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Gold-Silver Rate Update: चांदी ₹1.81 लाख कम, सोना ₹48,000 सस्ता, 24 कैरेट का ताजा रेट

 नई दिल्ली सोना-चांदी की कीमतों (Gold-Silver Rate) में बीते सप्ताह बड़ा चेंज देखने को मिला है और दोनों कीमती धातुओं के दाम में तेजी दर्ज की गई है. हालांकि, पांच दिन की बढ़ोतरी के बाद भी एमसीएक्स (MCX) पर सोना अपने हाई लेवल से 48000 रुपये प्रति 10 ग्राम से ज्यादा सस्ता मिल रहा है. चांदी की अगर बात करें, तो ये कीमती धातु भी अपने हाई लेवल से अभी भी 1.81 लाख रुपये सस्ती मिल रही है. बीते पांच कारोबारी दिनों में 1 Kg Silver Price 14000 रुपये से ज्यादा कम हुआ है।  चांदी चमकी, फिर भी हाई से सस्ती सबसे पहले बताते हैं चांदी की कीमत के बारे में, एमसीएक्स पर 5 मई की एक्सपायरी वाली चांदी का रेट बीते सप्ताह के पांच कारोबारी दिनों में 14,805 रुपये बढ़ा है. पिछले 10 अप्रैल को 1 किलो चांदी की कीमत 2,43,274 रुपये थी, जो बीते शुक्रवार को 2,58,079 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई।  अगर हाई से तुलना करें, तो हफ्तेभर के उछाल के बाद भी सिल्वर प्राइस क्रैश (Silver Price Crash From High) नजर आ रहा है. दरअसल, इस साल जनवरी महीने में एमसीएक्स पर पहली बार चांदी का वायदा भाव 4 लाख रुपये के पार निकला था और इस कीमती धातु ने 4,39,337 रुपये प्रति किलो का लाइफ टाइम हाई लेवल छुआ था, यहां पहुंचने के बाद से ये लगातार बिखरी नजर आई है और इस स्तर से अभी भी 1,81,258 रुपये प्रति किलो सस्ती मिल रही है।  सोना भी पिछले हफ्ते इतना चढ़ा  बात Gold Rate की करें, तो ये भी चांदी की तरह पिछले हफ्ते चमका है. 10 अप्रैल को 10 Gram 24 Karat Gold Rate एमसीएक्स पर 1,52,652 रुपये पर क्लोज हुआ था और बीते शुक्रवार को ये उछलकर 1,54,605 रुपये पर बंद हुआ. इस हिसाब से देखें, तो हफ्तेभर में सोना 1953 रुपये प्रति 10 ग्राम महंगा हुआ है।  चांदी की तरह ही सोने का भाव भी जनवरी महीने में तेज रफ्तार से भागते हुए पहली बार 2 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के पार निकला था. इस कीमती पीली धातु का एमसीएक्स पर लाइफ टाइम हाई लेवल 2,02,984 रुपये प्रति 10 ग्राम है. इस स्तर से वर्तमान रेट की तुलना करें, तो सोना अभी भी 48,379 रुपये सस्ता मिल रहा है। 

यूपी में बेटियों के लिए वरदान बनी योगी सरकार की यह योजना, 6 चरणों में मिल रही सहायता

