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मध्य प्रदेश: तेज रफ्तार ने ली 14 हजार से ज्यादा जानें, ग्रामीण क्षेत्रों में दोगुनी मौतें

भोपाल  मध्य प्रदेश में तेज रफ्तार वाहन चलाने वालों पर अंकुश लगाया जाए तो हर साल 10 हजार से अधिक लोगों की जान बच सकती है। सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में 75 प्रतिशत मामले तेज रफ्तार के रहे। पुलिस ट्रेनिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (पीटीआरआई) के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में वर्ष 2024 में 14 हजार 791 लोगों की मृत्यु सड़क दुर्घटनाओं में हुई है, जबकि 2023 से 13 हजार 798 लोगों की जान चली गई थी।ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों पर हुई मौतों की संख्या शहरी क्षेत्र की तुलना में दोगुना से भी अधिक है। ग्रामीण क्षेत्र की सड़कों पर दुर्घटनाओं से लगभग नौ हजार लोगों की मौत हुई है। पिछले चार वर्ष से यह संख्या आठ हजार से नौ हजार के बीच है। इसका कारण यह है कि भीड़ नहीं होने के कारण लोग तेज गति से वाहन चलाते हैं। दूसरा यह की सड़कों पर संरक्षा (सेफ्टी) मापदंडों का पालन भी ठीक से नहीं हो पाता। अंधेरा, अंधा मोड़, संकरी सड़क जैसे ब्लैक स्पाट भी यहां दुर्घटनाओं की वजह बनते हैं। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि कुल मौतों में शराब पीकर और मोबाइल पर बात करते हुए वाहन चलाने के कारण 500 से अधिक लोगों की मौत हुई है। पुलिस मुख्यालय अब इस रिपोर्ट के आधार पर सभी जिलों और संबंधित एजेंसियों को दुर्घटनाएं रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई करने के लिए निर्देशित करने जा रहा है। ये है दुर्घटनाओं की बड़ी वजह     मध्य प्रदेश में ट्रैफिक पुलिस का अमला मात्र साढ़े तीन हजार है, जबकि जिस तरह से वाहनों की संख्या बढ़ रही है उससे इसका दोगुना पुलिस बल चाहिए।     मध्य प्रदेश में ब्लैक स्पाट यानी दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की संख्या घटने की जगह बढ़ रही है। इनकी संख्या 400 से अधिक है। स्थायी तौर पर इस समस्या को हल करने के लिए जिम्मेदार एजेंसिया रुचि नहीं ले रही हैं। पुलिस की चेकिंग के दौरान चालान की कार्रवाई में सबसे अधिक ध्यान हेलमेट और सीट बेल्ट नहीं लगाने वालों पर रहता है। दोनों को मिला लें तो प्रतिवर्ष आंकड़ा औसत 10 लाख के ऊपर रहता है, जबकि तेज गति से वाहन चलाने वालों में 50 हजार के विरुद्ध भी कार्रवाई नहीं होती। वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ी     यह सही है कि सड़क हादसों की बड़ी वजह तेज गति से वाहन चलाना है। सभी को गति सीमा का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई करने के लिए कहा गया है। वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ी है। सड़कें बेहतर होने से रफ्तार भी बढ़ी है। दुर्घटनाएं रोकने के लिए विशेष अभियान चलाकर भी यातायात नियम तोड़ने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की जाती है। – शाहिद अबसार, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (पीटीआरआई)।  

कर्मचारियों को बड़ी राहत: जनवरी से ATM के ज़रिए मिलेगी PF की सुविधा

नई दिल्ली कर्मचारी भविष्‍य निधि संगठन (EPFO) के मेंबर्स के लिए एक बड़ा अपडेट सामने आया है. ईपीएफओ जनवरी 2026 से एटीएम से पैसा निकालने की सर्विस शुरू कर सकता है. खबरों के मुताबिक, ईपीएफओ की सर्वोच निर्णय लेने वाली संस्‍था CBT अक्‍टूबर के दूसरे सप्‍ताह में होने वाली अपनी आगामी बोर्ड बैठक में ATM से पैसे निकालने की सुविधा को मंजूरी दे सकती है.  ATM से पैसा निकालने की सुविधा से कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलेगी. उन्‍हें पैसा निकालने के लिए किसी तरह के ऑनलाइन क्‍लेम की आवश्‍यकता नहीं पड़ेगी. साथ ही लंबे इंतजार की भी जरूरत खत्‍म हो जाएगी. कर्मचारी सीधे एटीएम ब्रांच जाकर ATM से पीएफ का पैसा निकाल सकते हैं.   सीबीटी के एक सदस्य ने मनीकंट्रोल को बताया कि हमें पता चला है कि ईपीएफओ का आईटी ढांचा ATM जैसे ट्रांजेक्‍शन की अनुमति देने के लिए तैयार है. उन्होंने आगे कहा कि एटीएम से पैसे निकालने की एक सीमा होगी, लेकिन इस पर चर्चा होनी बाकी है.  मंत्रालय ने आरबीआई से की बात  लेबर मिनिस्‍ट्री के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि मंत्रालय ने ईपीएफओ एटीएम की सुविधा शुरू करने के लिए बैंकों के साथ-साथ, RBI से भी बात की है. अधिकारी ने कहा कि एटीएम सुविधा को एक जरूरत के तौर पर देखा जा रहा है, क्‍योंकि सरकार लोगों को उनके पीएफ अकाउंट तक ज्‍यादा पहुंच देना चाहती है.  ईपीएफओ के पास कुल 28 लाख करोड़ ईपीएफओ के तहत अभी 7.8 करोड़ लोग रजिस्‍टर्ड हैं, जिन्‍होंने मिलकर EPFO के पास 28 लाख करोड़ रुपये से ज्‍यादा डिपॉजिट किया है. 2014 में यह आंकड़ा- 7.4 लाख करोड़ रुपये और 3.3 करोड़ था.  PF विड्रॉल के लिए जारी होगा कार्ड  सूत्रों ने बताया कि संभावना है कि EPFO अपने सदस्यों को एक विशेष कार्ड जारी करेगा, जिससे वे ATM से अपनी राशि का एक हिस्सा निकाल सकेंगे. इस साल की शुरुआत में EPFO ने कस्‍टमर्स के लिए पैसे की उपलब्‍धता को आसान बनाने के लिए ऑटोमैटिव क्‍लेम सेटलमेंट अमाउंट को 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया था. इस प्रॉसेस के तहत ऑटोमैटिक सिस्‍टम क्‍लेम की पात्रता की पुष्टि के लिए डिजिटल जांच और एल्‍गोरिदम के एक सेट का उपयोग करती है. पूरी प्रक्रिया सिस्टम-संचालित है और सदस्य के केवाईसी विवरण पर आधारित है.  विशेषज्ञों का कहना है कि ATM के माध्यम से ईपीएफओ फंड विड्रॉल की अनुमति देने से सदस्यों के लिए धन तक पहुंच अधिक सुविधाजनक हो जाएगी. खासतौर से इमरजेंसी के समय में, क्योंकि वर्तमान में विड्रॉल में अक्सर प्रक्रियागत देरी और कागजी कार्रवाई शामिल होती है. 

