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डेटा आधारित मॉनिटरिंग से विकास योजनाओं की होगी सटीक समीक्षा, जिलों में आर्थिक रणनीति बनेगी मजबूत

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश को ‘वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था’ बनाने के लक्ष्य को गति देने के लिए बड़ा निर्णय लिया गया है। इसके तहत हर जिले में ओटीडी सीएम फेलो (वन ट्रिलियन डॉलर मुख्यमंत्री फेलोशिप कार्यक्रम) लागू किया जाएगा, जिससे जिला स्तर पर विकास योजनाओं की निगरानी और क्रियान्वयन को और प्रभावी बनाया जा सके। हर जिले में दो फेलो की तैनाती कैबिनेट के निर्णय के अनुसार प्रत्येक जनपद में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में संचालित ओटीडी सेल को मजबूत करने के लिए दो विशेषज्ञ तैनात किए जाएंगे, एक आर्थिक विकास फेलो और एक डेटा विश्लेषक फेलो। ये दोनों मिलकर जिले की आर्थिक गतिविधियों की निगरानी और रणनीति निर्माण में अहम भूमिका निभाएंगे। ये फेलो विभिन्न विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर कृषि, उद्योग, निवेश, अवसंरचना, पर्यटन, रोजगार और जिला घरेलू उत्पाद (डीडीपी) जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों की नियमित समीक्षा करेंगे। नियोजन विभाग के डैशबोर्ड के माध्यम से ऑनलाइन रिपोर्टिंग और केपीआई आधारित मॉनिटरिंग की जाएगी, जिससे निर्णय प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, तथ्यपरक और परिणामोन्मुख बनेगी। योग्यता और चयन प्रक्रिया तय ओटीडी सीएम फेलो बनने के लिए संबंधित विषय में परास्नातक डिग्री अनिवार्य होगी और अधिकतम आयु सीमा 40 वर्ष रखी गई है। चयन प्रक्रिया में लिखित परीक्षा (50 अंक), अधिमानी योग्यता (30 अंक) और साक्षात्कार (20 अंक) शामिल होंगे। चयन स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन उत्तर प्रदेश द्वारा किया जाएगा। चयनित फेलो को ₹50,000 प्रतिमाह पारिश्रमिक के साथ लैपटॉप, यात्रा भत्ता और आवासीय सुविधा/भत्ता प्रदान किया जाएगा। प्रारंभिक कार्यकाल एक वर्ष का होगा, जिसे प्रदर्शन के आधार पर आगे बढ़ाया जा सकेगा। ओटोडी सीएम फेलो स्थानीय संसाधनों, निवेश संभावनाओं और विकास अवसरों का विश्लेषण कर साक्ष्य-आधारित रणनीतियां तैयार करेंगे। इससे विभागीय योजनाओं का बेहतर प्राथमिकता निर्धारण और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित होगा। इस फैसले से जिलों में विकास कार्यों की निगरानी और योजना निर्माण अधिक पेशेवर और डेटा-आधारित होगा। इससे प्रदेश के ‘वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था’ लक्ष्य को हासिल करने में ठोस आधार मिलेगा और स्थानीय स्तर पर विकास की गति तेज होगी। बॉक्स डिजिटल सिस्टम से साक्ष्य होंगे सुरक्षित, छोटे अपराधों में जेल के बजाय सेवा योगी कैबिनेट ने नई न्याय संहिताओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए तीन महत्वपूर्ण नियम लागू किए हैं, पहला ई-साक्ष्य प्रबंधन नियम, दूसरा ई-समन (इलेक्ट्रॉनिक आदेशिका) नियम और तीसरा सामुदायिक सेवा गाइडलाइंस 2026 है। ये नियम न्याय प्रक्रिया को आधुनिक, तेज और ज्यादा प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम माने जा रहे हैं। ई-साक्ष्य के तहत अब डिजिटल सबूत सुरक्षित और मजबूत होंगे। नए ई-साक्ष्य प्रबंधन नियमों के तहत डिजिटल सबूत (जैसे मोबाइल डेटा, वीडियो, ईमेल आदि) को एक वैज्ञानिक तरीके से इकट्ठा, सुरक्षित और अदालत में पेश किया जाएगा। इससे सबूत के साथ छेड़छाड़ की संभावना कम होगी। केस मजबूत होंगे और फैसले ज्यादा सटीक होंगे। वहीं, ई-समन नियम के तहत अब कोर्ट के समन और वारंट डिजिटल माध्यम से भेजे जा सकेंगे,जैसे ईमेल, मोबाइल मैसेज या अन्य ऐप्स के जरिए। इससे नोटिस जल्दी पहुंचेगा। साथ ही, प्रक्रिया पारदर्शी और ट्रैक करने योग्य बनेगी तो वहीं महिलाओं और बच्चों से जुड़े मामलों में पहचान गोपनीय रहेगी। सामुदायिक सेवा की नई गाइडलाइंस के अनुसार छोटे अपराधों में अब जेल भेजने के बजाय ‘सामुदायिक सेवा’ कराई जा सकेगी। इससे अपराधियों को सुधार का मौका मिलेगा। जेलों पर बोझ कम होगा और समाज के लिए उपयोगी कार्य (जैसे सफाई, वृक्षारोपण, गो-सेवा, ट्रैफिक मैनेजमेंट) होंगे।  150 सरकारी स्कूलों में बनेंगी ड्रीम स्किल लैब्स, छात्रों को मिलेगा आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण कैबिनेट ने मिलका नेटवर्क प्रोडक्ट्स लि. के सहयोग से प्रदेश के 150 राजकीय विद्यालयों में ड्रीम (डिजाइन, रोबोटिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग) स्किल लैब्स स्थापित करने का निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य छात्रों को नई तकनीकों से जोड़कर उन्हें भविष्य की औद्योगिक जरूरतों के अनुसार तैयार करना है। इन लैब्स के जरिए छात्रों को रोबोटिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और आधुनिक डिजाइन जैसी स्किल्स सीखने का मौका मिलेगा। इससे न केवल उनकी तकनीकी समझ और व्यक्तित्व विकास होगा, बल्कि उन्हें पढ़ाई के बाद बेहतर नौकरी और प्लेसमेंट के अवसर भी मिलेंगे। इस परियोजना में 68% निवेश टाटा नेल्को नेटवर्क प्रोडक्ट्स लि. द्वारा और 32% राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा। नोएडा-यमुना क्षेत्र को बड़ा पावर बूस्ट, 653 करोड़ से बनेगा नया हाईटेक बिजली उपकेंद्र कैबिनेट बैठक में यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक क्षेत्र (गौतमबुद्ध नगर) में नया आधुनिक बिजली उपकेंद्र बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इसके तहत सेक्टर-28, यीडा में 400/220 केवी का जीआईएस (गैस इंसुलेटेड) उपकेंद्र स्थापित किया जाएगा, जिसकी कुल क्षमता 3×500 एमवीए होगी। करीब ₹653.53 करोड़ की लागत से बनने वाला यह उपकेंद्र क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहे उद्योगों को मजबूत बिजली आपूर्ति देगा। इससे इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, डेटा सेंटर, फिल्म सिटी और अन्य औद्योगिक इकाइयों को बिना रुकावट बिजली मिल सकेगी। यह परियोजना न सिर्फ वर्तमान जरूरतों को पूरा करेगी, बल्कि आने वाले समय में बढ़ने वाली बिजली की मांग को भी ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है। इससे पूरे क्षेत्र में ग्रिड की स्थिरता मजबूत होगी और बिजली आपूर्ति अधिक विश्वसनीय बनेगी।

