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उपलब्धियों का उत्सव भविष्य की बड़ी जिम्मेदारियों की शुरुआत है : राज्यपाल पटेल

उपलब्धियों के उत्सव से शुरू होती भविष्य की बड़ी जिम्मेदारियाँ : राज्यपाल  पटेल गरीब और वंचितों का जीवन बेहतर बनाने में ज्ञान से करें सहयोग भोपाल राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने युवाओं से कहा कि आज का समारोह उनके जीवन की उपलब्धियों का उत्सव तो है, लेकिन यह उनके भविष्य की बड़ी जिम्मेदारियों की शुरुआत भी है। उन्होंने युवाओं से अपेक्षा की कि वे संवेदना, सेवा और सहयोग के पथ पर निरंतर अग्रसर रहें और अपने हौसले तथा हुनर से गरीब, वंचित और जरूरतमंदों का जीवन बेहतर बनाने में योगदान दें। गरीब बस्तियों में जाकर जरूरतमंदों की मदद को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाएं और अपने ज्ञान को सार्थकता प्रदान करें। राज्यपाल  पटेल ने  स्वशासी संस्थान टेक्नोक्रेट्स ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस (टी.आई.टी.) के वार्षिक ‘प्लेसमेंट डे’ समारोह को संबोधित कर रहे थे। राज्यपाल  पटेल ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उनका स्मृति-चिह्न भेंट कर अभिनंदन किया गया।राज्यपाल  पटेल ने समारोह में प्लेसमेंट प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों और हायरिंग कम्पनियों के प्रतिनिधियों को सम्मानित भी किया। राज्यपाल  पटेल ने ‘प्लेसमेंट डे’ के अवसर पर रोजगार प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों, उनके गुरुजनों और अभिभावकों को बधाई और शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी युवाओं को विकसित भारत का कर्णधार मानते हैं। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति, स्टार्टअप, कौशल विकास और डिजिटल इंडिया जैसे अभिनव कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं की प्रतिभा को नए पंख मिले हैं। उन्होंने वैश्विक मानकों और अपेक्षाओं के अनुरूप विद्यार्थियों को तैयार करने के प्रयासों के लिए टी.आई.टी. ग्रुप से जुड़े सभी सहयोगियों को साधुवाद दिया। पूर्व मंत्री एवं विधायक  अजय विश्नोई ने विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने सामान्य हवा और हीलियम से भरे गुब्बारों के प्रसंग के माध्यम से विद्यार्थियों को ज्ञान की शक्ति का महत्व बताया। उन्होंने असफलता को सफलता में बदलने के लिए स्वयं की कमियों को पहचानकर उन्हें दूर करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम को बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. एस.के. जैन, संस्थान की अध्यक्ष मती साधना करसोलिया और विभिन्न कंपनियों के कैंपस हायरिंग प्रतिनिधियों ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर संस्थान के मुख्य संरक्षक  रामराज करसोलिया भी मंचासीन थे।  

8 करोड़ की अफीम खेती मामले में बड़ी कार्रवाई, भाजपा नेता के भाई की दुकान तोड़ी गई