पेमेंट का नया दौर: QR कोड की छुट्टी, अब अंगूठा लगाएंगे और हो जाएगा भुगतान

नई दिल्ली भारत में कई लोगों को स्मार्टफोन से QR Code स्कैन करके UPI पेमेंट करते हुए देखा होगा, लेकिन जिनके पास मोबाइल ना हो वे क्या करें. ऐसे ही लोगों के लिए अब Proxgy स्टार्टअप ने ThumbPay नाम का प्रोडक्ट अनवील किया है, जो बायोमैट्रिक ऑथेंटिकेशन की मदद से पेमेंट करने की सुविधा देता है. यानी आप सिर्फ अंगूठा लगाकर दुकान, पेट्रोल पंप और शोरूम आदि पर पेमेंट कर सकेंगे. यह सिस्टम आधार ऑथेंटिकेशन को UPI से कनेक्ट करता है. इसके लिए फोन, कार्ड या वॉलेट को कनेक्ट करने की जरूरत नहीं होगी. कस्टमर्स को पेमेंट करने के लिए सिर्फ डिवाइस पर अपना अंगूठा लगाना होगा.  ThumbPay में पेमेंट का प्रोसेस ?  ThumbPay से पेमेंट करने के लिए कस्टमर्स को डिवाइस पर अपना अंगूठा लगाना होगा, जिसके बाद उसकी स्कैनिंग होगी. आधार इनेबल पेमेंट सिस्टम (AEPS) सिस्टम पहले अंगूठे की मदद से शख्स को वेरिफाई करेगा. ऑथेंटिकेशन कंप्लीट होने के बाद UPI सिस्टम बैंक टू बैंक पेमेंट कंप्लीट करेगा. इसके लिए कस्टमर्स को QR Code, स्मार्टफोन और कैश रखने की जरूरत नहीं होगी.  सिक्योरिटी और हाइजीन का भी रखा ध्यान कंपनी ने बताया है कि इस डिवाइस में सर्टिफाइड फिंगरप्रिंट स्कैनर लगाया है, जो फ्रॉड डिटेक्शन के साथ आता है. इसमें वेरिफिकेशन्स के लिए एक छोटा कैमरा भी दिया है. इसमें हाइजीन के लिए UV स्टेरेलाइजेशन भी दिया जाता है.  ThumbPay में QR कोड और NFC पेमेंट का सपोर्ट डिवाइस को और बेहतर बनाने के लिए इसमें QR कोड और NFC पेमेंट का सपोर्ट दिया है. UPI साउंडबॉक्स और 4G का सपोर्ट मिलेगा. इसमें वाईफाई कनेक्शन की भी सुविधा है.   ThumbPay की कीमत ThumbPay की कीमत करीब 2 हजार रुपये है. यह बैटरी पावर के साथ भी काम कर सकेगा, जिसकी मदद से इसे बड़े शोरूम, छोटी दुकानों और गांवों की दुकानों में भी यूज किया जा सकेगा.  असल में यह आधार से कनेक्टेड बैंक खाते से सीधे जुड़ता है. इसके बाद कोई भी शख्स जिसका आधार कार्ड से बैंक अकाउंट लिंक है, वो इस डिवाइस पर अपना अंगूठा लगाकर कर पेमेंट कर सकते हैं.  दुकान वालों के लिए कब से होगा उपलब्ध  जानकारी के मुताबिक, इस डिवाइस ने पायलट ट्रायल को कंप्लीट कर लिया है. अब इसको UIDAI और NPCI की तरफ से कंप्लाइंस चेक मिलना है. एक बार सिक्योरिटी का अप्रूवल मिलने के बाद Proxgy इसे स्टेप बाई स्टेप तरीके से डिस्ट्रीब्यूट करेगी. 

