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कांग्रेस और लालू यादव पर सम्राट चौधरी का हमला, बोले– बिहार को दशकों तक लूटते रहे

पटना बिहार के उपमुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता सम्राट चौधरी  ने बुधवार को कहा कि राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव और कांग्रेस  ने 55 सालों तक प्रदेश को लूटा, जबकि डबल इंजन सरकार ने बिहार में विकास की नई इबारत लिखी है। सम्राट चौधरी बेगूसराय विधानसभा क्षेत्र के वीरपुर में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) प्रत्याशी कुंदन सिंह (BJP) और खगड़िया विधानसभा क्षेत्र के मारड़ में बब्लू मंडल जनता दल यूनाईटेड (JDU) उम्मीदवार के समर्थन में आयोजित जनसभा में कांग्रेस और राजद पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस और लालू यादव ने मिलकर 55 सालों तक बिहार को लूटा। कांग्रेस ने गरीबों के मसीहा कर्पूरी ठाकुर को गाली दी थी। बिहार यदि पिछड़ा है तो इसका कारण कांग्रेस और राजद है। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि इस बार विधानसभा चुनाव में एक तरफ विनाश है और दूसरी तरफ विकास है। एक तरफ जंगलराज है तो दूसरी तरफ सुशासन है। उन्होंने कहा कि जहां एक ओर महागठबंधन में परिवारवाद हावी है, वहीं दूसरी ओर जदयू ने एक साधारण कार्यकर्ता बब्लू मंडल को प्रत्याशी बनाकर यह साबित किया है कि राजग में कार्यकर्ताओं का सम्मान होता है। राजग शासन में ना हिंदू देखा गया, ना मुसलमान,बस इंसान देखा गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में सबका साथ, सबका विकास की भावना से काम हुआ। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि डबल इंजन सरकार ने बिहार में विकास की नई इबारत लिखी है। उन्होंने कहा कि करीब एक करोड़ लोगों को पक्का मकान मिला, गांवों में 20 घंटे से ज्यादा बिजली मिल रही है। पहले बागमती, गंडक और कोसी में पुल बनने की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी, लेकिन नीतीश कुमार के नेतृत्व में यह सब संभव हुआ। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि 2005 से पहले बिहार की स्थिति बेहद खराब थी।बिजली, सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य सब बदहाल थे। उस समय अपहरण उद्योग फल-फूल रहा था। महिलाएं शाम पांच बजे के बाद घर से निकलने से डरती थीं, लेकिन नीतीश कुमार के सुशासन ने बिहार का चेहरा बदल दिया।उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार की सरकार ने साइकिल और पोशाक योजना से बेटियों को स्कूल तक पहुंचाया, पढ़ाई के अवसर दिए और उन्हें सरकारी नौकरी में 33 प्रतिशत आरक्षण देकर सशक्त किया। पंचायत चुनाव में भी महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण मिला। अब सरकार एक करोड़ 41 लाख महिलाओं को 10 हजार रुपये की पहली किस्त देकर उन्हें स्वावलंबी बना रही है।  

