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केंद्र का जवाब: पंजाब में गेहूं लिफ्टिंग नहीं रुक रही, 234 ट्रेनें चलाई गईं; उत्पादन घटा

चंडीगढ़  केंद्र सरकार ने पंजाब की मंडियों में भारी भीड़ और गेहूं की लिफ्टिंग न होने को झूठा करार दिया है। अब गेहूं लिफ्टिंग को लेकर केंद्र और सूबे की आप सरकार में तनातनी का माहौल हो गया है।  इसके बावजूद मंडियों से गेहूं का उठाव पिछले साल से बेहतर है। इस साल अब तक 78.96 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उठान किया जा चुका है, जबकि पिछले साल इसी समय तक यह आंकड़ा 75.63 लाख मीट्रिक टन था। सरकार का कहना है कि आवक कम होने और उठान अधिक होने से यह स्पष्ट है कि इस बार मंडियों में पिछले साल की तुलना में भीड़ कम है और लिफ्टिंग की व्यवस्था ठीक है। डायरेक्ट डिलवरी योजना से लिफ्टिंग तेज हुई मंडियों में भीड़ कम करने के लिए इस बार सीधी डिलीवरी योजना चलाई गई। अप्रैल में सीधी डिलीवरी के जरिए 3.5 लाख मीट्रिक टन गेहूं निकाला गया। मई के लिए 6.6 लाख मीट्रिक टन और जून के लिए 8 लाख मीट्रिक टन की योजना बनाई गई है। केंद्र ने बताया कि आप सरकार के अनुरोध पर गेहूं सीजन में कुल 18 लाख मीट्रिक टन गेहूं की सीधी डिलीवरी का लक्ष्य रखा गया है, जिससे मंडियों में गेहूं रखने की जगह कम न पड़े। 413 गेहूं स्पेशल ट्रेनों में से 234 अकेले पंजाब को दी केंद्र सरकार ने बताया कि रेल मंत्रालय और एफसीआई पंजाब से गेहूं की निकासी के लिए विशेष ट्रेनों का संचालन कर रहे हैं। अप्रैल में देशभर में चलीं 413 गेहूं स्पेशल ट्रेनों में से 234 अकेले पंजाब को दी गईं। इसी तरह मई में भी उपलब्ध 354 ट्रेनों में से 201 ट्रेनें पंजाब के हिस्से में आई हैं, जो कुल राष्ट्रीय आवागमन का लगभग 60 प्रतिशत है। 100 अतिरिक्त ट्रेनें पंजाब को आवंटित स्थिति को और बेहतर बनाने के लिए उत्तर प्रदेश व दक्षिण के राज्यों के लिए मई में 100 अतिरिक्त ट्रेनें पंजाब को आवंटित की गई हैं। सरकार ने भरोसा दिलाया है कि वह जमीनी हालात पर नजर रखे हुए हैं और गेहूं की निर्बाध निकासी सुनिश्चित की जा रही है।  

स्मार्ट प्रीपेड मीटर पर सरकार का यू-टर्न, अब नहीं देना होगा नया सिक्योरिटी चार्ज

लखनऊ उत्तर प्रदेश के लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी जीत की खबर है। स्मार्ट प्रीपेड मीटरों को पोस्टपेड में बदलने के बाद नई दरों पर सिक्योरिटी मनी वसूलने के फैसले को पावर कॉर्पोरेशन ने देर रात वापस ले लिया है। अब उपभोक्ताओं से पुरानी जमा सिक्योरिटी ही मान्य होगी और नई कॉस्ट डेटा बुक के तहत अतिरिक्त पैसा नहीं वसूला जाएगा। देर रात बदला गया आदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के कड़े विरोध के बाद रात करीब 10:30 बजे पावर कॉर्पोरेशन ने अपना आदेश संशोधित किया। परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने इस मुद्दे को मजबूती से उठाते हुए इसे 'कानून की ताकत' बताया है। कॉर्पोरेशन ने पहले आदेश दिया था कि पोस्टपेड होने पर उपभोक्ताओं को नई कॉस्ट डेटा बुक-2025 के अनुसार बढ़ी हुई सिक्योरिटी मनी देनी होगी, जिसका सीधा बोझ लगभग 83 लाख उपभोक्ताओं पर पड़ रहा था। क्या था विवाद? जब पावर कॉर्पोरेशन ने उपभोक्ताओं के पोस्टपेड कनेक्शन को प्रीपेड मोड में बदला था, तब उनकी जमा सिक्योरिटी मनी को उनके प्रीपेड अकाउंट में रिचार्ज के रूप में डाल दिया गया था। अब दोबारा पोस्टपेड होने पर कॉर्पोरेशन नई दरों से सुरक्षा राशि मांग रहा था। अवधेश कुमार वर्मा के अनुसार, "प्रदेश के कई कनेक्शन 10 साल, 20 साल या उससे भी पुराने हैं। उस समय के नियमों के अनुसार सिक्योरिटी जमा की गई थी। अब वर्तमान की नई दरों के हिसाब से अतिरिक्त पैसा मांगना पूरी तरह गलत और कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन था।" उपभोक्ता परिषद की बड़ी जीत उपभोक्ता परिषद ने इस मामले में विद्युत नियामक आयोग में लोकमत प्रस्ताव दाखिल करने की तैयारी भी कर ली थी। परिषद का तर्क था कि चूंकि उपभोक्ताओं ने पहले ही अपनी जिम्मेदारी पूरी कर दी थी, इसलिए सिस्टम के बार-बार बदलने का खामियाजा जनता क्यों भुगते। देर रात आए इस फैसले से उन मध्यम और निम्न वर्गीय परिवारों को बड़ी राहत मिली है, जिन्हें हजारों रुपये की अतिरिक्त सिक्योरिटी मनी बिल में जुड़कर आने का डर था। जून से एसएमएस और व्हाट्सएप पर मिलेगा बिल सभी स्मार्ट प्रीपेड मीटर तत्काल प्रभाव से पोस्टपेड प्रणाली में बदले जा रहे हैं। अगले महीने से उपभोक्ताओं को इस्तेमाल की गई बिजली का बिल मिलेगा। मई 2026 की खपत का बिल जून 2026 में पोस्टपेड प्रणाली के तहत जारी किया जाएगा। यह बिल एसएमएस और व्हाट्सएप के माध्यम से मिलेगा। हर महीने की 10 तारीख तक बिल जारी किए जाएंगे। 15 दिन के अंदर बिल जमा करना होगा। बिल न मिलने पर मैनुअल रीडिंग लेकर बिल लेकर पैसा जमा कर सकते हैं।

