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पानी के नीचे भारत की ताकत: पनडुब्बियों का ऐसा किला जिसे दुश्मन छू भी नहीं सकते

नई दिल्ली भारत ने अपने दुश्मनों से निपटने के लिए समुद्र के भीतर पनुडुब्बियों का अभेद्य किला बना लिया है। यह किला इतना ताकतवर है यह अरब सागर से लेकर हिंद महासागर तक पाकिस्तान और चीन की चुनौतियों से पार पाने में बेहद कारगर और मारक साबित होगा। भारत के इस किले में न्यूक्लियर पॉवर्ड समेत हर तरह की पनडुब्बियां हैं, जो दुश्मन की नींद उड़ाने के लिए काफी हैं। भारत ने अपने दोनों तरफ के समुद्र में पनडुब्बियों का जाल बिछा रखा है। भारत ने परमाणु ऊर्जा से चलने वाली हमलावर स्वदेशी पनडुब्बियां बनाने के लिए भी तेजी से कदम बढ़ा दिए हैं, मगर उसके नौसेना के बेड़े में शामिल होने में अभी एक दशक लग सकता है। भारत ने अपने पश्चिमी और पूर्वी तट पर समंदर के पास पनडुब्बियों का जाल बिछा रखा है, जिससे भारत के चीन और पाकिस्तान जैसे दुश्मन अपनी हद पार करने से पहले सौ बार सोचेंगे। इसमें हर तरह की पनडुब्बियां शामिल हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय नौसेना के बेड़े में करीब 20-21 मारक पनडुब्बियां हैं। इनमें से 17 तो डीजल पॉवर्ड अटैक पनडुब्बियां हैं। इसके अलावा, कम से कम 2 न्यूक्लियर पॉवर्ड बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी हैं। इसके अलावा, एक पनडुब्बी रूस से लीज पर ले रखी है। वहीं, एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत अपनी तीसरी स्वदेशी परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (एसएसबीएन) आईएनएस अरिदमन (S-4) को अप्रैल या मई तक सेवा में शामिल किए जाने की उम्मीद है। पनडुब्बी वर्तमान में समुद्री परीक्षणों के अंतिम चरण में है और आने वाले महीनों में सेवा में शामिल होने की संभावना है। आईएनएस अरिदमन के शामिल होने के साथ ही भारत के पास सामरिक बल कमान (एसएफसी) के तहत पहली बार तीन परिचालन एसएसबीएन हो जाएंगे। NTI पर छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय नौसेना की पनडुब्बियां पश्चिमी तट मुंबई और पूर्वी तट पर विशाखापत्तनम के पास समंदर में तैनात हैं। भारत ने हाल ही में दो पनडुब्बी अड्डे बनाए हैं। पहला मुंबई से 500 किलोमीटर दक्षिण में स्थित कारवार है। दूसरा, आईएनएस वर्षा नामक एक गुप्त नौसैनिक अड्डा है, जो चीन के हालिया उन्नयन के जवाब में भारत की नौसैनिक परमाणु क्षमताओं को बढ़ाने की एक बड़ी परियोजना का हिस्सा है। यह अड्डा पूर्वी तट पर काकीनाडा के पास स्थित है और इसमें पनडुब्बियों के लिए भूमिगत ठिकाने होंगे। फरवरी, 2015 में भारत सरकार ने स्वदेशी 6 न्यूक्लियर पॉवर्ड अटैक सबमरींस को अपने जंगी बेड़े में शामिल करने की परियोजना को मंजूरी दी थी। ये पनडुब्बियां विशाखापत्तनम के शिप बिल्डिंग सेंटर में बननी हैं। भारत के पश्चिमी तट पर अरब सागर है, जिसकी सीमा पाकिस्तान को छूती है। वहीं, पूर्वी तट के पास बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर है, जहां चीन के जासूसी जहाज अक्सर मंडराते रहते हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत के लिए न्यूक्लियर पॉवर्ड अटैक क्लास की पनडुब्बी की स्वदेशी क्षमता हासिल करना अभी भी एक दशक दूर का लक्ष्य है। माना जा रहा है कि इस तरह की पहली पनडुब्बी 2036 तक ही तैयार हो पाएगी। भारत के पास पहले से ही अरिहंत श्रेणी की परमाणु ऊर्जा से चलने वाली और परमाणु हथियारों से लैस पनडुब्बियां (एसएसबीएन) मौजूद हैं।

