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मध्य प्रदेश में 500 वर्गमीटर तक के प्लॉट पर स्थानीय निकाय देगा मकान की मंजूरी, T&CP से मिली राहत

भोपाल / इंदौर  मध्य प्रदेश में 500 वर्गमीटर (करीब 5,382 वर्गफीट) तक के प्लॉट पर मकान बनाने की अनुमति अब स्थानीय निकाय के स्तर पर ही मिल सकेगी। इसके लिए T&CP से अलग डेवलपमेंट परमिशन लेने की जरूरत नहीं होगी। स्वीकृत लैंड यूज वाले प्लॉट का नक्शा नगर निगम, नगर पालिका या नगर परिषद 30 दिन में मंजूर कर सकेगा। पहले इस प्रक्रिया में तीन से चार महीने लगते थे।  500 वर्गमीटर तक के भूखंडों पर प्रक्रिया होगी सरल महापौर भार्गव ने कहा कि संशोधन से 500 वर्गमीटर तक के भूखंडों पर भवन निर्माण और पुनर्निर्माण की प्रक्रिया अधिक सरल और सुगम होगी। इससे आम नागरिकों को निर्माण से जुड़ी प्रक्रियाओं में राहत मिलने की उम्मीद है। विकास की गति बढ़ाने में मदद मिलेगी उन्होंने कहा कि नियमों में बदलाव से नागरिकों को सुविधा मिलेगी और शहरों में विकास की गति भी बढ़ेगी। साथ ही बेहतर शहरी नियोजन को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने इस निर्णय को जनसुविधा और सुगम विकास की दिशा में स्वागतयोग्य पहल बताया। मुख्यमंत्री और मंत्री का जताया आभार पुष्यमित्र भार्गव ने इस संशोधन के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का हृदय से धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि जनसुविधा को प्राथमिकता देते हुए लिए गए ऐसे फैसले नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण हैं। डिजिटल दस्तावेज ही होंगे मान्य मध्य प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में अब घर या अन्य भवन बनाने की अनुमति लेना पहले से आसान होगा। राज्य सरकार ने बिल्डिंग परमिशन के लिए कई विभागों से अनिवार्य रूप से अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) लाने की बाध्यता खत्म कर दी है। अब हाउसिंग सोसायटी, नजूल और बिजली विभाग समेत कई मामलों में आवेदकों को अलग-अलग विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। साथ ही भवन अनुज्ञा की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी और केवल डिजिटल दस्तावेज ही स्वीकार किए जाएंगे। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने इस संबंध में सभी नगरीय निकायों को निर्देश जारी किए हैं। अपर मुख्य सचिव संजय दुबे द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, भवन अनुज्ञा प्रक्रिया को सरल, तेज और पारदर्शी बनाने के लिए यह बदलाव किए गए हैं। सरकार का कहना है कि इससे आम नागरिकों के साथ निवेशकों, बिल्डर्स और निर्माण एजेंसियों को भी राहत मिलेगी। कई विभागों की NOC से मिली राहत नई व्यवस्था के तहत सहकारिता विभाग एवं गृह निर्माण सहकारी समितियों, नजूल और बिजली विभाग से मांगी जाने वाली कई प्रकार की NOC की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। रक्षा प्रतिष्ठानों, मध्यप्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल तथा विकास प्राधिकरणों से जुड़े मामलों में भी अब आवेदकों को स्वयं NOC लाने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। यदि किसी मामले में संबंधित विभाग की राय आवश्यक होगी तो सक्षम प्राधिकारी आवेदन मिलने के सात दिन के भीतर प्रकरण संबंधित विभाग को भेजेगा। विभाग को 21 दिन के भीतर अपनी अनापत्ति या आपत्ति देनी होगी। तय समय में जवाब नहीं मिलने पर भवन अनुमति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकेगी। इन मामलों में अब भी NOC जरूरी सरकार ने स्पष्ट किया है कि एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI), राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण (NMA) और हेरिटेज क्षेत्रों से संबंधित NOC केवल उन्हीं मामलों में जरूरी होगी, जहां ऑनलाइन GIS आधारित जांच में भूखंड प्रतिबंधित या प्रभावित क्षेत्र में पाया जाएगा। अन्य मामलों में इनकी जरूरत नहीं होगी। पर्यावरण और फायर नियमों में भी स्पष्टता निर्धारित क्षेत्रफल से बड़े भवनों और परियोजनाओं के लिए ही पर्यावरणीय स्वीकृति जरूरी होगी। वृक्ष कटाई की अनुमति भी केवल उन्हीं मामलों में लेनी होगी, जहां वास्तव में पेड़ काटे जाने हों। अग्निशमन (फायर) अनापत्ति के नियम राष्ट्रीय भवन संहिता के अनुसार लागू रहेंगे। नियमों में 5 बड़े बदलाव     दायरा: छूट 500 वर्गमीटर (5,382 वर्गफीट) तक के प्लॉट पर ही लागू होगी।     T&CP की अनुमति खत्म: भवन निर्माण के लिए T&CP से अलग ‘डेवलपमेंट परमिशन’ लेने की जरूरत नहीं होगी।     मंजूरी का अधिकार: नक्शा पास करने और निर्माण की अनुमति देने का अधिकार स्थानीय निकाय-नगर निगम, नगर पालिका या नगर परिषद के पास होगा।     अनिवार्य शर्त: प्लॉट का लैंड यूज स्वीकृत डेवलपमेंट प्लान (मास्टर प्लान) के मुताबिक होना जरूरी है।     प्रक्रिया: सरकार ने 28 अगस्त को संशोधन का ड्राफ्ट जारी कर 5 दिन में आपत्तियां और सुझाव मांगे थे। अब फाइनल नोटिफिकेशन जारी किया जा रहा है। इंदौर में 3 साल से अटकी भवन अनुमतियों की प्रक्रिया फिर शुरू होने की उम्मीद मंत्रालय सूत्रों के अनुसार, इस बदलाव की पृष्ठभूमि इंदौर की भवन अनुमति से जुड़ी समस्या रही। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने यह मुद्दा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने उठाया था। बाणगंगा, भागीरथपुरा, न्यू देवास रोड और परदेशीपुरा समेत एक दर्जन से अधिक इलाकों में खसरा भूमि और प्लॉटों के लेआउट T&CP से स्वीकृत नहीं थे। यहां पहले ‘डाटा फॉर्म’ के आधार पर प्लॉट तैयार कर भवन अनुमति दी जाती थी, लेकिन जुलाई 2023 में इस व्यवस्था पर रोक लग गई। इसके बाद इन इलाकों में मकानों के नक्शे पास होने की प्रक्रिया रुक गई। नए नियम से इंदौर समेत प्रदेश के ऐसे भूखंड मालिकों को राहत मिलने की उम्मीद है।