क्रिकेट का पहला महान फिनिशर, दबाव में हमेशा टीम को दिलाई जीत

नई दिल्ली क्रिकेट इतिहास में कई महान बल्लेबाज आए, लेकिन कुछ खिलाड़ियों ने खेल की दिशा ही बदल दी. माइकल बेवन उन्हीं चुनिंदा क्रिकेटरों में शामिल हैं, जिन्हें दुनिया का पहला 'असली फिनिशर' माना जाता है. आज क्रिकेट जगत में 'फिनिशर' शब्द बेहद आम हो चुका है, लेकिन इस भूमिका को पहचान दिलाने का सबसे बड़ा श्रेय माइकल बेवन को जाता है. दबाव में शांत रहकर मैच खत्म करना, विकेट बचाए रखना और आखिरी ओवर तक टीम को जीत दिलाना- बेवन ने वनडे इंटरनेशनल (ODI) में इस कला को नई ऊंचाई दी. बेवन 8 मई (शुक्रवार) को 56 साल के हो गए. माइकल बेवन दुनिया के सर्वश्रेष्ठ लिमिटेड ओवर्स बल्लेबाजों में गिने जाते हैं. उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के लिए 232 ओडीआई मुकाबलों में 53.58 की औसत से 6912 रन बनाए, जिसमें 6 शतक और 46 अर्धशतक शामिल रहे. बेवन ओडीआई में 67 मौकों पर नाबाद लौटे. उनका औसत उस दौर में बेहद असाधारण माना जाता था. संन्यास के वक्त वह दुनिया के उन गिने-चुने बल्लेबाजों में शामिल थे, जिनका ओडीआई औसत 50 से ऊपर था. बाएं हाथ के बल्लेबाज माइकल बेवन की सबसे बड़ी ताकत थी- दबाव में भी शांत रहना. जब भी ऑस्ट्रेलियाई टीम मुश्किल में फंसती, तब बेवन क्रीज पर टिककर मैच को अंत तक ले जाते और टीम को जीत दिलाते. उनकी बल्लेबाजी में चौके-छक्कों की चमक कम, लेकिन मैच जिताने की क्षमता सबसे ज्यादा थी. गैप में शॉट खेलना, तेजी से रन लेना और सही समय पर बाउंड्री लगाना उनकी खास पहचान बन गया था. माइकल बेवन ने अपने करियर में कई ऐसी पारियां खेलीं जो आज भी क्रिकेट इतिहास का हिस्सा हैं. 1996 में सिडनी में वेस्टइंडीज के खिलाफ और 2002 में मेलबर्न में न्यूजीलैंड के विरुद्ध उनकी मैच जिताऊ पारियां आज भी याद की जाती हैं. इन मुकाबलों में बेवन ने निचले क्रम के बल्लेबाजों के साथ मिलकर आखिरी ओवर्स में ऑस्ट्रेलिया को यादगार जीतें दिलाई थी. बेवन करीब एक दशक तक ऑस्ट्रेलिया की वनडे टीम का सबसे अहम हिस्सा रहे. उन्होंने ऑस्ट्रेलिया को दो वनडे वर्ल्ड कप (1999 और 2003) जिताने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. टेस्ट क्रिकेट में नहीं चला बल्ला वनडे क्रिकेट में महान सफलता पाने के बावजूद माइक बेवन टेस्ट क्रिकेट में वैसा असर नहीं छोड़ सके. उन्होंने 18 टेस्ट मैचों में 29.07 के एवरेज 785 रन बनाए, जिसमें 6 अर्धशतक शामिल रहे. पाकिस्तान के खिलाफ डेब्यू सीरीज में 82, 70 और 91 रनों की पारियां खेलकर शानदार शुरुआत की थी, लेकिन बाद में शॉर्ट बॉल के खिलाफ कमजोरी सामने आ गई. दिलचस्प बात यह रही कि घरेलू क्रिकेट में उन्हें शॉर्ट बॉल से ज्यादा परेशानी नहीं होती थी, लेकिन इंटरनेशनल स्तर पर यह कमजोरी उनके टेस्ट करियर पर भारी पड़ गई. माइकल बेवन सिर्फ बल्लेबाज नहीं थे. वह बेहतरीन फील्डर भी थे और उनकी लेफ्ट आर्म रिस्ट स्पिन गेंदबाजी कई बार टीम के काम आई. उनकी गेंदबाजी कभी-कभी अनियमित जरूर रहती थी, लेकिन जरूरत पड़ने पर वह अहम विकेट निकालने की क्षमता रखते थे. बेवन ने इंटरनेशनल क्रिकेट में कुल 65 विकेट झटके. करियर के आखिर में इंजरी से रहे परेशान ऑस्ट्रेलियाई टीम से बाहर होने के बाद भी माइकल बेवन का बल्ला शांत नहीं हुआ. उन्होंने तस्मानिया के लिए 2004-05 के सीजन में रिकॉर्ड 1464 रन बनाए, जिसमें 8 शतक शामिल थे. उस सीजन में उनका औसत 97.60 रहा, जो किसी सपने जैसा था. करियर के आखिरी वर्षों में बेवन घुटने, कूल्हे और एड़ी की चोटों से जूझते रहे, शरीर लगातार जवाब दे रहा था और आखिरकार जनवरी 2007 में उन्होंने क्रिकेट को अलविदा कह दिया. टीम इंडिया के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को दुनिया के सबसे महान फिनिशर्स में गिना जाता है, लेकिन उससे पहले माइकल बेवन ने इस भूमिका की नींव रखी थी. बेवन ने साबित किया कि क्रिकेट सिर्फ ताकत का खेल नहीं है, बल्कि धैर्य, दिमाग और सही फैसलों का भी खेल है. बेवन सिर्फ रन मशीन नहीं थे, बल्कि ओडीआई क्रिकेट की नई सोच के प्रतीक थे.

