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दिल्ली में पानी संकट की चेतावनी: 3 विधानसभा क्षेत्रों के कई इलाकों में एक दिन नहीं आएगा पानी

नई दिल्ली दिल्ली जल बोर्ड ने राजधानी में पानी आपूर्ति को लेकर एक बड़ा अलर्ट जारी किया है। जल बोर्ड ने कहा है कि तीन विधानसभा क्षेत्रों के दर्जनभर इलाकों में 24 घंटे तक पानी नहीं आएगा। हैदरपुर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से जुड़े पाइप लाइन की मरम्मत के लिए आपूर्ति रोकी जाएगी। रोहिणी, रिठाला और बादली विधानसभा क्षेत्र के अधिकतर इलाकों में 17 मार्च सुबह 10 बजे से अगले दिन 10 बजे तक पानी की आपूर्ति नहीं होगी। दिल्ली जल बोर्ड की ओर से जारी अलर्ट में कहा गया है कि इन क्षेत्रों में जिस पाइप लाइन से आपूर्ति होती है, वह क्षतिग्रस्त हो गया है और इसकी जल्द से जल्द मरम्मत के प्रयास किए जा रहे हैं। इन इलाकों में रहने वाले लोगों को वैकल्पिक व्यवस्था और जरूरी इंतजाम की सलाह दी गई है। लोगों को पहले ही पर्याप्त पानी स्टोर करके रखने को कहा गया है। इसके अलावा मांग के आधार पर टैंकर उपलब्ध कराने की बात कही गई है। किन-किन इलाकों में बंद रहेगी पानी आपूर्ति रोहिणी- रोहिणी विधानसभा क्षेत्र में सेक्टर 19, बादली इंडस्ट्रियल एयरिया फेज-1, 2, 3, सूरज पार्क, राजा विहार, प्रशांत विहार और आसपास के इलाकों में पानी आपूर्ति बंद रहेगी। रिठाला- रिठाला के भी कई इलाकों में पानी नहीं आने की चेतावनी दी गई है। रिठाला में सेक्टर 16, सेक्टर 17, सरदार कॉलोनी, अमर ज्योति कॉलोनी और आसपास के इलाकों दिक्कत रहेगी। बादली- बादली के समयपुर, शिवपुरी, टीचर कॉलोनी, बादली गांव और आसपास के इलाकों में पानी की आपूर्ति बंद रहेगी। इन नंबरों पर फोन करके मंगवा सकते हैं टैंकर रोहिणी AC6 & 13- 8770530657, 9289138498 अवंतिका वाटर इमर्जेंसी- 0999902478, 9650755709, 8178020816, 9650094327, 9643575478 बादली- केवल पार्क- 9654708881 (JE) पानी आपूर्ति इन इलाकों में रहेगी बाधित  

शराब घोटाला मामले में CBI को मिली बड़ी राहत, HC ने फैसला बरकरार रखा; जानें आज की सुनवाई का हाल

