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मरीजों की बीमारी पर ‘कमीशनखोरी’ का इलाज!

मरीजों की बीमारी पर ‘कमीशनखोरी’ का इलाज! राजपुर अस्पताल के तीन डॉक्टर लोकायुक्त के शिकंजे में, पैथोलॉजी जांच को बना रखा था ‘कमाई का धंधा’  बड़वानी सरकारी अस्पताल, जहां मरीज इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, वहीं अगर डॉक्टर बीमारी नहीं बल्कि “कमीशन” देखने लगें, तो व्यवस्था पर सवाल उठना तय है। ऐसा ही शर्मनाक मामला राजपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सामने आया, जहां तीन डॉक्टर मरीजों को निजी पैथोलॉजी लैब पर भेजने के एवज में मोटा कमीशन वसूलते पकड़े गए। विशेष पुलिस स्थापना लोकायुक्त संगठन की इंदौर इकाई ने बुधवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए तीनों डॉक्टरों को रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। बताया जा रहा है कि अस्पताल में लंबे समय से “जांच के नाम पर कमीशन” का खेल चल रहा था और मरीजों को सिर्फ इसलिए एक विशेष लैब पर भेजा जा रहा था ताकि डॉक्टरों की जेब गर्म होती रहे। शिकायतकर्ता अदनान अली, जो राजपुर की एक पैथोलॉजी लैब में मैनेजर है, ने लोकायुक्त को बताया कि पहले डॉक्टर 20 प्रतिशत कमीशन लेते थे, लेकिन पिछले महीने से लालच इतना बढ़ गया कि तीनों ने मिलकर सीधे 50 प्रतिशत हिस्सा मांगना शुरू कर दिया। यानी मरीजों की जेब कटे और डॉक्टरों की कमाई बढ़े — यही खेल चल रहा था। लोकायुक्त जांच में शिकायत सही पाए जाने के बाद ट्रैप बिछाया गया। कार्रवाई के दौरान आरोपी डॉक्टरों को रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ लिया गया। डॉ. अमित शाक्य — 8 हजार रुपए डॉ. दिव्या साईं — 5 हजार रुपए डॉ. मनोहर गोदारा — 12 हजार रुपए लोकायुक्त टीम ने कुल 25 हजार रुपए की रिश्वत राशि बरामद की। तीनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया गया है। इस कार्रवाई ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि क्या सरकारी अस्पतालों में मरीजों का इलाज अब “कमीशन आधारित व्यवस्था” बन चुका है? और यदि लोकायुक्त की कार्रवाई नहीं होती, तो यह खेल आखिर कब तक चलता रहता? सूत्रों की मानें तो अब इस पूरे नेटवर्क में अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच हो सकती है। राजपुर अस्पताल में हुई इस कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।

स्वप्न शास्त्र के अनुसार ये 5 शुभ सपने कभी किसी से शेयर नहीं करने चाहिए

अक्सर सुबह उठते ही हमारी आदत होती है कि रात में आए किसी दिलचस्प या अच्छे सपने को हम तुरंत अपने घर वालों या दोस्तों के साथ शेयर कर देते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि स्वप्न शास्त्र के अनुसार आपकी यह आदत आपके बनते हुए काम बिगाड़ सकती है? शास्त्रों का मानना है कि हर सपने का एक खास संकेत होता है. कुछ सपने भविष्य की खुशहाली की दस्तक होते हैं, जिन्हें गुप्त रखने पर ही उनका पूरा फल मिलता है. आइए जानते हैं वे 5 खास सपने जिन्हें आपको कभी भी शेयर नहीं करना चाहिए: 1. साक्षात ईश्वर का दर्शन होना अगर सपने में आपको किसी देवी-देवता के दर्शन हुए हैं, तो यह आपके अत्यंत भाग्यशाली होने का प्रमाण है. यह इस बात का संकेत है कि आपकी आध्यात्मिक ऊर्जा बढ़ रही है और जल्द ही आपको किसी बड़े कार्य में सफलता मिलने वाली है. इसे दूसरों को बताने से उस सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव कम हो जाता है. 2. माता-पिता द्वारा जल पिलाना यदि आप देखते हैं कि आपके माता-पिता आपको पानी पिला रहे हैं, तो यह करियर और सामाजिक प्रतिष्ठा के लिए संकेत है.  यह दर्शाता है कि भविष्य में आपका मान-सम्मान और पद-प्रतिष्ठा बढ़ने वाली है. इस सपने की शुभता बनाए रखने के लिए इसे अपने तक ही सीमित रखें. 3. लक्ष्मी कृपा के प्रतीक (चांदी और धन) सपने में चांदी के सिक्के देखना या धन से भरा हुआ कलश (पात्र) दिखाई देना साक्षात मां लक्ष्मी के आगमन का संकेत है.  यह आर्थिक तंगी दूर होने और व्यापार में लाभ का सूचक है. इसे साझा करने से नजर लगने का डर रहता है, जिससे मिलने वाले लाभ में देरी हो सकती है. 4. सफेद गाय का दिखाई देना हिंदू धर्म में गाय को पूजनीय माना गया है. यदि सपने में सफेद गाय दिखे, तो समझ लीजिए कि आपके जीवन के संकटों का अंत होने वाला है.  यह सुख-समृद्धि का प्रतीक है. स्वप्न शास्त्र कहता है कि ऐसे पवित्र सपनों को जितना गुप्त रखेंगे, परिणाम उतना ही शीघ्र मिलेगा. 5. स्वयं की मृत्यु का दृश्य सुनने में यह डरावना लग सकता है, लेकिन स्वप्न शास्त्र में खुद की मृत्यु देखना बेहद शुभ माना गया है. यह आपकी आयु वृद्धि, किसी पुरानी बीमारी से मुक्ति और रुके हुए कार्यों के अचानक पूरा होने का संकेत है. इस सपने को भी कभी दूसरों के साथ शेयर न करें. क्यों जरूरी है गोपनीयता? माना जाता है कि शुभ सपनों को सार्वजनिक करने से उनकी शक्ति क्षीण हो जाती है.  जिस तरह हम अपनी सफलता के राज (Secrets) सबको नहीं बताते, उसी तरह प्रकृति द्वारा दिए गए इन संकेतों को भी तब तक गुप्त रखना चाहिए जब तक कि वे हकीकत में न बदल जाएं.  

