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तारापुर से सम्राट चौधरी की चुनौती, भाजपा ने डिप्टी CM को पुश्तैनी सीट से बाहर किया

पटना बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए बीजेपी ने बड़ा दांव खेला है। पार्टी ने अपने कद्दावर नेता और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को तारापुर विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया है। सम्राट तारापुर से 16 अक्टूबर को नामांकन करेंगे। हालांकि, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की कैंडिडेट लिस्ट अभी नहीं आई है। तारापुर सिर्फ एक चुनावी सीट नहीं, बल्कि सम्राट चौधरी के परिवार की राजनीतिक विरासत से जुड़ी भूमि है। उनके पिता शकुनी चौधरी यहां से कई बार विधायक रह चुके हैं, जबकि उनकी मां पार्वती देवी भी एक बार इसी सीट से विधानसभा पहुंची थीं। गौरतलब है कि सम्राट चौधरी मौजूदा वक्त में विधान परिषद के सदस्य हैं। सम्राट चौधरी की राजनीतिक यात्रा काफी दिलचस्प रही है। वे हमेशा से विधान परिषद के सदस्य नहीं रहे, बल्कि पहले राजद (RJD) से दो बार विधायक बन चुके हैं। भाजपा में आने से पहले वो दो बार राजद के विधायक बने हैं। खगड़िया जिले की परबत्ता सीट से सम्राट चौधरी पहली बार 2000 और दूसरी बार 2010 में विधानसभा पहुंचे थे। उनसे हारने और उनको हराने वाले जेडीयू नेता रामानंद प्रसाद सिंह भी परबत्ता से चार के विधायक रहे। रामानंद के बेटे संजीव सिंह 2020 में परबत्ता से जेडीयू के विधायक बने थे लेकिन अब तेजस्वी यादव के साथ हैं और अब राजद के टिकट पर लड़ेंगे। हाल ही में प्रशांत किशोर ने सम्राट चौधरी को घेरते हुए एक पुराना मामला उठाया। उन्होंने तारापुर हत्याकांड (1995) का जिक्र किया और उनकी उम्र और रिहाई पर सवाल उठाए। जानकार बताते हैं कि यह केस भी तारापुर के चुनावी माहौल से जुड़ा था, जब उनके पिता शकुनी चौधरी ने चुनाव लड़ा और जीत हासिल की थी। इस पुराने विवाद ने अब फिर से राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है, खासकर तब जब सम्राट खुद उसी सीट से ताल ठोकने जा रहे हैं।  

पंजाब राजनीति में हलचल: अकाली दल के पूर्व प्रत्याशी जगदीप चीमा ने थामा भाजपा का दामन

चंडीगढ़  चंडीगढ़ में शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के पूर्व नेता जगदीप सिंह चीमा सोमवार को हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की मौजूदगी में भाजपा में शामिल हो गए। चीमा पंजाब के पूर्व मंत्री रणधीर सिंह चीमा के बेटे हैं। उन्होंने 2012 में अमलोह और 2022 में फतेहगढ़ साहिब से अकाली दल के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू और पंजाब भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष अश्विनी शर्मा भी चीमा के पार्टी में शामिल होने संबंधी समारोह में उपस्थित थे। चीमा का भाजपा में स्वागत करते हुए अश्विनी शर्मा ने कहा कि जो लोग पंजाब की प्रगति और विकास देखना चाहते हैं वह पार्टी से जुड़ना चाहते हैं। राज्य की 'आप' सरकार पर हमला बोलते हुए उन्होंने दावा किया कि 2022 में सत्ता में आने के बाद से उन्होंने पंजाब के विकास के लिए कुछ नहीं किया है। उन्होंने कहा कि भगवंत मान सरकार पंजाब की हर महिला को 1,000 रुपये प्रति माह देने के अपने चुनावी वादे को पूरा करने में "विफल" रही है। उन्होंने 'आप' पर महिलाओं के साथ धोखा करने का आरोप लगाया। शर्मा ने कहा कि हरियाणा की नायब सिंह सैनी सरकार, लाडो लक्ष्मी योजना के तहत पात्र महिलाओं को 2,100 रुपये प्रति माह दे रही है। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार राज्य में सभी फसलों के लिए किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) भी दे रही है।