नई दिल्ली दिल्ली हाईकोर्ट ने अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया से जुड़े शराब घोटाला केस में सीबीआई को आज फिर बड़ी राहत दी है। हाईकोर्ट ने जांच में खामियों के लिए सीबीआई पर की गई टिप्पणियों और सीबीआई अधिकारी की जांच कराने के ट्रायल कोर्ट के आदेश पर लगाई गई रोक को फिलहाल बरकरार रखा है। जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि जो भी अंतरिम रोक लगाई गई थी वो अभी ऐसी ही जारी रहेंगी। अदालत ने कहा कि वो इस मामले में 6 अप्रैल को अगली सुनवाई करेगी। बता दें कि इस मामले की पिछली सुनवाई में हाई कोर्ट ने प्रथमदृष्टया यह पाया था कि केजरीवाल और अन्य को बरी करते समय ट्रायल कोर्ट द्वारा की गई कुछ टिप्पणियां ‘गलत’ थीं। कोर्ट ने सीबीआई अधिकारी के खिलाफ की गई प्रतिकूल टिप्पणियों पर भी रोक लगा दी थी और ट्रायल कोर्ट में चल रही ईडी के केस की कार्यवाही को भी टाल दिया था। इसके साथ ही कोर्ट ने इस मामले में 9 मार्च को हुई पिछली सुनवाई में सीबीआई की दलीलें सुनने के बाद केजरीवाल समेत सभी 23 आरोपियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। सीबीआई की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल (एसजी) तुषार मेहता ने बताया कि सभी प्रतिवादियों को पहले ही नोटिस दिया जा चुका था और नोटिस जारी होने के बाद भी उन्हें सूचित किया गया है। इस पर बेंच ने प्रतिवादियों से पूछा कि क्या किसी ने भी अपना जवाब दाखिल नहीं किया है? क्या आप और समय चाहते हैं? प्रतिवादियों ने कहा, ‘हां’ उन्हें जवाब दाखिल करने के लिए कुछ और मोहलत चाहिए। केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट में लगाई एसएलपी अरविंद केजरीवाल की तरफ से पेश हुए सीनियर एडवोकेट एन. हरिहरन ने कहा कि यह 500 पन्नों का आदेश है। सिर्फ इसलिए कि यह आदेश उनके पक्ष में नहीं है, वो इसे गलत बता रहे हैं। हमें जवाब दाखिल करने के लिए उचित समय दिया जाना चाहिए। केजरीवाल के वकील ने कहा कि जब यह कहा कि हमने सुप्रीम कोर्ट में एक SLP (विशेष अनुमति याचिका) दाखिल की है। एसजी तुषार मेहता ने इसका विरोध करते हुए कहा कि अगर केस को टालने का यही आधार है तो आपत्तियों को दूर करके केस को सुनवाई के लिए लिस्ट किया जाना चाहिए। इस हरिहरन ने कहा कि मैं सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री का इंचार्ज नहीं हूं। एसजी ने कहा कि यह कोई ऐसा मामला नहीं है जिसमें जवाब या जवाबी हलफनामा दाखिल करना जरूरी हो, क्योंकि हमें सिर्फ विवादित आदेश और केस के रिकॉर्ड को ही देखना है। यह एक असाधारण आदेश है। इसे रिकॉर्ड में एक पल के लिए भी और नहीं रखा जा सकता। सीबीआई ने आरोपियों को वक्त देने का किया विरोध बेंच ने कहा कि उन्हें अपना जवाब दाखिल करने दीजिए। इस पर एसजी ने कहा कि मैं कोर्ट से गुजारिश करूंगा कि उन्हें एक हफ्ते से अधिक का समय न दिया जाए। किसी को बरी करने के मामले में सिर्फ केस के रिकॉर्ड को ही देखा जाता है। यह पूरी तरह से गलत है और मैं इसका विरोध करता हूं। इसके बाद बेंच ने कहा कि केस को दो हफ्ते बाद लिस्ट किया जाए और प्रतिवादी दो हफ्ते के अंदर अपना जवाब दाखिल करें। जस्टिस शर्मा ने केजरीवाल के वकील से कहा कि मैंने अपने आदेश में यह दर्ज कर लिया है कि आपने याचिका दाखिल की है और यह भी कि आपने मुझे इस बारे में सूचित किया है। 6 अप्रैल तक अंतरिम आदेश जारी रहेंगे एसजी तुषार मेहता ने कहा कि अब तो यह एक चलन सा बन गया है। ये लोग आरोप लगाते हैं और फिर भाग खड़े होते हैं। ऐसे मुकदमों को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए। इन्होंने तो सिर्फ आरोप लगाकर ही अपना करियर बना लिया है। इस पर हरिहरन ने उनसे पूछा कि कैसे आरोप? हम तो सिर्फ जवाब दाखिल करने के लिए थोड़ा और समय मांग रहे हैं। इस पर कोर्ट ने कहा कि वह इस मामले की सुनवाई 6 अप्रैल को करेगी और तब तक अंतरिम आदेश जारी रहेंगे। क्या है मामला गौरतलब है कि दिल्ली हाईकोर्ट ने सीबीआई की उस याचिका पर सुनवाई कर रही है जिसमें आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल, पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया समेत 23 आरोपियों को बरी करने वाले ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई है।

