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ईरान से इंटरनेट पर बड़ा खतरा, रिपोर्ट में खुलासा, भारत और अन्य देशों में हो सकता है अटैक

नई दिल्ली ईरान के निशाने पर अब दुनिया का इंटरनेट कनेक्शन हो सकता है। खबर है कि IRGC यानी इस्लामिक रिवॉल्युशनरी गार्ड्स कोर से जुड़ी तस्नीम एजेंसी ने फारस की खाड़ी में समुद्र के अंदर मौजूद इंटरनेट केबल का नक्शा जारी कर ऐसे संकेत दिए हैं। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। आशंका जताई जा रही है कि इसका असर भारत पर भी पड़ सकता है। इंटरनेट केबल्स और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर का एक नक्शा तस्नीम की तरफ से जारी किया गया है। अब इस कदम को चेतावनी के तौर पर भी देखा जा रहा है कि फारस की खाड़ी पर अब डिजिटल अटैक किया जा सकता है। बुधवार को प्रकाशित इस रिपोर्ट में खासतौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का जिक्र किया गया है। रिपोर्ट में स्ट्रेट को न सिर्फ एनर्जी के लिहाज से अहम रास्ता बताया गया है। बल्कि, समुद्र के नीचे बिछी केबल्स के लिए भी एक बेहद महत्वपूर्ण गलियारा माना है। ये केबल्स फारस की खाड़ी के देशों को इंटरनेट और संचार सेवाओं से जोड़ती हैं। इनमें यूएई, कतर, बहरीन, कुवैत और सऊदी अरब शामिल हैं। रिपोर्ट में चेतावनी भरे सुर इसमें कहा गया है कि इस जलमार्ग से कई बड़े कबल सिस्टम गुजरते हैं। साथ ही कहा गया है कि ईरान के मुकाबले फारस की खाड़ी इन समुद्री मार्गों पर ज्यादा निर्भर है। खास बात है कि जारी युद्ध के समय डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पहले ही निशाने पर आ चुका था। ऐसे में इस ताजा रिपोर्ट ने डिजिटल अटैक की आशंका को और तेज कर दिया है। भारत के लिए है चिंता की बात? ये समुद्री नेटवर्क ओमान, संयुक्त अरब अमीरात और पाकिस्तान जैसे देशों के लैंडिंग स्टेशन से गुजरता है। खास बात है कि इनमें से कई देश युद्ध की आंच का सामना कर रहे हैं। अब कहा जा रहा है कि दुनिया के बड़े डेटा उपभोक्ता होने के चलते भारत की डिजिटल इकोनॉमी इन कनेक्शन पर काफी निर्भर है। क्या होगा असर आशंकाएं हैं कि अगर किसी तरह की परेशानी आती है, तो लाखों यूजर्स की इंटरनेट स्पीड धीमी हो सकती है। साथ ही क्लाउड सर्विसेज और डिजिटल पेमेंट सिस्टम खासे प्रभावित हो सकते हैं। खास बात है कि इससे पहले फ्रांस की सरकारी कंपनी अल्काटेल सबमरीन नेटवर्क्स ने फोर्स मेजर नोटिस जारी कर दिए हैं। खास बात है कि इस कंपनी ने ही केबल बिछाने की जिम्मेदारी है। फोर्स मेजर का मतलब ऐसी असाधारण घटना से है, जो किसी व्यक्ति या कंपनी के नियंत्रण से बाहर हो, और उस घटना के कारण वह अपना काम या अनुबंध पूरा ना कर पाए।

अधूरे निर्माण के भुगतान के दबाव की खबर भ्रामक, शिक्षा विभाग ने किया खंडन

अधूरे निर्माण के भुगतान के दबाव की खबर भ्रामक, शिक्षा विभाग ने किया खंडन प्रधान अध्यापक की आत्महत्या मामले में पुलिस जांच जारी, विभाग दे रहा पूरा सहयोग रायपुर  बीजापुर जिले में प्रधान अध्यापक की आत्महत्या से जुड़ी हालिया मीडिया रिपोर्ट्स को लेकर जिला मिशन समन्वयक समग्र शिक्षा बीजापुर ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि अधूरे निर्माण कार्य के भुगतान के दबाव जैसी खबरें तथ्यहीन एवं भ्रामक हैं। जिला मिशन समन्वयक, समग्र शिक्षा बीजापुर द्वारा जारी स्पष्टीकरण में कहा गया है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए विभाग निष्पक्ष रूप से पुलिस जांच में पूर्ण सहयोग कर रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत पालनार अंतर्गत प्राथमिक शाला मझारपारा में पदस्थ प्रधान पाठक श्री राजू पुजारी का 22 अप्रैल 2026 को निधन हो गया, जो एक अत्यंत दुखद घटना है। पुलिस द्वारा प्रारंभिक जांच के दौरान मृतक के पास से कुछ पत्र बरामद किए गए हैं, जिनके आधार पर जांच की कार्यवाही जारी है। समग्र शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्राथमिक शाला भवन एवं अतिरिक्त कक्ष का निर्माण कार्य शाला प्रबंधन समिति के माध्यम से कराया गया था, जिसमें प्रधान अध्यापक पदेन अध्यक्ष होते हैं। निर्माण कार्यों के लिए स्वीकृत राशि के अनुरूप प्रथम किस्त का भुगतान नियमानुसार किया गया तथा कार्य पूर्ण होने के पश्चात माप पुस्तिका, पूर्णता प्रमाण पत्र, हस्तांतरण प्रमाण पत्र एवं फोटोग्राफ्स प्राप्त होने पर प्रगति के आधार पर रनिंग बिलों के माध्यम से राशि जारी की गई। विभाग के अनुसार, प्राथमिक शाला भवन एवं अतिरिक्त कक्ष दोनों का निर्माण फरवरी 2026 में पूर्ण हो चुका था तथा शेष 60 प्रतिशत राशि राज्य स्तर से प्राप्त होना लंबित है। भुगतान की प्रक्रिया में किसी प्रकार का दबाव या अनियमितता नहीं पाई गई है। जिला मिशन समन्वयक ने कहा कि कुछ समाचार पत्रों एवं इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों में बिना तथ्यों की पुष्टि के प्रकाशित खबरें भ्रामक हैं, जिससे आमजन में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो रही है। उन्होंने अपील की है कि आधिकारिक जानकारी के आधार पर ही समाचारों का प्रकाशन किया जाए। विभाग ने पुनः स्पष्ट किया है कि इस दुखद घटना के सभी पहलुओं की जांच पुलिस द्वारा की जा रही है और शिक्षा विभाग द्वारा हर स्तर पर सहयोग सुनिश्चित किया जा रहा है।