फौज में जाने का नया रास्ता: अग्निवीर भर्ती नियमों में बदलाव, ज्यादा युवाओं को मिलेगा मौका

ग्वालियर भारतीय सेना में शामिल होकर देश की सेवा का सपना देखने वाले युवाओं के लिए बड़ी राहत की खबर है। रक्षा मंत्रालय और सेना भर्ती बोर्ड ने अग्निवीर भर्ती प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। फौजी बनने की हसरत रखने वाले युवाओं की आयु सीमा एक साल बढ़ा दी गई है। अभी तक अग्निवीर बनने की अधिकतम आयु सीमा 21 वर्ष थी। भर्ती में एक साल की बढ़ोतरी होने से हजारों युवाओं को फौजी की वर्दी पहनने का मौका मिलेगा। सेना भर्ती बोर्ड के अनुसार इस फैसले से युवाओं में अग्निवीर बनने का जुनून और बढ़ा है। पिछले 15 दिनों में 13,499 आवेदन प्राप्त हुए है, जिनमें मुरैना और भिंड के युवाओं की संख्या सबसे अधिक है। सेना भर्ती बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि फौजी बनने का जज्बा युवाओं में लगातार बढ़ रहा है। पिछली भर्ती में करीब 1700 युवाओं ने सेना जॉइन की थी। इस बार आवेदनों की संख्या देखकर लग रहा है कि पिछला आंकड़ा टूट सकता है। 13 फरवरी से अग्निवीर भर्ती के लिए आवेदन लिए जा रहे है। भिंड-मुरैना के युवा आगे… सबसे ज्यादा 7271 आवेदन भिंड और मुरैना के युवाओं के हैं। बोर्ड 1 अप्रैल तक आवेदन स्वीकार करेगा, इसलिए संख्या और बढ़ने की संभावना है। उम्र बनी थी रोड़ा, अब मौका अग्निवीर भर्ती प्रक्रिया में आवेदकों की अधिकतम आयु सीमा अब 22 वर्ष कर दी गई है। पिछली बार उम्र सीमा की वजह से जो अभ्यर्थी भर्ती से बाहर हो गए थे. उनके लिए यह बड़ा मौका है। उम्र में रियायत देकर सेना ने हजारों युवाओं के लिए रास्ता खोल दिया है। जिस तेजी से आवेदन आ रहे हैं. उससे उम्मीद है कि इस बार आवेदकों की संख्या पिछले आंकड़ों को पीछे छोड़ देगी। – पंकज कुमार, कर्नल, सेना भर्ती बोर्ड, ग्वालियर

