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रीड हेस्टिंग्स का बड़ा फैसला: नेटफ्लिक्स से पूरी तरह अलग होने का ऐलान

ओवर द टॉप (OTT) इंडस्ट्री के दिग्गज प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स के को-फाउंडर रीड हेस्टिंग्स ने इस्तीफे का ऐलान कर दिया है. आने वाले जूम महीने में उनके चेयरमैन पद का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, जिसके बाद वह कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स से भी इस्तीफा दे देंगे. इसकी जानकारी खुद कंपनी की तरफ से दी गई है. को-फाउंडर इस्तीफे के बाद लोगों की भलाई के लिए काम करना चाहते हैं. हालांकि वह क्या काम होगा, वो तो आने वाले दिनों में ही पता चलेगा. साल 2023 में भी उन्होंने सीईओ पद से इस्तीफा दिया था, जो काफी चर्चा में रह चुका है. रीड हेस्टिंग ने 1997 में अपने दोस्त और सह-संस्थापक मार्क रैंडोल्फ के साथ इस प्लेटफॉर्म की शुरुआत की थी. इसके बाद साल 2023 तक यानी करीब 20 साल तक उन्होंने नेटफ्लिक्स की जिम्मेदारी संभाली. इसके बाद हेस्टिंग ने सीईओ पद से इस्तीफा दे दिया. रीड हेस्टिंग ने कहा रीड हेस्टिंग ने कहा कि Netflix में मेरा असली योगदान कोई एक फैसला नहीं था. असल में यह मेंबर्स की खुशी पर फोकस करना और एस ऐसे कल्चर को बनाना, जिसे लोग आगे बेहतर बना सकें. नेटफ्लिक्स क्या है? नेटफ्लिक्स, असल में एक वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म है. अब यह इंटरनेट के माध्यम से काम करता है, जबकि शुरुआत DVD के जरिए हुई थी. अब नेटफ्लिक्स वेब सीरीज, टीवी शो और डॉक्यूमेंट्रीज आदि उपलब्ध कराता है और यह प्लेटफॉर्म दुनियाभर में पॉपुलर है. कंपनी अपने इस प्लेटफॉर्म को सब्सक्रिप्शन बेस्ड सर्विस के रूप में देती है. भारत समेत दुनियाभर में इसके करोड़ों यूजर्स हैं. भारत में टीवी के लिए शुरुआती वर्जन 199 रुपये का है, जो विज्ञापन के साथ आता है. आज यह 190 से अधिक देशों में उपलब्ध है. OTT प्लेटफॉर्म क्या होते हैं? ओवर द टॉप (OTT), असल में वे प्लेटफॉर्म होते हैं, जो इंटरनेट के जरिए सीधे स्मार्टफोन, टीवी, लैपटॉप और टैबलेट आदि पर वीडियो कंटेंट स्ट्रीमिंग की सुविधा देते हैं. इसमें नेटफ्लिक्स, प्राइम वीडियो, जियो हॉटस्टार, जी5 आदि का नाम शामिल है.

बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार मई के पहले सप्ताह में, 70% पुराने चेहरे रहेंगे

पटना  बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल का विस्तार मई के पहले सप्ताह में होगा। यह विस्तार पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजे आने के बाद होगा। चुनावों के नतीजे 4 मई को आएंगे। हालांकि संभावना यही है कि बिहार का नया मंत्रिमंडल कोई खास सरप्राइज देने वाला नहीं होगा। कैबिनेट में करीब 70 प्रतिशत वही चेहरे होंगे जो नीतीश कुमार की पिछली सरकार के मंत्रिमंडल में थे। बीजेपी क्यों कर रही 5 विधानसभा चुनावों के नतीजों का इंतजार? बताया जाता है कि पश्चिम बंगाल का विधानसभा चुनाव भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के लिए सबसे खास है। इस चुनाव में दो चरणों में 23 और 29 मई को मतदान होना है। इससे पहले बीजेपी के तमाम बड़े नेता बंगाल में चुनाव प्रचार में जुटे हैं। यानी इस महीने बीजेपी के नेता फुरसत में नहीं हैं। दूसरी तरफ बिहार में पहली बार बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए की सरकार बनी है। वह सरकार के मंत्रिमंडल के विस्तार के बाद होने वाले शपथ समारोह को भव्य बनाना चाहती है। बीजेपी चाहती है कि शपथ समारोह में पार्टी के सभी वरिष्ठ नेता मौजूद रहें। यही कारण है कि वह पश्चिम बंगाल सहित असम, तमिलनाडु, केरल और पुद्दुचेरी के विधानसभा चुनावों के नतीजे आने का इंतजार कर रही है। उसे इस चुनाव में असम के साथ बंगाल में भी बीजेपी का परचम लहराने की उम्मीद है। इसी आशा में वह बिहार के शपथ समारोह में दोहरा जश्न मनाना चाहती है। नई कैबिनेट में 70 प्रतिशत पुराने चेहरे दिखने के आसार बिहार में सम्राट चौधरी की नई सरकार के मंत्रिमंडल का विस्तार 4 मई के बाद होने के आसार हैं। संभावना यही है कि बिहार सरकार के इस नए मंत्रिमंडल में 70 प्रतिशत मंत्री वही होंगे, जो इससे पहले नीतीश कुमार सरकार की कैबिनेट में थे। बताया जाता है कि शेष करीब 30 फीसदी मंत्री जातीय समीकरणों और क्षेत्रीय संतुलन को साधते हुए बनाए जा सकते हैं। पिछली सरकार के कई मंत्रियों के बदल सकते हैं विभाग बिहार सरकार में पिछली सरकार के मंत्रियों में से कई के विभाग बदले जा सकते हैं। उनमें से कई को अधिक महत्वपूर्ण विभाग दिए जा सकते हैं। बताया जाता है कि स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा, जल संसाधन और वित्त जैसे विभाग पुराने मंत्रियों को ही दिए जा सकते हैं। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी के मुताबिक कैबिनेट में विस्तार पर अंतिम निर्णय बैठक में होगा। सम्राट चौधरी का कहना है कि बिहार में अब मोदी और नीतीश मॉडल चलेगा। उन्होंने अब नीतीश मॉडल के साथ पीएम मोदी का भी नाम जोड़ दिया है। पूर्व में सिर्फ नीतीश मॉडल की बात कही जाती रही थी। सत्ता के बंटवारे का समीकरण बताया जाता है कि नए मंत्रिमंडल में बीजेपी की प्रमुख सहयोगी पार्टी जनता दल यूनाईटेड ( जेडीयू ) से ज्यादातर मंत्री पुराने ही होंगे। बीजेपी के कोटे से उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम), चिराग पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी- रामविलास (एलजेपी-आर) और जीतनराम मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के विधायकों को मंत्री बनाया जाएगा। एलजेपी-आर को दो, आरएलएम को एक और ‘हम’ को एक मंत्री पद मिल सकता है। बताया जाता है कि सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने वाले मंत्रियों में से किसी को भी दो से अधिक विभाग नहीं दिए जाएंगे।  

