samacharsecretary.com

रांची में कर्मचारी पेंशन विवाद, हाई कोर्ट ने सरकार की कार्यशैली पर जताई नाराजगी

रांची  झारखंड हाई कोर्ट में गुमला जिला के बैजनाथ जालान कालेज, सिसई के तृतीय वर्गीय कर्मचारी दिनेश साहू को पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभ नहीं दिए जाने के मामले में दाखिल अवमानना याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद अदालत ने उच्च शिक्षा निदेशक की कार्यशैली पर नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा कि जब समान परिस्थितियों वाले दूसरे कर्मियों को पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभ दिया जा चुका है, तो प्रार्थी को इससे वंचित रखना उचित नहीं है। सुनवाई के दौरान अदालत में उपस्थित उच्च शिक्षा निदेशक सुधीर बाड़ा को निर्देश दिया कि वे आठ सप्ताह के भीतर मामले की पुनः समीक्षा कर दिनेश साहू को पंचम एवं छठा वेतनमान का लाभ देते हुए पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों का भुगतान सुनिश्चित करें। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई जुलाई के पहले सप्ताह में निर्धारित करते हुए अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है। उच्च शिक्षा निदेशक की ओर से दाखिल शपथ पत्र में कहा गया था कि विभाग ने सकारण आदेश पारित कर प्रार्थी को एकल पीठ के आदेश के अनुरूप लाभ नहीं देने का निर्णय लिया है। इस पर हाई कोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताते हुए उस सकारण आदेश को निरस्त कर दिया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि दिनेश साहू का मामला उपेंद्र प्रसाद एवं अन्य कर्मियों के मामले के समान है। कोर्ट ने कहा कि प्रार्थी का समायोजन और नियमितीकरण भी उसी पत्र के आधार पर हुआ था, जिसके आधार पर उपेंद्र प्रसाद एवं अन्य कर्मियों को लाभ मिला। इसलिए दिनेश साहू को भी वही लाभ मिलना चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि प्रार्थी के मामले में सरकार ने अब तक कोई अपील दाखिल नहीं की है, जबकि उपेंद्र प्रसाद मामले में अपील समय सीमा के भीतर दाखिल नहीं होने के कारण खारिज हुई थी। इसका हवाला देकर प्रार्थी के मामले को लंबित रखना अनुचित है। प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता प्रेम पुजारी ने अदालत को बताया कि दिनेश साहू वर्ष 2022 में बैजनाथ जालान कालेज, सिसई (गुमला) से तृतीय वर्गीय कर्मचारी के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। उन्हें फिलहाल प्रोविजनल रूप से पंचम वेतनमान का लाभ मिल रहा है। उनकी सेवा समायोजन और नियमितीकरण सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आलोक में वर्ष 2005 और 2007 में हुआ था। दिनेश साहू के मामले में सरकार ने एकल पीठ के आदेश को कभी चुनौती ही नहीं दी। बता दें कि हाई कोर्ट की एकल पीठ ने वर्ष 2024 में ही दिनेश साहू को पंचम एवं छठा वेतनमान का लाभ देते हुए पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभ का भुगतान करने का निर्देश दिया था। आदेश का पालन नहीं होने पर प्रार्थी ने अवमानना याचिका दाखिल की है।