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बेटियों के उत्थान और सशक्तिकरण को नई दिशा मिल रही है। मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के माध्यम से योगी सरकार बालिकाओं को जन्म से लेकर उच्च शिक्षा तक आर्थिक सहयोग प्रदान कर रही है। महिला कल्याण विभाग की ओर से संचालित यह योजना बेटियों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव बन रही है। इस योजना के तहत अब तक प्रदेश की 27 लाख से अधिक बालिकाएं लाभान्वित हो चुकी हैं, जो इसकी व्यापक पहुंच और प्रभाव को दर्शाता है। बेटियों के लिए आर्थिक सुरक्षा और शिक्षा का मजबूत आधार साल 2019 में शुरू की गई इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत अब तक प्रदेश की 27,37,676 से अधिक बालिकाओं को लाभ मिल चुका है। योजना के अंतर्गत अब तक 674.13 करोड़ रुपये की धनराशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जा चुकी है। यह सहायता राशि कुल 6 चरणों में दी जाती है, जो बालिका के जन्म से लेकर ग्रेजुएशन में प्रवेश तक उसे आर्थिक संबल प्रदान करती है। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ को मिल रहा बल यह योजना न सिर्फ आर्थिक सहायता देती है, बल्कि समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने में भी अहम भूमिका निभा रही है। योजना के माध्यम से बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के लक्ष्यों को आगे बढ़ाया जा रहा है। लिंगानुपात में सुधार, कन्या भ्रूण हत्या पर रोक और बालिकाओं की शिक्षा व स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की दिशा में यह योजना प्रभावी साबित हो रही है। यह योजना शत-प्रतिशत राज्य सरकार द्वारा वित्त पोषित है। धनराशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में योजना का संचालन ऑनलाइन पोर्टल (mksy.up.gov.in) के माध्यम से किया जा रहा है, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहती है। साथ ही पीएफएमएस के जरिए धनराशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जाती है, जिससे किसी भी प्रकार की अनियमितता की संभावना खत्म हो जाती है। शासन स्तर से साफ तौर पर निर्देश दिए गए हैं कि कोई भी पात्र लाभार्थी योजना से वंचित न रहे। योजना का लाभ पाने के लिए मुख्य शर्तें इस योजना का लाभ लेने के लिए सरकार ने कुछ जरूरी पात्रता शर्तें तय की हैं, जिनका पालन करना जरूरी है। योजना के तहत लाभ पाने के लिए सबसे पहले लाभार्थी परिवार का उत्तर प्रदेश का मूल निवासी होना जरूरी है। साथ ही परिवार की वार्षिक आय अधिकतम 3 लाख रुपये तक निर्धारित की गई है। इससे अधिक आय वाले परिवार इस योजना के पात्र नहीं माने जाएंगे। एक परिवार की अधिकतम दो ही बच्चियों को ही इस योजना का लाभ मिल सकता है। इसके साथ ही परिवार में कुल बच्चों की संख्या भी अधिकतम दो ही होनी चाहिए। हालांकि, कुछ विशेष परिस्थितियों में सरकार ने राहत भी दी है। अगर किसी महिला को दूसरे प्रसव में जुड़वा बच्चियां होती हैं, तो तीसरी संतान के रूप में जन्मी बालिका को भी योजना का लाभ मिलेगा। वहीं अगर पहले प्रसव से एक बालिका और दूसरे प्रसव में दो जुड़वा बालिकाएं होती हैं, तो ऐसी स्थिति में तीनों बच्चियों को योजना का लाभ दिया जाएगा। इसके अलावा अगर कोई परिवार अनाथ बालिका को गोद लेता है, तो जैविक और विधिक रूप से गोद ली गई संतानों को मिलाकर अधिकतम दो बालिकाओं को ही योजना का लाभ मिल सकेगा। छह चरणों में मिल रही सहायता योजना के अंतर्गत बालिकाओं को छह अलग-अलग चरणों में आर्थिक सहायता दी जाती है, जिससे उनकी शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों को मजबूती मिलती है। पहले चरण में बालिका के जन्म पर 5000 रुपये की धनराशि दी जाती है। जबकि दूसरे चरण में एक वर्ष तक के पूर्ण टीकाकरण के बाद 2000 रुपये प्रदान किए जाते हैं। तीसरे चरण में कक्षा प्रथम में प्रवेश लेने पर 3000 रुपये दिए जाते हैं। इसी तरह चौथे चरण में कक्षा छह में प्रवेश पर 3000 रुपये और पांचवें चरण में कक्षा नौ में प्रवेश लेने पर 5000 रुपये की सहायता दी जाती है। अंतिम और छठे चरण में कक्षा 10वीं या 12वीं उत्तीर्ण करने के बाद स्नातक या दो वर्ष या उससे अधिक अवधि के डिप्लोमा कोर्स में प्रवेश लेने पर 7000 रुपये की धनराशि दी जाती है। इस प्रकार कुल 25 हजार रुपये की सहायता से सरकार बालिकाओं की शिक्षा को प्रोत्साहित कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रही है। बेटियों के सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल महिला कल्याण निदेशालय की डायरेक्टर डॉ. वंदना वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना प्रदेश की बेटियों के सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि सरकार के साफ निर्देश है कि कोई भी पात्र बालिका इस योजना के लाभ से वंचित न रहे। इसके लिए सभी जिलों को निर्देश दिए गए हैं कि पात्र लाभार्थियों का समयबद्ध पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए और उन्हें शीघ्र लाभ उपलब्ध कराया जाए। डॉ. वर्मा ने कहा कि यह योजना न सिर्फ आर्थिक सहायता प्रदान करती है, बल्कि समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने में भी अहम भूमिका निभा रही है।