राज्यसभा के उपसभापति बने हरिवंश, पीएम मोदी की उपस्थिति में हुआ चुनाव

नई दिल्ली राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह चुने गई हैं. इतिहास में यह पहली बार है जब किसी को भी लगातार तीसरी बार बिना किसी विरोध के राज्यसभा का उपसभापति चुना गया है.  इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी खुद मौजूद थे. राजनीति में कई बार ऐसे मौके आते हैं जब सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव की जगह सहमति नजर आती है. राज्यसभा के उपसभापति पद का चुनाव ऐसा ही एक पल लेकर आया, जहां बिना किसी मुकाबले के फैसला हो गया. हरिवंश नारायण सिंह का लगातार तीसरी बार इस पद पर चुना जाना सिर्फ एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि सदन की कार्यशैली और राजनीतिक समीकरणों का संकेत भी है. दिलचस्प यह रहा कि इस अहम मौके पर नरेंद्र मोदी खुद सदन में मौजूद रहे, जिससे इस चुनाव की अहमियत और बढ़ गई।  बिना विपक्षी उम्मीदवार के चुनाव जीतना किसी भी संसदीय प्रक्रिया में एक खास स्थिति होती है. यह या तो राजनीतिक रणनीति का हिस्सा होता है या फिर सहमति की मजबूरी. इस बार भी ऐसा ही देखने को मिला, जब विपक्ष ने कोई नामांकन दाखिल नहीं किया और राज्यसभा में उपसभापति का चुनाव लगभग तय हो गया. इससे यह भी साफ हुआ कि मौजूदा राजनीतिक माहौल में सत्ता पक्ष की पकड़ मजबूत बनी हुई है।  तीसरी बार उपसभापति बने हरिवंश, विपक्ष ने नहीं उतारा उम्मीदवार     हरिवंश नारायण सिंह को राज्यसभा का उपसभापति तीसरी बार चुना गया है. उन्हें इस बार निर्विरोध चुना गया, क्योंकि विपक्ष की ओर से कोई भी उम्मीदवार मैदान में नहीं उतरा. निर्धारित समय सीमा तक कोई नामांकन नहीं आने के कारण उनका चयन लगभग तय हो गया था।      इस चुनाव के लिए कुल पांच प्रस्ताव दाखिल किए गए थे. इनमें जगत प्रकाश नड्डा, निर्मला सीतारमण और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने उनका नाम आगे बढ़ाया. यह प्रस्ताव विभिन्न दलों के नेताओं द्वारा समर्थित थे, जिससे उनकी उम्मीदवारी को व्यापक समर्थन मिला।      संसदीय परंपरा के अनुसार, इन प्रस्तावों को सदन में पेश किया जाएगा और वॉइस वोट के जरिए मंजूरी दी जाएगी. एक प्रस्ताव के पारित होते ही बाकी प्रस्ताव स्वतः समाप्त हो जाते हैं. ऐसे में यह प्रक्रिया औपचारिकता भर रह जाती है, लेकिन इसकी राजनीतिक अहमियत कम नहीं होती।      इससे पहले हरिवंश नारायण सिंह को 2018 में पहली बार इस पद के लिए चुना गया था और 2020 में उन्हें दूसरी बार मौका मिला. अब तीसरी बार इस पद पर उनकी वापसी उनके अनुभव और स्वीकार्यता को दर्शाती है।      हरिवंश नारायण सिंह एक बार फिर राज्यसभा के सदस्य बने हैं. शुक्रवार को उन्होंने बतौर राज्यसभा सांसद शपथ ली. बीते कई वर्षों से हरिवंश नारायण सिंह राज्यसभा के उपसभापति रहे हैं. उनका कार्यकाल पूरा होने पर उन्हे राज्यसभा के लिए नॉमिनेट किया गया है. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी कर इसकी जानकारी दी थी।      मनोनीत किए जाने के उपरांत शुक्रवार को उन्होंने राज्यसभा सदस्य के तौर पर शपथ ली. राज्यसभा में यह उनका तीसरा कार्यकाल है. प्रख्यात पत्रकार रहे हरिवंश का यह नया कार्यकाल वर्ष 2032 तक चलेगा. शुक्रवार को सामने आई अधिसूचना में बताया गया था कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 80 के खंड (3) के साथ पठित खंड (1) के उपखंड (क) के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए राष्ट्रपति ने हरिवंश को राज्यसभा के लिए नामित किया है. पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के राज्यसभा से हाल ही में रिटायर होने के बाद संसद के उच्च सदन में यह एक सीट खाली हो हुई थी।  गौरतलब है कि संविधान के अनुसार राष्ट्रपति राज्‍यसभा में 12 सदस्यों को नामित या मनोनीत कर सकती हैं. राज्यसभा के ये सदस्‍य साहित्‍य, विज्ञान, कला और समाज सेवा जैसे क्षेत्रों में विशेष ज्ञान या अनुभव के आधार पर मनोनीत किए जाते हैं. इससे पहले नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने हरिवंश नारायण सिंह राज्यसभा सांसद बनाया था. लेकिन इस बार जेडीयू ने उन्हें उम्मीदवार नहीं बनाया और हरिवंश को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा राज्यसभा सांसद मनोनीत किया गया।  राज्यसभा में हरिवंश का कार्यकाल 9 अप्रैल को खत्म हो चुका था. 10 अप्रैल से उनका नया कार्यकाल शुरू हुआ है. हरिवंश को पहली बार जेडीयू ने अप्रैल 2014 में बिहार से पहली बार राज्यसभा में भेजा था. 9 अगस्त 2018 को उन्हें राज्यसभा का उपसभापति बनाया गया. गौरतलब है कि शुक्रवार को ही नीतीश कुमार ने भी राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली. नई दिल्ली में राज्यसभा के सभापति व उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने उन्हें राज्यसभा सांसद के तौर पर शपथ दिलाई।  इस मौके पर राज्यसभा में नेता सदन व केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन, कांग्रेस के जयराम रमेश, जेडीयू व भाजपा नेता मौजूद रहे. नीतीश कुमार के इस शपथग्रहण के साथ ही बिहार की सियासत में भी एक ऐतिहासिक बदलाव की शुरुआत हो गई है।  गौरतलब है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्य विधान परिषद के सदस्य थे. लेकिन राज्यसभा के लिए निर्वाचन के बाद उन्होंने 30 मार्च को विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था. नीतीश कुमार बीते मार्च महीने में संसद के उच्च सदन के लिए बिहार से निर्वाचित हुए थे।  हरिवंश नारायण सिंह का निर्विरोध चुना जाना क्या दर्शाता है? यह दिखाता है कि सदन में उनके प्रति व्यापक स्वीकार्यता है. जब विपक्ष उम्मीदवार नहीं उतारता, तो इसका मतलब होता है कि या तो वह मुकाबले की स्थिति में नहीं है या फिर वह इस पद को लेकर सहमति बनाना चाहता है. यह राजनीतिक रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है, जहां विपक्ष किसी बड़े मुद्दे पर फोकस रखना चाहता है. और लगातार तीसरी बार चुना जाना अपने आप में इतिहास है।  उपसभापति का पद कितना महत्वपूर्ण होता है? राज्यसभा के उपसभापति का पद बेहद अहम होता है. यह व्यक्ति सभापति की अनुपस्थिति में सदन की कार्यवाही चलाता है. सदन में अनुशासन बनाए रखना, बहस को सुचारु रूप से आगे बढ़ाना और नियमों का पालन सुनिश्चित करना इसकी जिम्मेदारी होती है. इसलिए इस पद पर अनुभवी और संतुलित व्यक्ति का होना जरूरी माना जाता है।  क्या इस चुनाव में कोई राजनीतिक संदेश छिपा है? हां, यह चुनाव कई संकेत देता है. एक तरफ यह सत्ता पक्ष की मजबूती … Read more

