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बिहार चुनाव में वोटिंग बढ़ी, AAP ने भाजपा पर टिकट बांटकर वोटिंग प्रभावित करने का लगाया आरोप

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में रिकॉर्डतोड़ वोटिंग को राजनीतिक दल अलग-अलग चश्मे से देख रहे हैं। कोई इसे सरकार के पक्ष में जनता का समर्थन बता रहा है तो किसी को बदलाव की बयार दिख रही है। इस बीच आम आदमी पार्टी (आप) ने इसमें एक नया एंगल जोड़ दिया है। पार्टी ने इसे 'वोट चोरी' का दूसरा हिस्सा बताते हुए कहा है कि भाजपा ने अपने वोटर्स को टिकट देकर दूसरे शहरों से बिहार भेजा, इसी वजह से 75 साल में सबसे ज्यादा वोटिंग हुई है। दिल्ली में आम आदमी पार्टी के संयोजक और पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज ने एक यूट्यूब वीडियो के सहारे दावा किया कि लाखों वोटर्स को भाजपा ने अलग-अलग शहरों से बिहार भेजा था। उन्होंने जिस वीडियो को शेयर किया है उसमें कुछ लोग गले में भाजपा का पटका लटकाए दिख रहे हैं। वह कहते हैं कि वोट देने के लिए बिहार जा रहे हैं और टिकट की व्यवस्था भाजपा की ओर से की गई है। बताया गया कि हरियाणा के करनाल से भाजपा ने वोटर्स को बिहार भेजा था। भारद्वाज ने वीडियो के साथ लिखा, 'भाजपा के करनाल के जिला अध्यक्ष स्टेशन पर मौजूद हैं। भाजपा ने संगठित तरीके से वोटरों को चिन्हित किया। SIR में भाजपा के द्वारा चिन्हित वोटरों की वोट नहीं काटी गई। फिर लाखों तादाद में वोटरों को अलग अलग शहरों से चुनाव से पहले बिहार भेजा गया। ट्रेन की टिकट आदि सारे इंतजाम भाजपा ने किए। इस तरीके से बिहार की वोटिंग 75 साल के सबसे ऐतिहासिक स्तर पर पहुंची।' बिहार में अब तक का सबसे ज्यादा मतदान बिहार विधानसभा के लिए पहले चरण के मतदान में गुरुवार को 3.75 करोड़ से अधिक मतदाताओं में से 64.66 प्रतिशत ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया, जो राज्य में 'अब तक का सबसे ज्यादा' मतदान प्रतिशत है। इसमें अभी और इजाफे की संभावना है। पहले चरण में 18 जिलों के कुल 121 निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान हुआ, जहां मतदाताओं की कुल संख्या 3.75 करोड़ से अधिक थी। बिहार में इससे पहले सबसे ज्यादा 62.57 प्रतिशत मतदान 2000 में दर्ज किया गया था। कोविड-19 महामारी के साये में हुए 2020 के विधानसभा चुनावों में मतदान प्रतिशत 57.29 रहा था।

हुरून इंडिया की सूची में मध्यप्रदेश के सबसे धनी व्यक्ति विनोद अग्रवाल, संपत्ति 4,430 करोड़

इंदौर  इंदौर शहर के जाने-माने उद्योगपति और समाजसेवी विनोद अग्रवाल प्रदेश में सबसे ज्यादा धनी तो हैं ही, वे सेवा कार्यों में भी अव्वल हैं। गुरुवार को हुरून इंडिया ने देशभर के दानदाताओं की सूची जारी की, इसमें अग्रवाल कोल के मुखिया विनोद अग्रवाल देश में 71वें नंबर पर हैं। वे प्रदेश में सबसे ऊपर हैं। वे लगातार 5 बार से इस लिस्ट में जगह बनाए हुए हैं। अग्रवाल ने वर्ष 2024-25 में 19 करोड़ की राशि शिक्षा, स्वास्थ्य, पशु कल्याण, गरीब, कुपोषण जैसे कार्यों में लगाई। मालूम हो, पिछले दिनों हुरून इंडिया ने देश के सबसे धनी लोगों की सूची जारी की थी। इसमें विनोद अग्रवाल की संपत्ति 4430 करोड़ रुपए थी। वे प्रदेश के सबसे धनी व्यक्ति भी है। 5 साल से वे परोपकार में प्रदेश में नंबर वन हैं। बुधवार को ही उन्होंने इंदौर के अन्नपूर्णा माता मंदिर में 10 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले हाईटेक सभा मंडप और अन्नक्षेत्र का भूमिपूजन किया। वे अपनी संस्था बालाजी सेवार्थ विनोद अग्रवाल फाउंडेशन के माध्यम से कई प्रकल्प चला रहे हैं। हालांकि बीते साल उन्होंने 20 करोड़ रुपए दान में लगाए थे, वे देश में 58वें नंबर पर थे। टाटा-बिरला से मिली प्रेरणा विनोद अग्रवाल ने पत्रिका से बातचीत में कहा कि भगवान ने बहुत कुछ दिया है। सभी को अपनी कमाई से दूसरों के लिए कुछ करना चाहिए। मैंने टाटा-बिरला को देखकर परोपकार शुरू किया। ऐसे ही अन्य सक्षम लोगों को मदद के लिए हाथ बढ़ाना चाहिए। परोपकार करने से आत्म संतुष्टि मिलती है। पूरे शहर में जरूरतमंदों को बांटेंगे भोजन अग्रवाल ने बताया कि अयोध्या में अन्नक्षेत्र का वर्तमान में काम चल रहा है। महालोक, सालासर बालाजी में जनसुविधा के लिए काम करवाए हैं। अन्नपूर्णा मंदिर में हाईटेक भोजनशाला बनाई जा रही है। हर दिन दो से ढाई हजार जरूरतमंद लोगों को शहर के अलग-अलग हिस्सों में भोजन पहुंचाएंगे। योग के साथ ही शिक्षा और स्वास्थ्य के वे कई प्रकल्प चला रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा — विभाजन की सोच अब भी राष्ट्र के सामने सबसे बड़ी बाधा

