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वंदे मातरम के अपमान पर भड़के सीएम मोहन यादव, कांग्रेस से इस्तीफा मांगा: ‘नहीं गाऊंगी’ का बयान बड़ी बेशर्मी

भोपाल  इंदौर नगर निगम के बजट सम्मेलन के दौरान शुरू हुआ 'वंदे मातरम' विवाद अब पूरे प्रदेश की राजनीति का केंद्र बन गया है। कांग्रेस पार्षदों द्वारा सार्वजनिक रूप से राष्ट्रगीत गाने से इनकार करने पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बेहद कड़ी प्रतिक्रिया दी है। मुख्यमंत्री ने इसे देशभक्तों का अपमान बताते हुए कहा कि अगर कांग्रेस नेतृत्व इस पर कार्रवाई नहीं कर सकता, तो पूरी प्रदेश इकाई को इस्तीफा दे देना चाहिए। सीएम ने बताई बेशर्मी की राजनीति इंदौर नगर निगम में कांग्रेस पार्षद रुबीना इकबाल खान और फौजिया शेख अलीम ने धर्म का हवाला देकर 'वंदे मातरम' गाने से मना कर दिया था। इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद मुख्यमंत्री ने भोपाल में मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि 'बड़े दुर्भाग्य के साथ कहना पड़ रहा है कि कांग्रेस की पार्षद ने बेशर्मी के साथ कहा कि मैं नहीं गाऊंगी। यह केवल एक पार्षद का बयान नहीं, बल्कि कांग्रेस के उस चरित्र को दर्शाता है जो हमेशा से राष्ट्र प्रतीकों के खिलाफ रहा है।' जीतू पटवारी और राहुल गांधी से सीधे सवाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने सवाल उठाया कि हर छोटी बात पर मुखर रहने वाले प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी इस 'राष्ट्रद्रोह' जैसे कृत्य पर चुप क्यों हैं? सीएम ने कहा कि राहुल गांधी और राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वे इस तरह की मानसिकता को पार्टी में प्रोत्साहित कर रहे हैं। हजारों देशभक्तों ने भारत माता की जय बोलते-बोलते अपने प्राणों की आहुति दे दी। जब कांग्रेस पार्षद भगवान राम और हिंदुओं की निंदा करते हैं, तब पार्टी चुप रहती है। लेकिन अब राष्ट्रगीत के अपमान पर मौन रहना यह बताता है कि वे देश को किस दिशा में ले जाना चाहते हैं। डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री, मध्य प्रदेश पुरानी है वंदे मातरम की खींचतान? मुख्यमंत्री ने कांग्रेस के इतिहास को कुरेदते हुए कहा कि यह पार्टी आजादी के पहले से ही वंदे मातरम पर बखेड़ा खड़ा करती रही है। डॉ. यादव के अनुसार, कांग्रेस की पुरानी सरकारों ने राष्ट्रगीत के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ की थी। विशेषज्ञ मानते हैं कि चुनाव से पहले राष्ट्रवाद के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरकर बीजेपी अपनी पैठ और मजबूत करना चाहती है, खासकर तब जब मामला सीधे तौर पर राष्ट्रगीत के सम्मान से जुड़ा हो।  

मध्य प्रदेश में मौसम में बदलाव, बारिश-आंधी के बाद अब गर्मी की बढ़ी आहट, पारा बढ़ा

