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इंडस्ट्री को बड़ा झटका: इस फेमस अभिनेता का अचानक हुआ निधन, परिवार ने दी जानकारी

लॉस एंजिल्स हॉलीवुड इंडस्ट्री को एक बड़ा झटका लगा है। फेमस एक्टर विलियम रश का 31 साल की उम्र में निधन हो गया। विलियम के अचानक निधन ने उनके परिवार और फैंस को हैरान कर दिया है। अभिनेता की मौत की जानकारी उनकी मां और हॉलीवुड की जानी-मानी एक्ट्रेस डेबी रश ने खुद अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर साझा की। अभी तक विलियम के निधन का कारण सामने नहीं आया है। मां ने दी निधन की जानकारी विलियम की मां डेबी रश ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा कि उनके प्यारे बेटे का 17 दिसंबर को निधन हो गया। उन्होंने बताया कि इस गहरे दुख से उनका परिवार पूरी तरह टूट गया है। डेबी ने पोस्ट में कहा कि इस मुश्किल समय में भी विलियम ने दूसरों की मदद की और अंगदान कर कई परिवारों को नई उम्मीद और जीवन दिया। उन्होंने फैंस से प्रार्थना की अपील करते हुए कहा कि विलियम को हमेशा याद रखा जाएगा। विलियम रश कौन थे? विलियम रश ने अपने करियर की शुरुआत टीवी सीरीज से की थी। उन्होंने 'Waterloo Road' में जोश स्टीवेन्सन की भूमिका निभाई और दर्शकों का ध्यान खींचा। साल 2016 में उन्होंने 'X Factor' में ऑडिशन भी दिया। विलियम की मां डेबी रश भी हॉलीवुड की जानी-मानी एक्ट्रेस हैं, जिन्होंने 'Coronation Street' में करीब एक दशक तक काम किया। फैंस ने जताया दुख सोशल मीडिया पर विलियम रश के फैंस उनकी याद में पोस्ट साझा कर उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं। उनकी मौत ने न सिर्फ परिवार बल्कि पूरी हॉलीवुड इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ा दी है।

रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की बड़ी सौगात, जशपुर की 4 प्रमुख सड़कों हेतु 12.69 करोड़ रुपये स्वीकृत

रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की बड़ी सौगात: जशपुर की 4 प्रमुख सड़कों के लिए 12.69 करोड़ रू. मंजूर, क्षेत्रवासियों ने जताया आभार रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जशपुर जिले के सर्वांगीण विकास को नई गति देने के लिए जिले की चार प्रमुख सड़कों के निर्माण के लिए कुल 12 करोड़ 69 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की है। इस निर्णय से ग्रामीण-शहरी संपर्क मजबूत होगा, आवागमन आसान बनेगा और क्षेत्र की आर्थिक प्रगति को बल मिलेगा। जशपुरवासियों ने मुख्यमंत्री के इस जनहितकारी फैसले पर उत्साह व्यक्त करते हुए साय के प्रति गहरा आभार जताया है।     मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा स्वीकृत सड़क परियोजनाओं में 3 किमी लंबी कंडोरा से आराकोना पहुंच मार्ग के लिए 3 करोड़ 86 लाख रुपये, 3 किमी लंबी माडो से ढेंगनी पहुंच मार्ग के लिए 3 करोड़ 77 लाख रुपये, 1.9 किमी लंबी चराईडांड के मलेरिया बस्ती से एनएच-43 तक पहुंच मार्ग के लिए 2 करोड़ 20 लाख रुपये तथा 2.86 किमी लंबी बेहराखार अटल चौक से कुरूमढ़ोड़ा तक पहुंच मार्ग के लिए 3 करोड़ 76 लाख रुपये शामिल हैं। इन सड़कों के निर्माण से दूरस्थ ग्रामीण इलाकों में यातायात सुगम होगा, जिससे व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आसान हो जाएगी। दो वर्षों में 1000 करोड़ से अधिक की सड़क सौगात, ग्रामीण तस्वीर बदली     उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने दो वर्ष के कार्यकाल में जशपुर जिले को सड़क निर्माण के लिए लगभग 1000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि आवंटित की है। इससे न केवल बुनियादी ढांचा मजबूत हुआ है, बल्कि ग्रामीण अंचलों की समग्र विकास की गति तेज हो गई है। राज्य शासन की इस विकासोन्मुखी नीति से जशपुर जैसे आदिवासी बहुल जिलों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार हो रहा है, जो छत्तीसगढ़ सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।     इस सौगात पर जशपुर के ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को धन्यवाद ज्ञापित किया है। लोगों का मानना है कि इन सड़कों से न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि क्षेत्र की पर्यटन क्षमता भी मजबूत होगी। छत्तीसगढ़ सरकार की यह पहल राज्य के हर कोने तक विकास पहुंचाने के संकल्प को साकार कर रही है। विष्णुदेव साय सरकार के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ बुनियादी विकास के नए मानक गढ़ रहा है, जिससे लाखों नागरिक लाभान्वित हो रहे हैं।

