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भारत-चीन व्यापार ने छुआ नया स्तर, US के साथ डील के बीच राजदूत ने दिया बयान

नई दिल्ली भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील फाइनल होने की खबरों के बीच चीनी राजदूत ने भी एक खुशखबरी दी है। चीनी राजदूत शू फेइहोंग ने मंगलवार को बताया जी कि भारत-चीन द्विपक्षीय व्यापार 2025 में 155 अरब अमेरिकी डॉलर के 'रिकॉर्ड उच्च स्तर' पर पहुंच गया है। यह पिछले साल की तुलना में हुए व्यापार से करीब 12 प्रतिशत से भी अधिक है। उन्होंने कहा कि चीन को भारत का निर्यात भी 9.7 फीसदी बढ़ गया है, जो आर्थिक सहयोग की कई संभावनाओं को रेखांकित करता है। राजदूत चीनी नव वर्ष के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने इस दौरान कहा है कि चीन भारत के ब्रिक्स की अध्यक्षता करने का समर्थन करता है और भारत के साथ बहुपक्षीय समन्वय को मजबूत करने के लिए तत्पर है। उन्होंने कहा कि चीन 'ग्लोबल साउथ' के विकास को आगे बढ़ाने के लिए भारत के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है। वहीं द्विपक्षीय संबंधों की दिशा पर बात करते हुए, जू ने कहा कि पिछले साल तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद चीन और भारत के संबंधों में लगातार सुधार हुआ है। उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तियानजिन में एक सफल बैठक की, जिससे चीन-भारत संबंध 'रीसेट और नई शुरुआत' से सुधार के एक नए स्तर पर पहुंचे।”

भारत की आर्थिक प्रगति: अगले 5 साल में प्रति व्यक्ति आय 4000 डॉलर, चीन से बराबरी करेगा देश

नई दिल्ली भारत के पड़ोसी चीन की जीडीपी भले ही अभी भारत से अधिक हो, लेकिन कई आर्थिक संकेतकों में भारत अब उसके बराबर पहुंचने या उससे तेजी से नजदीक आने की स्थिति में है. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस दशक के अंत तक भारत ‘अपर-मिडिल इनकम’ श्रेणी में शामिल हो जाएगा और प्रति व्यक्ति आय के मामले में चीन और इंडोनेशिया की बराबरी कर लेगा. यह रिपोर्ट भारत की आय संरचना में एक बड़े और ऐतिहासिक बदलाव की ओर इशारा करती है. इनकम में चीन की बराबरी करेगा भारत   एसबीआई के अनुसार, अगले चार वर्षों में यानी 2030 तक भारत की प्रति व्यक्ति आय 4,000 डॉलर तक पहुंच सकती है. भारत की आय में यह बढ़ोतरी लंबी और क्रमिक प्रक्रिया का नतीजा है. आजादी के बाद भारत को लो-इनकम से लोअर-मिडिल इनकम इकोनॉमी बनने में करीब 60 साल लग गए और यह मुकाम 2007 में हासिल हुआ. इस दौरान प्रति व्यक्ति औसत आय 1962 में जहां मात्र 90 डॉलर थी, वहीं 2007 तक यह बढ़कर 910 डॉलर हो गई, यानी सालाना औसतन 5.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. इसके बाद भारत की आर्थिक रफ्तार में तेजी आई. आजादी के बाद देश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने में लगभग छह दशक लगे, लेकिन 2014 तक भारत दो ट्रिलियन डॉलर, 2021 तक तीन ट्रिलियन डॉलर और फिर सिर्फ चार वर्षों में 2025 तक ब्रिटेन को पीछे छोड़ते हुए चार ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन गया. इसके साथ ही भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनकर उभरा. मौजूदा अनुमानों के अनुसार, 2027 तक भारत की अर्थव्यवस्था 5 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को भी छू सकती है. 