सुपरमार्केट्स को मिली GST छूट, छोटे दुकानदारों को छोड़ दिया बाहर

 ग्वालियर  जीएसटी कम होने के बाद मंगलवार को कांच मिल क्षेत्र के निवासी बीपी श्रीवास्तव ने दुकान से घी का पैकेट खरीदा। घी का पैकेट 595 रुपए में दुकानदार ने दिया। पहले भी उन्हें घी का पैकेट इतनी ही कीमत में मिलता था। जब उन्होंने दुकानदार से जीएसटी कम करके घी देने के लिए कहा तो उसने कहा कि अभी तो पुरानी रेट में ही मिलेगा। जब हमें कम कीमत पर मिलेगा तब हम भी आपको कम कीमत पर देंगे। ऐसा केवल एक व्यक्ति के साथ नहीं हो रहा है, बल्कि शहर में बड़े सुपर मार्केट या डिपार्टमेंटल स्टोर को छोड़ दें, गली मोहल्लों सहित अन्य जगहों की दुकानों पर जीएसटी कम होने के बाद भी सामान पुरानी कीमत या एमआरपी पर ही मिल रहा है। बिस्किट हो, चिप्स का पैकेट हो या अन्य ऐसी ही कोई पैक्ड सामग्री हो, उपभोक्ताओं को जीएसटी की छूट लागू होने के दो दिन बाद भी एमपीआरपी पर ही मिल रहे है। ऐसे में अभी लोगों को जीएसटी कम होने से कम ही राहत मिल पा रही है। सुपर मार्केट या डिपार्टमेंटल स्टोर पर क्यों मिल रही है छूट     सुपर मार्केट या डिपार्टमेंटल स्टोर न केवल जीएसटी में रजिस्टर्ड हैं, बल्कि वे बिलिंग भी सॉफ्टवेयर से करते हैं। ऐसे में उनके साफ्टवेयर में जीएसटी कम कर दिया गया है। इसलिए इन स्टोर पर लोगों को कम कीमत में सामान मिल रहा है। जबकि छोटी व गली मोहल्लों की दुकानों में से अधिकतर जीएसटी में रजिस्टर्ड ही नहीं है, साथ ही इन दुकानों पर बिलिंग के लिए किसी तरह का साफ्टवेयर भी उपयोग नहीं करते। ऐसे में ये दुकानदार अभी भी जीटएसटी कम होने के बाद भी पुरानी एमआरपी पर ही चीजें बेच रहे हैं। शहर में अधिकतर दुकानदारों को सामान डिस्ट्रीब्यूटर या उनके एजेंट ही सप्लाई करते हैं। ये लोग सीधे सीधे कच्चे बिल पर ही माल सप्लाई करते हैं। ऐसे में दुकानदारों का कहना है कि एजेंट या डिस्ट्रीब्यूटर को तो हम माल के पैसे दे चुके हैं, अब वो वापस नहीं करेगा। इसलिए जब तक पुराना माल है तब तक पुरानी ही कीमत में बेचेंगे। जिन मेडिकल स्टोरों पर कंप्यूटर से बिलिंग हो रही है वहां पर लोगों को दवाओं पर जीएसटी से राहत मिल रही है। हालांकि मेडिकल स्टोर वाले अब पहले जो 10 से 15 प्रतिशत डिस्काउंट दवा पर देते थे, वह नहीं दे रहे हैंं। ऑनलाइन ग्रोसरी का सामान बेचने वाली कंपनियों ने भी कीमत घटाई ऑनलाइन ग्रोसरी सहित अन्य आयटम बेचने वाली कंपनियों ने अपने यहां सभी सामग्रियों की कीमतों को जीएसटी कटौती के मुताबिक घटा दिया है। आर्डर मिलने के बाद वे तुरंत डिलेवरी भी दे रही हैं। ऐसे में लोग अब दुकानों से पुरानी दरों की जगह ऑनलाइन चीजें मंगा रहे हैं। दुकानदारों की यह भी समस्या गोले का मंदिर चौराहे पर एक दुकानदार से जब 5 रुपए का बिस्किट पैकेट और एक 10 रुपये का चिप्स का पैकेट लिया गया और उससे जीएसटी कम करने की बात की तो उसने कहा कि माल नहीं बेच पाएंगे, क्योंकि आप तो 5 और 10 का सिक्का या नोट दोगे। बिस्किट पर 20 पैसे कम होंगे और चिप्स पर 40 पैसे। ऐसे में अब 60 पैसे मैं कहां से लाउंगा। ये सिक्के तो अब चलन में भी नहीं है। इस वजह से 5 से लेकर 50 रुपये की चीजें पुरानी कीमतों पर ही बिक रही हैं। क्या कहते हैं दुकानदार     पांच से दस रुपये या सौ रुपये तक के पैकेट पर जीएसटी कम करके बेचें भी, लेकिन छोटे सिक्के चलन में नहीं है। ऐसे में इन चीजों को एमआरपी पर ही बेचना पड़ रहा है। जिन चीजों पर 20 से 30 या अधिक राशि छूट की होती है उसमें जरूर कम करते हैं। – प्रमोद जैन, किराना दुकानदार जब नया स्टॉक आएगा तभी कम करेंगे     अभी तक घर के उपयोग की जो भी चीजें खरीदी हैं, उन वे सभी एमपीआरपी या पुरानी दर पर मिल रही थी, उसी पर मिल रही हैं। दुकानदार कह देते हैं, जब नया स्टॉक आएगा तभी ही कम पर मिलेंगी। – सुधीर झा, निवासी मुरार क्या कहते हैं व्यापारी संघ के पदाधिकारी     जब भी नई व्यवस्था होती है तो उसमें स्थिरता आने में समय लगता है। वर्तमान में जीएसटी का फायदा 5 हजार रुपये से अधिक की खरीदारी पर ही दिखेगा। दुकानदारों के पास 10 से 15 दिन या एक महीने का ही स्टाक होगा। तब तक छोटे आयटमों पर ही जीएसटी का फायदा आम आदमी को नहीं मिलेगा। लेकिन एक महीने में यह व्यवस्था पूरी तरह से सेटल हो जाएगी। इसके बाद सभी को राहत मिलेगी और बचत होगी। – प्रवीण अग्रवाल, अध्यक्ष चैंबर ऑफ कॉमर्स  

