पंचायतों को दीर्घकालिक योजना निर्माण, संसाधनों के बेहतर उपयोग और समयबद्ध क्रियान्वयन में सक्षम बनाती है। वित्त वर्ष 2026 के लिए 86 हजार करोड़ रुपये का ऐतिहासिक आवंटन यह दर्शाता है कि ग्रामीण रोजगार और आजीविका को अब देश के समग्र आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण स्तंभ माना जा रहा है। मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में इस मिशन के अंतर्गत कार्यों को जल सुरक्षा, मुख्य अवसंरचना, आजीविका-संबंधी अवसंरचना और जलवायु-सहिष्णु परिसंपत्तियों जैसी स्पष्ट श्रेणियों में केंद्रित किया गया है। जिले की भौगोलिक विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए खेत-तालाब, चेकडैम, लघु सिंचाई संरचनाएँ और ग्रामीण सड़कें न केवल रोजगार सृजन का माध्यम बन रही हैं, बल्कि कृषि उत्पादकता, बाजार संपर्क और ग्रामीण जीवन की गुणवत्ता को भी नई ऊँचाई दे रही हैं। ग्राम पंचायत स्तर की योजनाओं का पीएम गति-शक्ति ढांचे से जुड़ना इस बात का प्रमाण है कि ग्रामीण विकास अब एक समग्र और दूरदर्शी दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ रहा है। 125 दिनों का रोजगाररू आत्मनिर्भरता की ओर सशक्त कदम वीबी-जी राम-जी के तहत रोजगार गारंटी को 100 से बढ़ाकर 125 दिनों तक विस्तारित करना ग्रामीण परिवारों के लिए एक सशक्त आश्वासन है। यह विस्तार केवल रोजगार के दिनों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन दिनों में किए जाने वाले कार्यों को अधिक उपयोगी, टिकाऊ और परिणाम-उन्मुख बनाने पर केंद्रित है। इससे ग्रामीण श्रमिकों को न केवल अधिक आय का अवसर मिलेगा, बल्कि उनके श्रम से निर्मित परिसंपत्तियाँ आने वाली पीढ़ियों के लिए भी लाभकारी सिद्ध होंगी। एमसीबी जिले के आदिवासी और वनांचल बहुल क्षेत्रों में, जहाँ आजीविका का गहरा संबंध प्रकृति और स्थानीय संसाधनों से है, यह मॉडल मनरेगा को स्थायी ग्रामीण जीवन का आधार बनाने की क्षमता रखता है। जल संरचनाओं से बढ़ी सिंचाई क्षमता, बेहतर सड़कों से आसान बाजार पहुँच और आजीविका-संबंधी परिसंपत्तियों से स्थानीय रोजगार के नए अवसर ग्रामीण समाज को आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रसर करेंगे। वीबी-जी राम-जी के माध्यम से मनरेगा का यह पुनर्गठन एमसीबी जिले के लिए केवल एक योजना सुधार नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास की सोच में आया एक सकारात्मक और दूरगामी परिवर्तन है। राज्य सरकार, जिला प्रशासन और ग्राम पंचायतों के समन्वित प्रयासों से यह मिशन जिले को रोजगार गारंटी के साथ-साथ टिकाऊ आजीविका का सशक्त मॉडल बना सकता है।

रायपुर साहित्य उत्सव–2026: 23 से 25 जनवरी तक नवा रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन में तीन दिवसीय भव्य आयोजन

