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LPG कनेक्शन बचाने के लिए जरूरी, सरकार का नया नियम लागू; जानें क्या करना होगा

नई दिल्ली अगर आपके घर में भी रसोई गैस सिलेंडर (LPG) और पाइप वाली गैस (PNG) दोनों का इस्तेमाल हो रहा है, तो आपके लिए बड़ी खबर है। भारत सरकार अब एक घर, एक कनेक्शन (One Household, One Connection) के नियम को बेहद सख्ती से लागू कर रही है। नए नियमों के मुताबिक, किसी भी एक परिवार के लिए सब्सिडी वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर और पीएनजी कनेक्शन दोनों को एक साथ रखना अब पूरी तरह से गैर-कानूनी घोषित कर दिया गया है। पश्चिम एशिया (Middle East) में बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के कारण ईंधन की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिसके चलते सरकार ने गैस के सही इस्तेमाल को सुनिश्चित करने के लिए यह कड़ा कदम उठाया है। सरकार का मुख्य उद्देश्य सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडरों की कालाबाजारी को रोकना और यह सुनिश्चित करना है कि गैस सिलेंडर केवल उन जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचे, जहां अभी तक पीएनजी की पाइपलाइन नहीं बिछी है। दिल्ली और देश के अन्य बड़े शहरों में गैस कंपनियां अब ऐसे घरों की पहचान कर रही हैं, जो दोनों कनेक्शन का एक साथ फायदा उठा रहे हैं। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा जारी नए आदेश के तहत ऑयल कंपनियों और डिस्ट्रीब्यूटर्स को साफ निर्देश दिए गए हैं कि पीएनजी वाले घरों को नया एलपीजी सिलेंडर जारी या रीफिल न किया जाए।     एलपीजी सिलेंडर सरेंडर करें- अगर आपके घर में पीएनजी (पाइपलाइन गैस) चालू हो चुकी है, तो आपको तुरंत अपना पुराना एलपीजी गैस कनेक्शन सरेंडर (वापस) करना होगा।     स्वेच्छा से छोड़ रहे हैं लोग- अब तक देश भर में 43,000 से अधिक उपभोक्ता स्वेच्छा से अपना एलपीजी कनेक्शन सरेंडर कर चुके हैं, लेकिन सरकार के पास मौजूद डेटा के अनुसार ऐसे घरों की संख्या काफी अधिक है।     कार्रवाई की चेतावनी- अगर कोई परिवार इस नियम का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उस पर जुर्माना लगाया जा सकता है और बिना किसी पूर्व सूचना के उसका कनेक्शन भी रद्द किया जा सकता है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 88% कच्चा तेल, 50% प्राकृतिक गैस और लगभग 60% एलपीजी विदेशों (मुख्य रूप से सऊदी अरब और यूएई) से आयात करता है। ईरान-इजराइल तनाव और वैश्विक संकट के कारण गैस सप्लाई काफी सीमित हो गई है। इसका असर न केवल घरों पर, बल्कि होटलों, रेस्तरां और कॉमर्शियल यूनिट्स पर भी पड़ रहा है, जहां एलपीजी की कम आपूर्ति के चलते वैकल्पिक ईंधन अपनाने को कहा जा रहा है। इसलिए, अगर आपके पास भी डबल कनेक्शन है, तो परेशानी से बचने के लिए जल्द से जल्द एक कनेक्शन सरेंडर कर दें। सबसे अधिक घरों में 14.2 किलो वाला सिलेंडर इस्तेमाल होता है। आज दिल्ली में यह एलपीजी सिलेंडर ₹913 में मिल रहा है। वहीं, छोटे परिवार या अस्थायी उपयोग के लिए 5 किलोग्राम का सिलेंडर ₹339 में उपलब्ध है।

झारखंड बोर्ड 12वीं रिजल्ट: छोटी, रशीदा और श्वेता बनीं टॉपर, टॉप करने वाले लड़कों की भी सूची

रांची  झारखंड में 12वीं के छात्रों का अपने परीक्षा परिणाम का इंतजार खत्म हो गया है. झारखंड एकेडमिक काउंसिल ने वार्षिक इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 के नतीजे 6 मई, 2026 दिन बुधवार को जारी कर दिया है. इस परीक्षा परिणाम में कुल 81,144 सफल रहे. वहीं, 85,104 छात्रों एग्जाम दिया था. इंटरमीडिएट के रिजल्ट में एक बार फिर छात्राओं ने बाजी मारी है. मगर, छात्र भी पीछे नहीं रहे. लड़कियों के साथ लड़कों ने भी अपना परचम परीक्षा में लहराया है।  झारखंड एकेडमिक काउंसिल की ओर से जारी इंटरमीडिएट के रिजल्ट में बोकारो की छोटी कुमारी 478 नंबर के साथ आर्ट्स की टॉपर बनी. जबकि, दुमका के अंकित कुमार को दूसरा स्थान और सदमा रांची की अंशु कुमारी आर्ट में थर्ड टॉपर बनी. वहीं, कॉमर्स में रांची के छात्र-छात्राओं का शानदार प्रदर्शन रहा।  कॉमर्स में 478 मार्क्स के साथ श्वेता प्रसाद साइंस में टॉप किया. कृष कुमार बरनवाल सेकंड टॉपर और प्रियांशी खत्री थर्ड टॉपर बनी.  श्वेता प्रसाद धुर्वा स्थित योगदान सत्संग इंटरमीडिएट महाविद्यालय की छात्रा हैं. कृष कुमार बरनवाल बाल कृष्णा हाई स्कूल छात्र हैं. संत जेवियर गर्ल्स इंटर कॉलेज चाईबासा की छात्रा प्रियांशी खत्री हैं।  अब बात करें साइंस में झारखंड 12वीं बोर्ड परीक्षा में किसने बाजी मारी, तो साइंस स्ट्रीम में धनबाद की रशीदा नाज ने पहला स्थान हासिल किया है. नाज ने 489 नंबर लाकर टॉप किया है. वह वह डीएवी +2 हाई स्कूल की छात्रा हैं. वहीं, पाटन के रहने वाले फैजान आलम साइंस के सेकंड टॉपर बने हैं. उनको 483 अंक मिला है. 481 नंबर के साथ आकांक्षा कुमारी सिमरिया और सना आफरीन सतबरवा ने संयुक्त रूप से तीसरे स्थान हासिल किया है।  आर्ट्स, कॉमर्स और साइंस: मिलिए झारखंड के स्टेट टॉपर्स से झारखंड बोर्ड की इस परीक्षा में छोटी कुमारी, रशीदा नाज और श्वेता प्रसाद ने अपने-अपने स्ट्रीम में टॉप कर राज्य का मान बढ़ाया है।  साइंस स्ट्रीम (Science): धनबाद की रशीदा नाज़ ने 500 में से 489 अंक प्राप्त कर पूरे राज्य में टॉप किया है. वो DAV +2 हाई स्कूल, पाथरडीह की छात्रा हैं।  आर्ट्स स्ट्रीम (Arts): बोकारो की छोटी कुमारी ने 478 अंक लाकर प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है. छोटी KN +2 हाई स्कूल, हरनाद की छात्रा हैं।  कॉमर्स स्ट्रीम (Commerce): रांची की श्वेता प्रसाद ने 478 अंकों के साथ राज्य में टॉप किया है. वे योगदा सत्संग इंटर कॉलेज, रांची की छात्रा हैं।  बेटियों का शानदार प्रदर्शन राज्य स्तरीय आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष भी छात्राओं का उत्तीर्ण प्रतिशत छात्रों से बेहतर रहा है. आर्ट्स स्ट्रीम में जहाँ 96.68% छात्राएं सफल रहीं, वहीं छात्रों का सफलता प्रतिशत 95.34% रहा. गुमला और लोहरदगा जैसे जिलों में छात्राओं का प्रदर्शन शत-प्रतिशत के करीब रहा है, जो राज्य में महिला शिक्षा के बढ़ते स्तर को दर्शाता है.  परीक्षार्थी अपना विस्तृत रिजल्ट DigiLocker के माध्यम से results.digilocker.gov.in पर देख सकते हैं.