खिलाड़ियों को सीएम की सीख: बैडमिंटन की तरह अपने सपनों को गिरने न दें

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खिलाड़ियों को जीवन का मूलमंत्र दिया। कहा कि बैडमिंटन-टेबल टेनिस में एकाग्रता व त्वरित निर्णय की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। खेल के माध्यम से सीखे गए स्किल आपदा प्रबंधन के साथ ही विपरीत परिस्थितियों का मुकाबला करने को तैयार करते हैं। हर मेडल के पीछे संघर्ष और कभी हार न मानने के संकल्प की कहानी होती है। टैलेंट शुरुआत देता है, लेकिन मेहनत हमें लक्ष्य तक पहुंचाती है। जितना पसीना बहेगा, जीत उतनी ही बड़ी होगी। खेल गिरना, उठना और जीतना सिखाता है। बैडमिंटन में शटल कॉक को नहीं गिरने देते, वैसे ही जीवन में सपनों और हौसलों को टूटने नहीं देना चाहिए। जैसे हर खेल में स्टेप व शॉट का ध्यान जरूरी है, वैसे ही जीवन में निरंतर सुधार व अनुशासन के साथ लगातार किए जाने वाले प्रयास का परिणाम भी बेहतर तरीके से प्राप्त होता है।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को बाबू बनारसी दास यूपी बैडमिंटन एकेडमी गोमतीनगर में द्वितीय अखिल भारतीय पुलिस बैडमिंटन क्लस्टर (बैडमिंटन- टेबल टेनिस) प्रतियोगिता 2025-26 का शुभारंभ किया। सीएम ने बैडमिंटन भी खेला और स्मारिका का विमोचन किया। कपिल चौधरी ने खिलाड़ियों को शपथ दिलाई। यूपी में खेल व खिलाड़ियों की उपलब्धियों पर आधारित लघु फिल्म भी प्रदर्शित की गई। 35वीं वाहिनी पीएसी के बैंड ने मधुर स्वर लहरियां प्रस्तुत कीं।  स्वस्थ शरीर के लिए खेलकूद को जीवन का हिस्सा बनाएं सीएम योगी ने कहा कि पहली बार उत्तर प्रदेश में हो रहे पांच दिवसीय अखिल भारतीय पुलिस बैडमिंटन कलस्टर में लगभग 1400 खिलाड़ी भाग ले रहे हैं। भारत में खेल व इसकी गतिविधियों को प्रोत्साहन देने की परंपरा प्राचीन काल से ही रही है। जीवन के जितने भी साधन हैं, वह स्वस्थ शरीर से ही संभव हो सकते हैं। स्वस्थ शरीर के लिए आवश्यक है कि दैनिक कार्यक्रमों के साथ खेलकूद की गतिविधियों को भी जीवन का हिस्सा बनाएं। कबड्डी, कुश्ती, खो-खो, धनुर्विद्या, मलखंभ, तलवारबाजी, शतरंज प्राचीन काल से ही जीवन का हिस्सा रहे हैं। सीएम ने अखाड़ा शब्द की व्याख्या करते हुए, बताया कि ज्ञान की परंपरा व शरीर को स्वस्थ रखने की कला को जिस क्षेत्र विशेष में प्रदर्शित किया जाए, वही अखाड़ा है। स्वस्थ शरीर से स्वस्थ मस्तिष्क व स्वस्थ मस्तिष्क से स्वस्थ चरित्र का निर्माण करके राष्ट्र निर्माण में प्रत्येक व्यक्ति का योगदान सुनिश्चित करना उस अभियान का हिस्सा बनाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।  एकाग्रता, अनुशासन व समर्पण के प्रतीक हैं अर्जुन सीएम ने प्राचीन धर्मग्रंथों की चर्चा कर अर्जुन का भी उल्लेख किया। कहा कि अर्जुन एकाग्रता, अनुशासन व समर्पण के प्रतीक हैं। मल्लयुद्ध की बात करते हैं तो बलराम जी व भीम जी का स्मरण हो जाता है। बलराम मतलब शक्ति और संतुलन का प्रतीक। गदायुद्ध में शक्ति, रणनीति व पराक्रम भी है। डबल इंजन सरकार इन प्राचीन विधाओं से प्रेरणा प्राप्त कर खेल के कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से बढ़ा रही है।  खेल के मैदान में जो पाठ पढ़ाए जाते हैं, उनका पुस्तकों में मिलना कठिन होता सीएम योगी ने कहा कि 25 करोड़ वाले उत्तर प्रदेश में 56 प्रतिशत युवा हैं। खेल के मैदान में जो पाठ पढ़ाए जाते हैं, उनका पाठ्य पुस्तकों में मिलना कठिन होता है क्योंकि खेलकूद के बारे में जो व्यावहारिक रणनीति बताई जाएगी, वह सैद्धांतिक रूप से पुस्तकों में मिलना कठिन होता है। खेल के मैदान में अनुशासन, दृढ़संकल्प और समर्पण के बारे में खिलाड़ी को तैयार किया जाता है और उसके माध्यम से ऐसे व्यक्तित्व को तराशने का कार्य होता है, जो राष्ट्र को सशक्त, सुरक्षित और विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कड़ी बन सकता है।  11 वर्ष में देश में नए स्पोट्र्स इकोसिस्टम का हुआ क्रियान्वयन सीएम ने कहाकि हम लोगों ने पीएम मोदी के विजन को यूपी में प्रभावी ढंग से लागू करने में सफलता हासिल की। 11 वर्ष में देश के अंदर नए स्पोट्र्स इकोसिस्टम का प्रभावी क्रियान्वयन सभी ने देखा है। खेल ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ व राष्ट्र निर्माण का सशक्त माध्यम बना है। खेलो इंडिया, फिट इंडिया मूवमेंट, सांसद/विधायक खेलकूद प्रतियोगिता, यूपी में ग्रामीण लीग आदि प्रतियोगिताएं समाज के अंतिम पायदान पर बैठे खिलाड़ियों को प्लेटफॉर्म उपलब्ध करा रही हैं। इसी का परिणाम है कि ओलंपिक, कॉमनवेल्थ, एशियन गेम्स व विश्व चैंपियनशिप में भारत का प्रतिभाग बढ़ा है और हमें अभूतपूर्व सफलता भी मिल रही है।  2017 के पहले प्रतीक्षा सूची में दम तोड़ती थीं प्रतिभाएं सीएम ने कहा कि 2017 से पहले यूपी में नाममात्र के स्टेडियम थे, इनमें बुनियादी सुविधाएं तक नहीं थीं। उनका उचित रखरखाव तक नहीं था। ट्रैक टूटे और स्वीमिंग पुल सूखे थे। खिलाड़ी उपेक्षित और कुशल खिलाड़ी कार्यालय-कार्यालय भटकने को मजबूर थे। प्रतिभाएं प्रतीक्षा सूची में दम तोड़ने को मजबूर होती थीं, लेकिन अब ऐसा नहीं है। उत्तर प्रदेश ने आज कुशल खिलाड़ियों के लिए सीधी भर्ती, पदोन्नति व नकद पुरस्कार की पारदर्शी व्यवस्था लागू की है। सीएम ने खिलाड़ियों के लिए किए कार्यों को गिनाया सीएम योगी ने कहा कि हमारी सरकार ने खिलाड़ियों के लिए नौकरियों में दो प्रतिशत हॉरिजेंटल रिजर्वेशन की व्यवस्था की है। खेल अब केवल शौक, टाइमपास नहीं बल्कि सम्मानजक कैरियर बन रहा है। हमारी सरकार इसकी गारंटी भी दे रही है।