संसद ने मनरेगा खत्म करने वाले बिल को दी मंजूरी, वीबी जी राम जी कानून की राह आसान

नई दिल्ली संसद ने गुरुवार को विपक्ष के तीव्र विरोध और हंगामे के बीच विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड अजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी राम जी ) बिल पारित कर दिया. यह बिल 20 साल पुरानी महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह लेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में हर साल 125 दिनों की रोजगार की गारंटी देगा. राज्यसभा ने बिल को ध्वनि मत से पास किया. गुरुवार को ही दिन में लोकसभा ने भी इसे मंजूरी दी थी. विपक्ष ने बिल के पारित होने के दौरान जोरदार हंगामा किया. विपक्ष का कहना है कि मौजूदा योजना से महात्मा गांधी का नाम हटाकर सरकार उनकी स्मृति का अपमान कर रही है और राज्यों पर वित्तीय बोझ डाल रही है.राज्यसभा में विपक्षी सदस्यों ने बिल वापस लेने की मांग की और सरकार के खिलाफ नारे लगाए. कई सदस्यों ने बिल की प्रतियां फाड़ दीं, जिस पर सभापति सीपी राधाकृष्णन ने उन्हें ट्रेजरी बेंच की ओर न जाने की चेतावनी दी. हंगामे के बाद विपक्षी सदस्यों ने वॉकआउट किया और संसद परिसर में संविधान सदन के बाहर धरने पर बैठ गए. उन्होंने देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है. पूरी रात धरने पर बैठे टीएमसी सांसद तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने संविधान सदन की सीढ़ियों पर 12 घंटे का धरना देने का फैसला किया. विपक्ष ने बिल को संसदीय समिति के पास भेजने की भी मांग की थी. राज्यसभा में पांच घंटे की चर्चा के जवाब में ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बिल का जोरदार बचाव किया. उन्होंने कहा कि यह बिल ग्रामीण भारत के विकास और रोजगार अवसरों के लिए जरूरी है. चौहान ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने महात्मा गांधी के आदर्शों की कई बार हत्या की और उनके नाम का राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया. मंत्री ने कहा कि यूपीए शासन में मनरेगा भ्रष्टाचार से ग्रस्त थी और सामग्री खरीद पर अपेक्षित धन खर्च नहीं हुआ. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना विकसित भारत बनाने का है, जिसमें गांवों का विकास अहम है. उन्होंने विपक्ष के हंगामे को लोकतंत्र का अपमान करार दिया और कहा कि सदन दादागिरी से नहीं चलेगा. चौहान ने दावा किया कि भाजपा ने गांधीजी को अपना आदर्श बनाया है और उनकी सामाजिक-आर्थिक विचारधारा को अपनाया है. लोकसभा में 8 घंटे चली चर्चा लोकसभा में भी आठ घंटे की चर्चा के दौरान विपक्ष ने कागज फाड़े और नारे लगाए. चौहान ने कहा कि मनरेगा अब पुरानी हो चुकी है और अब स्थायी संपत्तियां बनाने, जल संरक्षण, ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर और मौसम संबंधी कार्यों पर 10-11 लाख करोड़ रुपये खर्च करने की जरूरत है. अब यह बिल राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा. राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद सरकार इसे नोटिफाई करेगी और यह कानून बन जाएगा. बताया जा रहा है कि सरकार फरवरी में बजट सत्र से पहले इसे कानूनी शक्ल देना चाहती थी ताकि नए बजट में इस मद में धन राशि आवंटित की जा सके. बिल पर चर्चा के दौरान जमकर हंगामा इससे पहले  सदन में उक्त विधेयक पर देर रात तक चर्चा हुई और विपक्ष के अधिकतर सदस्यों ने इसे विभाग संबंधी संसदीय स्थायी समिति को विचार-विमर्श के लिए भेजने की मांग की। कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने गुरुवार को केंद्रीय मंत्री के जवाब से पहले यह मांग फिर से उठाई जिसे आसन की ओर से अस्वीकार कर दिया गया। सदन पर उछाले गए कागज, फाड़ी गई बिल की कॉपी? इसके बाद विपक्षी सदस्यों की नारेबाजी के बीच शिवराज सिंहचौहान ने अपना जवाब पूरा किया। हालांकि, उनके उत्तर के बाद सदन ने विपक्ष के कुछ सदस्यों के संशोधनों को खारिज करते हुए ‘विकसित भारत-जी राम जी विधेयक, 2025’ को ध्वनिमत से पारित कर दिया। इस दौरान आसन के समीप हंगामा कर रहे कुछ विपक्षी सदस्यों ने मंत्री के सामने कागज भी उछाले। फैसले में सिविल अपीलों को मंजूर करते हुए शैला की पार्टिशन सूट को खारिज कर दिया गया. मामला केरल का है, जहां श्रीधरन की मौत के बाद 1990 में भाई-बहनों ने इंजेक्शन सूट दाखिल किया था और वसीयत की कॉपी पेश की थी. शैला ने उसमें हिस्सा नहीं लिया, जिसे कोर्ट ने बाद में उनके खिलाफ माना. वोट के कारण कांग्रेस को बापू याद आए- शिवराज उन्होंने कहा कि मनरेगा के नाम में पहले महात्मा गांधी का नाम नहीं था और इसका नाम नरेगा था, लेकिन 2009 के लोकसभा चुनाव से पहले वोटों के कारण कांग्रेस को बापू याद आ गए और उनका नाम जोड़ा गया। चौहान ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नीत सरकार ने मनरेगा को भी ताकत के साथ लागू नहीं किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे सही से क्रियानवित किया। यूपीए और एनडीए सरकार की तुलना उन्होंने संप्रग और राजग सरकार के समय इस योजना के क्रियान्वयन की तुलना करते हुए कहा कि कांग्रेस के समय जहां 1660 करोड़ श्रम दिवस सृजित हुए थे, वहीं मोदी सरकार में 3210 करोड़ श्रम दिवस का सृजन किया गया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार से पहले इस योजना में महिलाओं की भागीदारी 48 प्रतिशत थी, जो इस सरकार के समय 56.73 प्रतिशत हो गई। 'कांग्रेस ने किया गांधी का नाम चुराने का पाप' केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने तो गांधी का नाम चुराने का पाप किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने सदन में कहा कि यह सरकार ‘सनक’ में नाम बदल रही है। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हम सनक में नाम नहीं बदल रहे, अपने परिवार के लोगों पर नाम रखने की सनक तो कांग्रेस की है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस की सरकारों के समय सैकड़ों योजनाओं, इमारतों, उत्सवों, संस्थानों आदि के नाम गांधी परिवार के सदस्यों- जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के नाम पर रखे गए थे। कांग्रेस पर जमकर बरसे केंद्रीय मंत्री केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कांग्रेस महात्मा गांधी का नाम लेकर ‘ढोंग’ कर रही है और उसने तो देश के बंटवारे के दिन, कश्मीर को विशेष दर्जा दिये जाने के साथ, इंदिरा गांधी द्वारा आपातकाल लगाये जाने के दिन ही ‘‘बापू के आदर्शों की हत्या कर दी थी। उन्होंने कांग्रेस को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि इन्होंने बापू के आदर्शों को मारने का काम किया, मोदी … Read more

