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गोड्डा में 1363 एकड़ भूमि अधिग्रहण को चुनौती, हाईकोर्ट ने मामले पर लिया संज्ञान

रांची  झारखंड हाई कोर्ट की एकल पीठ ने अडानी पावर लिमिटेड के गोड्डा स्थित थर्मल पावर प्रोजेक्ट के लिए 1363 एकड़ कृषि भूमि अधिग्रहण को चुनौती देने वाली याचिका सुनवाई के लिए स्वीकार कर ली है। याचिका गोड्डा जिले के करीब 16 गांवों के स्थानीय किसानों और आदिवासी समुदाय के सदस्यों की ओर से दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं ने भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पर कई गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं। याचिका में कहा गया है कि परियोजना में उत्पादित पूरी बिजली बांग्लादेश को निर्यात की जानी है। ऐसे में अधिग्रहण को सार्वजनिक उद्देश्य की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। प्रार्थियों का तर्क है कि जब परियोजना का लाभ देश के आम नागरिकों को नहीं मिलना है तो कृषि भूमि का अधिग्रहण उचित नहीं माना जा सकता। संताल परगना टेनेंसी एक्ट का उल्लंघन का आरोप याचिका में आरोप लगाया गया है कि भूमि अधिग्रहण के लिए आवश्यक 80 प्रतिशत भूमि मालिकों की सहमति प्राप्त नहीं की गई। सोशल इम्पैक्ट असेसमेंट (एसआईए) प्रक्रिया में भी लगभग 4,000 प्रभावित लोगों जिनमें किरायेदार, खेतिहर मजदूर और अन्य आश्रित शामिल हैं को शामिल नहीं किया गया।

किशनगंज में पुलिस अफसरों की जोड़ी पर करोड़ों की बेनामी संपत्ति का आरोप

किशनगंज बिहार के किशनगंज में तैनात रहे निलंबित एसडीपीओ गौतम कुमार और लाइन हाजिर किए गए थानेदार अभिषेक कुमार रंजन की जोड़ी पर आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) की कार्रवाई ने भ्रष्टाचार के बड़े नेटवर्क का खुलासा किया है। सूत्रों के अनुसार, दोनों अधिकारियों के बीच तालमेल इतना मजबूत था कि अवैध वसूली से लेकर उसके बंटवारे तक एक संगठित तंत्र के तहत काम किया जाता था। ईओयू की जांच में यह भी सामने आया है कि कई संपत्तियां बेनामी हो सकती हैं और इन्हें छिपाने के लिए तीसरे पक्ष के नाम का इस्तेमाल किया गया। डिजिटल साक्ष्यों और बैंकिंग ट्रांजेक्शन की गहन पड़ताल की जा रही है। जांच में सामने आया है कि दोनों अधिकारियों ने बालू, पशु, लॉटरी, कोयला और तथाकथित ‘एंट्री’ माफिया से साठगांठ कर करोड़ों रुपये की अवैध कमाई की। इन अवैध गतिविधियों के जरिए न केवल नियमित उगाही की जाती थी, बल्कि क्षेत्र में संचालित विभिन्न गैर कानूनी धंधों को संरक्षण भी दिया जाता था। ईओयू के अनुसार दोनों घूसखोर पुलिस अधिकारी के बीच बीते तीन महीने में 2000 बार मोबाइल कॉल पर बातचीत हुई है।आर्थिक अपराध इकाई का कहना है कि यह जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे संभव हैं। बेनामी संपत्तियों का सत्यापन कर रही ईओयू ईओयू को मुजफ्फरपुर के कांटी सहित पश्चिम बंगाल, दिल्ली एनसीआर सहित कई जगहों पर थानाध्यक्ष की नामी-बेनामी संपत्तियां होने की जानकारी मिली है। अलग-अलग टीम के माध्यम से इन संपत्तियों का सत्यापन कराया जा रहा है। सिलीगुड़ी स्थित फ्लैट से लेकर दार्जिलिंग रोड में खरीदी गयी जमीन के भुगतान स्त्रोत आदि को लेकर जांच चल रही है। थानेदार से ईओयू कार्यालय में बुला कर पूछताछ होगी आय से अधिक संपत्ति मामले के आरोपित किशनगंज नगर थानाध्यक्ष अभिषेक कुमार रंजन पर लगे आरोपों को लेकर आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) उनसे पूछताछ करेगी। उनको नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए पटना स्थित ईओयू कार्यालय बुलाया जाएगा। ईओयू सूत्रों के मुताबिक आरोपित थानाध्यक्ष को अगले हफ्ते सोमवार को उपस्थित होने की नोटिस दी जा सकती है। पूछताछ के दौरान उनको अपने पक्ष में बयान व दस्तावेज पेश करने का मौका दिया जाएगा। थानाध्यक्ष पर अपने सेवाकाल में करीब 50 करोड़ रुपये की अवैध संपत्तियां बनाने का आरोप है। अभिषेक निलंबित एसडीपीओ का राजदार किशनगंज के निलंबित एसडीपीओ गौतम कुमार पर दर्ज आय से अधिक संपत्ति मामले की छानबीन के दौरान ही अभिषेक रंजन ईओयू के निशाने पर आये। छानबीन में सामने आया कि अभिषेक निलंबित एसडीपीओ के राजदार हैं। उनका स्थानीय बालू माफिया, एंट्री माफिया, शराब माफिया व तस्करों से गहरे संबंध हैं। उनके व्यापार को प्रश्रय देने के एवज में उनको नियमित रूप से कमीशन की राशि मिलती थी। यह राशि जमीन, मकान सहित अन्य नामी-बेनामी संपत्तियां जमा करने में निवेश की जाती थी।