स्मार्ट शिक्षा की ओर बढ़ते कदम: होशियारपुर में स्कूल के नए कमरों का शिलान्यास, बच्चों को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं

होशियारपुर. होशियारपुर क्षेत्र में विद्यार्थियों के बेहतर भविष्य को ध्यान में रखते हुए सरकारी स्कूल की नई इमारत के निर्माण का कार्य आधिकारिक तौर पर शुरू हो गया है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में इस परियोजना की नींव रखी गई। इस नई इमारत का निर्माण होने से न केवल स्कूल में कमरों की कमी दूर होगी, बल्कि छात्रों को बैठने के लिए एक सुरक्षित और व्यवस्थित स्थान भी उपलब्ध होगा। आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा नया भवन स्कूल के इस नए बुनियादी ढांचे को आधुनिक मानकों के अनुसार तैयार किया जा रहा है। इसमें हवादार कमरों के साथ-साथ स्वच्छ पेयजल और शौचालय की समुचित व्यवस्था की जाएगी। शिक्षा विभाग का मानना है कि स्कूल की अच्छी इमारत बच्चों के सीखने के स्तर को सकारात्मक रूप से प्रभावित करती है। इस परियोजना के तहत स्कूल परिसर के सौंदर्यीकरण पर भी ध्यान दिया जा रहा है ताकि बच्चे एक खुशनुमा माहौल में अपनी शिक्षा ग्रहण कर सकें। गुणवत्ता और समय सीमा पर जोर निर्माण कार्य का जायजा लेते हुए अधिकारियों ने संबंधित ठेकेदारों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि निर्माण सामग्री की गुणवत्ता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए। इस भवन को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है ताकि अगले शैक्षणिक सत्र तक छात्र नए कमरों का लाभ उठा सकें। निर्माण कार्य की नियमित निगरानी के लिए एक विशेष टीम भी गठित की गई है जो समय-समय पर प्रगति की जांच करेगी। क्षेत्र के विकास में मील का पत्थर इस स्कूल भवन का निर्माण स्थानीय समुदाय के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है। ग्रामीणों ने सरकार के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि लंबे समय से इस क्षेत्र में शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की आवश्यकता थी। सरकारी स्कूलों के कायाकल्प से अब गरीब परिवारों के बच्चों को भी निजी स्कूलों जैसी सुविधाएं मिल सकेंगी, जिससे राज्य में शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने में मदद मिलेगी।