MiG-2 ने भरी आखिरी उड़ान, भारतीय वायुसेना ने किया सलामी के साथ विदा

चंडीगढ़   चंडीगढ़ के इंडियन एयरफोर्स स्टेशन से भारतीय वायुसेना के प्रसिद्ध जंगी विमान मिग-21 की विदाई का महत्त्वपूर्ण क्षण नजदीक आ गया है। आज 12 विंग एयरफोर्स स्टेशन में इसके अंतिम प्रस्थान से पहले फुल ड्रेस रिहर्सल का आयोजन हुआ, जिसमें मिग-21 को वाटर कैनन सैल्यूट के साथ सम्मानित किया गया। आसमान में सूर्य किरण एरोबेटिक टीम और आकाश गंगा स्काई डाइवर्स ने शानदार एरोबेटिक प्रदर्शन कर समारोह को यादगार बना दिया। जब मिग-21 ने गर्जना करते हुए उड़ान भरी, तो पूरा शहर गूंज उठा। 62 वर्षों के गौरवशाली इतिहास के साथ अब मिग-21 भारतीय वायुसेना से विदा हो रहा है। मिग-21 को पहली बार 1963 में भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया था। मिकोयन ग्युरेविच (मिग-21) का चंडीगढ़ से करीब छह दशक पुराना गहरा नाता रहा है, और यहीं से इसकी विदाई हो रही है। यह विमान न केवल वायुसेना के लिए बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय रहा है। इसकी विदाई भावुक कर देने वाला क्षण होगा, क्योंकि इसने दशकों तक देश की हवाई सीमाओं की सुरक्षा की है। 26 सितंबर को मिग-21 की आखिरी उड़ान भारतीय वायुसेना ने मिग-21 को आधिकारिक तौर पर 26 सितंबर को रिटायर करने का ऐलान किया है। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के आगरा से विशेष टीम भी चंडीगढ़ पहुंच रही है, ताकि इस ऐतिहासिक विदाई में हिस्सा ले सके। मिग-21 का गौरवशाली इतिहास      1963 में भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया।     भारत का पहला सुपरसोनिक लड़ाकू विमान, जिसकी गति ध्वनि की गति से भी अधिक थी।     1971 के भारत-पाक युद्ध में दुश्मन के कई विमानों को मार गिराकर निर्णायक भूमिका निभाई।     कारगिल युद्ध (1999) में भी वीरता और ताकत का परिचय दिया।     ‘वायुसेना की रीढ़’ के रूप में विख्यात, देश की हवाई सुरक्षा की आधारशिला रहा।     62 वर्षों तक भारतीय वायुसेना की ताकत बना रहा। मिग-21 की तकनीकी खूबियां     अधिकतम गति लगभग 2,200 किलोमीटर प्रति घंटा (Mach 2.05)।     उड़ान की अधिकतम ऊंचाई 17,500 मीटर।     हवा से हवा और हवा से जमीन पर मार करने वाली मिसाइलों से लैस।     छोटा, परंतु अत्यंत शक्तिशाली डिजाइन, जो तेज हमलों और हवाई युद्ध के लिए उपयुक्त। मिग-21 की विदाई न केवल भारतीय वायुसेना के लिए बल्कि पूरे देश के लिए एक भावुक और गौरवशाली क्षण है। यह विमान वर्षों तक हमारी हवाई सीमाओं की रक्षा करता रहा और अब अपनी आखिरी उड़ान के साथ इतिहास बन जाएगा।