कर्नाटक से बिहार चुनाव में धन वर्षा? कांग्रेस पर BJP के गंभीर आरोप

पटना  कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की बुलाई कैबिनेट बैठक को लेकर अटकलों का दौर जारी है। कहा जा रहा है कि यह बैठक राज्य कैबिनेट में होने वाले संभावित बदलाव से जुड़ी हो सकती है। वहीं, भारतीय जनता पार्टी ने सोमवार को होने वाली इस मीटिंग के तार बिहार विधानसभा चुनाव से जोड़े हैं। भाजपा का कहना है कि कर्नाटक कांग्रेस ने बिहार चुनाव में खर्च की जिम्मेदारी उठाई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर अशोक ने शनिवार को कहा कि कांग्रेस ने कर्नाटक को बिहार चुनाव के लिए एटीएम बना दिया है। उन्होंने कहा, 'मुझे जानकारी मिली है कि उन्होंने बिहार चुनाव के दौरान कांग्रेस के पूरे खर्च की जिम्मेदारी उठाई है। यहां तक कि मुख्यमंत्री ने इस पर चर्चा करने के लिए डिनर मीटिंग बुलाई है।' उन्होंने कहा है कि कांग्रेस विधायक केसी वीरेंद्र ने चुनाव में इस्तेमाल के लिए कथित तौर पर 40 किलो सोना बिहार भेजा है। खास बात है कि वीरेंद्र को हाल ही में ED यानी प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार किया था। अशोक ने संकेत दिए हैं कि कांग्रेस पार्टी में नेतृत्व स्तर पर बदलाव हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि नवंबर में सिद्धारमैया को बदला जा सकता है। उन्होंने कहा, 'मंत्रियों के साथ मुख्यमंत्री की डिनर मीटिंग, शिवकुमार के सीएम बनने को लेकर विधायकों के बयान और जल्दबाजी में जातिगत जनगणना से कांग्रेस में राजनीतिक क्रांति के संकेत मिल रहे हैं।' कांग्रेस क्या बोली इधर, कांग्रेस के जिला प्रभारी मंत्री एन चालूवरयस्वामी ने कहा कि डिनर का राजनीति से कोई लेना देना नहीं है। उन्होंने इसे अफवाह बताया है। उन्होंने कहा है कि बिहार चुनावों के बाद कैबिनेट में फेरबदल हो सकता है, लेकिन नेतृत्व में बदलाव का फैसला पार्टी आलाकमान पर है। उन्होंने कहा, '34 मंत्री हैं। अन्य के लिए कुछ और वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी।' कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने शनिवार को राज्य में मंत्रिमंडल फेरबदल की अटकलों को खारिज करते हुए इसे मीडिया में चल रही एक 'अफवाह' बताया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शिवकुमार ने कहा कि पार्टी हाईकमान इस पर फैसला करेगा। ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि नवंबर में जब कांग्रेस सरकार अपने पांच साल के कार्यकाल की आधी अवधि पूरी कर लेगी तो राज्य में नेतृत्व परिवर्तन और मंत्रिमंडल में फेरबदल हो सकता है, जिसे कुछ लोग 'नवंबर क्रांति' के रूप में मान रहे हैं। एक सवाल के जवाब में शिवकुमार ने संवाददाताओं को बताया, 'कोई मंत्रिमंडल फेरबदल नहीं, कुछ नहीं। ये सब मीडिया में चल रही अफवाहें हैं, कुछ लोगों की बातें सुन रहा हूं। बातें मीडिया में हैं। या तो मुझे या मुख्यमंत्री को इस बारे में बोलना होगा। जब हम दोनों ने ही कुछ नहीं कहा, तो इसमें क्या है?' उन्होंने कहा, 'कुछ लोगों को (मंत्री बनने की) जल्दी है। अगर उनके नाम मीडिया में आ गए, तो वे (नेताओं के) घर-घर जाएंगे। इसकी कोई संभावना नहीं है। सब कुछ आलाकमान तय करेगा।' पार्टी सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री सिद्धरमैया और उनका खेमा फेरबदल पर जोर दे रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा मंत्रिमंडल में फेरबदल किया जाना, जब सरकार अपने कार्यकाल के ढाई साल पूरे करने वाली है, इस संदेश के रूप में देखा जाएगा कि सत्ता की कमान उनके हाथ में है और आगे भी वही नेतृत्व करते रहेंगे। यह कदम शिवकुमार के लिए एक झटका साबित हो सकता है, जो मुख्यमंत्री पद पर दावा करने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। राज्य के राजनीतिक हलकों में, विशेषकर सत्तारूढ़ कांग्रेस में, इस वर्ष के अंत में मुख्यमंत्री परिवर्तन के बारे में अटकलें लगाई जा रही हैं, जिसमें सिद्धरमैया और शिवकुमार के बीच सत्ता-साझाकरण समझौते का दावा किया जा रहा है। पिछले कुछ समय से, मंत्री पद के इच्छुक कांग्रेस विधायकों के एक वर्ग की ओर से भी मंत्रिमंडल में फेरबदल करके उन्हें शामिल करने की मांग उठ रही है। कुछ विधायकों ने तो खुले तौर पर मंत्री बनने की इच्छा भी व्यक्त की है।

