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भिवंडी कोर्ट में राहुल गांधी की पेशी, RSS केस में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने दिखाए काले झंडे

ठाणे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े मानहानि मामले में कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी शनिवार को ठाणे जिले के भिवंडी में मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश हुए. राहुल ने मानहानि केस में नया जमानत दिया. उन्होंने महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल को नए जमानतदार के तौर पर पेश किया. इससे पहले, भिवंडी मजिस्ट्रेट कोर्ट ने राहुल गांधी से केस में नया जमानत देने को कहा था, क्योंकि पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल, जो उनके जमानतदार या गारंटर थे, का पिछले साल दिसंबर में निधन हो गया था. राहुल गांधी के वकील नारायण अय्यर ने पहले कहा था कि जज ने राहुल गांधी को खास तौर पर नए जमानत से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी करने के लिए खुद कोर्ट में मौजूद रहने का निर्देश दिया था. क्योंकि शिवराज पाटिल चाकुरकर, जो उनके मौजूदा जमानतदार थे, की 12 दिसंबर को मौत हो गई थी. जब राहुल गांधी को इस मामले में जमानत मिली थी, तो पूर्व केंद्रीय मंत्री शिवराज पाटिल उनकी जमानत के लिए खड़े हुए थे. बीजेपी कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी को दिखाए काले झंडे वहीं, कोर्ट में पेशी के लिए राहुल गांधी जब मुंबई पहुंचे तो बीजेपी कार्यकर्ताओं ने काले झंडे दिखाकर विरोध प्रदर्शन किया. उन्होंने इसे एआई समिट में यूथ कांग्रेस के विरोध का जवाब बताया. राहुल गांधी सुबह छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरे और कोर्ट में पेश होने के लिए सड़क के रास्ते ठाणे जिले के भिवंडी गए. बीजेपी समर्थकों के एक ग्रुप ने मुलुंड टोल नाका पर विरोध प्रदर्शन किया और उनके खिलाफ नारे लगाए. हालांकि, पुलिस ने कांग्रेस नेता के दौरे के लिए कड़े सुरक्षा इंतजाम किए थे ताकि भाजपा और कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के बीच किसी भी टकराव को रोका जा सके. पत्रकारों से बात करते हुए, प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल का विरोध करते हैं और उन पर देश की छवि खराब करने का आरोप लगाया. एक प्रदर्शनकारी ने कहा, "राहुल गांधी लगातार प्रधानमंत्री के हर काम का विरोध करते हैं. देश से जुड़े मुद्दों पर भी. यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने AI समिट में नारे लगाए, जिससे भारत की छवि खराब हुई. इसीलिए हमने उनके खिलाफ विरोध किया." इस बीच, कांग्रेस नेता सचिन सावंत ने बीजेपी के विरोध प्रदर्शन को राष्ट्रीय मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश बताया. सावंत ने सत्ताधारी बीजेपी पर ड्रामा करने का आरोप लगाया. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बीजेपी ने अमेरिका के साथ ट्रेड डील में महाराष्ट्र और देश के किसानों के हितों को दांव पर लगाकर उनके भविष्य से समझौता किया है. राहुल के खिलाफ मानहानि का केस राहुल के बयानों को लेकर एक RSS कार्यकर्ता राजेश कुंते ने उनके खिलाफ मानहानि का केस किया है. राजेश कुंते ने कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई कि कांग्रेस नेता राहुल ने 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान सोनाले गांव में एक रैली में कहा था कि महात्मा गांधी की हत्या के पीछे संघ का हाथ था. कुंते ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 500 (मानहानि) के तहत अपनी शिकायत में कहा कि इस झूठी टिप्पणी से आरएसएस की छवि धूमिल हुई है. ट्रायल के दौरान कुंते का क्रॉस-एग्जामिनेशन और पुनर्परीक्षा खत्म हो गया है. इसस पहले, सुनवाई 20 दिसंबर, 2025 को होनी थी, लेकिन नए जमानतदार की जरूरत के कारण इसे 17 जनवरी तक के लिए टाल दिया गया था. 17 जनवरी को मजिस्ट्रेट ने मामले को 21 फरवरी तक के लिए आगे बढ़ा दिया.

भिंड सड़क हादसा: बस-वन टक्कर, 5 मृतक और 7 घायल, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

भिंड  मध्य प्रदेश के भिंड में शुक्रवार देर रात बस और वैन आमने-सामने भिड़ गए। हादसे में 5 लोगों की मौत हो गई, जबकि 7 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हैं। टक्कर इतनी भीषण थी कि वैन पूरी तरह से टूट गई। उसमें सवार लोग अंदर ही फंस गए। हादसा गोहद चौराहा थाना अंतर्गत छींमका गांव के पास नेशनल हाईवे-719 पर रात 2.30 बजे हुआ। गोहद चौराहा थाना प्रभारी मनीष धाकड़ के अनुसार, ईको और वैन ग्वालियर से सवारियों को लेकर भिंड की ओर आ रहा था, जबकि बस भिंड से ग्वालियर की ओर जा रही थी। चार लोगों की मौत हादसे में चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।वहीं घायलों को एंबुलेंस से ग्वालियर रेफर किया गया। फिलहाल, घायलों का ग्वालियर में इलाज जारी है।टीआई ने बताया कि अभी दो मृतकों की पहचान हुई है।इनके नाम अतुल शिवहरे निवासी फूप और जगदीश भदौरिया निवासी स्योड़ा गांव अकोड़ा है। बाकी के शिनाख्ती के प्रयास किए जा रहे हैं।पुलिस परिजनों का पता लगाने के लिए दस्तावेजों और वाहन नंबर के आधार पर जांच कर रही है।जिस जगह हादसा हुआ, वहां अंधा मोड़ है।हो सकता है दोनों वाहन तेज रफ्तार में हों।हादसे की जांच जारी है।दोनों वाहनों को सड़क से हटाकर यातायात बहाल कर दिया गया है।इस दर्दनाक घटना में केतु पुत्र संतोष, संतोष पुत्र कल्याण, प्रदीप पुत्र राम प्रकाश, मेंवाराम पुत्र बाबूराम, राम लखन पुत्र भागीरथ, मीरा पुत्र सुरेश, सुखबीर सिंह पुत्र श्री गंभीर रूप से घायल हो गए है.. वही पांच मार्को के शव पोस्टमार्टम भिजवा दिए है। घायलों को रेफर किया भिंड के एसपी असित यादव ने बताया कि घायलों को तुरंत जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां से गंभीर मामलों को ग्वालियर रेफर किया गया। हालांकि, तमाम विरोध औ प्रदर्शन के बावजूद हाईवे पर दुर्घटनाओं का सिलसिला जारी है। यातायात सुरक्षा पर गंभीर सवाल है कि बीते सालों में तमाम कोशिशों के बाद भी यहां कोई सुधार नहीं हो पाया है। जांच में पता चला कि बस की स्पीड ज्यादा थी और संभवतः चालक की लापरवाही से यह हादसा हुआ। परिवारों का विलाप दिल दहला देने वाला है। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला और शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए गोहद अस्पताल भेजा।यह घटना न केवल एक हादसा है, बल्कि सड़क सुरक्षा के अभाव को उजागर करती है, जहां तेज रफ्तार और ओवरलोडिंग आम समस्या है।