200MP कैमरे वाला Vivo फोन भारत में होगा लॉन्च, जानें लॉन्च डेट, कीमत और फीचर्स

 नई दिल्ली  वीवो भारत में नए फोन लॉन्च करने जा रहे हैं, जो Vivo X300 सीरीज का हिस्सा होगा. यह लॉन्चिंग 6 मई को होगी. कंपनी पहली बार भारत में Vivo X300 Ultra लॉन्च होगा, जिसमें 200MP के दो कैमरा लेंस होगा।  एक 200MP का प्राइमरी कैमरा और दूसरा 200MP का पेरिस्कोप लेंस है. इस हैंडसेट को हाल ही में इंडियन प्रीमियर लीक (IPL) मैच के दौरान पंजाब के कप्तान श्रेषस अय्यर के साथ स्पॉट किया जा चुका है, जो फोटोग्राफी कर रहे थे. अय्यर का वह फोटो वायरल हो चुका है।  Vivo X300 FE भी भारत में लॉन्च होगा. दोनों ही हैंडसेट में एक्सटर्नल लेंस किट को फिट किया जा सकेगा. इसकी मदद से यूजर्स को बेहतर जूम और क्रिस्प फोटो क्लिक करने में मदद मिलेगी. हाल ही में श्रेयस अय्यर इससे फोटोग्राफी करते हुए नजर आ चुके हैं।  भारत में 6 मई को लॉन्च होगा  Vivo X300 Ultra को 6 मई को दोपहर 12 बजे लॉन्च किया जाएगा, उसके बाद इसकी सेल ईकॉमर्स प्लेटफॉर्म ऐमेजॉन, फ्लिपकार्ट और वीवो के ऑनलाइन स्टोर्स से की जाएगी।  Vivo X300 Ultra के स्पेसिफिकेशन्स  Vivo X300 Ultra के इंडियन पोर्टल पर कुछ स्पेसिफिकेशन्स को कंफर्म किया है. इसमें स्नैपड्रैगन 8 इलाइट का यूज किया जाएगा।  पोर्टल पर लिस्ट डिटेल्स में बताया है कि भारत में लॉन्च होने वाले वीवो एक्स 300 अल्ट्रा में 6600mAh की बैटरी दी जाएगी, जिसके साथ 100W का वायर्ड फास्ट चार्जर और 40W का वायरलेस चार्जिंग मिलता है।  Vivo X300 Ultra पहले ही चीन में लॉन्च हो चुका है, जहां इसके स्पेसिफिकेशन्स को रिवील किया जा चुका है. कीमत भी करीब 1 लाक रुपये रखी है और भारत में भी कीमत करीब इतनी हो सकती है।  सैमसंग और शाओमी से होगी कांटे की टक्कर  Vivo X300 Ultra का मुकाबला सैमसंग और सैमंसग के हाइ एंड स्मार्टफोन से होगा. वीवो के इस हैंडसेट की टक्कर सैमसंग गैलेक्सी एस 26 अल्ट्रा और शाओमी 17 अल्ट्रा से होगी.. 

ब्यावरा में 21 मीटर चौड़ी फोरलेन सड़क का निर्माण, खाटू श्याम मंदिर पहुंचना होगा आसान