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के 150 वर्ष पूरे होने पर एक वर्ष तक चलने वाले स्मरणोत्सव का शुभारंभ किया है। इस दौरान आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि वंदे मातरम, ये शब्द एक मंत्र है, एक ऊर्जा है, एक स्वप्न है, एक संकल्प है। वंदे मातरम, ये शब्द मां भारती की साधना है, मां भारती की आराधना है। वंदे मातरम, ये शब्द हमें इतिहास में ले जाता है, ये हमारे वर्तमान को नए आत्मविश्वास से भर देता है, और हमारे भविष्य को ये नया हौसला देता है कि ऐसा कोई संकल्प नहीं जिसकी सिद्धि न हो सके, ऐसा कोई लक्ष्य नहीं जिसे हम भारतवासी पा न सकें। गुलामी के कालखंड  'वंदे मातरम्' आजादी का गीत बना- पीएम इस दौरान पीएम मोदी ने कहा, 'गुलामी के उस कालखंड में वंदे मातरम् इस संकल्प का उद्घोष बन गया था और वह उद्घोष था- भारत की आजादी का, मां भारती के हाथों से गुलामी की बेड़िया टूटेगी और उसकी संतानें स्वयं अपने भाग्य की भाग्य विधाता बनेगी।' उन्होंने आगे कहा 'गुलामी के कालखंड में जिस तरह अंग्रेज भारत को नीचा और पिछड़ा बताकर अपने शासन को सही ठहराते थे, इस पहली पंक्ति ने उस दुष्प्रचार को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया। इसलिए, 'वंदे मातरम्' न केवल आजादी का गीत बना, बल्कि 'वंदे मातरम्' ने करोड़ों देशवासियों के सामने स्वतंत्र भारत कैसा होगा, वह 'सुजलाम सुफलाम' सपना भी प्रस्तुत किया।'   'आतंक के विनाश के लिए दुर्गा भी बनना जानता है भारत' इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा, '1927 में महात्मा गांधी ने कहा था 'वंदे मातरम्' हमारे सामने पूरे भारत की एक ऐसी तस्वीर प्रस्तुत करता है जो अखंड है… हमारे राष्ट्रीय ध्वज में समय के साथ कई बदलाव हुए हैं, लेकिन तब से लेकर आज तक, जब भी राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाता है, तो 'भारत माता की जय', 'वंदे मातरम्' स्वतः ही हमारे मुंह से निकलता है।' पीएम मोदी ने आगे कहा कि 'बीते वर्षों में दुनिया ने भारत के इसी स्वरूप का उदय देखा है। हमने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है। हम दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में उभरे हैं और जब दुश्मन ने आतंकवाद के माध्यम से भारत की सुरक्षा और सम्मान पर प्रहार करने का दुस्साहस किया, तो पूरी दुनिया ने देखा कि नया भारत अगर मानवता की सेवा के लिए कमला और विमला का स्वरूप है, तो आतंकवाद के विनाश के लिए 10 प्रहर धारिणी दुर्गा बनना भी जानता है।'   विभाजनकारी सोच आज भी देश के लिए चुनौती- पीएम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'आजादी की लड़ाई में 'वंदे मातरम्' की भावना ने पूरे राष्ट्र को आलोकित किया, लेकिन दुर्भाग्य से 1937 में इसकी आत्मा का एक हिस्सा, 'वंदे मातरम्' के महत्वपूर्ण पदों को अलग कर दिया गया। 'वंदे मातरम्' को खंडित किया गया, उसके टुकड़े-टुकड़े कर दिए गए। 'वंदे मातरम्' के इसी विभाजन ने देश के विभाजन के बीज भी बोए… आज की पीढ़ी के लिए यह जानना जरूरी है कि यह अन्याय क्यों हुआ, क्योंकि वही विभाजनकारी सोच आज भी देश के लिए चुनौती बनी हुई है।'

अहमदाबाद बनेगा 2026 T20 वर्ल्ड कप फाइनल का गवाह, मेजबानी की लिस्ट से बेंगलुरु गायब

