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PCC अध्यक्ष बैज ने अस्पताल में घायलों से की मुलाकात, रेल हादसे पर जताया गहरा दुख

बिलासपुर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज आज बिलासपुर के रेलवे अस्पताल पहुंचे, जहां रेल हादसे के घायलों से मुलाकात कर हाल-चाल जाना. इलाज को लेकर डॉक्टरों से बातचीत की. साथ ही अफसरों से घटना के बारे में जानकारी ली. बैज ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा, रेल हादसे के जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. केंद्र और प्रदेश दोनों सरकार फेल है. अगर दोनों सरकारें ठीक से ध्यान देती तो ऐसा हादसा नहीं होता. रेल हादसे में हुई मौतों के लिए केंद्र व राज्य सरकार जिम्मेदार है. मृतक परिवारों को 1-1 करोड़ और घायलों को 50-50 लाख देने की मांग दीपक बैज ने डिप्टी सीएम अरुण साव के बयान पर भी पलटवार किया. उन्होंने कहा, हम राजनीति करने नहीं आए हैं. 11 लोगों की मौत का जिम्मेदार कौन है. कोयला गाड़ी को प्राथमिकता दी जा रही है, यात्री ट्रेनों को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है. छत्तीसगढ़ से सबसे ज्यादा आय देने वाला रेलवे जोन है. एक जान की कीमत 10 लाख रुपए दिया जा रहा है. मृतक परिवारों को 1-1 करोड़ और घायलों को 50-50 लाख रुपए दिया जाना चाहिए.