5 ट्रिलियन डॉलर की ओर भारत SBI की रिपोर्ट के अनुसार, अगर मौजूदा ग्रोथ ट्रेंड जारी रहा तो भारत अगले दो साल में 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन सकता है. भारत को 1 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनने में करीब छह दशक लगे, लेकिन इसके बाद रफ्तार तेज हो गई.     दूसरा ट्रिलियन सिर्फ 7 साल में जुड़ा     तीसरा ट्रिलियन 2021 तक     चौथा ट्रिलियन 2025 तक हासिल होने का अनुमान     2027 के आसपास 5 ट्रिलियन डॉलर का लक्ष्य संभव प्रति व्यक्ति आय में तेज उछाल SBI के मुताबिक, भारत को लो-इनकम देश से लोअर-मिडिल इनकम देश बनने में करीब 60 साल लगे.     1962 में प्रति व्यक्ति आय: 90 डॉलर     2007 में: 910 डॉलर     2009 में: 1,000 डॉलर     2019 में: 2,000 डॉलर     2026 तक अनुमान: 3,000 डॉलर 2030 तक अपर-मिडिल इनकम देश रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक भारत की प्रति व्यक्ति आय 4,000 डॉलर (करीब 3.64 लाख रुपये) तक पहुंच सकती है. इसके साथ ही भारत अपर-मिडिल इनकम देशों की श्रेणी में आ जाएगा, जहां फिलहाल चीन और इंडोनेशिया जैसे देश शामिल हैं. यह बदलाव सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं होगा, बल्कि करोड़ों भारतीयों के जीवन स्तर में सुधार का संकेत देगा. 2047 का बड़ा लक्ष्य सरकार का लक्ष्य है कि 2047 तक भारत एक हाई-इनकम देश बने. इसके लिए प्रति व्यक्ति आय को करीब 13,936 डॉलर तक ले जाना होगा. SBI का मानना है कि अगर भारत 7.5% की औसत वार्षिक आर्थिक वृद्धि बनाए रखता है, तो यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है. हालांकि, अगर हाई-इनकम की सीमा बढ़कर 18,000 डॉलर हो जाती है, तो देश को और तेज रफ्तार से विकास करना होगा. इसके लिए शिक्षा, रोजगार, उद्योग, निर्यात और संरचनात्मक सुधारों पर विशेष जोर देना जरूरी होगा. वैश्विक स्तर पर मजबूत स्थिति पिछले एक दशक में भारत की आर्थिक वृद्धि दर वैश्विक औसत से बेहतर रही है. ग्लोबल ग्रोथ रैंकिंग में भारत 95वें परसेंटाइल में पहुंच चुका है, यानी दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते देशों में शामिल है. वर्ल्ड बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, 1990 में जहां केवल 39 देश हाई-इनकम थे, वहीं 2024 तक इनकी संख्या बढ़कर 87 हो गई है. भारत भी अब तेजी से उसी दिशा में आगे बढ़ता नजर आ रहा है. साल दर साल आय में इजाफा प्रति व्यक्ति आय के मोर्चे पर भी यही रुझान देखने को मिला है. साल 2009 तक भारत की प्रति व्यक्ति आय 1,000 डॉलर तक पहुंची और अगले दस वर्षों में, यानी 2019 तक, यह दोगुनी होकर 2,000 डॉलर हो गई. अनुमान है कि 2026 तक यह बढ़कर 3,000 डॉलर तक पहुंच जाएगी, जिससे देश की खपत क्षमता और मध्यम वर्ग का आकार और मजबूत होगा. इसी पृष्ठभूमि में रेटिंग एजेंसी मूडीज ने भी चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है. मूडीज का मानना है कि मजबूत आर्थिक विस्तार से औसत घरेलू आय को समर्थन मिलेगा, जिसका सीधा असर बीमा जैसे क्षेत्रों की मांग पर पड़ेगा. एजेंसी के अनुसार, तेज ग्रोथ, बढ़ता डिजिटलीकरण, कर सुधार और सरकारी स्वामित्व वाली बीमा कंपनियों में प्रस्तावित बदलाव बीमा प्रीमियम में निरंतर वृद्धि को बढ़ावा देंगे, जिससे उद्योग की लाभप्रदता में भी सुधार आने की संभावना है.