दिल्ली में बड़ा खतराः लाल किला और चांदनी चौक के मंदिर पर लश्कर ए तैयबा का धमाका अलर्ट

नई दिल्ली देश की राजधानी दिल्ली एक बार फिर आतंकवादियों के निशाने पर है. खुफिया विभाग के सूत्रों ने एक हाई अलर्ट जारी किया है, जिसमें बताया गया है कि लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के आंतकी दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले के सामने IED हमले की साजिश रच रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान स्थित इस आतंकी संगठन ने चांदनी चौक इलाके में स्थित प्रमुख मंदिरों को भी टारगेट करने की योजना बनाई है. यह अलर्ट ऐसे समय आया है जब नवंबर 2025 में लाल किले के पास हुए कार ब्लास्ट की जांच अभी चल रही है, जिसमें 13 लोगों की मौत हुई थी. खुफिया एजेंसियों से जुड़े सूत्रों ने बताया कि लश्कर-ए-तैयबा भारत में बड़ी आतंकी वारदात को अंजाम देने की फिराक में है. सूत्रों का कहना है कि लश्कर ने कश्मीर में बिलाल मस्जिद हमले का बदला लेने के लिए दिल्ली को चुना है, जहां नवंबर 2025 के ब्लास्ट के बाद एक वायरल पोस्ट में LeT ने जिम्मेदारी ली थी. उस पोस्ट में कहा गया था, ‘नई दिल्ली पर हमला लश्कर-ए-तैयबा के बहादुर शेरों ने किया है. यह कश्मीर में शहीदों का बदला है. हम हर मस्जिद के ईंट का बदला लेंगे और हर मंदिर तक पहुंचेंगे.’ लाल किले के सामने IED हमले की साजिश अलर्ट के अनुसार, लश्कर के स्लीपर सेल दिल्ली के लाल किले के मुख्य द्वार के पास भीड़भाड़ वाले इलाके में IED प्लांट करने की योजना बना रहे हैं. लाल किला पहले भी आतंकी हमलों का शिकार रहा है. दिसंबर 2000 में LeT ने लाल किले पर हमला किया था, जिसमें तीन लोग मारे गए थे. नवंबर 2025 के कार ब्लास्ट में भी लाल किले के पास मेट्रो स्टेशन के बाहर विस्फोट हुआ था, जिसमें 13 लोगों की मौत और 20 से अधिक घायल हुए थे. जांच एजेंसियों ने इसे ‘आतंकी घटना’ करार दिया था और UAPA (अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट) के तहत केस दर्ज किया था. खुफिया सूत्रों ने बताया कि लश्कर के हैंडलर्स ISI (इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस) की मदद से पंजाब स्थित गैंगस्टरों के साथ मिलकर IED सप्लाई कर रहे हैं. ये IED हाई-इंटेंसिटी वाले हैं, जो वाहनों या बैग्स में छिपाकर लगाए जा सकते हैं. दिल्ली पुलिस ने अलर्ट के बाद लाल किले के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी है. NSG (नेशनल सिक्योरिटी गार्ड) कमांडोज, डॉग स्क्वाड और AI आधारित फेशियल रिकग्निशन कैमरे तैनात किए गए हैं. दिल्ली मेट्रो और रेलवे स्टेशनों पर भी हाई अलर्ट है. चांदनी चौक के मंदिर निशाने पर अलर्ट में विशेष रूप से चांदनी चौक इलाके के मंदिरों को खतरा बताया गया है. लाल किले से सटे चांदनी चौक में कई प्राचीन मंदिर जैसे दिगंबर जैन मंदिर, गौरी शंकर मंदिर और सीस गंज गुरुद्वारा हैं. ये जगहें रोजाना हजारों श्रद्धालुओं से भरी रहती हैं, जिससे हमले की स्थिति में बड़ा नुकसान हो सकता है. सूत्रों के मुताबिक, लश्कर के आतंकी IED या सुसाइड बॉम्बर का इस्तेमाल कर इन मंदिरों को निशाना बना सकते हैं. यह साजिश धार्मिक स्थलों को टारगेट कर साम्प्रदायिक तनाव फैलाने की कोशिश है. यह अलर्ट ऐसे समय आया है जब भारत-पाकिस्तान संबंध तनावपूर्ण हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि लश्कर ISI की मदद से भारत में अस्थिरता फैलाने की कोशिश कर रहा है. जनता से अपील है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और सतर्क रहें. जांच एजेंसियां साजिशकर्ताओं की तलाश में जुटी हैं, और जल्द ही बड़े खुलासे की उम्मीद है.

