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वोट चोरी के आरोपों पर कांग्रेस का प्रदर्शन, दिल्ली में जुटे पंजाब के सांसद; चन्नी-रंधावा भी साथ

चंडीगढ़. पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले कांग्रेस हाईकमान ने संगठन को एकजुट करने के साथ ही केंद्र के खिलाफ राजनीतिक माहौल बनाने की कवायद तेज कर दी है। मंगलवार को नई दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ ‘वोट चोरी’ और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के मुद्दे पर कांग्रेस समेत विपक्षी दलों के सांसदों के प्रदर्शन में पंजाब कांग्रेस की भी मजबूत भागीदारी दिखाई दी। पंजाब से सांसद चरणजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा और गुरजीत सिंह औजला समेत अन्य नेता दिल्ली में प्रदर्शन में पहुंचे। इंडिया गठबंधन के सांसद संसद भवन से चुनाव आयोग कार्यालय की ओर मार्च कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद सांसदों ने सड़क पर धरना दिया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर नारेबाजी की।

परगट सिंह की ताजपोशी 11 अक्टूबर को, पंजाब में होने वाले कार्यक्रम में सचिन पायलट भी रहेंगे मौजूद

चंडीगढ़. पंजाब कांग्रेस के नए प्रदेश अध्यक्ष परगट सिंह की औपचारिक ताजपोशी की तैयारियां तेज हो गई हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार परगट सिंह 11 अक्टूबर के आसपास चंडीगढ़ में प्रदेश अध्यक्ष का कार्यभार संभाल सकते हैं। इससे पहले दिल्ली में उनकी वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं और सांसदों के साथ मुलाकातों का दौर जारी है। इन बैठकों के जरिए पंजाब कांग्रेस की आगामी रणनीति और संगठन को मजबूत करने पर मंथन किया जा रहा है। दिल्ली में वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात का दौर प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालने से पहले परगट सिंह दिल्ली में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर पंजाब के राजनीतिक हालात की जानकारी साझा कर रहे हैं। माना जा रहा है कि इन बैठकों में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों, संगठनात्मक बदलाव और पार्टी नेताओं के बीच बेहतर समन्वय जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे। चंडीगढ़ में होगी परगट सिंह की ताजपोशी परगट सिंह की औपचारिक ताजपोशी का कार्यक्रम चंडीगढ़ में आयोजित किए जाने की तैयारी है। कांग्रेस के पंजाब प्रभारी सचिन पायलट भी अगले चार-पांच दिनों में चंडीगढ़ पहुंच सकते हैं। इसके बाद पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी में परगट सिंह को विधिवत रूप से प्रदेश अध्यक्ष का कार्यभार सौंपे जाने की संभावना है। राहुल गांधी के कार्यक्रम को लेकर भी पार्टी स्तर पर चर्चा चल रही है। परगट सिंह के सामने क्या है सबसे पड़ी चुनौती? परगट सिंह के सामने सबसे बड़ी चुनौती पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी और अंदरूनी मतभेदों को पीछे छोड़कर नेताओं व कार्यकर्ताओं को एक मंच पर लाने की होगी। पार्टी में लंबे समय से चल रही खींचतान के बीच कांग्रेस नेतृत्व ने परगट सिंह को ऐसे चेहरे के रूप में चुना है, जो विभिन्न धड़ों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर सके। वहीं, पंजाब के विभिन्न मुद्दों पर कांग्रेस का सरकार के खिलाफ आंदोलन भी जारी है। ऐसे में नए प्रदेश अध्यक्ष के कार्यभार संभालने के बाद पार्टी की सक्रियता और संगठनात्मक गतिविधियों को और तेज करने की तैयारी है। कांग्रेस का लक्ष्य 2027 के चुनाव से पहले संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करना है।

छात्रों की मानसिक सेहत पर पंजाब सरकार का फोकस, स्कूलों में अब होगी मेंटल हेल्थ काउंसलिंग

जालंधर. कांग्रेस नेता एवं पंजाब ब्राह्मण कल्याण बोर्ड के पूर्व डायरेक्टर एडवोकेट रविश कुमार शर्मा द्वारा भेजे गए लीगल नोटिस के बाद पंजाब सरकार हरकत में आई है। रवीश शर्मा ने 18 सितंबर 2026 को पंजाब सरकार को लीगल नोटिस भेजकर सुप्रीम कोर्ट के केस सुखदेव साहा बनाम आंध्र प्रदेश राज्य में दिए गए दिशा-निर्देशों का पालन करने की मांग की थी। स्कूलों में जरूरी है काउंसलिंग सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को स्कूलों में मेंटल हेल्थ पॉलिसी अपनाने, काउंसलर नियुक्त करने और सुसाइड प्रिवेंशन के उपाय लागू करने के निर्देश दिए हैं। रवीश राज शर्मा ने यह मुद्दा उठाया था कि स्कूलों में विद्यार्थियों की काउंसलिंग के लिए काउंसलर होना जरूरी है ताकि वह बच्चों की मानसिक स्थिति को समझ कर उसे हिसाब से उन्हें गाइड कर सके। उन्होंने यह मुद्दा इसलिए उठाया था कि पिछले समय के दौरान बड़ी गिनती में विद्यार्थियों ने दबाव में आत्महत्या की हैं। मेंटल हेल्थ को लेकर हरकत में आई सरकार इस लीगल नोटिस पर संज्ञान लेते हुए स्कूल शिक्षा मंत्री कार्यालय ने शिक्षा विभाग को कार्रवाई के आदेश दिए हैं। इसके बाद पंजाब सरकार, स्कूल शिक्षा विभाग ने डायरेक्टर, स्टेट काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग पंजाब, मोहाली को भेजे गए पत्र में स्पष्ट लिखा गया है कि एडवोकेट के जरिए भेजे गए रवीश शर्मा के लीगल नोटिस में दर्शाए गए मामले पर तुरंत अगली जरूरी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए और की गई कार्रवाई की रिपोर्ट सीधे संबंधित एडवोकेट और रवीश राज शर्मा को सूचित करते हुए सरकार को भी भेजी जाए।