ओवैसी का सियासी तीर: NDA जीती तो नीतीश नहीं, कोई और होगा बिहार का मुख्यमंत्री

पटना  बिहार चुनाव में अपनी पार्टी की किस्मत आजमाने के लिए एआईएमआईएम (AIMIM) चीफ असदुद्दीन ओवैसी भी कूद चुके हैं। कल उन्होंने सीमांचल में रैली का आगाज कर दिया। इस दौरान वह सत्ता पक्ष के साथ-साथ विपक्षी दलों पर भी खूब बरसे। साथ ही उनके बीजेपी की बी टीम कहने पर भी पलटवार किया। ओवैसी ने एक इंटरव्यू के दौरान यह भी दावा किया है कि बिहार में अगर एनडीए गठबंधन की जीत होती है इसबार नीतीश कुमार की जगह भाजपा का कोई नेता मुख्यमंत्री बनेगा। ओवैसी ने कहा, 'बिहार में अगर एनडीए की सरकार बनी तो इसबार नीतीश कुमार नहीं, बल्कि भाजपा का सीएम होगा।' जब उनसे पूछा गया कि आप भाजपा की बी टीम बनने का आरोप लगता है। आप मुस्लिम वोट काटने के लिए बिहार आए हैं। उन्होंने कहा कि यह महज आरोप है। लालू यादव के घर के बाहर पार्टी कार्यकर्ताओं के पहुंचने पर उन्होंने कहा कि दुश्मन भी आपके घर पर पहुंचता है तो उसे बिठाकर बात करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लालू यादव और तेजस्वी यादव को किस बात का डर है मुझे नहीं मालूम। मेरे दिल में कोई डर नहीं है। उन्होंने कहा कि पिछली बार की तरह इस चुनाव में भी सीमांचल में जो भी दल रहेगा उनके हराएंगे। आपको बता दें कि 2020 के विधानसभा चुनाव में ओवैसी की पार्टी ने सीमांचल में पांच सीटों पर जीत हासिल कर लोगों को चौंका दिया था। यह राजद के लिए बड़ा झटका साबित हुआ था। हालांकि, बाद में चार विधायक आरजेडी में शामिल हो गए थे। इससे पहले बिहार में भाजपा की मदद करने के आरोपों पर नाराजगी जताते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने बुधवार को कहा था कि आगामी विधानसभा चुनाव में अगर उनकी पार्टी को छह सीट दी जाती हैं तो वह विपक्षी दलों के गठबंधन ‘इंडिया’ में शामिल हो जाएंगे। हैदराबाद से सांसद ओवैसी किशनगंज में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। किशनगंज उत्तर बिहार का एक ऐसा जिला है जहां की लगभग दो-तिहाई आबादी मुस्लिम है। यहीं से उन्होंने तीन दिवसीय ‘सीमांचल न्याय यात्रा’ की शुरुआत की। ओवैसी ने कहा, “मेरी पार्टी के बिहार प्रदेश अध्यक्ष ने विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को कई पत्र लिखे हैं। आखिरी पत्र में अनुरोध किया गया है कि विधानसभा की 243 सीटों में से एआईएमआईएम को छह सीटें दी जाएं।” उन्होंने कहा, “अब गेंद ‘इंडिया’ गठबंधन के पाले में है। हमने यह पहल इसलिए की ताकि हम पर भाजपा की मदद करने का आरोप न लगे। अगर गठबंधन की तरफ से उचित जवाब नहीं मिलता है तो यह साफ हो जाएगा कि वास्तव में भाजपा की मदद कौन कर रहा है।”

‘भारत से दिक्कत है…’ बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार यूनुस का विवादित बयान फिर चर्चा में

ढाका  बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने एक बार फिर भारत पर तीखी टिप्पणी की है. न्यूयॉर्क में एशिया सोसाइटी में आयोजित इंटरैक्टिव सेशन में यूनुस ने आरोप लगाते हुए कहा कि फिलहाल भारत के साथ बांग्लादेश के संबंध तनावपूर्ण हैं क्योंकि भारत को उनके देश के छात्रों द्वारा किए गए हालिया आंदोलन पसंद नहीं आए. यूनुस ने कहा, "हमें अभी भारत के साथ कुछ दिक्कते हैं. उन्हें यह अच्छा नहीं लगा कि बांग्लादेश में छात्र क्या कर रहे हैं. और वे शेख हसीना की मेजबानी कर रहे हैं, जो पूर्व प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने ये सारी समस्याएं पैदा कीं और अपने कार्यकाल में कई युवा लोगों को मारने जैसी घटनाओं को अंजाम दिया. यही चीज भारत और बांग्लादेश के बीच तनाव पैदा कर रही है. उन्होंने आगे दावा करते हुए कहा कि सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्म से लगातार भारत की ओर से फर्जी खबरें और प्रचार फैला रहे हैं, जिसमें इस आंदोलन को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है. वे इसे इस्लामी आंदोलन और छात्रों को तालिबानी बता रहे हैं. कह रहे हैं कि उन्हें ट्रेनिंग दी गई है. वे तो यहां तक कहते हैं कि मैं भी तालिबानी हूं. हालांकि मेरे पास दाढ़ी नहीं है और मैं घर पर ही रहा. फिर भी, मेरा प्रचार लगातार जारी है. यूनुस ने जोर देते हुए कहा कि इसलिए मुझे सामने आकर अपनी पहचान दिखानी पड़ी. उन्होंने कहा, "देखिए, यह मुख्य तालिबान है. यही स्थिति वास्तविकता में है." बता दें कि यह टिप्पणी तब आई है जब बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार न्यूयॉर्क में हैं और संयुक्त राष्ट्र की सत्र में भाग लेने आए हैं. यूनुस का कहना है कि भारत के साथ यह तनाव केवल छात्रों के आंदोलनों और मीडिया प्रचार के कारण उत्पन्न हुआ है और इसे राजनीतिक रूप से बढ़ाया जा रहा है.

