samacharsecretary.com

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भोपाल में ड्रोन टेक वर्कशॉप एक्सपो 2025 को किया संबोधित

कृषि कार्य हो, आपदा की स्थिति हो या पुलिस प्रशासन के लिए मॉनीटरिंग की आवश्यकता सभी जगह ड्रोन तकनीक उपयोगी राज्य सरकार विकास-नवाचार और आत्मनिर्भरता के सशक्त वाहक के रूप में ड्रोन तकनीक का उपयोग करने के पथ पर अग्रसर ड्रोन पर केन्द्रित प्रदर्शनी का शुभारंभ कर अवलोकन किया भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि विज्ञान एवं तकनीकी क्षेत्र की सहायता से प्रदेश में विकास के हर संभव प्रयास जारी हैं। प्रदेश सरकार ने अपनी नई ड्रोन पॉलिसी भी तैयार की है। हमें दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ने की आवश्यकता है। भारतीय समाज नई तकनीक और नवाचारों को शीघ्रता से आत्मसात करने में कभी पीछे नहीं रहा है। ड्रोन, विज्ञान एवं तकनीक के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव है। ड्रोन कृषि कार्यों में आज अन्नदाता की मदद कर रहा है। इससे खेतों में कीटनाशक दवाओं का छिड़काव आसान हुआ है। ड्रोन तकनीक से देश के दुश्मनों का खात्मा भी हो रहा है। अब तो शादियां भी ड्रोन के बिना पूरी नहीं होती हैं। हमारे वैज्ञानिक वाइस कमांड कंट्रोल की सहायता से ड्रोन को ज्यादा आधुनिक बने रहे हैं। दुनिया ने ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से भारतीय ड्रोन तकनीक की ताकत देखी है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में ड्रोन टेक्नोलॉजी के माध्यम से भारत ने दुश्मन को उसके घर में घुसकर मारा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ड्रोन तकनीक कार्यशाला एवं एक्सपो 2025 का विज्ञान भवन- नेहरू नगर में दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर लगाई गई प्रदर्शनी और वर्कशॉप का शुभारंभ कर अवलोकन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभिन्न शैक्षणिक संस्थाओं, स्टार्टअप और औद्योगिक संस्थानों द्वारा लगाए गए स्टॉल्स पर पहुंचकर ड्रोन तकनीक के शैक्षणिक, औद्योगिक और कृषि क्षेत्र में उपयोग के संबंध में जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ड्रोन टेक एक्सपो वर्कशॉप का आयोजन भारत की तकनीकी क्रांति का प्रतीक है। किसान भाइयों के लिए ड्रोन वरदान बन गया है। आपदा कीस्थिति हो या पुलिस प्रशासन के लिए मॉनीटरिंग की आवश्यकता ड्रोन तकनीक ने जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में जिस प्रकार से बदलाव किया है वह अभूतपूर्व है। राज्य सरकार विकास-नवाचार और आत्मनिर्भरता के सशक्त वाहक के रूप में ड्रोन तकनीक का उपयोग करने के पथ पर अग्रसर है। मध्यप्रदेश विज्ञान एवं तकनीकी शिक्षा परिषद के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी ने कहा कि मध्यप्रदेश के 70वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में ड्रोन टेक वर्कशॉप एक्सपो-2025 आयोजित की गई है। इसमें ड्रोन तकनीक के प्रशिक्षण के लिए प्रदेशभर के 4 हजार से अधिक विद्यार्थियों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। कार्यशाला में विशेषज्ञों द्वारा उन्हें स्वरोजगार एवं तकनीक आधारित महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की जाएगी। विज्ञान एवं तकनीकी नवाचारों के माध्यम से मध्यप्रदेश विज्ञान एवं तकनीकी शिक्षा परिषद मध्यप्रदेश के विकास के लिए हर स्तर पर सहयोग प्रदान करने के लिए तत्पर है। स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर भोपाल के निदेशक श्री कैलाशा राव ने कहा कि आज ड्रोन तकनीक अधोसंरचना विकास कार्यों को मूर्तरूप देने में अहम भूमिका निभा रही है। उज्जैन सहित प्रदेश के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थलों के मानचित्र तैयार करने में यह तकनीक उपयोगी सिद्ध हुई है। ड्रोन तकनीक पर आधारित यह कार्यशाला युवाओं में वैज्ञानिक सोच विकसित करने और जनसामान्य को ड्रोन तकनीक के विविध उपयोगों की जानकारी देने में सहायक सिद्ध होगी। अपर मुख्य सचिव विज्ञान एवं तकनीकी शिक्षा श्री संजय दुबे ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विविध गतिविधियां जारी हैं। प्रदेश के युवाओं को आगे बढ़ने के अनेक अवसर प्राप्त हो रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ड्रोन टेक्नोलॉजी के विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं। ड्रोन अब केवल रक्षा या निगरानी का साधन नहीं रहे बल्कि कृषि, भू-सर्वेक्षण, पर्यावरण संरक्षण, आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य सेवाएँ, परिवहन, उद्योग एवं मीडिया जैसे अनेक क्षेत्रों में उपयोगी साबित हो रहे हैं। भारत सरकार की “ड्रोन नीति 2021” तथा “मेक इन इंडिया” अभियान के अनुरूप राज्य स्तर पर भी ड्रोन तकनीक को नवाचार, स्टार्टअप और रोजगार के नए अवसरों के रूप में विकसित किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि ड्रोन टेक वर्कशॉप एवं एक्सपो 2025 का मुख्य उद्देश्य राज्य में ड्रोन तकनीक की समझ, उपयोगिता और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देना है। इस कार्यक्रम से युवाओं, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स, उद्योगों और नीति निर्माताओं को एक साझा मंच मिलेगा, जिससे ड्रोन तकनीक के व्यावहारिक, सामाजिक और औद्योगिक उपयोग को बढ़ावा दिया जा सकेगा। कार्यक्रम में ड्रोन प्रदर्शनी एवं हैंड्स ऑन वर्कशॉप आयोजित की गई। साथ ही राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय विशेषज्ञों के प्रेरक व्याख्यान, ड्रोन उड़ान के लाइव डेमो एवं टेक्निकल शोकेस, इनोवेशन चैलेंज एवं प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। कार्यक्रम में मनासा विधायक श्री अनिरुद्ध माधव मारू, मुख्यमंत्री डॉ. यादव के संस्कृति सलाहकार श्री राम तिवारी तथा विभिन्न शैक्षणिक संस्थाओं के विद्यार्थी, विषय-विशेषज्ञ, शोधकर्ता और ड्रोन टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में नवाचार करने वाले युवा तथा उद्यमी उपस्थित थे।  

