samacharsecretary.com

एलोवेरा पौधा सही दिशा में रखने से बढ़ सकती है घर की बरकत और खुशहाली

 आज के दौर में शायद ही कोई ऐसा घर होगा जहां एलोवेरा (Aloe Vera) का पौधा न हो. लोग इसे इसकी सुंदरता और त्वचा के लिए औषधीय गुणों के कारण लगाते हैं.  लेकिन, क्या आप जानते हैं कि वास्तु शास्त्र (Vastu Shastra) में एलोवेरा को केवल एक पौधा नहीं, बल्कि घर की ऊर्जा को बदलने वाला एक शक्तिशाली रक्षक माना जाता है? प्राचीन विज्ञान कहता है कि अगर एलोवेरा सही दिशा में हो, तो यह धन वर्षा कर सकता है और परिवार को रोगों से बचा सकता है, लेकिन अगर गलत दिशा में हो, तो यह तरक्की में रुकावट और मानसिक अशांति का कारण भी बन सकता है. वास्तु अनुसार: एलोवेरा लगाने की सबसे शुभ दिशाएं (Best Directions) पुराने मान्यताओं के अलावा, वास्तु के आधुनिक जानकार एलोवेरा के लिए इन तीन दिशाओं को सबसे उत्तम मानते हैं: पश्चिम दिशा (West) इसे एलोवेरा के लिए सबसे शुभ माना जाता है.  इस दिशा में एलोवेरा रखने से घर के सदस्यों के जीवन में प्यार, प्रगति और प्रतिष्ठा बढ़ती है. यह आपके काम को पहचान दिलाने में मदद करता है. उत्तर दिशा (North) या उत्तर-पूर्व (North-East)  यह कुबेर की दिशा है. यहां एलोवेरा रखने से वित्तीय स्थिति (Financial condition) मजबूत होती है. इससे घर में पैसा टिकने लगता है.  उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में यह स्वास्थ्य पर बहुत अच्छा असर डालता है. दक्षिण-पूर्व कोना (South-East) फायदा: यह अग्नि तत्व का कोना है, लेकिन एलोवेरा पानी और जमीन की ऊर्जा को बैलेंस करता है.  यहां रखने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह (Flow of positive energy) बढ़ता है, जिससे घर में खुशहाली बनी रहती है. यह नौकरी और व्यापार में भी लाभ दे सकता है. इन दिशाओं में कभी न रखें एलोवेरा (Worst Directions) कुछ दिशाएँ एलोवेरा की ऊर्जा के साथ तालमेल नहीं खातीं, जिससे अशुभ परिणाम मिलते हैं. उत्तर-पश्चिम दिशा (North-West) यह वायु तत्व की दिशा है.  यहां एलोवेरा रखने से यह दुर्भाग्य (Bad luck) को आकर्षित कर सकता है. इससे घर के संतुलन बिगड़ता है . यह सदस्यों को मानसिक अशांति या फोकस की कमी महसूस हो सकती है. दक्षिण दिशा (South) या दक्षिण-पश्चिम (South-West)  इन दिशाओं में एलोवेरा रखने से घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है. दक्षिण-पश्चिम में यह रिश्तों में टकराव का कारण बन सकता है. घर के वास्तु दोष कैसे दूर करें? एलोवेरा का उपयोग घर के कई वास्तु दोषों को दूर करने के लिए भी किया जाता है.   मुख्य द्वार पर रक्षक: अपने घर के मुख्य द्वार के बाईं ओर (Left side when exiting) एलोवेरा का पौधा लगाना बहुत शुभ माना जाता है. यह घर के अंदर आने वाली नकारात्मक शक्तियों को रोकता है. बुरी नजर से सुरक्षा (नजर दोष उपाय) अगर घर के बच्चों को बार-बार नजर लगती है, तो घर के प्रवेश द्वार पर दाहिनी ओर एलोवेरा का पौधा लगाएं.  धार्मिक दृष्टि से यह बुरी ऊर्जा को फिल्टर करने का काम करता है. कर्ज मुक्ति और बरकत के लिए (शुक्रवार उपाय) कर्ज से मुक्ति पाने के लिए हर शुक्रवार को एलोवेरा के पौधे में थोड़ा सा कच्चा दूध मिला जल चढ़ाएं. माना जाता है कि इससे माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं .

