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दिल्ली में आयोजित हिंदी ग्रंथ अकादमी बैठक में मध्यप्रदेश की सक्रिय भागीदारी

दिल्ली में हिंदी ग्रन्थ अकादमियों की बैठक में मध्यप्रदेश ने की सहभागिता दिल्ली में आयोजित हिंदी ग्रंथ अकादमी बैठक में मध्यप्रदेश की सक्रिय भागीदारी हिंदी साहित्य के मंच पर मध्यप्रदेश की उपस्थिति, दिल्ली में हुई अकादमियों की बैठक भोपाल  वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग के अध्यक्ष प्रो. धनंजय सिंह की अध्यक्षता में देश के विभिन्न राज्यों में स्थापित हिंदी ग्रंथ अकादमी के संचालकों की बैठक तकनीकी शब्दावली आयोग मुख्यालय दिल्ली में संपन्न हुई। बैठक में मध्यप्रदेश हिंदी ग्रंथ अकादमी के प्रतिनिधि राम विश्वास कुशवाह सहायक संचालक एवं महेंद्र सिंह सिसोदिया सम्मिलित हुए। सहायक संचालक कुशवाहा ने बैठक में लिए गए निर्णयों की जानकारी देते हुए बताया कि वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग दिल्ली द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत नवीन पुस्तकों के प्रकाशन के लिए अकादमियों को न्यूनतम 15 लाख से लेकर 40 लाख रुपए तक का अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा। बैठक में मप्र हिंदी ग्रन्थ अकादमी के प्रतिनिधियों ने तकनीकी शब्दावली आयोग को मध्यप्रदेश हिंदी ग्रंथ अकादमी द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 2020 एवं भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित 40 विषयों की 275 से अधिक शीर्षक की प्रकाशित पुस्तकों की सूची तथा प्रत्येक विषयों की एक-एक पुस्तकों की प्रति सौंपी। इस अवसर पर मध्यप्रदेश हिंदी ग्रंथ अकादमी से प्रकाशित द्विमासिक मासिक "रचना" पत्रिका के वर्तमान अंक तथा मध्य प्रदेश हिंदी ग्रंथ अकादमी के स्थापना के अवसर पर तैयार किया गया 55 वर्ष की यात्रा पर आधारित प्रकाशित "विकास गाथा" ब्रोशर भी आयोग के अध्यक्ष तथा अन्य राज्यों के अकादमियों के संचालकों को भेंट किया गया। बैठक में प्रोफेसर रूपेश चतुर्वेदी ,जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय दिल्ली, प्रोफेसर मोहम्मद शरीफ, जामिया इस्लामिया विश्वविद्यालय दिल्ली, डॉ. अनूप कोकसल, वित्त अधिकारी जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय दिल्ली सहित मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार, पंजाब, गुजरात, उड़ीसा, केरल, हरियाणा आदि विभिन्न राज्यों की हिंदी ग्रंथ अकादमी तथा केंद्रीय हिंदी निदेशालय दिल्ली के संचालक/ प्रतिनिधि उपस्थित थे।  

राहुल गांधी की अचानक विदेश यात्राएं बनीं चिंता का कारण, CRPF ने जताई नाराजगी

नई दिल्ली केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के अनशेड्यूल्ड विदेश दौरों पर आपत्ति जताई है। सुरक्षा प्रोटोकॉल तोड़ने के मामले में उन्हें एक पत्र लिखा गया है। यह पत्र CRPF के वीवीआईपी सुरक्षा प्रमुख ने जारी किया है और इसकी प्रति कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भी भेजी गई है। पत्र 10 सितंबर को जारी किया गया। इसमें कहा गया है कि राहुल गांधी लगातार उन सुरक्षा मानकों का पालन नहीं कर रहे हैं, जो उनकी सुरक्षा टीम ने निर्धारित किए हैं। वीवीआईपी सुरक्षा प्रमुख ने राहुल गांधी के सुरक्षा के प्रति रवैये पर भी सवाल उठाए और कहा कि वह इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। राहुल गांधी को Z+ श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई है, जिसमें ASL (Advance Security Liaison) कवर भी शामिल है। यह देश की सबसे ऊंची सुरक्षा श्रेणियों में से एक है, जिसमें बड़ी संख्या में CRPF के जवान हर वक्त सुरक्षा में तैनात रहते हैं। आपको बता दें कि बिहार में ‘वोटर अधिकार यात्रा’ संपन्न करने के बाद राहुल गांधी अचानक विदेश यात्रा पर चले गए। ट्विटर पर उनकी कुछ तस्वीरें वायरल हो रही थीं। हालांकि वह उपराष्ट्रपति चुनाव में शामिल होने के लिए भारत वापस आ गए और पार्टी के कार्यक्रम में शामिल हो रहे हैं। बिहार में यात्रा के दौरान एक अज्ञात व्यक्ति द्वारा अचानक गांधी को कसकर गले लगाने और उनके कंधे पर किस करने के कुछ हफ्ते बाद यह चिंता जताई गई। राहुल गांधी भी इस घटना से क्षण भर के लिए अचंभित रह गए थे। यह घटना पूर्णिया जिले में हुई, जहां से राहुल गांधी मोटरसाइकिल पर सवार होकर अपने दिन के अंतिम पड़ाव अररिया के लिए रवाना हुए थे। राजद नेता तेजस्वी यादव सहित सैकड़ों बाइक सवार राहुल गांधी के साथ चल रहे थे।