हॉर्मुज संकट में भारत ने बदली रणनीति, सोलर के साथ गैस से बिजली उत्पादन में 80% उछाल

नई दिल्ली एक तरफ यूएस और ईरान के बीच चल रहे युद्ध की वजह से हॉर्मुज पर फिर तनाव बढ़ गया है. ऐसे में दुनियाभर को फिर गैस और बिजली की टेंशन सताने लगी है. लेकिन इसी बीच भारत ने अब बिजली के प्रोडक्शन को बढ़ाने के लिए ऐसा तरीका निकाल लिया है, जिससे बिजली का प्रोडक्शन बढ़ा है. देशभर में सितंबर की शुरुआत से बिजली की मांग तेजी से बढ़ी है. खासकर शाम के समय जब लोग काम से घर लौटते हैं, तब बिजली की खपत अचानक से बढ़ जाती है. इसी समय सोलर पावर का प्रोडक्शन भी कम हो जाता है, जिससे बिजली की कमी और बढ़ जाती है. इस स्थिति से निपटने के लिए बिजली कंपनियां अब गैस से चलने वाले पावर प्लांट्स का ज्यादा इस्तेमाल कर रही हैं. 1 से 9 सितंबर के बीच गैस आधारित बिजलीघरों ने 1,088.64 मिलियन यूनिट बिजली बनाई. पिछले साल इसी अवधि में प्रोडक्शन 603.70 मिलियन यूनिट था. यानी एक साल में गैस से बिजली प्रोडक्शन करीब 80 फीसदी बढ़ गया है।  बिजली की जरूरत ने बढ़ाई चिंता सितंबर में भी कई इलाकों में गर्मी और उमस बनी हुई है. ऐसे में घरों और कारोबारों में बिजली की खपत बढ़ी है. 9 सितंबर को देश में बिजली की अधिकतम मांग 267 गीगावॉट तक पहुंच गई. इस दौरान रात में करीब 7.7 गीगावॉट बिजली की कमी दर्ज हुई. अगले दिन यानी 10 सितंबर को मांग और बढ़कर 269 गीगावॉट हो गई. हालांकि, उस दिन बिजली की कमी घटकर करीब 6.1 गीगावॉट रह गई. शाम के समय यह समस्या इसलिए ज्यादा होती है क्योंकि सूरज ढलने के साथ सोलर पावर का प्रोडक्शन तेजी से कम हो जाता है. दूसरी तरफ घरों में पंखे, एसी, लाइट और दूसरे उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ जाता है।  गैस प्लांट से कैसे मिल रही मदद? गैस से चलने वाले बिजलीघरों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इन्हें जरूरत के हिसाब से जल्दी चालू किया जा सकता है और इनका प्रोडक्शन भी तेजी से बढ़ाया या घटाया जा सकता है. यही वजह है कि बिजली की अचानक बढ़ी मांग के समय ये प्लांट काफी काम आते हैं. देश में गैस आधारित बिजली प्रोडक्शन की कुल कैपेसिटी करीब 20.1 गीगावॉट है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, एक सीनियर सरकारी अधिकारी के मुताबिक, फिलहाल शाम के समय बिजली की कमी को संभालने के लिए करीब 4.5 से 5.5 गीगावॉट गैस आधारित बिजली का इस्तेमाल किया जा रहा है।  कोयला और हाइड्रो से नहीं मिल रही पूरी मदद बिजली की बढ़ती जरूरत के बीच कोयला आधारित पावर प्लांट भी लगभग अपनी पूरी क्षमता से चल रहे हैं. ऐसे में उनसे अचानक और ज्यादा बिजली पैदा करवाना आसान नहीं है. वहीं, बारिश की कमी का असर हाइड्रो पावर यानी पानी से बनने वाली बिजली पर भी पड़ा है. दक्षिण और पश्चिम भारत के कई इलाकों में जलाशयों का जलस्तर कम है. इससे आने वाले दिनों में हाइड्रो पावर का प्रोडक्शन और घटने की आशंका है. ऐसे में बिजली की पीक डिमांड को पूरा करने के लिए गैस पावर की भूमिका और अहम हो गई है।  महंगी गैस के बावजूद बढ़ी खरीद बिजली बनाने वाली कंपनियों ने गैस की खरीद भी बढ़ा दी है. 1 से 10 सितंबर के बीच पावर सेक्टर की ओर से स्पॉट मार्केट में 30,53,300 MMBtu से ज्यादा नेचुरल गैस खरीदी गई. पिछले साल इसी अवधि में खरीद करीब 3,75,000 MMBtu थी. हालांकि, इस दौरान गैस की कीमत भी काफी बढ़ी. औसत स्पॉट गैस कीमत पिछले साल के 1,013 रुपये प्रति MMBtu से बढ़कर 2,420 रुपये प्रति MMBtu हो गई. यानी कीमत में करीब 139 फीसदी का इजाफा हुआ. इसके बावजूद बिजली की जरूरत पूरी करने के लिए गैस प्लांट्स का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है। 

लद्दाख बॉर्डर पर चीन को झटका! LAC पर कम हुई PLA की तैनाती, भारत की पकड़ हुई मजबूत