भोपाल  मध्य प्रदेश में मौसम का मिजाज तेजी से बदल गया है। आंधी-बारिश का दौर खत्म होते ही अब गर्मी ने जोर पकड़ लिया है और खास बात यह है कि सिर्फ दिन ही नहीं, रातें भी अब गर्म महसूस होने लगी हैं। शुक्रवार को प्रदेश के अधिकांश शहरों में तापमान 1 से 5.4 डिग्री तक बढ़ गया। इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर में बढ़ोतरी ज्यादा रही, जबकि भोपाल और रतलाम में भी गर्मी का असर साफ नजर आया। रतलाम में सबसे ज्यादा 5.4 डिग्री की बढ़ोतरी दर्ज की गई। शनिवार को तापमान में और इजाफा होने की संभावना है, यानी गर्मी का असर लगातार तेज होता जाएगा।  मध्य प्रदेश में मौसम का मिजाज तेजी से बदल गया है। आंधी-बारिश का दौर खत्म होते ही अब गर्मी ने जोर पकड़ लिया है और खास बात यह है कि सिर्फ दिन ही नहीं, रातें भी अब गर्म महसूस होने लगी हैं। शुक्रवार को प्रदेश के अधिकांश शहरों में तापमान 1 से 5.4 डिग्री तक बढ़ गया। इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर में बढ़ोतरी ज्यादा रही, जबकि भोपाल और रतलाम में भी गर्मी का असर साफ नजर आया। रतलाम में सबसे ज्यादा 5.4 डिग्री की बढ़ोतरी दर्ज की गई। शनिवार को तापमान में और इजाफा होने की संभावना है, यानी गर्मी का असर लगातार तेज होता जाएगा।  इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर के तापमान में सबसे तेज उछाल दर्ज किया गया, जबकि भोपाल और रतलाम में भी गर्मी का असर साफ नजर आया। रतलाम में सबसे ज्यादा 5.4 डिग्री की बढ़ोतरी दर्ज की गई। शनिवार को तापमान में और इजाफा होने की संभावना है, यानी गर्मी का असर लगातार तेज होगा। लंबे समय राहत की आस नहीं मौसम विभाग के अनुसार, आने वाली 15 अप्रैल से एक नया सिस्टम एक्टिव हो रहा है। लेकिन इसके ज्यादा मजबूत न होने से प्रदेश के मौसम में खासा बदलाव नहीं आएगा। यानी प्रदेश में तेज गर्मी का दौर जारी रहने के आसार है। यानी फिलहाल प्रदेशभर के लिए कोई बड़ी राहत आसपास नजर नहीं आ रही है। गर्मी का असर बढ़ते ही मौसम विभाग ने बचाव की एडवायजरी भी जारी की है। लोगों से कहा गया है कि वे दिनभर पर्याप्त पानी पिएं और शरीर को हाइड्रेट रखें। दोपहर के समय लंबे समय तक धूप में न रहे। हल्के वजन और रंग के सूती कपड़े पहनें। बच्चे और बुजुर्ग खासतौर पर ध्यान रखें। नर्मदापुरम में पारा 40 डिग्री के करीब, रतलाम-खरगोन भी गर्म रहे शुक्रवार को दिन के तापमान में खासी बढ़ोतरी दर्ज की गई। नर्मदापुरम प्रदेश में सबसे गर्म रहा। यहां अधिकतम तापमान 39.3 डिग्री दर्ज किया गया। रतलाम में 38.6 डिग्री, खरगोन में 38 डिग्री रहा। वहीं, धार, खंडवा, नरसिंहपुर और खजुराहो में पारा 36 डिग्री या इससे अधिक दर्ज किया गया। प्रदेश के 5 बड़े शहरों की बात करें तो उज्जैन में सबसे ज्यादा 35.5 डिग्री रहा। भोपाल में 34.6 डिग्री, इंदौर में 35 डिग्री, ग्वालियर में 33.4 डिग्री और जबलपुर में 34.6 डिग्री सेल्सियस रहा। 15 अप्रैल का सिस्टम, लेकिन राहत की उम्मीद कम मौसम विभाग के अनुसार 15 अप्रैल को एक नया सिस्टम एक्टिव होगा, लेकिन यह ज्यादा मजबूत नहीं है। ऐसे में प्रदेश में तेज गर्मी का दौर जारी रहने के आसार हैं और फिलहाल बड़ी राहत मिलती नहीं दिख रही। गर्मी से बचने के लिए बदल रही आदतें तापमान बढ़ते ही लोगों की दिनचर्या भी बदलने लगी है। कोई चेहरे को कपड़े से ढककर बाहर निकल रहा है, तो कोई गन्ने का रस, कोल्ड ड्रिंक्स और आइसक्रीम के जरिए राहत तलाश रहा है। भोपाल में गन्ने के जूस की दुकानों पर भीड़ बढ़ने लगी है। इन शहरों में ज्यादा असर नर्मदापुरम प्रदेश में सबसे गर्म रहा, जहां तापमान 39.3 डिग्री दर्ज किया गया। रतलाम 38.6 डिग्री और खरगोन 38 डिग्री पर रहे। धार, खंडवा, नरसिंहपुर और खजुराहो में भी तापमान 36 डिग्री या उससे अधिक दर्ज किया गया। बड़े शहरों में उज्जैन सबसे गर्म (35.5 डिग्री) रहा। भोपाल और जबलपुर 34.6 डिग्री, इंदौर 35 डिग्री और ग्वालियर 33.4 डिग्री दर्ज हुआ। अप्रैल का बदला ट्रेंड इस बार अप्रैल की शुरुआत तेज गर्मी से नहीं, बल्कि आंधी-बारिश और ओलों से हुई। 1 से 9 अप्रैल तक प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम बदला रहा। करीब 45 जिलों में बारिश और 15 से ज्यादा जिलों में ओलावृष्टि दर्ज की गई। अब शुरू होगा असली गर्मी का दौर मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अप्रैल का दूसरा पखवाड़ा हर साल तेज गर्मी लेकर आता है। जैसे सर्दियों में दिसंबर-जनवरी और बारिश में जुलाई-अगस्त पीक होते हैं, वैसे ही गर्मी का पीक अप्रैल-मई में होता है। इस बार भी वही ट्रेंड नजर आने लगा है। बचाव के लिए जरूरी सलाह – दिनभर पर्याप्त पानी पिएं – दोपहर की धूप से बचें – हल्के और सूती कपड़े पहनें – बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें मौसम का बैकग्राउंड इस साल फरवरी और मार्च में चार-चार बार मौसम बदला। कई दौर में बारिश, आंधी और ओलों ने फसलों को नुकसान पहुंचाया। मार्च के आखिर तक भी मौसम अस्थिर रहा, लेकिन अब प्रदेश में गर्मी ने स्थायी रूप से दस्तक दे दी है।  

