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मोहन यादव ने भाईदूज पर दी खास सौगात, लाड़ली बहनों को मिलेगा 1500 रुपए

भोपाल  मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कांग्रेस को कोसते हुए लाड़ली बहनों के लिए भाईदूज से 1500 रुपए देने का एलान किया है. उन्होंने कहा कि कांग्रेसी कुछ भी कहें लेकिन बहनों चिंता करो, दिवाली के बाद इसी भाईदूज से आपको 1500 रुपए मिलना चालू हो जाएगा. कांग्रेसी रोते रहेंगे और हमारे पास इतने पैसे हैं कि हम अपनी बहनों को देते रहेंगे.  भाईदूज से लाड़ली बहनों को 1500 रुपए का एलान  मुख्यमंत्री डाॅ मोहन यादव ने कहा कि "लाड़ली बहनों हाथ खड़े करो, जिन जिनको पैसे मिल रहा है. आप बताओ बहन को भी मिल रहा है और भाई को भी मिल रहा है. हमारे पास कोई पैसे की कमी नहीं है, किसानों की जिंदगी जितनी बेहतर कर सकते हैं, हम लगातार उस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और बहनों चिंता मत करो. ये कांग्रेसी कुछ भी कहें, लेकिन इसी दिवाली के बाद भाईदूज से आपको भी 1500 रुपए महीने मिलना चालू हो जाएगा. ये कांग्रेसी रोते रहेंगे… रोते रहेंगे… रोते रहेंगे और हमारे पास पैसे इतने हैं कि हम अपनी बहनों को देते रहेंगे..देते रहेंगे… देते रहेंगे. बहनें भी अपने एक-एक पैसे का उपयोग अपने बच्चों को पढ़ाई, बुजुर्गों की दवाई और घर के परिवार के सदस्यों के लिए सब की चिंता के लिए इस्तेमाल करती हैं. ऐसे में उनकी चिंता अगर हम नहीं करेंगे, तो कौन करेगा,यह काम हमारा है. मोहन यादव बोले- हमारे पास पैसे की कमी नहीं मुख्यमंत्री ने विशाल जनसमुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि "विकास योजनाएं चलाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार के पास पैसे की कमी नहीं है.हम अपने किसान भाईयों और लाड़ली बहनों को किसी तरह की कमी नहीं आने देंगे. किसान भाईयों को केंद्र और राज्य सरकार की किसान सम्मान निधि मिलेगी, तो लाड़ली बहनों के लिए दीपावली के बाद भाईदूज को 1500 रुपए मिलेंगे. लाड़ली बहना योजना का महत्व  लाड़ली बहना योजना महिलाओं की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने की दिशा में एक अहम कदम है। इससे महिलाओं को विभिन्न प्रकार की योजनाओं का फायदा मिल सकेगा। सीएम ने इस योजना के माध्यम से महिलाओं को सीधे वित्तीय सहायता प्रदान करने का वादा किया है। कांग्रेस पर तंज  सीएम मोहन यादव ने कांग्रेस पर तंज करते हुए कहा कि कांग्रेस गोमांस और गोवंश को लेकर बातें करती है, जबकि उनकी सरकार ने 2004 के बाद मध्यप्रदेश में गोवंश को लेकर कानून बनाया है। उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी व्यक्ति यदि गोमाता को परेशान करेगा, तो उसे जेल भेजा जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह स्पष्ट किया कि उनकी सरकार के द्वारा गोशालाओं की संख्या बढ़ाई गई है और दूध उत्पादन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

बाघों की छठी गिनती में मध्य प्रदेश करेगा कमाल, अन्य राज्यों के एक्सपर्ट्स ने दिया उच्च दर्जा