तमिलनाडु में बड़ी संख्या में इस्तीफे, बंगाल की तरह 100+ अधिकारी छोड़ रहे पद

चेन्नई तमिलनाडु में नई सरकार के गठन को लेकर जारी अनिश्चितता के बीच एक बड़ा प्रशासनिक घटनाक्रम सामने आया है। राज्य सरकार की पैरवी करने वाले 100 से अधिक विधि अधिकारियों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। आपको बता दें कि इससे पहले पश्चिम बंगाल में भी कई अधिकारियों ने अपनी नौकरी छोड़ दी थी। वहां तृणमूल कांग्रेस को बेदखल कर भारतीय जनता पार्टी पहली बार सत्ता में आई है। तमिलनाडु में एडवोकेट जनरल पी.एस. रमन के नेतृत्व वाले इन अधिकारियों ने अपना इस्तीफा सौंप दिया है। दरअसल, सरकारी वकीलों और विधि अधिकारियों की नियुक्तियां काफी हद तक राजनीतिक होती हैं। परंपरा के अनुसार, जब भी राज्य में सत्ता परिवर्तन होता है या नई सरकार आने वाली होती है तो पिछली सरकार द्वारा नियुक्त अधिकारी पद छोड़ देते हैं ताकि नई सरकार अपनी पसंद के वकीलों को नियुक्त कर सके। अभी काम करते रहेंगे सभी वकील इस्तीफे के बावजूद, इन अधिकारियों को एक सप्ताह और पद पर बने रहने का निर्देश दिया गया है। सरकार नहीं चाहती कि अदालत में राज्य का पक्ष रखने वाला कोई न हो। सामान्य तौर पर नई सरकार अंतरिम व्यवस्था के तौर पर तीन-चार वकीलों की नियुक्ति करती है, लेकिन विजय की पार्टी (TVK) की सरकार बनने पर मचे सस्पेंस के कारण अभी तक ऐसी कोई नियुक्ति नहीं हुई है। एक विधि अधिकारी ने बताया, "राज्य को अदालत में बिना प्रतिनिधित्व के नहीं छोड़ा जा सकता, इसलिए हम तब तक काम जारी रखेंगे जब तक नई सरकार अपने अधिकारियों की नियुक्ति नहीं कर लेती।" नियम के मुताबिक, जैसे ही नई सरकार शपथ लेगी वह अपनी पार्टी से जुड़े अनुभवी वकीलों को इन महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त करेगी। वर्तमान में तमिलनाडु सरकार की ओर से अदालतों में पैरवी करने वाले 100 से अधिक अधिकारियों की टीम है, जिनका भविष्य अब नई सरकार के स्वरूप पर निर्भर करता है।

जैसलमेर में पारा 45 पार, कई जिलों में येलो अलर्ट जारी, धूलभरी हवाओं की चेतावनी

जयपुर राजस्थान में मई की शुरुआत के साथ ही मौसम ने उथल-पुथल मचा रखी है. एक तरफ जहां तापमान लगातार ऊपर चढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर आंधी-बारिश ने मौसम को अस्थिर बना दिया है. गुरुवार (7 मई) को कई हिस्सों में तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की गई. सबसे गर्म इलाके जैसलमेर में पारा 45.1 डिग्री तक पहुंच गया. पश्चिमी राजस्थान के अन्य जिलों में भी तपिश बरकरार है. बाड़मेर में 44.2, फलोदी में 43.6 और बीकानेर में 43 सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया. शुक्रवार (8 मई) के लिए कई जिलों में आंधी-बारिश का भी अलर्ट है.   कोटा-जयपुर में पारा 40 डिग्री के पार चित्तौड़गढ़, कोटा और जयपुर में भी पारा 40 डिग्री के पार दर्ज किया गया. इन शहरों में दिनभर तेज गर्मी का असर साफ दिखाई दे रहा है. बारां, धौलपुर, डीग, भरतपुर और अलवर जिलों में येलो अलर्ट है. इन इलाकों में तेज हवाओं के साथ हल्की-मध्यम वर्षा की संभावना है. मौसम विभाग ने साफ संकेत दिए हैं कि आगामी 2 से 3 दिनों में अधिकतम तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक और बढ़ोतरी हो सकती है.   जोधपुर संभाग में धूलभरी हवाओं से बढ़ेगी मुश्किल मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले तीन से चार दिनों में जोधपुर संभाग और आसपास के क्षेत्रों में 20 से 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से धूलभरी हवाएं चल सकती हैं. गर्मी के साथ-साथ तेज हवाओं का असर भी लोगों की मुश्किलें बढ़ा सकता है. इसके साथ ही कई हिस्सों में आंधी और हल्की बारिश की संभावना भी जताई गई है, जिससे मौसम का मिजाज और अधिक अस्थिर रह सकता है. वहीं, 9 मई से पश्चिमी राजस्थान में एक बार फिर हीटवेव का नया दौर शुरू होने की आशंका जताई गई है. खासतौर पर जोधपुर संभाग के सीमावर्ती इलाकों में तापमान 45 डिग्री के आसपास पहुंच सकता है.

