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सीएम रेखा गुप्ता ने शुरू किया ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान, रिज वन पुनरुद्धार को मिलेगा बल

नई दिल्ली  सीएम रेखा गुप्ता ने बुधवार को ग्रीन ड्राइव पोर्टल (greendrive.delhivanmahotsav.in) का शुभारंभ किया। यह पोर्टल आगामी 'रिज वन पुनरुद्धार कार्यक्रम' ' एक पेड़ मां के नाम ' अभियान को जन आंदोलन के रूप में शुरू करने की पहल है। सीएम ने सभी लोगों से अपील की कि वह इस महाअभियान में हिस्सा लें। इस कार्यक्रम में दिल्ली ग्रीन वॉरियर्स भी शामिल हुए। सीएम ने कहा कि राजधानी को हरा भरा और साफ बनाने का यह अभियान सरकार के साथ-साथ जनभागीदारी से ही सफल होगा। उन्होंने कहा कि यह पोर्टल सिर्फ एक डिजिटल प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि जनभागीदारी का सशक्त माध्यम है। अब कोई भी व्यक्ति घर बैठे अपने मोबाइल या कंप्यूटर के जरिए सीधे इस अभियान से जुड़ सकता है। सीएम ने कहा कि यह दिल्ली के हर नागरिक का अभियान है। लोग एक पेड़ मां के नाम जरूर लगाएं। इससे वे आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ हवा और हरित पर्यावरण का उपहार दे सकते हैं। पोर्टल पर मिलने वाली सुविधाएं     पौधारोपण स्लॉट बुकिंग- लोग अपनी सुविधा के मुताबिक इस पोर्टल पर स्थान और समय का चयन कर पौधारोपण का ऑनलाइन स्लॉट बुक करवा सकते हैं।     वृक्ष रथ सुविधा- यदि किसी व्यक्ति, स्कूल, कार्यालय, आरडब्ल्यूए या आवासीय सोसायटी के पास पौधारोपण के लिए पर्याप्त स्थान है, तो दिल्ली सरकार निशुल्क पौधे सीधे उनके परिसर तक पहुंचाएगी।     नर्सरी लोकेटर- इस फीचर की मदद से नागरिक अपने पास की सरकारी नर्सरी की लोकेशन जानकर वहां से सीधे निशुल्क पौधे ले सकता है।     एनवायरमेंट सेवियर- इसके जरिए लोग दिल्ली सरकार के पर्यावरण अभियानों से सीधे जुड़कर एक जिम्मेदार 'ग्रीन वॉरियर' के रूप में अपना स्थायी योगदान दे सकेंगे। क्या है विशेष     जुलाई में गृह मंत्री अमित शाह रिज वन पुनरुद्धार कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन करेंगे।     70 लाख पौधे पूरी दिल्ली में लगाए जाएंगे।     300 नई इलेक्ट्रिक बसों और नए अंतरराज्यीय मार्गों की बसों को हरी झंडी दिखाई जाएगी।     रिज में देसी और दीर्घायु प्रजातियों के पौधों का रोपण किया जाएगा।

Delhi New Rules: बाहरी वाहनों पर रोक, बिना PUC पेट्रोल-डीजल नहीं, 4 महीने सख्त रहेगा सिस्टम