160 km/h की रफ्तार, 40 मिनट में मेरठ‑दिल्ली: रैपिड रेल से बढ़ेगा यात्रा का रोमांच, पीएम देंगे सौगात

मेरठ  मेरठ और एनसीआर के लिए 22 फरवरी का दिन ऐतिहासिक साबित होने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नमो भारत रैपिड रेल और मेरठ मेट्रो को जनता को समर्पित करेंगे। इससे दिल्ली से मेरठ के बीच सफर का समय घटकर लगभग 40 मिनट रह जाएगा। शुक्रवार को एनसीआरटीसी ने मीडिया के लिए विशेष ट्रायल रन आयोजित किया। सराय काले खां से दोपहर 12 बजे रवाना हुई नमो भारत ट्रेन ने 160 किमी प्रति घंटा की अधिकतम रफ्तार से दौड़ते हुए मात्र 39 मिनट में बेगमपुल स्टेशन तक का सफर तय किया। यह सफर नॉन-स्टॉप रहा। स्टॉपेज के साथ 55 मिनट में दिल्ली टू मेरठ सामान्य संचालन के दौरान ट्रेन प्रत्येक स्टेशन पर लगभग एक मिनट के ठहराव के साथ करीब 55 मिनट में दिल्ली से मेरठ पहुंचेगी। ट्रायल के दौरान नमो भारत ने सराय काले खां से गाजियाबाद की दूरी लगभग 15 मिनट में पार की और फिर अगले 15 मिनट में मेरठ साउथ पहुंच गई। वहां से कुछ ही मिनटों में शताब्दीनगर को पार करते हुए बेगमपुल स्टेशन पहुंच गई। इस तेज रफ्तार और समयबद्ध संचालन से रोजाना दिल्ली-गाजियाबाद आने-जाने वाले हजारों यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। ट्रायल के दौरान 120 की स्पीड से दौड़ी मेरठ मेट्रो बेगमपुल स्टेशन का दृश्य बेहद आकर्षक रहा। जमीन से लगभग 70 मीटर नीचे बने इस अंडरग्राउंड स्टेशन पर एक ओर नमो भारत खड़ी थी तो सामने मेरठ मेट्रो इंटरचेंज के लिए तैयार दिखाई दी। फ्लोरोसेंट ग्रीन, ब्लू और ऑरेंज थीम वाली तीन कोच की मेरठ मेट्रो 120 किमी प्रति घंटा की रफ्तार तक पहुंचने में सक्षम है। बेगमपुल से मेरठ साउथ तक का सफर मेट्रो से करीब 10 मिनट में पूरा होगा। बिजली बचाने का रोल मॉडल बनेगी रैपिड रेल मेरठ साउथ से नमो भारत के जरिए सात स्टेशनों को पार कर सीधे आनंद विहार तक पहुंचा जा सकेगा। आनंद विहार आरआरटीएस स्टेशन, आईएसबीटी और मेट्रो स्टेशन आपस में जुड़े हुए हैं, जिससे यात्रियों को निर्बाध कनेक्टिविटी मिलेगी। 82 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर में पर्यावरण संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया गया है। स्टेशन और डिपो की छतों पर सौर पैनल लगाए गए हैं, जिनसे 15 मेगावॉट सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य है। वर्तमान में 5.5 मेगावॉट ऊर्जा तैयार की जा रही है। भविष्य में 110 मेगावॉट का कैप्टिव सोलर प्लांट स्थापित किया जाएगा, जो कुल बिजली जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा पूरा करेगा। इससे हर वर्ष करीब 1.77 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी। पर्यावरण संतुलन की मिसाल बनेंगे स्टेशन साहिबाबाद और गुलधर स्टेशन देश के पहले ऐसे स्टेशन हैं जिन्हें आईजीबीएस नेट जीरो एनर्जी (ऑपरेशन) रेटिंग प्राप्त हुई है। इन स्टेशनों पर जितनी बिजली खपत होती है, उतनी ही सौर ऊर्जा से उत्पादन कर ग्रिड को वापस भेज दी जाती है। साथ ही, पूरे कॉरिडोर में वर्षा जल संचयन की व्यवस्था की गई है, जिससे पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी। नमो भारत और मेरठ मेट्रो के संचालन से न केवल यात्रा समय कम होगा, बल्कि यह परियोजना आधुनिक, तेज और पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन का नया मॉडल भी बनेगी।

