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होर्मुज में ईरानी गोलीबारी के दौरान कैप्टन आशीष ने खुद जहाज में डटे रहकर बाकी को भारत भेजा

मुंबई  होर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव बरकरार है। ईरान ने एक बार फिर जल मार्ग को बंद कर दिया और दो भारतीय जहाजों पर फायरिंग भी की। होर्मुज में भारत समेत कई देशों के जहाज फंसे हुए हैं। इन्हीं जहाजों में एक की कमान कैप्टन आशीष के कंधों पर है। 45 दिन से होर्मुज में फंसे होने के बावजूद उन्होंने मिसाल पेश की। जहाज में फंसे लोगों की जब वतन लौटने की बारी आई, तो उन्होंने कर्तव्य चुनते हुए खुद को जहाज पर डटे रखा और जहाज में 12 क्रू मेंबर को भारत रवाना किया। जब समुद्र की लहरें उग्र हों और अनिश्चितता का अंधेरा गहराने लगे, तब नेतृत्व की असली परीक्षा होती है। ऐसी ही कठिन परिस्थिति में उत्तराखंड के रुड़की निवासी कैप्टन आशीष शर्मा ने अपने निर्णयों से साबित किया कि समंदर की लहरों से बड़ी चुनौती होती है जिम्मेदारी और डर से बड़ा होता कर्तव्य। आशीष ने साहस, कर्तव्यनिष्ठा और मानवीय संवेदनाओं की प्रेरक मिसाल पेश की है। जहाज में कैप्टन आशीष के साथ अभी 12 क्रू मेंबर और फंसे हॉर्मुज जलडमरूमध्य में 45 दिनों से फंसे पोतों में एक भारतीय जहाज के कैप्टन हैं रुड़की के आशीष शर्मा। दरअसल, तनाव कुछ कम होने के बाद ईरान ने वाणिज्यिक जहाजों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोल दिया है। घर वापसी का रास्ता साफ होने पर कैप्टन आशीष के पास विकल्प था कि पहले वे खुद लौट आएं, लेकिन उन्होंने कर्तव्य को सबसे ऊपर रखते हुए खुद से पहले अपने क्रू मेंबरों की सुरक्षा को चुना। जहाज पर मौजूद 24 क्रू मेंबरों में से 12 को उन्होंने सुरक्षित वतन रवाना कर दिया, जबकि स्वयं जहाज पर डटे रहने का निर्णय लिया। ‘अंतिम साथी के घर पहुंचने तक पोस्ट नहीं छोड़ूंगा’ ‘हिन्दुस्तान’ से विशेष बातचीत में आशीष ने कहा,‘जहाज पर मौजूद हर सदस्य की सुरक्षा कैप्टन की पहली जिम्मेदारी होती है। जब तक मेरा अंतिम साथी सुरक्षित घर नहीं पहुंच जाता, मैं अपनी पोस्ट नहीं छोड़ सकता।’ उन्होंने बताया कि शेष क्रू मेंबरों की वापसी को कंपनी प्रयासरत है। सभी को भेजने के बाद वह भारत लौटेंगे। उन्होंने बताया कि जहाज को निकलने में अभी लगभग डेढ़ महीना तक लग सकता है। इस बीच आशीष ने वीडियो संदेश भेज अपने और क्रू मेंबरों के सुरक्षित होने की जानकारी दी। जिन 12 क्रू मेंबरों को भारत भेजा गया, उन्होंने रवाना होते समय अपने कैप्टन के प्रति आभार जताया। गौरतलब है कि ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से बंद किए जाने के बीच भारतीय ध्वज वाला एक तेल टैंकर इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को सफलतापूर्वक पार कर गया, जबकि कम से कम चार अन्य जहाज वापस लौट गए। जहाजों के निगरानी आंकड़ों के अनुसार, 'देश गरिमा' नामक तेल टैंकर ने शनिवार को जलडमरूमध्य पार किया। भारतीय नौवाहन निगम लिमिटेड (एससीआई) का यह टैंकर मार्च की शुरुआत से इस मार्ग को पार करने वाला भारतीय ध्वज वाला 10वां जहाज है।