सहमति से बने संबंध पर निराशा हुई तो यह अपराध नहीं — कर्नाटक HC ने दी अहम टिप्पणी

बेंगलुरु  बलात्कार के मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया और आरोपी के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द कर दिया। अदालत का कहना है कि आपसी सहमति से शुरू हुआ रिश्ता अगर निराशा के साथ खत्म होता है, तो इसे अपराध नहीं माना जा सकता। दरअसल, एक महिला ने याचिकाकर्ता पर रेप के आरोप लगाए थे। वहीं, कोर्ट ने पाया कि दोनों के बीच संबंध सहमति से बने थे। जस्टिस एम नागप्रसन्न मामले की सुनवाई कर रहे थे। 25 अक्तूबर को हुई सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा, 'अगर वर्तमान अभियोजन पक्ष को ट्रायल में चलते रहने की अनुमति दी गई, तो यह न्याय की विफलता की ओर एक औपचारिक प्रक्रिया के अलावा कुछ नहीं होगा। यह कानून का दुरुपयोग होगा।' क्या था मामला रिपोर्ट के मुताबिक, रिकॉर्ड में जानकारी दी गई थी कि एक महिला और पुरुष डेटिंग ऐप के जरिए मिलते हैं। उन दोनों के बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बात शुरू होती है और वो एक रेस्त्रां में मिलने का फैसला करते हैं। इसके बाद दोनों ने एक होटल में संबंध भी बनाए। अब महिला ने बाद में आरोप लगाए हैं कि उसके साथ बलात्कार हुआ है। महिला की शिकायत के आधार पर FIR दर्ज की गई, जिसे हाईकोर्ट में आरोपी ने चुनौती दी। कोर्ट ने पाया कि जांच अधिकारी ने जानबूझकर आरोपी और शिकायतकर्ता के बीच हुई चैट को नजरअंदाज किया था। कोर्ट ने पाया कि चैट से संकेत मिलते हैं कि दोनों के बीच आपसी सहमति से फैसले लिए गए थे। इस दौरान उच्च न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी हवाला दिया, जिसमें सहमति से संबंध और बलात्कार के बीच अंतर बताया गया था। हाईकोर्ट ने आरोपी की याचिका को स्वीकार कर लिया और एफआईआर को खारिज कर दिया।  