देर रात एनकाउंटर से दहशत, पुलिस जांच में जुटी

नई दिल्ली दिल्ली में देर रात उस वक्त सनसनी फैल गई, जब सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट पुलिस की स्पेशल स्टाफ टीम और बदमाशों के बीच मुठभेड़ हो गई. पुलिस को सूचना मिली थी कि आपराधिक मामलों में शामिल दो आरोपी इलाके में आने वाले हैं. इसी इनपुट के आधार पर स्पेशल स्टाफ की टीम ने जाल बिछाया और संदिग्धों को घेरने की कोशिश की. पुलिस के मुताबिक, जैसे ही टीम ने दोनों आरोपियों को रोकने का इशारा किया, बदमाशों ने फायरिंग शुरू कर दी. इसके बाद पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई की. कुछ देर तक चली गोलीबारी के दौरान दोनों आरोपियों के पैर में गोली लगी और वे घायल हो गए. पुलिस ने मौके पर ही दोनों को पकड़ लिया. घायल आरोपियों को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है. पुलिस का कहना है कि दोनों आरोपी पहले से कई आपराधिक मामलों में शामिल रहे हैं. फिलहाल उनकी पहचान और आपराधिक रिकॉर्ड की जांच की जा रही है. सूत्रों के अनुसार, पुलिस को इन आरोपियों की लंबे समय से तलाश थी और उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी. मुठभेड़ के बाद इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई. मौके से हथियार और अन्य संदिग्ध सामान भी बरामद किए जाने की बात कही जा रही है. दिल्ली पुलिस की स्पेशल स्टाफ टीम अब दोनों आरोपियों से पूछताछ कर रही है. जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आरोपी किसी बड़े गैंग से जुड़े हैं या नहीं और हाल के दिनों में हुई किसी वारदात में उनकी भूमिका रही है या नहीं. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच जारी है और पूछताछ के बाद कई अहम खुलासे हो सकते हैं. वहीं इस मुठभेड़ के बाद इलाके में दहशत का माहौल हो गया. फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है.

छाछ और लस्सी में कौन ज्यादा फायदेमंद? गर्मी में सेहत के लिए सही विकल्प जानें

 भयंकर गर्मी और धूप में शरीर को अंदर से ठंडा रखना सबसे बड़ी चुनौती होती है. ऐसे में प्यास बुझाने के लिए कोल्ड ड्रिंक्स के बजाय छाछ (Buttermilk) और लस्सी (Lassi) जैसे ट्रेडिशनल ऑप्शंस हमेशा से लोगों की पहली पसंद रहे हैं. दही से बनी ये दोनों चीजें न केवल स्वादिष्ट हैं, बल्कि सेहत के गुणों से भी भरपूर हैं. लेकिन अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि लू और डिहाइड्रेशन से बचने के लिए इन दोनों में से ज्यादा असरदार कौन है? तो आइए इस बारे में जानते हैं. छाछ (Buttermilk) छाछ यानी मट्ठा में कैलोरी काफी कम होती है और इसमें पानी की मात्रा भी अच्छी होती है. छाछ में पोटैशियम और विटामिन B12 जैसे जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स होते हैं जो पसीने के जरिए शरीर से निकले मिनरल्स की कमी को तुरंत पूरा करते हैं. छाछ में मौजूद प्रोबायोटिक्स पेट को ठंडा रखते हैं और भारी भोजन के बाद होने वाली एसिडिटी को कम करने में मदद करते हैं. गर्मी में लू से बचने के लिए छाछ एक नेचुरल रिहाइड्रेशन ड्रिंक की तरह काम करती है. लस्सी (Lassi) लस्सी छाछ के मुकाबले काफी गाढ़ी और हैवी होती है. इसमें दही की मात्रा ज्यादा होती है जो प्रोटीन और कैल्शियम का बेहतरीन सोर्स है. रिपोर्ट के मुताबिक, लस्सी शरीर को इंस्टेंट एनर्जी देने के साथ-साथ लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराती है. अगर आप मीठी लस्सी पीते हैं तो यह ग्लूकोज लेवल को बनाए रखती है, लेकिन वजन कम करने वालों के लिए इसकी कैलोरी अधिक हो सकती है. लस्सी मांसपेशियों की रिकवरी और हड्डियों की मजबूती के लिए भी काफी अच्छी मानी जाती है. पाचन के लिए कौन है ज्यादा असरदार? अगर डाइजेशन की बात करें तो छाछ को लस्सी से अधिक फायदेमंद मानी जाती है. मेडिकल न्यूज टुडे के अनुसार, छाछ में भुना हुआ जीरा, काला नमक और पुदीना मिलाकर पीने से डाइजेशन अच्छा होता है,  शरीर के तापमान कम होता है और मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करती है. वहीं, लस्सी को पचाने में शरीर को थोड़ा अधिक समय लगता है इसलिए इसे सुबह या दोपहर के समय पीना बेहतर होता है. रात के समय लस्सी पीने से सुस्ती या भारीपन महसूस हो सकता है. क्या कहते हैं एक्सपर्ट? तपती धूप में जब आपका शरीर पानी खो रहा हो, तो छाछ सबसे बेहतरीन ऑप्शंस है. फर्मेंटेड डेयरी प्रोडक्ट्स शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाने और गट हेल्थ को सुधारने में मददगार होते हैं. अगर आप वेट लॉस डाइट पर हैं तो मसाला छाछ आपके लिए बेस्ट है. लेकिन अगर आप एक मील रिप्लेसमेंट या भारी वर्कआउट के बाद कुछ हेल्दी चाहते हैं तो लस्सी एक शानदार चॉइस हो सकती है. कुल मिलाकर हाइड्रेशन के लिए छाछ और पोषण के लिए लस्सी का अपना-अपना महत्व है.