दिल्ली HC ने निचली अदालतों को चेतावनी दी, बच्चियों को यौन उत्पीड़न के मामलों में बार-बार कोर्ट बुलाना मानसिक रूप से हानिकारक

नई दिल्ली दिल्ली हाई कोर्ट ने पॉक्सो केस में पीड़िताओं को बार-बार कोर्ट में पेशी के लिए बुलाने के लिए निचली अदालतों के रवैये पर चिंता जताई। हाई कोर्ट जज स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत ने निर्देश दिया है कि नाबालिग पीड़ितों को ट्रायल या जमानत सुनवाई के दौरान बार-बार अदालत में पेशी के लिए बुलाना ठीक नहीं है। ऐसा करने से बच्चों को मानसिक पीड़ा और दोबारा ट्रॉमा का सामना करना पड़ सकता है। मामला 2022 के एक यौन उत्पीड़न केस से जुड़ा है। जिसमें ट्रायल के दौरान नाबालिग पीड़िता को 9 बार कोर्ट में पेश होना पड़ा। इतना ही नहीं पेश न होने पर जमानती वारंट तक जारी किया गया। बार एंड बेंच में छपि खबर के मुताबिक, जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत ने कहा कि प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस एक्ट के तहत अदालतों को ‘चाइल्ड-फ्रेंडली’ प्रक्रिया अपनानी चाहिए, ताकि नाबालिग पीड़ितों को बार-बार या अनावश्यक रूप से अदालत में उपस्थित न होना पड़े। अदालत ने यह भी कहा कि बच्चों के बयान दर्ज करने के लिए संभव हो तो वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का उपयोग किया जाए, जिससे उन्हें अदालत में आने की आवश्यकता कम हो। अदालत ने अपने आदेश में आगे कहा कि जमानत याचिकाओं की सुनवाई के दौरान पीड़ित को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन एक बार यदि जमानत पर पीड़ित के आपत्ति या विचार दर्ज हो जाएं, तो हर सुनवाई पर उसकी शारीरिक या वर्चुअल उपस्थिति पर जोर देना उचित नहीं है। 2022 का यौन उत्पीड़न मामला यह टिप्पणी हाई कोर्ट ने 2022 में दर्ज एक यौन उत्पीड़न मामले की तीन नाबालिग पीड़िताओं की याचिका पर सुनवाई करते हुए की। याचिका के अनुसार तीनों लड़कियां लापता हो गई थीं और बाद में दिल्ली में मिलीं। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें दो दिनों तक कई आरोपियों ने बंधक बनाकर यौन उत्पीड़न किया और धमकाया। इस मामले में बलात्कार, मानव तस्करी और पॉक्सो अधिनियम के तहत भी आरोप जोड़े गए। बार-बार गवाही के लिए बुलाने से मानसिक तनाव याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि ट्रायल के दौरान उन्हें कई बार अदालत में गवाही के लिए बुलाया गया, जिससे उन्हें मानसिक रूप से काफी परेशानी हुई। एक पीड़िता को तो उसकी गवाही पूरी होने से पहले नौ बार अदालत बुलाया गया, जबकि बाकी दोनों को भी कई बार पेश होना पड़ा। यहां तक कि एक नाबालिग पीड़िता के अदालत में उपस्थित न होने पर ट्रायल कोर्ट ने उसके खिलाफ जमानती वारंट भी जारी कर दिया था। बाद में हाईकोर्ट ने उस वारंट को रद्द कर दिया। ट्रायल कोर्ट को निर्देश हाईकोर्ट ने कहा कि नाबालिग पीड़ितों के हित में पहले भी कई दिशानिर्देश जारी किए जा चुके हैं। इसलिए ट्रायल कोर्ट और विशेष अदालतों को इन्हें एक समान और सख्ती से लागू करना चाहिए, ताकि बच्चों को न्यायिक प्रक्रिया के दौरान अनावश्यक मानसिक पीड़ा न झेलनी पड़े।