प्रबंधन सुधार की दिशा में कदम: महाकाल मंदिर में पांच न्यास गठन को मंजूरी

उज्जैन. मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में व्यवस्थाओं के बेहतर प्रबंधन के लिए पांच नए न्यास बनाए जाएंगे। इनके माध्यम से अन्न क्षेत्र, भक्त निवास, पारमार्थिक गतिविधियों का संचालन, शैक्षणिक तथा चिकित्सा सेवा जैसे प्रकल्प पृथक-पृथक संचालित होंगे। यह निर्णय शनिवार को कलेक्टर रौशन कुमार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की बैठक में लिया गया है। मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि बैठक में प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण, श्रद्धालुओं की सुविधाओं व सिंहस्थ की तैयारियों से जुड़े महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए। इनमें महाकाल महालोक में 11 करोड़ की लागत से फैब्रिकेशन शेड, संध्या एवं शयन आरती के महत्व का प्रचार-प्रसार, क्यूआर कोड आधारित फैल्प बैरियर लगाने, महाकालेश्वर अन्नक्षेत्र में अन्नदान/भोजन की आनलाइन बुकिंग, 80 नई दानपेटियां लगाने, मंदिर समिति के कर्मचारियों को वेतन के साथ महंगाई भत्ता देने और सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था के विस्तारित का निर्णय शामिल है।

मिशन-2027: भाजपा सुशासन बनाम अराजकता के मुद्दे पर, सपा के पीडीए समीकरण की परीक्षा