यूरोप से FTA डील का असर: 200 अरब डॉलर का मार्केट, निवेश और रोजगार में जबरदस्त उछाल

 नई दिल्‍ली, भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) का ऐलान 27 जनवरी को होने जा रही है. FTA डील के तहत दोनों अपने देश के मार्केट में पहुंच आसान बनाएंगे. यूरोपीय संघ की वस्‍तुओं की भारत में कम टैरिफ या बिना टैरिफ एंर्टी मिल सकेगी, तो वहीं भारत भी यूरोपीय संघ के देशों में अपनी वस्‍तुओं को कम टैरिफ या बिना टैरिफ बेच सकेगा.  यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने स्विट्ज़रलैंड के दावोस में कहा कि यूरोपीय यूनियन भारत के साथ एक ऐसी डील करने जा रहा है, जो आजतक किसी भी देश ने नहीं किया है. उन्होंने कहा कि इससे 27 देशों के इस समूह को 'फर्स्ट मूवर एडवांटेज' मिलेगा. वहीं दूसरी ओर, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भी आगामी भारत–ईयू व्यापार समझौते को 'मदर ऑफ़ ऑल डील्स' कहा था. आइए जानते हैं इस डील से भारत को क्‍या-क्‍या फायदे होंगे.  भारत के लिए एक बड़ा मार्केट भारत और EU के बीच साल 2024–25 में करीब ₹11.8 लाख करोड़ ($136.5 अरब) का व्यापार हुआ था, जिसमें  एक्‍सपोर्ट $75.8 डॉलर था और इम्‍पोर्ट $60.7 डॉलर रहा.  लेकिन अब एफटीए डील के बाद भारत का एक्‍सपोर्ट तेजी से बढ़ जाएगा. सर्विस सेक्‍टर से लेकर मैन्‍युफैक्‍चरिंग में भी भारत की वस्‍तुओं की संख्‍या यूरोप में बढ़ेगी. आगे बताए जा रहे आंकड़े से भी समझ सकते हैं कि भारत को कितना बड़ा फायदा हो सकता है. दरअसल, यूरोप में 450 मिलियन से ज्‍यादा लोग रहते हैं और यह दुनिया का  20 ट्रिलियन  डॉलर से बड़ा अर्थव्‍यवस्‍था वाला मार्केट है. एफटीए के बाद भारत को इस बड़े मार्केट में कम या बिना टैक्‍स के एंट्री मिलेगी. यूरोपीय संघ दुनिया के सबसे बड़े ट्रेड ब्लॉक्स में से एक माना जाता है, ऐसे में इसका हिस्‍सा बनकर भारत को लंबे समय तक एक्‍सपोर्ट, इन्‍वेस्‍टमेंट और बिजनेस में बड़ा लाभ मिलने वाला है. अनुमान है कि इस डील के बाद भारत का ईयू में कारोबार 136 अरब डॉलर से बढ़कर 200 से 250 अरब डॉलर हो सकता है.  भारत को क्‍या-क्‍या होंगे फायदे 1. एक्सपोर्ट तेजी से बढ़ेगी यूरोपीय संघ दुनिया का सबसे बड़ा ट्रेड ब्‍लॉक है. इस डील के बाद भारतीय प्रोडक्‍ट्स पर इम्‍पोर्ट ड्यूट कम या फिर खत्‍म हो जाएगी. एक रिपोर्ट्स के मुताबिक यूरोप अमेरिका पर निर्भरता खत्‍म करने के लिए भारत के ऑर्म्‍स की ओर देख रहा है, ऐसे में हथियारों की सप्‍लाई भारत से बढ़ सकती है. इसके साथ ही टेक्सटाइल, रेडीमेड गारमेंट, फार्मा प्रोडक्‍ट्स, चमड़ा, जूते, जेम्स एंड ज्वेलरी, आईटी और सर्विस सेक्टर चीजों का एक्‍सपोर्ट तेजी से बढ़ेगा.  2. Make in India को बूस्‍ट मिलेगा  एफटीए डील के बाद भारत और यूरोपीय यूनियन को वो चीजें भी भेजी जाएंगी, जो भारत में बनती हैं. इसमें डिफेंस इक्‍यूपमेंट से लेकर अन्‍य मैन्‍युफैक्‍चरिंग प्रोडक्‍ट्स शामिल हैं. साथ ही कम लागत में रॉ मैटेरियल भी यूरोप से आ सकेंगे, जिससे कम लागत में चीजों का भारत में निर्माण होगा.  बड़े स्‍तर पर निवेश भारत में आएगा, नई फैक्‍ट‍ियां खुलेंगी और टेक्‍नोलॉजी ट्रांसफर भी आसान होगा.  3. नई नाौकरियों के मौके इस डील के बाद उम्‍मीद की जा रही है कि मैन्युफैक्चरिंग, आईटी और डिजिटल सर्विस, लॉजिस्टिक्स और MSME सेक्टर में लाखों डायरेक्‍ट एंड इनडायरेक्‍ट रोजगार के अवसर बनेंगे.  4. भारतीय कंपनियों की यूरोप में एंट्री एफटीए डील के बाद नॉन टैरिफ बैरियर कम होगा,  जिससे ज्‍यादा से ज्‍यादा कंपनियां यूरोप में अपने कारोबार का विस्‍तार करेंगी. साथ ही भारतीय प्रोफेशनल्स को यूरोप में काम करने के ज्‍यादा मौके भी मिलेंगे.  5. चीन पर निर्भरता कम होगी भारत लंबे समय से चीन का विकल्‍प तलाश रहा है. यूरोप से डील के बाद यह ख्‍वाहिश पूरी हो सकती है. भारत के लिए यूरोप एक भरोसेमंद सप्‍लाई चेन पार्टनर बन सकता है. फिर बहुत सी चीजों पर चीन से निर्भरता कम होगी. साथ ही इलेक्ट्रिक व्हीकल, रिन्यूएबल एनर्जी और ग्रीन हाइड्रोजन के लिए नई फंडिंग मिल सकती है.  6. यूरोपीय निवेश से भारतीय कंपनियों फायदा यूरोप बड़े स्‍तर पर अमेरिका को फंड देता है, लेकिन अब अमेरिका उतनी तेज से ग्रो करने वाली इकोनॉमी नहीं है और बार-बार अमेरिकी दबाव के कारण यूरोप को कई समस्‍याओं का भी सामना करना पड़ रहा है. ऐसे में भारत यूरोप के लिए बड़ा मार्केट बन सकता है, जिसमें वे दाव लगा सकते हैं, क्‍योंकि भारत के इकोनॉमी अभी दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाली इकोनॉमी है. यूरोपीय निवेश से स्‍टॉर्टअप्‍स को भी बेनिफिट्स होगा. 

