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सतर्कता और संवेदनशीलता की मिसाल: पुलिसकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से बची जिंदगी

मध्यप्रदेश पुलिस की संवेदनशीलता और दक्षता का उत्कृष्ट उदाहरण आरक्षकों ने सीपीआर देकर बचाई आगंतुक की जान पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने आरक्षकों को पुरस्कृत करने की घोषणा की समय पर दिए गए सीपीआर से अचेत आगंतुक को मिला नया जीवन भोपाल मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा पुलिसकर्मियों को नियमित रूप से प्रदान किए जाने वाले सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) प्रशिक्षण का सकारात्मक परिणाम लगातार सामने आ रहे है। इसी के परिणामस्‍वरूप आज पुलिस आयुक्त कार्यालय, भोपाल में पदस्थ दो आरक्षकों ने त्वरित सूझबूझ, तत्परता एवं सीपीआर कौशल से एक अचेत नागरिक को समय रहते जीवनरक्षक सहायता प्रदान कर उसकी जान बचाई। इस सराहनीय कार्य के लिए पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने दोनों पुलिसकर्मियों को पुरस्कृत किए जाने की घोषणा की है। प्राप्त जानकारी के अनुसार कार्यालय पुलिस आयुक्त, नगरीय पुलिस भोपाल में एक आगंतुक अचानक अस्वस्थ होकर अचेत अवस्था में जमीन पर गिर पड़ा। घटना को देखते हुए वहां मौजूद चालक आरक्षक क्रमांक 858 मुकेश साहू एवं गनमैन आरक्षक क्रमांक 3685 रंजीत रघुवंशी ने तत्काल स्थिति की गंभीरता को समझते हुए बिना समय गंवाए प्राथमिक उपचार प्रारंभ किया। दोनों आरक्षकों ने प्रशिक्षित दक्षता का परिचय देते हुए अचेत व्यक्ति को तत्काल सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) देना शुरू किया। उन्होंने बारी-बारी से लगातार सीपीआर प्रदान किया, जिसके परिणामस्वरूप कुछ ही समय में आगंतुक को होश आ गया। प्राथमिक उपचार के उपरांत उसे बेहतर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य लाभ के लिए अस्पताल भेजा गया। उल्‍लेखनीय है कि मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा समय-समय पर पुलिसकर्मियों को सीपीआर एवं अन्य आपातकालीन जीवनरक्षक तकनीकों का प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है, ताकि दुर्घटना, हृदयाघात अथवा अन्य आपात स्थितियों में नागरिकों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जा सके। आज की यह घटना ऐसे प्रशिक्षणों की उपयोगिता और प्रभावशीलता का उत्कृष्ट उदाहरण है। मध्यप्रदेश पुलिस नागरिकों की सुरक्षा एवं सेवा के अपने संकल्प के अनुरूप कानून-व्यवस्था के साथ-साथ आपात परिस्थितियों में मानवीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए भी निरंतर प्रतिबद्ध है।  

सुपोषण की दिशा में नई पहल, विदिशा का ‘पोषण संजीवनी अभियान’ बना प्रदेश के लिए मिसाल