नई दिल्ली सर्दियों में बढ़ने वाले वायु प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने कई अहम कदम उठाए हैं। सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनके तहत 1 नवंबर से सरकारी और निजी दफ्तरों में कर्मचारियों की उपस्थिति को सीमित किया जाएगा। नए नियमों के अनुसार, दफ्तरों में एक समय पर केवल 50 % कर्मचारी ही काम करेंगे, जबकि बाकी कर्मचारी घर से काम यानी वर्क फ्रॉम होम करेंगे। यह व्यवस्था प्रदूषण के स्तर को कम करने और सड़कों पर वाहनों की संख्या घटाने के उद्देश्य से लागू की जाएगी। इसके साथ ही दिल्ली में वाहनों की पार्किंग दरों को दोगुना करने का फैसला लिया गया है। सरकार का मानना है कि पार्किंग शुल्क बढ़ने से लोग निजी वाहनों का कम इस्तेमाल करेंगे और सार्वजनिक परिवहन की ओर बढ़ेंगे। सरकार ने सर्दियों के दौरान लागू होने वाले ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) की पाबंदियों को अब पूरे सीजन के लिए लागू करने का फैसला किया है। इसके तहत GRAP के अलग-अलग चरणों में लगने वाले प्रतिबंध हर साल 1 नवंबर से 28 फरवरी तक स्वत: प्रभावी रहेंगे। दिल्ली में सर्दियों के दौरान बढ़ने वाले वायु प्रदूषण से निपटने के लिए लागू किए गए नए दिशा-निर्देशों को लेकर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा है कि इन नियमों में पुराने सभी आदेशों को एकीकृत कर एक स्पष्ट, सरल और सख्त व्यवस्था तैयार की गई है। मुख्यमंत्री ने बताया कि नई व्यवस्था से सरकारी विभागों, संस्थानों और आम लोगों के लिए नियमों का पालन करना आसान होगा। उन्होंने कहा कि अधिसूचना तैयार करते समय पिछले वर्षों के प्रदूषण स्तर, अनुभवों और वायु गुणवत्ता से जुड़े आंकड़ों का विस्तृत अध्ययन किया गया है। उन्होंने कहा कि नए दिशा-निर्देशों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की ओर से जारी संशोधित ग्रैप और सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के निर्देशों को भी शामिल किया गया है। रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली में हर साल नवंबर से फरवरी के बीच प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है। इसी चुनौती को देखते हुए सरकार ने ऐसी स्थायी व्यवस्था लागू की है, जिससे हर साल अलग-अलग आदेश जारी करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सरकारी ऑफिसों की बदलेगी टाइमिंग दिल्‍ली में पिछले कई सालों में देखा गया है कि वायु प्रदूषण का एक बड़ा कारण व्‍हीकल्‍स से निकालने वाला धुआं होता है. इसमें निजी वाहनों की भूमिका सबसे ज्‍यादा होती है. इस समस्‍या से निपटने के लिए 'वर्क फ्रॉम होम' सबसे बेहतर उपाय है. ऐसे में दिल्‍ली सरकार ने नवंबर से फरवरी तक पाबंदियों के दिनों में यातायात का दबाव कम करने के लिए ऑफिसों के अलग-अलग समय और घर से काम करने की व्यवस्था भी लागू की गई है. सर्दियों के दौरान, दिल्ली नगर निगम के तहत आने वाले कार्यालयों में सुबह 8:30 बजे से शाम पांच बजे तक काम होगा, जबकि दिल्ली सरकार के कार्यालयों में एक नवंबर से 28 फरवरी के बीच सुबह 10 बजे से शाम 6:30 बजे तक काम होगा।  वायु प्रदूषण के दिनों में कुछ ऐसी होती है दिल्‍ली की स्थिति प्राइवेट ऑफिसों के लिए 50% वर्क फ्रॉम होम दिल्‍ली सरकार के मुताबिक, एक नवंबर से 31 जनवरी तक दिल्ली सरकार और प्राइवेट ऑफिसों में 50 प्रतिशत से अधिक कर्मचारी मौजूद नहीं रहेंगे, बाकी कर्मचारी वर्क फ्रॉर्म होम करेंगे. इससे सड़कों पर वाहनों की संख्‍या काफी कम होने की उम्‍मीद है. हालांकि, जरूरी और इमरजेंसी सर्विस (जैसे अस्पताल, सार्वजनिक यातायात, बिजली, पानी की आपूर्ति, साफ-सफाई, आपदा प्रबंधन और प्रदूषण नियंत्रण करने वाली एजेंसियों) को इससे छूट दी गई है।      PUC सर्टिफिकेट दिखाने पर ही मिले पेट्रोल-डीजल  रेखा गुप्‍ता सरकार के अनुसार, दिल्ली में सभी पेट्रोल, डीजल और सीएनजी/एलपीजी खुदरा दुकानें पूरे साल सिर्फ वैध पीयूसीसी दिखाने पर ही पेट्रोल और डीजल देंगे. बिना वैध प्रमाणपत्र के ईंधन लेते पाए जाने पर वाहनों पर जुर्माना लगाया जा सकता है. इसकी जांच फिजिकल सर्टिफिकेट, ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (एएनपीआर) प्रणाली और 'वाहन' जैसे इलेक्ट्रॉनिक डेटाबेस के जरिए की जाएगी।  PUC के बिना ईंधन नहीं मिलेगा अब पूरे वर्ष पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और LPG पंपों पर केवल उन्हीं वाहनों को ईंधन दिया जाएगा, जिनके पास वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) होगा। सरकार के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, जिन वाहनों के पास वैध PUC प्रमाणपत्र नहीं होगा, उन्हें ईंधन नहीं दिया जाएगा। साथ ही ऐसे वाहन चालकों के खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई भी की जाएगी। प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर नियंत्रण के उद्देश्य से यह व्यवस्था लागू की गई है। बाहरी वाहनों के प्रवेश पर रोक नए दिशा-निर्देशों के तहत दिल्ली के बाहर पंजीकृत BS-6 से कम मानक वाले वाहनों के राजधानी में प्रवेश पर रोक रहेगी। इसका उद्देश्य पुराने और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को कम करना है। हालांकि, इस प्रतिबंध से कुछ आवश्यक वाहनों को छूट दी गई है। CNG वाहन, इलेक्ट्रिक वाहन, एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और पुलिस वाहनों को दिल्ली में प्रवेश की अनुमति रहेगी। निर्माण गतिविधियां पर रहेगा प्रतिबंध नए दिशा-निर्देशों के तहत निर्माण और तोड़फोड़ से निकलने वाली धूल पर नियंत्रण रखा जाएगा। इसके लिए 1 नवंबर से 31 जनवरी तक धूल पैदा करने वाली तोड़-फोड़ और खुले में होने वाली निर्माण गतिविधियों पर रोक रहेगी। सरकार का उद्देश्य निर्माण स्थलों से निकलने वाली धूल के कारण बढ़ने वाले प्रदूषण को कम करना है। सर्दियों के महीनों में हवा की गति कम होने और प्रदूषक तत्वों के जमा होने से दिल्ली की वायु गुणवत्ता प्रभावित होती है। दफ्तरों में 50% उपस्थिति दिल्ली सरकार ने सरकारी और निजी कार्यालयों में कर्मचारियों की उपस्थिति को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत सरकारी और निजी कार्यालयों में एक समय में केवल 50 % कर्मचारी ही कार्यालय से काम करेंगे, जबकि बाकी कर्मचारी वर्क फ्रॉम होम करेंगे। यह व्यवस्था प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित करने और कार्यालय आने-जाने वाले वाहनों की संख्या कम करने के उद्देश्य से लागू की जाएगी। हालांकि, विभागाध्यक्षों और जरूरी सेवाओं से जुड़े अधिकारियों को नियमित रूप से कार्यालय आना होगा। आवश्यक सेवाओं के संचालन में किसी तरह की बाधा न आए, इसके लिए ऐसे कर्मचारियों को इस नियम से अलग रखा गया है। पार्किंग शुल्क होगा दोगुना नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, अधिकृत पार्किंग स्थलों पर अब … Read more

अब जानवरों के और करीब होंगे विजिटर्स, दिल्ली जू में ग्लास वॉल एनक्लोजर और आधुनिक सुविधाएं