ममता के इस्तीफा न देने वाले स्टंट की सीमा केवल कल तक

कलकत्ता पश्चिम बंगाल के चुनाव नतीजे चार मई को आ गए. इस बार विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने परचम लहराया और इस तरह बीते 15 सालों से टीएमसी की सत्ता का सूपड़ा साफ हो गया. चुनाव नतीजे आने के बाद से ही अब तक सीएम रहीं ममता बनर्जी आक्रामक मोड में हैं. उन्होंने पहले तो यह आरोप लगाया कि मतगणना केंद्रों पर वोटों की हेरफेर हुई है. यहां तक कि उन्होंने कहा कि कुछ गुंडों ने उन्हें भवानीपुर के मतगणना केंद्र पर पीटा भी।  ममता बनर्जी ने कहा- वह हारी नहीं, उन्हें हराया गया मंगलवार शाम को ममता बनर्जी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और बीजेपी पर तमाम आरोप लगाते हुए कहा कि, उनके सीएम पद से इस्तीफा देने का सवाल नहीं. ममता बनर्जी के इस बयान से राज्य में एक तरह का संवैधानिक संकट खड़ा होने की आशंका जताई जा रही है. सवाल उठ रहे हैं कि ममता ने इस्तीफा नहीं दिया तो क्या होगा? असल में बीजेपी 10 मई से पहले-पहले शपथ ग्रहण की तैयारी में जुटी है।  बुधवार को छह तारीख हो चुकी है. सात मई 2026 को पश्चिम बंगाल की 17वीं विधानसभा का कार्यकाल समाप्त हो रहा है. ऐसा होने पर सभी पद संवैधानिक रूप से खुद ही समाप्त हो जाएंगे. ऐसे में ममता बनर्जी खुद-ब-खुद सीएम नहीं रहेंगी. यानी वह इस्तीफा दें या न दें, विधानसभा भंग होने के बाद वह वैसे भी सीएम नहीं रहने वाली हैं।  सिर्फ आज तक ही है उनके इस बयान का मतलब? यानी ममता बनर्जी के इस्तीफा न देने की मियाद सिर्फ एक दिन यानी आज ही के दिन तक है.  इसके बाद उनके इस बयान कि मैं 'इस्तीफा नहीं दूंगी.' इसका भी कोई मतलब नहीं रह जाएगा. चुनाव आयोग (ECI) ने चुनावी प्रक्रिया पूरी होने के बाद नई विधानसभा के गठन के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है और इसे राज्यपाल को भेज भी दिया है तो ममता बनर्जी के इस्तीफा देने या न देने के लिए भी सिर्फ आज ही का दिन है।  वैसे भी ममता बनर्जी बीते तीन महीने से औपचारिक तौर पर सीएम नहीं हैं. इस बात को बताया है टीएमसी सांसद और वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी ने. उन्होंने ममता बनर्जी का बचाव करते हुए कहा कि ममता व्यावहारिक रूप से सीएम के तौर पर काम नहीं कर रही थीं. उन्होंने कहा कि 'पिछले तीन महीनों से राज्य में आचार संहिता लागू थी, इसलिए ममता बनर्जी व्यावहारिक रूप से मुख्यमंत्री के तौर पर काम नहीं कर रही थीं. ऐसे में इस्तीफे का सवाल ही नहीं उठता।  कल्याण बनर्जी ने कहा, 'पिछले 3 महीनों से मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट लागू है. सरकार कौन चला रहा था? मुख्य सचिव. इसलिए पिछले 3 महीनों से ममता बनर्जी मुख्यमंत्री के तौर पर काम नहीं कर रही थीं. फिर इस्तीफे का सवाल कहां है?' हालांकि ममता बनर्जी के बयान ने ये एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया कि क्या कोई मुख्यमंत्री चुनाव हारने के बाद भी पद पर बना रह सकता है? संविधान क्या कहता है? दो बड़े कानून के जानकारों ने इस पर अपनी राय दी है।  क्या कहते हैं एक्सपर्ट? वकील और संविधान के जानकार ज्ञानंत सिंह कहते हैं कि ममता का यह बयान संविधान से ज्यादा एक राजनीतिक चाल है. यानी इसका असर कानूनी कम और राजनीतिक ज्यादा होगा. उन्होंने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 164 के मुताबिक मुख्यमंत्री और बाकी मंत्री राज्यपाल की मर्जी तक अपने पद पर रहते हैं. इसका मतलब यह है कि राज्यपाल चाहें तो ममता को हटा सकते हैं.लेकिन एक पेच है।  अगर राज्यपाल अभी ममता को हटाते हैं और नई सरकार नहीं बनती तो राज्य में एक खालीपन आ जाएगा यानी राज्य चलाने वाला कोई नहीं होगा. यह संवैधानिक रूप से सही नहीं होगा. इसके अलावा उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 356 के तहत अगर ममता खुद को मुख्यमंत्री मानते हुए बड़े फैसले लेने लगें तो राज्यपाल राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश कर सकते हैं।  एक और अहम बात उन्होंने यह बताई कि अगर कोई मुख्यमंत्री विधानसभा में बहुमत साबित नहीं कर पाता तो राज्यपाल किसी नए मुख्यमंत्री को नियुक्त कर सकते हैं. भले ही हारने वाला मुख्यमंत्री इस्तीफा देने से मना कर दे. एक और जरूरी बात यह है कि पुरानी विधानसभा का कार्यकाल खत्म हो चुका है और नई विधानसभा के लिए चुनाव हो चुके हैं. इसलिए SR बोमई वाला फ्लोर टेस्ट का नियम यहां लागू नहीं होगा. पुरानी विधानसभा में ममता को बिना फ्लोर टेस्ट के भी हटाया जा सकता है।  ममता न दें इस्तीफा तो राज्यपाल कर सकते हैं बर्खास्त वहीं, सुप्रीम कोर्ट के वकील और संविधान के जानकार आर के सिंह और भी सीधी बात करते हैं. वो कहते हैं कि अगर ममता इस्तीफा नहीं देतीं तो राज्यपाल सीधे उन्हें बर्खास्त कर सकते हैं. उन्होंने एक बहुत दिलचस्प बात कही. उन्होंने कहा कि जिस दिन विधानसभा का कार्यकाल खत्म हो जाता है, उस दिन से मौजूदा मुख्यमंत्री संविधान की भाषा में 'संवैधानिक रूप से मृत' हो जाते हैं. यानी कानूनी तौर पर उनका अस्तित्व खत्म हो जाता है. और हमारे संविधान में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है कि कोई 'संवैधानिक रूप से मृत' नेता देश या राज्य चला सके. उन्होंने संविधान के चार अनुच्छेदों का हवाला दिया।  क्या कहते हैं संविधान के अनुच्छेद 164 और 172 अनुच्छेद 164 कहता है कि मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं और मंत्री राज्यपाल की मर्जी तक पद पर रहते हैं. सरकार तभी तक चलती है जब तक उसे विधानसभा का भरोसा मिला हुआ है. जैसे ही बहुमत जाता है, मुख्यमंत्री को इस्तीफा देना चाहिए. अनुच्छेद 163 कहता है कि राज्यपाल आमतौर पर मंत्रिपरिषद की सलाह पर चलते हैं. लेकिन जब नई सरकार बनानी हो या बहुमत खो जाए तो राज्यपाल अपनी मर्जी से फैसला ले सकते हैं।  अनुच्छेद 172 कहता है कि विधानसभा का कार्यकाल 5 साल का होता है. जब यह खत्म होता है तो नई विधानसभा को सत्ता में आना ज़रूरी हो जाता है. अनुच्छेद 174 राज्यपाल को विधानसभा बुलाने, बंद करने और भंग करने का अधिकार देता है. चुनाव में जब किसी पार्टी को साफ बहुमत मिलता है तो राज्यपाल उस बहुमत वाले नेता को सरकार बनाने का मौका दे सकते हैं।  उन्होंने SR बोमई केस … Read more