हिमालय में गूँजी जशपुर की गूंज: आदिवासी युवाओं ने जगतसुख पीक पर खोला नया मार्ग

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री साय की पहल के सम्मान में दिया गया विष्णु देव रूट नाम रायपुर  छत्तीसगढ़ के जशपुर ज़िले के आदिवासी युवाओं के एक दल ने भारतीय पर्वतारोहण के इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया है। इस दल ने हिमाचल प्रदेश की दूहंगन घाटी (मनाली) में स्थित 5,340 मीटर ऊँची जगतसुख पीक पर एक नया आल्पाइन रूट खोला, जिसे छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल के सम्मान में “विष्णु देव रूट” नाम दिया गया है। टीम ने यह चढ़ाई बेस कैंप से केवल 12 घंटे में पूरी की — वह भी आल्पाइन शैली में, जो तकनीकी रूप से अत्यंत कठिन मानी जाती है। यह ऐतिहासिक अभियान सितंबर 2025 में आयोजित हुआ, जिसका आयोजन जशपुर प्रशासन ने पहाड़ी बकरा एडवेंचर के सहयोग से किया। इस अभियान को हीरा ग्रुप सहित अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों का सहयोग प्राप्त हुआ। यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष है क्योंकि इस दल के पाँचों पर्वतारोही पहली बार हिमालय की ऊँचाइयों तक पहुँचे थे। सभी ने “देशदेखा क्लाइम्बिंग एरिया” में प्रशिक्षण प्राप्त किया, जो जशपुर प्रशासन द्वारा विकसित भारत का पहला प्राकृतिक एडवेंचर खेलों के लिए समर्पित प्रशिक्षण क्षेत्र है। विश्वस्तरीय मानकों को सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने भारतीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों को जोड़ा, जिनमें बिलासपुर के पर्वतारोही एवं मार्गदर्शक स्वप्निल राचेलवार, न्यूयॉर्क (USA) के रॉक क्लाइम्बिंग कोच डेव गेट्स, और रनर्स XP के निदेशक सागर दुबे शामिल रहे। इन तीनों ने मिलकर तकनीकी, शारीरिक और मानसिक दृष्टि से युवाओं को तैयार करने के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम बनाया। दो महीनों की कठोर तैयारी और बारह दिनों के अभ्यास पर्वतारोहण के बाद टीम ने यह चुनौतीपूर्ण चढ़ाई पूरी की। अभियान प्रमुख स्वप्निल राचेलवार ने बताया कि जगतसुख पीक का यह मार्ग नए पर्वतारोहियों के लिए अत्यंत कठिन और तकनीकी था। मौसम चुनौतीपूर्ण था, दृश्यता सीमित थी और ग्लेशियरों में छिपी दरारें बार-बार बाधा बन रही थीं। इसके बावजूद टीम ने बिना फिक्स रोप या सपोर्ट स्टाफ के यह चढ़ाई पूरी की — यही असली आल्पाइन शैली है। यह अभियान व्यावसायिक पर्वतारोहण से अलग था, जहाँ पहले से तय मार्ग और सहायक दल पर निर्भरता होती है; इस दल ने पूरी तरह आत्मनिर्भर रहते हुए नई मिसाल कायम की। अभियान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली। स्पेन के प्रसिद्ध पर्वतारोही टोती वेल्स, जो इस अभियान की तकनीकी कोर टीम का हिस्सा थे और स्पेन के पूर्व वर्ल्ड कप कोच रह चुके हैं, ने कहा कि “इन युवाओं