पंजाब सरकार की बड़ी चुनौती, CBI जांच के हाईकोर्ट आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर की याचिका

चंडीगढ़  पंजाब में अधिकारियों के तबादलों, अनुकूल नीतियां बनवाने, टेंडर और अन्य कथित अवैध गतिविधियों के लिए लेन-देन के आरोपों की जांच का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। पंजाब सरकार ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने के निर्देश दिए गए थे। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी है। अब इस मामले में शीर्ष अदालत में सुनवाई होगी। जानें क्या है मामला यह मामला एनफोर्समेंट डायरेकरेट (ईडी) की ओर से पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को लिखी गई चिट्ठी से जुड़ा है। ईडी ने चिट्ठी के माध्यम से पंजाब में अधिकारियों के तबादलों, नीतियों को प्रभावित करने, टेंडर और अन्य कथित गतिविधियों में लेन-देन के आरोपों की जानकारी दी थी। इसी मामले की जांच को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद पंजाब सरकार ने अब सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। सरकार की ओर से दायर याचिका में हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत से राहत की मांग की गई है। कल ही चीमा ने दिए थे संकेत सरकार के सुप्रीम कोर्ट जाने के संकेत सोमवार को ही वित्त मंत्री हरपाल चीमा ने अपनी प्रेस कांफ्रेंस में दे दिए थे। उन्होंने हाईकोर्ट के सीबीआई जांच के आदेश पर सरकार का पक्ष रखते हुए कहा था कि सरकार इस आदेश को चुनौती देने के लिए कानूनी विकल्प अपनाएगी। इसके अगले ही दिन पंजाब सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी गई। पंजाब की राजनीति में बढ़ी सियासत इस मामले को लेकर पंजाब की राजनीति में भी सियासत तेज है। विपक्षी दल हाईकोर्ट के आदेश और ईडी की चिट्ठी को आधार बनाकर सरकार पर सवाल उठा रहे हैं। वहीं, पंजाब सरकार का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश को शीर्ष अदालत के समक्ष चुनौती दी जाएगी। अब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के बाद जांच की दिशा और हाईकोर्ट के आदेश पर आगे की कार्रवाई को लेकर शीर्ष अदालत के रुख पर नजर रहेगी। सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई से यह स्पष्ट होगा कि हाईकोर्ट के सीबीआई जांच के आदेश पर क्या स्थिति रहती है और मामले की जांच आगे किस एजेंसी के माध्यम से होगी।