 नई दिल्ली भारत-चीन सीमा से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है. रक्षा मंत्रालय की 2025-26 की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में उत्तरी सीमाओं पर चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी यानी PLA की तैनाती में बड़ी कमी देखी गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC के सामने अपनी तैनाती घटाई है और अब उत्तरी सीमाओं और पारंपरिक ट्रेनिंग इलाकों में करीब 10 कंबाइंड आर्म्स ब्रिगेड के बराबर बल तैनात हैं।  रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की तरफ से सभी LAC सेक्टर में सेना की तैनाती मजबूत बनी हुई है. भारतीय सेना किसी भी उभरती चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार और सही स्थिति में है. रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत-चीन के बीच सकारात्मक राजनीतिक, कूटनीतिक और सैन्य स्तर की बातचीत से उत्तरी सीमाओं पर हालात में ज्यादा स्थिरता आई है।  चीन के साथ फिर शुरू हुआ सैन्य संवाद रिपोर्ट के मुताबिक, भारत और चीन के बीच सैन्य स्तर पर बातचीत भी फिर शुरू हुई है. इसमें अक्टूबर 2025 में पूर्वी लद्दाख में हुई 23वीं कोर कमांडर स्तर की बैठक भी शामिल है. दोनों देशों के बीच सैन्य बातचीत के जरिए सीमा से जुड़े मुद्दों को सुलझाने और तनाव कम करने की कोशिश जारी है।  इसके अलावा PLA के साथ बॉर्डर पर्सनल मीटिंग यानी BPM भी सभी सेक्टर में जारी हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि इन बैठकों का माहौल सौहार्दपूर्ण रहा है और इनके जरिए दोनों पक्षों से जुड़े मुद्दों को उठाया और सुलझाया जा रहा है।  ऑपरेशन सिंदूर के बाद क्षमताओं की समीक्षा रक्षा मंत्रालय ने अपनी रिपोर्ट में ऑपरेशन सिंदूर का भी जिक्र किया है. रिपोर्ट के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की मल्टी-डोमेन क्षमता, इंटेलिजेंस में बढ़त, तकनीकी ताकत और तीनों सेनाओं की संयुक्त ऑपरेशनल तैयारी को दिखाया।  ऑपरेशन के बाद सेना ने अपनी क्षमताओं और कमियों की समीक्षा भी की. इसके बाद फोर्स रिस्ट्रक्चरिंग, तीनों सेनाओं के बीच ज्यादा जॉइंटनेस और नई तकनीकों पर फोकस बढ़ाया गया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि बदलते सुरक्षा हालात को देखते हुए भारतीय सेना अपनी तैयारी और क्षमताओं को लगातार मजबूत कर रही है।  डिफेंस मिनस्ट्री की सालाना रिपोर्ट में क्या है, बड़ी बातें     भारत और चीन के बीच प्रगाढ़ हो रहे रिश्तों के बीच ही भारतीय रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट आई है।     वित्त वर्ष 2025-26 की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2025 में उत्तरी सीमाओं के सामने पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की सेनाओं की तैनाती में काफी कमी देखी गई।     इसमें LAC के साथ वाले इलाकों और पारंपरिक ट्रेनिंग इलाकों में 10-10 'कंबाइंड आर्म्स ब्रिगेड' आकार की सेनाएं तैनात थीं।     इसका मतलब है कि लद्दाख से अरुणाचल प्रदेश तक फैली LAC पर लगभग 45,000-50,000 चीनी सैनिक थे, और इतनी ही संख्या पारंपरिक ट्रेनिंग इलाकों में भी थी।     रिपोर्ट के मुताबिक, पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की 10 अतिरिक्त ब्रिगेड उसके पारंपरिक ट्रेनिंग इलाकों में तैनात हैं। 2020 में टकराव, तक लद्दाख सीमा पर तैनात थे 60000 चीन सैनिक: रिपोर्ट हालांकि MoD की यह रिपोर्ट इस महीने जारी की गई है, लेकिन इसे अरुणाचल प्रदेश में सीमा पर मौजूदा तनाव के दौर से पहले तैयार किया गया था। उस तनाव के कारण अतिरिक्त सैनिकों को आगे के इलाकों में तैनात करना पड़ा था। 2020 के सीमा संकट के दौरान, लद्दाख सीमा पर लगभग 60,000 चीनी सैनिक तैनात थे। रिपोर्ट में भारतीय तैनाती का जिक्र नहीं है। अरुणाचल में टकराव के बाद कितने बदले हालात सालाना रिपोर्ट में अरुणाचल की स्थिति का खास तौर पर जिक्र नहीं है, लेकिन कहा गया है कि LAC के सभी सेक्टरों में भारतीय सेना की तैनाती मजबूत और अच्छी स्थिति में है, और वह किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। रिपोर्ट को अंतिम रूप दिए जाने के बाद के महीनों में, अरुणाचल के कम से कम दो इलाकों में सीमा पर तनाव हुआ है, जिसके चलते आगे तैनात सैनिकों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है। लगातार जारी है बॉर्डर पर्सनल मीटिंग्स तनाव के बाद स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव (विशेष प्रतिनिधि) स्तर की बातचीत हुई, और उसके बाद मतभेदों को सुलझाने के लिए इस महीने की शुरुआत में कोर कमांडर स्तर की बैठक हुई। रिपोर्ट में कहा गया है कि जमीनी स्तर पर, टकराव के मुद्दों को सुलझाने के लिए सभी सेक्टरों में PLA के साथ सौहार्दपूर्ण और दोस्ताना माहौल में 'बॉर्डर पर्सनल मीटिंग्स' (सीमा कर्मियों की बैठकें) जारी हैं। ऑपरेशन सिंदूर पर रिपोर्ट में क्या है? 'ऑपरेशन सिंदूर' पर बनी रिपोर्ट में भारतीय सशस्त्र बलों के सफल हमलों का जिक्र है, जिन्होंने पाकिस्तान में मौजूद आतंकवादी बुनियादी ढांचे को नष्ट किया और वहां की सेना को भारी नुकसान पहुंचाया। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि ऑपरेशन के दौरान ड्रोन और एंटी-ड्रोन उत्पाद उपलब्ध कराने में भारतीय उद्योग की क्षमता में कमी थी, जिसे अब तेजी से विकास करके दूर किया जा रहा है।

