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महाराष्ट्र में बीजेपी की झोली भर गई, चुनावी जंग में बिना खड़े हुए मिली सफलता; विपक्ष ने जताई नाराजगी

मुंबई  बिहार विधानसभा चुनाव में शानदान जीत के बाद अब महाराष्ट्र में बीजेपी को बड़ी खूबखबरी मिल गई है. पार्टी ने 2 दिसंबर को होने वाले नगर परिषद और नगर पंचायत चुनाव से पहले ही बढ़त बना ली है. राज्य के बीजेपी अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने बताया कि पार्टी के 100 पार्षद बिना किसी मुकाबले के ही जीत गए हैं. इसके अलावा तीन नगर परिषद अध्यक्ष भी बिना चुनाव के ही चुने गए हैं. चव्हाण ने इस जीत का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व को दिया है. चव्हाण के अनुसार निर्विरोध जीतने वाले इन 100 पार्षदों में 4 कोंकण क्षेत्र से 49 उत्तर महाराष्ट्र से 41 पश्चिम महाराष्ट्र से 3-3 मराठवाड़ा और विदर्भ क्षेत्र से हैं. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कहा कि मतदान से पहले ही इतनी सीटें मिलना बीजेपी संगठन की मजबूती को दर्शाता है. बीजेपी के ही उम्मीदवार कैसे जीत रहे? हालांकि बीजेपी के इस दावे पर विपक्ष ने सवाल खड़े किए हैं. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) का कहना है कि निर्विरोध चुनाव पर आपत्ति नहीं है, लेकिन बार-बार केवल बीजेपी के ही उम्मीदवार बिना मुकाबले कैसे जीत रहे हैं? विपक्ष का आरोप है कि पैसे, ताकत और सत्ता का इस्तेमाल कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित किया जा रहा है. विवाद इसलिए भी बढ़ गया है, क्योंकि कई जगह बीजेपी नेताओं के परिजन भी बिन मुकाबला जीत गए हैं. जामनेर में जलसंपदा मंत्री गिरीश महाजन की पत्नी साधना महाजन नगर परिषद की अध्यक्ष बिना चुनाव के ही चुनी गईं, क्योंकि उनके सामने खड़े सभी उम्मीदवारों ने अंतिम समय पर नाम वापस ले लिया. कांग्रेस नेता का बड़ा आरोप धुले जिले में मार्केटिंग मंत्री जयकुमार रावल की मां नयन कुंवर रावल भी विरोधी उम्मीदवार का नामांकन रद्द होने के बाद अध्यक्ष बन गईं. चिखलदरा में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के चचेरे भाई अल्हद कालोटी भी बिना मुकाबले पार्षद चुन लिए गए. कांग्रेस नेता यशोमती ठाकुर का आरोप है कि अन्य उम्मीदवारों को नाम वापस लेने के लिए धमकाया गया. इन घटनाओं के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं. बीजेपी इसे अपनी लोकप्रियता और जनता के समर्थन का नतीजा मान रही है, जबकि विपक्ष दावा कर रहा है कि लोकतंत्र को दबाने की कोशिश हो रही है, क्योंकि नामांकन वापस लेने या रद्द होने का फायदा हर बार केवल बीजेपी को ही मिलता है. राज्य में 246 नगर परिषदों और 42 नगर पंचायतों के लिए मतदान 2 दिसंबर को होगा और मतगणना 3 दिसंबर को की जाएगी. इसके साथ-साथ यह विवाद भी चुनावी माहौल का एक बड़ा मुद्दा बन चुका है.

केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मजबूत की अपनी दावेदारी, BJP अध्यक्ष पद की रेस में बढ़त