जबलपुर से प्रमुख शहरों की ट्रेनें भरी, यात्रियों को टिकट न मिलने की दिक्कत

जबलपुर होली पर घर पहुंचे लोगों की कार्यस्थल की ओर वापसी का दौर जारी है। त्योहार के बाद रविवार को सप्ताहांत पर जबलपुर से जाने वाली लगभग सभी प्रमुख ट्रेनें फुल रही। दिल्ली, इंदौर, जयपुर, अहमदाबाद जैसे शहरों के लिए जाने वाली ट्रेनों में अभी पांच दिनों तक कन्फर्म टिकिट उपलब्ध नहीं है। सबसे ज्यादा भार दिल्ली और इंदौर जाने वाली ट्रेन पर है। प्रमुख ट्रेनों की तत्काल टिकिट में भी लंबी प्रतीक्षा सूची बन रही है। यात्रियों की सुविधा के लिए पश्चिम मध्य रेल ने दिल्ली, दानापुर, कोटा, अयोध्या के लिए स्पेशल ट्रेन चलाई है। इन ट्रेनों में स्लीपर श्रेणी की टिकिट बुक हो चुकी है। वातानुकूलित श्रेणी की कुछ टिकिट ही खाली है। वहीं, उत्तर भारत से महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के बीच चलने वाली ट्रेनें यात्रियों से खचाखच भरी हुई है।   मुंबई, पुणे, हैदराबाद, बेंगलुरू के लिए एक सप्ताह तक नियमित ट्रेनों में सीट उपलब्ध नहीं है। ट्रेन में कन्फर्म टिकिट नहीं मिलने पर पुणे, इंदौर, हैदराबाद, अहमदाबाद के लिए यात्री बसों का सहारा ले रहे है। यात्रियों को राहत देने रेलवे लंबी दूरी की स्पेशल ट्रेनों के फेरे बढ़ाने की भी तैयारी कर रहा है। सुरक्षा और सतर्कता बढ़ाई, लगातार निगरानी त्योहार के बाद घर से वापसी के बीच रविवार को आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में यात्रा जबलपुर स्टेशन पहुंचे। शहर से चलने वाली लंबी दूरी की ट्रेनों की सवारी के चलते मुख्य स्टेशन पर यात्रियों का दबाव रहा। भीड़ को देखते हुए रेल सुरक्षा बल और शासकीय रेल पुलिस ने सुरक्षा बढ़ाई। आरपीएफ के साथ ही होमगार्ड के जवान स्टेशन के प्रवेश द्वार पर तैनात रहे। यात्रियों के सामान की जांच और ट्रेन के प्रस्थान करने के एक घंटे पूर्व यात्रियों को प्रवेश दिया गया। रेल प्रशासन भी सतर्क रहा। ट्रेन के समय से कई घंटे पहले पहुंचने वाले यात्रियों को होल्डिंग एरिया में ठहराया गया। स्पेशल ट्रेनों की स्थिति     सोमवार को जाने वाली जबलपुर-निजामुद्दीन (01701) ट्रेन के स्लीपर में वेटिंग। सेकेंड एसी में आरएसी। थर्ड एसी में कुछ सीटें खाली।     सोमवार को चलने वाली दानापुर-सोगरिया (09822) ट्रेन के स्लीपर, थर्ड एसी इकोनोमी एवं सेकेंड एसी लगभग फुल।     मंगलवार को जाने वाली जबलपुर-अयोध्या (01705) ट्रेन के स्लीपर और सेकेंड एसी में वेटिंग। थर्ड एसी में कन्फर्म सीट उपलब्ध है। शहर से चलने वाली ट्रेनों     हजरत निजामुद्दीन सुपरफास्ट, श्रीधाम और महाकोशल एक्सप्रेस में दिल्ली के लिए एक सप्ताह तक वेटिंग।     जबलपुर-वेरावल सोमनाथ एक्सप्रेस में अहमदाबाद के लिए एक सप्ताह तक किसी श्रेणी में कन्फर्म टिकिट नहीं है।     ओवरनाइट और नर्मदा एक्सप्रेस में इंदौर के लिए एक सप्ताह तक प्रत्येक श्रेणी के टिकिट प्रतीक्षा सूची में है।     जबलपुर-अजमेर दयोदय एक्सप्रेस में जयपुर के लिए कन्फर्म टिकिट नहीं है।     जबलपुर-लखनऊ चित्रकूट एक्सप्रेस में लखनऊ के लिए अगले दिन तक टिकिट प्रतीक्षा सूची में है। साप्ताहिक ट्रेनों के हाल     जबलपुर-श्रीमाता वैष्णोदेवी एक्सप्रेस में स्लीपर में वेटिंग सौ और थर्ड एसी में 50 पार पहुंच गई है।     रविवार को जबलपुर-पुणे स्पेशल फुल थी। उसके अगले फेरे में भी समस्त श्रेणियों का टिकिट अभी से प्रतीक्षा सूची पर है।