‘गाद नहीं निकाली तो बढ़ेगा बाढ़ का खतरा’, NGT में पंजाब सरकार ने रखा बड़ा तर्क

चंडीगढ़ पंजाब सरकार ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में कहा है कि बाढ़ प्रबंधन, नदियों और ड्रेनों की जलप्रवाह क्षमता बहाल करने तथा भविष्य की आपदाओं से बचाव के लिए की जाने वाली वास्तविक डी-सिल्टिंग (गाद निकालने) और ड्रेजिंग को केवल इसलिए व्यावसायिक खनन नहीं माना जा सकता। दरअसल निकाली गई सामग्री का आर्थिक मूल्य हो सकता है। राज्य सरकार ने यह पक्ष पंजाब में डी सिल्टिंग पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग से संबंधित आवेदन की सुनवाई के दौरान रखा। सरकार ने कहा कि डी-सिल्टिंग पर ब्लैंकेट रोक लगाने से उसके कई जरूरी वैधानिक कार्य प्रभावित होंगे। इनमें बाढ़ प्रबंधन, नदियों और ड्रेनों की क्षमता बहाल करना, तटबंधों की सुरक्षा तथा भविष्य में बाढ़ से होने वाली आपदाओं की रोकथाम शामिल है। पंजाब ने एनजीटी के समक्ष स्पष्ट किया कि रखरखाव, पुनर्बहाली और आपदा प्रबंधन के लिए की जाने वाली डी-सिल्टिंग और ड्रेजिंग को खनिजों के व्यावसायिक दोहन और बिक्री के लिए किए जाने वाले खनन से अलग रखा जाना चाहिए। हालांकि, राज्य सरकार ने यह भी स्वीकार किया कि पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (ईआईए) अधिसूचना, 2006 के परिशिष्ट-IX के आइटम-7 में मुख्य प्रबंधन के लिए ड्रेजिंग और डी-सिल्टिंग को दी गई छूट का इस्तेमाल व्यावसायिक खनन को छिपाने के लिए नहीं किया जा सकता। सरकार ने कहा कि उसका इरादा ऐसी किसी गतिविधि को अनुमति देने का नहीं है, जो वास्तविकता और प्रभाव में व्यावसायिक खनन हो, लेकिन उसे डी-सिल्टिंग के नाम पर कराया जाए। 2025 की बाढ़ का दिया उदाहरण पंजाब सरकार ने अपने पक्ष में वर्ष 2025 में आई अभूतपूर्व बाढ़ का हवाला दिया। सरकार के अनुसार, 2025 के मानसून में पंजाब में 622.1 मिलीमीटर बारिश हुई, जो सामान्य से 41 प्रतिशत अधिक थी। इस दौरान सतलुज, ब्यास, रावी और घग्गर नदी तंत्र में भी असाधारण रूप से अधिक पानी आया। बाढ़ के कारण नदी चैनलों, ड्रेनों, तटबंधों और बाढ़ प्रबंधन से जुड़े अन्य ढांचों को नुकसान पहुंचा। राज्य ने यह भी बताया कि 16 सितंबर 2025 के केंद्रीय गृह मंत्रालय के पत्र में केंद्रीय अंतर-मंत्रालयी टीम द्वारा स्थिति का आकलन किए जाने का उल्लेख था। टीम ने व्यावहारिक तौर पर स्थिति को 'गंभीर प्रकृति की आपदा' माना था। इसके बाद जल संसाधन विभाग ने नदियों, ड्रेनों और अन्य जलमार्गों की जलप्रवाह क्षमता को बहाल करने और बनाए रखने के लिए निवारक तथा सुधारात्मक कार्य शुरू किए। साथ ही बाढ़ प्रबंधन से जुड़े ढांचों को मजबूत करने के काम भी किए गए। रा ज्य ने कहा कि ये कार्य उसकी वैधानिक जिम्मेदारियों का हिस्सा हैं और पंजाब कैनाल एंड ड्रेनेज एक्ट, 2023 की धारा 38 के तहत भी ऐसे कार्य किए जाते हैं। एनजीटी के अंतरिम निर्देश के बाद एसओपी पंजाब ने एनजीटी के अंतरिम निर्देश का भी उल्लेख किया, जिसमें सरकारी एजेंसियों या अन्य माध्यमों से मेंटेनेंस, अपकीप और डिजास्टर मैनेजमेंट के लिए डी-सिल्टिंग की अनुमति दी गई है। इसकी शर्त यह है कि इसका इस्तेमाल व्यावसायिक रेत खनन के लिए नहीं होना चाहिए। इसी निर्देश के बाद जल संसाधन विभाग ने 15 जून 2026 को आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत महत्वपूर्ण स्थानों पर नदी की जलप्रवाह क्षमता बहाल करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की। इसमें महत्वपूर्ण स्थलों की पहचान, काम शुरू करने से पहले तकनीकी आकलन और राज्य तकनीकी मूल्यांकन समिति से स्वीकृत विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) के आधार पर काम कराने का प्रावधान किया गया। डी-सिल्टिंग की आड़ में नहीं होने देंगे अवैध खनन विभाग के मुख्य अभियंता/ड्रेनेज-कम-माइनिंग ने 99 डी-सिल्टिंग साइटों की पहचान कर उनकी जिला स्तर की सूची 16 जून को उपायुक्तों को भेजी। इन स्थानों पर आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत जमीन मालिकों या एसओपी के अनुसार काम कराने की व्यवस्था की गई। इसके बाद 16 जुलाई को विभाग ने 37 और साइटों की सूची भेजी। इसमें वॉल्यूम-शेयर और प्राइस-बिड टेंडर मॉडल वाले स्थान शामिल थे। साथ ही उन साइटों को भी सूची में रखा गया, जिन्हें पहले जमीन मालिकों को आवंटित किया गया था, लेकिन विरोध या अन्य कारणों से वहां काम रुक गया था। उपायुक्तों को महत्वपूर्ण नदी स्थलों पर जरूरत का आकलन करने और जमीन मालिकों अथवा एसओपी के तहत डी-सिल्टिंग का काम कराने के निर्देश दिए गए। राज्य सरकार ने एनजीटी को स्पष्ट किया कि बाढ़ प्रबंधन और आपदा से बचाव के लिए ऐसे कार्यों को व्यावसायिक खनन के बराबर नहीं रखा जा सकता, लेकिन डी-सिल्टिंग की आड़ में होने वाले वास्तविक व्यावसायिक खनन की अनुमति भी नहीं दी जाएगी।  