मंत्री लखन लाल के मुख्य आतिथ्य में गोपालपुर में नए औद्योगिक क्षेत्र का भूमिपूजन

मंत्री लखन लाल के मुख्य आतिथ्य में गोपालपुर में नए औद्योगिक क्षेत्र का हुआ भूमिपूजन 27 एकड़ में विकसित होगा नया औद्योगिक क्षेत्र: कोरबा के विकास को मिलेगा नया आयाम गोपालपुर औद्योगिक क्षेत्र से कोरबा के विकास को मिलेगी नई दिशा, निवेश और रोजगार के बढ़ेंगे अवसर बढ़ेंगे : मंत्री लखन लाल नई औद्योगिक नीति से उद्योग स्थापित करने की प्रक्रिया हुई सरल, पारदर्शी और समयबद्ध रायपुर वाणिज्य, उद्योग, श्रम, आबकारी एवं सार्वजनिक उपक्रम मंत्री लखन लाल देवांगन के मुख्य आतिथ्य में कोरबा जिले के दर्री तहसील अंतर्गत ग्राम गोपालपुर में नवीन औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना हेतु अधोसंरचना विकास कार्यों का भूमिपूजन समारोह का आयोजन हुआ। मंत्री देवांगन द्वारा विधिवत पूजा-अर्चना के साथ अधोसंरचना विकास कार्यों का भूमिपूजन किया गया। यह औद्योगिक क्षेत्र लघु, मध्यम एवं बड़े उद्योगों की स्थापना को प्रोत्साहित करते हुए क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करेगा। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलेपमेंट कार्पाेरेशन लिमिटेड के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल, विधायक कटघोरा प्रेमचंद्र पटेल, महापौर श्रीमती संजू देवी राजपूत, जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ पवन सिंह, कलेक्टर कुणाल दुदावत, प्रबंध निदेशक सीएसआईडीसी रायपुर विश्वेश कुमार, निगम आयुक्त आशुतोष पाण्डेय, अपर कलेक्टर देवेंद्र पटेल, सहित अन्य जनप्रतिनिधि, विभागीय अधिकारी, चेम्बर ऑफ कॉमर्स एवं बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित थे। मंत्री देवांगन ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि गोपालपुर में नवीन औद्योगिक क्षेत्र के अधोसंरचना विकास कार्यों का भूमिपूजन केवल एक परियोजना की शुरुआत नहीं, बल्कि कोरबा के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव है। कोरबा के लिए गर्व की बात है, वर्ष 1980 के बाद आज जिले में नवीन औद्योगिक क्षेत्र का विकास किया जा रहा है। लगभग 10.900 हेक्टेयर (27 एकड़) भूमि पर 10.59 करोड़ की लागत से विकसित होने वाला यह औद्योगिक क्षेत्र कोरबा जिले के औद्योगिक विकास को नई दिशा देगा।   इस परियोजना के माध्यम से क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा मिलेगा तथा स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रदेश में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कुशल नेतृत्व में उद्योगों के विस्तार और अधोसंरचना विकास को प्राथमिकता दी जा रही है।  मंत्री देवांगन ने कहा कि राज्य की नई औद्योगिक नीति निवेशकों और आम नागरिकों के हितों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से अब उद्योग स्थापित करने की प्रक्रियाएं सरल, पारदर्शी और समयबद्ध हो गई हैं, जिससे निवेशकों को अनावश्यक दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ेगा। भूमि आबंटन की प्रक्रिया को पूर्णतः ऑनलाइन कर दिया गया है, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार की संभावनाएं कम होंगी। विशेष रूप से अनुसूचित जनजाति एवं अनुसूचित जाति वर्ग के उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के लिए मात्र 1 रुपये में भूमि उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है, ताकि वे भी आत्मनिर्भर बन सकें और औद्योगिक विकास में सक्रिय भागीदारी निभा सकें। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत 2047” के विजन को साकार करने के लिए हम सभी को मिलकर कार्य करना होगा। इसी संकल्प के साथ “विकसित छत्तीसगढ़ 2047” और “विकसित कोरबा 2047” का लक्ष्य प्राप्त किया जाएगा। सीएसआईडीसी के अध्यक्ष अग्रवाल ने कहा कि राज्य की नई औद्योगिक नीति युवाओं और नवोदित उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से तैयार की गई है, जिससे नए उद्योग स्थापित हों और व्यापक रोजगार के अवसर सृजित हों। गोपालपुर के इस नवीन औद्योगिक क्षेत्र में 44 इकाइयों को भूखंड आवंटित किए जाएंगे। इससे यहां औद्योगिक गतिविधियों में तेजी आएगी और स्थानीय युवाओं को यहीं पर रोजगार के अवसर मिलेंगे। उन्होंने बताया कि नीति के अंतर्गत उद्योगों को आकर्षित करने के लिए भूमि आवंटन प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया गया है। साथ ही, पात्र इकाइयों को विभिन्न प्रोत्साहनों के माध्यम से कुल निवेश का लगभग 65 प्रतिशत तक सहायता/अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कोरबा अब केवल कोयला और विद्युत उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे विविध उद्योगों के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। अंत में उन्होंने सभी उद्यमियों को शुभकामनाएँ दीं। एमडी कुमार ने लगभग 11 हेक्टेयर क्षेत्र में नए औद्योगिक क्षेत्र के विकास की घोषणा करते हुए सभी को शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने बताया नवीन औद्योगिक एरिया विकास की प्रस्तावना से लेकर टेंडर कार्य प्रक्रिया में है। कार्यों को पारदर्शी और सुव्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। नई औद्योगिक नीति के तहत एमएसएमई, नए उद्योगों और स्टार्टअप्स को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है, जिससे विभिन्न प्रकार के उद्योगों को स्थापित करने में सहायता मिलेगी और रोजगार के व्यापक अवसर सृजित होंगे। साथ ही, “वन क्लिक सिंगल विंडो” प्रणाली के माध्यम से सभी आवश्यक प्रक्रियाओं को सरल, तेज और सुगम बनाया गया है,  ताकि निवेशकों और उद्यमियों को एक ही मंच पर सभी सुविधाएँ उपलब्ध हो सकें।