खसरे की चपेट में रतलाम के बच्चे, तुरंत कार्रवाई में जुटी स्वास्थ्य टीम

रतलाम रतलाम जिले के बाजना विकासखंड में मीजल्स (खसरा) के केस सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। शनिवार को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संध्या बेलसरे ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा रात करीब नौ बजे तक किया। इस दौरान बताया गया कि 10 बच्चों में मीजल्स के लक्षण मिले। इनकी हालत अब नियंत्रण में है। होली पर बाहर से आए कुछ बच्चे वापस पलायन भी कर गए। स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा क्षेत्र में भ्रमण कर उपचार एवं आवश्यक स्वास्थ्य सेवा दे रही है। मामले में संबंधित एएनएम पर कार्रवाई के लिए प्रस्ताव बनाया गया है। शुक्रवार को डब्ल्यूएचओ के सर्विलांस मेडिकल ऑफिसर डॉ. रितेश बजाज, जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. वर्षा कुरील, बीएमओ बाजना डॉ. जितेंद्र जायसवाल व स्वास्थ्य विभाग का अमला प्रभावितों के पास पहुंचा था।   बाजना ब्लाक के ग्राम बोरपाड़ा और ग्राम रूपाखेड़ा में 9 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों को एमआर वैक्सीनेशन करने के साथ ही विटामिन-ए का घोल पिलाया जा रहा है। निर्धारित प्रोटोकाल के अनुसार नोटिफिकेशन जनरेट करने, घर-घर जाकर स्वास्थ्य शिक्षा देने तथा अतिरिक्त टीकाकरण सत्र आयोजित करने की कार्ययोजना तैयार कर ली गई है। 10 से 14 दिन तक दिखाई देते हैं लक्षण जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. वर्षा कुरील ने बताया कि खसरा (मीजल्स) एक संक्रामक वायरल बीमारी है, जिसके प्रमुख लक्षण तेज बुखार, खांसी, बहती नाक, लाल और पानी भरी आंखें तथा पूरे शरीर पर लाल-भूरे रंग के दाने हैं। वायरस के संपर्क में आने के 10 से 14 दिन बाद इसके लक्षण दिखाई देते हैं और दानों से पहले मुंह के अंदर छोटे सफेद धब्बे (कोप्लिक स्पाट्स) भी नजर आ सकते हैं।  

UP के 2002 गांवों में BSNL की नई ओएफसी परियोजना, दो अरब रुपये से होगा डिजिटल विस्तार

गोंडा उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं देने के लिए गोंडा व बलरामपुर में बीएसएनएल दो अरब रुपये खर्च कर अपना नेटवर्क सुधार रहा है। दोनों जिलों के 2002 गांवों में बीएसएनएल गांव-गांव ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई जा रही है। इसके बाद ब्लाक, स्कूल अस्पताल व थाने को फाइबर कनेक्शन देकर उन्हें तेज रफ्तार के इंटरनेट सेवाएं दी जाएगी। यही नहीं, करीब 300 रुपये प्रति माह में ग्रामीण उपभोक्ता भी कनेक्शन लेकर तीव्र गति वाले इंटरनेट का लाभ ले सकेंगे। सरकार भले ही डिजिटलाइज्ड व आनलाइन सेवाएं देने के लिए गंभीर है लेकिन ऑनलाइन आवेदन फॉर्म से लेकर बैकिंग,गेहूं बिक्री रजिस्ट्रेशन समेत अन्य सेवाएं डिजिटल होने के बाद उनका पूरा लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है। कारण, गांवों में इंटरनेट की खराब हालत के चलते हमेशा सर्वर डाउन रहता है, जिससे लोगों को बार-बार मुख्यालय दौड़ना पड़ रहा है। यही नहीं आए दिन सर्वर डाउन रहने से बच्चे,महिलाएं व बुजुर्गों को भी परेशानी हो रही है। कोई परीक्षा फॉर्म नही भर पा रहा है तो कोई पेंशन के लिए मुख्यालय तक दौड़ रहा है। इन्हें स्कूल में नामांकन परीक्षा व फॉर्म भरने से लेकर अन्य जरूरी कार्य भी निजी साइबर कैफे से कराना पड़ रहा है। सरकारी कार्यालयों में आनलाइन कामकाज निपटाने के लिए कार्मिकों को एनआईसी या फिर साइबर कैफे का सहारा लेना पड़ता है, जिसमें अधिक धन व श्रम अधिक व्यय होता है। साथ ही गोपनीयता भंग होने का भी डर रहता है। इन समस्याओं को देखते हुए सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों की इंटरनेट सेवाएं दुरुस्त करने की तैयारी शुरू कर दी है। सरकारी दूर संचार कंपनी बीएसएनएल ने गोंडा-बलरामपुर के 2002 गांवों में बीएसएनएल गांव-गांव ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछा रहा है। दो अरब रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना को जिम्मा उसने रेलवे विकास निगम को दिया है, जो इस साल 31 मई तक पूरा कर लिया जाना है। ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछने के बाद ब्लाक, स्कूल अस्पताल व थाने को फाइबर कनेक्शन दिया जाएगा, जिससे उन्हें तेज इंटरनेट की सेवाएं मिलेंगी। यही नहीं करीब 300 रुपये प्रति माह में ग्रामीण उपभोक्ता भी कनेक्शन लेकर इसका लाभ सकेंगे। दीपेंद्र गुप्ता, जिला प्रबंधक भारत संचार निगम लिमिटेड- ओएफसी केबल मई तक पड़ जाएगी, जिसके बाद जून से दोनाें जिलाें के सभी गांवों में तीव्र गति वाला इंटरनेट चलने लगेगा।