बिल पास करने की एवज में मांगी रिश्वत, इंजीनियर नरेंद्र गुप्ता रंगेहाथ पकड़े गए

मंडला  मध्य प्रदेश में लोकायुक्त की टीम ताबड़तोड़ कार्रवाई कर रही है। हर दिन दो से तीन भ्रष्ट कर्मचारी और अधिकारी पकड़े जा रहे हैं। जबलपुर लोकायुक्त की टीम ने मंडला जिले में कार्रवाई की है। रिटायरमेंट की उम्र में एक इंजीनियर साहब 20000 रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़े गए हैं। पकड़े जाने के बाद आगे की कार्रवाई की जा रही है। ये है मामला दरअसल, रौशन कुमार तिवारी नाम के शिकायतकर्ता ने जबलपुर लोकायुक्त से शिकायत की थी। शिकायत में उसने कहा था कि हमारी फर्म बोरिंग बिल्डर्स ने वर्ष 2024 में आदिवासी जनजातीय विभाग मंडला में रिपेयर और मेंटेनेंस का काम किया था। विभाग में बिल का बकाया था। बिल भुगतान के लिए सहायक इंजीनियर नरेंद्र कुमार गुप्ता 56000 रुपए की रिश्वत मांग रहे थे। रिश्वत नहीं देने पर बिल पास नहीं हो रहा था। लोकायुक्त में की शिकायत सहायक इंजीनियर नरेंद्र कुमार गुप्ता की शिकायत फरियादी ने लोकायुक्त से की। लोकायुक्त ने शिकायत की जांच की। जांच के दौरान मामला सही पाया गया। इसके बाद कार्रवाई के लिए ट्रैप दल का गठन किया गया है। 11 सितंबर को रिश्वत की पहली किस्त 20000 रुपए लेते हुए उन्हें रंगे हाथ पकड़ा गया है। आरोपी के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधन)2018 की धारा-7,13(1)B, 13(2) के अंतर्गत कार्यवाही की जा रही है। इस कार्रवाई से जनजातीय कार्यालय में हड़कंप मच गया है। रिटायरमेंट की उम्र में पकड़े गए वहीं, मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मियों की रिटायरमेंट की उम्र 62 साल है। सहायक इंजीनियर गुप्ता 61 साल के हैं। कुछ दिनों में वह रिटायर हो जाते। इससे पहले ही रिश्वत के मामले में पकड़े गए हैं। पकड़े जाने के बाद उनके चेहरे पर शिकन दिख रहा था। पूजा कर आए थे ऑफिस गौरतलब है कि पकड़े जाने के बाद सहायक इंजीनियर गुप्ता की तस्वीर सामने आई है। उस तस्वीर में दिख रहा है कि माथे पर चंदन है। साथ ही उंगलियों में अंगूठियां हैं। इससे साफ पता चलता है कि वह दफ्तर पूजा पाठ के बाद आए थे। लेकिन रिश्वत की बोहनी के समय ही लोकायुक्त के ट्रैप में फंस गए। इसके बाद टेबल पर अपनी हथेली सीधी कर दिखा रहे थे।

सीएम भगवंत मान ने अस्पताल से सीधे वीडियो कॉल कर की बातचीत, मनकीरत औलख और प्रीतपाल सिंह जुड़े