AAP में टिकट की रेस तेज! बठिंडा में 7 दावेदारों ने बढ़ाया जनसंपर्क, 2027 चुनाव पर नजर

बठिंडा बठिंडा में आम आदमी पार्टी के मौड़ हलके में विधायक सुखबीर सिंह माइसरखाना के पार्टी से निष्कासन के बाद अब सियासी हलचल तेज हो गई है। MLA की जगह संगठन में खाली हुई राजनीतिक स्पेस को भरने के लिए पार्टी के भीतर कई चेहरे सक्रिय हो गए हैं।  इसके साथ ही 2027 के विधानसभा चुनाव की टिकट के लिए भी अभी से जमीन तैयार करने की कवायद शुरू हो गई है। मौड़ में फिलहाल करीब सात नेताओं के नाम राजनीतिक गलियारों में चर्चा में हैं। खास बात यह है कि इन नेताओं ने केवल पार्टी संगठन तक अपनी गतिविधियां सीमित नहीं रखी हैं, बल्कि वर्करों से व्यक्तिगत संपर्क, गांवों में बैठकें और डोर-टू-डोर संपर्क भी बढ़ा दिया है। यानी मुकाबला सिर्फ हलका इंचार्ज बनने का नहीं, बल्कि 2027 में पार्टी का चेहरा बनने की तैयारी का भी दिखाई दे रहा है। मौड़ में AAP की कमान पाने की दौड़…     किसी की नजर दिल्ली पर, कोई मान से करीबियां बढ़ा रहा: मौड़ में दावेदारों के बीच असली मुकाबला स्थानीय संगठन के साथ-साथ ऊपर तक पहुंच बनाने का भी है। पार्टी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, कुछ नेता दिल्ली में बैठे पार्टी नेताओं से संपर्क साध रहे हैं, जबकि कुछ की कोशिश मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ अपने राजनीतिक संबंध मजबूत करने की है। ऐसे में आने वाले दिनों में हलका इंचार्ज की नियुक्ति पार्टी के भीतर शक्ति संतुलन का संकेत भी दे सकती है।     राजनीतिक जगह को लेकर अंदरखाने मुकाबला शुरू: मौड़ में अभी तस्वीर साफ नहीं है, लेकिन सात चेहरों की बढ़ती सक्रियता ने साफ कर दिया है कि माइसरखाना के बाद खाली हुई राजनीतिक जगह को लेकर अंदरखाने मुकाबला शुरू हो चुका है। हलका इंचार्ज का फैसला पार्टी के लिए महज संगठनात्मक नियुक्ति नहीं होगा।     टिकट की दौड़ के समीकरण भी काफी हद तक प्रभावित: इससे 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए मौड़ में पार्टी के संभावित चेहरे और टिकट की दौड़ के समीकरण भी काफी हद तक प्रभावित हो सकते हैं। अब नजर पार्टी हाईकमान के फैसले पर है कि वह पुराने संगठनात्मक चेहरे पर भरोसा जताता है, सरकार के करीब माने जाने वाले चेहरे को आगे करता है या स्थानीय स्तर पर मजबूत पकड़ रखने वाले नेता को जिम्मेदारी सौंपता है।     जीदा के पास संगठन और सरकार दोनों का अनुभव: दावेदारों में एडवोकेट नवदीप सिंह जीदा का नाम सबसे प्रमुखता से चर्चा में है। वह बठिंडा लोकसभा हलके के इंचार्ज हैं और पंजाब शुगरफेड के चेयरमैन भी हैं। पार्टी के पुराने कार्यकर्ता होने के कारण संगठन में उनकी पहचान नई नहीं है। संगठनात्मक जिम्मेदारी और सरकार से जुड़े पद पर रहने का अनुभव उनकी दावेदारी का मजबूत पक्ष माना जा रहा है।     डॉ. राजू ढड्डे: शुरुआत से AAP के साथ: डॉ. राजू ढड्डे भी मौड़ की राजनीति में मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। वह आम आदमी पार्टी के शुरुआती दौर से जुड़े हुए हैं। मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ उनके करीबी संबंधों की भी पार्टी हलके में चर्चा रहती है। ऐसे में उनकी दावेदारी का आधार पुराना संगठनात्मक जुड़ाव और शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच दोनों को माना जा रहा है।     महिला विंग की नेता ने भी बढ़ाई सक्रियता: महिला विंग की पंजाब वाइस प्रधान रूपिंदर कौर गिल भी इस दौड़ में सक्रिय हैं। लंबे समय से पार्टी के साथ जुड़ी होने के कारण संगठन में उनका अपना आधार है। महिला कार्यकर्ताओं और महिला वोटरों के बीच सक्रियता को देखते हुए वह भी हलका इंचार्ज की दौड़ में महत्वपूर्ण चेहरा बनकर उभर रही हैं।     सिपी भाकर ने बदली राजनीतिक पारी: सिपी भाकर की राजनीतिक पृष्ठभूमि अलग है। वह पहले कांग्रेस में रह चुके हैं और लोकसभा चुनाव 2024 से पहले आम आदमी पार्टी में शामिल हुए थे। AAP में आने के बाद अब उन्होंने मौड़ में अपनी राजनीतिक गतिविधियां तेज कर दी हैं। वर्करों से संपर्क और क्षेत्र में सक्रियता बढ़ाकर वह भी अपनी जगह बनाने में जुटे हैं।     बूटा सिंह संदोहा के पास ग्रामीण संगठन का आधार: बूटा सिंह संदोहा लंबे समय से पार्टी के साथ जुड़े हुए हैं। वह जिला परिषद के सदस्य हैं और नशे के खिलाफ काम करने वाली टीम से भी जुड़े रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में उनकी सक्रियता और लंबे समय से पार्टी संगठन में रहने का अनुभव उनकी दावेदारी का आधार है।     हिम्मत सिंह के साथ परिवार की भी राजनीतिक मौजूदगी: मौड़ हलके के कोऑर्डिनेटर हिम्मत सिंह कुत्तीवाल भी मैदान में हैं। उनकी पत्नी रानी कौर जिला परिषद सदस्य हैं। यानी हलके में राजनीतिक सक्रियता के साथ परिवार की भी स्थानीय स्तर पर मौजूदगी है। यही वजह है कि उनका नाम भी संभावित दावेदारों में लिया जा रहा है।     माइसरखाना से रंजीत सिंह मठाड़ू की दावेदारी: रंजीत सिंह मठाड़ू गांव माइसरखाना के रहने वाले हैं। उनकी पत्नी मौजूदा सरपंच हैं। माइसरखाना क्षेत्र से स्थानीय पकड़ और पंचायत स्तर पर राजनीतिक संपर्कों के चलते उन्होंने भी अपनी सक्रियता बढ़ाई है।

