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2026 में लॉन्च हो सकता है फोल्डेबल iPhone, डिजाइन लीक होने पर Apple ने किया मुकदमा

 नई दिल्ली ऐपल उन गिनी चुनी कंपनियों में से है जो अपने आने वाले प्रोडक्ट्स को सालों तक पूरी तरह छुपाकर रखती है. इसलिए आपने दूसरी कंपनियों की तरह ऐपल के किसी प्रोडक्ट का टीजर कभी नहीं देखा होगा. हालांकि सालों से ऐपल के आईफोन लॉन्च से पहले लीक हो जाते हैं.  टेक इंडस्ट्री में एक सच्चाई यह भी है कि ऐपल से जुड़ी सबसे बड़ी कहानियां अक्सर लॉन्च से पहले ही बाहर आ जाती हैं. इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ है. फर्क बस इतना है कि इस बार लीक किसी अफवाह या सप्लाई चेन रिपोर्ट से नहीं, बल्कि उस शख्स से आया है जिसके खिलाफ ऐपल पहले ही कानूनी कार्रवाई कर चुका है. हाल के दिनों में ऐपल के Foldable iPhone को लेकर चर्चाएं फिर तेज़ हो गई हैं. यह वही प्रोडक्ट है जिसे लेकर सालों से कहा जाता रहा है कि ऐपल इस सेगमेंट में तब तक एंट्री नहीं करेगा जब तक टेक्नोलॉजी पूरी तरह तैयार न हो जाए. अब जो जानकारी सामने आई है, वह इसी सोच को मजबूत भी करती है और नए सवाल भी खड़े करती है. जॉन प्रॉसर नाम के यूट्यूबर ने एक बार फिर से Foldable iPhone का डिजाइन लीक किया है. लीक के मुताबिक ऐपल का फोल्डेबल आईफोन बुक स्टाइल डिजाइन में हो सकता है. यानी फोन बंद रहने पर यह एक नॉर्मल बार स्मार्टफोन जैसा दिखेगा और खोलने पर टैबलेट साइज स्क्रीन में बदल जाएगा. बताया जा रहा है कि बाहर की स्क्रीन कॉम्पैक्ट होगी ताकि रोज़मर्रा के इस्तेमाल में फोन भारी न लगे, जबकि अंदर की स्क्रीन बड़ी होगी जो वीडियो, पढ़ने और मल्टीटास्किंग के लिए बनाई गई है. रिपोर्ट के मुताबिक फोल्डेबल आईफोन में क्रीज ना के बराबर होगा. फोल्डेबल फोन की सबसे बड़ी कमजोरी यही रही है कि स्क्रीन के बीच एक लाइन साफ दिखती है. इंडस्ट्री में लंबे समय से चर्चा है कि ऐपल बिना क्रीज़ या बहुत कम क्रीज़ वाली डिस्प्ले टेक्नोलॉजी पर काम कर रहा है, और इसी वजह से वह अब तक फोल्डेबल फोन लॉन्च करने से बचता रहा. इस पूरे मामले को और दिलचस्प बनाता है कानूनी बैकग्राउंड. जिस व्यक्ति ने यह जानकारी शेयर की है, उसके खिलाफ ऐपल पहले ही ट्रेड सीक्रेट चोरी करने का आरोप लगा चुका है. कंपनी का दावा है कि उसके इंटरनल सॉफ्टवेयर और डिजाइन से जुड़ी जानकारी गैरकानूनी तरीके से बाहर लाई गई. इसके बावजूद नई जानकारी सामने आना यह दिखाता है कि ऐपल के लिए अपने सीक्रेट्स को पूरी तरह कंट्रोल में रखना अब पहले जितना आसान नहीं रहा. टेक इंडस्ट्री के जानकार मानते हैं कि फोल्डेबल आईफोन की टाइमिंग भी बेहद अहम होगी. अभी तक फोल्डेबल मार्केट में सैमसंग और कुछ हद तक गूगल जैसे ब्रांड्स मौजूद हैं, लेकिन यह सेगमेंट अभी भी नीश कैटेगरी में ही गिना जाता है. ऐपल की एंट्री इस कैटेगरी को मेनस्ट्रीम बना सकती है, ठीक वैसे ही जैसे उसने पहले स्मार्टफोन और स्मार्टवॉच के साथ किया था. यह भी मुमकिन है कि ऐपल फोल्डेबल आईफोन को एक अलग पहचान के साथ पेश करे. चर्चा है कि कंपनी इसे प्रो या अल्ट्रा कैटेगरी में रख सकती है ताकि यह एक प्रीमियम और लिमिटेड ऑडियंस के लिए बना प्रोडक्ट लगे. इससे ऐपल को टेक्नोलॉजी को धीरे धीरे स्केल करने का वक्त भी मिल जाएगा. फिलहाल ऐपल की तरफ से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. कंपनी हमेशा से लीक और रूमर्स पर प्रतिक्रिया नहीं देती. लेकिन इतना साफ है कि फोल्डेबल आईफोन अब सिर्फ एक दूर की संभावना नहीं रह गया है. इस साल सितंबर में ऐपल iPhone 18 सीरीज के साथ ही फोल्डेबल लॉन्च कर सकता है. 