भारत में घुसी ईरानी टैंकर की चालाकी, पाकिस्तानी सीमा में छुपकर हुआ था प्रवेश

मुंबई  भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard) ने 6 फरवरी को भारत के पश्चिमी तट के पास ईरान से जुड़े जिन तीन प्रतिबंधित तेल टैंकरों को जब्त किया, उनमें से एक जहाज के बारे में बड़ा खुलासा हुआ है. दर्ज एफआईआर के अनुसार, इन टैंकरों में से एक जहाज एमटी एस्फाल्ट स्टार कई दिनों तक पाकिस्तान के समुद्री क्षेत्र में अपनी ट्रैकिंग सिस्टम बंद रखे हुए था. जब्त किए गए तीन जहाजों के नाम MT Asphalt Star, MT Stellar Ruby और MT Al Jafzia हैं. इन पर ईरान से जुड़े तेल की तस्करी और अवैध गतिविधियों का आरोप है. भारतीय तटरक्षक ने 4-5 फरवरी को इन जहाजों की संदिग्ध शिप-टू-शिप ट्रांसफर गतिविधियों का पता लगाया और उन्हें मुंबई लाकर जांच के लिए रखा. कुल 55 क्रू मेंबर्स इन जहाजों पर सवार थे. रिपोर्ट के मुताबिक, 15 फरवरी को येलो गेट पुलिस स्टेशन में तटरक्षक कमांडेंट अनिरुद्ध धर्मपाल दबाश की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई. इसमें नौ लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिसमें तीनों जहाजों के मालिक अबू धाबी (यूएई) स्थित भारतीय नागरिक जोगिंदर सिंह बरार शामिल हैं. एस्फाल्ट स्टार के कप्तान श्याम बहादुर चौहान और एक क्रू मेंबर को तेल तस्करी तथा जालसाजी के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. एफआईआर के अनुसार, एमटी एस्फाल्ट स्टार के इलेक्ट्रॉनिक चार्ट डिस्प्ले एंड इंफॉर्मेशन सिस्टम (ECDIS) डेटा की जांच में पाया गया कि 20 जनवरी से 28 जनवरी तक यह जहाज पाकिस्तान की विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) में प्रवेश कर गया था. 28 जनवरी को सुबह करीब 11 बजे जहाज ने अपना ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS), वेरी हाई फ्रीक्वेंसी (VHF) और सभी सेंसर बंद कर दिए, जिससे उसकी पहचान छिपाई गई और संदिग्ध गतिविधियां की गईं. कप्तान ने पूछताछ में कहा कि जहाज का वॉयेज डेटा रिकॉर्डर सिस्टम खराब हो गया था. तीनों जहाजों ने AIS स्पूफिंग (झूठी लोकेशन दिखाना) और फर्जी पहचान डेटा का इस्तेमाल करके जांच से बचने की कोशिश की. एफआईआर में कहा गया है कि एमटी अस्फाल्ट स्टार ने भारतीय महासागर की ईईज़ेड में बिना किसी भारतीय सरकारी अधिकारी को सूचित किए एमटी अल जफजिया को 30 मीट्रिक टन हेवी फ्यूल ऑयल ट्रांसफर किया. साथ ही, एमची स्टेलर रूबी को 5473 मीट्रिक टन बिटुमेन (सड़क निर्माण के लिए इस्तेमाल) ट्रांसफर किया गया. जोगिंदर सिंह बरार ने आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि उनके जहाज संकट में फंसे अन्य जहाजों को आवश्यक आपूर्ति प्रदान कर रहे थे तथा कोई अवैध गतिविधि नहीं की गई. उन्होंने भारतीय अधिकारियों के खिलाफ मानहानि का मुकदमा करने की धमकी दी है. यह कार्रवाई ईरान से जुड़े ‘शैडो फ्लीट’ (गुप्त जहाजों के नेटवर्क) के खिलाफ अमेरिका के प्रतिबंधों का समर्थन करने वाली भारत की बढ़ती सतर्कता का हिस्सा मानी जा रही है. तटरक्षक ने भारतीय EEZ में निगरानी बढ़ा दी है और अवैध तेल व्यापार पर सख्ती बरती जा रही है. जांच जारी है और आरोपी जहाज मुंबई में लंगर डाले हुए हैं.  

मतदाता सूची अपडेट: भोपाल में 3.80 लाख नाम हटाए गए, 120+ उम्र के 125 वोटर्स अब नहीं होंगे शामिल