पंजाब  पंजाब में आई भीषण बाढ़ के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान लगातार बाढ़ प्रभावित परिवारों और राहत कार्यों से जुड़े हुए हैं. अस्पताल में रहकर भी उन्होंने पंजाबी गायक मनकीरत औलख से वीडियो कॉल के माध्यम से बातचीत की. सीएम ने उनके द्वारा किए जा रहे राहत प्रयासों की सराहना की. मुख्यमंत्री मान ने हंसपाल ट्रेडर्स के मालिक प्रीतपाल सिंह हंसपाल का भी विशेष रूप से धन्यवाद किया. हंसपाल ट्रेडर्स ने बाढ़ में फंसे लोगों और उनके पशुओं को सुरक्षित निकालने के लिए काफी काम किया है. उन्होंने अपनी तरफ से 150 से अधिक नावें बनवाईं. पंजाब सरकार का राहत प्रयासों में सहयोग मुख्यमंत्री भगवंत मान ने आगे कहा कि संकट की इस घड़ी में पंजाबियों ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि उनके भीतर हिम्मत, सेवा की भावना और आपसी भाईचारे की मिसालें आज भी जिंदा हैं. जो भी लोग अपने लेवल पर दूसरों की मदद कर रहे हैं और जान बचाने में जुटे हुए हैं, पंजाब की सरकार उन सभी लोगों के साथ मजबूती से खड़ी है. सीएम ने आगे कहा कि यह सिर्फ एक प्रशासनिक समर्थन नहीं है, बल्कि यह पंजाबियों की भावनाओं से भावनात्मक जुड़ाव भी है . यही वजह है कि आज हर पंजाबी को यह विश्वास है कि वो अकेला नहीं है उसकी सरकार उसके साथ खड़ी है और केवल सरकार ही नहीं बल्कि उसका समाज पूरी ताकत और संवेदनशीलता के साथ उसके साथ खड़ा है. पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को 5 सितंबर को तबियत खराब के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था. तबीयत में सुधार के बाद उन्होंने सोमवार को अस्पताल से ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कैबिनेट की बैठक की अध्यक्षता की. मुख्यमंत्री की तबियत खराब के चलते पहले यह बैठक स्थगित कर दी गई थी. सीएम अरविंद केजरीवाल के साथ बाढ़ प्रभावित इलाकों के दौरे पर भी नहीं जा पाए थे.  

सूर्यकुमार यादव का जलवा: एशिया कप में खेल भावना से सबका दिल जीत लिया

दुबई एशिया कप 2025 में बुधवार को भारत और यूएई के बीच दुबई अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में मुकाबला खेला गया। मैच के दौरान भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव ने खेल भावना का परिचय दिया, जिसकी तारीफ हो रही है। भारतीय टीम के कप्तान सूर्यकुमार यादव ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया था। यूएई की पारी का 13वां ओवर शिवम दुबे कर रहे थे। दुबे ने जैसे ही गेंद फेंकी, उनके पैकेट से उनका तौलिया क्रीज पर गिर गया। गेंद संभालने के बजाय सिद्दीकी गिरे हुए तौलिये की ओर इशारा करते हुए क्रीज से बाहर ही रहे। सैमसन ने मौके का फायदा उठाते हुए बेल्स गिरा दीं और तीसरे अंपायर ने उन्हें आउट करार दे दिया। हालांकि, भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव सफल स्टंपिंग अपील वापस ले ली। सूर्यकुमार यादव की इस फैसले की तारीफ हो रही है। हालांकि इस जीवनदान का जुनैद सिद्दीकी फायदा नहीं उठा सके और अगली गेंद पर आउट हो गए। यूएई की बल्लेबाजी बेहद निराशाजनक रही। यूएई भारतीय गेंदबाजों के सामने 13.1 ओवर में मात्र 57 रन पर सिमट गई। आलिशान शराफू ने सर्वाधिक 22 रन बनाए, वहीं कप्तान मुहम्मद वसीम ने 19 रन बनाए। इसके अलावा कोई भी बल्लेबाज दो अंकों में नहीं पहुंच सका। टी20 अंतर्राष्ट्रीय में यूएई का यह न्यूनतम स्कोर है। भारत की तरफ से कुलदीप यादव ने घातक गेंदबाजी की । बाएं हाथ के इस स्पिनर ने 2.1 ओवर में मात्र 7 रन देकर 4 विकेट लिए। ये कुलदीप की स्पिन का ही कमाल था की यूएई 57 रन पर सिमट गई। इसके अलावा ऑलराउंडर शिवम दुबे ने 2 ओवर में 4 रन देकर 3 विकेट लिए। बुमराह, अक्षर और वरुण चक्रवर्ती को 1-1 विकेट मिले। 58 रन के लक्ष्य को भारत ने 4.3 ओवर में हासिल कर लिया। अभिषेक और गिल ने 3.5 ओवर में पहले विकेट के लिए 48 रन की साझेदारी की। इस स्कोर पर अभिषेक शर्मा 16 गेंद पर 3 छक्के और 2 चौके की मदद से 30 रन बनाकर आउट हुए। तीसरे नंबर पर उतरे सूर्यकुमार यादव ने गिल के साथ मिलकर भारत को 9 विकेट से जीत दिला दी। भारत ने 4.3 ओवर में 1 विकेट पर 60 रन बनाकर मैच 9 विकेट से जीता। गिल 9 गेंद पर 20 जबकि सूर्या 2 गेंद पर 7 रन बनाकर नाबाद रहे।  