BBL में आखिरी गेंद पर छक्का, 19 वर्षीय खिलाड़ी ने मेलबर्न रेनेगेड्स को दिलाई पर्थ स्कॉर्चर्स पर 4 विकेट से जीत

 पर्थ  BBL 2026 (बिग बैश लीग 2026) में मेलबर्न रेनेगेड्स ने रोमांचक मुकाबले में पर्थ स्कॉर्चर्स को चार विकेट से हरा दिया. पर्थ स्टेडियम में गुरुवार को पहले बल्लेबाजी करते हुए स्कॉर्चर्स की टीम 19.2 ओवर में 127 रनों पर सिमट गई. जवाब में रेनेगेड्स ने आखिरी गेंद पर जीत हासिल की. मैच के हीरो 19 साल के ओल‍िवर पीक रहे, जिन्होंने दर्शकों के शोर के बीच आखिरी गेंद पर छक्का लगाकर टीम को जीत दिलाई. जीत के लिए उनकी टीम को चार रन चाहिए थे और पीक ने एरोन हार्डी की गेंद को फाइन लेग के ऊपर से स्टैंड्स में भेज दिया. इससे पहले पीक 17वें ओवर में कैच आउट दिए गए थे, लेकिन रिप्ले में गेंद जमीन को छूती दिखी और उन्हें जीवनदान मिला. इसके बाद उन्होंने कप्तान विल सदरलैंड के साथ अहम साझेदारी निभाई. गेंदबाजी में गुरिंदर संधू ने चार विकेट लेकर स्कॉर्चर्स को बड़ा स्कोर बनाने से रोका. पर्थ की ओर से एरॉन हार्डी ने सबसे ज्यादा 44 रन बनाए, लेकिन टीम का मिडिल ऑर्डर बुरी तरह लड़खड़ा गया और आखिरी पांच विकेट सिर्फ 16 रन में गिर गए. ओल‍िवर पीक को उनकी दमदार पारी के लिए 'प्लेयर ऑफ द मैच' दिया गया.  ध्यान रहे बिग बैश लीग में ऑस्ट्रेल‍िया की 8 टीमें एडिलेड स्ट्राइकर्स, ब्रिस्बेन हीट, होबार्ट हरिकेन्स, मेलबर्न रेनेगेड्स, मेलबर्न स्टार्स, पर्थ स्कॉर्चर्स, सिडनी सिक्सर्स और सिडनी थंडर खेलती हैं. इस समय होबार्ट हर‍िकेन्स 7 मुकाबलों में 5 जीतकर प्वाइंट्स टेबल में टॉप पर हैं. टूर्नामेंट की शुरुआत 14 दिसंबर को हुई थी, जबक‍ि इसका फाइनल 25 जनवरी को होगा. 

सावधान किसान! PM-Kisan की ₹2000 किस्त अटकने का खतरा, जानें क्या करना है तुरंत

नई दिल्ली प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM-Kisan) का लाभ लेने वाले करोड़ों किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। अब अगली किस्त पाने के लिए केवल ई-केवाईसी (e-KYC) पर्याप्त नहीं होगी; सरकार ने 'फार्मर आईडी' (Farmer ID) को अनिवार्य करने की तैयारी कर ली है। यदि आपके पास यह डिजिटल पहचान पत्र नहीं है, तो आपकी ₹2000 की अगली किस्त अटक सकती है। क्या है फार्मर आईडी और क्यों है जरूरी? फार्मर आईडी किसानों की एक डिजिटल पहचान है, जिसे 'एग्रीस्टैक' (AgriStack) पहल के तहत तैयार किया जा रहा है। यह आईडी न केवल किसान की पहचान सुनिश्चित करेगी, बल्कि इसमें उनकी खेती से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी डिजिटल रूप में दर्ज होगी।     जमीन का विवरण: किसान के पास कितनी और कहां जमीन है।     फसल और खाद: कौन सी फसल उगाई गई है और किस खाद का उपयोग हुआ है।     अन्य विवरण: पशुपालन, सिंचाई के साधन और कृषि ऋण से जुड़ी जानकारी। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ केवल पात्र और असली किसानों तक ही पहुंचे और बीच में होने वाली गड़बड़ियों को रोका जा सके। योजना का मौजूदा स्वरूप पीएम किसान योजना के तहत किसानों को सालाना ₹6000 की आर्थिक मदद दी जाती है। यह राशि ₹2000 की तीन किस्तों में सीधे बैंक खाते (DBT) के जरिए भेजी जाती है। सामान्यतः प्रत्येक किस्त 4 महीने के अंतराल पर आती है, हालांकि प्रशासनिक कारणों से इस समय सीमा में थोड़ा बदलाव हो सकता है। कैसे बनवाएं अपनी फार्मर आईडी? किसान अपनी डिजिटल आईडी ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से बनवा सकते हैं: 1. ऑनलाइन प्रक्रिया:     सबसे पहले आधिकारिक पोर्टल AgriStack पर जाएं।     पोर्टल पर अपना रजिस्ट्रेशन करें और आधार कार्ड के जरिए ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूरी करें।     मांगी गई अपनी भूमि और फसल संबंधी जानकारी दर्ज करें।     आवश्यक दस्तावेज स्कैन कर सबमिट करें। विभाग द्वारा सत्यापन (Verification) के बाद आपकी यूनिक फार्मर आईडी जेनरेट हो जाएगी। 2. ऑफलाइन प्रक्रिया: जो किसान तकनीक के जानकार नहीं हैं, उनके लिए सरकार देश भर के ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष कैंप लगा रही है। किसान अपने नजदीकी कैंप या कृषि विभाग के कार्यालय में जाकर आवश्यक दस्तावेजों की मदद से अपनी आईडी बनवा सकते हैं।  