भोपाल  टाइगर स्टेट मप्र अब 6वीं बार बाघों की गिनती (अखिल भारतीय बाघ आकलन) के लिए तैयार है। उसके पहले विशेषज्ञों का अनुमान है कि प्रदेश में 1000 से अधिक बाघ है। यदि अनुमान सही साबित होता है तो मप्र टाइगर स्टेट का दर्जा बचाने में सफल होगा और कर्नाटक जैसे राज्यों को और मेहनत करनी पड़ सकती है। अभी प्रदेश में 785 बाघ है, यह संया वर्ष 2022 में हुए अखिल भारतीय बाघ आकलन रिपोर्ट में सामने आई थी। अब यह आकलन वर्ष 2026 में होना है। पांच राज्यों के विशेषज्ञों ने पेंच में किया मंथन बाघों का आकलन करने से पहले देशभर में इसकी तैयारी की जा रही है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण इसका नेतृत्व कर रहा है। उसी के नेतृत्व में वन्यजीव संस्थान देहरादून में बीते महीने राष्ट्रीय स्तर की बैठक हो चुकी है। इसके बाद मध्यप्रदेश के पेंच टाइगर रिजर्व में कार्यशाला हुई है, जिसमें पांच राज्यों के विशेषज्ञ जुटे थे। इनके बीच बाघों के आकलन से जुड़ी तैयारियों को लेकर बिंदुवार चर्चा हुई और तैयारियों में की जाने वाली सुधारात्मक प्रक्रिया पर बातचीत हुई। 2026 में शुरू होगी बाघों की गिनती बाघों (Tigers in MP) का आकलन 2026 में होगा। यह रिपोर्ट काफी अध्ययन व सत्यापन के बाद ही जारी होती है। ताकि आंकड़ों में कोई दोहरा व छूट न हो। इस पूरी प्रक्रिया को करने में लंबा समय लग जाता है। साक्ष्यों से मिलान के बाद ही फाइनल रिपोर्ट का प्रकाशन शासन के द्वारा किया जाता है। 2027 में आएगी रिपोर्ट बाघ आकलन 2026 की रिपोर्ट एक साल बाद जुलाई 2027 में आएगी, जो विश्व बाघ दिवस पर जारी की जाएगी। हर बार इस दिन रिपोर्ट जारी की जाती रही है। हालांकि तब प्राथमिक रिपोर्ट ही जारी होगी, विस्तृत रिपोर्ट आने में और एक से डेढ़ वर्ष लग जाएंगे। वनाधिकारियों का कहना है कि बाघ आंकलन की प्रक्रिया बहुत जटली है, इसमें कई स्तर पर साक्ष्य जुटाने पड़ते हैं। सभी साक्ष्यों का अध्ययन बड़ी चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया होती है, फिर उसे दूसरे अन्य साक्ष्यों से मिलान करना पड़ता है। मप्र में सबसे अच्छे रहवास स्थल प्रदेश में बाघों के लिए सबसे अच्छे और अनुकूल रहवास स्थल है। इसमें बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के जंगल सबसे आगे रहे हैं, जिसकी पुष्टि भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून भी अपनी विभिन्न रिपोर्टों में कर चुका है। रिजर्व की संया भी बढ़ी है। कुछ सामान्य वन क्षेत्रों में भी बाघों की मौजूदगी दिखाई दे रही है। इन सबकुछ आधार पर कहा जा सकता है कि 2022 में जब 785 बाघ थे तो इनकी संया अब तक बढ़कर 1000 तक पहुंच जानी चाहिए। – आरके दीक्षित, वन्यप्राणी विशेषज्ञ

मध्य प्रदेश में प्रमोशन प्रक्रिया को मिल सकती है रफ्तार, हरी झंडी मिली तो दिसंबर तक होंगे प्रमोशन

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार द्वारा बनाए गए नए पदोन्नति नियम को लेकर हाई कोर्ट जबलपुर की सुनवाई में सरकार का जोर इस बात पर है कि नौ वर्ष से प्रदेश में पदोन्नतियां बंद हैं। इससे कर्मचारी हतोत्साहित हैं। सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन प्रकरण को ध्यान में रखते हुए जब तक अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक सशर्त पदोन्नति दी जाएगी। यदि सब-कुछ ठीक रहा और निर्णय सरकार के पक्ष में आया तो दिसंबर तक सभी पात्र कर्मचारियों को एक-एक पदोन्नतियां दे दी जाएंगी। हाई कोर्ट जबलपुर में सरकार की ओर से गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन की अनुपस्थिति को आधार बनाकर सुनवाई की तिथि आगे बढ़ाने का आग्रह किया, जिसे स्वीकार किया गया। सरकार का जोर इस बात पर है कि सशर्त ही सही पर नौ वर्ष से बंद पदोन्नति का सिलसिला प्रारंभ हो जाए। वैसे भी सुप्रीम कोर्ट में मामला विचाराधीन है, इसलिए पदोन्नति दी भी जाती है तो वह अंतिम निर्णय के अधीन ही रहेगी। सभी वर्ग के कर्मचारी हो रहे प्रभावित इसमें किसी को कोई परेशानी भी नहीं होनी चाहिए क्योंकि प्रभावित तो सभी वर्ग के कर्मचारी हो रहे हैं। वहीं, सामान्य वर्ग के याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट में दायर विशेष अनुमति याचिका को वापस ना लेने पर प्रश्न खड़ा कर रहे हैं। सामान्य पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक वर्ग अधिकारी-कर्मचारी संस्था (सपाक्स) का कहना है कि जब सरकार ने यह मान लिया है कि पुराने नियम दोषपूर्ण थे और हाई कोर्ट ने उन्हें जो निरस्त किया वह सही था तो फिर याचिका वापस लेने में आपत्ति क्या है। जब नियम ही गलत थे तो जो पदोन्नतियां उससे हुईं वे वापस ली जानी चाहिए यानी पदोन्नत अधिकारियों-कर्मचारियों को पदावनत करके वरिष्ठता सूची तैयार की जाए और फिर पदोन्नतियां हों। अभी जो स्थिति है, उसमें तो सामान्य वर्ग का नुकसान ही नुकसान है।ये पहले ही विसंगतिपूर्ण पदोन्नति नियम के कारण पिछड़ गए हैं और अब फिर वही स्थिति बनाने का प्रयास हो रहा है। जो नए नियम हैं वे भी सामान्य वर्ग के हितों का संरक्षण नहीं करते हैं। विभागों ने शुरू कर दी थी पदोन्नति की तैयारियां विभागीय अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश के नियमित साढ़े सात लाख अधिकारियों-कर्मचारियों में से साढ़े तीन से चार लाख कर्मचारी पदोन्नति के पात्र होंगे। नए नियम बनाने के साथ ही इन्हें पदोन्नति देने की तैयारियां भी विभागों ने प्रारंभ कर दी थी। विभागीय पदोन्नति समिति के गठन के साथ कर्मचारियों के सेवा अभिलेख के आधार पर प्रस्ताव भी तैयार हो चुके हैं। नगरीय विकास एवं आवास, लोक निर्माण सहित अन्य विभागों और विधानसभा सचिवालय ने तैयारी करके रखी है। यदि जल्द ही नियम को हरी झंडी मिल जाती है तो दिसंबर तक पात्र अधिकारियों-कर्मचारियों को एक पदोन्नति दे दी जाएगी। यथास्थिति भी होगी स्पष्ट सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट में यथास्थिति को भी स्पष्ट करने के लिए कहा है। दरअसल, सपाक्स का कहना है कि भले ही नए नियम बना दिए गए हैं लेकिन जब तक यथास्थिति है, तब तक पदोन्नति नहीं हो सकती है। वहीं, सरकारी पक्ष का कहना है कि यथास्थिति संदर्भ में है जिसमें पदोन्नत कर्मचारियों को पदावनत करने की बात उठाई जा रही है।