GST में छूट का दिखा असर: वाहन बाजार में बुकिंग का उछाल, लेकिन सप्लाई चेन बना रोड़ा

ग्वालियर जीएसटी काउंसिल ने फेस्टिवल सीजन को देखते हुए आम लोगों की जेब पर बड़ा फायदा देने का ऐलान किया है। इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, इंश्योरेंस और अन्य रोजमर्रा की चीजों पर जीएसटी दरों में कटौती की गई है, लेकिन इसका एक साइड इफेक्ट ये हुआ है कि बाजार फिलहाल थम सा गया है। ज्यादातर लोग नई दरों का इंतजार कर रहे हैं, जिससे खरीदारी 70-80 फीसदी तक गिर गई है। ऑटोमोबाइल सेक्टर में बुकिंग जारी, डिलीवरी रुकी ग्वालियर ऑटोमोबाइल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष हरिकांत समाधिया ने बताया कि सरकार की ओर से जीएसटी की दरें कम करने के बाद कंपनियां दिमाग लगा रही हैं। कंपनियां सेस का कंपन्सेशन एडजस्ट नहीं करना चाहती, ऐसे में वे स्कीम्स को बंद करने का मन बना रही हैं। जहां तक कारों की खरीदारी की बात है तो फिलहाल सिर्फ वाहनों की बुकिंग हो रही है, खरीदारी 22 सितंबर के बाद होगी। एक छोटी गाड़ी पर 50 हजार तक की बचत होगी। सरकार को 22 सितंबर को ही घोषणा करनी थी इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबारी केदारनाथ गुप्ता ने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार में जीएसटी की दरें 28 से कम होकर 18 फीसदी होने वाली हैं। पर सरकार को इसकी घोषणा 22 सितंबर को ही करनी थी, फिलहाल बाजार एकदम से थम सा गया है। यानी खरीदारी 80 फीसदी तक कम हो गई है। लोग अब 22 सितंबर का ही इंतजार कर रहे हैं। एक लाख रुपए के 75 इंच के एलइडी पर 10 हजार और 55 इंच के एलइडी पर करीब 3906 रुपए की बचत होगी। नहीं करा रहे इंश्योरेंस, रिन्युअल प्रीमियम भी नहीं भर रहे स्वास्थ्य और जीवन बीमा पर जीएसटी पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है। इंश्योरेंस कंसल्टेंट प्रणव कुमार दास ने बताया कि 22 सितंबर तक कोई भी व्यक्ति इंश्योरेंस कराने को तैयार नहीं है। यहां तक कि लोग अपनी रिन्युअल प्रीमियम भी नहीं जमा कर रहे। हम उन्हें समझा रहे हैं कि आपकी पॉलिसी लेप्स हो जाएगी और उसमें रिस्क कवर भी नहीं है। फिर भी लोग मानने को तैयार नहीं हैं और कह रहे हैं कि 16-17 दिनों में कुछ नहीं होगा। इसके साथ ही जिन बीमा कंपनियों ने अपना बिजनेस बढ़ाने के लिए प्रतियोगिताएं निकाली थीं, उन्हें या तो बंद कर दिया गया है या फिर उनकी तारीख बढ़ा दी है। सिर्फ तीन दिन में होगा जीएसटी रजिस्ट्रेशन जीएसटी कॉउंसिल की ओर से किए गए रिफॉर्म्स में जीएसटी करदाताओं के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को भी अब बेहद सरल बना दिया गया है। कॉउंसिल ने महज 3 दिन में ही जीएसटी रजिस्ट्रेशन देने की बात कही है। इससे व्यापार करने में सुगमता आएगी और विभाग के चक्कर लगाने की कोई जरूरत नहीं होगी। इसमें खास बात यह है कि ये रजिस्ट्रेशन अब बिना वेरिफिकेशन के ही प्रदान कर दिए जाएंगे। इस नई स्कीम से करीब 96 फीसदी करदाताओं को लाभ मिलेगा, जो नया पंजीयन लेते हैं। ये स्कीम एक नवंबर 2025 से चालू होगी। इसके साथ ही जीएसटी के 90 फीसदी रिफंड का रुपया प्रोविजनल आधार पर ही मिल सकेगा। सीए पंकज शर्मा ने बताया कि व्यापार की सुगमता के लिए जीएसटी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को आसान बनाना अच्छा कदम है। इससे लंबा समय लेने वाली प्रक्रिया से बचाव होगा।