सुवर्णरेखा नदी किनारे बम मिलने से हड़कंप, सेना से मदद मांगी गई

 सिंहभूम पूर्वी सिंहभूम जिले में बहरागोड़ा में सुवर्णरेख नदी किनारे एक बम मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया। ऐसी आशंका जताई जा रही है कि यह बम वर्ल्ड वॉर-2 के दौरान का हो सकता है। बम की खबर मिलते ही लोगों में भय और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों ने किसी भी अनहोनी से बचने के लिए तुरंत दूरी बना ली। वहीं, सूचना पर पहुंची पुलिस ने इलाके की सुरक्षा बढ़ा दी है। इसी साल मार्च में भारतीय सेना के जवानों ने बहरागोड़ा में दो एक्टिव बमों को निष्क्रिय किया था। इन दो बम को लेकर भी आशंका थी कि यह वर्ल्ड वॉर-2 के दौरान के हो सकते हैं। बम डिटेक्शन और डिस्पोजल स्क्वॉड की टीम ने छानबीन में पाया था कि दोनों बम एक्टिव थे और वजन में काफी भारी थे। 50-100 मीटर की दूरी पर ही फिर मिला एसपी (ग्रामीण) ऋषभ गर्ग ने कहा ने कहा ‘बम को पानीपाड़ा गांव के निवासियों ने बुधवार की रात को बम को देखा था। यह हम सुवर्णरेख नदी किनारे पर पड़ा था। बम उस जगह से लगभग 50-100 मीटर की दूरी पर है जहां पहले दो बम मिले थे। हम निरीक्षण करने और जरूरी कार्रवाई शुरू करने के लिए भारतीय सेना के साथ बातचीत कर रहे हैं।’ इलाके की सुरक्षा बढ़ा दी गई बहरागोड़ा पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी शंकर प्रसाद कुशवाहा ने बताया कि बम जैसी दिखने वाली धातु से बनी ठोस वस्तु का आकार और वजन मार्च में बरामद किए गए दो बमों के के जैसा ही है। एहितयात के तौर पर इलाके की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। 25 मार्च को किया था डिफ्यूज पानीपड़ा-नागसुड़ाई में स्वर्णरेखा नदी के किनारे मिले विशाल सिलेंडरनुमा मिसाइल बम को भारतीय सेना ने आस-पास के इलाके को खाली करवाकर डिफ्यूज कर दिया था। बम का वजन करीब 200 किलोग्राम था। ये बम मजदूर को रेत की खुदाई के दौरान मिला था। 30 मिनट के अंतराल में डिफ्यूज इसके बाद, जब मौके की जांच की गई तो पास के ही एक ग्रामीण के घर में भी उसी आकार का दूसरा बम बरामद हुआ। दोनों बमों को डिफ्यूज कम करने के लिए इन विस्फोटकों को घटना स्थल के पास ही खोदे गए 25-30 फीट गहरे गड्ढे में रखा गया और चारों तरफ से रेत की बोरियों से ढक दिया गया ताकि किसी भी तरह के नुकसान को रोका जा सके। दोनों बमों को एक के बाद एक 30 मिनट के अंतराल में डिफ्यूज कर दिया गया था। साथ ही एहतियात के तौर पर लोगों को अगले 24 घंटों तक उस स्थान के आसपास न जाने की सलाह दी गई थी।  