ब्यावरा  नेशनल हाईवे का संगम कहे जाने वाले ब्यावरा शहर को अब नई रफ्तार मिलने जा रही है। लगातार बढ़ते ट्रैफिक और हादसों के चलते अब आधुनिक ग्रेड सेपरेटेड फोरलेन बायपास बनने जा रहा है, जो न सिर्फ ट्रैफिक को व्यवस्थित करेगा बल्कि सुरक्षित सफर भी संभव बनाएंगा। करीब 66 करोड़ से अधिक की लागत से बनने वाले उक्त प्रोजेक्ट का काम भी शुरू हो चुका है। खास बात यह है कि इस बार पुराने अनुभवों से सीख लेकर डिजाइन तैयार किया गया है, ताकि हाईवे और लोकल ट्रैफिक पूरी तरह अलग रह सके। बायपास पर हाईवे का ट्रैफिक पूरी तरह सेपरेट रहेगा, यानी फोरलेन बायपास में एंट्री पूरी तरह बंद रहेगी। वहीं लोकल के ट्रैफिक के लिए दोनों तरफ सर्विस रोड बनेगा। जिससे आए दिन होने वाले सड़क हादसों से राहत मिलेगी।  दो हिस्सों में काम, मार्च-2027 डेडलाइन उक्त प्रोजेक्ट को अक्टूबर-2025 में स्वीकृति मिली। जिसकी शुरूआत में लागत 96 करोड़ रुपए थी, लेकिन बाद में 66.37 करोड़ रुपए हो गई। प्रोजेक्ट का काम अब शुरू हो चुका है। दो हिस्सो में इसका काम होना है। जिसमें पहला हिस्सा खाटू श्याम मंदिर से गुना बायपास और दूसरा हिस्सा, राजगढ़ बायपास से भोपाल बायपास शामिल है। जिसकी कुल लंबाई करीब करीब 3.5 किमी है। डेढ़ साल में इसका काम पूरा करना है। यानी मार्च-2027 तक बायपास पूरी तरह तैयार हो जाए। 21 मीटर चौड़ा होगा मुख्य फोरलेन खाटू श्याम मंदिर से लेकर भोपाल बायपास तक सेपरेटेड बायपास बनने जा रहा है। जिसमें वर्तमान प्रोजेक्ट में मुख्य सड़क की चौड़ाई करीब 10.5 मीटर होगी, ऐसे में मुख्य फोरलेन करीब 21 मीटर चौड़ा होगा। इनके बीच में 2.5 मीटर चौड़ा डिवाइडर रहेगा। साथ ही पैब्ड शोल्डर भी रहेंगे। फोरलेन के दोनों ओर 7-7 मीटर चौड़ी सर्विस रोड तैयार की जाएगी। सर्विस रोड के बगल दोनों तरफ 1.5 मीटर की नालियां भी बनेगी। अरनिया और फूंदा बाजार के पास दो अंडरपास हाईवे से लोकल के ट्रैफिक को सीधे मिलने से रोकने के लिए दो जगह अंडरपास निर्माण किया जा रहा है। जिसमें पहला बहुप्रतीक्षित अरनिया जोड़ का शामिल है। वहीं दूसरा अंडरपास फूंदा बाजार और राजगढ़ बायपास के बीच रेलवे अंडरपास के पास बनने जा रहा है। दोनों अंडरपास करीब 12 मीटर चौड़े और 5.5 मीटर ऊंचे होंगे। ऐसे में करीब 250 मीटर तक दोनों अंडरपास के आसपास एलिवेडेट जैसा मार्ग होगा। खाटू श्याम मंदिर तक अलग से बनेगा पूरा मार्ग दरअसल पहले हाईवे पर खाटू श्याम मंदिर नहीं होने से उसी हिसाब से प्रोजेक्ट डिजाइन किया गया था। खाटू श्याम मंदिर तक जाने के लिए अलग मार्ग भी नहीं है। हाईवे से ही मंदिर जाना पड़ता है। भीड़ अधिक होने से हाईवे पर हादसों का डर रहता है। ऐसे में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मांग और कलेक्टर के निर्देश पर अब खाटू श्याम मंदिर तक भी फोरलेन से साइड में अलग से रोड बनाने को योजना बनाई गई है। प्रोजेक्ट लागत बढ़ाकर मंदिर तक सेपरेट रोड बनाया जाएगा। एक नजर में प्रोजेक्ट की स्थिति-     66.37 करोड़ कुल लागत     3.5 किमी लंबाई     10.5 मीटर फोरलेन (एकतरफा)     7-7 मीटर सर्विस रोड     50 मीटर चौड़ाई कुल     02 अंडरपास     मार्च-2027 तक पूरा करना काम (नोट- दो हिस्सो में बन रहा बायपास- अरनिया जोड़ से गुना बायपास और राजगढ़ बायपास से भोपाल बायपास।) बायपास का निर्माण शुरू बायपास निर्माण का काम शुरू करा दिया गया है। जिसमें दो अंडरपास और सर्विस रोड सहित नालियों का काम होना है। फोरलेन बायपास में कई तकनीकी सुधार किए गए है। हाईवे का ट्रैफिक पूरी तरह अलग किया जाएगा।- देवांश नुअल, रीजनल मैनेजर, एनएचएआई, भोपाल दो हिस्सों में होगा काम प्रोजेक्ट का काम दो हिस्सों में होना है। दोनों जगह काम शुरू कर दिए है। मार्च-2027 तक काम पूरा करना है। अभी नालियों का काम कर रहे है, सर्विस रोड के लिए जगह बनाकर मुख्य हिस्से का काम कराएंगे।- निरंजन ठाकुर, प्रोजेक्ट मैनेजर, गोर्डेक निर्माण एजेंसी

‘पति से नहीं, उसके साथ रहूंगी…’, 2 शादीशुदा महिलाओं का प्यार, साथ रहने का लिया फैसला

विदिशा  मप्र के विदिशा जिले में रिश्तों के बदलते स्वरूप और सामाजिक ताने-बाने को चुनौती देने वाला एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस प्रशासन को भी हैरत में डाल दिया है। दो विवाहित महिलाएं एक-दूसरे के साथ जीवन बिताने की जिद पर अड़ी हैं। इससे उपजा विवाद अब थाने की दहलीज तक जा पहुंचा है। इस उलझे हुए रिश्ते की कहानी तब उजागर हुई जब एक पीड़ित पति ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर अपनी पत्नी से तलाक दिलाने और दूसरी महिला के खिलाफ कार्रवाई की गुहार लगाई। बीते दिन जनसुनवाई के दौरान एएसपी डॉ. प्रशांत चौबे के पास आवेदकों की लंबी कतार थी। अपनी बारी का इंतजार कर रहे एक युवक का आवेदन जब अधिकारी के हाथ में पहुंचा, तो वे भी चौंक गए। महिला ने स्वयं स्वीकार किया युवक ने अपनी पत्नी के किसी और पुरुष के साथ नहीं, बल्कि एक अन्य विवाहित महिला के साथ समलैंगिक संबंधों का हवाला देते हुए सुरक्षा और न्याय की मांग की थी। पीड़ित पति ने आवेदन में बताया कि उसकी शादी महज एक साल पहले जिले के ही दूसरे थाना क्षेत्र की एक युवती से हुई थी। विवाह के बाद से ही स्थितियां सामान्य नहीं थीं।  एक साल के भीतर उसकी पत्नी केवल दो-तीन बार ही ससुराल आई। जांच-पड़ताल और बातचीत में खुलासा हुआ कि पत्नी के मायके में रहने वाली उसकी एक हमउम्र रिश्तेदार महिला के साथ प्रगाढ़ संबंध हैं। पति का दावा है कि उक्त महिला ने स्वयं स्वीकार किया है कि उन दोनों के बीच समलैंगिक संबंध हैं और वे आपस में समलैंगिक विवाह भी कर चुकी हैं। परेशान पति तलाक देने को है तैयार मानसिक और सामाजिक प्रताडऩा से टूट चुके है। तलाक देने के लिए तैयार पति मानसिक और सामाजिक प्रताडऩा से टूट चुके पति अपनी पत्नी को तलाक देने के लिए तैयार है। उसने पुलिस से मांग की है कि पिछले 15 दिनों से जांच के नाम पर रखा गया उसका मोबाइल वापस दिलाया जाए। उसे तलाक दिलाया जाए। तीन शादियां कर चुकी है महिला फरियादी ने मामले की गंभीरता बताते हुए कहा कि जिस महिला के मोहपाश में उसकी पत्नी है, वह पहले ही तीन शादियां कर चुकी है और तीनों पतियों को छोड़ चुकी है। आरोप है कि दो महीने पहले वह महिला कुछ अज्ञात लोगों के साथ फरियादी के घर पहुंची और उसे जान से मारने की धमकी देते हुए पत्नी को छोडऩे का दबाव बनाया। इतना ही नहीं, वह महिला सोशल मीडिया पर अनर्गल वीडियो डालकर युवक को बदनाम कर रही है और थाने में उसके खिलाफ झूठी शिकायतें भी दर्ज कराई गई हैं। आवेदन प्राप्त हुआ है। चूंकि मामला काफी पेचीदा और संवेदनशील है, इसलिए तीनों पक्षों (पति, पत्नी और दूसरी महिला) के बयान दर्ज होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। जांच के बाद ही वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। डॉ. प्रशांत चौबे, एडिशनल एसपी, विदिशा