गठबंधन में मोह या मजबूरी? मांझी-कुशवाहा की खामोशी और BJP की चालाकी

पटना  बिहार चुनाव के जारी नामांकन प्रक्रिया के बीच सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में सीट बंटवारे का ऐलान हो गया है. एनडीए के सबसे बड़े घटक भारीय जनता पार्टी (बीजेपी) के बिहार चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर सीट शेयरिंग फॉर्मूले का ऐलान कर दिया. बीजेपी और जनता दल (यूनाइटेड) 101-101, जबकि चिराग पासवान की पार्टी 29 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. जीतनराम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टियों को छह-छह सीटें मिली हैं. जीतनराम मांझी 15 सीटों की डिमांड पर अड़े थे. वहीं, उपेंद्र कुशवाहा 12 सीटें मांग रहे थे. सहयोगी दलों के अड़ियल रुख से फंसे सीट शेयरिंग के पेच को बीजेपी ने आखिर कैसे सुलझाया? बीजेपी 15 सीटों की मांग पर अड़े मांझी और 10 सीटों की डिमांड कर रहे कुशवाहा को 6–6 सीट पर कैसे ले आई?  दरअसल, जीतनराम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा परिवार और रिश्तेदार के मोह में फंस गए. सीट शेयरिंग को लेकर मांझी और उपेंद्र कुशवाहा के साथ हर दौर की बातचीत में बीजेपी ने उनसे अपनी दावेदारी वाली सीटों से संभावित उम्मीदवारों के नाम सामने रखने को कहा. जीतनराम मांझी की अगुवाई वाली हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) और उपेंद्र कुशवाहा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के साथ सीट शेयरिंग पर बातचीत के दौरान बीजेपी को एक बात समझ आ गई. बीजेपी यह समझ गई कि दोनों ही नेता (मांझी और कुशवाहा) अपने परिजनों या रिश्तेदारों के लिए मनपसंद सीटें चाहते हैं. सूत्रों के मुताबिक इस बात का अंदाजा लगते ही बीजेपी ने जीतनराम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा पर सीटों की संख्या कम करने के लिए प्रेशर बनाना शुरू कर दिया. मांझी और कुशवाहा परिवार और रिश्तेदार के मोह में फंस गए और सीटों का पेच सुलझ गया. जीतनराम मांझी अपनी समधन ज्योति मांझी को बाराचट्टी से चुनाव लड़ाएंगे. वहीं, इमामगंज सीट से उनकी बहू दीपा मांझी उम्मीदवार होंगी. कुछ ऐसी ही रणनीति आरएलएम प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा की भी है. उपेंद्र कुशवाहा भी अपनी पत्नी और बेटे, बहू को विधानसभा चुनाव में उतारने की तैयारी में हैं. उपेंद्र कुशवाहा अपनी पत्नी स्नेह लता को सासाराम विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारेंगे. वहीं, महुआ सीट से उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक कुशवाहा या बहू साक्षी मिश्रा कुशवाहा में से किसी एक के चुनावी जंग में उतरने की चर्चा है. आरएलएम प्रमुख ने सीट शेयरिंग पर बातचीत के दौरान दिनारा विधानसभा सीट से आलोक सिंह और उजियारपुर से प्रशांत पंकज के नाम बतौर उम्मीदवार रखे. यह दोनों ही नए नाम हैं.

