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घर पर बनाएं शाही राजभोग कुल्फी, केसर और ड्रायफ्रूट्स से भरपूर मलाईदार स्वाद

 गर्मियों में ठंडी-ठंडी आइसक्रीम खाने का मन भला किसका नहीं करता लेकिन बाहर की आइसक्रीम और कुल्फी में बहुत ज्यादा चीनी और प्रिर्जेवेटिव्स का डर रहता है. ऐसे में क्यों ना इस गर्मी में आप घर पर ही राजभोग कुल्फी बनाएं. यह एक ऐसी ही शाही और पारंपरिक मलाईदार डेजर्ट है जो ड्रायफ्रूट्स, केसर और मावे के लाजवाब स्वाद से भरपूर होती है जो बच्चों को खासतौर पर खूब पसंद होती है. यहां हम आपको इसकी आसान रेसिपी बता रहे हैं जिसकी मदद से आप बिना किसी झंझट के बाजार से भी गाढ़ी, दानेदार और मलाईदार राजभोग कुल्फी घर पर ही तैयार कर सकते हैं जिसे खाते ही बच्चे और बड़े सभी इसके दीवाने हो जाएंगे. शाही राजभोग कुल्फी रेसिपी सामग्री फुल क्रीम दूध: 1 लीटर सम्बंधित ख़बरें मावा (खोया) या मिल्क पाउडर चीनी (स्वादानुसार) केसर के धागे 15-20 (2 चम्मच गुनगुने दूध में भीगे हुए) काजू, बादाम और पिस्ता (बारीक कटे हुए) हरी इलायची पाउडर 1 चम्मच कॉर्नफ्लोर (2 चम्मच ठंडे दूध में घुला हुआ कुल्फी को गाढ़ा करने के लिए है. आप चाहें तो स्किप कर सकते हैं) कुल्फी बनाने का तरीका दूध उबालें: एक भारी तले की कड़ाही में दूध डालकर तेज आंच पर उबालें. जब दूध में उबाल आ जाए, तो गैस की आंच धीमी कर दें. दूध को गाढ़ा करें: दूध को धीमी आंच पर तब तक पकाएं जब तक कि वह अपनी मूल मात्रा का आधा न रह जाए. कड़ाही के किनारों पर जमने वाली मलाई को खुरचकर दूध में ही मिलाते रहें, इससे कुल्फी दानेदार बनेगी. मावा और चीनी मिलाएं: जब दूध आधा रह जाए, तो इसमें कद्दूकस किया हुआ मावा (या मिल्क पाउडर) और चीनी डालकर अच्छी तरह मिलाएं. इसे 5 मिनट तक और पकाएं ताकि मावा और चीनी दूध में पूरी तरह घुल जाएं. फ्लेवर और कॉर्नफ्लोर डालें: अब इसमें केसर वाला दूध, इलायची पाउडर और बारीक कटे हुए ड्रायफ्रूट्स (थोड़े से ड्रायफ्रूट्स गार्निशिंग के लिए बचा लें) डालें. इसके बाद, कॉर्नफ्लोर का घोल धीरे-धीरे डालते हुए दूध को लगातार चलाते रहें ताकि गुठलियां न बनें. दूध को 3-4 मिनट और पकाएं, मिश्रण काफी गाढ़ा और मलाईदार हो जाएगा. ठंडा करें: गैस बंद कर दें और कुल्फी के इस गाढ़े मिश्रण को पूरी तरह से ठंडा होने दें. ठंडा होने के बाद इसे कुल्फी मोल्ड (सांचे) या पेपर कप में डालें. ऊपर से बचे हुए कटे हुए ड्रायफ्रूट्स डालें. फ्रीज करें: मोल्ड को एल्युमिनियम फॉयल से ढक दें (ताकि बर्फ के क्रिस्टल न जमने पाएं) और बीच में एक कट लगाकर कुल्फी स्टिक लगा दें. इसे 7-8 घंटे या पूरी रात के लिए डीप फ्रीजर में जमने के लिए रख दें. आपकी ठंडी-ठंडी, मलाईदार राजभोग कुल्फी तैयार है! सांचे को कुछ सेकंड पानी में डिपोकर कुल्फी बाहर निकालें और सर्व करें.

फीफा वर्ल्ड कप 2026 का ऑफिशियल एंथम ‘दाई दाई’ रिलीज, शकीरा-बर्ना बॉय की जोड़ी ने मचाया धमाल

