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नोरोवायरस का हमला, 115 यात्रियों की तबीयत बिगड़ी, 3116 लोगों से भरी क्रूज शिप प्रभावित

बैंकॉक कैरिबियन प्रिंसेस क्रूज शिप पर नोरोवायरस का बड़ा संक्रमण फैल गया है. इस जहाज पर कुल 3116 यात्री सवार थे, जिनमें से 102 यात्रियों और 13 क्रू सदस्यों को बीमारी हो गई. कुल मिलाकर 115 लोग इस संक्रमण की चपेट में आए हैं. यह यात्रा 28 अप्रैल से 11 मई तक की थी, जो फोर्ट लॉडरडेल से शुरू होकर पोर्ट कैनावेरल पर खत्म होने वाली है।  यात्रा के दौरान जहाज अरूबा, बोनेर, प्यूर्टो रिको और बहामास जैसे सुंदर स्थानों पर रुका था. सेंटर फॉर डिजीस कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के अनुसार, बीमारी के मुख्य लक्षण उल्टी और दस्त था. प्रिंसेस क्रूज कंपनी ने इसे पेट संबंधी बीमारी बताया है।  नोरोवायरस क्या है और यह कैसे फैलता है? नोरोवायरस एक संक्रामक वायरस है जो पेट और आंतों को संक्रमित करता है. यह तेजी से उल्टी और दस्त पैदा करता है. यह वायरस बंद जगहों और लोगों के संपर्क वाली जगहों पर तेजी से फैलता है. क्रूज शिप जैसी जगहें खासतौर पर जोखिम भरी होती हैं क्योंकि यहां हजारों यात्री और कर्मचारी लंबे समय तक एक साथ रहते हैं, एक ही भोजन का सेवन करते हैं. सामान्य सुविधाओं का इस्तेमाल करते हैं।  संक्रमित व्यक्ति के हाथों, खाने-पीने की चीजों, पानी या छुई हुई सतहों के जरिए यह वायरस दूसरों तक आसानी से पहुंच जाता है. क्रूज शिप पर होने वाली पेट की बीमारियों का सबसे आम कारण नोरोवायरस ही है।  इस यात्रा में क्या हुआ? यह प्रकोप पूरी यात्रा के दौरान धीरे-धीरे फैला. सभी यात्री एक साथ बीमार नहीं हुए, बल्कि केस पूरे सफर में लगातार बढ़ते रहे. जब बीमार लोगों की संख्या कुल यात्रियों के 3 प्रतिशत से अधिक हो गई, तब CDC को सार्वजनिक सूचना जारी करनी पड़ी. स्वास्थ्य अधिकारी अब जहाज का पूरा निरीक्षण कर रहे हैं. वेसल सैनिटेशन प्रोग्राम के तहत गहन जांच चल रही है।  कंपनी ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पूरे जहाज पर सख्त सफाई और डिसइंफेक्शन बढ़ा दिया है. बीमार यात्रियों और क्रू सदस्यों को अलग-अलग रखा गया है. उनके स्टूल सैंपल लेकर जांच की जा रही है. CDC के साथ मिलकर हर जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।  बीमारी के लक्षण क्या हैं? नोरोवायरस संक्रमण के प्रमुख लक्षण अचानक शुरू होने वाली उल्टी और पानी जैसे दस्त हैं. इसके साथ पेट में दर्द, जी मिचलाना, हल्का बुखार, सिरदर्द और शरीर में कमजोरी भी हो सकती है. ज्यादातर मामलों में ये लक्षण 1 से 3 दिन तक रहते हैं. ज्यादातर लोग बिना किसी गंभीर समस्या के ठीक हो जाते हैं।  हालांकि, छोटे बच्चे, बुजुर्ग और पहले से कमजोर स्वास्थ्य वाले लोगों में डिहाइड्रेशन का खतरा ज्यादा होता है. इसलिए उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए. इस प्रकोप में प्रभावित लोगों को हल्की बीमारी बताई गई है।  क्रूज शिप पर नोरोवायरस क्यों फैलता हैं? क्रूज शिप बंद और भीड़-भाड़ वाली जगह होती है, जहां एक संक्रमित व्यक्ति पूरे समूह को आसानी से संक्रमित कर सकता है. अक्सर कोई यात्री बिना लक्षण दिखे जहाज पर चढ़ जाता है. फिर बुफे खाना, स्विमिंग पूल, लिफ्ट, हैंड्रेल जैसी साझी चीजों के जरिए वायरस फैलने लगता है।  अमेरिका में हर साल लाखों लोग नोरोवायरस से संक्रमित होते हैं, लेकिन क्रूज शिप वाले मामले कुल आंकड़ों का बहुत छोटा हिस्सा होते हैं. फिर भी इनकी चर्चा ज्यादा होती है क्योंकि यहां बड़ी संख्या में लोग एक साथ प्रभावित होते हैं।  प्रिंसेस क्रूज कंपनी ने कहा कि उन्होंने पूरे जहाज को अच्छी तरह साफ किया. पूरे सफर के दौरान अतिरिक्त सैनिटाइजेशन जारी रखा. हाथ धोने, सैनिटाइजर इस्तेमाल करने और बीमार लोगों से दूरी बनाए रखने पर जोर दिया गया है. कंपनी CDC के साथ पूरी तरह सहयोग कर रही है।  नोरोवायरस कितना खतरनाक है? नोरोवायरस आमतौर पर जानलेवा नहीं होता. ज्यादातर लोग कुछ दिनों में आराम से ठीक हो जाते हैं. गंभीर जटिलताएं बहुत कम होती हैं. वे भी मुख्य रूप से कमजोर स्वास्थ्य वाले लोगों में देखी जाती हैं. इस प्रकोप में भी ज्यादातर मामलों में स्थिति हल्की बताई गई है. यात्रा के दौरान यात्रियों में तनाव और चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। 