प्रदेश में सुपोषण का नया रोडमैप विदिशा के पोषण संजीवनी अभियान ने पेश की राज्य स्तरीय मिसाल भोपाल प्रदेश को कुपोषण मुक्त बनाने के लिए निरंतर अभिनव और नीतिगत प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में विदिशा जिले से सफलता की एक ऐसी गौरवशाली गाथा सामने आई है, जिसने पूरे राज्य के सामने प्रशासनिक सूझबूझ और जनभागीदारी का एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के 'स्वस्थ मध्यप्रदेश' के संकल्पों को जमीनी धरातल पर उतारते हुए विदिशा जिला प्रशासन द्वारा शुरू किए गए 'पोषण संजीवनी अभियान' ने गंभीर कुपोषण के खिलाफ एक निर्णायक और प्रभावी जंग छेड़ दी है। यह अभियान इस बात का जीवंत प्रमाण बन गया है कि जब जिला प्रशासन और समाज की संवेदनशील ताकतें एक साथ कदम बढ़ाती हैं, तो कठिन से कठिन सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का समाधान सहज संभव हो जाता है। अमूमन यह देखा जाता है कि पोषण पुनर्वास केंद्रों (एनआरसी) में उपचार के बाद जब बच्चे घर लौटते हैं, तो परिवारों की सीमित आर्थिक क्षमता और माताओं में पोषण संबंधी जागरूकता की कमी के कारण वे दोबारा कुपोषण चक्र में फंस जाते हैं। जून 2025 में हुए एक व्यापक सर्वे के दौरान जिले में 1,307 गंभीर कुपोषित बच्चों की पहचान होने पर समस्या की गंभीरता और स्पष्ट हो गई। इसी चुनौती को एक बड़े अवसर में बदलते हुए विदिशा जिला कलेक्टर अंशुल गुप्ता के नेतृत्व में 'पोषण संजीवनी अभियान' की परिकल्पना की गई, जिसका मूल ध्येय बच्चों का तात्कालिक उपचार नहीं बल्कि उनका दीर्घकालिक सुपोषण सुनिश्चित करना था। अभियान के तहत प्रत्येक चिन्हित गंभीर कुपोषित बच्चे को तीन महीने तक अतिरिक्त पोषण देने के लिए ₹3000 मूल्य की विशेष 'सुपोषण किट' प्रदान की जा रही है। उच्च गुणवत्तायुक्त पौष्टिक तत्वों से भरपूर इस किट में दो किलो मूंगदाल, एक किलो बेसन, पंद्रह सौ ग्राम मुरमुरा, एक लीटर खाद्य तेल, एक किलो शुद्ध घी, डेढ़ किलो मूंगफली, एक किलो गुड़ पाउडर, दो किलो मल्टीग्रेन आटा, एक किलो सत्तू, दो किलो चावल और पांच सौ ग्राम तिल जैसी अत्यंत पौष्टिक सामग्रियां शामिल की गई हैं। यह संतुलित आहार बच्चों को प्रतिदिन लगभग 750 अतिरिक्त कैलोरी प्रदान करता है, जो उनके शारीरिक विकास के लिए संजीवनी साबित हो रहा है। इस पूरे अभियान की सफलता के पीछे जनभागीदारी एक प्रमुख कारण बना। इस पुनीत कार्य में समाज के विभिन्न वर्गों, स्थानीय व्यापारियों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने अभूतपूर्व संवेदनशीलता का परिचय दिया। समाज के सामूहिक प्रयासों से देखते ही देखते ₹39.21 लाख की सम्मानजनक राशि स्वेच्छा से एकत्र हो गई, जिसके माध्यम से अब तक सभी 1,307 बच्चों तक सुपोषण किट पहुंचाई जा चुकी है। यह जनसहयोग इस बात का सशक्त प्रतीक है कि समाज अपने नौनिहालों के स्वास्थ्य के प्रति कितना सजग और उत्तरदायी है। तकनीक और जमीनी निगरानी से सफल परिणाम प्रशासन ने केवल राशन वितरण तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि माताओं के व्यवहार में स्थायी बदलाव लाने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग के जमीनी अमले को पूरी मुस्तैदी से काम पर लगाया। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा माताओं को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सामग्रियों से सरल और पौष्टिक व्यंजन जैसे लड्डू, हलवा और सत्तू पेय बनाने की विधियों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इसके साथ ही, बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और आनंद को ध्यान में रखते हुए उन्हें खिलौना किट और स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के लिए टिफिन व पानी की बोतलें भी उपहार स्वरूप दी गईं। तकनीक और कड़े पर्यवेक्षण के मोर्चे पर भी यह मॉडल बेहद सुदृढ़ है। 'पोषण ट्रैकर' ऐप के माध्यम से प्रत्येक बच्चे के चयन से लेकर उसकी शारीरिक प्रगति का संपूर्ण डिजिटल रिकॉर्ड संधारित किया जा रहा है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा नियमित रूप से घर-घर जाकर बच्चों की वृद्धि निगरानी की गई। वहीं विभाग के पर्यवेक्षक लगातार बच्चों का वजन मापकर उनकी वास्तविक स्थिति का जमीनी आकलन कर रहे हैं। 63%  से अधिक बच्चे हुए सामान्य इस बेहद सुनियोजित और समन्वित प्रयास के जो परिणाम निकलकर आए हैं, वे राज्य स्तर पर बेहद उत्साहजनक और प्रेरणादायी हैं। जिले के कुल 1,307 कुपोषित बच्चों में से 772 बच्चे पूरी तरह स्वस्थ होकर सामान्य श्रेणी में आ चुके हैं, जिससे 63.02% की उल्लेखनीय और ऐतिहासिक रिकवरी दर दर्ज की गई है। यह शानदार सफलता इस अभियान को मध्यप्रदेश के अन्य जिलों के लिए भी एक अनुकरणीय 'रोल मॉडल' के रूप में स्थापित करती है। यह अभियान अब एक प्रशासनिक पहल से आगे बढ़कर विदिशा में एक व्यापक जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। जिला प्रशासन के सशक्त नेतृत्व में अब स्वयंसेवी संस्थाओं, प्रबुद्ध समाज सेवियों एवं विभिन्न सरकारी विभागों की सक्रिय अंतर-विभागीय भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। विभाग द्वारा इन गंभीर कुपोषित बच्चों की सतत और गहन निगरानी की जा रही है ताकि परिवर्तन केवल कागजी आंकड़ों तक सीमित न रहे, बल्कि हर बच्चे के स्वस्थ भविष्य के संकल्प में बदले। भविष्य की तैयारियों को लेकर भी सरकार और प्रशासन की प्रतिबद्धता स्पष्ट दिखाई देती है। आगामी तिमाही के लिए 650 नए गंभीर कुपोषित बच्चों को इस अभियान से जोड़कर कुपोषण मुक्त करने का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) के तहत एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अडाणी फाउंडेशन के सहयोग से जून माह में लटेरी, सिरोंज एवं कुरवाई जैसी दूरस्थ परियोजनाओं के चिन्हित गंभीर कुपोषित बच्चों के बीच 500 अतिरिक्त सुपोषण किट के वितरण का लक्ष्य रखा गया है। विदिशा का यह सुपोषण मॉडल यह संदेश देता है कि जब शासन, प्रशासन, समाज और संस्थाएं एकजुट होकर पूरी संवेदनशीलता से कार्य करते हैं, तो कुपोषण जैसी सामाजिक बुराई के खिलाफ जीत सुनिश्चित हो जाती है।

विदेश में पढ़ाई का सपना हुआ साकार! छात्रवृत्ति योजना से बालाघाट के राजवर्धन का LSE में चयन