16 साल बाद शकीरा एक बार फिर अपने गाने से वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने को तैयार हैं। 2010 के फीफा वर्ल्ड कप का एंथम ‘वाका वाका’ से दुनिया हिलाने वाली शकीरा अब फीफा विश्व कप 2026 के एंथम ‘दाई दाई’ के साथ वापस लौटी हैं। बीते दिनों गाने का टीजर जारी होने के बाद से फैंस इसका बेसब्री से इंतजार कर रहे थे, अब फीफा वर्ल्ड कप 2026 का ऑफिशियल एंथम ‘दाई दाई’ रिलीज कर दिया गया है। इसे शकीरा ने नाइजीरियन अफ्रोबीट्स के दिग्गज बर्ना बॉय के साथ मिलकर बनाया है। गाने में ये है खास ‘दाई दाई’ लगभग चार मिनट का गाना है, जिसमें अफ्रोबीट्स, डांस-पॉप, वर्ल्ड बीट्स और रेगेटन की भरपूर झलक देखने को मिलती है। ये इस गाने को और भी शानदार बनाती है। गाने के बोल फुटबॉल की भावना को पूरी तरह से दिखाते हैं और खिलाड़ियों व फैंस को उत्साहित करने वाला संदेश भी देते हैं। गाने में फुटबॉल के दिग्गजों का नाम भी लेते हैं, जिनमें माराडोना, माल्डिनी, रोमारियो, क्रिस्टियानो रोनाल्डो, बेकहम, काका और मेस्सी के नाम शामिल हैं। इसके अलावा गाने में इस साल फीफा में भाग लेने वाले देशों जैसे ब्राजील, अर्जेंटीना, कोलंबिया, संयुक्त राज्य अमेरिका और नीदरलैंड्स के नाम भी सुनने को मिलते हैं। ‘वाका वाका’ के बाद फीफा में शकीरा की वापसी ‘दाई दाई’ के जरिए शकीरा ने दूसरी बार फीफा का ऑफिशियल एंथम तैयार किया है। इससे पहले उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में 2010 के फीफा विश्व कप के लिए आइकॉनिक गीत ‘वाका वाका (दिस टाइम फॉर अफ्रीका)’ बनाया था। इसने काफी पॉपुलर्टी पाई थी। जुलाई 2010 में ‘वाका वाका’ बिलबोर्ड हॉट लैटिन सॉन्ग्स, लैटिन एयरप्ले और लैटिन पॉप एयरप्ले चार्ट पर दूसरे नंबर पर पहुंचा। लैटिन रिदम एयरप्ले पर यह आठवें नंबर पर रहा और इसी दौरान बिलबोर्ड हॉट 100 पर 38वें नंबर तक पहुंचा। लैटिन डिजिटल सॉन्ग सेल्स चार्ट पर भी यह 42 हफ्तों तक पहले नंबर पर रहा, जो शाक का उस चार्ट पर सबसे लंबे समय तक रहने वाला गाना है। 11 जून से होगी फीफा 2026 की शुरुआत 2026 फीफा विश्व कप 11 जून को मैक्सिको सिटी के एस्टाडियो एज्टेका स्टेडियम में शुरू होगा। 19 जुलाई को न्यू जर्सी के मेटलाइफ स्टेडियम में इसका फाइनल होगा। जिसका नाम खेलों के लिए बदलकर न्यूयॉर्क न्यू जर्सी स्टेडियम कर दिया गया है। फाइनल में शकीरा, मैडोना और बीटीएस फीफा फाइनल के पहले हाफटाइम शो में जबरदस्त परफॉर्मेंस भी देंगे।

ब्रिक्स समिट में मतभेद, 60 एजेंडों पर सहमति लेकिन ईरान मुद्दे पर विवाद

नई दिल्ली ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में कोई साझा बयान जारी नहीं किया गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि विदेश मंत्रियों के बीच ईरान के मसले को लेकर कोई आम सहमति नहीं बन सकी। ऐसी स्थिति में साझा बयान जारी नहीं किया गया। इसकी बजाय एक आउटकम स्टेटमेंट ही जारी किया गया है। जानकारी मिली है कि ईरान के मसले पर भले ही ब्रिक्स देशों के बीच कोई आम सहमति नहीं बन सकी, लेकिन कुल 60 एजेंडों पर सभी ने विचार साझा किए। सभी देशों के इन एजेंडों पर एक जैसे विचार रहे। इन एजेंडों में ऊर्जा सहयोग, डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर, व्यापार, क्लाइमेट ऐक्शन, फाइनेंशियल कनेक्टिविटी आदि शामिल हैं। दिल्ली में आयोजित विदेश मंत्रियों की इस समिट में ईरान के मसले को लेकर मतभेद हो गए। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ब्रिक्स देशों से मांग की कि वे बयान में ईरान और इजरायल के हमलों की निंदा करें। उन्होंने कहा कि इन दोनों देशों ने ईरान पर जो हमले किए, वह गलत थे और अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ थे। लेकिन ज्यादातर इस पर सहमत नहीं दिखे। इसकी वजह यह है कि भारत समेत ज्यादातर देश चाहते थे कि ईरान के साथ ही अमेरिका और इजरायल के साथ भी संतुलन बनाकर रखा जाए। इसी को लेकर मीटिंग में मतभेद पैदा हो गए और अंत में साझा बयान जारी न करने पर ही सहमति बनी। गुरुवार को इस समिट की शुरुआत हुई थी। अपने शुरुआती भाषण में भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोले जाने की वकालत की थी। उनका कहना था कि समुद्र में संचालन सुरक्षित और निरंतर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी जंग में अंतरराष्ट्रीय सीमा के तहत आने वाले समुद्री क्षेत्र में किसी तरह की बंदी नहीं होनी चाहिए। वहीं ईरान के विदेश मंत्री ने ब्रिक्स देशों से अपील करते हुए कहा कि आप सभी अमेरिका और इजरायल की ओर से हमारे ऊपर हमले की निंदा करें। इस पर सहमति ही नहीं बन पाई। कुछ देश इसके लिए तैयार थे, लेकिन कुछ मुल्कों ने इस पर सहमति नहीं जताई। जयशंकर और अराघची के बीच समिट से इतर क्या हुई बात ब्रिक्स समिट के इतर जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री अराघची के बीच बातचीत हुई। इस दौरान दोनों नेताओं ने इजराय और ईरान के बीच चल रही जंग को लेकर बात की। वहीं जयशंकर ने होर्मुज से जहाजों की आवाजाही होने देने की मांग की। एस. जयशंकर ने कहा कि हमने दोनों देशों के हितों को लेकर बात की। हमारी इस बात को लेकर सहमति है कि जरूरी मुद्दों को बातचीत से हल किया जाए। हमारी क्षेत्रीय स्थिरता और हालातों को लेकर भी बात हुई।