भगवंत मान ने किया जोरदार बयान, कहा- भाजपा की ED ने अरोड़ा के घर मारा छापा

चंडीगढ़  पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान (Bhagwant Mann) ने कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा (Sanjeev Arora) के घर ईडी की छापेमारी को लेकर भाजपा पर तीखा हमला बोला है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि भाजपा केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है, लेकिन पंजाब दबाव में आने वाला नहीं है। भगवंत मान ने एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा, “आज फिर से भाजपा की ईडी संजीव अरोड़ा के घर आई है। एक साल में तीसरी बार और एक महीने में दूसरी बार भाजपा की ईडी उनके घर आई है। फिर भी उन्हें कुछ नहीं मिला।” उन्होंने आगे कहा, “मैं मोदी जी को बताना चाहता हूं कि पंजाब गुरुओं की भूमि है। औरंगजेब भी इसे झुका नहीं सका। यह भगत सिंह की भूमि है, जिन्होंने अंग्रेजों के सामने कभी सिर नहीं झुकाया, इसलिए पंजाब मोदी की चालों के आगे कभी नहीं झुकेगा।” मुख्यमंत्री ने भाजपा और ईडी के बीच “अनैतिक गठबंधन” होने का आरोप लगाते हुए कहा कि पंजाब इस राजनीति का जवाब देगा। उन्होंने दावा किया कि विपक्षी नेताओं को दबाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि शनिवार सुबह ईडी की टीम चंडीगढ़ के सेक्टर-2 स्थित मंत्री संजीव अरोड़ा के सरकारी आवास पर छापेमारी करने पहुंची थी। कार्रवाई के दौरान केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती भी की गई थी। बीजेपी पंजाब में भी खेल रही वहीं खेल  मुंख्‍यमंत्री भगवंत मान ने कहा, "आज फिर ईडी संजीव अरोड़ा के घर आई है. एक साल में तीसरी बार और एक महीने में दूसरी बार भाजपा की ED उनके घर आई है. फिर भी उन्हें कुछ नहीं मिला. पंजाब गुरुओं की भूमि है, औरंगजेब भी इसे झुका नहीं सका. यह भगत सिंह की भूमि है, जिन्होंने अंग्रेजों के सामने कभी सिर नहीं झुकाया. इसलिए, पंजाब विरोधियों की चालों के आगे कभी नहीं झुकेगा. पंजाब में भी वही हो रहा है, जो BJP पूरे देश में काम कर रही है. बीजेपी प्रवर्तन निदेशालय, चुनाव आयोग जैसे हथियारों का इस्तेमाल कर रही है. पंजाब अब बीजेपी के निशाने पर है. पहले अशोक मित्तल के घर और यूनिवर्सिटी पर रेड, 2 दिन रेड और तीसरे दिन वो बीजेपी में शामिल हो गए. आज सुबह संजीव अरोड़ा के घर पर रेड पड़ रही है. इस महीने में 2 बार आए, कुछ नहीं मिला, लेकिन लोगों को डरा-धमकाकर शामिल करवा रहे हैं।  पिछले महीने भी ठिकानों पर दबिश दी थी  करीब 20 दिन पहले भी मंत्री संजीव अरोड़ा और उनके 2 पार्टनर के लुधियाना और जालंधर के ठिकानों पर ED ने रेड की थी. अधिकारियों ने बताया था कि संजीव अरोड़ा पर अपने राजनीतिक प्रभाव के जरिए पंजाब में अवैध सट्टेबाजी (बेटिंग) संचालकों को संरक्षण देने का संदेह है, ताकि उनके मुनाफे में हिस्सा लिया जा सके. उन पर यह भी आरोप था कि वह अपनी कंपनियों और कई एंट्री ऑपरेटरों का इस्तेमाल कर सट्टेबाजों के बेहिसाब पैसे को वैध निवेश में बदल रहे हैं. वह मनी लॉन्ड्रिंग में सहायता कर रहे थे।  अधिकारियों के अनुसार, संजीव अरोड़ा की कंपनियां कई फर्जी निर्यात बिल बुक करने, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से फंड की राउंड-ट्रिपिंग करने और नॉन-एग्जिस्टेंट जीएसटी संस्थाओं से फर्जी खरीदारी दिखाने के मामले में भी जांच के दायरे में हैं।  अब कानून वापस नहीं होगा पंजाब के लोग बेअदबी कानून के साथ सहमत है, लेकिन सिर्फ बादल परिवार ही ऐसा है जो विरोध कर रहा है। इसका कारण यह है कि परिवार पहले खुद बेअदबी की घटना में संलिप्त रहा है। पंजाब में क्या कोई नया पंथ बादल पंथ चलाया जा रहा है। अब कानून वापस नहीं होगा। राज्यपाल के हस्ताक्षर भी हो चुके हैं। कोई पत्थर दिल होगा जो इस कानून का विरोध करेंगा। ED, CBI का भाजपा ने किया राजनीतिकरण मान ने कहा कि पूरे देश में भाजपा के काम करने का यही तरीका है। अब वह ईडी, सीबीआई, इनकम टेक्स, चुनाव आयोग का इस्तेमाल करेंगे। इन विभागों का भाजपा ने राजनीतिकरण कर दिया है। भाजपा इन्हें लंबे समय से इसी तरह से बरत रही है। महाराष्ट्र, बिहार, यूपी, वेस्ट बंगाल आदि राज्यों में भी इसका इस्तेमाल इसी तरह से किया गया है। ED रेड का मतलब भाजपा में आ जाओ सब कुछ माफ मान ने कहा कि अब पंजाब में चुनाव आने वाले हैं। ED रेड का मतलब यही है कि भाजपा में आ जाओ फिर सब कुछ माफ है। कुछ दिन पहले अशोक मित्तल के घर ED ने रेड की थी। वह भाजपा में आए तो रेड खत्म उन्हें Y सुरक्षा देकर भाजपा ने सम्मानित कर दिया। संजीव अरोड़ा को डराया जा रहा है अब संजीव अरोड़ा के घर रेड की गई है। पहले भी अरोड़ा के रेड की थी कुछ नहीं मिला था। अब भी कुछ नहीं मिलेगा। संजीव अरोड़ा को डराया जा रहा है कि आपके कारोबार बंद कर देंगे अन्यथा भाजपा में आ जाओ। यह सब पंजाब में नहीं चलेगा। पंजाबी डरने वाले नहीं है। एक बार ही मोदी जी ने यू-टर्न लिया और माफी मांगी थी जब तीनों काले कानूनों को रद्द करना पड़ा था। उस समय भी उन्हें पंजाबियों ने झुकाया था। उसी बात का मोदी जी दिल में दर्द रखे बैठे हैं। कभी कहते हैं चंडीगढ़ हम अलग से यूटी बना देंगे। उसका राज्यपाल अलग बना देंगे। कभी कहते हैं कि पंजाब यूनिर्वसिटी हमारी है। कभी कहते हैं कि भाखड़ा पर डेंम सीआईएफ लगाकर पानी हरियाणा को देंगे। कभी कहते हैं धान नहीं उठानी। कभी पंजाब की झांकी नहीं 26 जनवरी को दिखानी। आरडीएफ का पैसा नहीं देना। किस मुंह से वोट मांगने अब आएंगे। मोदी की नीरव मोदी और विजय माल्या के साथ है तस्वीरें मान ने कहा कि मैं ईडी के इस्तेमाल की सख्त शब्दों में निंदा करता हूं। कुछ दिन पहले एक कारोबारी पर रेड की और अमन अरोड़ा का नाम उससे जोड़ दिया। अमन अरोड़ा की कई लोगों के साथ तस्वीरें हैं। किसी के साथ तस्वीर खिंचवाने से पहले उसकी आईडी नहीं पूछ सकते। ऐसे तो मोदी जी की नीरव मोदी या विजय माल्या के साथ तस्वीरें है। बंगाल में अभी भाजपा ने शपथ ग्रहण करना है, उससे पहले ही पूरे बंगाल में आग लगी पड़ी है। दो समुदायों … Read more

क्रिकेट और राजनीति में मुश्किलें: यशस्वी जायसवाल और शेफाली वर्मा जांच के दायरे में