चंडीगढ़ में सोलर एनर्जी को मिलेगा बढ़ावा, 8000 घरों की छतों पर लगेंगे सोलर प्लांट, ₹78 हजार तक सब्सिडी

चंडीगढ़  शहर को वर्ष 2030 तक मॉडल सोलर सिटी बनाने की दिशा में प्रशासन ने निजी घरों की छतों पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने का अभियान तेज कर दिया है।चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी, साइंस एंड टेक्नोलाजी प्रमोशन सोसायटी (क्रेस्ट) ने मार्च 2027 तक शहर के आठ हजार निजी घरों की छतों पर सोलर प्लांट लगाने का लक्ष्य तय किया है। अभी तक प्रधानमंत्री सूर्य घर-मुफ्त बिजली योजना के तहत 1433 निजी घरों पर सोलर प्लांट लगाए जा चुके हैं, जबकि करीब दो हजार लोगों ने अपने स्तर पर संयंत्र स्थापित किए हैं। लक्ष्य हासिल करने के लिए क्रेस्ट की ओर से शहरभर में जागरूकता शिविर लगाए जा रहे हैं। इनमें लोगों को आवेदन प्रक्रिया, सब्सिडी, बैंक ऋण और सोलर प्लांट लगाने की तकनीकी जानकारी दी जा रही है। 12 सूचीबद्ध विक्रेता लोगों को संयंत्र की क्षमता और स्थापना संबंधी जानकारी दे रहे हैं। पंजाब एंड सिंध बैंक तथा पंजाब नेशनल बैंक के प्रतिनिधि ऋण संबंधी सवालों का जवाब दे रहे हैं। सरकारी भवनों पर पहले ही पूरा हुआ लक्ष्य चंडीगढ़ देश के उन शुरुआती शहरों में शामिल है, जहां सभी पात्र सरकारी भवनों और मकानों पर सोलर प्लांट लगाने का लक्ष्य पूरा किया जा चुका है। शहर के 6366 सरकारी भवनों पर सौर संयंत्र लगाए गए हैं। करीब 1400 सरकारी मकानों में बिजली खपत नेट-जीरो स्तर तक पहुंच गई है। इन संयंत्रों की कुल क्षमता 18.1 मेगावाट पीक है और इनसे सालाना करीब 2.35 करोड़ यूनिट बिजली उत्पादन होने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत अब तक 148 लाभार्थियों के बिजली बिल शून्य हो चुके हैं। योजना में तीन किलोवाट तक के घरेलू सोलर प्लांट के लिए केंद्र सरकार की ओर से अधिकतम 78 हजार रुपये की सब्सिडी दी जाती है। पात्र लोगों को छह प्रतिशत तक की ब्याज दर पर ऋण की सुविधा भी उपलब्ध है। 97 नगर निगम भवनों पर लगेगा सोलर प्लांट क्रेस्ट ने चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड से रेंट-ए-रूफ योजना के तहत छतों पर सोलर प्लांट लगाने का आग्रह किया है। वहीं नगर निगम के 97 भवनों, जिनमें सामुदायिक केंद्र भी शामिल हैं, पर सोलर प्लांट लगाने के लिए क्रेस्ट का समझौता हो चुका है। चंडीगढ़ फ्लोटिंग सोलर ऊर्जा के क्षेत्र में भी आगे बढ़ रहा है। सेक्टर-39 वाटरवर्क्स में उत्तर भारत का सबसे बड़ा 2.5 मेगावाट पीक क्षमता का फ्लोटिंग सोलर प्लांट पहले ही शुरू किया जा चुका है। अब तीन मेगावाट क्षमता का एक और फ्लोटिंग प्लांट तैयार है, जिसे जल्द शुरू किया जाएगा। सूर्य घर योजना में क्या मिलेगा     तीन किलोवाट तक के सोलर प्लांट पर अधिकतम 78 हजार रुपये की केंद्रीय सब्सिडी।     छह प्रतिशत तक की ब्याज दर पर बैंक ऋण की सुविधा।     क्रेस्ट की ओर से विक्रेता चयन और तकनीकी सहायता।     सब्सिडी सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में।     शिकायतों के समाधान के लिए एकल खिड़की व्यवस्था।     आवेदन के लिए प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के पोर्टल का इस्तेमाल किया जा सकता है।  

BRICS समिट खत्म होते ही बदले बांग्लादेश के सुर, PM तारिक रहमान ने भारत से रिश्तों पर दिया बड़ा बयान