लखनऊ  पश्चिम बंगाल और असम के चुनाव परिणामों ने यूपी की राजनीति को नई दिशा दे दी है। मिशन-2027 की तैयारी में जुटी भारतीय जनता पार्टी को इन नतीजों से निश्चित रूप से मनोवैज्ञानिक बढ़त मिलेगी, जबकि विपक्षी दलों -खासकर समाजवादी पार्टी -के सामने अपने पीडीए समीकरण को बनाए रखने की कठिन चुनौती आ खड़ी हुई है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इन राज्यों से मिली राजनीतिक ऊर्जा के दम पर भाजपा यूपी में तीसरी बार सत्ता हासिल कर पाएगी? सुशासन बनाम अतीत की अराजकता पश्चिम बंगाल चुनाव में भाजपा की रणनीति पश्चिम बंगाल चुनाव में भाजपा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की 'बुलडोजर बाबा' और 'हिंदू हृदय सम्राट' की छवि को प्रभावी ढंग से भुनाया और प्रदेश में सुशासन लागू करने का वादा किया, जिसका असर चुनाव परिणामों में स्पष्ट दिखा। माना जा रहा है कि भाजपा यूपी में भी इसी रणनीति को आगे बढ़ाएगी। पार्टी संगठन पहले से ही अपने कार्यकर्ताओं को वर्ष 2012-2017 बनाम 2017-2027 की तुलना के आधार पर विकास, सुशासन और रोजगार को मुद्दा बनाकर विपक्ष को घेरने की गोपनीय हिदायत दे चुका है। समाजवादी पार्टी के पीडीए समीकरण की होगी कठिन परीक्षा वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा ने कांग्रेस के साथ मिलकर पीडीए की रणनीति पर चलते हुए 43 सीटें जीती थीं और एनडीए गठबंधन को जोरदार चुनौती दी थी। अब मिशन-2027 में इस सफलता को दोहराना सपा के लिए आसान नहीं होगा। सपा प्रमुख लगातार पीडीए की राजनीति को धार देने में जुटे हैं, लेकिन भाजपा के सुशासन के दावों का जवाब देना और पूर्वांचल के जातीय समीकरणों को साधना उनके लिए बड़ी परीक्षा होगी। कांग्रेस के सामने खुद को मजबूत करने की चुनौती वर्ष 2024 में सपा के साथ गठबंधन कर कांग्रेस ने छह लोकसभा सीटें जीती थीं, जबकि विधानसभा में उसके दो विधायक हैं। पार्टी अब दलितों, ओबीसी और अल्पसंख्यकों को संगठन में तरजीह देते हुए सम्मेलनों के माध्यम से अपना जनाधार मजबूत करने में लगी है। हालाँकि भाजपा और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार मुस्लिम तुष्टिकरण के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरते रहते हैं, जिसका तोड़ निकालना कांग्रेस के लिए सरल नहीं होगा। बसपा को तलाशनी होगी नई सोशल इंजीनियरिंग की राह मायावती के लिए भी ये नतीजे चुनौती लेकर आए हैं। बसपा ने वर्ष 2007 में सोशल इंजीनियरिंग के बल पर सरकार बनाई थी और उसे 30.43 प्रतिशत मत मिले थे। लेकिन बीते दो दशकों में पार्टी का जनाधार लगातार घटता रहा – वर्ष 2022 में यह 12.88 प्रतिशत और वर्ष 2024 में मात्र 9.39 प्रतिशत रह गया। ऐसे में मिशन-2027 में वर्ष 2007 जैसी सफलता दोहराना बसपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी。

योगी सरकार का बड़ा फैसला: हर महीने 10 तारीख को आएगा बिजली बिल, 25 तक भुगतान की मोहलत