साइबर ठगी के शिकार? RBI देगी राहत, अब डिजिटल फ्रॉड पर मिलेगा मुआवजा

मुंबई डिजिटल ट्रांजेक्शन के दौर में ऑनलाइन ठगी का शिकार होने वाले करोड़ों भारतीयों के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) राहत की एक बड़ी योजना लेकर आया है। आरबीआई ने डिजिटल लेनदेन में ग्राहकों की सुरक्षा और जवाबदेही से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव का एक प्रारूप (Draft) पेश किया है। इस नई नीति का मुख्य उद्देश्य छोटे मूल्य की धोखाधड़ी (Small Value Frauds) के लिए ग्राहकों को सीधा मुआवजा दिलाना और बैंकों की जिम्मेदारी तय करना है। प्रस्तावित समय-सारणी के अनुसार, जनता 6 अप्रैल, 2026 तक इस ड्राफ्ट पर अपने सुझाव दे सकती है और ये नियम 1 जुलाई, 2026 से पूरे देश में प्रभावी हो सकते हैं। अब बैंकों को साबित करनी होगी ग्राहक की गलती नए नियमों के तहत, डिजिटल धोखाधड़ी के मामलों में 'सबूत' जुटाने का पूरा बोझ अब बैंकों के कंधों पर होगा।     बैंक की जिम्मेदारी: बैंक को यह सिद्ध करना होगा कि धोखाधड़ी ग्राहक की लापरवाही से हुई है, न कि बैंकिंग सिस्टम की किसी खामी से।     व्यापक परिभाषा: 'अधिकृत इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन' के दायरे को बढ़ाकर अब इसमें जबरदस्ती (Coercion) या धोखे से कराए गए भुगतान को भी शामिल किया गया है। इन स्थितियों में ग्राहक की होगी 'जीरो लायबिलिटी' (Zero Liability):     बैंक की चूक: यदि फ्रॉड बैंक की किसी तकनीकी कमी या लापरवाही के कारण हुआ हो।     थर्ड-पार्टी ब्रीच: यदि किसी तीसरे पक्ष की गलती से नुकसान हुआ है और ग्राहक 5 दिनों के भीतर इसकी सूचना बैंक को दे देता है। छोटे फ्रॉड के लिए मुआवजे का नया मॉडल RBI ने पहली बार ₹50,000 तक के डिजिटल फ्रॉड के लिए एक विशेष मुआवजे के ढांचे का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत पीड़ित को उसके शुद्ध नुकसान का 85% या अधिकतम ₹25,000 (जो भी कम हो) वापस मिल सकेगा। मुआवजे की शर्तें:     यह लाभ एक व्यक्ति को जीवन में केवल एक बार ही मिल सकेगा।     धोखाधड़ी की रिपोर्ट 5 दिनों के भीतर बैंक और साइबर क्राइम पोर्टल दोनों पर दर्ज करना अनिवार्य होगा। अलर्ट और रिपोर्टिंग के लिए सख्त निर्देश सुरक्षा को और पुख्ता करने के लिए RBI ने बैंकों के लिए नए रिपोर्टिंग मानक तय किए हैं:     अनिवार्य SMS अलर्ट: ₹500 से अधिक के हर डिजिटल लेनदेन पर बैंक को तुरंत SMS अलर्ट भेजना होगा।     24×7 रिपोर्टिंग चैनल: बैंकों को डिजिटल फ्रॉड की शिकायत के लिए चौबीसों घंटे चालू रहने वाली हेल्पलाइन या पोर्टल की सुविधा देनी होगी। RBI का यह कदम न केवल ग्राहकों का डिजिटल बैंकिंग पर भरोसा बढ़ाएगा, बल्कि बैंकों को अपने सुरक्षा तंत्र को और अधिक मजबूत करने के लिए भी प्रेरित करेगा।

