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अखबार में प्रकाशित पेयजल संकट पर मुख्यमंत्री साय की त्वरित प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अखबार में प्रकाशित पेयजल समस्या की खबर पर लिया त्वरित संज्ञान सुबह अखबार पढ़ते ही कलेक्टर सरगुजा को फोन कर दिए समाधान के निर्देश मैनपाट के सपनादर स्थित चेराजोबला बस्ती में पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सरगुजा जिले के मैनपाट क्षेत्र की चेराजोबला बस्ती में पेयजल समस्या से संबंधित समाचार पर त्वरित संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन को तत्काल आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने आज सुबह समाचार पत्रों का अवलोकन करते समय “नाला और ढोढ़ी के दूषित जल पर आज भी निर्भर हैं वनवासी” शीर्षक से प्रकाशित खबर को गंभीरता से लिया और सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत को फोन कर प्रभावित बस्ती में शीघ्र पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को मूलभूत सुविधाओं से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि चेराजोबला बस्ती में पेयजल संकट की स्थिति का तत्काल स्थलीय निरीक्षण कर आवश्यकतानुसार हैंडपंप खनन, वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था और दीर्घकालिक समाधान की दिशा में प्राथमिकता के साथ कार्रवाई की जाए। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री साय ने यह भी कहा कि विशेष पिछड़ी जनजातियों के निवास वाले क्षेत्रों में पेयजल, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं की नियमित समीक्षा की जाए। उन्होंने कहा कि शासन का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उनका वास्तविक लाभ ज़मीन पर सुनिश्चित करना है।

जालंधर-अमृतसर धमाकों के पीछे खालिस्तानी-ISI नेटवर्क, सुरक्षा एजेंसियां जांच में जुटी

 जालंधर/अमृतसर पंजाब में एक बार फिर सुरक्षा हालात को लेकर गंभीर चिंता सामने आ रही है। पाकिस्तान समर्थित खुफिया एजेंसी, खालिस्तानी आतंकी नेटवर्क और गैंगस्टर-आतंकी गठजोड़ के सक्रिय होने के संकेत मिल रहे हैं। हाल के घटनाक्रम और सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई से साफ है कि राज्य को अस्थिर करने की कोशिशें सुनियोजित तरीके से की जा रही हैं। बीते महीनों में कई घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती दी है। अप्रैल 2026 में पटियाला-राजपुरा रेल ट्रैक पर कम तीव्रता का आईईडी विस्फोट हुआ जिसे बड़े हमले की साजिश के तौर पर देखा गया।  चंडीगढ़ के सेक्टर-37 स्थित भाजपा कार्यालय के बाहर ग्रेनेड हमला हुआ जिससे राजनीतिक और सुरक्षा हलकों में हलचल मच गई। जनवरी 2026 में गणतंत्र दिवस से पहले सिरहिंद रेलवे ट्रैक पर विस्फोट किया गया जबकि नवंबर 2025 में मोगा के सीआईए कार्यालय पर ग्रेनेड फेंका गया था।  मार्च 2025 में अमृतसर के खंदवाला इलाके में धार्मिक स्थल के बाहर विस्फोट की घटना भी सामने आई जिसकी जांच एनआईए ने की थी। इन घटनाओं के बीच सुरक्षा एजेंसियों ने कई बड़ी कामयाबियां भी हासिल की हैं। अप्रैल 2026 में तरनतारन से भारी मात्रा में आरडीएक्स और आधुनिक हथियार बरामद कर एक बड़े हमले को टाल दिया गया। जनवरी 2026 में होशियारपुर में बीकेआई से जुड़े मॉड्यूल से ढाई किलो आरडीएक्स, पिस्तौल और कारतूस बरामद हुए। गुरदासपुर, नवांशहर और अमृतसर में भी हथियारों की बरामदगी ने संकेत दिया कि आतंकी नेटवर्क सक्रिय हैं। सीसीटीवी गैंग की गिरफ्तारी पंजाब और देश के अन्य इलाकों में बीते कुछ समय से ऐसी गतिविधियां नोटिस की जा रही है जिससे खुफिया एजेंसियों के काम खड़े हो गए हैं. बीते कुछ समय में देश के अलग-अलग इलाकों में सीसीटीवी गैंग की गिरफ्तारी भी इसी से जुड़ी घटना मानी जा रही है. ये गैंग हाईवे टोल प्लाजा और अन्य इलाकों संवेदनशील इलाकों में सीसीटीवी इंस्टॉल कर उसका एक्सेस पाकिस्तान में बैठे आकाओं को देते थे. इन सभी गतिविधियों के पीछे आतंकी लांडा और रिंदा का हाथ माना जा रहा है।  आतंकी लखबीर सिंह लांडा आतंकी घोषित बब्बर खालसा इंटरनेशनल से जुड़ा खालिस्तानी आतंकी लखबीर सिंह लांडा को भारत सरकार ने यूएपीए के तहत आतंकवादी घोषित कर दिया है. कनाडा में बैठे लांडा पर मोहाली इंटेलिजेंस हेडक्वार्टर पर RPG हमले का मास्टरमाइंड होने, पाकिस्तान से IED और हथियारों की तस्करी, टारगेट किलिंग और जबरन वसूली के आरोप हैं. वह हरदीप सिंह निज्जर और गुरपतवंत सिंह पन्नून जैसे आतंकियों से जुड़ा था. एनआईए ने उस पर इनाम रखा है. लांडा पंजाब के तरन तारन का रहने वाला है और कनाडा के एडमंटन में छिपा बैठा ISI के इशारे पर मॉड्यूल चला रहा है।  हरविंदर सिंह उर्फ रिंदा गैंग फिर सक्रिय दूसरी ओर, पाकिस्तान में बैठे खालिस्तानी आतंकी हरविंदर सिंह उर्फ रिंदा के गैंग को फिर सक्रिय करने की कोशिशें सामने आई हैं. महाराष्ट्र के नांदेड़ पुलिस ने रिंदा के पिता चरण सिंह संधू और भाई नवजोत सिंह संधू को एक्सटॉर्शन के मामले में गिरफ्तार किया है. पुलिस को शक है कि रिंदा अभी भी अपने परिवार के जरिए नांदेड़ और आसपास के इलाकों में धमकियां देकर वसूली करवा रहा है. रिंदा पर 2021 में पंजाब पुलिस पर हमले समेत कई मामलों में 10 लाख का इनाम है. जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या रिंदा ISI के साथ मिलकर अपना पुराना गैंग भारत में फिर से खड़ा कर रहा है।  इधर, लखनऊ में यूपी एटीएस की एक बड़ी कामयाबी भी इसी सिलसिले में देखी गई. संदिग्ध आतंकी तुषार चौहान उर्फ हिज्बुल्लाह अली खान और समीर खान की कस्टडी रिमांड खत्म होने वाली है. एटीएस ने नोएडा से दोनों को पिस्टल, रकम और अन्य सुराग मिलने की बात कही है. दोनों पाकिस्तानी हैंडलर्स (ISI से जुड़े मेजर हामिद, इकबाल आदि) के इशारे पर ग्रेनेड अटैक और टारगेट किलिंग की तैयारी कर रहे थे. सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को रैडिकलाइज करने की साजिश भी सामने आई।  अंतरराष्ट्रीय सीमा से ड्रोन के जरिए हथियारों और विस्फोटकों की तस्करी बड़ी चुनौती बन चुकी है। अमृतसर और फिरोजपुर सेक्टर में कई बार पाकिस्तान से ड्रोन के माध्यम से हथियार गिराए जाने के मामले सामने आए हैं। जांच में पता चला है कि इन गतिविधियों के पीछे पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स और विदेशों में सक्रिय खालिस्तानी आतंकी शामिल हैं। इनमें रंजीत नीटा और लखबीर लंडा जैसे नाम प्रमुख हैं। इस पूरे परिदृश्य में गैंगस्टर-आतंकी गठजोड़ नई चुनौती बनकर उभरा है। वर्ष 2025 में एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स ने 400 से अधिक गैंगस्टर मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया जिससे स्पष्ट हुआ कि संगठित अपराध और आतंकवाद के बीच तालमेल बढ़ रहा है। यही नेटवर्क स्थानीय स्तर पर हमलों को अंजाम देने और लॉजिस्टिक सपोर्ट देने में भूमिका निभा रहा है।   भाजपा नेता मनोरंजन कालिया के घर पर ग्रेनेड हमला और पुलिस थानों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं दर्शाती हैं कि आतंकी संगठनों का मकसद पंजाब के शांत माहौल को बिगाड़ना और डर फैलाना है। हालांकि पंजाब पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों की सतर्कता से कई साजिशें नाकाम हुई हैं।इसके बावजूद सीमा पार से मिल रहे समर्थन और स्थानीय नेटवर्क के कारण चुनौती बनी हुई है। पंजाब फिलहाल संवेदनशील दौर से गुजर रहा है जहां सुरक्षा तंत्र लगातार सतर्क है। 