ने, जिन्होंने जीवन में कभी बर्फ नहीं देखी थी, हिमालय में नया मार्ग खोला है। यह साबित करता है कि सही प्रशिक्षण और अवसर मिलने पर ये पर्वतारोही विश्वस्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं।” “विष्णु देव रूट” के अलावा दल ने दूहंगन घाटी में सात नई क्लाइम्बिंग रूट्स भी खोले। इनमें सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि रही एक अनक्लाइम्ब्ड (पहले कभी न चढ़ी गई) 5,350 मीटर ऊँची चोटी की सफल चढ़ाई, जिसे टीम ने ‘छुपा रुस्तम पीक’ नाम दिया। इस पर चढ़ाई के मार्ग को ‘कुर्कुमा (Curcuma)’ नाम दिया गया — जो हल्दी का वैज्ञानिक नाम है और भारतीय परंपरा में सहनशक्ति और उपचार का प्रतीक माना जाता है। यह अभियान इस बात का प्रमाण है कि यदि सही दिशा, अवसर और संसाधन मिलें तो भारत के सुदूर ग्रामीण और आदिवासी इलाकों से भी विश्वस्तरीय पर्वतारोही तैयार हो सकते हैं। बिना किसी हिमालयी अनुभव के इन युवाओं ने आल्पाइन शैली में जो उपलब्धि हासिल की है, उसने भारतीय साहसिक खेलों को नई दिशा दी है। इस पहल ने तीन बातों को सिद्ध किया — आदिवासी युवाओं में प्राकृतिक शक्ति, सहनशीलता और पर्यावरण से जुड़ी सहज समझ उन्हें एडवेंचर खेलों के लिए विशेष रूप से उपयुक्त बनाती है; “देशदेखा क्लाइम्बिंग सेक्टर” जैसे स्थानीय प्रशिक्षण केंद्र पेशेवर पर्वतारोही तैयार करने की क्षमता रखते हैं; और हिमालय की अनदेखी चोटियाँ भारत में सतत एडवेंचर पर्यटन की नई संभावनाएँ खोल सकती हैं। अभियान का नेतृत्व स्वप्निल राचेलवार ने किया, उनके साथ राहुल ओगरा और हर्ष ठाकुर सह-नेता रहे। जशपुर के पर्वतारोही दल में रवि सिंह, तेजल भगत, रुसनाथ भगत, सचिन कुजुर और प्रतीक नायक शामिल थे। अभियान को प्रशासनिक सहयोग डॉ. रवि मित्तल (IAS), रोहित व्यास (IAS), शशि कुमार (IFS) और अभिषेक कुमार (IAS) से मिला। तकनीकी सहायता डेव गेट्स, अर्नेस्ट वेंटुरिनी, मार्टा पेड्रो (स्पेन), केल्सी (USA) और ओयविंड वाई. बो (नॉर्वे) ने दी। पूरे अभियान का डॉक्यूमेंटेशन और फोटोग्राफी ईशान गुप्ता की कॉफी मीडिया टीम ने किया। प्रमुख सहयोगी और प्रायोजक संस्थानों में पेट्ज़ल, एलाइड सेफ्टी इक्विपमेंट, रेड पांडा आउटडोर्स, रेक्की आउटडोर्स, अडवेनम एडवेंचर्स, जय जंगल प्राइवेट लिमिटेड, आदि कैलाश होलिस्टिक सेंटर, गोल्डन बोल्डर, क्रैग डेवलपमेंट इनिशिएटिव और मिस्टिक हिमालयन ट्रेल शामिल रहे। यह अभियान केवल एक पर्वतारोहण उपलब्धि नहीं, बल्कि उस सोच का प्रतीक है कि भारत के गाँवों और आदिवासी क्षेत्रों से भी अंतरराष्ट्रीय स्तर की सफलता प्राप्त की जा सकती है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि “भारत का भविष्य गाँवों से निकलकर दुनिया की ऊँचाइयों तक पहुँच सकता है।” इस उल्लेखनीय उपलब्धि के साथ अब जशपुर को एक सतत एडवेंचर एवं इको-टूरिज़्म केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।