सोने-चांदी की कीमतों में उछाल, वैश्विक अस्थिरता से बढ़े दाम

मुंबई  वैश्विक स्तर पर अस्थिरता के चलते सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी है और कीमतों में शुक्रवार को 0.81 प्रतिशत तक की गिरावट देखने को मिली। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने का 5 जून 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 1,52,261 रुपए के मुकाबले 411 रुपए बढ़कर 1,52,672 रुपए पर खुला। सुबह 9:43 पर यह 471 रुपए या 0.31 प्रतिशत की मजबूती के साथ 1,52,732 रुपए पर था।अब तक के कारोबार में सोने ने 1,52,672 रुपए का न्यूनतम स्तर और 1,53,103 रुपए का उच्चतम स्तर बनाया है। चांदी का 3 जुलाई 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछ्ली क्लोजिंग 2,58,540 रुपए के मुकाबले 1,445 रुपए की बढ़त के साथ 2,59,999 रुपए पर खुला।खबर लिखे जाते समय यह 2,118 रुपए या 0.82 प्रतिशत की मजबूती के साथ 2,60,658 रुपए पर था। अब तक के कारोबार में चांदी का न्यूनतम स्तर 2,59,999 रुपए और उच्चतम स्तर 2,61,811 रुपए रहा है।अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी सोने और चांदी में तेजी देखी जा रही है। कॉमेक्स पर सोना 0.28 प्रतिशत की तेजी के साथ 4,725 डॉलर प्रति औंस और चांदी 0.17 प्रतिशत की मजबूती के साथ 80.30 डॉलर प्रति औंस पर थी। सोने और चांदी की कीमतों में तेजी की वजह वैश्विक स्तर पर अस्थिरता का बढ़ना है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर से बढ़ने के चलते इसमें इजाफा हुआ है। इससे सुरक्षित माने जाने वाले सोने और चांदी की खरीद को बढ़ावा मिल रहा है। हालांकि, शांति के लिए दोनों देशों के बीच बातचीत लगातार जारी है और उम्मीद की जा रही है कि एक अस्थायी समझौता जल्द ही हो सकता है। अमेरिका और ईरान में तनाव बढ़ने के कारण भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ खुला। इस दौरान सेंसेक्स 212.58 अंक या 0.27 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 77,631.94 और निफ्टी 93 अंक या 0.38 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,233.65 पर था।