तृषा कृष्णन ने विजय को दी बधाई, कहा- उनकी जीत पर बहुत खुश हूं

साउथ सिनेमा के सुपरस्टार थलपति विजय तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री बन गए हैं. 10 मई को उन्होंने शपथ लेकर अपनी राजनीतिक पारी का आगाज कर दिया है. चेन्नई के नेहरू स्टेडियम में हुए इस ऐतिहासिक शपथ ग्रहण समारोह में उनकी को-स्टार और करीबी दोस्त तृषा कृष्णन भी मौजूद रहीं. तृषा ने अपने खास अंदाज से हर किसी का ध्यान खींचा. थलपति विजय के मुख्यमंत्री बनने पर अब तृषा ने अपना पहला रिएक्शन दिया है. तृषा कृष्णन का पहला रिएक्शन आया सामने तमिलनाडु सीएम के शपथ समारोह के बाद तृषा कृष्णन ने मीडिया संग बातचीत की और विजय की जीत पर अपनी खुशी जाहिर की. टाइम्स नाऊ संग बातचीत के दौरान तृषा ने थलपति विजय को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बनने पर बधाई भी दी. तृषा कृष्णन बोलीं- बहुत-बहुत बधाई हो. मैं बहुत ज्यादा खुश हूं. बता दें कि थलपति विजय जब तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद के लिए शपथ ले रहे थे, तब तृषा भी उनके साथ समारोह में मौजूद रहीं. वो खुशी से चहकती नजर आईं. दोस्त विजय की जिंदगी के सबसे अहम और ऐतिहासिक पल में तृषा ने सच्चे दोस्त की तरह उनका साथ दिया और उनकी जीत का जश्न मनाया. इतना ही नहीं शपथ समारोह में तृषा कृष्णन ने थलपति विजय की मां और बहनों को गले लगकर बधाई दी. विजय के परिवार संग तृषा का खास बॉन्ड देखकर फैंस भी खुशी से गदगद नजर आए. परिवार संग दिखा तृषा का बॉन्ड थलपति विजय के सीएम शपथ समारोह में तृषा कृष्णन ने अपनी एंट्री के साथ ही हर किसी का ध्यान खींच लिया था. तृषा पाउडर ब्लू साड़ी में ट्रेडिशनल लुक में नजर आईं. उन्होंने डायमंड चोकर नेकलेस और मैचिंग ईयररिंग्स को साड़ी संग टीमअप किया. बिंदी और गजरा लगाकर अपने ट्रेडिशनल लुक को फाइनल टच दिया. इस लुक में वो काफी खूबसूरत लगीं. तृषा और थलपति विजय की बात करें तो दोनों दोस्त होने के साथ को-एक्टर्स भी हैं. दोनों कई फिल्मों में साथ काम कर चुके हैं, जिनमें 'तिरुपाची' , 'आथी', 'कुरुवी', 'लियो'  हैं. इन सभी फिल्मों में तृषा और थलपति की जोड़ी को फैंस का बेशुमार प्यार मिला है.  