HAM प्रत्याशी पर हमले की निंदा करते हुए मांझी बोले—RJD फैला रही है अराजकता

गया बिहार के गया जिले के टिकारी विधानसभा में बुधवार को प्रचार के लिए पहुंचे हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) के प्रत्याशी एवं पार्टी के वरिष्ठ नेता डॉ. अनिल कुमार पर असामाजिक तत्वों ने हमला कर दिया है, जिसमें उन्हें गंभीर रूप से चोट लगी। वहीं, केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के अध्यक्ष जीतन राम मांझी ने पार्टी के उम्मीदवार अनिल कुमार पर हुए हमले की कड़ी निंदा की है। जीतन राम मांझी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर लिखा, "माननीय विधायक अनिल कुमार जी के ऊपर हुआ हमला विपक्ष के कायरता और हताशा का जीता जागता उदाहरण है। राजद के लोग बिहार को बंगाल बनाने की कोशिश कर रहें है…अनिल जी के उपर चले हर पत्थर का जवाब बिहार की जनता वोट के चोट से देगी।" इससे पहले लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री मोदी पर 'नचनिया' शब्द का इस्तेमाल करने पर केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा, "राहुल गांधी बचकाना व्यवहार कर रहे हैं। उनमें कोई गंभीरता नहीं है…छठ पवित्रता और आध्यात्मिकता का त्योहार है…छठ पूजा करने वालों के लिए 'नचनिया' शब्द का इस्तेमाल कर वह अपने पूर्वजों का भी अपमान कर रहे हैं। गौरतलब है कि बिहार विधानसभा की 243 सीटों के लिए दो चरण में 06 नवंबर और 11 नवंबर को मतदान कराया जाना है। 14 नवंबर को मतगणना होगी और चुनाव की प्रक्रिया 16 नवंबर तक पूरी हो जायेगी। बिहार विधानसभा का वर्तमान कार्यकाल 22 नवंबर 2025 को समाप्त हो रहा है।

चुनाव से पहले बड़ी कार्रवाई, होटल से करोड़ों की नकदी जब्त

पटना बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले पटना जिले के बख्तियारपुर विधानसभा क्षेत्र में पुलिस की बड़ी कार्रवाई से हड़कंप मच गया है। दरअसल पुलिस ने होटल में छापेमारी करके लाखों रुपए की बरामदगी की है। मिली जानकारी के अनुसार, पैसों की बरामदगी सालिमपुर थाना क्षेत्र के फोर लेन स्थित एक होटल से की गई। बताया जा रहा है कि स्थानीय अंचलाधिकारी (सीओ) और सालिमपुर थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने मिलकर होटल में छापा मारा। इस दौरान एक कमरे से 10 लाख 36 हजार रुपये नकद बरामद किए गए हैं। फिलहाल पुलिस नकदी जब्त कर आगे की कार्रवाई में जुट गई है। बता दें कि बिहार में चुनावों के चलते आदर्श आचार संहिता लागू है। जिस कारण भारी मात्रा में कैश को लेकर आने जाने पर प्रतिबंध है। वहीं बिहार मे 6 नवंबर को पहले चरण का मतदान होना है। ऐसे में इतनी भारी मात्रा में नकदी की बरामदगी ने सियासी माहौल में खलबली मचा दी है।  