रायपुर छत्तीसगढ़ की समृद्ध साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं बौद्धिक परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित करने के उद्देश्य से रायपुर साहित्य उत्सव–2026 का भव्य आयोजन 23, 24 एवं 25 जनवरी 2026 को नवा रायपुर अटल नगर स्थित पुरखौती मुक्तांगन परिसर में किया जा रहा है। तीन दिवसीय यह आयोजन साहित्य, संस्कृति और विचार विमर्श का एक सशक्त मंच बनेगा, जिसमें देश-प्रदेश के साहित्य प्रेमी, लेखक, विचारक और पाठक बड़ी संख्या में सहभागिता करेंगे। इस तीन दिवसीय साहित्य उत्सव में देश एवं प्रदेश के लगभग 120 ख्याति प्राप्त साहित्यकारों का आगमन होगा। आयोजन के दौरान कुल 42 साहित्यिक सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें समकालीन सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक और बौद्धिक विषयों पर गहन विमर्श किया जाएगा। साहित्य उत्सव के सत्रों में बौद्धिक विमर्श, भारतीय ज्ञान परम्परा, संविधान, सिनेमा और समाज, देश में नव जागरण, छत्तीसगढ़ में साहित्य, इतिहास के झरौखे में साहित्य, शैक्षणिक संस्थानों में भाषा और साहित्य का स्तर जैसे विषयों पर विचार-विमर्श होगा, जो वर्तमान समय की बौद्धिक आवश्यकताओं को संबोधित करेंगे। इसके अतिरिक्त नाट्य शास्त्र एवं कला परम्परा, साहित्य और राजनीति, समकालीन महिला लेखन, जनजातीय साहित्य, छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, पर्यटन, पत्रकारिता और शासन जैसे विषयों पर भी विशद परिचर्चाएं आयोजित की जाएंगी। साथ ही प्रकाशकों की चुनौतियां, डिजिटल युग में लेखन और पाठक जैसे समसामयिक विषय भी विमर्श के केंद्र में रहेंगे। आयोजन की तैयारियां युद्धस्तर पर जारी हैं और प्रशासन द्वारा 21 जनवरी 2026 तक सभी व्यवस्थाएं पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। आयोजन स्थल पर मंच, पंडाल, तकनीकी व्यवस्थाएं, साज-सज्जा और अन्य आवश्यक सुविधाएं तेजी से अंतिम रूप ले रही हैं। साहित्य उत्सव का शुभारंभ 23 जनवरी 2026 को राज्यसभा के उपसभापति श्री हरिवंश द्वारा किया जाएगा। उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय तथा वर्धा अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. कुमुद शर्मा की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी। साहित्य उत्सव का समापन 25 जनवरी 2026 को होगा, जिसमें राज्य सरकार के मंत्रिगणों के साथ-साथ डॉ. सच्चिदानंद जोशी एवं डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी जैसी प्रतिष्ठित साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विभूतियां विशेष रूप से शामिल होंगी। साहित्य उत्सव के दौरान 23 जनवरी को सायंकाल 7 बजे से प्रख्यात साहित्यकार एवं रंगमंच कलाकार श्री मनोज जोशी द्वारा चर्चित ‘चाणक्य’ नाटक का विशेष मंचन किया जाएगा, जो आयोजन का प्रमुख आकर्षण होगा। इसके साथ ही महाभारत धारावाहिक में भगवान श्रीकृष्ण की भूमिका निभाने वाले श्री नीतीश भारद्वाज तथा सिनेमा जगत के जाने-माने निर्माता-निर्देशक श्री अनुराग बसु भी साहित्य उत्सव में सहभागिता करेंगे। 24 जनवरी 2026 को देश के पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति में विशेष काव्य-पाठ का आयोजन किया जाएगा। साहित्यकारों की परिचर्चाओं एवं सत्रों के लिए आयोजन स्थल पर चार मंडप बनाए गए हैं। मुख्य मंडप का नामकरण ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित छत्तीसगढ़ के एकमात्र साहित्यकार स्व. श्री विनोद कुमार शुक्ल के नाम पर किया गया है। दूसरे मंडप का नामकरण पं. श्यामलाल चतुर्वेदी, तीसरे मंडप का नामकरण बस्तर के गौरव साहित्यकार लाला जगदलपुरी तथा चौथे मंडप का नामकरण साहित्यकार अनिरुद्ध नीरव के नाम पर किया गया है। आयोजन स्थल पर विशाल पुस्तक मेला भी लगाया जाएगा, जहां प्रभात प्रकाशन, राजकमल प्रकाशन, सरस्वती बुक, यशस्वी प्रकाशन, हिन्द युग्म प्रकाशन, राजपाल प्रकाशन सहित लगभग 15 राष्ट्रीय स्तर के प्रकाशक अपनी पुस्तकों का प्रदर्शन एवं विक्रय करेंगे। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ के साहित्यकारों एवं स्कूली विद्यार्थियों द्वारा लिखी गई पुस्तकों को भी प्रदर्शित किया जाएगा तथा साहित्यकारों द्वारा लिखी गई नई पुस्तकों के विमोचन की भी समुचित व्यवस्था की गई है। आयोजन स्थल पर छत्तीसगढ़ के 25 वर्षों में हुए विकास को प्रदर्शित करने वाली आकर्षक प्रदर्शनी लगाई जाएगी। स्थानीय युवाओं एवं लोक कलाकारों के लिए टेलेंट ज़ोन बनाया गया है, जहां काव्य-पाठ, कहानी-पाठ, लोकनृत्य एवं गीत-संगीत की प्रस्तुतियां होंगी। साथ ही प्रतिदिन क्विज प्रतियोगिताएं आयोजित कर विजेताओं को पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र प्रदान किए जाएंगे। पुरखौती मुक्तांगन तक पुराने रायपुर से आने-जाने के लिए प्रशासन द्वारा लगभग 20 निःशुल्क बसों का संचालन रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, टाटीबंध, तेलीबांधा सहित छह मार्गों पर किया जाएगा। साहित्य उत्सव के सफल आयोजन हेतु लगभग 500 अधिकारी-कर्मचारी व्यवस्थाओं में जुटे हैं। आयोजन स्थल पर छत्तीसगढ़ी व्यंजनों सहित स्थानीय खान-पान के लिए लगभग 15 फूड स्टॉल लगाए जा रहे हैं। कार्यक्रम स्थल में पेयजल, स्वच्छता एवं शौचालय जैसी सभी आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। रायपुर साहित्य उत्सव–2026  छत्तीसगढ़ की बौद्धिक चेतना, सांस्कृतिक विरासत और समकालीन विचारधारा का राष्ट्रीय स्तर पर सशक्त प्रदर्शन है। यह उत्सव साहित्य, संवाद और संस्कृति के माध्यम से समाज को जोड़ने का कार्य करेगा तथा नई पीढ़ी में अध्ययन, अभिव्यक्ति और सृजनशीलता के प्रति रुचि को और सुदृढ़ करेगा।