तेजस Mk1A से दोगुनी होगी वायुसेना की ताकत, HAL को मिला अब तक का सबसे बड़ा ऑर्डर

नई दिल्ली भारत ने अपनी हवाई ताकत को नया आयाम देते हुए 62,370 करोड़ रुपये की मेगा डील पर मुहर लगा दी है. रक्षा मंत्रालय ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के साथ 97 तेजस लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA Mk-1A) खरीदने का कॉन्ट्रैक्ट साइन कर दिया है. यह सौदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) से मंजूरी मिलने के एक महीने बाद हुआ. इससे पहले फरवरी 2021 में सरकार ने 83 तेजस लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए 48,000 करोड़ रुपये की डील की थी. तेजस Mk-1A की खासियतें तेजस पूरी तरह स्वदेशी मल्टी-रोल फाइटर है, जो दुश्मन के सबसे खतरनाक वातावरण में भी उड़ान भर सकता है. इसमें आधुनिक Swayam Raksha Kavach सिस्टम और अत्याधुनिक कंट्रोल एक्ट्यूएटर्स होंगे. इस वर्जन में 64% से ज्यादा इंडिजिनस कॉन्टेंट और 67 नई देसी टेक्नॉलॉजीज शामिल की जा रही हैं. तेजस के ऑपरेशन सिर्फ एयर डिफेंस तक सीमित नहीं, बल्कि यह मैरिटाइम रिकॉनिसेंस और सटीक स्ट्राइक रोल्स भी अंजाम देने में सक्षम है. 2027 से शुरू होंगी डिलीवरी कॉन्ट्रैक्ट के मुताबिक तेजस Mk-1A की डिलीवरी 2027-28 से शुरू होगी. यह सिंगल-इंजन जेट भारतीय वायुसेना के पुराने हो चुके MiG-21 बेड़े की जगह लेगा. स्क्वॉड्रन गैप भरेगा तेजस IAF की मंजूर ताकत 42 स्क्वॉड्रन की है, लेकिन फिलहाल सिर्फ 31 स्क्वॉड्रन ही सक्रिय हैं. नए तेजस फाइटर्स इस खालीपन को भरेंगे और दुश्मनों को जवाब देने की क्षमता को कई गुना बढ़ा देंगे. ‘मेक इन इंडिया’ का सशक्त प्रतीक तेजस प्रोजेक्ट न सिर्फ भारतीय वायुसेना को मजबूती देगा, बल्कि रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर भारत का सबसे बड़ा प्रतीक भी बनेगा. HAL की यह डील घरेलू उद्योग को नई तकनीक, रोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा धक्का देगी. तेजस एमके-1ए डिलीवरी में आएगी तेजी इसी महीने HAL को तेजस LCA MK-1ए के लिए तीसरा जीई-404 इंजन मिल गया. सितंबर 2025 के अंत तक चौथा इंजन भी मिलने की उम्मीद है. यह इंजन अमेरिकी कंपनी से भारत को सप्लाई हो रहे हैं. इंजन की उपलब्धता से तेजस उत्पादन और डिलीवरी की गति बढ़ेगी. एचएएल का कहना है कि तय योजना के मुताबिक भारतीय वायुसेना को विमान सौंपने में अब आसानी होगी. सूत्रों के मुताबिक इस वित्त वर्ष के अंत तक एचएएल को कुल 12 इंजन मिल सकते हैं. तेजस का सफर: 1983 से शुरू हुई कहानी LCA तेजस कार्यक्रम की शुरुआत 1980 के दशक में हुई. 1983 में भारत सरकार ने एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) को प्रोजेक्ट सौंपा. इसका मकसद था रूस के पुराने मिग-21 को बदलना. 2001 में पहली उड़ान भरी गई. 2003 में नाम पड़ा 'तेजस' – जो संस्कृत में 'चमकदार' या 'रेडिएंट' होता है.  2015 में IAF को पहला उत्पादन मॉडल मिला. 2016 में पहला ऑपरेशनल तेजस सौंपा गया. लेकिन देरी हुई – टेक्नोलॉजी चैलेंजेस और फंडिंग की वजह से. फिर भी, भारतीय वैज्ञानिकों ने एवियोनिक्स और रडार खुद बनाए. आज तेजस 4.5 जेनरेशन का मल्टीरोल फाइटर है, जो हवा-हवा, हवा-जमीन और रेकॉन मिशन कर सकता है. पहले सौदे: 2006 में 20 तेजस का ऑर्डर मिला. 2021 में 83 और तेजस Mk1A के लिए 48,000 करोड़ का सौदा हुआ. अब यह 97 का तीसरा बड़ा ऑर्डर है. कुल 220 विमान IAF को मिलेंगे. IAF 324 विमान (18 स्क्वाड्रन) खरीदने की योजना बना रहा है. Mk1A में क्या खास? एडवांस फीचर्स की पूरी लिस्ट तेजस Mk1A तेजस का सबसे एडवांस वर्जन है. यह सिंगल-इंजन, डेल्टा विंग वाला विमान है. इसमें हॉरिजॉन्टल टेल नहीं है, लेकिन फिन लगा है. खाली वजन करीब 5,450 किलोग्राम, अधिकतम टेकऑफ वजन 13,500 किलोग्राम. इंजन GE F404-IN20 है, जो 85 KN थ्रस्ट देता है. अधिकतम स्पीड 1.6 मैक (लगभग 1,900 किमी/घंटा).  मुख्य फीचर्स     उत्तम AESA रडार: एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड ऐरे. दुश्मन को 200 किमी दूर पकड़ता है. मल्टी-टारगेट ट्रैकिंग.     स्वयं रक्षा कवच: इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम. दुश्मन रडार से बचाता है.     कंट्रोल सरफेस एक्ट्यूएटर्स: बेहतर मैन्यूवरिंग.     स्वदेशी कंटेंट: 64% से ज्यादा. पहले सौदे से 67 नई चीजें जोड़ी गईं.     अन्य: डिजिटल फ्लाई-बाय-वायर, हेलमेट माउंटेड डिस्प्ले, मिड-एयर रिफ्यूलिंग. हल्का वजन (6,560 किग्रा), एडवांस एवियोनिक्स, स्टेल्थ फीचर्स.  यह विमान IAF की ऑपरेशनल जरूरतें पूरी करेगा. बालाकोट जैसे मिशनों में उपयोगी. IAF के लिए क्यों जरूरी? रणनीतिक महत्व पुराने मिग-21 रिटायर हो रहे हैं. तेजस Mk1A से नई स्क्वाड्रन बनेंगी. यह स्वदेशी फाइटर दुश्मन (पाकिस्तान, चीन) के खिलाफ मजबूत होगा. सरकार का फोकस इंडिजेनाइजेशन पर है. डिफेंस एक्विजिशन प्रोसीजर 2020 के तहत यह सौदा 'मेक इन इंडिया' को बढ़ावा देगा. अर्थव्यवस्था और नौकरियों को बूस्ट यह प्रोजेक्ट 105 भारतीय कंपनियों को जोड़ेगा. वे डिटेल्ड पार्ट्स बनाएंगी. 6 साल में हर साल 11,750 डायरेक्ट और इंडायरेक्ट नौकरियां पैदा होंगी. HAL के शेयर 2% ऊपर चढ़ गए. एयरोस्पेस इकोसिस्टम मजबूत होगा. MSME और एकेडेमिया को फायदा. भविष्य की योजनाएं: Mk2 और AMCA तेजस Mk1A के बाद Mk2 आएगा, जो बड़ा और ज्यादा ताकतवर होगा. AMCA (एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) 5th जेन स्टेल्थ फाइटर पर काम चल रहा है. HAL और प्राइवेट कंपनियां मिलकर भारत को एयरोस्पेस पावर बनाएंगी.  IAF दुनिया की टॉप एयरफोर्स बनेगी.