कीमतों की परवाह नहीं, आस्था की उड़ान जारी: बिहार जा रही हर फ्लाइट भरी

नई दिल्ली सूर्य उपासना के महापर्व छठ पर बिहार जाने वाली सारी फ्लाइट फुल हो गई हैं। 50 से 60% महंगे किराए के बावजूद हजारों प्रवासियों ने आस्था को प्राथमिकता दी है। ट्रेनों में वेटिंग लिस्ट भी खत्म हो गई है जबकि बस संचालक छठ पर बिहार जाने वालों की भारी भीड़ देखते हुए मनमाना किराया वसूल रहे हैं। ट्रैवल पोर्टल्स और एयरलाइंस के आंकड़ों के अनुसार, सामान्य दिनों में जहां दिल्ली-पटना का एक ओर का किराया 4,000 से 6,000 रुपये के बीच रहता है, वहीं 25 से 27 अक्तूबर के लिए यह 8,000 से 10,000 रुपये तक पहुंच गया है। दिल्ली-दरभंगा रूट पर किराया 13,000 रुपये और दिल्ली-गया पर 12,000 रुपये के आसपास है। लास्ट-मिनट की बुकिंग की कीमतें और भी ज्यादा हैं। छठ महापर्व पर दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और अन्य महानगरों में रहने वाले लाखों बिहारी प्रवासी त्योहार मनाने के लिए गांव लौटते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि त्योहारों के मौसम में मांग, आपूर्ति के असंतुलन से एयरलाइंस डायनामिक प्राइसिंग मॉडल अपनाती हैं, जिससे किराये में अचानक उछाल आता है। इंडिगो, स्पाइसजेट और एयर इंडिया जैसी प्रमुख एयरलाइंस ने इन रूट्स पर अतिरिक्त फ्लाइट्स जोड़ी हैं। सीटें बढ़ने के बावजूद किराया कम नहीं हुआ है। पिछले सप्ताह से बुकिंग्स में 200 फीसदी की बढ़ोतरी निजी ट्रैवल पोर्टल्स के डेटा से पता चलता है कि पिछले हफ्ते बुकिंग्स में 200% फीकी बढ़ोतरी हुई है। मूल रूप से पटना निवासी दिल्ली में नौकरीपेशा राजेश कुमार ने बताया कि पिछले साल 5,500 रुपये में टिकट मिल गया था, लेकिन इस बार 9,800 रुपये देने पड़े। परिवार के साथ जाना है, मजबूरी है। दिल्ली से बिहार बस किराये में भी उछाल : सामान्य दिनों में किराया 1,000 से 2,000 रुपये के बीच रहता है लेकिन छठ पर यह बढ़कर 1,500 से 4,000 रुपये हो गया है।  दिल्ली-दरभंगा रूट पर नॉन-एसी बसों का किराया 1,000-1,500 रुपये होता है, लेकिन त्योहारी भीड़ में यह 2,599-4,999 रुपये तक पहुंच गया है। सरकार किराया कैपिंग पर विचार करे ट्रैवल एजेंट्स एसोसिएशन ने  मांग की कि सरकार किराया कैपिंग पर विचार करे। रेलवे ने स्पेशल ट्रेनें चलाई हैं, लेकिन पटना की ट्रेनें पहले से पैक हैं और वेटिंग लिस्ट हजारों में है। यह समस्या दशहरा, दीपावली और छठ जैसे त्योहारों में पूर्वी भारत के रूट्स पर हर साल यही हाल होता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यात्रियों को कम से कम कई महीने पहले बुकिंग करनी चाहिए। वैकल्पिक रूप से, लखनऊ या वाराणसी से कनेक्टिंग फ्लाइट्स या बस सेवाएं सस्ती पड़ सकती हैं। लेकिन लास्ट-मिनट प्लान करने वालों के लिए यह बोझिल साबित हो रहा है।

घर बैठे मतदान का विकल्प: बिहार में वरिष्ठ नागरिक व दिव्यांग 1 नवंबर से करेंगे मतदान

पटना बिहार में 6 नवंबर नहीं, बल्कि 1 नवंबर से ही मतदान शुरू होने जा रहा है। दरअसल, वरिष्ठ नागरिक व दिव्यांग वोटर 1 व 2 नवंबर को घर बैठे मतदान कर सकेंगे। कटिहार जिला प्रशासन ने दिव्यांग वोटरों को यह बड़ी सुविधा देने की घोषणा की है। जिला प्रशासन ने ऐसे मतदाताओं के लिए पोस्टल बैलेट द्वारा होम वोटिंग  की व्यवस्था की है। कौन कर सकेगा घर से वोट? यह सुविधा केवल उन मतदाताओं को दी जा रही है जिन्होंने मतदाता प्रारूप-12 (Form 12D) भरकर जमा किया है। इस प्रक्रिया में मतदाता के घर जाकर निर्वाचन दल उन्हें पोस्टल बैलेट से मतदान कराएंगे। होम वोटिंग की तिथि और समय होम वोटिंग की सुविधा 1 नवंबर और 2 नवंबर को सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक होगी। होम वोटिंग को लेकर प्रखंडवार मतदान दल गठित किया गया है। जिला उप निर्वाचन पदाधिकारी के अनुसार, यदि पहली बार टीम पहुंचने पर मतदाता घर पर नहीं मिलते हैं, तो दूसरी विजिट का समय सूचित किया जाएगा। हालांकि, दो बार अनुपस्थित रहने पर मतदान दल दोबारा नहीं आएगा। निर्वाचन ड्यूटी कर्मियों के लिए भी पोस्टल बैलेट की सुविधा इसके अलावा चुनावी कार्य में प्रतिनियुक्त सभी श्रेणी के कर्मी भी डाक मतपत्र (Postal Ballot) के माध्यम से मतदान कर सकते हैं। इसके लिए जिला प्रशासन ने हरिशंकर नायक उच्च विद्यालय, मिरचाईबाड़ी (कटिहार) में पोस्टल बैलेट फैसिलिटेशन सेंटर स्थापित किया है। यहां विधानसभा वार कुल सात काउंटर तथा अन्य जिलों के कर्मियों के लिए एक अतिरिक्त काउंटर बनाए गए हैं। कर्मचारी वर्ग के लिए मतदान की तिथियां कटिहार जिले के कर्मी: 29 अक्टूबर से 3 नवंबर तक अन्य जिलों से आए कर्मी: 30 अक्टूबर और 31 अक्टूबर समय: सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक

बिहार की राजनीति में हलचल: उपमुख्यमंत्री पद पर दलित-मुस्लिम गठजोड़, पप्पू यादव ने दी प्रतिक्रिया

पटना बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की हलचल के बीच निर्दलीय सांसद पप्पू यादव  ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि बिहार में INDIA गठबंधन की सरकार बनेगी तो हमारे नेता राहुल गांधी दलित और मुस्लिम समुदाय से एक-एक उपमुख्यमंत्री अवश्य बनाएंगे। उनके इस बयान ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। दरअसल, पप्पू यादव ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर दावा किया कि अगर बिहार में INDIA गठबंधन की सरकार बनेगी तो हमारे नेता राहुल गांधी जी दलित औरमुस्लिम समुदाय से एक-एक उपमुख्यमंत्री अवश्य बनाएंगे! उन्होंने आगे लिखा कि वह सभी समाज को समुचित प्रतिनिधि देने के  पक्षधर रहे हैं। उनके पिता राजीव गांधी जी, तारिक अनवर साहब को मुख्यमंत्री बनाना चाहते थे तो इंदिरा जी ने भोला पासवान शास्त्री जी और गफ़ूर साहब को बिहार का मुख्यमंत्री बनाया था!

तेजस्वी का बीजेपी पर वार, नीतीश पर प्यार, बोले- बिहार को चलाने का हक सिर्फ बिहारी को

पटना आगामी बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर शुक्रवार को पूर्व उपमुख्यमंत्री और राजद नेता तेजस्वी यादव ने सहरसा के सिमरी बख्तियारपुर से चुनाव प्रचार का शंखनाद किया। सलखुआ उच्च विद्यालय मैदान में चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए सीएम नीतीश कुमार और एनडीए गठबंधन पर जमकर निशाना साधा। हालांकि इस दौरान नीतीश कुमार पर तेजस्वी नरम दिखे। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार बीस साल में भी बिहार से पलायन नहीं रोक पाए। हमारी सरकार आएगी तो नया बिहार बनाएंगे। मेरी उम्र भले ही कच्ची है, लेकिन जुबान पक्की है। मेरा सपना भ्रष्टाचार मुक्त बिहार बनाने का है। तेजस्वी ने कहा कि एनडीए ने अब तक मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित नहीं किया है। अमित शाह ने खुद कह दिया कि चुनाव के बाद सीएम तय करेंगे। तेजस्वी ने तंज कसते हए कहा कि एक बात तय है कि नीतीश जी अब मुख्यमंत्री नहीं बनेंगे। जबकि हमने तय कर लिया है। उन्होंने वीआईपी सुप्रीमो मुकेश सहनी को उपमुख्यमंत्री बनाने की बात कही। तेजस्वी ने सीएम नीतीश कुमार के प्रति हमदर्दी भी जताई और कहा, हमारे चाचा नीतीश कुमार को भाजपा ने हाइजैक कर लिया है। उनके साथ नाइंसाफी की जा रही है। तेजस्वी ने कहा कि बिहार को बाहरी ताकतें नियंत्रित नहीं करेंगी। बिहार को बिहारी ही चलाएगा, कोई बाहरी नहीं। हम बिहारी डरने वाले नहीं हैं। इस दौरान वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी, इंडियन इंक्लूसिव पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष आईपी गुप्ता, खगड़िया के पूर्व सांसद एवं राजद नेता चौधरी महबूब अली केसर, युसूफ सलाहउद्दीन, सरिता पासवान, गौतम कृष्ण मौजूद रहे।