पंजाब में किसानों का बड़ा प्रदर्शन, बठिंडा-मानसा में प्रशासनिक दफ्तरों पर लगाया ताला

 बठिंडा  पंजाब के विभिन्न जिलों में मांगों को लेकर किसानों की ओर से जिला प्रबंधकीय परिसर के सभी गेटों का बंद कर धरना-प्रदर्शन किया जा रहा है।किसान सोमवार से यहां धरना-प्रदर्शन करने में जुटे हैं। इस दौरान किसी भी कर्मचारी को अंदर जाने नहीं दिया गया। इस कारण जिला प्रबंधकिय परिसर में बने सभी सरकारी दफ्तरों में काम बंद पड़ा है। मानसा में भी दिखा असर वहीं, मानसा में भी किसान जिला प्रबंधकीय परिसर के गेट पर लगा रहे हैं। इस बीच किसान संगठन उगराहा की ओर से मंगलवार सुबह प्रबंधन के परिसर को जाने वाले दोनों गेट को बंद करते धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया गया। प्रशासन की ओर से किसानों के प्रदर्शन को देखते धरना स्थल के आसपास पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। इस दौरान किसी भी अधिकारी और कर्मचारियों को प्रबंधन के परिसर के अंदर और बाहर जाने की अनुमति नहीं है। नतीजन डीसी, एसएसपी समेत अन्य विभागों के अधिकारी अपने दफ्तर तक नहीं पहुंच पाए हैं। बेशक सोमवार को जिले में मुख्यमंत्री की लोक मिलनी को लेकर पूरा प्रशासन गांव फत्ता मालोका में व्यस्त होने के कारण बड़े अधिकारी दफ्तर तक नहीं पहुंच पाए, लेकिन किसानों ने मंगलवार सुबह ही प्रबंधकीय कॉम्प्लेक्स के बाहरी गेट से आगे बढ़ते परिसर के अंदर जाने वाले दोनों दरवाजों को बंद करते सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की गई। किसान नेता राम सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री गांव की चौपाल में लोगों की समस्या हल करने के दावे कर रहे हैं, लेकिन किसानी मांगों को लेकर पिछले महीने डीसी दफ्तरों के आगे दिन रात का धरना देने के बाद भी सरकार उनकी मांगे मानने को मंजूर नहीं है। किसान नेता ने कहा कि संगठन की प्रदेश कमेटी नेताओं कि फैसले अनुसार प्रबंधकीय कांप्लेक्स का। घेराव जारी रहेगा। प्रदर्शन में ही लंगर का प्रबंध प्रबंधकीय कांप्लेक्स में धरने पर बैठे किसानों के लिए लंगर की व्यवस्था भी की गई है ताकि किसान लंगर खाने के लिए इधर-उधर में जा सके।  

बंदी सिंहों की रिहाई के मुद्दे पर CM भगवंत मान सख्त, कहा- न्याय दिलाने के लिए करेंगे कानूनी कार्रवाई