पंजाब में आंधी-बारिश का अलर्ट, 15 शहरों में तापमान 35 डिग्री पार, बठिंडा सबसे गर्म

बठिंडा पंजाब और चंडीगढ़ में गर्मी का असर दिखने लगा है। तापमान 40 डिग्री तक पहुंच गया है। वहीं वेस्टर्न डिस्टरबेंस पहाड़ों पर पहुंच गया है। इस वजह से शुक्रवार को (17 अप्रैल को) आंधी, तूफान और बिजली चमकने का येलो अलर्ट मौसम विभाग ने जारी किया है। कुछ जिलों में बारिश की भी संभावना है। पिछले दिन की तुलना में तापमान में 1.3 डिग्री की बढ़ोतरी हुई है। यह सामान्य से 3.5 डिग्री अधिक हो गया है। सबसे अधिक तापमान 40.3 डिग्री बठिंडा में रहा है।  चंडीगढ़ 38.1 डिग्री तापमान रहा , जो कि सामान्य से 2.8°C अधिक है। वहीं, गर्मी बढ़ने से बिजली की खपत बढ़ गई। यह डिमांड 7854 से अधिक बनी हुई है। सात जिलों में बारिश और आंधी मौसम विभाग के मुताबिक शुक्रवार को 7 जिलों पठानकोट, गुरदासपुर, होशियारपुर, फाजिल्का, मुक्तसर, बठिंडा और मानसा में अलग-अलग स्थानों पर तेज हवाओं (30 से 40 किमी/घंटा) के साथ गरज-चमक और बिजली गिरने की संभावना है। इन्हीं 7 जिलों के कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने की भी संभावना है।  इसके बाद 18 को मौसम साफ है, जबकि 19 को फिर से बारिश की संभावना है। राज्य में 23 अप्रैल तक किसी भी महत्वपूर्ण वर्षा की संभावना नहीं है। अधिकतम तापमान उत्तर और पूर्वी हिस्सों में 32 से 36°C के बीच रहने की संभावना है, जबकि राज्य के बाकी हिस्सों में यह 36 से 40°C के बीच रह सकता है। इस सप्ताह राज्य में अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। लुधियाना में सबसे अधिक तापमान बढ़ा लुधियाना में सबसे अधिक 4.1 डिग्री की बढ़ोतरी के साथ 39.6 डिग्री तापमान रिकॉर्ड हुआ।  मौसम प्रणाली का असर मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार एक पश्चिमी विक्षोभ ऊपरी वायुमंडल में सक्रिय है, जो लगभग 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित है। इसके अलावा उत्तर हरियाणा के आसपास निचले स्तर पर एक चक्रवाती सिस्टम बना हुआ है। उत्तर-पश्चिम भारत के ऊपर ऊंचाई पर तेज पश्चिमी हवाएं भी चल रही हैं, जिनकी गति लगभग 100 नॉट्स तक है। आगे कैसा रहेगा मौसम मौसम विभाग के निदेशक सुरेंद्र पाल के अनुसार 17 अप्रैल को कुछ स्थानों पर हल्की बारिश हो सकती है। अगले दो दिनों में अधिकतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की और बढ़ोतरी होने की संभावना है। इसके बाद तापमान में ज्यादा बदलाव की उम्मीद नहीं है, लेकिन गर्मी बनी रह सकती है। राज्य का औसत अधिकतम तापमान सामान्य से लगभग 3.5 डिग्री अधिक रहा, जबकि सबसे अधिक तापमान बठिंडा में 40.4 डिग्री दर्ज किया गया। अमृतसर में 38.0 डिग्री (सामान्य से 3.1 डिग्री अधिक), पटियाला में 39.5 डिग्री (सामान्य से 3.3 डिग्री अधिक) और चंडीगढ़ शहर में 38.1 डिग्री (सामान्य से 2.8 डिग्री अधिक) तापमान रिकॉर्ड किया गया। इसके अलावा फरीदकोट में 39.5 डिग्री, भाखड़ा बांध (रूपनगर) में 37.7 डिग्री, रोपड़ में 36.9 डिग्री, पठानकोट में 36.7 डिग्री, मोहाली और एसबीएस नगर (बलोवाल सौंखड़ी) में 36.6 डिग्री, होशियारपुर में 35.9 डिग्री से 36.2 डिग्री के बीच, थीन डैम (पठानकोट) में 35.8 डिग्री और गुरदासपुर में 35.5 डिग्री तापमान दर्ज किया गया।  