लेनिन की मूर्ति हुई क्षतिग्रस्त, TMC कार्यालय पर कांग्रेस का अधिकार—बंगाल में बढ़ा उबाल

कलकत्ता पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के जियागंज इलाके में लेनिन की मूर्ति तोड़े जाने की घटना सामने आई है। जानकारी के अनुसार, कुछ लोगों ने मौके पर पहुंचकर मूर्ति को नुकसान पहुंचाया। इस दौरान आरोपियों ने नारेबाजी भी की। पुलिस के अनुसार आरोपियों की अभी पहचान नहीं हो सकती है। सीसीटीवी फुटेज की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस घटना के बाद से इलाके में तनाव का माहौल है। रात के अंधेरे में तोड़फोड़ यह घटना श्रीपत सिंह कॉलेज के सामने स्थित जियागंज-अजीमगंज नगर पालिका के वार्ड नंबर 2 में मंगलवार रात करीब 10:30 बजे हुई। इस घटना का एक वीडियो क्लिप सामने आया है, जिसमें कुछ लोग मूर्ति को नुकसान पहुंचाते हुए नजर आ रहे हैं, वीडियो में लोग जय श्री राम के नारे लगाते हुए भी दिख रहे हैं। हालांकि अभी आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की गई है। जानकारी के अनुसार, जब पुलिस को घटना की सूचना मिली तो मौके पर जियागंज थाने की पुलिस टीम मौके पर पहुंची, लेकिन उससे पहले ही घटना में शामिल लोग वहां से फरार हो गए। पुलिस ने बताया कि घटना में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है। इसके लिए आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की जा रही है। दोषियों की पहचान होने के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने आम लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। तोड़ी गई लेनिन की प्रतिमा पश्चिम बंगाल में मुर्शिदाबाद के जियागंज में एक घटना सामने आई है, जहां लेनिन की दशकों पुरानी प्रतिमा को तोड़ दिया गया. महुआ मोइत्रा ने आरोप लगाया है कि बीजेपी कार्यकर्ताओं ने प्रतिमा को गिराया और उसकी जगह दूसरी प्रतिमा लगाने की योजना बनाई. तृणमूल कांग्रेस का दावा है कि इस तोड़फोड़ में बीजेपी समर्थकों का हाथ है।  वहीं, बीजेपी का कहना है कि इस घटना में उसके कार्यकर्ताओं या समर्थकों की कोई भूमिका नहीं थी. पार्टी का दावा है कि चुनाव के बाद के जश्न के दौरान वहां अलग-अलग समूहों के लोग मौजूद थे, और हो सकता है कि किसी अज्ञात शख्स ने यह हरकत की हो।  कांग्रेस ने नदिया में टीएमसी कार्यालय परकब्ज़ा कर लिया है. यह घटना नदिया जिले के करीमपुर 2 ब्लॉक की नतिडांगा ग्राम पंचायत में हुई. कांग्रेस का कहना है कि यह दफ्तर पहले उसी का था, टीएमसी ने इस पर कब्जा कर लिया था TMC दफ्तर पर बुलडोजर मंगलवार रात को मध्य कोलकाता में उस वक्त तनाव फैल गया, जब बुलडोजरों के साथ आए लोगों के एक समूह ने कथित तौर पर ऐतिहासिक हॉग मार्केट इलाके के पास तृणमूल कांग्रेस (TMC) के एक दफ़्तर को निशाना बनाया. इस घटना से दुकानदारों में दहशत फैल गई और उन्हें अपनी दुकानें अचानक बंद करनी पड़ीं।  टीएमसी का न्यू मार्केट में यूनियन दफ़्तर लोगों का मुख्य निशाना था और उसे पूरी तरह से ढहा दिया गया. इलाके में हुई तोड़-फोड़ और अफरा-तफरी की तस्वीरें तेज़ी से फैल गईं, जिससे स्थानीय दुकानदारों की चिंता और बढ़ गई. कोलकाता के सबसे व्यस्त कारोबारी केंद्रों में से एक में जब हालात बिगड़ने लगे, तो घबराए हुए व्यापारियों ने अपनी दुकानों के शटर गिरा दिए और वहां से भाग निकले।  न्यू मार्केट इलाके में हिंसा और बुलडोजर एक्शन को लेकर टीएमसी सांसद महुआ मोइत्र ने सोशल मीडिया पर गुस्सा जाहिर किया है. उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, "कोलकाता का ऐतिहासिक न्यू मार्केट. बंगाली परिवर्तन का आनंद ले रहे हैं।  TMC के सीनियर लीडर डेरेक ओ'ब्रायन ने यह भी आरोप लगाया कि यह तोड़फोड़ सरकारी निगरानी में की गई. उन्होंने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “मध्य कोलकाता में न्यू मार्केट के पास पुलिस की अनुमति से जीत के जश्न के हिस्से के तौर पर मीट की दुकानों को गिराने के लिए एक बुलडोजर लाया गया. CAPF के जवान आस-पास खड़े थे.” उन्होंने आगे कहा, “यही है बीजेपी. दुनिया इन तस्वीरों को देखे।  टीएमसी नेता कल्याण बनर्जी ने लिखा, "जगतबल्लभपुर में TMC पार्टी के दफ़्तर को कथित तौर पर बीजेपी के उपद्रवियों ने आग लगा दी है. यह उस स्थिति का एक चिंताजनक आईना है, जिसे झेलने के लिए अब बंगाल के लोग मजबूर हैं।  'बीजेपी का परिवर्तन बुलडोजर के साथ…' ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस ने बुधवार को बीजेपी पर मध्य कोलकाता में हिंसा भड़काने का आरोप लगाया. पार्टी ने आरोप लगाया कि बीजेपी समर्थकों ने न्यू मार्केट इलाके के पास दुकानों और एक पार्टी दफ़्तर में तोड़फोड़ की।  सोशल मीडिया पर जारी एक कड़े बयान में टीएमसी ने दावा किया कि 'बीजेपी समर्थकों की भीड़' ने जमकर उत्पात मचाया. टीएमसी ने इस घटना को 'खुली गुंडागर्दी और अराजकता' करार दिया है. पार्टी ने आरोप लगाया कि इस हिंसा में स्थानीय कारोबारियों और तृणमूल कांग्रेस के दफ़्तर को निशाना बनाया गया, जिससे व्यापारियों में दहशत फैल गई।  टीएमसी ने आगे आरोप लगाया कि बीजेपी के सीनियर नेता पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा की गई ऐसी हरकतों को बढ़ावा दे रहे हैं. इन नेताओं में नरेंद्र मोदी और अमित शाह भी शामिल हैं. बढ़ते तनाव पर चेतावनी देते हुए टीएमसी ने कहा कि यह घटना एक बड़े पैटर्न का हिस्सा है, जिसे पार्टी ने 'बुलडोजर की राजनीति' का नाम दिया है।  TMC और BJP वर्कर की हत्या बंगाल में जारी हिंसा में अब तक दो लोगों की मौत का मामला सामने आया है. एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, बंगाल पुलिस ने बताया कि मंगलवार को पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हुई हिंसा की अलग-अलग घटनाओं में बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस के एक-एक कार्यकर्ता की हत्या कर दी गई. पुलिस के मुताबिक, मंगलवार को दिन में बीरभूम के नानूर में बीजेपी कार्यकर्ताओं द्वारा कथित तौर पर टीएमसी कार्यकर्ता अबीर शेख की धारदार हथियार से काटकर हत्या कर दी गई।  वहीं, मंगलवार शाम न्यू टाउन इलाके में जीत के जुलूस के दौरान टीएमसी कार्यकर्ताओं द्वारा कथित तौर पर पीटे जाने के बाद बीजेपी कार्यकर्ता मधु मंडल की मौत हो गई।  चुनाव आयोग ने दिए कार्रवाई के निर्देश… निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल में मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के प्रमुखों को पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद किसी भी किस्म की और किसी के भी हिंसा फैलाने … Read more