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी अब तक अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर अंतिम फैसला नहीं ले सकी है। हालांकि, अब कहा जा रहा है कि इस पद पर केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपनी दावेदारी मजबूत कर ली है। इसकी बड़ी वजह बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा का शानदार प्रदर्शन है। हालांकि, इसे लेकर पार्टी ने आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा है। भाजपा ने बिहार में प्रधान को चुनाव प्रभारी बनाया था। टेलीग्राफ की रिपोर्ट में सत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि बिहार में यह जीत भाजपा और आरएसएस में अध्यक्ष पद को लेकर जारी खींचतान खत्म करने में मदद कर सकती है। उन्होंने कहा कि संगठन क्षमता और चुनाव प्रबंधन ने उन्हें इस पद की दौड़ में आगे कर कर दिया है। चुनाव से पहले वह लंबे समय तक बिहार में रहे। एक ओर जहां उन्होंने बागियों को नामांकन वापस लेने में मनाया। वहीं, कैडर को भी मजबूत करने में सफलता हासिल की है। रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी सूत्र बताते हैं कि हरियाणा, महाराष्ट्र और अब बिहार चुनाव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की जोड़ी को मजबूती दी है, जिसपर लोकसभा चुनाव के दौरान मिले झटके के चलते असर पड़ा था। अखबार से बातचीत में एक केंद्रीय मंत्री ने कहा, 'मोदी जी अब आरएसएस को मनाने में सफल हो सकते हैं कि भाजपा का अध्यक्ष उनकी चॉइस का हो।' एक और नाम था आगे जुलाई में इस पद के लिए केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव का नाम भी आगे चल रहा था। रिपोर्ट के अनुसार, जब भाजपा ने यादव और प्रधान का नाम आगे बढ़ाया, तो आरएसएस ने मंजूरी देने से पहले विचार विमर्श की जरूरत बताई थी। कहा जाता है कि प्रधान ने ही ओडिशा विधानसभा चुनाव में भाजपा को बीजू जनता दल से अलग होकर चुनाव लड़ने के लिए मनाया था, जिसके बाद भाजपा राज्य में सत्ता बनाने में सफल हुई। रिपोर्ट में एक भाजपा नेता के हवाले से बताया गया है, 'इससे पहले संकेत मिल रहे थे कि दक्षिण से नेता भाजपा अध्यक्ष बना सकता है। उप राष्ट्रपति पद के लिए सीपी राधाकृष्णन के चुनाव के बाद यह माना जाने लगा है कि पार्टी प्रमुख उत्तर से होगा।' मौजूदा अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा का तीन साल का कार्यकाल जनवरी 2023 में खत्म हो चुका था, लेकिन लोकसभा चुनाव के मद्देनजर विस्तार दिया गया।

लोहा नगर परिषद चुनाव में बीजेपी की रणनीति—एक ही परिवार के छह उम्मीदवार मैदान में

मुंबई  महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनाव हो रहे हैं. निकाय चुनावों के बीच सत्ताधारी महायुति में रार खुलकर सामने आ गई है. इस रार की वजह बनी है नांदेड़ जिले की लोहा नगर परिषद चुनाव के लिए उम्मीदवारों की लिस्ट. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने नांदेड़ की इस नगरपालिका परिषद के चुनाव में एक ही परिवार के छह सदस्यों को उम्मीदवार बना दिया है. इसे लेकर अब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार) ने अपने सहयोगी दल के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया है. एनसीपी (एपी) के विधायक प्रताप पाटिल चिखलिकर ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा है कि एक ही परिवार के छह सदस्यों को टिकट देना उम्मीदवारों की उपलब्धता पर सवाल खड़े करता है. उन्होंने तंज करते हुए कहा है कि बड़े नेता जब उपयुक्त उम्मीदवार नहीं खोज पाते हैं, तब ऐसा ही होता है. नांदेड़ में पत्रकारों से बात करते हुए चिखलिकर ने कहा कि जब राज्य और जिले का खुद को बड़ा नेता मानने वाले लोग उम्मीदवार नहीं ढूंढ पाते, तब छह नहीं तो 10 लोग एक ही परिवार के खड़े कर दिए जाते हैं. उन्होंने बिलोली नगर परिषद में कोई उम्मीदवार नहीं उतारने के बीजेपी के फैसले पर भी सवाल खड़े किए हैं. गौरतलब है कि परिवारवाद के मुद्दे पर विपक्षी दलों के खिलाफ आक्रामक तेवर दिखाने वाली बीजेपी ने काउंसिल प्रेसिडेंट से पार्षद तक, एक ही परिवार के छह लोगों को उम्मीदवार बनाया है. ऐसा तब है, जब लोहा नगर परिषद के कुल 10 वार्ड के लिए 20 सदस्य चुने जाने हैं. गजानन सूर्यवंशी को बीजेपी ने काउंसिल प्रेसिडेंट कैंडिडेट बनाया है. गजानन सूर्यवंशी की पत्नी गोदावरी वार्ड 7ए, भाई सचिन वार्ड 1ए, भाभी सुप्रिया वार्ड 8ए, रिश्तेदार वाघमारे वार्ड 7बी, भतीजे की पत्नी व्याहारे वार्ड 3 से चुनाव लड़ रहे हैं. महाराष्ट्र में 246 नगर परिषदों और 42 नगर पंचायतों के लिए चुनाव हो रहे हैं. 2 दिसंबर को मतदान होना है और नतीजे 3 दिसंबर को आएंगे. नांदेड़ कांग्रेस से बीजेपी में आए पूर्व सीएम अशोक चव्हाण का गृह जिला है और इस बार के निकाय चुनाव में उनकी साख दांव पर है.