नियमितीकरण नीति 2014: सरकार ने डाटा अपडेट के लिए अधिकारियों को दिया अंतिम समय

हरियाणा  सुप्रीम कोर्ट में लंबित स्टेट ऑफ हरियाणा बनाम योगेश त्यागी केस को लेकर हरियाणा सरकार ने सभी विभागों, निगमों और बोर्डों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वर्ष 2014 की नियमितीकरण नीति के तहत कितने कर्मचारियों को स्थायी किया गया, कितनों का अभी तक नहीं हुआ और कितनों का होना बाकी है – इसकी पूरी और ताज़ा जानकारी 12 सितंबर तक भेजनी होगी। मानव संसाधन विभाग द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि 28 जुलाई 2025 को हुई पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार के अधिवक्ता से नवीनतम आंकड़े प्रस्तुत करने को कहा था। इससे पहले 95 विभागों, बोर्डों और निगमों की रिपोर्ट महाधिवक्ता कार्यालय, चंडीगढ़ को भेजी जा चुकी है। अब अदालत ने दोबारा अपडेटेड डेटा मांगा है। विभाग ने सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों और उपायुक्तों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने पुराने आंकड़ों में कोई बदलाव है तो उसे अपडेट करें और तुरंत भेजें। जानकारी न होने की स्थिति में भी ‘शून्य सूचना’ अनिवार्य रूप से भेजनी होगी। सभी विभागों को यह रिपोर्ट मानव संसाधन-1 शाखा को ई-मेल के माध्यम से भेजनी है। लापरवाही पर जवाबदेही तय सरकार ने आदेश में स्पष्ट किया है कि अगर समयसीमा का पालन नहीं किया गया तो संबंधित अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे। अदालत से होने वाले किसी भी प्रतिकूल आदेश की जवाबदेही उसी विभाग/अधिकारी की होगी जिसने जानकारी देने में लापरवाही बरती। इसलिए उठाया कदम सरकार की ओर से यह पत्र इसीलिए जारी किया है ताकि समय पर ताज़ा आंकड़े उपलब्ध हों और अदालत में सरकार की स्थिति मजबूत हो। नियमितीकरण नीति 2014 से जुड़े विवादित मुद्दों पर न्यायिक फैसला तेज़ी से आ सकेगा। साथ ही, विभागीय जवाबदेही तय होने से आगे लापरवाही पर अंकुश लगेगा। विभागों के सामने चुनौती मानव संसाधन विभाग की ओर से बृहस्पतिवार को ही सभी प्रशासनिक सचिवों को यह पत्र जारी किया है। जानकारी के लिए उन्हें केवल एक दिन का समय दिया है। यानी शुक्रवार तक उन्हें पूरी जानकारी देनी होगी। कम समय में सभी विभागों और निगमों से सटीक आंकड़े जुटाना कठिन है। पुराने रिकॉर्ड और नई जानकारी में अंतर होने से भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। समयसीमा चूकने पर सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी और प्रतिकूल आदेश का खतरा है।   इस तरह समझें पूरा केस स्टेट ऑफ हरियाणा बनाम योगेश त्यागी एवं अन्य (विशेष अनुमति याचिका संख्या 31566/2018) की ओर से सुप्रीम कोर्ट में कहा गया कि हरियाणा सरकार ने 2014 में नियमितीकरण नीति लागू की थी। इसमें लंबे समय से कार्यरत संविदा कर्मचारियों को स्थायी करने का प्रावधान था। कर्मचारियों ने दावा किया कि नीति लागू करने में भेदभाव हुआ। इसलिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे कुछ कर्मचारियों ने अदालत का रुख किया और नीति की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। इसके बाद सरकार ने इस पर सर्वोच्च न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका दायर की। अब अदालत यह तय करेगी कि किन संविदा कर्मचारियों को स्थायी किया जाए। अदालत ने सरकार से ताज़ा और सही आंकड़े मांगे हैं। इसी कारण सरकार ने सभी विभागों को 12 सितंबर तक रिपोर्ट भेजने का आदेश दिया है। अहम बिंदु सुप्रीम कोर्ट में 2014 की नियमितीकरण नीति पर सुनवाई जारी हरियाणा सरकार ने सभी विभागों को रिपोर्ट जमा करने का आदेश 12 सितंबर तक भेजनी होगी जानकारी, वरना अधिकारी होंगे जिम्मेदार पहले ही 95 विभागों की रिपोर्ट महाधिवक्ता कार्यालय को दी जा चुकी है