नया कोरोना वायरस थाईलैंड में मिला, स्वास्थ्य अधिकारियों ने जताई चिंता

बैंकाक  थाईलैंड में चमगादड़ों के अंदर एक नया कोरोना वायरस मिला है जो इंसानों को संक्रमित कर सकता है. टोक्यो यूनिवर्सिटी के वायरस एक्सपर्ट्स की टीम ने यह खोज की है. यह वायरस SARS-CoV-2 (कोविड-19 पैदा करने वाले वायरस) से मिलता है. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि अभी यह तुरंत कोई बड़ी महामारी नहीं फैलाएगा, लेकिन भविष्य में खतरा हो सकता है. इस खोज से वैज्ञानिकों को वायरस की निगरानी बढ़ाने की चेतावनी मिली है।  टोक्यो यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर केई सातो की अगुवाई वाली टीम ने थाईलैंड के चाचोएंगसाओ प्रांत में घोड़ों की नाल जैसे कान वाले चमगादड़ों (Horseshoe bats) में यह नया वायरस पाया. यह वायरस Clade B नामक ग्रुप का है. यह SARS-CoV-2 संबंधित कोरोनावायरस का नया समूह है. शोधकर्ताओं ने चमगादड़ों के नमूने लेकर लैब में टेस्ट किए. अध्ययन 6 मई 2026 को प्रतिष्ठित जर्नल 'Cell' में प्रकाशित हुआ।  इस वायरस की जेनेटिक्स कोविड-19 वायरस से काफी करीब है. प्रयोगों में पता चला कि यह मानव कोशिकाओं के ACE2 रिसेप्टर से जुड़ सकता है, यानी यह इंसानों में घुसने की क्षमता रखता है. लेकिन अच्छी बात यह है कि यह वायरस धीरे बढ़ता है और जानवरों में संक्रमण नहीं फैला पाया।  वायरस कितना खतरनाक है? प्रोफेसर केई सातो और उनकी टीम के अनुसार, यह वायरस अभी इंसानों के लिए तत्काल खतरा नहीं है. मौजूदा कोविड-19 के टीके और दवाएं इस नए वायरस के खिलाफ प्रभावी पाई गई हैं. प्रयोगशाला परीक्षणों में यह वायरस कमजोर साबित हुआ।  फिर भी वैज्ञानिक चिंतित हैं क्योंकि चमगादड़ों में वायरस लगातार बदलते रहते हैं. अगर इसमें छोटा-सा बदलाव आया तो यह ज्यादा संक्रामक और खतरनाक बन सकता है. थाईलैंड और आसपास के इलाकों में चमगादड़ों के नेटवर्क के जरिए यह वायरस युन्नान (चीन) और उत्तरी लाओस से आया हो सकता है।  प्रकृति में हजारों तरह के वायरस मौजूद हैं. चमगादड़ वायरसों के बड़े भंडार हैं. एशिया में चमगादड़ों पर लगातार निगरानी रखनी चाहिए. अभी कोई इंसान इस नए वायरस से संक्रमित होने की खबर नहीं है. फिर भी स्वास्थ्य अधिकारी सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं. अगर कोई व्यक्ति चमगादड़ों या उनके मल-मूत्र वाले इलाकों के पास जाता है तो सावधानी बरतनी चाहिए।  सीख क्या है इस खोज से? कोविड-19 महामारी के बाद पूरी दुनिया जान गई है कि वायरस कितनी तेजी से फैल सकते हैं. इस नए वायरस की खोज समय पर हुई है. इससे पहले भी थाईलैंड में RacCS203 नाम का एक और SARS-CoV-2 संबंधित वायरस मिल चुका है।  वैज्ञानिकों का मानना है कि ऐसी खोजों से हम भविष्य की महामारियों को रोक सकते हैं. नियमित निगरानी, शोध और तैयारियां बहुत जरूरी हैं. आम लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन जंगलों, गुफाओं या चमगादड़ों वाले इलाकों में सावधानी जरूर बरतनी चाहिए। 