नई दिल्ली बांग्‍लादेश में शेख हसीना की सरकार को जबरन सत्‍ता से बेदखल करने के बाद मोहम्‍मद यूनुस ने अंतरिम सरकार की कमान संभाली थी. उनके रवैये से भारत और बांग्‍लादेश के रिश्‍ते काफी तल्‍ख हो गए थे. इसके बाद आम चुनाव कराए गए, जिसके बाद तारिक रहमान बांग्‍लादेश के नए प्रधानमंत्री बने. हालांकि, भारत के प्रति उनका रुख अभी तक कुछ ज्‍यादा ठीक नहीं रहा है. बांग्‍लादेश ने जिस तरह से ब्रिक्‍स समिट से दूरी बनाई, उसे रिश्‍तों में और कड़वाहट आई है. हालांकि, लगता है अब ढाका की अक्‍ल ठिकाने आई है. तारिक रहमान के देश ने भारत के साथ संबंधों को सुधारने की बात कही है. हालांकि, शेख हसीना के कार्यकाल में बनाए गए संबंधों को ‘अनकंफर्टेबल’ बताया गया है।  बांग्लादेश ने भारत के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों को नए सिरे से तय करने की इच्छा जताई है. बांग्लादेश के विदेश मंत्री हुमायूं कबीर ने कहा कि उनका देश भारत के साथ संबंधों को ‘रीसेट’ करना चाहता है और इन्हें आपसी हितों पर आधारित नए रिश्ते के रूप में आगे बढ़ाना चाहता है. उन्होंने शेख हसीना के प्रधानमंत्री रहने के दौरान दोनों देशों के संबंधों को ‘असहज’ करार दिया. कबीर ने कहा कि बांग्लादेश भारत के साथ एक नए रिश्ते की ओर बढ़ना चाहता है. उन्होंने कहा कि इसके लिए बहुपक्षीय मंचों के बजाय दोनों देशों के बीच सीधे द्विपक्षीय संवाद होना चाहिए. उनके मुताबिक, ढाका को भारत को लेकर अपनी ‘अत्यधिक निर्भरता’ वाली सोच से बाहर निकलकर संतुलित विदेश नीति अपनानी चाहिए।  अच्‍छे द्विपक्षीय संबंधों की वकालत हुमायूं कबीर ने कहा कि बांग्लादेश के लिए भारत महत्वपूर्ण है, लेकिन उसे अपने संबंधों को केवल भारत के इर्द-गिर्द नहीं रखना चाहिए. कबीर ने कहा, ‘नाश्ता भारत में, दोपहर का भोजन भारत में और रात का खाना भी भारत में तो अपना खाना कब खाएंगे?’ उन्होंने कहा कि बांग्लादेश को इससे बाहर निकलना होगा और भारत को एक अन्य देश के रूप में देखते हुए उसके साथ अच्छे द्विपक्षीय संबंध बनाए रखने चाहिए. कबीर की टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब दोनों देशों के रिश्तों में पिछले करीब दो वर्षों में तनाव बढ़ा है. अगस्त 2024 में युवा आंदोलन के बाद सत्ता से बेदखल हुईं शेख हसीना भारत आ गई थीं. हसीना को भारत में शरण दिए जाने के मुद्दे पर बांग्लादेश की अंतरिम सरकार और नई सरकार ने कई बार नाराजगी जताई है।  ब्रिक्स सम्मेलन को लेकर भी बढ़ी दूरी भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में ताजा तनाव प्रधानमंत्री तारिक रहमान के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल नहीं होने के फैसले से भी जुड़ा है. ‘हिन्‍दुस्‍तान टाइम्‍स’ की रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश ने कहा था कि रहमान को सम्मेलन के लिए उचित तरीके से आमंत्रित नहीं किया गया था. हालांकि, रिपोर्टों के अनुसार भारत ने रहमान को द्विपक्षीय यात्रा और बिम्सटेक के अध्यक्ष के तौर पर ब्रिक्स सम्मेलन में भाग लेने का निमंत्रण दिया था. ढाका ने कथित तौर पर दोनों निमंत्रणों को औपचारिक रूप से स्वीकार नहीं किया।  भारत के साथ 101 समझौतों की समीक्षा इसी बीच बांग्लादेश भारत के साथ हुए 101 समझौतों और समझौता ज्ञापनों (एमओयू) की समीक्षा भी कर रहा है. सत्तारूढ़ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के मुख्य सचेतक नुरुल इस्लाम मोनी ने शुक्रवार को कहा था कि सभी 101 समझौतों की समीक्षा की जा रही है और जल्द ही इसके नतीजे सामने आएंगे. जब उनसे पूछा गया कि क्या चटगांव और मोंगला बंदरगाहों को मित्र देशों के जहाजों के लिए इस्तेमाल की अनुमति देने वाले समझौते रद्द किए जाएंगे, तो उन्होंने कहा कि सभी समझौतों की समीक्षा की जा रही है. कबीर ने भी इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि इन समझौतों की जांच संसदीय प्रक्रिया के तहत की जा रही है। 

ममता बनर्जी की जीत के बाद BJP कार्यकर्ता की मौत का राज खुलेगा? 5 साल बाद कब्र से निकला शव

कोलकाता पश्चिम बंगाल में भाजपा के एक कार्यकर्ता का शव करीब 5 साल बाद कब्र से निकाला गया है। जानकारी के मुताबिक कोर्ट के आदेश के बाद 2021 में संदेशखाली में चुनाव बाद हुई हिंसा में मारे गए कार्यकर्ता के कंकाल के अवशेष पांच साल बाद कब्र से निकाले गए हैं। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को इसकी पुष्टि की है। अब अवशेष का पोस्टमार्टम कराया जाएगा। नाजाट थाने के एक अधिकारी ने बताया कि पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की गई है और मौत के कारण का पता लगाने के लिए अवशेषों को पोस्टमार्टम और फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है। परिवार ने जरूरत पड़ने पर CBI से जांच कराने और मौत के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। 2021 में क्या हुआ था? अधिकारी के मुताबिक 2021 के विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के दिन झनझनिया गांव के निवासी आस्तिक चंद्र दास पर कथित तौर पर विजय जुलूस निकाल रहे तृणमूल कांग्रेस के समर्थकों ने हमला किया था। उनके बेटे सुब्रत दास ने आरोप लगाया कि हमले में उनके पिता गंभीर रूप से घायल हो गए थे और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाने की इजाजत भी नहीं दी गई। इसके बाद उनकी घर पर ही मौत हो गई। परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि उनके घर के बाहर पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था और उन्हें शव को दफनाने के लिए मजबूर किया गया। परिवार के मुताबिक शव का पोस्टमार्टम भी नहीं कराया गया था। पुलिस अधिकारी ने बताया कि राज्य में ममता बनर्जी की सरकार के हटने और भाजपा की सरकार बनने के बाद परिवार ने एक नई शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद अदालत ने शव को कब्र से निकालने का आदेश दिया। रविवार को मजिस्ट्रेट और परिवार के सदस्यों की मौजूदगी में कंकाल के अवशेष कब्र से निकाले गए। जबरन शव दफनाने का आरोप परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि उनके घर के बाहर पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था और उन्हें शव को दफनाने के लिए मजबूर किया गया। परिवार के मुताबिक, शव का पोस्टमार्टम भी नहीं कराया गया था। पुलिस अधिकारी ने बताया कि राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद परिवार ने एक नई शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद अदालत ने शव को कब्र से निकालने का आदेश दिया। फरेंसिक जांच को भेजे गए अवशेष अधिकारियों ने कहा कि रविवार को मजिस्ट्रेट और परिवार के सदस्यों की मौजूदगी में कंकाल के अवशेष कब्र से निकाले गए। नाजाट थाने के एक अन्य अधिकारी ने बताया कि पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की गई और मौत के कारण का पता लगाने के लिए अवशेषों को पोस्टमार्टम तथा फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है। परिवार ने जरूरत पड़ने पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से विस्तृत जांच कराने और मौत के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने कहा कि यह घटना 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं को कथित तौर पर झेलनी पड़ी ज्यादतियों का प्रमाण है। उस चुनाव में टीएमसी ने बड़ी जीत दर्ज की थी। उन्होंने कहा, कि टीएमसी के शासन में आतंक का माहौल था और पुलिस मूकदर्शक बनी रही। हमें पता है कि न्याय होगा और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को कड़ी सजा मिलेगी। पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले का एक गांव संदेशखाली 2024 में उस समय राष्ट्रीय सुर्खियों में आया था, जब बड़ी संख्या में महिलाओं ने स्थानीय टीएमसी नेता शाहजहां शेख पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किए थे। भाजपा हुई हमलावर इस बीच भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने कहा है कि यह घटना 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं को झेलनी पड़ी ज्यादतियों का प्रमाण है। उन्होंने कहा, ''टीएमसी के शासन में आतंक का माहौल था और पुलिस मूकदर्शक बनी रही। हमें पता है कि न्याय होगा और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को कड़ी सजा मिलेगी।''