RJD के दो विधायकों ने दिया इस्तीफा, बिहार चुनाव से पहले BJP को मजबूत बढ़त

पटना अगले माह होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के दो विधायकों– संगीता कुमारी और चेतन आनंद ने शुक्रवार को विधानमंडल से इस्तीफा दे दिया। दोनों के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। विधानसभा सचिवालय द्वारा जारी की गयी अधिसूचना में कहा गया है कि संगीता कुमारी (मोहनिया) और चेतन आनंद (शिवहर) के इस्तीफे के बाद दोनों सीट रिक्त हो गई हैं। दोनों विधायक तत्काल प्रतिक्रिया के लिए उपलब्ध नहीं हो सके। इस वर्ष की शुरुआत में जब जनता दल यूनाइटेड (जदयू) दोबारा भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में शामिल हुआ था, तब से संगीता कुमारी और चेतन आनंद विधानसभा की कार्यवाही के दौरान लगातार सत्तापक्ष की बेंचों पर बैठते नजर आ रहे थे। इसके बाद राजद ने दोनों के खिलाफ अयोग्यता याचिका दायर की थी, जो फिलहाल विधानसभा अध्यक्ष नंद किशोर यादव के समक्ष लंबित है। बता दें कि राज्य में दो चरणों में चुनाव होंगे, पहला चरण छह नवंबर को और दूसरा चरण 11 नवंबर को होगा। मतगणना 14 नवंबर को होगी। इससे पहले कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री मुरारी प्रसाद गौतम और भभुआ से राजद विधायक भारत बिंद ने भी विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा दिया था।  

BJP शीर्ष नेतृत्व की दिल्ली बैठक: बिहार चुनाव रणनीति पर शाह-नड्डा का मंथन

पटना बिहार विधानसभा चुनाव में सीट बंटवारे को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में बातचीत का दौर अब अंतिम चरण है। भाजपा और जदयू ने अपने कई पुराने चेहरों को हरी झंडी भी दे दी है। लेकिन, अब तक औपचारिक रूप से घोषणा नहीं की है। यह घोषणा आज शाम तक संभावित है। लेकिन, इससे पहले भारतीय जनता पार्टी की कोर कमेटी के सदस्य दिल्ली में राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के घर पर जुटे हैं। गृह मंत्री अमित शाह, बिहार चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय राज्य मंत्री नित्यानंद राय समेत भाजपा के वरिष्ठ नेता सीट शेयरिंग समेत कई मुद्दों पर बातचीत कर रहे हैं। एनडीए में चिराग-मांझी की जिद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में सीट बंटवारे का काम 95 फीसदी तक हो चुका है। भाजपा और जदयू दोनों 100 से अधिक पर चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। केंद्रीय चिराग पासवान की पार्टी को 28, केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी को आठ और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी को करीब पांच सीटें  भाजपा और जदयू देना चाहती है। लेकिन, लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास और हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा मानने को तैयार नहीं। चिराग 35 से कम सीटों पर चुनाव नहीं लड़ना चाहते हैं। वहीं जीतन राम मांझी का तर्क है कि राज्य स्तर की पार्टी बनने के लिए आठ विधायक चाहिए। हमारे पास पहले से चार विधायक हैं। ऐसे में 15 सीटों से कम पर चुनाव हमलोग नहीं लड़ कसते हैं। वहीं आरएलएसपी के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने 24 सीटों की मांग की है। तीनों पार्टी के नेताओं ने चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान से मिलकर अपनी-अपनी बात रख दी है। जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने दावा किया है कि एनडीए के घटक दलों के कहीं कोई मतभेद नहीं है। सबलोग एकजुट हैं। जल्द ही सीट बंटवारे का एलान कर दिया जाएगा। प्रधानमंत्री के रहते सम्मान की चिंता नहीं बिहार चुनाव को लेकर बीजेपी के साथ सीट बंटवारे की बातचीत पर एलजेपी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने कहा कि बातचीत सकारात्मक ढंग से चल रही है और अब अपने अंतिम चरण में है। जिस घोषणा का इंतजार आपलोग कर रहे हैं, वह भी जल्द होने वाली है। हमलोग हर एक चीजों पर विस्तार से चर्चा कर रहे हैं। ताकि बाद में गठबंधन के अंदर किसी भी चीजों को लेकर कोई संशय नहीं हो। हम हर छोटे-बड़े मुद्दे, सीटों, उम्मीदवारों और प्रचार को लेकर विस्तृत चर्चा कर रहे हैं। जहां पर मेरे प्रधानमंत्री हैं, वहां पर मुझे अपने सम्मान करने की चिंता नहीं है। 