प्रदेश के गौरव को मिलेगा सम्मान, 41 हस्तियों को उपराष्ट्रपति करेंगे अलंकृत

रायपुर  नवा रायपुर में आयोजित राज्योत्सव 2025 के अंतिम दिन राज्य अलंकरण समारोह होगा. इस साल 34 राज्य अलंकरण दिया जाएगा. संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने बुधवार को मीडिया से चर्चा में राज्य अलंकरण से सम्मानित होने वाले लोगों की लिस्ट भी जारी की है. अलग-अलग क्षेत्रों में इन्हें मिलेगा सम्मान इस वर्ष शहीद वीर नारायण सिंह सम्मान हिरेश सिन्हा को आदिवासी चेतना के लिए प्रदान किया जाएगा, जबकि यति यतनलाल सम्मान भारतीय कुष्ठ निवारक संघ को अहिंसा और गौ रक्षा के लिए दिया जाएगा. खेल के क्षेत्र में, गुंडाधूर सम्मान ज्ञानेश्वरी यादव को मिला है. महिला एवं बाल विकास में महत्वपूर्ण कार्य के लिए, मिनीमाता सम्मान ललेश्वरी साहू को दिया जाएगा. गुरु घासीदास सम्मान भुवनदास जांगड़े और शशि गायकवाड़ को दिया जाएगा. ठाकुर प्यारेलाल सिंह पुरस्कार प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति मर्यादित, डोम को सहकारिता के लिए प्रदान किया जाएगा. हबीब तनवीर सम्मान डॉ. कुंज बिहारी शर्मा को समकालीन रंगकर्म के लिए, महाराजा प्रवीरचंद्र भंजदेव सम्मान चांदनी साहू को खेल के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन (तीरंदाजी) के लिए और पं. सुंदरलाल शर्मा सम्मान चित्तरंजन कर को हिंदी साहित्य, चक्रधर सम्मान पं. कीर्ति माघव लाल व्यास को शास्त्रीय संगीत एवं नृत्य के लिए, दाऊ मंदराजी सम्मान रिखी क्षत्रिय को लोक नाट्य एवं लोक शिल्प के लिए, डॉ. खूबचंद बघेल कृषक रत्न पुरस्कार थनेन्द्र कुमार साहू और वामन कुमार टिकरिहा को कृषि के लिए दिया जाएगा. वहीं महाराजा अग्रसेन सम्मान राजेंद्र अग्रवाल को सामाजिक समरसता के लिए दिया जाएगा. पत्रकारिता (प्रिंट मीडिया हिंदी) में चन्दूलाल चन्द्राकर स्मृति पत्रकारिता पुरस्कार डॉ. संदीप कुमार तिवारी को दिया जाएगा. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया (हिन्दी) के लिए यह पुरस्कार डॉ. सोमेश कुमार पटेल और प्रिंट मीडिया (अंग्रेजी) के लिए अभिषेक शुक्ला को मिलेगा. मधुकर खेर स्मृति पत्रकारिता पुरस्कार भावना पांडेय को प्रिंट मीडिया (अंग्रेजी) के लिए दिया जाएगा. दानवीर भामाशाह सम्मान नीरज कुमार बाजपेयी को दानशीलता, सौहार्द और अनुकरणीय सहायता के लिए, धन्वंतरि सम्मान अजय कृष्ण कुलश्रेष्ठ को आयुर्वेद चिकित्सा शिक्षा और शोध एवं अनुसंधान के लिए, श्रीमती बिलासादेवी केंवट मत्स्य विकास पुरस्कार सुखदेव दास को मछली पालन के लिए, डॉ. भंवरसिंह पोर्ट आदिवासी सेवा सम्मान जंगो रायतार विद्या केतुल शिक्षण संस्था को आदिवासियों की सेवा और आर्थिक उत्थान के लिए, रामानुज प्रताप सिंहदेव स्मृति श्रम यशस्वी पुरस्कार मिथलेश कुमार आदिल एवं अग्रसर टीम जिला दुर्ग और एनटीपीसी लिमि. लारा, सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट, पुसौर को श्रम के लिए, पंडित लखनलाल मिश्र सम्मान  योगेश कुमार साहू को अपराध अनुसंधान के लिए, छत्तीसगढ़ अप्रवासी भारतीय सम्मान मनीष तिवारी को देश के बाहर अप्रवासी भारतीय द्वारा सामाजिक कल्याण, साहित्य, मानव संसाधान, निकाय और आर्थिक के लिए, देवदास बंजारे स्मृति पंथी नृत्य पुरस्कार रोहित कुमार कोसरिया को पंथी नृत्य के लिए दिया जाएगा. किशोरी मोहन त्रिपाठी पुरस्कार सुनील सोनी को, लक्ष्मण मस्तुरिया सम्मान राकेश तिवारी को, लाला जगदलपुरी साहित्य पुरस्कार डॉ. विनोद कुमार वर्मा को और किशोर साहू राष्ट्रीय अलंकरण अनुराग बसु  को हिंदी/छत्तीसगढ़ी सिनेमा में निर्देशन के लिए प्रदान किया जाएगा. बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल सम्मान खेम चंद, डॉ. सुरेश मणि त्रिपाठी, डॉ. भूपेंद्र करवन्दे, भरतलाल सोनी को दिया जाएगा। वीरांगना रानी अवंतीबाई लोधी स्मृति पुरस्कार प्रेमशीला बघेल को महिलाओं की वीरता, शौर्य, साहस और आत्मबल को सशक्त के लिए, माता बहादुर कलारिन सम्मान शिल्पा पांडेय सृष्टि को महिलाओं के उत्पीड़न के खिलाफ संघर्ष, नारी उत्थान के लिए, पं माधव राव सप्रे राष्ट्रीय रचनात्मक सम्मान अवधेश कुमार को रचनात्मक लेखन और हिंदी भाषा के लिए और संस्कृति भाषा डॉ. दादू भाई त्रिपाठी को संस्कृत भाषा के लिए दिया जाएगा.

मुख्यमंत्री ने भारत रत्न डॉ. भूपेन हजारिका की पुण्यतिथि पर उन्हें किया नमन

रायपुर, उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, राज्यपाल रमेन डेका एवं  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजभवन में आधुनिक असम के सांस्कृतिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले बहुमुखी प्रतिभा के धनी, भारत रत्न डॉ. भूपेन हजारिका जी की पुण्यतिथि पर उन्हें नमन करते हुए पुष्पांजलि अर्पित की। इस अवसर पर राज्य की प्रथम महिला श्रीमती रानी डेका काकोटी, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर प्रसन्ना एवं राजभवन के अधिकारियों-कर्मचारियों ने श्री हजारिका के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

रेल दुर्घटना का दर्दनाक मंज़र: 11 की मौत, 20 गंभीर — पहचाने गए 5 मृतकों के नाम व फोटो जारी

