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‘गाद नहीं निकाली तो बढ़ेगा बाढ़ का खतरा’, NGT में पंजाब सरकार ने रखा बड़ा तर्क

चंडीगढ़ पंजाब सरकार ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में कहा है कि बाढ़ प्रबंधन, नदियों और ड्रेनों की जलप्रवाह क्षमता बहाल करने तथा भविष्य की आपदाओं से बचाव के लिए की जाने वाली वास्तविक डी-सिल्टिंग (गाद निकालने) और ड्रेजिंग को केवल इसलिए व्यावसायिक खनन नहीं माना जा सकता। दरअसल निकाली गई सामग्री का आर्थिक मूल्य हो सकता है। राज्य सरकार ने यह पक्ष पंजाब में डी सिल्टिंग पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग से संबंधित आवेदन की सुनवाई के दौरान रखा। सरकार ने कहा कि डी-सिल्टिंग पर ब्लैंकेट रोक लगाने से उसके कई जरूरी वैधानिक कार्य प्रभावित होंगे। इनमें बाढ़ प्रबंधन, नदियों और ड्रेनों की क्षमता बहाल करना, तटबंधों की सुरक्षा तथा भविष्य में बाढ़ से होने वाली आपदाओं की रोकथाम शामिल है। पंजाब ने एनजीटी के समक्ष स्पष्ट किया कि रखरखाव, पुनर्बहाली और आपदा प्रबंधन के लिए की जाने वाली डी-सिल्टिंग और ड्रेजिंग को खनिजों के व्यावसायिक दोहन और बिक्री के लिए किए जाने वाले खनन से अलग रखा जाना चाहिए। हालांकि, राज्य सरकार ने यह भी स्वीकार किया कि पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (ईआईए) अधिसूचना, 2006 के परिशिष्ट-IX के आइटम-7 में मुख्य प्रबंधन के लिए ड्रेजिंग और डी-सिल्टिंग को दी गई छूट का इस्तेमाल व्यावसायिक खनन को छिपाने के लिए नहीं किया जा सकता। सरकार ने कहा कि उसका इरादा ऐसी किसी गतिविधि को अनुमति देने का नहीं है, जो वास्तविकता और प्रभाव में व्यावसायिक खनन हो, लेकिन उसे डी-सिल्टिंग के नाम पर कराया जाए। 2025 की बाढ़ का दिया उदाहरण पंजाब सरकार ने अपने पक्ष में वर्ष 2025 में आई अभूतपूर्व बाढ़ का हवाला दिया। सरकार के अनुसार, 2025 के मानसून में पंजाब में 622.1 मिलीमीटर बारिश हुई, जो सामान्य से 41 प्रतिशत अधिक थी। इस दौरान सतलुज, ब्यास, रावी और घग्गर नदी तंत्र में भी असाधारण रूप से अधिक पानी आया। बाढ़ के कारण नदी चैनलों, ड्रेनों, तटबंधों और बाढ़ प्रबंधन से जुड़े अन्य ढांचों को नुकसान पहुंचा। राज्य ने यह भी बताया कि 16 सितंबर 2025 के केंद्रीय गृह मंत्रालय के पत्र में केंद्रीय अंतर-मंत्रालयी टीम द्वारा स्थिति का आकलन किए जाने का उल्लेख था। टीम ने व्यावहारिक तौर पर स्थिति को 'गंभीर प्रकृति की आपदा' माना था। इसके बाद जल संसाधन विभाग ने नदियों, ड्रेनों और अन्य जलमार्गों की जलप्रवाह क्षमता को बहाल करने और बनाए रखने के लिए निवारक तथा सुधारात्मक कार्य शुरू किए। साथ ही बाढ़ प्रबंधन से जुड़े ढांचों को मजबूत करने के काम भी किए गए। रा ज्य ने कहा कि ये कार्य उसकी वैधानिक जिम्मेदारियों का हिस्सा हैं और पंजाब कैनाल एंड ड्रेनेज एक्ट, 2023 की धारा 38 के तहत भी ऐसे कार्य किए जाते हैं। एनजीटी के अंतरिम निर्देश के बाद एसओपी पंजाब ने एनजीटी के अंतरिम निर्देश का भी उल्लेख किया, जिसमें सरकारी एजेंसियों या अन्य माध्यमों से मेंटेनेंस, अपकीप और डिजास्टर मैनेजमेंट के लिए डी-सिल्टिंग की अनुमति दी गई है। इसकी शर्त यह है कि इसका इस्तेमाल व्यावसायिक रेत खनन के लिए नहीं होना चाहिए। इसी निर्देश के बाद जल संसाधन विभाग ने 15 जून 2026 को आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत महत्वपूर्ण स्थानों पर नदी की जलप्रवाह क्षमता बहाल करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की। इसमें महत्वपूर्ण स्थलों की पहचान, काम शुरू करने से पहले तकनीकी आकलन और राज्य तकनीकी मूल्यांकन समिति से स्वीकृत विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) के आधार पर काम कराने का प्रावधान किया गया। डी-सिल्टिंग की आड़ में नहीं होने देंगे अवैध खनन विभाग के मुख्य अभियंता/ड्रेनेज-कम-माइनिंग ने 99 डी-सिल्टिंग साइटों की पहचान कर उनकी जिला स्तर की सूची 16 जून को उपायुक्तों को भेजी। इन स्थानों पर आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत जमीन मालिकों या एसओपी के अनुसार काम कराने की व्यवस्था की गई। इसके बाद 16 जुलाई को विभाग ने 37 और साइटों की सूची भेजी। इसमें वॉल्यूम-शेयर और प्राइस-बिड टेंडर मॉडल वाले स्थान शामिल थे। साथ ही उन साइटों को भी सूची में रखा गया, जिन्हें पहले जमीन मालिकों को आवंटित किया गया था, लेकिन विरोध या अन्य कारणों से वहां काम रुक गया था। उपायुक्तों को महत्वपूर्ण नदी स्थलों पर जरूरत का आकलन करने और जमीन मालिकों अथवा एसओपी के तहत डी-सिल्टिंग का काम कराने के निर्देश दिए गए। राज्य सरकार ने एनजीटी को स्पष्ट किया कि बाढ़ प्रबंधन और आपदा से बचाव के लिए ऐसे कार्यों को व्यावसायिक खनन के बराबर नहीं रखा जा सकता, लेकिन डी-सिल्टिंग की आड़ में होने वाले वास्तविक व्यावसायिक खनन की अनुमति भी नहीं दी जाएगी।  