तेहरान का बयान, होर्मुज में भारतीय जहाज पर फायरिंग को लेकर 10 ताज़ा अपडेट्स

नई दिल्ली ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के कारण होर्मुज स्ट्रेट से एक बार फिर जहाजों का आवाजाही बंद हो गई है. होर्मुज के रास्ते कच्चा तेल ले जा रहे भारतीय ध्वज वाले दो जहाजों पर फायरिंग की घटना ने हालात को और गंभीर बना दिया है. समुद्री सुरक्षा से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, यह घटना तब हुई जब ये जहाज इस संकरे जलमार्ग से गुजर रहे थे, जो पहले से ही क्षेत्रीय संघर्ष के चलते संवेदनशील बना हुआ है. इस घटना के बाद भारत ने तुरंत कड़ा रुख अपनाते हुए ईरान के राजदूत को तलब किया और अपने नागरिकों और समुद्री व्यापार की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता जताई।  इस बीच एक ऑडियो क्लिप भी सामने आई है, जिसमें एक भारतीय जहाज के क्रू मेंबर समुद्री अधिकारियों पर नाराजगी जताते हुए कहते सुनाई दे रहे हैं, ‘आपने मुझे रास्ता दिया और अब फायरिंग कर रहे हैं, मुझे वापस मुड़ने दीजिए.’ इस बीच ईरान की ओर से शांति का संदेश भी आया है, लेकिन जमीनी हालात और समुद्री गतिविधियां लगातार बढ़ते तनाव की ओर इशारा कर रही हैं।  होर्मुज के हालात पर 10 लेटेस्ट अपडेट्स…     होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे दो भारतीय जहाजों के पास अचानक फायरिंग शुरू हो गई. बताया गया कि ये गोलियां आसपास हो रही ‘स्मॉल आर्म्स फायरिंग’ का हिस्सा थीं, जो जहाजों तक पहुंच गईं. हालांकि किसी भी क्रू मेंबर को चोट नहीं आई.     सरकार से जुड़े सूत्रों ने स्पष्ट किया कि दोनों जहाजों को हल्का नुकसान हुआ है. इन जहाजों की ब्रिज विंडो पर गोली लगने की बात सामने आई है, लेकिन कोई बड़ा तकनीकी नुकसान या जानमाल की हानि नहीं हुई।      एक टैंकर के कप्तान ने दावा किया कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े दो गनबोट्स जहाज के पास आए और फायरिंग शुरू कर दी. हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।      इस घटना के बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने ईरान के राजदूत मोहम्मद फताअली को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया. विदेश मंत्रालय के अनुसार, विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने ईरानी राजदूत को इस ‘गोलीबारी की घटना’ पर भारत की ‘गहरी चिंता’ से अवगत कराया.उन्होंने भारतीय जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।      विदेश मंत्रालय ने याद दिलाया कि पहले भी ईरान ने भारत जाने वाले जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने में सहयोग किया है. अब भारत चाहता है कि वही प्रक्रिया जल्द बहाल की जाए।      भारतीय सूत्रों के मुताबिक, जहाजों को जानबूझकर निशाना नहीं बनाया गया, बल्कि वे ‘भटकी हुई गोलियों’ की चपेट में आए. इसके बावजूद घटना ने सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।      उधर यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने ओमान तट से करीब 20 नॉटिकल मील दूर सुरक्षा घटना की पुष्टि की है, जिससे क्षेत्र में खतरे का स्तर और बढ़ गया है।      कई जहाजों ने दावा किया कि उन्हें VHF रेडियो पर ईरानी नौसेना की ओर से संदेश मिला कि होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से बंद कर दिया गया है. हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई, लेकिन इससे जहाजों में दहशत फैल गई।      होर्मुज में गोलीबारी की इस घटना पर भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा, ‘ईरान और भारत के बीच रिश्ते बहुत मज़बूत हैं और जिस घटना का आपने ज़िक्र किया है, उसके बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है।  हमें उम्मीद है कि सब ठीक हो जाएगा और यह मामला सुलझ जाएगा.’ इसके साथ ही उन्होंने कहा, ‘…हम यह युद्ध नहीं चाहते. हम शांति चाहते हैं, और हमें उम्मीद है कि दूसरा पक्ष भी शांति का पालन करेगा, ताकि हम एक शांतिपूर्ण क्षेत्र बना सकें।      इसी बीच ईरानी नेता मोहम्मद बाकेर क़ालिबाफ़ और सईद खतिबजादेह के बयानों ने हालात को और जटिल बना दिया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने अमेरिका को लेकर सख्त रुख अपनाया है और परमाणु मुद्दे पर किसी भी दबाव को मानने से इनकार किया है. इससे क्षेत्र में टकराव की आशंका और बढ़ गई है।  होर्मुज जलडमरूमध्य में हुई यह घटना सिर्फ एक फायरिंग नहीं, बल्कि वैश्विक समुद्री सुरक्षा के लिए बड़ा संकेत है. भारत जैसे देश, जिनका बड़ा व्यापार इस मार्ग से गुजरता है, अब अतिरिक्त सतर्कता बरत रहे हैं. बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच यह देखना अहम होगा कि आने वाले दिनों में हालात शांत होते हैं या यह संकट और गहराता है।   

हरियाणा में बड़ा हेल्थ स्कैम: Panipat ESI रेफरल घोटाले की जांच ACB को, CM सैनी का एक्शन