दिल्ली और सोनीपत के प्रतिष्ठित स्थल थे ISI की योजना में, पुलिस ने किया पर्दाफाश

नई दिल्ली  दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की जांच में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़े कथित शहजाद भट्टी मॉड्यूल को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने कई सनसनीखेज जानकारियां दी हैं, जिनसे पता चला है कि दिल्ली का एक ऐतिहासिक मंदिर भी आतंकवादियों के निशाने पर था. सूत्रों के मुताबिक इस मॉड्यूल से जुड़े एक आरोपी ने मंदिर की बाकायदा रेकी की थी. उसने मंदिर परिसर, वहां तैनात पुलिसकर्मियों और सुरक्षा व्यवस्था की तस्वीरें और वीडियो तैयार किए थे. जांच एजेंसियों को शक है कि ये फोटो और वीडियो पाकिस्तान में बैठे सोशल मीडिया हैंडलर्स और कथित आईएसआई संपर्कों को भेजे गए थे।  जांच में सामने आया है कि साजिश सिर्फ मंदिर तक सीमित नहीं थी. आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि मंदिर परिसर में मौजूद पुलिसकर्मियों और अर्धसैनिक बलों को निशाना बनाकर गोलीबारी करने की योजना थी. इसके जरिए बड़े स्तर पर दहशत फैलाने और सांप्रदायिक तनाव पैदा करने की साजिश रची जा रही थी।  दिल्ली पुलिस के सूत्रों के अनुसार इस मॉड्यूल का नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हुआ था. जांच में यह भी सामने आया कि दिल्ली-सोनीपत हाईवे पर स्थित एक प्रसिद्ध ढाबा भी आतंकियों के निशाने पर था. इस ढाबे पर हर दिन हजारों लोगों की आवाजाही रहती है. आरोपियों ने खुलासा किया कि वहां हैंड ग्रेनेड हमला कर भारी तबाही मचाने की योजना बनाई गई थी. एजेंसियों को आशंका है कि भीड़भाड़ वाले स्थानों को टारगेट कर ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाने की तैयारी थी।  हिसार में मौजूद एक सैन्य कैंप की भी रेकी इसके अलावा हरियाणा के हिसार में मौजूद एक सैन्य कैंप की भी रेकी किए जाने का खुलासा हुआ है. पूछताछ में सामने आया कि कैंप के वीडियो और आसपास की गतिविधियों की जानकारी पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स को भेजी गई थी. जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि सैन्य प्रतिष्ठानों से जुड़ी और कौन-कौन सी सूचनाएं साझा की गई थीं।  सूत्रों के मुताबिक मॉड्यूल का टारगेट सिर्फ दिल्ली और हरियाणा तक सीमित नहीं था. उत्तर प्रदेश के कुछ पुलिस स्टेशनों पर तैनात पुलिसकर्मियों को भी निशाना बनाने की योजना थी. माना जा रहा है कि पुलिस और सुरक्षा बलों पर हमले कर आतंकवादियों का मकसद सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देना और भय का माहौल बनाना था।  बता दें कि दिल्ली पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों ने बीते दिन दिल्ली समेत कई राज्यों में संयुक्त कार्रवाई करते हुए शहजाद भट्टी मॉड्यूल से जुड़े 9 संदिग्धों को गिरफ्तार किया था. उनके पास से हथियार, गोला-बारूद और संदिग्ध दस्तावेज भी बरामद किए गए थे. गिरफ्तार आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है और कई राज्यों की पुलिस भी इस मामले में इनपुट साझा कर रही है।  जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि मॉड्यूल को फंडिंग कहां से मिल रही थी, सोशल मीडिया के जरिए किस तरह संपर्क बनाए जा रहे थे और भारत में इनके नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं. सुरक्षा एजेंसियों ने संवेदनशील धार्मिक स्थलों, सैन्य प्रतिष्ठानों और भीड़भाड़ वाले इलाकों की सुरक्षा भी बढ़ा दी है।  मंदिर और मुरथल को लेकर क्या थी साजिश मॉडयूल की प्लानिंग थी कि मंदिर की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों और पैरामिलिट्री के जवानों को निशाना बनाया जाएगा। सुरक्षाकर्मियों पर गोलीबारी करके पैनिक फैलाने और व्यवधान पैदा करने की कोशिश थी। सूत्रों ने बताया कि आरोपियों को दिल्ली-सोनीपत हाईवे पर मौजूद एक मशहूर ढाबे पर हमले का काम भी दिया गया था। यहां हर दिन हजारों लोग आते हैं। दहशतगर्दों की साजिश थी कि भीड़भाड़ के बीच अचानक गोलीबारी की जाए, जिससे बड़ी संख्या में लोग हताहत हों। मिलिट्री कैंप पर भी करने वाले थे हमला दहशतगर्त हरियाणा के हिसार में मौजूद एक मिलिट्री कैंप पर भी हमले की योजना तैयार कर रहे थे। उन्होंने कैंप की रेकी की थी और वीडियो बनाए थे। इन्हें सीमा पार भेजा गया था। उत्तर प्रदेश के कुछ पुलिस थानों पर भी आतंकी हमले की साजिश की बात सामने आई है।

तिरहुत प्रमंडल के स्कूलों में मनमानी पर सख्ती, शिक्षा विभाग ने मांगा जवाब

 मुजफ्फरपुर तिरहुत प्रमंडल के तीन सौ से अधिक निजी स्कूलों पर शिक्षा विभाग की कार्रवाई की तलवार लटक गई है। फीस वृद्धि, किताब और पोशाक के नाम पर मनमानी वसूली की शिकायतों के बाद विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। प्रमंडलीय आयुक्त के निर्देश के बाद जिला शिक्षा अधिकारी सक्रिय हो गए हैं और चिह्नित स्कूलों के प्रबंधन व प्राचार्यों से जवाब-तलब की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। बताया गया कि प्रमंडल के विभिन्न जिलों में संचालित निजी विद्यालयों की शुल्क संरचना और अन्य व्यवस्थाओं की जांच की जा रही है। 300 स्कूल चिह्नित विभाग ने ऐसे करीब 300 स्कूलों को चिह्नित किया है, जहां नियमों के उल्लंघन की शिकायतें मिली हैं। संबंधित स्कूलों से जवाब मांगा जा रहा है। जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। आयुक्त ने बिहार निजी विद्यालय शुल्क (विनियमन अधिनियम) 2019 का हवाला देते हुए इसके प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया है। अधिनियम के अनुसार निजी विद्यालय हर वर्ष अधिकतम सात प्रतिशत तक ही फीस वृद्धि कर सकते हैं। बावजूद इसके कई स्कूलों द्वारा बिना उचित आधार के शुल्क बढ़ाने की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। जिला शिक्षा पदाधिकारियों को सख्त निर्देश आयुक्त ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने जिलों में निजी विद्यालयों की नियमित निगरानी और निरीक्षण करें साथ ही फीस, पुस्तक और पोशाक से संबंधित व्यवस्थाओं की समीक्षा कर निर्धारित प्रारूप में रिपोर्ट उपलब्ध कराएं, ताकि अनियमितता पाए जाने पर तत्काल कार्रवाई की जा सके। शिक्षा विभाग की इस सख्ती से निजी स्कूल संचालकों में बेचैनी बढ़ गई है। अभिभावकों को उम्मीद है कि विभाग की कार्रवाई से मनमानी फीस वसूली पर रोक लगेगी और उन्हें राहत मिलेगी।