BJP को चुनावी झटका: मिश्री लाल यादव ने छोड़ी पार्टी, RJD में एंट्री तय

पटना  भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को एक और तगड़ा झटका लगा है। दरअसल, अब दरभंगा की अलीनगर विधानसभा सीट से विधायक मिश्रीलाल यादव ने बीजेपी से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि संगठन में दलितों और अन्य पिछड़े समुदायों को उनका हक नहीं मिल रहा है। दरअसल, मिश्री लाल यादव ने शनिवार को पार्टी से इस्तीफा देने की घोषणा की और आरोप लगाया कि संगठन में दलितों और अन्य पिछड़े समुदायों को उनका हक नहीं मिल रहा है। दरभंगा ज़िले की अलीनगर सीट से विधायक यादव ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि वह पार्टी की राज्य इकाई के अध्यक्ष दिलीप जायसवाल को अपना इस्तीफ़ा सौंपेंगे। पार्टी ने तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन सूत्रों ने बताया कि यादव इन अटकलों से नाराज हैं कि इस बार उन्हें टिकट नहीं दिया जाएगा और भाजपा अलीनगर से गायिका मैथिली ठाकुर को मैदान में उतार सकती है। राजद में होंगे शामिल! विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के टिकट पर 2020 का चुनाव लड़ने वाले मिश्री लाल यादव ने कहा, "मैंने पहली बार एनडीए के लिए अलीनगर सीट जीती है। पहले, कई अन्य उम्मीदवार, जिनके पास बहुत पैसा और बाहुबल था, ऐसा करने में नाकाम रहे थे।" यादव ने अपनी भविष्य की योजनाओं का खुलासा नहीं किया, लेकिन समझा जाता है कि वह राजद नीत विपक्षी दल इंडिया ब्लॉक के संपर्क में हैं।