अहमदाबाद भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने अगले साल होने वाले T20 वर्ल्ड कप के लिए अहमदाबाद, दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई और मुंबई को वेन्यू के रूप में शॉर्टलिस्ट किया है. टूर्नामेंट का फाइनल मुकाबला अहमदाबाद में खेला जाएगा.2023 ODI वर्ल्ड कप का फाइनल भी भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच अहमदाबाद में ही खेला गया था, जो दुनिया के सबसे बड़ा स्टेडियम है, जिसकी क्षमता एक लाख से ज्यादा दर्शकों की है. तब उस दौरान कुल 10 मैच वेन्यू पर मुकाबले खेले गए थे. PTI के मुताब‍िक- महिला ODI वर्ल्ड कप की लिस्ट से पहले ही बाहर किए जाने के बाद बेंगलुरु इस बार भी फाइनल वेन्यू की सूची में जगह नहीं बना पाया है. जून में RCB की IPL जीत के जश्न के दौरान चिन्नास्वामी स्टेडियम में हुई भगदड़ के बाद कर्नाटक स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन जरूरी मंजूरी हासिल करने में विफल रहा था. तब इस हादसे में 11 लोगों की मौत हो गई थी और तब से स्टेडियम में कोई भी इंटरनेशनल मैच नहीं खेला गया है. सूत्रों के मुताबिक, ICC फरवरी-मार्च में होने वाले इस टूर्नामेंट का पूरा शेड्यूल अगले हफ्ते जारी करेगा. यह टूर्नामेंट श्रीलंका के साथ मिलकर आयोजित किया जाएगा, जहां श्रीलंका पाकिस्तान के मैचों के लिए एक न्यूट्रल वेन्यू की भूमिका निभाएगा, जो भारत के साथ समझौते के तहत तय किया गया है. श्रीलंका में तीन वेन्यू पर मुकाबले खेले जाएंगे, जिसमें कोलंबो भी शामिल है. भारत घरेलू सरजमीं पर डिफेंडिंग चैम्प‍ियन के तौर पर उतरेगा. टीम ने पिछला T20 वर्ल्ड कप जून में बारबाडोस में जीता था. भारत में चुने गए पांचों वेन्यू टियर-1 शहरों के हैं और उम्मीद है कि यहां बड़ी संख्या में दर्शक मैच देखने पहुंचेंगे. अगर पाकिस्तान फाइनल में पहुंचता है, तो खिताबी मुकाबला श्रीलंका में खेला जाएगा. ICC, BCCI और PCB के बीच हुए समझौते के अनुसार, भारत और पाकिस्तान 2027 तक अपने सभी मुकाबले न्यूट्रल वेन्यू पर खेलेंगे, चाहे मेजबान देश कोई भी हो.

उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया: मुस्लिम पर्सनल लॉ में 18 साल से कम उम्र की सहमति को नहीं मानेंगे

चंडीगढ़  पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट (Punjab High Court) ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की से शादी के बाद भी संबंध बनाने को कानूनी तौर पर रेप माना है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि उनकी धार्मिक या व्यक्तिगत कानूनी मान्यता की स्थिति कुछ भी हो, सहमति हो या वैवाहिक स्थिति हो, पॉक्सो (POCSO) अधिनियम के तहत वैधानिक बलात्कार है। पंजाब के होशियारपुर की एक 17 वर्षीय मुस्लिम लड़की और उसके पति ने अपने परिवारों की इच्छा के विरुद्ध शादी करने के बाद सुरक्षा की मांग करते हुए अदालत में याचिका दायर की थी। उन्हें लड़की के माता-पिता से हिंसा का डर था। कपल ने तर्क दिया था कि मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत एक लड़की को यौवन प्राप्त करने पर शादी करने का अधिकार है। इसकी उम्र महज 15 साल मानी जाती है। न्यायमूर्ति सुभाष मेहता ने इस तर्क को अस्वीकार करते हुए कहा, "विपरीत वैधानिक कानून के सामने, व्यक्तिगत कानून प्रभावी नहीं हो सकता।" न्यायाधीश सुभाष मेहता ने अपने विस्तृत आदेश में समझाया कि तीन विशेष कानून इस मामले में प्रभावी हैं। बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के तहत लड़की के लिए शादी की न्यूनतम कानूनी आयु 18 वर्ष है। यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम, 2012 के तहत 18 वर्ष से कम उम्र के व्यक्ति के साथ सभी यौन गतिविधियां, चाहे सहमति हो या वैवाहिक स्थिति, वैधानिक बलात्कार है। किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 के तहत देखभाल और संरक्षण की आवश्यकता वाले हर बच्चे को दुर्व्यवहार, शोषण और उपेक्षा से बचाया जाना चाहिए। न्यायाधीश ने कहा, "ये विशेष कानून धर्मनिरपेक्ष, कल्याण-केंद्रित हैं और व्यक्तिगत कानूनों का अतिक्रमण करते हैं। वे बच्चों की सुरक्षा में सरकारी की बाध्यकारी रुचि और बाल विवाह तथा नाबालिगों के साथ यौन कृत्यों को अपराधी बनाने के विधायी इरादे को दर्शाते हैं, भले ही वे विवाह की आड़ में किए गए हों। उपरोक्त चर्चा के आलोक में यह अदालत ऐसे युगल को सुरक्षा प्रदान करने के पक्ष में नहीं है, जहां पति-पत्नी में से कोई एक नाबालिग है, क्योंकि ऐसा करने से उपर्युक्त लाभकारी विधियों का उद्देश्य ही विफल हो जाएगा।" सरकार ने इस याचिका का विरोध करते हुए कहा कि लड़की 18 वर्ष से कम है, जिससे यह विवाह बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के तहत रद्द करने योग्य है। सरकार ने यह भी कहा कि एक बार नाबालिग का दर्जा स्थापित हो जाने पर अदालत को 'पेरेंट्स पेट्रियाए' (नाबालिग के अभिभावक) के रूप में कार्य करते हुए बच्चे के सर्वोत्तम हित का निर्धारण करना होगा। सभी पक्षों को सुनने के बाद बेंच ने होशियारपुर के एसएसपी को नाबालिग को बाल कल्याण समिति के सामने पेश करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि CWC को किशोर न्याय अधिनियम, 2015 की धारा 36 के तहत एक जांच करनी चाहिए और नाबालिग लड़की की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करना चाहिए। साथ ही, पुलिस को याचिकाकर्ता युगल को शारीरिक नुकसान से बचाने का भी निर्देश दिया गया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वन्दे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम को किया संबोधित