वाहन चालकों पर बढ़ा बोझ, मांडर टोल पर फिर बढ़े नए रेट

 मांडर एनएच में मांडर टोल प्लाजा में एक महीने में दूसरी बार टोल टैक्स के दर में भारी बढ़ोतरी वाहन मालिक पर बोझ बनते जा रहा है। बताया जा रहा है कि यहां एक अप्रैल को ही टोल टैक्स के दरों में प्रति वाहन 5 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी। उसके बाद फिर एक माह पूरा होते ही दूसरी बार एक मई से प्रति वाहन 40 से 275 रुपये तक टोल टैक्स बढ़ा दिया गया है। मांडर टोल प्लाजा के मैनेजर अभिषेक साहू के अनुसार पूर्व में कार, जीप, वैन अन्य लाइट वाहन का सिंगल जर्नी में टोल टैक्स 80 रुपये और उसी दिन रिटर्न जर्नी पर 115 रुपये लगता था। जो अब बढ़कर 120 व 180 रुपये हो गया है। सेम डे के रिटर्न जर्नी बढ़कर 405 व 610 इसी तरह कमर्शियल व्हीकल व लाइट गुड्स व्हीकल में पूर्व में टोल टैक्स का दर सिंगल जर्नी में 125 व रिटर्न जर्नी पर 190 रुपये थे जो अब बढ़कर 195 व 290 रुपये हो गया है। बस व ट्रक में पहले सिंगल जर्नी में 265 व सेम डे के रिटर्न जर्नी में 395 रुपये लगता था जो अब बढ़कर 405 व 610 हो गया है। थ्री एक्सल कमर्शियल व्हीकल में पूर्व में सिंगल जर्नी में 285 व रिटर्न जर्नी में 430 रुपये लगता था जो अब बढ़कर 445 व 665 हो गया है। चार से छह एक्सल वाले व्हीकल में पूर्व में सिंगल जर्नी पर 410 व रिटर्न जर्नी पर 620 रुपये लगता था जो अब बढ़कर 635 व 955 हो गया है। फास्टटैग लेन देन ऑटोमेटिक मोड से होगा इसके अलावा ओवरसाइज व्हीकल में पूर्व में सिंगल जर्नी पर 500 व सेम डे रिटर्न जर्नी पर 755 रुपये लगते थे जो अब बढ़कर 775 के 1165 रुपया हो गया है। इसके अलावा सभी प्रकार के वाहनों के मासिक पास के दर में भी भारी बढ़ोतरी की गई है। साथ ही टोल प्लाजा में अब एक मई से सौ प्रतिशत फास्टटैग लेन देन ऑटोमेटिक मोड से होगा। वाहन का नंबर डालकर मैनुअल मोड की व्यवस्था बंद हो गई है. मैनेजर अभिषेक साहू ने बताया की टॉल टैक्स दर मे बढ़ोतरी मांडर के अलावा रांची गुमला मार्ग पतराचौली टॉल प्लाजा मे दरों की बढ़ोतरी हुई है।  

राजस्थान में ग्रीन एनर्जी पर जोर: एनर्जी कॉन्क्लेव में इलेक्ट्रिक व्हीकल से पहुंचे मुख्यमंत्री