बिहार कैबिनेट विस्तार से पहले अटकलें तेज: मैथिली ठाकुर पर BJP लगा सकती है बड़ा दांव

रांची बिहार में नई सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। भाजपा (JDU) और जदयू (JDU) मंत्रियों के नाम पर मंथन कर रही है। बात करें भाजपा की तो वह इस बार युवा, महिलाएं और सामाजिक रूप से प्रभावशाली वर्गों को कैबिनेट में बड़ा प्रतिनिधित्व देने की तैयारी में है। इसी रणनीति के तहत मैथिली ठाकुर, श्रेयसी सिंह समेत कई नए चेहरों के नाम लगातार सुर्खियों में हैं। दरभंगा के अलीनगर से जीतकर आईं 25 वर्षीय लोकगायिका और BJP MLA मैथिली ठाकुर नई कैबिनेट के सबसे चर्चित नामों में शामिल हो गई हैं। पहली बार चुनाव लड़कर उन्होंने RJD उम्मीदवार विनोद मिश्रा को 11,730 वोटों से हराया और 2025 के चुनाव में सबसे युवा विधायकों में जगह बनाई। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, उनकी बढ़ती लोकप्रियता, सांस्कृतिक पहचान और युवाओं में गहरी पकड़ को देखते हुए यह स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि वे कला-संस्कृति, युवा मामलों या सामाजिक न्याय जैसे अहम विभागों की दावेदार हो सकती हैं। शपथ ग्रहण में साफ होगा कैबिनेट का चेहरा नीतीश कुमार अपनी 10वीं पारी के रूप में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं। नए मंत्रिमंडल में कौन-कौन शामिल होंगे, इसका खुलासा शपथ ग्रहण समारोह में होगा, लेकिन मौजूदा संकेत बताते हैं कि बिहार की नई राजनीति में मैथिली ठाकुर की एंट्री प्रभावशाली साबित हो सकती है।

नीतीश कुमार को जदयू विधायक दल की कमान, भाजपा ने सम्राट चौधरी को बनाया नेता—विजय सिन्हा उपनेता

पटना जनता दल यूनाईटेड के नवनिर्वाचित विधायकों ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार को फिर से अपना नेता चुन लिया है। बुधवार सुबह 11 बजे मुख्यमंत्री आवास में जदयू के विधायक दल की बैठक हुई। साढ़े 11 बजे जदयू के विधायकों ने सर्वसम्मति से नीतीश कुमार को विधायक दल का नेता चुन लिया है। जदयू के वरिष्ठ नेता और विधायक श्याम रजक ने कहा कि बिहार की जनता उत्साहित है, उन्होंने नीतीश कुमार अपना नेता चुना है। मुख्यमंत्री पद के लिए पार्टी की पहली और अंतिम पसंद नीतीश कुमार ही हैं। नई सरकार में मंत्री बनाए जाने के सवाल पर रजक ने कहा कि इसका फैसला नीतीश कुमार करेंगे। विधायक दल की बैठक से पहले जदयू विधायक मनोरमा देवी ने कहा कि यह बिहार के लिए बहुत अच्छा दिन है। हमारे अभिभावक नीतीश कुमार जी हैं और वह सभी के कल्याण के लिए काम करेंगे। इधर, भारतीय जनता पार्टी के विधायकों की बैठक पार्टी कार्यालय में हो रही है। भाजपा के विधायकों ने सम्राट चौधरी के विधायक दल का नेता चुन लिया है। यानी वह डिप्टी सीएम बनेंगे। वहीं विजय सिन्हा को उपनेता चुना गया है। वह भी दूसरे डिप्टी सीएम बन सकते हैं। लेकिन, दूसरे डिप्टी सीएम पद के लिए फिलहाल मंथन जारी है। भाजपा दोनों डिप्टी सीएम का पद अपने पास रखना चाहती है। इधर, 19 सीट लाने वाली चिराग पासवान की पार्टी एक डिप्टी सीएम समेत तीन मंत्री का पद चाहती है। इस मुद्दे पर भी बातचीत चल रही है। दोपहर 3.30 बजे विधानसभा के सेंट्रल हॉल में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की बैठक होगी। इसमें भारतीय जनता पार्टी, जनता दल यूनाईटेड, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा, लोक जनशक्ति पार्टी के सभी नव निर्वाचित विधायक और नीतीश कुमार, चिराग पासवान, संतोष सुमन, उपेंद्र कुशवाहा, सम्राट चौधरी, विजय सिन्हा मौजूद रहेंगे। इधर, कुछ ही देर में गृह मंत्री अमित शाह भी पटना पहुंचेंगे। वह भारतीय जनता पार्टी की बैठक में शामिल होंगे।