मई में 7 दिन नहीं चलेगी भोपाल-जोधपुर एक्सप्रेस, रेलवे ने बताया नया शेड्यूल

 भोपाल  भोपाल से जोधपुर की यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए जरूरी खबर है। उत्तर पश्चिम रेलवे के जयपुर मंडल के अंतर्गत कनकपुरा स्टेशन पर यार्ड में नान-इंटरलॉकिंग कार्य के चलते मई महीने में भोपाल-जोधपुर-भोपाल एक्सप्रेस के कुछ फेरे निरस्त रहेंगे। गाड़ी संख्या 14814 भोपाल-जोधपुर एक्सप्रेस 3, 4, 5, 8, 12, 13 और 14 मई 2026 को रद्द रहेगी। वहीं गाड़ी संख्या 14813 जोधपुर-भोपाल एक्सप्रेस 2, 3, 4, 7, 11, 12 और 13 मई को निरस्त रहेगी। रेल प्रशासन ने बताया कि यह कार्य ट्रेनों की सुरक्षा और बेहतर संचालन के लिए किया जा रहा है। यात्रियों से अपील है कि यात्रा पर निकलने से पहले अपनी ट्रेन की स्थिति जरूर जांच लें और वैकल्पिक व्यवस्था बनाकर ही सफर करें, ताकि किसी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके। रेलवे ने उठाया बड़ा कदम बता दें कि तीन दिन पहले ही प्रदेश में रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में रेलवे ने बड़ा कदम उठाया। रेलवे बोर्ड ने राज्य में 11 नए रेल मार्गों की संभावना तलाशने का निर्णय लिया। इनमें से एक मार्ग (भोपाल-सागर-छतरपुर-दमोह-खजुराहो) पर आरंभिक सर्वे कार्य शुरू किया जाएगा, जबकि शेष 10 प्रस्तावित मार्गों पर टोही (रि-कानिसेंस) एवं यातायात सर्वे कराया जाएगा। टोही सर्वे की प्रस्तावित योजनाओं में जबलपुर-डिंडौरी-पेंड्रा रोड एवं झांसी-शिवपुरी-श्योपुर-सवाई माधोपुर शामिल है। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर होगा निर्णय रेलवे की इस पहल को प्रदेश के विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि प्रस्तावित योजनाएं साकार होती हैं, तो आने वाले समय में राज्य की रेल कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, जिन 10 मार्गों पर सर्वे किया जाना है, वहां पहले चरण में टोही सर्वे के माध्यम से भौगोलिक स्थिति, संभावित रूट, लागत और तकनीकी चुनौतियों का आकलन किया जाएगा। इसके बाद यातायात सर्वे के जरिए यह देखा जाएगा कि प्रस्तावित मार्गों पर यात्री और माल परिवहन की कितनी संभावना है। सर्वे रिपोर्ट रेलवे बोर्ड को भेजी जाएगी, जिसके आधार पर ही आगे नई रेल लाइन बिछाने का निर्णय लिया जाएगा।  

सारा और अर्जुन पहुंचे महाकाल के दर, 1700 करोड़ के पार धुरंधर ने टेका माथा

उज्जैन  धुरंधर: द रिवेंज फेम एक्ट्रेस सारा अर्जुन लगातार चर्चा में बनी हुई हैं. फिल्म धुरंधर और उसके सीक्वल धुरंधर: द रिवेंज की सफलता के बाद वह इंडस्ट्री में एक मजबूत पहचान बना चुकी हैं. इसी बीच सारा हाल ही में उज्जैन के प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर पहुंचीं, जहां उन्होंने भगवान शिव का आशीर्वाद लिया. सारा अपने माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती में शामिल हुईं. इस दौरान उन्होंने गुलाबी साड़ी पहनी हुई थी, जिसमें वह बेहद खूबसूरत लग रही थी।  महाकाल मंदिर में परिवार संग की पूजा मंदिर में दर्शन के बाद पीटीआई से बातचीत में उन्होंने कहा, “मैंने भगवान से कोई खास चीज नहीं मांगी, बस हेल्थ, धन और सफलता की कामना की है. वहां जाकर बहुत अच्छा महसूस हुआ. मैं शब्दों में इसे बयां नहीं कर सकती. दिल खुश हो गया.” आज सारा की मां का जन्मदिन भी है. जब उनसे पूछा गया कि क्या इस वजह से मंदिर आई हैं, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “हम दिन देखकर आशीर्वाद लेने नहीं आते, हम हर दिन भगवान का आशीर्वाद लेते हैं. लेकिन हां, आज का दिन हमारे लिए बहुत शुभ है।  अगली फिल्म को लेकर सस्पेंस बरकरार फिल्म धुरंधर 2 की बड़ी सफलता के बाद सारा अर्जुन के अगले प्रोजेक्ट को लेकर कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं. जब उनसे इस बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने सीधे जवाब देने से बचते हुए ऊपर की ओर इशारा किया. उनका मतलब था कि वह अपने भविष्य को भगवान शिव पर छोड़ चुकी हैं।  अगले प्रोजेक्ट पर दिया जवाब 'धुरंधर' जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्म देने के बाद अब सबकी नजरें सारा के अगले प्रोजेक्ट पर हैं. जब पत्रकारों ने उनसे उनके फ्यूचर प्लान और अगली फिल्म के बारे में सवाल किया, तो सारा ने मुस्कुराते हुए आसमान की तरफ इशारा कर दिया. इस पर जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने सब कुछ महाकाल के भरोसे छोड़ दिया है, तो उन्होंने सिर हिलाते हुए  'जी' कहा।  धुरंधर की धुआंधार कलेक्शन जारी 'धुरंधर: द रिवेंज' ने बॉक्स ऑफिस पर अपनी मज़बूत पकड़ बनाए रखी है और चौथे हफ्ते में भी इसकी सफलता का सिलसिला जारी है. ट्रेड वेबसाइट Sacnilk के अनुसार, रणवीर-सारा की इस फिल्म ने दुनिया भर में कुल 1,671.26 करोड़ रुपये का ग्रॉस कलेक्शन किया है. इसमें से 1,263.26 करोड़ रुपये भारतीय बाजार से आए हैं, जबकि विदेशों से इसकी कमाई 408 करोड़ रुपये रही है।  अब यह फिल्म, वीकेंड के अंत तक दुनिया भर में 1,700 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर सकती है. यह दुनिया भर में तीसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली भारतीय फिल्म के तौर पर 'पुष्पा 2: द रूल' (1,742 करोड़ रुपये) को पीछे छोड़ने के करीब पहुंच रही है।  कौन हैं सारा अर्जुन?  बता दें कि सारा अर्जुन मशहूर साउथ एक्टर राज अर्जुन की बेटी हैं. सारा ने अपने करियर की शुरुआत महज एक टॉडलर (नन्हीं बच्ची) के तौर पर की थी और 6 साल की उम्र से पहले ही वह 100 से ज्यादा विज्ञापनों में नजर आ चुकी थीं. उन्हें घर-घर में पहचान 'क्लिनिक प्लस' के विज्ञापन से मिली थी. इसके बाद उन्होंने तमिल फिल्म 'देइवा थिरुमगल' और मणिरत्नम की 'पोन्नियिन सेलवन' में ऐश्वर्या राय के बचपन का किरदार निभाकर अपनी एक्टिंग का लोहा मनवाया. अब मात्र 20 साल की उम्र में रणवीर सिंह के साथ 'धुरंधर' फ्रेंचाइजी की दोनों फिल्मों (2025 और 2026) में काम करके उन्होंने बॉलीवुड में अपनी एक अलग जगह बना ली है।  क्या अब मधुबाला बनेगी सारा अर्जुन? फिलहाल खबरें हैं कि सारा अर्जुन एक बड़ी बायोपिक में नजर आ सकती हैं, जिसमें वह दिग्गज एक्ट्रेस मधुबाला का किरदार निभा सकती हैं. हालांकि इसको लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है. कुछ अन्य रिपोर्ट्स में यह भी कहा जा रहा है कि इस भूमिका के लिए किसी और एक्ट्रेस से भी बात चल रही है। 