खेती की जैविक पद्धतियों को अपनाएँ : राज्यपाल पटेल

जैविक उत्पादों के प्रति समाज का बढ़ा रूझान राज्यपाल ने कृषि महाविद्यालय सीहोर के कन्या छात्रावास एवं ऐरोपोनिक्स इकाई का किया लोकार्पण भोपाल  राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि किसान को खेती की जैविक पद्धतियों, प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग के लिए प्रेरित करें। कृषि की आधुनिक तकनीक और नई शोध पद्धतियों को अपनाकर उत्पादन की क्वालिटी और क्वांटिटी बढ़ाने का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि यह सुखद है कि अब समाज में लोगों का रूझान जैविक उत्पादों की ओर बढ़ रहा है। राज्यपाल श्री पटेल गुरूवार को रफी अहमद किदवई कृषि महाविद्यालय सीहोर के कन्या छात्रावास एवं ऐरोपोनिक्स इकाई के लोकार्पण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर प्रदेश के कृषि मंत्री श्री एदल सिंह कंसाना भी मौजूद थे। राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि प्राकृतिक खेती, भूमि एवं पर्यावरण हितैषी कृषि पद्धति है, जो भूमि की ऊर्वरता बनाए रखती है। इसके लिए समय-समय पर वर्मी कंपोस्ट का उपयोग भी किया जाना चाहिए। उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों से कहा कि वे किसानों की आय बढ़ाने वाली उन्नत बीजों और नई तकनीकों पर अनुसंधान करें। राज्यपाल श्री पटेल ने महाविद्यालय के विद्यार्थियों को शोध और नवाचार की भावना के साथ मेहनत से कार्य करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा, अनुसंधान और पर्यावरण संरक्षण का संयोजन ही राष्ट्र के भविष्य को बेहतर दिशा प्रदान कर सकता है। राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि स्वस्थ जीवन के लिए उत्तम आहार और संतुलित जीवनशैली अपनाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे जंक फूड का उपयोग नहीं करें। भोजन में स्वास्थ्य वर्धक एवं पोषक तत्वों से भरपूर आहार को प्राथमिकता दें। राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि कुपोषण एवं अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के निदान के लिए मशरूम जैसी पौष्टिक फसलों को आम घरों तक पहुँचाने की आवश्यकता है। मशरूम पोषण का उत्तम स्रोत होने के साथ ही किसानों की आय बढ़ाने का महत्वपूर्ण साधन भी बन सकता है। प्रकृति का शोषण नहीं, बल्कि पोषण करना जरूरी राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि देश में सबसे अधिक वन मध्यप्रदेश में हैं। यह प्रकृति का अनमोल खजाना है। हमें इसका संरक्षण और संवर्धन करना चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ी को स्वस्थ और सुरक्षित वातावरण मिल सके। राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि यदि हर व्यक्ति एक पेड़ लगाने की जिम्मेदारी निभाता है तो हमारी धरती और अधिक हरित और समृद्ध बन सकती है। उन्होंने सभी से अपील की कि एक पेड़ “माँ” के नाम अवश्य लगाएं। उसकी नियमित देखरेख भी करें। यह प्रकृति से भावनात्मक जुड़ाव के प्रतीक के साथ प्रकृति संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान साबित होगा। उन्होंने प्रकृति और औषधीय गुणों की चर्चा करते हुए कहा कि अधिकांश पेड़ों में मौजूद औषधीय गुण प्राकृतिक चिकित्सा में बहुत मददगार हैं इसलिए हमें प्रकृति का शोषण नहीं, बल्कि उसका पोषण करना जरूरी है, ताकि भावी पीढ़ी को स्वस्थ और समृद्ध पर्यावरण की विरासत प्रदान कर सके। प्रदेश में किसान कल्याण की अनेक योजनाएं संचालित : कृषि मंत्री श्री कंषाना कृषि मंत्री श्री एदल सिंह कंषाना ने कहा कि भारत एक कृषि प्रधान देश है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी तथा प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में कृषि के विकास में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा खेती के विकास और किसानों के कल्याण के लिए अनेक कल्याणकारी योजनाएँ संचालित की जा रही हैं। किसानों की आय में वृद्धि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने का विशेष प्रयास किया जा रहा है। कृषि प्रदर्शनी का किया अवलोकन राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने महाविद्यालय परिसर में कृषि विज्ञान केंद्रों द्वारा उत्पादित विभिन्न फसलों, जैविक उत्पादों एवं नवीन तकनीक के प्रदर्शन पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया एवं किसानों और वैज्ञानिकों से संवाद किया। कृषि क्षेत्र के नवाचारों एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने के प्रयासों की सराहना की। कार्यक्रम में कुलगुरू श्री अरविन्द कुमार शुक्ला ने कृषि महाविद्यालय तथा राजमाता विजयराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय की गतिविधियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस कृषि वैज्ञानिक, विद्यार्थी, अधिकारी तथा किसान उपस्थित थे। 