नई दिल्ली  भारतीय टेस्ट टीम के सलामी बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल और महिला टीम की तूफानी ओपनर शेफाली वर्मा मुश्किल में घिरते हुए नजर आ रहे हैं। इन दोनों को राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (नाडा) ने नोटिस भेजा है। नाडा ने दोनों खिलाड़ियों को ये नोटिस डोप टेस्ट नहीं देने को कारण भेजा है। दोनों ही खिलाड़ियों ने नाडा को अपने दिए गए ठिकानों पर टेस्ट के लिए न मिलने को लेकर नोटिस भेजा है। इस संबंध में दोनों को अपनी सफाई देने का मौका दिया जाएगा। 12 महीने में अगर खिलाड़ी तीन बार व्हेयर अबाउट फेल्योर टेस्ट को तीन बार मिस कर देता है तो उसे डोपिंग नियमों के उल्लंघन का दोषी माना जाता है। इसके बाद नाडा के पैनल के सामने खिलाड़ी को अपनी सफाई देनी पड़ती है। अगर इसमें वह असफल होता है तो फिर दो साल का बैन लगाया जाता है। 17 दिसंबर को नहीं मिले यशस्वी नाडा के नोटिस के मुताबिक, यशस्वी पिछले साल 17 दिसंबर को अपनी बताई हुई जगह पर डोप टेस्ट के लिए नहीं मिले। वहीं शेफाली सात नवंबर को अपनी बताई हुई जगह पर टेस्ट के लिए नहीं मिलीं। इसी कारण दोनों को नोटिस मिला है। ये दोनों ही खिलाड़ी नाडा की रिजस्टर्ड टेस्टिंग पूल का हिस्सा हैं। इस पूल में जो खिलाड़ी शामिल होते हैं उन्हें नाडा को बताना होता है कि वह कब और कहां टेस्ट के लिए उपलब्ध रहेंगे। उसी के हिसाब से नाडा टेस्ट के लिए अपनी टीम भेजता है, लेकिन दोनों ही खिलाड़ी अपनी बताई हुई जगह पर नहीं मिले थे। सात दिन का मिला समय इस मामले की जानकारी भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) और आईसीसी को दे दी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों ही खिलाड़ियों को अपनी सफाई पेश करने के लिए सात दिन का समय मिला है। दोनों को अब पहले से ज्यादा एहियात बरतने की जरूरत है क्योंकि अगर दो और मिस टेस्ट की रिपोर्ट आती है तो इन्हें बैन झेलना पड़ सकता है। दोनों ने नहीं दिया था जवाब, फिर मिला समय मिस टेस्ट रिकॉर्ड होने के बाद भी दोनों खिलाड़ियों को अपनी सफाई देने का एक और मौका मिला है. शेफाली और यशस्वी को सफाई देने के लिए 7 दिन का और समय दिया गया है. रिपोर्ट के अनुसार 18 फरवरी और 20 फरवरी को इन दोनों क्रिकेटर्स से जवाब माँगा गया था लेकिन उनकी तरफ से कोई उत्तर नहीं दिया गया. इसके बाद नाडा ने पहला मिस टेस्ट रिकॉर्ड कर लिया।  नाडा ने इसकी जानकारी BCCI और ICC को भी दे दी है. अब दोनों ही खिलाड़ियों को सावधान रहना होगा क्योंकि अगर 2 मिस टेस्ट उनके खिलाफ और रिकॉर्ड में दर्ज हो जाते हैं तो उन पर बैन का खतरा मंडराने लगेगा।   क्या होगी सख्त कार्रवाई? 12 माह के अंतराल में अगर किसी भी खिलाड़ी के व्हेयर अबाउट फेल्योर के तहत तीन मिस टेस्ट दर्ज किए जाते हैं तो उसे एंटी डोपिंग नियमों के उल्लंघन का दोषी करार दिया जाता है। नाडा सुनवाई पैनल के समक्ष अगर खिलाड़ी अपनी बेगुनाही साबित नहीं कर पाता है तो उस पर दो साल तक का प्रतिबंध लग सकता है। यशस्वी ने 17 दिसंबर को नहीं दिया टेस्ट यशस्वी और शेफाली दोनों नाडा के रजिस्टर्ड टेस्टिंग पूल (आरटीपी) में हैं। आरटीपी में शामिल खिलाड़ियों को डोप टेस्टिंग के लिए दिन के किसी भी समय का एक हिस्सा और स्थान नाडा को दर्ज कराना होता है। दिए गए समय और स्थान पर डोप कंट्रोल ऑफिसर (डीसीओ) कभी भी सैंपल लेने पहुंच सकता है। नाडा की ओर से जारी नोटिस के अनुसार यशस्वी का बीते वर्ष 17 दिसंबर और शेफाली का बीते वर्ष सात नवंबर को डोप टेस्ट लेने डीसीओ पहुंचा, लेकिन दोनों वहां नहीं मिले। नाडा ने दोनों क्रिकेटरों से इस वर्ष 18 और 20 फरवरी को जवाब मांगा, लेकिन दोनों ने कोई उत्तर नहीं दिया। इस पर नाडा ने दोनों का पहला मिस टेस्ट दर्ज कर दिया। बीसीसीआई, आईसीसी को दी गई जानकारी मिस टेस्ट दर्ज किए जाने के बावजूद दोनों क्रिकेटरों को सफाई के लिए सात दिन का समय दिया गया है। दोनों क्रिकेटरों के मिस टेस्ट की जानकारी भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) और आईसीसी को भी दे दी गई है। अब दोनों ही क्रिकेटरों को बेहद सतर्क रहना होगा। अगर उनके खिलाफ दो और मिस टेस्ट दर्ज कर लिए गए तो दोनों बड़ी मुसीबत में फंस सकते हैं। इस वक्त नाडा के आरटीपी में इन दोनों के अलावा अभिषेक शर्मा, अक्षर पटेल, शुभमन गिल, हार्दिक पांड्या, जसप्रीत बुमराह, ऋषभ पंत, केएल राहुल, अर्शदीप सिंह, तिलक वर्मा, दीप्ति शर्मा, रेणुका ठाकुर जैसे क्रिकेटर शामिल हैं। About the author शिवम शिवम फरवरी 2025 से एबीपी की स्पोर्ट्स टीम के साथ जुड़े हैं. इससे पहले शिवम ने 3 साल इनसाइडस्पोर्ट में बतौर सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम किया है. शिवम ने अपनी पत्रकारिता की पढ़ाई जामिया मिल्लिया इस्लामिया से की है।   

सुशासन तिहार 2026: सिमड़ा शिविर में 4 हितग्राहियों को मिली प्रधानमंत्री आवास योजना की चाबी

सुशासन तिहार 2026: सिमड़ा शिविर में 4 हितग्राहियों को मिली प्रधानमंत्री आवास योजना की खुशियों की चाबी पक्के घर का सपना हुआ साकार, हितग्राहियों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का जताया आभार रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेशभर में आयोजित “सुशासन तिहार 2026” के तहत आमजन की समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर निराकरण किया जा रहा है। इसके साथ ही पात्र हितग्राहियों को विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी मौके पर प्रदान किया जा रहा है। इसी क्रम में जशपुर जिले के दुलदुला विकासखंड के ग्राम सिमड़ा में आयोजित जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर में 4 हितग्राहियों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत निर्मित आवासों की चाबी सौंपी गई। लाभान्वित हितग्राहियों में ग्राम सिमड़ा की जेरोम, मयूरचुंदी के बीरबल यादव, करडेगा के टूना राम तथा जगदीश यादव शामिल हैं। पक्के मकान की चाबी पाकर सभी हितग्राहियों के चेहरे खुशी से खिल उठे। हितग्राहियों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अब उन्हें बारिश, धूप और अन्य कठिनाइयों से राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से उनका सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जीने का सपना साकार हुआ है और अब वे अपने परिवार के साथ नए घर में सुखपूर्वक जीवन व्यतीत करेंगे। सुशासन तिहार के माध्यम से शासन की योजनाओं का लाभ सीधे जरूरतमंदों तक पहुंच रहा है, जिससे लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन दिखाई दे रहा है।