पंजाब के मॉडल को हरियाणा में लागू करने की मांग, CM सैनी से BKU नेताओं की चर्चा

हरियाणा  पंजाब की तर्ज पर हरियाणा में भी ‘जिसका खेत-उसकी रेत’ पॉलिसी लागू करने की मांग भारतीय किसान यूनियन (BKU) ने मुखर रूप से उठाई है। संगठन का कहना है कि बाढ़ और बारिश के कारण हजारों किसानों के खेतों में रेत जम गई है। अगर इस रेत को बेचने का अधिकार किसानों को मिले, तो वे हुए भारी नुकसान की भरपाई कर सकेंगे। इसी मुद्दे को केंद्र में रखते हुए भाकियू अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी के नेतृत्व में यूनियन प्रतिनिधिमंडल ने चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मुलाकात की और 11 सूत्रीय मांगपत्र सौंपा। भाकियू नेताओं ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि धान की खरीद 15 सितंबर से शुरू की जाए। उनका कहना था कि खरीफ सीजन में पहले ही किसानों को मौसम की मारझेलनी पड़ी है, ऐसे में फसल बिकने में देरी किसानों की हालत और बिगाड़ देगी।   बाढ़ पीड़ितों को 50 हजार मुआवजा प्रतिनिधिमंडल ने मांग रखी कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मुआवजा बढ़ाकर 50 हजार रुपये प्रति एकड़ किया जाए। साथ ही बाढ़ में खराब हुए ट्यूबवेलों के लिए विशेष मुआवजा दिया जाए। किसानों ने यह भी कहा कि जब तक नदियों और बरसाती नालों की सफाई व तटीय बंदों की मरम्मत नहीं होगी, तब तक हर साल यह संकट दोहराया जाएगा। भाकियू ने सीएम से बातचीत में दो-टूक कहा, “सिर्फ राहत नहीं, स्थायी समाधान चाहिए।” हांसी-बुटाना नहर पर उठे सवाल चीका हलका क्षेत्र की समस्या को भी जोरदार ढंग से रखा गया। भाकियू का कहना है कि हांसी-बुटाना नहर के कारण घग्गर नदी बार-बार उफान पर आती है और खेतों में पानी भर जाता है। सरकार को इस पर ठोस कदम उठाने की जरूरत बताई गई। यहां बता दें कि पूर्व की हुड्डा सरकार के समय हांसी-बुटाना नहर बनी थी लेकिन इस पर अभी तक विवाद बना हुआ है। खाद वितरण और बीमा योजना पर आपत्ति यूरिया खाद वितरण को पोर्टल से जोड़ने पर किसानों ने कड़ा विरोध जताया। उनका कहना था कि पोर्टल सिस्टम से किसानों को लंबी लाइनों और तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। भाकियू ने इसे बंद करने की मांग की। इसी तरह प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना पर भी सवाल उठे। यूनियन ने कहा कि इसमें किसानों को समय पर और पर्याप्त मुआवजा नहीं मिलता, इसलिए इसके लिए कानूनी प्रावधान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि बीमा योजना कागजों में मजबूत है, लेकिन जमीनी स्तर पर कमजोर।   गन्ना, कपास और बिजली टावर का मुद्दा किसानों ने गन्ने का भाव 500 रुपये प्रति क्विंटल तय करने और कपास की पूरी खरीद सरकारी स्तर पर करने की मांग रखी। साथ ही उन्होंने कहा कि जो बड़े बिजली टावर किसानों की जमीन से गुजरते हैं और एक राज्य से दूसरे राज्य में बिजली ले जाते हैं, उनका मुआवजा भी किसानों को मिलना चाहिए। किसानों को मुख्यमंत्री से उम्मीद भाकियू अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि किसानों की समस्याएं गंभीर हैं और सरकार को इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उन्होंने भरोसा जताया कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी इन मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय लेंगे।