अब बेअदबी पर उम्रकैद: पंजाब में ‘जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब बिल 2026’ पास, राज्यपाल की मुहर

चंडीगढ़. जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब बिल 2026 को राज्यपाल गुलाब चन्द कटारिया ने मंजूरी दे दी है। अब बेअदबी करने वाले को उम्र कैद की सजा मिलेगी। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने एक्स पर पोस्ट डाल कर दी जानकारी दी है। पंजाब सरकार ने बैसाखी के पावन अवसर पर एक बड़ा और महत्वपूर्ण विधायी कदम उठाते हुए ‘जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) विधेयक-2026’ को विधानसभा में पेश किया था। इस विधेयक का उद्देश्य गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी से जुड़े मामलों में सख्त सजा का प्रावधान करना और इसकी पवित्रता की रक्षा के लिए मजबूत कानूनी ढांचा तैयार करना है। मुख्यमंत्री भगवंत मान, जो गृह विभाग भी संभाल रहे हैं, ने यह विधेयक सदन में पेश किया था। उन्होंने स्पष्ट किया था कि बेअदबी की घटनाओं को रोकने के लिए यह कानून बेहद जरूरी है और इसमें पहले से कहीं अधिक सख्त प्रावधान किए गए हैं। बेअदबी गैर-जमानती और संज्ञेय (कॉग्निज़ेबल ऑफेंस) बनाया गया इस विधेयक में बेअदबी के अपराध को गैर-जमानती और संज्ञेय (कॉग्निज़ेबल ऑफेंस) बनाया गया है, जिससे पुलिस बिना वारंट के कार्रवाई कर सकेगी। ऐसे मामलों की सुनवाई सत्र न्यायालय में होगी और जांच केवल डीएसपी या सहायक पुलिस आयुक्त स्तर के अधिकारियों द्वारा ही की जाएगी। संशोधन के तहत कानून की भाषा में भी बदलाव किया गया है। पहले जहां “बीड़” शब्द का उपयोग होता था, उसे बदलकर “स्वरूप” किया गया है, ताकि धार्मिक परंपराओं के अनुरूप शब्दावली का इस्तेमाल किया जा सके। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि गुरु ग्रंथ साहिब के सरूपों की छपाई, प्रकाशन, भंडारण और वितरण केवल शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी या उसके अधिकृत संस्थानों द्वारा ही किया जाएगा। संरक्षक करेंगे स्वरूप की सुरक्षा मुख्यमंत्री ने बताया कि इस कानून में “संरक्षक” की परिभाषा भी जोड़ी गई है, जिसमें उन व्यक्तियों या संस्थाओं को शामिल किया गया है जो सरूप की देखभाल और मर्यादा के लिए जिम्मेदार होंगे। उनके लिए यह अनिवार्य होगा कि वे सरूप की सुरक्षा सुनिश्चित करें और किसी भी प्रकार की क्षति या बेअदबी की आशंका होने पर तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचित करें। बेअदबी की परिभाषा को भी इस कानून में विस्तारित किया गया है। इसमें न केवल भौतिक नुकसान जैसे जलाना, फाड़ना या चोरी करना शामिल है, बल्कि किसी भी प्रकार के मौखिक, लिखित, प्रतीकात्मक या डिजिटल माध्यम से धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले कृत्य को भी इसमें शामिल किया गया है।

महिला मुद्दों पर BJP का बड़ा कदम: CM साय और Arun Singh आज करेंगे प्रेस कॉन्फ्रेंस, निकलेगी जनआक्रोश पदयात्रा