मंगल पांडेय की खाली सीट पर फिर होगा MLC उपचुनाव

 पटना बिहार विधान परिषद की एक और सीट पर उपचुनाव की घोषणा हो गई है। विधानसभा कोटे की एक सीट के लिए 12 मई को मतदान होगा। यह सीट पूर्व मंत्री मंगल पांडेय के विधायक निर्वाचित होने के कारण खाली हुई थी। यह सीट 16 नवंबर 2025 से खाली है। मंगल पांडेय का कार्यकाल 6 मई 2030 तक था। अब इस पर उपचुनाव कराया जाएगा। उपचुनाव में जो जीतकर इस सीट से जो एमएलसी बनेंगे, वह 4 साल तक इस पद पर रहेंगे भारत निर्वाचन आयोग ने गुरुवार को इस सीट पर उपचुनाव की घोषणा की। आयोग के अनुसार विधान परिषद की इस सीट पर उपचुनाव के लिए 23 अप्रैल को अधिसूचना जारी की जाएगी। उसी दिन नामांकन की प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी। नॉमिनेशन की आखिरी तारीख 30 अप्रैल है। इसके बाद 2 अप्रैल को नामांकन पत्रों की स्क्रूटनी की जाएगी। 4 मई तक नामांकन वापसी हो सकेगी। इसके बाद 12 मई को सुबह 9 से शाम 4 बजे तक मतदान होगा। उसी दिन शाम 5 बजे से मतगणना की जाएगी और रिजल्ट जारी कर दिया जाएगा। नडीए के खाते में जाएगी यह सीट? इस उपचुनाव में सत्ताधारी गठबंधन एनडीए की जीत लगभग तय मानी जा रही है। बिहार विधानसभा में एनडीए का संख्याबल भारी है। विधानसभा कोटे की एक ही सीट पर मतदान होने इसका फायदा सत्ताधारी गठबंधन को मिलेगा। यह सीट पहले भाजपा के पास थी, तो माना जा रहा है कि इस बार भी इसी पार्टी से किसी को उम्मीदवार बनाया जा सकता है। हालांकि, भाजपा अपने सहयोगी दलों में से भी किसी को प्रत्याशी बनवा सकती है। नामांकन के दौरान उम्मीदवारी पर स्थिति साफ हो जाएगी। इस उपचुनाव में विपक्ष की ओर से प्रत्याशी उतारा जाता है या नहीं, यह देखने वाली बात होगी। भोजपुर-बक्सर स्थानीय निकाय सीट पर भी 12 मई को ही वोटिंग बिहार विधान परिषद में स्थानीय निकाय कोटे की भोजपुर-बक्सर सीट पर उपचुनाव के लिए मतदान भी 12 मई को ही होने वाला है। इस उपचुनाव की घोषमा चुनाव आयोग के द्वारा पिछले दिनों की गई थी। जदयू के एमएलसी रहे राधाचरण साह के विधायक निर्वाचित होने के बाद यह सीट खाली हुई थी। उपचुनाव में एनडीए की ओर से राधाचरण के बेटे कन्हैया प्रसाद को प्रत्याशी बनाया गया है। वह जदयू के सिंबल पर ही चुनाव लड़ेंगे। वहीं, महागठबंधन से राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने सोनू राय को टिकट दिया है, जो पूर्व एमएलसी लालदास राय के बेटे हैं।

सम्राट चौधरी सरकार में शराबबंदी नीति पर सवाल, राजस्व नुकसान का मुद्दा उठा

 पटना बिहार में बीजेपी के नेतृत्व में सरकार बन गई है जिसके मुखिया सम्राट चौधरी बनाए गए हैं। इसी के साथ नीतीश कुमार की शराबबंदी कानून बहस तेज हो गई है। एनडीए में शामिल उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा(आरएलएम)के विधायक माधव आनंद ने इस कानून को राज्य के लिए नुकसानदायक बताते हुए समीक्षा करके समाप्त करने की मांग की है। गुरुवार को सीएम सम्राट चौधरी से मिलकर लौटे माधव आनंद मीडिया कर्मियों से बात की और कहा कि उनसे बिहार की जनता को काफी उम्मीदे हैं। वे बिहार नाम वैश्विक स्तर पर ले जाएंगे। बिहार में बीस साल पुराने नीतीश युग का अंत हो गया। इसके साथ ही उनके फैसलों पर चर्चा शुरू हो गई। पूर्ण शराबबंदी नीतीश कुमार का बहुत बड़ा क्रांतिकारी और कदम है। नीतीश कुमार सीएम पद से हटते ही शराबबंदी पर सत्ता पक्ष की ओर से ही सवाल उठने लगे हैं। राष्ट्रीय लोक मोर्चा के मधुबनी विधायक सीएम से मिलने उनके सरकारी आवास पर पहुंचे। बाहर निकले तो काफी प्रसन्न मुद्रा में दिखे। उन्होंने कहा कि सीएम शपथ लेने के साथ ही ऐक्टिव हैं। लोगों से मिल रहे हैं। शराबबंदी के सवाल पर माधव आनंद ने क्रांतिकारी बयान दिया। उन्होंने कहा कि राज्य में शराबबंदी कानून की कोई आवश्यकता नहीं है। इससे राजस्व की हानि हो रही है। उन्होंने कहा कि सदन में ही नीतीश कुमार के सामने शराबबंदी की समीक्षा की मांग की थी। अर्थशास्त्री होने के नाते आज फिर से कह रहा हूं कि बिहार में शराबबंदी की कोई जरूरत नहीं है बल्कि, जागरुकता पैदा करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि शरबबंदी कोई समाधान नहीं हो सकता। बिहार को राजस्व का बहुत नुकसान हो रहा है। बिहार को विकसित बनाने के लिए फंड की आवश्यकता है जिसकी कमी महसूस की जाती है। हमारे राज्य का राजस्व दूसरे राज्यों और देशों में जा रहा है। शराबबंदी नीतीश कुमार की ऐतिहासिक पहल थी। इसके दस साल हो गए। अब इसकी समीक्षा होनी चाहिए। इसकी बिहार जैसे राज्य में कोई जरूरत नहीं है जहां राजस्व की बहुत अधिक जरूरत है। माधव आनंद ने कहा कि जागरुकता और जानकारी बढ़ेगी तो लोग खुद नशे से दूर हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि सम्राट चौधरी के नेतृत्व में नई सरकार बिहार के विकास के लिए तेजी से काम करेगी और प्रदेश काफी तरक्की करेगा। नीतीश कुमार ने जो खाका खींचा उसे वर्तमान सरकार आगे बढ़ाएगी। भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलेरेंस की नीति जारी रहेगी। बिहार अब इतिहास रचेगा। विकसित भारत और विकसित बिहार की परिकल्पना जरूर साकार होगी। हालांकि, सम्राट चौधरी पहले ही शराबंदी कानून को लागू रखने की बात कह चुके हैं। बिहार में 2016 से पूर्ण शराबबंदी कानून लागू है। इस दौरान करोड़ों लीटर शराब जब्त किए गए और लाखों लोगों को जेल भेजा गया। लेकिन, जहरीली शराब से बड़ी संख्या में लोग मारे गए और राज्य में अपराध का एक नया नेटवर्क शराब के अवैध कारोबार की वजह से तैयार हो गया।