भोपाल की अवैध कॉलोनियों पर प्रशासन की सुस्ती, बिना अनुमति फल-फूल रही 250 बस्तियां

भोपाल  भोपाल जिले में अवैध कॉलोनियों पर प्रशासन की कार्रवाई पूरी तरह ठप हो गई है, यही कारण है कि भूमाफिया बिना अनुमतियों के प्लाट बेचकर मोटा लाभ कमा रहे हैं। जबकि पिछले दिनों ईंटखेड़ी के घासीपुरा इलाके की अवैध कॉलोनी स्थित मकान में ड्रग्स फैक्ट्री का खुलासा हो चुका है। इसके बाद भी जिम्मेदारों ने अवैध कॉलोनियों पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं की है। जबकि छह महीने पहले कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने अवैध कॉलोनियों को चिह्नित कर कार्रवाई करने के निर्देश सभी एसडीएम को दिए थे, जिसके बाद एसडीएम द्वारा करीब 250 अवैध कॉलोनियों को चिह्नित तो किया था, लेकिन इसके आगे कार्रवाई नहीं बढ़ सकी और मामला ठंडे बस्ते में चला गया है। अधिकारियों की अनदेखी के चलते यहां बीते दो से तीन महीने की बात करें, तो अन्य तहसील/सर्कल में कोई भी बड़ी कार्रवाई नहीं हुई। दरअसल, प्रशासन ने जिले में 250 ऐसी जमीनें चिह्नित की थीं, जहां अवैध कॉलोनियों का निर्माण जारी है। इन कॉलोनियों के निर्माण के लिए शासकीय अनुमति नहीं ली गई है। एसडीएम ने ऐसी कॉलोनियों को नोटिस तो जारी किए, लेकिन इसके बाद एक्शन नहीं लिया। सूत्रों की मानें तो राजनीतिक संरक्षण की वजह से अधिकारियों द्वारा अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई नहीं की गई है। जिले में कोलार, हुजूर, गोविंदपुरा व बैरसिया क्षेत्र में अवैध कॉलोनियों जमकर फल-फूल रही हैं। कोलार में अवैध कॉलोनियों का जाल कोलार तहसील के आसपास ही अवैध कॉलोनियों का जाल बुना जा रहा है। रतनपुर सड़क, पिपलिया केशो, सेमरी, सोहागपुर, गेहूखेड़ा, राजहर्ष सहित अन्य क्षेत्रों में कृषि भूमि पर कॉलोनियों का निर्माण किया जा रहा है। यह सभी गांव नगर निगम क्षेत्र में आते हैं। यहां पर कृषि भूमि पर सड़क बनाकर प्लाट बेचे जा रहे हैं। इसके लिए बकायदा कॉलोनाइजरों ने बोर्ड लगा रखे हैं। इसमें से किसी ने भी न तो टीएनसीपी से और न ही नगर निगम से अनुमति ली है। हुजूर से बैरसिया तक काटे जा रहे अवैध प्लाट जिले की हुजूर तहसील से लेकर बैरसिया तक भूमाफिया अवैध कॉलोनियों में जमकर प्लाट बेच रहे हैं। यहां पर भोपाल बायपास से लगे नगर निगम सीमा के पास वाले ग्रामीण क्षेत्रों में कॉलोनियों काटी गई हैं, जिनमें से किसी के पास भी अनुमतियां नहीं हैं। लांबाखेड़ा से लेकर बैरसिया तक 35 किलोमीटर के मार्ग पर कृषि भूमि पर अवैध प्लाटिंग की जा रही है। इसके बाद भी जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। इस तरह लोगों को फंसा रहे भूमाफिया लोगों को फंसाकर अवैध कॉलोनियों में प्लाट बेचने के लिए भूमाफिया नए-नए तरीके अपना रहे हैं। यह विकसित कॉलोनियों की तर्ज पर कवर्ड कैंपस बनाकर दे रहे हैं। वो जमीन के चारों तरफ बाउंड्री बनाते हैं। इसके बाद रोड, बिजली के पोल व सीवेज लाइन बिछाते हैं। ऐसे में जब कोई व्यक्ति प्लाट लेने आता है, तो वो यह देखकर आकर्षित हो जाता है। ऐसी एक-दो नहीं, करीब 50 से अधिक अवैध कॉलोनियां बन रही हैं। हालांकि, एक बार कॉलोनी में प्लाट बेचने के बाद तथा कथित बिल्डर कभी वहां पलटकर नहीं देखते हैं। एफआईआर दर्ज करने के निर्देश जिले में अवैध कॉलोनियों को चिह्नित कर कार्रवाई करने के निर्देश सभी एसडीएम को दिए गए हैं। पिछले महीनों में अवैध कॉलोनाइजरों को नोटिस जारी किए गए थे। इसके बाद जिन कॉलोनाइजरों ने दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए हैं, उन पर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।  -कौशलेंद्र विक्रम सिंह, कलेक्टर

TikTok की चीन से विदाई, ट्रंप की चाल के बाद नया मालिक कौन?