रायपुर. लोकसभा में महिला आरक्षण बिल गिरने के बाद भाजपा ने  कांग्रेस के खिलाफ बड़े प्रदर्शन की तैयारी कर ली है. आज प्रदेश, संभाग और जिला स्तर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएगी. दोपहर में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे. कल रायपुर में भाजपा की महिला जनआक्रोश पदयात्रा निकाली जाएगी, जिसकी शुरुआत दोपहर 3 बजे इंडोर स्टेडियम से होगी और सुभाष स्टेडियम पहुंचकर सम्मेलन व समापन होगा. इसके अलावा 20–21 अप्रैल को प्रदेशभर में महिला पदयात्राएं और 23–24 अप्रैल को जनआक्रोश महिला सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे. आज डीसीपी नार्थ करेंगे फेसबुक-इंस्टा पर लोगों से बात रायपुर. डीसीपी नार्थ कमिश्नरेट (आईपीएस) मयंक गुर्जर रविवार को फेसबुक और इंस्टाग्राम पर लाइव हैं. पहले वह आम लोगों के बीच अपने कार्यक्षेत्र उत्तर कमिश्नरेट की पुलिसिंग की जानकारी देंगे. इसके बाद वे लोगों के सवालों का जवाब भी देंगे. उनसे नार्थ कमिश्नरेट के अंतर्गत आने वाले खमतराई, उरला, गुढ़ियारी, पंडरी और खम्हारडीह थाना क्षेत्र में पुलिसिंग को लेकर बात की जा सकती है. आम लोग अपने सुझाव भी दे सकते हैं और शिकायतें भी कमेंट्स बॉक्स में बता सकते हैं. पुलिस कमिश्नर ने कहा कि हर सुझाव और फीडबैक उनके लिए महत्वपूर्ण हैं.

बस्तर में क्रिकेट का जश्न: 22 अप्रैल को पहुंचेंगे Sachin Tendulkar, बच्चों संग बिताएंगे खास पल

रायपुर. क्रिकेट लीजेंड सचिन तेंदुलकर जल्द ही सपरिवार छत्तीसगढ़ आने वाले हैं. वह 22 अप्रैल को दंतेवाड़ा के प्रवास पर रहेंगे. इस दौरान वह अबूझमाढ़ से सटे इंद्रावती नदी के तटीय इलाके में बसे ग्राम छिंदनार में विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे. सचिन बच्चों के साथ क्रिकेट खेलते भी नजर आएंगे. इस दौरान उनके साथ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी मौजूद रहेंगे. तेंदुलकर फाउंडेशन ने छिंदनार में ग्रामीण खेलों को बढ़ावा देने और बच्चों को खेल के लिए प्रशिक्षित करने के उद्देश्य से दंतेवाड़ा में तब प्रयास प्रारंभ किया था, जब यहां नक्सली समस्या गंभीर थी. अब जब बस्तर के नक्सल मुक्त होने की घोषणा हो चुकी है तो स्वयं सचिन सपरिवार दंतेवाड़ा पहुंचेंगे और स्थानीय बच्चों से संवाद भी करेंगे. बता दें कि हाल ही में सचिन तेंदुलकर फाउंडेशन की टीम हाल ही में दो दिवसीय दौरे पर छत्तीसगढ़ आई थी. इस दौरान उन्होंने जन स्वास्थ्य सहयोग (गनियारी) संस्था का दौरा किया. पहले दिन मुंगेली स्थित अचानकमार टाइगर रिजर्व (ATR) के सुदूर वनांचल ग्राम बम्हनी में पहुंचकर शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी ली. डॉ. अंजली तेंदुलकर और सारा तेंदुलकर ने दौरे के दूसरे दिन बिलासपुर में गनियारी जन स्वास्थ्य केंद्र का भी दौरा किया. इस दौरान डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों के साथ बातचीत कर उन्होंने जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति को समझा. उन्होंने यहां भी फुलवारी केंद्र और बालवाड़ी पहुंचकर आदिवासी बच्चों से मुलाकात की थी. साथ ही बच्चों के रहन-सहन, खान-पान और वन क्षेत्र में शिक्षा के स्तर को लेकर स्थानीय समिति के सदस्यों से विस्तृत चर्चा भी की थी.