BJP का बंगाल प्लान: बिहार की सफलता को दोहराते हुए बड़े नेताओं पर दांव

नई दिल्ली बिहार विधानसभा में बड़ी सफलता दर्ज करने वाली भारतीय जनता पार्टी की नजरें अब पश्चिम बंगाल पर हैं। तृणमूल कांग्रेस के शासन वाले राज्य में मार्च या अप्रैल 2026 को चुनाव होने हैं। खबर है कि इसके लिए भाजपा ने अलग रणनीतियां बनाई हैं, जिनकी अगुवाई पार्टी के शीर्ष और सबसे ताकतवर नेता करने जा रहे हैं। हालांकि, किसी योजना को लेकर पार्टी ने आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शुरुआत में भाजपा अपने सबसे ताकतवर नेताओं को पश्चिम बंगाल में प्रचार अभियान में उतारने जा रही है। हालांकि, ये नेता कौन होंगे, अब तक साफ नहीं है। बिहार में बड़ी जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बधाई संदेश में भी बंगाल का जिक्र कर दिया था। उन्होंने कहा था कि गंगा नदी बिहार होते हुए बंगाल जाती है और इसी तरह भाजपा की जीत भी बिहार से बंगाल फैलेगी। क्या होगी रणनीति एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा ने बंगाल चुनाव सामूहिक नेतृत्व और पीएम मोदी के कामों के बल पर लड़ने की तैयारी की है। ऐसे में संभव है कि पार्टी किसी एक चेहरे पर दांव न लगाए। भाजपा अपना संगठन मजबूत करने की कोशिश में भी है। इधर, बूथ स्तर पर बारीकी से प्लानिंग की जा रही है। खबर है कि राज्य के करीब 70 हजार बूथों पर भाजपा ने बूथ कमेटी बना दी हैं। कुल 91 हजार बूथ हैं। SIR की भी है तैयारी ECI यानी भारत निर्वाचन आयोग ने राज्य में एसआईआर की तैयारियां तेज कर दी हैं। रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा के एक नेता का कहना है कि वाम दलों ने बंगाल में धांधली कर चुनाव जीते थे। उन्होंने कहा कि इसमें वोटर लिस्ट में मरे हुए लोगों के नाम शामिल थे, जिनके नाम पर उनके कार्यकर्ता वोट करते थे। ऐसा माना जा रहा है कि एसआईआर के बाद मतदाता सूची में से ऐसे नाम बड़ी संख्या में हट जाएंगे, जो दुनिया को अलविदा कह चुके हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इसके बाद भाजपा अपना बूथ स्तर पर प्रचार तेज करेगी। पार्टी ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव, त्रिपुरा के पूर्व सीएम बिप्लब कुमार देव और आईटी हेड अमित मालवीय को जिम्मेदारी सौंपी है। बीते तीन सालों से भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव सुनील बंसल बंगाल में काम कर रहे हैं। खबर है कि भाजपा एकता का संदेश देने की योजना बना रही है। महिला मतदाता करेंगी खेला? रिपोर्ट में भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के हवाले से बताया गया है कि इस चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा महिला सुरक्षा होगा। खबर है कि आरजी टैक्स स्कैंडल, दुर्गापुर में मेडिकल छात्रा के साथ गैंगरेप, कानून और व्यवस्था जैसे मुद्दे उठाए जाएंगे। रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा नेताओं का कहनाहै कि जनता कानून और व्यवस्था की स्थिति से परेशान हैं। इसके अलावा भाजपा उद्योगों की कमी, माइग्रेशन जैसे मुद्दों को भी उठाएगी। सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि भाजपा अपने शासित अन्य राज्यों में जारी महिलाओं के लिए आर्थिक योजनाओं के बारे में बंगाल में बताएगी। उन्होंने कहा कि बिहार में महिलाओं को 10 हजार रुपये देने के फैसले को खासतौर पर बताया जाएगा।