ऐतिहासिक ब्रिगेड मैदान में शपथ, शुभेंदु अधिकारी ने संभाली बंगाल की कमान

कलकत्ता  पश्चिम बंगाल की राजनीति ने शनिवार को रवींद्र जयंती पर नया इतिहास लिख दिया. कोलकाता के विशाल ब्रिगेड परेड ग्राउंड में पहली बार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार ने शपथ ली. शुभेंदु अधिकारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के अलावा देश के अलग-अलग राज्यों के एनडीए सरकारों के मुखिया की मौजूदगी में पश्चिम बंगाल के नौवें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली. उनके शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए देश भर के नेता तो आये ही, बंगाल के कोने-कोने से आम लोग भी ब्रिगेड परेड ग्राउंड पहुंचे। शुभेंदु अधिकारी बंगाल में बीजेपी के पहले मुख्यमंत्री बन गए हैं। राज्यपाल आरएन रवि ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, अशोक कीर्तिनिया, निशीथ प्रमाणिक और क्षुदीराम टुड्डू ने मंत्री पद की शपथ ली है। कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन किया गया। इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद थे। इस कार्यक्रम में कम से कम 20 राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बीजेपी के दिग्गज नेता पहुंचे हैं। बीजेपी ने भवानीपुर में ममता बनर्जी को हारने वाले दिग्गज नेता शुभेंदु अधिकारी को विधायक दल का नेता चुना गया था। उन्होंने राज्यपाल के सामने सरकार बनाने का दावा कल ही पेश कर दिया था। मशहूर ब्रिगेड परेड ग्राउंड ने भव्य शपथ ग्रहण समारोह की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही टीएमसी के 15 साल का शासन खत्म हो गया है और पहली बार बंगाल में बीजेपी का सियासी सूर्योदय हुआ है। पहली बार लोक भवन के बाहर लोकतंत्र का उत्सव आजादी के बाद यह पहली बार है, जब बंगाल की किसी सरकार का शपथ ग्रहण समारोह राजभवन (अब लोक भवन) के बंद कमरों से निकलकर खुले मैदान में आयोजित हो रहा है. बंगाली पंचांग के अनुसार, बैसाख के 25वें दिन पूरा राज्य रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती मना रहा है. इसी दौरान रवींद्र संगीत की धुन के बीच राज्यपाल आरएन रवि ने शुभेंदु अधिकारी को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलायी. उनके साथ 5 मंत्रियों दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, अशोक किर्तनिया, खुदीराम टुडू और निशीथ प्रमाणिक को भी राज्यपाल ने शपथ दिलायी।  ब्रिगेड परेड ग्राउंड में खुली जीप में पीएम मोदी, शुभेंदु और शमिक अधिकारी के शपथ ग्रहण समारोह से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुली जीप में बंगाल के नये चीफ मिनिस्टर और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नये चीफ मिनिस्टर के साथ ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आये लोगों का अभिवादन स्वीकार किया. पीएम मोदी हाथ हिला रहे थे और शुभेंदु अधिकारी तालियां बजा रहे थे. थोड़ी देर बाद पीएम मोदी, शुभेंदु और शमिक जीप से उतरकर पैदल ही स्टेज की तरफ बढ़े. इस दौरान वह लोगों से मिलते रहे. कभी हाथ जोड़कर, तो कभी दोनों हाथ हिलाकर प्रधानमंत्री ने लोगों का अभिनंदन किया।   शहीद परिवारों को सम्मान भाजपा ने राजनीतिक हिंसा में जान गंवाने वाले अपने 200 से अधिक कार्यकर्ताओं के परिजनों को विशेष रूप से आमंत्रित किया है. उनके बैठने के लिए मंच के पास अलग व्यवस्था की गयी थी. मैदान में आने वाले समर्थकों और मेहमानों के लिए बंगाल के पारंपरिक जायके ‘झालमुड़ी’ और ‘रसगुल्ले’ के स्टॉल लगाये गये थे।  निशीथ प्रमाणिक ने ली मंत्रिपद की शपथ माथाभांगा सीट से विधायक निशीथ प्रमाणिक ने मंत्री पद की शपथ ली है। उन्होंनेन राजनीति की शुरुआत टीएमसी से की थी और 2019 मेंबीजेपी में शामिल हुए थे। वह उत्तर बंगाल से आते हैं। वह केंद्र में राज्य मंत्री रह चुके हैं। वह कूचबेहार से सांसद थे। क्षुदीराम टुड्डू बने मंत्री क्षुदीराम टुड्डू ने मंत्री पद की शपथ ली है। वह बंगाल का आदिवासी चेहरा हैं। पेशे से शिक्षक हैं और सरकारी स्कूल में अध्यापन करते थे। वह रानीबांध से चुनकर आए हैं। उन्होंने संथाली भाषा में शपथ ली है। अशोक कीर्तिनिया ने मंत्री पद की शपथ ली है।  वह बनगांव उत्तर से विधायक हैं। वह मुतआ समुदाय के लिए ऐक्टिव रहते हैं। सामाजिक कार्यों में उनके योगदान को सराहा जाता है। वह लगातार दो बार विधायक बन चुके हैं। इस बार भी बनगांव से उन्हें जीत हासिल हुई है।  अग्निमित्रा पॉल ने ली मंत्रिपद की शपथ  अग्निमित्रा पॉल ने भी मंत्री पद की शपथ ली है। उन्हें भी उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की चर्चा है। वह आसनसोल दक्षिण से विधायक हैं और 2019 में बीजेपी में शामिल हुई थीं। वह बंगाल में मजबूत महिला चेहरा हैं। वह फैशन डिजाइनर से नेता बनी हैं।  दिलीप घोष बने मंत्री दिलीप घोष ने मंत्री पद की शपथ ली है। जानकारों का कहना है कि उन्हें उपमुख्यमंत्री भी बनाया जा सकता है। वह लंबे समय से आरएसएस से जुड़े हैं और बंगाल में बीजेपी के अध्यक्ष रहे हैं। वह खड़गपुर सदर से विधायक हैं ब्रिगेड परेड ग्राउंड की खास बातें     900 एकड़ में फैला ‘कोलकाता लंग्स’ : ब्रिगेड परेड ग्राउंड का अपना एक गौरवशाली इतिहास है. इसे दुनिया के सबसे बड़े शहरी पार्कों में गिना जाता है।      सेना का प्रबंधन : लगभग 900 एकड़ में फैले इस विशाल मैदान का रखरखाव भारतीय सेना की पूर्वी कमान के हाथ में है।      क्रिकेट का जन्मस्थान : कहा जाता है कि भारत में सबसे पहले क्रिकेट के बैट-बॉल इसी मैदान पर चले थे, जहां इयोनिया और कोलकाता के बीच मैच हुआ था।      राजनीति का मक्का : 18वीं सदी में जंगलों को साफ कर बनाये गये इस मैदान में 7 लाख से भी अधिक लोगों की रैलियां हो चुकी हैं. माकपा, कांग्रेस, टीएमसी और अब भाजपा, सभी ने यहां से अपनी सांगठनिक ताकत का लोहा मनवाया है।  सुरक्षा का अभेद्य किला ब्रिगेड परेड ग्राउंड कोलकाता पुलिस ने सुरक्षा के लिए 4000 पुलिसकर्मियों को तैनात किया था. पूरे मैदान में 1500 सीसीटीवी कैमरे और ड्रोन से नजर रखी जा रही थी. वीवीआईपी मेहमानों के लिए कार्यक्रम स्थल के पास ही अस्थायी हेलीपैड बनाया गया था. मैदान में उमड़ने वाली लाखों की भीड़ के लिए 100 से अधिक बड़ी एलईडी स्क्रीन लगायी गयी है, ताकि हर कोई इस पल को लाइव देख सके। 