किसान के चेहरे पर खुशी ही हमें सुकून देती है-मुख्यमंत्री डॉ यादव

जो कहा वो किया  मुख्यमंत्री डॉ यादव अचानक पहुंचे उज्जैन और किया उपार्जन केंद्र का औचक निरीक्षण  किसान के चेहरे पर खुशी ही हमें सुकून देती है-मुख्यमंत्री डॉ यादव गेहूं, चना ,मसूर तीनों की खरीदी मध्य प्रदेश सरकार के द्वारा लगातार की जा रही है आवश्यकता पड़ने पर गेहूं खरीदी की अंतिम तिथि को भी आगे बढ़ाया जाएगा-मुख्यमंत्री डॉ यादव किसानों की उपज की तौल पारदर्शिता से हो और प्रक्रिया में कोई लापरवाही ना हो – मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव  उज्जैन  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने  अचानक उज्जैन पहुंचकर सेवा सहकारी संस्था दताना और सुरजनवासा के ग्राम मानपुरा स्थित उपार्जन केंद्र एग्रो स्टील साइलो पर गेहूं खरीदी की व्यवस्थाओं का औचक निरीक्षण किया और किसानों से संवाद कर उपार्जन प्रक्रिया की यथास्थिति ली। बिना पूर्व सूचना के मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव का आगमन उपार्जन व्यवस्थाओं की जानकारी प्राप्त करने के लिए था।            मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार किसानों के हितों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है और उपार्जन प्रक्रिया पारदर्शिता और सुगमता से संचालित करवाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सरकार द्वारा गेहूं, चना ,मसूर तीनों की खरीदी लगातार की जा रही है। किसान भाईयों की सुविधा के लिए सभी उपार्जन केद्रों पर पीने के पानी की व्यवस्था ,बैठने के लिए छाया की व्यवस्था, अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं और जिले में कंट्रोल रूम भी स्थापित किया गया है। उन्‍होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर गेहूं खरीदी की अंतिम तिथि को भी आगे बढ़ाया जाएगा।       मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निरीक्षण के दौरान तौल व्यवस्था, भंडारण, भुगतान प्रक्रिया और उपार्जन केंद्र पर उपलब्ध सुविधाओं का बारीकी से जायजा लिया। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसानों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, किसानों की उपज की तौल पारदर्शिता से हो और उपार्जन का भुगतान समय पर सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संबंधित अधिकारियों को चेतावनी भी दी कि उपार्जन प्रक्रिया में लापरवाही बरतने पर कार्यवाही की जाएगी।  मुख्यमंत्री डॉ यादव उपार्जन केंद्र पर निरीक्षण के दौरान पूरी तरह किसानों के रंग में रंगे मुख्यमंत्री डॉ यादव उपार्जन केंद्र पर निरीक्षण के दौरान पूरी तरह किसानों के रंग में रंगे नजर आए।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव का औचक उपार्जन केंद्र पहुंचने पर किसानों द्वारा आत्मीय स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता पर किसानों ने कहा कि मुख्यमंत्री उनके हर सुख-दुख में हमेशा साथ रहते हैं और किसानों का हित सर्वोपरि रखते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषकों से संवाद किया और ट्रैक्टर ट्राली पर चढ़कर गेहूं की फसल की गुणवत्ता भी देखीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसान भाइयों से कहा कि कोई भी समस्या आने पर प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन सदैव आपके साथ हैं। हमारी सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि किसानों की उपज का समय पर विक्रय हो और उसकी राशि उनके खातों में समय सीमा में हस्तांतरित हो।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव से किसान भाइयों ने उपार्जन प्रक्रिया में तौल, बारदाने की उपलब्धता,भुगतान और परिवहन संबंधी मुद्दों पर चर्चा की। ग्राम दताना मताना निवासी किसान श्री अल्ताफ पटेल ने बताया कि उनकी गेहूं की फसल अच्‍छी हुई है और सरकार के द्वारा की जा रही गेहूं खरीदी के बाद गेहूं के उपज की राशि भी व्यवस्थित रूप से मिल रही हैं। साथ ही बाजार में भी गेहूं के दाम उचित रूप से प्राप्त हो रहे हैं। कृषक श्री पटेल ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार के द्वारा जो कार्य किसानों के हित में किए गए हैं उससे हमारी आय में वृद्धि हुई है। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने कृषक श्री पटेल से कहां कि आप किसान भाईयों के चेहरे की खुशी ही हमें सुकून देती हैं।            निरीक्षण के दौरान उज्‍जैन विकास प्राधिकरण अध्यक्ष श्री रवि सौलंकी और अन्‍य स्‍थानीय जन प्रतिनिधि, संभागायुक्त श्री आशीष सिंह, एडीजीपी श्री राकेश गुप्ता, कलेक्टर श्री रौशन कुमार सिंह, पुलिस अ‍धीक्षक श्री प्रदीप शर्मा एवं अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी उपस्थित रहे।