रायसेन में तीन दिवसीय राष्ट्रीय कृषि महोत्सव, रक्षामंत्री राजनाथ, सीएम यादव और शिवराज सिंह करेंगे उद्घाटन, ड्रोन तकनीक का लाइव प्रदर्शन

रायसेन  केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी एक मंच पर होंगे। वे 11 से 13 अप्रैल तक रायसेन में होने जा रहे राष्ट्रीय उन्नत कृषि महोत्सव में शामिल होंगे। महोत्सव का उद्घाटन राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव करेंगे, जबकि समापन 13 अप्रैल को नितिन गडकरी द्वारा किया जाएगा। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को भोपाल स्थित अपने आवास में रायसेन में होने वाले उन्नत कृषि महोत्सव की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि महोत्सव को हमने कर्मकांड नहीं, गंभीर प्रयास की तरह आयोजित किया है। उन्होंने कहा भारत दालों का सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता देश होते हुए भी अभी पूर्ण आत्मनिर्भर नहीं है, इसलिए अब नीति का फोकस दलहन-तिलहन के क्षेत्र और उत्पादकता बढ़ाने पर है, ताकि देश इन फसलों में भी आत्मनिर्भर बन सके। महोत्सव से एक दिन पहले शुक्रवार शाम को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। उन्होंने विभिन्न स्टॉलों और प्रदर्शन क्षेत्रों का निरीक्षण किया और कहा कि यह आयोजन किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने का एक प्रभावी माध्यम बनेगा। 300 से अधिक स्टॉल लगाए गए इस विशाल प्रदर्शनी में 300 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं, जो कृषि, बागवानी, सिंचाई, उर्वरक, बीज, कीटनाशक, कृषि यंत्रीकरण, डिजिटल खेती और फसल बीमा से जुड़ी नवीनतम तकनीकों का प्रदर्शन कर रहे हैं। आयोजन स्थल को तीन बड़े हैंगरों में बांटा गया है। पहले हैंगर में कृषि यंत्र, सिंचाई और नवाचार से संबंधित स्टॉल हैं। दूसरे हैंगर में पशुपालन, डेयरी, सहकारी संस्थाएं और ग्रामीण विकास विभाग शामिल हैं, जबकि तीसरे हैंगर में उद्घाटन समारोह, तकनीकी सत्र और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। कृषि यंत्रों का प्रदर्शन होगा महोत्सव में आधुनिक कृषि यंत्रों के साथ-साथ ड्रोन तकनीक और सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों का सीधा प्रदर्शन किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को नई तकनीकों से परिचित कराना और उन्हें अपनी खेती में अपनाने के लिए प्रेरित करना है। विभिन्न कृषि स्टार्टअप, कंपनियां और संस्थान भी अपने नवाचारों के माध्यम से किसानों को आय के नए स्रोतों की जानकारी देंगे। इस आयोजन में कृषि विज्ञान केंद्र, राज्य कृषि विश्वविद्यालय, नाबार्ड, नेफेड, पशुपालन और मत्स्य पालन विभाग जैसे कई प्रमुख संस्थान भाग ले रहे हैं। इसके अतिरिक्त, किसान उत्पादक संगठन (FPO) और MSME से जुड़े उद्यम भी अपने सफल मॉडल प्रस्तुत करेंगे, जिससे किसानों को व्यावहारिक अनुभव मिल सकेगा। महोत्सव में पशुपालन को विशेष प्राथमिकता महोत्सव में पशुपालन को विशेष प्राथमिकता दी गई है। यहां गिर, साहीवाल और थारपारकर नस्ल की गायों के साथ जमुनापारी, सिरोही और बारबरी नस्ल की बकरियों का प्रदर्शन किया जाएगा। इसके अलावा कड़कनाथ मुर्गी पालन के मॉडल भी किसानों के लिए आकर्षण का केंद्र होंगे। पशु स्वास्थ्य शिविर, टीकाकरण और पोषण प्रबंधन पर विशेषज्ञ मार्गदर्शन भी उपलब्ध रहेगा। मत्स्य पालन के क्षेत्र में बायोफ्लॉक, आरएएस और एक्वापोनिक्स जैसे आधुनिक मॉडल भी प्रस्तुत किए जाएंगे। साथ ही तीनों दिनों में किसानों के लिए निःशुल्क प्रशिक्षण, स्टार्टअप प्रेजेंटेशन और वैज्ञानिकों से सीधा संवाद आयोजित होगा।

एम्स भोपाल, शासकीय होम्योपैथी कॉलेज और केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद के बीच त्रिपक्षीय एमओयू