‘रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद नहीं रहूंगा राष्ट्रपति’ – जेलेंस्की का चौंकाने वाला ऐलान

कीव रूस के साथ करीब चार साल से चल रही जंग के बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने बड़ा ऐलान किया है. उन्होंने साफ कहा कि रूस के खिलाफ युद्ध खत्म होने के बाद वह राष्ट्रपति पद छोड़ने को तैयार हैं. जेलेंस्की ने कहा कि मेरा मकसद जंग खत्म करना है और उसके बाद इस पद पर नहीं रहना चाहता. 'सीजफायर हुआ तो कराएंगे चुनाव'  जेलेंस्की ने कहा कि उनका इरादा शांतिकाल में अपने देश का नेतृत्व करने का नहीं है. जेलेंस्की ने यह भी कहा कि अगर रूस के साथ सीजफायर हो जाता है, तो वह यूक्रेन की संसद से चुनाव कराने के लिए कहेंगे. यह पूछे जाने पर कि क्या जंग खत्म समाप्त होने पर वह अपना काम खत्म मानेंगे, जेलेंस्की ने कहा कि वह पद छोड़ने के लिए तैयार हैं. उन्होंने कहा, 'मेरा मकसद जगं खत्म करना है, न कि पद के लिए भाग-दौड़ को जारी रखना.' यूक्रेन में जंग की वजह से चुनाव अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिए गए हैं और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से लेकर तमाम आलोचकों ने इस मुद्दे को उठाया है. जेलेंस्की ने कहा कि सुरक्षा स्थिति और यूक्रेन का संविधान, दोनों ही चुनाव कराने में चुनौतियां पेश करते हैं. लेकिन उनका मानना है कि चुनाव मुमकिन हैं. ट्रंप को बताई अपने दिल की बात संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) से कीव लौटने से ठीक पहले जेलेंस्की ने न्यूयॉर्क में यह इंटरव्यू दिया है. जब उनसे पूछा गया कि अगर कई महीनों के सीजफायर पर सहमति बन जाती है, तो क्या वह चुनाव कराने के लिए प्रतिबद्ध होंगे, तो उन्होंने 'हां' में जवाब दिया. जेलेंस्की ने कहा कि मंगलवार को जब वह राष्ट्रपति ट्रंप से मिले थे तो उन्होंने उनसे कहा था कि अगर सीजफायर होता है तो हम इस टाइम पीरियड का इस्तेमाल कर सकते हैं और मैं संसद को यह संकेत दे सकता हूं.' जेलेंस्की ने कहा कि वह समझते हैं कि लोग एक नए जनादेश वाले नेता की चाहत रखते हैं, जो हमेशा के लिए शांति कायम करने के लिए जरूरी फैसले ले सके. उन्होंने कहा कि सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण फिलहाल चुनाव आयोजित करना मुश्किल हो जाएगा, लेकिन उनका मानना है कि ऐसा किया जा सकता है. मई 2024 में ही खत्म हो चुका है कार्यकाल यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की 2019 में भारी वोटों से निर्वाचित हुए थे. अगर रूस के खिलाफ जंग नहीं छिड़ती तो उनका पांच साल का कार्यकाल मई 2024 में ही खत्म हो जाता. युद्ध के शुरुआती महीनों में उनकी लोकप्रियता करीब 90% तक बढ़ गई थी. फरवरी में ट्रंप ने दावा किया था कि यह घटकर 4% रह गई है, लेकिन हाल के ज़्यादातर सर्वे में यह 60% से कहीं ज़्यादा बताई गई है. जुलाई में जब उनके संसदीय सहयोगियों ने यूक्रेन की स्वतंत्र भ्रष्टाचार-विरोधी एजेंसियों को कमज़ोर करने का कदम उठाया, तो ज़ेलेंस्की को घरेलू विरोध का सामना करना पड़ा. हालांकि इस कदम को तुरंत पलट दिया गया, लेकिन इसने जेलेंस्की के नेतृत्व में यूक्रेन की लोकतांत्रिक प्रगति को लेकर चिंताएं जरूर पैदा कर दीं. जंग के बीच चुनाव कराने पर पाबंदी अगर जेलेंस्की चुनाव आयोजित करने के लिए किसी विधेयक का समर्थन करते हैं, तो संसद में उनकी पार्टी के बड़े बहुमत को देखते हुए यह आसानी से पारित हो जाएगा. असल बात यह है कि यूक्रेन के संविधान के तहत मार्शल लॉ के दौरान चुनावों पर साफ तौर पर प्रतिबंध है. अगर उस पर काबू पा भी लिया जाए, तो सुरक्षा स्थिति के कारण रसद व्यवस्था बेहद मुश्किल हो जाएगी. यूक्रेन का लगभग 20% हिस्सा रूस के कब्ज़े में है और लाखों यूक्रेनी विस्थापित हैं. अगर मॉस्को इस प्रक्रिया में बाधा डालने की कोशिश करता है, तो पूरा देश रूसी हमलों की जद में होगा. ज़ेलेंस्की ने कहा, 'मुझे लगता है कि सीजफायर के दौरान सुरक्षा व्यवस्था चुनाव कराने की संभावना दे सकती है, ऐसा हो सकता है.'