जयपुर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने ईधन बचाने को लेकर एक बार फिर अलग संदेश देने की कोशिश की है. हाल ही में अपने काफिले में गाड़ियों की संख्या कम करने के बाद शुक्रवार (15 मई) को मुख्यमंत्री जयपुर में आयोजित एनर्जी कॉन्क्लेव में इलेक्ट्रिक व्हीकल यानी ईवी से पहुंचे. मुख्यमंत्री का ईवी से कार्यक्रम स्थल पहुंचना पूरे आयोजन में चर्चा का विषय बना रहा. इसे सरकार की ग्रीन एनर्जी, पर्यावरण संरक्षण और सस्टेनेबल ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देने की पहल के तौर पर देखा जा रहा है. सरकार का ग्रीन एनर्जी पर फोकस उनके इस कदम को प्रतीकात्मक होने के साथ-साथ एक बड़े संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है कि सरकार अब पारंपरिक ईंधन के विकल्पों को बढ़ावा देना चाहती है. राजस्थान सरकार पिछले कुछ समय से सौर ऊर्जा, ग्रीन एनर्जी और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को लेकर लगातार फोकस कर रही है. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा कई बार मंच से यह कह चुके हैं कि प्रदेश आने वाले वर्षों में ऊर्जा क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होगा. काफिला कर चुके हैं सीएम मुख्यमंत्री ने हाल ही में अपने काफिले में शामिल वाहनों की संख्या कम कर दी थी. ताकि आम लोगों को कम परेशानी हो, ट्रैफिक बाधित न हो और सरकारी खर्चों में भी कटौती की जा सके. अब ईवी से कार्यक्रम में पहुंचकर उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा बचत का संदेश देने की कोशिश की है. कई जिलों में सोलर पार्क प्रोजेक्ट विकसित करने पर जोर जयपुर में आयोजित एनर्जी कॉन्क्लेव में ग्रीन एनर्जी निवेश, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, सोलर और विंड एनर्जी सेक्टर की संभावनाओं पर चर्चा हुई. राजस्थान पहले से ही देश में सोलर एनर्जी उत्पादन का बड़ा केंद्र बनकर उभरा है. राज्य के कई जिलों में बड़े स्तर पर सोलर पार्क और रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट विकसित किए जा रहे हैं. सरकार का फोकस अब पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों के साथ-साथ स्वच्छ और वैकल्पिक ऊर्जा के विस्तार पर भी है.  

भोजशाला पर हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत, सचिन दवे बोले- मां वाग्देवी मंदिर की पहचान हुई पुनर्स्थापित