देसी F-35 की धमाकेदार एंट्री, दुश्‍मनों का आसमान में मुकाबला करने के लिए एयर डिफेंस सिस्‍टम पर पड़ेगा दबाव

बेंगलुरु  देश के साथ ही दुनियाभर में सामरिक हालात लगातार बदल रहे हैं. रूस-यूक्रेन युद्ध हो या इजरायल का ईरान पर अटैक या फिर भारत का ऑपरेशन सिंदूर, इन सब घटनाओं से ग्‍लोबल लेवल पर अभूतपूर्व स्थिति पैदा हुई है. कुछ दिनों पहले ही अमेरिका ने एक हाइपर-सीक्रेट ऑपरेशन को अंजाम देते हुए वेनेजुएला के राष्‍ट्रपति को गिरफ्तार कर लिया. वॉशिंगटन के इस कदम ने दुनिया को हिलाकर रख दिया है. सबके दिल-दिमाग में एक ही सवाल चल रहा है- क्‍या अब जिसकी लाठी, उसकी भैंस वाली स्थिति पैदा हो गई है? क्‍या कमजोर देश की संप्रभुता की कोई अहमियत नहीं है? इन सबको देखते हुए दुनिया के तमाम देशों ने अपने डिफेंस सिस्‍टम को अपग्रेड करने की मुहिम शुरू कर दी है. मिसाइल, एयर ड‍िफेंस सिस्‍टम, ड्रोन और कटिंग एज फाइटर जेट पर हजारों-लाखों करोड़ रुपये का इन्‍वेस्‍ट किया जा रहा है. सुरक्षा के लिहाज से भारत की स्थिति काफी संवेदनशील है. एक तरफ पाकिस्‍तान तो दूसरी तरफ चीन जैसा देश स्थित है. पाकिस्‍तान आतंकवादियों को पालने-पोसने के लिए दुनियाभर में कुख्‍यात है. पाकिसतान की सरजमीं पर ही ओसामा बिन लादेन जैसा दुर्दांत आतंकवादी मिला था. दूसरी तरफ, चीन की आक्रामक विस्‍तारवादी नीतियों से हर कोई वाकिफ है. ऐसे में भारत के लिए अपने डिफेंस सिस्‍टम को मजबूत करना अनिवार्य हो गया है. विदेशी तकनीक पर लंबे समय तक निर्भर नहीं रहा जा सकता है. यही वजह है कि भारत ने मिसाइल, एयर डिफेंस सिस्‍टम और फाइटर जेट डेवलप करने में आत्‍मनिर्भर बनने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं. अग्नि-5, ब्रह्मोस, आकाश मिसाइल सिस्‍टम आदि उसके परिणाम है. भारत अब 5th जेनरेशन फाइटर जेट बनाने की दिशा में भी अहम कदम उठा चुका है. इसको ध्‍यान में रखते हुए एडवांस्‍ड मीडियम कॉम्‍बैट एयरक्राफ्ट यानी AMCA प्रोजेक्‍ट लॉन्‍च किया गया है, जिसके तहत पांचवीं पीढ़ी के स्‍टील्‍थ जेट्स डेवलप किया जाना है. आनेवाले तीन से चार साल इसके लिए काफी अहम होने वाले हैं. जानकारी के अनुसार, भारत के सबसे महत्वाकांक्षी सैन्य विमानन कार्यक्रम एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) को लेकर बड़ी और अहम जानकारी सामने आई है. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के प्रमुख डॉ. समीर वी. कामत ने पुष्टि की है कि देश का स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट AMCA प्रोजेक्‍ट पर पूरी तरह तय समय पर आगे बढ़ रहा है. उन्होंने बताया कि इस अत्याधुनिक लड़ाकू विमान का पहला प्रोटोटाइप 2028 के अंत तक रोलआउट किया जाएगा, जबकि इसकी पहली उड़ान (मेडन फ्लाइट) 2029 की शुरुआत में होने की योजना है. डॉ. कामत ने यह अहम जानकारी बेंगलुरु में आयोजित ‘तेजस-25’ नेशनल सेमिनार के दौरान साझा की. इस कार्यक्रम का आयोजन एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) द्वारा किया गया था, जो स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) तेजस की पहली उड़ान के 25 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित हुआ. हालांकि, यह आयोजन तेजस की उपलब्धियों को याद करने के लिए था, लेकिन चर्चा का केंद्र भारत के भविष्य के सैन्य विमानन रोडमैप और खास तौर पर AMCA प्रोग्राम रहा. इसके तहत फाइटर जेट डेवलप होने के बाद भारत अमेरिका, रूस और चीन श्रेणी में आ जाएगा. बता दें कि मौजूदा समय में पांचवीं पीढ़ी के जेट्स में अमेरिकी F-35 और Su-57 टॉप पर हैं. AMCA के तहत डेवलप किए जाने वाले जेट्स इस वजह से खास     स्टील्थ टेक्‍नोलॉजी: इस विमान में खास तरह की बनावट और रडार से निकलने वाली किरणों को अब्‍जॉर्ब यानी अवशोषित करने वाली टेक्‍नोलॉजी को शामिल किया गया है. इससे दुश्मन के रडार इसे आसानी से पकड़ नहीं पाएंगे.     