 दुर्ग छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में प्रशासन ने अतिक्रमण के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए समोदा गांव में बुलडोजर चलाया. इस अभियान के दौरान उस दुकान को ध्वस्त कर दिया गया, जिसे अधिकारियों ने सरकारी जमीन पर बना अवैध निर्माण बताया है. यह दुकान उस व्यक्ति की थी, जिसके भाई को हाल ही में अफीम की खेती के मामले में गिरफ्तार किया गया है. प्रशासन की इस कार्रवाई ने इलाके में काफी चर्चा पैदा कर दी है. जैसे ही बुलडोजर मौके पर पहुंचा, बड़ी संख्या में ग्रामीण वहां इकट्ठा हो गए और पूरी कार्रवाई को देखने लगे. इस पूरे मामले का संबंध भाजपा किसान मोर्चा के नेता विजय ताम्रकार से जुड़ा बताया जा रहा है, जिन्हें कुछ दिन पहले पुलिस ने अफीम की खेती के आरोप में गिरफ्तार किया था। मक्के के खेत में मिली करोड़ों की अफीम जानकारी के मुताबिक 7 मार्च को पुलिस और नारकोटिक्स से जुड़ी एजेंसियों ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए एक खेत में छापा मारा था. जांच के दौरान मक्के की फसल के बीच अफीम के पौधे पाए गए. जांच में सामने आया कि खेत में बड़े पैमाने पर अफीम की खेती की जा रही थी. अधिकारियों के अनुसार बरामद फसल की अनुमानित कीमत करीब 8 करोड़ रुपये आंकी गई. इस कार्रवाई के बाद पुलिस ने भाजपा किसान मोर्चा से जुड़े नेता विजय ताम्रकार को दो अन्य लोगों के साथ गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तारी के बाद इस मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल पैदा कर दी। भाई की दुकान पर चला बुलडोजर इसी घटनाक्रम के बीच प्रशासन ने समोदा गांव में एक और कार्रवाई की. अधिकारियों के मुताबिक गिरफ्तार नेता के भाई बृजेश ताम्रकार गांव में करीब 32 डिसमिल सरकारी जमीन पर दुकान चलाते थे. जिला प्रशासन को लंबे समय से इस जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायतें मिल रही थीं. जांच के बाद पाया गया कि यह दुकान सरकारी भूमि पर बनाई गई है. इसके बाद प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने का निर्णय लिया और मंगलवार को बुलडोजर की मदद से इस निर्माण को ध्वस्त कर दिया गया. कार्रवाई के दौरान राजस्व विभाग और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम मौके पर मौजूद रही. इस अभियान का नेतृत्व अतिरिक्त तहसीलदार ने किया. उन्होंने बताया कि प्रशासन ने सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद ही यह कदम उठाया है. अवैध निर्माण को हटाने के लिए बुलडोजर का इस्तेमाल किया गया और कुछ ही समय में पूरी संरचना को गिरा दिया गया. अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई अतिक्रमण हटाने के अभियान का हिस्सा थी और इसका उद्देश्य सरकारी जमीन को मुक्त कराना था। पहले ही जारी हो चुका था बेदखली आदेश प्रशासन के मुताबिक इस मामले में स्थानीय अदालत पहले ही बेदखली का आदेश जारी कर चुकी थी. इसके बावजूद लंबे समय तक कब्जा नहीं हटाया गया. गांव के लोगों और ग्राम प्रधान ने कई बार प्रशासन को लिखित शिकायत देकर बताया था कि सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण किया गया है. इन शिकायतों के आधार पर जांच की गई और अंततः अदालत से बेदखली वारंट जारी होने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई को अंजाम दिया। बुलडोजर कार्रवाई देखने जुटे ग्रामीण मंगलवार को जब प्रशासन की टीम समोदा गांव पहुंची, तो वहां बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया. जैसे ही बुलडोजर ने अवैध निर्माण को गिराना शुरू किया, गांव के लोग आसपास इकट्ठा होने लगे. कई लोग पूरे घटनाक्रम को देखने के लिए मौके पर मौजूद रहे. हालांकि प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए थे, जिससे कार्रवाई के दौरान किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति पैदा नहीं हुई. अधिकारियों का कहना है कि जिले में सरकारी जमीन पर कब्जे के मामलों को लेकर प्रशासन गंभीर है. राजस्व विभाग के अधिकारियों के मुताबिक कई जगहों पर अवैध कब्जों की शिकायतें मिल रही हैं और उन्हें हटाने के लिए चरणबद्ध तरीके से अभियान चलाया जा रहा है. प्रशासन का कहना है कि जहां भी सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण मिलेगा, वहां इसी तरह की कार्रवाई की जाएगी। विपक्ष ने उठाए सवाल इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं. विपक्षी दल कांग्रेस ने अफीम की खेती के मामले को लेकर राज्य सरकार की आलोचना की है. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर अफीम की खेती होना प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है. उन्होंने मामले की गहन जांच की मांग भी की है. हालांकि सरकार की ओर से इस पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि कानून के अनुसार कार्रवाई की जा रही है। कानून व्यवस्था पर प्रशासन का जोर प्रशासन का कहना है कि अवैध गतिविधियों और सरकारी जमीन पर कब्जे के मामलों में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी. अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जिले में सरकारी भूमि की सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिकता है. इसी के तहत जहां भी अवैध कब्जे की शिकायत मिलेगी, वहां जांच कर कार्रवाई की जाएगी. समोदा गांव में हुई यह कार्रवाई इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है. एक तरफ अफीम की करोड़ों की खेती का खुलासा और दूसरी तरफ उससे जुड़े व्यक्ति के परिवार की अवैध दुकान पर बुलडोजर चलने की घटना ने लोगों का ध्यान खींचा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन की यह कार्रवाई यह संदेश देती है कि सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा सकते हैं. प्रशासन के अधिकारियों ने साफ किया है कि यह कार्रवाई केवल एक मामले तक सीमित नहीं है. जिले में जहां-जहां सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायतें हैं, वहां जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी. अधिकारियों के मुताबिक आने वाले दिनों में भी अतिक्रमण हटाने का अभियान जारी रहेगा और अवैध कब्जों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे. इस बीच पुलिस अफीम की खेती से जुड़े मामले की भी जांच आगे बढ़ा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस अवैध गतिविधि में और कौन-कौन लोग शामिल थे।

जबरन कब्जे पर क्या कहते हैं संयुक्त राष्ट्र के कानून?