एम्स भोपाल, शासकीय होम्योपैथी कॉलेज भोपाल और केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद के बीच हुआ त्रिपक्षीय एमओयू मधुमेह के जटिल उपचार पर होगा संयुक्त शोध भोपाल  विश्व होम्योपैथी दिवस के उपलक्ष्य में विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयुष मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रताप राव जाधव और सचिव आयुष वैद्य राजेश कोटेचा की उपस्थिति में होम्योपैथी के बढ़ते वैश्विक प्रभाव पर चर्चा की गई। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण, प्रदेश के आयुष विभाग के लिए एक बड़ी उपलब्धि रहा, जिसके अंतर्गत शासकीय होम्योपैथिक चिकित्सा महाविद्यालय भोपाल, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल और केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद नई दिल्ली के बीच एक त्रिपक्षीय एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। आयुष विभाग के लिए यह गौरवपूर्ण क्षण है, जो प्रदेश में उच्च स्तरीय वैज्ञानिक अनुसंधान के नए द्वार खोलेगा। एमओयू में अब भोपाल के इन प्रतिष्ठित संस्थानों में 'मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट डायबिटीज मेलिटस' के कारण होने वाले 'फुट अल्सर' के मामलों में होम्योपैथी दवाओं के प्रभाव पर विस्तृत शोध किया जाएगा। यह अनुसंधान, भविष्य में एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति कीटाणुओं की बढ़ती प्रतिरोधक क्षमता (रेजिस्टेंस) के वैश्विक संकट को हल करने में एक मील का पत्थर साबित होगा। भारत में इस विधा के स्वरूप, अनुसंधान और शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे नवाचारों को रेखांकित करते हुए विशेषज्ञों को सम्मानित भी किया गया। इस अवसर पर एम्स भोपाल के माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. देवाशीष विश्वास, मुख्य शोधकर्ता डॉ. शाश्वती नेमा, शासकीय होम्योपैथी कॉलेज भोपाल की शोध प्रमुख डॉ. जूही गुप्ता, सीसीआरएच के महानिदेशक डॉ. सुभाष कौशिक, राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग के सचिव डॉ. संजय गुप्ता एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रेनु मित्तल विशेष रूप से उपस्थित थे।  

मेडिकल हब बनने से मध्यप्रदेश में रोजगार के अवसर तेजी से बढ़ेंगे : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