योगी सरकार में एमएसएमई, स्टार्टअप और स्वरोजगार से आत्मनिर्भर बने प्रदेश के युवा

9 वर्षों में रोजगार, निवेश और आत्मनिर्भरता का सबसे बड़ा मॉडल बना उत्तर प्रदेश योगी सरकार में एमएसएमई, स्टार्टअप और स्वरोजगार से आत्मनिर्भर बने प्रदेश के युवा रोजगार क्रांति के जरिए नौकरी मांगने वाले नहीं, नौकरी देने वाले बन चुके हैं युवा महिलाओं और युवाओं को सरकारी नौकरी से लेकर स्वरोजगार तक मिल रहा खूब मौका लखनऊ  उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार ने पिछले 9 वर्षों में रोजगार और स्वरोजगार के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव किये हैं। योगी सरकार ने रोजगार के मामले को मिशन के रूप में लिया है। इसके तहत प्रदेश की अर्थव्यवस्था को एक ट्रिलियन डॉलर बनाने के लक्ष्य के साथ युवाओं और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है। सरकार, सरकारी क्षेत्र में नौकरी के अवसर देने के साथ निजी क्षेत्रों में भी युवाओं के लिए मौके उपलब्ध करा रही है।  उत्तर प्रदेश, देश में सबसे ज्यादा रोजगार देने वाला राज्य बन चुका है। इसी क्रम में बीते 9 वर्षों में योगी सरकार ने 9 लाख से अधिक सरकारी नौकरियां दी हैं। यूपी पुलिस में ही इस दौरान 2.19 लाख भर्ती पूरी हो चुकी हैं। वहीं वर्ष 2026 में 80 हजार से अधिक पदों पर भर्ती होनी है। शिक्षा विभाग में करीब 1.65 लाख से अधिक नियुक्तियां की गई हैं। इसके अलावा उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड के द्वारा वर्ष 2017 से 2025 तक 53 हजार से ज्यादा,  उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के द्वारा 47 हजार से ज्यादा भर्तियां पारदर्शी तरीके से पूरी की गईँ। उत्तर प्रदेश में आज कारखानों की संख्या 31 हजार से अधिक हो गई है। वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में मात्र 14 हजार कारखाने ही पंजीकृत थे। नौजवानों के नए रोजगार की संभावनाएं भी पैदा हुईं। सरकारी नौकरी की जगह अपना रोजगार करने वाले नौजवान को एमएसएमई सेक्टर से बड़ा लाभ मिला है। केवल एमएसएमई सेक्टर से ही प्रदेश में 3 करोड़ से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला है। योगी सरकार की विभिन्न योजनाओं से युवाओं और महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने का सपना भी साकार हुआ। खादी एंव ग्रामोद्योग क्षेत्र में विस्तार से 4.63 लाख रोजगार सृजित किए गए हैं। विगत 9 वर्षों में 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव से 1 करोड़ से ज्यादा युवाओं के लिए रोजगार और सेवायोजन के अवसर उपलब्ध होने की संभावना है। बीते 9 वर्षों में 4 ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के माध्यम से 15 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव को जमीन पर उतारा गया है, जिनसे 60 लाख से अधिक रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं।  मुख्यमंत्री युवा रोजगार योजना के अंतर्गत अब तक 38 हजार से ज्यादा लाभार्थियों को 1,09,710 लाख से अधिक की मार्जिन मनी वितरित की गई। इस तरह योगी सरकार ने केवल रोजगार ही नहीं बल्कि स्वरोजगार के भी मौके प्रदेशवासियों के हित में उपलब्ध कराए हैं। प्रदेश में शिक्षित एवं प्रशिक्षित युवाओं को सूक्ष्म उद्योग स्थापित करने के लिए ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान’ शुरू किया गया। वर्ष 2024-25 से अब तक 1.47 लाख युवाओं को इस योजना का लाभ दिया गया, जिससे 4.51 लाख लोगों को रोजगार मिला है। योगी सरकार ने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं में उत्कष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को राजपत्रित पदों पर सेवायोजित करने की नीति घोषित की है। इसके तहत अब तक 500 से अधिक खिलाड़ियों को विभिन्न सरकारी विभागों में नौकरी दी जा चुकी है। प्रदेश में महिलाओं के लिए रोजगार के रास्ते खुले बीसी सखी योजना के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्र की महिला को आत्मनिर्भर बनाने का काम किया गया। इसके तहत ग्रामीण महिलाओं ने बैंकिंग प्रतिनिधि के रूप में 42,711 करोड़ का लेन-देन किया और 116 करोड़ का लाभांश कमाया। खेती में तकनीक को बढ़ावा देने के लिए महिलाओं को ड्रोन चलाने का प्रशिक्षण दिया गया। वहीं, स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं की वार्षिक आय 1 लाख रुपये से ऊपर ले जाने का लक्ष्य लखपति दीदी के जरिए पूरा किया जा रहा है। इससे प्रदेश में 18.55 लाख महिलाएं लखपति श्रेणी में पहुंच गईं हैं। एक करोड़ से ज्यादा महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर रोजगार कर रही हैं। कृषि आजीविका संवर्धन गतिविधियों से 64.34 लाख महिला किसान परिवारों को जोड़ा गया है। इन आंकड़ों को देखकर कहा जा रहा है कि आज उत्तर प्रदेश का युवा केवल नौकरी की तलाश में दूसरे राज्यों की ओर नहीं देख रहा, बल्कि अपने ही प्रदेश में रोजगार और व्यवसाय के अवसर प्राप्त कर रहा है। योगी सरकार की योजनाओं ने युवाओं और महिलाओं में आत्मविश्वास पैदा किया है। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश आज रोजगार, निवेश, उद्यमिता और महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में देश के सामने एक सफल मॉडल बनकर उभरा है।