पिछड़ा वर्ग विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति योजना दे रही विदेश अध्ययन के सपने को उड़ान बालाघाट के राजवर्धन का ‘लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स’ में चयन मुख्यमंत्री डॉ. यादव और राज्यमंत्री श्रीमती गौर का जताया आभार भोपाल बालाघाट की वारासिवनी तहसील के ग्राम सांवगी निवासी राजवर्धन राणा ने अपनी प्रतिभा और लगन के बल पर पूरे प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। राजवर्धन का चयन इंग्लैंड की प्रसिद्ध शिक्षण संस्था ‘द लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एंड पॉलिटिकल साइंस’ में ‘मास्टर ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन’ पाठ्यक्रम के लिए हुआ है। ग्रामीण परिवेश से निकलकर वैश्विक स्तर की इस प्रतिष्ठित संस्था तक पहुँचने में मध्यप्रदेश शासन की 'पिछड़ा वर्ग विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति योजना' ने अहम भूमिका निभाई है। आर्थिक रूप से सीमित किंतु होनहार विद्यार्थियों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर की शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित 'पिछड़ा वर्ग विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति योजना' के तहत राज्य शासन राजवर्धन को पूर्ण वित्तीय सहयोग प्रदान कर रहा है। पाठ्यक्रम के प्रथम वर्ष की फीस के रूप में 40 लाख 70 हजार 736 रुपये की सहायता राशि स्वीकृत की गई है। योजना के प्रावधानों के अनुसार निर्वाह भत्ता (लिविंग अलाउंस), आकस्मिकता भत्ता, बीमा राशि और हवाई यात्रा का किराया भी राज्य शासन द्वारा वहन किया जा रहा है। राजवर्धन राणा ने अपनी इस सफलता पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर समेत पूरे प्रशासन का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि इस दूरदर्शी योजना के बिना उनके लिए इतने बड़े संस्थान में पढ़ने का सपना साकार करना संभव नहीं था। राजवर्धन ने कहा यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, परिश्रम निष्ठापूर्वक किया जाए और शासन की योजनाओं का समुचित लाभ उठाया जाए, तो सीमित संसाधन सफलता के मार्ग में बाधा नहीं बन सकते। वे भविष्य में उच्च शिक्षा प्राप्त कर समाज में सकारात्मक बदलाव लाना चाहते हैं। राजवर्धन जैसे कई छात्र विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति योजना के ज़रिए विदेश में पढ़ाई के अपने सपनों को साकार कर रहे हैं। इस योजना के माध्यम से मध्यप्रदेश सरकार उन मेधावी और होनहार युवाओं को एक मजबूत आर्थिक संबल प्रदान करती है, जो प्रतिभा के धनी हैं, लेकिन आर्थिक सीमाओं के कारण अंतर्राष्ट्रीय स्तर की उच्च शिक्षा प्राप्त करने से वंचित रह जाते हैं। योजना के बारे में जानिए पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा संचालित ‘पिछड़ा वर्ग विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति योजना’ प्रदेश के युवाओं को वैश्विक मंच पर स्थापित करने का एक सशक्त माध्यम है। इस योजना के अंतर्गत चयनित विद्यार्थियों को विदेश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में पोस्ट-ग्रेजुएशन, पीएचडी या रिसर्च की पढ़ाई के लिए ट्यूशन फीस का भुगतान शासन द्वारा किया जाता है। पढ़ाई के खर्च के साथ-साथ रहने और यात्रा का खर्च भी सरकार वहन करती है। योजना में निर्वाह भत्ता (लिविंग अलाउंस), आकस्मिक व्यय, स्वास्थ्य बीमा, वीज़ा शुल्क और विदेश जाने-आने का हवाई यात्रा (इकोनॉमी क्लास) का खर्च भी शामिल है। योजना के लिए पात्रता     छात्र-छात्रा मध्यप्रदेश के मूल निवासी और पिछड़ा वर्ग श्रेणी (नॉन क्रीमी लेयर) के अंतर्गत आते हों।     पिछली परीक्षा प्रथम श्रेणी (कम से कम 60% अंक) के साथ उत्तीर्ण की हो।     आवेदक की आयु 35 वर्ष से कम हो।     विद्यार्थी ने विदेश के किसी मान्यता प्राप्त और प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय/संस्थान में प्रवेश प्राप्त कर लिया हो।  

रेलवे का बड़ा प्लान: मांगलिया स्टेशन को जंक्शन बनाने की तैयारी तेज, ट्रैक से गुड्स शेड तक शुरू हुए काम

इंदौर  इंदौर से बुधनी को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण रेल परियोजना के तहत मांगलिया गांव रेलवे स्टेशन को बड़े जंक्शन के रूप में विकसित किया जा रहा है। स्टेशन पर एक ओर यात्री की सुविधाओं को देखते हुए विस्तार का काम चल रहा है। वहीं, दूसरी ओर माल ढुलाई क्षमता बढ़ाने पर भी ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। स्टेशन परिसर में कई निर्माण कार्य तेजी से चलते दिखाई दिए, लेकिन अभी भी कई काम अधूरे हैं। यात्रियों को मूलभूत सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है। नईदुनिया की टीम ने मौके पर पहुंचकर ग्राउंड जीरो पर काम की स्थिति देखी। टीम मांगलिया स्टेशन पहुंची तो प्लेटफार्म के हिस्से का निर्माण काफी हद तक पूरा नजर आया। नया फुट ओवरब्रिज (एफओबी) भी लगभग तैयार हो चुका है। हालांकि, स्टेशन परिसर में बनने वाला यात्री और गुड्स शेड अभी अधूरा है। लोहे का स्ट्रक्चर खड़ा कर दिया गया है, लेकिन उस पर छत नहीं डाली गई है। गर्मी के मौसम में यात्री खुले में ट्रेन का इंतजार करने को मजबूर हैं। आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार के अनुसार, प्रस्तावित कार्यों में विभिन्न गुड्स शेड्स पर आल वेदर एप्रोच रोड, पीसीसी फ्लोरिंग, सर्कुलेशन एवं हैंडलिंग एरिया का विकास, कवर शेड निर्माण, हाई मास्ट लाइट, पेयजल सुविधा, महिला एवं पुरुष विश्राम कक्ष, शौचालय ब्लाक, गुड्स ऑफिस एवं ट्रेडर्स रूम जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। मांगलिया गांव गुड्स शेड पर अतिरिक्त हाई मास्ट लाइट, कवर शेड, महिलाओं के लिए विश्राम कक्ष एवं शौचालय तथा प्लेटफार्म क्षेत्र के सुधार कार्य किए जाएंगे। पेट्रोलियम और सोयाबीन आपूर्ति के लिए मजबूत स्टेशन के दोनों ओर नए गुड्स शेड बनाए जा रहे हैं, ताकि माल ढुलाई का दबाव संभाला जा सके। यहां पेट्रोलियम डिपो और सोयाबीन बाय-प्रोडक्ट्स की आपूर्ति के लिए माल परिवहन सुविधा को मजबूत किया जा रहा है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार मांगलिया आने वाले समय में माल ढुलाई का बड़ा केंद्र बन सकता है। इसके लिए ट्रैक जुड़ाव व संपर्क और लादना व भरने की सुविधाओं को बढ़ाया जा रहा है। 10 नए क्रासिंग एवं सात हाल्ट इस रेल मार्ग पर 10 नए क्रासिंग और सात नए हाल्ट स्टेशन विकसित किए जा रहे हैं। वहीं, आगे एक फ्लाईओवर भी बनाया जाना है, जिसके लिए पिलर निर्माण का काम शुरू हो चुका है। स्टेशन परिसर में बनने वाले कुछ कमरों का निर्माण अभी अधूरा है। कुल मिलाकर मांगलिया स्टेशन पर काम तेजी से चल रहा है, लेकिन यात्रियों को पूरी सुविधाएं मिलने में अभी समय लगेगा। इंदौर-बुधनी रेल लाइन पर जारी अर्थवर्क इंदौर-बुधनी रेल लाइन पर भी काम तेजी से जारी है। स्टेशन के आगे रेलवे क्रासिंग के पास नई लाइन डालने के लिए अर्थवर्क किया जा रहा है। मौके पर बड़ी मशीनों से मिट्टी भराई और जमीन समतल करने का काम चलता दिखाई दिया। कई स्थानों पर गड्ढे खोदकर आधार मजबूत किया जा रहा है। रेलवे स्लीपर भी साइट पर पहुंच चुके हैं और ट्रैक बिछाने की तैयारी शुरू हो गई है। हालांकि, अभी कुछ स्थानों पर किसानों के विरोध के कारण बीच-बीच में काम अटका हुआ है। इसके आगे देवास जिले में भी काम चल रहा है।