बुध का नक्षत्र परिवर्तन 2026 में, कई राशियों पर पड़ सकता है नकारात्मक असर

ज्योतिष शास्त्र में बुध को बुद्धि, अच्छे कामों और संचार का कारक माना जाता है. जब बुध अपनी स्थिति बदलते हैं और किसी नए नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तो इसे बुध का नक्षत्र परिवर्तन कहा जाता है. माना जाता है कि इसका असर सभी राशियों पर पड़ता है. द्रिक पंचांग के अनुसार, 13 मई 2026, बुधवार की शाम 7 बजकर 37 मिनट पर बुध कृत्तिका नक्षत्र में प्रवेश करेंगे. यह परिवर्तन कई लोगों के जीवन में नकारात्मक बदलाव आ सकता है. ज्योतिषियों के अनुसार, बुध के इस परिवर्तन से कई राशियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है. बुध नक्षत्र परिवर्तन का महत्व नक्षत्र परिवर्तन के दौरान बुध की ऊर्जा और प्रभाव का तरीका बदल जाता है, जिससे सभी राशियों के जीवन पर अलग-अलग असर देखने को मिलता है. कहीं यह समय सोचने-समझने की क्षमता को मजबूत करता है, तो कहीं संवाद में गलतफहमी या निर्णय में भ्रम की स्थिति भी पैदा कर सकता है. यह परिवर्तन खासतौर पर शिक्षा, नौकरी, व्यापार और कम्युनिकेशन से जुड़े क्षेत्रों को प्रभावित करता है. इसलिए इस दौरान लोगों को अपने शब्दों, फैसलों और निवेश को लेकर अधिक सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है. मेष राशि इस समय मेष राशि वालों को कार्यस्थल पर गलतफहमी से जुड़ी समस्या फेस करनी पड़नी सकती है. किसी भी बात को ठीक तरीके से न समझ पाने के कारण निर्णय गलत ले सकते हैं. खर्चों पर भी नियंत्रण रखना जरूरी होगा वरना पैसा से जुड़ी दिक्कत होंगी. कर्क राशि कर्क राशि के जातकों के लिए यह समय मानसिक तनाव बढ़ा सकता है. परिवार या कामकाज में छोटी-छोटी बातों पर विवाद की स्थिति बन सकती है. किसी भी निर्णय में जल्दबाजी नुकसान दे सकती है. वृश्चिक राशि वृश्चिक राशि वालों को इस दौरान करियर में रुकावट या काम में देरी का सामना करना पड़ सकता है. सहकर्मियों के साथ तालमेल बिगड़ सकता है, इसलिए धैर्य रखना जरूरी होगा. किसी से बहस या झगड़े से बचना अच्छा रहेगा. कुंभ राशि कुंभ राशि के लिए यह समय आर्थिक मामलों में सावधानी बरतने का संकेत देता है. निवेश या बड़े लेन-देन में गलती होने की संभावना हो सकती है. सेहत पर भी थोड़ा ध्यान देने की जरूरत रहेगी.

बठिंडा में शुकराना यात्रा के दौरान सीएम का BJP पर निशाना, बंगाल की स्थिति को बताया उदाहरण