पटना में डिप्टी सीएम पद को लेकर भ्रम, विजय कुमार चौधरी ने बताया- पद समाप्त नहीं हुआ

 पटना  उप मुख्यमंत्री से जुड़ी मंत्रिमंडल विभाग की अधिसूचना को लेकर इंटरनेट मीडिया पर बहस चल रही है। यूजर प्रश्न पूछ रहे हैं-क्या राज्य में उप मुख्यमंत्री का पद समाप्त हो गया है? विभागीय सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने साफ किया-उप मुख्यमंत्री का पद समाप्त नहीं हुआ है। वह कायम है। हरेक अधिसूचना में पदनाम का उल्लेख करना जरूरी नहीं होता है। 7 मई की अधिसूचना पर शुरू हुई चर्चा बहस की शुरुआत सात मई की अधिसूचना से हुई है। इसमें मुख्यमंत्री और मंत्रियों के विभागों को अधिसूचित किया गया है। पदनाम में मुख्यमंत्री और मंत्री लिखा हुआ है। विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव के नाम के साथ उप मुख्यमंत्री पदनाम का उल्लेख नहीं है। इन दोनों का नाम भी मंत्रियों की श्रेणी में है। नाम के साथ विभागों का विवरण दिया गया है। विभागीय सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने पूछने पर बताया कि 15 अप्रैल को मुख्यमंत्री के अलावा दो उप मुख्यमंत्रियों का शपथ ग्रहण हुआ था। उस दिन जारी अधिसूचना में दोनों के पदनाम उप मुख्यमंत्री दिए गए हैं। वही मान्य है। वैसे, सोशल मीडिया के यूजर इस तर्क से सहमत नहीं हैं। वे पिछले साल के 21 नवंबर को जारी इसी विभाग की अधिसूचना का हवाला दे रहे हैं। डिप्‍टी सीएम के रूप में व‍िजय कुमार स‍िन्‍हा का नाम उसमें तत्कालनीन उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी एवं विजय कुमार सिन्हा के नाम के सामने उप मुख्यमंत्री लिखा हुआ है। वैसे संविधान में उप मुख्यमंत्री के पद का उल्लेख नहीं है। उसमें मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल के अन्य पदधारक मंत्री, राज्य मंत्री, उप मंत्री आदि की चर्चा है। आज भी मुख्यमंत्री को छोड़ कर मंत्रिमंडल के अन्य सदस्य मंत्री पद की ही शपथ लेते हैं। मुद्रण की भूल हो सकती है: उप मुख्यमंत्री सह संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि नाम के साथ पदनाम का जिक्र नहीं होना मुद्रण की भूल हाे सकती है।विभाग वाले इसमें सुधार कर लेंगे।