कांग्रेस और लालू यादव पर सम्राट चौधरी का हमला, बोले– बिहार को दशकों तक लूटते रहे

पटना बिहार के उपमुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता सम्राट चौधरी  ने बुधवार को कहा कि राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव और कांग्रेस  ने 55 सालों तक प्रदेश को लूटा, जबकि डबल इंजन सरकार ने बिहार में विकास की नई इबारत लिखी है। सम्राट चौधरी बेगूसराय विधानसभा क्षेत्र के वीरपुर में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) प्रत्याशी कुंदन सिंह (BJP) और खगड़िया विधानसभा क्षेत्र के मारड़ में बब्लू मंडल जनता दल यूनाईटेड (JDU) उम्मीदवार के समर्थन में आयोजित जनसभा में कांग्रेस और राजद पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस और लालू यादव ने मिलकर 55 सालों तक बिहार को लूटा। कांग्रेस ने गरीबों के मसीहा कर्पूरी ठाकुर को गाली दी थी। बिहार यदि पिछड़ा है तो इसका कारण कांग्रेस और राजद है। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि इस बार विधानसभा चुनाव में एक तरफ विनाश है और दूसरी तरफ विकास है। एक तरफ जंगलराज है तो दूसरी तरफ सुशासन है। उन्होंने कहा कि जहां एक ओर महागठबंधन में परिवारवाद हावी है, वहीं दूसरी ओर जदयू ने एक साधारण कार्यकर्ता बब्लू मंडल को प्रत्याशी बनाकर यह साबित किया है कि राजग में कार्यकर्ताओं का सम्मान होता है। राजग शासन में ना हिंदू देखा गया, ना मुसलमान,बस इंसान देखा गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में सबका साथ, सबका विकास की भावना से काम हुआ। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि डबल इंजन सरकार ने बिहार में विकास की नई इबारत लिखी है। उन्होंने कहा कि करीब एक करोड़ लोगों को पक्का मकान मिला, गांवों में 20 घंटे से ज्यादा बिजली मिल रही है। पहले बागमती, गंडक और कोसी में पुल बनने की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी, लेकिन नीतीश कुमार के नेतृत्व में यह सब संभव हुआ। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि 2005 से पहले बिहार की स्थिति बेहद खराब थी।बिजली, सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य सब बदहाल थे। उस समय अपहरण उद्योग फल-फूल रहा था। महिलाएं शाम पांच बजे के बाद घर से निकलने से डरती थीं, लेकिन नीतीश कुमार के सुशासन ने बिहार का चेहरा बदल दिया।उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार की सरकार ने साइकिल और पोशाक योजना से बेटियों को स्कूल तक पहुंचाया, पढ़ाई के अवसर दिए और उन्हें सरकारी नौकरी में 33 प्रतिशत आरक्षण देकर सशक्त किया। पंचायत चुनाव में भी महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण मिला। अब सरकार एक करोड़ 41 लाख महिलाओं को 10 हजार रुपये की पहली किस्त देकर उन्हें स्वावलंबी बना रही है।  

स्थिति बेहद खराब — मेकाहारा अस्पताल पर भड़का हाईकोर्ट, एक बेड पर दो प्रसूताओं का मामला गंभीर

बिलासपुर रायपुर के मेकाहारा अस्पताल के गायनिक वार्ड में दो प्रसूताओं को एक ही बेड पर भर्ती किए जाने का मामला सामने आया है। इस घटना ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं इस मामले में बिलासपुर हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की बेंच ने कहा, स्थिति बेहद ही खराब है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है और 6 नवंबर तक एडिशनल चीफ सेक्रेटरी को शपथ पत्र में जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। इस मामले में मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की बेंच ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा, अगर राजधानी के प्रमुख अस्पताल की यह स्थिति है तो प्रदेश के अन्य जिलों में हालात की कल्पना की जा सकती है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए कहा कि अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) को 6 नवंबर तक शपथपत्र प्रस्तुत करना होगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि ऐसी घटनाएं मानव गरिमा के विपरीत है और प्रशासन को तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने होंगे। सरकारी सिस्टम पर उठे सवाल इस घटना ने न केवल स्वास्थ्य तंत्र की लापरवाही को उजागर किया है, बल्कि राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है। जनता अब यह सवाल उठा रही है कि जब राजधानी के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल का यह हाल है तो ग्रामीण इलाकों के अस्पतालों में मरीजों का क्या हाल होगा?