प्रधानमंत्री मोदी की मंशानुसार मध्यप्रदेश में भी मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देशन में विशेष रीजनल मेडिकल हब स्थापित किया जायेगा मेडिकल हब बनने से मध्यप्रदेश में रोजगार के अवसर तेजी से बढ़ेंगे : उप मुख्यमंत्री शुक्ल विशेष रीजनल मेडिकल हब के लिये इंदौर-उज्जैन कॉरिडोर बेहतर जगह स्टेक-होल्डर कंस्यूलेशन वर्कशॉप फॉर डेवलपमेंट ऑफ इंदौर-उज्जैन हेल्थ एंड वेलनेस टूरिज्म कॉरिडोर कार्यक्रम में टूरिज्म, हेल्थ, होटल इंड्रस्टी के प्रतिनिधि शामिल हुए भोपाल  उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में पाँच विशेष रीजनल मेडिकल हब स्थापित करने की योजना है। प्रधानमंत्री मोदी की मंशानुसार मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशन में विशेष रीजनल मेडिकल हब बनाने की दिशा में कार्य शुरू हो गया है। इस मेडिकल हब के बनने से मेडिकल टूरिज्म के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन आएगा। रोजगार के अवसर तेजी से बढ़ेंगे। इस दृष्टि से मध्यप्रदेश विशेषकर इंदौर में विशेष मेडिकल हब बनने की अपार संभावनाएं है। मध्यप्रदेश में विशेष रीजनल मेडिकल हब के लिये इंदौर-उज्जैन कॉरिडोर बेहतर जगह है। इंदौर में के 100 किलोमीटर की दायरे में देा ज्यार्तिलिंग ओंकारेश्वर और उज्जैन में प्रसिद्ध महांकालेश्वर मंदिर है। बाहर से आने वाले नागरिक उक्त दोनों ही ज्योर्तिलिंगों पर दर्शन के लिये आते है। इस दृष्टि से भी विशेष रीजनल मेडिकल हब इंदौर-उज्जैन कॉरिडोर पर बनाना उपयुक्त है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि इंदौर में एजुकेशन हब है। इंदौर में मजबूत इन्फ्रास्ट्रक्चर है। रेलवे और एयर कनेक्टिविटी है। व्यवसायी दृष्टि से भी इंदौर तेजी से बढ़ता हुआ शहर है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि केन्द्र सरकार की आयुष्मान स्वास्थ्य योजना से नागरिकों का नि:शुल्क इलाज हो रहा है। अभी तक करोड़ नागरिकों द्वारा आयुष्मान स्वास्थ्य योजना का लाभ ले चुके हैं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल शुक्रवार को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित स्टेकहोल्डर कंस्यूलेशन वर्कशॉप फॉर डेवलपमेंट ऑफ इंदौर-उज्जैन हेल्थ एंड वेलनेस टूरिज्म कॉरिडोर में अपना संबोधन दे रहे थे। इस मौके पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की एमडी डॉ. सलोनी सिड़ाना, एसीएस हेल्थ अशोक बर्णवाल, संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े और आयुक्त आयुष विभाग शोभित जैन विशेष रूप से उपस्थित थे। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि विशेष रीजनल मेडिकल हब स्थापित करने का उद्देश्य दुनियाभर से आने वाले मरीजों को विश्व स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं आधुनिक तकनीक और किफायती इलाज मुहैया कराना है। भारत की चिकित्सा क्षमता को दुनिया के सामने लाने में विशेष रीजनल मेडिकल हब की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। वर्तमान में भारत मेडिकल टूरिज्म इंडेक्स और वेलनेस इंडेक्स में अच्छी स्थिति में है और हमें इसे और बेहतर करना है। मध्यप्रदेश में विशेष रीजनल मेडिकल हब बनने से स्वास्थ्य सुविधाएं, देखभाल रिहैबिलिटेशन सेवाएं और आयुष सेवाएं बेहतर होगी। देश में मेडिकल सेवाएं के बेहतर होने से विदेशी मरीज विशेषकर मध्य एशिया, यूरोपी देश और अफ्रीका से इलाज के लिए मध्यप्रदेश में आएंगे, जिससे विदेशी मुद्रा आएगी और भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा भी बढ़ेगी। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि मध्यप्रदेश में विकास की अपार संभावनाएं है। मध्यप्रदेश, देश में तेजी से आगे बढ़ता हुआ राज्य है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश कृषि क्षेत्र में लगातार अवार्ड प्राप्त कर रहा है। मध्यप्रदेश में बिजली का उत्पादन भी सरप्लस हो रहा है और मध्यप्रदेश दूसरे राज्यों को भी बिजली दे रहे है। ताप्ती-पार्वती, केन, बेतवा आदि नदियों से अर्थव्यवस्था मजबूत हुई। रिन्यूवेबल एनर्जी के क्षेत्र में भी मध्यप्रदेश आगे बढ़ रहे है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि हमें एलोपैथी चिकित्सा पद्धति के साथ-साथ आयुर्वेद एवं अन्य भारतीय चिकित्सा को भी बढ़ाने की आवश्यकता है। देहदान और अंगदान के क्षेत्र में जिस तरह का कार्य आज तमिलनाडू, महाराष्ट्र और तेलंगाना प्रदेश में हो रहा है, उस स्तर का कार्य मध्यप्रदेश में भी करने की आवश्यकता है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में स्वास्थ्य सेवा का तेजी से विस्तार हुआ है और इसका लाभ मध्यप्रदेश को भी मिला है। टीयर-2 और टीयर-3 सिटी में वेलनेस सेंटर तेजी बढ़ने लगे हैं। आम आदमी की पेइंग केपेसिटी बढ़ी है। शुक्ल ने कहा कि भारत आज जीडीपी में भी अच्छा प्रदर्शन कर रहा है। शुक्ल ने कहा कि हमारे स्वास्थ्य का खराब होने का एक बड़ा कारण दूषित पेयजल है। बेहतर होगा कि हम खेती किसानी में रासायनिक उर्वरकों की बजाय गौमूत्र-गोबर खाद् का इस्तेमाल करें, इससे हमारी धरती सुधरेगी और प्राकृतिक खेती को भी बढ़ावा मिलेगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि एक समय था कि जब आर्गन ट्रांसप्लांट के लिये हम मुंबई जाते थे, लेकिन अब यह कार्य इंदौर में हो रहा है। एसीएस हेल्थ बर्णवाल ने कहा कि आज की वर्कशॉप में हेल्थ, होटल, टूरिज्म आदि क्षेत्रों से आये प्रतिनिधियों के अपेक्षा से अधिक सुझाव आये है और अब इस पर तेजी से काम करने की आवश्यकता है। हमें एक कमेटी बनानी होगी जो और आगामी तीन महिनों के भीतर रीजनल मेडिकल हब का फाइनल ड्रॉफ्ट बना सकें। इस कार्य में सभी को सकारात्मक सोच के साथ काम करने की आवश्यकता है। संभागायुक्त डॉ. खाड़े ने कहा कि मेडिकल टूरिज्म के क्षेत्र में मध्यप्रदेश में अपार संभावनाएं है। इस दृष्टि से इंदौर शहर में अच्छा कार्य हो रहा है। इंदौर के ही चोइथराम अस्पताल में सर्जरी का लाइन डेमों बच्चों को दिखाया जाता है। इंदौर में एयर एम्बुलेंस की बेहतर सुविधा है। बुरहानपुर के शासकीय आयुर्वेदिक कॉलेज में अच्छा कार्य हो रहा है। वर्कशॉप में अरबिंदों अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. विनोद भंडारी ने मेडिकल इंटीग्रेटेड पर बात की। सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के अधीक्षक डी.के. शर्मा ने मेडिकल टूरिज्म को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस से जोड़ने की बात की। वर्कशॉप में अंगदान, फार्मेसी इंड्रस्टी, इंटरनल टूरिज्म, स्किल डेवलपमेंट, नी रीप्लेसमेंट, क्वालिटी हेल्थ एजुकेशन, ग्लोबल हेल्थ इंश्यूरेंस आदि विषयों पर भी चर्चा हुई। वर्कशॉप में अपर कलेक्टर नवजीवन पंवार, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी माधव प्रसाद हासानी, एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया, डॉ. अशोक यादव सहित अनूप हजेला ने भी अपने विचार रखें। वर्कशॉप में नगरीय प्रशासन एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, विधायक गोलू शुक्ला एवं उपस्थित प्रतिनिधियों ने एमवाय परिसर में बनने जा रहे आधुनिक जी-प्लस-8 भवन का थ्रीडी प्रजेंटेशन का अवलोकन किया। बताया गया आधुनिक सुविधाओं से लेस इस शासकीय अस्पताल में 1610 बेड होंगे साथ ही मल्टी लेवल पार्किंग होगा।  

हाईकोर्ट का सख्त रुख: ध्वनि प्रदूषण पर जागरूकता जरूरी, डीजे की तेज आवाज है खतरे की घंटी