आदिवासी महोत्सव में पहुंचेंगे Amit Shah, एमपी के कई क्षेत्रों को मिलेंगी बड़ी सौगातें

भोपाल प्रदेश का पहला बैगा महोत्सव शहडोल में नहीं, बल्कि बालाघाट में होगा। जिले में स्थान के चयन की प्रक्रिया लगभग पूरी कर ली है। यह जिला मुख्यालय या आसपास के क्षेत्रों में मार्च के अंत या अप्रैल के पहले सप्ताह में होगा। इसमें केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह शामिल होंगे। आदिवासी समाज से आने वाले अन्य केंद्रीय व राज्य के मंत्री व प्रमुख जन भी हिस्सा लेंगे। प्रदेश में नक्सलियों के खात्मे के बाद सरकार पहला बड़ा आयोजन करने जा रही है, इसका मकसद आदिवासी समाज को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए अतिरिक्त प्रयास करना और नक्सली गतिविधियों के कारण विकास से पिछड़े बालाघाट, मंडला जैसे जिलों पर अतिरिक्त ध्यान देना है। गृह मंत्री ने कार्य योजना को सराहा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर उक्त महोत्सव की कार्य योजना बनाई गई, इसे केंद्रीय गृहमंत्री के सामने रखा गया, उन्होंने भी इसे सराहा है साथ ही उक्त महोत्सव में सहभागी बनने की इच्छा भी जताई है। बता दें, केंद्र ने नक्सलियों के खात्मे के लिए राज्य को मार्च-अप्रैल तक की गाइडलाइन दी थी लेकिन उसके तीन महीने पहले ही मप्र पुलिस और एजेंसियों ने मिलकर चिह्नित नक्सलियों का खात्मा कर दिया। कई को मार गिराया तो कुछ ने सरकार के समक्ष समर्पण किए थे। नक्सल से प्रभावित क्षेत्र को मिलेंगी सौगातें बैगा महोत्सव में आदिवासी समाज के उन लोगों को बड़ी सौगात मिल सकती है जो लंबे समय तक नक्सलियों के चंगुल में रहे। सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री के निर्देश पर ऐसे क्षेत्रों की जरुरतों का अलग से रोडमैप तैयार कर लिया है। इसका मकसद आदिवासी समाज को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए अतिरिक्त प्रयास करना और नक्सली गतिविधियों के कारण विकास से पिछड़े बालाघाट, मंडला जैसे जिलों पर अतिरिक्त ध्यान देना है। हालांकि अभी भी सरकार ने नक्सलियों के विरुद्ध अभियान को बंद नहीं किया, बल्कि यह आगे भी जारी रहेगा। क्षेत्र में सख्ती के साथ सर्च अभियान जारी है।

लाडली बहनों को फिर सौगात: जल्द खातों में ट्रांसफर होंगे 1500 रुपए

ग्वालियर  मध्य प्रदेश की महत्वाकांक्षी लाडली बहना योजना की पात्र महिलाओं के लिए बड़ी खबर है। लाडली बहना योजना की 34वीं किस्त जल्द ही जारी होने वाली है। इस बार प्रदेश की करीब 1.28 करोड़ महिलाओं के खातों में सीधे 1500-1500 रुपए की राशि भेजी जाएगी। मुख्यमंत्री Mohan Yadav सिंगल क्लिक के माध्यम से यह राशि पात्र महिलाओं के खातों में ट्रांसफर करेंगे। 1.28 करोड़ को मिलेगा योजना का लाभ वर्तमान में 1.28 करोड़़ लाडली बहनें इस योजना (Ladli Behna Yojana) का लाभ ले रही हैं। इन महिलाओं के खातों में प्रतिमाह 1500-1500 रुपए की राशि ट्रांसफर की जाती है। इस सरकारी आंकड़े के मुताबिक मार्च महीने में आने वाली लाडली बहना योजना की 34वीं किस्त के कुल 1920 रुपए मोहन सरकार पात्र महिलाओं के खातों में ट्रांसफर करेगी। यह पैसा सीधे DBT (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से महिलाओं के बैंक में पहुंचाया जाएगा। प्रदेश की बीजेपी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना बता दें कि लाडली बहना योजना (Ladli Behna Yojana) प्रदेश की बीजेपी सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक है। जो प्रदेश की राजनीति में एक बड़ी गेम चेंजर योजना साबित हुई है। इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना और परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर करना है। शुरुआत में इस योजना की पात्र महिलाओं को 1000 रुपए की राशि दी जाती थी। जिसे बढ़ाकर पहले 1250 रुपए किया गया और अब यह राशि 1500 तक बढ़ाई जा चुकी है। सरकार का दावा, महिलाएं हुईं आत्मनिर्भर, मिला सम्मान मध्य प्रदेश की मोहन सरकार का दावा है कि इस योजना का शुरू होने से प्रदेश की करोड़ों महिलाओं को बड़ा सहारा मिला है। वे न केवल आर्थिक रूप से मजबूत हुई हैं, बल्कि आत्मनिर्भर बनी हैं, परिवार में उनके आर्थिक योगदान से उनका सम्मान बढ़ा है और वे अब निर्णायक भूमिका में आ गई हैं। घर खर्च के साथ ही वे बच्चों की पढ़ाई और अपनी छोटी-मोटी जरूरतें खुद पूरी कर रही हैं।