भोजशाला पर हाईकोर्ट का फैसला :   भोजशाला को मां वाग्देवी का मंदिर मानकर इसकी सदियों पुरानी पहचान को पुनर्स्थापित किया – सचिन दवे  धार भोजशाला से जुड़ा विवाद वर्षों से भारतीय इतिहास, आस्था और सांस्कृतिक पहचान के केंद्र में रहा है। आज हाईकोर्ट द्वारा दिए गए निर्णय, जिसमें भोजशाला को वाग्देवी अर्थात मां सरस्वती का मंदिर माना गया, ने इस विषय को एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है। यह फैसला केवल एक कानूनी निर्णय नहीं, बल्कि करोड़ों हिंदुओं  की भावनाओं, ऐतिहासिक मान्यताओं और सांस्कृतिक चेतना से जुड़ा हुआ विषय बन गया है। कई लोगों के लिए यह भारतीय सभ्यता और सांस्कृतिक विरासत के सम्मान का क्षण है। आज धार शहर के साथ ही मध्यप्रदेश और सम्पूर्ण भारतवर्ष के सभी सुधिजन इस फैसले पर हर्ष व्यक्त कर रहे हैं, जो की भोजशाला की गरिमा की पुनःस्थापना और सांस्कृतिक पुनरुत्थान का परिचायक है। ज्ञातव्य है की भोजशाला मध्य प्रदेश के धार शहर में स्थित एक अत्यंत प्राचीन और ऐतिहासिक स्थल है। माना जाता है कि इसका संबंध परमार वंश के महान राजा भोज से है, जिन्हें भारतीय इतिहास में विद्या, कला और संस्कृति के संरक्षक के रूप में याद किया जाता है। राजा भोज केवल एक शासक नहीं थे, बल्कि वे एक महान विद्वान, साहित्यकार और स्थापत्य प्रेमी भी थे। इतिहासकारों के अनुसार, भोजशाला उस काल में शिक्षा, संस्कृत अध्ययन और विद्या साधना का प्रमुख केंद्र थी। यहां मां वाग्देवी अर्थात सरस्वती की आराधना की जाती थी और देशभर से विद्वान अध्ययन एवं शास्त्रार्थ के लिए यहां आते थे। भोजशाला की वास्तुकला और वहां पाए गए अनेक शिलालेख, मूर्तियां तथा पुरातात्विक अवशेष इसकी प्राचीन सांस्कृतिक पहचान की ओर संकेत करते हैं। संस्कृत भाषा के शिलालेख, देवी सरस्वती से जुड़े प्रतीक और मंदिर शैली की संरचना लंबे समय से यह दावा मजबूत करते रहे हैं कि यह स्थान मूल रूप से एक मंदिर और विद्या केंद्र था। इसी कारण बड़ी संख्या में लोग इसे भारतीय ज्ञान परंपरा और सनातन संस्कृति का प्रतीक मानते हैं। सभी जानते ही हैं की समय के साथ यह स्थल विवाद का विषय बन गया अथवा बना दिया गया। विभिन्न समुदायों द्वारा इस स्थान को अलग-अलग धार्मिक पहचान से जोड़ा गया और यही कारण रहा कि यह मामला अदालत तक पहुंचा। वर्षों से इस विषय पर कानूनी लड़ाई चल रही थी। अनेक याचिकाएं दायर की गईं, पुरातत्व सर्वेक्षण की मांग हुई, ऐतिहासिक दस्तावेज प्रस्तुत किए गए और विभिन्न पक्षों ने अपने-अपने दावे अदालत के सामने रखे। अंततः विस्तृत सुनवाई और तथ्यों के अध्ययन के बाद हाईकोर्ट का यह निर्णय सामने आया है जिसने सभी आशंकाओं पर पूर्णविराम लगते हुए भोजशाला को माँ वाग्देवी का मंदिर मानकर इसकी सदियों पुरानी पहचान को पुनर्स्थापित किया है।  यह फैसला कई मायनों में ऐतिहासिक हैं क्योंकि यह केवल एक भवन की पहचान तय करने का विषय नहीं, बल्कि भारतीय इतिहास और सांस्कृतिक स्मृति से जुड़ा हुआ मामला है। लंबे समय से जो लोग भोजशाला को मां वाग्देवी का प्राचीन मंदिर मानते रहे, उनके लिए यह निर्णय आस्था और विश्वास की पुष्टि के रूप में देखा जा रहा है। विशेष रूप से मध्य प्रदेश और देशभर के सनातन समाज में इस निर्णय के बाद प्रसन्नता और संतोष का वातावरण दिखाई  दे रहा है। भोजशाला का महत्व केवल धार्मिक दृष्टि से नहीं है, बल्कि यह भारतीय शिक्षा और ज्ञान परंपरा का भी प्रतीक है। प्राचीन भारत में शिक्षा को आध्यात्मिकता और संस्कृति से जोड़ा जाता था। मंदिर केवल पूजा के स्थान नहीं होते थे, बल्कि वे ज्ञान, कला, संगीत, साहित्य और दर्शन के केंद्र भी होते थे। भोजशाला इसी परंपरा का प्रतिनिधित्व करती है। इसलिए यह फैसला भारतीय सभ्यता के उस गौरवशाली अध्याय की याद दिलाता है, जब भारत विश्व में ज्ञान और संस्कृति का अग्रणी केंद्र था। इस पूरे विवाद में पुरातत्व विभाग की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण रही। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा किए गए अध्ययन और विभिन्न ऐतिहासिक प्रमाणों ने इस स्थल की प्राचीनता और सांस्कृतिक महत्व को समझने में मदद की। अदालत ने भी अपने निर्णय में तथ्यों, ऐतिहासिक साक्ष्यों और प्रस्तुत दस्तावेजों को गंभीरता से परखा। यही कारण है कि यह फैसला केवल भावनाओं पर आधारित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे एक विस्तृत न्यायिक प्रक्रिया का परिणाम कहा जा रहा है। हालांकि, ऐसे संवेदनशील मामलों में समाज की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। भारत विविधताओं का देश है, जहां अनेक धर्म, परंपराएं और मान्यताएं साथ-साथ रहती हैं। इसलिए किसी भी न्यायिक निर्णय के बाद सामाजिक सौहार्द बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। लोकतंत्र की शक्ति इसी में है कि सभी पक्ष कानून और संविधान का सम्मान करें तथा शांति और भाईचारे की भावना बनाए रखें। इतिहास को समझना और सांस्कृतिक पहचान का सम्मान करना महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ सामाजिक समरसता भी उतनी ही आवश्यक है। भोजशाला का मुद्दा यह भी दर्शाता है कि भारत में सांस्कृतिक विरासत को लेकर लोगों की भावनाएं कितनी गहरी हैं। आज का भारत केवल आर्थिक और तकनीकी प्रगति की ओर नहीं बढ़ रहा, बल्कि अपनी ऐतिहासिक जड़ों और सांस्कृतिक पहचान को भी पुनः समझने का प्रयास कर रहा है। ऐसे में भोजशाला जैसे विषय लोगों को अपने अतीत, अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ते हैं। कई इतिहासकारों और सांस्कृतिक चिंतकों का मानना है कि भारत के प्राचीन शिक्षा केंद्रों, मंदिरों और सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के लिए अत्यंत आवश्यक है। भोजशाला का महत्व इसी कारण और बढ़ जाता है क्योंकि यह केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है। यदि इस स्थल का संरक्षण और अध्ययन व्यवस्थित रूप से किया जाए, तो यह आने वाले समय में भारतीय इतिहास और संस्कृति के अध्ययन का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है। अंततः, भोजशाला पर आया यह फैसला अनेक लोगों के लिए गौरव, संतोष और सांस्कृतिक आत्मविश्वास का क्षण है। यह निर्णय भारतीय इतिहास, आस्था और न्यायिक प्रक्रिया के संगम का उदाहरण बनकर सामने आया है। साथ ही, यह हमें यह भी याद दिलाता है कि किसी भी सभ्यता की शक्ति केवल उसके वर्तमान में नहीं, बल्कि उसकी सांस्कृतिक स्मृति और ऐतिहासिक चेतना में भी निहित होती है। भारत जैसे प्राचीन राष्ट्र के लिए अपनी विरासत का सम्मान करना केवल … Read more

मुजफ्फरपुर में फार्मर रजिस्ट्री अभियान तेज,पीएम किसान और सब्सिडी योजनाओं से जोड़ने की पहल