चंडीगढ़. पानीपत के ईएसआइ अस्पताल से मरीजों को निजी अस्पतालों में रेफर करने का खेल उजागर होने के बाद प्रदेश सरकार सख्त हो गई है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पूरे मामले की जांच भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को सौंपने का निर्देश दिया है। अनियमितताओं में संलिप्त पानीपत ईएसआइ अस्पताल के तीन कर्मचारियों को निलंबित करते हुए पांच चिकित्सा अधीक्षकों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। साथ ही छह निजी अस्पतालों को तुरंत पैनल से बाहर करने के लिए नोटिस जारी किया गया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शनिवार को समीक्षा बैठक में ईएसआइ हेल्थ केयर सिस्टम में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के निर्देश जारी करते हुए कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही या भ्रष्टाचार को सहन नहीं किया जाएगा। इन अस्पतालों ने वर्ष 2020-21 से 2023-24 के दौरान अत्यधिक रेफरल किए थे और रेफरल प्रपत्रों पर चिकित्सकों के हस्ताक्षरों में गड़बड़ी पाई गई। इस मामले की निष्पक्ष और गहन जांच के लिए एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। प्रदेश भर में ईएसआइ के पैनल पर शामिल अन्य 133 निजी अस्पतालों के रिकार्ड की भी एसीबी द्वारा जांच कराई जाएगी, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता का समय रहते पता लगाया जा सके। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि पानीपत ईएसआइ अस्पताल की क्षमता को 75 बेड से बढ़ाकर 100 बेड किया जाए तथा वहां आपरेशन थिएटर का विस्तार किया जाए। इसी प्रकार जगाधरी ईएसआइ अस्पताल को 80 से 100 बेड और हिसार ईएसआइ डिस्पेंसरी को 12 से बढ़ाकर 50 बेड करने के निर्देश दिए गए। सभी अस्पतालों में आधुनिक तकनीक से युक्त उपकरण भी लगाए जाएंगे। इसके अलावा बावल और बहादुरगढ़ में निर्माणाधीन 100-100 बेड के ईएसआइ अस्पतालों का कार्य शीघ्र पूरा किया जाएगा। इन परियोजनाओं के पूरा होने से प्रदेश के श्रमिकों और आम नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होंगी। उन्होंने कहा कि ईएसआइ हेल्थ केयर में डाक्टरों और पैरा-मेडिकल स्टाफ की किसी भी प्रकार की कमी नहीं रहने दी जाएगी। आवश्यकतानुसार स्टाफ की भर्ती प्रक्रिया को तेजी से पूरा किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य पारदर्शिता, जवाबदेही और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है, और इस दिशा में कोई भी ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस दौरान मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी, श्रम विभाग के प्रधान सचिव राजीव रंजन ने भी अपनी बात रखी।

पंजाब में नशे पर बड़ा वार: Amritsar से 71 किलो हेरोइन के साथ 2 आरोपी गिरफ्तार, ड्रोन भी जब्त

अमृतसर. पंजाब में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की तरफ से भेजी गई हेरोइन की बड़ी खेप के साथ दो तस्करों को गिरफ्तार किया गया है। स्टेट स्पेशल आपरेशन सेल और बीएसएफ ने दो मामलों में कुल 71 किलो से अधिक हेरोइन, एक मारुति और एक ड्रोन बरामद किया है। आरोपितों ने माना कि यह खेप कुछ दिन पहले पाकिस्तानी तस्करों ने ड्रोन के जरिये भेजी थी। वे इसे आगे सप्लाई करने की योजना बना रहे थे। पहले मामले में पुलिस ने नाकाबंदी कर गांव माहल के पास दो तस्करों गांव अवान वसाउ के स्वर्ण सिंह और दयाल नगर निवासी शमशेर सिंह को 64 किलो हेरोइन सहित गिरफ्तार कर एक मारुति कार बरामद की। आरोपितों को शनिवार शाम न्यायाधीश गरिमा गुप्ता की अदालत में पेश किया गया। अदालत ने पांच दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। एआईजी सुखमिंदर सिंह मान ने बताया कि यह खेप पुर्तगाल में बैठे हैंडलर ने पाकिस्तानी तस्कर मूसा के जरिये भिजवाई थी। 2019 में भारत पाकिस्तान सीमा पर कस्टम विभाग द्वारा पकड़ी गई 532 किलो हेरोइन के मामले में भी मूसा का नाम सामने आया था। दूसरे मामले में बीएसएफ ने भारत-पाकिस्तान सीमा पर स्थित बीओपी पुल मोरां के पास एक बड़ा ड्रोन और सात किलो हेरोइन बरामद की। पुलिस ने अज्ञात आरोपितों के खिलाफ केस दर्ज किया है। बरामद किए गए ड्रोन को जांच के लिए भेजा गया है। बता दें पहली जनवरी से लेकर अब तक सीमा पर कुल 48 ड्रोन बरामद हो चुके हैं।

Illegal Mining पर बड़ा एक्शन: छत्तीसगढ़ में Drone Surveillance और 10 ई-चेक गेट से होगी सख्त निगरानी