विजय के शपथ समारोह में अटपटे हालात, तमिलनाडु की राजनीति में नए मोड़

चेन्नई  तमिनलाडु की सियासत में सस्पेंस ही सस्पेंस है. ऐसा लग रहा जैसे सांप-सीढ़ी का खेल चल रहा हो. कभी थलापति विजय की टीवीके की सरकार बनती दिखती है तो कभी डीएमके-एआईडीएमके के बीच गठबंधन की हवा चलती है. कभी सरकार बनने की बात आती हो तो कभी फिर इंतजार बढ़ जाता है. थलापति विजय कभी सरकार बनाने के लिए बहुमत होने की बात करते हैं तो कभी उनके नंबर कम पड़ जाते हैं. पहले खबर आई कि थलापति विजय आज सरकार बनाएंगे और शपथग्रहण होगा. मगर अब तमिलनाडु में फिर ट्विस्ट आ गया है. ऐसा लग रहा है कि थलापति विजय के शपथग्रहण पर फिर से ग्रहण लग गया है. कारण कि आधिकारिक तौर पर अब तक गवर्नर ने सरकार बनाने के लिए थलापति विजय को न्योता नहीं दिया है।  जी हां, टीवीके के संस्थापक एक्टर विजय के 118 विधायकों के बहुमत के आंकड़े को पार करने और सरकार बनाने का दावा पेश करने के कुछ घंटे बाद ही शुक्रवार देर रात उनकी बहुमत की स्थिति को लेकर नया संशय पैदा हो गया. आईयूएमएल ने थलापति विजय को समर्थन देने से इनकार कर दिया. वहीं वीसीके ने अपना फैसला लंबित रखा है और समर्थन के बदले कड़ी शर्तें रखीं. इससे तमिलनाडु की राजनीतिक स्थिति अस्थिर हो गई और बहुमत के आंकड़े फिर से अनिश्चित हो गए।  116, 117, 118: विजय अब भी बहुमत से दूर इन सबके बीच सरकार बनाने को लेकर थलापति विजय की टीवीके के लिए असमंजस और अनिश्चितता और बढ़ गई है. कारम कि थलापति विजय अब भी बहुमत के जादुई आंकड़े तक नहीं पहुंच पाए हैं. राज्यपाल से तीसरी बार मुलाकात के बाद भी टीवीके विधानसभा में बहुमत से कुछ कदम दूर है. यही कारण है कि राज्यपाल ने सरकार बनाने के लिए न्योता नहीं दिया है. थलापति विजय की टीवीके के पास 108 सीटें हैं. असल में देखें तो 107 क्योंकि विजय ने दो सीटों से जीत दर्ज की है. ऐसे में एक सीट उन्हें छोड़नी होगी. तमिलनाडु में सरकार बनाने के लिए 118 सीटों की जरूरत है।  कैसे थलापति विजय को लगा झटका थलापति विजय के दो सीटों से जीतने के बाद प्रभावी बहुमत घटकर 117 रह गया. डीएमके गठबंधन से अलग हुई कांग्रेस ने अपने पांच विधायकों के साथ विजय को समर्थन दिया है. सीपीआई और सीपीआई(एम) के दो-दो विधायकों ने भी बिना शर्त बाहर से समर्थन देने का ऐलान किया है. लेकिन आईयूएमएल ने डीएमके गठबंधन के साथ रहने का फैसला किया, जिससे विजय की पक्की संख्या घट गई और बहुमत के आंकड़े कड़े हो गए. ऐसे में विजय के बहुमत का आंकड़ा कभी 116 पर अटक जाता है तो कभी 118 पूरा हो जाता है. मगर आईयूएमएल के पीछे हटने से टीवीके अभी 116 पर है और उसे अब भी दो सीटों की जरूरत है।  आईयूएमएल ने बिगाड़ा विजय का खेल इधर डीएमके की पुरानी सहयोगी आईयूएमएल के पास दो विधायक हैं. उसने कहा कि वह राज्यपाल आरएन रवि की ओर से आमंत्रित किसी भी पार्टी को ‘स्थिर और धर्मनिरपेक्ष सरकार’ बनाने के लिए समर्थन देगी और भाजपा को ‘पीछे के रास्ते’ से राज्य में घुसने से रोकेगी. चूंकि न तो डीएमके और न ही एआईएडीएमके के पास सरकार बनाने के लिए पर्याप्त संख्या है. इसलिए माना जा रहा था कि राज्यपाल विजय को सरकार बनाने का न्योता देंगे. टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है।  हालांकि, बाद में खबर आई कि डीएमके की एक और सहयोगी वीसीके ने अपने विधायकों के साथ थलापति विजय को समर्थन देने का फैसला किया है. एक उच्चस्तरीय बैठक के बाद पार्टी सूत्रों ने बताया कि वीसीके ने समर्थन देने पर सहमति जताई है और शनिवार सुबह टीवीके को समर्थन पत्र सौंपेगी. पार्टी प्रवक्ता ने भी यूएनआई से इस कदम की पुष्टि की।  शपथग्रहण पर ग्रहण वहीं, वाम दलों के समर्थन और वीसीके के संभावित समर्थन के साथ थलापति विजय ने राज्यपाल से मुलाकात की. इससेक पहले वो दो बार राज्यपाल से मिल चुके थे और दोनों बार निराशा हाथ लगी थी. अबकी बार थलापति विजय ने सरकार बनाने का दावा पेश किया और समर्थन पत्र सौंपे. इससे राज्यभर में टीवीके कार्यकर्ताओं में जश्न का माहौल बन गया. खबरें यह भी थीं कि विजय का शपथ ग्रहण शनिवार को हो सकता है।  रात में अचानक हुआ खेल हालांकि, रात में हालात अचानक बदल गए. थलापति विजय ने सीपीआई और सीपीआई(एम) नेताओं से मिलकर समर्थन के लिए धन्यवाद दिया और आईयूएमएल और वीसीके नेताओं से मिलने की योजना बनाई, लेकिन दोनों दलों ने अपने रुख पर पुनर्विचार के संकेत दिए. इससे थलापति विजय को तगड़ा झटका लगा. अब सबसे बड़ा यूटर्न है कि आईयूएमएल ने स्पष्ट रूप से टीवीके को समर्थन देने से इनकार कर दिया है. उसने कहा कि वह डीएमके गठबंधन के साथ ही रहेगी. आईयूएमएल ने कहा कि हम पहले भी डीएमके के साथ थे, अब भी हैं और आगे भी रहेंगे।  थलापति विजय को एक बार फिर झटका लगा है. वीसीके ने भी लिया यूटर्न वहीं, वीसीके ने कहा कि बातचीत जारी है और विजय को समर्थन देने पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है. खबरें यह भी थीं कि पार्टी समर्थन के बदले कड़ी शर्तें रख रही है. यह बात तब और मजबूत हो गई जब वीसीके के उप महासचिव और नवनिर्वाचित विधायक वन्नियारासु ने सोशल मीडिया पर सत्ता और शासन में हिस्सेदारी की मांग की. इस अनिश्चितता के बीच TVK के सदस्य जो विजय के शपथ ग्रहण की उम्मीद में बड़ी संख्या में जुटे थे, उन्हें निराशा हाथ लगी क्योंकि बहुमत का आंकड़ा पूरा नहीं हो पाया. अब आगे जब तक बहुमत वाला नंबर नहीं दिखा देते एक्टर विजय, तब तक टीवीके सरकार का सपना… सपना ही रहेगा। 