इंटरनल वेपन बे: पुराने लड़ाकू विमानों में मिसाइलें पंखों यानी विंग्‍स पर लगाई जाती हैं, जिससे रडार पर उनकी पकड़ बढ़ जाती है. इसके विपरीत AMCA के तहत डेवलप किए जाने वाले जेट में हथियार विमान के अंदर रखे जाएंगे, ताकि उसकी स्टील्थ क्षमता बनी रहे.     मॉडर्न सेंसर: इसमें आधुनिक एवियोनिक्स और सेंसर फ्यूज़न तकनीक होगी, जिससे पायलट दुश्मन के खतरों को बहुत पहले देख और ट्रैक कर सकेगा, उससे पहले कि दुश्मन उसे पहचान पाए.     पावरफुल इंजन: शुरुआती स्क्वाड्रन (AMCA Mk1) में अमेरिकी GE F414 इंजन लगाए जाने की उम्मीद है, जबकि भविष्य के संस्करण (Mk2) में इससे ज्यादा ताकतवर, संयुक्त रूप से विकसित इंजन इस्तेमाल किए जा सकते हैं. कहां तक पहुंचा AMCA प्रोजेक्‍ट? DRDO प्रमुख के अनुसार, AMCA प्रोग्राम अब केवल डिजाइन और कॉन्‍सेप्‍ट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वास्तविक विकास के चरण में प्रवेश कर चुका है. उन्होंने बताया कि यह परियोजना भारतीय वायुसेना (IAF) की जरूरतों के अनुसार एक सख्त और समयबद्ध योजना के तहत आगे बढ़ रही है. साल 2028 में प्रोटोटाइप और 2029 में पहली उड़ान के बीच का कम अंतर यह दर्शाता है कि इस परियोजना पर कई मोर्चों पर एक साथ काम किया जा रहा है. इसे पैरेलल डेवलपमेंट रणनीति कहा जाता है, जिसमें डिजाइन को अंतिम रूप देने के साथ-साथ प्रोडक्‍शन की तैयारी और विभिन्न सिस्टम्स की टेस्टिंग भी एक साथ की जाती है. इससे जटिल रक्षा परियोजनाओं में अक्सर होने वाली देरी से बचने में मदद मिलती है. AMCA को लेकर DRDO का भरोसा काफी हद तक तेजस कार्यक्रम से मिले अनुभव पर आधारित है. शुरुआती वर्षों में तेजस परियोजना को कई तकनीकी और प्रशासनिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा था, लेकिन इसी प्रक्रिया ने भारत को एक मजबूत घरेलू रक्षा औद्योगिक ढांचा तैयार करने में मदद की. तेजस के जरिए देश में आधुनिक फ्लाइट टेस्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, कुशल इंजीनियरों और तकनीशियनों की टीम तथा मजबूत सप्लाई चेन विकसित हुई. अब DRDO और ADA इन सभी अनुभवों और सीख को AMCA परियोजना में लागू कर रहे हैं. इसके अलावा, निजी उद्योगों को शुरुआती चरण से ही निर्माण प्रक्रिया में शामिल किया जा रहा है, ताकि जोखिम कम हों और समयसीमा बनी रहे. AMCA प्रोजेक्ट क्या है और इसका उद्देश्य क्या है? AMCA यानी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट भारत का स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट प्रोजेक्ट है. इसका उद्देश्य भारतीय वायुसेना को अत्याधुनिक तकनीक से लैस करना, आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता को मजबूत करना और भविष्य की हवाई चुनौतियों का सामना करना है. AMCA प्रोजेक्ट की मौजूदा स्थिति क्या है? डीआरडीओ प्रमुख डॉ. समीर वी. कामत के अनुसार AMCA प्रोग्राम … Read more