 चंडीगढ़  बंदी सिंहों की रिहाई के मुद्दे को लेकर गठित चार सदस्यीय कमेटी ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से मुलाकात की। कमेटी में गुरदीप सिंह बठिंडा, एडवोकेट जसपाल सिंह मंझपुर, पाल सिंह फ्रांस और बलविंदर पाल सिंह शामिल हैं। मुलाकात के दौरान कमेटी के सदस्यों ने बंदी सिंहों की रिहाई से जुड़े मुद्दे पर मुख्यमंत्री के समक्ष अपने विचार और मांगें रखीं। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि उन्होंने कमेटी के सदस्यों की बात और उनकी अपील को गंभीरता से सुना है। उन्होंने कमेटी को भरोसा दिलाया कि पंजाब सरकार बंदी सिखों की रिहाई के मामले का जल्द से जल्द उचित और कानूनी समाधान निकालने के लिए प्रतिबद्ध है। 'जो काम पिछली सरकारों ने नहीं किया, हम करेंगे' बंदी सिंहों की रिहाई पर CM भगवंत मान ने दिलाया न्याय का भरोसा मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बंदी सिंहों की रिहाई के मुद्दे पर गठित चार सदस्यीय कमेटी से मुलाकात की। उन्होंने कमेटीपंजाब सरकार कानूनी समाधान हेतु प्रतिबद्ध, जल्द कार्रवाई का भरोसादी सिंहों की रिहाई के मुद्दे को लेकर गठित चार सदस्यीय कमेटी ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से मुलाकात की। कमेटी में गुरदीप सिंह बठिंडा, एडवोकेट जसपाल सिंह मंझपुर, पाल सिंह फ्रांस और बलविंदर पाल सिंह शामिल हैं। मुलाकात के दौरान कमेटी के सदस्यों ने बंदी सिंहों की रिहाई से जुड़े मुद्दे पर मुख्यमंत्री के समक्ष अपने विचार और मांगें रखीं।  मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि उन्होंने कमेटी के सदस्यों की बात और उनकी अपील को गंभीरता से सुना है। उन्होंने कमेटी को भरोसा दिलाया कि पंजाब सरकार बंदी सिखों की रिहाई के मामले का जल्द से जल्द उचित और कानूनी समाधान निकालने के लिए प्रतिबद्ध है।मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन जायज और कानूनी कदमों को पिछली सरकारों की ओर से कई वर्षों से नहीं उठाया गया, उन्हें उनकी सरकार प्राथमिकता के आधार पर उठाएगी। सरकार का प्रयास रहेगा कि इस मामले को आगे बढ़ाकर जल्द समाधान तक पहुंचाया जा सके।मान ने कहा कि पंजाब सरकार हमेशा न्याय के साथ खड़ी रही है और बंदी सिखों के मामले में भी सरकार कानून के दायरे में रहते हुए जरूरी कदम उठाएगी।  उन्होंने कहा कि इस मामले से जुड़े सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।मुख्यमंत्री ने इस मुलाकात की जानकारी इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म के माध्यम से भी साझा की। उन्होंने कहा कि सरकार इस मुद्दे को लेकर संवेदनशील है और कमेटी के साथ हुई बातचीत को आगे की कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कमेटी की ओर से बंदी सिखों की रिहाई के लिए लंबे समय से प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री के साथ हुई इस बैठक को इस मुद्दे पर आगे की प्रक्रिया के लिहाज से अहम माना जा रहा है। जो पुरानी सरकार ने नहीं किया वो हम करेंगे मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन जायज और कानूनी कदमों को पिछली सरकारों की ओर से कई वर्षों से नहीं उठाया गया, उन्हें उनकी सरकार प्राथमिकता के आधार पर उठाएगी। सरकार का प्रयास रहेगा कि इस मामले को आगे बढ़ाकर जल्द समाधान तक पहुंचाया जा सके। दिलाया न्याय का भरोसा मान ने कहा कि पंजाब सरकार हमेशा न्याय के साथ खड़ी रही है और बंदी सिखों के मामले में भी सरकार कानून के दायरे में रहते हुए जरूरी कदम उठाएगी। उन्होंने कहा कि इस मामले से जुड़े सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। इस बैठक को माना जा रहा अहम मुख्यमंत्री ने इस मुलाकात की जानकारी इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म के माध्यम से भी साझा की। उन्होंने कहा कि सरकार इस मुद्दे को लेकर संवेदनशील है और कमेटी के साथ हुई बातचीत को आगे की कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कमेटी की ओर से बंदी सिखों की रिहाई के लिए लंबे समय से प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री के साथ हुई इस बैठक को इस मुद्दे पर आगे की प्रक्रिया के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

ASI पर गोलीबारी के बाद TTH की धमकी, कहा- ‘वर्दी हो या सिविल ड्रेस, सभी को पहचानते हैं’