न्यूयॉर्क अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टिकटॉक को लेकर बड़ा ऐलान किया है. उन्होंने  एक्जीक्यूटिव ऑर्डर साइन किया है, जिसमें TikTok के अमेरिकी ऑपरेशन्स को बेचने की मंजूरी दी गई है. यानी टिकटॉक का अमेरिकी ऑपरेशन किसी अमेरिकी इन्वेस्टर ग्रुप को बेचने की मंजूरी दे दी गई है.  ये अमेरिका और चीन के बीच लंबे समय से चला आ रहा विवाद था. अमेरिका ने कई बार टिकटॉक को देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया है. ऐसे में अगर टिकटॉक का ऑपरेशन किसी अमेरिकी कंपनी को मिलेगा, तो इससे ऐप को अमेरिका में बैन नहीं किया जाएगा.  कितनी लगाई गई है कीमत? रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बताया कि टिकटॉक अमेरिका की वैल्यू 14 अरब डॉलर लगाई गई है. ट्रंप के एक्जीक्यूटिव ऑर्डर की वजह से टिकटॉक पर बैन फिलहाल के लिए टल गया है. एक्जीक्यूटिव ऑर्डर डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस को कानून को लागू करने से रोकता है, जिसके तहत टिकटॉक की पैरेंट कंपनी ByteDance को देश भर में बैन किया जाना था.  कौन होगा नया मालिक और क्या बदलेगा? डील के तहत TikTok US अब नए बोर्ड ऑफ डायरेक्ट नियुक्त करेगा. साथ ही एल्गोरिद्म रिकमेंडेशन, सोर्स कोड और कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम को भी नए मालिक को ट्रांसफर किया जाएगा. ट्रंप के एक्जीक्यूटिव ऑर्डर के बाद, Oracle अब TikTok US के सिक्योरिटी ऑपरेशन्स को हैंडल करेगा और क्लाउड सर्विस भी ऑफर करेगी.  इसके अलावा Oracle, Silver Lake और अबू धाबी बेस्ड MGX ग्रुप नई इकाई में 45 फीसदी हिस्सेदारी खरीदेगी. वेंस ने रॉयटर्स को बताया, 'शुरुआत में चीन की ओर से कुछ प्रतिरोध था, लेकिन हम चाहते थे कि टिकटॉक काम करता रहे. हम ये भी चाहते थे कि अमेरिकी डेटा सुरक्षित रहे.' चीनी राष्ट्रपति से ट्रंप ने की बात ट्रंप ने भी रिपोर्टर्स ने बातचीत ने कहा कि उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से बात की और उन्होंने इस पर अपनी सहमति दी थी. डोनाल्ड ट्रंप ने बताया, 'मैंने उनसे (शी जिनपिंग) बताया कि हम ये करने जा रहे हैं और उन्होंने कहा आप करिए.' उन्होंने ये भी बताया कि अब TikTok US पूरी तरह से अमेरिका द्वारा ऑपरेट किया जाएगा.  ट्रंप ने ये भी कहा है कि टिकटॉक के नए मालिक इस बात का ख्याल रखेंगे कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल प्रोपेगेंडा फैलाने में ना हो. हालांकि, इस पूरे मामले पर ByteDance ने कोई जानकारी नहीं दी है. कंपनी ने पहले ऐसा जरूर कहा था कि वे टिकटॉक को अमेरिका में बनाए रखने के लिए पूरी तरह से कानून का पालन करेंगे.