AAP में टिकट की रेस तेज! बठिंडा में 7 दावेदारों ने बढ़ाया जनसंपर्क, 2027 चुनाव पर नजर

बठिंडा बठिंडा में आम आदमी पार्टी के मौड़ हलके में विधायक सुखबीर सिंह माइसरखाना के पार्टी से निष्कासन के बाद अब सियासी हलचल तेज हो गई है। MLA की जगह संगठन में खाली हुई राजनीतिक स्पेस को भरने के लिए पार्टी के भीतर कई चेहरे सक्रिय हो गए हैं।  इसके साथ ही 2027 के विधानसभा चुनाव की टिकट के लिए भी अभी से जमीन तैयार करने की कवायद शुरू हो गई है। मौड़ में फिलहाल करीब सात नेताओं के नाम राजनीतिक गलियारों में चर्चा में हैं। खास बात यह है कि इन नेताओं ने केवल पार्टी संगठन तक अपनी गतिविधियां सीमित नहीं रखी हैं, बल्कि वर्करों से व्यक्तिगत संपर्क, गांवों में बैठकें और डोर-टू-डोर संपर्क भी बढ़ा दिया है। यानी मुकाबला सिर्फ हलका इंचार्ज बनने का नहीं, बल्कि 2027 में पार्टी का चेहरा बनने की तैयारी का भी दिखाई दे रहा है। मौड़ में AAP की कमान पाने की दौड़…     किसी की नजर दिल्ली पर, कोई मान से करीबियां बढ़ा रहा: मौड़ में दावेदारों के बीच असली मुकाबला स्थानीय संगठन के साथ-साथ ऊपर तक पहुंच बनाने का भी है। पार्टी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, कुछ नेता दिल्ली में बैठे पार्टी नेताओं से संपर्क साध रहे हैं, जबकि कुछ की कोशिश मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ अपने राजनीतिक संबंध मजबूत करने की है। ऐसे में आने वाले दिनों में हलका इंचार्ज की नियुक्ति पार्टी के भीतर शक्ति संतुलन का संकेत भी दे सकती है।     राजनीतिक जगह को लेकर अंदरखाने मुकाबला शुरू: मौड़ में अभी तस्वीर साफ नहीं है, लेकिन सात चेहरों की बढ़ती सक्रियता ने साफ कर दिया है कि माइसरखाना के बाद खाली हुई राजनीतिक जगह को लेकर अंदरखाने मुकाबला शुरू हो चुका है। हलका इंचार्ज का फैसला पार्टी के लिए महज संगठनात्मक नियुक्ति नहीं होगा।     टिकट की दौड़ के समीकरण भी काफी हद तक प्रभावित: इससे 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए मौड़ में पार्टी के संभावित चेहरे और टिकट की दौड़ के समीकरण भी काफी हद तक प्रभावित हो सकते हैं। अब नजर पार्टी हाईकमान के फैसले पर है कि वह पुराने संगठनात्मक चेहरे पर भरोसा जताता है, सरकार के करीब माने जाने वाले चेहरे को आगे करता है या स्थानीय स्तर पर मजबूत पकड़ रखने वाले नेता को जिम्मेदारी सौंपता है।     जीदा के पास संगठन और सरकार दोनों का अनुभव: दावेदारों में एडवोकेट नवदीप सिंह जीदा का नाम सबसे प्रमुखता से चर्चा में है। वह बठिंडा लोकसभा हलके के इंचार्ज हैं और पंजाब शुगरफेड के चेयरमैन भी हैं। पार्टी के पुराने कार्यकर्ता होने के कारण संगठन में उनकी पहचान नई नहीं है। संगठनात्मक जिम्मेदारी और सरकार से जुड़े पद पर रहने का अनुभव उनकी दावेदारी का मजबूत पक्ष माना जा रहा है।     डॉ. राजू ढड्डे: शुरुआत से AAP के साथ: डॉ. राजू ढड्डे भी मौड़ की राजनीति में मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। वह आम आदमी पार्टी के शुरुआती दौर से जुड़े हुए हैं। मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ उनके करीबी संबंधों की भी पार्टी हलके में चर्चा रहती है। ऐसे में उनकी दावेदारी का आधार पुराना संगठनात्मक जुड़ाव और शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच दोनों को माना जा रहा है।     महिला विंग की नेता ने भी बढ़ाई सक्रियता: महिला विंग की पंजाब वाइस प्रधान रूपिंदर कौर गिल भी इस दौड़ में सक्रिय हैं। लंबे समय से पार्टी के साथ जुड़ी होने के कारण संगठन में उनका अपना आधार है। महिला कार्यकर्ताओं और महिला वोटरों के बीच सक्रियता को देखते हुए वह भी हलका इंचार्ज की दौड़ में महत्वपूर्ण चेहरा बनकर उभर रही हैं।     सिपी भाकर ने बदली राजनीतिक पारी: सिपी भाकर की राजनीतिक पृष्ठभूमि अलग है। वह पहले कांग्रेस में रह चुके हैं और लोकसभा चुनाव 2024 से पहले आम आदमी पार्टी में शामिल हुए थे। AAP में आने के बाद अब उन्होंने मौड़ में अपनी राजनीतिक गतिविधियां तेज कर दी हैं। वर्करों से संपर्क और क्षेत्र में सक्रियता बढ़ाकर वह भी अपनी जगह बनाने में जुटे हैं।     बूटा सिंह संदोहा के पास ग्रामीण संगठन का आधार: बूटा सिंह संदोहा लंबे समय से पार्टी के साथ जुड़े हुए हैं। वह जिला परिषद के सदस्य हैं और नशे के खिलाफ काम करने वाली टीम से भी जुड़े रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में उनकी सक्रियता और लंबे समय से पार्टी संगठन में रहने का अनुभव उनकी दावेदारी का आधार है।     हिम्मत सिंह के साथ परिवार की भी राजनीतिक मौजूदगी: मौड़ हलके के कोऑर्डिनेटर हिम्मत सिंह कुत्तीवाल भी मैदान में हैं। उनकी पत्नी रानी कौर जिला परिषद सदस्य हैं। यानी हलके में राजनीतिक सक्रियता के साथ परिवार की भी स्थानीय स्तर पर मौजूदगी है। यही वजह है कि उनका नाम भी संभावित दावेदारों में लिया जा रहा है।     माइसरखाना से रंजीत सिंह मठाड़ू की दावेदारी: रंजीत सिंह मठाड़ू गांव माइसरखाना के रहने वाले हैं। उनकी पत्नी मौजूदा सरपंच हैं। माइसरखाना क्षेत्र से स्थानीय पकड़ और पंचायत स्तर पर राजनीतिक संपर्कों के चलते उन्होंने भी अपनी सक्रियता बढ़ाई है।