लखनऊ यूपी में जिले-जिले में स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर मचे घमासान के बीच यूपी की योगी सरकार ने इस व्यवस्था को ही खत्म कर दिया है। अब स्मार्ट मीटर नहीं लगाए जाएंगे। पहले से जो स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं, उन्हें पोस्ट पेड कर दिया जाएगा। सीएम योगी के निर्देश पर ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने इसे लेकर ऐलान किया और साथ ही नए नियमों के बारे में बताया है। अब हर महीने की 10 तारीख को बिजली का बिल आएगा। इसे जमा करने के लिए 15 दिनों यानी 25 तारीख तक का समय होगा। एक राहत यह भी है कि यदि एक महीने का बकाया होगा तो बिजली नहीं कटेगी। पुराने बिजली बिलों के बकाये के लिए भी व्यवस्था बना दी गई है। इसे अब किस्तों में जमा किया जा सकेगा। इसके साथ ही सिक्योरिटी मनी भी अब जमा करनी होगी। इसे भी किस्त में जमा करने की व्यवस्था कर दी गई है। हालांकि नए स्मार्ट मीटर लगने के बाद से ज्यादा बिल आने की शिकायतों का क्या होगा? इस पर अभी कुछ नहीं कहा गया है। समय से न मिले बिल तो यहां करें शिकायत ऊर्जा मंत्री न कहा कि सभी स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को बिल हर महीने की 10 तारीख तक दिए जाएंगे। बिल मिलने की तारीख से भुगतान के लिए 15 दिन का समय दिया जाएगा। जिन स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को समय से बिल न मिले वे वितरण कंपनियों के नंबर पर कनेक्शन नंबर बताकर बिल प्राप्त कर सकेंगे। इसके लिए फोन नंबर भी जारी किए गए हैं। इसके अलावा टोल फ्री नंबर 1912 पर शिकायत दर्ज करके भी बिल प्राप्त किए जा सकेंगे। एके शर्मा ने आदेश दिए हैं कि उपभोक्ताओं को बिल संबंधी किसी भी समस्या के निपटारे के लिए खंड और उपखंड स्तर पर कैंप लगाए जाएंगे। पूर्वांचल – 8010968292; मध्यांचल – 7669003409; पश्चिमांचल – 7859804803 दक्षिणांचल – 8010957826 केस्को – 8287835233 चार किस्तों में जमा करवाई जाएगी सिक्योरिटी पोस्टपेड मीटर में कनेक्शनधारकों से सिक्योरिटी राशि जमा करवाई जाती है जबकि प्रीपेड मीटर में सिक्योरिटी राशि नहीं देनी होती है। ऐसे में जिन उपभोक्ताओं के मीटर पोस्टपेड से प्रीपेड में बदले गए उनकी सिक्योरिटी राशि वापस कर दी गई थी। अब जब दोबारा प्रीपेड मीटरों को पोस्टपेड में बदला जाएगा तो उपभोक्ताओं को सिक्योरिटी राशि जमा करनी होगी। एके शर्मा ने आदेश दिए हैं कि सिक्योरिटी राशि एकमुश्त न जमा करवाकर चार किस्तों में जमा करवाई जाए ताकि उपभोक्ताओं पर वित्तीय बोझ न आए। अब लोगों पर दर्ज मुकदमे भी वापस लेने की मांग प्रीपेड मीटर की जबरिया लगाने के खिलाफ मुखर रहे अवधेश कुमार वर्मा ने प्रीपेड मीटर की व्यवस्था समाप्त होने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार जताया है। उन्होंने मीटर उखाड़कर फेंकने वाले उपभोक्ताओं पर दर्ज मुकदमे भी वापस लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि अगर पावर कॉरपोरेशन ने पहले ही नियम के मुताबिक फैसला ले लिया होता तो ऐसी घटना नहीं होती। यूपी में जबरिया लगाए जा रहे थे प्रीपेड मीटर पिछले संसद सत्र के दौरान केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने साफ कर दिया था कि मीटर प्रीपेड होगा या पोस्टपेड यह चुनने का अधिकार उपभोक्ताओं का है। विद्युत अधिनियम – 2003 की धारा 47 (5) में यही व्यवस्था है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) ने भी अधिसूचना जारी करके मीटरों के प्रीपेड मोड में होने की बाध्यता समाप्त कर दी थी।इसके बाद भी यूपी में लोगों के घरों पर जबरिया प्रीपेड मीटर लगाए जा रहे थे। अचानक रिचार्ज खत्म होने पर लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। इससे जिले-जिले आक्रोश फैल रहा था। इस आक्रोश के कारण ही चुनावी साल में सरकार किसी तरह का खतरा मोल लेना नहीं चाह रही थी। अंततः सोमवार को प्रीपेड की व्यस्था खत्म करने का ऐलान कर दिया गया।

वन ट्रिलियन डॉलर लक्ष्य के लिए मुख्यमंत्री फेलोशिप शुरू, युवाओं को मिलेगा ₹50,000 मानदेय