नया नोएडा बनेगा मेट्रोपॉलिस: उद्योग और आबादी की बड़ी योजना का खुलासा

नोएडा उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर और बुलंदशहर के बीच बसने वाला 'नया नोएडा' (Naya Noida Master Plan 2041) (दादरी-नोएडा-गाजियाबाद विशेष निवेश क्षेत्र – DNGIR) भविष्य का सबसे आधुनिक औद्योगिक शहर बनने जा रहा है। इसे संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के अबू धाबी मॉडल पर विकसित किया जा रहा है। औद्योगिक हब… 3 हजार फैक्ट्रियां और 21 हजार हेक्टेयर क्षेत्र नया नोएडा करीब 21,000 हेक्टेयर के विशाल क्षेत्र में फैला होगा। मास्टर प्लान 2041 के अनुसार, इसका सबसे बड़ा हिस्सा यानी 8,811 हेक्टेयर क्षेत्र केवल उद्योगों के लिए आरक्षित किया गया है। यहां लगभग 3,000 छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयां लगाई जाएंगी, जिससे यह क्षेत्र निवेश का ग्लोबल हब बनेगा।  इस नए शहर की अनुमानित आबादी करीब 6 लाख होगी। खास बात यह है कि इसमें से 3.5 लाख लोग माइग्रेंट (प्रवासी) होंगे, जो यहाँ के उद्योगों में काम करने के लिए आएंगे। आवासीय जरूरतों को पूरा करने के लिए 2,000 हेक्टेयर से अधिक जमीन का उपयोग किया जाएगा। ईडब्ल्यूएस से लेकर एचआईजी फ्लैट्स तक यहां हर आय वर्ग के लिए घर उपलब्ध होंगे। मास्टर प्लान में चार कैटेगरी और तीन टाइप के मकानों का प्रस्ताव है…     EWS (आर्थिक रूप से कमजोर): 18.1 हेक्टेयर क्षेत्र।     LIG (निम्न आय वर्ग): 40.8 हेक्टेयर क्षेत्र।     MIG (मध्यम आय वर्ग): 29.9 हेक्टेयर क्षेत्र।     HIG (उच्च आय वर्ग): 1.8 हेक्टेयर क्षेत्र। पानी और पर्यावरण: गंगाजल और झीलों का संगम शहर की प्यास बुझाने के लिए 300 MLD पानी की व्यवस्था की जाएगी, जिसमें गंगाजल और भूजल का मिश्रण होगा। पर्यावरण संरक्षण के लिए मास्टर प्लान में खास प्रावधान हैं…     झीलों और नहरों का निर्माण: 58.96 हेक्टेयर में लेक और 91.75 हेक्टेयर में कैनाल बनाई जाएंगी।     जल संचयन: गिरते भूजल स्तर को सुधारने के लिए वेटलैंड विकसित किए जाएंगे।     वाटर सप्लाई: कुल पानी में से 212 MLD उद्योगों को और 85 MLD घरेलू उपयोग के लिए दिया जाएगा। 80 गांवों की जमीन पर 'लैंड पूल' मॉडल नया नोएडा को बुलंदशहर और दादरी के 80 गांवों की जमीन पर बसाया जा रहा है। यहां जमीन का अधिग्रहण 'लैंड पूलिंग' नीति के जरिए किया जाएगा, जिससे किसानों को भी शहर के विकास में भागीदार बनाया जा सके।