फिरौती के लिए अपहरण तथा डकैती के मामलों में यूपी देश में सबसे निचले पायदान पर

एनसीआरबी रिपोर्ट: अपराध के मामलों में यूपी की स्थिति काफी बेहतर फिरौती के लिए अपहरण तथा डकैती के मामलों में यूपी देश में सबसे निचले पायदान पर महिलाओं के प्रति अपराधियों को सजा दिलाने में उत्तर प्रदेश देश में नंबर-1 लखनऊ  राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के वर्ष 2024 के आंकड़ों ने राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की बेहतर स्थिति को दर्शाया है। रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2024 में देश में कुल 35,44,608 आपराधिक मामले दर्ज किए गए। राष्ट्रीय क्राइम रेट 252.3 के सापेक्ष उत्तर प्रदेश का क्राइम रेट 180.2 रहा। कुल अपराधों में उत्तर प्रदेश का देश में 18वां स्थान है, जबकि देश की 17 फीसदी जनसंख्या यूपी में निवास करती है। गौरतलब है कि किसी भी राज्य में अपराध की स्थिति को समझने के लिए क्राइम रेट सबसे बेहतर एवं विश्वसनीय माध्यम है। प्रति एक लाख जनसंख्या के सापेक्ष अपराधों की संख्या को अपराध दर (Crime Rate) के रूप में परिभाषित किया जाता है। यह एक स्थापित वास्तविक संकेतक है, जो राज्य के आकार और जनसंख्या में वृद्धि के प्रभाव को संतुलित करता है। क्राइम रेट ही अपराधों की सही स्थिति समझने के लिए प्रामाणिक संकेतक है। एनसीआरबी रिपोर्ट के मुताबिक, देश के 28 राज्यों एवं 8 केन्द्रशासित प्रदेशों में उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की मजबूत स्थिति इस प्रकार समझी जा सकती है। हत्या के मामलों में देश में यूपी का स्थान 29वां है, जबकि हत्या के प्रयास के मामलों में यह 26वें स्थान पर है। शीलभंग के मामलों में प्रदेश 20वें स्थान पर है, जबकि फिरौती हेतु अपहरण के मामलों में राज्य पूरे देश में सबसे नीचे 36वें नंबर पर है। दुष्कर्म के मामलों में यूपी देश में 24वें स्थान पर है, जो राज्य में बेहतर कानून-व्यस्था को इंगित करता है। इसी प्रकार बलवे के मामलों में उत्तर प्रदेश 19वें स्थान पर है। इसी प्रकार डकैती के मामलों में उत्तर प्रदेश देश में सबसे निचले पायदान यानी 36वें स्थान पर है। लूट के मामलों में प्रदेश 28वें स्थान पर और पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज मामलों में यूपी का स्थान 23वां है। महिलाओं के प्रति अपराधों में यूपी 17वें नंबर पर है, जबकि बच्चों के विरुद्द अपराध के मामले में प्रदेश का स्थान 27वां है। ये आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि देश के अन्य राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों की तुलना में उत्तर प्रदेश की स्थिति अपराध नियंत्रण के मामले में काफी बेहतर है। आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि योगी सरकार लगातार अपराध व अपराधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति पर चल रही है, जिसके ठोस परिणाम भी सामने आ रहे हैं। महिला न्याय (Conviction Rate): यूपी देश का शीर्ष राज्य अपराधियों को सजा दिलाने (दोषसिद्धि) में उत्तर प्रदेश पूरे देश के लिए एक मानक स्थापित कर चुका है। महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में अदालतों द्वारा सजा सुनाने की दर इस प्रकार है- उत्तर प्रदेश: दोषसिद्धि दर 76.6% (शीर्ष) पश्चिम बंगाल: यहां दर मात्र 1.6% है। कर्नाटक: यहां मात्र 4.8% मामलों में सजा होती है। तेलंगाना: यहां दर 14.8% है। केरल: यहां दर मात्र 17.0% है। पंजाब: यहां दर 19.0% है। तमिलनाडु: यहां दर 23.4% है। उपरोक्त आंकड़े बताते हैं कि यूपी में महिला अपराध करने वाले अपराधी के बचने की संभावना न्यूनतम है, जबकि अन्य राज्यों में अपराधियों के छूटने की दर 75% से 98% तक है। इसी प्रकार राज्य में मर्यादा भंग के अपराधों की दर मात्र 18.6 है, जबकि तेलंगाना में 52.8, पश्चिम बंगाल में 39.5, केरल में यह 23.9 है। गंभीर अपराधों पर नियंत्रण यूपी में हत्या के मामलों की दर प्रति लाख जनसंख्या मात्र 1.3 है, जो तेलंगाना (2.7),  झारखण्ड (3.7) और पंजाब (2.5) की तुलना में काफी कम है। यूपी के महानगर जांच पूरी करने में देश के अन्य बड़े मेट्रो शहरों से कहीं अधिक तेज हैं। कानपुर में महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में चार्जशीट दर 84.4%, लखनऊ में 83.7% है। जेलों में क्षमता और अनुशासन के मामले में भी यूपी का प्रशासन अन्य राज्यों से बेहतर है। यूपी में महिला जेलों में अधिभोग दर (Occupancy Rate) मात्र 36.7% है, जो महिला कैदियों को सुव्यवस्थित वातावरण प्रदान करता है। यूपी की केंद्रीय जेलों की अधिभोग दर 74.3% है, जो पंजाब (118.4%) और केरल (149.9%) की तुलना में बहुत बेहतर है। एनसीआरबी रिपोर्ट का सांख्यिकीय डेटा स्पष्ट करता है कि उत्तर प्रदेश न केवल महिलाओं के प्रति अपराध करने वालों को दंडित करने (76.6% दोषसिद्धि) में देश में अग्रणी है, बल्कि गंभीर अपराधों (हत्या, धोखाधड़ी) और महिला सुरक्षा के मानकों पर दक्षिण भारतीय राज्यों और पंजाब/पश्चिम बंगाल की तुलना में कहीं अधिक बेहतर स्थिति में है।