मायावती कर रहीं SIR के नफा-नुकसान का विश्लेषण, बसपा नई रणनीति के तहत कैंडिडेट का चयन कर रही है

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव की हलचल तेज हो गई है. सपा प्रमुख अखिलेश यादव मिशन-2027 का बिगुल फूंक चुके हैं और एक के बाद एक चुनावी घोषणाएं भी शुरू कर दी है. बीजेपी भी सत्ता की हैट्रिक लगाने के लिए हरसंभव कोशिश में जुटी है और सीएम योगी भी सड़क पर उतरकर सपा-कांग्रेस को महिला विरोधी कठघरे में खड़े करने में जुटे हैं।  सपा और बीजेपी के बीच सिमटती यूपी की सियासत को बसपा प्रमुख मायावती त्रिकोणीय बनाने की कवायद में है, जिसके लिए पार्टी नेताओं के साथ लगातार बैठकें भी कर रही हैं. मायावती ने 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए अपने संभावित उम्मीदवारों के नाम का ऐलान भी शुरू कर दिया था, लेकिन अब एसआईआर प्रक्रिया के बाद उन्होंने अपनी रणनीति में बदलाव किया है।  2027 का चुनाव बसपा के लिए सियासी वजूद को बचाए रखने का है. यही वजह है कि मायावती सूबे में हुई एसआईआर अभियान से हुए फायदे और नुकसान का आकलन कर रही है, उसके लिहाज से पार्टी उम्मीदवारों का सेलेक्शन करेगी. इसके लिए मायावती ने काम भी शुरू कर दिया है. ऐसे में सवाल उठता है कि मायावती क्या बसपा को दोबारा से खड़ा कर पाएंगी?  बसपा कैंडिडेट सेलेक्शन में जुटी मायावती मायावती ने 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए अपनी चुनावी तैयारियों को धार देना शुरू कर दिया है. मायावती के नेतृत्व में बसपा अपनी पुरानी सोशल इंजीनियरिंग को फिर से अपनाने की कोशिश में है. बसपा ने 2027 के लिए उम्मीदवारों के नाम का ऐलान शुरू कर दिया था. सूबे की 40-50 सीटों पर बसपा ने विधानसभा प्रभारी बनाकर  संभावित उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने की हरी झंडी दे दी थी, लेकिन एसआईआर प्रक्रिया के बाद उन्होंने अपनी रणनीति में बदलाव किया है।  यूपी में हुए मतदाता सूची पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान से हुए फायदे-नुकसान का बसपा आकलन कर रही है. मायावती ने पिछले दिनों अपने 15 हजार बूथ कमेटियों से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी है, जिसके आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी. बसपा ने एसआईआर अभियान में सक्रिय रूप से भाग लिया था ताकि उसके समर्थकों का नाम मतदाता सूची में बरकरार रहे. बसाप इसी आधार पर चुनावी रणनीति बनाएगी और 2027 के लिए प्रत्याशी चयन होगा।  एसआईआर के लिहाज से कैंडिडेट का चयन बसपा के एक बड़े नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पिछले दिनों लखनऊ में हुई बैठक में मायावती ने बूथ कमेटियों से रिपोर्ट मांगी है. एसआईआर अभियान में जिन पदाधिकारियों ने सक्रिय भूमिका निभाई, उन्हें टिकट चयन में तवज्जो दी जाएगी. खासकर जिलों में जिन संभावित प्रत्याशियों को प्रभारी बनाया गया था, उनके बारे में रिपोर्ट मिलने के बाद उनकी दावेदारी पर फैसला लिया जाएगा।  बसपा सुप्रीमो मायावती खुद इस मामले की गहनता से समीक्षा कर रही हैं. उन्होंने बसपा के प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल से इस बाबत सभी जिलों से रिपोर्ट मंगाने को कहा है। खासकर पार्टी के प्रभाव वाले क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या कम होने के बारे में बताने को कहा गया है ताकि जिनके नाम मतदाता सूची में शामिल होने से रह गए हैं, उनको आगे जुड़वाया जा सके।  कास्ट समीकरण से उम्मीदवारी पर मुहर मायावती के नेतृत्व में बसपा अपनी पुरानी सोशल इंजीनियरिंग को फिर से अपनाने की कोशिश में है. 2027 के लिए बसपा के कैंडिडेट सेलेक्शन के लिए सीट के समीकरण का भी आकलन किया जा रहा, खासकर जाति केमिस्ट्री देखी जा रही है. मायावती ने रणनीति बनाया है कि एसआईआर से सीट पर किस समाज के वोट घटे हैं और मौजूदा समय में किस समाज से वोट बढ़े हैं, उसके आकलन पर टिकट वितरण किया जा रहा।  बसपा ने मिशन-2027 के लिए प्लान बनाया है कि प्रत्येक विधानसभा सीट पर चार-चार दावेदारों का पैनल बनाकर उनको कसौटी पर परखा जा रहा है. इन्हीं में से एक को पहले विधानसभा क्षेत्र प्रभारी और बाद में प्रत्याशी घोषित कर दिया जाएगा. बसपा इस काम के लिए अपने वरिष्ठ नेताओं की एक पूरी टीम लगा रखी है,जिसमें पार्टी के मंडल और जोनल कोऑर्डिनेटर शामिल है।  मायावती अपने जोनल कोऑर्डिनेटर के जरिए सीट के जातीय समीकरण की रिपोर्ट लेती हैं और उसके बाद कैंडिडेट के चयन के लिए तय करती हैं कि किस जाति का होना चाहिए. इसके लिए जोनल कोऑर्डिनेटर को फिर उस जाति से उम्मीदवार के तलाश करने का टारगेट देती हैं. इसके बाद चार नाम का पैनल बनाकर दिया जाता है, जिसमें से मायावती किसी एक नाम को अपनी मंजूरी देती है. इसके बाद जोनल कोऑर्डिनेटर उसे प्रभारी बनाने के ऐलान करती हैं, जो चुनाव के समय प्रत्याशी होगा।  2007 के फार्मूले से 2027 जीतने का प्लान  उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव मायावती ने अकेले दम पर लड़ने का प्लान बनाया है. बसपा के प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल साफ कहा कि बसपा इस बार पारंपरिक गठबंधनों से अलग राह पर चलेगी और समय से पहले कैंडिडेट घोषित कर दिए जाएंगे. प्देश अध्यक्ष का यह बयान बसपा की पुरानी 'सोशल इंजीनियरिंग' रणनीति की पुनर्वापसी का संकेत है,जिसके सहारे 2007 में पार्टी ने प्रचंड बहुमत हासिल किया था।  बसपा का फोकस मुस्लिम-ब्राह्मण-दलित समीकरण पर है. इस तरह आगामी विधानसभा चुनाव के लिए बसपा संगठन और प्रत्याशियों का पैमाना तैयार किया है. ब्राह्मण और मुस्लिम कैंडिडेट को चुनावी मैदान में उतारकर और दलितों को संगठन के माध्यम से जोड़कर काम करने की योजना बनाई गई है. बसपा ने 2007 में इसी दांव से सत्ता पर काबिज हुई थी।  मायावती ने 2007 में परंपरागत दलित वोटों के साथ-साथ ब्राह्मण और मुस्लिम वोटरों को लेकर मैदान में उतरीं और इस सोशल इंजीनियरिंग ने विपक्षी दलों को चुनावी रण में धराशाई कर दिया. अब मायावती उसी फॉर्मूले को फिर आजमाना चाह रही हैं।  मायावती पिछले 3 महीने में हुई सभी बैठकों मैं यह बात कहती रही हैं कि ब्राह्मण-मुस्लिम और दलित गठजोड़ के साथ वह 2027 के विधानसभा चुनाव में जाएंगी और एक बार फिर से सत्ता में पूर्ण बहुमत के साथ वापसी करेंगी. अब लखनऊ से दिल्ली  वापस आ गई हैं, जहां से पश्चिमी यूपी के सियासी समीकरण को मजबूत करने की कवायद करेंगी?   