अरावली की ढलान पर खनन को हरी झंडी! SC के फैसले से पर्यावरण पर मंडराया बड़ा खतरा

अरावली देश में पिछले कुछ वर्षों से खनन के जरिए पहाड़ों को काटने का सिलसिला लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट के एक हालिया फैसले ने पर्यावरण से जुड़े बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। 20 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने खनन से जुड़ा एक अहम फैसला सुनाया, जिसके तहत 100 मीटर तक ऊंचाई वाले पहाड़ों पर खनन की अनुमति दी गई है। यह फैसला खासतौर पर राजस्थान और अरावली पर्वतमाला के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह फैसला पूरी तरह लागू हुआ, तो राजस्थान में रेगिस्तान का क्षेत्र बढ़ सकता है। अरावली पर्वतमाला पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला अरावली पर्वतमाला को राजस्थान की लाइफ लाइन कहा जाता है, लेकिन अब यह लाइफ लाइन खतरे में नजर आ रही है। पर्यावरण मंत्रालय की रिपोर्ट के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि अरावली पर्वत का क्षेत्र तेजी से सिकुड़ रहा है। कोर्ट के अनुसार, अरावली का लगभग 90% हिस्सा अब 100 मीटर से कम ऊंचाई का रह गया है, 100 मीटर से कम ऊंचाई वाले क्षेत्र को अब पर्वत नहीं, सिर्फ भूभाग माना जाएगा,  इसका सीधा मतलब यह है कि इन इलाकों में खनन के रास्ते खुल सकते हैं। क्या राजस्थान में बढ़ेगा रेगिस्तान? पर्यावरण मंत्रालय की रिपोर्ट में बताया गया कि अरावली पर्वतमाला अब पहले जैसी ऊंची नहीं रही। अरावली मरुस्थल के विस्तार को रोकने में प्राकृतिक दीवार का काम करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अरावली में खनन बढ़ा, तो: मरुस्थल का विस्तार तेजी से होगा, मानसून की हवाएं कमजोर पड़ेंगी, प्रदेश में बारिश कम होगी। अरावली की ऊंचाई घटने से मानसून सिस्टम भी प्रभावित हो रहा है, जिससे राजस्थान के मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। राजस्थान की पहचान है अरावली पर्वतमाला अरावली पर्वतमाला को दुनिया की सबसे पुरानी वलित पर्वतमालाओं में से एक माना जाता है। अरावली की कुल लंबाई: 692 किलोमीटर राजस्थान में हिस्सा: करीब 550 किलोमीटर सबसे ऊंची चोटी: गुरु शिखर (माउंट आबू) – ऊंचाई 1727 मीटर अरावली तीन राज्यों—दिल्ली, राजस्थान और गुजरात—से होकर गुजरती है। राजस्थान की अधिकांश नदियों का उद्गम भी अरावली पर्वतमाला से ही होता है, इसलिए इसे प्रदेश की लाइफ लाइन कहा जाता है। अरावली कमजोर होने से क्या होंगे नुकसान अगर अरावली पर्वतमाला का क्षरण इसी तरह जारी रहा, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं: राजस्थान में मरुस्थल का तेजी से विस्तार गर्म हवाओं का असर और बढ़ेगा बंगाल की खाड़ी से आने वाला मानसून कमजोर पड़ेगा भूकंप के झटकों का असर बढ़ सकता है अरावली से निकलने वाली नदियां सूख सकती हैं खेती और फसलों पर बुरा असर पड़ेगा प्रदेश की जलवायु और भौगोलिक संतुलन बिगड़ जाएगा बारिश का सिस्टम हो रहा है प्रभावित पर्यावरण विशेषज्ञ और राजस्थान विश्वविद्यालय की भूगोल विभाग की वरिष्ठ प्रोफेसर के अनुसार, अरावली की ऊंचाई कम होने से राजस्थान का वर्षा तंत्र बिगड़ रहा है। पहले मानसून की हवाएं अरावली से टकराकर पूर्वी राजस्थान में बारिश करती थीं, लेकिन अब अरावली कमजोर होने के कारण हवाएं पश्चिमी राजस्थान की ओर निकल जा रही हैं। इससे पूरे प्रदेश का वर्षा संतुलन गड़बड़ा रहा है, जो बेहद चिंताजनक स्थिति है। कैसे शुरू हुआ अरावली का क्षरण अरावली पर्वतमाला के क्षरण की शुरुआत 1990 के दशक में हुई। इसके मुख्य कारण बताए जा रहे हैं: तेजी से शहरीकरण दिल्ली और राजस्थान में बड़े निर्माण कार्य पत्थर और खनिजों के लिए अंधाधुंध खनन पेड़ों की कटाई स्थिति बिगड़ने पर 2002 में सुप्रीम कोर्ट ने अरावली में अवैध खनन पर रोक लगाई थी, लेकिन अब नए फैसले के बाद एक बार फिर पर्यावरण को लेकर चिंता बढ़ गई है।  