हनीट्रैप और सुरक्षा खतरे पर अलर्ट, IPL टीमों के लिए नई गाइडलाइन जारी

नई दिल्ली इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 का सीजन जारी है, इसी बीच भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने सभी फ्रेंचाइजियों के लिए नई और सख्त एडवाइजरी जारी की है. खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बोर्ड ने होटल में आने-जाने वाले मेहमानों और विजिटर्स को लेकर कड़े नियम लागू किए हैं. BCCI सचिव देवजीत सैकिया ने फ्रेंचाइजियों को भेजे गए आधिकारिक कम्युन‍िकेशन में कहा है कि IPL ऑपरेशंस टीम समय-समय पर जांच करेगी कि एडवाइजरी का पालन हो रहा है या नहीं. साथ ही टीम मैनेजरों को सभी स्वीकृत गेस्ट विजिट और होटल मूवमेंट का रिकॉर्ड रखने के निर्देश दिए गए हैं. बोर्ड ने अपनी एडवाइजरी में साफ कहा है कि कुछ मामलों में खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ ने बिना टीम मैनेजर की जानकारी या अनुमति के बाहरी लोगों को होटल रूम तक पहुंच दी. कई मामलों में टीम मैनेजर को विजिटर्स की मौजूदगी की जानकारी तक नहीं थी. BCCI ने इस प्रथा को तुरंत प्रभाव से प्रतिबंधित कर दिया है. नई गाइडलाइन के मुताबिक अब कोई भी व्यक्ति चाहे उसका खिलाड़ी या स्टाफ सदस्य से कोई भी रिश्ता क्यों न हो, टीम मैनेजर की पूर्व जानकारी और लिखित मंजूरी के बिना होटल रूम में प्रवेश नहीं कर सकेगा. BCCI ने यह भी स्पष्ट किया है कि खिलाड़ियों या सपोर्ट स्टाफ से मिलने आने वाले मेहमानों को केवल होटल की सार्वजनिक जगहों जैसे लॉबी या रिसेप्शन लाउंज में ही मिलने की अनुमति होगी. किसी भी गेस्ट को निजी होटल रूम तक ले जाने के लिए टीम मैनेजर की लिखित अनुमति जरूरी होगी. बोर्ड ने फ्रेंचाइजियों को हनीट्रैप और सुरक्षा जोखिमों को लेकर भी आगाह किया है. एडवाइजरी में कहा गया कि हाई-प्रोफाइल स्पोर्ट्स वातावरण में टारगेटेड कॉम्प्रोमाइज और हनीट्रैप जैसी घटनाओं का खतरा बना रहता है. इसके अलावा यौन उत्पीड़न जैसे गंभीर कानूनी आरोपों की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता. BCCI ने सभी IPL फ्रेंचाइजियों से खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर लगातार सतर्क और सक्रिय रहने को कहा है ताकि किसी भी तरह के विवाद या सुरक्षा संकट से बचा जा सके.