‘200 रुपये की पुड़िया देकर कराए जा रहे अपराध’ – AAP का CM रेखा गुप्ता पर बड़ा हमला

नई दिल्ली आम आदमी पार्टी ने एक बार फिर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर बड़ा आरोप लगा दिया है। पार्टी का कहना है कि दिल्ली में सीएम रेखा गुप्ता के संरक्षण में नशे का धंधा और फिर अपराध किए जा रहे हैं। पार्टी का कहना है कि ये जानकारी खुद पुलिस की ओर से दी गई है। आप दिल्ली के मुखिया सौरभ भारद्वाज ने रविवार को इस मामले पर सीएम रेखा गुप्ता के इस्तीफे मांग की है। सौरभ भारद्वाज ने कहा, दिल्ली में अपराध और नशा बहुत तेजी से बढ़ रहा है। तमाम जगहों पर खुलेआम नशा बिक रहा है और पुलिस तस्करों को जानती भी है लेकिन कोई एक्शन नहीं लिया जाता है। नाबालिग बच्चों को सूखा नशा कराया जाता है और उनसे आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दिलाया जाता है। ऐसा ही कुछ वजीरपुर की JJ कॉलोनी में हुआ, वहां नशेड़ियों ने अपनी गैंग बुलाकर एक आदमी की हत्या कर दी और एक व्यक्ति अस्पताल में भर्ती है। सीएम रेखा गुप्ता पर अपराधियों को बचाने का आरोप आप नेता ने कहा, इस हत्याकांड के बाद इलाके की महिलायें पुलिस थाने पहुंची और उन्होंने SHO से कहा कि जब CCTV में सभी लोग नजर आ रहे हैं तो उन्हें गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया? इसके बाद SHO बताते हैं कि जब भी हम नशेड़ियों और तस्करों के खिलाफ एक्शन लेते हैं तब उन्हें दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता बचाती हैं। सौरभ भारद्वाज ने कहा, दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर साफ-साफ कह रहे हैं कि जब-जब हम इन बदमाशों को पकड़ते हैं, तब-तब रेखा गुप्ता जी के यहां से इन्हें छोड़ने का आदेश आ जाता है। पूरी दिल्ली में नाबालिग बच्चों को नशा कराकर अपराध कराया जा रहा है। 200 रुपए की पुड़िया दी जाती है और खुलेआम गोलीबारी और चाकूबाजी कराई जाती है। ये सभी चीजें सीएम रेखा गुप्ता के संरक्षण में खुल्लम खुल्ला चल रही हैं।

हाई कोर्ट ने नहीं मानी केजरीवाल की दलील, जज स्वर्ण कांता शर्मा को हटाने की याचिका खारिज