रांची में फीस वसूली पर कार्रवाई, रांची के स्कूलों को चेतावनी

 रांची  जिले के निजी स्कूलों पर शुल्क वसूली और अभिभावक-शिक्षक संघ (पीटीए) गठन को लेकर सख्ती बरतते हुए उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने 16 सीबीएसई- 2 आईसीएसई स्कूलों को शोकॉज नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। जिन स्कूलों ने वार्षिक फीस स्ट्रक्चर और (पीटीए) का विवरण नहीं दिया है, उनके खिलाफ शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई होगी। उपायुक्त ने स्पष्ट कहा कि एडमिशन व एनुअल चार्ज के नाम पर वसूले गए शुल्क को इस वर्ष की मासिक फीस में समायोजित करने का एक्शन प्लान 10 से 15 दिनों के भीतर जिला शिक्षा पदाधिकारी को सौंपा जाए। यह निर्देश रांची के मोरहाबादी स्थित आर्यभट्ट सभागार में आयोजित जिला स्तरीय बैठक में दिए गए। बैठक में जिले के विभिन्न निजी विद्यालयों के प्राचार्यों व प्रतिनिधियों ने शिरकत की। उपायुक्त ने (पीटीए) गठन की समीक्षा की, जिसमें बताया गया कि जिले के कुल 149 सीबीएसई- आईसीएसई स्कूलों में से 131 ने अभिभावक-शिक्षक संघ का गठन कर लिया है। शेष 18 स्कूलों ने अभी तक जानकारी नहीं दी है। इनमें से दो स्कूलों को शोकॉज नोटिस भेजा जाएगा। साथ ही, बैठक में अनुपस्थित स्कूलों की कार्यात्मक स्थिति की जांच के आदेश भी दिए गए। बैठक का मुख्य फोकस स्कूलों द्वारा फीस वृद्धि और वार्षिक शुल्क वसूली पर रहा। चर्चा में पाया गया कि कई स्कूल प्रबंधन (आरटीई) राइट-टू-एजुकेशन नियमों का उल्लंघन करते हुए नर्सरी से 12वीं तक 37 से 106 प्रतिशत तक वार्षिक शुल्क बढ़ा रहे हैं। उपायुक्त ने जोर देकर कहा कि फीस संरचना तर्कसंगत, पारदर्शी और अभिभावक अनुकूल होनी चाहिए, ताकि परिवारों पर आर्थिक बोझ न पड़े। उन्होंने स्कूलों को निर्देशित किया कि स्कूल बस चालकों की पूरी जानकारी शिक्षा विभाग को उपलब्ध कराएं, जिससे प्रशासन ड्राइवर का सत्यापन कर सके। शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 के तहत कमजोर वर्ग के 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों पर नामांकन के दिशा-निर्देश भी दोहराए गए। उपायुक्त ने चिंता जताई कि कुछ स्कूल टीसी (ट्रांसफर सर्टिफिकेट) जारी करने के लिए 25 हजार रुपये तक वसूल रहे हैं, जो चाइल्ड प्रोटेक्शन एक्ट का स्पष्ट उल्लंघन है। जिला प्रशासन शिक्षा क्षेत्र में पूर्ण पारदर्शिता चाहता है। नए सत्र के लिए शीघ्र बीपीएल बच्चों की लाटरी आयोजित की जाएगी। एक्शन प्लान पर अगले 10 दिनों में साक्षात्कार या ऑनलाइन बैठक होगी। उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने स्कूल प्रतिनिधियों से अपील की कि अभिभावकों के हित में नियमों का पालन करें। बैठक में जिला शिक्षा पदाधिकारी सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इस पहल से रांची के अभिभावकों को राहत मिलने की उम्मीद है, खासकर उन परिवारों को जो महंगी फीस से जूझ रहे हैं। बैठक में यह पाया गया कि राइट टू एजुकेशन एक्ट का उलंघन कर सभी 149 निजी स्कूलों ने प्रति वर्ष वार्षिक शुल्क बढ़ाया है। जिनमें केवल 2 वर्षों में वार्षिक शुल्क 10 प्रतिशत बढ़ानी हैं। इसपर स्कूल प्रबंधन ने अपना जवाब में पुन: विचार करने का आश्वासन दिया। इसी दौरान जनगणना 2027 के तहत स्व-गणना पोर्टल के माध्यम से अधिकाधिक सहभागिता सुनिश्चित करने का निर्देश बैठक में उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री उपस्थित सभी निजी विद्यालयों के प्राचार्य व प्रतिनिधियों को सेंसस 2027 के अंतर्गत पोर्टल के माध्यम से स्वगणना करने के लिए कहा गया। उन्होंने कहा कि जनगणना जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य में प्रत्येक नागरिक की सहभागिता आवश्यक है, इसके लिए बच्चों को भी जानकारी दें ताकि वो अपने माता-पिता अभिभावक को डिजिटल माध्यम से स्वगणना करने को कहें। जिला शिक्षा अधीक्षक बादल राज द्वारा बताया गया कि स्व-गणना अंतर्गत आनलाइन पोर्टल (एसई डाट सेंससडाट जीओभी डाट इन ) (se.census.gov.in) के माध्यम से स्वयं अपने परिवार व आवास संबंधी जानकारी आनलाइन उपलब्ध कराया जा सकता है। ये हैं बैठक में अनुपस्थित स्कूल जिन्हें किया गया शोकाज नोटिस     वाईबीएन पब्लिक स्कूल मैक्लुस्कीगंज     संत कोलंबस मूरबू     कैंब्रियन पब्लिक स्कूल रांची     सेंट्रल एकैडमी कांके     शाईन वैली स्कूल     रायल प्रोग्रेस स्कूल डकरा     झारखंड पब्लिक स्कूल डकरा     कैंब्रियन बीजूपाड़ा     सचिदानंद पब्लिक स्कूल डोरंडा     स्टार इंटरनेशनल स्कूल नगड़ी     एलए गार्डन स्कूल सामलोंग     छोटानागपुर पब्लिक स्कूल     आर्मी पब्लिक स्कूल दीपाटोली     सरस्वती शिशु विद्या मंदिर डकरा     सेंट्रल एकेडमी बरियातू     बलदेव पब्लिक स्कूल     उर्सुलाईन सिल्ली मूर     माउंट कार्मेंल ओरमाझी  