भारत की आजादी का अमर मंत्र बन गया था वन्दे मातरम्ः सीएम योगी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वन्दे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम को किया संबोधित वन्दे मातरम् का किया गया सामूहिक गायन व लिया गया स्वदेशी का संकल्प प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित कार्यक्रम का किया गया लाइव प्रसारण उत्तर प्रदेश पिछले 8 वर्ष में जिन ऊंचाइयों की ओर अग्रसर हुआ है, यह हमारे कर्तव्यों की ही अभिव्यक्ति हैः सीएम योगी बोले- आजादी के मंत्र को बढ़ाने और भारत को नई दिशा देने में सफल हुआ वंदे मातरम् गीत कर्तव्यों के प्रति आग्रही बनाता है वन्दे मातरम्ः सीएम योगी 150 वर्ष से भारत को प्रतिनिधित्व देते हुए राष्ट्रीयता का भाव पैदा करने में सफल हुआ है यह गीतः योगी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रगीत वन्दे मातरम् के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को किया नमन लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है। आजादी के आंदोलन का मंत्र बने वन्दे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने पर पीएम मोदी ने इस दिवस को स्मृति दिवस के रूप में आयोजित करने के लिए देशवासियों को नई प्रेरणा दी। सीएम ने कहा कि वन्दे मातरम् भारत की आजादी का अमर मंत्र बन गया था। उस दौरान विदेशी हुकूमत के द्वारा दी जाने वाली अनेक यातनाओं, प्रताड़नाओं की परवाह किए बिना भारत का हर नागरिक (स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, क्रांतिकारी) वन्दे मातरम् गीत के साथ गांव, नगर, प्रभातफेरी के माध्यम से भारत की सामूहिक चेतना के जागरण के अभियान से जुड़ चुका था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वन्दे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम में अपनी बातें रखीं। इस दौरान राष्ट्रगीत का सामूहिक गायन हुआ और स्वदेशी का संकल्प भी लिया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रगीत के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को नमन किया। मुख्यमंत्री ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया। लोकभवन में उपस्थित लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित कार्यक्रम का लाइव प्रसारण भी देखा। सीएम ने कोविड प्रबंधन की भी चर्चा की सीएम योगी ने 100 वर्ष पूर्व देश के अंदर आई महामारी का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय भारत की आबादी कुल 30 करोड़ थी और इस महामारी से मरने वालों की संख्या भी करोड़ों में थी। गांव के गांव साफ हो गए थे। स्वतंत्र भारत में कोविड जैसी महामारी का संक्रमण भी दुनिया ने झेला है। इस महामारी के दौरान शासन-प्रशासन हो या अल्पवेतन भोगी, जान की परवाह किए बिना सभी के मन में एक ही भाव था कि इसे नियंत्रित करना है और इसके समाधान का रास्ता निकालना है। सीएम योगी ने कहा कि भारत और भारतीयता, नागरिकों के बारे में संवेदनशील तरीके से वह नेतृत्व ही सोच सकता है, जो उस भावना से ओतप्रोत हो। आजादी के मंत्र को बढ़ाने में सफल हुआ वन्दे मातरम् सीएम योगी ने कहा कि 1875 में रचा गया यह गीत केवल आजादी का ही गीत नहीं रहा, बल्कि देश के अंदर आजादी के मंत्र को बढ़ाने में भी सफल हुआ। वन्दे मातरम् गीत संस्कृत व बांग्ला की सामूहिक अभिव्यक्ति को भले ही प्रदर्शित करता हो, लेकिन यह संपूर्ण भारत को राष्ट्र माता के भाव के साथ जोड़ने का अमर गीत बन गया। इसने भारत की शाश्वत अभिव्यक्ति को देशवासियों के सामने प्रस्तुत किया था। सीएम ने कहा कि जब विदेशी हुकूमत ने 1905 में बंग-भंग के माध्यम से भारत की भुजाओं को काटने का दुस्साहिक निर्णय लिया था, उस समय भी इस गीत ने पूरे भारतवासियों को एकजुट होकर प्रतीकार करने की प्रेरणा दी। उसके बाद के कालखंड में जब भी किसी क्रांतिकारी ने फांसी के फंदे को चूमा, तब उसके मुख से वंदे मातरम् मंत्र ही निकलता रहा। वन्दे मातरम् ने किया संपूर्ण भारत की सामूहिक अभिव्यक्ति का प्रतिनिधित्व सीएम योगी ने कहाकि भारत की आजादी के आंदोलन के दौरान भी जब स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने कोई स्लोगन, फ्लैग दिया तो वन्दे मातरम् उसका स्वर बना। वन्दे मातरम् संपूर्ण भारत की सामूहिक अभिव्यक्ति का प्रतिनिधित्व करते हुए पूरे देश को एकता के सूत्र में बांधने वाला मंत्र बना। इस गीत ने हर भारतीय के मन में यह भाव रचने का प्रयास किया कि व्यक्ति जाति-मत-मजहब से ऊपर उठकर राष्ट्र के बारे में सोच सके और राष्ट्रप्रथम के भाव के साथ राष्ट्रमाता के प्रति सामूहिक अभिव्यक्ति हो। सीएम योगी ने वंदे मातरम् को भारत की भक्ति-शक्ति के सामूहिक शाश्वत अभिव्यक्ति का सामूहिक स्वरूप बताया। सीएम ने कहा कि वन्दे मातरम् के अमरगीत के साथ उसके 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में हम सभी इसके रचयिता को भी याद कर रहे हैं। संविधान सभा ने इस गीत को 24 जनवरी 1950 को भारत के राष्ट्रगीत के रूप में मान्यता दी। यह अमर गीत भारत को नई दिशा देने में हुआ है सफल सीएम योगी ने कहा कि यह भले ही बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के आनंद मठ के उस अमर उपन्यास पर आधारित है, जिन्होंने भारत व बंगाल में उस दौरान भूख से तड़पती, अकाल-अभाव से ग्रसित जनता के उन स्वरों को, जिसे संन्यासियों ने बाद में आंदोलन का रूप दिया। लेकिन वास्तव में यह अमर गीत भारत को नई दिशा देने व भारत की सामूहिक चेतना को आगे बढ़ाने में सफल हुआ है। आज इसके 150 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं। यह गीत 150 वर्ष से भारत को प्रतिनिधित्व देते हुए नई राष्ट्रीयता का भाव पैदा करने में सफल हुआ है। कर्तव्यों के प्रति आग्रही बनाता है वन्दे मातरम् सीएम योगी ने कहा कि हम सब वन्दे मातरम् का हिस्सा हो सकते हैं। वन्दे मातरम् किसी उपासना विधि, किसी जाति-व्यक्ति का महिमा मंडन करने के प्रति नहीं, बल्कि हमारे कर्तव्यों के प्रति आग्रही बनाता है। सीएम ने बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर द्वारा 26 नवंबर 1949 को भारत के संविधान की ड्राफ्टिंग प्रति सौंपने का भी जिक्र किया। सीएम ने पीएम मोदी के उस कथन की चर्चा की औऱ कहा कि हम देश में रहते हैं, अधिकारों की बात करते हैं पर क्या कभी कर्तव्य के बारे में स्मरण किया है। कर्तव्य ऐसा हो, जो वर्तमान व भावी पीढ़ी के भविष्य को भी उज्ज्वल बना सके। वन्दे … Read more