चंडीगढ़ मुख्यमंत्री भगवंत मान की शुकराना यात्रा का आज तीसरा दिन है। जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार एक्ट अमेंडमेंट 2026 के लागू होने के बाद सीएम पूरे पंजाब में यात्रा कर रहे हैं। यात्रा के दाैरान बठिंडा में मुख्यमंत्री ने भाजपा पर निशाना साधा। शहर के अमरीक सिंह रोड पर लोगों को संबोधित करते हुए मान ने कहा कि बंगाल में भाजपा की सरकार बनने के बाद वहां पर बुरा हाल हो चुका है। मान ने कहा कि पंजाब में कुछ पार्टियां आपसी भाईचारक सांझ को तोड़ने का प्रयास कर रही है, लेकिन पंजाब के लोग बहुत समझदार हैं। फिर भी राज्य के लोग ऐसी पार्टियों से सचेत रहें। मान ने कहा कि परमात्मा ने उन्हें हिम्मत दी, जिस कारण वे बेअदबी का इंसाफ देने के लिए कानून बनाने में कामयाब हुए।   अपनी चार दिवसीय शुक्राना यात्रा के दूसरे चरण की शुरुआत से पहले, मान ने जालंधर के ओल्ड बारादरी स्थित अपने आधिकारिक आवास पर पत्रकारों से कहा: “पंजाब की कठिन परिश्रम से अर्जित शांति और सांप्रदायिक सद्भाव को कोई भंग नहीं कर सकता। पंजाब एक उपजाऊ भूमि है जहाँ कोई भी फसल उगाई जा सकती है, लेकिन नफरत के बीज यहाँ नहीं बोए जा सकते। हालिया विस्फोट पंजाब में भाजपा के प्रवेश के संकेत हैं।” मान ने इन घटनाओं को पश्चिम बंगाल में भाजपा के चुनावोत्तर भाषणों से जोड़ा और उनके नारे "बंगाल सरकार हमारी है, अब पंजाब की बारी है" का हवाला दिया। उन्होंने भाजपा और शिरोमणि अकाली दल दोनों को सांप्रदायिक संगठन बताया और कहा कि पंजाब, जिसने AK-47 के दौर को पार कर लिया है, अपनी "मजबूत भाईचारे" के बल पर आज भी दृढ़ है। जांच बनाम आरोप मुख्यमंत्री के दावे पुलिस के मौजूदा रुख के विपरीत हैं। जहां मान ने बीएसएफ पंजाब फ्रंटियर मुख्यालय के बाहर और खासा सेना छावनी के पास हुए विस्फोटों के लिए भाजपा की "कार्यशैली" को जिम्मेदार ठहराया, वहीं पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) गौरव यादव ने कहा कि प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि ये विस्फोट पाकिस्तान की आईएसआई द्वारा प्रायोजित आईईडी विस्फोट थे। इन टिप्पणियों पर तुरंत तीखी प्रतिक्रिया हुई। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने मान को कानूनी नोटिस भेजकर बिना शर्त माफी मांगने की मांग की। भाजपा ने इन आरोपों को राज्य सरकार की कानून-व्यवस्था बनाए रखने में विफलताओं से ध्यान भटकाने का "दुर्भावनापूर्ण प्रयास" बताते हुए खारिज कर दिया और कहा कि जब एक संवेदनशील आतंकी जांच चल रही हो, तब किसी राजनीतिक दल पर आरोप लगाना "खतरनाक" है। चुघ ने कहा कि मान ने बिना किसी सबूत के भाजपा पर संलिप्तता का आरोप लगाकर मुख्यमंत्री पद की गरिमा को ठेस पहुंचाई है। चंडीगढ़ में पत्रकारों से बात करते हुए चुघ ने कहा, "इसीलिए उनके खिलाफ आपराधिक मानहानि, झूठी सूचना फैलाने और जन अशांति भड़काने के प्रयास के लिए कानूनी कार्यवाही शुरू की गई है।" “सवाल सीधा सा है: क्या मुख्यमंत्री पंजाब की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं, या वे राष्ट्रविरोधी ताकतों को राजनीतिक संरक्षण दे रहे हैं? जिस दिन पूरा देश ऑपरेशन सिंदूर की वर्षगांठ पर हमारे सशस्त्र बलों के साहस और शौर्य का जश्न मना रहा है, उस दिन भाजपा जैसी लोकतांत्रिक और राष्ट्रवादी पार्टी को विस्फोटों से जोड़ने का मान का प्रयास न केवल एक राजनीतिक झूठ है, बल्कि लाखों भारतीयों के जनादेश और विश्वास का अपमान है,” चुघ ने कहा। उन्होंने कहा कि अगर मान सात दिनों के भीतर अपना बयान वापस नहीं लेते और सार्वजनिक माफी नहीं मांगते, तो उनके खिलाफ आपराधिक और दीवानी दोनों तरह की कानूनी कार्यवाही शुरू की जाएगी। जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब (संशोधन) अधिनियम के पारित होने के उपलक्ष्य में शुरू की गई मान की शुक्राना यात्रा 9 मई को फतेहगढ़ साहिब में समाप्त होने वाली है।

ड्यूटी से गायब और भ्रष्टाचार में लिप्त डॉक्टरों पर सख्त कार्रवाई, डिप्टी सीएम का बड़ा हंटर