स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल की मौजूदगी में समाधान शिविर में सैकड़ों मुद्दों का तुरंत निवारण

संवाद से संपूर्ण समाधान शिविर बना जनविश्वास का केंद्र, स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल की मौजूदगी में सैकड़ों समस्याओं का त्वरित निराकरण मनेन्द्रगढ़/एमसीबी छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी पहल “सुशासन तिहार 2026” के अंतर्गत विकासखंड खड़गवां के ग्राम मझौली में आयोजित “गांव-गांव, द्वार-द्वार सुशासन तिहार जनसमस्या निवारण शिविर संवाद से संपूर्ण समाधान कार्यक्रम में जनसैलाब उमड़ पड़ा। प्रशासन और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित करने वाले इस विशाल शिविर में ग्रामीणों की समस्याओं का मौके पर ही निराकरण कर शासन ने संवेदनशील और जवाबदेह प्रशासन की मिसाल पेश की। ग्राम पंचायत अखराडांड, बरमपुर, मझौली, भूकभूकी, दुबछोला, ठग्गांव, दुग्गी, सिंघत, खड़गवां और पोडीडीह सहित कुल 10 ग्राम पंचायतों को शामिल करते हुए आयोजित इस शिविर में सुबह से ही बड़ी संख्या में ग्रामीण अपनी समस्याएं और आवेदन लेकर पहुंचे। शिविर ने “समाधान आपके द्वार” की अवधारणा को साकार करते हुए लोगों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत दिलाई। कार्यक्रम का शुभारंभ स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, जिला पंचायत सदस्य प्रिया मसराम, जनपद सदस्य श्यामबाई मरकाम, उपाध्यक्ष बीरेन्द्र सिंह करियाम, जनपद सदस्य इंद्रावती सिंह, धर्मपाल सिंह, सोनमती उर्रे सहित जनप्रतिनिधियों द्वारा छत्तीसगढ़ महतारी के छायाचित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया। शुभारंभ के साथ ही पूरे शिविर परिसर में उत्साह, जनभागीदारी और भरोसे का वातावरण देखने को मिला। शिविर में एसडीएम विज्येन्द्र सारथी, जनपद सीईओ हेमंत बंजारे, तहसीलदार सिद्धि गबेल, सीपीएस दीपिका मिंज, सीएचएमओ अविनाश खरे सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी ने यह संदेश दिया कि शासन अब जनता की समस्याओं के समाधान के लिए गांव-गांव पहुंच रहा है। शिविर स्थल पर स्वास्थ्य, राजस्व, ग्रामीण यांत्रिकी, समाज कल्याण, कृषि, उद्यानिकी, वन, खाद्य, पुलिस, बिजली, लोक निर्माण, आयुष्मान कार्ड, महिला एवं बाल विकास, पशु चिकित्सा, पेयजल, बैंकिंग सेवाएं, आधार सेवा, मनरेगा और सामाजिक सुरक्षा सहित विभिन्न विभागों के आकर्षक एवं सुव्यवस्थित स्टॉल लगाए गए थे। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने सभी स्टॉलों का निरीक्षण कर अधिकारियों को आमजन की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। कार्यक्रम के दौरान सामाजिक संवेदनशीलता की झलक भी देखने को मिली, जब जनप्रतिनिधियों द्वारा गर्भवती महिलाओं बबीता, कदम कुंवर, रजंती, रोशनी, पप्पी, ममता, मानसी, सविता और उर्मिला की गोद भराई की रस्म संपन्न कराई गई। इससे शिविर केवल प्रशासनिक आयोजन न रहकर सामाजिक सरोकार का भी केंद्र बन गया। जनसमस्या निवारण शिविर में कुल 392 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए। स्वास्थ्य मंत्री द्वारा छह हितग्राहियों को राशन कार्ड, आठ हितग्राहियों को वन अधिकार पट्टा, पांच लोगों को जाति प्रमाण पत्र, अठारह किसानों को किसान किताब, पांच हितग्राहियों को आवास की चाबी, पांच लोगों को आयुष्मान कार्ड तथा सात लोगों को नवीन जॉब कार्ड वितरित किए गए। इसके अलावा दो क्षय रोगियों को फूड बास्केट भी प्रदान किया गया। कई आवेदनों का मौके पर ही निराकरण कर ग्रामीणों को तत्काल राहत दी गई, जबकि शेष आवेदनों को समय-सीमा में समाधान हेतु संबंधित विभागों को सौंपा गया। अपने संबोधन में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में सुशासन की नई संस्कृति विकसित हुई है। उन्होंने कहा कि अब सरकार केवल दफ्तरों तक सीमित नहीं है, बल्कि गांव-गांव पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुन रही है और मौके पर समाधान कर रही है। उन्होंने “सुशासन तिहार 2026” को जनहित, जवाबदेही और संवेदनशील प्रशासन की मिसाल बताते हुए कहा कि शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार गरीबों, किसानों, मजदूरों, महिलाओं, युवाओं और आदिवासी समाज के उत्थान के लिए लगातार ऐतिहासिक फैसले ले रही है। स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, पेयजल, राशन, आवास और सामाजिक सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में प्रभावी कार्य किए जा रहे हैं। विशेष रूप से स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने पर सरकार विशेष ध्यान दे रही है। स्वास्थ्य मंत्री ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सरल व्यक्तित्व, संवेदनशील कार्यशैली और जनसेवा के प्रति समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में छत्तीसगढ़ आने वाले समय में सुशासन और विकास का आदर्श राज्य बनकर उभरेगा। कार्यक्रम के अंत में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व विज्येन्द्र सारथी ने बताया कि शिविर में प्राप्त 392 से अधिक आवेदनों में से कई का मौके पर ही निराकरण कर हितग्राहियों को राहत प्रदान की गई है, जबकि शेष लंबित मामलों के त्वरित समाधान के लिए संबंधित विभागों को निर्देशित किया गया है। उन्होंने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप प्रत्येक आवेदन का गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा। कार्यक्रम में हृदय सिंह, रमेश जायसवाल, अशोक खरे, शंकर प्रताप गुप्ता, रामलाल साहू, हरबंस साहू, सतेन्द्र साहू, मनोज साहू, अंगद, सरपंच सुश्री जया सिंह मरावी, श्रीमती तुला, कुन्ती सिंह, सोनिया सिंह, सुनीता, रामबाई, संत कुमार सिंह, सुखीत लाल अगरिया, हरि सिंह, सचिव श्रीमती सुन्दर लली, उर्मिला, यशोदा, अनुराग दुबे, अशोक पाण्डेय, सीता सिंह सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