मुख्यमंत्री साय से राज्य प्रशासनिक सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों ने की सौजन्य मुलाकात

रायपुर,  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में राज्य प्रशासनिक सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों ने सौजन्य मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल में 2024 बैच के 13 एवं 2021 बैच के एक अधिकारी शामिल थे। मुख्यमंत्री साय ने प्रशिक्षु अधिकारियों से चर्चा के दौरान कहा कि राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी प्रशासन की धुरी हैं। जनता की समस्याओं को हल करने में उनकी अहम भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि प्रशासन के साथ-साथ आपको प्रबुद्ध नागरिक के रूप में समाज की भी चिंता करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एक बेहतर समाज के निर्माण में आप सभी अपना योगदान दें। मुख्यमंत्री श्री साय ने सभी अधिकारियों को पदेन दायित्वों का कुशलतापूर्वक निर्वहन करने के लिए शुभकामनाएँ दीं। छत्तीसगढ़ प्रशासन अकादमी के संचालक टी.सी. महावर ने मुख्यमंत्री  साय को अवगत कराया कि इन अधिकारियों का 7 अप्रैल 2025 से प्रारंभ हुआ इंडक्शन कोर्स अब समाप्त हो रहा है। इसके बाद ये सभी अधिकारी राज्य के विभिन्न जिलों में डिप्टी कलेक्टर के रूप में सेवा देंगे, जहाँ वे शासन के विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली को समझेंगे। मुख्यमंत्री साय ने प्रशिक्षु अधिकारियों से उनके प्रशिक्षण के अनुभव भी जाने। उन्होंने कहा कि यह आपका सौभाग्य है कि आपको राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी के रूप में जनता की सेवा का अवसर मिला है। यह अवसर सभी को नहीं मिलता। पूरे मनोयोग से इस अवसर का लाभ उठाते हुए निष्ठा और समर्पण के साथ अपने प्रशासनिक दायित्वों का निर्वहन करें। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शासन का काम जनहित की नीतियाँ बनाना है, लेकिन उनके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों पर ही रहती है। छत्तीसगढ़ एक अत्यंत समृद्ध राज्य है। यहाँ प्रचुर मात्रा में खनिज और वन संपदा है, मिट्टी उर्वरा है और पावर सेक्टर बहुत मजबूत है। राज्य के विकास में नक्सलवाद एक बड़ी रुकावट था, जो अब अपनी अंतिम साँसें गिन रहा है। हमारे जवान पूरी मुस्तैदी से नक्सलियों का मुकाबला कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का संकल्प है कि 31 मार्च 2026 तक नक्सल समस्या का उन्मूलन कर दिया जाएगा। हमारे बहादुर जवान डटकर मुकाबला कर रहे हैं। इस लक्ष्य की प्राप्ति के बाद छत्तीसगढ़ और तेजी से विकसित होगा। राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के रूप में आपकी जिम्मेदारी भी और अधिक बढ़ जाएगी। विशेष रूप से छत्तीसगढ़ में जनजातीय समाज को आगे लाने में आपकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रशासन में पारदर्शिता लाना हमारी प्राथमिकता है। छत्तीसगढ़ पहला राज्य है जहाँ सुशासन एवं अभिसरण विभाग बनाया गया है। छत्तीसगढ़ में  ई-ऑफिस प्रणाली भी लागू की गई है। छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक नीति निवेशकों को आकर्षित कर रही है। अब तक हमें साढ़े 7 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। छत्तीसगढ़ को अग्रणी राज्य बनाने में आप सभी की भूमिका होगी। मुख्यमंत्री साय ने प्रशिक्षु अधिकारियों से चर्चा के दौरान कहा कि राजस्व मामले सीधे जनता से जुड़े होते हैं। कई बार प्रशासनिक अधिकारियों की एक छोटी-सी पहल से भी लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार राजस्व मामलों के समयबद्ध निराकरण के लिए निरंतर प्रयासरत है। राजस्व प्रक्रियाओं को ऑनलाइन कर सरल बनाया जा रहा है। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ प्रशासन अकादमी के संयुक्त संचालक प्रणव सिंह तथा राज्य प्रशासनिक सेवा के प्रशिक्षु अधिकारी उपस्थित थे।