विजय बने मुख्यमंत्री, तमिलनाडु में सत्ता परिवर्तन पर पीएम मोदी ने दी बधाई

तमिलनाडु तमिलनाडु में 10 मई से विजय थलापति का राज शुरू हो चुका है। विजय के ऐतिहासिक शपथ ग्रहण समारोह के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें तमिलनाडु का पद भार ग्रहण करने के लिए बधाई दी और साथ ही केंद्र सरकार की तरफ से पूरी मदद करने का भरोसा भी दिलाया। उन्होंने सोशल मीडिया साइट एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, "श्री सी. जोसेफ विजय को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने पर बहुत बधाई। उनके आगामी कार्यकाल के लिए बहुत-बहुत शुभकामनाएं। केंद्र सकार तमिलनाडु सरकार और वहां के लोगों की भलाई के लिए लगातार काम करती रहेगी।"    तमिलनाडु की नई नवेली सरकार को बधाई देने के साथ ही एक दूसरे कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी कांग्रेस को एक परजीवी पार्टी बताते हुए अन्य विपक्षी पार्टियों को चेताया भी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस दशकों तक डीएमके के साथ खड़ी रही, लेकिन हवा बदलते ही उसने पाला भी बदल लिया। कांग्रेस को लेकर चेताया कर्नाटक में एक कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी ने कहा, "तमिलनाडु की मौजूद स्थिति को देखिए। वहां पर पिछले पच्चीस से तीस वर्षों तक कांग्रेस और डीएमके के बीच घनिष्ठ संबंध रहे। डीएमके के साथ गठबंधन ने कई बार कांग्रेस को संकटों से उबारा। वास्तव में, 2014 से पहले दस वर्षों तक कांग्रेस का जो शासन चला, वह काफी हद तक डीएमके के समर्थन के कारण ही कायम रहा। लेकिन जैसे ही राजनीतिक हवा ने रुख बदला, कांग्रेस पार्टी ने डीएम के को धोखा दे दिया। सत्ता की लालसा में चूर कांग्रेस ने पहले ही मौके पर डीएमके को छुरा घोंपा। अब कांग्रेस को राजनीतिक रूप से प्रासंगिक बने रहने के लिए एक और पार्टी की जरूरत है, जिसके सहारे वह आगे बढ़ सके।" विजय की ऐतिहासिक शपथ इससे पहले, अभिनेता से राजनेता बने थलापति विजय ने रविवार सुबह चेन्नई के जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में हुए एक भव्य कार्यक्रम में पद और गोपनीयता की शपथ ली। उनके साथ ही नौ नए मंत्रियों ने भी शपथ ली। इस दौरान हजारों की संख्या में समर्थक वहां मौजूद थे। लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी वहां पर पहुंचे। शपथ के साथ ही विजय तमिलनाडु के नौवें मुख्यमंत्री बन चुके हैं। अपने पहले ही भाषण में उन्होंने साफ कर दिया कि सत्ता का एक ही केंद्र होगा, और वह स्वयं विजय ही होंगे। गौरतलब है कि हाल ही में संपन्न तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और 234 सदस्यीय विधानसभा में 108 सीटें जीतीं। बाद में पार्टी को विदुथलाई चिरुथाइगल काची (VCK) और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) का समर्थन मिला, जिससे उसकी सीटों की संख्या 120 हो गई और उसने बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया। विजय का शपथ ग्रहण तमिलनाडु में एक बड़ा राजनीतिक बदलाव है, क्योंकि लगभग 70 वर्षों में यह पहली बार है कि डीएमके-एआईएडीएमके गठबंधन से बाहर की कोई सरकार राज्य में सत्ता में आई है।

बिहार के रोहतास में औद्योगिक पुनर्जागरण की तैयारी, डालमियानगर रेल कारखाने को मिला बजट