भाजपा-झेडीयू के बीच स्पीकर पद की जंग, दिल्ली पहुंचे ललन सिंह और संजय झा

नई दिल्ली बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में नई सरकार के गठन की कवायद चल रही है. मंगलवार को जेडीयू और भाजपा दोनों दलों के विधायक दलों की बैठक होने वाली है. इन बैठकों में दोनों दल अपने-अपने विधायक दल के नेता का चुनाव करेंगे. इस बीच मंत्रिमंडल के स्वरूप और मंत्री पद को लेकर दोनों दलों के बीच चर्चा चल रही है. अभी तक की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों दल बिहार सरकार में बराबर मंत्री पद लेंगे. इस बीच सूत्रों से यह भी जानकारी मिली है कि दोनों दल विधानसभा अध्यक्ष पद चाहते हैं. इसी के मद्देनजर जेडीयू-बीजेपी के शीर्ष नेता आज दिल्ली में मीटिंग करेंगे. जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा और जेडीयू कोटे के केंद्रीय मंत्री ललन सिंह बीती रात पटना से दिल्ली रवाना हुए थे. मंगलवार को ये दोनों नेता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात कर सकते हैं. स्पीकर के अलावा सरकार में महत्वपूर्ण विभागों को लेकर भी दोनों दलों की ओर से दावेदारी चल रही है. बीजेपी हर हाल में स्पीकर का पद अपने पास रखना चाहती है. सोमवार देर रात तक पटना में प्रदेश बीजेपी के नेताओं ने इस पर चर्चा की थी. इसके अलावा चिराग पासवान, जीतनराम मांझी और उपेन्द्र कुशवाहा से बातचीत का जिम्मा धर्मेंद्र प्रधान संभाल रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक, इन तीनों सहयोगी दलों के साथ सरकार गठन को लेकर सहमति बन चुकी है. छोटे दलों से बात कर रहे हैं धर्मेंद्र प्रधान इस बीच बुधवार 19 नवंबर को बीजेपी और जेडीयू विधानमंडल दल की अलग–अलग बैठकें बुलाई गई हैं. दोनों दलों की बैठक के बाद एनडीए विधानमंडल दल की बैठक भी 19 नवंबर को होगी. 20 नवंबर को पटना के गांधी मैदान में शपथ ग्रहण समारोह होगा. मौजूदा विधानसभा में तीन बार स्पीकर बदल चुके हैं. फिलहाल यह पद भाजपा के नंदकिशोर यादव के पास है. इससे पहले जेडीयू और राजद के बीच गठबंधन के वक्त स्पीकर पद राजद के अवध बिहारी चौधरी के पास था. उससे पहले भाजपा के विजय सिन्हा विधानसभा अध्यक्ष थे. हालांकि, इससे पहले यानी 2020 से पहले नीतीश कुमार की जेडीयू ने हमेशा अपने पास विधानसभा अध्यक्ष का पद रखा. विधायकों की अदला-बदली या फिर कमजोर बहुमत वाली सरकार होने की स्थिति में विधानसभा अध्यक्ष का पद राजनीतिक रूप से काफी अहम हो जाता है. वैसे एक मजबूत सरकार होने की स्थिति में इस पद को पार्टियां अपने किसी वरिष्ठ नेता को समायोजित करने का जरिया मानती हैं.  