ट्रंप का बड़ा फैसला: दवाओं और ट्रकों पर भारी टैक्स, 1 अक्टूबर से लागू

नई दिल्ली अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपनी व्यापारिक नीतियों को लेकर सुर्खियों में हैं। इस बार उन्होंने सीधे दवा उद्योग को निशाना बनाते हुए विदेशी फार्मा कंपनियों पर बड़ा फैसला सुनाया है, जो भारत समेत कई विकासशील और विकसित देशों को प्रभावित कर सकता है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एलान किया कि 1 अक्टूबर 2025 से अमेरिका में किसी भी ब्रांडेड या पेटेंटेड दवा उत्पाद पर 100% टैरिफ लगाया जाएगा – अगर वह अमेरिका में निर्मित नहीं हो रही है। यानी, कोई कंपनी यदि अमेरिका में फार्मा मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित नहीं कर रही है, तो उसे इस भारी-भरकम टैक्स का सामना करना पड़ेगा। दवा कंपनियों पर सीधा असर यह फैसला उन देशों के लिए झटका है जो अमेरिका को बड़ी मात्रा में दवा उत्पाद निर्यात करते हैं। भारत, जो विश्व के सबसे बड़े जेनेरिक दवा उत्पादकों में से एक है, उसके लिए यह निर्णय न सिर्फ आर्थिक, बल्कि रणनीतिक मोर्चे पर भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई कंपनी अमेरिका में निर्माण कार्य वास्तव में शुरू कर चुकी है, तो उस पर टैरिफ लागू नहीं होगा। “IS BUILDING” का मतलब केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि निर्माण स्थल पर वास्तविक कार्य होना चाहिए। फर्नीचर और घरेलू सामान पर भी टैरिफ ट्रंप की आक्रामक टैरिफ नीति सिर्फ दवा उद्योग तक सीमित नहीं रही। उन्होंने ऐलान किया कि: -किचन कैबिनेट्स और बाथरूम वैनिटीज पर 50% टैरिफ -अपहोल्स्टर्ड फर्नीचर (गद्देदार फर्नीचर) पर 30% टैरिफ -भारी ट्रकों और अन्य घरेलू उत्पादों पर भी उच्च टैरिफ लगाए जाएंगे। ट्रंप का कहना है कि विदेशी कंपनियों ने अमेरिकी बाजार में जरूरत से ज्यादा सामान भर दिया है, जिससे स्थानीय निर्माण उद्योग पर सीधा असर पड़ा है। टैरिफ लगाना अब जरूरी हो गया है ताकि अमेरिका फिर से अपनी उत्पादन क्षमता हासिल कर सके। कई देशों पर नई टैरिफ दरें ट्रंप ने अगस्त में भी कई देशों पर टैरिफ बढ़ाए थे, जो अब लागू हो चुके हैं: भारत: 50% टैरिफ रूस: 25% अतिरिक्त जुर्माना ब्राज़ील: 50% टैरिफ दक्षिण अफ्रीका: 30% टैरिफ वियतनाम: 20% टैरिफ जापान व दक्षिण कोरिया: 15% टैरिफ अमेरिका फर्स्ट की वापसी? ट्रंप की इन घोषणाओं को उनकी पुरानी रणनीति America First का विस्तार माना जा रहा है। वे पहले भी टैरिफ को हथियार की तरह इस्तेमाल करते रहे हैं – चाहे वह चीन के साथ ट्रेड वॉर हो या यूरोपीय उत्पादों पर शुल्क। इस नई घोषणा से अमेरिका में फार्मा इंडस्ट्री को तो बढ़ावा मिलेगा, लेकिन वैश्विक व्यापार संतुलन पर इसका गहरा असर पड़ेगा।

ऑपरेशन सिंदूर से घबराया पाकिस्तान, लश्कर का ट्रेनिंग कैंप अफगान सीमा पर पहुंचाया

खैबर पख्तूनख्वा  पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा इलाके में लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का नया ट्रेनिंग सेंटर बन रहा है. यह खबर पूरे इलाके की सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बनी हुई है. यह सेंटर आतंकवाद को बढ़ावा दे सकता है. नया ट्रेनिंग सेंटर: मरकज जिहाद-ए-अकसा यह सेंटर लोअर डिर जिले के कुम्बन मैदान इलाके में बनाया जा रहा है. यह अफगान सीमा से करीब 47 किलोमीटर दूर है. 4643 वर्ग फुट के प्लॉट पर यह बन रहा है, जो LeT के हाल ही में बने जामिया अहले सुन्नाह मस्जिद के बगल में है.  निर्माण जुलाई 2025 में शुरू हुआ, जो ऑपरेशन सिंदूर के दो महीने बाद था. यह दिसंबर 2025 तक पूरा हो जाएगा. ऑपरेशन सिंदूर भारत की तरफ से था, जिसमें LeT के कई ठिकाने तबाह हो गए थे. मुख्य विशेषताएं और उद्देश्य     ट्रेनिंग प्रोग्राम: यहां दो मुख्य कोर्स चलेंगे – दौरा-ए-खास और दौरा-ए-लश्कर. ये आतंकियों को हथियार चलाना, हमले करना और जिहाद की ट्रेनिंग देंगे.     पुराने सेंटर की जगह: यह LeT के जान-ए-फिदाई फिदायीन यूनिट की जगह लेगा. यह यूनिट पहले भींबर-बरनाला के मरकज अहले हदीस में था, जो ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेना ने नष्ट कर दिया था.     भर्ती और कट्टरवाद: यहां नए लोगों की भर्ती होगी, उन्हें कट्टर बनाया जाएगा. बड़े ग्रुप में ट्रेनिंग दी जाएगी. नेतृत्व और संचालन     कमांड: नसर जावेद को कमान सौंपी गई है. वह 2006 के हैदराबाद बम धमाके का सह-मास्टरमाइंड था. 2004 से 2015 तक वह PoK के दुलाई कैंप चला चुका है.     जिहाद की शिक्षा: मुहम्मद यासिन (उर्फ बिलाल भाई) जिहाद की धार्मिक शिक्षा देगा.     हथियार ट्रेनिंग: अनस उल्लाह खान हथियारों की ऑपरेशनल ट्रेनिंग संभालेगा. उसने 2016 में LeT के गढ़ी हबीबुल्लाह कैंप में ट्रेनिंग ली थी. रणनीतिक महत्व     स्थान बदलना: LeT ने PoK और पंजाब के पुराने ठिकानों को छोड़कर खैबर पख्तूनख्वा में शिफ्ट किया है. इसका मकसद भविष्य में भारतीय हमलों से बचना है.     दूसरे ग्रुप्स से तालमेल: यह सेंटर हिजबुल मुजाहिदीन के HM-313 कैंप से सिर्फ 4 किलोमीटर दूर है. इससे दोनों ग्रुप्स के बीच समन्वय या रणनीतिक सहयोग की आशंका है.     पाकिस्तानी सेना की भूमिका: जून 2025 में पाकिस्तानी सेना ने क्लीनअप ड्राइव चलाई, जिसमें 2 दर्जन से ज्यादा TTP (तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान) के सदस्य मारे गए. इससे इलाके को LeT के लिए साफ कर दिया गया लगता है. इलाके की सुरक्षा चिंताएं     आतंकी गतिविधियां: यह इलाका हमेशा से भारत-विरोधी आतंकवाद का केंद्र रहा है. यहां अल बद्र और TTP जैसे ग्रुप्स सक्रिय हैं.     नागरिकों की हानि: जून 2025 से पाकिस्तानी सेना और एयर फोर्स के हवाई हमलों में 40 से ज्यादा नागरिक मारे गए हैं. इससे काउंटर-टेररिज्म ऑपरेशंस की प्रभावशीलता पर सवाल उठे हैं.     पाकिस्तान की रणनीति: पाकिस्तान अच्छे आतंकवाद को बढ़ावा देता है और बुरे आतंकवाद को खत्म करता है. यह बात मुख्यमंत्री अली अमीन गंदापुर ने खुद स्वीकार की है. इससे पाकिस्तान की आतंकवाद विरोधी प्रतिबद्धता पर शक होता है. यह नया सेंटर भारत और पूरे क्षेत्र के लिए खतरे की घंटी है. LeT जैसे ग्रुप्स की गतिविधियां बढ़ने से शांति भंग हो सकती है. अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस पर नजर रखनी चाहिए. भारत को अपनी सुरक्षा मजबूत करनी होगी ताकि ऐसे हमलों का मुंहतोड़ जवाब दिया जा सके.