BJP की नई चाल शाहाबाद-मगध में, 2020 की 36 सीटों को फिर से जीतने की तैयारी

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में भारतीय जनता पार्टी ने इस बार ‘जीती सीटों को बचाने’ के साथ-साथ ‘हारी सीटों को वापस पाने’ का बड़ा अभियान शुरू किया है. पार्टी के भीतर इसे “मिशन रिकवरी प्लान” का नाम दिया गया है. पिछले विधानसभा चुनाव 2020 में भाजपा ने 110 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिनमें से 74 पर जीत हासिल की थी. हालांकि, पार्टी ने बाद में हुए उपचुनावों में कुढ़नी, रामगढ़ और तरारी जैसी तीन सीटों पर अपनी वापसी दर्ज करायी थी. इन 36 सीटों के लिए बीजेपी तैयार कर रही रणनीति अब भाजपा की निगाह उन 36 सीटों पर है जहां 2020 में हार मिली थी. पार्टी ने इन सभी सीटों को दो चरणों में विभाजित कर उनकी अलग-अलग रणनीति तैयार की है. पहले चरण की 18 सीटों में बैकुंठपुर, दरौली, सीवान, राघोपुर, गरखा, सोनपुर, कुढ़नी, मुजफ्फरपुर, बखरी, उजियारपुर, बक्सर, तरारी, शाहपुर, बख्तियारपुर, फतुहा, दानापुर, मनेर और बिक्रम शामिल हैं. वहीं, दूसरे चरण की हार वाली सीटों में कल्याणपुर, भागलपुर, रजौली, हिसुआ, बोधगया, गुरुआ, औरंगाबाद, गोह, डिहरी, काराकाट, रामगढ़, मोहनिया, भभुआ, चैनपुर, जोकिहाट, बायसी, किशनगंज और अरवल हैं. बीजेपी 2020 में जहां हारी, उन क्षेत्रों में विशेष फोकस इन सभी सीटों के लिए भाजपा ने अपने बूथ और जातिगत समीकरणों की गहराई से समीक्षा की है. विशेष रूप से उन जिलों पर फोकस किया गया है, जहां 2020 में पार्टी का ‘संपूर्ण सफाया’ हुआ था. इनमें औरंगाबाद, रोहतास, कैमूर और बक्सर जैसे जिले शामिल हैं. इन चारों जिलों में पिछली बार एक भी सीट नहीं मिल पाई थी. दिलचस्प बात यह है कि 2015 के विधानसभा चुनाव में कैमूर की चारों सीटें भाजपा के खाते में थीं, लेकिन 2020 में पार्टी को यहां करारी हार झेलनी पड़ी. यही वजह है कि इस बार भाजपा शाहाबाद और मगध क्षेत्र को लेकर बेहद सतर्क है. शाहाबाद-मगध में ‘पावर स्टार’ का दांव पार्टी ने इन क्षेत्रों में सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को साधने के लिए ‘लोकप्रिय चेहरों’ की रणनीति अपनाई है. भोजपुरी गायक और अभिनेता पवन सिंह को एक बार फिर भाजपा के प्रचार अभियान में सक्रिय किया गया है. पवन सिंह की क्षेत्र में पकड़ और लोकप्रियता को देखते हुए पार्टी उन्हें ‘जनसंपर्क का चेहरा’ बना रही है. इसके अलावा RLM प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा का मगध और शाहाबाद क्षेत्र में गहरा प्रभाव है. इसी कड़ी में भाजपा के बिहार प्रभारी विनोद तावड़े ने हाल ही में दिल्ली में पवन सिंह और कुशवाहा की मुलाकात कराई थी. जिसे राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है. हर जिले के लिए ‘माइक्रो प्लान’ भाजपा संगठन ने हर जिले की हारी हुई सीट के लिए अलग-अलग ‘माइक्रो प्लान’ तैयार किया है. इसमें पुराने उम्मीदवारों का आकलन, स्थानीय समीकरणों की पुनर्समीक्षा, और सहयोगी दलों के साथ सीट तालमेल पर जोर दिया गया है. हालांकि एनडीए में सीटों का बंटवारा अभी अंतिम रूप में नहीं है, लेकिन भाजपा ने स्पष्ट कर दिया है कि चाहे सीटें बदली जाएं या नहीं, पार्टी का संगठन हर क्षेत्र में पूरी ताकत के साथ उतरेगा. ‘हारी नहीं, छोड़ी सीटों पर भी वापसी’ का लक्ष्य पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि 2020 में कुछ सीटें हार की वजह से नहीं, बल्कि सीट-शेयरिंग के कारण छूटी थीं. इस बार भाजपा ऐसे क्षेत्रों पर भी फोकस कर रही है, जहां उसके संगठन की मजबूत जड़ें हैं लेकिन पिछले बार साथी दलों को मौका मिला था. शाहाबाद-मगध में BJP की परीक्षा कुल मिलाकर, भाजपा ने बिहार में इस बार चुनावी जंग को दो हिस्सों में बांट दिया है. ‘सेव द सीट्स’ (जीती सीटें बचाने का अभियान) और ‘रिक्लेम द लॉस्ट’ (हारी सीटें वापस पाने की रणनीति). शाहाबाद और मगध की सियासी जमीन पर भाजपा की सबसे बड़ी परीक्षा होने जा रही है, जहां से पार्टी अपने खोए जनाधार को वापस पाने की जुगत में जुटी है. 