बीजेपी और जेडीयू में मंत्रिपद साझा करने को लेकर चर्चा, पुराने फार्मूले को किया जाएगा बदल

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की प्रचंड जीत के बाद सरकार बनाने की कवायद तेज हो गई है। चुनाव से पहले बीजेपी और जेडीयू ने बराबर सीटों (101) पर अपने प्रत्याशी उतारने का फैसला किया था। ऐसे में दोनों ही दलों को बराबर मंत्रिपद भी मिल सकते हैं। सरकार गठन के फार्मूले पर बात करें तो चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) को दो मंत्रिपद और जीतनराम मांझी की हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) को 01 वह उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा पार्टी को एक मंत्रिपद दिया जा सकता है। सूत्रों का कहना है कि एनडीए के घटक दलों के बीच सरकार बनाने को लेकर बातचीत चल रही है और कई पहले के मंत्रियों के पोर्टफोलियो बदलने पर भी विचार हो रहा है।  सूत्रों के मुताबिक मंगलवार को बीजेपी के विधायक दल की बैठक संभावित है। बता दें कि 243 सीटों वाली विधानसभा में बीजेपी ने अकेले 89 सीटें जीती हैं। दूसरे नंबर पर जेडीयू के खाते में 85 सीटें गई हैं। एलजेपी (आरवी) को 19, HAM (S) को पांच और आरएमएम को चार सीटें मिली हैं। 2020 की बात करें तो बीजेपी को 74 सीटें मिली थीं और जेडीयूके पास 43 सीटें थीं। वहीं सरकार में बीजेपी के 22 और जेडीयू के 12 मंत्री थे। बता दें कि बिहार की मौजूदा विधानसबा का कार्यकाल 22 नवंबर को खत्म हो रहा है। ऐसे मे बुधवार या फिर गुरुवार को ही शपथ ग्रहण हो सकता है। बीजेपी सूत्रों के मुताबिक शुक्रवार को बिहार चुनाव परिणाम आने के बाद प्रधानमंत्री मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा और महासचिव बीएल संतोष के बीच संक्षिप्त बैठक हुई थी जिसमें सरकार बनाने पर चर्चा की गई थी। जानकारी के मुताबिक नीतीश कुमार 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। वहीं उपमुख्यमंत्रियों को लेकर कोई फैसला नहीं किया गया है। मौजूदा उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर भ्रष्टाचारा के आरोपों और फिर नामांकन पेपर में गड़बड़ी के बाद सम्राट चौधरी को उपमुख्यमंत्री बनाया जाएगा या नहीं, इसपर अभी असमंजस की स्थिति है। बता दें कि गांधी मैदान में बिहार की नई सरकार का शपथ ग्रहण कार्यक्रम हो सकता है। 2015 में नीतीश कुमार ने गांधी मैदान में ही शपथ ली थी। 17 से 20 नवंबर तक गांधी मैदान को आम लोगों के लिए बंद किया गया है। माना जा रहा है कि गांधी मैदान में बड़ी संख्या में लोगों के बैठने की व्यवस्था की जा रही है। इसके अलावा शपथ ग्रहण के लिए भव्य मंच तैयार किया जाएगा।