पंजाब में किसानों का बड़ा प्रदर्शन, बठिंडा-मानसा में प्रशासनिक दफ्तरों पर लगाया ताला

 बठिंडा  पंजाब के विभिन्न जिलों में मांगों को लेकर किसानों की ओर से जिला प्रबंधकीय परिसर के सभी गेटों का बंद कर धरना-प्रदर्शन किया जा रहा है।किसान सोमवार से यहां धरना-प्रदर्शन करने में जुटे हैं। इस दौरान किसी भी कर्मचारी को अंदर जाने नहीं दिया गया। इस कारण जिला प्रबंधकिय परिसर में बने सभी सरकारी दफ्तरों में काम बंद पड़ा है। मानसा में भी दिखा असर वहीं, मानसा में भी किसान जिला प्रबंधकीय परिसर के गेट पर लगा रहे हैं। इस बीच किसान संगठन उगराहा की ओर से मंगलवार सुबह प्रबंधन के परिसर को जाने वाले दोनों गेट को बंद करते धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया गया। प्रशासन की ओर से किसानों के प्रदर्शन को देखते धरना स्थल के आसपास पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। इस दौरान किसी भी अधिकारी और कर्मचारियों को प्रबंधन के परिसर के अंदर और बाहर जाने की अनुमति नहीं है। नतीजन डीसी, एसएसपी समेत अन्य विभागों के अधिकारी अपने दफ्तर तक नहीं पहुंच पाए हैं। बेशक सोमवार को जिले में मुख्यमंत्री की लोक मिलनी को लेकर पूरा प्रशासन गांव फत्ता मालोका में व्यस्त होने के कारण बड़े अधिकारी दफ्तर तक नहीं पहुंच पाए, लेकिन किसानों ने मंगलवार सुबह ही प्रबंधकीय कॉम्प्लेक्स के बाहरी गेट से आगे बढ़ते परिसर के अंदर जाने वाले दोनों दरवाजों को बंद करते सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की गई। किसान नेता राम सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री गांव की चौपाल में लोगों की समस्या हल करने के दावे कर रहे हैं, लेकिन किसानी मांगों को लेकर पिछले महीने डीसी दफ्तरों के आगे दिन रात का धरना देने के बाद भी सरकार उनकी मांगे मानने को मंजूर नहीं है। किसान नेता ने कहा कि संगठन की प्रदेश कमेटी नेताओं कि फैसले अनुसार प्रबंधकीय कांप्लेक्स का। घेराव जारी रहेगा। प्रदर्शन में ही लंगर का प्रबंध प्रबंधकीय कांप्लेक्स में धरने पर बैठे किसानों के लिए लंगर की व्यवस्था भी की गई है ताकि किसान लंगर खाने के लिए इधर-उधर में जा सके।  

बंदी सिंहों की रिहाई के मुद्दे पर CM भगवंत मान सख्त, कहा- न्याय दिलाने के लिए करेंगे कानूनी कार्रवाई