भोपाल  स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत नाम जोड़ने, हटाने के लिए बुलाए गए दावे-आपत्ति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आज शनिवार को मध्य प्रदेश में मतदाताओं की स्थिति साफ हो जाएगी। जिलों में निर्वाचन अधिकारी मतदाता सूची का प्रकाशन कर बताएंगे कि किस विधानसभा सीट में कितने मतदाताओं के नाम काटे और जोड़े गए हैं। इसके बाद अब चुनाव आयोग की एसआईआर की कार्यवाही भी कम्प्लीट हो जाएगी। अब ऑनलाइन आवेदन के माध्यम से नाम जोड़ने और हटवाने की प्रक्रिया चलती रहेगी। एसआईआर की कार्यवाही पूरी होने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव समेत उनके मंत्रियों के क्षेत्र से 8 लाख 20 हजार 255 नाम काटे गए थे। इसके बाद नए नाम जोड़ने को लेकर तय समय-सीमा में सिर्फ 1 लाख 69 हजार 753 आवेदन जमा किए गए। सबसे अधिक नाम मंत्री कृष्णा गौर और विश्वास सारंग के विधानसभा क्षेत्र से कटे थे उसी तरह नए नाम जोड़ने के लिए सबसे अधिक आवेदन जमा हुए थे। पूरे प्रदेश की बात करें तो 42 लाख 74 हजार से अधिक नाम काटने की कार्यवाही एसआईआर में की गई और इसके विपरीत नए नाम जोड़ने के लिए सिर्फ 9 लाख 89 हजार 991 लोगों ने आवेदन जमा किए गए थे। नए नाम जोड़ने के लिए जिन विधानसभा क्षेत्रों में दस हजार से अधिक आवेदन जमा किए गए थे, उसमें मंत्री कृष्णा गौर की गोविंदपुरा विधानसभा सीट सबसे आगे है। यहां 17888 आवेदन नए नाम जोड़ने के लिए आए। इसके बाद मंत्री विश्वास सारंग की सीट नरेला में 15115 नए नाम जोड़ने के आवेदन आए थे। भोपाल जिले की हुजूर विधानसभा सीट जिसके विधायक रामेश्वर शर्मा हैं, वहां से 13024 नए नाम जोड़ने के आवेदन आए। इंदौर जिले में इंदौर 2 विधानसभा सीट से 10446 और इंदौर 5 विधानसभा क्षेत्र से 11040 नाम जोड़ने के लिए आवेदन जमा कराए गए। राऊ सीट के लिए 12700, नागदा खाचरौद सीट के लिए 11047 आवेदन जमा कराए गए। भोपाल में 120+ उम्र के 125 वोटर्स स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) में भोपाल की वोटर संख्या को लेकर तस्वीर साफ हो गई है। पहले सर्वे और फिर दावे-आपत्तियों की सुनवाई के बाद वोटर लिस्ट से 3.80 लाख से ज्यादा मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह की अध्यक्षता में स्टैंडिंग कमेटी की बैठक होगी। बता दें, 23 दिसंबर को प्रारूप मतदाता सूची का प्रकाशन किया गया। इसके बाद 22 जनवरी तक बूथ लेवल ऑफिसर यानी, बीएलओ अपने-अपने बूथ पर बैठें। इस दौरान उन्होंने नए फॉर्म 6, 7 और 8 प्राप्त किए। एसआईआर में जिन मतदाताओं को 'नो मैपिंग' में रखा गया कि उन्हें नोटिस जारी किए गए और 50 दिन के अंदर उनका रिकॉर्ड देखा। 14 फरवरी तक ये काम पूरा हो गया। अब फाइनल मतदाता सूची शनिवार को जारी होगी। पहले इतनी थी मतदाता संख्या एसआईआर से पहले 27 अक्टूबर 2025 की स्थिति में भोपाल की मतदाता संख्या 21 लाख 25 हजार 908 थी, जो अब 17 लाख 45 हजार 453 हो गई है। इस तरह वोटर लिस्ट से 3 लाख 80 हजार 455 मतदाता कम हो जाएंगे। उम्र के हिसाब से भी आंकड़े जारी होंगे जानकारी के अनुसार, शनिवार को फाइनल वोटर लिस्ट में उम्र के हिसाब से भी आंकड़े जारी होंगे। इनमें शतक यानी, 100 या इससे अधिक उम्र के मतदाताओं की संख्या भी सामने आएगी। इस उम्र की कैटेगिरी में करीब 125 मतदाता हैं। सबसे कम आवेदन वाले विधानसभा में राजनगर और बीना का नाम छतरपुर जिले के राजनगर विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची में नए नाम जोड़ने के लिए सबसे कम 1138 आवेदन आए थे। राजनगर कांग्रेस के पूर्व एमएलए विक्रम सिंह नातीराजा का क्षेत्र है। इसके साथ ही बीजेपी में शामिल होने को लेकर विवादों में चल रही कांग्रेस की एमएलए निर्मला सप्रे भी उन विधायकों में शामिल हैं जिनके यहां नए नाम जोड़ने के लिए कम आवेदन जमा हुए थे। बीना विधानसभा क्षेत्र में एसआईआर के बाद नाम जोड़ने के लिए 1288 आवेदन जमा हुए। इन विधानसभा सीट में भी दो हजार से कम आवेदन आए चुनाव आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक टिमरनी विधानसभा सीट से 1463 आवेदन मिले थे। भगवानपुरा सीट से 1556 और रतलाम ग्रामीण के लिए 1629 आवेदन जमा कराए गए तो जावद सीट के लिए 1649 आवेदन नए नाम जोड़ने के लिए आए। छतरपुर जिले की मलहरा विधानसभा सीट से 1742 आवेदन आए। पूर्व मंत्री बिसाहू लाल सिंह की सीट अनूपपुर से 1750 आवेदन नए नाम जोड़ने के लिए मिले थे। वहीं शमशाबाद विधानसभा सीट के लिए 1781 आवेदन जमा किए गए। भीकनगांव के लिए 1794, बदनावर सीट से 1799, बड़वाह सीट के लिए 1838 आवेदन नए नाम जोड़ने के लिए आए। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के विधानसभा क्षेत्र से 1934 आवेदन जमा हुए थे। मंत्री कृष्णा और सारंग के क्षेत्र में सबसे अधिक नाम कटे एसआईआर में सबसे अधिक नाम गोविन्दपुरा से विधायक और मोहन सरकार में मंत्री कृष्णा गौर के क्षेत्र से काटे गए थे। भोपाल जिले की इस विधानसभा सीट से 97052 मतदाताओं के नाम काटे गए हैं। दूसरे स्थान पर इंदौर-5 से बीजेपी विधायक महेंद्र हार्डिया का विधानसभा क्षेत्र है। मोहन सरकार के मंत्री विश्वास सारंग और कैलाश विजयवर्गीय के क्षेत्र से 81235 और 75014 वोटर्स के नाम काटे गए। एसआईआर में सबसे कम 6034 नाम नर्मदापुरम जिले के सोहागपुर विधानसभा क्षेत्र से कटे। एसआईआर ड्राफ्ट प्रकाशन के बाद जो रिपोर्ट सामने आई थी उसके अनुसार मोहन सरकार के पांच मंत्रियों के क्षेत्र में 50 हजार से अधिक मतदाताओं के नाम काटे गए हैं। इसमें भोपाल के दो विधानसभा क्षेत्र गोविन्दपुरा और नरेला, इंदौर के इंदौर-1, ग्वालियर जिले की ग्वालियर विधानसभा, ग्वालियर दक्षिण विधानसभा, इंदौर जिले की इंदौर -1 विधानसभा शामिल है। मुख्यमंत्री के यहां 37728, विस अध्यक्ष के यहां 13920 नाम कटे थे एसआईआर के ड्राफ्ट प्रकाशन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की विधानसभा सीट उज्जैन दक्षिण से 37728 वोटर्स के नाम काटे गए हैं। मुरैना जिले के दिमनी विधानसभा सीट से विधायक और विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के क्षेत्र के 13920 मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटे हैं। कांग्रेस के विधायक और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के विधानसभा क्षेत्र गंधवानी से 14712 मतदाताओं के नाम काटे गए हैं। अटेर विधानसभा कांग्रेस … Read more