अमृतसर अमृतसर में ASI सुखचैन पर हुई फायरिंग की जिम्मेदारी ‘तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान’ (TTH) नाम के संगठन ने ली है। संगठन की ओर से जारी प्रेस नोट में हमले को ‘ऑपरेशन नूर’ के तहत की गई कार्रवाई बताया गया है।साथ ही, भारतीय पुलिसकर्मियों और सरकारी कर्मचारियों को धमकी देते हुए भविष्य में ऐसे और हमले जारी रखने का दावा किया गया है।  प्रेस नोट में दावा किया गया कि पुलिसकर्मी अगर वर्दी के बजाय सादे कपड़ों में भी घूमते हैं, तो उन्हें पहचाना जा सकता है। संगठन ने दावा किया है कि उसे पुलिसकर्मियों के बारे में जानकारी है, चाहे वे वर्दी में हों या सिविल कपड़ों में। हालांकि अमृतसर रूरल SSP कंवलप्रीत सिंह चहल ने कल(5 अक्टूबर को) कहा था कि यह टारगेट किलिंग की कोशिश नहीं थी। उन्होंने कहा कि ASI के बयान दर्ज कर लिए गए हैं। उसने आरोप लगाया है कि उसे शक है कि यह हमला उसकी भाभी ने करवाया है। अब विस्तार से पढ़िए पूरा मामला ड्यूटी से लौटते समय हमला हुआ: अमृतसर रूरल SSP कंवलप्रीत सिंह चहल के अनुसार, 4 अक्टूबर की शाम करीब 7 बजे GRP में तैनात ASI सुखचैन सिंह ड्यूटी खत्म करने के बाद अपने घर जगदेव कलां जा रहे थे। रास्ते में कुछ अज्ञात लोगों ने उन पर फायरिंग की। एक गोली उनकी बाजू में लगी। उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत खतरे से बाहर है। भाभी से विवाद, भाई की हत्या की: SSP के मुताबिक, ASI सुखचैन सिंह के बयान के आधार पर सामने आया है कि उनका अपनी भाभी गुरप्रीत कौर के साथ विवाद चल रहा था। वह भिखीविंड की रहने वाली है। बताया गया कि 2019 में ASI के भाई हीरा सिंह की हत्या हुई थी। यह हत्या भाभी ने अपने दोस्त सतनाम सिंह उर्फ सत्ता के साथ मिलकर की थी। आरोपी भाभी को फेसबुक पर मिला था: ASI ने अपने बयान में कहा कि सत्ता हरियाणा का रहने वाला है। आरोपी भाभी को वह फेसबुक पर मिला था। उसके साथ मिलकर भाई को जहरीली चीज देकर मार दिया था। इसका केस सेशन कोर्ट में अंतिम चरण में चल रहा है। पुलिस CCTV खंगाल रही: SSP के अनुसार, ASI के बयान के मुताबिक 3 लोग मोटरसाइकिल पर आए थे। जगदेव कलां के पुल पार करने के बाद उन्होंने ASI पर एक राउंड फायर किया। घटना के बाद पुलिस की तकनीकी और फोरेंसिक टीमें मौके पर पहुंचीं। पुलिस CCTV फुटेज खंगाल रही है। अज्ञात हमलावरों के खिलाफ केस दर्ज : इस मामले में थाना अजनाला में FIR दर्ज की गई है। डीएसपी धर्मिंदर कल्याण ने बताया कि अज्ञात हमलावरों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। पुलिस आरोपियों की पहचान करने और उन्हें गिरफ्तार करने के लिए जांच कर रही है।

Punjab DA Case: मुलाजिमों के महंगाई भत्ते पर हाईकोर्ट में फिर सुनवाई, सरकार से कहा- ‘बहुत हो चुका’