पंजाब में धमाकों पर सियासत तेज, CM मान ने भाजपा को ठहराया माहौल बिगाड़ने का जिम्मेदार

चंडीगढ़. मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पंजाब में हाल ही में हुए बम धमाकों को लेकर विपक्ष पर हमला बोल दिया है। श्री आनंदपुर साहिब से शुकराना यात्रा शुरू करने के दौरान मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि ये धमाके भाजपा की चुनावी तैयारी का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा चुनाव से पहले लोगों में डर और तनाव का माहौल बनाकर राजनीतिक फायदा लेने की कोशिश करती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद भाजपा नेताओं ने खुद कहा था कि अब पंजाब की बारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा का तरीका यही रहा है कि जहां चुनाव आते हैं, वहां पहले लोगों को आपस में लड़ाया जाता है और फिर डर का माहौल बनाकर वोट हासिल करने की कोशिश की जाती है। छोटे-मोटे धमाकों से पंजाब डरने वाला नहीं मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि पंजाब के लोग समझदार हैं और छोटे-मोटे धमाकों से डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब पहले भी कठिन और काले दौर देख चुका है, लेकिन यहां के लोगों ने हमेशा शांति और भाईचारे को बनाए रखा है। उन्होंने साफ कहा कि पंजाब एक शांतिप्रिय प्रदेश है और यहां नफरत की राजनीति सफल नहीं होगी। बेदअदबी पर सख्त हुई सरकार मुख्यमंत्री ने हाल ही में लागू किए गए श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार कानून संशोधन 2026 का जिक्र करते हुए कहा कि इस कानून से भाजपा परेशान है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले बेअदबी की घटनाओं के जरिए माहौल खराब करने की कोशिश की जाती थी, ताकि दो समुदायों के बीच तनाव पैदा हो सके। लेकिन अब नए कानून के तहत सख्त सजा का प्रावधान होने के कारण ऐसी घटनाओं पर रोक लगेगी। उन्होंने मोहाली में हुई बेअदबी की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि दोषियों के खिलाफ नए कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार किसी भी दोषी को बख्शने वाली नहीं है और धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ करने वालों पर सख्त कदम उठाए जाएंगे। चुनाव प्रक्रिया को लेकर उठे सवाल पश्चिम बंगाल के चुनावों पर टिप्पणी करते हुए मुख्यमंत्री मान ने कहा कि वहां चुनाव प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने कहा कि ममता बेनर्जी की ओर से यह आरोप लगाया गया है कि भाजपा ने 100 से अधिक सीटों में गड़बड़ी की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनाव आयोग को किसी राजनीतिक दल की तरह व्यवहार नहीं करना चाहिए, बल्कि स्थिति को स्पष्ट करते हुए लोगों के सवालों का जवाब देना चाहिए। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद पंजाब की राजनीति में नया विवाद खड़ा होने की संभावना जताई जा रही है। भाजपा की ओर से भी इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया आने की संभावना है। बीजेपी पर लगाए आरोप वहीं, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा, 'भाजपा एक सांप्रदायिक पार्टी है. बंगाल चुनाव अब खत्म हो चुके हैं और अब वे कह रहे हैं कि पंजाब की बारी है. ये धमाके भाजपा की साजिश हैं. मैं भाजपा से कहना चाहता हूं कि इस तरह की हरकतें बंद करे. जहां-जहां भाजपा चुनाव लड़ना चाहती है, वहां इस तरह की घटनाएं होने लगती हैं.' उन्होंने आगे कहा, 'क्या भाजपा ऐसे धमाकों के जरिए वोट लेना चाहती है? पंजाब में जो हो रहा है, वह भाजपा की तैयारी का हिस्सा है। शिरोमणि अकाली दल ने सीएम के बयान को बताया राष्ट्र विरोधी शिरोमणि अकाली दल ने पंजाब में धमाकों को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. शिरोमणि अकाली दल ने सीएम के बयान को “राष्ट्रविरोधी” करार दिया है. अकाली दल की ओर से कहा गया कि बिना किसी जांच के मुख्यमंत्री इस तरह का आरोप कैसे लगा सकते हैं. पार्टी ने सवाल उठाया कि क्या सीएम मान अपने इस बयान के जरिए राष्ट्रविरोधी तत्वों को फायदा पहुंचाना चाहते हैं? अकाली दल ने कहा कि अगर मुख्यमंत्री के पास किसी तरह की खुफिया या पुख्ता जानकारी है तो उसे सार्वजनिक करें और एजेंसियों के सामने रखें. पार्टी नेताओं ने कहा कि इस तरह के संवेदनशील मामलों में राजनीतिक आरोप लगाने से पंजाब का माहौल खराब हो सकता है. साथ ही अकाली दल ने राज्य सरकार से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। बता दें कि जालंधर के बीएसएफ चौक पर बीएसएफ मुख्यालय पर भीड़भाड़ वाले इलाके में खड़ी एक स्कूटर में ब्लास्ट हुआ था. चश्मदीदों ने बताया कि ब्लास्ट के कुछ ही देर बाद स्कूटर में आग लग गई, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। घटना के कुछ घंटों बाद, मंगलवार देर रात अमृतसर के खासा इलाके में बीएसएफ ठिकानों के पास स्थित एक आर्मी कैंप के बाहर दूसरा धमाका हुआ. शुरुआती शक के आधार पर माना जा रहा है कि मोटरसाइकिल पर सवार किसी हमलावर ने कथित तौर पर उस जगह पर ग्रेनेड फेंका था. यह इलाका अटारी-वाघा अंतरराष्ट्रीय सीमा से करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

CM मोहन यादव का बुरहानपुर को विकास का तोहफा, निमाड़ में इन्वेस्टर्स समिट की घोषणा

बुरहानपुर  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार को बुरहानपुर पहुंचे। यहां उन्होंने परमानंद गोविंदजीवाला ऑडिटोरियम में उद्योगपतियों से संवाद किया और निमाड़ में इन्वेस्टर्स समिट कराने की बड़ी घोषणा की। इसके बाद सीएम भाजपा के 'विजय उत्सव' में शामिल हुए. मुख्यमंत्री सुबह 10:30 बजे रेणुका माता हेलीपैड से सीधे ऑडिटोरियम पहुंचे थे। यहां उद्योगपतियों ने अपनी समस्याओं और मांगों से उन्हें अवगत कराया। डॉ. यादव ने कहा, “हमने निमाड़ में इन्वेस्टर्स समिट कराने का वादा किया था और हम इसे जरूर पूरा करेंगे। व्यापारिक कल्याण बोर्ड बनाने पर भी कैबिनेट में चर्चा हुई है, जो आगे चलकर जिला स्तर तक काम करेगा।” केला किसानों और औद्योगिक क्लस्टर पर फोकस सीएम ने कहा कि इस साल को किसान कल्याण वर्ष के रूप में समर्पित किया गया है, जिसमें बुरहानपुर के केला किसानों का विशेष ध्यान रखा जाएगा। उन्होंने बताया कि बुरहानपुर का व्यापार 400 करोड़ से बढ़कर 800 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। सरकार ने निंबोला औद्योगिक क्लस्टर के लिए 350 करोड़ रुपये की पहली किस्त भी दे दी है। इसके अलावा देश में 25 करोड़ से ज्यादा लोग गरीबी से बाहर आए हैं, क्योंकि सरकार का मकसद लोगों की जिंदगी बदलना है। जीत के जश्न में खाई झालमुड़ी, कार्यकर्ताओं को बांटी उद्योगपतियों से संवाद के बाद मुख्यमंत्री ऑडिटोरियम में ही नीचे आयोजित 'विजय उत्सव' और 'जन विश्वास उत्सव' में शामिल हुए। यह कार्यक्रम बुरहानपुर विधायक अर्चना चिटनिस की ओर से पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी में भाजपा की जीत की खुशी में आयोजित किया गया था। इस दौरान सीएम ने मंच पर झालमुड़ी खाई। उन्होंने अपने हाथों से जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, नेपानगर विधायक मंजू दादू, पूर्व विधायक सुमित्रा देवी कास्डेकर और भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. मनोज माने सहित अन्य कार्यकर्ताओं को भी झालमुड़ी बांटी। कांग्रेस पर राम मंदिर और बंटवारे को लेकर साधा निशाना विजय उत्सव को संबोधित करते हुए सीएम ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, "देशभक्त लोगों के बीच जहर फैलाने और देश के बंटवारे का पाप कांग्रेस ने किया है। वंदे मातरम को बांटने और भगवान राम के मंदिर में ताला लगाने का पाप भी कांग्रेस के ही सिर पर है।" मुख्यमंत्री ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राम मंदिर को हिंदू और मुसलमान, सभी ने आनंद के साथ स्वीकार किया, लेकिन कांग्रेस के नेता आज तक वहां दर्शन करने नहीं गए। 'बंगाल को 75 साल बाद सही मायनों में मिली आजादी' डॉ. यादव ने अरविंद केजरीवाल और ममता बनर्जी पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा, "केजरीवाल जेल जाने के बाद भी पद नहीं छोड़ते। वहीं, इतनी बड़ी हार के बाद भी ममता बनर्जी निर्ममता के साथ पेश आती हैं और पद छोड़ने को तैयार नहीं हैं।" सीएम ने कहा कि बंगाल और असम के चुनाव में मुस्लिम समुदाय ने भी बड़े पैमाने पर भाजपा का साथ दिया है। 17वें मुख्यमंत्री गुरु रबींद्रनाथ टैगोर की जयंती पर शपथ लेने जा रहे हैं। आज 75 साल बाद बंगाल सही मायनों में आजाद हुआ है और अब वह देश के साथ कदम से कदम मिलाकर चलेगा।