संयुक्त राष्ट्र दुनियाभर में अभी दो जंगे चल रही हैं, जिनकी चर्चा हर जगह हो रही है। इसमें पहला युद्ध तो अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच हो रहा है, जबकि दूसरा रूस-यूक्रेन के बीच चल रहा है। रूस-यूक्रेन जंग फरवरी 2022 से ही जारी है। इस युद्ध में रूस ने यूक्रेन के कई हिस्सों को कब्जाया है, जिसमें डोनेट्स्क, लुहांस्क, खेरसॉन और जापोरिज्जिया जैसी जगहें शामिल हैं। इसके अलावा वह 2014 से ही क्रीमिया पर कब्जा करके बैठा है, जो कभी यूक्रेन का हिस्सा हुआ करता था। ये तो बस एक ताजा उदाहरण है, जिसमें किसी देश ने दूसरे देश के हिस्सों को कब्जाया है। अगर इतिहास उठाकर देखें तो ऐसे कई उदाहरण मिलेंगे, जहां किसी देश ने पहले दूसरे मुल्क के खिलाफ जंग छेड़ दी। फिर उस मुल्क के किसी हिस्से को कब्जा लिया। ईरान के साथ चल रही अमेरिका-इजरायल की जंग में भी ऐसा होने की संभावना जताई जा रही है। अब यहां सवाल उठता है कि क्या कोई देश ऐसा कर सकता है? क्या किसी देश को दूसरे मुल्क की जमीन पर जबरन कब्जा करने का अधिकार है? संयुक्त राष्ट्र के नियम इस संबंध में क्या कहते हैं? अगर आप इंटरनेशनल रिलेशन के स्टूडेंट हैं या फिर सरकारी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, तो फिर आपको इसका जवाब भी मालूम होना चाहिए। देश कब्जाने को लेकर UN के नियम क्या हैं? संयुक्त राष्ट्र (UN) एक ऐसी संस्था है, जिसका प्रमुख काम दुनिया में शांति बनाए रखना है, ताकि युद्ध की संभावना पैदा ना हो। मगर फिर भी कई देशों के बीच युद्ध होते रहते हैं। UN के 193 सदस्य देश हैं, जिन्हें संयुक्त राष्ट्र चार्टर का पालन करना होता है। इस चार्टर को आप UN का संविधान मान सकते हैं, जिसमें बताया गया है कि किसी देश को क्या करना है और क्या नहीं करना है। इसी चार्टर में इस बात की भी जानकारी दी गई है कि क्या कोई देश दूसरे देश के किसी हिस्से पर कब्जा कर सकता है या नहीं। UN चार्टर के आर्टिकल 2 में इस बारे में विस्तार से बात की गई है। इस आर्टिकल में 7 प्वाइंट्स हैं, जिसमें आर्टिकल 2(4) में कब्जे से संबंधित बातें हैं। आर्टिकल 2(4) में कहा गया है, 'सभी सदस्य देश अपने अंतरराष्ट्रीय संबंधों में किसी भी मुल्क की क्षेत्रीय अखंडता या राजनीतिक स्वतंत्रता के विरुद्ध बल प्रयोग या धमकी से परहेज करेंगे, या किसी भी अन्य ऐसे तरीके से परहेज करेंगे जो संयुक्त राष्ट्र के उद्देश्यों के साथ मेल नहीं खाता हो।' आसान भाषा में कहें तो इस आर्टिकल में कहा गया है कि दूसरे देशों पर ना तो हमला करें और ना ही उन्हें धमकी दें। यहां जिस क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखने की बात हुई है, उसका मतलब है कि किसी देश की ना तो जमीन कब्जाई जाए और ना ही उसके बॉर्डर चेंज किए जाएं। कुल मिलाकर शांति से रहें और युद्ध ना करें। जमीन कब्जाने के बाद क्या नियम लागू होते हैं? हालांकि, ऐसा देखने को मिलता है कि भले ही हर देश UN चार्टर पर साइन कर दे, लेकिन वह इसके नियमों का पालन नहीं करता है। जैसे रूस का ही उदाहरण लेते हैं, उसने UN के नियमों का पालन नहीं किया और यूक्रेन के कई हिस्सों को कब्जा लिया। अब यहां सवाल उठता है कि अगर कोई देश ऐसा कर देता है, तो फिर उसे कब्जे वाली जगह पर किन नियमों का पालन करना चाहिए। 12 अगस्त, 1949 को अपनाई गई चौथी जिनेवा संधि में इस बारे में विस्तार से बात हुई है। ये संधि युद्ध के समय और कब्जे वाले क्षेत्रों में लोगों की सुरक्षा के लिए समर्पित है। इसमें कहा गया है कि कब्जे वाले इलाके में उन सभी लोगों की सुरक्षा करनी चाहिए, जो सेना के सदस्य नहीं हैं। कब्जे वाले इलाके में रहने वाले सभी लोगों के साथ मानवीय व्यवहार किया जाना चाहिए। उनके साथ मारपीट या उन्हें टॉर्चर नहीं किया जा सकता है। कब्जाने वाले देश को इस बात की इजाजत नहीं है कि वह लोगों को भगाए या उन्हें डिपोर्ट करे। उसे इस बात की भी इजाजत नहीं है कि वह कब्जे वाले इलाके में अपने देश के नागरिकों को बसा सके। सिर्फ इतना ही नहीं, बल्कि कब्जा वाले इलाके में खाना और दवाएं पहुंचाने की जिम्मेदारी भी उसी की है।

10 साल बाद रायपुर को मिल सकता है IPL का तोहफा: RCB के मैचों के साथ स्टेडियम में होंगे बड़े बदलाव