 चंडीगढ़  बंदी सिंहों की रिहाई के मुद्दे को लेकर गठित चार सदस्यीय कमेटी ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से मुलाकात की। कमेटी में गुरदीप सिंह बठिंडा, एडवोकेट जसपाल सिंह मंझपुर, पाल सिंह फ्रांस और बलविंदर पाल सिंह शामिल हैं। मुलाकात के दौरान कमेटी के सदस्यों ने बंदी सिंहों की रिहाई से जुड़े मुद्दे पर मुख्यमंत्री के समक्ष अपने विचार और मांगें रखीं। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि उन्होंने कमेटी के सदस्यों की बात और उनकी अपील को गंभीरता से सुना है। उन्होंने कमेटी को भरोसा दिलाया कि पंजाब सरकार बंदी सिखों की रिहाई के मामले का जल्द से जल्द उचित और कानूनी समाधान निकालने के लिए प्रतिबद्ध है। 'जो काम पिछली सरकारों ने नहीं किया, हम करेंगे' बंदी सिंहों की रिहाई पर CM भगवंत मान ने दिलाया न्याय का भरोसा मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बंदी सिंहों की रिहाई के मुद्दे पर गठित चार सदस्यीय कमेटी से मुलाकात की। उन्होंने कमेटीपंजाब सरकार कानूनी समाधान हेतु प्रतिबद्ध, जल्द कार्रवाई का भरोसादी सिंहों की रिहाई के मुद्दे को लेकर गठित चार सदस्यीय कमेटी ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से मुलाकात की। कमेटी में गुरदीप सिंह बठिंडा, एडवोकेट जसपाल सिंह मंझपुर, पाल सिंह फ्रांस और बलविंदर पाल सिंह शामिल हैं। मुलाकात के दौरान कमेटी के सदस्यों ने बंदी सिंहों की रिहाई से जुड़े मुद्दे पर मुख्यमंत्री के समक्ष अपने विचार और मांगें रखीं।  मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि उन्होंने कमेटी के सदस्यों की बात और उनकी अपील को गंभीरता से सुना है। उन्होंने कमेटी को भरोसा दिलाया कि पंजाब सरकार बंदी सिखों की रिहाई के मामले का जल्द से जल्द उचित और कानूनी समाधान निकालने के लिए प्रतिबद्ध है।मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन जायज और कानूनी कदमों को पिछली सरकारों की ओर से कई वर्षों से नहीं उठाया गया, उन्हें उनकी सरकार प्राथमिकता के आधार पर उठाएगी। सरकार का प्रयास रहेगा कि इस मामले को आगे बढ़ाकर जल्द समाधान तक पहुंचाया जा सके।मान ने कहा कि पंजाब सरकार हमेशा न्याय के साथ खड़ी रही है और बंदी सिखों के मामले में भी सरकार कानून के दायरे में रहते हुए जरूरी कदम उठाएगी।  उन्होंने कहा कि इस मामले से जुड़े सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।मुख्यमंत्री ने इस मुलाकात की जानकारी इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म के माध्यम से भी साझा की। उन्होंने कहा कि सरकार इस मुद्दे को लेकर संवेदनशील है और कमेटी के साथ हुई बातचीत को आगे की कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कमेटी की ओर से बंदी सिखों की रिहाई के लिए लंबे समय से प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री के साथ हुई इस बैठक को इस मुद्दे पर आगे की प्रक्रिया के लिहाज से अहम माना जा रहा है। जो पुरानी सरकार ने नहीं किया वो हम करेंगे मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन जायज और कानूनी कदमों को पिछली सरकारों की ओर से कई वर्षों से नहीं उठाया गया, उन्हें उनकी सरकार प्राथमिकता के आधार पर उठाएगी। सरकार का प्रयास रहेगा कि इस मामले को आगे बढ़ाकर जल्द समाधान तक पहुंचाया जा सके। दिलाया न्याय का भरोसा मान ने कहा कि पंजाब सरकार हमेशा न्याय के साथ खड़ी रही है और बंदी सिखों के मामले में भी सरकार कानून के दायरे में रहते हुए जरूरी कदम उठाएगी। उन्होंने कहा कि इस मामले से जुड़े सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। इस बैठक को माना जा रहा अहम मुख्यमंत्री ने इस मुलाकात की जानकारी इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म के माध्यम से भी साझा की। उन्होंने कहा कि सरकार इस मुद्दे को लेकर संवेदनशील है और कमेटी के साथ हुई बातचीत को आगे की कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कमेटी की ओर से बंदी सिखों की रिहाई के लिए लंबे समय से प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री के साथ हुई इस बैठक को इस मुद्दे पर आगे की प्रक्रिया के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

ASI पर गोलीबारी के बाद TTH की धमकी, कहा- ‘वर्दी हो या सिविल ड्रेस, सभी को पहचानते हैं’