गोरखपुर के तारामंडल क्षेत्र में वाटर बॉडी पर 14.33 करोड़ रुपये की लागत से बने टू-लेन ब्रिज का लोकार्पण किया सीएम योगी ने

विकास कार्यों का संरक्षण नागरिकों की भी जिम्मेदारी: मुख्यमंत्री गोरखपुर के तारामंडल क्षेत्र में वाटर बॉडी पर 14.33 करोड़ रुपये की लागत से बने टू-लेन ब्रिज का लोकार्पण किया सीएम योगी ने पहले लोग गोरखपुर का नाम सुनकर डरते थे, 2017 के बाद गोरखपुर में तैयार हुई विकास की विस्तृत श्रृंखला: सीएम योगी गोरखपुर,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि तेजी से आगे बढ़ते देश, प्रदेश के साथ ही गोरखपुर भी तीव्र प्रगति कर रहा है। 2017 के बाद गोरखपुर में विकास की विस्तृत श्रृंखला तैयार हुई है। विकास से बढ़ी सुविधाओं का लाभ लंबे समय तक प्राप्त होता रहे, इसके लिए नागरिकों को भी विकास कार्यों के संरक्षण की जिम्मेदारी उठानी होगी। सीएम योगी मंगलवार दोपहर तारामंडल क्षेत्र में वाटर बॉडी पर बने टू-लेन ब्रिज के लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने फीता काटकर तथा शिलापट्ट का अनावरण कर 14.33 करोड़ रुपये की लागत से बने इस पुल को जनता को समर्पित किया। ब्रिज का निरीक्षण करने के बाद मंचीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने गोरखपुर में विकास से आए बदलाव की चर्चा करते हुए कहा कि 2017 के पहले गोरखपुर की छवि असुरक्षा से जुड़ी थी। लोग माफिया व मच्छर से परेशान थे। गोरखपुर का नाम सुनकर डरते थे। कोई निवेश करने नहीं आता था। यहां नौजवान पहचान का मोहताज था, नौकरी के लिए भटकना पड़ता था, पहचान छिपानी पड़ती थी। पर, अब उसे भटकने या पहचान छिपाने की जरूरत नहीं है। वर्तमान में 50 हजार से अधिक नौजवानों को अकेले गीडा में उद्योगों के माध्यम से नौकरी और रोजगार प्राप्त हुआ है। आज गोरखपुर को देखकर अचंभित व प्रफुल्लित होते हैं लोग मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जो भी गोरखपुर आता है, यहां के बदलाव को देखकर अचंभित और प्रफुल्लित होता है। गोरखपुर में चारों ओर फोर-लेन व सिक्स-लेन कनेक्टिविटी है। यहां एम्स बन गया है। खाद कारखाना और पिपराइच में चीनी मिल फिर चल पड़ी है। उत्कृष्ट शिक्षण संस्थान, आयुष विश्वविद्यालय, चिड़ियाघर, बेहतरीन पर्यटन स्थल रामगढ़ताल, कई होटल्स सहित अनेक सुविधाओं का विस्तार हुआ है। गोरखपुर का विकास सामुदायिकता के भाव से किए गए कार्य का परिणाम है। यह हम सबकी जिम्मेदारी है कि कोई भी विकास कार्यों और सुविधाओं का नुकसान न करने पाए।  तारामंडल क्षेत्र बना समृद्धि का प्रतीक सीएम योगी ने कहा कि करीब बीस वर्ष पूर्व लोग तारामंडल क्षेत्र में रहने का साहस नहीं कर पाते थे। 1998 की बाढ़ के बाद यहां से लोग भाग रहे थे। यहां एकतरफ रामगढ़ताल की गंदगी थी तो दूसरी तरफ बुनियादी सुविधाओं का अभाव। पर, आज विकास के चलते सबसे महंगी जमीन इस क्षेत्र की है। वाटर बॉडी पर टू-लेन ब्रिज बनने से इस समूचे क्षेत्र में इंटरनल कनेक्टिविटी मजबूत हो जाएगी। समृद्धि के प्रतीक के रूप में इस क्षेत्र को सबसे पॉश कॉलोनी माना जा रहा है। इस क्षेत्र में रामगढ़ताल पर्यटन का शानदार केंद्र बना है, चिड़ियाघर इसी क्षेत्र में है। यहां कन्वेंशन सेंटर बन रहा है, तारामंडल का पुनरोद्धार हो रहा है, साइंस पार्क बनाया जा रहा है। साथ ही वाटर बॉडी का भी व्यवस्थित रूप से सौंदर्यीकरण कराया जा रहा है। सीएम ने जीडीए के अफसरों से कहा कि वे वाटर बॉडी को रामगढ़ताल के समकक्ष जोड़ने का प्रयास करें। इस वाटर बॉडी में पानी बहता हुआ दिखाई देना चाहिए, जहां लोग नौकायन का भी आनंद उठा सकें। वाटर बॉडी के किनारे लोग परिवार सहित आ सकें, बच्चे खेल सकें। उन्होंने स्वच्छता और सुंदरता को लेकर मोहल्ला स्तर पर स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का आह्वान किया।   सीएम योगी के नेतृत्व में नजीर पेश कर रहा गोरखपुर: रविकिशन कार्यक्रम में सांसद रविकिशन शुक्ल ने कहा कि सीएम योगी के मार्गदर्शन और नेतृत्व में गोरखपुर नजीर पेश कर रहा है। मुख्यमंत्री ने गोरखपुर को विकसित, स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए करोड़ों रुपये की परियोजनाएं दी हैं। सांसद रविकिशन ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा की शानदार जीत के लिए मुख्यमंत्री को बधाई दी। स्वागत संबोधन गोरखपुर ग्रामीण के विधायक विपिन सिंह ने किया।   कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष साधना सिंह, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, एमएलसी एवं भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र सिंह, विधायक राजेश त्रिपाठी, महेंद्रपाल सिंह, डॉ. विमलेश पासवान, प्रदीप शुक्ल, सरवन निषाद, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी, भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष सहजानंद राय, जिलाध्यक्ष जनार्दन तिवारी, महानगर संयोजक राजेश गुप्ता आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।  श्रमिकों के साथ फोटो खिंचवाई सीएम योगी ने तारामंडल क्षेत्र में वाटर बॉडी पर बने ब्रिज का लोकार्पण करने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जब इस ब्रिज का निरीक्षण कर रहे थे, तभी उनकी नजर किनारे खड़े मजदूरों पर पड़ गई। मुख्यमंत्री ने उन्हें अपने पास बुलाया और श्रम शक्ति का सम्मान करते हुए उनके साथ फोटो खिंचवाई। सीएम का सानिध्य पाकर श्रमिक बेहद प्रफुल्लित नजर आए। ब्रिज के लोकार्पण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने बच्चों से भी मुलाकात की और उन पर प्यार-दुलार लुटाया।  ब्रिज से जुड़ गया दो हिस्सों में बंटा तारामंडल क्षेत्र तारामंडल क्षेत्र के वसुंधरा एंक्लेव द्वितीय व तृतीय के मध्य स्थित वाटर बॉडी के ऊपर टू-लेन ब्रिज बन जाने से दो हिस्सों में बंटा तारामंडल क्षेत्र आपस में जुड़ गया है। गोरखपुर विकास प्राधिकरण ने 112 मीटर लंबे इस ब्रिज पर दोनों तरफ 1.5 मीटर चौड़ा फुटपाथ भी बनाया है। इस पुल के बनने से पहले तक अमरावती निकुंज, वसुंधरा फेज 1, 2 व 3, सिद्धार्थ एंक्लेव, सिद्धार्थ एंक्लेव विस्तार, सिद्धार्थपुरम, सिद्धार्थपुरम विस्तार, सिद्धार्थ विहार, गौतम विहार, बुद्ध विहार, बुद्ध विहार कमर्शियल, बुद्ध विहार पार्ट ए, बी और सी, लेक व्यू, वैशाली, विवेकपुरम, जैमिनी गार्डेनिया तथा आसपास के विस्तृत आवासीय क्षेत्रों के निवासियों को नौका विहार होते हुए दिग्विजयनाथ पार्क, सर्किट हाउस होकर कॉरपोरेट पार्क के सामने से पैडलेगंज और अन्य प्रमुख स्थलों तक पहुंचने के लिए अपेक्षाकृत अधिक लंबा मार्ग तय करना पड़ता था। अब इस टू-लेन ब्रिज के जरिये उनका मार्ग छोटा हो गया है। इस ब्रिज के क्रियाशील हो जाने से नया सवेरा पर अक्सर लगने वाले जाम से भी निजात मिलेगी।