साध्वी की मौत का खुलासा! 18 दिन की पड़ताल में CCTV और कॉल डिटेल से सामने आया सच

 जोधपुर राजस्थान की चर्चित युवा साध्वी प्रेम बाईसा का मौत को लेकर सवालों का सैलाब उमड़ पड़ा था. क्या उनकी मौत के पीछे कोई साजिश थी? क्या उन्हें जहर दिया गया? या फिर कोई मेडिकल लापरवाही? 18 दिनों तक चली लंबी और पेचीदा जांच, 44 गवाहों के बयान, 106 लोगों की कॉल डिटेल, 100 से ज्यादा सीसीटीवी फुटेज और 37 से अधिक विसरा नमूनों की पड़ताल के बाद आखिरकार जोधपुर पुलिस ने इस राज से पर्दा उठा दिया. लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती. क्योंकि मौत की वजह भले सामने आ गई हो, इंजेक्शन का सच सामने आना अभी बाकी है. एक लंबी और चुनौतीपूर्ण तफ्तीश के बाद राजस्थान की मशहूर साध्वी प्रेम बाईसा के मौत के रहस्य से आखिरकार पर्दा हट ही गया. इस मामले में फाइनल ओपिनियन के लिए जोधपुर पुलिस को फॉरेंसिक साइंस लैब्रोटरी यानी एफएसएल की रिपोर्ट का इंतजार था. उस रिपोर्ट के बाद पुलिस ने इसे लेकर फिर से मेडिकल एक्सपर्ट्स से चर्चा की और आखिरकार प्रेम बाईसा की मौत के सच का खुलासा कर दिया.  28 जनवरी को हुई प्रेम बाईसा की मौत के बाद से ही इसे लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म था. प्रेम बाईसा के अनुयायी तो खैर इस मामले में इंसाफ की मांग कर ही रहे थे, खुद प्रेम बाईसा के पिता वीरमनाथ भी बार-बार इस मामले में साजिश की आशंका जताते हुए अपनी बेटी के लिए न्याय मांग रहे थे, ऐसे में पुलिस ने पहले डॉक्टरों के बोर्ड से उनके शव का पोस्टमार्टम करवाया और फिर हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच के लिए उनके विसरा के नमूनो को स्टेट फॉरेंसिक साइंस लैब्रोटरी जयपुर भेजा, जिसकी रिपोर्ट 16वें दिन सामने आ गई और 18वें दिन जोधपुर पुलिस ने इस केस को एक तरह से कनक्लूड कर दिया. पुलिस की मानें तो साध्वी प्रेम बाईसा के साथ ना तो कोई साजिश हुई, ना उनके साथ मौत से पहले कोई सेक्सुअल ऑफेंस हुआ और ना ही उन्होंने खुदकुशी की, बल्कि उनकी मौत की वजह कार्डिएक और पल्मॉनरी अरेस्ट बनी. कार्डियो पल्मनॉरी अरेस्ट से मौत बोले तो दिल की धड़कनों का और सांस लेने की क्रिया रुकने के चलते हुई मौत. पुलिस ने साफ किया कि उन्हें पहले से फेफड़े से संबंधित बीमारी थी, ऐसे में कार्डियो पल्मनॉरी अरेस्ट जानलेवा बन गई.  वैसे तो इस मामले में कई पेच थे, लेकिन सबसे बड़ा पेच साध्वी को मौत से ऐन पहले लगाए गए इंजेक्शन का ही था. क्योंकि सामने आई खबरों के मुताबिक इंजेक्शन लगाए जाने के बाद ही उनकी तबीयत एकाएक बिगड़ी और जब तक उनके पिता और आश्रम के लोग उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे, तब तक उनकी जान चली गई. ऐसे में इंजेक्शन में दी गई दवाओं की जांच के साथ-साथ पुलिस के लिए उस कंपाउंडर की भूमिका की पड़ताल भी जरूरी थी. पुलिस ने इस दिशा में जांच की भी और शुरुआती तफ्तीश में उसे कंपाउंडर की लापरवाही का पता चला. आपको याद होगा कि 28 जनवरी को साध्वी की तबीयत बिगड़ने पर जोधपुर के एक कंपाउंडर देवी सिंह राजपुरोहित को आश्रम की ओर से साध्वी के इलाज के लिए बुलाया गया था और तब देवी सिंह दो दवाओं के साथ साध्वी के पास पहुंचा था. साध्वी को ये दवाएं पहले भी दी जाती रही हैं. इन दवाओं में डेक्सोना और डायनापार शामिल हैं, लेकिन गौर करने वाली बात ये है कि से शेड्यूल एच की दवाएं हैं, जिन्हें बिना किसी मेडिकल प्रैक्टिशनर यानी डॉक्टर की इजाजत या देख-रेख के बगैर दिए जाने की मनाही है. इसके बावजूद देवी सिंह राजपुरोहित ने ना सिर्फ साध्वी को इन दो दवाओं का इंजेक्शन दिया, बल्कि वो बगैर किसी प्रैस्क्रिप्शन यानी डॉक्टर की पर्ची के खुद ही ये दवाएं लेकर साध्वी के पास पहुंचा था, जो की एक गैरकानूनी हरकत है. जोधपुर पुलिस ने साफ किया कि कंपाउंडर की लापरवाही को लेकर पुलिस ने नए सिरे से मेडिकल बोर्ड से उनकी राय मांगी है, ताकि ये साफ हो सके कि क्या कपाउंडर देवी सिंह राजपुरोहित की ओर से दिया गया इंजेक्शन ही उनकी मौत की वजह बनी या नहीं? पुलिस ने कहा कि इस मामले में मेडिकल बोर्ड की राय आने के बाद ही देवी सिंह राजपुरोहित के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी. साध्वी को 28 जनवरी को 2 इंजेक्शन लगाए गए थे. डायनापार और डेक्सोना. डायनापार यानी डाइक्लोफिनैक और डेक्सोना यानी डेक्सामेथासोन. तेज दर्द, सूजन, चोट और सर्जरी के बाद होने वाले दर्द से निजात दिलाने वाली ये दवाएं आम तौर पर एक साथ दी जाती हैं. लेकिन इसकी शर्त है कि इन्हें डॉक्टर की निगरानी में ही दिया जाना जरूरी है. क्योंकि इन्हें दी जाने में बरती गई मामूली लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है. एक्सपर्ट बताते हैं कि कभी-कभार एक ही सीरींज से डाइक्लोफिनैक और डेक्सामेथासोन का इंजेक्शन मरीज के लिए खतरनाक कार्डियोवैस्कुलर इवेंट यानी हार्टफेल की वजह बन जाती है. कई बार इन दवाओं से पेट से संबंधी समस्याएं, सिर चकराने, सिर दर्द या इनफेक्शन यानी संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है. यही वजह है कि ये दवाएं सिर्फ डॉक्टर की निगरानी में ही दी जाने की बात कही जाती है. लेकिन साध्वी प्रेम बाईसा के मामले में डॉक्टर की निगरानी वाली बात की अनदेखी की गई. अब सवाल यही है कि क्या साध्वी के शरीर में इन दो दवाओं का रिएक्शन हो गया, जिसके चलती उनकी जान चली गई? पुलिस फिलहाल ये पता लगाने में जुटी है. फिलहाल इंजेक्शन लगाने वाला कपाउंडर बेशक डॉक्टर की पर्ची के मुताबिक ही इंजेक्शन लगाने की बात कह रहा है, लेकिन ये भी सच है कि वो पर्ची पुरानी थी. साध्वी ने 28 जनवरी को किसी डॉक्टर से कोई सलाह नहीं ली थी. अजमेर से प्रोग्राम कर लौटने के बाद जब साध्वी की तबीयत बिगड़ी, तो उन्होंने अपने पिता से ट्रिटमेंट करवा देने की बात कही थी. हालांकि अस्पताल जाने के पिता की पेशकश को उन्होंने ठुकरा दिया था. एफएसएल और हिस्टोपैथोलॉजिकल रिपोर्ट के सामने आने के बाद साध्वी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद बनी असमंजस की स्थिति भी काफी हद तक साफ हो गई है. क्योंकि इन रिपोर्ट में बताया गया है कि साध्वी के शरीर में ना तो अंदरुनी या बाहरी चोट के निशान थे और ना ही उनके शरीर में … Read more