ईंधन के दाम में इजाफा संभव, सरकार को हर दिन उठाना पड़ रहा 1000 करोड़ का भार

 नई दिल्‍ली ईरान अमेरिका तनाव और होर्मुज के बंद होने से ग्‍लोबल स्‍तर पर कच्चे तेल के दाम में भारी उछाल देखने को मिली है. कुछ ही समय में कच्‍चे तेल के दाम 70 डॉलर प्रति बैरल से 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए हैं, जिसके बाद भी देश में पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर रहे हैं, लेकिन अब संभावना जताई जा रही है कि ईंधन की कीमतें जल्‍द बढ़ सकती हैं।  क्‍यों सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) को हर दिन भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है, जिसका पूरा भार या तो कंपनी के ऊपर या सरकार के खजाने पर पड़ रहा है. इस कारण, पेट्रोल-डीजल के दाम में हफ्ते भर के दौरान बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है।  सूत्रों ने बिजनेस टुडे को बताया कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 15 मई से पहले बढ़ोतरी की जा सकती है, क्योंकि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों  को प्रति माह लगभग 30,000 करोड़ रुपये के भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।  स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज ने बढ़ाई टेंशन  स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज, जिससे होकर दुनिया की लगभग 20% तेल आपूर्ति गुजरती है, पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण हफ्तों से बुरी तरह प्रभावित है, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट पैदा हो गया है. कई देशों में ईंधन की समस्‍या आई है और कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है।  हांगकांग में पेट्रोल की कीमत लगभग 295 रुपये प्रति लीटर है, सिंगापुर में लगभग 240 रुपये, नीदरलैंड में 225 रुपये, इटली में 210 रुपये और ब्रिटेन में लगभग 195 रुपये प्रति लीटर है. वहीं, भारत में कई शहरों में पेट्रोल की कीमतें बिना किसी बड़े संशोधन के लगभग 95 रुपये प्रति लीटर के आसपास बनी हुई हैं।  कई देशों में इमरजेंसी लागू  कई देशों ने एनर्जी संकट से निपटने के लिए पहले ही आपातकालीन उपाय लागू कर दिए हैं. बांग्लादेश ने ईंधन की राशनिंग लागू की गई है, श्रीलंका ने चार दिन का कार्य सप्ताह शुरू किया, पाकिस्तान ने सरकारी कार्यालयों के कार्य दिवस कम किए, जबकि दक्षिण कोरिया ने दशकों में पहली बार ईंधन की कीमतों पर सीमा लागू की. हालांकि, भारत में ईंधन की कमी, लंबी कतारें या राशनिंग जैसी समस्याएं नहीं हुईं।  भारत ने उठाए सख्‍त कदम  सरकारी और उद्योग जगत के सूत्रों के अनुसार, संकट शुरू होते ही भारत ने तेजी से कदम उठाए. घरेलू एलपीजी उत्पादन को कुछ ही दिनों में 36,000 टन प्रतिदिन से बढ़ाकर 54,000 टन प्रतिदिन कर दिया गया है. सरकार ने वैश्विक स्तर पर बढ़ती कीमतों से लोगों को राहत देने के लिए पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में भी भारी कमी की।  सरकार और तेल कंपनियां उठा रहीं भार  उद्योग जगत के अनुमानों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों के चरम पर, सरकार और तेल उत्पादक कंपनियां मिलकर पेट्रोल पर लगभग 24 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 30 रुपये प्रति लीटर का भार प्रभावी रूप से वहन कर रही थीं।  उत्पाद शुल्क में कटौती के बाद भी, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम को मिलाकर हर महीने लगभग ₹30,000 करोड़ का नुकसान होने का अनुमान है।  100 फीसदी अधिक क्षमता पर काम  भारत ने रूस, अमेरिका, पश्चिम अफ्रीका और अन्य क्षेत्रों से कच्चे तेल का आयात बढ़ाकर आपूर्ति को स्थिर करने में भी कामयाबी हासिल की है. खबरों के मुताबिक, ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने के लिए रिफाइनरियां 100% से अधिक क्षमता पर काम कर रही हैं. हालांकि, वेस्‍ट एशिया में जारी संघर्ष और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण पब्लिक सेक्‍टर की तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ता जा रहा है। 

पंजाब के मंत्री संजीव अरोड़ा के खिलाफ ED की बड़ी कार्रवाई, कई अधिकारी मौके पर

चंडीगढ़  पंजाब की राजनीति में शुक्रवार को उस वक्त बड़ा भूचाल आ गया जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीमों ने कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा के सरकारी आवास समेत कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी शुरू कर दी. सुबह करीब 7 बजे सेक्टर-2 स्थित सरकारी कोठी पर ED अधिकारियों का काफिला पहुंचा. करीब 20 गाड़ियों में पहुंचे अधिकारियों के साथ भारी सुरक्षा बल भी तैनात किया गया. CIA और स्पेशल फोर्स के करीब तीन दर्जन जवानों ने पूरे इलाके को घेर लिया. जानकारी के मुताबिक सुबह 7:25 बजे औपचारिक रूप से सर्च ऑपरेशन शुरू हुआ. ED की यह कार्रवाई PMLA 2002 के तहत की जा रही है. एजेंसी चंडीगढ़ और दिल्ली-NCR में संजीव अरोड़ा और उनसे जुड़े सहयोगियों के कुल चार ठिकानों पर जांच कर रही है. सूत्रों के अनुसार यह कार्रवाई दो दिन पहले शुरू हुई बड़ी जांच का विस्तार मानी जा रही है, जिसमें बिल्डर अजय सहगल, मोहिंदर सिंह और अन्य कारोबारियों के यहां भी छापेमारी हुई थी।  इस कार्रवाई के समानांतर पंजाब के मोहाली जिले के खरड़ स्थित वेस्टर्न टावर की 9वीं मंजिल पर चल रही ED रेड भी शुक्रवार देर रात खत्म हुई. यह सर्च ऑपरेशन करीब 40 घंटे तक चला. कारोबारी नितिन गोहल और प्रीतपाल सिंह ढींढसा के घरों और दफ्तरों पर लगातार जांच चलती रही. सूत्रों के मुताबिक प्रीतपाल सिंह ढींढसा के घर से ED की टीम रात करीब 11 बजे निकली, जबकि नितिन गोहल के यहां कार्रवाई देर रात 12:30 से 1 बजे के बीच खत्म हुई. हालांकि अधिकारियों ने किसी गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं की है. बताया जा रहा है कि ED अधिकारी कई बैग और दस्तावेज लेकर बाहर निकले. अभी तक एजेंसी ने बरामदगी, जब्ती या गिरफ्तारी को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है. इससे पूरे मामले को लेकर सस्पेंस और बढ़ गया है।  एक महीने में दूसरी बार, एक साल में तीसरी रेड पंजाब सरकार और आम आदमी पार्टी ने ED की कार्रवाई को राजनीतिक बदले की कार्रवाई करार दिया है. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर केंद्र सरकार और BJP पर निशाना साधते हुए कहा कि संजीव अरोड़ा के घर एक साल में तीसरी बार और एक महीने में दूसरी बार ED पहुंची है, लेकिन अब तक कुछ नहीं मिला. उन्होंने लिखा कि पंजाब गुरुओं और शहीदों की धरती है, जिसे कोई ताकत झुका नहीं सकती. मान ने आरोप लगाया कि ED और BJP मिलकर विपक्षी नेताओं को डराने की कोशिश कर रहे हैं. मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद राज्य की राजनीति और गर्म हो गई है।  बिल्डर नेटवर्क से जुड़ रही जांच की कड़ियां सूत्रों के मुताबिक दो दिन पहले पंजाब और दिल्ली-NCR में बिल्डर और कारोबारी नेटवर्क से जुड़े लोगों के खिलाफ ED ने बड़ी कार्रवाई शुरू की थी. उसी जांच के तार अब संजीव अरोड़ा और उनके करीबियों तक पहुंचते दिखाई दे रहे हैं. जांच एजेंसी कथित मनी लॉन्ड्रिंग, संदिग्ध लेनदेन और कंपनियों से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड खंगाल रही है. अधिकारियों ने फिलहाल किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से इनकार किया है, लेकिन लगातार बढ़ती छापेमारी से यह साफ है कि जांच का दायरा बड़ा हो चुका है।  सुरक्षा घेरे में पूरा इलाका ED रेड के दौरान चंडीगढ़ के सेक्टर-2 इलाके में सुरक्षा बेहद कड़ी रही. मंत्री आवास के आसपास आम लोगों की आवाजाही सीमित कर दी गई. पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे इलाके को घेर लिया था. सुबह से लेकर देर शाम तक मीडिया और स्थानीय लोगों की भीड़ बाहर जमा रही. अधिकारियों ने किसी को भी परिसर के भीतर जाने की अनुमति नहीं दी. इससे पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई।  क्या आगे गिरफ्तारी भी हो सकती है? फिलहाल ED ने किसी गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं की है. हालांकि सूत्रों का कहना है कि एजेंसी वित्तीय दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर रही है. यदि जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आती हैं तो आने वाले दिनों में पूछताछ और गिरफ्तारी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. पंजाब की राजनीति में इस कार्रवाई को आने वाले समय के बड़े राजनीतिक संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है। 