BJP ने तोड़ा पिछला रिकॉर्ड, विधायकों की संख्या में 2014 से बेहतर स्थिति

नईदिल्ली  बिहार विधानसभा चुनावों में शानदार प्रदर्शन के बाद बीजेपी के नेता गदगद हैं। अब उनकी नजरें पश्चिम बंगाल पर टिक चुकी हैं। बंगाल चुनाव से पहले भाजपा के लिए एक बड़ी और अच्छी खबर सामने आई है। राज्य विधानसभाओं में पार्टी का प्रतिनिधित्व अब तक का सर्वोच्च स्तर छू चुका है। इस सफलता को देखते हुए भाजपा ने अपना नया लक्ष्य भी तय कर लिया है। बीजेपी नेता अमित मालवीय ने दावा किया है कि पार्टी जल्द ही 1800 विधायकों के आंकड़े को पार करने के लिए पूरी तरह तैयार है। बीजेपी 1800 विधायकों का आंकड़ा पार करेगी बीजेपी नेता अमित मालवीय ने पार्टी की प्रगति पर अटूट विश्वास जताते हुए भविष्यवाणी की कि अगले दो वर्षों में बीजेपी पूरे देश में 1800 विधायकों की संख्या को आसानी से पार कर लेगी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा एक पोस्ट में मालवीय ने भाजपा की इस उड़ान की तुलना कांग्रेस से भी की। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि इस रफ्तार से भाजपा अगले दो सालों में बिना किसी झिझक के 1800 सीटों का आंकड़ा पार कर जाएगी। मालवीय ने बताया कि 1985 में कांग्रेस अपने चरम पर लगभग 2018 विधायकों के साथ पहुंची थी। इस दौरान उन्होंने तर्क दिया कि 1980 के दशक की राजनीतिक परिस्थितियां सत्ता को मजबूत करने और मतदाताओं को प्रभावित करने में आसान बना देती थीं, लेकिन बीजेपी का उदय धीरे-धीरे, लगातार और कड़ी मेहनत से हुआ है। जहां कांग्रेस को यह शिखर वंशानुगत विरासत में मिला, वहीं भाजपा ने इसे सीट-दर-सीट, राज्य-दर-राज्य और संघर्ष-दर-संघर्ष अर्जित किया। अपने पोस्ट में अमित मालवीय ने दोनों राष्ट्रीय दलों के बीच तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करते हुए कहा कि भाजपा की सफलता निरंतर परिश्रम का फल है। उन्होंने जोर देकर लिखा कि अंतर स्पष्ट है, कांग्रेस को शिखर विरासत में मिला, भाजपा ने इसे कमाया। भविष्य उस पार्टी का है जो काम करती है, न कि जो वंशवाद पर टिकी रहती है। भाजपा के विधायकों की संख्या में वृद्धि पार्टी द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, 2014 के बाद से भाजपा के विधायकों की संख्या में लगातार इजाफा होता जा रहा है… वर्ष               भाजपा विधायकों की संख्या 2014              1,035 2015              997 2016              1,053 2017            1,365 2018            1,184 2019          1,160 2020          1,207 2021            1,278 2022            1,289 2023           1,441 2024          1,588 2025          1,654 2025 में 1654 विधायकों का आंकड़ा भाजपा का अब तक का सर्वाधिक है।

भाजपा का सख्त कदम: मध्यप्रदेश में महिला नेत्री 6 साल तक पार्टी से बाहर

सागर मध्यप्रदेश में भाजपा पार्टी ने बड़ा एक्शन लेते हुए एक बीजेपी नेत्री को 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है। मामला सागर जिले के है जहां देवरी नगर पालिका की अध्यक्ष नेहा जैन और उनके पति अलकेश जैन को भाजपा से 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया गया है। बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष के निर्देश के बाद जिलाध्यक्ष ने नेहा जैन व उनके पति अलकेश जैन के निष्कासन का आदेश जारी कर दिया है। बीजेपी नेत्री 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित नगर पालिका अध्यक्ष नेहा जैन और उनके पति अलकेश जैन को पार्टी से निष्कासित किए जाने का जो आदेश जारी किया गया है उसमें लिका है कि विधानसभा चुनाव 2023 के दौरान आपके और आपके पति ने भाजपा के प्रत्याशी बृजबिहारी पटेरिया का सीधा विरोध किया था और पार्टी संगठन के पास इसकी शिकायत व प्रमाण मौजूद हैं। आपके द्वारा इस संबंध में जवाब मांगा गया था जो कि आपके द्वारा जवाब दिया गया लेकिन वो भी संतोषजनक नहीं है इसलिए बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के निर्देशानुसार आप दोनों को पार्टी से 6 साल के लिए निष्कासित किया जाता है। कांग्रेस पार्षद को PIC में किया शामिल बता दें कि नेहा जैन पर कांग्रेस पार्षद त्रिवेंद्र जाट को पीआईसी में शामिल करने का भी आरोप था। इस संबंध में भी उनसे पार्टी ने जवाब मांगा था। जिसके जवाब में नेहा जैन ने कहा कि पार्षद त्रिवेंद्र जाट ने 25 मार्च 2023 को कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है जो कि तथ्यहीन है। क्योंकि त्रिवेंद्र जाट सभी भाजपा विरोधी कार्यक्रमों में लगातार सक्रिय रहे हैं जो कि आज तक जारी है। जिसके प्रमाण स्वरूप इनके सोशल मीडिया अकाउंट पर प्रमाणित हैं।