युगों पुरानी छठ परंपरा की कहानी: जानें इसका आरंभ कहाँ हुआ

लोक आस्था का महापर्व छठ पूजा कल से शुरू हो रही है. छठ पूजा छठी मैया और भगवान सूर्य को समर्पित की गई है. छठ पूजा में भगवान सूर्य और छठी मैया की पूजा की जाती है. ये महापर्व चार दिनों तक चलता. कल से शुरू होने वाली छठ पूजा का समापन 28 अक्टूबर को होगा. कल नहाय-खाय से ये महापर्व शुरू होगा. 28 अक्टूबर को उदयगामी सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही महापर्व का समापन हो जाएगा. छठ पूजा वर्तमान में नहीं, बल्कि युगों से होती हुई चली आ रही है. छठ पूजा की उत्पत्ति को लेकर कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं. छठ पूजा की शुरुआत बिहार एक जिले से हुई थी. आइए जानते हैं कि बिहार का वो कौनसा जिला है, जहां से छठ महापर्व की शुरुआत हुई? मुंगेर से हुई थी छठ पूजा की शुरुआत छठ पूजा की शुरुआत सबसे पहले बिहार के मुंगेर से हुई थी.धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता सीता ने सबसे पहला छठ पूजन बिहार के मुंगेर में गंगा तट पर किया था. इसके बाद छठ महापर्व की शुरुआत हुई. वाल्मीकि और आनंद रामायण के अनुसार मुंगेर में माता सीता ने छह दिनों तक रहकर छठ पूजन किया था. दरअसल, भगवान राम को रावण वध का पाप लगा था. इस पाप से मुक्त होने के लिए ऋषि-मुनियों के कहने पर प्रभु ने फैसला किया वो राजसूय यज्ञ कराएंगे. इसके बाद मुग्दल ऋषि को आमंत्रण भेजा गया, लेकिन मुग्दल ऋषि ने भगवान राम और माता सीता आदेश दिया कि वो दोनों ही उनके आश्रम में आएं. इसके बाद बाद मुग्दल ऋषि ने माता सीता को सूर्य की अराधना करने की सलाह दी. मुग्दल ऋषि के कहने पर माता सीता ने व्रत किया. माता सीता ने की थी सूर्य देव की अराधना ऋषि के आदेश पर माता सीता ने कार्तिक मास की षष्ठी तिथि पर मुंगेर के बबुआ गंगा घाट के पश्चिमी तट पर भगवान सूर्य की अराधना की. सूर्य देव की अराधना के दौरान माता सीता ने अस्ताचलगामी सूर्य को पश्चिम दिशा की ओर उदयगामी सूर्य को पूर्व दिशा की ओर अर्घ्य दिया था. जिस जगह पर माता सीता ने व्रत किया, वह सीता चारण मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है. इतना ही नहीं मंदिर के गर्भ गृह में पश्चिम और पूर्व दिशा की ओर माता सीता के चरणों के निशान आज भी मौजूद हैं. साथ ही शिलापट्ट पर सूप, डाला और लोटा के निशान हैं.