दिल्ली के 12 कॉलेज फेक? UGC की नई सूची में नाम — एडमिशन लेने से पहले जरूर चेक करें

 नई दिल्ली विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने पूरे भारत में 32 फेक यूनिवर्सिटी की पहचान की है और छात्रों को इनमें एडमिशन न लेने की चेतावनी दी है. इनमें सबसे ज्यादा  फेक यूनिवर्सिटी दिल्ली में पाए गए हैं. UGC के अनुसार ये फेक यूनिवर्सिटी बिना मान्यता के डिग्री देते हैं, जो नौकरी, आगे की पढ़ाई या सरकारी सेवाओं के लिए मान्य नहीं होती. पिछले दो साल में ऐसे संस्थानों की संख्या 20 से बढ़कर 32 हो गई है, जिससे शिक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है. दिल्ली में सबसे ज्यादा 12 फेक यूनिवर्सिटी मिले इस सूची में हरियाणा, राजस्थान, झारखंड और अरुणाचल प्रदेश जैसे नए राज्य भी शामिल हुए हैं. वहीं बेंगलुरु में “ग्लोबल ह्यूमन पीस यूनिवर्सिटी” नाम से चल रहे एक संस्थान को लेकर भी खास चेतावनी जारी की गई है. दिल्ली में सबसे ज्यादा 12 फेक यूनिवर्सिटी मिले हैं. इनके अलावा उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, केरल, महाराष्ट्र, पुडुचेरी, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में भी ऐसे संस्थान चल रहे हैं.  एडमिशन लेने से पहले करें जांच विशेषज्ञों का कहना है कि फेक यूनिवर्सिटी कम फीस, जल्दी डिग्री और आसान पढ़ाई का लालच देकर छात्रों को फंसाते हैं. इनमें सही शिक्षक, सुविधाएं या पढ़ाई का स्तर भी नहीं होता. कुछ संस्थान खुद को विदेशी यूनिवर्सिटी बताकर भी छात्रों को गुमराह करते हैं. UGC ने छात्रों और अभिभावकों से कहा है कि किसी भी कॉलेज या यूनिवर्सिटी में दाखिला लेने से पहले उसकी मान्यता UGC की आधिकारिक वेबसाइट पर जरूर जांच लें. आयोग का कहना है कि जागरूकता ही फर्जी विश्वविद्यालयों से बचने का सबसे अच्छा तरीका है.