सतना का नया अंतरराज्यीय बस स्टैंड उद्घाटन के बावजूद खाली पड़ा, बसों का संचालन शुरू नहीं

सतना शहर के बाईपास पर न्यू बस स्टैंड बनकर तैयार है. इस नए अंतरराज्यीय बस स्टैंड का उद्घाटन सीएम डॉ. मोहन यादव ने 27 दिसंबर को फीता काटकर किया था. लेकिन उद्घाटन के बाद से अभी तक 10 दिन बीत जाने के बाद भी यहां से बसों का संचालन शुरू नहीं हो सका है. अभी भी सभी बसों का संचालन सेमरिया चौराहे स्थित पुराने बस स्टैंड से किया जा रहा है. 31 करोड़ की लागत से बना है बस स्टैंड सतना-मैहर बायपास में स्थित नवनिर्मित अंतरराज्यीय बस स्टैंड का उद्घाटन किया जा चुका है. यह अंतरराज्यीय बस स्टैंड 31 करोड़ से अधिक की लागत से बनकर तैयार हुआ है. जो नगर निगम के द्वारा तैयार कराया गया है. इसके उद्घाटन के बाद जिले भर के समस्त बसें यही से संचालित होनी है, लेकिन बस स्टैंड सुनसान पड़ा हुआ है. आरोप लगाया जा रहा है कि बसों के संचालन का नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ है और परिवहन विभाग की संपूर्ण गाइडलाइन का पालन किए बिना ही इसका उद्घाटन हो गया. धूल फांक रहा है बस स्टैंड बस स्टैंड पर मौजूद चौकीदार विनोद सिंह बघेल ने बताया कि "जब से इस बस स्टैंड का निर्माण हो रहा है, तब से यहां पर चौकीदारी का काम कर रहे हैं. इसका उद्घाटन मुख्यमंत्री ने किया, लेकिन बसों का संचालन शुरू नहीं हुआ है. हम भी यहां पर बसों के संचालन की राह देख रहे हैं. इतना खूबसूरत बस स्टैंड तो बना दिया गया, लेकिन यहां बसें नहीं चल पा रही हैं. जिससे यहां धूल और जाले लगते जा रहे हैं." परमिट शर्तों का पालन किए जाने की मांग इस बारे में बस यूनियन के अध्यक्ष कमलेश गौतम ने बताया कि "हमारी कोई नवीन मांगे नहीं है. नवनिर्मित बस स्टैंड से बसों के संचालन के लिए जो हम लोगों को परमिट शर्तों में अनुबंध हुआ है. इस अनुबंध के तहत इसका पालन किया जाए. जिससे कि हम सब बसों का संचालन नए बस स्टैंड से कर सकें." बैठक कर संचालन के बिंदु पर होगी चर्चा आरटीओ अधिकारी संजय श्रीवास्तव ने बताया कि "नियमानुसार बस स्टैंड बन गया और उसका उद्घाटन भी मुख्यमंत्री कर चुके हैं. अब धीरे-धीरे करके यहां से बसों का संचालन शुरू किया जाएगा. परमिट शर्तों के पालन के लिए एक पत्र संभाग आयुक्त को भेजा गया है, जिसमें संशोधन की बात हो चुकी है. जिला प्रशासन के द्वारा इस विषय में आगामी 8 जनवरी को एक बैठक भी रखी गई है. जिसमें बस यूनियन और जिला प्रशासन शामिल होंगे. इस बैठक में नियम शर्तों के तहत नए बस स्टैंड से बसों का संचालन शुरू करने की पूरे बिंदु सामने रखे जाएंगे." इस बारे में जिले के सांसद गणेश सिंह ने बताया कि "बहुत जल्दी हम बसों का संचालन नए बस स्टैंड से शुरू कराएंगे. बसों के परमिट एवं अन्य बिंदुओं को लेकर हम एक बड़ी बैठक बुलाने वाले हैं जिसमें सारी चीजें तय होंगी."

हरियाणा में राजनीतिक हलचल, कांग्रेस को मिलेगा एक और झटका; राज्यसभा चुनाव में भाजपा की रणनीति