अदालती कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग पर रोक जारी, MP हाईकोर्ट में 29 अक्टूबर को होगी सुनवाई

 जबलपुर  हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा व न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ के समक्ष गुरुवार को लाइव स्ट्रीमिंग के वीडियो के दुरुपयोग को चुनौती के मामले में सुनवाई हुई। मेटा कंपनी की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी वर्चुअल पैरवी की। उन्होंने माना कि इंटरनेट मीडिया के कई प्लेटफार्म्स पर हाई कोर्ट प्रकरणों की सुनवाई के वीडियो का दुरुपयोग हो रहा है। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें आपत्तिजनक वीडियो के यूआरएल लिंक उपलब्ध करा दिए जाएं तो उन वीडियो को हटा दिया जाएगा। 29 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता को उक्त लिंक उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। कोर्ट ने अंतरिम आदेश के तहत सभी क्रिमिनल कोर्ट की लाइव स्ट्रीमिंग पर रोक अगली सुनवाई तक बरकरार रखी है। मामले की अगली सुनवाई 29 अक्टूबर को होगी। कोर्ट की बातों को मिर्च मसाला लगाकर करते हैं वायरल जबलपुर निवासी अधिवक्ता अरिहंत तिवारी और विदित शाह ने याचिका दायर कर बताया कि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की लाइव स्ट्रीमिंग के वीडियो यूट्यूब और इंस्टाग्राम पर मीम्स या शार्ट्स के माध्यम से डाली जाती है। यह आपत्तिजनक है। कई बार न्यायाधीशों द्वारा ओपन कोर्ट में कही बातों को मिर्च मसाला लगाकर उन्हें वायरल किया जाता है। यह अदालत की अवमानना है। गतिविधियों की मानिटरिंग करें आईटी याचिका में मांग की गई कि यूट्यूब के स्थान पर वेबेक्स आधारित प्लेटफॉर्म के जरिए प्रकरणों की लाइव स्ट्रीमिंग की जाए, जो कि कुछ हद तक सुरक्षित है। यह मांग भी की गई कि रजिस्ट्रार आईटी भी इस तरह की गतिविधियों पर मानिटरिंग करें और नियंत्रण सुनिश्चित करें।

भाजपा को लाडो लक्ष्मी योजना से मिलेगी बढ़त? हरियाणा में बेटियों को मिलेंगे सबसे ज्यादा रुपये