दताना-मताना में प्रदेश के 10वें एयरपोर्ट का विकास जारी

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सिंहस्थ-2028 के दृष्टिगत उज्जैन में अधोसंरचना विकास के कार्यों को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं, पर्यटकों और अन्य यात्रियों के सुगम आवागमन को ध्यान में रखते हुए दताना-मताना स्थित हवाई पट्टी को एयरपोर्ट के रूप में विकसित किया जा रहा है। यह मध्यप्रदेश का 10वां एयरपोर्ट होगा। सिंहस्थ-2028 से पूर्व इसके निर्माण को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। आरसीएस-उड़ान 5.2 योजना के तहत विकास कार्य जारी दताना-मताना हवाई पट्टी का विकास केंद्र सरकार की आरसीएस-उड़ान 5.2 योजना के अंतर्गत किया जा रहा है। इसके लिए भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) और राज्य सरकार के बीच एमओयू निष्पादित हो चुका है। परियोजना के लिए लगभग 120 एकड़ शासकीय भूमि भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को हस्तांतरित की जा चुकी है। 1800 मीटर रनवे से होगी शुरुआत, 2700 मीटर तक विस्तार का प्रावधान दताना-मताना में वर्तमान हवाई पट्टी को 1800 मीटर रनवे के लिए विकसित किया जा रहा है। भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए रनवे की लंबाई 27 मीटर तक बढ़ाये जाने की योजना है। इससे उज्जैन के लिए हवाई सेवाओं के विस्तार की संभावनाएं बढ़ेंगी और विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले यात्रियों के यात्रा समय में कमी आएगी। सिंहस्थ-2028 की तैयारियों में महत्वपूर्ण कड़ी सिंहस्थ-2028 उज्जैन के लिए देश और दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक होगा। आयोजन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के पहुंचने की संभावना है। ऐसे में दताना-मताना एयरपोर्ट का विकास सिंहस्थ की तैयारियों की महत्वपूर्ण अधोसंरचनात्मक कड़ी है। एयरपोर्ट के माध्यम से उज्जैन तक हवाई मार्ग से पहुंचना अधिक सुगम होगा, जिससे बड़े आयोजन के दौरान यात्रियों को आवागमन का एक अतिरिक्त और सुविधाजनक विकल्प उपलब्ध होगा। धार्मिक पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा विस्तार बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन देश के प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन केंद्रों में शामिल है। एयरपोर्ट के विकास से वर्षभर देश के विभिन्न हिस्सों से उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को सुविधा मिलेगी। इससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ व्यापार, स्थानीय परिवहन, होटल, खान-पान और अन्य सेवा क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों के विस्तार की संभावनाएं भी मजबूत होंगी। प्रदेश में लगातार बढ़ रहा हवाई अधोसंरचना का दायरा मध्यप्रदेश में हवाई अधोसंरचना के विस्तार की दिशा में लगातार कार्य किए जा रहे हैं। वर्ष 2023-24 में प्रदेश में इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर और खजुराहो सहित 5 प्रमुख एयरपोर्ट संचालित थे। वर्ष 2024-25 में रीवा, दतिया और सतना को जोड़ने के बाद इनकी संख्या 8 हो गई। इसके बाद शिवपुरी में नए एयरपोर्ट के विकास की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है और दताना-मताना में एयरपोर्ट का विकास पूरा होने पर मध्यप्रदेश को अपना 10वां एयरपोर्ट प्राप्त होगा। केंद्र सरकार द्वारा मध्यप्रदेश में 5 नए एयरपोर्ट के विकास को भी मंजूरी दी गई है। प्रदेश में हवाई अधोसंरचना के विस्तार के लिए व्यापक स्तर पर प्रस्तावित कार्यों से आने वाले समय में विभिन्न क्षेत्रों को बेहतर हवाई संपर्क से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त होगा।  

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने परिवारजनों के साथ विधि-विधान से की गणपति की स्थापना और पूजा-अर्चना