HAM प्रत्याशी पर हमले की निंदा करते हुए मांझी बोले—RJD फैला रही है अराजकता

गया बिहार के गया जिले के टिकारी विधानसभा में बुधवार को प्रचार के लिए पहुंचे हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) के प्रत्याशी एवं पार्टी के वरिष्ठ नेता डॉ. अनिल कुमार पर असामाजिक तत्वों ने हमला कर दिया है, जिसमें उन्हें गंभीर रूप से चोट लगी। वहीं, केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के अध्यक्ष जीतन राम मांझी ने पार्टी के उम्मीदवार अनिल कुमार पर हुए हमले की कड़ी निंदा की है। जीतन राम मांझी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर लिखा, "माननीय विधायक अनिल कुमार जी के ऊपर हुआ हमला विपक्ष के कायरता और हताशा का जीता जागता उदाहरण है। राजद के लोग बिहार को बंगाल बनाने की कोशिश कर रहें है…अनिल जी के उपर चले हर पत्थर का जवाब बिहार की जनता वोट के चोट से देगी।" इससे पहले लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री मोदी पर 'नचनिया' शब्द का इस्तेमाल करने पर केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा, "राहुल गांधी बचकाना व्यवहार कर रहे हैं। उनमें कोई गंभीरता नहीं है…छठ पवित्रता और आध्यात्मिकता का त्योहार है…छठ पूजा करने वालों के लिए 'नचनिया' शब्द का इस्तेमाल कर वह अपने पूर्वजों का भी अपमान कर रहे हैं। गौरतलब है कि बिहार विधानसभा की 243 सीटों के लिए दो चरण में 06 नवंबर और 11 नवंबर को मतदान कराया जाना है। 14 नवंबर को मतगणना होगी और चुनाव की प्रक्रिया 16 नवंबर तक पूरी हो जायेगी। बिहार विधानसभा का वर्तमान कार्यकाल 22 नवंबर 2025 को समाप्त हो रहा है।

यात्रियों की भीड़ को काबू में रखने की तैयारी! 76 स्टेशनों पर बनेगा ‘होल्डिंग एरिया’

नई दिल्ली  रेल यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए रेल मंत्रालय ने देशभर के प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर 'पैसेंजर होल्डिंग एरिया' विकसित करने की योजना को मंजूरी दे दी है। यह फैसला नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर इस व्यवस्था की शानदार सफलता के बाद लिया गया है। नई दिल्ली स्टेशन पर दीपावली और छठ जैसे त्योहारों के दौरान यात्रियों की भारी भीड़ को संभालने में यह सुविधा बेहद कारगर साबित हुई थी। सिर्फ चार महीने में तैयार हुआ यह होल्डिंग एरिया यात्रियों के लिए एक बड़ा राहत केंद्र बना, जिससे प्लेटफॉर्म और ट्रेनों पर भीड़ को नियंत्रित करना आसान हो गया। अब इसी मॉडल को देश के अन्य बड़े स्टेशनों पर लागू किया जाएगा। रेल मंत्री ने निर्देश दिया है कि सभी होल्डिंग एरिया 2026 के त्योहारी सीजन से पहले तैयार हो जाने चाहिए। रेल मंत्रालय के अनुसार, इन नए होल्डिंग एरियाज का डिजाइन मॉड्यूलर होगा, यानी इन्हें स्थानीय परिस्थितियों के हिसाब से बनाया जाएगा। इससे अलग-अलग शहरों के तापमान, भीड़भाड़ और स्पेस के अनुसार सुविधाएं तैयार की जा सकेंगी। इस योजना के तहत देश के 76 प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर होल्डिंग एरिया विकसित किए जाएंगे। इन स्टेशनों का चयन विभिन्न जोनल रेलवेज के आधार पर किया गया है। सेंट्रल रेलवे जोन में मुंबई सीएसएमटी, लोकमान्य तिलक टर्मिनस, नागपुर, नासिक रोड, पुणे और दादर, कुल 6 स्टेशन हैं। ईस्टर्न रेलवे में हावड़ा, सियालदह, आसनसोल, भागलपुर,जसीडीह जंक्शन कुल 5 स्टेशन हैं। ईस्ट सेंट्रल रेलवे में पटना, दानापुर, गया, दरभंगा, मुजफ्फरपुर और पं. दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन (कुल 6 स्टेशन) शामिल हैं। ईस्ट कोस्ट रेलवे में भुवनेश्वर, पुरी और विशाखापत्तनम के 3 स्टेशन, नॉर्दर्न रेलवे में नई दिल्ली, आनंद विहार, निजामुद्दीन, दिल्ली, गाजियाबाद, जम्मू तवी, कटरा, लुधियाना, लखनऊ (एनआर), वाराणसी, अयोध्या धाम और हरिद्वार के 12 स्टेशन और नॉर्थ सेंट्रल रेलवे में कानपुर, झांसी, मथुरा और आगरा कैंट (4 स्टेशन) शामिल हैं। वहीं, नॉर्थ ईस्टर्न रेलवे में गोरखपुर, बनारस, छपरा और लखनऊ जंक्शन (एनईआर) 4 स्टेशन, नॉर्थ ईस्ट फ्रंटियर रेलवे में गुवाहाटी और कटिहार, नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे में जयपुर, गांधी नगर जयपुर, अजमेर, जोधपुर और रिंगस के 5 स्टेशन और साउदर्न रेलवे में चेन्नई सेंट्रल, चेन्नई एग्मोर, कोयंबटूर, एर्नाकुलम जंक्शन (4 स्टेशन) शामिल हैं। साउथ सेंट्रल रेलवे में सिकंदराबाद, विजयवाड़ा, तिरुपति, गुंटूर, काचीगुड़ा और राजमुंद्री (6 स्टेशन), साउथ ईस्टर्न रेलवे में रांची, टाटा और शालीमार के 3 स्टेशन, साउथ ईस्ट सेंट्रल रेलवे में रायपुर का 1 स्टेशन, साउथ वेस्टर्न रेलवे में बेंगलुरु, यशवंतपुर, मैसूर और कृष्णराजपुरम के 4 स्टेशन, वेस्टर्न रेलवे में मुंबई सेंट्रल, बांद्रा टर्मिनस, उधना, सूरत, अहमदाबाद, उज्जैन, वडोदरा और सीहोर के 8 स्टेशन, वेस्ट सेंट्रल रेलवे में भोपाल, जबलपुर और कोटा के 3 स्टेशन शामिल हैं।