सनातन संस्कृति का मूल है कर्ता के प्रति आभार: मुख्यमंत्री का वक्तव्य

कर्ता के प्रति कृतज्ञता का भाव सनातन का पहला संस्कार : मुख्यमंत्री सनातन संस्कृति का मूल है कर्ता के प्रति आभार: मुख्यमंत्री का वक्तव्य कृतज्ञता ही है सनातन का प्रथम संस्कार: मुख्यमंत्री ने कहा कर्तव्य और कृतज्ञता सनातन की नींव: मुख्यमंत्री का बयान राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ महाराज की 11वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि समारोह में बोले मुख्यमंत्री युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 56वीं तथा राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की11वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में आयोजित साप्ताहिक श्रद्धांजलि समारोह का समापन गोरखपुर  गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कर्ता के प्रति कृतज्ञता का भाव प्रकट करना सनातन धर्म का पहला संस्कार है। भारतीय मनीषा के ज्ञान दर्शन में इस बात को प्रतिष्ठित किया गया है कि जीवन में हमारे, समाज और राष्ट्र के प्रति जिस किसी ने योगदान दिया हो उसके प्रति कृतज्ञता का भाव होना ही चाहिए।  सीएम योगी युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 56वीं तथा राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की11वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में आयोजित साप्ताहिक श्रद्धांजलि समारोह के अंतिम दिन गुरुवार (आश्विन कृष्ण चतुर्थी) को महंत अवेद्यनाथ की पुण्यतिथि पर श्रद्धासुमन अर्पित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने रामायणकाल में हनुमानजी और मैनाक पर्वत के बीच हुए संवाद के मुख्य उद्धरण ‘कृते च कर्तव्यम एषः धर्म सनातनः’ को समझाते हुए कहा कि यह भाव सनातन से ही मिलता है। सनातन की परंपरा में पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता का भाव व्यक्त करने के लिए आश्विन माह का पूरा कृष्ण पक्ष ही समर्पित किया गया है। गोरक्षपीठ में ब्रह्मलीन पूज्य महंतद्वय की पुण्य स्मृति में साप्ताहिक आयोजन भी कृतज्ञता ज्ञापन का ही आयाम है।  सनातन और भारत के हित में हर मुद्दे पर आजीवन प्रतिबद्ध रहे गोरक्षपीठ के ब्रह्मलीन महंतद्वय : सीएम योगी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने दादागुरु ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ और गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ का स्मरण करते हुए कहा कि महंतद्वय समाज, राष्ट्र और लोक जीवन से जुड़े हर मुद्दे पर सनातन धर्म और भारत के हितों के प्रति प्रतिबद्ध रहे।  महंत दिग्विजयनाथ जी ने सनातन धर्म, शिक्षा, सेवा और राष्ट्रीयता के जिन मूल्यों और आदर्शों को स्थापित किया, उन्हें महंत अवेद्यनाथ जी ने आत्मसात कर आगे बढ़ाया। इन मूल्यों और आदर्शों के लिए, देश और धर्म के लिए महंतद्वय आजीवन समर्पित रहे। दोनों ने सदैव देश और धर्म को प्राथमिकता दी। गोरक्षपीठ आज भी उनके बताए मार्ग का अनुसरण कर रहा है।  गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को सशक्त राष्ट्र की बुनियाद मानते थे महंतद्वय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गोरक्षपीठ के ब्रह्मलीन महंतद्वय ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को सभ्य समाज और सशक्त राष्ट्र की आधारशिला माना। महंत दिग्विजयनाथ जी ने इसी ध्येय से देश की गुलामी के कालखंड में ही 1932 में महाराणा प्रताप जैसे वीर योद्धा के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना की थी। 1932 में पहली संस्था खुली और फिर यह श्रृंखला बढ़ती गई। गोरखपुर में जब पहले विश्वविद्यालय की स्थापना की बात आई तो उन्होंने महाराणा प्रताप महाविद्यालय और महाराणा प्रताप महिला विद्यालय दान में देकर विश्वविद्यालय की स्थापना का शुभारंभ कराया। यह कार्य श्रेय के लिए नहीं था। उन्होंने महिला शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, आयुष शिक्षा सहित शिक्षा के हरेक क्षेत्र को आगे बढ़ाया। उनके बाद महंत अवेद्यनाथ जी ने भी इस सिलसिले को जारी रखा।  अयोध्या में श्रीराम मंदिर बनाने में महंतद्वय का अविस्मरणीय योगदान सीएम योगी ने अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण में गोरक्षपीठ के ब्रह्मलीन महंतद्वय के अविस्मरणीय योगदान का भी उल्लेख किया। कहा कि श्रीराम मंदिर निर्माण के यज्ञ का शुभारंभ महंत दिग्विजयनाथ जी ने किया था। उनके बाद 1983 से लेकर जीवन पर्यंत महंत अवेद्यनाथ मंदिर निर्माण के लिए संघर्षरत रहे।  सामाजिक समरसता को आजीवन बढ़ाते रहे महंत अवेद्यनाथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी समाज को तोड़ने वाली ताकतों से चिंतित रहे। उन्होंने अश्पृश्यता के खिलाफ आवाज उठाई और आजीवन सामाजिक समरसता को बढ़ाते रहे।