पश्चिम बंगाल के नतीजों पर बोले मुख्यमंत्री, गुंडों को प्रश्रय और सनातन का अपमान करने वालों का यही हश्र होगा

जनता की उपेक्षा करने वालों का सूपड़ा साफ होना तय: सीएम योगी पश्चिम बंगाल के नतीजों पर बोले मुख्यमंत्री, गुंडों को प्रश्रय और सनातन का अपमान करने वालों का यही हश्र होगा गोरखपुर में कल्याण मंडपम सहित 612.32 करोड़ रुपये की लागत वाली 71 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास किया मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में अब पश्चिम बंगाल बनेगा ‘सोनार बांग्ला’: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव परिणाम के लिए वहां की जनता का अभिनंदन करते हुए इसे जन उपेक्षा करने वाले राजनीतिक दलों के लिए बड़ा सबक बताया है। उन्होंने कहा कि जो भी जनता की उपेक्षा करेगा, विकास के पैसे पर डकैती डालेगा, गुंडों को प्रश्रय देगा और सनातन का अपमान करेगा, उसका सूपड़ा साफ होना तय है। पश्चिम बंगाल की जनता ने ऐसा करके दिखा भी दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में अब पश्चिम बंगाल ‘सोनार बांग्ला’ बनेगा।  सीएम योगी मंगलवार दोपहर बाद जंगल बेनी माधव में नवनिर्मित कल्याण मंडपम (कन्वेंशन सेंटर) का उद्घाटन तथा गोरखपुर के विकास से जुड़ी 612.32 करोड़ रुपये की 71 परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास करने के बाद उपस्थित जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि अच्छी सरकार ही अच्छा परिणाम लाती है। अच्छी सरकार न होने पर परिणाम पश्चिम बंगाल जैसा होता है। यूपी व गोरखपुर में वर्ष 2017 के बाद से जारी विकास व जनकल्याण कार्यों का उल्लेख करते हुए सीएम ने कहा कि जब नीयत साफ, नीति स्पष्ट और कुछ करने का दृढ़ संकल्प हो तो सार्थक परिणाम भी आते हैं। आज यही परिणाम गोरखपुर समेत उत्तर प्रदेश में दिख रहे हैं। कांग्रेस, सपा सरकारों के भ्रष्टाचार का स्मारक था बंद खाद कारखाना सीएम योगी ने कहा कि गोरखपुर का बंद खाद कारखाना कांग्रेस, सपा सरकारों के भ्रष्टाचार का स्मारक बना हुआ था। आज यह खाद कारखाना शानदार तरीके से चल रहा है। नकहा से फर्टिलाइजर फैक्टरी व स्पोर्ट्स कॉलेज जाने के लिए ओवरब्रिज बन गया है। बरगदवा से नकहा होते हुए मोहद्दीपुर तक फोर-लेन सड़क बन गई है। महेश्वर में मुख्य मार्ग फोर-लेन होने से अब जाम नहीं लगता। महेसरा से लखनऊ जाने के लिए जल्द ही माधोपुर, हाबर्ट बंधा होते हुए राजघाट तक के लिए फोर-लेन कनेक्टिविटी मिल जाएगी। तब महेसरा से राजघाट जाने में महज पांच मिनट लगेंगे, फोर-लेन बनने से तटबंध भी सुदृढ़ होगा। पहले गोरखपुर से लखनऊ जाने में 8-9 घंटे लगते थे, आज यह दूरी तीन-साढ़े तीन घंटे में पूरी हो जाती है। वाराणसी जाने में लगने वाला समय भी घटकर ढाई घंटे हो गया है। जंगल कौड़िया से जगदीशपुर तक बन रहे फोर-लेन बाईपास से महेसरा होकर कुशीनगर जाने में सिर्फ आधा घंटा लगेगा।  तेज विकास से ही आएगी समृद्धि सीएम योगी ने कहा कि गति जितनी तेज होगी, विकास भी उतना ही तेज होगा। विकास जितना तेज होगा, उतनी ही तेजी से व्यक्ति, समाज और राष्ट्र की समृद्धि होगी। इसी समृद्धि के लिए गोरखपुर का विस्तार किया जा रहा है और जंगल कौड़िया, जगदीशपुर बाईपास रोड इस विस्तार का आधार बनेगी। एम्स, बीआरडी की सुदृढ़ता, आयुष विश्वविद्यालय और अनेक नई सुविधाओं के विकास से लोगों को राहत मिली है। युवाओं के लिए रोजगार, महिलाओं की आत्मनिर्भरता, कारोबार में वृद्धि हो रही है। जब नए निवेश आएंगे तो रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। अब गोरखपुर की पहचान सुरक्षा, स्वच्छता, समृद्धि व मजबूत सड़कों से मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 के बाद उनकी सरकार ने गोरखपुर की छवि को बदला। पहले गोरखपुर की पहचान मच्छर व माफिया से थी। अब माफिया और मच्छर, दोनों गायब हैं। अब गोरखपुर की पहचान सुरक्षा, स्वच्छता, समृद्धि और मजबूत सड़कों से है। अब यहां का नौजवान पहचान का मोहताज नहीं, बल्कि सीना तानकर बताता है कि वह गोरखपुर का है। मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि जिनकी कार्यप्रणाली भ्रष्ट थी, जो माफिया पालते थे, अराजकता फैलाते थे, उन्होंने प्रदेश की पहचान को शक के दायरे में ला दिया था। उनकी सरकार ने सुरक्षा का माहौल और समृद्धि देकर राज्य को नई मजबूत पहचान दिलाई है।  कल्याण मंडपम और अन्य विकास परियोजनाओं की खूबी बताई सीएम ने मुख्यमंत्री ने कल्याण मंडपम और अन्य विकास परियोजनाओं की खूबी भी बताई। उन्होंने कहा कि कल्याण मंडपम अल्प व मध्यम आयवर्ग के लोगों के सार्वजनिक कार्यक्रमों को भव्य व यादगार बनाने का माध्यम बनेगा। शहर में कुल 9 कल्याण मंडपम या तो बन गए हैं या निर्माणाधीन हैं। इसे बनाने के लिए उन्होंने अपनी विधायक निधि से राशि दी है। आज जिस एकीकृत मंडलीय कार्यालय का शिलान्यास हुआ है, वहां सभी अधिकारी एक ही छत के नीचे जनता के लिए उपलब्ध रहेंगे। हर तबके की आवासीय सुविधा के लिए कुश्मी एंक्लेव का शिलान्यास हुआ है। इन सभी परियोजनाओं से लोगों का जीवन आसान होगा।  बिना भेदभाव विकास व कल्याण ही पीएम-सीएम का लक्ष्य: रविकिशन समारोह में सांसद रविकिशन शुक्ल ने कहा कि बिना भेदभाव सबको विकास और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना ही पीएम मोदी व सीएम योगी का लक्ष्य है। पीएम मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में 2027 में यूपी विधानसभा चुनाव में भाजपा की ऐतिहासिक जीत होगी। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री का स्वागत करते हुए महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने कहा कि विकास और जन कल्याण ही सीएम योगी का ध्येय है। उनके नेतृत्व में गोरखपुर सहित पूरे प्रदेश में विकास की गंगा बह रही है। इस अवसर पर एमएलसी एवं भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र सिंह, विधायक विपिन सिंह, महेंद्रपाल सिंह, डॉ. विमलेश पासवान, प्रदीप शुक्ल, सरवन निषाद, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी, जिला पंचायत अध्यक्ष साधना सिंह, भाजपा के महानगर संयोजक राजेश गुप्ता, नगर निगम के उप सभापति पवन त्रिपाठी, स्थानीय पार्षद संतोष चौहान आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।  फीता काटकर किया कल्याण मंडपम का लोकार्पण मंचीय कार्यक्रम से पहले मुख्यमंत्री ने फीता काटकर कल्याण मंडपम का औपचारिक उद्घाटन किया। इसके बाद उन्होंने मंडपम का भ्रमण कर इंफ्रास्ट्रक्चर व सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने कल्याण मंडपम परिसर में पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश दिया।  मुख्यमंत्री ने जीडीए की इन प्रमुख परियोजनाओं का किया शिलान्यास -एकीकृत मंडलीय कार्यालय का निर्माण, लागत 269.63 करोड़ रुपये। -लच्छीपुर में कुश्मी एवेन्यू अपार्टमेंट का निर्माण, 172.86 करोड़ … Read more