सीट बंटवारे पर BJP की रणनीति: बिहार में NDA अपनाएगी 2020 वाला रास्ता

पटना 6 और 11 नवंबर को बिहार विधानसभा चुनाव के लिए होने वाले मतदान का परिणाम 14 नवंबर को सामने आ जाएगा। मतलब, अब चुनाव परिणाम आने में भी 36 दिन शेष ही हैं। आमने-सामने की लड़ाई लड़ रहे दोनों गठबंधनों में सीटों पर ही बात बनती नहीं दिख रही है, प्रत्याशियों का नाम तो उसके बाद घोषित होगा। गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी के बिहार प्रदेश कार्यालय में गहमागहमी रही। चिराग पासवान और जीतन राम मांझी के बयानों ने उस गहमागहमी को गरमागरमी जैसा बनाए रखा। लेकिन, अंदर की बात यह है कि एनडीए की सीट शेयरिंग योजना ट्रैक से उतरी नहीं है। लोकसभा चुनाव में ही भाजपा ने कर ली थी तैयारी बिहार भाजपा के चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान पटना में हैं। वह घटक दलों के मन की बातें उनके मन से निकालने में कामयाब रहे हैं। मांझी-चिराग के मन की बात भले सामने आई, लेकिन भाजपा को भी पता है कि केंद्रीय मंत्री की कद्दावर कुर्सी छोड़ चिराग पासवान और जीतन राम मांझी बाहर जाने वाले नहीं हैं। उपेंद्र कुशवाहा तो किनारे होकर तमाशा देख रहे हैं। चिराग पासवान की पार्टी के पास मौजूदा विधानसभा में कोई विधायक नहीं। जीतन राम मांझी के पास चार विधायक हैं। उपेंद्र कुशवाहा के पास भी कोई विधायक नहीं। मांझी-चिराग या कुशवाहा को लोकसभा चुनाव के समय भी अंदाजा बता दिया गया था कि बिहार विधानसभा चुनाव के समय सीटों पर कैसे बात होगी। चिराग और मांझी को इसी कारण पसंदीदा, मजबूत और काम लायक मंत्रालय दिए गए थे। रही बात उपेंद्र कुशवाहा की तो, उनके लिए एनडीए के पास कई ऑफर हैं। बिहार में हुई बात, लेकिन रास्ता तो दिल्ली में निकलेगा बिहार विधानसभा में 243 सीटें हैं। भाजपा-जदयू अब तक लगभग बराबर 100-100 के गणित पर है। चिराग पावान न्यूनतम 35 और जीतन राम मांझी कम-से-कम 15 सीटें चाह रहे हैं। इस तरह से बच रही है तीन सीटें उपेंद्र कुशवाहा के लिए। जदयू 110-105  की मांग से उतर कर 101-100 पर आकर टिकेगा ही। भाजपा 105 की तैयारी के बीच 100 के लिए भी मन बनाए बैठी है। भाजपा की पटना में बैठकों से कोई अंतिम नतीजा निकलना भी नहीं था। अब फैसला दिल्ली में होना है। ऐसे में भाजपा के रणनीतिकारों ने 2020 मॉडल को ही अंतिम उपाय माना है। क्या है भाजपा का अंतिम रास्ता, जो 2020 में अपनाया था 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में चिराग की पार्टी से भाजपा के कई कद्दावर नेता उतरे थे, लेकिन उस समय निशाना जदयू था। इस बार वैसी परिस्थिति नहीं है। सीएम नीतीश कुमार और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के बीच उस समय वाली दूरी अभी नहीं है। भाजपा ने उस समय एनडीए में रही मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी में अपने प्रत्याशी दिए थे। मुकेश सहनी खुद चुनाव नहीं जीत सके थे, इसलिए उनके चार में से तीन विधायक अपनी मूल पार्टी भाजपा में चले गए। एक का निधन हो गया था। मौजूदा परिस्थिति में जदयू-भाजपा अपने खाते में 100-100 सीटों को रखती है तो जीतन राम मांझी की हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा-सेक्युलर को जीतने वाली 8 सीटों के साथ मजबूत स्थिति वाली दो-तीन सीटें देगी। उपेंद्र कुशवाहा के राष्ट्रीय लोक मोर्चा को पांच-आठ सीटों के बीच फाइनल किया जाएगा। चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को 22-25 सीटें देने की बात अंतिम तौर पर चल रही है। जब यह सब फाइनल होने लगेगा तो इन दलों से अपने कुछ मजबूत प्रत्याशी भी शिफ्ट करने की बात होगी। देखना यही है कि इस बात पर चिराग कितना राजी होते हैं।मांझी या कुशवाहा के लिए भाजपा की पंचायत का यह रास्ता फायदेमंद ही होगा, क्योंकि ऐसे प्रत्याशियों के पास भाजपा का कैडर भी होगा।