लखनऊ उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने स्वास्थ्य विभाग में व्याप्त लापरवाही और अनुशासनहीनता के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा हंटर चलाया है। ड्यूटी से गायब रहने, भ्रष्टाचार में लिप्त होने और मरीजों के इलाज में कोताही बरतने वाले 5 डॉक्टरों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। इसके अलावा, एक सीएमओ समेत 16 अन्य चिकित्साधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच और कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश जारी किए गए हैं। 5 डॉक्टर सेवा से बर्खास्त लंबे समय से बिना किसी सूचना के ड्यूटी से नदारद रहने वाले डॉक्टरों पर सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें बर्खास्त कर दिया गया है। इनमें डॉ. अलकनन्दा (गोरखपुर), डॉ. रामजी भरद्वाज (कुशीनगर), डॉ. सौरभ सिंह (बलरामपुर), डॉ. विकलेश कुमार शर्मा (अमेठी) और डॉ. मोनिका वर्मा (औरैया) शामिल हैं। निजी अस्पतालों से साठगांठ पर गिरी गाज अम्बेडकर नगर के सीएमओ डॉ. संजय कुमार शैवाल और डिप्टी सीएमओ डॉ. संजय वर्मा को निजी नर्सिंग होम और अल्ट्रासाउंड केंद्रों के पंजीकरण में अनियमितता का दोषी पाया गया है। व्यक्तिगत स्वार्थ और पद के दुरुपयोग के मामले में इनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है। वहीं, हरदोई के संडीला अधीक्षक डॉ. मनोज कुमार सिंह पर भी अवैध अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई न करने पर गाज गिरी है। वसूली और अभद्रता पर भी कार्रवाई हमीरपुर की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. लालमणि की तीन वेतनवृद्धियां स्थायी रूप से रोक दी गई हैं। उन पर प्रसूताओं से अवैध वसूली और अभद्रता के आरोप सिद्ध हुए हैं। इसके साथ ही, राजकीय मेडिकल कॉलेज बदायूं के सह-आचार्य डॉ. रितुज अग्रवाल के खिलाफ गाली-गलौज और अभद्रता के मामले में अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं। अन्य प्रमुख कार्रवाइयां: प्रयागराज: मेजा अधीक्षक डॉ. शमीम अख्तर का प्रशासनिक लापरवाही के कारण तबादला और जांच। मथुरा: गलत मेडिकोलीगल रिपोर्ट बनाने पर डॉ. देवेंद्र कुमार और डॉ. विकास मिश्रा पर एक्शन। झांसी: प्राइवेट प्रैक्टिस करने के दोषी ट्रामा सेंटर के आर्थोसर्जन डॉ. पवन साहू की 2 वेतनवृद्धियां रोकी गईं। प्रतिनियुक्ति समाप्त: अमर्यादित भाषा का प्रयोग करने पर डॉ. आदित्य पाण्डेय की प्रतिनियुक्ति तत्काल प्रभाव से खत्म कर दी गई है। सेवा से बर्खास्त किए गए डॉक्टर डॉ. अलकनन्दा: चिकित्साधिकारी, जिला चिकित्सालय, गोरखपुर डॉ. रामजी भरद्वाज: चिकित्साधिकारी, कुशीनगर डॉ. सौरभ सिंह: चिकित्साधिकारी, बलरामपुर डॉ. विकलेश कुमार शर्मा: सी.एच.सी. जगदीशपुर, अमेठी डॉ. मोनिका वर्मा: सी.एच.सी. दिबियापुर, औरैया विभागीय कार्यवाही के दायरे में आए अधिकारी डॉ. संजय कुमार शैवाल: मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO), अम्बेडकर नगर डॉ. संजय वर्मा: डिप्टी सी.एम.ओ., अम्बेडकर नगर डॉ. मनोज कुमार सिंह: चिकित्सा अधीक्षक, सण्डीला, हरदोई डॉ. शमीम अख्तर: अधीक्षक, सी.एच.सी. मेजा, प्रयागराज डॉ. अनिल कुमार सिंह: तत्कालीन अधीक्षक, लम्भुआ (वर्तमान- कादीपुर), सुल्तानपुर डॉ. धर्मराज: चिकित्साधिकारी, सुल्तानपुर डॉ. देवेन्द्र कुमार: इमरजेंसी मेडिकल अफसर, जिला चिकित्सालय, मथुरा डॉ. विकास मिश्रा: सर्जन, जिला चिकित्सालय, मथुरा डॉ. अन्नू चन्द्रा: चिकित्साधिकारी, बलरामपुर डॉ. शिवेश जायसवाल: चिकित्साधिकारी, राजकीय चिकित्सालय, वाराणसी डॉ. राजेश कुमार वर्मा: चिकित्साधिकारी, जिला चिकित्सालय, बदायूँ डॉ. गणेश कुमार: चिकित्सा अधीक्षक, सी.एच.सी. गोला, लखीमपुर खीरी डॉ. अरूण कुमार: चिकित्साधिकारी, जिला चिकित्सालय, बदायूँ डॉ. अरविन्द कुमार श्रीवास्तव: संयुक्त चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवायें डॉ. जानकीश चन्द्र शंखधर: चिकित्साधिकारी, जिला संयुक्त चिकित्सालय, सम्भल डॉ. रितुज अग्रवाल: सह-आचार्य (अस्थिरोग), राजकीय मेडिकल कॉलेज, बदायूँ वेतनवृद्धि रोकने और अन्य दंड पाने वाले डॉक्टर डॉ. लालमणि: स्त्री रोग विशेषज्ञ, जिला महिला चिकित्सालय, हमीरपुर (3 वेतनवृद्धियां रुकीं) डॉ. सन्तोष सिंह: चिकित्साधिकारी, बलरामपुर (4 वेतनवृद्धियां रुकीं) डॉ. निशा बुन्देला: चिकित्साधिकारी, झाँसी (2 वेतनवृद्धियां रुकीं) डॉ. पवन साहू: आर्थोसर्जन, ट्रामा सेन्टर, मोठ, झाँसी (2 वेतनवृद्धियां रुकीं) डॉ. आदित्य पाण्डेय: स्टेट हेल्थ एजेंसी (वाराणसी प्रतिनियुक्ति समाप्त कर मूल पद पर भेजे गए) डॉ. प्रतिभा यादव: चिकित्साधिकारी, सी.एच.सी. महसी, बहराइच (परिनिन्दा का दण्ड) डॉ. राकेश सिंह: चिकित्साधिकारी, सी.एच.सी. राल, मथुरा (परिनिन्दा का दण्ड)