BCCI ने IPL 2026 फाइनल अहमदाबाद शिफ्ट किया, बेंगलुरु को लगा झटका, टिकट विवाद बना कारण

अहमदाबाद  IPL final to be played in Ahemdabad: इंड‍ियन प्रीम‍ियर लीग (IPL) 2026 के प्लेऑफ वेन्यू को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है, जिसने फैन्स के बीच हलचल मचा दी है. सूत्रों के मुताबिक इस बार टूर्नामेंट का फाइनल अहमदाबाद में होगा. वहीं, क्वालिफायर-1 धर्मशाला में खेला जाएगा, जबकि एलिमिनेटर और क्वालिफायर-2 के मुकाबले चंडीगढ़ में होंगे।  गौर करने वाली बात यह है कि IPL के नियमों के अनुसार फाइनल मुकाबला डिफेंडिंग चैम्प‍ियन के होम ग्राउंड पर होना चाहिए था. ऐसे में बेंगलुरु इस रेस में सबसे आगे था, लेकिन हाल ही में हुए टिकट विवाद ने पूरा समीकरण बदल दिया।  सूत्रों की मानें तो टिकटों की बिक्री और उससे जुड़े मैनेजमेंट इश्यूज के कारण BCCI ने वेन्यू बदलने का फैसला लिया. यही वजह है कि अब फाइनल को अहमदाबाद शिफ्ट करने की तैयारी की जा रही है।  हालांकि अभी तक भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है. फैन्स और फ्रेंचाइजियों को अब बोर्ड के फाइनल ऐलान का इंतजार है. अगर यह प्लान फाइनल होता है, तो IPL 2026 के प्लेऑफ अलग-अलग शहरों में खेले जाएंगे, जिससे टूर्नामेंट का रोमांच और भी बढ़ सकता है।  हालांकि प्लेऑफ और फाइनल मुकाबले की तारीखों की घोषणा अभी नहीं हुई है. इसकी तारीखों का ऐलान भी जल्द होने की उम्मीद है. ध्यान रहे आईपीएल 2026 की शुरुआत 28 मार्च को हुई थी. अंत‍िम लीग मुकाबला यानी 70वां मैच 24 मई को खेला जाएगा. बाकी बचे प्लेऑफ मुकाबले और फाइनल मुकाबला इसके बाद होगा. फाइनल का द‍िन 31 मई तय है।  IPL 2026 क्वालीफायर और एलिमिनेटर मैच के बदले वेन्यू   बता दें कि सिर्फ आईपीएल 2026 का फाइनल ही नहीं, बल्कि क्वालीफायर-1 और 2, एलिमिनेटर मैचों के वेन्यू में भी बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। IPL 2026 Qualifier 1: अब धर्मशाला के खूबसूरत मैदान पर खेला जाएगा। Eliminator & Qualifier 2: चंडीगढ़ के मुल्लांपुर स्टेडियम में इन दो अहम मुकाबलों की भिड़ंत होगी। फाइनल मैच: अहमदाबाद के मैदान पर ही होगा, जहां से विजेता टीम मिलेगी। IPL 2026 Final Date: प्लेऑफ और फाइनल मैच कब? आईपीएल 2026 क्वालीफायर-1: 26 मई 2026, मंगलवार, धर्मशाला आईपीएल 2026 का एलिमिनेटर 2026: 27 मई 2026, बुधवार, चंडीगढ़ आईपीएल 2026 का क्वालीफायर-2: 29 मई 2026, शुक्रवार, चंडीगढ़ आईपीएल 2026 फाइनल मैच: 31 मई 2026, रविवार, अहमदाबाद क्या है MLA टिकट विवाद? आईपीएल 2026 का फाइनल मैच का वेन्यू बदलने की वजह MLA टिकट विवाद बताई जा रही है। ये विवाद सीजन के ओपनिंग मैच से पहले शुरू हुआ था कि हर MLA को कम से कम 5 टिकट मिलनी चाहिए, यह कहते हुए कि जनप्रतिनिधि VIP होते हैं और उन्हें टिकट के लिए लाइन में नहीं लगना चाहिए।  इसके बाद कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा कि MLA और MP को आरसीबी मैचों के लिए 3-3 टिकट दिए जाएंगे। इस फैसले के बाद टिकट के दुरुपयोग के आरोप लगने लगे। हालांकि, कर्नाटक के गृह मंत्री जी.परमेश्वर ने इन आरोपों को खारिज किया और कहा कि टिकट ऑनलाइन बुक होते हैं और उनका गलत इस्तेमाल नहीं होता।  उन्होंने ये भी साफ किया कि ये टिकट नॉन-ट्रांसफरेबल हैं और आमतौर पर विधायक या उनके परिवार के सदस्य ही मैच देखने आते हैं। अब इस विवाद की वजह से डिफेंडिंग चैंपियन आरसीबी के होम ग्राउंड में आईपीएल 2026 का फाइनल मैच नहीं खेलने का फैसला लिया है। सीजन का समापन 31 मई को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में ग्रैंड फाइनल के साथ होगा. यह दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम है, कुछ ऑपरेशनल और लॉजिस्टिक कारणों की वजह से, TATA IPL 2026 प्लेऑफ्स इस बार विशेष रूप से तीन अलग-अलग वेन्यू पर आयोजित किए जाएंगे. बेंगलुरु को पहले फाइनल की मेजबानी के लिए चुना गया था. लेकिन स्थानीय एसोसिएशन और अधिकारियों की कुछ आवश्यकताओं के कारण फाइनल का वेन्यू बदल दिया गया।  प्लेऑफ्स के शेड्यूल के मुताबिक, मंगलवार 26 मई को धर्मशाला के एचपीसीए क्रिकेट स्टेडियम में पहला क्वालीफायर खेला जाएगा। इसको जीतने वाली टीम सीधे फाइनल में पहुंचेगी और हारने वाली टीम क्वालीफायर 2 में जाएगी। वहीं, अगले दिन यानी बुधवार 27 मई को न्यू चंडीगढ़ के न्यू इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में एलिमिनेटर मुकाबला खेला जाएगा। इस मैच को जीतने वाली टीम क्वालीफायर 2 में क्वालीफायर 1 को हारने वाली टीम से भिड़ेगी, जबकि एलिमिनेटर हारने वाली टीम टूर्नामेंट से बाहर हो जाएगी। आईपीएल 2026 का दूसरा क्वालीफायर शुक्रवार 29 मई को न्यू चंडीगढ़ में ही आयोजित होगा। वहीं, आईपीएल 2026 का फाइनल मुकाबला अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में रविवार 31 मई को खेला जाएगा। क्वालीफायर 1 की विजेता और क्वालीफायर 2 की विजेता टीम की टक्कर फाइनल में होगी। आपको बता दें, क्वालीफायर 1 उन टीमों के बीच खेला जाता है, जो लीग फेज के बाद पॉइंट्स टेबल में नंबर एक और नंबर दो पर रहती हैं, जबकि एलिमिनेटर में नंबर 3 और नंबर 4 की टीम भिड़ती हैं। इस तरह पॉइंट्स टेबल में टॉप 2 में रहने पर आपको दो मौके प्लेऑफ्स में पहुंचने के मिलते हैं। इसलिए टॉप 4 से ज्यादा टॉप 2 के लिए भी लड़ाई होती है। IPL 2026 प्लेऑफ्स का शेड्यूल क्वालीफायर 1 – मंगलवार 26 मई – HPCA स्टेडियम, धर्मशाला एलिमिनेटर – बुधवार 27 मई – न्यू इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम, न्यू चंडीगढ़ क्वालीफायर 2 – शुक्रवार 29 मई – न्यू इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम, न्यू चंडीगढ़ फाइनल – रविवार 31 मई – नरेंद्र मोदी स्टेडियम, अहमदाबाद आमतौर पर आईपीएल के प्लेऑफ्स के मुकाबले दो शहरों में खेले जाते हैं, लेकिन बीसीसीआई ने इस बार स्पेशल केस का हवाला देकर तीन शहरों में इसका आयोजन करने का फैसला किया है। अभी तक क्वालीफायर 1 और एलिमिनेटर मैच एक मैदान पर, जबकि क्वालीफायर 2 और फाइनल दूसरे मैदान पर खेला जाता था, लेकिन इस बार क्वालीफायर 1 अलग, एलिमिनेटर और क्वालीफायर 2 अलग और फाइनल अलग मैदान पर खेला जाएगा। यहां तक कि बोर्ड ने यह भी जानकारी दी है कि बेंगलुरु से मेजबानी क्यों छिनी? बीसीसीआई ने अपनी मीडिया रिलीज में बताया, "कुछ ऑपरेशनल और लॉजिस्टिक वजहों से, IPL 2026 प्लेऑफ्स के मुकाबले इस सीजन में तीन जगहों पर एक स्पेशल केस के तौर पर कराए जाएंगे। बेंगलुरु को शुरू में फाइनल होस्ट … Read more