कुल मिलाकर राज्य के अधिकांश क्षेत्रों में तापमान सामान्य से काफी अधिक रहा। इस तरह की मौसम की स्थिति इस समय एक पश्चिमी विक्षोभ ऊपरी हवा के हिस्सों में सक्रिय है। यह लगभग 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई पर फैला हुआ है और 58° पूर्वी देशांतर के आसपास तथा 32° उत्तरी अक्षांश के उत्तर की ओर स्थित है। उत्तर हरियाणा और आसपास के इलाकों में करीब 1.5 किलोमीटर की ऊँचाई पर हवा का एक घूमता हुआ सिस्टम बना हुआ है। इसके अलावा उत्तर-पश्चिम भारत के ऊपर बहुत उंचाई (लगभग 13.5 किलोमीटर) पर तेज पश्चिमी हवाओं की धारा चल रही हैं, जिसमें हवा की रफ्तार करीब 100 नॉट्स तक है।  दो से तीन डिग्री तापमान बढ़ेगा मौसम विभाग के डायरेक्टर सुरेंद्र पाल के मुताबिक 17 तारीख को कुछ जगहों पर हल्की बारिश होने की संभावना है। अगले 2 दिनों में अधिकतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हो सकती है। इसके बाद तापमान में ज्यादा बदलाव की संभावना नहीं है।

आज का ज्योतिषीय प्रभाव: सूर्य-चंद्र युति और शनि गोचर से बदलेगा भाग्य

आज का दिन ज्योतिष के नजरिए से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इस दिन अमावस्या के साथ ग्रहों की चाल में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा. द्रिक पंचांग के अनुसार, आज दोपहर 12 बजकर 2 मिनट पर चंद्रमा मेष राशि में प्रवेश करेगा, जहां सूर्य के साथ उसकी युति बनेगी. इसके अलावा आज शाम 4 बजकर 05 मिनट पर  शनि उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के चौथे चरण में जाएंगे. यह विशेष संयोग कुछ राशियों के लिए शुभ संकेत लेकर आ रहा है. ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, इन योगों का असर करियर, धन और पारिवारिक जीवन पर सकारात्मक रूप से पड़ सकता है. खासतौर पर 4 राशियों को इसका सबसे ज्यादा लाभ मिलने की संभावना है. मेष राशि: रुके काम पूरे, करियर में मजबूती मेष राशि वालों के लिए यह अमावस्या शुभ संकेत दे रही है. सूर्य और चंद्रमा की युति आपकी ही राशि में बन रही है, जिससे अटके हुए काम पूरे होने के योग बन रहे हैं. व्यापार में बड़ा अवसर मिल सकता है और नौकरी में आपकी छवि मजबूत होगी. आर्थिक स्थिति सुधरेगी और घर में शांति बनी रहेगी. उपाय: जरूरतमंदों को दान करें. वृषभ राशि: करियर में ग्रोथ, सेहत में सुधार वृषभ राशि के जातकों के लिए समय अनुकूल नजर आ रहा है. आपको करियर में अच्छे मौके मिल सकते हैं और आपकी मेहनत रंग लाएगी. धन लाभ के संकेत हैं और अगर आप किसी पुरानी बीमारी से परेशान थे तो उसमें भी राहत मिल सकती है. उपाय: पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाएं. तुला राशि: सपने होंगे पूरे, मिलेगा संपत्ति लाभ तुला राशि वालों के लिए यह समय खुशियां लेकर आ सकता है. आपकी कोई बड़ी इच्छा पूरी हो सकती है. प्रॉपर्टी से जुड़े मामलों में लाभ होगा और नया घर या वाहन खरीदने का मौका मिल सकता है. परिवार में खुशी का माहौल रहेगा और रिश्ते मजबूत होंगे. उपाय: शनि देव के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाएं. धनु राशि: आत्मविश्वास बढ़ेगा, प्रमोशन के योग धनु राशि के लोगों के लिए यह समय उत्साह बढ़ाने वाला रहेगा. आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा और काम में सफलता मिलेगी. व्यापार में फायदा होगा और नौकरी करने वालों को प्रमोशन या सैलरी बढ़ने के संकेत हैं. मानसिक तनाव कम होगा और परिवार के साथ अच्छा समय बिताएंगे. उपाय: शाम के समय दीपदान करें.

सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम छोर तक पहुंचाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता- मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े

जहां गूंजता था लालातंक वहां लगी बाच चौपाल सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम छोर तक पहुंचाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता- मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े रचनात्मक गतिविधियों से बाल आयोग अध्यक्षा डॉ वर्णिका ने जानी बच्चों की समस्याएं बच्चों की समस्याओं का हुआ त्वरित निराकरण बाल चौपाल में दिखा नया बस्तर, जागरूक और आत्मविश्वासी बच्चे रायपुर  छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल की पहचान अब तेजी से बदलती नजर आ रही है। एक समय था जब यहां नक्सल आतंक का साया मंडराता था और लोगों के जीवन में भय और असुरक्षा का माहौल था, लेकिन आज उसी धरती पर बच्चों की खिलखिलाहट गूंज रही है। उत्तर बस्तर कांकेर जिले के दुर्गकोंडल क्षेत्र में आयोजित “बाल चौपाल” इस सकारात्मक बदलाव का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया है। यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उस बदलती सोच और प्रयासों का प्रतीक है, जिसके जरिए सुदूर और संवेदनशील क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। बस्तर में जहां कभी डर और सन्नाटा था, आज वहां बच्चों की मुस्कान और उम्मीदों की गूंज सुनाई दे रही है छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा के कार्यकाल का एक वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में  इस विशेष बाल चौपाल का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े और हस्तशिल्प विकास बोर्ड की अध्यक्ष शालिनी राजपूत भी शामिल हुईं। इस दौरान बच्चों और स्थानीय ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं, जरूरतों और आकांक्षाओं को समझने का प्रयास किया गया। यह पहल इस बात को दर्शाती है कि अब शासन केवल कागजी योजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर पहुंचकर वास्तविक स्थितियों का आकलन कर समाधान निकालने की दिशा में सक्रिय है। बाल चौपाल के जरिए सरकार ने सुदूर बस्तर में पहुंचकर बच्चों और समाज की आवाज को सीधे सुना कार्यक्रम के दौरान बच्चों को उनके अधिकारों, सुरक्षा और आत्मरक्षा के प्रति जागरूक किया गया। खासतौर पर “गुड टच और बैड टच” जैसे संवेदनशील विषय को बेहद सरल और सहज तरीके से समझाया गया। बच्चों ने इस विषय को गंभीरता से समझा और अपनी जागरूकता का परिचय भी दिया। यह इस बात का संकेत है कि अब बस्तर के बच्चे भी अपनी सुरक्षा और अधिकारों के प्रति पहले से अधिक सजग हो रहे हैं, जो एक सकारात्मक बदलाव का संकेत है। खेल-खेल में नैतिक शिक्षा से बच्चों को जोड़ा बाल चौपाल में बच्चों को खेल-खेल के माध्यम से नैतिक शिक्षा भी दी गई। इस अनोखे तरीके से बच्चों ने अनुशासन, ईमानदारी, सहयोग और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे मूल्यों को आसानी से समझा। शिक्षा को रोचक और आनंददायक बनाकर बच्चों को सीखने के लिए प्रेरित करना इस कार्यक्रम की खासियत रही। इसके साथ ही बच्चों को चाइल्ड हेल्पलाइन के बारे में भी जानकारी दी गई और उन्हें बताया गया कि किसी भी समस्या की स्थिति में वे किस तरह मदद प्राप्त कर सकते हैं। कई बच्चों ने यह भी साझा किया कि उन्होंने पहले हेल्पलाइन का उपयोग किया है, जो इस बात का प्रमाण है कि जागरूकता अभियान अब प्रभावी हो रहे हैं। हालांकि इस दौरान एक अहम समस्या भी सामने आई, जो डिजिटल सुविधाओं की कमी से जुड़ी थी। दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों को अभी भी डिजिटल शिक्षा और संसाधनों की पर्याप्त सुविधा नहीं मिल पा रही है। इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) से समन्वय कर आगामी सत्र से बच्चों को डिजिटल रूप से जोड़ने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे, ताकि वे भी आधुनिक शिक्षा से जुड़ सकें। डॉ वर्णिका ने कहा कि दुर्गकोंडल में आयोजित यह बाल चौपाल केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि बदलते बस्तर की नई कहानी है। यह दर्शाता है कि जब सरकार, प्रशासन और समाज मिलकर काम करते हैं, तो सबसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी सकारात्मक बदलाव संभव है। आज बस्तर में बच्चों की हंसी और उनके सपनों की चमक इस बात का प्रमाण है कि यह क्षेत्र अब भय से निकलकर विकास, शिक्षा और खुशहाली की ओर तेजी से बढ़ रहा है। मुख्यधारा में लौटे नक्सलियों के पुनर्वास केंद्र पहुंचीं मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने की मुलाकात बाल चौपाल के बाद महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाडे, बाल आयोग अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा और हस्तशिल्प बोर्ड अध्यक्ष शालिनी राजपूत ने पुनर्वास केंद्र में रह रहे लोगों से संवाद कर यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि वे समाज में सम्मानजनक जीवन जी सकें। इस पहल का उद्देश्य न केवल उन्हें मुख्यधारा से जोड़ना है, बल्कि उनके जीवन में स्थायित्व और सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है। यहां उन्होंने मुख्यधारा में वापस लौटे नक्सलियों और उनके परिवारों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं को जाना।