रायपुर  गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर आज मुख्यमंत्री निवास में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के वातावरण में भगवान  गणेश की प्रतिमा स्थापित की गई। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने अपने परिवारजनों के साथ पूरे विधि-विधान और पारंपरिक रीति-रिवाज से विघ्नहर्ता भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की तथा प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और खुशहाली की मंगलकामना की। मुख्यमंत्री  साय ने इस अवसर पर प्रदेशवासियों को गणेश चतुर्थी की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान  गणेश बुद्धि, और विवेक के प्रतीक हैं। किसी भी शुभ कार्य का प्रारंभ भगवान गणेश की आराधना से करने की हमारी प्राचीन परंपरा रही है। गणेशोत्सव हमारी आस्था का पर्व होने के साथ ही समाज में आपसी प्रेम, सद्भाव और एकजुटता को सुदृढ़ करने वाला उत्सव भी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति में तीज-त्योहारों और उत्सवों का विशेष महत्व है। हमारे पर्व हमें अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के साथ परिवार और समाज को भी एक सूत्र में पिरोते हैं। गणेशोत्सव का उल्लास भी हमें सामूहिकता, सद्भाव और लोकमंगल की भावना से जोड़ता है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के परिवारजन, मुख्यमंत्री के सलाहकार डॉ. धीरेंद्र तिवारी, मुख्यमंत्री के प्रेस अधिकारी  आलोक सिंह तथा मुख्यमंत्री निवास कार्यालय के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

मेरिट में आने वाले 7,500 से ज्यादा विद्यार्थियों को मिलेगी स्कूटी

भोपाल  प्रदेश के शासकीय हायर सेकंडरी स्कूलों में कक्षा 12वीं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को एक बड़ी सौगात मिलने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव "मुख्यमंत्री स्कूटी योजना" अंतर्गत 19 सितंबर को भोपाल से मेधावी विद्यार्थियों को ई-स्कूटी का वितरण करेंगे। इससे विद्यार्थियों की उच्च शिक्षा की राह आसान होगी। साथ ही, कॉलेज आने-जाने में भी सहूलियत होगी। राज्य स्तरीय स्कूटी वितरण कार्यक्रम शासकीय सुभाष उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय शिवाजी नगर, भोपाल में सुबह 10 बजे से होगा। मुख्यमंत्री स्कूटी योजना का उद्देश्य स्कूली विद्यार्थियों को शैक्षणिक उपलब्धियां हासिल करने के लिए प्रोत्साहित करना है। योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए विद्यार्थियों को कक्षा 12वीं में प्रथम प्रयास में ही 70% अंक के साथ स्कूल में प्रथम स्थान आना जरूरी हैं। प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही इस योजना का लाभ स्कूल शिक्षा एवं जनजातीय कार्य विभाग के शासकीय हायर सेकंडरी स्कूलों में नियमित विद्यार्थी के रूप में अध्ययनरत विद्यार्थी को दिया जाता है। योजना में सभी संकायों के विद्यार्थियों को शामिल किया गया है। 7,500 से अधिक विद्यार्थी होंगे लाभान्वित योजना अंतर्गत शिक्षण सत्र 2025-26 के लिए प्रदेश के 7,500 से अधिक पात्र विद्यार्थियों को ई-स्कूटी का लाभ मिलेगा। योजना में अब तक प्रदेश के 23,000 से अधिक विद्यार्थियों को मिल चुका है लाभ मेधावी विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही इस योजना के अंतर्गत अब तक प्रदेश के 23,000 से अधिक पात्र विद्यार्थी लाभान्वित हो चुके हैं। योजना के संचालन पर अब तक लगभग 246 करोड़ रूपये व्यय किए गए हैं। मुख्यमंत्री स्कूटी योजना मेधावी विद्यार्थियों की मेहनत और उपलब्धि को प्रोत्साहित करने के साथ ही आगे की पढ़ाई के लिए सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में प्रदेश सरकार की महत्वपूर्ण पहल है। शासकीय स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित करने से शिक्षा के प्रति उनका उत्साह बढ़ रहा है और उच्च शिक्षा की ओर उनकी भागीदारी को मजबूत करने में भी मदद मिल रही है।  

सीएम योगी का बड़ा संदेश: शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण जरूरी, अनावश्यक शिकायत करने वालों पर भी हो कार्रवाई