चंडीगढ़  पंजाब के सरकारी मुलाजिमों और पेंशनरों के बकाया DA मामले में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट आज (6 अक्टूबर) फिर सुनवाई करेगा। पंजाब के चीफ सेक्रेटरी केएपी सिन्हा आज भी व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में हाजिर होंगे। उन्हें कोर्ट ने समन किया है। सोमवार (5 अक्टूबर) को हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि सरकार सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करने के मामले में तथ्यों को गलत तरीके से पेश कर रही है। कोर्ट ने कहा- सुप्रीम कोर्ट जाना आपका अधिकार है, लेकिन ट्वीट कर फैसले को चुनौती देंगे तो हम इसकी तारीफ नहीं करेंगे। सरकार खुद के लिए कड़ी कार्रवाई की स्थिति पैदा कर रही है। अब बहुत हो चुका, अब और लुका-छिपी नहीं चल सकती। बता दें कि 3 अगस्त 2026 को हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को कर्मचारियों और पेंशनरों को IAS, IPS और IFS अधिकारियों के बराबर लंबित DA/DR देने को कहा था। कोर्ट ने यहां तक कहा था कि बकाया देने तक सरकार बड़े स्तर पर एडवरटाइजमेंट जैसे खर्च भी बंद करे। पहले जानिए कि मुख्य विवाद क्या है? पंजाब के मुलाजिम और पेंशनर्स मांग कर रहे हैं कि उन्हें छठे पंजाब पे कमीशन के अनुसार DA केंद्र सरकार के पैटर्न पर मिलना चाहिए। उनका कहना है कि राज्य का टैक्स राजस्व बढ़ा है, इसलिए सरकार को ₹14,200 करोड़ का बकाया एरियर तुरंत ब्याज समेत देना चाहिए। इस पर पंजाब सरकार का तर्क है कि 2021 के पे-रूल्स में कोई निश्चित केंद्रीय दर अनिवार्य नहीं है। इतनी बड़ी रकम अचानक जारी करने से राज्य का वित्तीय ढांचा प्रभावित होगा और वह पहले से ही कर्मचारियों को कई केंद्रीय श्रेणियों से ज्यादा वेतन दे रही है। अब विवाद की पूरी टाइमलाइन पढ़िए     8 अप्रैल 2026 (सिंगल बेंच का फैसला): हाई कोर्ट के सिंगल जज की बेंच ने पंजाब सरकार को आदेश दिया कि वह अपने कर्मचारियों और पेंशनर्स को केंद्रीय पैटर्न के अनुसार उसी दर पर DA/DR जारी करे, जिस दर पर पंजाब में तैनात IAS, IPS अधिकारियों को दिया जाता है। कोर्ट ने इसके लिए 30 जून 2026 तक की डेडलाइन तय की थी।     3 अगस्त 2026 (हाई कोर्ट की डबल बेंच का सख्त आदेश): पंजाब सरकार ने सिंगल बेंच के फैसले के खिलाफ अपील दायर की। हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली डिवीजन बेंच ने सरकार की अपील खारिज कर दी और आदेश दिया कि 15 दिनों के भीतर सभी लंबित किस्तों का भुगतान किया जाए। कोर्ट ने यह भी शर्त रखी कि देरी होने पर 6% सालाना साधारण ब्याज देना होगा और जब तक भुगतान नहीं होता, सरकार प्रिंट या सोशल मीडिया पर विज्ञापनों जैसे गैर-जरूरी खर्चों पर रोक लगाए।     17 अगस्त 2026 (हाई कोर्ट की डेडलाइन खत्म): हाई कोर्ट की ओर से दी गई 15 दिनों की डेडलाइन समाप्त हो गई, लेकिन सरकार ने भुगतान नहीं किया। इसके विरोध में पंजाब स्टेट मिनिस्टीरियल सर्विसेज यूनियन और अन्य संगठनों ने हड़ताल की चेतावनी दी।     27 अगस्त 2026 (कर्मचारियों की महा-हड़ताल और सरकार का एक्शन): लंबित DA, एरियर और पुरानी पेंशन योजना (OPS) को लेकर कर्मचारियों ने राज्यव्यापी सामूहिक हड़ताल की। जवाब में भगवंत मान सरकार ने नो वर्क, नो पे (काम नहीं तो वेतन नहीं) का नियम लागू कर कर्मचारियों को कारण बताओ (शो-कॉज) नोटिस जारी कर दिए।     1 सितंबर 2026 (सरकार पहुंची सुप्रीम कोर्ट): पंजाब सरकार ने हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दाखिल की। सरकार ने तर्क दिया कि इतनी बड़ी रकम का एक साथ भुगतान करना वित्तीय और संवैधानिक रूप से संभव नहीं है।     8 से 9 सितंबर 2026 (पेन-डाउन स्ट्राइक और सरकार का झुकना): शो-कॉज नोटिस के विरोध में कर्मचारियों ने आंदोलन तेज करते हुए पेन-डाउन स्ट्राइक शुरू कर दी और सामूहिक छुट्टी पर चले गए। चौतरफा दबाव के बाद, 9 सितंबर को सरकार ने सभी कर्मचारियों के खिलाफ जारी किए गए कारण बताओ नोटिस वापस ले लिए, जिसके बाद कर्मचारियों ने अपनी हड़ताल स्थगित की।     11 सितंबर 2026 (हाई कोर्ट का अल्टीमेटम): सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने पंजाब सरकार की याचिका (SLP) में 9 तकनीकी आपत्तियां निकाली थीं। हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार को इन आपत्तियों को दूर करने और सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू करवाने के लिए 10 दिन का समय दिया।     18 से 27 सितंबर 2026 (8% डीए बढ़ोतरी का ऐलान): मुख्यमंत्री भगवंत मान और कर्मचारी यूनियनों के बीच एक अहम बैठक हुई। गतिरोध को कम करने के लिए सरकार ने अंतरिम राहत के रूप में 8% डीए बढ़ोतरी का नोटिफिकेशन जारी किया। इससे राज्य में DA 42% से बढ़कर 50% हो गया। हालांकि, पुराने बकाए का मुद्दा अभी भी जस का तस बना रहा।     5 अक्टूबर 2026 (मुख्य सचिव की पेशी और हाई कोर्ट की फटकार): मामले की सुनवाई के दौरान पंजाब के मुख्य सचिव केएपी सिन्हा हाई कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश हुए। सरकार ने हलफनामा देकर कहा कि मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। इस पर हाई कोर्ट ने सख्त नाराजगी जताते हुए कहा कि सरकार सुप्रीम कोर्ट की अपील के स्टेटस को लेकर तथ्यों को गलत तरीके से पेश कर रही है और कोर्ट को गुमराह कर रही है। कोर्ट ने नोट किया कि 1 सितंबर को याचिका दायर होने के बावजूद तकनीकी आपत्तियां अभी तक दूर नहीं की गई हैं। ऐसा लग रहा है कि सरकार सिर्फ समय बिताने की कोशिश कर रही है। हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री से खुद स्टेटस रिपोर्ट मांगी है।