संजय गांधी थर्मल पावर स्टेशन की ऐतिहासिक उपलब्धि, यूनिट-3 ने 100 दिन लगातार किया बिजली उत्पादन

संजय गांधी थर्मल पॉवर स्टेशन का शिखर प्रदर्शन: यूनिट-3 ने लगातार 100 दिन बिजली उत्पादन कर रचा इतिहास भोपाल प्रदेश को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी के संजय गांधी थर्मल पॉवर स्टेशन बिरसिंगपुर (SGTPS) ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। स्टेशन की यूनिट नंबर 3 ने बीते 27 फरवरी से बिना रुके लगातार 100 दिनों तक बिजली पैदा करने का स्वर्णिम आंकड़ा छू लिया है। गौरतलब है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान भी कंपनी की कुल 13 उत्पादन इकाइयों ने 100 से अधिक दिनों तक लगातार निर्बाध बिजली उत्पादन करने का रिकॉर्ड बनाया था। इस शानदार ट्रैक रिकॉर्ड में अकेले संजय गांधी ताप विद्युत गृह बिरसिंगपुर का दबदबा रहा; जहां इसी यूनिट-3 ने पहले भी एक बार यह मुकाम हासिल किया था, वहीं स्टेशन की यूनिट-4 दो बार और यूनिट-5 ने एक बार इस ऐतिहासिक उपलब्धि को अपने नाम दर्ज कराया था। सटीक परिचालन से गढ़े गए दक्षता के नए मानदंड इस रिकॉर्ड परिचालन अवधि के दौरान यूनिट ने 89.18 प्रतिशत का प्लांट अवेलेबिलिटी फैक्टर (PAF) बनाए रखा, जो बिजली उत्पादन के लिए इस इकाई की उच्च उपलब्धता और तकनीकी मजबूती को प्रमाणित करता है। इसके साथ ही, इकाई ने 80.07 प्रतिशत का प्लांट लोड फैक्टर (PLF) दर्ज कर अपनी वास्तविक उत्पादन क्षमता के कुशल उपयोग का लोहा मनवाया। ऊर्जा दक्षता के मोर्चे पर भी प्रबंधन का प्रदर्शन उत्कृष्ट रहा, जहां आंतरिक सहायक विद्युत खपत (APC) को महज 9.17 प्रतिशत पर सीमित रखकर बिजली की बड़ी बचत की गई। उत्पादन इकाइयाँ उच्चतम विश्वसनीयता के साथ काम करने में सक्षम मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी के प्रबंध संचालक मनजीत सिंह ने इस गौरवमयी उपलब्धि पर गहरी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए पूरी टीम की सराहना की। उन्होंने कहा, "हमारे इंजीनियरों और तकनीकी टीम ने उत्कृष्ट संधारण (Maintenance) और कुशल संचालन (Operation) के दम पर बार-बार यह साबित किया है कि कंपनी की बिजली उत्पादन इकाइयाँ उच्चतम विश्वसनीयता के साथ काम करने में पूरी तरह सक्षम हैं। यही वजह है कि हमारी इकाइयाँ लगातार राष्ट्रीय स्तर के कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं और उत्कृष्ट प्रदर्शन का एक बेहद मजबूत रिकॉर्ड बना रही हैं।" उन्होंने कहा यह उपलब्धि तकनीकी कार्मिकों एवं ठेका श्रमिकों की सतत निगरानी, समर्पण तथा समयबद्ध गुणवत्तापूर्ण संधारण का परिणाम है। डायरेक्टर टेक्न‍िकल सुबोध निगम ने कहा कि यह सफलता पूरी टीम के आपसी तालमेल, सक्रिय कार्यप्रणाली और संकट के समय त्वरित फैसलों का नतीजा है। उन्होंने विश्वास जताया कि हमारे सभी विद्युत गृह भविष्य में भी प्रदेश को निर्बाध और भरोसेमंद बिजली देने में हमेशा आगे रहेंगे।  

HPV टीकाकरण में मध्यप्रदेश ने बनाया रिकॉर्ड, 7.63 लाख से अधिक बालिकाओं को लग चुका है टीका

मध्यप्रदेश 7.63 लाख से अधिक बालिकाओं का एचपीवी टीकाकरण कर देश के शीर्ष राज्यों में शामिल भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि मध्यप्रदेश ने एचपीवी टीकाकरण अभियान में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल कर यह सिद्ध कर दिया है कि जनभागीदारी, स्वास्थ्य अमले की प्रतिबद्धता और प्रभावी नेतृत्व के बल पर बड़े से बड़े जनस्वास्थ्य अभियानों को समय से पहले सफल बनाया जा सकता है। उन्होंने अभियान से जुड़े चिकित्सकों, नर्सिंग स्टॉफ, आशा एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, एएनएम, शिक्षकों, जिला प्रशासन तथा स्वास्थ्य विभाग के सभी अधिकारियों-कर्मचारियों के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें सफलता के लिये बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह अभियान प्रदेश की बेटियों को सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचाकर सुरक्षित भविष्य देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 28 फरवरी 2026 को देशव्यापी एचपीवी(ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) टीकाकरण अभियान का शुभारंभ किया गया था। महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से प्रारंभ किए गए इस विशेष अभियान में मध्यप्रदेश शीर्ष राज्यों में शामिल है। स्वास्थ्य अमले, सहयोगी विभागों की प्रतिबद्धता एवं सतत मॉनिटरिंग के परिणामस्वरूप प्रदेश में 7.63 लाख से अधिक पात्र बालिकाओं का सफलतापूर्वक एचपीवी टीकाकरण किया जा चुका है। यह अभियान मूल रूप से 90 दिनों के लिए निर्धारित था, लेकिन मध्यप्रदेश ने निर्धारित लक्ष्य को मात्र 60 दिनों में ही पूर्ण कर लिया जो प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की दक्षता और प्रभावी क्रियान्वयन का उत्कृष्ट उदाहरण है। सर्वाइकल कैंसर भारत में महिलाओं में होने वाला दूसरा सबसे सामान्य कैंसर है तथा इसके अधिकांश मामलों का प्रमुख कारण एचपीवी संक्रमण होता है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार यह ऐसा कैंसर है जिसे प्रभावी टीकाकरण के माध्यम से काफी हद तक रोका जा सकता है। एचपीवी वैक्सीन बालिकाओं को भविष्य में इस गंभीर बीमारी से सुरक्षा प्रदान करने का सुरक्षित, प्रभावी एवं वैज्ञानिक उपाय है। अभियान की सफलता में स्वास्थ्य विभाग, स्कूल शिक्षा विभाग, जिला प्रशासन, जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों, आशा एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं तथा अभिभावकों की सक्रिय सहभागिता रही। प्रदेश के सभी जिलों में व्यापक जनजागरूकता, सूक्ष्म कार्ययोजना (माइक्रो प्लानिंग) एवं सतत मॉनिटरिंग के माध्यम से यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल हुई है।  