मोहन यादव के निर्देश: सरकारी निगम और प्राधिकरणों में नियुक्तियों के लिए BJP कार्यकर्ताओं की लिस्ट तैयार

इंदौर  दो दशक से अधिक की सत्ता में अब तक भाजपा के आम कार्यकर्ताओं ने सत्ता की रेवड़ी का स्वाद तक नहीं चखा, लेकिन मोहन सरकार में उनकी लॉटरी खुलने वाली है। मुख्यमंत्री की विशेष रुचि के चलते जिला स्तर पर बनने वाली समिति सहकारी समितियों का गठन होने जा रहा है। प्रदेश संगठन के निर्देश पर जिला इकाई ने सभी विधायकों से नाम मांग लिए हैं। माना जा रहा है कि इस माह सभी घोषणाएं हो जाएंगी। भाजपा की सत्ता और संगठन में नियुक्तियों का सिलसिला जारी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव चाहते थे कि सरकारी के सभी निगम, मंडल और प्राधिकरणों में नियुक्ति हो जाए जिससे पार्टी नेताओं को भी सरकार के होने का अहसास रहे। उनके लगातार प्रयास और संगठन से चले लंबे मंथन के बाद बड़ी संख्या में नेताओं को उपकृत किया गया और बची हुई नियुक्तियां भी पाइप लाइन में है। जहां पर विवाद की स्थिति है उनका निराकरण कर वे घोषणाएं हो जाएगी। एक सप्ताह तक दें पूरी सूची ये नियुक्तियां बड़े नेताओं की हो रही है, लेकिन जल्द ही अब आम कार्यकर्ता को भी उपकृत करने की तैयारी है ताकि उन्हें भी लगे कि वे सत्ताधारी संगठन से ताल्लुक रखते हैं। इसको लेकर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने हाल ही में सभी जिला अध्यक्षों को 25 से अधिक समितियों में नियुक्तियों को लेकर नाम की फेहरिस्त मांग ली है। इसके चलते नगर भाजपा अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने सभी विधायकों के अलावा कोर कमेटी के सदस्यों से कार्यकर्ताओं के नाम मांग लिए हैं। एक सप्ताह में पूरी सूची बनाकर देने का कहा गया है जिसमें सभी नेताओं का समन्वय होना चाहिए। ये हैं प्रमुख समितियां जिला स्तर पर बनने वाली समितियों में प्रमुख रूप से आरटीओ समिति, उद्यानिकी विभाग की समिति, जेल विभाग में अशासकीय संदर्शक समिति व विजिटर बोर्ड, पशु क्रूरता निवारण समिति, जिला पशु रोगी कल्याण समिति, मछुआ कल्याण व मत्स्य समिति, जिला शहरी विकास अभिकरण में प्रबंधकारिणी व निगरानी समिति, आइटीआइ में जिला कौशल समिति, शिक्षा विभाग में जिला स्तरीय अनुदान व निर्णायक समिति, खाद्य विभाग की सतर्कता समिति, जिला योजना समिति, अंत्योदय समिति, कॉलेज में जनभागीदारी समिति, पुलिस शिकायत बोर्ड, जिला व्यापार एवं उद्योग बोर्ड, सामाजिक न्याय व निशक्त जन समिति, खेल प्रशिक्षण समिति, जिला जल व स्वच्छता समिति, खनिज निधि समिति, मुख्यमंत्री ऋण माफी योजना, सिटी फॉरेस्ट योजना सहित कुल 25 समितियां हैं। अधिकांश समितियां उमा भारती के मुख्यमंत्री रहते बनी थीं। उसके बाद शिवराज सिंह चौहान के सीएम रहते कुछ समितियों का ही गठन हुआ था। हर बार कार्यकर्ताओं के नाम बुलाए गए, लेकिन घोषणा नहीं हो सकी। विधायक आधारित हुआ संगठन एक समय था जब संगठन आधारित सत्ता होती थी, लेकिन अब उल्टा हो गया है। सत्ता हो या संगठन की नियुक्ति उसमें विधायकों की पसंद से दिए गए नामों को ही उपकृत किया जाता है। बूथ से लेकर मंडल अध्यक्ष तक उनके समर्थक रहते हैं तो बची कसर अब सत्ता में भी पूरी हो जाएगी। उनके दिए गए नामों को ही पार्टी सत्ता में भी उपकृत करेगी। उन कार्यकर्ताओं की कोई पूछपरख नहीं है जो कि गुटबाजी में न पड़ कर संगठन के लिए समर्पित है। मजेदार बात ये है कि विधायक ऐसे कार्यकर्ताओं का विरोध कर हाशिए पर पहुंचा देते हैं। फिर मांगे एल्डरमैन के नाम वैसे तो महापौर पुष्यमित्र भार्गव के नेतृत्व वाली नगर निगम परिषद को एक साल ही शेष रह गया है। इस पर अब पार्टी एल्डरमैन की नियुक्ति करने जा रही है। इसको लेकर पहले भी दो बार नाम लिए जा चुके हैं, लेकिन संगठन में कुछ नाम ऐसे थे जो पदाधिकारी बन गए। इस वजह से फिर से सूची मांगी गई है। 12 पदों को लेकर विधायक चाहते हैं कि उनकी पसंद से ही बने, लेकिन सांसद शंकर लालवानी और महापौर भार्गव भी अपने समर्थकों को उपकृत करना चाहते हैं। उनका तर्क है कि एक-एक एल्डरमैन विधायकों की पसंद से हो जाए तो बाकी छह एल्डरमैन के लिए हमारे नामों को तवज्जो दी जाना चाहिए।