जबलपुर  ध्वनि प्रदूषण के कारण बढ़ती बीमारियों तथा डीजे की तेज आवाज से लोगों को हार्ट अटैक आने और ब्लड प्रेशर बढ़ने को चुनौती देते हुए याचिका दायर की गई थी। याचिका की सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से पेश किए गए जवाब में बताया गया कि कान फाड़ देने वाली डीजे की तेज आवाज जनसमस्या बन गई है। कोलाहल एक्ट के तहत निर्धारित सीमा से अधिक आवाज में डीजे बजने पर जुर्माने की कार्रवाई की जाती है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा तथा जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए तल्ख टिप्पणी की कि इस समस्या के समाधान के लिए नागरिकों का जागरूक होना आवश्यक है। नाना देशमुख वेटनरी यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति गोविंद प्रसाद मिश्रा (उम्र 83 वर्ष), सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी आर.पी. श्रीवास्तव (उम्र 100 वर्ष) सहित अन्य चार की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि शादियों व धार्मिक आयोजनों के दौरान बहुत तेज आवाज में डीजे बजाए जाते हैं। मानव शरीर 75 डेसिबल तक की आवाज की तीव्रता सहन कर सकता है। इससे अधिक आवाज ध्वनि प्रदूषण की श्रेणी में आती है। डीजे की आवाज की तीव्रता 100 डेसिबल से अधिक होती है, जिससे लोगों को गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ता है। तेज आवाज के कारण हार्ट अटैक से मौत के मामले भी सामने आए हैं। इसके अलावा लोग बहरेपन और उच्च रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) जैसी समस्याओं का शिकार हो रहे हैं। याचिका पर हुई सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से पेश जवाब में इसे जनसमस्या बताते हुए कहा गया कि कोलाहल एक्ट के तहत जुर्माने की कार्रवाई की जाती है। याचिकाकर्ताओं का पक्ष रखते हुए युगलपीठ को बताया गया कि सर्वोच्च न्यायालय ने भी ध्वनि प्रदूषण को गंभीर समस्या माना है, जिसका प्रतिकूल असर मानव जीवन पर पड़ रहा है और लोग विभिन्न बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। डीजे की तेज आवाज के कारण हार्ट अटैक से कई लोगों की मौत भी हुई है। केवल जुर्माने की कार्रवाई से इस समस्या पर पूरी तरह अंकुश नहीं लगाया जा सकता।

पुलिस अधिकारी की पहचान निष्पक्षता, ईमानदारी और संवेदनशीलता में है – पुलिस महानिदेशक मकवाणा