नई दिल्ली दिल्ली हाई कोर्ट ने शराब घोटाला मामले में जज बदलने वाली अरविंद केजरीवाल की मांग ठुकरा दी। केजरीवाल ने मामले में सुनवाई कर रहीं जज स्वर्ण कांता शर्मा पर पक्षपात का आरोप लगाकर मामले को किसी अन्य पीठ को स्थानांतरित करने की मांग की थी। चीफ जस्टिस ने मामले में टिप्पणी भी की। दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने कहा कि याचिका वर्तमान रोस्टर के अनुसार न्यायमूर्ति शर्मा को सौंपी गई है और प्रशासनिक पक्ष पर आदेश पारित करके इसे स्थानांतरित करने का कोई कारण नहीं पाया जाता। उन्होंने यह भी कहा कि अगर न्यायमूर्ति शर्मा खुद को इस मामले की सुनवाई से अलग करना चाहें तो यह निर्णय उन्हें लेना है। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल की ओर से 13 मार्च को एक पत्र की जानकारी दी गई थी। यह पत्र उन आठ लोगों को भेजा गया था, जिन्होंने मामले को दूसरी बेंच में ट्रांसफर करने की मांग की थी, जिनमें केजरीवाल भी शामिल थे। चीफ जस्टिस ने मामले में कहा कि प्रशासनिक स्तर पर इस याचिका को किसी अन्य बेंच में ट्रांसफर करने का कोई कारण नहीं दिखता। केजरीवाल के आरोप दरअसल, 11 मार्च को लिखे अपने पत्र में केजरीवाल ने आशंका जताई थी कि यदि मामला जस्टिस स्वर्णा कांत शर्मा के पास ही रहा तो सुनवाई निष्पक्ष और तटस्थ तरीके से नहीं हो पाएगी। इससे पहले 27 फरवरी को एक ट्रायल कोर्ट ने आबकारी नीति मामले में केजरीवाल और 22 अन्य आरोपियों को राहत देते हुए उन्हें आरोपों से मुक्त कर दिया था। इसके खिलाफ सीबीआई ने हाईकोर्ट में चुनौती दी, जिसकी सुनवाई फिलहाल जस्टिस स्वर्ण कांत शर्मा की बेंच में चल रही है। ट्रायल कोर्ट की टिप्पणियों पर जस्टिस शर्मा की रोक 9 मार्च को जस्टिस शर्मा ने मामले में नोटिस जारी किया था और ट्रायल कोर्ट के उस निर्देश पर रोक लगा दी थी, जिसमें मामले की जांच करने वाले सीबीआई अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने को कहा गया था। साथ ही उन्होंने ट्रायल कोर्ट के आदेश की कुछ टिप्पणियों को गलत बताया और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों की कार्यवाही को फिलहाल टालने का निर्देश भी दिया। केजरीवाल ने पत्र में क्या मांग की थी केजरीवाल ने अपने पत्र में कहा था कि 9 मार्च के आदेश में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि किस गंभीर त्रुटि के आधार पर बिना दूसरी पक्ष की सुनवाई के ऐसा अंतरिम आदेश दिया गया। उन्होंने यह भी आपत्ति जताई कि हाईकोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों की कार्यवाही टालने का निर्देश दिया, जबकि उस समय अदालत में ईडी पक्षकार भी नहीं थी। आप नेता ने यह भी कहा कि आमतौर पर इस तरह की रिविजन याचिकाओं में पक्षों को जवाब दाखिल करने के लिए चार से पांच सप्ताह का समय दिया जाता है, लेकिन इस मामले में अदालत का रुख जल्दबाजी वाला प्रतीत हुआ, जिससे उन्हें पूर्वाग्रह की आशंका हुई।

नकली मेडिकल वीजा के सहारे दिल्ली में रह रहे 10 बांग्लादेशी पुलिस के हत्थे चढ़े

 नई दिल्ली दिल्ली पुलिस के बाहरी जिले की 'फॉरेनर सेल' ने अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों के खिलाफ एक बड़ा अभियान चलाया है. इस विशेष अभियान के तहत पुलिस ने 10 बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़ा है, जो फर्जी मेडिकल वीजा के सहारे भारत में रह रहे थे और यहां से यूरोप जाने की योजना बना रहे थे। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि कुछ विदेशी नागरिक अपने भारतीय वीजा की अवधि खत्म होने के बाद भी अवैध रूप से इलाके में छिपे हुए हैं. सूचना के आधार पर 6 मार्च, 2026 को फॉरेनर सेल की टीम ने पीरागढ़ी चौक के पास स्थित डीडीए पार्क की घेराबंदी की। पुलिस की मौजूदगी भांपते ही संदिग्धों ने भागने की कोशिश की, लेकिन मुस्तैद टीम ने उन्हें चारों ओर से घेरकर पकड़ लिया. तलाशी के दौरान इनमें से कोई भी व्यक्ति वैध पहचान पत्र या भारत में रहने के जरूरी दस्तावेज पेश नहीं कर सका। बुल्गारिया जाने का था इरादा पूछताछ में खुलासा हुआ कि ये सभी 10 बांग्लादेशी नागरिक भारत का इस्तेमाल एक 'ट्रांजिट पॉइंट' के रूप में कर रहे थे. इनका असल मकसद भारत में रहते हुए बुल्गारिया के लिए मेडिकल वीजा हासिल करना था. जांच में पता चला कि इनके पासपोर्ट और वीजा काफी समय पहले ही एक्सपायर हो चुके थे, जिसके बाद से ये दिल्ली में अवैध रूप से रह रहे थे। गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों की पहचान पकड़े गए लोगों में फारुक (39), मोहम्मद सोजिब फकीर (29), शोहाग मिया (26), शहाबुद्दीन (36), मोहम्मद शराजुल इस्लाम शाहिदुल (37), गुलाम रब्बानी (29), सजीब मिया (26), मोहम्मद जहिरुल (33), मोहम्मद आलमगीर होसिन (30) और मोहम्मद अब्दुल कुद्दुस (38) शामिल हैं। देश निकाला की प्रक्रिया शुरू पुलिस ने कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद सभी 10 आरोपियों को हिरासत में ले लिया है. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इन सभी के खिलाफ FRRO के समन्वय से निर्वासन की कार्यवाही शुरू कर दी गई है. बाहरी जिला पुलिस का कहना है कि उनके अधिकार क्षेत्र में अवैध रूप से रह रहे विदेशियों की पहचान के लिए इस तरह के वेरिफिकेशन अभियान आगे भी जारी रहेंगे।