रायपुर करीब एक दशक बाद राजधानी रायपुर में एक बार फिर इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) का रोमांच देखने को मिलेगा। नवा रायपुर स्थित शहीद वीर नारायण सिंह इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में इस बार रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के दो मुकाबले आयोजित करने की तैयारी चल रही है। फ्रेंचाइजी ने इस स्टेडियम को अपना होम ग्राउंड बनाया है, जिससे रायपुर के क्रिकेट प्रेमियों को लंबे समय बाद आईपीएल का लाइव रोमांच देखने का मौका मिल सकता है। चेन्नई सुपर किंग्स और मुंबई इंडियंस से हो सकते हैं मुकाबले जानकारी के अनुसार, इन मुकाबलों को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु अपने मैच चेन्नई सुपर किंग्स और मुंबई इंडियंस के खिलाफ आयोजित कराने की तैयारी में है। यदि ऐसा होता है तो दर्शकों को एक ही मैदान पर विराट कोहली, एमएस धोनी और रोहित शर्मा जैसे दिग्गज खिलाड़ियों को खेलने का मौका मिल सकता है। वीआईपी गैलरी और स्क्रीन में होंगे बदलाव इन संभावित मुकाबलों को देखते हुए स्टेडियम में सुविधाओं को बेहतर बनाने की कवायद भी शुरू हो गई है। बताया जा रहा है कि वीआईपी गैलरी को पहले से अधिक आधुनिक बनाया जाएगा। वहीं दर्शकों के अनुभव को बेहतर करने के लिए स्टेडियम में लगी बड़ी स्क्रीन में भी बदलाव किए जाने की योजना है। गोल्ड और सिल्वर सीटों को बनाया जाएगा लग्जरी इसके अलावा गोल्ड और सिल्वर श्रेणी की सीटों को भी अधिक लग्जरी बनाने का प्रस्ताव है, ताकि दर्शकों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। स्टेडियम की अपर गैलरी में लगी दोनों स्क्रीन को हटाने की भी योजना है। इन स्क्रीन के हटने से करीब 1500 अतिरिक्त सीटों की व्यवस्था हो सकेगी। नई जगह पर बड़ी स्क्रीन लगाई जाएंगी, जिनसे दर्शकों को मैच के रोमांचक पलों को स्लो मोशन में देखने की सुविधा मिलेगी। प्लेटिनम बॉक्स में भी किया जाएगा बदलाव रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के विशेषज्ञों ने स्टेडियम के प्लेटिनम बॉक्स में लगे ग्लास बदलने की भी सिफारिश की है। लगभग 700 दर्शक क्षमता वाले इस बॉक्स को आमतौर पर वीवीआईपी मेहमानों के लिए आरक्षित रखा जाता है, इसलिए इसमें अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है। टीमों की प्रैक्टिस के लिए बनेगी अलग पिच छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ के पदाधिकारियों के अनुसार, टीमों की प्रैक्टिस के लिए स्टेडियम के बाहर अलग से एक पिच भी तैयार की जाएगी। साथ ही फ्रेंचाइजी का प्रतिनिधिमंडल जल्द ही रायपुर का दौरा कर व्यवस्थाओं का जायजा ले सकता है। करीब 50 हजार से अधिक दर्शक क्षमता वाले इस स्टेडियम में मैचों के आयोजन को लेकर फ्रेंचाइजी ने यहां की सुविधाओं और रायपुर के स्टार होटल्स का भी सर्वे किया है। यदि सभी तैयारियां समय पर पूरी हो जाती हैं तो रायपुर के क्रिकेट प्रेमियों को लंबे इंतजार के बाद आईपीएल के हाई वोल्टेज मुकाबले देखने का मौका मिल सकता है।

क्या 2026 में बदल गए किरायेदारी कानून? मकान खाली कराने के दावों का फैक्ट चेक

नई दिल्ली 'नए रेंट नियम 2026' वाला एक पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। 'भारत का नया किराया कानून 2026' के दावे के साथ शेयर किए गए ऐसे पोस्ट में किराएदारों और मकान मालिकों से संबंधित नियमों को लेकर कई बड़े सनसनीखेज बदलाव के दावे किए गए हैं। वायरल पोस्ट के अनुसार किराया कानूनों में सरकार ने बहुत ज्यादा परिवर्तन कर दिया है। इसमें किराया, एडवांस और मकान खाली कराने के लिए नई वैद्यानिक प्रक्रिया में संशोधन की बात कही गई है। नए रेंट नियम 2026 के दावे से कंफ्यूजन ऑनलाइन तेजी से फैलने की वजह से ऐसे पोस्ट ने किराएदारों और मकान मालिकों में बहुत ही ज्यादा कंफ्यूजन पैदा कर दिया है। अलबत्ता,शेयर किए जा रहे तथ्यों में तकनीकी तौर पर कुछ सही हैं, लेकिन उनके पीछे की सच्चाई पूरी तरह से अलग है। 'नए रेंट नियम 2026' वाले पोस्ट में दावा     पहला तो वायरल पोस्ट के माध्यम से यह दावा किया जा रहा है कि नया किराया नियम इसी साल लागू हुआ है।     इसे इस तरह से बताने की कोशिश की गई है कि ये नियम एकसाथ पूरे देश में लागू हैं।     डिपॉजिट के तौर पर मकान मालिक दो महीने से ज्यादा का किराया नहीं ले सकता।     बिना कानूनी प्रक्रिया का पालन किए किराएदारों को नहीं निकाला जा सकता।     रेंट एग्रीमेंट डिजिटली स्टैंप्ड होना जरूरी है और 60 दिन के अंदर रजिस्ट्रेशन आवश्यक है।     12 महीने में सिर्फ एक बार किराया बढ़ सकता है, इसके लिए 90 दिनों की पूर्व सूचना जरूरी है।     मकान मालिक को प्रॉपर्टी में दाखिल होने से 24 घंटे पहले नोटिस देना होगा।     अगर 30 दिनों के भीतर जरूरी मरम्मत नहीं करवाए जाते हैं तो किराएदार उसे खुद ही करवा सकता है और किराए से उसमें लगा खर्च काट सकता है।     ताला बदलना, पानी/बिजली काटना या किराएदारों को धमकाना दंडनीय है।     कुछ रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि अगर किराया, संपत्ति को नुकसान या एग्रीमेंट को लेकर कोई विवाद होता है, तो इसका निपटारा किराया अदालत या ट्रिब्यूनल के द्वारा 60 दिन के अंदर किया जाएगा।   'रेंट नियम 2026' जैसा कोई नियम नहीं बनाया गया है। अलबत्ता इनके कुछ प्रावधान मॉडल टेनेंसी एक्ट(MTA) 2021 में शामिल हैं।     केंद्रीय कैबिनेट से मंजूरी के बाद सरकार ने इसे एक गाइडलाइन नियमावली की तरह जारी किया था।     राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इसके आधार पर अपने किराया नियम तैयार करने थे।     भारत में आवासीय और किराया संबंधी कानून राज्य सरकारों के अधीन आते हैं।     यानी किराया से संबंधित नियावली तैयार करने या उसमें संशोधन का अधिकार राज्य सरकारों के पास है। मॉडल टेनेंसी एक्ट पर केंद्र सरकार का स्टैंड     दिसंबर, 2021 में तत्कालीन आवास और शहरी मामलों के राज्यमंत्री कौशल किशोर ने एक सवाल के जवाब में लोकसभा में कहा था कि लैंड और कोलोनाइजेशन राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है।     उन्होंने केंद्र शासित प्रदेशों को लेकर भी ये बताया था कि उन्हें सलाह दी गई है कि वह या तो मॉडल टेनेंसी एक्ट के आधार पर नया कानून लागू करें या फिर अपने मौजूदा किराया नियावली में संशोधन करें। मॉडल टेनेंसी एक्ट को किन राज्यों ने अपनाया     राज्यसभा में पिछले साल अगस्त तक की दी गई जानकारी के अनुसार कुछ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने मॉडल टेनेंसी एक्ट के आधार पर नियम तैयार किए हैं।     असम, अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्य और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव और लक्षद्वीप जैसे केंद्र शासित प्रदेश इनमें शामिल हैं।     केंद्र की ओर से यह भी कहा गया कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्यों से कहा गया है कि वह मॉडल टेनेंसी एक्ट के ताजा स्वरूप के अनुरूप अपने किराया कानूनों में बदलाव करें। इन राज्यों ने इसके पुराने ड्राफ्ट के आधार पर इसे नोटिफाई कर लिया था। मॉडल टेनेंसी एक्ट को लेकर विवाद     रेंटल एग्रीमेंट के दौरान 'आधार' डिटेल उपलब्ध करवाने के प्रावधान पर सवाल उठाए गए हैं और इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के विपरीत बताया जाता है।     इस कानून के तहत रेंट एग्रीमेंट के डिजिटल रजिस्ट्रेशन का यह कहकर विरोध होता है कि इससे किराएदार और मकान मालिक दोनों के निजी डेटा एक्सपोज होने का खतरा है।