FMG इंटर्न को मिलेगा ₹17,500 स्टाइपेंड, राज्य सरकार का बड़ा फैसला

रांची झारखंड मंत्रिमंडल की बैठक में बुधवार को राज्य के चार जिलों धनबाद, जामताड़ा, गिरिडीह और खूंटी के सदर अस्पतालों को पीपीपी मोड में मेडिकल कॉलेज के रूप में उन्नयन की स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। साथ ही विदेशों से मेडिकल ग्रेजुएट की पढ़ाई (फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट) करने वाले छात्रों को राज्य के मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप के दौरान स्टाईपंड की भी मंजूरी दी गयी। अब एफएमजी इंटर्न को 17500 रुपए स्टाईपंड मिलेंगे। स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने इस फैसले के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेजों की कमी के कारण हमारे राज्य में डॉक्टरों की भारी कमी रही है। मैं स्वयं इसका उदाहरण हूं, मुझे अपनी मेडिकल शिक्षा के लिए राज्य से बाहर जाना पड़ा। बाहर के डॉक्टर राज्य में आने से कतराते हैं, ऐसे में स्थानीय स्तर पर डॉक्टर तैयार करना ही स्थायी समाधान है। राज्य में मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ने से स्थानीय युवाओं को मेडिकल शिक्षा का अवसर मिलेगा। डॉक्टरों की कमी दूर होगी तो उच्च स्तरीय इलाज की सुविधा जिले में ही उपलब्ध होगी। स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार के साथ ही स्थानीय रोजगार के नए मौके सृजित होंगे। क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिलेगा। मरीजों को बाहर जाने की जरूरत कम होगी। केंद्र और राज्य के सहयोग से होगा विकास चार जिलों में मेडिकल कॉलेज का राज्य सरकार द्वारा दिए गए प्रस्ताव पर बीते अक्तूबर में केंद्र सरकार ने सहमति दी थी। चारों जिलों में मेडिकल कॉलेजों की स्थापना पीपीपी (सार्वजनिक निजी सहभागिता) मोड में की जाएगी। यह स्वीकृति भारत सरकार की ‘पीपीपी मोड में मेडिकल कॉलेज स्थापना योजना’ के तहत दी गई है। चारों जिले में मेडिकल कॉलेज की स्थापना केंद्र-राज्य की मदद से होगा। परियोजना का संचालन वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के डिपार्टमेंट ऑफ ईकोनॉमिक अफेयर द्वारा संचालित व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण, यानी वीजीएफ (वायबिलिटी गैप फंडिंग) की उप योजना 1 एवं 2 के अंतर्गत कार्यान्वित की जाएगी। इन योजनाओं के तहत कार्यान्वित होंगे कॉलेज मेडिकल कॉलेज धनबाद परियोजना वीजीएफ उपयोजना-1 के तहत, खूंटी, जामताड़ा व गिरिडीह मेडिकल कॉलेज परियोजना वीजीएफ उपयोजना-2 के तहत कार्यान्वित होंगे। इस उप योजना-2 के तहत भारत सरकार 40% पूंजीगत व्यय सहायता तथा 25% परिचालन व्यय सहायता प्रदान करेगी। जबकि, झारखंड सरकार 25% से 40% तक पूंजीगत व्यय तथा 15% से 25% तक परिचालन व्यय सहायता के रूप में योगदान देगी। उपयोजना-1 के तहत पूंजीगत सहायता के रूप में भारत सरकार से 30 प्रतिशत तथा राज्य सरकार से 30 प्रतिशत के अनुपात में प्रदान की जाएगी। जिलों में खुलेंगे नए कॉलेज खूंटी 50 एमबीबीएस सीटें जामताड़ा 100 एमबीबीएस सीटें धनबाद 100 एमबीबीएस सीटें गिरिडीह 100 एमबीबीएस सीटें