कजाकिस्तान ने चुना अब्राहम समझौता: 33 साल से इजरायल से संबंध, अब क्यों हो रहा साझेदारी?

तेल अवीव अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा ऐलान किया है. उन्होंने कहा कि कजाकिस्तान अब्राहम समझौते में शामिल हो गया है. यह ट्रंप के दूसरे कार्यकाल का पहला ऐसा कदम है. लेकिन सवाल यह है कि आखिर यह समझौता क्या है, कजाकिस्तान क्यों इसमें आ रहा है, और इससे मिडिल ईस्ट या दुनिया में क्या बदलाव आएगा? आइए समझते हैं. अब्राहम समझौता क्या है? अब्राहम समझौता ट्रंप के पहले कार्यकाल की बड़ी कामयाबी है. यह 2020 में शुरू हुआ था. इसका नाम अब्राहम से आया है, जो यहूदी, ईसाई और इस्लाम धर्मों के पैगंबर माने जाते हैं. यह समझौता इजरायल और कुछ मुस्लिम देशों के बीच दोस्ती से जुड़ा है. इससे पहले, इजरायल और कई अरब देशों के बीच दुश्मनी थी. लेकिन इस समझौते से वे देश इजरायल को आधिकारिक तौर पर मान्यता देने लगे. दूतावास खोले, व्यापार बढ़ाया, पर्यटन शुरू किया. अभी तक इसमें संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बहरीन, मोरक्को और सूडान शामिल हैं. इन देशों ने इजरायल के साथ पूर्ण संबंध बनाए. सूडान इकलौता ऐसा देश है, जिसने दूतावास नहीं खोला. ट्रंप इसे अपनी विदेश नीति की सबसे बड़ी सफलता मानते हैं. लेकिन गाजा युद्ध के बाद यह समझौता थोड़ा ठंडा पड़ गया था. अब ट्रंप इसे फिर से जिंदा करना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि मध्य एशिया का मुस्लिम बहुल देश कजाखस्तान ऐसा पहला देश होगा, जो उनके दूसरे कार्यकाल में अब्राहम अकॉर्ड का हिस्सा बनेगा। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ पर इस संबंध में पोस्ट करके जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मैंने कजाखस्तान के राष्ट्रपति कासम-जोमार्ट तोकायेव से बात की है। इसके अलावा इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू से भी इस संबंध में बात की है। उन्होंने कहा कि हम दुनिया में शांति स्थापित करना चाहते हैं और उसके लिए ये संबंध अहम हैं। इसी के तहत अब्राहम अकॉर्ड अहम है और सभी इसके साथ जुड़कर शांति एवं समृद्धि को बढ़ावा देना चाहते हैं। डोनाल्ड ट्रंप का दावा- कुछ और मुसलमान देश हैं लाइन में डोनाल्ड ट्रंप ने यह दावा भी किया कि अभी इस अकॉर्ड से कुछ और देश भी जुड़ने के लिए कतार में हैं। उन्होंने कहा कि हम जल्दी ही एक सेरेमनी का ऐलान करेंगे, जिसमें कजाखस्तान अब्राहम अकॉर्ड का हिस्सा बनेगा। हमें उम्मीद है कि जल्दी ही दुनिया में एकता, विकास और समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए कुछ और देश भी साथ आएंगे। बता दें कि इस अकॉर्ड से सीरिया के भी जुड़ने की संभावनाएं जताई जा रही हैं। यह इजरायल का पड़ोसी देश है और यदि सीरिया साथ आया तो यह बड़ा बदलाव होगा। खासतौर पर मध्य पूर्व एशिया में शांति और स्थिरता के लिहाज से यह अहम होगा। यही नहीं मुस्लिम देशों की एकता के लिए भी यह देखने लायक होगा। इजरायल के साथ कजाखस्तान के हैं पुराने रिश्ते, अब क्या बदलेगा बता दें कि कजाखस्तान के पहले से ही इजरायल से रिश्ते रहे हैं। कभी सोवियत संघ का हिस्सा रहे कजाखस्तान ने 1992 में इजरायल के साथ कूटनीतिक संबंध स्थापित किए थे। ट्रंप का मानना है कि मुसलमान देशों को साथ लाने से गाजा में भी शांति