वोटर लिस्ट अपडेट पर कांग्रेस की नजर, नए-पुराने वोटर्स तक पहुंच बनाएगी पार्टी, BJP के पन्ना मॉडल को चुनौती

भोपाल  एमपी के चुनावों में लगातार हार के बाद कांग्रेस अब वोटर लिस्ट सुधार को लेकर तेजी से काम कर रही है। बीजेपी के पन्ना प्रमुखों के मुकाबले कांग्रेस अब हर बूथ पर बीएलए तैनात कर रही है। 2028 के विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस ने प्रदेशभर में मतदाता सूची की करेगी जाँच।  ऐसे में कांग्रेस अब ज्यादा नंबर वाले वोटर्स के घर जाएगी, जो भी नए नाम जुड़ेंगे-कटेंगे उन तक भी पहुंचेगी। कांग्रेस अब केवल प्रचार तक सीमित नहीं रहना चाहती बल्कि मतदाता सूची के हर पन्ने और हर नाम पर अपनी निगरानी रखने पर तेजी से काम करेगी। नाम जुड़वाने, कटवाने की ट्रेनिंग देंगे कांग्रेस सभी बीएलए को निर्वाचन आयोग की प्रक्रियाओं जैसे फॉर्म-6 (नाम जोड़ना), फॉर्म-7 (नाम हटाना), फॉर्म-8 (सुधार) और फॉर्म-8A (स्थानांतरण) की जानकारी देने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेगी। BLO के सीधे संपर्क में होंगे कांग्रेस के BLA कांग्रेस के बूथ लेवल एजेंट (BLA) सीधे बूथ लेवल ऑफिसर (BLO)के संपर्क में रहेंगे। आयोग द्वारा जारी गाइडलाइन के अनुसार बीएलओ घर-घर जाकर एनेक्सचर-C भरवाएंगे, जो मतदाता की पात्रता प्रमाणित करने का दस्तावेज होगा। कांग्रेस ने अपने बीएलए को यह जिम्मेदारी दी है कि वे इस सर्वे में शामिल होकर हर वोटर का विवरण सही तरीके से दर्ज करवाएं। हर विधानसभा में बनेगा कांग्रेस कंट्रोल रूम प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने हर जिले और विधानसभा क्षेत्र में ‘मतदाता सूची नियंत्रण कक्ष’ बनाएगी। जो निर्वाचन आयोग की वेबसाइट और ऑफलाइन मतदाता सूची दोनों से डेटा एकत्र करेगा। इस कंट्रोल रूम से वोटर लिस्ट में छूटे नामों की रिपोर्ट तैयार की जाएगी। कंट्रोल रूम पार्टी के हर बीएलए से फीडबैक लेगा। और स्थानीय स्तर पर शिकायतों का समाधान कराने पार्टी स्तर पर सूचित करेगा। कांग्रेस के समर्थक वोटर्स के काटे गए थे नाम कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पिछले चुनावों में बड़ी संख्या में समर्थक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटे पाए गए थे। इस बार कांग्रेस ने उस गलती को न दोहराने का संकल्प लिया है। SIR को लेकर कांग्रेस की तैयारी     हर मतदान केंद्र पर कम से कम एक प्रशिक्षित बीएलए की नियुक्ति।     मतदाता सूची के संशोधन और दावे-आपत्ति अवधि में सक्रिय भागीदारी।     पात्र युवाओं और पहली बार वोट डालने वालों को पंजीकृत कराने का अभियान।     मृत मतदाताओं या स्थानांतरित व्यक्तियों के नाम हटवाने के लिए साक्ष्य आधारित आपत्तियाँ।     महिला मतदाताओं के लिए विशेष जागरूकता कार्यक्रम। एमपी के 5 करोड लोगों के हस्ताक्षर कराने चलेगा अभियान वोट चोर-गद्दी छोड़ कार्यक्रम के तहत एमपी में 5 करोड़ लोगों के हस्ताक्षर कराने एक अभियान चलाया जाएगा। इस हस्ताक्षर अभियान के लिए पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने एमपी की सभी 230 विधानसभाओं के प्रभारी नियुक्त किए हैं।