मातृत्व का गहरा अर्थ: शरीर से परे एकत्व और चेतना का अनुभव

भारतीय संस्कृति ने हमेशा मां को दिव्यता से और दिव्यता को मां से जोड़ा है. ऐसा इसलिए है,  क्योंकि मातृत्व का संबंध हमारे अस्तित्व के स्रोत से है. आज भी पूरी दुनिया में लोग 'धरती मां', 'मातृभूमि' और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स में 'मदर बोर्ड' की बात करते हैं. मातृत्व की महिमा में बहुत कुछ कहा गया है. फिर भी इस अवधारणा को बहुत गलत समझा गया है. मातृत्व, 'थाईमाई' या 'मदरहुड' का असल में क्या मतलब है? जब हम 'मां' शब्द कहते हैं तो हमारा मतलब ऐसे व्यक्ति से होता है जिसने कम से कम एक पल के लिए ही सही, किसी दूसरे जीवन के प्रति पूरी तरह से समर्पित होने का अनुभव किया हो. जब बच्चे बड़े हो जाते हैं तो मां के उनके साथ कुछ मुद्दे हो सकते हैं. लेकिन नई पीढ़ी का अस्तित्व मां के अपने शिशु के साथ गहरे एकत्व के अनुभव पर निर्भर करता है. मां के शरीर की हर कोशिका इस नए जीवन की जरूरतों के प्रति रिस्पॉन्ड करती है. यही बात मातृत्व को इतना अनोखा मानवीय अनुभव बनाती है. मातृत्व की पवित्रता इस बात में निहित है कि प्रकृति व्यक्ति को यह एहसास कराने में सहयोग करती है कि उसके अपने शरीर की संकीर्ण सीमाओं से परे कुछ अधिक मौजूद है. यह बात मातृत्व को अद्भुत स्वाभाविक संभावना बनाती है और 'परे' तक पहुंचने का माध्यम बनाती है. मां के रूप में आप अपनी निजी इच्छाओं और नापसंदों से ऊपर उठ जाती हैं और स्वयं से अधिक किसी चीज के साथ एकत्व का अनुभव करती हैं. इस उपहार का 'योग' या एकत्व के रूप में और भी विस्तार किया जा सकता है, जिसका अर्थ है संपूर्ण अस्तित्व के साथ अनुभवजन्य एकत्व की अवस्था. मातृत्व केवल एक जैविक स्थिति होना जरूरी नहीं है. केवल एक बच्चे को जन्म देना कोई महान उपलब्धि नहीं है. कई संस्कृतियों में उन महिलाओं को कलंकित किया गया है जिन्होंने बच्चों को जन्म नहीं दिया. यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है. मातृत्व के जादू को नकारा नहीं जा सकता. लेकिन इसकी पवित्रता केवल प्रजनन की प्रक्रिया में निहित नहीं है. योग विज्ञान, लिंग-भेद से परे प्रत्येक मनुष्य के लिए मां बनने के इस सौभाग्य को सुलभ बनाता है. दुनिया की मां होना एक जैविक मां और बच्चे के बीच का जुड़ाव प्रजाति के कायम रहने को सुनिश्चित करता है. लेकिन यह सरल प्रजनन प्रक्रिया परे जाने का द्वार भी बन सकती है. समावेश की जिस चुनिंदा भावना से कोई मां अपने बच्चे को देखती है, उसे विस्तृत करके पूरी दुनिया को उसमें शामिल किया जा सकता है. एक ऐसा समावेश जो संपूर्ण और शर्त-रहित हो. यही एक योगी का आंतरिक अनुभव होता है. दुर्भाग्य से, कई माताएं पालन-पोषण को स्वामित्व मान बैठती हैं. हालांकि मैं परिवार में सबसे छोटा था, फिर भी मेरी अपनी मां अक्सर मुझे एक बड़े भाई जैसा मानती थीं. एक बार जब उन्होंने अपनी भावनाएं मुझसे थोड़ी कोमलता से व्यक्त कीं तो मैंने उनसे बहुत ही सीधे-सादे अंदाज में पूछा, 'अगर मेरा जन्म पड़ोस वाले घर में हुआ होता तो क्या तब भी आप मेरे बारे में ऐसा ही महसूस करतीं?' वह फूट-फूटकर रो पड़ीं और चली गईं. लेकिन बाद में आंखों में आंसू लिए वापस आईं और मेरे पैर छू लिए. उस दिन उनके भीतर एक तरह का वैराग्य जाग उठा. जब उन्हें यह एहसास हुआ कि हम सबने कितनी पहचान जोड़ रखी है. चाहे वह हमारा शरीर हो, हमारा वंश, हमारा परिवार, हमारा घर या हमारा समुदाय हो. जब मैं लोगों को आध्यात्मिक प्रक्रिया में दीक्षित करता हूं तो सबसे पहले उनसे पूछता हूं कि क्या वे 'पूरी दुनिया की मां' बनने के लिए तैयार हैं. ऐसा इसलिए है, क्योंकि मातृत्व की सच्ची भावना का मतलब किसी एक व्यक्ति को महज एक वस्तु, अपनी निजी संपत्ति या अपना जुनून बना लेना नहीं है. इसके विपरीत, यह चरम प्रेम और शर्त-रहित समावेश की अवस्था है. जहां आप न सिर्फ अपने सगे बच्चे को, बल्कि हर किसी को अपना एक हिस्सा मानते हैं. ऐसी अवस्था में आपके कार्य आपकी निजी इच्छाओं से तय नहीं होते, बल्कि आप बस वही करते हैं जिसकी उस पल जरूरत होती है. यदि मां आपको सृष्टि की गोद में सौंपती है तो योग विज्ञान आपको सीधे सृष्टिकर्ता की गोद में पहुंचाने में सक्षम है. मातृत्व का यह कहीं अधिक गहरा अनुभव एक जबरदस्त उपहार और संभावना है, जो हर किसी के लिए खुली है. चेतना को ऊंचा उठाने का एक सरल तरीका अभी आपके शरीर में जो कुछ भी है उसमें से आपकी मां के गर्भ से आया हुआ अंश अब शायद ही बचा हो. वह ज्यादातर खत्म हो चुका है. आज आपके शरीर का वजन जितने भी किलोग्राम हो, वह सब कुछ 'धरती मां' से आया है. हमें अपनी जन्म देने वाली मां और धरती मां दोनों की सराहना करनी चाहिए और उनके प्रति कृतज्ञ होना चाहिए. हम यहां इस मां और उस मां के कारण हैं. आपको अपने जीवन में योगदान देने वाली हर चीज, हर इंसान की सराहना करनी चाहिए. अगर आप इस बात पर थोड़ी गहराई से गौर करें तो इस पूरी सृष्टि में ऐसी कोई एक भी चीज नहीं है, जिसके बिना आपका अस्तित्व संभव हो. तो मैं चाहता हूं कि आप हर चीज को 'मां' के रूप में देखें. आज 'वृक्ष-मां' का दिन है, तो कल 'पर्वत-मां' का दिन होगा. उसके अगले दिन आपकी जन्म देने वाली मां का दिन होगा. इन दिनों को इस तरह तय किए जाने का मुख्य कारण यह है कि अगर ऐसा न किया जाए, तो लोग शायद कभी अपनी मां के बारे में नहीं सोचेंगे. संस्कृतियां ऐसी ही बन गई हैं. लेकिन अगर आप थोड़े ज्यादा सचेतन हैं, अगर आप खुद को यह याद दिलाते रहें कि 'अरे! ये पेड़ मुझे ऑक्सीजन दे रहे हैं, ये हर पल मुझे सहारा दे रहे हैं.' अगर आप हर चीज में, हर जगह जहां आप घूमते हैं, वहां इस बात को महसूस करें तो आप सचेतन बन जाएंगे.