मुख्यमंत्री का आदेश: जन समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करें अधिकारी

जन समस्याओं का त्वरित समाधान कराएं अधिकारी : मुख्यमंत्री लगातार दूसरे दिन जनता दर्शन में 200 लोगों की समस्याएं सुनीं सीएम योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री ने लोगों को दिया भरोसा, हर समस्या का प्रभावी निस्तारण कराएगी सरकार गोरखपुर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर प्रवास के दौरान लगातार दूसरे दिन, शुक्रवार सुबह गोरखनाथ मंदिर में आयोजित जनता दर्शन में लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं।  मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनता की समस्याओं पर त्वरित संवेदनशीलता दिखाएं। समस्या से जुड़ी शिकायत पर तेजी से कार्रवाई करते हुए गुणवत्तापूर्ण व संतुष्टिपरक समाधान सुनिश्चित कराएं। जनता दर्शन कार्यक्रम में पहुंचे लोगों को मुख्यमंत्री ने आश्वस्त करते हुए कहा, “घबराइए मत। सरकार, आपकी हर समस्या पर प्रभावी समाधान सुनिश्चित कराएगी।”  शुक्रवार सुबह गोरखनाथ मंदिर परिसर में, महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के बाहर आयोजित जनता दर्शन के दौरान सीएम योगी करीब 200 लोगों से मिले। उनके पास जाकर उनकी बातें सुनीं। उनके प्रार्थना पत्र अपने हाथ में लेकर उसका अवलोकन कर समस्या/शिकायत का संज्ञान लिया। फिर, अलग-अलग मामलों से जुड़ी समस्याओं के निस्तारण के लिए उन्होंने संबंधित प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों को प्रार्थना पत्र संदर्भित और हस्तगत किया। साथ ही निर्देशित किया कि सभी समस्याओं का निस्तारण समयबद्ध, निष्पक्ष और संतुष्टिप्रद होना चाहिए।  जनता दर्शन में हर बार की तरह शुक्रवार को भी कुछ लोग इलाज के लिए आर्थिक मदद की गुहार लेकर आए थे। मुख्यमंत्री ने उन्हें भरोसा दिया कि धन के अभाव में किसी का इलाज नहीं रुकेगा। उन्होंने अफसरों को निर्देश दिया कि जो भी जरूरतमंद हैं, प्रशासन उनके उच्च स्तरीय इलाज का इस्टीमेट शीघ्रता से बनवाकर उपलब्ध कराए। इस्टीमेट मिलते ही सरकार धन उपलब्ध कराएगी। कुछ महिलाओं ने आवास की समस्या मुख्यमंत्री को बताई। इस पर सीएम योगी ने उन्हें आश्वस्त किया कि सरकार हर जरूरतमंद को प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत पक्का आवास उपलब्ध कराने को संकल्पित हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जो भी पात्र लोग पक्के आवास की सुविधा से वंचित हैं, उन्हें इसका लाभ दिलाया जाए।

अक्षय तृतीया 2026: जानिए शुभ सपनों के संकेत और उनका धार्मिक महत्व

अक्षय तृतीया हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और शुभ पर्वों में से एक माना जाता है.  इस दिन को अक्षय कहा जाता है, जिसका अर्थ है जो कभी समाप्त न हो या जिसका कभी क्षय न हो.  यह दिन समृद्धि, सौभाग्य और शुभ फलों का प्रतीक माना जाता है.  धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन किए गए शुभ कार्य, दान, पूजा और सेवा का फल कई गुना बढ़कर मिलता है.  इसी कारण इसे अत्यंत पुण्यदायी दिन माना जाता है. इस वर्ष अक्षय तृतीया 19 अप्रैल, रविवार को मनाई जाएगी. इस अवसर पर लोग दान-पुण्य, पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यों में भाग लेते हैं ताकि जीवन में सुख, समृद्धि और सौभाग्य की वृद्धि हो सके. मान्यताओं के अनुसार, अक्षय तृतीया से पहले दिखने वाले सपनों को भी विशेष महत्व दिया जाता है.  ऐसा कहा जाता है कि इस समय देखे गए कुछ सपने भविष्य में आने वाले शुभ संकेतों की ओर इशारा कर सकते हैं. ये सपने व्यक्ति के जीवन में सुख, धन, सफलता और सकारात्मक बदलाव का संकेत माने जाते हैं. हालांकि, इन्हें निश्चित भविष्यवाणी के रूप में नहीं बल्कि एक आध्यात्मिक संकेत के रूप में देखा जाता है. अक्षय तृतीया से पहले दिखने वाले शुभ सपने 1. सोना या आभूषण देखना यदि सपने में सोना, चांदी या किसी प्रकार के आभूषण दिखाई दें, तो इसे आर्थिक समृद्धि और धन लाभ का संकेत माना जाता है. यह सपना जीवन में स्थिरता और वित्तीय सुधार की ओर इशारा करता है. 2. देवी लक्ष्मी का दर्शन सपने में कमल के फूल के साथ देवी लक्ष्मी का दिखाई देना अत्यंत शुभ माना जाता है.  यह घर में सुख-समृद्धि, बरकत और खुशहाली आने का प्रतीक होता है. यह सपना जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सौभाग्य बढ़ने का संकेत भी देता है. 3. साफ पानी या नदी देखना यदि सपने में स्वच्छ जल, बहती नदी या झरना दिखाई दे, तो इसे मानसिक शांति और जीवन में सकारात्मक बदलाव का प्रतीक माना जाता है. यह सपना दर्शाता है कि आने वाला समय शांत और संतुलित हो सकता है. 4. मंदिर या पूजा देखना सपने में मंदिर, पूजा-पाठ या धार्मिक अनुष्ठान देखना आध्यात्मिक उन्नति और नए शुभ अवसरों का संकेत माना जाता है. यह दर्शाता है कि व्यक्ति का मन धर्म और सकारात्मकता की ओर अग्रसर हो रहा है. 5. सूर्य या उजाला देखना सपने में उगता हुआ सूर्य या तेज प्रकाश दिखाई देना नए अवसरों, सफलता और जीवन में नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है.  यह आने वाले समय में प्रगति और उपलब्धियों का संकेत देता है. सपनों का महत्व क्या है? ज्योतिष शास्त्र में सपनों को केवल मानसिक कल्पना नहीं माना जाता, बल्कि कई बार इन्हें आने वाले समय की ऊर्जा और घटनाओं का संकेत भी माना जाता है. विशेष रूप से अक्षय तृतीया जैसे पावन पर्व से पहले देखे गए सपनों को अधिक महत्वपूर्ण समझा जाता है, क्योंकि इस समय सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव अधिक माना जाता है.