लंबे बिजली कट पर अब भरपाई करेगी कंपनी, 4 घंटे से अधिक बाधित रही सप्लाई तो मिलेगा हर्जाना

भोपाल  मध्य प्रदेश विद्युत विभाग ने जबलपुर में बिजली उपभोक्ताओं को एक बड़ी खुशखबरी दी है। शहर में 4 घंटे से अधिक बिजली आपूर्ति बाधित होने पर उपभोक्ताओं को मुआवजा दिया जाएगा। बिजली सप्लाई बंद होने के कारणों का पता लगाने के बाद बिजली विभाग मुआवजे की राशि निर्धारित करेगा। प्रदेश के लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत की खबर है। राज्य में जल्द ही ऐसा नया नियम लागू होने वाला है, जिसके बाद बिना सूचना के होने वाली बिजली कटौती पर उपभोक्ताओं को मुआवजा पाने के लिए अलग से चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। बिजली कंपनी की गलती साबित होने पर मुआवजे की प्रक्रिया खुद-ब-खुद शुरू होगी। यानी अब घंटों बिजली गुल रहने और शिकायतों पर सुनवाई न होने की समस्या पर लगाम लग सकती है। अब खुद मिलेगा मुआवजा सरकार नया इलेक्ट्रिसिटी बिल, 2025 और राष्ट्रीय विद्युत नीति 2026 लेकर आ रही है। इसमें इस व्यवस्था को बहुत कड़ा और साफ कर दिया गया है। इस नए संशोधन बिल की धारा 58 में बदलाव करके बिजली सप्लाई की क्वालिटी और उसे ठीक करने का एक समय तय किया जा रहा है। अच्छी बात यह है कि अब इसके लिए आपको दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे। आपके इलाके में तय समय से ज्यादा देर तक बिजली कटी, तो मुआवजा अपने आप आपके बिजली खाते या अगले महीने के बिल में जोड़ दिया जाएगा। इससे बिजली उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी। स्मार्ट मीटर से खुलेगी कंपनियों की पोल अक्सर बिजली कंपनियां यह कहकर बच जाती हैं कि बिजली सिर्फ 10-15 मिनट के लिए ही कटी थी। अब ऐसा नहीं चल पाएगा। जहां-जहां भी स्मार्ट मीटर लग रहे हैं, वहां बिजली कब कटी और कब वापस आई, इसका एक-एक सेकंड का डेटा सीधे कंप्यूटर सिस्टम में दर्ज हो जाएगा। इस डिजिटल रिकॉर्ड की वजह से कंपनियां झूठ नहीं बोल पाएंगी। साथ ही उपभोक्ताओं को उनका हक आसानी से मिल जाएगा। अभी ऐसी स्थिति अभी विद्युत (उपभोक्ता अधिकार) नियम, 2020 के तहत बिजली कंपनियों ने अघोषित या तय सीमा से ज्यादा बिजली कटौती पर उपभोक्ताओं को हर्जाना देने का प्रावधान तय किया है। सामान्य फॉल्ट जैसे फ्यूज उडना या तार टूटना को 1 से 3 घंटे के भीतर ठीक करना होता है। ग्रामीण क्षेत्रों में 4 घंटे का समय तय है। ट्रांसफार्मर जलने पर 12 घंटे में आपूर्ति का समय है। प्रतिघंटा 25 रुपए से 100 रुपए तक है। इस संशोधन से स्मार्ट मीटर दिलाएगा मुआवजा नए इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल, 2025 और राष्ट्रीय विद्युत नीति 2026 में इस व्यवस्था को और स्पष्ट बनाया जा रहा है। नए संशोधन बिल की धारा 58 में संशोधन के तहत बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता और बहाली की बेसलाइन तय की जा रही है। स्मार्ट मीटर में क्षेत्र की बिजली कटौती का डेटा सीधे सिस्टम में दर्ज होगा। ग्रामीण इलाकों में 4 घंटे और शहरों में 2 घंटे के भीतर बिजली नहीं आई, तो स्वतः मुआवजा मिलना शुरू हो जाएगा, जो सीधे उनके बिजली खाते या अगले बिल में क्रेडिट होगा। बिल में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जहां-जहां स्मार्ट मीटर लग रहे हैं, वहां बिजली कटने और जुड़ने का समय सीधे कंप्यूटर में दर्ज होगा, जिससे कंपनियों को यह झूठ बोलने का मौका नहीं मिलेगा कि बिजली सिर्फ 10 मिनट के लिए कटी थी। बिजली गुल हो तो ये रखें ध्यान बिजली कटते ही तुरंत कंपनी के टोल-फ्री नंबर या वाट्सऐप पर शिकायत दर्ज कराएं और शिकायत नंबर रखें। बिजली कब कटी और कितने घंटे बाद आई, इसका रिकॉर्ड रखें। कंपनी तय समय से ज्यादा बिजली काटने के बाद भी बिल में मुआवजा नहीं जोड़ती। उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। 45 दिनों में समस्या का समाधान करना अनिवार्य है। बिजली सुधारने के लिए अभी के नियम? विद्युत नियम, 2020 के तहत बिजली कंपनियों के लिए अलग-अलग तरह के फॉल्ट को ठीक करने का एक समय तय किया गया है। कंपनियां इस समय के अंदर बिजली बहाल नहीं कर पाती हैं, तो उन्हें हर घंटे के हिसाब से 25 रुपए से लेकर 100 रुपए तक का हर्जाना देना होगा। खराबी का प्रकार  शहर के लिए समय सीमा  ग्रामीण क्षेत्र के लिए समय सीमा  सामान्य फॉल्ट (जैसे- फ्यूज उड़ना या तार टूटना) 1 से 3 घंटे 4 घंटे ट्रांसफार्मर जलना या खराब होना 12 घंटे 12 घंटे बिना पूर्व सूचना के बिजली कटना 2 घंटे 4 घंटे यदि आपके इलाके में बिना किसी पहली सूचना के 4 घंटे से अधिक समय तक बिजली आपूर्ति  बंद रहती है, तो आप अभी भी उपभोक्ता फोरम से मुआवजे की मांग कर सकते हैं। बिजली गुल होने पर इन 4 बातों का रखें ध्यान बिजली कटते ही सबसे पहले बिजली कंपनी के टोल-फ्री नंबर या व्हाट्सएप नंबर पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं। शिकायत दर्ज होने के बाद मिलने वाले कंप्लेंट नंबर को कहीं लिख कर सुरक्षित रख लें। बिजली किस समय कटी थी और कितने घंटे बाद वापस आई। इसका अपने पास एक रिकॉर्ड जरूर रखें। अगर कंपनी तय समय से ज्यादा बिजली काटने के बाद भी आपके बिल में मुआवजा नहीं जोड़ती है, तो बिजली उपभोक्ता, उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम में अपनी शिकायत दे सकते हैं। इस फोरम के लिए 45 दिनों के भीतर आपकी समस्या का समाधान करना कानूनी रूप से अनिवार्य है। मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग के सचिव उमाकांत पांड़ो ने कहा कि बिजली से जुड़े जो भी नियम तय हैं, उनका पूरी तरह पालन किया जाएगा। नए बिजली बिल के तहत यदि उपभोक्ताओं को शिकायत करने या मुआवजा पाने का अधिकार मिलता है, तो पात्र लोगों को उसका फायदा जरूर दिया जाएगा।