अमृतसर अमृतसर में ASI सुखचैन पर हुई फायरिंग की जिम्मेदारी ‘तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान’ (TTH) नाम के संगठन ने ली है। संगठन की ओर से जारी प्रेस नोट में हमले को ‘ऑपरेशन नूर’ के तहत की गई कार्रवाई बताया गया है।साथ ही, भारतीय पुलिसकर्मियों और सरकारी कर्मचारियों को धमकी देते हुए भविष्य में ऐसे और हमले जारी रखने का दावा किया गया है।  प्रेस नोट में दावा किया गया कि पुलिसकर्मी अगर वर्दी के बजाय सादे कपड़ों में भी घूमते हैं, तो उन्हें पहचाना जा सकता है। संगठन ने दावा किया है कि उसे पुलिसकर्मियों के बारे में जानकारी है, चाहे वे वर्दी में हों या सिविल कपड़ों में। हालांकि अमृतसर रूरल SSP कंवलप्रीत सिंह चहल ने कल(5 अक्टूबर को) कहा था कि यह टारगेट किलिंग की कोशिश नहीं थी। उन्होंने कहा कि ASI के बयान दर्ज कर लिए गए हैं। उसने आरोप लगाया है कि उसे शक है कि यह हमला उसकी भाभी ने करवाया है। अब विस्तार से पढ़िए पूरा मामला ड्यूटी से लौटते समय हमला हुआ: अमृतसर रूरल SSP कंवलप्रीत सिंह चहल के अनुसार, 4 अक्टूबर की शाम करीब 7 बजे GRP में तैनात ASI सुखचैन सिंह ड्यूटी खत्म करने के बाद अपने घर जगदेव कलां जा रहे थे। रास्ते में कुछ अज्ञात लोगों ने उन पर फायरिंग की। एक गोली उनकी बाजू में लगी। उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत खतरे से बाहर है। भाभी से विवाद, भाई की हत्या की: SSP के मुताबिक, ASI सुखचैन सिंह के बयान के आधार पर सामने आया है कि उनका अपनी भाभी गुरप्रीत कौर के साथ विवाद चल रहा था। वह भिखीविंड की रहने वाली है। बताया गया कि 2019 में ASI के भाई हीरा सिंह की हत्या हुई थी। यह हत्या भाभी ने अपने दोस्त सतनाम सिंह उर्फ सत्ता के साथ मिलकर की थी। आरोपी भाभी को फेसबुक पर मिला था: ASI ने अपने बयान में कहा कि सत्ता हरियाणा का रहने वाला है। आरोपी भाभी को वह फेसबुक पर मिला था। उसके साथ मिलकर भाई को जहरीली चीज देकर मार दिया था। इसका केस सेशन कोर्ट में अंतिम चरण में चल रहा है। पुलिस CCTV खंगाल रही: SSP के अनुसार, ASI के बयान के मुताबिक 3 लोग मोटरसाइकिल पर आए थे। जगदेव कलां के पुल पार करने के बाद उन्होंने ASI पर एक राउंड फायर किया। घटना के बाद पुलिस की तकनीकी और फोरेंसिक टीमें मौके पर पहुंचीं। पुलिस CCTV फुटेज खंगाल रही है। अज्ञात हमलावरों के खिलाफ केस दर्ज : इस मामले में थाना अजनाला में FIR दर्ज की गई है। डीएसपी धर्मिंदर कल्याण ने बताया कि अज्ञात हमलावरों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। पुलिस आरोपियों की पहचान करने और उन्हें गिरफ्तार करने के लिए जांच कर रही है।

Punjab DA Case: मुलाजिमों के महंगाई भत्ते पर हाईकोर्ट में फिर सुनवाई, सरकार से कहा- ‘बहुत हो चुका’