लखनऊ औद्योगिक विकास मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता नंदी ने सोमवार को इन्वेस्ट यूपी कार्यालय में औद्योगिक विकास से जुड़े प्रस्तावों की समीक्षा। उन्होंने उच्चस्तरीय बैठक में लेटर आफ कम्फर्ट (एलओसी) से जुड़े आवेदनों की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में प्रमुख निवेश प्रस्तावों को एलओसी जारी करने की सिफारिश की गई। यह परियोजनाएं बरेली, फिरोजाबाद, वाराणसी, गौतमबुद्ध नगर और कानपुर देहात में स्थापित की जाएंगी और इनके माध्यम से 2,000 से अधिक रोजगार सृजित होने का अनुमान है। प्रस्तावित परियोजनाओं में स्टील व आयरन कास्टिंग, मेडिकल डिवाइस, पीईटी प्रीफार्म, कैप्स व क्लोजर्स, ईवी चार्जर्स, बीईएसएस चार्जर्स, इलेक्ट्रिकल एनक्लोजर और सोलर स्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में विनिर्माण गतिविधियां शामिल हैं। इन्हें सभी प्रोत्साहन व सब्सिडी प्रदान की जाएगी। बैठक में मंत्री ने कहा कि सभी आवेदनों का त्वरित व पारदर्शी निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। बैठक में अपर मुख्य सचिव, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आलोक कुमार सहित इन्वेस्ट यूपी के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे वन ट्रिलियन डॉलर मुख्यमंत्री फेलोशिप कार्यक्रम लागू उधर, प्रदेश की अर्थव्यवस्था को वन ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने के लिए वन ट्रिलियन डालर मुख्यमंत्री फेलोशिप कार्यक्रम (ओटीडी सीएम फेला) कार्यक्रम लागू किया गया है। कैबिनेट की बैठक में सोमवार को इसके प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। कार्यक्रम के तहत हर जिले में पहले से डीएम की अध्यक्षता में गठित जिला ओटीडी सेल की कार्यक्षमता बढ़ाई जाएगी। इसके लिए सभी जिलों में एक ओटीडी फेलो (आर्थिक विकास) और एक ओटीडी फेलो (डेटा विश्लेषक) को ओटीडी सीएम फेलो के रूप में तैनात किए जाने का निर्णय किया गया है। ओटीडी फेलो विभिन्न विभागों से समन्वय स्थापित कर कृषि, उ‌द्योग, निवेश, अवसंरचना, पर्यटन, रोजगार तथा जिला घरेलू उत्पाद (डीडीपी) से संबंधित संकेतांकों की नियमित समीक्षा में सहयोग करेंगे। डाटा का वैज्ञानिक विश्लेषण कर मासिक और त्रैमासिक प्रगति रिपोर्ट भी तैयार करेंगे। नियोजन विभाग विकसित डैशबोर्ड के माध्यम से आनलाइन रिपोर्टिंग और केपीएल आधारित मानिटरिंग व्यवस्था लागू करेगा। ओटीडी सीएम फेला के लिए संबंधित विषयों में परास्नातक की पात्रता तथा अधिकतम 40 वर्ष आयु सीमा निर्धारित की गई है। अनिवार्य अहर्ता की उपाधि में निर्धारित प्रतिशत, शोध प्रकाशन और प्रासंगिक अनुभव को वरीयता दी जाएगी। हर माह 50 हजार रुपये मिलेगा पारिश्रमिक ओटीडी फेलो को 50,000 प्रतिमाह पारिश्रमिक, लैपटाप, यात्रा भत्ता और आवासीय सुविधा/भत्ता प्रदान किया जाएगा। कार्यक्रम प्रारंभिक रूप से एक वर्ष के लिए होगा, जिसे प्रदर्शन के आधार पर नवीनीकृत किया जा सकेगा। कार्यक्रम के तहत ओटीडी सीएम फेलो का चयन स्टेट ट्रांसफारर्मेशन कमीशन (एसटीसी) करेगा। चयन प्रक्रिया में लिखित परीक्षा (50 अंक), अधिमानी अहर्ता (30 अंक) और साक्षात्कार (20 अंक) शामिल होंगे। प्रारंभिक कार्यकाल एक वर्ष होगा।

दिल्ली में अहम बैठक: भगवंत मान ने द्रौपदी मुर्मू से मिलने का किया रुख, बागी सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग तैयार