पटना में जदयू की अचानक बैठक, मंत्रिमंडल विस्तार पर कयास

पटना  बिहार में एक बार फिर से सियासी हलचल तेज होती हुई दिख रही है।  15 अप्रैल को सम्राट सरकार के गठन के दिन जदयू ने अपने विधायक दल की बैठक टाल दी थी। लेकिन अब अचानक से नीतीश कुमार के आवास 7 सर्कुलर रोड पर फिर से जदयू की बैठक बुला ली गई है। जदयू के विधायकों को 20 अप्रैल को पटना में हाजिर रहने को कहा गया है। जदयू विधायक दल की अचानक बुलाई गई बैठक बिहार में नीतीश कुमार के सीएम पद छोड़ने के बाद इस घटनाक्रम को अहम माना जा रहा है। हालांकि ये बताया जा रहा है कि 15 अप्रैल को जदयू विधायक दल की बैठक टाल कर उसे NDA विधायक दल की बैठक बनाया गया था। अब नई सरकार के मद्देनजर 20 अप्रैल को जदयू विधायक दल की बैठक बुलाई गई है। हालांकि इसको लेकर कई तरह के कयास भी लगाए जा रहे हैं। पहला कयास- मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर विधायक दल की मीटिंग पहला कयास ये लगाया जा रहा है कि बिहार में अभी सिर्फ सम्राट चौधरी (सीएम), विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव (डिप्टी सीएम) ही मंत्रिमंडल में हैं। ऐसे में विभागों के बंटवारे के लिए कैबिनेट विस्तार होना तय है। कहा जा रहा है कि जदयू ने मंत्रिमंडल विस्तार में अपने कोटे के मंत्रियों की लिस्ट फाइनल करने के लिए ये बैठक बुलाई है। हालांकि पुष्ट रूप से कुछ भी नहीं बताया गया है। दूसरा कयास- क्या निशांत को बड़ी जिम्मेदारी देने की तैयारी जदयू विधायक दल की बैठक को लेकर ये कयास भी लगाए जा रहे हैं कि बिहार में निशांत कुमार को बड़ी जिम्मेदारी देने की तैयारी है। लिहाजा जदयू विधायक दल की बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में निशांत कुमार को जदयू में बड़ी जिम्मेदारी देने को लेकर भी संभावना जताई जा रही है। या बैठक का कोई और ही मकसद NDA के एक सूत्र ने हमें बताया कि 'बैठक का मकसद अभी तक साफ नहीं है।' एक तरह से देखा जाए तो ये बैठक 15 नवंबर को भी हो सकती थी, उस दिन जदयू विधायक दल की मीटिंग होनी जरूरी भी थी, क्योंकि बिहार में नई सरकार आकार लेने वाली थी। लेकिन नीतीश कुमार ने इसे टाल दिया। क्यों टाला गया, अब तक इसकी ठोस वजह नहीं बताई गई है। वहीं दूसरी तरफ ये भी चर्चा है कि नीतीश कुमार कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं। हालांकि इसकी आधिकारिक तौर पर अभी कोई भी पुष्टि नहीं है।  