जदयू प्रत्याशी अनंत सिंह के समर्थकों पर हत्या का आरोप, मोकामा में बढ़ा तनाव

पटना पटना के मोकामा विधानसभा क्षेत्र के घोसवरी प्रखंड में गुरुवार शाम जनसुराज दुलारचंद यादव की गोली मारकर हत्या कर दी गई। घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। बताया जा रहा है कि इस वारदात में जदयू प्रत्याशी और पूर्व विधायक बाहुबली अनंत सिंह के समर्थकों का हाथ होने का संदेह जताया जा रहा है। घटना की जानकारी मिलते ही पटना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह एक राजनीतिक साजिश के तहत की गई हत्या है, जिसमें जन सुराज समर्थक को निशाना बनाया गया। मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया है कि अनंत सिंह के समर्थकों ने योजना बनाकर इस हत्या को अंजाम दिया। पुलिस ने मामले की प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।  

प्रदेश में एक नवम्बर से नगरीय निकायों में होगी केन्द्रीयकृत फेस आधारित उपस्थिति प्रणाली अनिवार्य

उपस्थिति प्रक्रिया से प्रशासन होगा और अधिक उत्तरदायी भोपाल  प्रदेश के सभी 413 नगरीय निकायों में केन्द्रीयकृत फेस आधारित उपस्थिति (Face-Based Attendance) प्रणाली सफलतापूर्वक लागू की जा चुकी है। यह व्यवस्था एक नवम्बर से सभी नगरीय निकायों में अनिवार्य रूप से प्रभावशील हो जाएगी। यह प्रणाली निकायों में कार्यरत सभी शासकीय एवं अशासकीय कर्मचारियों पर समान रूप से लागू होगी। आयुक्त श्री संकेत भोंडवे ने बताया कि यह पहल कर्मचारियों की उपस्थिति प्रक्रिया को अधिक सुगम, पारदर्शी और उत्तरदायी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। नगरीय निकायों में भविष्य में कर्मचारियों के वेतन एवं भुगतान इसी फेस आधारित उपस्थिति के आधार पर किए जाएंगे। वर्तमान में प्रदेश में एक लाख 35 हजार से अधिक नगरीय निकाय कर्मचारियों ने इस प्रणाली में अपना पंजीयन पूर्ण करा लिया है। नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग द्वारा यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सभी नगरीय निकायों में यह व्यवस्था सुचारू रूप से कार्य करे और कर्मचारियों को आवश्यक तकनीकी सहायता समय पर उपलब्ध कराई जाए।