बिलासपुर छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में मंगलवार को हुए भीषण रेल हादसे ने पूरे प्रदेश को शोक में डुबो दिया है। लाल खदान स्टेशन के पास गाड़ी संख्या 68733 गेवरारोड-बिलासपुर मेमू लोकल ट्रेन और मालगाड़ी की टक्कर में अब तक 11 यात्रियों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 20 लोग गंभीर रूप से घायल हैं। हादसे में मृतकों की पहचान का सिलसिला जारी है और अब तक पांच यात्रियों के नाम और तस्वीरें सामने आई हैं, जिनमें लोको पायलट, छात्रा और अन्य यात्री शामिल हैं। मृतकों के नाम और पहचान मृतकों में लोको पायलट विद्या सागर, प्रमिला वस्त्रकार, अंकित अग्रवाल, प्रिया चंद्रा और शीला यादव के नाम की पुष्टि हुई है। मृतका शीला यादव देवरी खुर्द के बहनिया मंदिर के पास रहने वाली थीं, जबकि प्रिया चंद्रा गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय (GGU) की बीएससी फाइनल ईयर की छात्रा थीं। वह सक्ती जिले के बहेराडीह की निवासी थीं। इनकी मौत की खबर सुनते ही परिजनों में मातम छा गया है। हादसे में लोको पायलट विद्या सागर की मौके पर ही मौत हो गई, वहीं सहायक लोको पायलट रश्मि राज गंभीर रूप से घायल हैं। उन्हें अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हादसे के दौरान मालगाड़ी के ट्रेन मैनेजर शैलेश चंद्रा ने तेज गति से आती मेमू ट्रेन को देखकर गाड़ी से कूदकर अपनी जान बचाई। लगभग 10 घंटे तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन रेलवे और स्थानीय प्रशासन की टीम ने रेल हादसे के बाद लगभग 10 घंटे तक रेस्क्यू अभियान चलाया, जो बुधवार तड़के तक चला। मंगलवार देर रात तक हैवी क्रेन की मदद से क्षतिग्रस्त बोगी को हटा लिया गया। रात 3 बजे तक शवों को बाहर निकालने का काम चला। जिसके बाद मुंबई-हावड़ा रेल लाइन पर यातायात बहाल कर दिया गया है। साथ ही अप, डाउन और मिडल लाइन को क्लियर कर दिया गया है। अब रेल यातायात पूरी तरह से बहाल कर दिया गया है। घायल यात्रियों के नाम इस रेल हादसे में घायल हुए यात्रियों के नाम सामने आये हैं। इस सूची में 20 लोगों के नाम शामिल हैं।     मथुरा भास्कर, स्त्री, आयु 55 वर्ष     चौरा भास्कर, पुरुष, आयु 50 वर्ष     शत्रुघ्न, पुरुष, आयु 50 वर्ष     गीता देबनाथ, स्त्री, आयु 30 वर्ष     मेहनिश खान, स्त्री, आयु 19 वर्ष     संजू विश्वकर्मा, पुरुष, आयु 35 वर्ष     सोनी यादव, स्त्री, आयु 25 वर्ष     संतोष हंसराज, पुरुष, आयु 60 वर्ष     रश्मि राज, स्त्री, आयु 34     ऋषि यादव, आयु 2 वर्ष     तुलाराम अग्रवाल, पुरुष, आयु 60 वर्ष     अराधना निषाद, स्त्री, आयु 16 वर्ष     मोहन शर्मा, पुरुष, आयु 29 वर्ष     अंजूला सिंह, स्त्री, आयु 49 वर्ष     शांता देवी गौतम, स्त्री, आयु 64 वर्ष     प्रीतम कुमार, पुरुष, आयु 18 वर्ष     शैलेश चंद्र, पुरुष, आयु 49 वर्ष     अशोक कुमार दीक्षित, पुरुष, आयु 54 वर्ष     नीरज देवांगन, पुरुष, आयु 53 वर्ष     राजेंद्र मारुति बिसारे, पुरुष, आयु 60 वर्ष मुआवजे का ऐलान बिलासपुर रेल हादसा में प्रभावित लोगों को मुआवजे का ऐलान किया गया है। रेलवे ने मृतक के परिवार को 10 लाख और गंभीर घायलों को 5 लाख, सामान्य घायलों को एक लाख रुपये देने की घोषणा की है। सीएम साय ने किया मुआवजे का ऐलान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने घोषणा की है कि इस हादसे में मृतक के परिजनों को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। वहीं घायलों को 50 हजार रुपए की सहायता राशि दी जाएगी। CRS स्तर पर होगी जांच बिलासपुर रेल हादसे की जांच रेलवे सुरक्षा आयुक्त (Commissioner of Railway Safety – CRS) स्तर पर कराई जाएगी। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, दुर्घटना गटौरा और बिलासपुर के बीच सिग्नल या लाइन-स्विचिंग से जुड़ी तकनीकी त्रुटि के चलते हुई बताई जा रही है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।