नई दिल्ली  दिल्ली के चिड़ियाघर में आने वाले लोगों का अनुभव जल्द ही पूरी तरह बदलने वाला है। अब कई वन्यजीवों को दूर से देखने की बजाय विजिटर्स और जानवरों के बीच सिर्फ मजबूत ग्लास की दीवार जितनी दूरी होगी। इसके लिए एरिना (जहां दर्शकों के लिए वन्यजीव लाए जाते हैं) की डिजाइन बदली जाएगी, ताकि लोग उन्हें पहले से ज्यादा करीब और सुरक्षित तरीके से देख सकें। इसी बदलाव के साथ चिड़ियाघर के बड़े हिस्से के कायाकल्प का काम शुरू हो गया है। योजना को लेकर केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) की 400 करोड़ रुपये की मंजूरी दे चुका है। रेप्टाइल हाउस का होगा निर्माण     केंद्र सरकार के डेलीगेटेड इन्वेस्टमेंट बोर्ड (DIB) से मंजूरी मिलने के बाद परियोजना अब जमीन पर पर काम शुरू हो गया है।     सेंट्रल जू अथॉरिटी (CZA) के अधिकारियों के मुताबिक, डिजाइन की डीपीआर और प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग कंसल्टेंट (PMC) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद वन्यजीवों के बाड़ों का निर्माण नए सिरे से शुरू होगा।     अभी एरिना (जहां विजिटर्स के देखने के लिए वन्य जीव लाए जाते हैं) में विजिटर्स वन्यजीवों को काफी दूर से देख पाते हैं। एरिना की बनावट को ठीक किया जाएगा।     इसके तहत कई बाड़ों में वन्य जीव और लोगों के बीच सिर्फ ग्लास की दीवार होगी।     वहीं नाइट शेल्टर भी आधुनिक मानकों के अनुसार बनाए जाएंगे। इसके अलावा नए रेप्टाइल हाउस का भी निर्माण होगा। फिलहाल चिड़ियाघर में 72 बाड़ों में वन्यजीव रखे गए हैं। अत्याधुनिक अस्पताल और रेस्क्यू सेंटर भी बनेंगे वन्यजीवों के इलाज की व्यवस्था को भी आधुनिक बनाया जाएगा। मौजूदा अस्पताल का विस्तार कर करीब दो एकड़ में अत्याधुनिक हॉस्पिटल बनाया जाएगा, जिसमें ऑपरेशन थियेटर, पोस्टमार्टम रूम, लैब और जच्चा-बच्चा वार्ड जैसी सुविधाएं होंगी। इसके अलावा चार एकड़ में रेस्क्यू सेंटर और एक एजुकेशन सेंटर भी डिवेलप किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, इस चरण का काम पूरा होने के बाद 'वेलकम जू गेट' परिसर को भी नए रूप में डिवेलप किया जाएगा। यहां पिक-एंड-ड्रॉप ज़ोन, सरफेस पार्किंग और मल्टीलेवल पार्किंग जैसी सुविधाएं तैयार की जाएंगी।

Delhi News: 1 नवंबर से 31 जनवरी तक इन वाहनों पर रोक, बढ़ेगी पार्किंग फीस; जानें नए नियम

 नई दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हर साल सर्दियों का मौसम प्रदूषण की मार लेकर आता है. इस बार प्रदूषण पर नकेल के लिए सरकार पहले से ही एक्शन प्लान तैयार करने में जुटी है. दिल्ली सरकार ने इस बार प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए कड़े नियमों का ऐलान कर दिया है. दिल्ली में इस बार एक नवंबर से 28 फरवरी तक वाहनों की आवाजाही से लेकर निर्माण कार्य तक, कड़े नियम लागू रहेंगे।  दिल्ली सरकार का कहना है कि पिछले तीन वर्ष में सर्दियों के दौरान वायु गुणवत्ता लगातार बहुत खराब से गंभीर श्रेणी तक पहुंचती रही है, इसलिए अब स्थायी और सख्त उपाय लागू किए जा रहे हैं. दिल्ली में अब बिना पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (पीयूसी) सर्टिफिकेट के वाहनों को ईंधन नहीं मिलेगा. दिल्ली के सभी पेट्रोल और सीएनजी पंपों पर पूरे साल केवल उन्हीं वाहनों को ईंधन मिलेगा, जिनके पास वैध पीयूसी होगा।  दिल्ली में अब एएनपीआर कैमरों और डिजिटल डेटाबेस के जरिये निगरानी की जाएगी. बिना पीयूसी के पकड़े जाने पर जुर्माना लगाया जाएगा. एक नवंबर से 31 जनवरी तक दिल्ली में दिल्ली के बाहर पंजीकृत बीएस-VI से नीचे के वाहनों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा. दिल्ली से बाहर के सभी वाहनों के दिल्ली में प्रवेश पर इस अवधि के दौरान रोक रहेगी. हालांकि, CNG के साथ ही इलेक्ट्रिक वाहन, एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड और पुलिस की गाड़ियों को छूट दी जाएगी।  दोगुनी होगी पार्किंग फी एक नवंबर से 28 फरवरी तक पार्किंग की फीस भी महंगी होगी. अधिकृत पार्किंग स्थलों पर वाहन पार्क करने की फीस इस अवधि में दोगुनी वसूली जाएगी. दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के पार्किंग स्थलों को इस फैसले से बाहर रखा गया है. इसके पीछे यह तर्क दिया जा रहा है कि इससे लोग मेट्रो का अधिक उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित होंगे।  दफ्तर आएगा 50% स्टाफ एक नवंबर से 31 जनवरी तक सरकारी और निजी कार्यालयों में केवल 50% कर्मचारी ही शारीरिक रूप से उपस्थित रह सकेंगे. बाकी कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम अनिवार्य होगा. निजी कंपनियों को कार-पूलिंग, सार्वजनिक परिवहन और अलग-अलग शिफ्ट लागू करने के निर्देश दिए गए हैं. इस अवधि में निर्माण और तोड़फोड़ के काम पर भी रोक रहेगी. 10 दिसंबर से 20 जनवरी के बीच अधिकांश निर्माण और तोड़फोड़ से जुड़े काम पर पूर्ण प्रतिबंध लागू रहेगा।  इस दौरान निर्माण सामग्री लेकर आने वाले वाहनों को भी दिल्ली में एंट्री नहीं दी जाएगी. तीन हजार वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल वाली सभी व्यावसायिक ऊंची इमारतों, मॉल, होटल और कार्यालय भवनों में एंटी-स्मॉग गन या मिस्ट सिस्टम लगाना अनिवार्य होगा. सभी संस्थानों को 15 अगस्त तक यह व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी. एक हजार वर्गमीटर से बड़े निर्माण स्थलों पर भी मिस्ट सिस्टम लगाना जरूरी होगा।  खुले में कूड़ा या पत्ते जलाने पर एक्शन दिल्ली में आरडब्ल्यूए, हाउसिंग सोसाइटी, संस्थानों और सरकारी-निजी प्रतिष्ठान को अपने-अपने परिसर में खुले में आग जलाने की घटनाएं रोकने की जिम्मेदारी दी गई है. कूड़ा, पत्तियां, प्लास्टिक या बायोमास जलाने पर सख्त कार्रवाई होगी. खुले में आग जलाने और प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर नजर रखने के लिए ड्रोन आधारित निगरानी की जाएगी. रात के समय निगरानी और अधिक की जाएगी।  नियम तोड़ने वालों पर केस दिल्ली सरकार ने सख्त लहजे में कहा है कि आदेशों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत कार्रवाई की जाएगी. नियम तोड़ने वालों के खिलाफ जुर्माना, पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति, परिसर सील करने से लेकर अभियोजन तक की कार्रवाई की जा सकती है. दिल्ली सरकार ने कहा है कि पिछले तीन वर्षों में नवंबर से फरवरी के बीच दिल्ली का AQI लगातार 312 से 342 के बीच रहा, जबकि अधिकतम AQI 461 से 494 तक पहुंचा।  अधिकारियों का कहना है कि इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए सर्दियों के लिए यह स्थायी प्रदूषण नियंत्रण ढांचा तैयार किया गया है. कुल मिलाकर, दिल्ली सरकार ने सर्दियों में प्रदूषण को आपदा के स्तर तक पहुंचने से रोकने के लिए अब तक का सबसे व्यापक और सख्त शीतकालीन प्रदूषण नियंत्रण आदेश जारी किया है. इसका असर सीधे आम नागरिकों, वाहन चालकों, दफ्तरों, बिल्डरों और व्यावसायिक संस्थानों पर पड़ेगा। 