बिहार प्रशासन में हलचल, ब्यूरोक्रेसी का चेहरा बदलने की तैयारी तेज

पटना बिहार में बहुत जल्द ब्यूरोक्रेसी का मूड-मिजाज और चेहरा बदल जाएगा। नेतृत्व बदलते ही ब्यूरोक्रेसी का मन बदलने लगा है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के सचिवालय में पदभार संभालने के साथ ही विभागों के प्रमुख अधिकारी अलर्ट मोड में आ गए। अधिकारी नई सरकार के संकेतों पर नजर टिकाए बैठे हैं। साथ ही विभागीय प्रस्तुतीकरण को लेकर रोडमैप तैयार करने में जुट गए हैं। खास कर सरदार पटेल भवन में, जहां सम्राट करीब पांच महीने उपमुख्यमंत्री सह गृह मंत्री बन कर रहे। यहां पर गृह विभाग से लेकर पुलिस मुख्यालय के प्रमुख अधिकारियों के कक्ष में नई सरकार के रोडमैप को लेकर चर्चाएं होती दिख रही। बिहार में बदल जाएगी ब्यूरोक्रेसी मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के सचिवालय में पदभार संभालने के साथ ही विभागों के अधिकारी अलर्ट मोड में हैं। पुलिस मुख्यालय में नई सरकार के रोडमैप को लेकर चर्चाएं होती रहीं कई जिलों में प्रशासन का प्रमुख चेहरा बदलने की भी पूरी संभावना है। प्रशासनिक महकमे में भी फेरबदल के आसार हैं। राज्य में नई सरकार बनते ही ब्यूरोक्रेसी के प्रमुख चेहरों के बदलने की चर्चाएं भी शुरू हुई हैं। लंबे समय तक सरकार का चेहरा बने कई अधिकारी केंद्र सरकार में इम्पैनल हो चुके हैं। कई कतार में हैं। ऐसे में उनके विरमित होने पर नए अधिकारियों की तैनाती होगी। नए नेतृत्व की एनडीए सरकार में मुख्यमंत्री सचिवालय सहित प्रमुख विभागों में नए चेहरे दिख सकते हैं। कई जिलों में प्रशासन का प्रमुख चेहरा बदलने की भी पूरी संभावना है। अपराधियों पर सख्ती रहगी जारी सम्राट चौधरी ने चुनावी भाषण से लेकर बतौर उपमुख्यमंत्री कई बार अपराधियों को बिहार छोड़ देने की चेतावनी दी थी। ऐसे में अब उनके मुख्यमंत्री बनने पर पुलिस अधिकारी महिला सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ने मुख्यालय सहित सभी क्षेत्रीय उत्साहित हैं कि अपराधियों पर कड़े प्रहार जारी रखे जाएंगे। महिला सुरक्षा भी सरकार का फोकस रहेगा। सम्राट चौधरी ने ही अपराध और विशेष महिला पुलिस दस्ता 'अभया बिग्रेड' बनाने की घोषणा की थी। बुधवार की साप्ताहिक बैठक में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) विनय कुमार ने मुख्यालय सहित क्षेत्रीय पदाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षकों को नए सिरे से सरकार की प्राथमिकताओं से अवगत कराया और सख्ती से अनुपालन के निर्देश दिए। गृह विभाग से लेकर पुलिस मुख्यालय के प्रमुख अधिकारियों के कक्ष में नई सरकार के रोडमैप को लेकर चर्चाएं होती दिख रही। चौक-चौराहों पर सम्राट-नीतीश में तुलना सचिवालय के गलियारों से लेकर चौक-चौराहों पर नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से भी खूब तुलना हो रही है। युवा मुख्यमंत्री से लोगों को उम्मीदें तो हैं, मगर कुछ चिंताएं भी हैं। कुछ लोगों का मानना है कि सम्राट चौधरी के पास सरकार का लंबा अनुभव है, ऐसे में उनको ज्यादा दिक्कत नहीं आएगी। जबकि, कुछ लोगों को भरोसा है कि उनको केंद्र सरकार का भी सहयोग मिलेगा। नीतीश सरकार की तरह सांप्रदायिक शक्तियों और भ्रष्टाचारियों पर कड़ी चोट जारी रहनी चाहिए। थानों और अंचल कार्यालयों की कार्य संस्कृति में सुधार लाना चाहिए। शराब पर लगे प्रतिबंध को लेकर भी अलग-अलग लोगों की अलग-अलग राय दिखी। कुछ दिन में नई सरकार के परफॉर्मेंस का भी आकलन होने लगेगा।