निष्पक्षता, ईमानदारी एवं संवेदनशीलता ही पुलिस अधिकारी की पहचान : पुलिस महानिदेशक मकवाणा  प्रशिक्षु पुलिस उप अधीक्षकों से संवाद कर दी टिप्स भोपाल  मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी, भौंरी भोपाल में प्रशिक्षणरत  44वें एवं 45वें बैच के प्रशिक्षु उप पुलिस अधीक्षकों का संबोधन सत्र पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा के मुख्य आतिथ्य में नवीन पुलिस मुख्‍यालय क्रॉफ्रेंस हॉल में आयोजित किया गया। इस अवसर पर कुल 49 प्रशिक्षु उप पुलिस अधीक्षक उपस्थित रहे। डीजीपी कैलाश मकवाणा ने चयनित अधिकारियों को बधाई देते हुए उन्हें ईमानदारी, निष्पक्षता एवं पूर्ण समर्पण के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने हेतु प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में साइबर अपराध एक बड़ी चुनौती के रूप में उभर रहा है, अतः अधिकारियों को अपनी व्यावसायिक दक्षताओं एवं तकनीकी कौशल को निरंतर अद्यतन करते रहना आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों को iGOT Karmayogi platform India पर उपलब्ध एआई, साइबर एवं अन्य व्यावसायिक कोर्सों का अधिकतम लाभ लेकर अपनी दक्षता निरंतर बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। पुलिस महानिदेशक मकवाणा ने पुलिस सेवा को समाज सेवा का सशक्त माध्यम बताते हुए विशेष रूप से गरीब एवं जरूरतमंद वर्ग के प्रति संवेदनशीलता एवं सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार अपनाने पर बल दिया, वहीं अपराधियों के विरुद्ध दृढ़ता एवं कठोरता से कार्यवाही करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को कानून एवं प्रक्रियाओं का कड़ाई से पालन करने, नए आपराधिक कानूनों की समुचित जानकारी रखने तथा भ्रष्टाचार एवं किसी भी प्रकार के दुराचार से दूर रहने की सलाह दी।  डीजीपी मकवाणा ने कहा कि वर्तमान में मीडिया, सोशल मीडिया, न्यायालय एवं विभिन्न आयोगों द्वारा सतत निगरानी की जाती है, ऐसे में प्रत्येक कार्रवाई पूर्ण पारदर्शिता एवं नियमसम्मत होना आवश्यक है, क्योंकि एक छोटी सी त्रुटि भी संपूर्ण करियर को प्रभावित कर सकती है। डीजीपी मकवाणा ने अपने अनुभव साझा करते हुए निष्पक्ष विवेचना, धैर्यपूर्वक सुनवाई एवं तथ्यों के आधार पर निर्णय लेने के महत्व को रेखांकित किया तथा निर्देशित किया कि किसी भी निर्दोष व्यक्ति को अनावश्यक रूप से प्रकरण में न फंसाया जाए। उन्होंने कहा कि अच्छे कार्य करने वाले कर्मियों को उचित प्रोत्साहन एवं पुरस्कार मिलना चाहिए, जबकि त्रुटि करने वालों के विरुद्ध निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि फील्ड में पदस्थापना के दौरान विभिन्न माध्यमों से प्राप्त सूचनाओं का समुचित सत्यापन करते हुए त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई करना अत्यंत आवश्यक है, जिससे आमजन का विश्वास सुदृढ़ किया जा सके।  डीजीपी मकवाणा ने कहा कि पुलिस की सकारात्मक छवि उसके निरंतर व्यवहार एवं कार्यशैली से निर्मित होती है, जिसे स्थापित करने में लंबा समय लगता है, जबकि एक छोटी सी चूक से वह प्रभावित हो सकती है। समापन पर उन्होंने अधिकारियों को प्रेरित करते हुए कहा कि यदि वे पूर्ण ईमानदारी, निष्ठा एवं संवेदनशीलता के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करेंगे, तो न केवल अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित होगा, बल्कि आमजन के साथ विश्वासपूर्ण संबंध भी विकसित होंगे तथा समाज में पुलिस के प्रति सकारात्मक छवि और अधिक सुदृढ़ होगी। अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक एवं निदेशक पुलिस अकादमी भौंरी  मोहम्‍मद शाहिद अबसार ने बताया कि 44वें एवं 45वें बैच के प्रशिक्षु उप पुलिस अधीक्षकों का प्रशिक्षण चरणबद्ध रूप से संचालित किया जा रहा है, जिसमें प्रथम सेमेस्टर पूर्ण हो चुका है एवं द्वितीय सेमेस्टर प्रगति पर है। प्रशिक्षण के अंतर्गत कानून एवं व्यवस्था, अपराध अनुसंधान, नवीन आपराधिक कानून, पुलिस प्रक्रियाएं, आईटी एवं साइबर अपराध सहित विभिन्न विषयों पर विस्तृत प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। साथ ही पुलिस मुख्यालय की विभिन्न शाखाओं में ओरिएंटेशन, फील्ड एक्सपोजर एवं नवरात्रि जैसे आयोजनों के दौरान लॉ एंड ऑर्डर ड्यूटी का व्यावहारिक अनुभव भी दिया गया है। प्रशिक्षण में शारीरिक दक्षता एवं कौशल विकास हेतु पीटी, ड्रिल, योग, वेपन हैंडलिंग, फायरिंग एवं खेल गतिविधियों को शामिल किया गया है। प्रशिक्षु अधिकारी उच्च शिक्षित, अनुशासित एवं उत्साहपूर्वक प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं तथा आगामी चरणों में उनका मूल्यांकन एवं फील्ड प्रशिक्षण निर्धारित है। प्रशिक्षु अधिकारियों विशेषता यह है कि इनमें से कई  अधिकारियों ने विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों से तकनीकी और उच्च डिग्रियां प्राप्त की हैं, जिनमें बी.टेक, एम.टेक, एम.एससी,  एलएलबी तथा 'ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन' जैसे विषय में पीएचडी जैसी डिग्रियां प्रमुख हैं। कुछ अधिकारी  Indian Institutes of Technology (IIT) , National Institutes of Technology (NIT) तथा BHU जैसे देश के प्रतिष्ठित संस्थानों से शिक्षित है। इस प्रकार के उच्च शिक्षित और बहुमुखी प्रतिभा के धनी युवा अधिकारियों का पुलिस बल में शामिल होना, मध्यप्रदेश पुलिस की आधुनिक पुलिसिंग और तकनीकी दक्षता को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में एक मील का पत्थर साबित होगा इस अवसर पर उप पुलिस महानिरीक्षक डॉ. विनीत कपूर, उप निदेशक पुलिस अकादमी भौंरी संजय कुमार अग्रवाल, एसओ टू डीजीपी मलय जैन सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।  

डायल-112 हीरोज की बहादुरी: विदिशा में सूखे कुएँ से मिली नवजात बच्ची को अस्पताल पहुँचाया

भोपाल  विदिशा जिले के थाना कुरवाई क्षेत्र में डायल-112 जवानों की संवेदनशील एवं मानवीय कार्रवाई से सूखे कुएँ में परित्यक्त अवस्था में मिली नवजात बच्ची को सुरक्षित बाहर निकालकर तत्काल अस्पताल पहुँचाया गया। समय पर किए गए इस प्रयास से मासूम बच्ची को जीवनदान मिल सका। दिनांक 10 अप्रैल को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112, भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना कुरवाई क्षेत्र अंतर्गत ग्राम परसरी में एक सूखे कुएँ में नवजात बच्ची परित्यक्त अवस्था में मिली है, जिसे कोई अज्ञात व्यक्ति छोड़कर चला गया है। तत्काल पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना प्राप्त होते ही कुरवाई थाना क्षेत्र में तैनात डायल-112 एफआरव्ही वाहन को घटनास्थल के लिए रवाना किया गया तथा वरिष्ठ अधिकारियों को भी अवगत कराया गया। मौके पर पहुँचकर डायल-112 स्टाफ आरक्षक श्री नेतराम अहिरवार एवं पायलट श्री नरेंद्र दांगी ने नवजात बच्ची को सुरक्षित संरक्षण में लिया।डायल-112 जवानों ने त्वरित एवं मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए बच्ची को एफआरव्ही वाहन से तत्काल शासकीय चिकित्सालय, कुरवाई पहुँचाया, जहाँ प्राथमिक उपचार उपरांत उसे जिला चिकित्सालय, विदिशा रेफर किया गया।  इस कार्रवाई में डायल-112 जवानों की सजगता एवं संवेदनशीलता से एक नवजात को समय पर चिकित्सकीय सहायता मिल सकी। डायल-112 हीरोज श्रृंखला के अंतर्गत यह घटना दर्शाती है कि मध्यप्रदेश पुलिस की डायल-112 सेवा आमजन, विशेषकर असहाय एवं जरूरतमंदों की सुरक्षा हेतु सदैव तत्पर, संवेदनशील एवं प्रतिबद्ध है।