मध्य प्रदेश अधिवक्ता परिषद चुनाव: 12 मई को मतदान, 16 जून से गिनती; 87 हजार वकील तय करेंगे नई टीम

इंदौर राज्य अधिवक्ता परिषद के पांच साल में एक बार होने वाले चुनाव के लिए अधिसूचना जारी कर दी गई है। इसके अनुसार पूरे प्रदेश में 12 मई 2026 को एक साथ मतदान कराया जाएगा, जबकि मतगणना 16 जून 2026 से शुरू होगी। कार्यकारिणी सदस्य के कुल 25 पदों में से इस बार सात पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं। इनमें से पांच पदों पर चुनाव होगा, जबकि दो पदों पर मनोनयन किया जाएगा। इस चुनाव में प्रदेशभर के लगभग 87 हजार वकील हिस्सा लेंगे। राज्य अधिवक्ता परिषद के चुनाव के लिए प्रारंभिक मतदाता सूची 16 मार्च 2026 को जारी की जाएगी। इस सूची को लेकर 24 मार्च 2026 तक दावे और आपत्तियां प्रस्तुत की जा सकेंगी। इसके बाद एक अप्रैल को अंतिम मतदाता सूची जारी होगी। मतदान का अधिकार केवल उन्हीं वकीलों को मिलेगा, जिन्होंने निर्धारित प्रावधानों के अनुसार अपना सत्यापन करा लिया है।   नामांकन के लिए तीन दिन का समय प्रत्याशियों को नामांकन फार्म जमा करने के लिए तीन दिन का समय मिलेगा। आठ, नौ और दस अप्रैल को नामांकन फार्म जमा किए जा सकेंगे। 15 और 16 अप्रैल को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी। वहीं 20 से 22 अप्रैल शाम चार बजे तक नाम वापस लिया जा सकेगा। 22 अप्रैल 2026 को शाम पांच बजे प्रत्याशियों की अंतिम सूची जारी कर दी जाएगी। दो महीने से अधिक चलती है मतगणना मतदान के बाद सभी मतपेटियों को सीलबंद कर जबलपुर भेजा जाएगा। वहां 16 जून 2026 से मतगणना शुरू होगी। आमतौर पर राज्य अधिवक्ता परिषद के चुनाव की मतगणना लगभग दो महीने तक चलती है। महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ेगी इस बार राज्य अधिवक्ता परिषद में महिलाओं की भागीदारी बढ़ना तय है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 25 में से सात पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं। पिछली कार्यकारिणी में 25 सदस्यों में से केवल एक महिला थी, लेकिन इस बार यह संख्या सात तक पहुंच जाएगी। प्रत्याशियों के लिए चुनौतीपूर्ण होगा चुनाव पिछले चुनाव की तुलना में इस बार चुनाव अधिक चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। इसका कारण यह है कि पुरुष प्रत्याशियों के लिए 25 के बजाय सिर्फ 18 पद ही उपलब्ध होंगे। अनुमान के अनुसार प्रथम वरीयता के लगभग 2500 मत पाने वाले प्रत्याशी खुद को सुरक्षित स्थिति में मान सकते हैं। इंदौर से 30 से ज्यादा संभावित प्रत्याशी नामांकन प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही संभावित प्रत्याशियों ने प्रचार शुरू कर दिया है। इंटरनेट मीडिया के साथ-साथ प्रत्यक्ष संपर्क के माध्यम से भी प्रचार किया जा रहा है। प्रत्याशी वकीलों के कार्यालयों और घरों तक पहुंचकर प्रथम वरीयता का मत देने की अपील कर रहे हैं। इस बार राज्य अधिवक्ता परिषद के चुनाव में अकेले इंदौर से 30 से अधिक प्रत्याशियों के मैदान में उतरने की तैयारी है, जिनमें वर्तमान कार्यकारिणी के पांच सदस्य भी शामिल हैं।