कोयला सिंडिकेट पर ईडी की चार्जशीट, गुंडा टैक्स से चल रहा था 650 करोड़ का खेल

रांची प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने झारखंड और पश्चिम बंगाल की सीमाओं के बीच चल रही कोयला तस्करी और मनी लाउंड्रिंग के बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। ईडी ने इस मामले में विशेष अदालत के समक्ष अभियोजन शिकायत (चार्जशीट) दाखिल की है, जिसमें 650 करोड़ रुपये से अधिक की मनी लाउंड्रिंग का जिक्र किया है। यह काली कमाई पिछले पांच वर्षों में जबरन वसूली और गुंडा टैक्स से की गई है। ईडी की जांच में यह बात प्रमुखता से सामने आई है कि इस सिंडिकेट का जाल झारखंड तक फैला हुआ था। ईडी के अनुसार, सिंडिकेट न केवल बंगाल के दुर्गापुर-आसनसोल क्षेत्र में सक्रिय था, बल्कि झारखंड से पश्चिम बंगाल में अवैध रूप से लाए गए कोयले के कारोबार में भी संलिप्त था। झारखंड से होने वाली इस अवैध तस्करी को संरक्षण देने के लिए सिंडिकेट ने कई सरकारी अधिकारियों और राजनीतिक रसूखदारों को घूस के रूप में मोटी रकम पहुंचाई थी। सिंडिकेट वैध डिलीवरी ऑर्डर (डीओ) धारकों, ट्रांसपोर्टरों और खरीदारों से जबरन वसूली करता था। इसे जीटी (गुंडा टैक्स) या रंगदारी टैक्स कहा जाता था। जीटी नहीं देने पर उठाव व परिवहन रोक दिया जाता था ईडी ने पाया है कि यह वसूली ₹275 प्रति टन से लेकर ₹1,500 प्रति टन तक की जाती थी। यह कोयले के वास्तविक मूल्य का लगभग 20-25 प्रतिशत हिस्सा था। जो व्यापारी यह टैक्स नहीं देते थे, उन्हें कोयला उठाने और परिवहन करने से रोक दिया जाता था। इस दबाव के कारण भारी मात्रा में कोयला खदानों में ही पड़ा रहा, जिससे ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) को भी भारी वित्तीय नुकसान हुआ। उगाही की गई रकम को कई प्रोप्राइटरशिप फर्मों और मुखौटा कंपनियों के जरिए घुमाया जाता था, ताकि कमाई को वैध दिखाया जा सके। लाला पैड के जरिए होती थी वसूली ईडी ने जांच में पाया था कि गुंडा टैक्स व अवैध कोयला संचालन के लिए लाला पैड का इस्तेमाल किया जाता था। आप सांसद अशोक मित्तल के ठिकानों पर ईडी के छापे जालंधर/चंडीगढ़। ईडी ने बुधवार को आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सदस्य अशोक मित्तल से जुड़े शैक्षणिक संस्थानों पर छापेमारी की। ईडी ने यह कार्रवाई विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत इन शैक्षणिक संस्थानों के कुछ विदेशी वित्तीय लेनदेन की जांच के तहत की। अधिकारियों ने बताया कि जालंधर, उसके आसपास के इलाकों और गुरुग्राम में लगभग 10 स्थानों पर तलाशी ली गई। इसमें फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी परिसर और गुरुग्राम में स्थित टेट्र कॉलेज ऑफ बिजनेस तथा मास्टर्स यूनियन कॉलेज ऑफ बिजनेस नामक दो शैक्षणिक संस्थान शामिल हैं। आप ने हाल ही में राघव चड्ढा को हटाकर मित्तल को राज्यसभा में पार्टी का उपनेता नियुक्त किया था। वह फगवाड़ा में स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति भी हैं। उनके बेटे प्रथम मित्तल ने गुरुग्राम स्थित शिक्षण संस्थानों की स्थापना की।

हेमंत सोरेन कैबिनेट का बड़ा फैसला, भवन नियमितीकरण और खनन नियमों में बदलाव

रांची झारखंड में अनधिकृत रूप से बनाए गए भवन अब नियमित किए जाएंगे। इसके लिए सरकार ने नियमितीकरण नियमावली 2025 को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में इस पर सहमति दी गई। बैठक में 53 प्रस्तावों को हरी झंडी मिली। कैबिनेट सचिव वंदना दादेल ने बैठक के बाद बताया कि अनधिकृत रूप से बनाए गए भवनों को नियमित करने को लेकर 2019 की नियमावली में संशोधन किया है। इसके अनुसार, 10 मीटर ऊंचाई तक के जी-प्लस टू भवनों को नियमित किया जा सकेगा। इसका अधिकतम क्षेत्रफल 300 वर्ग मीटर होगा। वहीं, आवासीय भवनों के लिए 10000 और व्यावसायिक भवनों के लिए 20000 की राशि देनी होगी। पेनाल्टी तीन किस्तों में देनी होगी। 60 दिनों में आवेदन जरूरी राज्य सरकार ने अनधिकृत रूप से निर्मित भवनों के नियमितीकरण को लेकर नए प्रावधान लागू किए हैं। इसके तहत अब ऐसे सभी भवनों के मालिकों को नियमितीकरण के लिए अनिवार्य रूप से आवेदन करना होगा। यह आवेदन अधिसूचना जारी होने की तिथि से 60 दिनों के भीतर ऑनलाइन करना अनिवार्य होगा। यह आवेदन संबंधित सक्षम प्राधिकरण या अधिकृत अधिकारी के समक्ष निर्धारित प्रारूप में जमा करना होगा। अनधिकृत निर्माण के मामलों में भवन का पूरा निर्मित क्षेत्र साइट प्लान के साथ प्रस्तुत करना होगा। छात्रों के लिए प्रतियोगिताएं होंगी राज्य में रोबोटिक फेस्टिवल आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। इसमें प्रतिभागियों को किसी भी प्रकार का रोबोट बनाने की स्वतंत्रता होगी। प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार पांच लाख, द्वितीय पुरस्कार तीन लाख और तृतीय पुरस्कार दो लाख रुपये तय किया गया है। वहीं, स्कूल, आईटीआई और पॉलिटेक्निक के छात्रों के लिए उभरती तकनीक और विज्ञान पर क्विज आयोजित होगी। यह तीन चरणों में होगी। पहले चरण में आठवीं से 10वीं, दूसरे में 11वीं-12वीं व आईटीआई और तीसरे चरण में पॉलिटेक्निक के छात्र शामिल होंगे। रोबोटिक्स और बायोटेक्नोलॉजी से जुड़े क्विज में प्रथम पुरस्कार 50 हजारे, द्वितीय 30 हजार और तृतीय 20 हजार रुपये रखा गया है। बालू और लघु खनिज खनन के नियमों में बदलाव कैबिनेट की बैठक में झारखंड लघु खनिज रियायत (संशोधन) नियमावली, 2026 को मंजूरी दी गई। इसमें लघु खनिजों के लिए 100, 150 और 200 हेक्टेयर की क्षेत्र सीमा निर्धारित की गई है। बालू व पत्थर की लीज की अवधि 10 वर्षों के लिए होगी, जबकि ग्रेनाइट व अन्य लघु खनिजों की लीज की अवधि 30 वर्षों के लिए होगी। यह भी प्रावधान किया गया है कि आवेदन प्रक्रिया के 120 दिनों में एलओआई दिया जाएगा। पर्यावरण स्वीकृति के 30 दिनों में सीटीओ दिया जायेगा। खदानों का आवंटन ई-नीलामी के जरिये होगा। राज्य में बालू और लघु खनिजों के खनन को अधिक पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए सरकार ने ऐसा किया है। नई नियमावली का मुख्य उद्देश्य पुरानी नियमावलियों में आ रही व्यावहारिक कठिनाइयों को दूर करना और राजस्व संग्रह को गति देना है।