AAP वर्करों पर फायरिंग का मामला, लुधियाना में 18 कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ केस दर्ज

लुधियाना लुधियाना के बचितर नगर इलाके में ब्लाक समिति चुनाव में हुई जीत का जश्न मना रहे आप वर्करों पर कांग्रेसियों द्वारा चलाई गई गोलियों के मामले में कमिश्नरेट पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। इस मामले में महिला कांग्रेसी पंच सहित पूर्व सरपंच को भी पुलिस ने नामजद किया है। पुलिस ने इस गोलीकांड में अज्ञात सहित 18 के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ साथ आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है।  पुलिस ने यह मामले बचित नगर के रहने वाले प्रवीण कुमार की शिकायत पर पूर्व सरपंच जसबीर सिंह, अजय वीर सिंह, उदयवीर सिंह, निंदा सरपंच, तजिंदर सिंह उर्फ लाडी, पूजा पंच और हरपाल सिंह बब्बू के साथ साथ अज्ञात पर दर्ज किए हैं।  सूत्रों की माने तो पुलिस ने तीन आरोपियों को हिरासत में ले लिया है, लेकिन अभी खुलासा नहीं किया है कि किन तीन लोगों को काबू किया गया है। बाकी आरोपियों की तलाश में पुलिस की टीमें लगातार छापामारी करने में जुटी है। उधर, गोली लगने से घायल हुए लोगों को देर रात सिविल अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। कुछ अब भी अस्पताल में दाखिल है।  प्रवीण कुमार द्वारा पुलिस के पास दर्ज कराई गई शिकायत के मुताबिक जीत के बाद पार्टी वर्कर धन्यवाद रैली निकाल रहे थे। इसी दौरान आरोपियों ने अपने एरिया में रैली नहीं आने दी। इसे लेकर बहसबाजी शुरू हो गई। जिसके बाद आरोपियों ने मारपीट की और सीधी गोलियां चलाई। इस गोलीकांड में पांच लोग घायल हो गए। जिन्हें तुरत इलाज के लिए अस्पताल दाखिल कराया गया। जबकि एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। जिसमें आप वर्कर कांग्रेसियों को धमका भी रहे है और ललकारें मार कर चेतावनी दे रहे है। दोनों वर्करों के हाथ में तेजधार हथियार पकड़े हुए है। जिसके बाद दोनों पक्षों की तरफ से मारपीट हुई और पत्थरबाजी शुरु हो गई। इस दौरान महिला अपने साथियों को रोक रही है और पूर्व सरपंच जसबीर सिंह ने सीधी गोलियां चलानी शुरु कर दी। जो पांच लोगों की टांगों पर जा लगी। जिससे सभी घायल हो गए।  गोलीकांड के बाद इलाके में दहशत का माहौल बचितर नगर इलाके में हुए गोलीकांड के बाद दहशत का माहौल बना हुआ है। देर रात को भी एरिया में पुलिस का सख्त पहरा रहा और पुलिस की टीमें गश्त करती रही। शुक्रवार सुबह भी पुलिस ने इलाके में गश्त की और टीमें अलग अलग एंगलों से जांच करने में जुटी रही। पुलिस ने इलाके के कुछ लोगों से भी पूछताछ की है और उनके बयान नोट किए है। बाकी पुलिस का कहना है कि जांच जारी है और जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। कांग्रेस नेता को AAP नेता चैलेंज देते वीडियो में दिखे AAP ने झड़प के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया। हालांकि, इस झड़प और फायरिंग का वीडियो सामने आया है। जिसमें एक घर के बाहर गुट के साथ कांग्रेस नेता को AAP के वर्कर चैलेंज देते हुए नजर आ रहे हैं। इसके बाद उनमें बहस हुई और पहले पथराव और बाद में फायरिंग हुई। इस घटना से गुस्साए AAP के वर्करों ने लुधियाना-मलेरकोटला रोड पर मराडो पुलिस चौकी के पास बीती रात जाम लगा दिया था। AAP से ब्लॉक समिति चुनाव जीते सुखमीत सिंह खन्ना ने कहा था कि मैंने जसदेव नगर से चुनाव जीता। कांग्रेस के गुंडों को यह बात हजम नहीं हुई। इस सीट के लिए राजा वड़िंग उसका परिवार, कुलदीप वैद, उसका परिवार और बैंस ब्रदर्स, सभी ने जोर लगाया, फिर भी वह हार गए। अब सीधी गोलियां चला रहे। हिंसक झड़प के वीडियो में क्या दिख रहा… 1.57 मिनट के वीडियो में दिख रहा है कि आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के वर्कर एक दूसरे को ललकार रहे हैं। आम आदमी पार्टी के वर्करों में सबसे आगे हाथ में तलवार लिए निहंग सिंह के बाणे में एक व्यक्ति है। लगातार दोनों गुट एक-दूसरे को धमकियां देते हुए नजर आ रहे है। दोनों गुटों के लोगों के हाथों में ईंट-पत्थर और डंडे नजर आ रहे है। दोनों गुट एक दूसरे को गालियां देने लगे। जब AAP के समर्थक करीब पहुंचे तो सबसे पहले ईंटें कांग्रेस की वर्करों की तरफ से चलाई गई। जिसके बाद आम आदमी पार्टी के वर्करों ने भी ईंटें बरसाई। आप वर्करों ने कांग्रसियों को ईंटें मार कर खदेड़ा। तभी अचानक से गोलियां चलने की आवाज आने लगी। क्रीम रंग की जैकेट पहने व्यक्ति ने आम आदमी पार्टी के वर्करों पर सीधे गोलियां चलाई। फायरिंग कर रहे व्यक्ति की वीडियोग्राफी आप वर्करों ने की। गोलीबारी में अचानक एक गोली बुजुर्ग गुरमुख सिंह के लगी जो जमीन पर गिर गया। जो गोली चला रहा, उसे कांग्रेस नेता जसबीर सिंह बताया जा रहा है। गोली बुजुर्ग को लगने के बाद एक महिला उसे खींचते हुए कहीं ले जाती नजर आई। इस वीडियो में 3 से 4 बार फायरिंग की आवाज सुनी गई।