 मुजफ्फरपुर  कम जमीन वाले किसान भी हैं तो अनिवार्य रूप से फार्मर रजिस्ट्री (Bihar Farmer Registry 2026) कराएं। यह जरूरी नहीं है कि जिनके पास बीघा और एकड़ में जमीन है वही किसान है। किसी ने एक या दो कट्ठा भूमि भी खेती के लिए खरीदी है। अगर उनके नाम पर जमाबंदी है तो अनिवार्य रूप से फार्मर रजिस्ट्री कराएं, ताकि उन्हें उर्वरक, धान अधिप्राप्ति, पीएम किसान सम्मान निधि योजना समेत सभी सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके। उक्त बातें गुरुवार को डीएम सुब्रत कुमार सेन ने प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में कही। उन्होंने फार्मर रजिस्ट्री अभियान, जनगणना और सहयोग शिविर के बारे में जानकारी दी और इसमें अधिक से अधिक लोगों को भागीदार बनने की अपील की। उन्होंने बताया कि जिले में अब तक कुल दो लाख 74 हजार 321 किसानों का फार्मर रजिस्ट्री के तहत निबंधन किया जा चुका है। इनमें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना से जुड़े किसानों की संख्या एक लाख 41 हजार 185 है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के लाभुक किसानों की कुल संख्या चार लाख 16 हजार 805 है। वहीं, अब तक चार लाख 55 हजार 975 किसानों का ई-केवाईसी पूरा किया जा चुका है। पीएम किसान योजना से जुड़े दो लाख 93 हजार 899 किसानों का ई-केवाईसी कार्य भी पूर्ण हो चुका है। सहयोग सेल का किया गया गठन डीएम ने कहा कि सरकार की महत्वाकांक्षी सात निश्चय-तीन योजना के अंतर्गत सबका सम्मान जीवन आसान के तहत सहयोग शिविर का आयोजन किया जा रहा है। इसका उद्देश्य आम नागरिकों की शिकायतों और समस्याओं का त्वरित एवं प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना है। 19 मई से इसकी शुरुआत होगी। आम नागरिकों की सुविधा के लिए सहयोग हेल्पलाइन नंबर 1100 जारी किया गया है, जो निःशुल्क है। शिविरों की मानिटरिंग के लिए उप विकास आयुक्त की अध्यक्षता में सहयोग सेल का गठन किया गया है। करीब सात लाख परिवारों तक पहुंचे प्रगणक डीएम ने जनगणना के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि एक लाख नौ हजार 797 परिवारों ने स्वगणना किया। मकानों की सूचीकरण प्रक्रिया एवं संबंधित सर्वेक्षण कार्य दो से 31 मई तक चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिले में कुल 9151 हाउस लिस्टिंग ब्लॉक हैं। इनमें से 9015 एचएलबी में कार्य प्रगति पर है। अब तक जिले में कुल छह लाख 80 हजार 493 परिवारों को कवर किया गया है। वहीं, कुल 32 लाख 25 हजार 610 आबादी की गणना की जा चुकी है। जिला जनगणना कोषांग का गठन स्थानीय संयुक्त भवन में किया गया है। जिला सांख्यिकी पदाधिकारी को प्रभारी बनाया गया है। उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि वे सरकार द्वारा संचालित अभियान में सक्रिय सहभागी बनें, सहयोग करें तथा सरकार की योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।

208 करोड़ की परियोजनाओं का शिलान्यास,महराजगंज में बोले सीएम योगी, विकास की रफ्तार नहीं रुकेगी