BRICS सम्मेलन की मेजबानी करेगा इंदौर, कृषि क्षेत्र के मुद्दों पर जुटेंगे 20 देशों के प्रतिनिधि

इंदौर  मध्य प्रदेश की व्यावसायिक राजधानी इंदौर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर के एक बेहद बड़े और प्रतिष्ठित आयोजन का मुख्य केंद्र बनने जा रही है। जी-20 शिखर सम्मेलन और प्रवासी भारतीय दिवस की शानदार सफलता के बाद अब इस साफ-सुथरे शहर को 'ब्रिक्स' (BRICS) देशों की बेहद महत्वपूर्ण कृषि बैठक की मेजबानी करने का गौरव मिला है। इस अंतरराष्ट्रीय समागम में भारत सहित दुनिया के 11 प्रमुख सदस्य देशों के वरिष्ठ प्रतिनिधि, कृषि विशेषज्ञ और केंद्रीय मंत्री शामिल होने जा रहे हैं। आपको बता दें कि यह आयोजन इसलिए भी बेहद खास है क्योंकि ब्रिक्स देशों के पास पूरी दुनिया की करीब 42 प्रतिशत कृषि योग्य भूमि मौजूद है। ऐसे में यह शक्तिशाली समूह खेती-किसानी से जुड़ी वर्तमान वैश्विक चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से विचार-विमर्श करेगा। सोमवार से ही विदेशी मेहमानों और राजनयिकों का इंदौर आगमन शुरू हो जाएगा। बैठक के साथ-साथ इन विदेशी प्रतिनिधियों को मालवा की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं से रूबरू कराने की भी विशेष तैयारी की गई है। इसके तहत उनके भ्रमण कार्यक्रम में इंदौर के मशहूर खान-पान केंद्र 'छप्पन दुकान', ऐतिहासिक 'राजवाड़ा पैलेस' और पारंपरिक 'ग्रामीण हाट-बाजार' जैसे प्रमुख दर्शनीय स्थलों को शामिल किया गया है। यह महा-मंथन एक ऐसे नाजुक समय में होने जा रहा है जब पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन (क्लाइमेट चेंज), वैश्विक खाद्य संकट और तेजी से बढ़ती आबादी जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मंच पर पर्यावरण को बिना नुकसान पहुंचाए कृषि उत्पादन बढ़ाने और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर व सीमित उपयोग पर जो भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाएंगे, वे आने वाले वर्षों में वैश्विक कृषि रणनीतियों और नीतियों को बदलने में बड़ी भूमिका निभाएंगे। तकनीक, डिजिटल खेती और किसानों की आय पर रहेगा मुख्य फोकस आगामीआज 9 जून से शुरू होने जा रही ब्रिक्स कृषि कार्य समूह (AWG) की इस तीन दिवसीय बैठक में कई तकनीकी और नीतिगत विषयों पर गंभीर चर्चा की जाएगी। वैश्विक खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करना, बदलते मौसम का फसलों पर पड़ने वाला असर, कृषि अनुसंधान को बढ़ावा देना, आधुनिक तकनीक का विस्तार और किसानों की आर्थिक स्थिति व आय को मजबूत करने के उपाय इस बैठक के मुख्य एजेंडे में शामिल रहेंगे। बदलते दौर को देखते हुए इस बैठक में पारंपरिक खेती के बजाय आधुनिक विषयों पर विशेष मंथन किया जाएगा। इसके तहत डिजिटल कृषि (डिजिटल एग्रीकल्चर), प्रिसिजन फार्मिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग और डेटा आधारित फसल प्रबंधन जैसी अत्याधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल पर बात होगी। वैज्ञानिक और नीति-निर्धारक यह साझा रणनीति तैयार करेंगे कि किस तरह इन तकनीकों के दम पर कम से कम संसाधनों, कम पानी और कम लागत में अधिक से अधिक पैदावार हासिल की जा सके। इसके अलावा, अनियमित बारिश और बढ़ते तापमान के बीच खेती को टिकाऊ, पर्यावरण-अनुकूल और घाटे से उबारकर लाभकारी बनाने के लिए सभी सदस्य देश अपने-अपने