उन्नाव रेप पीड़िता की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट की सुनवाई स्थगित, 28 मार्च तय हुई नई तारीख

नई दिल्ली दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता की ओर से दायर उस याचिका पर सुनवाई टाल दी है, जिसमें उसने अपने पिता की हिरासत में हुई मौत के मामले में दोषियों की सजा बढ़ाने की मांग की है। इस याचिका में मुख्य आरोपी और पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर समेत अन्य आरोपियों की सजा बढ़ाने की अपील की गई है। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने संबंधित पक्ष को जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय देने की अनुमति दे दी। कोर्ट ने कहा कि संबंधित पक्षों को अपना जवाब दाखिल करने के लिए और समय दिया जाता है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 28 मार्च के लिए तय कर दी है। उन्नाव रेप पीड़िता ने कोर्ट में याचिका दाखिल कर अपने पिता की कथित हिरासत में मौत के मामले में दोषियों के खिलाफ सजा बढ़ाने की मांग की है। पीड़िता के मुताबिक कहा गया है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए दोषियों को कड़ी सजा दी जानी चाहिए। उन्नाव दुष्कर्म मामले में पीड़िता के परिवारवालों ने अब दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।  पीड़िता ने अपने पिता की कथित पुलिस हिरासत में मौत के मामले में दोषी करार दिए गए पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की सजा बढ़ाने की मांग की है। निचली अदालत ने पीड़िता के पिता की मौत मामले में सेंगर को गैर इरादतन हत्या का दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष की सजा सुनाई थी और उस पर 10 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया था। निचली अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य की मौत के मामले में किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जा सकती। हालांकि, पीड़िता का पक्ष है कि यह सजा अपराध की गंभीरता के अनुरूप नहीं है और इसे बढ़ाया जाना चाहिए।

केजरीवाल की नई मांग: जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा से हटे केस, चीफ जस्टिस को भेजा पत्र

नई दिल्ली दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के मुखिया अरविंद केजरीवाल को हाई कोर्ट की जज जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा पर भरोसा नहीं है, जो उनसे जुड़े केस की सुनवाई कर रही हैं। केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य ने हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस को लेटर लिखकर शराब घोटाले वाले केस को किसी और 'निष्पक्ष' बेंच के सामने ट्रांसफर करने की मांग की है। ट्रायल कोर्ट से केजरीवाल समेत 23 आरोपियों को आरोपमुक्त किए जाने के आदेश को सीबीआई ने हाई कोर्ट में चुनौती दी है। एक दिन पहले ही आम आदमी पार्टी के दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने जस्टिस स्वर्ण कांता की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए थे और पूछा था कि उनका भारतीय जनता पार्टी से क्या रिश्ता है। अब खुद अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को लिखे लेटर में जज के पक्षपाती होने के आरोप लगा दिए हैं। गौरतलब है कि जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत में शराब घोटाले से जुड़े कुछ मामलों की पहले भी सुनवाई हो चुकी है और आरोपियों को झटका लगा था। उन्होंने अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी को भी उचित करार दिया था। अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य की ओर से चीफ जस्टिस को भेजे गए प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि सीबीआई द्वारा दायर पुनरीक्षण याचिका को 'निष्पक्ष बेंच' के पास स्थानांतरित कर दिया जाए। इनकी ओर से जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा पर 'पक्षपात' के आरोप लगाए गए हैं और कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में उनके हर आदेश को पलट दिया था। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत में इस मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च को होनी है।