गाजियाबाद में मार्च की शुरुआत से ही गर्मी का कहर, प्रदूषण और बिजली कटौती ने बढ़ाई परेशानी

गाजियाबाद मार्च का महीना अभी आधा भी नहीं बीता है, लेकिन शहर में मई जैसी गर्मी का एहसास होने लगा है। तेज धूप, बढ़ते प्रदूषण और लगातार हो रही बिजली कटौती ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है। सोमवार को अधिकतम तापमान 34.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जबकि रात का तापमान भी करीब 19 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। गर्मी के बढ़ते असर के कारण अब तक बंद पड़े पंखे और एसी भी चलने लगे हैं। वहीं, प्रदूषण का स्तर भी चिंताजनक बना हुआ है। सोमवार को शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 246 दर्ज किया गया जो खराब श्रेणी में आता है। मौसम विभाग के अनुसार फिलहाल तापमान में और बढ़ोतरी हो सकती है, हालांकि 15 मार्च के आसपास पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना है, जिससे मौसम में कुछ राहत मिल सकती है। गर्मी और प्रदूषण से बढ़ीं स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ती गर्मी और खराब हवा की गुणवत्ता का असर लोगों के स्वास्थ्य पर भी पड़ने लगा है। दोपहर के समय बाजारों में भीड़ कम दिखाई दे रही है। धूल और धुएं के कारण लोगों को आंखों में जलन और गले में खराश की शिकायत हो रही है। फील्ड में काम करने वाले लोगों को डिहाइड्रेशन और थकान जल्दी महसूस हो रही है। वहीं, मॉर्निंग वॉक करने वालों को भी सांस लेने में भारीपन महसूस हो रहा है। मौसम में बदलाव की उम्मीद मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले दो-तीन दिनों तक गर्मी का असर बना रहेगा। हालांकि 15 मार्च के आसपास एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना है, जिससे पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी और मैदानी क्षेत्रों में ठंडी हवाएं चल सकती हैं। इससे तापमान में कुछ गिरावट आ सकती है। खोड़ा में 17 घंटे बिजली गुल, लोग रहे परेशान गाजियाबाद के ट्रांस हिंडन क्षेत्र के खोड़ा इलाके में गंगाजल की समस्या के बाद अब बिजली संकट ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। रविवार को करीब 17 घंटे तक बिजली आपूर्ति बाधित रही, जिससे लाखों लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थानीय लोगों ने सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट कर बिजली विभाग के प्रति नाराजगी जताई। रविवार सुबह करीब 11 बजे बिजली आपूर्ति अचानक बंद हो गई, जिसके बाद देर रात तक स्थिति सामान्य नहीं हो सकी। मामले में चीफ इंजीनियर पवन अग्रवाल ने कहा कि संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट ली जाएगी और यह पता लगाया जाएगा कि इतनी देर तक बिजली आपूर्ति बाधित रहने की वजह क्या रही। कई इलाकों में बिजली ट्रिपिंग की समस्या गर्मी बढ़ने के साथ ही शहर के कई इलाकों में बिजली ट्रिपिंग और कटौती की समस्या भी बढ़ने लगी है। सोमवार को मानसरोवर पार्क, राज कंपाउंड, शंकर विहार, शनि विहार और हरपाल एन्क्लेव में एलटी लाइन में फॉल्ट के कारण करीब तीन घंटे तक बिजली आपूर्ति ठप रही। इसके अलावा सेन विहार, शांति नगर, बहरामपुर, अकबरपुर और बुद्ध विहार में करीब चार घंटे तक बिजली नहीं आने से लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। वहीं प्रताप विहार, राहुल विहार, चिपियाना बुजुर्ग, नंदग्राम, केला भट्टा, इस्लामनगर, दौलतपुर, भाटिया मोड़, पंचवटी कॉलोनी और पंचकूला कॉलोनी में भी दिनभर बिजली का आना-जाना लगा रहा। अधीक्षण अभियंता अनिल कुमार ने बताया कि जहां-जहां फॉल्ट की शिकायतें मिली हैं, वहां टीम भेजकर मरम्मत कराई जा रही है।