सफल अनुभवों को एक-दूसरे के साथ साझा करेंगे। ब्रिक्स समूह की चार प्रमुख प्राथमिकताएं  1. खाद्य सुरक्षा, पोषण-किसानों की आजीविका 2. कृषि व्यापार और आपसी सहयोग 3. जलवायु अनुकूल और सतत कृषि 4. नवाचार, अनुसंधान और साझेदारी  42 फीसदी खाद्य उत्पादन ब्रिक्स देशों के पास केंद्रीय मंत्री शिवराज ने कहा- ब्रिक्स की शुरुआत 2006 में हुई थी और आज 11 सदस्य देशों व 10 साझेदार देशों के साथ यह विश्व के सबसे प्रभावशाली समूहों में से एक बन गया है। वैश्विक नजरिए से यह समूह बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि दुनिया की लगभग 42 फीसदी कृषि भूमि, 68  प्रतिशत कृषि और करीब 42 फीसदी खाद्य उत्पादन इन्हीं ब्रिक्स देशों के पास है। अधिकारियों ने अब तक आठ बैठकें की संवाददाताओं से चर्चा के दौरान शिवराज ने कहा कि अधिकारियों के समूह ने अब तक आठ बैठकें की हैं, जिनमें खाद्य सुरक्षा फिशरीज पशुपालन जैसे विषयों पर विमर्श हुआ है। हमारी हर नीति नवाचार के केंद्र में छोटे जोत वाले किसान रहे हैं, इनकी अपनी समस्याएं हैं। रिसर्च का लाभ इन्हें मिले बाजार तक इनकी पहुंच आसान हो। कृषि क्रेडिट का प्रवाह इनकी तरफ बढ़े। किसानों की आय रोजगार आजीविका और सतत कृषि विकास पर चर्चा होगी। 20 देशों के प्रतिनिधि होंगे शामिल इंदौर में आयोजित हो रहा यह सम्मेलन इसलिए भी खास है क्योंकि पहली बार ब्रिक्स कृषि मंत्रियों की यह बैठक मंत्री स्तर पर आयोजित की जा रही है, जिसमें सदस्य और साझेदार देशों सहित लगभग 20 देशों के प्रतिनिधि शामिल होने जा रहे हैं । भारत की अध्यक्षता में अब तक कृषि कार्य समूह के अंतर्गत 4 सत्रों में 8 सफल बैठकें होंगी। चार वर्गों पर मुख्य फोकस छोटे और सीमांत किसान हमारी हर नीति और सहयोग के केंद्र में रहेंगे। कृषि विकास का वास्तविक अर्थ तभी सिद्ध होगा जब किसानों की आय बढ़ेगी और उनकी आजीविका सुरक्षित होगी। इस बार मुख्य रूप से चार विषयों-खाद्य सुरक्षा, पोषण एवं आजीविका, कृषि व्यापार एवं सहयोग, जलवायु अनुकूलन एवं सतत कृषि, कृषि एवं खाद्य प्रणालियों में नवाचार व साझेदारी को सशक्त बनाने पर विशेष काम किया जा रहा है। भारत पहले भी तीन सम्मेलनों की अध्यक्षता कर चुका इस मंच पर होने वाला सहयोग पूरी दुनिया की खाद्य सुरक्षा को प्रभावित करता है । भारत इससे पहले भी साल 2012, 2016 और 2021 में ब्रिक्स की अध्यक्षता कर चुका है, जिसके दौरान 2016 में 'ब्रिक्स कृषि अनुसंधान मंच' जैसी बड़ी पहल शुरू की गई थी। 'हमारी नीति में छोटे जोत वाले किसान' शिवराज सिंह चौहान ने कहा अधिकारियों के समूह ने अब तक आठ बैठकें की हैं, जिनमें खाद्य सुरक्षा फिशरीज पशुपालन जैसे विषयों पर विमर्श हुआ है। हमारी प्रत्येक नीति नवाचार के केंद्र में छोटे जोत वाले किसान रहे हैं, इनकी अपनी समस्याएं हैं। रिसर्च का लाभ इन्हें मिले बाजार तक इनकी पहुंच आसान हो। कृषि क्रेडिट का प्रवाह इनकी तरफ बढ़े। किसानों की आय रोजगार आजीविका और सतत कृषि विकास पर चर्चा होगी। 20 देशों के प्रतिनिधि होंगे शामिल इस बार इंदौर में आयोजित हो रहा यह सम्मेलन इसलिए भी खास है क्योंकि पहली बार ब्रिक्स कृषि मंत्रियों की यह बैठक मंत्री स्तर पर आयोजित की जा रही है, जिसमें सदस्य और साझेदार देशों सहित लगभग 20 देशों के प्रतिनिधि शामिल होने जा रहे हैं । कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि भारत … Read more