ब्रिगेड ग्राउंड में ऐतिहासिक शपथ समारोह, दुर्गा छवि और गेरुआ प्रतीकों से सजा मंच

 नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 90 साल के एक बीजेपी सदस्य के पैर छूना फिर ब्रिगेड ग्राउंड में उमड़ी भीड़ के सामने आभार जताते हुए घुटनों के बल बैठ जाना, मंच के बैकग्राउंड में देवी दुर्गा की तस्वीर और मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी का गेरुआ (भगवा) कुर्ता पहने होना… पश्चिम बंगाल में बीजेपी की पहली सरकार का शपथ ग्रहण समारोह कई तरह के प्रतीकों से भरा हुआ था। अगर बंगाल विधानसभा चुनावों ने इतिहास रचा तो बीजेपी ने अपनी पहली सरकार के शपथ ग्रहण के मौके पर इस इतिहास को बनाने में योगदान देने वाले हर पहलू को खास तौर पर सम्मान दिया। भावनात्मक पहलू इस पल का भावनात्मक महत्व साफ झलक रहा था। शपथ लेने के बाद सीएम सुवेंदु ने पीएम मोदी के सामने सिर झुकाया और कुछ देर तक उसी झुकी हुई मुद्रा में रहे, जबकि पीएम ने एक हाथ से उनके जुड़े हुए हाथों को थाम लिया और दूसरे हाथ से मुस्कुराते हुए उनकी पीठ थपथपाई। फिर भीड़ के शोर के बीच उन्होंने सुवेंदु को कसकर गले लगा लिया। सुवेंदु ने गणमान्य व्यक्तियों की कतार के बीच गृह मंत्री अमित शाह के प्रति भी ऐसा ही सम्मान दिखाया। सुवेंदु पर शाह का भरोसा 2020 में शाह की मौजूदगी में टीएमसी छोड़कर बीजेपी में शामिल होने के बाद से गृह मंत्री ने ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ बीजेपी के जमीनी विरोध का नेतृत्व करने के लिए सुवेंदु का पूरा समर्थन किया। यह एक ऐसा भरोसा था जिसका फल मिला। लेकिन यह ऐतिहासिक अवसर उन पुराने और अनुभवी नेताओं की लंबी मेहनत को स्वीकार करने का भी एक मौका था। दिलीप घोष को मौका आरएसएस के पूर्व प्रचारक और बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष और जिन्हें नए नेताओं के उभरने के दौर में कभी-कभी उपेक्षित महसूस हुआ था सुवेंदु के बाद शपथ लेने वाले पहले मंत्री बने। यह उनके दशकों लंबे भगवा विचारधारा के प्रति समर्पण का एक सम्मान था। राजनीतिक हिंसा में मारे गए बीजेपी सदस्यों के परिवार से मुलाकात पीएम मोदी ने बीजेपी के कुछ ऐसे सदस्यों के परिवार वालों से भी मुलाकात की, जिनकी कथित तौर पर पिछले कुछ दशकों में हुई राजनीतिक हिंसा में जान चली गई। बीजेपी ने जिन पांच मंत्रियों को चुना उससे यह साबित होता है कि चुनावों में पार्टी को अलग-अलग सामाजिक और क्षेत्रीय वर्गों का समर्थन मिला है। जहां सुवेंदु ब्राह्मण हैं, वहीं घोष ओबीसी हैं; जबकि अशोक कीर्तनिया, खुदीराम टुडू और निशित प्रमाणिक मतुआ, आदिवासी और राजबंशी समुदायों से आते हैं। एकमात्र महिला सदस्य अग्निमित्रा पॉल, कायस्थ समुदाय से हैं। मुस्लिम समुदाय को जगह नहीं चूंकि बीजेपी का कोई भी विधायक मुस्लिम नहीं है और राज्य में कोई विधान परिषद भी नहीं है, इसलिए सरकार में किसी मुस्लिम को जगह मिलने की संभावना बहुत कम नजर आती है। यह शायद पहला ऐसा मौका होगा जब बंगाल की किसी सरकार में मुस्लिम समुदाय को कोई प्रतिनिधित्व नहीं मिलेगा। टीएमसी ने बीजेपी पर यह आरोप लगाया था कि वे बाहरी लोग हैं और उन्हें बंगाली संस्कृति की कोई परवाह नहीं है। इन आरोपों का जवाब देने के लिए बीजेपी ने खास तौर पर इस कार्यक्रम का आयोजन टैगोर की जयंती के अवसर पर किया और मंच पर इस महान बंगाली विद्वान की तस्वीर भी लगाई गई थी।