व्यवस्था स्थापित करने में मदद मिलेगी। ऐसा इसलिए क्योंकि गाजा में इजरायली हमलों के खिलाफ मुसलमान देश एकजुट रहे हैं। कजाखस्तान भी मुस्लिम बहुल देश, पर क्यों नहीं है कट्टरता कज़ाखस्तान की आबादी लगभग 2 करोड़ है और यह क्षेत्रफल की दृष्टि से दुनिया के सबसे बड़े देशों में से एक है। हालांकि इसकी अधिकांश आबादी मुस्लिम है, लेकिन यह आधिकारिक तौर पर इस्लामिक देश नहीं है। जैसा बहरीन, मोरक्को और संयुक्त अरब अमीरात के साथ है, जिन्होंने 2020 में अब्राहम अकॉर्ड में शामिल होने का फैसला लिया था। यही नहीं कजाखस्तान को अपेक्षाकृत उदारवादी देश माना जाता है। अन्य इस्लामिक देशों के मुकाबले सोवियत से अलग होने वाले मुल्क मुस्लिम बहुल तो हैं, लेकिन कट्टरता वहां नहीं है। कजाकिस्तान का क्या संबंध है? कजाकिस्तान मध्य एशिया का एक बड़ा देश है. यहां की आबादी का 70 फीसदी मुस्लिम है. लेकिन अब्राहम समझौते पर अगर यह देश हस्ताक्षर करता है तो भी ये कुछ नया नहीं होगा. ऐसा इसलिए क्योंकि कजाकिस्तान के 1992 से ही इजरायल के साथ अच्छे संबंध रखे हैं. वहां दूतावास हैं, व्यापार होता है, कोई दुश्मनी नहीं. ऐसे में यह कदम नया संबंध बनाने का नहीं, बल्कि पुराने को मजबूत करने का है. ट्रंप ने कहा कि उन्होंने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट टोकायेव से फोन पर बात की. टोकायेव गुरुवार को व्हाइट हाउस में ट्रंप से मिले थे, क्योंकि वहां सेंट्रल एशिया के पांच देशों के नेताओं का समिट था. टोकायेव ने कहा, ‘यह हमारे देश की नीति का प्राकृतिक हिस्सा है. हम संवाद, सम्मान और स्थिरता चाहते हैं.’ एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप ने इसे ‘शक्ति का क्लब’ कहा और बोले, ‘यह पहला देश है, कई और आएंगे.’ कजाकिस्तान अब क्यों करेगा समझौता?     न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक कजाकिस्तान के राष्ट्रपति टोकायेव का कहना है कि इससे इजरायल के साथ व्यापार और सहयोग बढ़ेगा.     कजाकिस्तान के पास यूरेनियम और दुर्लभ खनिजों के बड़े भंडार हैं. गुरुवार को कजाकिस्तान ने महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में अमेरिकी सरकार के साथ एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग पर हस्ताक्षर किया. इसमें कजाकिस्तानका भी हित है. वह नहीं चाहता कि चीन और रूस के बीच फंसा रहे.     कजाकिस्तान अमेरिका को खुश करके निवेश और तकनीक हासिल करना चाहता है. इसका एक उदाहरण भी दिखा जब कजाकिस्तान के राष्ट्रपति ने ट्रंप के सामने उनकी तारीफ की. उन्होंने कहा, ‘आप एक महान राजनेता हैं जिन्हें अमेरिका की नीति में सामान्य ज्ञान और परंपराओं को वापस लाने के लिए स्वर्ग से भेजा गया है.’     ट्रंप के लिए यह राजनीतिक जीत है. गाजा युद्ध के बाद इजरायल दुनिया में अकेला पड़ गया था. ट्रंप पहले भी कह चुके हैं, ‘मेरा लक्ष्य इजरायल को फिर से मजबूत बनाना है.’ किसको क्या फायदा होगा?     ट्रंप कार्यकाल का यह पहला समझौता होगा. ऐसे में इजरायल की दुनिया में साख बढ़ेगी. दूसरे मुस्लिम देशों से समर्थन की भी उम्मीद है.     कजाकिस्तान अमेरिका के कहने पर यह समझौता करेगा. ऐसे में अमेरिका से आर्थिक मदद, इजरायल … Read more

60 करोड़ की वित्तीय गड़बड़ी में फंसे शिल्पा-राज कुंद्रा, झोल बढ़ा सकता है कानूनी दबाव