रायगढ़ बार्डर में अवैध वसूली के आरोप में जमकर मारपीट

रायगढ़. रायगढ़ और ओड़िसा बार्डर में जमकर हंगामा हुआ। जहां ओड़िसा के ट्रांसपोर्टरों ने रायगढ़ के वाहन मालिकों और यूनियन सदस्यों के साथ मारपीट किया। मामला अवैध वसूली से जुड़ा होना बताया जा रहा है। जहां रात में पुलिस ने मामले की सूचना पर 100 से अधिक लोगों के खिलाफ अपराध दर्ज किया है। मिली जानकारी के मुताबिक रविवार की शाम को रायगढ़ और ओड़िसा बार्डर पर ओड़िसा की गाड़ियों से अवैध वसूली की जा रही थी। इसी दौरान माहौल बिगड़ गया और ओड़िसा से आए कुछ आए कुछ ट्रांसपोर्टर्स व उनके समर्थकों ने रायगढ़ के वाहन मालिकों और यूनियन सदस्यों पर अचानक हमला कर दिया। हमलावरों ने गाली-गलौज के बाद मिर्ची स्प्रे छिड़ककर मारपीट किया जाना बताया जा रहा है। जिसके बाद वहां जमकर हंगामा होने लगा। रायगढ़ से भी काफी संख्या में युनियन के सदस्य मौके पर पहुंच गए। तब तक मामले की सूचना तमनार पुलिस को लग चुकी थी। ऐसे में पुलिस मौके पर पहुंची और सुरक्षा के लिहाज से माहौल को शांत कराया। इसके बाद रात में दोनों ओर से आने-जाने वाली वाहनों को रोक दिया और एक पक्ष तमनार थाना पहुंचकर रिपोर्ट दर्ज कराया।