देश का पहला रेयर अर्थ टाइटेनियम पार्क भोपाल में आज खुलेगा

भोपाल मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल अब क्रिटिकल मिनरल्स इनोवेशन के बड़े केंद्र के रूप में उभरने जा रही है। यहां देश के पहले ‘रेयर अर्थ एवं टाइटेनियम थीम पार्क’ की स्थापना की गई है, जिसका उद्घाटन आज 9 मई को परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष और परमाणु ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. अजीत के. मोहंती करेंगे। परमाणु ऊर्जा विभाग के अधीन कार्यरत इंडियन रेयर अर्थ्स लिमिटेड द्वारा विकसित यह पार्क केवल प्रदर्शनी स्थल नहीं होगा, बल्कि अनुसंधान से उद्योग तक तकनीक पहुंचाने वाला राष्ट्रीय नवाचार मंच बनेगा। इसका उद्देश्य वैज्ञानिक शोध को औद्योगिक उपयोग से जोड़ते हुए भारत को रेयर अर्थ मिनरल्स और टाइटेनियम तकनीक के क्षेत्र में वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना है। पार्क में भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र की विकसित आधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन किया जाएगा। यहां नियोडिमियम और सेरियम जैसे दुर्लभ खनिजों के निष्कर्षण और प्रसंस्करण से जुड़ी उन्नत प्रक्रियाओं को प्रदर्शित किया जाएगा। इसके साथ ही अनुपयोगी और पुराने मैग्नेट्स की रिसाइक्लिंग कर मूल्यवान तत्वों को दोबारा प्राप्त करने की तकनीक भी दिखाई जाएगी। इस पार्क को "प्रयोगशाला से उत्पाद" की अवधारणा पर डिजाइन किया गया है, जिसका उद्देश्य वैज्ञानिक अनुसंधान और औद्योगिक अनुप्रयोग के बीच की खाई को पाटना है। इससे भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियों को उन्नत स्तर तक पहुंचाया जा सकेगा और उद्योगों के लिए उनकी उपयोगिता प्रदर्शित की जा सकेगी। इस पार्क की कार्यप्रणाली 3P ढांचे पर आधारित है—प्रक्रिया, प्रदर्शन और लोग। इस ढांचे के तहत, पार्क अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों के विकास और प्रदर्शन, उच्च गुणवत्ता वाले औद्योगिक मानकों की स्थापना और प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के माध्यम से कुशल कार्यबल तैयार करने पर ध्यान केंद्रित करेगा। इस सुविधा का एक प्रमुख उद्देश्य चक्रीय अर्थव्यवस्था और सतत विकास को बढ़ावा देना है। यह पार्क नियोडिमियम और सेरियम जैसी दुर्लभ धातुओं के उत्पादन की विधियों को प्रदर्शित करेगा, जो इलेक्ट्रॉनिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा और रक्षा सहित आधुनिक उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण हैं। इसमें बेकार पड़े चुम्बकों को पुनर्चक्रित करके मूल्यवान तत्वों को पुनः प्राप्त करने की तकनीक भी शामिल होगी, जिससे अपशिष्ट कम होगा और संसाधन दक्षता में वृद्धि होगी। अधिकारियों ने आगे कहा कि "दुर्लभ पृथ्वी और टाइटेनियम थीम पार्क" भारत की खनिज आत्मनिर्भरता को मजबूत करने और आयात पर निर्भरता को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस विशिष्ट केंद्र की स्थापना महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। स्थिरता, नवाचार और कौशल विकास पर जोर देने के साथ, यह पार्क अत्याधुनिक अनुसंधान और औद्योगिक सहयोग का केंद्र बनने के लिए तैयार है, जिससे वैश्विक खनिज अर्थव्यवस्था में भारत की स्थिति मजबूत होगी। अस्वीकरण: यह पोस्ट किसी एजेंसी फीड से स्वतः प्रकाशित की गई है और इसमें पाठ में कोई संशोधन नहीं किया गया है। संपादक द्वारा इसकी समीक्षा नहीं की गई है। इस परियोजना का मुख्य फोकस सर्कुलर इकोनॉमी और ग्रीन टेक्नोलॉजी पर रहेगा। पार्क में खनिज संसाधनों के पुनः उपयोग और रिसाइक्लिंग तकनीकों को बढ़ावा देकर पर्यावरण संरक्षण के साथ आयात निर्भरता कम करने की दिशा में काम किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इलेक्ट्रिक वाहन, रक्षा, इलेक्ट्रॉनिक्स और हाईटेक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में रेयर अर्थ मिनरल्स की बढ़ती मांग के बीच भोपाल का यह पार्क भारत को रणनीतिक खनिज क्षेत्र में नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह थीम पार्क ‘3पी फ्रेमवर्क’ पर आधारित होगा। इसके तहत नई तकनीकों और नवाचारों का विकास, उच्च औद्योगिक गुणवत्ता सुनिश्चित करना और युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर विशेषज्ञ मानव संसाधन तैयार करना प्रमुख लक्ष्य होंगे। भोपाल में बनने वाला संस्थान क्यों महत्वपूर्ण? भोपाल में आज 9 मई को जिस “रेयर अर्थ एवं टाइटेनियम थीम पार्क ”का लोकार्पण होना है, उसे भारत की नई रेयर अर्थ रणनीति के एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में देखा जा रहा है। यह परियोजना रेयर अर्थ एवं टाइटेनियम आधारित अनुसंधान, प्रशिक्षण, प्रौद्योगिकी विकास और उद्योग सहयोग का केंद्र बन सकती है। भोपाल के आचारपुरा औद्योगिक क्षेत्र में “रेयर अर्थ एवं टाइटेनियम थीम पार्क” विकसित किए जाने का उद्देश्य केवल उत्पादन नहीं बल्कि देश में संपूर्ण औद्योगिक पारिस्थितिकी तैयार करना है, ताकि भारत केवल कच्चा माल बेचने वाला देश न रह जाए। 'प्रयोगशाला से उत्पाद' की अनूठी अवधारणा विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि भोपाल के इस केंद्र में शोध, परीक्षण, प्रोटोटाइप विकास और उद्योगों के लिए तकनीकी सहायता जैसी सुविधाएं विकसित होती हैं, तो मध्यप्रदेश देश के रेयर अर्थ मानचित्र पर नई पहचान बना सकता है।यह केवल औद्योगिक परियोजना नहीं, बल्कि तकनीकी आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मिशन बन जाएगा। 3पी फ्रेमवर्क पर आधारित कार्यप्रणाली:     प्रक्रिया (प्रोसेस) – दुर्लभ मृदा एवं टाइटेनियम क्षेत्रों में अत्याधुनिक तकनीकों एवं नवाचार उत्पादों का विकास एवं प्रदर्शन।     प्रदर्शन (पर्फार्मेंस) – उच्च गुणवत्ता वाले औद्योगिक मानकों की स्थापना, जिससे तकनीकों की दक्षता, विश्वसनीयता एवं विस्तार क्षमता सुनिश्चित हो सके।     मानव संसाधन (पीपुल) – युवाओं एवं पेशेवरों के कौशल विकास एवं क्षमता निर्माण के माध्यम से एक सक्षम कार्यबल तैयार