चंडीगढ़. पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात के लिए दिवील्ली रवाना हो गए हैं। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, उनसे पहले आम आदमी पार्टी (आप) छोड़कर भाजपा में शामिल हुए राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा सुबह करीब 11 बजे राष्ट्रपति से मुलाकात करेंगे, जबकि मुख्यमंत्री की मुलाकात दोपहर 12 बजे तय है। मुख्यमंत्री भगवंत मान विधायकों के साथ दिल्ली पहुंचे हैं और इस दौरान वे बागी सांसदों से जुड़े पूरे घटनाक्रम पर सरकार का पक्ष राष्ट्रपति के सामने रखेंगे। वहीं, राघव चड्ढा अपने साथियों के साथ राष्ट्रपति से मिलकर पंजाब सरकार की ओर से की गई कार्रवाई पर सवाल उठाने की तैयारी में हैं। गौरतलब है कि 24 अप्रैल को आप के 10 में से 7 राज्यसभा सांसदों ने पार्टी छोड़कर भाजपा जॉइन कर ली थी। इनमें संदीप पाठक, हरभजन सिंह, अशोक मित्तल, संजीव अरोड़ा और विक्रमजीत साहनी समेत अन्य नाम शामिल हैं। इन सांसदों ने इसे सामूहिक निर्णय बताते हुए नियमों के तहत कदम उठाने का दावा किया था। आप कार्यकर्ताओं ने बागी सांसदों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया इसके बाद 25 अप्रैल से पंजाब में आप कार्यकर्ताओं ने बागी सांसदों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए। कई जगहों पर नारेबाजी और प्रदर्शन हुए। इसी बीच हरभजन सिंह की सुरक्षा वापस लिए जाने का मामला भी सामने आया, जिसने राजनीतिक हलकों में चर्चा को और तेज कर दिया। 30 अप्रैल को पीपीसीबी (पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड) की टीमों ने कुछ औद्योगिक इकाइयों में कार्रवाई की, जिसे भी इस पूरे घटनाक्रम से जोड़कर देखा गया। 2 मई को आप छोड़ने वाले सांसद संदीप पाठक के खिलाफ पंजाब पुलिस ने भ्रष्टाचार और एक महिला के शोषण के आरोपों में गैर-जमानती एफआईआर दर्ज की। पुलिस टीम उनके दिल्ली स्थित आवास पर पहुंची, लेकिन वे पहले ही वहां से निकल चुके थे। वहीं, 1 मई को पंजाब विधानसभा में सरकार ने फ्लोर टेस्ट भी पास कर लिया। 117 सदस्यीय सदन में आप के 88 विधायकों ने सरकार के पक्ष में मतदान किया, जबकि विपक्ष ने इस प्रक्रिया का बहिष्कार किया। अब मुख्यमंत्री भगवंत मान और राघव चड्ढा की राष्ट्रपति से अलग-अलग होने वाली मुलाकातों को अहम माना जा रहा है, जहां दोनों पक्ष अपने-अपने तर्क और घटनाक्रम से जुड़े मुद्दे सामने रखेंगे।

ऑपरेशन तलाश बना मिसाल: बिलासपुर में 579 लापता लोगों की खोज, 69 मासूम सुरक्षित लौटे घर

बिलासपुर. बिलासपुर पुलिस ने ऑपरेशन मुस्कान और तलाश के तहत एक महीने के भीतर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है. वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह के निर्देशन के अभियान के तहत 648 को ढूंढ निकाला गया है. बारमद किए गए व्यक्तियों में 69 अपहृत बच्चें (11 लड़के और 58 लड़कियां) और 579 वयस्क (430 महिला और149 पुरूष) शामिल हैं. पुलिस टीमों ने न केवल राज्य भीतर, बल्कि देश के महाराष्ट्र और ओडिशा से भी 3 बच्चों को किडनैप किया है.  1 अप्रैल से 30 अप्रैल तक चलाए गए अभियान में तकनीकी सहयोग और मुखबिर तंत्र को स्ट्रांग किया गया, जिससे कई अपहृत बच्चों के विभिन्न राज्यों में होने की जानकारी प्राप्त हुई. टीम तैयार करके देश के विभिन्न राज्यों और राज्य के विभिन्न जिलों में टीम रवाना की गई, जिस पर राज्य के बाहर महाराष्ट्र से 2 बालिका और ओडिशा से 1 बालिका की दस्तायाबी की गई. गौरतलब है कि इस अभियान में बिलासपुर जिला ने ऑपरेशन मुस्कान के तहत 69 बच्चों की दस्तयाबी कर राज्य में प्रथम स्थान प्राप्त किया है. इसी प्रकार ऑपरेशन तलाश के तहत 579 महिला और पुरूष की दस्तयाबी कर राज्य में द्वितीय स्थान प्राप्त किया है.

आधार कार्ड में होगा बड़ा बदलाव, नया डिजाइन और नाम, पता, DOB नहीं दिखेंगे?