ADB ने घटाया भारत का GDP अनुमान, महंगाई बढ़ने की चेतावनी

नई दिल्ली अमेरिका और ईरान युद्ध का असर दुनिया पर पड़ा है और ये आगे भी बना रहेगा. विदेश से भारतीय इकोनॉमी और कच्चे तेल को लेकर एक बुरी खबर आई है. एशियन डेवलपमेंट बैंक यानी ADB के मुताबिक, Iran War की वजह से पैदा हुई ग्लोबल टेंशन का असर जारी रहेगा और कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रह सकती है. इकोनॉमिस्ट ने कहा है कि इसका असर भारत में भी देखने को मिलेगा और यहां पर महंगाई का बम फूट सकता है. इसके साथ ही एडीबी ने भारत के जीडीपी ग्रोथ अनुमान में भी बड़ी कटौती की है. इतनी रहेगी कच्चे तेल की कीमत पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, एडीबी के चीफ इकोनॉमिस्ट अल्बर्ट पार्क ने कहा है कि मिडिल ईस्ट संकट के उम्मीद से अधिक लंबे समय तक चला, इसके कारण सप्लाई चेन में पैदा हुआ रुकावट से कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहने की आशंका है. उन्होंने कहा कि,'Crude Oil की ऊंची कीमतों की संभावना के साथ, नए आउटलुक को देखें, तो ये 2026 के लिए औसत कीमत 96 डॉलर प्रति बैरल रहेगी. 2027 में यह 80 डॉलर प्रति बैरल पर बनी रहनी चाहिए.'  अल्बर्ट के मुताबिक, भविष्य के अनुमानों के अनुसार अगले साल के लिए कीमतें पहले की तुलना में अधिक रहने का संकेत दे रही हैं.  भारत की GDP को लगेगा झटका भारत पर वेस्ट एशिया संकट के प्रभाव के बारे में बात करते हुए अल्बर्ट पार्क ने कहा कि इससे देश की जीडीपी वृद्धि (India's GDP Growth) में 0.6 फीसदी की कमी आएगी, जिससे यह 6.3 फीसदी पर आ जाएगी. गौरतलब है कि एशियाई विकास बैंक ने बीते अप्रैल महीने में अनुमान लगाया था कि भारत की जीडीपी ग्रोथ मौजूदा वित्त वर्ष में 6.9 फीसदी पर मजबूती से बनी रहेगी, जबकि मजबूत घरेलू डिमांड के कारण अगले वित्त वर्ष में बढ़कर 7.3 फीसदी हो जाएगी. पार्क ने राहत भरी बात भी कही कि इससे अगले वर्ष देश का विकास फिर से पटरी पर आ जाएगा. क्या फूटने वाला है महंगाई बम? Middle East War और Crude Oil Price के हाई बने रहने के चलते सिर्फ भारत की जीडीपी पर ही असर नहीं पड़ेगा. बल्कि देश में महंगाई का बम भी फूट सकता है. एडीडी अर्थशास्त्री ने कहा है कि चालू वित्त वर्ष में India Inflation में भी काफी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. पहले अनुमान 4.5 फीसदी का जताया गया था, जिसे बढ़ाते हुए 6.9 फीसदी किया गया है. यानी महंगाई दर में सीधे 2.4 फीसदी का उछाल आ सकता है. देश में महंगाई बढ़ने के पीछे के कारणों के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि भारत आयातित तेल और गैस पर अधिक निर्भर है. अगर चीन को हटा दिया जाए, तो इस वर्ष ग्रोथ पर पड़ने वाला यह नकारात्मक 0.6 फीसदी पूरे क्षेत्र के लिए भी लगभग एक समान है. इकोनॉमिस्ट का कहना है कि फर्टिलाइजर की लागत बढ़ने से किसान कम इस्तेमाल को मजबूर होंगे, जिससे पैदावार कम होगी और साल के अंत में इसकी उपलब्धता भी कम हो जाएगी. इसका सीधा असर खाद्य पदार्थों की कीमतों (Food Price) पर पड़ेगा, लेकिन कितना असर पड़ेगा यह गैस आपूर्ति में व्यवधान पर निर्भर करेगा.