बंगाल के रिजल्ट से पहले यूपी में BJP की सक्रियता, PM मोदी समेत नेता जुटे मोर्चे पर

लखनऊ  पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे भी नहीं आए थे और भारतीय जनता पार्टी ने साल 2027 में होने वाले चुनावों की तैयारियां शुरू कर दी थीं। इसके संकेत भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन समेत कई पार्टी दिग्गजों के दौरों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषणों से मिल रहे हैं। बंगाल में भाजपा ने ऐतिहासिक जीत हासिल की है। वहीं, अगले साल उत्तर प्रदेश, पंजाब, गोवा, मणिपुर, उत्तराखंड, गुजरात और हिमाचल प्रदेश में चुनाव होने हैं। भाजपा को यूपी में भी असम की तरह हैट्रिक की उम्मीद है। UP में जुटे भाजपा के टॉप नेता 29 अप्रैल को बंगाल में दूसरे चरण का मतदान हुआ है। इससे एक दिन पहले ही भाजपा चीफ और पीएम मोदी 28 अप्रैल को उत्तर प्रदेश पहुंच गए थे। वहीं, जब पंजाब में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी के 7 राज्यसभा सांसदों ने दल बदल किया, तो बंगाल में चुनावी ड्यूटी निभा रहे कई भाजपा नेता दिल्ली पहुंच गए थे। बंगाल के नतीजों के बाद कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि नारी शक्ति वंदन (संशोधन) विधेयक का विरोध की कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और अन्य दलों को कड़ी सजा मिली है। उन्होंने दावा किया कि सपा को भी जल्द ही महिलाओं के गुस्से का सामना करना पड़ेगा। उनका इशारा उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों की ओर था। क्यों अहम है उत्तर प्रदेश साल 2014 में जब भाजपा ने कुल 282 लोकसभा सीटें जीती थीं, तो इसमें यूपी की 71 सीटें भी शामिल थीं। खास बात है कि 80 सीटों वाला यूपी लोकसभा सीटों के लिहाज से सबसे बड़ा राज्य है। वहीं, 2024 के चुनाव में भाजपा को बड़ा झटका लगा था और पार्टी घटकर महज 33 सीटों पर आ गई थी। इससे पहले 2019 में भाजपा को यूपी में 62 लोकसभा सीटें मिली थीं। एक ओर जहां समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव PDA यानी पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक को मजबूत करने पर काम कर रहे हैं। वहीं, भाजपा गैर-यादव ओबीसी और गैर-जाटव दलित वर्गों को वापस जोड़ने की कोशिश कर रही है जो लोकसभा चुनाव में उनसे छिटक गए थे। अब बीजेपी अपने पुराने वोट बैंक को फिर से हासिल करने के लिए कई बड़े कदम उठा सकती है ताकि यादव और जाटव वोटों के अलावा अन्य जातियों में अपनी पकड़ फिर से बनाई जा सके। बंगाल का जीत बनेगी भाजपा का इंश्योरेंस बंगाल में जीत के साथ ही भाजपा ने उत्तर और पश्चिम की तरह पूर्व में भी मजबूती हासिल कर ली है। हालांकि, दक्षिण में कर्नाटक को छोड़ दिया जाए, तो भाजपा को लोकसभा में खास समर्थन नहीं मिलता है। साथ ही बंगाल की जीत को भाजपा इंश्योरेंस की तरह भी देख सकती है, जहां अगर उसे किसी मजबूत राज्य में लोकसभा चुनाव में झटका लगता है, तो बंगाल से भरपाई की जा सके। यहां कुल 42 लोकसभा सीटें हैं। पंजाब पर भी नजरें कहा जा रहा है कि पंजाब को हमेशा से प्रधानमंत्री मोदी सरकार चुनावी रूप से अहम मानती रही है। सिख बहुल राज्य में भाजपा लगातार समुदाय को अपनी ओर लाने के प्रयास करती रही है। वही, दल सत्तारूढ़ आप को भी कुर्सी से बेदखल करने की कोशिश में है। 7 राज्यसभा सांसदों का आना भाजपा को कुछ हद तक चुनावी रूप से मददगार साबित हो सकता है। चुनाव के नतीजे बंगाल में भाजपा ने ऐतिहासिक 206 सीटों पर जीत हासिल की। वहीं, असम में शतक लगाकर चुनावी जीत की हैट्रिक पूरी की। इधर, केरल में भी भाजपा की सीटों का ग्राफ बढ़ा है। जबकि, तमिलनाडु में एक्टर विजय की टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनी। पुडुचेरी में एनडीए ने जीत हासिल की।