रायपुर. छत्तीसगढ़ में खदानों की निगरानी अब हाईटेक होने जा रही है. प्रदेश में अवैध खनन और ओवर माइनिंग पर लगाम के लिए ड्रोन तकनीक का उपयोग किया जाएगा. प्रमुख खदानों और आसपास ड्रोन कैमरे तैनात किए जाएंगे. ये कैमरे एरियल सर्वे और 3डी मैपिंग के जरिए खदानों की गतिविधियों पर नजर रखेंगे. ड्रोन से खदानों का ऊपर से लगातार सर्वे किया जाएगा. इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि तय लीज क्षेत्र के भीतर ही खनन हो रहा है या सीमा से बाहर भी खुदाई की जा रही है. समय-समय पर मिलने वाले डेटा की तुलना कर ओवर माइनिंग यानी तय सीमा से अधिक खनिज निकालने की गतिविधियों को आसानी से पकड़ा जा सकेगा. फिलहाल विभाग शुरुआती चरण में पांच ड्रोन कैमरे तैनात करने जा रहा है. इन्हें सर्विस मोड पर लिया जाएगा और इनके संचालन के लिए विशेषज्ञों की टीम भी तैनात रहेगी. ड्रोन को खासतौर पर रायपुर, धमतरी, बलौदाबाजार, बिलासपुर इत्यादि जिलों की खदानों में लगाया जाएगा, जहां अवैध खनन की शिकायतें ज्यादा सामने आती रही हैं. इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि दुर्गम इलाकों जैसे जंगल और पहाड़ी क्षेत्रों में भी निगरानी आसान हो जाएगी. यहां फिलहाल पारंपरिक निरीक्षण में समय और संसाधन ज्यादा लगते हैं. ड्रोन से मिलने वाली हाई-रिजोल्यूशन तस्वीरें और मैपिंग डेटा सीधे विभाग तक पहुंचेगा, जिससे तत्काल कार्रवाई संभव हो सकेगी. परिवहन गाड़ियों की डिजिटल निगरानी खनिज परिवहन को पारदर्शी और नियंत्रित बनाने के लिए 10 प्रमुख परिवहन रूट्स पर ई-चेक गेट सिस्टम लागू करने जा रहा है. यह पूरी तरह डिजिटल एंट्री-एग्जिट सिस्टम होगा. इसमें खदान से निकलने वाले हर ट्रक या वाहन का ऑनलाइन रिकॉर्ड तैयार होता है. जैसे ही वाहन चेक गेट से गुजरता है, उसकी जानकारी जैसे वाहन नंबर, खनिज का प्रकार, मात्रा और गंतव्य इत्यादि सिस्टम में दर्ज हो जाएगी. इस व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह है कि ओवरलोडिंग और बिना रॉयल्टी खनिज परिवहन पर रोक लगाई जा सकती है. पहले जहां कागजी दस्तावेजों के जरिए हेरफेर की गुंजाइश रहती थी, वहीं अब डेटा सीधे सिस्टम में दर्ज होने से गड़बड़ी पकड़ना आसान हो जाएगा. ई-चेक गेट रियल टाइम ट्रैकिंग की सुविधा भी देता है. अधिकारी किसी भी समय यह देख सकते हैं कि कौन सा वाहन कहां से निकला और कहां तक पहुंचा. इससे अवैध खनिज परिवहन और टैक्स चोरी पर प्रभावी नियंत्रण संभव हो पाता है. इन रूपों में होता है अवैध खनन 1. बिना लीज/परमिट के खनन : जमीन पर खनन शुरू कर दिया, लेकिन सरकार से अनुमति नहीं ली. 2. लीज एरिया से बाहर खनन : जहां तक खनन की इजाजत है, उससे बाहर खुदाई करना. 3. ओवर माइनिंग : तय सीमा से ज्यादा खनिज निकालना. 4. बिना रॉयल्टी/टैक्स के परिवहन : खनिज निकालकर बिना सरकारी शुल्क दिए बेच देना. 5. फर्जी कागजों से खनन : नकली परमिट या ट्रांजिट पास का इस्तेमाल. विभाग में अन्य कई प्रावधान खनिज नियमों में संशोधन कर रेत व गौड़ खनिजों के अवैध उत्खनन पर न्यूनतम 25 हजार रुपए जुर्माना माइनिंग सर्विलांस सिस्टम और सैटेलाइट मॉनिटरिंग से खदानों की रियल टाइम निगरानी कर कार्रवाई खनिज परिवहन में ऑनलाइन ट्रांजिट पास अनिवार्य किया गया, जिससे 5 साल में 84.47 करोड़ की वसूली सचिव खनिज विभाग के सचिव पी. दयानंद ने कहा कि प्रदेश में अवैध खनन को रोकने के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर सख्त कदम उठाए गए हैं. खदानों की निगरानी और अवैध परिवहन रोकने के लिए ड्रोन कैमरे से निगरानी और ई-गेट चालान सिस्टम शुरू किया जा रहा है.