बिहार में सियासी दिलचस्पी बढ़ी: महागठबंधन की आठ सीटों पर कांग्रेस-राजद में सीधी टक्कर

पटना विधानसभा चुनाव के पहले चरण की 121 सीटों पर नामांकन प्रक्रिया खत्म हो गई। अब तक केवल राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने सीट बंटवारे की घोषणा की है। महागठबंधन के घटक दलों के बीच सीट शेयरिंग का फॉर्मूला अब तक तय नहीं हुआ है। सभी दलों ने पहले चरण की सीटों पर अपने-अपने प्रत्याशी उतार दिए। इनमें राजद ने 72, कांग्रेस ने 26, वामदल ने 21 और वीआईपी ने छह सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि आठ ऐसी सीटें हैं, जहां महागठबंधन के ही घटक दलों के उम्मीदवार एक-दूसरे को चुनौती देंगे। इनमें वैशाली, लालगंज, राजापाकड़, बछवाड़ा, रोसड़ा, बछवाड़ा, तारापुर और कहलगांव विधानसभा सीट है। इन सीटों पर फ्रेंडली फाइल से स्पष्ट हो गया है कि महागठबंधन में सबकुछ ठीक नहीं है। तारापुर विधानसभा सीट     यहां पर राजद और विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के प्रत्याशी आमने सामने हैं। राजद से अरुण शाह ने नामांकन पर्चा दाखिल किया है। वहीं वीआईपी की ओर से सकलदेव सिंह ने अपना नामांकन पर्चा दाखिल किया है। बछवाड़ा विधानसभा सीट     यहां पर कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (सीपीआई) के प्रत्याशी आमने-सामने हैं। कांग्रेस से प्रकाश दास ने नामांकन पर्चा दाखिल किया है। वहीं सीपीआई से अवधेश कुमार राय ने नामांकन किया है। बिहारशरीफ विधानसभा सीट     यहां पर भी कांग्रेस और सीपीआई के प्रत्याशी आमने-सामने हैं। कांग्रेस से उमैर खान ने नामांकन किया है। वहीं सीपीआई के शिव प्रसाद यादव ने नामांकन किया है। रोसड़ा विधानसभा सीट     यहां पर कांग्रेस और सीपीआई के उम्मीदवार आमने-सामने हैं। कांग्रेस से बीके रवि ने नामांकन किया है। वहीं सीपीआई से लक्ष्मण पासवान ने नामांकन दाखिल किया है। राजपाकर विधानसभा सीट     यहां से कांग्रेस और सीपीआई के प्रत्याशी आमने-सामने हैं। कांग्रेस से प्रतिमा कुमारी ने नामांकन किया है। वहीं सीपीआई से मोहित पासवाान ने नामांकन किया है। वैशाली विधानसभा सीट     यहां राजद और कांग्रेस के प्रत्याशी आमने-सामने हैं। राजद से अजय कुशवाहा ने नामांकन किया है। वहीं कांग्रेस से ई.संजीव सिंह ने नामांकन किया है। लालगंज विधानसभा सीट     सबसे ज्यादा चर्चित यही सीट है। यहां राजद और कांग्रेस के प्रत्याशी आमने-सामने हैं। राजद पूर्व विधायक बाहुबली मुन्ना शुक्ला की बेटी शिवानी शुक्ला को टिकट दिया। उन्होंने अपना नामांकन पर्चा दाखिल कर दिया। वहीं कांग्रेस से आदित्य कुमार राजा ने भी अपना नामांकन कर दिया है। जानिए, महागठबंधन के अंदर कलह पर किसने क्या कहा? भाकपा (माले) के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि बिहार चुनाव के लिए सीट बंटवारे और उम्मीदवारों की घोषणा में हो रही देरी महागठबंधन के टूटने का संकेत नहीं, बल्कि इसके विस्तार का परिणाम है। कांग्रेस सांसद अखिलेश सिंह ने कहा कि कहीं कोई दिक्कत नहीं है। अंदर-अंदर काम चल रही है। महागठबंधन में कोई विवाद नहीं हैं। हमलोगों के बीच सबकुछ ठीक है। वहीं मुकेश सहनी की नाराजगी दूर हो गई है। उन्हें सम्मान देने कुछ तो इधर-उधर करना पड़ा। हमलोगों ने अपनी सीटें पिछली बार की तुलना में कम कर ली। वहीं सीएम फेस को लेकर उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के चेहरे हैं। सीट बंटवारे की प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही सबकुछ फाइनल हो जाएगा। राजद सांसद सुधाकर सिंह ने कहा कि महागठबंधन में सबलोग एकजुट हैं। विरोधी की अफवाहों पर आपलोग ध्यान नहीं दें। किसी सीट फ्रेंडली फाइट नहीं हो रही है। जहां पर कंफ्यूजन में महागठबंधन के घटन दलों ने एक-दूसरे के खिलाफ अपना नामांकन भर दिया है। वहां वापस लिया जा रहा है।  