जनगणना 2027: अब ऑनलाइन स्व-गणना, 33 सवालों का देना होगा जवाब

पटना  बिहार में आज 17 अप्रैल से जनगणना 2027 का पहला चरण (मकान सूचिकरण) शुरू होने जा रहा है। इसमें लोग घर बैठे खुद अपनी जानकारी ऑनलाइन कर सकेंगे। पहले चरण में स्व-गणना का काम 1 मई तक चलेगा। बिहार में जनगणना 2027 में पहले 15 दिनों तक लोग ऑनलाइन पोर्टल पर खुद अपने परिवार और घर की जानकारी भर सकेंगे। इसके बाद गणनाकर्मी घर पहुंचकर दर्ज जानकारी की जांच करेंगे। यह प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल होगी। बिहार में जीविका दीदियों की ली जाएगी मदद इस पोर्टल पर परिवार के मुखिया के नाम और परिवार के किसी एक सदस्य के मोबाइल नंबर से रजिस्ट्रेशन करना होगा। रजिस्ट्रेशन के बाद नागरिकों को 33 सवालों के जवाब भरने होंगे। स्व-गणना के लिए प्रभावी जन-जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। बताया गया कि ग्रामीण क्षेत्रों में इस अभियान से सभी को जोड़ने के लिए 'जीविका दीदियों' की मदद ली जाएगी।इन सवालों में मकान की स्थिति, फर्श, दीवार और छत किससे बनी है, कितने लोग रहते हैं, परिवार के सदस्यों की संख्या, पानी, बिजली, शौचालय, रसोई, गैस कनेक्शन, इंटरनेट, मोबाइल, वाहन और दूसरी जरूरी सुविधाओं की जानकारी मांगी जाएगी। आइए आपको बताते हैं कैसे आप स्पेट-बाय स्टेप जनगणना के लिए अपनी जानकारी भर सकते हैं… पहला चरण: जनगणना के लिए जानकारी भरने के लिए रजिस्ट्रेशन – जनगणना के लिए अपनी जानकारी भरने के लिए सबसे पहले आपको सरकारी पोर्टल में लॉगिन करके एंट्री करनी होगी। – सरकारी पोर्टल पर जाएं। फिर अपने राज्य/संघ राज्य क्षेत्र का चयन करें। कैशे कोड दर्ज करें। परिवार के पंजीकरण के लिए परिवार के मुखिया का नाम, 10 अंकों का मोबाइल नंबर, ई-मेल आईडी (वैकल्पिक) दर्ज करें। परिवार के मुखिया का नाम बाद में बदला नहीं जा सकेगा। ऐसे में जो मुखिया है, उसी का नाम डालें। – प्रत्येक परिवार के लिए केवल एक मोबाइल नंबर का उपयोग किया जा सकता है। एक बार पंजीकृत होने के बाद वही मोबाइल नंबर किसी अन्य परिवार के लिए उपयोग नहीं किया जा सकता है। दूसरा चरण– सत्यापन और जगह की पहचान जनगणना के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू होने के बाद दूसरा चरण शुरू होगा। इसमें आपने जो जगह भरी है, उसका सत्यापन किया जाएगा। फिर जगह की पहचान की जाएगी। बताते हैं इसके लिए आपको क्या करना होगा.. – पोर्टल पर आपको अपनी भाषा का चयन करना होगा। पोर्टल पर पसंदीदा भाषा वाले बॉक्स में जाकर अपनी भाषा का सिलेक्शन करें। यहां भाषा चयन के बाद रजिस्ट्रेशन के लिए डाले गए मोबाइल नंबर पर ओटीपी आएगा। इस ओटीपी को साइट पर दर्ज करें। बता दें, चयनित भाषा को बाद में बदला नहीं जा सकता है। – साइट पर आगे बढ़ें और अपने जिले का चयन करें। यहां पिन कोड दर्ज करें। फिर अपने गांव, नगर या स्थानीय क्षेत्र की जानकारी भरें। – आगे बढ़ने पर आपको आपके क्षेत्र का नक्शा दिखाई देगा। इस पर अपने निवास स्थान को चिन्हित करें। इसके लिए आपको नक्शे पर दिख रहे लाल रंग के मार्क को आगे-पीछे खिसकाकर अपने मकान के सटीक जगह पर रखें और स्थान की पुष्टि करें। तीसरा चरण: डेटा दर्ज करें और पूछी गई डिटेल भरें – पूछे गए सवालों को पूरा भरें: मकानसूचीकरण और मकानों की गणना वाली प्रश्नावली भरें। प्रश्नों को समझने में आपकी सहायता के लिए टूलटिप्स, अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) और 'महत्वपूर्ण जानकारी' उपलब्ध हैं। – पूर्वालोकन एवं समीक्षा: अभी तक आपने जो जानकारी भरी है, वो यहां आपको देखने को मिलेगी। आप दर्ज की गई सभी जानकारी को अच्छे से जांच लें। – अगर दर्ज किए गए डेटा में कोई संशोधन करना है तो आपको वापस उसी सेक्शन में जाना होगा। ऐसे में अभी तक भरी जानकारी को ड्राफ्ट के रूप में सेव करें। अगर सभी जानकारी भर चुकी है और कोई संसोधन नहीं करना है तो पुष्टि करें और सबमिट करें। – पुष्टि करें और सबमिट करें पर क्लिक करके अपने डेटा का फाइनल सबमिशन करें। फाइनल सबमिशन के बाद किसी भी प्रकार का संशोधन संभव नहीं होगा। – स्व-गणना पहचान संख्या (SEID) का सृजन: पूरी डिटेल भरने के बाद जब आप फाइनल सबमिट करेंगे तो 11 अंकों की एक खास स्व-गणना पहचान संख्या (SE ID) जनरेट होगी, जो 'H' अक्षर से शुरू होती है। यह आईडी SMS और अगर आपने ईमेल आईडी दी है तो उसके जरिए आपको मिलेगी। चौथा चरण: क्षेत्रीय सत्यापन चौथे चरण में आपके मकान का क्षेत्रीय सत्पापन जनगणना कर्मी करेंगे। – जब जनगणना करने वाले कर्मी आपके घर आएं, तो उन्हें अपनी SE ID दें, जो आपको ऑनलाइन मकान की गणना करने पर मिलेगी। – SE ID मिलान का परिणाम: अगर SE ID मौजूदा रिकॉर्ड से मेल खाती है, तो आपकी जानकारी की पुष्टि कर उसे मंजूर कर लिया जाएगा। अगर SE ID का मिलान नहीं होता है तो गणनाकर्मी आपकी नई जानकारी लेकर दर्ज करेगा।