भिवंडी में खेला हुआ खेल! बीजेपी के बागी नारायण चौधरी को कांग्रेस ने दिया मेयर पद

भिवंडी महाराष्ट्र के भिवंडी में एक नाटकीय राजनीतिक उथल-पुथल देखने को मिली, जहां भाजपा को उस समय बड़ा झटका लगा जब उसके बागी नेता नारायण चौधरी कांग्रेस और शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी  (एसपी) के समर्थन से मेयर बनकर उभरे. इस साल जनवरी में हुए 23 वार्डों और 90 सीटों वाले भिवंडी-निजामपुर नगर निगम (BNMC) चुनाव में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला था. इसने इस नगर निगम में नए सियासी समीकरणों और गठबंधनों को जन्म दिया. पार्षदों की खरीद-फरोख्त और राजनीतिक झड़पों के आरोप लगे. विलासराव देशमुख ऑडिटोरियम में शुक्रवार दोपहर 12 बजे हाथ उठाकर मतदान की प्रक्रिया हुई, जिसमें नारायण चौधरी को स्पष्ट बहुमत मिला. नारायण चौधरी मेयर चुने गए, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार मोमिन तारिक बारी डिप्टी मेयर चुने गए. नगर निगम चुनाव में कांग्रेस ने 30, भाजपा ने 22, शिवसेना ने 12, समाजवादी पार्टी ने 6, कोणार्क विकास अघाड़ी ने 5 और भिवंडी विकास अघाड़ी ने 3 सीटें जीतीं थीं. नारायण चौधरी ने 46 के जादुई आंकड़े से दो अधिक यानी 48 वोट हासिल करके मेयर पद हासिल किया. भाजपा की स्नेहा पाटिल को 16 वोट मिले, जबकि कोणार्क विकास अघाड़ी के विलास पाटिल (शिंदे की शिवसेना के समर्थन से)  को 25 वोट प्राप्त हुए. कांग्रेस के मोमिन तारिक बारी 43 वोट पाकर डिप्टी मेयर निर्वाचित हुए. कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) ने भिवंडी में सेक्युलर फ्रंट बनाकर मेयर चुनाव लड़ा. राज्य भाजपा अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने कहा, 'नारायण चौधरी ने पार्टी की नीति का उल्लंघन किया है. उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.' बीजेपी के खिलाफ कांग्रेस का सेक्युलर फ्रंट एनसीपी (एसपी) के लोकसभा सांसद सुरेश म्हात्रे, जिन्हें बलिया मामा के नाम से भी जाना जाता है, उन्होंने इस जीत को भिवंडी की जनता की जीत बताया. उन्होंने कहा कि परिस्थितियों के चलते कांग्रेस-एनसीपी (एसपी) का सेक्युलर फ्रंट बनाना जरूरी था. सपा विधायक रईस शेख ने कहा, 'हमने भिवंडी में सेक्युलर फ्रंट बनाया है.' राज्य कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा, 'कांग्रेस ने भाजपा या एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के साथ गठबंधन न करने का फैसला किया और अपने वैचारिक रुख से कोई समझौता नहीं किया. कुछ भाजपा पार्षदों ने पार्टी और उसकी विचारधारा छोड़कर सेक्युलर फ्रंट में शामिल होने का फैसला किया, जिससे हमें मेयर और डिप्टी मेयर चुनने में सफलता मिली.'   नारायण चौधरी ने बीजेपी से बगावत की और कुछ बीजेपी पार्षदों के साथ मिलकर एक स्वतंत्र समूह बनाया. उन्होंने कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन को समर्थन देने का फैसला किया. उन्होंने मेयर चुनाव जीतने के बाद कहा, 'स्थानीय राजनीति आप जानते हैं, मैं सिर्फ विकास पर काम करूंगा.' यह राजनीतिक घटनाक्रम भाजपा के उस अंतिम समय में लिए गए फैसले के बाद हुआ, जिसमें पार्टी ने नारायण चौधरी को मेयर पद के उम्मीदवार के रूप में हटाकर उनकी जगह स्नेहा पाटिल को मैदान में उतारा था. बता दें कि भाजपा में शामिल होने से पहले नारायण चौधरी कांग्रेस में थे.

कांग्रेस में भूचाल! हेमंत कटारे का इस्तीफा, उपनेता प्रतिपक्ष पद छोड़ने के पीछे यह वजह

भोपाल:  Madhya Pradesh की राजनीति में हेमंत कटारे के इस्तीफे के बाद अब एक और बयान चर्चा में आ गया है। बताया जा रहा है कि  विधानसभा से निकलते समय अटेर से कांग्रेस विधायक Hemant Katare ने भाजपा विधायक Bhagwandas Sabnani से मजाकिया अंदाज में कहा था ‘भाईसाहब, मुझे भी साथ ले चलिए।’  इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में अटकलें तेज हो गईं कि क्या कटारे भाजपा में शामिल होने वाले हैं। हालांकि भगवानदास सबनानी ने इन कयासों को खारिज करते हुए कहा कि यह बात केवल मजाक में कही गई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे उस समय रुके भी थे और पूछा था कि कटारे को कहां जाना है। उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि कटारे बाद में कहां गए। मीडिया द्वारा पूछे गए सवाल पर कि क्या कटारे भाजपा में शामिल हो सकते हैं, सबनानी ने कहा कि उन्हें ऐसी किसी भी संभावना की जानकारी नहीं है।  क्यों दिया इस्तीफा? इस संबंध में संगठन महासचिव डॉ संजय कामले ने जानकारी देते हुए कहा कि हेमंत कटारे ने अपने इस्तीफे में पारिवारिक दायित्वों एवं समय की कमी का उल्लेख किया है. उन्होंने स्पष्ट किया है कि वर्तमान परिस्थितियों में वे अपने विधानसभा क्षेत्र को अपेक्षित समय और ध्यान नहीं दे पा रहे थे, इसी कारण उन्होंने उप नेता प्रतिपक्ष के पद से त्यागपत्र दिया है. वे कांग्रेस के साथ थे, हैं और रहेंगे- कामले कामले ने यह भी स्पष्ट किया कि हेमंत कटारे का यह इस्तीफा केवल पद से संबंधित है, न कि पार्टी की सदस्यता से. वे कांग्रेस पार्टी के साथ थे, हैं और आगे भी पूरी निष्ठा के साथ पार्टी के साथ रहेंगे. अंतिम फैसला नेतृत्व पर निर्भर- कामले इसके साथ ही, उन्होंने बताया कि हेमंत कटारे के उपनेता प्रतिपक्ष पद से इस्तीफा स्वीकार किया जाए या नहीं, इसका अंतिम निर्णय प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष तू पटवारी एवं पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के विवेकाधिकार पर निर्भर है. आज कटारे की शादी की सालगिरह हेमंत कटारे की आज शादी की सालगिरह भी है. उन्होंने आज ही इस्तीफा दे दिया. उनके समर्थक सालगिरह की बधाई दे रहे हैं. 2018 में हेमंत कटारे पर रेप के आरोप लग चुके हैं. बाद में पीड़िता ने अपना बयान बदल लिया. 2019 में छात्रा ने सुसाइड कर लिया. दिसंबर 2024 में हाई कोर्ट ने हेमंत कटारे का राहत दी. हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ मध्य प्रदेश की सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई.  कांग्रेस विधायक बोले- सब ठीक हो जाएगा वहीं जौरा से कांग्रेस विधायक Pankaj Upadhyay ने कहा कि कटारे के इस्तीफे की जानकारी उन्हें मीडिया के माध्यम से मिली। उन्होंने बताया कि हेमंत कटारे की मैरिज एनिवर्सरी थी और परिवार में कार्यक्रम भी था। वे दिन में उनके साथ थे और काफी खुश नजर आ रहे थे। उपाध्याय ने कहा कि कोई गंभीर बात नहीं है। जो भी मामला है, वह पारिवारिक है और जल्द ही सुलझा लिया जाएगा।