Gold-Silver Rate Update: चांदी ₹1.81 लाख कम, सोना ₹48,000 सस्ता, 24 कैरेट का ताजा रेट

 नई दिल्ली सोना-चांदी की कीमतों (Gold-Silver Rate) में बीते सप्ताह बड़ा चेंज देखने को मिला है और दोनों कीमती धातुओं के दाम में तेजी दर्ज की गई है. हालांकि, पांच दिन की बढ़ोतरी के बाद भी एमसीएक्स (MCX) पर सोना अपने हाई लेवल से 48000 रुपये प्रति 10 ग्राम से ज्यादा सस्ता मिल रहा है. चांदी की अगर बात करें, तो ये कीमती धातु भी अपने हाई लेवल से अभी भी 1.81 लाख रुपये सस्ती मिल रही है. बीते पांच कारोबारी दिनों में 1 Kg Silver Price 14000 रुपये से ज्यादा कम हुआ है।  चांदी चमकी, फिर भी हाई से सस्ती सबसे पहले बताते हैं चांदी की कीमत के बारे में, एमसीएक्स पर 5 मई की एक्सपायरी वाली चांदी का रेट बीते सप्ताह के पांच कारोबारी दिनों में 14,805 रुपये बढ़ा है. पिछले 10 अप्रैल को 1 किलो चांदी की कीमत 2,43,274 रुपये थी, जो बीते शुक्रवार को 2,58,079 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई।  अगर हाई से तुलना करें, तो हफ्तेभर के उछाल के बाद भी सिल्वर प्राइस क्रैश (Silver Price Crash From High) नजर आ रहा है. दरअसल, इस साल जनवरी महीने में एमसीएक्स पर पहली बार चांदी का वायदा भाव 4 लाख रुपये के पार निकला था और इस कीमती धातु ने 4,39,337 रुपये प्रति किलो का लाइफ टाइम हाई लेवल छुआ था, यहां पहुंचने के बाद से ये लगातार बिखरी नजर आई है और इस स्तर से अभी भी 1,81,258 रुपये प्रति किलो सस्ती मिल रही है।  सोना भी पिछले हफ्ते इतना चढ़ा  बात Gold Rate की करें, तो ये भी चांदी की तरह पिछले हफ्ते चमका है. 10 अप्रैल को 10 Gram 24 Karat Gold Rate एमसीएक्स पर 1,52,652 रुपये पर क्लोज हुआ था और बीते शुक्रवार को ये उछलकर 1,54,605 रुपये पर बंद हुआ. इस हिसाब से देखें, तो हफ्तेभर में सोना 1953 रुपये प्रति 10 ग्राम महंगा हुआ है।  चांदी की तरह ही सोने का भाव भी जनवरी महीने में तेज रफ्तार से भागते हुए पहली बार 2 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के पार निकला था. इस कीमती पीली धातु का एमसीएक्स पर लाइफ टाइम हाई लेवल 2,02,984 रुपये प्रति 10 ग्राम है. इस स्तर से वर्तमान रेट की तुलना करें, तो सोना अभी भी 48,379 रुपये सस्ता मिल रहा है। 

यूपी में बेटियों के लिए वरदान बनी योगी सरकार की यह योजना, 6 चरणों में मिल रही सहायता