जानापाव में बनेगा भव्य श्रीपरशुराम-श्रीकृष्ण लोक, मुख्यमंत्री डॉ. यादव की घोषणा

जानापाव में बनेगा भव्य और दिव्य श्रीपरशुराम-श्रीकृष्ण लोक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव भगवान परशुराम की पूजा-अर्चना कर प्रदेश की समृद्धि और खुशहाली के लिए करेंगे मंगल कामना महाभारतकालीन अस्त्र-शस्त्रों और चक्रव्यूह की कला पर आधारित अनूठी प्रदर्शनी का करेंगे शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ‘परशुराम प्रकटोत्सव’ में होंगे शामिल जानापाव मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भगवान परशुराम की जन्म स्थली जानापाव में भव्य और दिव्य श्रीपरशुराम-श्रीकृष्ण लोक विकसित किया जा रहा है। इसकी लागत 17.41 करोड़ रूपये है। भगवान परशुराम और भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, दर्शन और संदेश को आमजन तक पहुंचाने के लिये श्रीपरशुराम-श्रीकृष्ण लोक एक प्रमुख आध्यात्मिक पर्यटन एवं सांस्कृतिक केन्द्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। 19 अप्रैल को भगवान परशुराम की पावन जन्मस्थली जानापाव (महू) में आयोजित 'परशुराम प्रकटोत्सव' में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव यहाँ भगवान परशुराम मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेश की समृद्धि और खुशहाली के लिए मंगल कामना करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव जानापाव की महाभारतकालीन अस्त्र-शस्त्रों और चक्रव्यूह की कला पर आधारित अनूठी प्रदर्शनी का शुभारंभ करेंगे। वे स्थानीय सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रमों में भी सम्मिलित होंगे। संस्कृति विभाग और श्रीकृष्ण पाथेय न्यास द्वारा आयोजित भगवान परशुराम प्रकटोत्सव के भव्य समारोह में कला और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। कार्यक्रम में विख्यात गायक सवई भट्ट एवं उनके दल द्वारा मनमोहक भक्ति गायन प्रस्तुत किया जाएगा। साथ ही, पंडित विजय शंकर मेहता द्वारा रचित और वीरेंद्र कुमार के निर्देशन में 'परशुराम नाट्य लीला' का सजीव मंचन भी होगा, जो भगवान परशुराम के विराट व्यक्तित्व को उजागर करेगा। कार्यक्रम में प्रवेश पूर्णतः नि:शुल्क रहेगा। भगवान श्रीपरशुराम-श्रीकृष्ण लोक में भगवान श्रीपरशुराम और श्रीकृष्ण की कांस्य प्रतिमाएं स्थापित की जायेंगी। जानापाव में पत्थर एवं धातु से निर्मित 30 फीट ऊँचा भव्य द्वार निर्मित किया जायेगा। कथा और अन्य धार्मिक आयोजनों के लिये कथा मंच का निर्माण किया जायेगा। लोक के प्रांगण में 4 गजीबो, व्यू पाइंट, लैंड स्केपिंग, पाथ-वे और अन्य विकास कार्य भी किये जायेंगे। भगवान श्रीपरशुराम-श्रीकृष्ण लोक में एक भव्य संग्रहालय बनेगा, जो भगवान श्रीकृष्ण के जीवन दर्शन पर आधारित होकर पौराणिक महत्व को प्रदर्शित करेगा। लोक में 5 दीर्घाएं होंगी। इसमें शस्त्र दीर्घा, उत्पत्ति दीर्घा, स्वरूप दीर्घा, संतुलन दीर्घा एवं ध्यानदीर्घा होंगी। इनमें भगवान श्रीपरशुराम-श्रीकृष्ण की विभिन्न कलाओं को दर्शाया जायेगा।  

अत्याधुनिक उपकरण स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावी और सटीक बनाएंगे: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