खेल और पढ़ाई साथ-साथ, नए स्पोर्ट्स कॉलेज में मिलेगा बेहतरीन प्रशिक्षण

योगी सरकार ने अधूरे सपने को किया साकार, यूपी को मिले दो नए स्पोर्ट्स कॉलेज सहारनपुर-फतेहपुर स्पोर्ट्स कॉलेज तैयार, 2026-27 सत्र से शुरू होगी पढ़ाई वर्षों से लटकी थी खिलाड़ियों के भविष्य से जुड़ी परियोजनाएं, योगी सरकार का बड़ा कदम दूरदराज के खिलाड़ियों को फायदा, अब अपने जिले में ही मिलेगा प्रशिक्षण खेल और पढ़ाई साथ-साथ, नए स्पोर्ट्स कॉलेज में मिलेगा बेहतरीन प्रशिक्षण लखनऊ  उत्तर प्रदेश में खेलों को बढ़ावा देने और खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने दो नए स्पोर्ट्स कॉलेजों को शुरू करने का फैसला लिया है। सहारनपुर और फतेहपुर में बने स्पोर्ट्स कॉलेज का शैक्षिक सत्र 2026-27 से संचालन शुरू हो जाएगा। योगी सरकार के इस फैसले से प्रदेश के युवाओं को अपने ही क्षेत्र में बेहतर खेल सुविधाएं और प्रशिक्षण उपलब्ध हो सकेगा। वर्षों से लंबित परियोजनाओं को मिली नई जिंदगी दरअसल यह दोनों परियोजनाएं लंबे समय से लंबित थी। फतेहपुर स्पोर्ट्स कॉलेज को जनवरी 2011 में स्वीकृति मिली थी और नवंबर 2011 में निर्माण कार्य शुरू हो गया था। इसे जुलाई 2018 तक पूरा किया जाना था, लेकिन कार्य समय पर पूरा नहीं हो सका। इसी तरह सहारनपुर स्पोर्ट्स कॉलेज का निर्माण कार्य भी फरवरी 2011 में शुरू होना था और फरवरी 2013 तक पूरा कार्य पूरा करने की मूल तारीख थी, लेकिन विभिन्न कारणों से काम आगे नहीं बढ़ पाया था। योगी सरकार ने इन अधूरी परियोजनाओं को प्राथमिकता देते हुए निर्माण कार्य को पूरा कराया है। साथ ही अब दोनों कॉलेजों को नए सत्र से शुरू करने की तैयारी भी पूरी कर ली गई है।  पांच स्पोर्ट्स कॉलेजों वाला राज्य बनेगा यूपी इस तरह योगी सरकार खेल ढांचे को मजबूत करने के साथ-साथ अधूरी योजनाओं को भी जमीन पर उतारने पर जोर दे रही है। वहीं इन दो नए स्पोर्ट्स कॉलेजों के शुरू होने के बाद उत्तर प्रदेश में संचालित स्पोर्ट्स कॉलेजों की संख्या बढ़कर पांच हो जाएगी। अभी तक लखनऊ स्थित गुरु गोविंद सिंह स्पोर्ट्स कॉलेज, गोरखपुर का वीर बहादुर सिंह स्पोर्ट्स कॉलेज और इटावा (सैफई) का मेजर ध्यान चंद स्पोर्ट्स कॉलेज ही संचालित थे। इसके अलावा बलिया में एक और स्पोर्ट्स कॉलेज का निर्माण कार्य जारी है। कक्षा 9 से शुरू होगा एडमिशन नए कॉलेजों के शुरू होने से प्रदेश के दूर-दराज इलाकों के खिलाड़ियों को अब राजधानी या अन्य बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। इससे समय और खर्च दोनों की बचत होगी और अधिक संख्या में प्रतिभाशाली खिलाड़ी खेल शिक्षा से जुड़ सकेंगे। फतेहपुर और सहारनपुर दोनों स्पोर्ट्स कॉलेजों में कक्षा 9 से प्रवेश प्रक्रिया शुरू होगी। फतेहपुर में एथलेटिक्स, हॉकी, हैंडबॉल और कुश्ती जैसे खेल संचालित किए जाएंगे। यहां कुल 80 सीटों पर प्रवेश होगा। जिसमें एथलेटिक्स रनर बालक के लिए 12, एथलेटिक्स जम्पर बालक के लिए 2, थ्रोवर बालक के लिए 4, हॉकी खिलाड़ी बालक के लिए 26, गोलकीपर बालक के लिए 4, कुश्ती बालक के लिए 10 और हैंडबॉल बालक के लिए 22 सीटें निर्धारित की गई हैं। खेलों की विविधता और सीटों का विस्तार वहीं सहारनपुर स्पोर्ट्स कॉलेज में भी कुल 80 सीटों पर एडमिशन होंगे। यहां एथलेटिक्स रनर बालक के लिए 8, एथलेटिक्स जम्पर बालक के लिए 6, थ्रोवर बालक के लिए 6, हॉकी खिलाड़ी बालक के लिए 21, हॉकी गोलकीपर बालक के लिए 4, जूडो बालक के लिए 10, बॉक्सिंग बालक के लिए 15 और भारोत्तोलन बालक के लिए 10 सीटें तय की गई हैं। भारोत्तोलन अभी तक किसी भी स्पोर्ट्स कॉलेज में नहीं था। सहारनपुर स्पोर्ट्स कॉलेज से पहली बार शुरू हो रहा है। इन कॉलेजों में प्रवेश के लिए छात्र का उत्तर प्रदेश का निवासी होना अनिवार्य है। चयन प्रक्रिया के माध्यम से योग्य खिलाड़ियों को प्रवेश दिया जाएगा, जिससे प्रतिभा के आधार पर खिलाड़ियों का चयन सुनिश्चित हो सके। प्रत्येक मंडल में स्पोर्ट्स कॉलेज और एक्सीलेंस सेंटर खोलने का लक्ष्यः खेल सचिव उत्तर प्रदेश खेल विभाग के सचिव सुहास एल.वाई. ने बताया कि मुख्यमंत्री जी का प्रत्येक मंडल में स्पोर्ट्स कॉलेज और एक्सीलेंस सेंटर खोलने का लक्ष्य है। स्टेट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की तरह जगह-जगह विभिन्न खेलो को लेकर वहां पर विशेषज्ञ प्रशिक्षण केंद्र खोला जाएगा। जिसमें बच्चों के रहने के साथ ही पढ़ाई की सुविधा भी रहेगी। प्रबंध समिति स्पोर्ट्स कॉलेज के सचिव व लखनऊ स्पोर्ट्स कॉलेज के प्रधानाचार्य अतुल सिन्हा ने कहा कि कुशल संचालन के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा। साथ ही खिलाड़ियों को कोई व्यवधान ना उत्पन्न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाएगा।  