 नई दिल्ली आधार कार्ड में जल्द ही बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा, जिसका दावा मीडिया रिपोर्ट्स में किया गया है. भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) की तरफ से जारी होने वाले फिजिकल/प्रिंटेड आधार कार्ड पर सभी डिटेल्स प्रिंट होती हैं।   रिपोर्ट में बताया है कि सेफ्टी के मद्देनजर आधार कार्ड में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा. ये बदलाव आधार कार्ड के मिसयूज को रोकेगे और साइबर ठगों से आधार कार्ड को बचाएगा।  रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले दिनों में फिजिकल आधार कार्ड की कॉपी पर फोटो और एक क्विक रिस्पोंस कोड (क्यूआर कोड) होगा. क्यूआर कोड से डिटेल्स पाने के लिए उसको स्कैन करना होगा. इस दौरान यूजर्स तय कर पाएंगे कि वह कौन सी डिटेल्स छिपाना चाहते हैं और किस डिटेल्स को रिवील करना चाहते हैं।  आधार कार्ड पर प्रिंट होती हैं ये डिटेल्स  UIDAI की तरफ से जारी आधार कार्ड पर नाम, फोटो, डेट ऑफ बर्थ, जेंडर, घर का पता और पिता का नाम तक होता है. ऐसे में अगर किसी ठग तक आधार कार्ड की फोटो कॉपी तक पहुंच जाती है, जिसके बाद वह आसानी से एक अनजान शख्स की कई डिटेल्स को जान लेता है।  ये बदलाव आने वाले दिनों में लागू होगा. रिपोर्ट के मुताबिक दिसंबर में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. इसको लेकर और भी डिटेल्स आने वाले दिनों में शेयर की जाएंगी. हालांकि UIDAI की तरफ से अभी इसको लेकर कोई ऑफिशियल जानकारी शेयर नहीं की है।  UIDAI जारी कर चुका है न्यू आधार ऐप  कुछ सप्ताह पहले ही आधार ऐप का फुल वर्जन जारी कर चुका है. आधार ऐप की मदद से कुछ डिटेल्स को हाइड करके उसको PDF या इमेज फॉर्मेट में शेयर कर सकते हैं. न्यू आधारो ऐप एंड्रॉयड और आईओएस पर मौजूद है।  आधार कार्ड क्या होता है?  भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण असल में 12 नंबर का यूनिक डिजिट जनरेट करती है. हर एक आधार कार्ड होल्डर के लिए अलग संख्या होती है. ये नंबर भारतीय नागरिकों को उनकी बायोमेट्रिक, नाम, पता और डेट ऑफ बर्थ के आधार पर दिया जाता है। 

भीषण दुर्घटना: नरसिंहपुर में डीडीएस टैंक गिरने से 2 मजदूरों की जान गई

बिलासपुर. बिलासपुर पुलिस ने ऑपरेशन मुस्कान और तलाश के तहत एक महीने के भीतर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है. वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह के निर्देशन के अभियान के तहत 648 को ढूंढ निकाला गया है. बारमद किए गए व्यक्तियों में 69 अपहृत बच्चें (11 लड़के और 58 लड़कियां) और 579 वयस्क (430 महिला और149 पुरूष) शामिल हैं. पुलिस टीमों ने न केवल राज्य भीतर, बल्कि देश के महाराष्ट्र और ओडिशा से भी 3 बच्चों को किडनैप किया है.  1 अप्रैल से 30 अप्रैल तक चलाए अभियान में तकनीकी सहयोग और मुखबिर तंत्र को स्ट्रांग किया गया, जिससे कई अपहृत बच्चों के विभिन्न राज्यों में होने की जानकारी प्राप्त हुई. टीम तैयार करके विभिन्न राज्यों और राज्य के विभिन्न जिलों में टीम रवाना की गई, जिस पर राज्य के बाहर महाराष्ट्र से 2 बालिका और ओडिशा से 1 बालिका की दस्तायाबी की गई. गौरतलब है कि इस अभियान में बिलासपुर जिला ने ऑपरेशन मुस्कान के तहत 69 बच्चों की दस्तयाबी कर राज्य में प्रथम स्थान प्राप्त किया है. इसी प्रकार ऑपरेशन तलाश के तहत 579 महिला और पुरूष की दस्तयाबी कर राज्य में द्वितीय स्थान प्राप्त किया है.