फर्जी प्रमोशन मामले में IAS संतोष वर्मा से जुड़ी टाइपिस्ट पर कार्रवाई, गिरफ्तारी हुई

 इंदौर मध्य प्रदेश के आईएएस अफसर संतोष वर्मा के फर्जी प्रमोशन घोटाले ने अब न्यायपालिका की दीवारों के भीतर छिपे खेल को बेनकाब करना शुरू कर दिया है। इस सनसनीखेज मामले में गुरुवार को पुलिस ने अदालत के ही एक कर्मचारी कोर्ट टाइपिस्ट नीतू सिंह चौहान को गिरफ्तार किया है। उसे पूछताछ के लिए बुलाया गया था, वहीं अचानक फर्जीवाड़े की कड़ी साबित हुई और सीधे हथकड़ी पहनाकर अदालत में पेश कर दिया गया। कोर्ट ने नीतू सिंह चौहान को 2 दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया है ताकि फर्जी आदेशों की फैक्ट्री का पूरा सच उगलवाया जा सके। पुलिस का दावा है कि नीतू पर तत्कालीन स्पेशल जज विजय रावत की अदालत के नाम से फर्जी आदेश तैयार करने का गंभीर आरोप है। यानी न्याय की मुहर लगने से पहले ही आदेश टाइपिंग टेबल पर गढ़ दिए गए। इस गिरफ्तारी के दौरान कोर्ट परिसर में हंगामा भी मचा, वकीलों ने विरोध जताया, लेकिन पुलिस अपने इरादों पर अडिग रही। साफ संदेश था कि अब इस फर्जीवाड़े पर पर्दा नहीं पड़ेगा। एसीपी कोतवाली विनोद दीक्षित के मुताबिक, सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिन आदेशों के आधार पर आईएएस संतोष वर्मा ने प्रमोशन हासिल किया, उनकी मूल प्रति आज तक पुलिस के हाथ नहीं लगी है। अदालत के रिकॉर्ड में ऐसे किसी आदेश का नामोनिशान तक नहीं है। अब पुलिस ने कोर्ट टाइपिस्ट के घर की तलाशी के लिए अनुमति मांगी है, ताकि कंप्यूटर, हार्ड डिस्क, ड्राफ्ट और दस्तावेजों से फर्जी आदेशों की पूरी कहानी निकाली जा सके। पूरा मामला इसलिए और भी गंभीर हो जाता है क्योंकि संतोष वर्मा ने दो अलग-अलग अदालतों के नाम से दो फर्जी आदेश पेश किए। एक आदेश में दावा किया गया कि प्रकरण समझौते से खत्म हो चुका है, जबकि दूसरे आदेश में खुद को पूरी तरह दोषमुक्त और बरी साबित करने की कोशिश की गई। लेकिन जब इन आदेशों की जांच हुई तो अदालत के रजिस्टर में ऐसा कोई रिकॉर्ड ही नहीं मिला। यानी कागजों पर प्रमोशन, हकीकत में कानून के साथ खुला खेल। इस हाई-प्रोफाइल फर्जीवाड़े में पहले ही तत्कालीन स्पेशल जज विजय रावत को जमानत मिल चुकी है, वहीं संतोष वर्मा भी सुप्रीम कोर्ट से जमानत पर बाहर हैं। लेकिन अब कोर्ट टाइपिस्ट की गिरफ्तारी के बाद यह साफ हो गया है कि जांच की आंच तेज होने वाली है। माना जा रहा है कि जैसे-जैसे रिमांड में पूछताछ आगे बढ़ेगी, वैसे-वैसे इस घोटाले में शामिल अन्य किरदारों के नाम भी सामने आ सकते हैं। न्यायालय के भीतर रचे गए इस अपराध ने सिस्टम की साख पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अब देखना यह है कि पुलिस इस फर्जी प्रमोशन कांड की जड़ों तक पहुंच पाती है या फिर कोई और बड़ा नाम इस खेल को दबाने की कोशिश करेगा। फिलहाल, कोर्ट की टाइपिंग मशीन से निकले फर्जी आदेश पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर चुके हैं। 