IND vs PAK का मुकाबला होगा एशिया कप में, सुप्रीम कोर्ट ने नहीं लगाई रोक

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को उस जनहित याचिका (PIL) पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसमें 14 सितंबर को होने वाले एशिया कप T20 टूर्नामेंट के भारत–पाकिस्तान मैच को रद्द करने की मांग की गई थी। मामला जब जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ के समक्ष पहुंचा तो अदालत ने इसे गंभीरता से लेने से इनकार कर दिया। जस्टिस माहेश्वरी ने साफ कहा, “इतनी भी क्या जल्दबाजी है? यह तो एक मैच है, होने दीजिए।” जब वकील ने दलील दी कि रविवार को मैच है और अगर शुक्रवार को भी सुनवाई नहीं हुई तो याचिका निरर्थक हो जाएगी तो जस्टिस माहेश्वरी ने दो टूक जवाब दिया, “मैच इस रविवार है? हम इसमें क्या कर सकते हैं? रहने दीजिए, मैच होना चाहिए।” याचिका में क्या कहा गया? यह याचिका चार कानून के छात्रों ने दाखिल की है। उनका कहना है कि हाल ही में हुए पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान के साथ मैच खेलना राष्ट्रीय हित के खिलाफ है। इससे शहीद हुए जवानों और नागरिकों के बलिदान का अपमान होगा। याचिका के मुताबिक, “जब हमारे सैनिक अपनी जान दे रहे हैं, उसी देश के साथ क्रिकेट खेलना गलत संदेश देता है और शहीदों के परिवारों की भावनाओं को ठेस पहुंचाता है।” याचिका में कहा गया कि मनोरंजन को राष्ट्र की सुरक्षा और गरिमा से ऊपर नहीं रखा जा सकता। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से यह भी अपील की है कि केंद्र सरकार राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम, 2025 (National Sports Governance Act, 2025) को लागू करे। सीजन बॉल क्रिकेट को मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय खेल महासंघ (National Sports Federation) के दायरे में लाया जाए। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) को खेल मंत्रालय के अधीन लाया जाए। याचिका का नेतृत्व कर रही छात्रा उर्वशी जैन ने कहा, “अब समय आ गया है कि बीसीसीआई को खेल मंत्रालय के अधीन लाया जाए। एक बार राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम लागू हो गया तो बोर्ड को राष्ट्रीय खेल बोर्ड के तहत आना ही पड़ेगा।”