बिहार में डिजिटल जनगणना की तैयारी, नागरिक खुद भर सकेंगे परिवार का डेटा

पटना  बिहार में 'जनगणना से जन-कल्याण' के संकल्प की बारी आ गई है। जनगणना 2027 को इस बार पूरी तरह आधुनिक और डिजिटल ढांचे पर उतारा गया है। इस प्रक्रिया का सबसे अनूठा पहलू 'स्व-भागीदारी' है। सरकार ने नागरिकों को ये अवसर दिया है कि वे 17 अप्रैल से 1 मई के बीच स्वयं अपने परिवार का विवरण पोर्टल पर दर्ज कर सकते हैं। ये केवल एक डेटा नहीं बल्कि राज्य के भविष्य निर्माण में प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। तकनीक के इस संगम से समय की बचत होगी और गलतियों की संभावना कम रह जाएगी आपका डेटा ही आपकी पहचान जनगणना अधिनियम 1948 के तहत प्रत्येक व्यक्ति की जानकारी को पूरी तरह गोपनीय रखने की गारंटी दी गई है। सभी डिजिटल टूल्स में लेटेस्ट एन्क्रिप्शन तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, ताकि सुरक्षा सुनिश्चित रहे। 2 मई से शुरू होने वाले जमीनी सर्वे से पहले नागरिकों से अपील की गई है कि वे मोबाइल या कंप्यूटर के जरिए इस सरल और सुरक्षित स्व-गणना प्रक्रिया का हिस्सा बनें। इस डिजिटल 'यज्ञ' में आपकी भागीदारी ही पारदर्शी और समृद्ध बिहार की नींव रखेगी, जिससे भविष्य की जनकल्याणकारी योजनाओं को सही दिशा मिल सकेगी। 17 अप्रैल से 1 मई तक स्व-गणना बिहार में स्व-गणना (Self Enumeration) की अवधि 17 अप्रैल से 1 मई 2026 तक निर्धारित है। इस अवधि में राज्य के नागरिक https://se.census.gov.in पोर्टल पर जाकर स्वयं अपने परिवार की जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं। इस प्रक्रिया में परिवार के मुखिया का नाम और किसी भी एक सदस्य के मोबाइल नंबर से पंजीकरण कर सकते हैं। स्व-गणना करने के बाद एक Self Enumeration ID प्राप्त होगी, जिसे सुरक्षित रखना होगा। प्रगणक (जनगणना करने वाले) के घर आने पर उन्हें उपलब्ध कराना होगा। स्व-गणना की सुविधा सुरक्षित, सरल और समय की बचत करने वाली प्रक्रिया है। इससे नागरिकों को घर बैठे अपनी जानकारी दर्ज करने की सुविधा मिलेगी। जनगणना कार्य को समयबद्ध और सुगम तरीके से संपन्न करने में सहायता मिलेगी। जनगणना अधिनियम 1948 के तहत एकत्र किया गया ये डेटा पूरी तरह से गोपनीय है। सभी डिजिटल टूल्स में डेटा एन्क्रिप्टेड (डिजिटल जानकारी गुप्त कोड में बदल जाती है, फिर केवल अधिकृत व्यक्ति ही उसे पढ़ पाता है) है, जो नागरिकों की व्यक्तिगत जानकारी की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित करता है। जनगणना से जन-कल्याण के उद्देश्य को सफल बनाने के लिए स्व-गणना की सुविधा का अधिक से अधिक उपयोग करें और इस राष्ट्रीय महत्व के कार्य में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें। 2-31 मई 2026 तक घर-घर सर्वे जनगणना कार्य निदेशालय की डायरेक्टर रंजीता और जनगणना कार्य सह नागरिक निबंधन के डिप्टी डायरेक्टर संजीव कुमार ने भारत की जनगणना- 2027 से संबंधित जानकारियां साझा की। जनगणना कार्य निदेशालय, बिहार के सभी नागरिकों से अनुरोध किया कि 'जनगणना से जन-कल्याण' के उद्देश्य को सफल बनाने के लिए स्व-गणना की सुविधा का अधिक से अधिक उपयोग करें और इस राष्ट्रीय महत्व के कार्य में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें। भारत की जनगणना 2027 के प्रथम चरण 'मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना' का काम बिहार