 महराजगंज  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश के विकास का ग्रोथ इंजन बना है। विकास की प्रक्रिया बिना रुके, बिना डिगे, बिना थके व बिना झुके चलती रहेगी। 2017 के पहले प्रदेश का विकास रुका था। माफिया गरीबों की संपत्तियों पर कब्जा कर रहे थे। सपा, बसपा व कांग्रेस के शासनकाल में अयोध्या में श्रीराम मंदिर व बनारस में काशी विश्वनाथ मंदिर का निर्माण नहीं हो पाता। यह पार्टियां कार्य में स्वयं बांधा बनी थी। इसी के चलते पश्चिम बंगाल की जनता ने भी इन्हें उखाड़ फेंका। मुख्यमंत्री योगी अदित्यनाथ शुक्रवार नौतनवा में 208 करोड़ रुपये से अधिक की 79 परियोजनाओं का शिलान्यास व लोकार्पण करने के बाद उपस्थित लोगों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के चलते डीजल, पेट्रोल व एलपीली की सप्लाई पर व्यापक असर पड़ा है। प्रतिदिन भारत सरकार को हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। कहा कि इस समय विपक्ष के नाकारात्मक नेरेटिव से बचना है। हमें प्रधानमंत्री के साथ खड़े रहना है। छाेटे-छोटे प्रयास कर हम डीजल व पेट्रोल के दुरुपयोग को रोक सकते हैं। उन्होंने कहा कि डबल इंजन की सरकार में तेजी से विकास हो रहा है। सड़कें बेहतर हुईं हैं। शिक्षा व चिकित्सा के क्षेत्र में बेहतर कार्य हुए हैं। महराजगंज सहित प्रदेश के सभी जिलों में मंदिरों का भी कायाकल्प कराया गया है। पहले यह रुपया कब्रिस्तान के बाउंड्रीवाल के निर्माण के लिए खर्च किया जाता था। पूर्ववर्ती सरकारों ने स्वास्थ्य सुविधाओं के विकास पर ध्यान नहीं दिया। इंसेफलाइटिस से पूर्वी उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में नौनिहाल प्रभावित होते थे। अब डलब इंजन की सरकार में उत्तर प्रदेश बीमारू प्रदेश नहीं रह गया है। यहां के लोगों को पहचान का संकट नहीं है। देश में सबसे अधिक एक्सप्रेस -वे, मैट्रो, एयरपोर्ट यूपी में है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत व नेपाल दोनों मित्र देश के रूप में साझी विरासत का प्रतिनिधित्व करते हैं। दोनों के बीच रोटी-बेटी का संबंध है। दोनों देशों के बीच बिना किसी बांधा के आवागमन होता है। सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण इस क्षेत्र का विकास आवश्यक है। उन्होंने कहा कि नौतनवा विधानसभा में भाजपा गठबंधन के प्रत्याशी को पहली बार विजय मिली। उसी कर्ज को चुकाने के लिए जो भी प्रस्ताव यहां के विधायक व सांसद द्वारा दिया जाता है, उसे तत्काल स्वीकृत दी जाती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 के पहले की सरकारों ने वनटांगिया परिवारों की कभी सुधि नहीं ली, लेकिन भाजपा सरकार ने उन्हें भूमि का मालिकाना हक दिलाने के साथ ही सभी अधिकार प्रदान किए। इससे पहले नौतनवा के विधायक ऋषि त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री कार्यक्रम स्थल पर स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। जिले के प्रभारी मंत्री दयाशंकर मिश्र दयालु, पनियरा विधायक ज्ञानेंद्र सिंह, सदर विधायक जयमंगल कन्नौजिया, पूर्व विधायक बजरंग बहादुर सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष संजय पांडेय, जिलाधिकारी गौरव सिंह सोगरवाल, पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी नौतनवा चेयरमैन बृजेश मणि त्रिपाठी, ब्लाक प्रमुख राकेश मद्धेशिया सहित बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

ईंधन बचत की पहल: बिहार सीएम और मंत्रियों ने कम किए सरकारी वाहनों के इस्तेमाल

पटना बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शुक्रवार को नो व्हीकल डे मनाया। मुख्यमंत्री अपने सरकारी आवास लोकसेवक आवास से पैदल चलकर 4 कस्तुरबा गांधी मार्ग सचिवालय स्थित अपने दफ्तर पहुंचे। सम्राट चौधरी के साथ उनके सुरक्षाकर्मी और सीएम कार्यालय के अधिकारी, कर्मी भी पैदल ही पहुंचे। मुख्यमंत्री ने यह कदम उठाकर बिहार की जनता को बड़ा संदेश दिया है कि यदि आवश्यक नहीं हो तो गाड़ियों के इस्तेमाल से बचें और डीजल, पेट्रोल की खपत पर नियंत्रण करें। इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के असर के रूप में देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री के बाद पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश भी पैदल चलकर अपने ऑफिस आए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने सही कहा है। वर्तमान हालातों में इंधन की खपत पर नियंत्रण करना बहुत जरूरी है। इससे पार्यावरण की शुद्धता बनी रहेगी और स्वास्थ्य के ख्याल से भी अच्छा रहेगा। उन्होंने बिहार के आम जनों से अपील की कि सप्ताह में एक दिन गाड़ियों के उपयोग से बचें। आवास से अपने दफ्तर पैदल जाते पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश इससे पहले गुरुवार और बुधवार को मुख्यमंत्री ने अपने काफिले में गाड़ियों की संख्या में कटौती की। बुधवार को मुख्यमंत्री मात्र तीन गाड़ियों के काफिले के साथ अपने ऑफिस में पहुंचे। सीएम का अनुसरण करते हुए कई मंत्री भी एक या दो गाड़ी के साथ ही कार्यालय आए। नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश मिश्रा एक मात्र कार से आए। वे इलेक्ट्रिक कार से पहुंचे। गुरुवार को सीएम सम्राट चौधरी दरभंगा जाने के लिए पटना एयरपोर्ट पर पहुंचे तो उनके साथ एक अपनी और एक सुरक्षा कर्मियों की गाड़ी थी।     बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी आज अपने आवास से सचिवालय पैदल ही गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद सीएम ने अपना काफिला 3 वाहन तक समेट दिया है। बाकी मंत्री और नेता भी कम वाहनों के साथ चलने लगे हैं। कुछ ट्रेन से आते-जाते दिखे हैं।      गुरुवार को सम्राट कैबिनेट के खान एवं भूतत्व मंत्री प्रमोद चंद्रवंशी ने ट्रेन की सवारी की। उन्हें गया जी जाना था तो ट्रेन का सहारा लिया। वंदे भारत ट्रेन से वे गया जी पहुंचे जहां से स्थानीय गाड़ी से आगे निकले। उन्होंने कहा कि ईंधन संरक्षण केवल एक आह्वान नहीं, बल्कि हमारी साझा जिम्मेदारी है। ट्रेन यात्रा से न केवल पेट्रोल-डीजल की बचत हुई, बल्कि हम आम यात्रियों के बीच घुलमिलकर उनके मुद्दों को समझने का अवसर भी मिला। उन्होंने कहा कि यह यात्रा ईंधन बचत के साथ सार्वजनिक परिवहन को प्रोत्साहन देने का प्रयास है। बिहार सरकार विभिन्न योजनाओं में पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दे रही है। यह उसी दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण है। सीएम की पहल का बड़ा असर वैशाली में दिखा। वैशाली डीएम वर्षा सिंह ने शनिवार को नो व्हीकल डे घोषित किया है। डीएम ने कहा कि मध्य पूर्व में तनाव के कारण ईंधन बचत जरूरी है। शनिवार को सरकारी कर्मी वाहन का प्रयोग नहीं करेंगे। जनता से भी अपील की गई है कि कम से कम वाहन का प्रयोग करें। बस, ऑटो का इस्तेमाल ज्यादा करें। अनावश्यक यात्रा से बचने और वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देने का निर्देश दिया गया है।