रहस्यमयी कुटुमसर गुफा का आगाज — पर्यटन सीजन की धमाकेदार शुरुआत

बस्तर कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में स्थित विश्व प्रसिद्ध कुटुमसर गुफा शनिवार से पर्यटकों के लिए खोल दी गई है. हर साल की तरह इस बार भी बारिश के मौसम में जलभराव और सुरक्षा कारणों से गुफा को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया था. अब मानसून समाप्त होने के बाद इसे फिर से पर्यटकों के लिए खोला गया है. शनिवार को खुलने के पहले ही दिन बड़ी संख्या में पर्यटक कुटुमसर गुफा का मनमोहक नजारा देखने पहुंचे. वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, हर वर्ष लाखों पर्यटक कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के घने जंगलों के बीच स्थित इस अद्भुत गुफा को देखने आते हैं. इस साल भी पर्यटकों की भारी आमद की उम्मीद जताई जा रही है. कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में स्थित कुटुमसर गुफा अपने अद्वितीय प्राकृतिक सौंदर्य, चूना पत्थर की संरचना और रहस्यमय वातावरण के लिए प्रसिद्ध है. यह गुफा छत्तीसगढ़ पर्यटन का एक प्रमुख आकर्षण मानी जाती है. सतीश चंद्रदास, महासमुंद जिला – “कुटुमसर गुफा का प्राकृतिक नज़ारा वाकई अद्भुत है, हर किसी को यहां आना चाहिए.” प्रेमीचंद साहू, रायपुर – “यह जगह बहुत खूबसूरत और अनोखी है, यहां आकर मन को शांति मिलती है.”

छत्तीसगढ़ के 25 वर्षों की विकास गाथा : वनोपज, जल संरक्षण और ईको टूरिज्म से समृद्ध हुआ राज्य

रायपुर : छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के 25 वर्षों की सफलता की कहानी, वनोपज, जल संरक्षण और ईको टूरिज्म से बढ़ी समृद्धि रायपुर छत्तीसगढ़ ने अपने 25 साल के सफर में विकास, पर्यावरण संरक्षण और लोगों की आजीविका के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धियाँ हासिल की हैं। इस सफर ने राज्य के ग्रामीण और वन क्षेत्रों के जीवन में खुशहाली और बदलाव लाया है। वनवासियों की आय और आर्थिक सुरक्षा में काफी बढ़ोतरी राज्य की सबसे बड़ी सफलता लघु वनोपज के क्षेत्र में मिली है। वर्ष 2000 में तेंदूपत्ता का मानक बोरा मूल्य जहाँ मात्र 400 रुपये था, वहीं अब यह बढ़कर 5,500 रुपये हो गया है। पहले जहाँ केवल 7 प्रकार की लघु वनोपजों की खरीद समर्थन मूल्य पर होती थी, अब यह संख्या बढ़कर 67 हो गई है। इससे वनवासियों की आय और आर्थिक सुरक्षा में काफी बढ़ोतरी हुई है। स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को वनोपज संग्रहण से मिली नियमित रोजगार वन धन विकास योजना ने इस दिशा में नई ऊर्जा दी है। इस योजना के तहत 190 स्व-सहायता समूहों की 2364 महिलाओं को वनोपज संग्रहण और प्रसंस्करण से नियमित रोजगार मिला है। अब तक संग्राहकों को 190 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे उनके खातों में डीबीटी के माध्यम से दी गई है। इससे व्यवस्था में पारदर्शिता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में मजबूती आई है। जल संरक्षण और ईको टूरिज्म का विकास आजीविका के साथ-साथ जल संरक्षण और ईको टूरिज्म (पर्यावरण पर्यटन) ने भी विकास को नई दिशा दी है। नरवा उपचार योजना के तहत राज्य में अब तक 7 लाख से अधिक जल संरक्षण संरचनाएँ बनाई गई हैं, जिससे लगभग 15 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सुधार हुआ है। इन कार्यों से 40 करोड़ रुपये से अधिक का रोजगार सृजन हुआ और भूजल स्तर में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। इससे किसानों की खेती अधिक उत्पादक बनी है। पर्यटन से स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर आईएसएफआर 2023 रिपोर्ट के अनुसार, इन प्रयासों से मृदा नमी और वन घनत्व दोनों में सुधार दर्ज किया गया है। साथ ही, ईको टूरिज्म को भी राज्य में रोजगार का नया माध्यम बनाया गया है। प्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात के पास नेचर ट्रेल, मिनी गोवा और खुर्साकोटा जैसे कई पर्यटक स्थलों का विकास किया जा रहा है। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिले हैं और क्षेत्र की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी है। वन क्षेत्र में 94.75 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि राज्य के किसान भी हरित विकास के भागीदार बने हैं। अब तक 19 हज़ार से अधिक किसानों ने गैर-वन भूमि पर लगभग 2 करोड़ 42 लाख पौधे लगाए हैं। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्र में 94.75 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है। हरियाली से खुशहाली की कहानी गढ़ता छत्तीसगढ छत्तीसगढ़ की यह 25 वर्षों की विकास यात्रा बताती है कि राज्य ने प्रकृति की सुरक्षा और मानव कल्याण के बीच एक मजबूत संतुलन स्थापित किया है। यह सचमुच हरियाली और खुशहाली की ओर अग्रसर होने की कहानी है।