₹1500 सीधे खातों में! लाड़ली बहनों के लिए बड़ी राहत, जानें तारीख और प्रक्रिया

भोपाल  मध्यप्रदेश की करोड़ों महिलाओं के लिए एक बार फिर राहत और उम्मीद की खबर है। राज्य की महत्वाकांक्षी लाड़ली बहना योजना की 36वीं किस्त को लेकर लंबे समय से चल रहा इंतजार अब खत्म होने की ओर है। मई महीने की यह किस्त खास इसलिए भी मानी जा रही है क्योंकि इस बार लाभार्थियों के खातों में बढ़ी हुई राशि 1500 रुपये भेजे जाने की तैयारी है। दरअसल, प्रदेश सरकार आमतौर पर हर महीने की 10 तारीख तक यह राशि ट्रांसफर करती रही है, लेकिन इस बार 10 मई को रविवार होने के कारण भुगतान में हल्का बदलाव संभव है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार 11 से 15 मई के बीच कभी भी यह किस्त जारी की जा सकती है, हालांकि अंतिम तारीख का आधिकारिक ऐलान अभी बाकी है। पिछले महीने अप्रैल में भी राशि 12 तारीख को जारी की गई थी, जिससे यह संकेत मिलता है कि भुगतान तिथि परिस्थितियों के अनुसार रखी जा रही है। इस योजना की शुरुआत 5 मार्च 2023 को तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की थी, आज प्रदेश की सामाजिक सुरक्षा की मजबूत कड़ी बन चुकी है। करीब 1 करोड़ 29 लाख से अधिक महिलाएं इस योजना का लाभ उठा रही हैं, जो इसे देश की सबसे व्यापक महिला कल्याण योजनाओं में शामिल करता है। सरकार का उद्देश्य न सिर्फ आर्थिक सहायता देना है, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाना भी है। योजना के तहत विवाहित महिलाओं के साथ-साथ विधवा, तलाकशुदा और परित्यक्ता महिलाओं को भी शामिल किया गया है। 21 से 60 वर्ष की आयु वर्ग की महिलाएं, जिनका बैंक खाता आधार से लिंक है और DBT सक्रिय है, वे इस योजना के दायरे में आती हैं। यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि सहायता राशि सीधे लाभार्थियों के खातों में पारदर्शिता के साथ पहुंचे। भुगतान की स्थिति जानने के लिए सरकार ने ऑनलाइन सुविधा भी उपलब्ध कराई है, जिससे महिलाएं घर बैठे ही अपनी किस्त का स्टेटस चेक कर सकती हैं। आवेदन क्रमांक या समग्र आईडी और ओटीपी के माध्यम से यह जानकारी कुछ ही मिनटों में प्राप्त की जा सकती है। कुल मिलाकर, लाड़ली बहना योजना अब केवल एक आर्थिक सहायता योजना नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश की महिलाओं के आत्मविश्वास और सशक्तिकरण का प्रतीक बन चुकी है। मई की 36वीं किस्त के साथ एक बार फिर सरकार की इस प्रतिबद्धता पर मुहर लगने जा रही है।

10 मई को दमोह में पीएम मोदी, स्वावलंबी गोशाला की आधारशिला रखेंगे

दमोह मध्य प्रदेश के दमोह जिले के लिए एक बड़ी खबर सामने आ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर प्रदेश के दौरे पर आ रहे हैं। इस बार वे किसी चुनावी रैली या सभा के लिए नहीं आ रहे हैं पीएम मोदी इस बार एक बेहद खास काम के लिए दमोह आ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक 10 मई 2026 को पीएम मोदी पथरिया विधानसभा क्षेत्र में आएंगे। दमोह जिले के पथरिया में एक विशाल स्वावलंबी गोशाला बनने जा रही है। यह गोशाला कोई आम गोशाला नहीं होगी, बल्कि इसे आधुनिक और आत्मनिर्भर मॉडल पर तैयार किया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी इसी गोशाला का भूमि पूजन करेंगे और इसकी नींव रखेंगे। 517 एकड़ जमीन पर तैयार होगी इस पूरी योजना के लिए कुल 517 एकड़ जमीन इसके लिए चुनी गई है। ये जमीन विकासखंड पथरिया के तीन गांवों रानगिर, कल्याणपुरा और बिजोरी में है।इतनी बड़ी जमीन पर गोशाला बनने से न केवल गायों को बेहतर ठिकाना मिलेगा, बल्कि इलाके के विकास को भी नई रफ्तार मिलेगी।हाल ही में आईएएस प्रताप नारायण यादव और पुलिस अधीक्षक (SP) श्रुतकीर्ति सोमवंशी ने खुद मौके पर जाकर जमीन का मुआयना किया।  मुंबई की कंपनी को मिला है जिम्मा मध्य प्रदेश गौसंबर्धन बोर्ड ने इस गोशाला के निर्माण के लिए मुंबई की एक प्रतिष्ठित कंपनी को आदेश जारी कर दिए हैं।पशुपालन विभाग के उपसंचालक डॉ. बृजेंद्र असाटी ने बताया कि कंपनी को सख्त निर्देश दिए गए हैं। साथ ही 10 मई से पहले जमीन की फेंसिंग का काम पूरा हो जाने की बात कही है। इसके अलावा कम से कम 200 गायों के रहने के लिए अस्थायी शेड तैयार करने के निर्देश दिए हैं। सुरक्षा और तैयारियों का जायजा दमोह के एसपी ने साफ किया है कि भूमि पूजन का कार्यक्रम प्रधानमंत्री के हाथों होना है। इसलिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं। जिले के बड़े अधिकारी लगातार पथरिया का दौरा कर रहे हैं ताकि व्यवस्थाओं में कोई कमी न रह जाए। अंतिम चरण में चल रही तैयारियां स्वीकृत भूमि पर गोशाला के निर्माण और संचालन के लिए मेसर्स श्रीराम मानेक एग्रो प्रोडक्टस प्राइवेट लिमिटेड मुंबई को मध्य प्रदेश गौसंबर्धन बोर्ड भोपाल द्वारा आदेशित किया गया है। दिए गए निर्देश इस संबंध में उपसंचालक पशुपालन डॉ. बृजेंद्र असाटी ने बताया कि मध्य प्रदेश गौसंबर्धन बोर्ड द्वारा गोशाला के संचालन के लिए नियुक्त कंपनी को समय सीमा में भूमि की फेंसिंग और अस्थायी 200 गौवन्श की गोशाला का निर्माण 10 मई 2026 के पहले किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। वरिष्ठ अधिकारियों ने लिया जायजा एसपी ने कहा कि, इस गोशाला का भूमि पूजन वैसे तो प्रधानमंत्री के सानिध्य में होना प्रस्तावित है, जिसकी तैयारियां प्रक्रिया के अंतिम चरण में चल रही हैं। इसी के चलते कलेक्टर के साथ – साथ अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने व्यवस्थाओं का जायजा लिया और समय पर निर्धारित काम निपटाने के साथ साथ तैयारियों को लेकर जरूरी दिशा – निर्देश दिए। पीएम मोदी के पिछले दौरे प्रधानमंत्री मोदी का मध्य प्रदेश से पुराना लगाव रहा है। इससे पहले वे 17 सितंबर 2025 को अपने 75वें जन्मदिन के मौके पर प्रदेश आए थे। उस दौरान उन्होंने कई बड़े काम किए थे।     धार दौरा: बदनावर के भैसोला गांव में देश के पहले पीएम मित्रा पार्क का शिलान्यास किया था।     महिला सशक्तिकरण: 'स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार' अभियान की शुरुआत की थी। साथ ही प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत महिलाओं को पैसे ट्रांसफर किए थे।     भोपाल दौरा (31 मई 2025): रानी अहिल्याबाई होलकर की 300वीं जयंती पर भोपाल आए थे। इंदौर मेट्रो के एक खास कॉरिडोर का उद्घाटन किया था।