इंदौर की किसान दीदी ने 600 बीघा खेत बचाए, पराली न जलाने की अलख जागृत की

सफलता की कहानी इंदौर की किसान दीदी ने जगाई पराली नहीं जलाने की अलख, 600 बीघा खेत बचाए भोपाल  उत्तर भारत में फसल कटाई के बाद पराली जलाने की समस्या लंबे समय से बनी हुई है लेकिन मध्यप्रदेश के इंदौर जिले के धुलेट गांव में एक महिला किसान ने इस प्रवृति को बदलने की दिशा में मिसाल पेश की है। गांव की रहने वाली श्रीमती पपीता रावत ने न केवल किसानों को जागरूक किया, बल्कि वैकल्पिक समाधान देकर पराली जलाने पर रोक लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। स्वयं सहायता समूह से शुरू हुआ सफर श्रीमती पपीता रावत, जो एक स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष है ने अपनी यात्रा आजीविका मिशन से जुड़कर शुरू की। शुरुआती आर्थिक तंगी के बीच उन्होंने सिलाई कार्य से शुरुआत की। कृषि गतिविधियों में रूचि के चलते बाद में स्व-सहायता समूह और बैंक से ऋण लेकर स्ट्रा रीपर मशीन खरीदी। इसके बाद उन्होंने गांव और आसपास के किसानों को पराली जलाने के नुकसान और उससे भूसा बनाने के फायदे समझाए। 600 बीघा खेत में पराली जलाने से बचाया जिले के धुलेट गांव के आसपास दूर-दूर तक कोई भी किसान अब अपने खेत में पराली (गेहूं कटाई के बाद बचे हुए ठूंठ,अवशेष) नहीं जलाता। इसका कारण महिला किसान श्रीमती पपीता रावत है। पपीता रावत बताती है -"शुरुआती दिनों में मैं घर ही रहती और मेरे पति महेश मजदूरी करने जाते थे। घर में तंगी बनी रहती। एक दिन गांव में आजीविका मिशन के अधिकारी आए। द्वारकाधीश सेल्फ हेल्प ग्रुप बनाया। सिलाई मशीन ली और काम शुरू किया। इसके बाद मैंने लोन लेकर 'स्ट्रा रीपर मशीन' खरीद ली। गांव सहित आसपास के किसान परिवारों को पराली जलाने के नुकसान और भूसा तैयार करने के फायदे बताए। देखते ही देखते इस साल हमने 600 बीघा से ज्यादा खेत में फसल कटने के बाद पराली जलने से बचा लिया। इस बार पराली से भूसा तैयार कर किसानों को लाभ पहुंचाया। वे इसका उपयोग मवेशियों के 'केटल फीड' के रूप में कर रहे है। डे आजीविका मिशन के जिला प्रबंधक गायत्री राठौड़ बताती है-"इस समूह को विलेज ऑर्गेनाइज़ेशन के साथ आस्था संकुल संगठन खुड़ैल से जोड़ा गया। किसान दीदी के रूप में पपीता रावत बेहतर काम कर रही ही है। पशु पालन से जुड़कर भी चार मवेशियों के माध्यम से दूध उत्पादन का व्यवसाय भी कर रही है।" पराली जलाने से यह होता है नुकासान कृषि वैज्ञानिकों का कहना है किसानों द्वारा पराली जलाने की मानसिकता बनी हुई है। प्रदेश में ही सैकड़ों एकड़ खेत में पराली जलाने से उनकी उपजाऊ क्षमता दांव पर लगी हुई है। वैज्ञानिकों के अनुसार "पराली जलाने से जहां अगले सीज़न में फसल उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है वहीं पराली (सूखी फसल अवशेष या STUBBLE) जलाने से CO2 (कॉर्बन डाय ऑक्साइड), नाइट्रोजन ऑक्साइड सहित हानिकारक गैस बनती है जिससे ग्लोबल वॉर्मिंग प्रभावित होती है। मिट्टी उर्वरता (सॉइल फर्टिलिटी) के साथ सूक्ष्मजीव और बैक्टीरिया नष्ट हो जाते है।" जिला प्रशासन और कृषि विभाग पराली न जलाने के लिए किसानों को जागरूक कर रहा है। यहां तक कि पराली जलाने पर जुर्माने का भी प्रावधान है। प्रशासन भी कर रहा प्रोत्साहित जिला पंचायत इंदौर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सिद्धार्थ जैन ने बताया कि जिला प्रशासन और कृषि विभाग पराली नहीं जलाने के लिए लगातार जागरूकता अभियान चला रहे है और नियमों के तहत जुर्माने का प्रावधान भी है। अधिकारियों का कहना है कि श्रीमती रावत जैसी किसान दीदियां न केवल खुद आत्मनिर्भर बन रही है, बल्कि समाज और कृषि क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। धुलेट गांव की यह पहल दिखाती है कि जागरूकता, नवाचार और सामूहिक प्रयास से पराली जताने जैसी गंभीर समस्या का समाधान संभव है। आने वाले समय में ऐसी पहलें कृषि सुधार और पर्यावरण संरक्षण में अहम भूमिका निभा सकती है।  