तरुण हत्याकांड पर दिल्ली में गुस्सा, प्रदर्शनकारियों की मांग—एनकाउंटर से मिले इंसाफ

दिल्ली  प्रदर्शन में शामिल एक प्रदर्शनकारी ने मीडिया से बातचीत में कहा- सरकार से मेरी यही मांग है कि दोषियों को फांसी की सजा मिलनी चाहिए। वहीं अन्य ने कहा- चार-पांच बंदों का एनकाउंटर कर दें, उसमें हमें तसल्ली हो जाएगी। 4-5 बंदों का एनकाउंटर कर दें, तसल्ली हो जाएगी…; दिल्ली के तरुण हत्याकांड पर प्रदर्शनकारी दिल्ली के तरुण हत्याकांड को लेकर बवाल बढ़ गया है। हिंदू संगठन से जुड़े प्रदर्शनकारियों ने दोषियों को फांसी और उनके एनकाउंट करने की मांग की है। प्रदर्शन में शामिल एक प्रदर्शनकारी ने मीडिया से बातचीत में कहा- सरकार से मेरी यही मांग है कि दोषियों को फांसी की सजा मिलनी चाहिए। वहीं अन्य ने कहा- चार-पांच बंदों का एनकाउंटर कर दें, उसमें हमें तसल्ली हो जाएगी। हिंदू संगठन ने किया मार्च और विरोध प्रदर्शन तरुण हत्याकांड में दोषियों के एनकाउंट की मांग जोर पकड़ रही है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सिर्फ बुलडोजर एक्शन काफी नहीं है। दोषियों को फांसी की सजा मिलनी चाहिए। इस मामले में 16 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिसमें 3 महिलाएं भी शामिल हैं। उत्तम नगर में हिंदू संगठन द्वारा लगातार विरोध प्रदर्शन और मार्च किया जा रहा है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। दोषियों का घर टूटना चाहिए इस मामले में प्रदर्शन कर रहे एक प्रदर्शनकारी ने कहा- दोषियों का घर टूटना चाहिए। समाज से आवाज आ रही है कि बुलडोजर से केवल छज्जे-छज्जे गिरे हैं। हम चाहते थे कि आरोपी का पूरा घर गिराया जाना चाहिए। ताकि वो भविष्य में फिर से अपना सिर न उठा सकें और ऐसी बर्बरता दोबारा न कर सकें। 4-5 बंदों का एनकाउंटर कर दें विरोध प्रदर्शन कर रहे एक अन्य हिंदू प्रदर्शनकारी ने आरोप लगाया- वो 25-30 लोग थे। अभी तक उन जिहादियों को पकड़ा नहीं गया है। हमारी मांग उनका एनकाउंटर करवाना है। अभी तक एनकाउंटर नहीं हुआ है। हम आखिरी सांस तक अपने भाई के लिए लड़ते रहेंगे। चार-पांच बंदों का एनकाउंटर कर दें, उसमें हमें तसल्ली हो जाएगी। बस हम यही चाहते हैं। अब तक 12 आरोपी गिरफ्तार किए गए दिल्ली पुलिस ने दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के उत्तम नगर में चार मार्च को होली के दिन तरुण बुटोलिया की हत्या के मामले में तीन महिलाओं सहित सात और लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने एक नाबालिग को भी हिरासत में लिया है। पुलिस के अनुसार, मामले में शामिल आठवां शख्स इमाम उर्फ बंटी रविवार को उत्तम नगर में अपने घर से गिरफ्तार कर लिया गया था। अब तक मामले में 12 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि दो नाबालिगों को हिरासत में लिया गया है।