एक दिन में बड़ी संख्या में अफगान शरणार्थियों को ईरान-पाकिस्तान द्वारा वापस भेजा गया

काबुल  ईरान और पाकिस्तान से एक ही दिन में 5,500 से अधिक अफगान शरणार्थियों को जबरन अफगानिस्तान वापस भेजा गया। यह जानकारी तालिबान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने  दी। प्रवासियों से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए गठित उच्च आयोग की रिपोर्ट को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा करते हुए तालिबान के उप प्रवक्ता मुल्ला हमदुल्लाह फ़ित्रत ने बताया कि बुधवार को कुल 863 परिवारों के 5,591 लोग अफगानिस्तान लौटे। यह जानकारी पज्हवोक अफगान न्यूज ने दी। उन्होंने बताया कि लौटने वाले शरणार्थी हेरात के इस्लाम क़िला बॉर्डर, हेलमंद के बह्रमचा, निमरोज़ के पुल-ए-अब्रेशम, नंगरहार के तोरखम और कंधार के स्पिन बोल्डक सीमा मार्गों से देश में दाखिल हुए। फ़ित्रत के अनुसार, 1,311 परिवारों के 7,165 लोगों को उनके संबंधित इलाकों में भेजा गया, जबकि 849 परिवारों को मानवीय सहायता प्रदान की गई। इसके अलावा, दूरसंचार कंपनियों ने हाल ही में लौटे शरणार्थियों को 937 सिम कार्ड भी उपलब्ध कराए। उन्होंने यह भी बताया कि  ईरान और पाकिस्तान से 3,005 अफगान शरणार्थियों को जबरन निर्वासित किया गया था।इस बीच, ईरान और पाकिस्तान से अफगान शरणार्थियों के निर्वासन का सिलसिला जारी है। काबुल के एक प्रवासी शिविर में रह रहे कई लौटे हुए शरणार्थियों ने पाकिस्तानी पुलिस द्वारा कथित दुर्व्यवहार की आलोचना की है और कहा है कि उनकी सारी संपत्ति वहीं छूट गई। अफगानिस्तान के टोलो न्यूज के अनुसार, पिछले सप्ताह लौटे शरणार्थियों ने तत्काल आश्रय, भूमि, आर्थिक सहायता और रोजगार के अवसरों की मांग उठाई थी। पाकिस्तान से निर्वासित जमालुद्दीन ने टोलो न्यूज से कहा, “हमें जबरन निकाल दिया गया। हमारी कुछ संपत्ति वहीं रह गई। यहां न पैसा है, न रहने की जगह। सर्दी बढ़ रही है और हालात बेहद कठिन हैं।” एक अन्य निर्वासित गुलज़ार ने कहा, “हमें बाहर निकाल दिया गया। वह देश हमारे लिए पराया था। अब हम अपने वतन लौटे हैं और इस्लामिक अमीरात से मदद की अपील करते हैं।” कई लौटे हुए शरणार्थियों ने कहा कि पाकिस्तान में उनकी सारी संपत्ति नष्ट या छूट गई और उन्होंने तालिबान से आश्रय, आपात सहायता और रोजगार उपलब्ध कराने की मांग की। ईरान से लौटे जन मोहम्मद ने कहा, “इस्लामिक अमीरात को इन लोगों की मदद करनी चाहिए। उनके पास रहने की कोई जगह नहीं है। मैं खुद जौज़जान प्रांत जा रहा हूं, लेकिन वहां भी ठहरने की कोई व्यवस्था नहीं है।”

HIV संक्रमित बच्चों के मामले में सतना में कार्रवाई, ब्लड बैंक स्टाफ सहित 3 सस्पेंड

सतना  मध्य प्रदेश के सतना स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल शासकीय अस्पताल में 6 बच्चों के एचआईवी संक्रमित पाए जाने के मामले में राज्य सरकार ने कार्रवाई करते हुए ब्लड बैंक प्रभारी और दो लैब टेक्नीशियन को सस्पेंड कर दिया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने गुरुवार को बताया कि सतना में एचआईवी संक्रमित खून चढ़ाने के मामले की जांच के लिए मध्य प्रदेश में आयुष्मान भारत योजना के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) डॉ. योगेश भरसट की अध्यक्षता में गठित 7 सदस्यीय जांच कमेटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई की गई। अधिकारी ने बताया कि राज्य के लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने 16 दिसंबर को यह कमेटी गठित की थी। अधिकारी ने बताया कि इस रिपोर्ट के आधार पर ब्लड बैंक प्रभारी डॉ, देवेंद्र पटेल और दो लैब टेक्नीशियन – राम भाई त्रिपाठी और नंदलाल पांडे को सस्पेंड कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि इसके अलावा जिला अस्पताल के पूर्व सिविल सर्जन मनोज शुक्ला को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है और मामले में लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारी के मुताबिक, स्पष्टीकरण संतोषजनक न होने पर शुक्ला को कड़ी विभागीय कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। उल्लेखनीय है कि 16 दिसंबर को खुलासा हुआ था कि सतना जिला अस्पताल में थैलेसीमिया से पीड़ित 6 बच्चे एचआईवी संक्रमित रक्त (ब्लड ट्रांसफ्यूजन) चढ़ाए जाने से इस लाइलाज बीमारी के शिकार हो गए हैं। इनमें से एक के माता-पिता भी इसकी चपेट में आ गए हैं। यह सारे मामले इस साल जनवरी से मई के बीच सामने आए हैं और सभी पीड़ितों का एचआईवी प्रोटोकॉल के तहत इलाज किया जा रहा है। मामला सामने आने के बाद इसे लेकर हंगामा खड़ा हो गया था, जिसके बाद सरकार ने इस मामले की जांच के लिए कमेटी गठित की थी।