दावोस में भारत की नई पहचान: अब विकासशील देश नहीं, एक शक्तिशाली राष्ट्र

नई दिल्ली 1.2 ट्रिलियन डॉलर की संपत्ति का प्रबंधन करने वाली कंपनी ब्लैकस्टोन के प्रमुख स्टीफन श्वार्जमैन ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की बदलती भूमिका पर मुहर लगा दी है। उन्होंने कहा कि हम जानते हैं कि भारत उभर चुका है और यह बात उन अधिकांश देशों के लिए नहीं कही जा सकती जिन्हें आप आमतौर पर 'इमर्जिंग मार्केट्स' की श्रेणी में रखते हैं। हाल के दिनों में भारतीय शेयर बाजारों से विदेशी निवेशकों की निकासी पर श्वार्जमैन ने एक अलग नजरिया पेश किया। उन्होंने कहा कि शेयर बाजार अक्सर बेहद भावुक और अप्रत्याशित होते हैं। उनके अनुसार, पिछले पांच वर्षों में भारतीय बाजार का प्रदर्शन शानदार रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी खास समय पर भारत का 'कम फैशनेबल' होना या शेयरों का गिरना एक अल्पकालिक घटना है, जबकि लंबी अवधि में भारत का शेयर बाजार एक 'बुल मार्केट' बना रहेगा। विकास की अपार संभावनाएं श्वार्जमैन ने भारत के विकास पथ को आंकड़ों के जरिए समझाया। उन्होंने तुलना करते हुए बताया कि भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी लगभग 3,000 डॉलर है। चीन की प्रति व्यक्ति जीडीपी लगभग 13,000 डॉलर है वहीं, अमेरिका की प्रति व्यक्ति जीडीपी 70,000 से अधिक है। उन्होंने कहा, "भारत के पास विकास का एक बहुत लंबा रास्ता है। यहां एक स्थिर सरकार है, पूंजी की आवश्यकता है और आबादी के जीवन स्तर में सुधार की गुंजाइश है। यहां के लोग काफी बुद्धिमान और मेहनती हैं। यही भारत के उज्ज्वल भविष्य का फॉर्मूला है।" 10 साल में बदल जाएगी दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर चर्चा करते हुए 78 वर्षीय श्वार्जमैन ने इसे बिजली के विकास और स्टीम इंजन के आविष्कार के समान क्रांतिकारी बताया। उन्होंने कहा कि जहां पिछली क्रांतियों को दुनिया बदलने में 50 साल लगे, वहीं AI यह काम महज 10 साल में कर देगा। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि वर्तमान में AI को लेकर कुछ अतिशयोक्ति है और कुछ कम पूंजी वाली कंपनियों का मूल्यांकन बहुत ज्यादा हो गया है, लेकिन उन्होंने 1999 या 2007 जैसी किसी बड़ी मार्केट उन्माद की संभावना से इनकार किया। भारत में ब्लैकस्टोन का विस्तार ब्लैकस्टोन वर्तमान में भारत में रियल एस्टेट और प्राइवेट इक्विटी में सबसे बड़ा विदेशी प्रत्यक्ष निवेशक है। श्वार्जमैन ने संकेत दिए कि कंपनी अब भारत में इन्फ्रास्ट्रक्चर और प्राइवेट क्रेडिट के क्षेत्र में भी अपना विस्तार करने की योजना बना रही है। इंटरव्यू के दौरान एक दिलचस्प मोड़ तब आया जब श्वार्जमैन ने अपनी पत्नी का फोन सुनने के लिए थोड़ा ब्रेक लिया। फोन पर उन्हें खबर मिली कि उनके बेटे और फिल्म निर्माता टेडी श्वार्जमैन की फिल्म 'ट्रेन ड्रीम्स' को 98वें एकेडमी अवार्ड्स (ऑस्कर) के लिए नामांकित किया गया है। यह खबर सुनते ही उन्होंने खुशी में हवा में मुक्का मारते हुए अपनी जीत का जश्न मनाया।

EU के दो प्रमुख नेता 25 जनवरी को भारत दौरे पर, FTA वार्ता होगी महत्वपूर्ण

नई दिल्ली   यूरोपीय संघ (ईयू) के दो बड़े नेता चार दिवसीय दौरे पर भारत पहुंचने वाले हैं। ईयू नेताओं का यह दौरा ऐसे समय में अहम माना जा रहा है, जब भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते को लेकर बातचीत अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। यूरोपियन काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा और यूरोपियन कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन 25 से लेकर 28 जनवरी तक भारत में रहेंगे। इस मौके पर हैदराबाद हाउस में आयोजित कार्यक्रमों के लिए एक्सपी डिवीजन आधिकारिक स्वीकृति प्रक्रिया संचालित करेगा। विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी है कि ज्यादा डिमांड की वजह से, एक्सपी डिवीजन हैदराबाद हाउस के अंदर लोगों की संख्या कम रखेगा और वायर सर्विस को प्राथमिकता दी जाएगी ताकि सभी आउटलेट को विजुअल्स मिल सकें। हैदराबाद हाउस की तस्वीरें और वीडियो विदेश मंत्रालय के सोशल मीडिया हैंडल पर उपलब्ध होंगी और मंत्रालय को क्रेडिट देकर रिपोर्टिंग के लिए इस्तेमाल की जा सकती हैं। बता दें, इसके साथ ही विदेश मंत्रालय ने सभी मीडिया आउटलेट्स से अनुरोध किया है कि हैदराबाद हाउस में होने वाले कार्यक्रम के लिए 23 जनवरी, 2026 को 10 बजे तक गूगल शीट भर दें।इस बार यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन 26 जनवरी को आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे। इसके अलावा, दोनों नेता 27 जनवरी को आयोजित होने वाले 16वें भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता भी करेंगे। भारत दौरे पर उनकी मुलाकात देश की राष्ट्रपति और प्रथम नागरिक द्रौपदी मुर्मू से होगी। इसके साथ ही दोनों नेता भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता भी करेंगे।भारत और ईयू के बीच मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को लेकर बातचीत लगभग अंतिम चरण में है। ऐसे में ईयू नेताओं के भारत दौरे से कयास लगाए जा रहे हैं कि एफटीए का ऐलान हो सकता है।