अब ‘बाय-बाय’ फोन… बिना मोबाइल छुए भी कर सकेंगे UPI पेमेंट

नई दिल्ली क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि कहीं पेमेंट करने के समय पर UPI ऐप में जाकर QR कोड स्कैन करने का ऑप्शन ढूंढना और फिर पेमेंट का पूरा प्रोसेस करना काफी लंबा काम हो जाता है? ऐसा उन लोगों के साथ खासतौर पर होता है, जो सुरक्षा के लिए UPI ऐप्स को फोन की होम स्क्रीन पर नहीं रखते। हालांकि अब आप चाहें, तो फोन को हिलाकर भी पेमेंट कर सकते हैं। इसके लिए आपको फोन को हाथ में पकड़कर उसी तरह हिलाना होगा, जिस तरह हम किसी को बाय करते हैं। इस फीचर का नाम Shake & Pay है और इसे PhonePe ऐप पर इस्तेमाल किया जा सकता है। क्या है Shake & Pay? जैसा कि नाम से पता चलता है इस फीचर की मदद से आप अपने फोन को शेक करके यानी कि हिला कर पेमेंट कर सकते हैं। यह फीचर उस झंझट को खत्म करता है, जिसमें आपको पहले पेमेंट ऐप को सर्च करना पड़ता है और फिर उसमें QR कोड स्कैन करने के ऑप्शन को तलाशना पड़ता है। कह सकते हैं कि यह UPI पेमेंट को और तेज बनाने का एक आसान सा तरीका है। कहां और कैसे काम करता है Shake & Pay फीचर अगर आप UPI पेमेंट्स के लिए Shake & Pay फीचर इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो बता दें कि यह PhonePe ऐप पर उपलब्ध है। इसे ऑन करने के बाद जब आप PhonePe खोलकर फोन को शेक करेंगे, तो सीधा QR कोड स्कैनर खुल जाता है। इससे तुरंत कहीं भी पेमेंट करना आसान और तेज हो जाता है। गौर करने वाली बात है कि इस फीचर को इस्तेमाल करने के लिए आपको फोन को हाथ में पकड़कर तेजी से इस तरह हिलाना होगा जैसे कि आप किसी को बाय कर रहे हों। कैसे ऑन करें Shake & Pay फीचर PhonePe के Shake & Pay फीचर को इस्तेमाल करने के लिए जरूरी है कि आप Phonepe ऐप इस्तेमाल करते हों।     PhonePe ऐप की होम स्क्रीन पर ऊपर बाईं ओर मौजूद अपनी प्रोफाइल आइकन पर टैप करें।     इसके बाद नीचे की ओर स्क्रॉल करें और Shake & Scan को सर्च करें।     आपके QR कोड के ठीक नीचे मौजूद Shake & Scan के ऑप्शन को ऑन कर दें।     इसके बाद जब भी आप फोन को शेक करेंगे, तो आप सीधा QR कोड स्कैन के पेज पर पहुंच जाएंगे। ध्यान रखने वाली बात है कि सुरक्षा के लिहाज से Shake & Pay फीचर तभी काम करता है, जब आपके फोन में PhonePe ऐप खुला हो। बायोमेट्रिक फीचर के साथ करें इस्तेमाल अगर आप पेमेंट करने के तरीके को और तेज बनाना चाहते हैं, तो Shake & Pay फीचर के साथ बायोमेट्रिक फीचर का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसे में जब आप फोन को शेक करके QR कोड स्कैन कर लेंगे, तो आपको सिर्फ चेहरा दिखाकर या अंगूठा लगाकर पेमेंट को पूरा कर देना होगा। कहने का मतलब है कि न सिर्फ Phonepe पर QR कोड स्कैन करके के पेज पर तेजी से जाना संभव होगा बल्कि पेमेंट भी बायोमेट्रिक फीचर के चलते बिना पिन डाले ही पूरी की जा सकती है।

समुद्र किनारे दिखीं रहस्यमयी ‘डूम्सडे फिश’, मैक्सिको में महिला ने रिकॉर्ड किया अनोखा नजारा