डॉ. रमन सिंह के प्रयासों से राजनांदगांव में खेल विकास को बढ़ावा, अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम के लिए 6.04 करोड़ स्वीकृत

राजनांदगांव विधानसभा अध्यक्ष एवं राजनांदगांव विधायक डॉ. रमन सिंह ने राज्य शासन के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा, एस्ट्रोटर्फ़ रिप्लेसमेंट एवं आधारभूत संरचना उन्नयन से क्षेत्र राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय खेल मानचित्र पर होगा और सशक्त.. राजनांदगांव, 12 दिसंबर 2025 – राजनांदगांव विधानसभा क्षेत्र तथा पूरे छत्तीसगढ़ के लिए आज अत्यंत हर्ष का विषय है कि राज्य शासन के खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम, राजनांदगांव में एस्ट्रोटर्फ रिप्लेसमेंट, भवन एवं सड़क निर्माण से संबंधित कार्यों हेतु लगभग 6 करोड़ 4 लाख रुपए की स्वीकृति प्रदान की गई है। इस महत्वपूर्ण निर्णय से राजनंदगांव क्षेत्र के खिलाड़ियों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय खेल मानचित्र पर और सशक्त रूप से स्थापित करेगी। शासन द्वारा प्रदत्त इस प्रशासनिक स्वीकृति के अंतर्गत लगभग 5 करोड़ 95 लाख रुपए (गैर-SOR दर) से कार्यों की प्रारंभिक स्वीकृति देते हुए आवश्यक नियमों एवं वित्तीय प्रावधानों के अनुपालन के साथ कार्य संपादन का मार्ग प्रशस्त किया गया है। यह निर्णय न केवल खेल अधोसंरचना को आधुनिक रूप देगा, बल्कि युवाओं को उत्कृष्ट प्रशिक्षण तथा खेल अवसर उपलब्ध कराने में भी मील का पत्थर सिद्ध होगा। इसके साथ ही खेलो इंडिया प्रोजेक्ट्स के अंतर्गत पिछले माह भी राजनांदगांव में कुल लागत राशि 9.50 करोड़ से 08 लेन सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक निर्माण कार्य को स्वीकृति मिल चुकी है। जिसका केंद्रांश 6.36 करोड़ + राज्यांश 3 करोड़ रहेगा। इस निर्णय के बाद वि.स अध्यक्ष डॉ रमन सिंह ने कहा, राजनांदगांव के जनप्रतिनिधि के रूप में, इस महत्वपूर्ण स्वीकृति हेतु मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय, उपमुख्यमंत्री एवं खेल मंत्री श्री अरुण साव तथा वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी जी के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ। यह स्वीकृति हमारे युवाओं में खेल भावना को प्रोत्साहित करने, उनके कौशल को निखारने तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा हेतु मजबूत मंच प्रदान करने में सहायक होगी। उन्होंने आगे कहा कि राजनांदगांव सदैव प्रतिभाओं की भूमि रही है, यह नई स्वीकृति हमारे खिलाड़ियों के सपनों को पंख देने वाली है। उन्होंने राजनांदगांव की जनता को विश्वास दिलाता हुए कहा कि मैं क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के लिए ऐसे प्रत्येक आवश्यक कार्य के लिए निरंतर प्रयासरत रहूँगा।

IAS सर्विस मीट का भोपाल में उद्घाटन, मुख्यमंत्री के साथ अफसर होंगे मस्ती और धमाल में शामिल