गर्मी में घर को ठंडा और सकारात्मक रखने के लिए पर्दों के सही रंग चुनें

गर्मी का मौसम शुरू हो चुका है. गर्मी का मौसम शुरू होते ही घर की खिड़कियां, छत, दरवाजे और कमरे तपने लगते हैं, जिनसे बचाव के लिए पर्दे लगाए जाते हैं. ये पर्दे गर्मी रोकने के साथ साथ घर में हल्की ठंडक भी बरकरार रखते हैं. लेकिन, ये ठंडक पर्दे के रंग पर बहुत ही ज्यादा निर्भर करती है. पर्दे किसी भी घर का जरूरी हिस्सा होते हैं क्योंकि ये घर को सुंदर भी बनाते हैं और काम के भी होते हैं. जिस तरह से पर्दे सूरज की गर्मी रोकते हैं, उसी तरह वास्तु शास्त्र में भी पर्दे बहुत ही महत्वपूर्ण माने जाते हैं. वास्तु के अनुसार, पर्दों का सही रंग चुनना बहुत विशेष माना गया है. सही रंग के पर्दे घर में अच्छी व पॉजिटिव ऊर्जा लाते हैं और नकारात्मक ऊर्जा को दूर रखते हैं. कमरे की सही दिशा और उसके उपयोग के अनुसार पर्दे चुनने से जल, अग्नि, वायु और आकाश जैसे तत्वों में बैलेंस बना रहता है. इससे घर का माहौल अच्छा रहता है, रिश्ते मजबूत होते हैं और शांति बनी रहती है. सही रंग के पर्दे लगाकर आप अपने घर को सकारात्मक ऊर्जा से भर सकते हैं. वहीं, गहरे रंग के पर्दे घर में तनाव स्थिति पैदा करते हैं जिसका सीधा सीधा असर पैसे की स्थिति पर पड़ता है. वास्तु के हिसाब से पर्दों के रंग का असर घर के माहौल और हमारी सोच पर पड़ता है. तो आइए जानते हैं हर रंग का मतलब. – सफेद पर्दे वास्तु शास्त्र के मुताबिक, सफेद रंग शांति का प्रतीक माना जाता है. इस रंग के पर्दे घर में भी शांति और साफ-सुथरा माहौल बनाते हैं. यह पर्दे पूजा घर में और लिविंग रूम में लगाए जा सकते हैं. – हल्के नीले पर्दे इस रंग के पर्दे मन को शांत करते हैं, गुस्सा और टेंशन कम करते हैं. बेडरूम और पढ़ाई वाले कमरों में इन्हें लगाना ठीक रहता है. – हरे पर्दे इस रंग के पर्दे ताजगी और पॉजिटिव फीलिंग देते हैं. घर में अच्छा माहौल और एनर्जी लाते हैं. पीले पर्दे वास्तु शास्त्र के अनुसार, पीले रंग का पर्दा खुशी और अच्छा मूड बनाते हैं. बच्चों के कमरे और स्टडी रूम के लिए बढ़िया हैं. नारंगी पर्दे इस रंग के पर्दे लोगों के बीच बातचीत और मेलजोल बढ़ाते हैं. खाने वाले कमरे में अच्छे रहते हैं. गुलाबी पर्दे इस रंग के पर्दे प्यार और अपनापन बढ़ाते हैं. बेडरूम के लिए यह रंग बहुत ही अच्छा माना जाता है. क्रीम या बेज पर्दे इस रंग के पर्दे बहुत शांत और सादा माहौल देते हैं. घर को आरामदायक बनाते हैं. लाल पर्दे लाल पर्दे ज्यादा एनर्जी देते हैं, लेकिन इन्हें संभलकर लगाना चाहिए क्योंकि ये गुस्सा या तनाव भी बढ़ा सकते हैं. लैवेंडर पर्दे इस रंग के पर्दे दिमाग को शांत करते हैं और आराम देते हैं. ध्यान या पढ़ाई के लिए अच्छे हैं. ग्रे पर्दे इस रंग के फोकस बढ़ाते हैं, लेकिन घर में ज्यादा इस्तेमाल करने से माहौल थोड़ा फीका लग सकता है. भूरे पर्दे सुरक्षा और स्थिरता का एहसास देते हैं. बेडरूम में अच्छे रहते हैं. घर की ये छोटी-छोटी चीजें, जैसे पर्दों का रंग, सौफे का रंग, सभी आपके घर के माहौल पर असर डालती हैं. सही रंग धीरे-धीरे आपके मन और सोच को प्रभावित करता है. सही जगह पर सही रंग के पर्दे लगाने से अच्छी नींद आती है, तनाव कम होता है और मन भी शांत रहता है. जब घर का माहौल सकारात्मक ऊर्जा से भरा होता है, तो जिंदगी भी आसान और खुशहाल लगने लगती है. जिससे पैसा भी आने लगता है और आर्थिक स्थिति अच्छी हो जाती है.