मैक्सिको बीच पर टहलना ही अपने आप में अनोखा अनुभव होता है। यहीं पर अगर कोइ दुर्लभ मछली दिख जाए तो दिन यादगार होना तय है। मैक्सिको के काबो सैन लुकास में बीच पर मोनिका पिटेंगर के साथ ऐसा ही हुआ है। उन्हें वो मछली दिखी है जो कई सालों में एक झलक दिखाती है। इस फिश को डूम्स डे फिश कहते हैं। डूम्स डे का मतलब 'प्रलय का दिन' होता है। मोनिका ने इसका वीडियो बनाकर अपना अनुभव साझा किया है। मोनिका वीडियो में बोलती दिख रही हैं कि मुझे अपनी आंखों पर विश्वास ही नहीं हुआ। मैंने ऐसा पहले कभी नहीं देखा था। फिक्शन मूवी वाला सीन था बिल्कुल। कुछ सेकंड बाद ही उन्हें दूसरी मछली भी दिखी तो वो नर्वस हो गईं। वो अजीब सी चमकती हुई आकृति थी इसलिए सभी परेशान हो रहे थे। पानी में वापस भेजा उनकी बहन को लगा कि ये मछली किसी दिक्कत में हैं। फिर उन्होंने मछली को धक्का देकर पानी में वापस भेजने की कोशिश शुरू की। तब कई और लोग भी आए और धक्का देने लगे। कितना अद्भुत मौका था जब मछलियां काफी देर बाद भी वापस नहीं आईं तो मोनिका और उनके परिवार ने इन फिश के बारे में पढ़ा और समझ आया ये तो अद्भुत मौका था। ये हर कोई नहीं अनुभव कर पाता है। 3000 फीट नीचे ये मछली 30 फीट तक लंबी होती है। ये पानी में 3000 फीट नीचे रहती हैं। इसलिए इन्हें अद्भुत माना जाता है। इनका असली नाम ओर फिश है। जापानी मान्यता इन्हें डूम्स डे फिश नाम जापान से मिला है। वहां माना जाता है कि ये समुद्र के देवता Ryūjin का संदेश देती हैं। ये बताती हैं कि सुनामी या भूकंप आने वाला है।

राज्यसभा के लिए 26 नेता निर्वाचित, शरद पवार-सिंघवी शामिल; हरियाणा और बिहार में चुनाव से तय होंगे नतीजे

नई दिल्ली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) प्रमुख शरद पवार और केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले समेत 26 उम्मीदवार सोमवार (9 मार्च) को राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुने गए। नाम वापसी की आखिरी तारीख बीत जाने के बाद, अब उच्च सदन की 11 सीटों के लिए 16 मार्च को मतदान होगा। बिहार में पांच, ओडिशा में चार और हरियाणा में दो सीटे हैं जहां चुनाव होगा। इन द्विवार्षिक चुनावों में बिहार के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार और भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा के लिए चुने जाने की पूरी संभावना है। 10 राज्यों में खाली हुई 37 सीटों के लिए कुल 40 उम्मीदवारों ने अपना नामांकन दाखिल किया था। नाम वापसी के बाद, अब बिहार, ओडिशा और हरियाणा में एक-एक सीट के लिए कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद है। 11 सीटों के लिए अब कुल 14 उम्मीदवार चुनावी मैदान में बचे हैं। भाजपा ने नियुक्त किए केंद्रीय पर्यवेक्षक भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोमवार (9 मार्च) को बिहार, हरियाणा और ओडिशा में राज्यसभा चुनाव के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की एक अधिसूचना जारी की। बिहार: केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा और छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा। हरियाणा: गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी। ओडिशा: महाराष्ट्र के मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले। राज्यों में चुनावी समीकरण और कड़ा मुकाबला बिहार (5 सीटें) बिहार में एक सीट के लिए दिलचस्प मुकाबला देखने को मिलेगा क्योंकि राजद (RJD) ने व्यवसायी से राजनेता बने अपने मौजूदा सांसद अमरेंद्र धारी सिंह को फिर से उम्मीदवार बनाया है। एनडीए के उम्मीदवार: केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर (हैट्रिक की कोशिश में), रालोमो (RLM) अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा (लगातार दूसरे कार्यकाल की उम्मीद में) और भाजपा के प्रदेश महासचिव शिवेश कुमार अपना संसदीय पदार्पण कर रहे हैं। नीतीश कुमार का ऐतिहासिक कदम: नीतीश कुमार ने पिछले सप्ताह राज्यसभा जाने के अपने फैसले की घोषणा की थी, जिससे राज्य के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री (20 वर्ष) के रूप में उनका कार्यकाल समाप्त हो रहा है। राजद का समीकरण: राजद के पास 25 विधायक हैं और कांग्रेस-वाम दलों सहित महागठबंधन के 10 अन्य विधायकों का समर्थन है। पार्टी एआईएमआईएम (AIMIM) और बसपा (BSP) की मदद से छह वोटों की अपनी कमी को पूरा करने की उम्मीद कर रही है। बिहार विधानसभा सचिव ख्याति सिंह के अनुसार, छह उम्मीदवारों में से किसी ने भी अपना नामांकन वापस नहीं लिया, जिसके कारण राज्य में एक दशक से अधिक समय में पहली बार मतदान की आवश्यकता पड़ रही है। ओडिशा (4 सीटें) ओडिशा में भी एक सीट के लिए मुकाबला तय है। भाजपा उम्मीदवार: प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल और मौजूदा राज्यसभा सांसद सुजीत कुमार। बीजद उम्मीदवार: संतरूप मिश्रा और प्रख्यात यूरोलॉजिस्ट डॉ. दातेश्वर होता। भाजपा के समर्थन से दिलीप रे ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर पर्चा भरा है, जिससे यहां क्रॉस-वोटिंग की संभावना बढ़ गई है। हरियाणा (2 सीटें) हरियाणा में भी एक सीट के लिए कड़ा मुकाबला होना है, जहां पहले भी क्रॉस-वोटिंग का इतिहास रहा है। कांग्रेस के पास 37 विधायक हैं और एक सीट जीतने के लिए विपक्षी पार्टी को केवल 31 पहली पसंद वाले वोटों की आवश्यकता है। मैदान में उम्मीदवार: भाजपा से संजय भाटिया, कांग्रेस से करमवीर सिंह बौद्ध और निर्दलीय सतीश नांदल। नांदल ने 2019 में भाजपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा था और अब वह मैदान में तीसरे उम्मीदवार के रूप में उतरे हैं। विभिन्न राज्यों से निर्विरोध चुने गए उम्मीदवार चुनावों के इस दौर के बाद राज्यसभा में भाजपा की सीटें बढ़ने की उम्मीद है और वह उच्च सदन में सबसे अधिक सीटों वाली पार्टी बनी रहेगी। लोकसभा के पूर्व उपाध्यक्ष एम. थंबीदुरई और कांग्रेस के जाने-माने वकील अभिषेक मनु सिंघवी भी उन नेताओं में शामिल हैं जो उच्च सदन के लिए निर्विरोध चुने गए हैं। महाराष्ट्र (7 सीटें): सभी सात उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए। इनमें सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के छह और विपक्षी महाविकास अघाड़ी के उम्मीदवार शरद पवार शामिल हैं। केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले, भाजपा नेता विनोद तावड़े, रामराव वडकुटे (भाजपा), नागपुर की पूर्व मेयर माया इवनाते (भाजपा), एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना की ज्योति वाघमारे और पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे पार्थ पवार निर्विरोध निर्वाचित हुए। पश्चिम बंगाल (5 सीटें): सत्तारूढ़ टीएमसी (TMC) के चार उम्मीदवार – बाबुल सुप्रियो, पश्चिम बंगाल के पूर्व डीजीपी राजीव कुमार, सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी और अभिनेत्री कोयल मल्लिक निर्विरोध चुने गए। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राहुल सिन्हा भी निर्विरोध जीते। असम (3 सीटें): सत्तारूढ़ एनडीए के तीन उम्मीदवार- जोगेन मोहन और तेरश गोवाला के साथ-साथ यूपीपीएल (UPPL) के प्रमोद बोरो- निर्विरोध निर्वाचित हुए। तेलंगाना (2 सीटें): कांग्रेस उम्मीदवार अभिषेक सिंघवी और वेम नरेन्दर रेड्डी निर्विरोध चुने गए। तमिलनाडु (6 सीटें): सभी छह उम्मीदवार निर्विरोध जीते। अन्नाद्रमुक (AIADMK) के मौजूदा सांसद एम. थंबीदुरई, पीएमके नेता अंबुमणि रामदास, सत्तारूढ़ द्रमुक (DMK) के तिरुची शिवा और जे कॉन्स्टेंटाइन रवींद्रन, कांग्रेस के एम क्रिस्टोफर तिलक और डीएमडीके के कोषाध्यक्ष एल.के. सुधीश निर्वाचित हुए। छत्तीसगढ़ (2 सीटें): भाजपा की लक्ष्मी वर्मा और कांग्रेस की फूलो देवी नेताम निर्विरोध जीतीं, क्योंकि दो सीटों के लिए केवल यही दो उम्मीदवार मैदान में थीं। हिमाचल प्रदेश (1 सीट): मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के करीबी विश्वासपात्र कांग्रेस उम्मीदवार अनुराग शर्मा निर्विरोध निर्वाचित हुए।  