दिल्ली में चार साल में बनेंगे 32 हजार चार्जिंग पॉइंट, नई ईवी पॉलिसी लागू।

नई दिल्ली  ईवी पॉलिसी 2.0 के आने के बाद सरकार का अनुमान है कि 2030 तक सड़कों पर 31.83 लाख इलेक्ट्रिक गाड़ियां होंगी। इसमें 77.17 फीसदी टूव्हीलर शामिल होंगी। इस अनुमानित संख्या के आधार पर सरकार ने अगले चार साल में 32 हजार से अधिक चार्जिंग पॉइंट बनाने की भी योजना तैयार कर ली है। नई ईवी पॉलिसी 2.0 के अनुसार, दिल्ली में वर्तमान (15 जून 2026 तक) में कुल 9.89 लाख रजिस्टर्ड ई-गाड़ियां हैं। नई ईवी पॉलिसी में परिवहन विभाग के अनुमान के मुताबिक, आने वाले सालों में हर साल औसतन 7-8 लाख ई-गाड़ियां रजिस्टर्ड होंगी। इन चार सालों में 24.57 लाख ई-टूव्हीलर, 1.88 लाख फोरव्हीलर, 2.50 लाख ई-रिक्शा, 22,887 ई-ऑटो के अलावा अलग-अलग कैटेगरी के कामर्शियल या गुड्स व्हीकल रजिस्टर्ड होंगे। ईवी पॉलिसी 2.0 में हर साल 6-7 लाख गाड़ियां बढ़ेंगी     परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि चार्जिंग इंफ्रा की योजना भी पॉलिसी में तैयार की गई है।     चार साल में 32 हजार चार्जिंग पॉइंट तैयार होंगे, जिसमें 8913 अभी मौजूद हैं।     अगले चार साल में एक हजार करोड़ रुपये का पूंजीगत निवेश करके कुल 23 हजार से अधिक चार्जिंग पॉइंट बनाए जाएंगे।     बैटरी स्वैपिंग पॉइंट भी बनाए जाएंगे। ईवी पॉलिसी के अनुसार, कुल मौजूद इलेक्ट्रिक गाड़ियों में से 9.57 लाख गाड़ियों को पब्लिक चार्जिंग इंफ्रा की जरूरत पड़ेगी।     कुल मौजूद ई-टूव्हीलर में से 25 फीसदी को पब्लिक चार्जिंग स्टेशन की जरूरत होगी।     इसी तरह 25 फीसदी निजी ई-कार के लिए चार्जिंग पॉइंट की जरूरत होगी।     6-7 लाख गाड़ियां हर साल बढ़ेंगी ईवी पॉलिसी 2.0 में     32 हजार से ज्यादा चार्जिंग पॉइंट बनाने की प्लानिंग कर रही सरकार अगले चार साल में     सीएम ने कहा, पुरानी ईवी पॉलिसी की कमियों को दूर कर बनाया गया 2030 का रोडमैप     2030 तक दिल्ली के ट्रांसपोर्ट सिस्टम को ई-मोबिलिटी की दिशा में ले जाने की प्लानिंग कितनी खूबसूरत हैं रवीना टंडन की 21 साल की बेटी राशा, देखिए वीडिय नई ईवी पॉलिसी जुलाई से होगी लागू नई ईवी पॉलिसी-2026 एक जुलाई से लागू हो जाएगी। सीएम आतिशी मार्लेना ने कहा कि इसका उद्देश्य केवल इलेक्ट्रिक गाड़ियों की खरीद को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि 2030 तक ट्रांसपोर्ट सिस्टम को इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की दिशा में ले जाना है। इसलिए नई नीति में ई-गाड़ी की खरीद के साथ बैटरी मैनेजमेंट, चार्जिंग पॉइंट इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने का रोडमैप तैयार किया है। ईवी पॉलिसी ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की शुरुआत करने में अहम भूमिका निभाई     सीएम के मुताबिक, 2020 में लागू की गई पुरानी ईवी पॉलिसी ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की शुरुआत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, लेकिन समय के साथ यह महसूस किया गया कि केवल प्रोत्साहन देकर ईवी की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं।     इसी को ध्यान में रखते हुए नई ईवी पॉलिसी-2026 तैयार की गई है, जिसमें चार्जिंग इन्फ्रा के विस्तार, संस्थागत व्यवस्था को मजबूत करने का रोडमैप शामिल है।     नई नीति के तहत इलेक्ट्रिक टू व्हीलर पर 30 हजार रुपये तक की सब्सिडी जारी रहेगी।     पुरानी गाड़ी को स्क्रैप कराने पर 10 हजार रुपये का अतिरिक्त लाभ मिलेगा। साथ ही एक अप्रैल 2028 से दिल्ली में नए दोपहिया गाड़ी सिर्फ इलेक्ट्रिक रजिस्टर्ड होंगे।     थ्री व्हीलर के लिए भी प्रोत्साहन राशि बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दी गई है।     पुरानी गाड़ियों को स्क्रैप करने पर 25 हजार रुपये का अतिरिक्त लाभ मिलेगा। पुरानी गाड़ियों को स्क्रैप कराने पर 50 हजार तक प्रोत्साहन मिलेगा जनवरी 2027 से ई-ऑटो रिक्शा का रजिस्ट्रेशन केवल इलेक्ट्रिक गाड़ियों के रूप में किया जाएगा। पहली बार माल ढोने वाली गाड़ियों को व्यापक रूप से शामिल किया गया है। एन-1 कैटेगरी के इलेक्ट्रिक ट्रकों पर एक लाख रुपये तक की सब्सिडी और पुरानी गाड़ियों को स्क्रैप कराने पर 50 हजार तक का अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाएगा। शुरुआती एक हजार एन-2 इलेक्ट्रिक ट्रकों को नो-एंट्री समय में विशेष छूट मिलेगी। सरकार ने स्कूल ट्रांसपोर्ट को भी नीति का हिस्सा बनाया है। 2030 तक स्कूल बसों के बेड़े को 30 फीसदी इलेक्ट्रिक करने का लक्ष्य रखा गया है।  