“भारत ने न्यूजीलैंड को 48 रनों से पटखनी दी, अभिषेक और रिंकू का धमाल”

नागपुर     भारत-न्यूजीलैंड के बीच नागपुर में बुधवार को खेले गए पहले टी20 मैच में टीम इंडिया ने 48 रनों से जीत हासिल की. इस जीत के बाद भारतीय टीम 5 मैचों की सीरीज में 1-0 से आगे हो गई है.  मुकाबले में टॉस जीतकर न्यूजीलैंड की टीम ने पहले गेंदबाजी चुनी थी. भारतीय टीम ने पहले बैटिंग करते हुए अभिषेक शर्मा की तूफानी 84 और रिंकू सिंह की नाबाद 44 रनों की पारी के दम पर 238 रन बनाए थे. इसके जवाब में उतरी मेहमान टीम 7 विकेट खोकर 190 रन ही बना सकी.   ऐसी रही न्यूजीलैंड की पारी 239 रनों के जवाब में उतरी न्यूजीलैंड की शुरुआत बेहद खराब रही. पहले ओवर की दूसरी ही गेंद पर अर्शदीप ने कॉन्वे का विकेट झटक लिया. वो खाता भी नहीं खोल सके. इसके बाद दूसरा ओवर लेकर हार्दिक आए. उन्होंने रचिन रवींद्र को आउट कर दिया. रवींद्र के बल्ले से केवल एक रन आए. यानी 1 रन के स्कोर पर कीवी टीम को 2 झटके लगे. लेकिन इसके बाद ग्लेन फिलिप्स और रॉबिन्सन ने पारी को संभालने की कोशिश की. दोनों के बीच अर्धशतकीय साझेदारी हुई. लेकिन 7वें ओवर में वरुण ने रॉबिन्सन का विकेट झटका. उस वक्त मेहमान टीम का स्कोर 52-3 था. इसके बाद ग्लेन फिलिप्स ने तूफानी पारी खेली. उन्होंने 40 गेंद में 78 रन बनाए. लेकिन 14वें ओवर में उनका विकेट गिरा. इसके बाद चैपमेन ने मोर्चा संभाला. लेकिन 15वें ओवर में वरुण ने उन्हें अपनी फिरकी में फंसा लिया. चैपमेन के बल्ले से 39 रन आए. जब चैपमेन का विकेट गिरा तो न्यूजीलैंड को जीत के लिए 31 गेंद में 96 रन चाहिए थे. इसके बाद भारतीय गेंदबाजों ने शिकंजा कस लिया और 190 के स्कोर पर ही न्यूजीलैंड को रोक दिया. सीरीज का दूसरा मैच अब 23 जनवरी को रायपुर में खेला जाएगा. अभिषेक शर्मा ने कीवी गेंदबाजों को कूट डाला अभिषेक शर्मा टी20 क्रिकेट में लगातार अपनी धाक मजबूत करते जा रहे हैं. दुनिया के नंबर-1 रैंक वाले टी20 अंतरराष्ट्रीय बल्लेबाज़ ने बुधवार (21 जनवरी) को नागपुर में खेले गए पहले टी20 मैच में न्यूजीलैंड की गेंदबाज़ी की धज्जियां उड़ाते हुए 35 गेंदों पर शानदार 84 रन की पारी खेली. 8 छक्के और 5 चौके लगाए पहले बल्लेबाज़ी के लिए उतरी भारतीय टीम को एक बार फिर शुरुआती बढ़त अभिषेक के निडर स्ट्रोकप्ले से मिली. उन्होंने अपनी 84 रनों की पारी में 8 छक्के और 5 चौके लगाए. महज 22 गेंदों में उन्होंने फिफ्टी जमाई. भले ही वह शतक से 16 रन दूर रह गए, लेकिन तब तक वह न्यूजीलैंड को भारी नुकसान पहुंचा चुके थे.  