भोपाल भोपाल में शुक्रवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव ने आईएएस सर्विस मीट का शुभारंभ किया। इस आयोजन में प्रदेशभर से आईएएस अधिकारी पहुंचे हैं। आज से शुरू हुआ यह तीन दिवसीय आईएएस सर्विस मीट सभी अधिकारियों की सहभागिता के साथ आयोजित किया जा रहा है। मध्य प्रदेश के आईएएस अधिकारियों की वार्षिक सर्विस मीट शुक्रवार से भोपाल में शुरू हो गई है। तीन दिन तक चलने वाले इस आयोजन का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रशासन अकादमी में करेंगे। इसके बाद अरेरा क्लब में दिनभर और देर रात तक विभिन्न सांस्कृतिक, खेल और मनोरंजक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस मीट में सहायक कलेक्टर से लेकर मुख्य सचिव स्तर तक के अधिकारी, सेवानिवृत्त आईएएस और उनके परिवारजन शामिल हो रहे हैं। आईएएस सर्विस मीट का उद्देश्य प्रशासनिक जिम्मेदारियों से इतर अधिकारियों को आपसी संवाद, समन्वय और रचनात्मक अभिव्यक्ति का अवसर देना है। कार्यक्रम के दौरान अधिकारी अपनी कला, सांस्कृतिक प्रतिभा और खेल कौशल का प्रदर्शन करेंगे। आयोजकों के अनुसार, यह आयोजन आपसी संबंधों को मजबूत करने और तनावमुक्त माहौल प्रदान करने का माध्यम बनता है। इस वर्ष की सर्विस मीट के लिए अधिकारियों को चार हाउस—रेड, ग्रीन, ब्लू और यलो—में विभाजित किया गया है। प्रत्येक हाउस के लिए कैप्टन और वाइस कैप्टन तय किए गए हैं। तीन दिनों तक इन हाउसों के बीच सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, खेल गतिविधियों और टीम इवेंट्स में प्रतिस्पर्धा होगी। इससे कार्यक्रम में प्रतिस्पर्धात्मक भावना के साथ उत्साह भी देखने को मिलेगा। मीट के अंतिम दिन चार प्रमुख कैटेगरी में अवॉर्ड दिए जाएंगे। इनमें मोस्ट क्रिएटिव, बेस्ट प्रेजेंटेशन, बेस्ट एंटरटेनमेंट वैल्यू और बेस्ट कोऑर्डिनेशन शामिल हैं। इसके अलावा 18 वर्ष तक की आयु के आईएएस अधिकारियों के बच्चों के लिए भी बेस्ट चाइल्ड आर्टिस्ट और बेस्ट सीनियर आर्टिस्ट के पुरस्कार प्रत्येक हाउस में प्रदान किए जाएंगे। आईएएस ऑफिसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष और अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव ने बताया कि फील्ड में पदस्थ अधिकारियों की अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए पास-पड़ोस के संभागों में कार्यरत अफसरों को एक ही समूह में रखा गया है। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक रात्रि और अन्य प्रतिस्पर्धात्मक आयोजनों से अधिकारियों के बीच आपसी तालमेल और टीम भावना मजबूत होगी। आखिरी दिन दिए जाएंगे अवार्ड तीन दिन तक चलने वाली सर्विस मीट के लिए चार हाउस बनाए गए हैं। ये हाउस रेड हाउस, ग्रीन हाउस, ब्लू हाउस और यलो हाउस के रूप में रहेंगे जिसके कैप्टन और वाइस कैप्टन तय कर दिए गए हैं। मीट के आखिरी दिन चार कैटेगरी में अवार्ड दिए जाएंगे। यह अवार्ड मोस्ट क्रियेटिव, बेस्ट प्रजेंटेशन, बेस्ट एंटरटेनमेंट वैल्यू और बेस्ट कोआर्डिनेशन को लेकर दिए जाएंगे। इसके साथ ही 18 साल तक की कम उम्र के आईएएस अफसरों के बच्चों को बेस्ट चाइल्ड आर्टिस्ट और बेस्ट सीनियर आर्टिस्ट के अवार्ड हर हाउस में दिए जाएंगे। आयोजन समिति के चेयरपर्सन और प्रमुख सचिव पी. नरहरि के अनुसार, वर्ष 2010 में शुरू हुई यह सर्विस मीट हर साल अधिक यादगार बनती जा रही है। इससे अधिकारियों और उनके परिवारों के बीच पारिवारिक माहौल बनता है, सहयोग की भावना बढ़ती है और नई मित्रताएं विकसित होती हैं। संगीत, क्विज़, खेल और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए यह आयोजन सभी वर्गों के लिए आकर्षण का केंद्र रहता है। पिछले वर्षों की तरह इस बार भी डीजे नाइट, खेल गतिविधियों और पारिवारिक आयोजनों में अधिकारियों और उनके परिजनों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिलेगी। यह सर्विस मीट प्रशासनिक तंत्र के भीतर मानवीय जुड़ाव और सकारात्मक कार्य संस्कृति को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। एसोसिएशन अध्यक्ष बोले- प्रतिस्पर्धा और उत्साह बढ़ेगा आईएएस आफिसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष और अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव ने कहा कि सर्विस मीट में फील्ड में पदस्थ अफसरों की भागीदारी को प्रोत्साहित करने और उनके आपसी समन्वय को सुगम बनाने के लिए, आस-पास के संभागों में पदस्थ फील्ड अफसरों को एक समूह में रखा गया है। इस सर्विस मीट के लिए बनाए गए ग्रुप्स के बीच सांस्कृतिक रात्रि सहित विभिन्न कार्यक्रमों में प्रतिस्पर्धा होने से उत्साह और भी बढ़ जाएगा। आयोजन समिति के चेयरपर्सन प्रमुख सचिव पी नरहरि ने कहा है कि वर्ष 2010 में स्थापना के बाद से सर्विस मीट लगातार यादगार बन रही है। इससे एक परिवार के रूप में हमारे बंधन मजबूत हुए हैं, सहयोग को बढ़ावा मिला है, नई मित्रताएं बनी हैं और हमें संजोने लायक पल मिले हैं। भावपूर्ण संगीत, क्विज़ से लेकर जोशपूर्ण खेलों तक, हर एडिशन में सभी के लिए कुछ न कुछ रहा है।