केजरीवाल से जुड़े केस में ईडी की याचिका पर हाईकोर्ट की सुनवाई, जज की टिप्पणी बनी चर्चा का विषय

नई दिल्ली दिल्ली हाईकोर्ट ने आबकारी नीति मामले में ट्रायल कोर्ट की टिप्पणियों को हटाने की मांग को लेकर दायर ईडी की याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि जज की टिप्पणियां संभवतः मामले से सीधे जुड़ी नहीं हो सकतीं और वे सामान्य प्रकृति की भी हो सकती हैं। हाई कोर्ट ने कहा, “जज ने जो कहा है, वह जरूरी नहीं कि इसी मामले के संदर्भ में हो। कई बार जज इस तरह की सामान्य टिप्पणियां करते हैं।” हाई कोर्ट ने कहा कि इस मामले में हमारा सवाल यह है कि ये जो टिप्पणियां की गई हैं, वे सामान्य प्रकृति की हैं और इनका इस मामले से कोई संबंध नहीं है। आगे कहा कि वह आदेश के संबंधित हिस्सों को देखकर यह तय करेगी कि वे सामान्य टिप्पणियां हैं या फिर इस मामले से जुड़ी हुई हैं। हाई कोर्ट ने क्या कहा बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा, “आप कह रहे हैं कि आदेश के कुछ पैराग्राफ इस फैसले के संदर्भ में हो सकते हैं? पूरा फैसला वैसे भी चुनौती के दायरे में है, इसलिए जब हम सीबीआई मामले पर सुनवाई करेंगे तो इस निर्णय को भी पढ़ेंगे। इस मामले में नोटिस जारी करेंगे और इसे उसी दिन सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जा रहा है, जिस दिन ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली सीबीआई की याचिका पर सुनवाई होगी।” दरअसल, ईडी ने हाल ही में सीबीआई द्वारा जांच किए जा रहे आबकारी नीति मामले में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य को आरोपमुक्त करते हुए निचली अदालत द्वारा धनशोधन जांच के संबंध में की गई टिप्पणी को हटाने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था। ईडी का कहना था कि 27 फरवरी का आदेश "न्यायिक अधिकार क्षेत्र का स्पष्ट उल्लंघन" था क्योंकि अदालत ने एजेंसी के खिलाफ कड़ी टिप्पणी करते हुए उसके साक्ष्यों पर ना तो गौर किया और ना ही उसकी बात सुनी। अदालत ने क्या कहा था विशेष न्यायाधीश जितेंद्र सिंह की अदालत ने पीएमएलए और ईडी जांच के संबंध में कई टिप्पणियां की थीं। आदेश में विशेष रूप से कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट ने 2022 के विजय मदनलाल चौधरी मामले में कहा था कि एक बार मूल मामला (सीबीआई मामला) समाप्त होने पर ईडी मामला भी अनिवार्य रूप से खत्म हो जाएगा। ईडी की आपत्ति ईडी ने 7 मार्च को दायर अपनी याचिका में आदेश के कई पैराग्राफ का हवाला देते हुए कहा कि अदालत की उसके खिलाफ की गई टिप्पणियां "प्रतिकूल, व्यापक और अवांछित" थीं क्योंकि सुनवाई में ईडी पक्षकार नहीं थी और अदालत के समक्ष केवल सीबीआई की जांच के गुण-दोष पर ही विचार किया जा रहा था। एजेंसी ने यह भी कहा कि यदि इस प्रकार की व्यापक और निराधार टिप्पणियों को बरकरार रहने दिया गया, जिनका आधार ईडी द्वारा एकत्रित किसी भी सामग्री या साक्ष्य पर नहीं है तो इससे सार्वजनिक हित के साथ-साथ ईडी को भी गंभीर और अपूरणीय क्षति पहुंचेगी।