5000 रन भी पूरे इस पारी के साथ अभिषेक शर्मा ने टी20 क्रिकेट में 5000 रन भी पूरे कर लिए और ऐसा करने वाले इस प्रारूप के इतिहास में 131वें खिलाड़ी बन गए. हालांकि, जो बात उन्हें सबसे अलग बनाती है, वह है इन रनों की रफ्तार. 5000 टी20 रन बनाने वाले सभी बल्लेबाज़ों में अभिषेक का स्ट्राइक रेट सबसे ज्यादा है. उन्होंने शानदार 172.54 के स्ट्राइक रेट से यह मुकाम हासिल किया. अभिषेक ने यह उपलब्धि 165 पारियों में हासिल की और वह 5000 टी20 रन पूरे करने वाले चौथे सबसे तेज़ भारतीय बल्लेबाज़ बन गए. भारतीय बल्लेबाज़ों में 5000 टी20 रन तक पहुंचने वाले सबसे तेज़ खिलाड़ी * 143 पारियां – केएल राहुल * 145 पारियां – ऋतुराज गायकवाड़ * 154 पारियां – शुभमन गिल * 165 पारियां – अभिषेक शर्मा * 167 पारियां – विराट कोहली पावरप्ले में उनका दबदबा उनकी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरा है. उनके कुल टी20 अंतरराष्ट्रीय छक्कों में से 60 प्रतिशत से अधिक पहले छह ओवरों में आए हैं. यह एक हैरान करने वाला आंकड़ा है. अभिषेक अब तक पावरप्ले में 49 छक्के जड़ चुके हैं, जो उनसे पीछे पाकिस्तान के साहिबज़ादा फरहान (28 छक्के) से कहीं ज्यादा हैं. फिफ्टी जड़कर भी बनाया रिकॉर्ड अपने सातवें टी20 अंतरराष्ट्रीय अर्धशतक के दौरान अभिषेक ने एक और विश्व रिकॉर्ड अपने नाम किया. उन्होंने महज 22 गेंदों में फिफ्टी पूरी करते हुए 25 गेंदों से कम में अपना आठवां टी20 अंतरराष्ट्रीय अर्धशतक जमाया, जो इस प्रारूप में किसी भी बल्लेबाज़ द्वारा सबसे अधिक है. इस दौरान उन्होंने इंग्लैंड के फिल साल्ट, वेस्टइंडीज़ के एविन लुईस और अपने कप्तान सूर्यकुमार यादव को पीछे छोड़ दिया, जिनके नाम सात-सात ऐसे अर्धशतक दर्ज हैं.   ऐसी रही भारत की पारी  पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारत की शुरुआत अच्छी नहीं रही. दूसरे ही ओवर में संजू सैमसन 10 रन बनाकर आउट हो गए. इसके बाद लंबे समय के बाद टी20 में वापसी कर रहे ईशान किशन भी सस्ते में निपट गए. उनके बल्ले से केवल 8 रन आए. लेकिन इसके बाद अभ‍िषेक शर्मा ने तूफानी पारी खेली और महज 22 गेंदों पर अर्धशतक जड़ दिया. कप्तान सूर्यकुमार यादव भी लय में दिखे. 10 ओवर में भारत का स्कोर 117-2 था. लेकिन 11वें ओवर में भारत को तीसरा झटका लगा जब कप्तान सूर्या 32 रन बनाकर आउट हो गए. सूर्या ने 22 गेंद में 4 चौके और एक छक्के जड़कर 32 रन बनाए. 12वें ओवर में भारत को चौथा झटका लगा जब अभिषेक शर्मा 35 गेंद में 84 रनों की तूफानी पारी खेलकर आउट हुए. अभिषेक ने अपनी पारी में 5 चौके और 8 छक्के लगाए. 14वें ओवर में भारत को 5वां झटका लगा जब शिवम दुबे 9 रन बनाकर आउट हो गए. 16वें ओवर में हार्दिक पंड्या का विकेट गिरा. हार्दिक ने 25 रन बनाए. इसके बाद रिंकू सिंह ने 20 गेंद में 44 रनों की नाबाद पारी खेली और भारत का स्कोर 238 तक पहुंचाया. भारतीय टीम (प्लेइंग इलेवन): संजू सैमसन, अभिषेक शर्मा, ईशान किशन, सूर्यकुमार यादव (कप्तान), रिंकू सिंह, हार्दिक पंड्या, शिवम दुबे, अक्षर पटेल, अर्शदीप सिंह, वरुण चक्रवर्ती, जसप्रीत बुमराह नागपुर टी20 में न्यूज़ीलैंड की  XI  : टिम रॉबिन्सन, डेवोन कॉन्वे, रचिन रवींद्र, ग्लेन फिलिप्स, मार्क चैपमैन, डेरिल मिचेल, मिचेल सेंटनर (कप्तान), क्रिस्टियन क्लार्क, काइल जेमिसन, ईश सोढ़ी, जैकब डफी. का फॉर्म चिंता का विषय है. 