छत्तीसगढ़ का मॉडल — वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान, सुरक्षा और कल्याण की मिसाल

रायपुर : विशेष लेख : वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान, सुरक्षा और कल्याण के लिए प्रतिबद्ध – छत्तीसगढ़ का आदर्श मॉडल रायपुर भारतीय संस्कृति के केंद्र में हमारे बुजुर्ग हैं – जिनके अनुभव समाज को दिशा देते हैं और जिनकी स्मृतियाँ हमारी सभ्यता की नींव हैं, लेकिन बदलते सामाजिक परिदृश्य में पारिवारिक संरचना और सामाजिक दायरे सिमटने लगे हैं। ऐसे में वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सहभागिता और गरिमामय जीवन सुनिश्चित करना शासन की प्राथमिकता बन जाता है। इसी भावना को साकार करती है – छत्तीसगढ़ सरकार की संवेदनशील नीतियाँ और सशक्त क्रियान्वयन। बुजुर्ग – संस्कृति, अनुभव और मूल्यों के स्तंभ छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने वरिष्ठजनों के सम्मान को शासन प्रणाली में प्रमुख स्थान दिया है। उनका मानना है “माता-पिता की पूजा ही ईश्वर की पूजा है।” इसी सोच के साथ राज्य में ऐसे प्रकल्पों का विस्तार हो रहा है जो बुजुर्गों के जीवन की गुणवत्ता बढ़ाते हैं। एक अक्टूबर अंतर्राष्ट्रीय वरिष्ठ नागरिक दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री  साय ने रायपुर, बिलासपुर, कोरबा और दुर्ग में पीपीपी मॉडल के तहत आधुनिक वृद्धाश्रम स्थापित करने तथा असहाय बुजुर्गों और दिव्यांगजनों के लिए रायपुर में उपकरण सर्विस सेंटर खोलने की घोषणा की। इसी के साथ राज्य में “सियान गुड़ी” जैसे सामाजिक-आध्यात्मिक केंद्रों का विस्तार बुजुर्गों को मानसिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक सहारा प्रदान कर रहा है। छत्तीसगढ़ की समाज कल्याण मंत्री मती लक्ष्मी राजवाड़े ने वृद्धजन केंद्रित कार्यक्रमों को जमीनी स्तर तक पहुँचाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। उनका कहना है “संवेदनशील शासन का अर्थ है, हर बुजुर्ग तक सेवा और सुरक्षा पहुँचाना।” राज्य में 35 वृद्धाश्रम सक्रिय रूप से संचालित हैं, जहाँ लगभग 1049 वरिष्ठ नागरिक भोजन, आवास, स्वास्थ्य, परामर्श और मनोरंजन की सुविधाएँ प्राप्त कर रहे हैं। गंभीर रोगों या असहाय स्थिति में रह रहे बुजुर्गों के लिए रायपुर, दुर्ग, कबीरधाम, रायगढ़, बालोद और बेमेतरा इन 6 जिलों में प्रशामक देखभाल गृह संचालित किए जा रहे हैं, जहाँ 128 वरिष्ठजनों को निःशुल्क उपचार, दवाइयाँ और नियमित स्वास्थ्य देखभाल मिल रहा है। वरिष्ठजनों की समस्याओं के निवारण हेतु स्थापित हेल्पलाइन सेवा द्वारा अब तक 2 लाख 70 हजार से अधिक प्रकरणों का समाधान किया जा चुका है। यह सेवा न केवल उनकी पहुँच बढ़ाती है, बल्कि आत्मविश्वास और सुरक्षा बोध भी जगाती है। वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम – 2007 का राज्य में सख्ती से पालन किया जा रहा है। अनुविभाग स्तर पर – भरण-पोषण अधिकरण, जिला स्तर पर – अपीलीय अधिकरण इन व्यवस्थाओं ने बुजुर्गों को संपत्ति, सुरक्षा और भरण-पोषण से जुड़े मामलों में त्वरित न्याय दिलाने का मार्ग प्रशस्त किया है। गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन करने वाले वरिष्ठ नागरिकों को नियमित पेंशन सहायता प्रदान की जा रही है 60 से 79 वर्ष तक की आयु के बुजुर्गों को 500 रुपए प्रति माह और 80 वर्ष से अधिक आयु वाले वरिष्ठजनों को 650 रुपए प्रति माह सहायता राशि दी जा रही है। वर्तमान में 14 लाख से अधिक बुजुर्ग इस योजना से लाभान्वित हो रहे हैं। यह सहायता उनके जीवन में आर्थिक सुरक्षा का आधार बनती है। राज्य सरकार की योजनाएँ गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा के अधिकार को सुदृढ़ कर रही हैं। आयुष्मान भारत और शहीद वीर नारायण सिंह स्वास्थ्य सहायता योजनाओं के तहत 8 लाख से अधिक वरिष्ठ नागरिकों को निःशुल्क उपचार मिला है। साथ ही वरिष्ठ नागरिक सहायक उपकरण प्रदाय योजना के अंतर्गत 50 हजार से अधिक बुजुर्गों को व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र, छड़ी, चश्मा जैसे उपकरण प्रदान किए गए हैं। आध्यात्मिक संतोष बुजुर्गों के मानसिक स्वास्थ्य का आधार है। इसी उद्देश्य से मुख्यमंत्री तीर्थयात्रा योजना और  रामलला दर्शन योजना के माध्यम से 2.5 लाख से अधिक वरिष्ठ नागरिक, 278 व्यक्ति तीर्थयात्राओं का लाभ ले चुके हैं। यात्रा के दौरान भोजन, आवास और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। प्रत्येक वर्ष एक अक्टूबर वृद्धजन दिवस राज्य और जिला स्तर पर मनाया जाता है। इन कार्यक्रमों से समाज में बुजुर्गों के प्रति सम्मान, संवेदना और सहयोग की भावना को प्रोत्साहन मिलता है। वरिष्ठ नागरिकों का सम्मान केवल एक सामाजिक मूल्य नहीं, बल्कि एक कर्तव्य है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय और समाज कल्याण मंत्री मती लक्ष्मी राजवाड़े के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ ने यह सिद्ध किया है कि संवेदनशील शासन, सुचारु क्रियान्वयन और मानवीय दृष्टिकोण मिलकर बुजुर्गों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन ला सकते हैं। बुजुर्ग – संस्कृति, अनुभव और मूल्यों के स्तंभ     डॉ. दानेश्वरी संभाकर, उप संचालक जनसंपर्क विभाग  

केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू ने रायपुर में लोगों को दी खुशियों की चाबी

रायपुर : केंद्रीय राज्यमंत्री  तोखन साहू ने बांटी खुशियों की चाबी श्रम विभाग की योजनाओं से लाभान्वित हुए हितग्राही, आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ा एक और कदम रायपुर बिलासपुर में जिला स्तरीय राज्योत्सव कार्यक्रम में केंद्रीय आवासन एवं शहरी विकास राज्य मंत्री  तोखन साहू ने श्रम विभाग द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के हितग्राहियों को चेक और सहायता सामग्री वितरित की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि राज्य और केंद्र सरकार की योजनाएँ आमजन को आत्मनिर्भर बनाने और समाज के अंतिम पायदान तक विकास की रोशनी पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण योजना के अंतर्गत हितग्राही तानिया राठौर को 20 हजार रुपये का चेक प्रदान किया गया। वहीं दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना के अंतर्गत कुसुम साहू को ई-रिक्शा की चाबी सौंपकर उन्हें आत्मनिर्भर जीवन की ओर कदम बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।  तोखन साहू ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर प्रत्येक वर्ग के उत्थान के लिए ठोस कदम उठा रही हैं। श्रम विभाग की योजनाएँ श्रमिक परिवारों को सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने में सेतु का कार्य कर रही हैं। उन्होंने उपस्थित हितग्राहियों से योजनाओं का अधिकाधिक लाभ लेने का आह्वान करते हुए कहा कि सरकार की मंशा है कि कोई भी पात्र हितग्राही योजनाओं से वंचित न रहे। राज्योत्सव के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि, अधिकारीगण, श्रमिक हितग्राही एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।