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बेटियों के उत्थान और सशक्तिकरण को नई दिशा मिल रही है। मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के माध्यम से योगी सरकार बालिकाओं को जन्म से लेकर उच्च शिक्षा तक आर्थिक सहयोग प्रदान कर रही है। महिला कल्याण विभाग की ओर से संचालित यह योजना बेटियों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव बन रही है। इस योजना के तहत अब तक प्रदेश की 27 लाख से अधिक बालिकाएं लाभान्वित हो चुकी हैं, जो इसकी व्यापक पहुंच और प्रभाव को दर्शाता है। बेटियों के लिए आर्थिक सुरक्षा और शिक्षा का मजबूत आधार साल 2019 में शुरू की गई इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत अब तक प्रदेश की 27,37,676 से अधिक बालिकाओं को लाभ मिल चुका है। योजना के अंतर्गत अब तक 674.13 करोड़ रुपये की धनराशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जा चुकी है। यह सहायता राशि कुल 6 चरणों में दी जाती है, जो बालिका के जन्म से लेकर ग्रेजुएशन में प्रवेश तक उसे आर्थिक संबल प्रदान करती है। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ को मिल रहा बल यह योजना न सिर्फ आर्थिक सहायता देती है, बल्कि समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने में भी अहम भूमिका निभा रही है। योजना के माध्यम से बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के लक्ष्यों को आगे बढ़ाया जा रहा है। लिंगानुपात में सुधार, कन्या भ्रूण हत्या पर रोक और बालिकाओं की शिक्षा व स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की दिशा में यह योजना प्रभावी साबित हो रही है। यह योजना शत-प्रतिशत राज्य सरकार द्वारा वित्त पोषित है। धनराशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में योजना का संचालन ऑनलाइन पोर्टल (mksy.up.gov.in) के माध्यम से किया जा रहा है, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहती है। साथ ही पीएफएमएस के जरिए धनराशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जाती है, जिससे किसी भी प्रकार की अनियमितता की संभावना खत्म हो जाती है। शासन स्तर से साफ तौर पर निर्देश दिए गए हैं कि कोई भी पात्र लाभार्थी योजना से वंचित न रहे। योजना का लाभ पाने के लिए मुख्य शर्तें इस योजना का लाभ लेने के लिए सरकार ने कुछ जरूरी पात्रता शर्तें तय की हैं, जिनका पालन करना जरूरी है। योजना के तहत लाभ पाने के लिए सबसे पहले लाभार्थी परिवार का उत्तर प्रदेश का मूल निवासी होना जरूरी है। साथ ही परिवार की वार्षिक आय अधिकतम 3 लाख रुपये तक निर्धारित की गई है। इससे अधिक आय वाले परिवार इस योजना के पात्र नहीं माने जाएंगे। एक परिवार की अधिकतम दो ही बच्चियों को ही इस योजना का लाभ मिल सकता है। इसके साथ ही परिवार में कुल बच्चों की संख्या भी अधिकतम दो ही होनी चाहिए। हालांकि, कुछ विशेष परिस्थितियों में सरकार ने राहत भी दी है। अगर किसी महिला को दूसरे प्रसव में जुड़वा बच्चियां होती हैं, तो तीसरी संतान के रूप में जन्मी बालिका को भी योजना का लाभ मिलेगा। वहीं अगर पहले प्रसव से एक बालिका और दूसरे प्रसव में दो जुड़वा बालिकाएं होती हैं, तो ऐसी स्थिति में तीनों बच्चियों को योजना का लाभ दिया जाएगा। इसके अलावा अगर कोई परिवार अनाथ बालिका को गोद लेता है, तो जैविक और विधिक रूप से गोद ली गई संतानों को मिलाकर अधिकतम दो बालिकाओं को ही योजना का लाभ मिल सकेगा। छह चरणों में मिल रही सहायता योजना के अंतर्गत बालिकाओं को छह अलग-अलग चरणों में आर्थिक सहायता दी जाती है, जिससे उनकी शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों को मजबूती मिलती है। पहले चरण में बालिका के जन्म पर 5000 रुपये की धनराशि दी जाती है। जबकि दूसरे चरण में एक वर्ष तक के पूर्ण टीकाकरण के बाद 2000 रुपये प्रदान किए जाते हैं। तीसरे चरण में कक्षा प्रथम में प्रवेश लेने पर 3000 रुपये दिए जाते हैं। इसी तरह चौथे चरण में कक्षा छह में प्रवेश पर 3000 रुपये और पांचवें चरण में कक्षा नौ में प्रवेश लेने पर 5000 रुपये की सहायता दी जाती है। अंतिम और छठे चरण में कक्षा 10वीं या 12वीं उत्तीर्ण करने के बाद स्नातक या दो वर्ष या उससे अधिक अवधि के डिप्लोमा कोर्स में प्रवेश लेने पर 7000 रुपये की धनराशि दी जाती है। इस प्रकार कुल 25 हजार रुपये की सहायता से सरकार बालिकाओं की शिक्षा को प्रोत्साहित कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रही है। बेटियों के सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल महिला कल्याण निदेशालय की डायरेक्टर डॉ. वंदना वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना प्रदेश की बेटियों के सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि सरकार के साफ निर्देश है कि कोई भी पात्र बालिका इस योजना के लाभ से वंचित न रहे। इसके लिए सभी जिलों को निर्देश दिए गए हैं कि पात्र लाभार्थियों का समयबद्ध पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए और उन्हें शीघ्र लाभ उपलब्ध कराया जाए। डॉ. वर्मा ने कहा कि यह योजना न सिर्फ आर्थिक सहायता प्रदान करती है, बल्कि समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने में भी अहम भूमिका निभा रही है।

स्मार्ट शिक्षा की ओर बढ़ते कदम: होशियारपुर में स्कूल के नए कमरों का शिलान्यास, बच्चों को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं

होशियारपुर. होशियारपुर क्षेत्र में विद्यार्थियों के बेहतर भविष्य को ध्यान में रखते हुए सरकारी स्कूल की नई इमारत के निर्माण का कार्य आधिकारिक तौर पर शुरू हो गया है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में इस परियोजना की नींव रखी गई। इस नई इमारत का निर्माण होने से न केवल स्कूल में कमरों की कमी दूर होगी, बल्कि छात्रों को बैठने के लिए एक सुरक्षित और व्यवस्थित स्थान भी उपलब्ध होगा। आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा नया भवन स्कूल के इस नए बुनियादी ढांचे को आधुनिक मानकों के अनुसार तैयार किया जा रहा है। इसमें हवादार कमरों के साथ-साथ स्वच्छ पेयजल और शौचालय की समुचित व्यवस्था की जाएगी। शिक्षा विभाग का मानना है कि स्कूल की अच्छी इमारत बच्चों के सीखने के स्तर को सकारात्मक रूप से प्रभावित करती है। इस परियोजना के तहत स्कूल परिसर के सौंदर्यीकरण पर भी ध्यान दिया जा रहा है ताकि बच्चे एक खुशनुमा माहौल में अपनी शिक्षा ग्रहण कर सकें। गुणवत्ता और समय सीमा पर जोर निर्माण कार्य का जायजा लेते हुए अधिकारियों ने संबंधित ठेकेदारों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि निर्माण सामग्री की गुणवत्ता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए। इस भवन को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है ताकि अगले शैक्षणिक सत्र तक छात्र नए कमरों का लाभ उठा सकें। निर्माण कार्य की नियमित निगरानी के लिए एक विशेष टीम भी गठित की गई है जो समय-समय पर प्रगति की जांच करेगी। क्षेत्र के विकास में मील का पत्थर इस स्कूल भवन का निर्माण स्थानीय समुदाय के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है। ग्रामीणों ने सरकार के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि लंबे समय से इस क्षेत्र में शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की आवश्यकता थी। सरकारी स्कूलों के कायाकल्प से अब गरीब परिवारों के बच्चों को भी निजी स्कूलों जैसी सुविधाएं मिल सकेंगी, जिससे राज्य में शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने में मदद मिलेगी।