प्रधानमंत्री मोदी के आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को पूरा कर रहा है मध्यप्रदेश: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

प्रधानमंत्री मोदी के आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को पूर्ण कर रहा है मध्यप्रदेश: मुख्यमंत्री डॉ. यादव पीएम स्वनिधि योजना में मध्यप्रदेश का देश में शीर्ष स्थान इंदौर, भोपाल और जबलपुर ने राष्ट्रीय स्तर पर अर्जित की विशिष्ट उपलब्धि भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना में मध्यप्रदेश की गौरवशाली उपलब्धियों पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रदेश के पथ-विक्रेता स्ट्रीट वेण्डर आज आत्मनिर्भरता की नई ऊंचाइयों को स्पर्श कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश ने इस योजना के सफल क्रियान्वयन में देशभर में अग्रणी रहते हुए एक अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया है, जो अंत्योदय और समावेशी विकास के प्रति हमारी सरकार की अटूट प्रतिबद्धता का परिचायक है। इंदौर, भोपाल और जबलपुर की ऐतिहासिक सफलता मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नगरीय निकायों द्वारा राष्ट्रीय रैंकिंग में अर्जित किए गए उत्कृष्ट स्थान की सराहना करते हुए बताया कि इंदौर नगर निगम ने नवीन पीएम स्वनिधि योजना के अंतर्गत 33,332 ऋण प्रकरणों के वितरण के साथ देश के समस्त नगरीय निकायों में प्रथम स्थान प्राप्त कर प्रदेश को गौरवान्वित किया है। देश में 10 लाख से 40 लाख की जनसंख्या वाली श्रेणी में भोपाल ने देशभर में द्वितीय और जबलपुर ने तृतीय स्थान प्राप्त कर विकास के मानकों में अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की है।डॉ. यादव ने कहा कि यह उपलब्धि केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे छोटे व्यापारियों और रेहड़ी-पटरी वाले भाई-बहनों के जीवन में आए सकारात्मक परिवर्तन का प्रतिबिंब है। पथ-विक्रेताओं के जीवन में आ रहा गुणात्मक परिवर्तन योजना के विस्तार पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि प्रदेश में अब तक 9.92 लाख से अधिक पथ-विक्रेताओं को इस योजना का लाभ प्राप्त हुआ है। 15.69 लाख ऋण प्रकरणों के माध्यम से 2632 करोड़ रुपये की ऋण राशि सीधे हितग्राहियों तक पहुँचाई गई है। योजना के पुनर्गठित स्वरूप में अब 15 हजार, 25 हजार और 50 हजार रुपये की क्रमिक ऋण सहायता के साथ-साथ 30,000 रुपये की सीमा वाला यूपीआई-लिंक्ड क्रेडिट कार्ड भी प्रदान किया जा रहा है, जिससे उनकी कार्यशील पूंजी की आवश्यकताएं सुगमता से पूर्ण हो रही हैं। डिजिटल क्रांति और छोटे निकायों का उत्कर्ष मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने डिजिटल साक्षरता की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश के 7 लाख से अधिक पथ-विक्रेता डिजिटल लेन-देन अपना चुके हैं, जिन्हें 47 करोड़ रुपये से अधिक का कैशबैक प्राप्त हुआ है। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि 1 लाख से कम आबादी वाले निकायों में सारणी नगर पालिका ने देशभर में प्रथम स्थान प्राप्त कर यह सिद्ध कर दिया है कि संकल्प शक्ति हो तो छोटे निकाय भी राष्ट्रीय पटल पर अपनी पहचान स्थापित कर सकते हैं। इसी श्रेणी में बालाघाट (5वें), टीकमगढ़ (7वें)और हरदा (9वें)के प्रदर्शन को भी उन्होंने अनुकरणीय बताया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्वास व्यक्त किया कि 31 मार्च, 2030 तक विस्तारित यह योजना आगामी समय में मध्यप्रदेश के नगरीय अर्थतंत्र को नई गति प्रदान करेगी और समाज के अंतिम पंक्ति के व्यक्ति को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का सशक्त माध्यम बनेगी।  