लाइन बिछी पर पानी नहीं आया: भागीरथपुरा में बढ़ा जल संकट

इंदौर देश के सबसे स्वच्छ और मध्य प्रदेश के आर्थिक नगर इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से अबतक 36 लोग जान गवा चुके हैं। इलाके के बड़े हिस्से में नगर निगम ने नर्मदा लाइन बिछा दी है, लेकिन फिर भी रहवासियों को जलसंकट से जूझना पड़ रहा है। नई लाइन से ज्यादातर रहवासी अपनी हौज में कनेक्शन नहीं ले पाए हैं। नीले पाइपों के जरिए वे हौज भर रहे हैं। इस कारण उन्हें जलसंकट झेलना पड़ रहा है। दरअसल नई लाइन से कनेक्शन लेने के लिए रहवासियों को हौज के आसपास खुदाई करना होगी। हौज तक पाइप लाने के लिए आंगन में भी खुदाई होगी। इसमें काफी पैसा खर्च होता है, इससे रहवासी बच रहे हैं। कई घरों में अस्थाई पाइपों से पानी पहुंचाया जा रहा है। टैंकरों से भी पहुंचाया जा रहा जल जिन इलाकों में नई लाइन नहीं बिछी, वहां टैंकरों से पानी पहुंचाया जा रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी उन लोगों को है, जो संकरी गलियों में रहते हैं। वहां टैंकर भी नहीं पहुंच पा रहे हैं। रहवासी मदन यादव ने कहा कि बस्ती के लोगों को जलसंकट का सामना करना पड़ रहा है।   नए कनेक्शन नहीं ले पाए कई लोग कई लोग नई लाइनों से कनेक्शन नहीं ले पाए हैं। अस्थाई कनेक्शन लेने की वजह से फिर लाइन में गंदगी जाने का खतरा बना रहेगा। अभी भी कई गलियों में खुदाई चल रही है और सड़कें खराब पड़ी हैं। लोग सड़कों के पेंचवर्क की मांग भी कर रहे हैं।   बता दें कि, इंदौर के भागीरथपुरा में दो माह पहले डायरिया और हैजा फैलने से एक हजार से ज्यादा लोग बीमार हो गए थे। साढ़े चार सौ से ज्यादा लोगों को भर्ती किया गया था और 36 लोगों की मौत हो चुकी है। इसका मामला कोर्ट में भी है। कोर्ट ने जांच के लिए एक आयोग गठित किया है। आयोग ने लोगों से दूषित पेयजल कांड को लेकर साक्ष्य भी मंगाए हैं।