चंडीगढ़  पंजाब के सरकारी मुलाजिमों और पेंशनरों के बकाया DA मामले में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट आज (6 अक्टूबर) फिर सुनवाई करेगा। पंजाब के चीफ सेक्रेटरी केएपी सिन्हा आज भी व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में हाजिर होंगे। उन्हें कोर्ट ने समन किया है। सोमवार (5 अक्टूबर) को हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि सरकार सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करने के मामले में तथ्यों को गलत तरीके से पेश कर रही है। कोर्ट ने कहा- सुप्रीम कोर्ट जाना आपका अधिकार है, लेकिन ट्वीट कर फैसले को चुनौती देंगे तो हम इसकी तारीफ नहीं करेंगे। सरकार खुद के लिए कड़ी कार्रवाई की स्थिति पैदा कर रही है। अब बहुत हो चुका, अब और लुका-छिपी नहीं चल सकती। बता दें कि 3 अगस्त 2026 को हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को कर्मचारियों और पेंशनरों को IAS, IPS और IFS अधिकारियों के बराबर लंबित DA/DR देने को कहा था। कोर्ट ने यहां तक कहा था कि बकाया देने तक सरकार बड़े स्तर पर एडवरटाइजमेंट जैसे खर्च भी बंद करे। पहले जानिए कि मुख्य विवाद क्या है? पंजाब के मुलाजिम और पेंशनर्स मांग कर रहे हैं कि उन्हें छठे पंजाब पे कमीशन के अनुसार DA केंद्र सरकार के पैटर्न पर मिलना चाहिए। उनका कहना है कि राज्य का टैक्स राजस्व बढ़ा है, इसलिए सरकार को ₹14,200 करोड़ का बकाया एरियर तुरंत ब्याज समेत देना चाहिए। इस पर पंजाब सरकार का तर्क है कि 2021 के पे-रूल्स में कोई निश्चित केंद्रीय दर अनिवार्य नहीं है। इतनी बड़ी रकम अचानक जारी करने से राज्य का वित्तीय ढांचा प्रभावित होगा और वह पहले से ही कर्मचारियों को कई केंद्रीय श्रेणियों से ज्यादा वेतन दे रही है। अब विवाद की पूरी टाइमलाइन पढ़िए     8 अप्रैल 2026 (सिंगल बेंच का फैसला): हाई कोर्ट के सिंगल जज की बेंच ने पंजाब सरकार को आदेश दिया कि वह अपने कर्मचारियों और पेंशनर्स को केंद्रीय पैटर्न के अनुसार उसी दर पर DA/DR जारी करे, जिस दर पर पंजाब में तैनात IAS, IPS अधिकारियों को दिया जाता है। कोर्ट ने इसके लिए 30 जून 2026 तक की डेडलाइन तय की थी।     3 अगस्त 2026 (हाई कोर्ट की डबल बेंच का सख्त आदेश): पंजाब सरकार ने सिंगल बेंच के फैसले के खिलाफ अपील दायर की। हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली डिवीजन बेंच ने सरकार की अपील खारिज कर दी और आदेश दिया कि 15 दिनों के भीतर सभी लंबित किस्तों का भुगतान किया जाए। कोर्ट ने यह भी शर्त रखी कि देरी होने पर 6% सालाना साधारण ब्याज देना होगा और जब तक भुगतान नहीं होता, सरकार प्रिंट या सोशल मीडिया पर विज्ञापनों जैसे गैर-जरूरी खर्चों पर रोक लगाए।     17 अगस्त 2026 (हाई कोर्ट की डेडलाइन खत्म): हाई कोर्ट की ओर से दी गई 15 दिनों की डेडलाइन समाप्त हो गई, लेकिन सरकार ने भुगतान नहीं किया। इसके विरोध में पंजाब स्टेट मिनिस्टीरियल सर्विसेज यूनियन और अन्य संगठनों ने हड़ताल की चेतावनी दी।     27 अगस्त 2026 (कर्मचारियों की महा-हड़ताल और सरकार का एक्शन): लंबित DA, एरियर और पुरानी पेंशन योजना (OPS) को लेकर कर्मचारियों ने राज्यव्यापी सामूहिक हड़ताल की। जवाब में भगवंत मान सरकार ने नो वर्क, नो पे (काम नहीं तो वेतन नहीं) का नियम लागू कर कर्मचारियों को कारण बताओ (शो-कॉज) नोटिस जारी कर दिए।     1 सितंबर 2026 (सरकार पहुंची सुप्रीम कोर्ट): पंजाब सरकार ने हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दाखिल की। सरकार ने तर्क दिया कि इतनी बड़ी रकम का एक साथ भुगतान करना वित्तीय और संवैधानिक रूप से संभव नहीं है।     8 से 9 सितंबर 2026 (पेन-डाउन स्ट्राइक और सरकार का झुकना): शो-कॉज नोटिस के विरोध में कर्मचारियों ने आंदोलन तेज करते हुए पेन-डाउन स्ट्राइक शुरू कर दी और सामूहिक छुट्टी पर चले गए। चौतरफा दबाव के बाद, 9 सितंबर को सरकार ने सभी कर्मचारियों के खिलाफ जारी किए गए कारण बताओ नोटिस वापस ले लिए, जिसके बाद कर्मचारियों ने अपनी हड़ताल स्थगित की।     11 सितंबर 2026 (हाई कोर्ट का अल्टीमेटम): सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने पंजाब सरकार की याचिका (SLP) में 9 तकनीकी आपत्तियां निकाली थीं। हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार को इन आपत्तियों को दूर करने और सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू करवाने के लिए 10 दिन का समय दिया।     18 से 27 सितंबर 2026 (8% डीए बढ़ोतरी का ऐलान): मुख्यमंत्री भगवंत मान और कर्मचारी यूनियनों के बीच एक अहम बैठक हुई। गतिरोध को कम करने के लिए सरकार ने अंतरिम राहत के रूप में 8% डीए बढ़ोतरी का नोटिफिकेशन जारी किया। इससे राज्य में DA 42% से बढ़कर 50% हो गया। हालांकि, पुराने बकाए का मुद्दा अभी भी जस का तस बना रहा।     5 अक्टूबर 2026 (मुख्य सचिव की पेशी और हाई कोर्ट की फटकार): मामले की सुनवाई के दौरान पंजाब के मुख्य सचिव केएपी सिन्हा हाई कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश हुए। सरकार ने हलफनामा देकर कहा कि मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। इस पर हाई कोर्ट ने सख्त नाराजगी जताते हुए कहा कि सरकार सुप्रीम कोर्ट की अपील के स्टेटस को लेकर तथ्यों को गलत तरीके से पेश कर रही है और कोर्ट को गुमराह कर रही है। कोर्ट ने नोट किया कि 1 सितंबर को याचिका दायर होने के बावजूद तकनीकी आपत्तियां अभी तक दूर नहीं की गई हैं। ऐसा लग रहा है कि सरकार सिर्फ समय बिताने की कोशिश कर रही है। हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री से खुद स्टेटस रिपोर्ट मांगी है।

अजरबैजान में भारत का परचम लहराएंगी जूडो स्टार इशरूप, विश्व चैंपियनशिप में करेंगी चुनौती पेश