Delhi EV Policy 2026: ₹1 लाख तक इंसेंटिव, रोड टैक्स माफ, जानें 1 जुलाई से क्या-क्या बदलने वाला है

नई दिल्ली दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने नई ईवी पॉलिसी को मंजूरी दे दी है। अब ये पॉलिसी एक जुलाई से दिल्ली में लागू होगी। इसके तहत ईवी गाड़ी खरदीने वाले लोगों को भारी छूट और सब्सिडी दी जाएगी। दिल्ली ईवी नीति के पहले साल में सभी इलेक्ट्रिक टू व्हीलर गाड़ी खरीदारों को 30 हजार रुपए और थ्री व्हीलर खरीदारों को 50 हजार रुपए की सब्सिडी मिलेगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई दिल्ली कैबिनेट की बैठक में दिल्ली EV पॉलिसी 2026 को मंजूरी दी गई। प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए और इलेक्ट्रिक गाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए लागू की जा रही ये नीति 31 मार्च 2030 तक प्रभावी रहेगी। क्या है सरकार का प्लान? नई ईवी नीति के तहत, अगले साल एक जनवरी से दिल्ली में सिर्फ इलेक्ट्रिक ऑटो और एक अप्रैल 2028 से इलेक्ट्रिक दो पहिया वाहन ही रजिस्टर्ड किए जाएंगे। ऐसे में इस नीति के लागू होने के बाद दिल्ली में पेट्रोल और सीएनजी से चलने वाले ऑटो रिक्शा की बिक्री पर प्रतिबंध लग सकता है। इसके अलावा पेट्रोल से चलने वाले टू व्हीलर की बिक्री भी बंद हो सकती है। सीएम रेखा गुप्ता ने बताया कि ईवी नीति के तहत 4 साल में 15,000 करोड़ रुपए का निवेश किया जाएगा। BS-IV कार स्कैप करने पर मिलेगा एक लाख रुपए इस नीति के तहत सबसे बड़ी घोषणा BS-IV गाड़ी वाले लोगों के लिए की गई है। दिल्ली ईवी नीति के तहत अगर BS-IV कार मालिक अपनी गाड़ी को स्क्रैप करते हैं तो उन्हें सरकार की तरफ से 10 हजार से लेकर एक लाख रुपए तक का इंसेंटिव दिया जाएगा। रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस भी माफ इसके अलावा ईवी गाड़ी खरदीने वाले लोगों को रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस पर 100 फीसदी छूट मिलेगी। यानी अगर कोई इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीदता है तो उसे रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस देने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इलेक्ट्रिक चार पहिया गाड़ी खरीदने वालों को ये फायदा 30 लाख रुपए तक की एक्स शोरूम कीमत वाली गाड़ियों पर मिलेगा। सरकार ने इस नीति के तहत भारी वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए भी एक बड़ा फैसला लिया है। इस फैसले के तहत नोटिफिकेशन जारी होने के 3 महीने के भीतर खरीदे गए पहले एक हजार N2 इलेक्ट्रिक ट्रकों नो एंट्री के समय से 10 साल की छूट मिलेगी। इसके अलावा दिल्ली में ईवी चार्जिंग स्टेशन भी तेजी से स्थापित किए जाएंगे। सरकार का चारगेट पूरी दिल्ली में 30 हजार चार्जिंग पॉइंट बनाने का है। कैसे खर्च होंगे 15 हजार करोड़? सीएम रेखा गुप्ता ने बताया उप राज्यपाल के पास फाइनल पॉलिसी भेज दी गई है। ईवी पॉलिसी के जरिए दिल्ली सरकार चार साल में 15000 करोड़ खर्च करेगी। इनमें से 7000 करोड़ सब्सिडी पर और 8000 करोड़ चार्जिंग स्टेशन बनाने और रजिस्ट्रेशन शुल्क और रोड टैक्स माफी पर खर्च होंगे।

उपराज्यपाल की समीक्षा के बाद दिल्ली में घटा ट्रैफिक जाम, डिजिटल सिस्टम से मिला सुधार

नई दिल्ली दिल्ली में ट्रैफिक नियमों के कड़ाई से पालन करने के चलते बीते तीन महीनों के दौरान जाम की समस्या करीब एक तिहाई कम हुई।उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने यातायात जाम से निपटने के उपायों की समीक्षा की और पुलिस को एआई और डिजिटल यातायात प्रबंधन प्रणाली का तेजी से विस्तार करने का निर्देश दिया। संधू ने पुलिस आयुक्त सतीश गोलछा और यातायात पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। इस बैठक का मकसद दो अप्रैल को टोडापुर स्थित दिल्ली यातायात पुलिस मुख्यालय के दौरे के दौरान दिए गए निर्देशों के पालन का जायज़ा लेना था। अधिकारियों के अनुसार, गूगल मैप के जरिए हर 15 मिनट पर दर्ज किए गए आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल से 25 जून के बीच शहर में औसत जाम की लंबाई घटकर 32.43 किलोमीटर रह गई, जबकि जनवरी-मार्च के दौरान यह 48.25 किलोमीटर थी। यातायात पुलिसकर्मियों की सड़कों पर बढ़ेगी तैनाती उन्होंने बताया कि यातायात पुलिसकर्मियों की सड़कों पर बढ़ी मौजूदगी, पैदल गश्त, इंजीनियरिंग संबंधी सुधारों और प्रौद्योगिकी आधारित प्रवर्तन उपायों के कारण स्थिति में सुधार आया है। दिल्ली यातायात पुलिस की नागरिक-केंद्रित 'प्रोजेक्ट संगम' पहल के तहत चिह्नित 62 प्राथमिक यातायात 'हॉटस्पॉट' में से 34 स्थानों पर महीने-दर-महीने जाम में कमी दर्ज की गई।     उनके मुताबिक, कैलाश नगर में पुश्ता रोड पर यातायात जाम में 82.59 प्रतिशत की कमी आई, जबकि खजूरी चौक पर 74.29 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। तीन मूर्ति गोलचक्कर पर भी यातायात प्रवाह में 66.01 प्रतिशत का सुधार देखा गया।     हालांकि, सड़क निर्माण और अन्य कारकों के कारण चार स्थानों पर जाम बढ़ गया। इनमें नारायणा फ्लाईओवर भी शामिल है, जहां जाम 1.28 प्रतिशत बढ़ा। इसके अलावा साउथ एक्सटेंशन पार्ट-1 में 7.55 प्रतिशत, मैक्स अस्पताल, साकेत में 14.93 प्रतिशत और भवभूति मार्ग पर जाम 349.87 प्रतिशत बढ़ा।     अधिकारियों ने द्वारका मोड़, सराय काले खां, मुकरबा चौक और डाबड़ी गोल चक्कर को भी लगातार जाम लगने वाले क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया, जिसके लिए तत्काल बुनियादी ढांचे और परिचालन हस्तक्षेप की आवश्यकता है। अतिक्रमण पर एजेंसियों का एक्शन उपराज्यपाल को सूचित किया गया कि अतिक्रमण हटाने और यातायात व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने के लिए दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी), लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी), भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई), दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी), नयी दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) और दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) जैसी नगर निकाय एजेंसियों के साथ संयुक्त सर्वेक्षण और नियमित समन्वय बैठकें शुरू की गई हैं।     बैठक के दौरान, संधू ने यातायात नियमों के उल्लंघनों की चौबीसों घंटे निगरानी और बेहतर जाम प्रबंधन के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता-आधारित और डिजिटल प्रवर्तन प्रणालियों को बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।     उन्होंने कहा कि यातायात जाम से न केवल समय और ईंधन की बर्बादी होती है, बल्कि शहर में प्रदूषण का स्तर भी काफी बढ़ जाता है।  