छत्तीसगढ़ की उन्नति और संस्कृति को मिला वैश्विक सम्मान — अटल जी के सपनों को साकार कर रहा प्रदेश

रायपुर : अटल जी का सपना हुआ साकार – प्रदेश की उन्नति व गौरवशाली संस्कृति को मिली पहचान :  मंत्री  टंकराम वर्मा जांजगीर-चांपा में तीन दिवसीय राज्योत्सव कार्यक्रम का हुआ भव्य समापन छत्तीसगढ़ रजत जयंती महोत्सव पर गूंजा ‘छत्तीसगढ़िया सबसे बढ़िया’ का जयघोष 2047 तक होगा पूर्ण विकसित भारत, छत्तीसगढ़ निभा रहा अग्रणी भूमिका रायपुर छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के रजत जयंती वर्ष के अवसर पर जांजगीर-चांपा जिले में आयोजित तीन दिवसीय राज्योत्सव कार्यक्रम का भव्य समापन हुआ। शासकीय हाई स्कूल मैदान जांजगीर में 2 से 4 नवम्बर तक चले इस आयोजन के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में राजस्व एवं उच्च शिक्षा मंत्री  टंकराम वर्मा शामिल हुए। कार्यक्रम में मंत्री  वर्मा ने अतिथियों के साथ विभिन्न विभागों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया, जिसमें छत्तीसगढ़ के 25 वर्षों की विकास यात्रा, नवाचारों और जनकल्याणकारी योजनाओं की झलक प्रस्तुत की गई थी। पात्र हितग्राहियों को योजनाओं के अंतर्गत सम्मानित भी किया गया। वहीं विद्यालयीन छात्र-छात्राओं एवं स्थानीय कलाकारों ने मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। छत्तीसगढ़ी नृत्य, लोकगीत और नाट्य प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में विधायक  ब्यास कश्यप, पूर्व नेता प्रतिपक्ष  नारायण चंदेल, पूर्व सांसद मती कमला देवी पाटले, पूर्व विधायक  चुन्नीलाल साहू, जिला पंचायत अध्यक्ष मती सत्यलता आनंद मिरी, नगर पालिका अध्यक्ष मती रेखा देवागढ़ेवाल, जिला पंचायत उपाध्यक्ष  गगन जयपुरिया, कलेक्टर  जन्मेजय महोबे, पुलिस अधीक्षक  विजय कुमार पांडेय, जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी  गोकुल रावटे सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे। मंत्री  टंकराम वर्मा ने कहा कि यह गर्व का क्षण है जब पूरा प्रदेश विकास, संस्कृति और आत्मगौरव की दिशा में आगे बढ़ रहा है। छत्तीसगढ़ की आत्मा इसकी लोककला और परंपराओं में बसती है। उन्होंने कहा, “हम छत्तीसगढ़िया हैं — यही हमारी असली पहचान है।"उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने रायपुर में राज्योत्सव का शुभारंभ करते हुए छत्तीसगढ़ को निरंतर सहयोग एवं मार्गदर्शन का भरोसा दिया है। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में गरीब कल्याण, शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई और आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य किए जा रहे हैं। किसानों को 3100 रुपये प्रति क्विंटल धान का समर्थन मूल्य देकर सरकार ने अपना वादा निभाया है। मंत्री  वर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ अब नक्सलवाद से लगभग मुक्त हो चुका है और 2026 तक यह पूरी तरह शांतिपूर्ण व समृद्ध प्रदेश बन जाएगा। प्रधानमंत्री के ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प को साकार करने में छत्तीसगढ़ अग्रणी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा हमें मिलकर अपने राज्य को ‘रामराज्य’ की भावना से सशक्त, सक्षम और समृद्ध बनाना है। मंत्री  वर्मा ने अटल बिहारी वाजपेयी जी के योगदान को नमन करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से ही छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण संभव हुआ। आज उनकी दृष्टि साकार हो रही है,प्रदेश संस्कृति, संकल्प और समृद्धि का संगम बन चुका है। कार्यक्रम में लोकसभा सांसद मती कमलेश जांगड़े ने कहा कि यह गर्व का क्षण है जब हमारा छत्तीसगढ़ तेजी से विकसित भारत की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में “सबका साथ, सबका विकास” की भावना के साथ राज्य प्रगति पथ पर है। दर्शकों की मांग पर गूंजा ‘मोर गवई गंगा हे’ समापन कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रहा जब दर्शकों की मांग पर मंत्री  टंकराम वर्मा ने मंच पर स्वयं छत्तीसगढ़ी गीत “मोर भाखा संग दया माया के सुंदर हवे मिलाप रे”, “गेंदा फूल” और “मोर गवई गंगा हे” गुनगुनाए। उनकी इस संगीतमय प्रस्तुति पर दर्शक भाव-विभोर हो उठे और कार्यक्रम तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