छत्तीसगढ़ राज्य में प्रशासनिक हलचल, जिलों के कलेक्टरों में हो सकते हैं बदलाव

रायपुर  नए साल की शुरुआत के साथ ही छत्तीसगढ़ प्रशासनिक महकमे में बड़े फेरबदल की आहट तेज हो गई है। राज्य के कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने से कई जिलों के कलेक्टर बदले जाने की पूरी संभावना बन गई है। प्रशासनिक गलियारों में इसे बड़े स्तर पर आईएएस तबादलों की शुरुआत माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, डॉ. प्रियंका शुक्ला के बाद अब जगदलपुर कलेक्टर एस. हरीश और बलौदाबाजार-भाटापारा कलेक्टर दीपक सोनी का नाम भी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने वाले अधिकारियों की सूची में शामिल हो चुका है। दोनों अधिकारियों की केंद्र सरकार में नई पोस्टिंग को मंजूरी मिल चुकी है, ऐसे में इन्हें जल्द ही राज्य से रिलीव किया जा सकता है। कई जिलों में बदलेगी प्रशासनिक कमान दो महत्वपूर्ण जिलों के कलेक्टरों के एक साथ रिलीव होने से जिला प्रशासन की कमान नए अधिकारियों को सौंपे जाने की तैयारी शुरू हो गई है। माना जा रहा है कि इसी क्रम में कई और जिलों के कलेक्टरों में बदलाव किया जा सकता है। जल्द ही राज्य सरकार आईएएस अफसरों की तबादला सूची जारी कर सकती है। मंत्रालय से मैदानी स्तर तक बदलाव संभव सूत्रों का कहना है कि अधिकारियों के रिलीव होते ही राज्य सरकार मंत्रालय और जिला स्तर पर व्यापक प्रशासनिक बदलाव कर सकती है। कुछ आईएएस अफसरों को नई जिम्मेदारियां सौंपी जा सकती हैं, जबकि कुछ के विभाग बदले जाने की भी संभावना है। आने वाले दिनों में मंत्रालय से लेकर मैदानी प्रशासन तक हलचल तेज रहने के संकेत हैं। केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर लगातार जा रहे अफसर छत्तीसगढ़ कैडर के आईएएस अफसरों का केंद्र सरकार में जाना लगातार जारी है। वर्तमान में करीब 17 आईएएस अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर सेवाएं दे रहे हैं। पहले से ही अमित अग्रवाल और निधि छिब्बर केंद्र में पदस्थ हैं। बता दें कि बस्तर कलेक्टर एस. हरीश को भारत सरकार ने केंद्रीय उद्योग एवं वाणिज्य विभाग में उप सचिव नियुक्त किया है। वहीं 2011 बैच के आईएएस दीपक सोनी को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में डायरेक्टर के पद पर जिम्मेदारी दी गई है। अब निगाहें राज्य सरकार की अगली तबादला सूची पर टिकी हैं, जो छत्तीसगढ़ प्रशासन में बड़े बदलाव की तस्वीर साफ कर सकती है।