मंत्री लखन लाल के मुख्य आतिथ्य में गोपालपुर में नए औद्योगिक क्षेत्र का भूमिपूजन

मंत्री लखन लाल के मुख्य आतिथ्य में गोपालपुर में नए औद्योगिक क्षेत्र का हुआ भूमिपूजन 27 एकड़ में विकसित होगा नया औद्योगिक क्षेत्र: कोरबा के विकास को मिलेगा नया आयाम गोपालपुर औद्योगिक क्षेत्र से कोरबा के विकास को मिलेगी नई दिशा, निवेश और रोजगार के बढ़ेंगे अवसर बढ़ेंगे : मंत्री लखन लाल नई औद्योगिक नीति से उद्योग स्थापित करने की प्रक्रिया हुई सरल, पारदर्शी और समयबद्ध रायपुर वाणिज्य, उद्योग, श्रम, आबकारी एवं सार्वजनिक उपक्रम मंत्री लखन लाल देवांगन के मुख्य आतिथ्य में कोरबा जिले के दर्री तहसील अंतर्गत ग्राम गोपालपुर में नवीन औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना हेतु अधोसंरचना विकास कार्यों का भूमिपूजन समारोह का आयोजन हुआ। मंत्री देवांगन द्वारा विधिवत पूजा-अर्चना के साथ अधोसंरचना विकास कार्यों का भूमिपूजन किया गया। यह औद्योगिक क्षेत्र लघु, मध्यम एवं बड़े उद्योगों की स्थापना को प्रोत्साहित करते हुए क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करेगा। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलेपमेंट कार्पाेरेशन लिमिटेड के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल, विधायक कटघोरा प्रेमचंद्र पटेल, महापौर श्रीमती संजू देवी राजपूत, जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ पवन सिंह, कलेक्टर कुणाल दुदावत, प्रबंध निदेशक सीएसआईडीसी रायपुर विश्वेश कुमार, निगम आयुक्त आशुतोष पाण्डेय, अपर कलेक्टर देवेंद्र पटेल, सहित अन्य जनप्रतिनिधि, विभागीय अधिकारी, चेम्बर ऑफ कॉमर्स एवं बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित थे। मंत्री देवांगन ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि गोपालपुर में नवीन औद्योगिक क्षेत्र के अधोसंरचना विकास कार्यों का भूमिपूजन केवल एक परियोजना की शुरुआत नहीं, बल्कि कोरबा के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव है। कोरबा के लिए गर्व की बात है, वर्ष 1980 के बाद आज जिले में नवीन औद्योगिक क्षेत्र का विकास किया जा रहा है। लगभग 10.900 हेक्टेयर (27 एकड़) भूमि पर 10.59 करोड़ की लागत से विकसित होने वाला यह औद्योगिक क्षेत्र कोरबा जिले के औद्योगिक विकास को नई दिशा देगा।   इस परियोजना के माध्यम से क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा मिलेगा तथा स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रदेश में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कुशल नेतृत्व में उद्योगों के विस्तार और अधोसंरचना विकास को प्राथमिकता दी जा रही है।  मंत्री देवांगन ने कहा कि राज्य की नई औद्योगिक नीति निवेशकों और आम नागरिकों के हितों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से अब उद्योग स्थापित करने की प्रक्रियाएं सरल, पारदर्शी और समयबद्ध हो गई हैं, जिससे निवेशकों को अनावश्यक दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ेगा। भूमि आबंटन की प्रक्रिया को पूर्णतः ऑनलाइन कर दिया गया है, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार की संभावनाएं कम होंगी। विशेष रूप से अनुसूचित जनजाति एवं अनुसूचित जाति वर्ग के उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के लिए मात्र 1 रुपये में भूमि उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है, ताकि वे भी आत्मनिर्भर बन सकें और औद्योगिक विकास में सक्रिय भागीदारी निभा सकें। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत 2047” के विजन को साकार करने के लिए हम सभी को मिलकर कार्य करना होगा। इसी संकल्प के साथ “विकसित छत्तीसगढ़ 2047” और “विकसित कोरबा 2047” का लक्ष्य प्राप्त किया जाएगा। सीएसआईडीसी के अध्यक्ष अग्रवाल ने कहा कि राज्य की नई औद्योगिक नीति युवाओं और नवोदित उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से तैयार की गई है, जिससे नए उद्योग स्थापित हों और व्यापक रोजगार के अवसर सृजित हों। गोपालपुर के इस नवीन औद्योगिक क्षेत्र में 44 इकाइयों को भूखंड आवंटित किए जाएंगे। इससे यहां औद्योगिक गतिविधियों में तेजी आएगी और स्थानीय युवाओं को यहीं पर रोजगार के अवसर मिलेंगे। उन्होंने बताया कि नीति के अंतर्गत उद्योगों को आकर्षित करने के लिए भूमि आवंटन प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया गया है। साथ ही, पात्र इकाइयों को विभिन्न प्रोत्साहनों के माध्यम से कुल निवेश का लगभग 65 प्रतिशत तक सहायता/अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कोरबा अब केवल कोयला और विद्युत उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे विविध उद्योगों के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। अंत में उन्होंने सभी उद्यमियों को शुभकामनाएँ दीं। एमडी कुमार ने लगभग 11 हेक्टेयर क्षेत्र में नए औद्योगिक क्षेत्र के विकास की घोषणा करते हुए सभी को शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने बताया नवीन औद्योगिक एरिया विकास की प्रस्तावना से लेकर टेंडर कार्य प्रक्रिया में है। कार्यों को पारदर्शी और सुव्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। नई औद्योगिक नीति के तहत एमएसएमई, नए उद्योगों और स्टार्टअप्स को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है, जिससे विभिन्न प्रकार के उद्योगों को स्थापित करने में सहायता मिलेगी और रोजगार के व्यापक अवसर सृजित होंगे। साथ ही, “वन क्लिक सिंगल विंडो” प्रणाली के माध्यम से सभी आवश्यक प्रक्रियाओं को सरल, तेज और सुगम बनाया गया है,  ताकि निवेशकों और उद्यमियों को एक ही मंच पर सभी सुविधाएँ उपलब्ध हो सकें।