छत्तीसगढ़ से कोस्टा रिका को फोर्टिफाइड राइस कर्नेल का निर्यात — मुख्यमंत्री साय बोले, आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम

रायपुर : छत्तीसगढ़ से कोस्टा रिका को 12 मीट्रिक टन फोर्टिफाइड राइस कर्नेल का निर्यात: आत्मनिर्भर भारत की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि – मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय रायपुर छत्तीसगढ़ के लिए यह अत्यंत गौरवपूर्ण क्षण है कि प्रदेश से 12 मीट्रिक टन फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (Fortified Rice Kernel – FRK) का निर्यात कोस्टा रिका को किया गया है।  मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने इस उपलब्धि पर कहा कि  छत्तीसगढ़ की पहचान न सिर्फ वैश्विक मंच पर सुदृढ़ हो रही है, बल्कि पोषण, गुणवत्ता और समृद्धि के क्षेत्र में राज्य की साख को नई ऊँचाई भी प्राप्त हो रही  है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि यह उपलब्धि माननीय प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन में कुपोषण के खिलाफ छेड़ी गई उस मुहिम का विस्तार है, जो अब वैश्विक स्तर पर प्रभाव दिखा रही है।  मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि यह हमारे किसानों, मिल संचालकों और निर्यातकों के लिए वैश्विक बाजार में नए अवसर और मूल्यवर्धित कृषि निर्यात को बढ़ावा देने वाला सराहनीय कदम है। साथ ही यह आत्मनिर्भर भारत और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (FRK) में आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन-बी12 जैसे आवश्यक पोषक तत्वों का समावेश किया जाता है। यह प्रयास न केवल खाद्य सुरक्षा को सुदृढ़ करता है, बल्कि समाज के पोषण स्तर को भी बेहतर बनाता है। अब छत्तीसगढ़ के उत्पाद वैश्विक बाजार में ‘पोषण के प्रतीक’ के रूप में उभर रहे हैं। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि को “आत्मनिर्भर भारत और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़” की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि यह निर्यात छत्तीसगढ़ के किसानों, मिल संचालकों और उद्योगों की मेहनत, गुणवत्ता और समर्पण का परिणाम है। आज हमारा छत्तीसगढ़ केवल भारत का अन्नदाता नहीं, बल्कि पोषण, नवाचार और गुणवत्ता का वैश्विक ब्रांड बन रहा है। यह गर्व का क्षण है, जो हमारे प्रदेश को वैश्विक व्यापार और पोषण मिशन – दोनों में अग्रणी बनाता है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि यह सफलता न केवल आर्थिक समृद्धि की दिशा में राज्य को आगे बढ़ाएगी, बल्कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी के ‘कुपोषण मुक्त भारत’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विज़न को नई ऊर्जा प्रदान करेगी। उल्लेखनीय है कि केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री  पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया हैंडल पर पोस्ट करके जानकारी दी है कि छत्तीसगढ़ से 12 मीट्रिक टन फोर्टिफाइड राइस कर्नेल की पहली खेप कोस्टा रिका के लिए निर्यात की गई है।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी के कुपोषण के खिलाफ अभियान को आगे बढ़ाते हुए यह वैश्विक स्तर पर किया गया प्रयास न केवल हमारे विदेशी व्यापार को सशक्त करता है, बल्कि हमारे पोषण मिशन को भी नई ऊर्जा प्रदान करता है।यह पहल हमारे किसानों, मिल संचालकों और निर्यातकों को नए बाजार, बेहतर मूल्य प्राप्ति और मूल्यवर्धित कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के अवसर प्रदान करती है।