दिल्ली में वोटर लिस्ट से नाम कटने के पांच कारण, चुनाव आयोग ने जारी की जानकारी

नई दिल्ली  राजधानी में हाल में अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया गया और कई अवैध निर्माण तोड़े गए हैं। ऐसे में प्रभावित लोग अगर SIR की प्रक्रिया में हिस्सा नहीं ले पा रहे हैं तो उनके लिए विशेष व्यवस्था की जाएगी। दिल्ली के मुख्य चुनाव अधिकारी अशोक ने बताया कि इन लोगों के लिए मुख्य चुनाव आयोग से चर्चा की जाएगी। कोई न कोई विशेष व्यवस्था करके उन्हें SIR में शामिल कराया जाएगा। इसके अलावा जो बेघर हैं और उन्होंने जो पोल नंबर दिया है या जहाँ का पता दिया है, उन तक फॉर्म पहुंचाए जाएंगे। मुख्य चुनाव अधिकारी ने बताया कि 13,033 बीएलओ एसआईआर की प्रक्रिया में भाग लेंगे। प्रमुख राजनीतिक दलों की ओर से नियुक्त 32,429 बीएलए-2 प्रक्रिया में सहयोग करेंगे। दिल्ली में वर्तमान में कुल मतदाताओं की संख्या 1,45,10,298 (लगभग 1.45 करोड़) हैं। इनमें पुरुष मतदाताओं की संख्या 77,11,132 है, जबकि महिला मतदाताओं का आंकड़ा 67,98,142 है। इसके अलावा राष्ट्रीय राजधानी में 1,024 थर्ड जेंडर मतदाता भी रजिस्टर्ड हैं। जनवरी 2026 के बाद से 16 जून तक 2,48,992 नए मतदाता लिस्ट में शामिल हुए हैं। इन 5 वजहों से कटेगा नाम बीएलओ के पहुंचने पर यदि आप उन्हें नहीं मिलते हैं और ऐसा तीन बार आने पर भी हो तो नाम कटेगा। कहीं और शिफ्ट हुए हैं और एड्रेस चेंज नहीं कराया है तो नाम कटेगा। जिनकी मृत्यु हुई है, उनका नाम हटेगा। अगर दो जगहों पर नाम है तो एक जगह काटा जाएगा। विदेशी नागरिक हैं तो प्रक्रिया में शामिल नहीं हो पाएंगे। महत्वपूर्ण तारीखें     30 जून से 29 जुलाई तक बीएलओ घर-घर जाकर सर्वे करेंगे।     5 अगस्त 2026 को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होगी।     5 अगस्त से 4 सितंबर तक दावे और आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे।     5 अगस्त से 3 अक्टूबर तक दावे और आपत्तियों का निवारण किया जाएगा।     7 अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाएगा। दिल्ली के लोग ऐसे खोज सकते हैं अपना नाम     www.ceo.delhi.gov.in पर जाएं।     जहां आपको सर्च बाय EPIC नंबर, इलेक्टर डिटेल और पोलिंग स्टेशन के विकल्प दिखाई देंगे।     इनसे आप 2002 की मतदाता सूची की डिटेल्स निकाल सकते हैं। यदि 2002 का EPIC नंबर मालूम है तो अपना नंबर और कैप्चा एंटर करें।     अगर इलेक्टर डिटेल से सर्च करना चाहते हैं तो इसके ऑप्शन में जाकर AC नंबर, इलेक्टर नंबर, रिलेटिव का नाम पैरेंट्स या ग्रैंड पैरेंट्स का नाम, हाउस नंबर, जेंडर और कैप्चा भरें।     अगर आपको हाउस नंबर या AC नंबर नहीं पता तो कोई भी दो या तीन विकल्प भरकर सर्च कर सकते हैं।     सर्च बाय पोलिंग स्टेशन विकल्प में AC नंबर और पोलिंग स्टेशन का नाम भरकर सर्च करें और अपना नाम देखें।     आखिर में अपने रिश्तेदार या माता-पिता का या ग्रैंड पैरेंट्स का नाम, AC का नाम या AC नंबर और लास्ट SIR की जानकारी नोट करके रख लें।     इसे एन्यूमरेशन फॉर्म में भरना होगा। जो लोग डिजिटल माध्यम अपनाना चाहते हैं, वे सीधे www.voters.eci.gov.in पर जाकर ऑनलाइन भी इस फॉर्म को भर सकते हैं, लेकिन बीएलओ इसका सत्यापन करेंगे।     इसके अलावा ECINET ऐप गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड करके अपना नाम आसानी से खोजा जा सकता है।     नए मतदाता माता-पिता और दादा-दादी की जानकारी से अपना नाम जुड़वा सकते हैं। हेल्प डेस्क, टोल-फ्री नंबर और बुक-ए-कॉल सर्विस चुनाव से जुड़ी किसी भी पूछताछ के लिए चुनाव आयोग का टोल-फ्री नंबर 1950 है। इसके अलावा ईसीआई ने 'ECINet' पर एक खास 'Book-A-Call' सुविधा भी दी है, जिससे लोग सीधे अपने क्षेत्र के बीएलओ से संपर्क साध सकते हैं। दिल्ली के सभी जिला मुख्यालयों और विधानसभा क्षेत्रों के मतदाता केंद्रों पर विशेष हेल्पडेस्क भी बनाई गई है, जिन्हें दिल्ली चुनाव आयोग की वेबसाइट पर जाकर देखा जा सकता है। इसके अलावा एन्यूमरेशन फॉर्म पर भी बीएलओ का नंबर लिखा होगा, जिसे कॉल कर मदद ली जा सकती है।