मदर्स डे पर मां को दें सेहत का तोहफा, ये 5 जरूरी हेल्थ टेस्ट हैं बेहद अहम

 मदर्स डे पर मां के लिए सबसे बड़ा गिफ्ट उनकी अच्छी सेहत हो सकती है क्योंकि जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, महिलाओं के शरीर में कई हार्मोनल और फिजिकल बदलाव आते हैं. अक्सर हमारी मां घर की जिम्मेदारियों को छोड़ अपनी सेहत को नजरअंदाज कर देती हैं लेकिन 40 और 50 की उम्र के बाद कुछ बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है. इस मदर्स डे पर आप उन्हें हेल्थ चेकअप का तोहफा दे सकते हैं. समय पर कराए गए ये 5 जरूरी टेस्ट उन्हें भविष्य की गंभीर बीमारियों से बचा सकते हैं और उनकी लंबी उम्र सुनिश्चित कर सकते हैं.   ब्लड प्रेशर और हार्ट हेल्थ चेकअप बढ़ती उम्र में हाई ब्लड प्रेशर एक साइलेंट किलर की तरह काम करता है. मेनोपॉज के बाद महिलाओं में हार्ट डिजीज का रिस्क बढ़ जाता है. क्लीवलैंड क्लीनिक के अनुसार, महिलाओं को रेगुलर ब्लड प्रेशर चेकअप और हार्ट हेल्थ स्क्रीनिंग करानी चाहिए ताकि स्ट्रोक या दिल के दौरे जैसी स्थिति से बचा जा सके. मैमोग्राम (ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग) महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. मोया क्लीनिक हेल्थकेयर की गाइडलाइंस कहती हैं कि 40 साल से ज्यादा उम्र की महिलाओं को हर 1 से 3 साल में मैमोग्राम कराना चाहिए. यह टेस्ट शुरुआती स्टेज में ही गांठ का पता लगा लेता है, जिससे इलाज आसान हो जाता है. बोन डेंसिटी टेस्ट (DEXA Scan) उम्र बढ़ने के साथ महिलाओं की हड्डियां कमजोर होने लगती हैं जिसे ऑस्टियोपोरोसिस कहते हैं. मेडिलाइन प्लस के मुताबिक, 65 साल की उम्र के बाद या मेनोपॉज के दौरान हड्डियों की मजबूती जांचने के लिए DEXA स्कैन बहुत जरूरी है ताकि फ्रैक्चर के खतरे को कम किया जा सके. सर्वाइकल कैंसर के लिए पैप स्मीयर टेस्ट सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए पैप स्मीयर और HPV टेस्ट अनिवार्य हैं. सलाह है कि 30 से 65 साल की महिलाओं को हर 5 साल में HPV के साथ को-टेस्टिंग करानी चाहिए. यह टेस्ट कैंसर बनने से पहले ही सेल्स में होने वाले बदलावों को पकड़ लेता है. लिपिड प्रोफाइल खराब लाइफस्टाइल और उम्र के कारण टाइप-2 डायबिटीज और हाई कोलेस्ट्रॉल का खतरा बना रहता है. हेल्थलाइन के अनुसार, 45 साल की उम्र के बाद हर 3 साल में ब्लड शुगर टेस्ट और हर 5 साल में लिपिड प्रोफाइल टेस्ट कराना चाहिए ताकि शरीर में शुगर और फैट का लेवल कंट्रोल में रहे.