चंडीगढ़  हरियाणा सरकार ने लाडो लक्ष्मी योजना की शुरुआत कर देश की राजनीति में नया अध्याय लिख दिया है। यह योजना न सिर्फ हरियाणा सरकार के लिए गेम चेंजर साबित होगी बल्कि भाजपा बिहार, पश्चिम बंगाल, पंजाब और यूपी के विधानसभा चुनाव में भी इस योजना को भुनाने की कोशिश करेगी। इस योजना की सबसे बड़ी यूएसपी यही है कि जो राशि पात्र महिलाओं व लाभार्थियों को दी जा रही है, वह देश में सबसे ज्यादा है। पूरे देश में इस समय आठ योजनाएं चल रही हैं जिनके माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए उनके बैंक खाते में हर माह वित्तीय मदद दी जाती है। राज्य सरकार की लाडो लक्ष्मी योजना के तहत महिलाओं को हर महीने 2100 रुपये दिए जाएंगे। बाकी किसी योजना में इतने पैसे नहीं मिलते हैं। मध्य प्रदेश में 1250 रुपये, ओडिशा में 800 रुपये, महाराष्ट्र में 1500 रुपये, पश्चिम बंगाल में 1200 रुपये, झारखंड में 1000 रुपये, कर्नाटक में दो हजार रुपये, तेलगांना में दो हजार रुपये और हिमाचल प्रदेश में 11 सौ रुपये दिए जा रहे हैं। दिल्ली और पंजाब में भी योजना प्रस्तावित हैं, जहां एक-एक हजार रुपये दिए जाने हैं। भाजपा सरकार अब यही भुनाने की कोशिश करेगी कि उसने जो वादा किया था, उसे वह समय पर पूरा कर रही है। हालांकि विपक्ष सवाल उठा रहा है कि पहले सभी महिलाओं को वित्तीय मदद देने की घोषणा की गई थी, मगर अब सिर्फ कुछ ही महिलाओं को दी जा रही है। विपक्ष को जवाब देते हुए सीएम ने कहा- अभी तो सरकार को एक साल पूरा नहीं हुआ है। इस योजना को चार चरणों में पूरा जाना है। बाकी तीन चरणों की घोषणा भी बहुत जल्द किया जाएगा। सबसे ज्यादा हरियाणा में महिलाओं को दिए जाएंगे पैसे प्रदेश                       योजना        लाभ (राशि) मध्यप्रदेश             लाडली बहना      1250 ओडिशा               सुभद्रा                800 महाराष्ट्र         माझी लाडकी बहीण   1500 पश्चिम बंगाल     लक्ष्मी भंडार    1200 झारखंड          मैया सम्मान       1000 कर्नाटक       गृह लक्ष्मी योजना    2000 तेलगांना       गृह लक्ष्मी योजना    2000 योजना को लेकर महिलाओं में था गजब उत्साह लाडो लक्ष्मी योजना के लॉचिंग के मौके पर ताऊ देवी लाल स्टेडियम महिलाओं से पूरा खचाखच भरा हुआ था। योजना को लेकर महिलाओं के चेहरे पर एक अलग ही खुशी देखने को मिल रही थी। महिलाओं को इस बात का अहसास था कि जब उनके खाते में रुपये आएंगे तो वे उन रुपयों से अपनी ख्वाहिशों को पूरा कर पाएंगी। अंबाला से पहुंची पल्लवी ने बताया, ये पैसे उनकी जिंदगी के लिए काफी अहम रखते हैं। उनके पति एक दुकान में नौकरी करते हैं। उन पैसों से जैसे-तैसे खर्चा चल रहा है। इससे उन्हें काफी बल मिल पाएगा। वहीं, पंचकूला की सखी ने बताया, सरकार से मिलने वाली यह मदद उनके परिवार के लिए काफी मायने रखती हैं। इस महंगाई के दौर में ये पैसे उनके बच्चों की पढ़ाई-लिखाई में मदद करेगी। अब प्रतियोगी परीक्षाओं की कर पाउंगी तैयारी : पुष्पेंद्र रायपुररानी की पुष्पेंद्र ने बताया, उसे इस योजना का बेसब्री से इंतजार था। इस योजना से आने वाले रुपयों से मैं अब प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर पाउंगी। मेरा सपना सरकारी नौकरी करने का है। इस वित्तीय मदद से मैं अब सीईटी की कोचिंग की तैयारी कर पाउंगी। मेरे मम्मी पापा नहीं है, इस योजना से मिलेगा सहारा : रजनी मंच से लाडो लक्ष्मी योजना में आवेदन करने वाली रजनी ने बताया, उसके मम्मी-पापा नहीं है। राज्य सरकार की इस योजना से मुझे काफी लाभ मिलेगा। इन रुपयों की मदद से मेरी आगे की पढ़ाई सुचारू रूप से जारी रह सकेगी। मैं नर्सरी टीचर बनना चाहती हूं। पैसे होंगे तो कुछ कर पाउंगी : कामना रायपुररानी की कामना ने बताया, वह अभी ग्रेजुएशन कर रही हैं। ग्रेजुएशन के बाद कुछ सोचा नहीं है। इतने पैसे नहीं हैं कि कोई तैयारी कर पाउं। अब यदि पैसे आते हैं तो मैं कुछ आगे सोच पाउंगी। मेरे पास प्रशासन की ओर से कॉल आई थी कि आपको इस योजना में आवेदन कर सकती हैं। यह सुनते ही मैं खुश हो गई थी।