30 जून से शुरू होगा बड़ा चुनावी सर्वे, ऐसे तय होगा आपका नाम वोटर लिस्ट में

नई दिल्ली देश के इलेक्शन कमिशन की ओर से चलाए जा रहे SIR (स्पेशल इंटेसिव रिवीजन) अभियान का मकसद वोटर लिस्ट को सही, पारदर्शी और अपडेट करना है। इसके तहत यह देखा जा रहा है कि कहीं कोई सही और पात्र वोटर इस लिस्ट से छूट न जाए और कोई भी गलत या अपात्र वोटर इसमें शामिल न हो जाए। दिल्ली जैसे शहर में यह काम और भी अहम हो जाता है क्योंकि यहां बड़ी संख्या में लोग दूसरे राज्यों से आकर रहते है। एनसीआर और आसपास के शहरों जैसे नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद आदि से लोग यहां आकर रहते है। जॉब, पढाई या कारोबार की वजह से भी लोग अक्सर घर बदलते है। ऐसे में समय के साथ वोटर लिस्ट में गलतियां, डुप्लिकेट नाम या पुराने रिकॉर्ड बने रह सकते है। SIR का मकसद इन्हीं कमियों को दूर करना है। SIR की प्रक्रिया एक नजर में कर्मचारियों की ट्रेनिंग: 20 जून से 29 जून तक BLO घर-घर जाकर जानकारी जुटाएंगे: 30 जून से 29 जुलाई तक पहली वोटर लिस्ट जारी: 5 अगस्त नाम जोड़ने और सुधार का मौका: 5 अगस्त से 4 सितंबर तक नोटिस और शिकायतों की जांच: 5 अगस्त से 3 अक्टूबर तक अंतिम वोटर लिस्ट जारी: 7 अक्तूबर नोट: दिल्ली के साथ यही तारीखे कर्नाटक, मेघालय, महाराष्ट्र और झारखंड की है। क्या करना है आपको? जब तक बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) घर पर दस्तक नहीं देता, तब तक यह पता कर सकते हैं कि आपका नाम 2002 की दिल्ली की वोटर लिस्ट में है या नहीं। इस पूरे अभियान में 2002 की वोटर लिस्ट की अहम आधार माना गया है। लिस्ट में अपना नाम देखने के लिए दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट ceodelhi.gov.in पर जाएं। वेबसाइट में दिल्ली मतदाता सूची 10.01.2002 को     प्रकाशित (गहन संशोधन, 2002) में नाम तलाशें। इसके अलावा ये जानकारियां तैयार रखेंः     विधानसभा क्षेत्र का नाम और नंबर     वोटर आईडी की डिटेल्स दस्तक से असली काम शुरू     अभियान के तहत 30 जून से बीएलओ पूरी दिल्ली में घर-घर आकर वेरीफिकेशन करेंगे।     वे घर आकर गणना प्रपत्र (एनुमरेशन फॉर्म) के दो सेट देंगे। भरकर एक फॉर्म वापस देना है, और दूसरा अपने पास रखना होगा     चाहें तो इसे नागरिक सेवा पोर्टल voters.eci gov.in पर भरकर भी जमा कर सकते हैं।     शुरुआती चरण में डॉक्युमेंट्स की जरूरत नहीं।     अगर 2002 की वोटर लिस्ट में जानकारियां हैं तो बिना परेशानी आपका नाम इसमें दर्ज हो जाएगा। तीन बार होगी घर पर दस्तक     अगर बीएलओ पहली बार आए और घर बंद मिले तो आपका नाम कट नहीं जाएगा।     बीएलओ कम से कम तीन बार आपके घर आएगा।     हर बार सूचना छोड़ सकता है।     जरूरत पड़ने पर आसपास के लोगों से भी जानकारी ली जा सकती है।     इसलिए अगर जॉब या किसी दूसरी वजह से दिनभर घर से बाहर रहते हैं तो फैमिली या पड़ोसियों को पहले से बता दें। नाम है, नहीं है या बाहर से आए हैं तो…     अगर नाम है: अगर आपका नाम 2002 की दिल्ली वोटर लिस्ट में है तो कोई परेशानी की बात ही नहीं। फॉर्म में यही बताने से आपका नाम दर्ज हो जाएगा।     अगर नाम नहीं है: अगर आपका नाम नहीं है, लेकिन माता-पिता, दादा-दादी या किसी रिश्तेदार का नाम लिस्ट में है तो उनके नाम और जानकारी का इस्तेमाल कर सकते हैं।     2002 के बाद आए है: दिल्ली में बड़ी संख्या में लोग दूसरे राज्यों से आकर रह रहे है। ऐसे में उनके नाम दिल्ली की 2002 वाली लिस्ट में नहीं होंगे। ऐसे वोटर अपने पुराने राज्य की 2002, 2003 या 2005 की वोटर लिस्ट में मौजूद ये जानकारियां तैयार रखें     पैरेंट्स का नाम     राज्य का नाम     विधानसभा क्षेत्र की जानकारी     वोटर आईडी की डिटेल्स डॉक्यूमेंट्स की ज़रूरत कब पड़ेगी अगर आपका नाम या माता-पिता/रिश्तेदारों की डिटेल्स दिल्ली की 2002 की वोटर लिस्ट या किसी दूसरे राज्य की 2002, 2003 या 2005 की वोटर लिस्ट में भी नहीं मिलतीं तो कुछ डॉक्यूमेंट्स मंगे जा सकते हैं। ऐसे मामलों में वेरीफिकेशन किया जा सकता है और चुनाव अधिकारियों की ओर से स्क्रूटनी के बाद ही फैसला लिया जाएगा। ये डॉक्यूमेंट्स मांगे जा सकते हैं     सरकारी कर्मचारी या पेशनर का     पहचान पत्र/PPO1 जुलाई 1987 से     पहले सरकारी संस्था, बैंक, डाकघर, LIC या PSU से जारी पहचान पत्र या सर्टिफिकेट     बर्थ सर्टिफिकेट     पासपोर्ट     10वी या अन्य प्रमाण     पत्र स्थायी निवास प्रमाण पत्र वन     अधिकार प्रमाण पत्र     OBC, SC/ST अन्य जाति प्रमाण पत्र     NRC का रिकॉर्ड (जहां लागू हो)     परिवार रजिस्टर     सरकार द्वारा जारी भूमि या मकान     आवंटन प्रमाण पत्र     आधार कार्ड ASDDF की स्थिति में कटेगा नाम A-Absent (अनुपस्थित): वह शख्स उस पते पर नहीं रहता और उसका पता भी नहीं चल पा रहा। S-Shifted (दूसरी जगह जाना): वह शख्स परमानेंट शिफ्ट कर चुका है। D-Dead (मृत्यु): उस शख्स की मृत्यु हो चुकी हो D-Duplicate (डुप्लिकेट): एक ही शख्स का नाम एक से ज्यादा बार दर्ज है। F-Foreign (विदेशी): यह शख्स भारतीय नागरिक नहीं है 5 अगस्त के बाद आपका सबसे अहम रोल घर-घर वेरीफिकेशन और फॉर्म भरने व जमा कराने की प्रक्रिया के बाद सबसे अहम तारीख होगी 5 अगस्त क्योंकि इस दिन मसौदा वोटर लिस्ट जारी होगी। यहीं से आपकी जिम्मेदारी बढ़ जाएगा। मसौदा लिस्ट आने के बादः 5 अगस्त के बाद आपका सबसे अहम रोल घर-घर वेरीफिकेशन और फॉर्म भरने व जमा कराने की प्रक्रिया के बाद सबसे अहम तारीख होगी 5 अगस्त क्योंकि इस दिन मसौदा वोटर लिस्ट जारी होगी। यहीं से आपकी जिम्मेदारी बढ़ जाएगा। मसौदा लिस्ट आने के बादः     अपना नाम जरूर चेक करें। इसके लिए voters.eci.gov.in में मतदाता सूची डाउनलोड करने के ऑप्शन में जाना होगा।     नाम, पता और दूसरी जानकारियां मिलाएं।     कोई गलती हो तो सुधार के लिए आवेदन करें।     नाम गायब हो तो दावा दर्ज कराएं।     नोटः 5 अगस्त से 4 सितंबर तक दावा और आपत्ति यानी नाम न होने पर उसे जोड़ने या कोई गलती होने पर उसे सुधारने के लिए आवेदन कर सकते है। नाम नहीं या गलती है … Read more