नई दिल्ली  60 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में एक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी और उनके पति राज कुंद्रा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. बेस्ट डील कंपनी के माध्यम से निवेशकों के साथ की गई कथित करोड़ों की धोखाधड़ी के मामले में नया और बड़ा खुलासा सामने आया है. मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) की जांच से पता चला है कि यह धोखाधड़ी केवल 60 करोड़ रुपये तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे कहीं अधिक है. इस मामले में ईओडब्ल्यू ने कंपनी के चार पूर्व कर्मचारियों के बयान दर्ज किए हैं, जिनमें पूर्व मुख्य वित्त अधिकारी (सीएफओ), पूर्व अकाउंटेंट और दो पूर्व निदेशक शामिल हैं. जांच एजेंसी अब पूरे वित्तीय लेन-देन और निवेश प्रक्रिया की गहराई से पड़ताल कर रही है. जांच को आगे बढ़ाने के लिए शाखा जल्द ही फोरेंसिक ऑडिटर नियुक्त करेगी, जिससे कंपनी के बैंक खातों की जांच कराई जा सके. मामले में राज कुंद्रा के अलावा कई अन्य लोगों के नाम भी सामने आ सकते हैं, जिन्होंने धोखाधड़ी में पूरी मदद की है. कंपनियों के बीच ही घुमाया पैसा जांच अधिकारियों का कहना है कि फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट आने के बाद मामला साफ हो जाएगा और आरोप पत्र दायर करने से पहले ऑडिट रिपोर्ट मिल जाएगी. ईओडब्लू की जांच में यह सामने आया है कि निवेशकों का पैसा लगातार राज कुंद्रा से जुड़ी कंपनियों के बीच ही घुमाया जाता था और बैलेंस शीट पर कंपनियों के नाम पर खर्चे दिखा रहे थे. कैसे किया झोल? ईओडब्लू के बयान के मुताबिक, राज कुंद्रा की कंपनी बेस्ट डील टीवी पर किसी प्रोडक्ट का विज्ञापन देखने के बाद ग्राहक जब आर्डर करता था तो उस आर्डर को सेलर कंपनी से सीधे लेने के बजाय राज कुंद्रा उसे खरीदने अपनी ही कंपनी स्टेटमेंट मीडिया सॉल्यूशंस (एसएमएस) को देते थे. प्रोडक्ट खरीदने के बाद अपनी कंपनी कूरियर कंपनी एसएलएस लॉजिस्टिक के जरिए डिलीवर भी कराई जाती थी, जबकि कंपनी की बैलेंस शीट और निवेशकों को दिखाए गए दस्तावेजों में यह दर्शाया गया था कि सेवाएं अलग-अलग कंपनियों से ली जा रही हैं. क्या-क्या हुए खुलासे ईओडब्लू अधिकारियों के अनुसार, भले ही एसएमएस और एसएलएस लॉजिस्टिक कंपनियों में राज कुंद्रा का नाम डायरेक्टर के रूप में दर्ज नहीं है, लेकिन दोनों कंपनियों के निदेशक उसके बेहद करीबी लोग थे. जांच में यह भी पता चला है कि एसएमएस कंपनी ने अधिकांश वेंडरों को वास्तविक भुगतान नहीं किया, जबकि रिकॉर्ड में भुगतान दिखाया गया है. इन खुलासों के बाद फिलहाल राज कुंद्रा की परेशानी बढ़ गई है.

कटरीना और विक्की के घर गूंजी किलकारियां, बेटे का जन्म होने पर कपल ने जताया आभार

मुंबई कटरीना कैफ और विक्की कौशल एक प्यारे से बच्चे के माता-पिता बन गए हैं। एक्ट्रेस ने एक बेटे को जन्म दिया है। बॉलीवुड कपल ने अपने पहले बच्चे यानी एक लड़के का स्वागत किया है। दोनों स्टार्स ने शुक्रवार को एक साथ यह खुशखबरी शेयर की है। कटरीना और व‍िक्‍की ने इंस्‍टाग्राम पर पोस्ट किया है, 'हमारी खुशियों की सौगात आ गई है। अपार कृतज्ञता के साथ, हम अपने नन्हे मेहमान का स्वागत करते हैं। 7 नवंबर, 2025। कैटरीना और विक्की।' दोनों ने जब डेटिंग शुरू की तो किसी को ये खबर नहीं थी और उनकी शादी भी कुछ ऐसी ही हुई लेकिन अब नन्हें मेहमान के आने से दोनों पूरे हो गए हैं। बेटे के माता-पिता बने विक्की-कटरीना इससे पहले, 23 सितंबर 2025 को, दोनों ने घोषणा की कि वे अपने पहले बच्चे की उम्मीद कर रहे हैं और इसे 'हमारे जीवन का सबसे अच्छा चैप्टर' कहा। एक भावुक नोट में, इस कपल ने लिखा, 'खुशी और कृतज्ञता से भरे दिलों के साथ अपने जीवन का सबसे अच्छा अध्याय शुरू करने जा रहे हैं।' नोट के साथ उन्होंने विक्की की एक तस्वीर भी शेयर की जिसमें वह कटरीना के बेबी बंप को सहला रहे हैं। विक्की कौशल-कटरीना कैफ की मुलाकात उनकी पहली मुलाकात 2019 में स्क्रीन अवार्ड्स में हुई, जहां विक्की कौशल होस्ट कर रहे थे। मंच पर तो सब कुछ स्क्रिप्टेड और प्रोफेशनल था, लेकिन उनकी पहली असली मुलाकात बैकस्टेज हुई। किसको पता था दोनों का मजाक उनके जीवन का सबसे बड़ा सच बन जाएगा। विक्की और कटरीना ने कही ये बात लेकिन अगर बॉलीवुड ने हमें कुछ सिखाया है, तो वो ये कि कभी-कभी किसी मजाक से चिंगारी भड़क सकती है। वो पल आया कॉफी विद करण में, जब कटरीना ने ज़िक्र किया कि वो विक्की कौशल के साथ काम करना चाहेंगी क्योंकि उन्हें लगता है कि दोनों साथ में अच्छे लगेंगे। जब करण जौहर ने बाद में उसी सोफे पर विक्की को ये बात बताई, तो एक्टर अचानक चौंक गए। शादी तक कैसे पहुंची बात इसके तुरंत बाद, बॉलीवुड के अनऑफिशियल मैचमेकर करण जौहर की एक पार्टी में दोनों की फिर से मुलाकात हुई। ये दिलों का मिलन था, जो अभी भी इस बात से अनजान थे कि भविष्य में क्या होने वाला है, तभी से उनकी बातचीत शुरू हो गई और ये प्यार शादी तक पहुंच गया।