भारत-ईरान संबंध पर खामेनेई के करीबी का बड़ा बयान, चाबहार को लेकर दूर की चिंता

नईदिल्ली /तेहरान  नोबेल पीस प्राइज का सपना लेकर घूमने वाले ट्रंप ने दुनिया भर में जंग मचा दी है. ट्रंप ने पावरफुल भारत के साथ कई देशों से रिश्ते खराब करने की भी पुरजोर कोशिश की है. पहले रूस और फिर ईरान के साथ ट्रेड बंद करवाने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति ने टैरिफ का हथौड़ा मारा था लेकिन उनका सारा प्लान चौपट हो गया. रूस और भारत के रिश्ते तो हर हाल में मजबूत रहते हैं लेकिन अब ईरान ने भी साफ कर दिया है कि इंडिया के साथ उसके रिश्ते कितने तगड़े हैं. खामेनेई के करीबी ने India Iran के रिश्तों पर कही ऐसी बात दुनिया को लग रहा था कि अमेरिका के दबाव में भारत और ईरान के रास्ते अलग हो जाएंगे. इन कयासों के बीच तेहरान से आए एक बयान ने सबको चौंका दिया है. ईरान की नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सदस्य सलार विलायतमदार ने रूस के सरकारी मीडिया RT को दिए इंटरव्यू में बड़ी बात कह दी है. उन्होंने सीधे तौर पर ट्रंप प्रशासन की तरफ इशारा करते हुए कहा कि ‘दुश्मनों और विरोधियों’ की उकसाने वाली कार्रवाइयों का भारत-ईरान के रिश्तों पर कोई असर नहीं पड़ेगा. अमेरिका को दिया तगड़ा जवाब उन्होंने भारत को एक समझदार और तर्कसंगत देश बताते हुए कहा कि ‘नई दिल्ली जानती है कि कौन अपने फायदे के लिए इस दोस्ती में दरार डालना चाहता है’. भारत की सबसे बड़ी चिंता चाबहार बंदरगाह है, जो दिल्ली के लिए मिडिल ईस्ट में तीसरी आंख है. 26 अप्रैल 2026 को अमेरिका द्वारा दी गई ‘प्रतिबंधों से छूट’ खत्म हो रही है और ट्रंप ने धमकी दी है कि जो देश ईरान के साथ बिजनेस करेंगे, उन पर 25% टैरिफ लगाया जाएगा. भारत के लिए यह पोर्ट रूस और सेंट्रल एशिया तक पहुंचने का इकलौता रास्ता है, जिसे वह चाहकर भी नहीं छोड़ सकता. दूर कर दी चाबहार वाली चिंता ये चिंता दूर करते हुए विलायतमदार ने साफ कर दिया कि चाबहार डील 2015 में फाइनल हुई थी और यह दोनों देशों के हितों के लिए है. उन्होंने चाबहार डील को सुरक्षित रखते हुए कह दिया है कि ‘भारत-ईरान के ये रिश्ते सतही राजनीतिक चालों से कहीं ज्यादा गहरे हैं’.

कुछ बड़ा होने की आशंका: भारत ने बांग्लादेश से अपने राजनयिकों के परिवारों को सुरक्षित वापस लाया

नई दिल्ली भारत और बांग्लादेश के बीच मौजूदा संबंधों की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। यही वजह है कि भारत लगातार सतर्कता के साथ तेज निर्णय ले रहा है। माना जा रहा है कि बांग्लादेश में बड़े राजनीतिक बदलाव की आशंका को देखते हुए भारत ने अग्रिम तैयारी शुरू कर दी है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है। दरअसल, बांग्लादेश में अब चुनाव महज कुछ दिनों की दूरी पर है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने चुनाव टालने की कोशिश की और कट्टरपंथी ताकतों को भारत-विरोधी गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित करने का प्रयास किया, ताकि चीन और पाकिस्तान के साथ संबंधों को और मजबूत किया जा सके। लेकिन ये कोशिशें नाकाम रहीं। इसी बीच भारत ने एक अहम और चौंकाने वाला फैसला लिया है। भारत ने बांग्लादेश को नॉन-फैमिली स्टेशन घोषित कर दिया है। इसका मतलब है कि बांग्लादेश में तैनात भारतीय राजनयिकों और अधिकारियों को अब अपने परिवार (पति-पत्नी या बच्चे) को साथ रखने की अनुमति नहीं होगी। पहले यह कैटेगरी सिर्फ इराक, अफगानिस्तान, पाकिस्तान और दक्षिण सूडान जैसे देशों के लिए थी। अब बांग्लादेश भी इस सूची में शामिल हो गया है। बताया जा रहा है कि भारतीय अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए कि उनके परिवारजन 8 जनवरी तक भारत लौट आएं। स्कूल जाने वाले बच्चों वाले परिवारों को 7 दिन की अतिरिक्त छूट दी गई। इस फैसले के अनुसार, 15 जनवरी तक ढाका समेत अन्य जगहों पर पोस्टेड राजनयिकों के अधिकांश परिवार भारत वापस लौट चुके हैं। हालांकि अभी तक विदेश मंत्रालय ने इस फैसले की कोई आधिकारिक सार्वजनिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार यह कदम खुफिया रिपोर्ट्स और सुरक्षा आकलन के आधार पर उठाया गया है। यही कारण है कि देश दुनिया में इस फैसले की चर्चा हो रही है।