हॉर्मुज बंद, फिर भी UAE और सऊदी से भारत में आयी भारी मात्रा में तेल, जानिए चौंकाने वाले आंकड़े

 नई दिल्‍ली अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्‍ता पूरी तरह से ब्‍लॉक है. अमेरिका का दावा है कि इस रास्‍ते से कोई तेल की जहाज नहीं गुजर रही है, क्‍योंकि उसकी सेना ने पूरी तरह से नाकाबंदी कर दी है. इतना ही नहीं अमेरिका ने वहां से गुजरने वाले जहाजों को देखते ही उड़ाने का भी आदेश दिया है।  यह वह रास्‍ता है, जहां से भारत और चीन जैसे देश मिडिल ईस्‍ट से भारी मात्रा में तेल का आयात करते हैं. इस बीच, एक ऐसा आंकड़ा सामने आया है, जो आपको भी हैरान कर देगा. दरअसल, मार्च की तुलान में भारत के तेल आयात का डाटा जारी हुआ है, जिसके मुत‍ाबिक भारत ने होर्मुज बंद रहने के बाद भी मिडिल ईस्‍ट के देशों से खूब तेल का आयात किया है. हालांकि, रूसी तेल खरीद में छूट मिलने के बाद भी कमी देखी गई है।  रूसी तेल का आयात गिरा  कमोडिटी एनालिटिक्स फर्म केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात अप्रैल में मार्च की रिकॉर्ड खरीद की तुलना में 21 प्रतिशत गिर गया. अप्रैल में हरदिन 1.56 मिलियन बैरल (एमबीडी) तेल का आयात यूक्रेन में हड़ताल के बाद एक प्रमुख रूसी टर्मिनल पर लोडिंग में आई बाधाओं से प्रभावित हुआ. यह मार्च की तुलना में भारी गिरावट है , जब भारत का आयात 1.98 मिलियन बैरल प्रतिदिन के रिकॉर्ड स्‍तर पर था।  भारत के किस कंपनी ने कितना तेल मंगाया?  इंडियन ऑयल ने हर दिन 677,000 बैरल तेल खरीदा और नंबर वन पर है. इसकी खरीद मार्च की तुलना में 14 फीसदी ज्‍यादा है. रिलायंस इंडस्ट्रीज 235,000 बैरल प्रतिदिन तेल खरीदकर दूसरे स्थान पर है. भारत पेट्रोलियम ने प्रतिदिन 176,000 बैरल तेल आयात किया, जो मार्च से 38 प्रतिशत कम है।  नाकाबंदी के बाद भी बढ़ी तेल खरीद  ऊर्जा के लिए महत्वपूर्ण मार्ग होर्मुज की नाकाबंदी के बावजूद, अप्रैल में पश्चिम एशियाई देशों से भारत में तेल की आपूर्ति में सुधार देखने को मिला है. सऊदी अरब से हरदिन 704,000 बैरल तेल का आयात हुआ, जो मार्च की तुलना में 23 प्रतिशत अधिक है. संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से आयात में 191 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह बढ़कर हरदिन 591,000 बैरल पहुंच गया।  नाकाबंदी के बाद भी कैसे भारत आया तेल?  तेल को सऊदी अरब की यानबू और यूएई की फुजैराह पाइपलाइनों के माध्यम से भेजा गया था, जो होमुज को बाईपास करती हैं और वैश्विक ऊर्जा आयात के लिए महत्वपूर्ण मार्गों के तौर पर उभर रही है. वेस्‍ट एशिया में चल रहे जंग के बीच, भारत ने वेनेजुएला, ईरान, ब्राजील और नाइजीरिया से भी तेल का आयात बढ़ाया है।  ईरान से इतना हुआ तेल का आयात  सात साल के अंतराल के बाद, भारत ने अप्रैल में ईरान से तेल की खरीद फिर से शुरू की और प्रतिदिन 137,000 बैरल तेल का आयात किया, जब अमेरिका ने प्रतिबंधों में 30 दिनों की छूट की घोषणा की. भारत ईरान से कच्चे तेल का एक प्रमुख खरीदार रहा है. 2018 में अमेरिका द्वारा प्रतिबंधों को कड़ा करने के बाद, मई 2019 से आयात बंद हो गया, और इसकी जगह पश्चिम एशियाई, अमेरिकी और अन्य ग्रेड के माल ने ले ली. करीब एक साल के अंतराल के बाद, इस महीने वेनेजुएला से तेल का आयात 298,000 बैरल प्रति दिन रहा।  इन सभी आयातों के बीच, कुल आयात में कमी देखने को मिली है. ईरान युद्ध के बाद होर्मुज की नाकाबंदी के चलते, भारत का कच्चे तेल का आयात अप्रैल में घटकर 4.3 मिलियन बैरल हर दिन हो गया, जो पिछले महीने के 4.4 मिलियन बैरल से कम है, यह जानकारी केप्लर के आंकड़ों से मिलती है।