 रोहतास  डालमियानगर औद्योगिक परिसर में चार दशक से पसरा अंधेरा अब छंटने की उम्मीद जगी है। रेलवे द्वारा 430.20 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत किए जाने के बाद एक बार फिर इस ऐतिहासिक औद्योगिक परिसर के गुलजार होने की संभावना बढ़ गई है। कभी देश-विदेश में अपनी पहचान रखने वाला डालमियानगर औद्योगिक परिसर स्वतंत्रता आंदोलन से भी जुड़ा रहा है। ले‍क‍िन वर्तमान में यहां सन्‍नाटा है। एश‍िया के बड़े औद्योग‍िक समूह में थी गिनती एक समय एशिया के सबसे बड़े औद्योगिक परिसरों में शामिल रोहतास उद्योग समूह का यह क्षेत्र दुधिया रोशनी से जगमगाता था, लेकिन वर्ष 1984 में रोहतास उद्योग समूह में तालाबंदी के बाद यहां सन्नाटा और अंधेरा छा गया। वर्ष 2007 से परिसमापन की प्रक्रिया में चल रहे रोहतास उद्योग समूह को रेलवे ने करीब 240 करोड़ रुपये में खरीदा था। इसके बाद स्थानीय लोगों में उम्मीद जगी कि इस क्षेत्र की औद्योगिक पहचान फिर लौटेगी। लोकसभा चुनाव 2009 से पहले तत्कालीन रेलमंत्री Lalu Prasad Yadav ने यहां रेल वैगन मरम्मत कारखाने का शिलान्यास किया था। उस समय लोगों को लगा कि डालमियानगर के अच्छे दिन लौट आएंगे, लेकिन यूपीए-2 सरकार के दौरान यह योजना ठंडे बस्ते में चली गई। प्रधानमंत्री से मिलकर की गई मांग वर्ष 2015 में एनडीए सरकार बनने के बाद तत्कालीन सांसद Upendra Kushwaha और शाहाबाद क्षेत्र के अन्य सांसदों ने प्रधानमंत्री से मिलकर यहां रेल कारखाना स्थापित करने की मांग उठाई। जून 2017 में रेल मंत्रालय में हुई बैठक में राइट्स को यहां रेल वैगन मरम्मत एवं कपलर कारखाना स्थापित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। केंद्र सरकार ने इसके लिए बजटीय प्रावधान भी किया। वर्ष 2018 में परिसर के कबाड़ की नीलामी 94 करोड़ रुपये से अधिक राशि में की गई। प्रस्तावित रेल कारखाने के लिए चिह्नित 219 एकड़ भूमि से कबाड़ हटाकर उसे समतल भी कर दिया गया। डीएफसीसी निर्माण बना बाधा इस परियोजना के बीच डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉरपोरेशन (DFCC) का निर्माण बड़ी बाधा बन गया। प्रस्तावित रेल वैगन मरम्मत कारखाने के समीप से गुजर रहे डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के कारण रेल लाइन ले जाना मुश्किल हो गया। रेलवे ने वर्ष 2020 में बजटीय प्रावधान होने के बावजूद परियोजना को आगे बढ़ाने में असमर्थता जताई। इसके बाद राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने प्रयास किया। उन्‍होंने रेलमंत्री अश्‍वि‍नी वैष्‍णव समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों और नेताओं से मुलाकात की। इसके बाद पहलेजा रेलवे स्टेशन के पास से फ्लाईओवर के जरिए डालमियानगर तक रेलवे ट्रैक ले जाने का प्रस्ताव रेल मंत्रालय को भेजा गया। अब रेलवे ने वर्ष 2026-27 के रेल बजट में डालमियानगर रेल वैगन मरम्मत कारखाने के लिए 430.20 करोड़ रुपये का आवंटन किया है। इससे इलाके के लोगों में एक बार फिर औद्योगिक विकास और रोजगार के नए अवसरों की उम्मीद जाग उठी है।  

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मां को नमन कर साझा की भावुक तस्वीर, सोशल मीडिया पर वायरल

पटना  मातृ दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भावुक संदेश और वीडियो साझा कर अपनी मां को याद किया। सोशल मीडिया पर साझा किए गए पोस्ट में उन्होंने मातृत्व की महत्ता, त्याग और संस्कारों की भावना को भावपूर्ण शब्दों में व्यक्त किया। माता को नमन करती तस्‍वीर की साझा मुख्यमंत्री ने अपनी दिवंगत माता पार्वती देवी को नमन करते हुए एक तस्वीर भी साझा की। तस्वीर पर लिखा था, मां ही पहली गुरु, पहली मित्र और ईश्वर का सबसे सुंदर स्वरूप है। एक मां का स्नेह, त्याग और आशीर्वाद ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। इसके साथ उन्होंने समस्त मातृशक्ति को शुभकामनाएं देते हुए लिखा कि ईश्वर से उनकी प्रार्थना है कि सभी माताएं सदैव स्वस्थ, सुखी और सम्मानित रहें। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि मां केवल एक रिश्ता नहीं, बल्कि त्याग, ममता और संस्कारों की सबसे बड़ी शक्ति होती हैं। वह बिना किसी अपेक्षा के अपना पूरा जीवन परिवार और बच्चों के लिए समर्पित कर देती हैं। उन्होंने कहा कि मातृशक्ति का सम्मान और उनका आशीर्वाद ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। 2022 में हो गया था सम्राट चौधरी की माता का निधन मुख्यमंत्री का यह भावुक पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बड़ी संख्या में लोगों ने उनकी भावनाओं की सराहना करते हुए अपनी माताओं के प्रति सम्मान व्यक्त किया। गौरतलब है कि सम्राट चौधरी की माता पार्वती देवी का वर्ष 2022 में निधन हो गया था। वे वर्ष 1998 के उपचुनाव में समता पार्टी के टिकट पर विधायक भी चुनी गई थीं। राजनीतिक और सामाजिक जीवन में उनकी सक्रिय भूमिका को आज भी याद किया जाता है।  