अब बेअदबी पर उम्रकैद: पंजाब में ‘जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब बिल 2026’ पास, राज्यपाल की मुहर

चंडीगढ़. जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब बिल 2026 को राज्यपाल गुलाब चन्द कटारिया ने मंजूरी दे दी है। अब बेअदबी करने वाले को उम्र कैद की सजा मिलेगी। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने एक्स पर पोस्ट डाल कर दी जानकारी दी है। पंजाब सरकार ने बैसाखी के पावन अवसर पर एक बड़ा और महत्वपूर्ण विधायी कदम उठाते हुए ‘जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) विधेयक-2026’ को विधानसभा में पेश किया था। इस विधेयक का उद्देश्य गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी से जुड़े मामलों में सख्त सजा का प्रावधान करना और इसकी पवित्रता की रक्षा के लिए मजबूत कानूनी ढांचा तैयार करना है। मुख्यमंत्री भगवंत मान, जो गृह विभाग भी संभाल रहे हैं, ने यह विधेयक सदन में पेश किया था। उन्होंने स्पष्ट किया था कि बेअदबी की घटनाओं को रोकने के लिए यह कानून बेहद जरूरी है और इसमें पहले से कहीं अधिक सख्त प्रावधान किए गए हैं। बेअदबी गैर-जमानती और संज्ञेय (कॉग्निज़ेबल ऑफेंस) बनाया गया इस विधेयक में बेअदबी के अपराध को गैर-जमानती और संज्ञेय (कॉग्निज़ेबल ऑफेंस) बनाया गया है, जिससे पुलिस बिना वारंट के कार्रवाई कर सकेगी। ऐसे मामलों की सुनवाई सत्र न्यायालय में होगी और जांच केवल डीएसपी या सहायक पुलिस आयुक्त स्तर के अधिकारियों द्वारा ही की जाएगी। संशोधन के तहत कानून की भाषा में भी बदलाव किया गया है। पहले जहां “बीड़” शब्द का उपयोग होता था, उसे बदलकर “स्वरूप” किया गया है, ताकि धार्मिक परंपराओं के अनुरूप शब्दावली का इस्तेमाल किया जा सके। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि गुरु ग्रंथ साहिब के सरूपों की छपाई, प्रकाशन, भंडारण और वितरण केवल शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी या उसके अधिकृत संस्थानों द्वारा ही किया जाएगा। संरक्षक करेंगे स्वरूप की सुरक्षा मुख्यमंत्री ने बताया कि इस कानून में “संरक्षक” की परिभाषा भी जोड़ी गई है, जिसमें उन व्यक्तियों या संस्थाओं को शामिल किया गया है जो सरूप की देखभाल और मर्यादा के लिए जिम्मेदार होंगे। उनके लिए यह अनिवार्य होगा कि वे सरूप की सुरक्षा सुनिश्चित करें और किसी भी प्रकार की क्षति या बेअदबी की आशंका होने पर तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचित करें। बेअदबी की परिभाषा को भी इस कानून में विस्तारित किया गया है। इसमें न केवल भौतिक नुकसान जैसे जलाना, फाड़ना या चोरी करना शामिल है, बल्कि किसी भी प्रकार के मौखिक, लिखित, प्रतीकात्मक या डिजिटल माध्यम से धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले कृत्य को भी इसमें शामिल किया गया है।