चंडीगढ़ हरियाणा के राज्यसभा चुनाव में भाजपा ने दिसंबर 2024 में बड़ा खेल किया था। उसके पास एक ही सीट जीतने के लिए विधायकों की संख्या थी, लेकिन उसने अपने समर्थन वाले एक निर्दलीय कैंडिडेट को जिता दिया था और इस तरह कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत पाई थी। अब मार्च 2026 में एक बार फिर से दो सीटों पर राज्यसभा का चुनाव होने वाला है और यहां भी भाजपा पहले की तरह ही खेल कर सकती है। हरियाणा की दो राज्यसभा सीटें 9 अप्रैल को खाली हो रही हैं। भाजपा की किरण चौधरी और रामचंदर जांगड़ा का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। विधायकों की मौजूदा संख्या के अनुसार हरियाणा में कांग्रेस और भाजपा दोनों ही एक-एक सीट जीतने की स्थिति में हैं। एक सीट पर जीत के लिए 31 विधायकों की संख्या चाहिए। भाजपा के पास अपने 48 विधायक हैं। कांग्रेस के पास 37 की संख्या है। इसके अलावा इनेलो के पास भी दो विधायक हैं और तीन निर्दलीय हैं, जो भाजपा को ही समर्थन करते रहे हैं। इस तरह भाजपा की ताकत 51 हो जाती है। ऐसे में दो सीटों को जीतने के लिए यदि 62 विधायक चाहिए तो भाजपा की ओर से कोशिश हो सकती है कि 9 और विधायकों का जुगाड़ करके कांग्रेस को जीरो पर रोक दिया जाए। फिलहाल हरियाणा की पांचों राज्यसभा सीटें भाजपा के पास ही हैं। इनमें से दो किरण चौधरी और रामचंदर जांगड़ा रिटायर हो रहे हैं। इसके अलावा तीन अन्य सांसद रेखा शर्मा, कार्तिकेय शर्मा और सुभाष बराला है। कार्तिकेय भाजपा समर्थित सांसद हैं। हरियाणा की राजनीति समझने वाले नेताओं का कहना है कि इस बार भाजपा किसी जाट नेता अथवा किसी अन्य ओबीसी या दलित को ही भेजेगी। फिलहाल दो ब्राह्मण नेता पहले ही राज्यसभा में हैं। इसके अलावा सुभाष बराला जाट हैं। राज्य में जाट केंद्रित राजनीति होने के चलते एक चेहरा जाट हो सकता है और किसी अन्य पिछड़ी या दलित बिरादरी के नेता को भी भेजा जा सकता है। इसके अलावा एक और चर्चा राजीव जेटली के नाम की भी है। वह सीएम नायब सिंह सैनी के मीडिया सलाहकार हैं और राष्ट्रीय प्रवक्ता भी हैं। ओपी धनखड़ और जेपी दलाल के नाम भी हैं चर्चा में जाट चेहरे के तौर पर भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ओपी धनखड़ और पूर्व मंत्री जेपी दलाल का नाम भी चर्चा में है। फिलहाल यह भी कहा जा रहा है कि किरण चौधरी खुद भी अपने लिए एक कार्यकाल चाहती हैं। उन्हें दो साल ही हुए हैं और वह एक पूरा कार्यकाल चाहती हैं। चर्चा तो मोहन लाल बड़ौली और रामविलास शर्मा के नाम की भी है, लेकिन दोनों ब्राह्मण नेता हैं। पहले से ही दो ब्राह्मण नेता राज्यसभा सांसद हैं। इसलिए शायद ही इन लोगों का नंबर लग पाए। किसी दलित नेता के नाम की भी चर्चा चल रही है। हालांकि अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि दलित चेहरों के नाम पर किस पर विचार चल रहा है।

शासकीय कार्यालयों में बगैर वैध दस्तावेज के वाहन नहीं चल सकेंगे, सरकार का बड़ा फैसला

शासकीय कार्यालयों में बगैर वैध दस्तावेज के वाहन नहीं चल सकेंगे दुर्घटना में क्षतिपूर्ति सुनिश्चित करने सरकार का बड़ा फैसला बीमा, फिटनेस व परमिट अनिवार्य परिवहन विभाग ने जारी किए आदेश भोपाल  मध्यप्रदेश शासन के परिवहन विभाग ने शासकीय विभागों, निगमों एवं निकायों द्वारा विभिन्न प्रयोजनों के लिए अनुबंधित किए जाने वाले वाहनों के संबंध में नवीन निर्देश जारी किए हैं। जारी आदेशानुसार अब बगैर वैध दस्तावेजों के किसी भी वाहन को शासकीय कार्यालयों में उपयोग में नहीं लिया जाएगा। शासकीय विभागों द्वारा सीधे अथवा निजी एजेंसियों के माध्यम से उपयोग में लाए जाने वाले मालवाहक एवं यात्री वाहनों के सभी वैधानिक दस्तावेज अनुबंध से पूर्व और वाहन उपयोग की संपूर्ण अवधि के दौरान वैध होना अनिवार्य होगा। साथ ही, विभागों को भुगतान से पहले भी इन दस्तावेजों की नियमित जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। परिवहन विभाग ने यह भी निर्देश दिये है कि खनिज अथवा अन्य सामग्री के परिवहन के लिये जारी की जाने वाली अनुमति संबंधित वाहन की निर्धारित क्षमता से अधिक नहीं होनी चाहिए। अनुबंधित वाहनों द्वारा नियमानुसार मोटरयान कर का भुगतान किया गया होना चाहिए। ई-मेल से  भीप्राप्‍त कर स‍कते हैं मार्गदर्शन सभी विभागों, निगमों एवं निकायों को यह सुविधा प्रदान की गई है कि वे अपने यहां अनुबंधित अथवा एजेंसियों द्वारा उपयोग में लाए जा रहे वाहनों के संबंध में परिवहन आयुक्त कार्यालय, मध्यप्रदेश, ग्वालियर से मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए ई-मेल आईडी commr.transpt@mp.gov.in पर पत्र प्रेषित किया जा सकता है।  