सिख नेता स्वर्णजीत सिंह खालसा की बड़ी सफलता, नॉर्विच (कनेक्टिकट) के मेयर चुने गए

 वॉशिंगटन भारतीय मूल के मुसलमान जोरहान ममदानी के अमेरिकी शहर न्यूयॉर्क का मेयर चुने जाने की दुनिया भर में चर्चा है। इस बीच भारतीय मूल के ही एक सिख नेता स्वर्णजीत सिंह खालसा ने भी बड़ी सफलता पाई है। वह अमेरिकी प्रांत कनेक्टिकट के शहर नॉर्विच के मेयर चुने गए हैं। वह पहले सिख नेता हैं, जिन्हें अमेरिका के इस प्रांत के किसी शहर में यह जिम्मेदारी मिली है। खालसा ने रिपब्लिक कैंडिडेट पीटर नैस्ट्रॉम को हराकर सफलता हासिल की है। अहम बात यह है कि नॉर्विच में सिर्फ 10 परिवार ही हैं और उसके बाद भी खालसा को जीत मिलना दिलचस्प है। स्वर्णजीत सिंह खालसा 40 वर्षीय अमृतधारी सिख हैं और मूल रूप से उनका परिवार पंजाब के जालंधर का रहने वाला है। उनका परिवार दिल्ली से लेकर पंजाब तक पंथिक मामलों से लेकर राजनीति तक में ऐक्टिव रहा है। उन्होंने अमेरिका में राजनीतिक जीवन की शुरुआत तब की, जब 9/11 के आतंकी हमलों के बाद सिखों को भी उनकी वेश-भूषा के चलते टारगेट किया गया। हेट क्राइम का भी सामना करना पड़ा। स्वर्णजीत सिंह खालसा ने एक लंबा कैंपेन चलाया था कि कैसे सिख समुदाय की एक अलग पहचान है। इसके बाद वह स्थानीय मसले भी उठाने लगे और धीरे-धीरे अमेरिका के नॉर्विच शहर में एक लोकप्रिय चेहरा बन गए। FBI ने भी किया था स्वर्णजीत सिंह खालसा का सम्मान उनकी ओर से लगातार प्रयास किए गए कि नॉर्विच समेत अमेरिका में सहिष्णुता और सामुदायिक भावना को प्रोत्साहित किया जाए। उनके प्रयासों का परिणाम था कि अमेरिकी एजेंसी एफबीआई की ओर से 2017 में उन्हें कम्युनिटी लीडरशिप अवॉर्ड मिला था। कुल 56 लोगों को ये सम्मान मिले थे, जिनमें से वह अकेले भारतीय थे। उनका मुख्य प्रयास यह था कि अमेरिकियों को बताया जाए कि सिखों की एक अलग पहचान है। वे वैसे नहीं हैं, जैसी इमेज उनके बारे में है। खासतौर पर दाढ़ी और पगड़ी के चलते उनके बारे में पूर्वाग्रह रखने वाले लोगों को उन्होंने जागरूक किया। जालंधर के कॉलेज से पढ़े और फिर स्टडी वीजा पर गए थे अमेरिका स्वर्णजीत सिंह खालसा के पिता परमिंदर पाल सिख इंटरनेशल सोसायटी में हैं। उन्होंने बेटे की सफलता का जिक्र सोशल मीडिया पर भी किया है। परमिंदर ने बताया कि उनके बेटे ने जालंधर के डीएवी इंजीनियरिंग कॉलेज से पढ़ाई की थी। इसके बाद वह स्टडी वीजा पर अमेरिका चले गए थे। अमेरिका में ही स्वर्णजीत सिंह ने कंप्यूटर इंजीनियरिंग में मास्टर्स की डिग्री हासिल की थी। वहीं पर उन्होंने लुधियाना की ही रहने वाली सिख युवती से विवाह किया था। फिलहाल वह नॉर्विच में कंस्ट्रक्शन का बिजनेस करते हैं। वह जिस नॉर्विच शहर में रहते हैं, वह अमेरिका के उन शहरों में से एक है, जहां लोगों की प्रति व्यक्ति आय काफी ज्यादा है।