छत्तीसगढ़ में तापमान में भारी गिरावट के साथ फिर कड़ाके की ठंड

रायपुर. राजधानी रायपुर समेत प्रदेश के कई अन्य जिलों में एक बार फिर कड़ाके की ठंड पड़ रही है। दो दिनों की राहत के बाद एक बारे फिर से तापमान में कमी आनी शुरू हो गई है। प्रदेश के कई जिलों में तापमान फिर 10 डिग्री से नीचे आ गया है। वहीं शनिवार रात से ही राजधानी में कड़ाके की पड़ रही है। वहीं मौसम विभाग ने अगले दो दिनों तक प्रदेश में शीतलहर चलने अनुमान जताया है। मौसम विभाग के इस अलर्ट ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। ऐसा इसलिए क्योंकि, अमूमन मकर संक्रांति के बाद तापमान बढ़ना शुरू हो जाता है, लेकिन इस बार तापमान में कमी दर्ज की जा रही है। अब देखना होगा कि, तपमान में बढ़ोतरी कब से शुरू होगी।  छत्तीसगढ़ मौसम विभाग ने, प्रदेश की राजधानी रायपुर और न्यायधानी बिलासपुर समेत 10 से ज्यादा जिलों में शीतलहर चलने और कड़ाके की ठंड पड़ने का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग ने रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, अंबिकापुर, कोरिया, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, बलरामपुर, जशपुर, सरगुजा और दंतेवाड़ा जिले में शीतलहर चलने का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार, शीतलहर चलने से इन जिलों में तापमान में और गिरावट दर्ज की जा सकती है।

बलौदाबाजार पुलिस ने विशेष ग्राम अभियान में सड़क सुरक्षा-जीवन रक्षा का दिया संदेश

बलौदा बाजार. बलौदाबाजार जिले में पुलिस विभाग द्वारा सड़क सुरक्षा, जीवन रक्षा, नशामुक्त जीवन और साइबर सतर्कता को लेकर जागरूकता अभियान चलाया गया। इस अभियान का उद्देश्य ग्रामीण नागरिकों में जिम्मेदार नागरिकता की भावना पैदा करना और उन्हें यातायात नियमों, नशामुक्त जीवनशैली और साइबर अपराध से सुरक्षित रहने की जानकारी प्रदान करना है। अभियान के दौरान पुलिस ने ग्रामवासियों के साथ विशेष चर्चा सत्र आयोजित किया। यातायात नियमों, सड़क सुरक्षा और हेलमेट, सीट बेल्ट के महत्व पर ग्रामवासियों को विस्तृत जानकारी दी गई। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सड़क सुरक्षा केवल नियमों का पालन करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक व्यक्ति के जीवन और दूसरों की सुरक्षा से जुड़ा हुआ मामला है। नशामुक्त जीवन को लेकर ग्रामवासियों को शराब और मादक पदार्थों के दुष्प्रभाव के बारे में बताया गया। पुलिस ने ग्रामीणों को चेतावनी दी कि नशा न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, बल्कि इससे सामाजिक और पारिवारिक समस्याएं भी उत्पन्न होती हैं। अभियान में बच्चों और युवाओं को नशे के खतरे से बचने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही, सायबर सतर्कता पर भी विशेष ध्यान दिया गया। ग्रामीणों को साइबर अपराध जैसे ऑनलाइन धोखाधड़ी, फर्जी कॉल, सोशल मीडिया पर गलत जानकारी और बैंकिंग धोखाधड़ी से बचने के उपाय बताए गए। लोगों को चेताया गया कि व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी को सुरक्षित रखना आवश्यक है और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें। अभियान में पुलिस टीम ने ग्रामवासियों के प्रश्नों का उत्तर दिया और उन्हें जागरूक नागरिक बनने के लिए प्रेरित किया। अभियान के माध्यम से पुलिस ने ग्रामीणों में सुरक्षा, अनुशासन और जिम्मेदारी की भावना बढ़ाने का प्रयास किया। पुलिस अधिकारियों ने इस अवसर पर कहा कि ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों के नियमित आयोजन से सड़क दुर्घटनाओं में कमी, नशा नियंत्रण और साइबर सुरक्षा में सुधार संभव है। अभियान का संदेश स्पष्ट था – सुरक्षित जीवन, नशामुक्त जीवन और सतर्क साइबर व्यवहार हर नागरिक की जिम्मेदारी है।