ग्वालियर: छात्रा का सोशल मीडिया पर वीडियो, योग मुद्रा से छेड़छाड़ पर सवाल उठाते हुए समाज की मानसिकता पर गंभीर टिप्पणी

ग्वालियर  शहर में स्मार्ट सिटी पहल के तहत बनाई गई महिलाओं की योग करती हुई पेंटिंग को कुछ आसामाजिक तत्वों ने गंदी हरकतों से खराब कर दिया। इस मामले ने तब तूल पकड़ा जब 11वीं की छात्रा आशी कुशवाहा ने इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। इस वीडियो ने लोगों को गुस्सा दिलाया और नगर निगम को तुरंत कार्रवाई करनी पड़ी। छात्रा ने सोशल मीडिया पर डाली थी पोस्ट छात्रा आशी कुशवाहा ने जब इस गंदी हरकत का वीडियो सोशल मीडिया पर डाला तो उसने लिखा, 'मुझे यह बात उठानी पड़ी। मैं रोज़ इस सड़क से गुज़रती हूं, और रोज़ इसे देखकर मुझे गुस्सा और घिन आती है। ग्वालियर को गर्व से 'स्मार्ट सिटी' कहा जाता है, लेकिन इसके लोगों की स्मार्टनेस कहां है? यह कोई मामूली नुकसान नहीं है। यह घटिया सोच, गंदी मानसिकता और गहरा अनादर है। यह शर्मनाक और बेहद निराशाजनक है कि एक महिला की पेंटिंग भी ऐसी बीमार सोच से सुरक्षित नहीं है। अगर हमारी सोच ऐसी है, तो 'स्मार्ट सिटी' का मतलब कुछ भी नहीं है।' वीडियो पोस्ट से पहले डरी हुई थी आशी आशी ने बताया कि वह वीडियो पोस्ट करने से पहले थोड़ी डरी हुई थी क्योंकि वह अभी 11वीं में पढ़ती है। उन्होंने बताया कि 'मैं ऐसे सिटी-लेवल स्टेप लेने के लिए छोटी भी हूं। लेकिन मुझे लगा कि यह ज़रूरी है। यह समस्या सिर्फ ग्वालियर की नहीं है, बल्कि पूरे देश में सार्वजनिक जगहों और संपत्तियों का यही हाल है। दीवार ठीक हो जाएगी और फिर से पेंट हो जाएगी, लेकिन उन लोगों की मानसिकता का क्या जो एक महिला की काली पेंटिंग को भी वस्तु की तरह देख रहे हैं? महिलाएं पेंटिंग में भी सुरक्षित नहीं हैं। यह शर्मनाक है। यह निराशाजनक और दुखद है।' वीडियो वायरल होने के बाद एक्शन छात्रा के पोस्ट के बाद, कई सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर मौके पर पहुंचे। लोकेंद्र सिंह उर्फ 'केतु' पेंट और ब्रश लेकर पहुंचे और पेंटिंग के खराब हुए हिस्सों को ठीक किया। उन्होंने कहा, 'जब मैंने अपने सोशल मीडिया फीड पर यह रील देखी, तो मुझे इतना बुरा लगा कि मैं मौके पर गया और दीवार पर आपत्तिजनक निशानों को फिर से पेंट कर दिया। लोगों को ऐसे काम करने से बचना चाहिए।' प्रशासन ने पूरी सफेद रंग दी दीवार इसके बाद, ग्वालियर नगर निगम ने पूरी दीवार को सफेद रंग से पोत दिया, जिससे सभी निशान और कलाकृति मिट गईं। जीएमसी कमिश्नर संघ प्रिय ने बताया कि फिलहाल दीवार को सफेद रंग से रंग दिया गया है। उन्होंने कहा कि वे उसी स्थान पर एक कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बना रहे हैं, जहां वे Gen Z को फिर से दीवार को सकारात्मक संदेशों के साथ पेंट करने के लिए आमंत्रित करेंगे। निगम पेंट के साथ-साथ स्नैक्स भी मुहैया कराएगा। इस प्रस्तावित कार्यक्रम के बारे में और जानकारी अलग से दी जाएगी।

योगी सरकार का कड़ा कदम, असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा रद्द करने का आदेश

लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश में होने वाली सभी भर्तियों और चयन प्रक्रियाओं को स्वतंत्र, निष्पक्ष, पारदर्शी एवं शुचितापूर्ण बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। अभ्यर्थियों के उज्ज्वल भविष्य को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक अहम निर्णय लेते हुए असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा को निरस्त करने के आदेश दिए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज द्वारा विज्ञापन संख्या 51 के अंतर्गत सहायक आचार्य पद के लिए अप्रैल 2025 में आयोजित परीक्षा में अनियमितताओं, धांधली और अवैध धन वसूली की शिकायतें सामने आई थीं। इन शिकायतों के आधार पर एसटीएफ यूपी को सूचनाएं प्राप्त हुईं, जिसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री द्वारा गोपनीय जांच के आदेश दिए गए। जांच के दौरान एसटीएफ ने 20 अप्रैल 2025 को असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा के फर्जी प्रश्नपत्र बनाकर अभ्यर्थियों से ठगी करने वाले गिरोह के तीन आरोपियों- महबूब अली, बैजनाथ पाल और विनय पाल को गिरफ्तार किया। आरोपियों के खिलाफ थाना विभूतिखंड, लखनऊ में भारतीय न्याय संहिता 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। पूछताछ में मुख्य आरोपी महबूब अली ने स्वीकार किया कि उसने मॉडरेशन प्रक्रिया के दौरान विभिन्न विषयों के प्रश्नपत्र निकालकर कई अभ्यर्थियों को धन लेकर उपलब्ध कराए थे। एसटीएफ की गहन विवेचना और डेटा विश्लेषण से उसकी स्वीकारोक्ति की पुष्टि हुई। जांच के दौरान अन्य संदिग्ध अभ्यर्थियों और व्यक्तियों के नाम भी सामने आए। आयोग से प्राप्त डाटा के मिलान में यह स्पष्ट हुआ कि परीक्षा की शुचिता भंग हुई है। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा को निरस्त करने के आदेश दिए हैं। साथ ही उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को निर्देशित किया गया है कि परीक्षा का आयोजन शीघ्र, पूर्णतः निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से दोबारा सुनिश्चित किया जाए, ताकि अभ्यर्थियों का भविष्य सुरक्षित रह सके।

रेकी पूरी, वारदात से पहले दबोचे गए आरोपी—लुधियाना में KCF के 2 सदस्यों की गिरफ्तारी

पंजाब पंजाब पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए खालिस्तान कमांडो फोर्स के सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पंजाब पुलिस की स्टेट स्पेशल ऑपरेशन सेल (SSOC) मोहाली ने लुधियाना की काउंटर इंटेलिजेंस के साथ संयुक्त कार्रवाई करते हुए 2 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो विदेशी हैंडलरों के निर्देश पर एक टारगेट किलिंग की योजना बना रहे थे। यह जानकारी पंजाब के पुलिस महानिदेशक (DGP) गौरव यादव ने बुधवार को सोशल मीडिया पर साझा की है। गिरफ्तार किए गए लुधियाना निवासी आरोपियों के कब्जे से एक 9 MM पिस्टल और 5 जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि दोनों आरोपी यूके और जर्मनी में बैठे हैंडलरों के संपर्क में थे, जिनका संबंध प्रतिबंधित संगठन खालिस्तान कमांडो फोर्स (KCF) और कट्टरपंथी विचारधारा से जुड़ा हुआ है। DGP गौरव यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘x’ पर बताया कि विदेशी हैंडलरों के निर्देश पर आरोपियों ने लुधियाना में सरकारी और प्रमुख संस्थानों की रेकी की थी। इसके अलावा, उन्हें कुछ अन्य चिन्हित व्यक्तियों के बारे में जानकारी जुटाने और ग्राउंडवर्क करने का भी जिम्मा सौंपा गया था। इस मामले में मोहाली में FIR दर्ज कर ली गई है और नेटवर्क की आगे-पीछे की कड़ियों को खंगालने के लिए जांच जारी है।   बता दें कि, लुधियाना में आतंकी हमले की धमकी मिलने के बाद जिला पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम कर दिए थे। अगस्त महीने में सरकारी दफ्तरों को निशाना बनाए जाने से जुड़े इनपुट मिलने के बाद से ही सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई थीं। हालांकि उस समय पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी इसे नियमित सुरक्षा अभ्यास बता रहे थे। इसके बाद से अब तक लुधियाना के कई सरकारी दफ्तरों के बाहर इसी तरह के सुरक्षा प्रबंध लगातार बनाए रखे गए हैं।     गौरतलब है कि एक दिन पहले भी पंजाब पुलिस ने एक बड़ी साजिश को नाकाम करते हुए अर्श डल्ला गैंग से जुड़े 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने उनके पास से 4 अवैध पिस्टल, चार मैगजीन और 26 कारतूस बरामद किए थे। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कुलदीप सिंह (निवासी गिल पट्टी, बठिंडा, वर्तमान में कनाडा), गुरविंदर सिंह (कोटशमीर, बठिंडा) और गगनदीप सिंह (गांव भोखरा, बठिंडा) के रूप में हुई है। जिनके पास से  एक ग्लॉक पिस्टल, एक जिगाना, एक .30 बोर और एक .32 बोर पिस्टल बरामद किए थे।