सुप्रीम कोर्ट का दिवाली से पहले अहम फैसला, दिल्ली-NCR में चल सकेंगे ग्रीन पटाखे

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली से पहले पटाखों को लेकर शुक्रवार को बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने दिल्ली-एनसीआर में उन निर्माताओं को ग्रीन पटाखे बनाने की इजाजत दे दी, जिनके पास नेशनल एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (NEERI) और पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन (PESO) से प्रमाणित सर्टिफिकेट हैं। हालांकि, कोर्ट ने यह शर्त रखी है कि ये निर्माता दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में अगले आदेश तक किसी भी प्रकार के पटाखों की बिक्री नहीं कर सकेंगे। निर्माताओं को यह सुनिश्चित करने के लिए हलफनामा देना होगा कि वे दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की बिक्री नहीं करेंगे। यह फैसला वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के मकसद से लिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह हितधारकों के साथ मिलकर दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की बिक्री और भंडारण पर प्रतिबंध से संबंधित समाधान तैयार करे और इसे 8 अक्टूबर तक कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करे। इससे पहले, एससी ने दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर प्रतिबंध को चुनिंदा तरीके से लागू करने पर सवाल उठाया था। इसने कहा था कि अगर स्वच्छ हवा राष्ट्रीय राजधानी के कुलीन निवासियों का अधिकार है, तो यह पूरे देश के नागरिकों को भी मिलना चाहिए। चीफ जस्टिस बीआर गवई और जज विनोद चंद्रन की पीठ राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में पटाखों के विनियमन से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। कोर्ट का तर्क और संतुलन सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि बिहार में खनन पर प्रतिबंध लगाने से अवैध माफिया पैदा हो गए। ऐसे में दिल्ली-NCR में भी पटाखों पर पूर्ण पाबंदी से अवैध बाजार बढ़ रहा है। कोर्ट का कहना है कि इस मसले पर संतुलित दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है। बिक्री पर अभी भी संशय हालांकि राहत सिर्फ निर्माण तक सीमित है। कोर्ट ने अभी साफ नहीं किया है कि दिल्ली-NCR में पटाखों की बिक्री और दागने की इजाजत होगी या नहीं। इस पर अंतिम फैसला 8 अक्टूबर की सुनवाई में हो सकता है। केंद्र सरकार को आदेश सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि सभी हितधारकों के साथ मिलकर पटाखों पर प्रतिबंध लागू करने की स्पष्ट नीति बनाई जाए। कोर्ट ने माना कि अब तक दिल्ली-NCR में पूरी तरह बैन लागू नहीं हो सका है। अब सभी की निगाहें 8 अक्टूबर पर दिल्ली-NCR की जनता में उत्सुकता है कि क्या दिवाली पर सालों बाद पटाखों की आवाज गूंजेगी। अब देखना होगा कि 8 अक्टूबर की सुनवाई में कोर्ट बिक्री और आतिशबाज़ी पर क्या फैसला सुनाता है। इससे कई सवाल खड़े हुए हैं कि क्या यह कदम प्रदूषण संकट को और बढ़ाएगा या फिर “ग्रीन पटाखे” सच में समाधान साबित होंगे। पटाखा बनाने वालों को देना होगा लिखित वचन बता दें कि पटाखा निर्माताओं को यह भी लिखित वचन देना होगा कि वे दिल्ली-एनसीआर में कोई पटाखा नहीं बेचेंगे। यह आदेश इसलिए दिया गया है क्योंकि इस क्षेत्र में दिवाली के समय प्रदूषण का स्तर बहुत बढ़ जाता है। इस मामले पर अगली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट यह तय करेगा कि आगे बिक्री पर क्या कदम उठाए जाएं। पूरे देश में नहीं लगा सकते रोक- बीआर गवई  बता दें कि, मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई की अध्यक्षता वाली बेंच ने यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने साफ कहा कि वह पूरे देश में पटाखों की बिक्री और निर्माण पर पूरी तरह से रोक नहीं लगा सकता, क्योंकि केंद्र सरकार ने इस बारे में कोई राष्ट्रीय स्तर का प्रतिबंध प्रस्तावित नहीं किया है। राजधानी में 494 तक पहुंच गया था एक्यूआई शीर्ष अदालत का यह कदम दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए उठाया गया है। नवंबर 2024 में राजधानी का औसत एक्यूआई 494 तक पहुंच गया था, जिससे शहर घने स्मॉग की चादर में लिपट गया था और लोगों का सांस लेना मुश्किल हो गया था। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला दिवाली से ठीक पहले आया है, जब पटाखों की बिक्री और जलाने से प्रदूषण का स्तर और ज्यादा बढ़ सकता था। अब दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की बिक्री पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगी।  क्या NCR के शहर ही साफ हवा के हकदार? चीफ जस्टिस ने कहा, ‘अगर एनसीआर के शहर स्वच्छ हवा के हकदार हैं, तो दूसरे शहरों के लोग क्यों नहीं? जो भी नीति होनी चाहिए, वह अखिल भारतीय स्तर पर होनी चाहिए। हम केवल इसलिए दिल्ली के लिए नीति नहीं बना सकते कि वे देश के कुलीन नागरिक हैं।’ उन्होंने कहा, ‘मैं पिछली सर्दियों में अमृतसर में था और वहां प्रदूषण दिल्ली से भी बदतर था। अगर पटाखों पर प्रतिबंध लगाना है, तो उन्हें पूरे देश में प्रतिबंधित किया जाना चाहिए।’ सीनियर वकील अपराजिता सिंह ने कहा कि कुलीन वर्ग अपना ख्याल खुद रखता है। प्रदूषण होने पर वे दिल्ली से बाहर चले जाते हैं। पीठ ने केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग से इस मुद्दे पर विस्तृत रिपोर्ट प्राप्त करने को कहा।