सरकारी अस्पतालों की मशीनें अब रहेंगी दुरुस्त, नई फंडिंग मंजूर

 पटना  राज्य में चिकित्सा उपकरणों को सुचारू रूप से चालू रखने के लिए चलाए जा रहे चिकित्सा उपकरण प्रबंधन एवं रख-रखाव कार्यक्रम के तहत राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए पहली किस्त जारी करने की स्वीकृति दी गई है। इस क्रम में 13 करोड़ 20 लाख रुपये की राशि खर्च के लिए मुक्त की गई है। राज्य स्वास्थ्य समिति ने बिहार के स्वास्थ्य विभाग को उपकरणों के रखरखाव के लिए चालू वित्तीय वर्ष में कुल 50 करोड़ 82 लाख रुपये की आवश्यकता जताई थी, जिसमें पिछले वित्तीय वर्ष की बकाया राशि का भुगतान भी शामिल है। समिति ने हवाला दिया कि प्रदेश के मेडिकल कलेज अस्पतालों से लेकर अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक स्थापित उपकरणों को लगातार कार्यशील बनाए रखने के लिए लिए व्यापक रख-रखाव और प्रबंधन की व्यवस्था लागू की गई है। इसके लिए निविदा प्रक्रिया के माध्यम से एक सेवा प्रदाता एजेंसी का चयन किया गया है। सरकार और एजेंसी से हुए करार के बाद उपकरणों के रखरखाव का कार्य जारी है। विभाग के अनुसार, पूर्व आकलन के अनुसार, राज्य के विभिन्न अस्पतालों में स्थापित उपकरणों की कुल संपत्ति का मूल्य करीब 978 करोड़ रुपये से अधिक है, जबकि इसे 1200 करोड़ रुपये तक होने की संभावना व्यक्त की गई है। इन उपकरणों के रख-रखाव पर सेवा शुल्क सहित हर वर्ष बड़ी राशि खर्च की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इस व्यवस्था से सरकारी अस्पतालों में मशीनों की खराबी कम होगी और मरीजों को बेहतर व निर्बाध चिकित्सा सेवाएं मिल सकेंगी।  

सुबह के ये वास्तु उपाय बदल सकते हैं घर की किस्मत और आर्थिक स्थिति

वास्तु शास्त्र में सुबह के समय को ब्रह्म मुहूर्त के समान बेहद  प्रभावशाली माना गया है. जिस तरह दिन की सही शुरुआत हमारे मूड को बेहतर बनाती है, ठीक उसी तरह सुबह किए गए कुछ खास वास्तु उपाय हमारे घर की ऊर्जा और आर्थिक स्थिति को बदल सकते हैं. यदि आप भी चाहते हैं कि आपका दिन सफल हो और घर में बरकत बनी रहे, तो हर सुबह इन शुभ कामों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा जरूर बनाएं. 1. हथेलियों के दर्शन (कराग्रे वसते लक्ष्मी) सुबह आंख खुलते ही सबसे पहले अपनी दोनों हथेलियों को जोड़कर उनके दर्शन करें. वास्तु और शास्त्रों के अनुसार, हथेलियों के अग्र भाग में लक्ष्मी, मध्य में सरस्वती और मूल भाग में भगवान विष्णु का वास होता है.  ऐसा करने से आत्मविश्वास बढ़ता है और दिन की शुरुआत सकारात्मकता के साथ होती है. 2. मुख्य द्वार पर जल का छिड़काव वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर का मुख्य द्वार ऊर्जा का प्रवेश द्वार होता है. सुबह स्नान के बाद तांबे के लोटे में जल भरकर मुख्य द्वार पर छिड़काव करें. यह उपाय न केवल नकारात्मक ऊर्जा को घर से दूर रखता है, बल्कि मां लक्ष्मी का आगमन भी होता है.  यह उपाय इनकम औऱ बैंक बैलेंस बढ़ाने में बेहद मददगार है. 3. सूर्य देव को अर्घ्य देना सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद तांबे के पात्र से सूर्य देव को जल अर्पित करें. वास्तु के अनुसार, सूर्य को जल देने से मान-सम्मान में वृद्धि होती है और कुंडली के दोष शांत होते हैं. यह उपाय आपके कार्यक्षेत्र में आने वाली बाधाओं को दूर करने में भी मदद करता है. 4. घर के 'ब्रह्मस्थान' की सफाई गर्मी के मौसम में घर के बीचों-बीच के हिस्से यानी 'ब्रह्मस्थान' का महत्व बढ़ जाता है.  हर सुबह सुनिश्चित करें कि यह स्थान पूरी तरह साफ और खाली हो. यहां से धूल-मिट्टी हटाने से घर में ऊर्जा का प्रवाह (Energy Flow) बेहतर होता है और आर्थिक तंगी दूर होती है. 5. तुलसी के पौधे में जल और दीप तुलसी का पौधा घर के वास्तु दोषों को सोखने की अद्भुत क्षमता रखता है.  हर सुबह तुलसी में जल अर्पित करना और संभव हो तो शाम को घी का दीपक जलाना घर में सुख-शांति सुनिश्चित करता है. यह परिवार के सदस्यों के बीच कलह को कम करने में भी सहायक है.