टेंपल मैनेजमेंट कोर्स की शुरुआत, मंत्री ने कहा—धार्मिक संस्थानों में मिलेगी उपयोगी ट्रेनिंग

भोपाल मध्य प्रदेश में धार्मिक पर्यटन और आस्था के बढ़ते दायरे के बीच अब मंदिरों की व्यवस्थाओं को प्रोफेशनल तरीके से संचालित करने की तैयारी शुरू हो गई है। प्रदेश सरकार पहली बार एमबीए पाठ्यक्रम के तहत टेंपल मैनेजमेंट कोर्स शुरू करने जा रही है। इसकी शुरुआत उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय से पायलट प्रोजेक्ट के रूप में होगी। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने अमर उजाला से बात करते हुए कहा कि प्रदेश के बड़े धार्मिक स्थलों पर लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए अब प्रशिक्षित और प्रोफेशनल मैनेजमेंट की जरूरत महसूस की जा रही है।  मंदिरों में तेजी से बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या मंत्री ने कहा कि महाकाल मंदिर, ओंकारेश्वर, ओरछा और प्रदेश के दूसरे बड़े धार्मिक स्थलों पर हर दिन हजारों से लेकर लाखों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। पहले जहां विशेष पर्व, शिवरात्रि या सावन जैसे मौकों पर ही भारी भीड़ दिखाई देती थी, वहीं अब हर शनिवार-रविवार और छुट्टियों में भी बड़ी संख्या में लोग दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि उज्जैन में अब सामान्य दिनों में भी एक लाख से ज्यादा श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। ऐसे में भीड़ को नियंत्रित करना, श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना और सुविधाओं को व्यवस्थित रखना बड़ी चुनौती बनती जा रही है। क्या पढ़ाया जाएगा टेंपल मैनेजमेंट कोर्स में? इस नए कोर्स में सिर्फ धार्मिक पहलुओं पर नहीं बल्कि आधुनिक मैनेजमेंट सिस्टम पर फोकस किया जाएगा। छात्रों को भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था, पार्किंग सिस्टम, श्रद्धालुओं की आवाजाही, सफाई व्यवस्था और आपदा प्रबंधन जैसे विषय पढ़ाए जाएंगे। इसके साथ ही मंदिरों में चढ़ने वाले फूल-माला, नारियल और अन्य पूजन सामग्री के उपयोग और डिस्पोजल की वैज्ञानिक व्यवस्था पर भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। धार्मिक स्थलों की आंतरिक व्यवस्थाओं को अधिक व्यवस्थित और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने पर भी विशेष ध्यान रहेगा। चर्च और मस्जिद में भी काम आएगा यह मैनेजमेंट इंदर सिंह परमार ने साफ कहा कि यह कोर्स केवल मंदिरों तक सीमित नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि मैनेजमेंट के सिद्धांत हर जगह एक जैसे होते हैं। जो छात्र यहां प्रशिक्षण लेंगे, वे चर्च, मस्जिद और अन्य धार्मिक या भीड़भाड़ वाले स्थानों पर भी बेहतर तरीके से व्यवस्थाएं संभाल सकेंगे। मंत्री ने कहा कि सरकार ने इसकी शुरुआत मंदिरों से इसलिए की है क्योंकि प्रदेश में धार्मिक पर्यटन तेजी से बढ़ रहा है और यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। पहले उज्जैन में पायलट प्रोजेक्ट, फिर दूसरे विश्वविद्यालयों में  सरकार फिलहाल इस कोर्स को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में उज्जैन में शुरू करेगी। इसके बाद छात्रों की रुचि, एडमिशन और परिणामों को देखकर आगे का फैसला लिया जाएगा। मंत्री ने कहा कि अगले साल इसे इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में भी शुरू करने की कोशिश की जाएगी। जरूरत पड़ने पर बाद में जबलपुर समेत अन्य विश्वविद्यालयों में भी यह कोर्स लागू किया जा सकता है। युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के नए अवसर सरकार का मानना है कि आने वाले समय में धार्मिक पर्यटन और बड़े धार्मिक आयोजनों में प्रशिक्षित मैनेजमेंट प्रोफेशनल्स की मांग बढ़ेगी। इससे युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार होंगे। मंत्री ने कहा कि प्रशिक्षित लोगों के आने से श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, मंदिरों की व्यवस्थाएं ज्यादा प्रोफेशनल होंगी और धार्मिक स्थलों का संचालन अधिक संवेदनशील और व्यवस्थित तरीके से किया जा सकेगा। विपक्ष के सवालों पर मंत्री का जवाब विपक्ष द्वारा इस कोर्स को राजनीति और धर्म से जोड़ने पर मंत्री ने कहा कि यह पूरी तरह व्यवस्थाओं और मैनेजमेंट से जुड़ा विषय है। इसका उद्देश्य केवल धार्मिक स्थलों पर बेहतर प्रबंधन और श्रद्धालुओं को सुगम सुविधाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि जो लोग इसे राजनीति के नजरिए से देख रहे हैं, वे इसकी वास्तविक जरूरत को समझ नहीं पा रहे हैं। सरकार समय की मांग के अनुसार धार्मिक स्थलों की व्यवस्थाओं को आधुनिक और व्यवस्थित बनाने की दिशा में काम कर रही है।