सीएम योगी ने बढ़ाया मुआवजा, यूपी के लोगों को मिलेगा दोगुना फायदा

लखनऊ  यूपी में किसानों के हित से जुड़ा एक बड़ा फैसला सामने आया है. लंबे समय से बिजली की हाईटेंशन लाइनों से प्रभावित किसानों की जो शिकायतें थीं, अब उन पर सरकार ने ठोस कदम उठाया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में मुआवजा व्यवस्था को पूरी तरह बदलते हुए किसानों को सीधा आर्थिक लाभ देने का फैसला किया गया है।  अब 765, 400, 220 और 132 केवी की हाईटेंशन लाइनों से प्रभावित जमीन पर पहले से कहीं ज्यादा मुआवजा मिलेगा. सबसे बड़ा बदलाव यह है कि जहां टावर (खंभे) खड़े किए जाते हैं, उस जमीन के लिए किसानों को अब जमीन की कीमत का 200% यानी दोगुना मुआवजा मिलेगा. वहीं, जिन खेतों के ऊपर से बिजली की लाइनें गुजरती हैं, उस हिस्से (राइट ऑफ वे/कॉरिडोर) के लिए 30% मुआवजा दिया जाएगा।  क्यों जरूरी था यह बदलाव दरअसल, बिजली की बड़ी ट्रांसमिशन लाइनों के लिए जमीन की जरूरत पड़ती है. टावर लगाने के साथ-साथ उनके बीच से गुजरने वाली तारों के नीचे भी जमीन का उपयोग सीमित हो जाता है. किसान उस जमीन पर न तो निर्माण कर सकते हैं और न ही कई बार पूरी तरह खेती कर पाते हैं. पहले इस नुकसान के बदले किसानों को या तो बहुत कम मुआवजा मिलता था या कई मामलों में बिल्कुल नहीं मिलता था. यही वजह थी कि कई परियोजनाओं में स्थानीय स्तर पर विरोध भी देखने को मिलता था. ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने बताया कि सरकार ने इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए नई व्यवस्था लागू की है, ताकि किसानों के साथ न्याय हो और परियोजनाएं भी बिना रुकावट आगे बढ़ सकें।  पहले क्या था नियम, अब क्या बदला अगर पुराने सिस्टम की बात करें, तो 2018 से पहले टावर के नीचे आने वाली जमीन पर अक्सर कोई स्पष्ट मुआवजा तय नहीं था. कई मामलों में किसानों को उचित भुगतान नहीं मिल पाता था. 2018 में इसमें सुधार किया गया और टावर बेस के नीचे जमीन की कीमत का करीब 85% मुआवजा देने का प्रावधान किया गया. लेकिन इसके बावजूद एक बड़ी कमी बनी रही लाइन के नीचे आने वाली जमीन (कॉरिडोर) के लिए कोई मुआवजा नहीं था. अब नई व्यवस्था में दोनों हिस्सों को शामिल किया गया है. टावर के नीचे जमीन का 200% (दोगुना) मुआवजा दिया जाएगा इसी तरह लाइन कॉरिडोर (तारों के नीचे) 30% मुआवजा दिया जाएगा. यानी अब किसान को उसकी जमीन के हर प्रभावित हिस्से का भुगतान मिलेगा।  कैसे तय होगा मुआवजा  मुआवजा तय करने के लिए जिलाधिकारी द्वारा निर्धारित सर्किल रेट को आधार बनाया जाएगा. इसका मतलब है कि हर जिले में जमीन की जो सरकारी दर तय होती है, उसी के अनुसार भुगतान किया जाएगा. इससे मुआवजा प्रक्रिया पारदर्शी और एकसमान बनेगी. साथ ही विवाद की संभावना भी कम होगी. सरकार के मुताबिक, इस नए फैसले से किसानों को पहले के मुकाबले 21% से 33% तक ज्यादा लाभ मिलेगा. अधिकारियों का कहना है कि योगी सरकार के इस फैसले को अगर सरल भाषा में समझा जाए तो जहां पहले कम या कोई मुआवजा नहीं मिलता था, अब वहां सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा. जमीन का उपयोग भले सीमित हो, लेकिन उसका मुआवजा मिलेगा. लंबे समय से चल रही असंतोष की स्थिति खत्म होगी.  यह फैसला खास तौर पर उन किसानों के लिए राहत लेकर आया है, जिनकी जमीन से होकर बड़ी बिजली लाइनें गुजरती हैं।   क्या होगा इसका असर सरकार का मानना है कि इस फैसले का असर सिर्फ किसानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे बिजली परियोजनाओं को भी गति मिलेगी. पहले जमीन से जुड़े विवादों और विरोध के कारण कई प्रोजेक्ट्स में देरी होती थी. अब जब किसानों को उचित मुआवजा मिलेगा, तो उनकी सहमति भी आसानी से मिलेगी. इससे ट्रांसमिशन लाइन बिछाने का काम तेजी से पूरा हो सकेगा, जिसका सीधा फायदा बिजली आपूर्ति व्यवस्था को मिलेगा. ऊर्जा मंत्री ने बताया कि यह नई व्यवस्था भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप तैयार की गई है. देश के कई अन्य राज्यों में भी इसी तरह की मुआवजा नीति लागू की जा रही है. उनका कहना है कि यह फैसला एक तरह से दो अहम जरूरतों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश है एक तरफ किसानों के अधिकार और दूसरी तरफ विकास की जरूरत. अक्सर देखा जाता है कि बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए जमीन लेने पर विवाद होता है. लेकिन अगर मुआवजा सही और समय पर मिले, तो यह टकराव काफी हद तक कम हो सकता है. उनका कहना है कि सरकार ने इस फैसले के जरिए यही संदेश देने की कोशिश की है कि विकास के साथ-साथ किसान हितों को भी प्राथमिकता दी जा रही है।  जमीनी असर कब दिखेगा नई मुआवजा व्यवस्था लागू होने के बाद इसका असर धीरे-धीरे जिलों में दिखाई देगा. जहां भी नई ट्रांसमिशन लाइनें बनेंगी या पुराने मामलों का निपटारा होगा, वहां किसानों को इसका फायदा मिलेगा. विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर इस नीति को सही तरीके से लागू किया गया, तो यह आने वाले समय में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत कर सकता है।   