डीटीसी की नई योजना: बसों की लाइव लोकेशन और टाइमिंग मोबाइल ऐप और डिजिटल बोर्ड पर दिखेगी

नई दिल्ली  मेट्रो की तरह बस स्टॉप पर खड़े यात्रियों को भी पता चलेगा कि अगली आने वाली बस किस रूट नंबर की है और वह कितनी देर में बस स्टॉप पर पहुंचेगी। यात्रियों को यह जानकारी न सिर्फ मोबाइल पर ऐप के जरिए बल्कि बस स्टॉप पर लगने वाले डिजिटल पब्लिक इन्फर्मेशन बोर्ड पर भी मिलेगी। डीटीसी इसके लिए आईआईटी कानपुर की भी मदद लेगा। पिछले सप्ताह डीटीसी बसों को लेकर हुई बैठक में इस पर फैसला हुआ है। सरकार डीटीसी बसों के रूटों के बेहतर रेशनलाइजेशन और टाइम-टेबल पर काम करना चाहती है। ताकि यात्री जिस रूट की बस पकड़ना चाहते हैं। उसे लाइव ट्रैक कर सकें। अधिकारियों ने कहा कि इसे लागू करने के लिए तकनीकी मदद आईआईटी कानपुर से लेंगे। इन्फ्रास्ट्रक्चर लेवल पर 3500 से अधिक बस स्टॉप को पीपीपी मॉडल पर विकसित किया जाएगा। यात्रियों को होगी आसानी बस स्टॉप पर खड़े यात्री जान सकेंगे कि अगली आने वाली बस किस रूट नंबर की है। बसों की लाइव ट्रैकिंग सेवा शुरू करने से पहले आईआईटी दिल्ली और DTIDC (दिल्ली परिवहन अवसंरचना विकास निगम) मिलकर एक स्टडी भी कर रहे है, ताकि दिल्ली के बस नेटवर्क को मजबूत, डेटा-आधारित और बेहतर तरीके से फिर से डिजाइन किया जा सके। वर्तमान में दिल्ली में ईस्ट दिल्ली में 121, वेस्ट जोन में 181 और नॉर्थ जोन में 194 बस रूट्स रेशनलाइजेशन पर भी काम चल रहा है। कैसे बेहतर होगी बसों की लाइव ट्रैकिंग ? पिछली सरकार में भी बसों की लाइव ट्रैकिंग व्यवस्था की शुरुआत की गई थी, लेकिन यह सिर्फ एनडीएमसी एरिया के बस स्टॉप और चार्टर ऐप, वन दिल्ली ऐप पर उपलब्ध थी। मगर तब डीटीसी और क्लस्टर स्कीम के तहत दो बसों में लगे जीपीएस का रखरखाव ठीक नहीं होने के कारण योजना पटरी से उतर गई। अब मौजूदा सरकार में इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाई गई है। अब दिल्ली में क्लस्टर स्कीम को खत्म करके सिर्फ डीटीसी के पास बसों का परिचालन है। बसें ओपेक्स मॉडल पर चलाई जा रही है, यानी परिचालन से लेकर रखरखाव की जिम्मेदारी निजी कंपनी के पास है। इसके अलावा डीटीसी ने अपना खुद का एक कमांड कंट्रोल सेंटर बनाया है, जहां पर सभी बसों की जीपीएस के जरिए निगरानी की जा रही है। आईआईटी कानपुर से तकनीकी मदद ली जाएगी। इसके अलावा अब सिर्फ एनडीएमसी एरिया ही नहीं बल्कि पूरी दिल्ली में 3500 से अधिक बस स्टॉप को पीपीपी मॉडल पर विकसित किया जाएगा। इसके लिए टेंडर भी जारी कर दिया गया है।