भोपाल  उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल भोपाल में निजी हॉस्पिटल में रोबोटिक सर्जरी सेवा के शुभारंभ कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि यह उन्नत सर्जिकल रोबोट अस्पताल और प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो सर्जनों को अधिक सटीक, सुरक्षित और प्रभावी सर्जरी करने में सहयोग प्रदान करेगा तथा उपचार की गुणवत्ता को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि किसी भी अस्पताल की गुणवत्ता इस बात से निर्धारित होती है कि वहां कितनी आधुनिक तकनीक और उन्नत उपकरण उपलब्ध हैं। उन्होंने वर्तमान समय में स्वास्थ्य क्षेत्र में सरकारी और निजी अस्पतालों के बीच समन्वय और सहयोग को अत्यंत आवश्यक बताते हुए कहा कि इससे मरीजों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित की जा सकती हैं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत तेजी से विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। उन्होंने गांव-गांव तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के प्रयासों को स्वास्थ्य सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि स्वच्छ जल से बीमारियों में कमी आएगी और जनस्वास्थ्य सुदृढ़ होगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि नेचुरल फार्मिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे लोगों को शुद्ध और पोषक आहार मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर अनेक बीमारियों से बचाव संभव है। आयुष्मान भारत योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इस योजना के माध्यम से गरीब और जरूरतमंद वर्ग के लिए उपचार अधिक सुलभ हुआ है। साथ ही, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों और तकनीकों के उपयोग से स्वास्थ्य सेवाओं में निरंतर सुधार हो रहा है और टियर-2 एवं टियर-3 शहरों में भी उन्नत चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने में डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में ‘पीएम एयर एंबुलेंस’ और अन्य जनउपयोगी पहल को अत्यंत उपयोगी और नवाचारपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इससे आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं और अधिक प्रभावी हुई हैं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने बंसल हॉस्पिटल प्रबंधन और चिकित्सा टीम को रोबोटिक सर्जरी जैसी अत्याधुनिक सुविधा शुरू करने के लिए बधाई दी और विश्वास व्यक्त किया कि इससे प्रदेश के मरीजों को उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सेवाएं प्राप्त होंगी।  

महाराजा रणजीत सिंह की निशानी खतरे में: दीनानगर बारादरी के अस्तित्व पर संकट, दिल्ली कमेटी ने बुलाई बैठक

दीनानगर.  दीनानगर में शेर-ए-पंजाब महाराजा रणजीत सिंह की ऐतिहासिक शाही बारादरी की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हाल ही में कुछ शरारती तत्वों द्वारा इस प्राचीन इमारत की छत और अन्य हिस्सों में तोड़फोड़ की गई, जिससे सिख समाज और विरासत प्रेमियों में भारी रोष है। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के धर्म प्रचार कमेटी (पंजाब) के चेयरमैन मनजीत सिंह भोमा ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। भू-माफिया और राजनीतिक गठजोड़ का आरोप चेयरमैन भोमा ने बारादरी का दौरा करने के बाद प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार के पर्यटन और सांस्कृतिक मामलों के विभाग द्वारा संरक्षित घोषित की गई इस इमारत को नुकसान पहुँचाने के पीछे भू-माफिया और बड़े राजनीतिक चेहरों का हाथ हो सकता है। उन्होंने बताया कि जहाँ लोग धार्मिक स्थलों पर सोना चढ़ाते हैं, वहीं माफिया महाराजा रणजीत सिंह की इस ऐतिहासिक निशानी की ईंटें तक उखाड़ कर ले जा रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की कि इस विनाशकारी कार्य को तुरंत रोका जाए। विरासत को बचाने के लिए पंथक बैठक का आह्वान शाही बारादरी के गिरते अस्तित्व को बचाने के लिए अब सिख समुदाय ने संगठित होने का फैसला किया है। इसके तहत आगामी 25 अप्रैल को सुबह 11 बजे शाही बारादरी परिसर में ही पंथक हितैषियों की एक विशेष बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में इस ऐतिहासिक इमारत के संरक्षण और इसके पुनर्निर्माण के लिए रणनीति तैयार की जाएगी। भोमा ने कहा कि यह इमारत पहले से ही प्रशासनिक अनदेखी के कारण खंडहर बन चुकी थी, और अब इस पर किए गए हमले असहनीय हैं। इतिहास की गर्मियों वाली राजधानी का महत्व दीनानगर की शाही बारादरी का अपना एक गौरवशाली इतिहास रहा है। महाराजा रणजीत सिंह अक्सर गर्मियों के महीनों में यहाँ अपना दरबार लगाते थे, जिस कारण इसे 'सरकार खालसा' की गर्मियों वाली राजधानी भी कहा जाता था। यहाँ कई ऐतिहासिक संधियाँ हुईं और सैन्य योजनाएं बनाई गईं। साल 2010 में सरकार ने इसे संरक्षित इमारत का दर्जा दिया था और इसके जीर्णोद्धार के लिए करोड़ों का टेंडर भी जारी हुआ था, लेकिन धरातल पर अब तक कोई काम शुरू नहीं हो सका है। स्थानीय निवासियों और विरासत मंच के सदस्यों ने सरकार से इस ऐतिहासिक गौरव को संरक्षित करने की अपील की है।