कर्मचारियों के लिए खुशखबरी: 8वें वेतन आयोग से सैलरी 283% तक बढ़ सकती है

नई दिल्ली केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग को लेकर एक बड़ी खबर है। नेशनल काउंसिल (JCM) के स्टाफ साइड ने सरकार को ज्ञापन सौंपते हुए 3.83 के फिटमेंट फैक्टर की मांग की है। अगर यह मांग मंजूर हो जाती है, तो कर्मचारियों की न्यूनतम मूल सैलरी और पेंशन में 283% तक का ऐतिहासिक उछाल आ सकता है। क्या है 3.83 फिटमेंट फैक्टर और इससे कितनी बढ़ेगी सैलरी? फिटमेंट फैक्टर वह गुणांक है, जिससे मौजूदा बेसिक सैलरी को गुणा किया जाता है। 7वें वेतन आयोग में यह फैक्टर 2.57 था। अब JCM ने इसे बढ़ाकर 3.83 करने की मांग रखी है। अगर मांग मान ली जाती है तो मौजूदा न्यूनतम मूल वेतन ₹18,000 × 3.83 = ₹68,940 हो जाएगा। वहीं, न्यूनतम पेंशन ₹9,000 से बढ़कर ₹34,470 हो जाएगा। यानी सैलरी और पेंशन दोनों में 283% की बढ़ोतरी हो सकती है, लेकिन यह सिर्फ कर्मचारियों की मांग है, अंतिम फैसला सरकार करेगी। क्या वाकई 283% बढ़ोतरी मिलेगी? हालांकि, 283% का आंकड़ा काफी चर्चा में है, लेकिन पिछले अनुभवों से समझा जा सकता है कि सरकार आमतौर पर कर्मचारियों की मांग से कम फिटमेंट फैक्टर तय करती है। एक्सपर्ट्स के अनुमान के अनुसार, सरकार 1.8 से 2.86 के बीच फिटमेंट फैक्टर लागू कर सकती है। ऐसे में असली बढ़ोतरी करीब 13% से 35% के बीच रहने की संभावना है, न कि 283%। फिर भी, यह केंद्रीय कर्मचारियों के लिए एक बड़ा फायदा होगा। कर्मचारियों की अन्य प्रमुख मांगें क्या हैं? JCM ने सिर्फ सैलरी बढ़ाने तक सीमित नहीं रखा है। उनकी अन्य प्रमुख मांगों में ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) की बहाली, वेतन स्तरों को घटाकर सिर्फ 7 लेवल करना, हाउस रेंट अलाउंस (HRA) 30% करना, सालाना इंक्रीमेंट 3% से बढ़ाकर 6% करना, और 30 साल की सेवा में कम से कम 5 प्रमोशन सुनिश्चित करना शामिल है। इन मांगों पर सरकार का फैसला अभी बाकी है। कब बना 8वां वेतन आयोग और कब मिलेगा फायदा? 8वें वेतन आयोग के गठन की घोषणा जनवरी 2025 में हुई थी। 3 नवंबर 2025 को इसका औपचारिक गठन किया गया। आयोग को अपनी रिपोर्ट देने के लिए 18 महीने का समय मिला है। उम्मीद है कि सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से प्रभावी मानी जाएंगी, भले ही औपचारिक लागू होने में देरी हो। संभावित तारीखों के अनुसार, कर्मचारियों को 2027 के अंत या 2028 की शुरुआत तक बढ़ी हुई सैलरी और पेंशन मिलना शुरू हो जाएगा। 7वां और 8वां वेतन आयोग में तुलना अगर 7वें वेतन आयोग की बात करें, तो उसमें फिटमेंट फैक्टर 2.57 था, जिससे न्यूनतम मूल वेतन ₹18,000 और अधिकतम ₹2,50,000 था। वहीं 8वें वेतन आयोग के लिए प्रस्तावित 3.83 फैक्टर से न्यूनतम मूल वेतन ₹68,940 हो सकता है। हालांकि, एक्सपर्ट्स अनुमान बताते हैं कि असली फैक्टर 2.86 के आसपास हो सकता है, जिससे न्यूनतम वेतन करीब ₹51,480 बनता है। क्या पेंशनर्स को भी फायदा होगा? जी हां, 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें सभी केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स पर समान रूप से लागू होंगी। जिस फिटमेंट फैक्टर से सक्रिय कर्मचारियों की सैलरी बढ़ेगी, उसी फैक्टर से पेंशनभोगियों की पेंशन भी बढ़ाई जाएगी। साथ ही, पिछली तारीख (1 जनवरी 2026) से एरियर भी दिया जाना संभव है।