सरकार की योजना: ₹10,000 पेंशन की संभावना, ये लोग होंगे सबसे बड़े लाभार्थी

नई दिल्ली भारत सरकार इनफॉर्मल वर्कर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाने की योजना बना रही है। बढ़ती महंगाई और रिटायर लोगों के बढ़ते खर्च को देखते हुए, सरकार अटल पेंशन योजना (APY) के तहत दी जाने वाली न्यूनतम पेंशन की अपर लिमिट को बढ़ाकर ₹10,000 प्रति माह करने पर विचार कर रही है। मिंट ने यह जानकारी तीन अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर दी है। बता दें भारत में नफॉर्मल वर्कर्स वे श्रमिक हैं, जो असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं। यहां नौकरी की सुरक्षा, फिक्स्ड सैलरी, या सामाजिक सुरक्षा (PF, पेंशन, छुट्टी) का अभाव होता है। ये देश के कुल वर्कफोर्स का लगभग 90% हिस्सा हैं, जिनमें रेहड़ी-पटरी वाले, घरेलू कामगार, मजदूर और स्वरोजगार करने वाले शामिल हैं। क्यों जरूरी है यह बदलाव? अटल पेंशन योजना मई 2015 में शुरू की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य असंगठित क्षेत्र के मजदूरों, किसानों, दुकानदारों और छोटे व्यवसायियों को बुढ़ापे में आर्थिक सहारा देना है। अभी इस योजना के तहत 60 साल की उम्र के बाद ₹1,000 से ₹5,000 प्रति माह तक की गारंटीड पेंशन दी जाती है। लेकिन बढ़ती कीमतों के कारण यह राशि कम पड़ रही है। मौजूदा हालात क्या हैं? अटल पेंशन योजना में अब तक 9 करोड़ से अधिक सदस्य जुड़ चुके हैं, लेकिन इनमें से लगभग आधे सदस्य नियमित योगदान देना बंद कर चुके हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक के सबसे ज्यादा 1.35 करोड़ नए सदस्य जुड़े हैं। सरकार का मानना है कि पेंशन की लिमिट बढ़ाने से नए सदस्य जुड़ेंगे और पुराने सदस्य योजना में बने रहेंगे। नया प्रस्ताव क्या है? वित्त मंत्रालय और पेंशन फंड नियामक (PFRDA) मिलकर इस प्रस्ताव पर काम कर रहे हैं। संभावना है कि पेंशन की अपर लिमिट ₹8,000 से ₹10,000 प्रति माह कर दी जाए।एक अधिकारी ने बताया , “यह बदलाव योजना को और आकर्षक बनाएगा और बढ़ती जीवन-लागत के अनुसार ढालेगा।” सरकार का कितना योगदान जो सदस्य 31 मार्च 2016 से पहले जुड़े थे, उन्हें शुरुआती पांच साल में सरकार की तरफ से को-कंट्रीब्यूशन मिलता था। यह रकम सदस्य के योगदान का 50% (अधिकतम ₹1,000 प्रति वर्ष) थी। यह सुविधा केवल उन्हीं को मिलती थी, जो इनकम टैक्स का भुगतान नहीं करते थे और किसी अन्य सामाजिक सुरक्षा योजना से नहीं जुड़े थे। कैसे होगा योजना का विस्तार? सरकार 'पेंशन सखी' और बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट (BC) के जरिए गांव-गांव तक योजना पहुंचाने की योजना बना रही है। साथ ही, निरंतर योगदान की चुनौती पर भी काम हो रहा है।26 जनवरी 2026 को कैबिनेट ने इस योजना को वित्त वर्ष 2031 तक जारी रखने की मंजूरी दी। प्रचार, विकास और गैप-फंडिंग गतिविधियों के लिए भी मदद जारी रहेगी। क्या सरकार के खजाने पर पड़ेगा बोझ? विशेषज्ञों का कहना है कि इस बदलाव से सरकारी खजाने पर अधिक दबाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि अटल पेंशन योजना ज्यादातर सदस्यों के अपने योगदान पर चलती है। ग्रांट थॉर्नटन के विवेक अय्यर कहते हैं, “APY एक निर्धारित-योगदान वाली योजना है। सुरक्षा ही इसका मुख्य उद्देश्य है। इसलिए इस बदलाव से सरकार पर कोई बड़ा वित्तीय दबाव नहीं पड़ेगा।”

राफेल डील पर भारत ने तय की लक्ष्मण रेखा, शर्त नहीं मानी तो सौदा रद्द, फ्रांस को ₹325000 करोड़ का भारी नुकसान