चंडीगढ़. चंडीगढ़ की युवा जूडो खिलाड़ी इशरूप नारंग सीनियर विश्व जूडो चैंपियनशिप 2026 में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। अजरबैजान के बाकू में 7 और 8 अक्टूबर को होने वाली इस प्रतियोगिता में 20 वर्षीय इशरूप दुनिया की शीर्ष जूडो खिलाड़ियों के बीच अपना दमखम दिखाएंगी। इशरूप ने सीनियर विश्व रैंकिंग में टॉप-100 में जगह बनाकर अंतरराष्ट्रीय जूडो महासंघ (आईजेएफ) की विश्व चैंपियनशिप में भागीदारी के लिए निर्धारित योग्यता हासिल की है। वह एमसीएम डीएवी कॉलेज की छात्रा हैं और अमेच्योर जूडो एसोसिएशन ऑफ चंडीगढ़ (एजेएसी) का प्रतिनिधित्व करती हैं। अहमद युसिफोव के खिलाफ हर्ष सिंह का शानदार सफर समाप्त हुआ भारत के हर्ष सिंह ने अजरबैजान के बाकू में आयोजित जूडो विश्व चैंपियनशिप में अपने अभियान के सबसे बेहतरीन प्रदर्शनों में से एक दिया, जहां उन्होंने दो उच्च रैंक वाले प्रतिद्वंद्वियों को हराकर पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में राउंड ऑफ 16 में जगह बनाई। विश्व रैंकिंग में 83वें स्थान पर काबिज हर्ष ने अपने अभियान की शुरुआत ऑस्ट्रेलिया के 40वें रैंक वाले पेड्रो कार्लोस एंटुन नेटो को पहले ही दौर में हराकर की। इसके बाद उन्होंने बहरीन के 20वें रैंक वाले रुस्लान पोल्टोरात्स्की पर एक और शानदार जीत हासिल कर राउंड ऑफ 16 में जगह बनाई। आखिरकार उनका सफर अजरबैजान के घरेलू खिलाड़ी और विश्व नंबर 5 अहमद युसिफोव के खिलाफ समाप्त हो गया। फिर भी, यह परिणाम भारतीय जूडोका के लिए एक महत्वपूर्ण प्रदर्शन साबित हुआ, जो रैंकिंग में शीर्ष समूह से काफी बाहर रहते हुए विश्व चैंपियनशिप में शामिल हुए थे, लेकिन उन्होंने बार-बार अपने से काफी ऊपर स्थान पर मौजूद प्रतिद्वंद्वियों को परास्त किया। पहले दौर के मुकाबले में हर्ष को अपने से कहीं अधिक उच्च रैंकिंग वाले प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ बढ़त हासिल करने का मौका मिला। विश्व रैंकिंग में 40वें स्थान पर काबिज एंटुन नेटो का सामना करते हुए, भारतीय खिलाड़ी ने वाजा-अरी से जीत हासिल कर 32वें दौर में प्रवेश किया। रैंकिंग में 43 स्थानों का अंतर इस परिणाम को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बनाता है। हर्ष बाकू में 83वीं रैंकिंग के साथ पहुंचे थे, जबकि ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी ने टूर्नामेंट में 40वें स्थान के जूडोका के रूप में प्रवेश किया था। पहले दौर में सिर्फ टिके रहने के बजाय, हर्ष ने स्कोरिंग एक्शन के जरिए जीत हासिल की, जिससे उन्हें अगले दौर में पहुंचने के लिए जरूरी बढ़त मिल गई। इसने -60 किलोग्राम वर्ग के मुश्किल दौर की नींव भी रख दी। दूसरे उलटफेर ने हर्ष को प्री-क्वार्टरफाइनल में पहुँचा दिया अगली चुनौती कागज़ पर और भी कठिन लग रही थी। हर्ष का सामना बहरीन के रुस्लान पोल्टोरात्स्की से था, जो विश्व रैंकिंग में 20वें स्थान पर थे। दोनों जूडो खिलाड़ियों के बीच 63 स्थानों का अंतर रैंकिंग में एक और बड़ा उलटफेर था। एक बार फिर, हर्ष ने वज़ा-अरी से जीत हासिल की। ​​इस जीत ने उन्हें प्री-क्वार्टर फाइनल में पहुँचा दिया और इसका मतलब यह था कि भारतीय खिलाड़ी ने लगातार दो राउंड में अपने से काफी ऊँची रैंकिंग वाले दो प्रतिद्वंद्वियों को हराया था। हर्ष के लिए, विश्व रैंकिंग में 83वें स्थान से राउंड ऑफ़ 16 तक पहुँचना विश्व चैंपियनशिप के मंच पर एक बड़ी उपलब्धि थी। इसने भारत को जूडो की सबसे प्रतिस्पर्धी भार श्रेणियों में से एक में उल्लेखनीय प्रदर्शन करने का अवसर भी दिया। हर्ष की दो जीत का इनाम उन्हें अज़रबैजान के अहमद युसिफोव के साथ राउंड ऑफ़ 16 में मुकाबले के रूप में मिला। युसिफोव एक बिल्कुल अलग स्तर की चुनौती पेश कर रहे थे। उपलब्ध परिणामों में अज़रबैजानी खिलाड़ी को विश्व का नंबर 5 जूडोका बताया गया था और वे घरेलू मैदान के प्रबल दावेदार के रूप में उतरे थे। विश्व के 40वें और 20वें नंबर के खिलाड़ियों को हराने के बाद भी हर्ष लगातार तीसरी बार उलटफेर करने में नाकाम रहे। युसिफोव ने राउंड ऑफ़ 16 में हर्ष को हराकर विश्व चैंपियनशिप में उनके शानदार सफर का अंत कर दिया। इस जीत के साथ हर्ष पुरुषों के -60 किलोग्राम वर्ग में शीर्ष 16 जूडो खिलाड़ियों में शामिल हो गए, जबकि टूर्नामेंट की शुरुआत में उनकी रैंकिंग 83वीं थी। एशियाई खेलों से बाहर होने के बाद एक महत्वपूर्ण अवसर हर्ष का प्रदर्शन इसलिए भी अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्हें भारत की एशियाई खेलों की टीम में नहीं चुना गया था। इस चूक का मतलब था कि विश्व चैंपियनशिप ने भारतीय खिलाड़ी को एक बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया। उन्होंने दो उच्च रैंक वाले प्रतिद्वंद्वियों को हराकर और ड्रॉ में काफी आगे बढ़कर इसका जवाब दिया। एंटुन नेटो और पोल्टोरात्स्की पर उनकी जीत विशेष रूप से उल्लेखनीय थी क्योंकि दोनों जीतें उनसे काफी उच्च रैंक वाले जूडो खिलाड़ियों के खिलाफ थीं। विश्व रैंकिंग में 83वें स्थान से शुरुआत करते हुए, हर्ष ने पहले 40वें स्थान पर रहे ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी को हराया और फिर 20वें स्थान पर रहे बहरीनी खिलाड़ी को मात दी। उनकी इस प्रगति ने रैंकिंग के अंतर को एक संभावित नुकसान से बदलकर उनके अभियान की सबसे महत्वपूर्ण कहानियों में से एक बना दिया। युसिफोव के खिलाफ उनकी अंतिम हार भी उनके सामने आए सबसे उच्च रैंकिंग वाले प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ हुई। हर्ष कॉमनवेल्थ स्तर पर एक स्थापित रिकॉर्ड के साथ बाकू पहुंचे थे, उन्हें उपलब्ध सामग्री में कॉमनवेल्थ गेम्स चैंपियन के रूप में वर्णित किया गया था। हालांकि, विश्व चैंपियनशिप एक बिल्कुल अलग चुनौती थी, जिसमें दुनिया के शीर्ष जूडो खिलाड़ी शामिल थे। हर्ष ने जोरदार जवाब दिया। उच्च रैंक वाले प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ दो वाजा-अरी जीत ने उन्हें पहले दौर से ही अंतिम 16 में पहुंचा दिया। हालांकि वे युसिफोव के खिलाफ अपनी जीत का सिलसिला जारी नहीं रख सके, लेकिन इस अभियान ने रैंकिंग में अपने से कहीं ऊपर के जूडो खिलाड़ियों के खिलाफ प्रतिस्पर्धा करने की उनकी क्षमता को प्रदर्शित किया। सबसे महत्वपूर्ण बात उनके प्रदर्शन में निरंतरता है। पहले उलटफेर को एक अलग घटना मानकर नजरअंदाज किया जा सकता था, लेकिन पोल्टोरात्स्की पर जीत ने इस बात की पुष्टि कर दी कि हर्ष कहीं अधिक उच्च रैंक वाले प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ भी जीत हासिल करने में सक्षम हैं। विश्व के नंबर 5 खिलाड़ी से हार के साथ उनका अभियान समाप्त हो गया, लेकिन इससे पहले हर्ष ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर … Read more