खेलों को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम स्पोर्ट्स कॉलेज ऐसे छात्रों के लिए बेहतरीन अवसर प्रदान करते हैं, जो खेल में अपना करियर बनाना चाहते हैं। यहां पढ़ाई और खेल दोनों पर समान रूप से ध्यान दिया जाता है। प्रोफेशनल कोचिंग, आधुनिक सुविधाएं और अनुशासित वातावरण खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के लिए तैयार करने में मदद करता है। सहारनपुर और फतेहपुर में स्पोर्ट्स कॉलेजों की शुरुआत उत्तर प्रदेश में खेल संस्कृति को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। इससे न केवल प्रदेश में खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि आने वाले समय में देश को बेहतर खिलाड़ी भी मिल सकेंगे।

अमेरिकी प्लेन का कतर में रहस्यमयी गायब होना, होर्मुज स्ट्रेट में चेतावनी जारी

वाशिंगटन मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच अमेरिकी वायुसेना का KC-135 स्ट्रैटो टैंकर अचानक सुर्खियों में आ गया है. हवा में फ्यूल भरने की क्षमता के कारण फ्लाइंग गैस स्टेशन कहे जाने वाला ये विमान उड़ान के दौरान इमरजेंसी सिग्नल भेजने के बाद रडार से गायब हो गया. इसके बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं।  फ्लाइट-ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, बोइंग KC-135 ने कतर के पास 7700 स्क्वॉक कोड टेलिकास्ट किया यह एक अंतरराष्ट्रीय इमरजेंसी संकेत होता है. इसका इस्तेमाल तब किया जाता है, जब विमान किसी गंभीर स्थिति का सामना कर रहा हो. इसके कुछ ही समय बाद विमान रडार से गायब हो गया. माना जा रहा है कि उस समय यह किसी सैन्य बेस की ओर बढ़ रहा था।  आखिरी लोकेशन और संभावित वजहें रिपोर्ट के मुताबिक विमान ने अपनी ऊंचाई कम की और कतर की दिशा में मुड़ने के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के ऊपर सिग्नल खो दिया. यह भी कहा जा रहा है कि विमान उस समय खाड़ी के ऊपर एयर-टू-एयर रीफ्यूलिंग मिशन पर था. 7700 कोड कई वजहों से ट्रिगर हो सकता है, जैसे तकनीकी खराबी, आग लगना, मेडिकल इमरजेंसी या किसी बाहरी खतरे का सामना किया होगा।  रिपोर्ट्स में बताया गया है कि ट्रांसपॉन्डर कोड 7700 जारी करने के बाद विमान नीचे उतर रहा था और अपना कोर्स बदलकर कतर की ओर मुड़ रहा था. तभी अचानक रडार से लापता हो गया. ये घटना खाड़ी में हवा में ईंधन भरने के अभियान के दौरान विमान द्वारा रास्ता बदलने और ऊंचाई कम करने के बाद हुई. हालांकि, अमेरिकी एयरफोर्स ने इस घटना को लेकर आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।  शुरुआत में यह स्पष्ट नहीं था कि विमान में कितने चालक दल के सदस्य सवार थे. अमेरिकी वायु सेना के आंकड़ों के अनुसार, इस विमान को आमतौर पर एक ही चालक दल का सदस्य संचालित करता है और इसमें एक कार्गो डेक होता है, जिसमें यात्री भी बैठ सकते हैं. ट्रांसपॉन्डर सिग्नल गायब होने से दुर्घटना की आशंका बढ़ गई है. हालांकि, अभी तक मलबे, डिस्ट्रेस कॉल, बचाव अभियान या समुद्री अलर्ट की कोई पुष्टि नहीं हुई है।  बता दें कि 28 फरवरी से शुरू हुए पश्चिम एशिया संघर्ष के बाद से ईरान ने इस क्षेत्र में लक्षित हमलों में कई अमेरिकी सैन्य विमानों को मार गिराने का दावा किया था।  एक घंटे बाद पूरी तरह गायब गल्फ न्यूज़ के अनुसार, इमरजेंसी कोड दिखने के लगभग एक घंटे बाद विमान का ट्रांसपोंडर सिग्नल पूरी तरह बंद हो गया. हालांकि, सिर्फ सिग्नल खो जाना किसी दुर्घटना की पुष्टि नहीं करता, लेकिन इमरजेंसी अलर्ट के बाद ऐसा होना चिंता बढ़ाता है. अब तक किसी मलबे, संकट संदेश (distress call), रेस्क्यू ऑपरेशन या समुद्री अलर्ट की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. विमान में कितने क्रू मेंबर थे, यह भी स्पष्ट नहीं है, हालांकि आमतौर पर KC-135 सीमित क्रू के साथ ऑपरेट किया जाता है।  क्यों अहम है यह मामला? स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ग्लोबल ऑयल सप्लाई का प्रमुख मार्ग है. इस इलाके में किसी भी सैन्य या तकनीकी घटना का असर सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पड़ सकता है. ऐसे में KC-135 का अचानक गायब होना सुरक्षा और रणनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।