स्मार्ट मीटर अब पोस्टपेड मोड में, संचालन के आदेश जारी

स्मार्ट मीटरों को पोस्टपेड मोड में संचालित करने के आदेश जारी प्रदेश में समाप्त हुई स्मार्ट प्री-पेड मीटर व्यवस्था: ऊर्जा मंत्री   आरडीएसएस योजना के अंतर्गत लगे स्मार्ट मीटर तत्काल प्रभाव से होंगे पोस्टपेड उपभोक्ताओं को जून से मिलेगी पोस्टपेड बिलिंग सुविधा, स्मार्ट पोस्टपेड बिल हर माह 10 तारीख तक जारी होंगे अब सभी नए बिजली कनेक्शन स्मार्ट पोस्टपेड मोड में होंगे जारी 15 मई से 30 जून तक लगाए जाएंगे स्मार्ट मीटर शिकायत निस्तारण कैंप उपभोक्ता हित में लगातार फैसले ले रही योगी सरकार: ए.के. शर्मा लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशानुसार उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश भर में लगे सभी स्मार्ट मीटरों को पोस्टपेड मोड में संचालित करने के आदेश जारी कर दिए हैं। ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने बताया कि आरडीएसएस योजना के तहत लगाए गए सभी स्मार्ट मीटर तत्काल प्रभाव से पोस्टपेड प्रणाली में बदले जा रहे हैं। इसके बाद उपभोक्ताओं को बिजली इस्तेमाल करने के बाद बिल मिलेगा। मई 2026 की खपत का बिल जून 2026 में पोस्टपेड प्रणाली के तहत जारी किया जाएगा। ऊर्जा मंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने आम विद्युत उपभोक्ताओं की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए प्रदेश में संचालित स्मार्ट प्री-पेड मीटर व्यवस्था को समाप्त कर सभी स्मार्ट मीटरों को पोस्टपेड मोड में संचालित करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी कर दिए गए हैं। पूर्वांचल, मध्यांचल, दक्षिणांचल, पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगमों और केस्को कानपुर में लागू यह व्यवस्था उपभोक्ताओं को बड़ी राहत प्रदान करेगी।  ऊर्जा मंत्री ने कहा कि उपभोक्ताओं को बिल एसएमएस और व्हाट्सएप के जरिये उपलब्ध कराया जाएगा। स्मार्ट पोस्टपेड बिल प्रत्येक माह की 10 तारीख तक जारी किए जाएंगे। जिन क्षेत्रों में नेटवर्क अथवा संचार संबंधी समस्या के कारण स्मार्ट मीटर की ऑटोमैटिक रीडिंग प्राप्त नहीं होगी, वहां एएमआईएसपी एजेंसियों के माध्यम से मैनुअल रीडिंग लेकर समय से बिल उपलब्ध कराया जाएगा। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि जिन उपभोक्ताओं के मोबाइल नंबर सिस्टम में पंजीकृत नहीं हैं या गलत दर्ज हैं, उनके लिए डिस्कॉम स्तर पर व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा। साथ ही उपभोक्ता संबंधित विद्युत वितरण निगम के व्हाट्सएप चैटबॉट एवं 1912 हेल्पलाइन के माध्यम से भी अपना बिल प्राप्त कर सकेंगे। प्रदेश में अब सभी नए विद्युत संयोजन स्मार्ट पोस्टपेड मोड में ही जारी किए जाएंगे। पूर्व में प्री-पेड व्यवस्था लागू होने के दौरान समायोजित की गई सुरक्षा धनराशि को अब विद्युत प्रदाय संहिता-2005 एवं कॉस्ट डाटा बुक-2026 के प्रावधानों के अनुसार चार समान मासिक किस्तों में उपभोक्ताओं के बिलों में जोड़ा जाएगा। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि पोस्टपेड उपभोक्ताओं को पूर्व की भांति बिल जारी होने की तारीख से 15 दिन का भुगतान समय और उसके बाद 7 दिन की डिस्कनेक्शन अवधि प्रदान की जाएगी। निर्धारित समय तक भुगतान न होने पर विद्युत प्रदाय संहिता एवं टैरिफ आदेश के अनुसार विलंब अधिभार लागू होगा। घरेलू उपभोक्ताओं को विशेष राहत देते हुए 30 अप्रैल 2026 तक के बकाया विद्युत बिल को 10 आसान किस्तों में जमा करने की सुविधा प्रदान की गई है। जबकि अन्य श्रेणी के उपभोक्ताओं को 40, 30 और 30 प्रतिशत की तीन किस्तों में भुगतान की सुविधा मिलेगी। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि स्मार्ट मीटर एवं बिजली बिलों से संबंधित शिकायतों के समाधान के लिए 15 मई 2026 से 30 जून 2026 तक अधिशासी अभियंता एवं उपखंड अधिकारी कार्यालयों पर विशेष कैंप एवं सहायता केंद्र लगाए जाएंगे। इसके अतिरिक्त 1912 हेल्पलाइन पर भी विशेष व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है, ताकि उपभोक्ताओं की समस्याओं का त्वरित समाधान हो सके।