नईदिल्ली  भारत अपने डिफेंस सिस्‍टम को अपग्रेड करने और उसे मॉडर्न एज वॉरफेयर के लेवल तक लाने के लिए हर संभव कोशिश कर रहा है. स्‍वदेशी तकनीक से नेक्‍स्‍ट जेनरेशन फाइटर जेट डेवलप करने के लिए AMCA प्रोग्राम लॉन्‍च किया गया है. इसके तहत 5th और 6th जेनरेशन का फाइटर जेट डेवलप किया जाना है. इसके साथ ही एयरस्‍पेस को अभेद्य किला बनाने के लिए मिशन सुदर्शन चक्र नाम से नेशनल एयर डिफेंस प्रोग्राम भी शुरू किया गया है. S-400 के साथ ही अन्‍य देसी डिफेंस सिस्‍टम इसका हिस्‍सा हैं. साल 2035 तक इसे पूरी तरह से अमल में लाने का लक्ष्‍य रखा गया है. इसके तहत कई एंटी मिसाइल, एंटी ड्रोन और एंटी एयरक्राफ्ट सिस्‍टम डेवलप किए गए हैं और किए जा रहे हैं. मिसाइल के क्षेत्र में भी भारत ने कई उपलब्धियां हासिल की हैं. अग्नि सीरीज की मिसाइलों के साथ ही ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल इसका उदाहरण हैं. फाइटर जेट के मामले में भारत अभी भी इंपोर्ट पर निर्भर है. इसी क्रम में फ्रांस की डसॉल्‍ट एविएशन के साथ 114 राफेल फाइटर जेट खरीदने के प्रस्‍ताव को हरी झंडी दी गई है. यह सौदा तकरीबन 3.25 लाख करोड़ बताया जा रहा है. हालांकि, अब इस डील में नया पेच फंसता दिख रहा है. दरअसल, भारत ने राफेल डील के तहत इंटरफेस कंट्रोल डॉक्‍यूमेंट (ICD) तक पहुंच की शर्त रखी है. भारतीय पक्ष का कहना है कि यदि फ्रांस के साइड से इस शर्त का पालन नहीं किया गया तो भारत इस डील से पूरी तरह से बाहर निकल सकता है. ऐसे में अब फ्रांस पर निर्भर करता है कि 114 राफेल फाइटर जेट की महाडील आगे बढ़ती है या फिर बीच रास्‍ते ही दम तोड़ती है।  दरअसल, भारत के बहुप्रतीक्षित मीडियम रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) कार्यक्रम में 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को लेकर बातचीत निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है. करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये के इस मेगा सौदे में अब इंटरफेस कंट्रोल डॉक्यूमेंट (ICD) सबसे अहम मुद्दा बनकर उभरा है, जो इस डील के भविष्य का फैसला कर सकता है. रक्षा मंत्रालय (MoD) के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, भारत को ICD तक पहुंच मिलने को लेकर भरोसा तो है, लेकिन यदि फ्रांस की ओर से इसमें किसी तरह की अनिच्छा दिखाई जाती है, तो नई दिल्ली इस सौदे से पूरी तरह पीछे हटने का कड़ा फैसला भी ले सकती है. यह रुख भारत की रक्षा खरीद नीति में एक बड़ा बदलाव दर्शाता है, जहां अब तकनीकी पहुंच और ऑपरेशनल ऑटोनॉमी को अनिवार्य शर्त के रूप में देखा जा रहा है, न कि एक अतिरिक्त सुविधा के रूप में. ‘इंडियन डिफेंस रिसर्च विंग’ की रिपोर्ट के अनुसार, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह के नेतृत्व में ICD के महत्व को और अधिक बढ़ाया गया है. फरवरी 2026 में रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) से मंजूरी मिलने के बाद MRFA कार्यक्रम अब सिर्फ विमानों की खरीद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह भारत की दीर्घकालिक सामरिक आत्मनिर्भरता से जुड़ गया है. सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि भविष्य में किसी भी अपग्रेड या वेपन इंटीग्रेशन के लिए विदेशी कंपनियों पर निर्भरता कम की जाए।  डिजिटल इंटरफेस फ्रेमवर्क तकनीकी रूप से ICD एक मानकीकृत डिजिटल इंटरफेस फ्रेमवर्क होता है, जो विमान के मिशन कंप्यूटर और बाहरी सिस्टम जैसे हथियारों के हार्डपॉइंट्स के बीच हैंडशेक का काम करता है. यदि भारत को ICD मिल जाता है, तो भारतीय इंजीनियर बिना मूल निर्माता के सोर्स कोड तक पहुंचे ही स्वदेशी हथियारों का फाइटर जेट में इंटीग्रेशन कर सकेंगे. इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि लागत भी काफी कम हो जाएगी. पहले 36 राफेल विमानों की खरीद में भारत को हर नए गैर-फ्रांसीसी हथियार को जोड़ने के लिए डसॉल्ट एविएशन पर निर्भर रहना पड़ा था. इस प्रक्रिया में अतिरिक्त लागत और लंबा समय लगता था, जिससे ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी प्रभावित होता था. हर नए हथियार के लिए अलग से बातचीत करनी पड़ती थी, जिससे पूरे सिस्टम की दक्षता पर असर पड़ता था. अब MRFA कॉन्‍ट्रैक्‍ट में ICD को शामिल करके भारत शुरुआत से ही इंटीग्रेशन फ्रीडम सुनिश्चित करना चाहता है. इसके तहत स्वदेशी हथियारों जैसे अस्त्र सीरीज (Mk1, Mk2, Mk3) की बीवीआर मिसाइलें, रुद्रम एंटी-रेडिएशन मिसाइल और स्मार्ट एंटी-एयरफील्ड वेपन (SAAW) जैसे प्रिसीजन गाइडेड म्यूनिशन को आसानी से जोड़ा जा सकेगा।  ICD क्‍यों है इतना अहम?     आईसीडी की अहम भूमिका: तकनीकी तौर पर ICD (Interface Control Document) एक मानकीकृत डिजिटल इंटरफेस फ्रेमवर्क है, जो विमान के मिशन कंप्यूटर और बाहरी सिस्टम के बीच हैंडशेक लेयर का काम करता है।      सिस्टम के बीच समन्वय: यह फ्रेमवर्क तय करता है कि विमान के मिशन कंप्यूटर और हथियार हार्डपॉइंट्स जैसे बाहरी सिस्टम आपस में कैसे संवाद करेंगे।      स्वदेशी क्षमता को बढ़ावा: ICD हासिल होने से भारतीय इंजीनियरों को स्वदेशी हथियारों को विमान में इंटीग्रेट करने की क्षमता मिलती है।      निर्माता पर निर्भरता कम: इसके जरिए मूल उपकरण निर्माता (OEM) के मालिकाना सोर्स कोड तक पहुंच की जरूरत नहीं रहती, जिससे विदेशी निर्भरता घटती है।      रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता: यह कदम भारत के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को मजबूत करने और स्वदेशी तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।  तकरीबन सवा तीन लाख करोड़ रुपये की राफेल डील के तहत भारत इंटरफेस कंट्रोल डॉक्‍यूमेंट यानी ICD का एक्‍सेस चाहता है, ताकि वेपन सिस्‍टम को फाइटर जेट में इंटीग्रेट करने में द‍िक्‍कतों का सामना न करना पड़े।  डिजिटल संप्रभुता रक्षा मंत्रालय ICD को डिजिटल संप्रभुता का एक महत्वपूर्ण साधन मान रहा है. इसका उद्देश्य भारत को अपने लड़ाकू प्लेटफॉर्म्स के विकास और उन्नयन पर पूर्ण नियंत्रण देना है, ताकि देश विदेशी कंपनियों के तकनीकी इकोसिस्टम में बंधा न रहे. यह कदम आत्मनिर्भर भारत और घरेलू रक्षा उद्योग को मजबूत करने की व्यापक रणनीति के अनुरूप है. हालांकि, फ्रांस के लिए यह मुद्दा संवेदनशील बना हुआ है. ICD तक पहुंच देने से बौद्धिक संपदा अधिकारों और सिस्टम आर्किटेक्चर पर नियंत्रण से जुड़े सवाल उठ सकते हैं. ऐसे में सीमित या शर्तों के साथ पहुंच देने का विकल्प भी बातचीत में सामने आ सकता है, लेकिन यह भी विवाद का कारण बन सकता है. MRFA डील अब केवल रक्षा खरीद नहीं, … Read more