101 साल बाद भी याद है नीमूचाणा कांड: किसानों पर गोलियां और गांव को जलाने की दर्दनाक कहानी

 अलवर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में पंजाब के जलियांवाला बाग की क्रूरता से तो हर कोई वाकिफ है, लेकिन राजस्थान की धरती पर भी एक ऐसा ही खौफनाक मंजर देखा गया था. अलवर रियासत के नीमूचाणा गांव में आज से ठीक 101 साल पहले यानी 14 मई 1925 को हुआ नरसंहार राजस्थान के इतिहास का सबसे काला अध्याय है. इस नृशंस कांड की 101वीं बरसी पर आज भी पूरा इलाका उन 250 से ज्यादा शहीद किसानों को याद कर भावुक है जिन्होंने दोहरे लगान और दमनकारी नीतियों के खिलाफ अपनी जान न्यौछावर कर दी थी. दोहरे लगान और शोषण के खिलाफ गूंजी थी आवाज तत्कालीन समय में अलवर रियासत के किसान भारी टैक्स, बेगार प्रथा और जंगली सूअरों द्वारा फसलों की बर्बादी से बेहद त्रस्त थे. इसी शोषण के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करने के लिए किसान नीमूचाणा गांव में शांतिपूर्वक तरीके से इकट्ठा हुए थे. किसानों की इस एकजुटता से बौखलाई रियासत की फौज ने पूरे गांव को चारों तरफ से घेर लिया और निहत्थे ग्रामीणों पर अंधाधुंध गोलियां बरसा दीं. इस फायरिंग में 250 से अधिक किसान मौके पर ही शहीद हो गए और 100 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हुए. क्रूरता यहीं नहीं रुकी, फौज ने गांव के करीब 150 घरों को आग के हवाले कर दिया जिससे भारी संख्या में मवेशी भी जिंदा जल गए. महात्मा गांधी ने कहा था 'दूसरा जलियांवाला बाग' इस भयानक नरसंहार की गूंज तत्कालीन समय में पूरे देश में सुनाई दी थी. अजमेर के 'तरुण राजस्थान' और कानपुर के 'प्रताप' अखबार ने इस खबर को प्रमुखता से छापा. महान स्वतंत्रता सेनानी गणेश शंकर विद्यार्थी खुद पैदल चलकर पीड़ितों का दर्द बांटने नीमूचाणा पहुंचे थे. वहीं राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने इस घटना की विभीषिका को देखते हुए इसे 'दूसरा जलियांवाला बाग' करार दिया था. सरदार वल्लभभाई पटेल ने भी बंबई की एक जनसभा में इस दमनकारी नीति की तीखी आलोचना की थी. इस देशव्यापी आक्रोश के आगे झुकते हुए आखिरकार अलवर रियासत को दोहरा लगान और बेगार प्रथा को वापस लेना पड़ा था. आज भी मौजूद हैं गोलियों के निशान नीमूचाणा गांव की पुरानी हवेलियों और दीवारों पर आज भी गोलियों के निशान उस खौफनाक दिन की गवाही देते हैं. दुखद बात यह है कि इस ऐतिहासिक बलिदान के 100 साल से अधिक बीत जाने के बाद भी इस जगह को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा नहीं मिल सका है. स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि हर बार उन्हें केवल आश्वासन मिलते हैं लेकिन धरातल पर कोई ठोस काम नहीं हुआ. अब ग्रामीण अपने स्तर पर ही हर साल कैंडल मार्च निकालकर शहीदों को श्रद्धांजलि देते हैं. वर्तमान में बानसूर से विधायक देवी सिंह शेखावत केंद्र और राज्य की सत्ताधारी पार्टी से हैं, ऐसे में ग्रामीणों को उम्मीद है कि अब इस ऐतिहासिक स्थल को वह गौरव और सम्मान जरूर मिलेगा जिसका यह हकदार है.