राजस्थान में साइबर सुरक्षा पर बड़ा कदम, AI आधारित कंट्रोल सेंटर और हेल्पलाइन कॉल सेंटर की होगी शुरुआत

जयपुर राजस्थान के सभी जिलों में साल 2030 तक साइबर पुलिस स्‍टेशन स्थापित किए जाएंगे. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शनिवार को जयपुर के बिड़ला ऑडिटोरियम में लोक अभियोजकों और विशेष लोक अभियोजकों के लिए आयोजित कार्यशाला के दौरान इसका ऐलान किया है. इस दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल ने बढ़ते डिजिटल अपराधों को देखते हुए स्पष्ट किया कि राज्य सरकार प्रदेशवासियों की साइबर सुरक्षा को लेकर अत्यंत गंभीर है. उन्होंने बताया कि सरकार साइबर अपराधों पर नियंत्रण के लिए राजस्थान साइबर क्राइम कंट्रोल सेंटर की स्थापना करने जा रही है. बनेगा साइबर हेल्पलाइन कॉल सेंटर इसके साथ ही, अब साइबर अपराधों का विश्लेषण करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित व्यवस्था और एक समर्पित साइबर हेल्पलाइन कॉल सेंटर भी विकसित किया जाएगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार तीनों नए आपराधिक कानूनों के सफल क्रियान्वयन के लिए प्रतिबद्ध है. पुलिस और अभियोजन को इन कानूनों की पूरी जानकारी देने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं. साथ ही, हमारी सरकार ने 42 न्यायालय स्थापित किए हैं. हमने फलौदी, डीडवाना-कुचामन, खैरथल-तिजारा, ब्यावर, बाड़मेर, डीग, कोटपूतली-बहरोड़ एवं सलूंबर में जिला एवं सेशन न्यायालय और बड़ी सादड़ी एवं केशोरायपाटन में नियमित अतिरिक्त जिला एवं सेशन न्यायालय स्थापित किए हैं. साइबर सुरक्षा सिमुलेशन लैब की हुई स्थापना मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेशवासियों की साइबर सुरक्षा को लेकर भी अत्यधिक सजग है. हमारी सरकार ने साइबर खतरों से बचाव के लिए साइबर सुरक्षा सिमुलेशन लैब की स्थापना की है. ऑपरेशन साइबर शील्ड चलाकर साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने और साइबर अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कार्यवाही करने का काम किया है. इसके अलावा लगभग 10 हजार साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर 12 लाख से अधिक लोगों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया. उन्होंने आगे बताया कि हमारी सरकार ने राज्य के समस्त पुलिस थानों पर साइबर हेल्प डेस्क स्थापित किए गए हैं और वर्ष 2030 तक समस्त जिलों में साइबर पुलिस स्‍टेशन स्थापित किए जाएंगे. सरकार डिजिटल अरेस्‍ट सहित अन्य साइबर अपराधों पर नियंत्रण और रोकथाम के लिए राजस्‍थान साइबर क्राइम कंट्रोल सेंटर की भी स्थापना करने जा रही है. राज्य सरकार साइबर अपराधों के एआई आधारित विश्लेषण तथा साइबर हेल्‍पलाइन कॉल सेंटर की व्यवस्था करेगी.

यूपी में उपभोक्ताओं को बड़ी राहत, स्मार्ट मीटर हटे, हर महीने आएगा सामान्य बिजली बिल

लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार ने काफी हंगामा मचने के बाद अब प्रीपेड स्मार्ट बिजली मीटर को वापस लेना शुरू कर दिया है। सरकार ने सभी वितरण कंपनियों को प्रदेश भर में लाखों उपभोक्ताओं के लिए पोस्टपेड बिल मॉडल बहाल करने की निर्देश दिया है। सरकार ने यह फैसला अनिवार्य प्रीपेड रिचार्ज, अचानक कनेक्शन काटने और प्रीपेड स्मार्ट मीटर से जुड़ी कथित बिलिंग अनियमितताओं को लेकर उपभोक्ताओं, व्यापारियों और किसान समूहों के महीनों के विरोध प्रदर्शन और शिकायतों के बाद लिया है। सरकार का यह कदम उत्तर प्रदेश के सभी प्रमुख वितरण निगमों- पूर्वांचल, मध्यांचल, दक्षिणांचल और पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगमों, साथ ही आरडीएसएस के तहत लगाए गए सभी स्मार्ट मीटरों पर लागू होता है। उपभोक्ताओं के लिए अब क्या? रिचार्ज करने की जरूरत नहीं सरकार के इस कदम से अब उपभोक्ताओं को अपने बैलेंस को पहले से रिचार्ज करने की जरूरत नहीं है। इसके बजाय उन्होंने जितनी बिजली खर्च की, उसका हर माह बिल आएगा, बिल्कुल पहले की तरह। यानी आपने मई में बिजली खर्च की है तो आपको बिल जून में देना होगा। बिलिंग कैसे होगी? नई व्यवस्था के तहत स्मार्ट मीटर के बिल हर माह 10 तारीख तक तैयार किए जाएंगे और यह एसएमएस और व्हाट्सऐप के माध्यम से भेजे जाएंगे। उपभोक्ता आधिकारिक व्हाट्सऐप चैटबोट और 1912 बिजली हेल्पलाइन के माध्यम से भी बिल देख सकेंगे। जिन क्षेत्रों में कनेक्टिविटी के दिक्कत है और जहां महीने की पांच तारीख तक ऑटोमैटिक रीडिंग नहीं मिलती, वहीं मीटर रीडिंग एजेंसियां बिलिंग प्रक्रिया पूरी करने के लिए मैन्युअल रीडिंग करेंगी। कैसे काम करेगी नई भुगतान प्रणाली? सरकार ने बताया कि उपभोक्ताओं को बिल जारी होने की तारीख से 15 दिनों के भीतर भुगतान करना होगा। अगर बिल जमा नहीं किया तो सात दिन के भीतर बिजली कनेक्शन काट दिया जाएगा। इसके बाद बकाया बिल पर विलंब शुल्क यानी लेट फीस भी लगेगी। बकाया राशि का निपटान ब्याज दरों में छूट के साथ-साथ बकाया राशि में राहत की घोषणा की है। घरेलु उपभोक्ताओं को चार किस्तों में राशि चुकाने की अनुमति दी जाएगी। उत्तर प्रदेश विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने कहा, “जब पोस्टपेड उपभोक्ताओं को प्रीपेड में बदला गया, तो उनकी पिछली सुरक्षा राशि बिल में जोड़ दी गई। 6 मई के आदेश के अनुसार, उपभोक्ताओं से मौजूदा लागत मानदंडों के अनुसार नई सुरक्षा जमा राशि जमा करने की अपेक्षा की गई थी। हालांकि, हमने इसका कड़ा विरोध किया क्योंकि इससे उपभोक्ता पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।” उन्होंने आगे कहा, “अब यूपीपीसीएल ने स्पष्ट किया है कि ली गई सुरक्षा राशि पहले की गणनाओं पर आधारित होगी और किश्तों में वसूल की जाएगी।” 15 मई से लगेगा विशेष शिविर शिकायतों के निवारण के लिए यूपीपीसीएल ने सभी डिस्कॉम को 15 मई से 30 जून के बीच कार्यकारी अभियंता और उपखंड कार्यालयों में विशेष स्मार्ट मीटर शिकायत शिविर आयोजित करने का निर्देश दिया है। अधिकारियों ने बताया कि इन शिविरों में बिल संबंधी विवाद, मोबाइल नंबर में सुधार, मीटर रीडिंग संबंधी शिकायतें, स्मार्ट मीटर में परिवर्तन से संबंधित मुद्दे और खाता मिलान जैसे मामलों को निपटाया जाएगा।

असम में NDA की बड़ी जीत: 102 सीटों के साथ फिर सत्ता में वापसी, हिमंता बिस्वा सरमा बने विधायक दल के नेता

गुवाहाटी असम में हिमंता बिस्वा सरमा लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बनेंगे. हिमंता बिस्वा सरमा को बीजेपी विधायक दल का नेता चुन लिया गया है.  गुवाहटी में आयोजित विधायक दल की बैठक में केंद्रीय पर्यवेक्षक जेपी नड्डा ने हिमंता के नाम की घोषणा की. अब 12 मई को हिमंता बिस्वा सरमा का गुवाहटी में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. असम में विधायक दल के लिए आए 8 प्रस्ताव विधायक दल की बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा- विधायक दल के नेता के लिए कुल 8 प्रस्ताव आए. पहला प्रस्ताव रंजीत कुमार दास, दूसरा प्रस्ताव विश्वजीत, तीसरा प्रस्ताव अंजता नियो, चौथा प्रस्ताव रामेश्वर तेली, पांचवां प्रस्ताव राजदीप राय, छठा प्रस्ताव अशोक सिंघल, सातवां प्रस्ताव पीयूष हजारिका, और आठवां प्रस्ताव चक्रधर गोगोई की तरह से आया. सभी 8 प्रस्तावों में केवल हिमंता का नाम जेपी नड्डा ने आगे कहा कि सभी 8 प्रस्तावों को हमारे दो-दो विधायकों ने समर्थन दिया है. हमारे एनडीए के सभी विधायक यहां उपस्थित है. अतुल बोरा ने भी अपना प्रस्ताव दिया है. सहयोगी दलों के नेता और विधायकों ने भी समर्थन दिया है. इन सभी प्रस्तावों में एक ही नाम है. हिमंता बिस्वा सरमा. ऐसे में हिमंता बिस्वा सरमा को विधायक दल का नेता चुना गया. असम में हिमंता ने पूरे चुनाव की बागडोर संभाली थी. 126 सीटों वाली विधानसभा में बीजेपी ने अकेले दम पर 82 सीटें जीती हैं. जबकि सहयोगी दलों को मिलकार 102 सीटों पर एनडीए ने जीत दर्ज की है.