बीएमएचआरसी के डॉक्टरों की बड़ी सफलता, 12 किलो के जटिल ओवरी ट्यूमर की सफल सर्जरी

बीएमएचआरसी में 12 किलो के जटिल ओवरी ट्यूमर की सफल सर्जरी  -बड़ी आंत, पेशाब की नली और प्रमुख रक्त वाहिकाओं के निकट था ट्यूमर, पांच घंटे चला ऑपरेशन  भोपाल   भोपाल स्मारक अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र (बीएमएचआरसी) में अंडाशय के कैंसर (ओवरी कैंसर) से पीड़ित 60 वर्षीय गैस पीड़ित महिला की जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। महिला के शरीर में विकसित ट्यूमर का आकार लगभग 12 किलो तक पहुंच गया था और वह ओवरी से फैलकर पेट के अन्य हिस्सों तक पहुंच चुका था। ट्यूमर के अत्यधिक बड़े आकार और कई महत्वपूर्ण अंगों से चिपके होने के कारण यह सर्जरी अत्यंत जटिल और उच्च जोखिम वाली थी। सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति में लगातार सुधार हुआ और उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है। बीएमएचआरसी के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग में सहायक प्रोफेसर डॉ. सोनवीर गौतम ने बताया कि मरीज पिछले लगभग तीन वर्षों से इस समस्या से जूझ रही थी। शुरुआती दो वर्षों तक बीमारी का पता नहीं चल पाया। बाद में पेट का आकार बढ़ने, भारीपन और तकलीफ होने पर जांच कराई गई। सीटी स्कैन में पता चला कि पेट में अत्यंत बड़ी गांठ मौजूद है, जो बड़ी आंत, पेशाब की नली तथा पेट की प्रमुख रक्त वाहिकाओं के अत्यंत निकट और उनसे चिपकी हुई थी। उन्होंने बताया कि ट्यूमर के कारण मरीज को हर्निया भी हो गया, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई थी। ट्यूमर कई महत्वपूर्ण अंगों से जुड़ा होने के कारण ऑपरेशन के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव का खतरा था। मरीज को मधुमेह (डायबिटीज) भी थी, जिससे सर्जरी का जोखिम और बढ़ गया था। ट्यूमर के कुछ हिस्सों में रक्त प्रवाह प्रभावित होने के कारण संक्रमण और पस बनने की स्थिति भी उत्पन्न हो गई थी। समय पर सर्जरी नहीं होने पर यह संक्रमण गंभीर रूप ले सकता था, जिससे मरीज की जान को खतरा हो सकता था। डॉ. गौतम ने बताया कि करीब पांच घंटे चली इस जटिल सर्जरी के दौरान चिकित्सकों की टीम ने सावधानीपूर्वक ट्यूमर को हटाया। सर्जरी में एनेस्थीशियोलॉजी विभााग में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ संध्या इवने ने भी महत्वपूर्ण सहयोग दिया। सर्जरी करने वाली टीम में सीनियर रेजिडेंट डॉ ऋषि आथ्या, डॉ श्रेया भारद्वाज, डॉ जेश्ना और जूनियय रेजिडेंट डॉ आशीष वैद्य शामिल थे। बीएमएचआरसी की प्रभारी निदेशक डॉ. मनीषा श्रीवास्तव ने कहा कि इस प्रकार की जटिल सर्जरी के लिए उच्च स्तर की विशेषज्ञता, अनुभव और विभिन्न विभागों के समन्वय की आवश्यकता होती है, जो बीएमएचआरसी के विशेषज्ञ चिकित्सकों के पास उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि संस्थान में गंभीर एवं जटिल बीमारियों के लिए उन्नत, समग्र और विशेषज्ञ उपचार सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे क्षेत्र के मरीजों को उपचार के लिए बड़े महानगरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। पैंक्रियाज़ कैंसर मरीज को मिली राहत : बीएमएचआरसी के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग में पैंक्रियाज़ कैंसर से पीड़ित 60 वर्षीय पुरुष की भी जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. सोनवीर गौतम ने बताया कि कैंसर पैंक्रियाज़ से बढ़कर पोर्टल वेन नामक महत्वपूर्ण रक्त वाहिका तक पहुंच गया था, जिससे सर्जरी अत्यंत जोखिमपूर्ण हो गई थी। ऑपरेशन के दौरान छोटी सी चूक भी मरीज के लिए घातक साबित हो सकती थी। चिकित्सकों की टीम ने सावधानीपूर्वक सर्जरी कर ट्यूमर हटाया। आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीज का निःशुल्क उपचार किया गया। सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति में सुधार है और उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है।

मध्यप्रदेश का जल प्रबंधन बना मिसाल, ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान

भोपाल मध्यप्रदेश में जल संरक्षण और जल आत्मनिर्भरता की दिशा में चलाया जा रहा ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ अब वैश्विक स्तर पर पहचान बना रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर संचालित यह अभियान जनभागीदारी आधारित जल संरक्षण का सफल मॉडल बनकर उभरा है, जिसकी सराहना अब अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भी होने लगी है। भोपाल स्थित भारत भवन में आयोजित सात दिवसीय ‘सदानीरा समागम’ में साइप्रस, फिजी, मेक्सिको, नेपाल, त्रिनिदाद एवं टोबैगो तथा इक्वाडोर के राजनयिकों ने हिस्सा लिया। सभी देशों के प्रतिनिधियों ने मध्यप्रदेश के जल संरक्षण मॉडल की सराहना करते हुए इसे वर्तमान समय की सबसे महत्वपूर्ण वैश्विक आवश्यकता बताया और अपने-अपने देशों में इस तरह की पहल लागू करने की इच्छा जताई। साइप्रस के उच्चायुक्त इवागोरस वराईओनाइडेस ने जल संकट को वैश्विक चुनौती बताते हुए जन-जागरूकता आधारित अभियानों की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं फिजी के उच्चायुक्त जगन्नाथ सामी ने जलवायु परिवर्तन को गंभीर चिंता का विषय बताते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल की सराहना की और कहा कि पर्यावरण संरक्षण को लेकर भारत और फिजी के सरोकार समान हैं।  मेक्सिको दूतावास की संस्कृति प्रमुख वनेसा एड्रियन ने जल संरक्षण को साझा वैश्विक जिम्मेदारी बताते हुए नदियों और जल स्रोतों को सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने की अवधारणा की प्रशंसा की। नेपाल दूतावास के प्रथम सचिव दीपक पोरखिरे ने कहा कि यह आयोजन प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारियों का बोध कराता है और भारत-नेपाल की सांस्कृतिक समानताओं को भी मजबूत करता है। त्रिनिदाद एवं टोबैगो के उच्चायुक्त चंद्रदत्त सिंह ने इस पहल को पर्यावरणीय जागरूकता का प्रभावी माध्यम बताया, जबकि इक्वाडोर के डिप्टी चीफ ऑफ मिशन जॉर्ज विनिशियो अनरंगो ने घोषणा की कि वे मध्यप्रदेश के अनुभवों से प्रेरणा लेकर अपने देश में भी जल संरक्षण पर केंद्रित ‘सदानीरा संगम’ जैसा आयोजन करेंगे। मध्यप्रदेश सरकार के अनुसार प्रदेश में अब तक 2 लाख 12 हजार से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण एवं पुनर्जीवन कार्य पूरा किया जा चुका है। सरकार का लक्ष्य इस संख्या को बढ़ाकर 3 लाख 66 हजार तक पहुंचाना है। जनभागीदारी और नवाचार पर आधारित यह अभियान जल संरक्षण के क्षेत्र में मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी नई पहचान दिला रहा है।