लखनऊ राजधानी लखनऊ में गोमतीनगर स्थित लोक आयुक्त कार्यालय में उत्तर प्रदेश लोक आयुक्त संगठन के 50वें स्थापना दिवस पर सोमवार को समारोह आयोजित किया गया। इसमें सीएम योगी आदित्यनाथ मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने लोक आयुक्त प्रशासन की स्मारिका और सूचना पुस्तिका का विमोचन किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता लोक आयुक्त न्यायमूर्ति संजय मिश्रा ने किया।इस दौरान संगठन की पांच दशक की विकास यात्रा और उपलब्धियों पर आधारित विशेष प्रदर्शनी भी लगाई गई। प्रदर्शनी में संगठन के गठन से लेकर अब तक की यात्रा, कार्यप्रणाली, शिकायतों की जांच और प्रमुख उपलब्धियों को क्रमवार प्रदर्शित किया गया। यहां बताते चलें कि लोक आयुक्त संगठन भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच में अहम भूमिका निभाता है। समारोह में लोक आयुक्त प्रशासन के अधिकारी और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे। लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है किसी संस्था से जुड़ा जन विश्वास  इस मौके पर सीएम योगी ने कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत किसी संस्था से जुड़ा सामान्यजन का विश्वास है। गुड गवर्नेंस आमजन के विश्वास पर निर्भर करता है। उन्होंने सुशासन के लक्ष्यों को भी गिनाया। कहा कि किसी संस्था में सामान्य व्यक्ति बेझिझक आए और नियमानुसार परिणाम को समयबद्ध प्राप्त कर सके। यही हमारी कसौटी होती है। शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण हो। साथ ही अनावश्यक शिकायत करने वालों पर भी शिकंजा कसने का काम भी हो।   जनविश्वास पर खरा उतरना ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी कसौटी  सीएम ने कहा कि संस्था के गठन मात्र से समस्या का समाधान नहीं होता। जन-विश्वास पर खरा उतरना ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी कसौटी है। संविधान निर्माताओं ने भारत की व्यवस्था के लिए संसदीय लोकतंत्र दिया। यदि जनप्रतिनिधि ने विश्वास खोया तो सरकार गई।     अनावश्यक शिकायत करने वालों पर कसना होगा शिकंजा  सीएम ने आगे कहा कि आईजीआरएस, सीएम हेल्पलाइन, जनता दर्शन आदि के जरिये जनसमस्याओं का समयबद्ध समाधान कराया जाता है। हालांकि, कुछ लोग अनावश्यक शिकायत भी लेकर आते हैं, बताते हैं कि मेरी व्यक्तिगत समस्या नहीं है, लेकिन किसी के खिलाफ शिकायत करनी है। यदि हम प्रमाण मांगते हैं तो आनाकानी भी होती है।  एक अनुभव साझा करते हुए सीएम ने कहा कि एक सज्जन ने एक विद्यालय के खिलाफ शिकायत की। जांच में शिकायत झूठी निकली तो उन्होंने कहा कि पूरे जिले के विद्यालयों की जांच की जाए। ऐसी झूठी शिकायतों को खारिज किया जाना चाहिए। किसी संस्था को विश्वास के प्रतीक के रूप में स्थापित करने के लिए आवश्यक है कि अंतिम पायदान पर बैठा व्यक्ति भी विश्वास व्यक्त करे कि मेरी समस्या का समाधान होगा। तकनीक के कारण अब पीडीएस की शिकायत नहीं  सीएम ने कहा कि लोक आयुक्त संगठन ने टेक्नोलॉजी का बेहतर उपयोग किया है। 2017 में पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (पीडीएस) में सबसे अधिक शिकायत खाद्यान्न वितरण की आती थी। जनता दर्शन में 100 में से 60 शिकायतें पीडीएस की होती थी। इससे परेशान होकर लगातार हम बैठक करते थे, फिर हमने तकनीक का प्रयोग किया। ई-पॉस मशीन लगाकर उसे मुख्यालय पर स्क्रीन लगाकर जोड़ दिया। इसके बाद यदि 80 हजार राशन कोटे की दुकानों में किसी ने कुछ इधर-उधर किया तो तुरंत अलर्ट आ जाता है। इससे हेराफेरी की गुंजाइश शून्य हो गई। साढ़े 9 साल में 34 लाख राजस्व मामलों का निस्तारण सीएम ने राजस्व विभाग के मामलों का भी जिक्र किया। कहा कि 2017 में भूमि संबंधी विवाद, पैमाइश, वरासत, नामांतरण से जुड़े 34 लाख मामले लंबित थे। इससे अनावश्यक विवाद होते थे। केवल वरासत से जुड़े लगभग छह लाख मामले लंबित थे। सभी के निस्तारण की समयसीमा तय की गई। तय किया गया कि लैंड यूज की समस्या का समाधान 30 दिन में नहीं हुआ तो इसे डीम्ड मान लिया जाएगा, यानी गलत होने पर निस्तारण करने वाले की जवाबदेही तय होगी। साढ़े 9 साल में 34 लाख मामले का निस्तारण हुआ, लेकिन 9 साल में 9 लाख और मामले भी सामने आए। वरासत, पैमाइश आदि की समस्याओं का समाधान किया गया।  हर तहसील में दिया गया रोबोट  सीएम ने कहा कि पैमाइश में शिकायत मिली कि लेखपाल ने जरीब में थोड़ा इधर-उधर कर दिया है। अब इस समस्या का भी समाधान हो गया। इसके लिए हर तहसील में रोबोट दे दिया है। इतनी पारदर्शिता हुई कि एक इंच भी कोई इधर-उधर नहीं कर सकता। टेक्नोलॉजी दिलाएगी शिकायतों के अंबार से मुक्ति  सीएम ने कहा कि टेक्नोलॉजी का उपयोग कर शिकायतों के अंबार का समाधान निकाल सकते हैं। हो सकता है कि लोकसेवक को बचाने का प्रयास होता है, लेकिन शिकायत जब लोक आयुक्त संगठन के पास जाती है तो वह मेरिट के आधार पर समाधान निकालता है। कई बार जब व्यक्ति को ताकत मिलती है तो वह उदंडतापूर्ण व्यवहार करने लगता है, उस पर अंकुश जरूरी है।   यूपी में 14 सितंबर 1977 को गठित हुआ लोक आयुक्त संगठन  सीएम ने कहा कि आजादी के बाद लगा होगा कि आने वाले समय में नेतृत्व देने वाले लोग ही व्यवस्था में गदर मचा डालेंगे, तब इमरजेंसी के तत्काल बाद बनी पहली सरकार ने लोक आयुक्त संगठन के निर्माण की तरफ कदम बढ़ाए। उत्तर प्रदेश में लोक आयुक्त संगठन का विधिवत कार्य 14 सितंबर 1977 को प्रारंभ हुआ। उस समय न्यायमूर्ति विशंभर दयाल ने उत्तर प्रदेश लोक आयुक्त संगठन को नेतृत्व प्रदान किया था। तबसे प्रारंभ हुई संगठन की यह यात्रा न्यायमूर्ति संजय मिश्र के नेतृत्व में नई पहचान, नई आभा के साथ जारी है। विश्वास ही लोकतंत्र की असली ताकत  सीएम ने कहा कि बहुत सारी समस्याओं के समाधान को व्यवस्थित रूप से बढ़ाया गया है। 2014 में सत्ता संभालने के बाद पीएम मोदी ने जनधन अकाउंट खोलने की बात की तो विपक्ष ने खिल्ली उड़ाई। आज जनधन अकाउंट की ताकत सबके सामने है। अब डीबीटी के माध्यम से सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में धनराशि जाती है। विश्वास ही लोकतंत्र की असली ताकत है।  उन्होंने विधवा, निराश्रित, वृद्धजन की बेचारगी को बताते हुए 2017 के पहले मिलने वाली राशि में घूसखोरी का भी जिक्र करते हुए कहा कि अब यूपी में ऐसा नहीं है। सरकार डीबीटी के माध्यम से सीधे अकाउंट में 1.10 करोड़ लोगों को वार्षिक 12 हजार पेंशन दे रही है। व्यवस्था से बिचौलिए समाप्त कर दिए गए। इस दौरान लोक … Read more