राजस्थान में सियासी हलचल, बिहार के स्टार प्रचारकों की घोषणा से मची खलबली

 जयपुर बीजेपी ने बिहार विधानसभा चुनावों के लिए स्टार प्रचारकों की जो सूची जारी की है उसने राजस्थान की सियासत में हडकंप मचा दिया है। पार्टी ने गुरुवार शाम बिहार चुनावों के लिए 40 स्टार प्रचारकों की सूची जारी की है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित कई दिग्गजों को शामिल किया गया है। इस सूची में उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, असम और दिल्ली के मुख्यमंत्रियों को भी जगह दी गई है। लेकिन इस बार राजस्थान से किसी भी केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री, पूर्व सीएम वसुंधरा राजे या वरिष्ठ नेता को स्टार प्रचारक नहीं बनाया गया, जिससे राजनीतिक हलकों में अटकलों का दौर शुरू हो गया है। प्रदेश में गुरुवार शाम से ही कयासों के दौर चल पड़े हैं क्या गुजरात पेटर्न पर राजस्थान में भी कुछ बड़ा बदलाव होने वाला है।  क्यों अहम है राजस्थान की भागीदारी? बिहार में राजस्थानी मूल के वोटर्स और व्यापारिक समुदाय का अच्छा खासा प्रभाव है। राज्य के हर बड़े शहर में मारवाड़ी व्यापारी समुदाय सक्रिय है। पूर्व में भाजपा राजस्थान के नेताओं को बिहार में प्रचार के लिए भेजती रही है। पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ सहित कई नेता पूर्व चुनावों में प्रचार में सक्रिय रहे हैं। वसुंधरा राजे को स्टार प्रचारकों में शामिल नहीं किए जाने को लेकर भी काफी चर्चाएं हैं। हालांकि राजे इन दिनों राजस्थान में पूरी तरह सक्रिय नजर आ रही हैं। वे न सिर्फ राजस्थान के दौरे कर रही हैं बल्कि सोशल मीडिया पर अपने कार्यकाल की योजनाओं का प्रचार भी कर रही हैं।  स्टार प्रचारक नहीं, लेकिन ग्राउंड पर मौजूद हैं राजस्थानी नेता हालांकि इस बार किसी नेता को स्टार प्रचारक नहीं बनाया गया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार, राजस्थान बीजेपी के कई नेता और कार्यकर्ता बिहार में सक्रिय हैं। राजेंद्र राठौड़ सहित कई वरिष्ठ नेता पिछले दो हफ्तों से बिहार में चुनावी प्रचार, जनसंपर्क और संगठनात्मक काम में जुटे हुए हैं। सियासी संकेत और अटकलें राजस्थान को पूरी तरह नजरअंदाज किए जाने पर सियासी विश्लेषक इसे पार्टी के भीतर बदलते समीकरणों से जोड़ कर देख रहे हैं। कुछ इसे केंद्रीय राजनीति में राजस्थान नेताओं के कम होते प्रभाव की ओर भी इशारा मान रहे हैं। जबकि राजस्थान से कई वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री भाजपा के संगठनात्मक ढांचे में प्रभावी भूमिका निभाते हैं। अब देखना यह होगा कि चुनावी रणनीति में इस बदलाव के पीछे पार्टी का क्या तर्क सामने आता है और क्या राजस्थान की अनदेखी का कोई असर बिहार चुनाव में देखने को मिलेगा।