भारत में Apple पर संकट के बादल, सरकार की चेतावनी से बढ़ी टेंशन

  नई दिल्ली भारत की प्रतिस्पर्धा नियामक संस्था यानी कि Competition Commission of India (CCI) ने Apple को एक कड़ी चेतावनी जारी की है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक ऐपल 2021 से चल रही एंटीट्रस्ट जांच में देरी करने की कोशिश कर रही है। इससे नाराज होकर CCI ने कंपनी को आखिरी चेतावनी दी है। यह मामला इन ऐप पेमेंट से जुड़ा है और कंपनी पर 38 बिलियन डॉलर यानी कि लगभग 32 लाख करोड़ रुपये का जुर्माना लग सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक ऐपल बार-बार जवाब देने में देरी कर रही है, जिससे जांच प्रक्रिया बाधित हो रही है। अब CCI ने साफ कर दिया है कि अगर अगले हफ्ते तक Apple ने जवाब नहीं दिया, तो वह एकतरफा कार्रवाई करेगी। क्या है पूरा मामला? भारत में ऐपल 2021 से एक एंटीट्रस्ट मामले में फंसी है, जो कि इन-ऐप पेमेंट से संबंधित है। इस कानूनी लड़ाई में कंपनी पर 38 बिलियन डॉलर का जुर्माना लग सकता है। वहीं ऐपल ने भारत के नए एंटीट्रस्ट दंड कानून को चुनौती दी है। दरअसल यह कानून CCI को जुर्माने की राशि तय करने के लिए ऐपल के ग्लोबल टर्नओवर का इस्तेमाल करने की मंजूरी देता है। इसके जवाब में CCI ने ऐपल से जांच पर अपनी आपत्तियां दर्ज करने के लिए कहा था। इस पर ऐपल को लंबे समय से मौका दिया जा रहा है। CCI की सख्त चेतावनी 31 दिसंबर 2025 एक आदेश में CCI ने कहा है कि साफ निर्देश के बाद भी बार-बार समय बढ़ाना सही नहीं है और इससे नियम-कानून कमजोर होते हैं। साथ ही ऐसा करने से मामले को समय पर खत्म करने में समस्या आती है। ऐपल को लेकर CCI का यह भी कहना है कि ऐसी छूट हमेशा के लिए नहीं दी जा सकती। अब CCI ने फैसला किया है कि अगर अगले हफ्ते तक Apple की ओर से जवाब नहीं मिलता, तो वह खुद ही आगे बढ़ेगी और फैसला लेगी। बता दें कि लंबे समय से ऐपल सरकारी आदेश के जवाब देने में सुस्ती दिखा रही है, जिससे मामले को आगे बढ़ाने में समस्या हो रही है। ऐपल का रुख और आगे क्या? रिपोर्ट के मुताबिक Apple का मानना है कि CCI अदालती कार्यवाही को रोकने की कोशिश कर रही है। इस मामले में अगली सुनवाई 27 जनवरी को है और इससे पहले ऐपल की ओर से CCI को जवाब दिया जाना संभव नहीं है। ऐसे में साफ है कि ऐपल अदालत के फैसले के इंतजार में है। हालांकि अगर Apple जवाब नहीं देती है, तो भारत सरकार सख्त कदम उठा सकती है और भारी जुर्माना लगा सकती है।

यूएई राष्ट्रपति का भारत आगमन आज तय, अहम समझौतों पर लग सकती है मुहर

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर, संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान आज भारत की आधिकारिक यात्रा पर आएंगे। संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति के रूप में पदभार ग्रहण करने के बाद यह उनकी तीसरी आधिकारिक भारत यात्रा होगी और पिछले एक दशक में उनकी पांचवीं भारत यात्रा होगी। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इसकी जानकारी दी है। विदेश मंत्रालय ने दी जानकारी विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच सौहार्दपूर्ण, घनिष्ठ और बहुआयामी संबंध हैं, जो मजबूत राजनीतिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों पर आधारित हैं। व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए), स्थानीय मुद्रा निपटान (एलसीएस) प्रणाली और द्विपक्षीय निवेश संधि द्वारा समर्थित ये संबंध दोनों देशों के शीर्ष व्यापारिक और निवेश साझेदारों में से हैं। भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच एक मजबूत ऊर्जा साझेदारी भी है, जिसमें दीर्घकालिक ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्थाएं शामिल हैं। यह दौरा दोनों नेताओं को भारत-यूएई व्यापक रणनीतिक साझेदारी के लिए नए आयाम स्थापित करने का अवसर प्रदान करेगा। इससे पारस्परिक हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान भी संभव होगा, जहां भारत और यूएई के बीच उच्च स्तर की समानताएं हैं। अमेरिका से तनाव के बीच भारत और यूएई के बीच होगी कोई बड़ी डील? अमेरिका से तनाव के बीच भारत को कई देशों से बड़ी उम्मीद है। अब यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के आने के बाद किस तरह की डील होती है, इसपर आधिकारिक घोषणा के बाद ही पता चलेगा। लेकिन विदेश मंत्रालय की ओर से मिली सूचना के आधार पर ऊर्जा के क्षेत्र में कोई बड़ा समझौता हो सकता है। यूएई और भारत के बीच पहले से रहे हैं मजबूत संबंध बता दें कि यूएई और भारत एक-दूसरे के लिए बड़े व्यापारिक भागीदार और निवेशक हैं। दोनों देशों के बीच CEPA यानी व्यापार समझौता जिससे द्विपक्षीय व्यापार करना आसान हुआ है। LCS यानी स्थानीय मुद्रा प्रणाली, इसके तहत दोनों देश अपनी खुद की करेंसी में लेनदेन कर सकते हैं। निवेश संधि, इससे एक-दूसरे के देश में पैसा लगाना सुरक्षित हुआ है।