कांग्रेस ने फिर जताया चन्नी पर विश्वास, तीसरी बार कृषि समिति के अध्यक्ष बने

चंडीगढ़. पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और जालंधर से कांग्रेस सांसद चरणजीत सिंह चन्नी पर पार्टी नेतृत्व ने एक बार फिर भरोसा जताया है। संसदीय स्थायी समितियों के पुनर्गठन के बाद चन्नी को लगातार तीसरी बार कृषि, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी और मत्स्य पालन संबंधी स्थायी समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। जताया पार्टी प्रमुखों का आभार चन्नी ने इसके लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी का आभार जताया है। चन्नी ने कहा कि वह किसानों की सेवा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए पूरी ईमानदारी, लगन और समर्पण के साथ काम करते रहेंगे। चन्नी सितंबर 2024 से इस समिति के अध्यक्ष हैं। समिति कृषि, पशुपालन और खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े मंत्रालयों की नीतियों, योजनाओं, बजट और कामकाज की समीक्षा करती है। दो साल में दो संसद रत्न सम्मान चन्नी के संसदीय प्रदर्शन को हाल के वर्षों में लगातार पहचान मिली है। वर्ष 2025 में उन्हें व्यक्तिगत संसदीय प्रदर्शन के लिए संसद रत्न सम्मान मिला था। वहीं 2026 में उनके नेतृत्व वाली कृषि संबंधी स्थायी समिति को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए संसद रत्न सम्मान दिया गया।

अजनाला गोलीकांड: घायल ASI से अस्पताल में मिले DGP, भाई की हत्या के भी हैं गवाह

अमृतसर. अजनाला इलाके में बदमाशों की गोली लगने से जख्मी हुए जीआरपी के एएसआई सुखचैन सिंह के साथ डीजीपी (स्पेशल) प्रवीण कुमार सिन्हा ने सोमवार की शाम अस्पताल में मुलाकात की। डीजे पीने आदेश दिया है कि आरोपियों का पता लगाकर जल्द गिरफ्तार किया जाए। सिनोप्सिस-अजनाला के पास गोली लगने से जख्मी एएसआई सुखचैवन सिंह के मामले में पुलिस जांच कर रही है। सीसी कैमरे खंगाले जा रहे हैं। पता चला है कि जीआरपी में तैनात सुखचैन सिंह के भाई की कुछ साल पहले हत्या कर दी गई थी। पता चला है कि सुखचैन भाई की हत्या के मामले में मुख्य गवा है और पैरवी कर रहा है। पुलिस आतंकी एंगिल के साथ साथ इस बिंदू पर भी जांच कर रही है। उल्लेखनीय है कि रविवार की देर रात सुख चैन सिंह को बाइक पर सवार तीन लोगों ने गोली मारकर जख्मी कर दिया था वह ड्यूटी के बाद सादे कपड़ों में बाइक से अपने घर लौट रहे थे।

पटियाला में किसानों और पुलिस में टकराव, मिनी सचिवालय के सभी गेट किए गए बंद

पटियाला. मांगों को लेकर किसानों ने सोमवार को डीसी दफ्तर के बाहर लगातार धरना शुरू कर दिया। धरने के दौरान किसानों ने मिनी सचिवालय के सभी गेट बंद कर दिए। जिसके बाद पुलिस और किसानों के बीच झड़प का मामला सामने आया है। किसानों ने गेट बंद करने और पुलिस की तरफ से उसे खोलने को लेकर धक्का मुक्की हुई। इस दौरान सचिवालय के अंदर आने-जाने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। किसानों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाता, तब तक उनका धरना जारी रहेगा। लोग हो रहे परेशान किसानों द्वारा मिनी सचिवालय के मुख्य गेटों को बंद किए जाने के कारण न तो लोगों को अंदर जाने दिया जा रहा है और न ही अंदर मौजूद लोगों को बाहर आने दिया जा रहा है। इससे विभिन्न सरकारी विभागों में अपने काम करवाने के लिए पहुंचे लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। कई लोग गेटों के बाहर खड़े होकर स्थिति सामान्य होने का इंतजार करते दिखाई दिए।