में 2-31 मई 2026 तक होने जा रहा है। इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल माध्यम से संपन्न की जाएगी। जिसमें नागरिकों के लिए स्व-गणना (Self Enumeration) की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। जनगणना में स्व-गणना क्या है और इससे क्या फायदा है? नागरिक स्वयं ऑनलाइन पोर्टल या मोबाइल ऐप के जरिए अपना और अपने परिवार का डिटेल भरते हैं। इसमें प्रगणक (enumerator) के घर आने का इंतजार नहीं करना पड़ता और त्रुटियां कम होती हैं। स्व-गणना से समय की बचत होती है। डेटा कलेक्शन को आधुनिक बनाता है। समय की बचत होती है। स्व-गणना कैसे और कहां करें, बिहार में कब तक होगा? भारत सरकार के आधिकारिक जनगणना पोर्टल https://se.census.gov.in या मोबाइल ऐप पर लॉगिन करके।  आधार या मोबाइल नंबर के माध्यम से पंजीकरण कर अपनी और परिवार की जानकारी ऑनलाइन भर सकते हैं।  जनगणना के प्रथम चरण (मकान सूचीकरण) के दौरान निश्चित समय के लिए उपलब्ध है, बिहार में 17 अप्रैल से 1 मई तक। भारत की जनगणना-2027 में अपना नाम कैसे जोड़ें?  जनगणना के आधिकारिक वेब पोर्टल https://se.census.gov.in पर मोबाइल नंबर और आधार से पंजीकृत करें।  स्व-गणना लॉगिन करने के बाद निर्धारित प्रपत्र में अपने और अपने परिवार के सदस्यों का विवरण सावधानीपूर्वक ऑनलाइन भरें। डेटा जमा करने के बाद प्राप्त संदर्भ संख्या (Reference Number) को सुरक्षित रखें, फिर प्रगणक को दिखाकर वेरिफाई कराएं। जनगणना में क्या-क्या पूछा जाता है और क्यों पूछा जाता है? परिवार के सदस्यों का नाम, आयु, लिंग, वैवाहिक स्थिति, धर्म, भाषा, शिक्षा, जाति, व्यवसाय और घर में उपलब्ध सुविधाएं। ये डेटा भविष्य की सरकारी योजनाओं, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और बुनियादी ढांचे के बेहतर नियोजन के लिए आधार बनता है। जनगणना से जुड़े डेटा से निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन और विभिन्न वर्गों के लिए आरक्षण और नीति निर्धारण सुनिश्चित होता है। जनगणना 2027 के दौरान कौन-कौन से सवाल पूछे जाएंगे? भारत की जनगणना 2027 के तहत 17 अप्रैल से 1 मई तक चलने वाली स्व-गणना की प्रक्रिया में अधिकतम जनता की सहभागिता सुनिश्चित करने में पूरी सरकारी टीम लगी हुई है। पहली बार आम लोगों को इस माध्यम से खुद जनगणना में हिस्सा लेने का अवसर प्रदान किया गया है। डिजिटल मोड में होने वाली इस जनगणना के प्रथम चरण में 2 मई से 31 मई के बीच मकान सूचीकरण और आवास गणना किया जाना है। इस दौरान 33 प्रश्न पूछे जाएंगे। इससे पहले 17 अप्रैल से इसी काम को आम लोग कहीं से भी पोर्टल https://se.census.gov.in के माध्यम से कर पाएंगे। इस दौरान 33 प्रश्न पूछे जाएंगे।     भवन संख्या (नगरपालिका या जनगणना संख्या)     घर/मकान संख्या     मकान के फर्श में उपयोग की गई प्रमुख सामग्री     मकान की दीवारों में उपयोग की गई प्रमुख सामग्री     मकान की छत में उपयोग की गई प्रमुख सामग्री     मकान का उपयोग (आवासीय, व्यावसायिक, आदि)     मकान की स्थिति (अच्छी, रहने योग्य, जीर्ण-शीर्ण)     परिवार संख्या (Household Number)     परिवार के सदस्यों की कुल संख्या     परिवार के मुखिया का नाम     परिवार के मुखिया का लिंग     परिवार के मुखिया की सामाजिक स्थिति (SC/ST/OBC/Other)     मकान के स्वामित्व की स्थिति (स्वयं का या किराए का)     घर में रहने वाले … Read more