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एलोवेरा पौधा सही दिशा में रखने से बढ़ सकती है घर की बरकत और खुशहाली

 आज के दौर में शायद ही कोई ऐसा घर होगा जहां एलोवेरा (Aloe Vera) का पौधा न हो. लोग इसे इसकी सुंदरता और त्वचा के लिए औषधीय गुणों के कारण लगाते हैं.  लेकिन, क्या आप जानते हैं कि वास्तु शास्त्र (Vastu Shastra) में एलोवेरा को केवल एक पौधा नहीं, बल्कि घर की ऊर्जा को बदलने वाला एक शक्तिशाली रक्षक माना जाता है? प्राचीन विज्ञान कहता है कि अगर एलोवेरा सही दिशा में हो, तो यह धन वर्षा कर सकता है और परिवार को रोगों से बचा सकता है, लेकिन अगर गलत दिशा में हो, तो यह तरक्की में रुकावट और मानसिक अशांति का कारण भी बन सकता है. वास्तु अनुसार: एलोवेरा लगाने की सबसे शुभ दिशाएं (Best Directions) पुराने मान्यताओं के अलावा, वास्तु के आधुनिक जानकार एलोवेरा के लिए इन तीन दिशाओं को सबसे उत्तम मानते हैं: पश्चिम दिशा (West) इसे एलोवेरा के लिए सबसे शुभ माना जाता है.  इस दिशा में एलोवेरा रखने से घर के सदस्यों के जीवन में प्यार, प्रगति और प्रतिष्ठा बढ़ती है. यह आपके काम को पहचान दिलाने में मदद करता है. उत्तर दिशा (North) या उत्तर-पूर्व (North-East)  यह कुबेर की दिशा है. यहां एलोवेरा रखने से वित्तीय स्थिति (Financial condition) मजबूत होती है. इससे घर में पैसा टिकने लगता है.  उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में यह स्वास्थ्य पर बहुत अच्छा असर डालता है. दक्षिण-पूर्व कोना (South-East) फायदा: यह अग्नि तत्व का कोना है, लेकिन एलोवेरा पानी और जमीन की ऊर्जा को बैलेंस करता है.  यहां रखने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह (Flow of positive energy) बढ़ता है, जिससे घर में खुशहाली बनी रहती है. यह नौकरी और व्यापार में भी लाभ दे सकता है. इन दिशाओं में कभी न रखें एलोवेरा (Worst Directions) कुछ दिशाएँ एलोवेरा की ऊर्जा के साथ तालमेल नहीं खातीं, जिससे अशुभ परिणाम मिलते हैं. उत्तर-पश्चिम दिशा (North-West) यह वायु तत्व की दिशा है.  यहां एलोवेरा रखने से यह दुर्भाग्य (Bad luck) को आकर्षित कर सकता है. इससे घर के संतुलन बिगड़ता है . यह सदस्यों को मानसिक अशांति या फोकस की कमी महसूस हो सकती है. दक्षिण दिशा (South) या दक्षिण-पश्चिम (South-West)  इन दिशाओं में एलोवेरा रखने से घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है. दक्षिण-पश्चिम में यह रिश्तों में टकराव का कारण बन सकता है. घर के वास्तु दोष कैसे दूर करें? एलोवेरा का उपयोग घर के कई वास्तु दोषों को दूर करने के लिए भी किया जाता है.   मुख्य द्वार पर रक्षक: अपने घर के मुख्य द्वार के बाईं ओर (Left side when exiting) एलोवेरा का पौधा लगाना बहुत शुभ माना जाता है. यह घर के अंदर आने वाली नकारात्मक शक्तियों को रोकता है. बुरी नजर से सुरक्षा (नजर दोष उपाय) अगर घर के बच्चों को बार-बार नजर लगती है, तो घर के प्रवेश द्वार पर दाहिनी ओर एलोवेरा का पौधा लगाएं.  धार्मिक दृष्टि से यह बुरी ऊर्जा को फिल्टर करने का काम करता है. कर्ज मुक्ति और बरकत के लिए (शुक्रवार उपाय) कर्ज से मुक्ति पाने के लिए हर शुक्रवार को एलोवेरा के पौधे में थोड़ा सा कच्चा दूध मिला जल चढ़ाएं. माना जाता है कि इससे माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं .

छाछ और लस्सी में कौन ज्यादा फायदेमंद? गर्मी में सेहत के लिए सही विकल्प जानें

 भयंकर गर्मी और धूप में शरीर को अंदर से ठंडा रखना सबसे बड़ी चुनौती होती है. ऐसे में प्यास बुझाने के लिए कोल्ड ड्रिंक्स के बजाय छाछ (Buttermilk) और लस्सी (Lassi) जैसे ट्रेडिशनल ऑप्शंस हमेशा से लोगों की पहली पसंद रहे हैं. दही से बनी ये दोनों चीजें न केवल स्वादिष्ट हैं, बल्कि सेहत के गुणों से भी भरपूर हैं. लेकिन अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि लू और डिहाइड्रेशन से बचने के लिए इन दोनों में से ज्यादा असरदार कौन है? तो आइए इस बारे में जानते हैं. छाछ (Buttermilk) छाछ यानी मट्ठा में कैलोरी काफी कम होती है और इसमें पानी की मात्रा भी अच्छी होती है. छाछ में पोटैशियम और विटामिन B12 जैसे जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स होते हैं जो पसीने के जरिए शरीर से निकले मिनरल्स की कमी को तुरंत पूरा करते हैं. छाछ में मौजूद प्रोबायोटिक्स पेट को ठंडा रखते हैं और भारी भोजन के बाद होने वाली एसिडिटी को कम करने में मदद करते हैं. गर्मी में लू से बचने के लिए छाछ एक नेचुरल रिहाइड्रेशन ड्रिंक की तरह काम करती है. लस्सी (Lassi) लस्सी छाछ के मुकाबले काफी गाढ़ी और हैवी होती है. इसमें दही की मात्रा ज्यादा होती है जो प्रोटीन और कैल्शियम का बेहतरीन सोर्स है. रिपोर्ट के मुताबिक, लस्सी शरीर को इंस्टेंट एनर्जी देने के साथ-साथ लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराती है. अगर आप मीठी लस्सी पीते हैं तो यह ग्लूकोज लेवल को बनाए रखती है, लेकिन वजन कम करने वालों के लिए इसकी कैलोरी अधिक हो सकती है. लस्सी मांसपेशियों की रिकवरी और हड्डियों की मजबूती के लिए भी काफी अच्छी मानी जाती है. पाचन के लिए कौन है ज्यादा असरदार? अगर डाइजेशन की बात करें तो छाछ को लस्सी से अधिक फायदेमंद मानी जाती है. मेडिकल न्यूज टुडे के अनुसार, छाछ में भुना हुआ जीरा, काला नमक और पुदीना मिलाकर पीने से डाइजेशन अच्छा होता है,  शरीर के तापमान कम होता है और मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करती है. वहीं, लस्सी को पचाने में शरीर को थोड़ा अधिक समय लगता है इसलिए इसे सुबह या दोपहर के समय पीना बेहतर होता है. रात के समय लस्सी पीने से सुस्ती या भारीपन महसूस हो सकता है. क्या कहते हैं एक्सपर्ट? तपती धूप में जब आपका शरीर पानी खो रहा हो, तो छाछ सबसे बेहतरीन ऑप्शंस है. फर्मेंटेड डेयरी प्रोडक्ट्स शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाने और गट हेल्थ को सुधारने में मददगार होते हैं. अगर आप वेट लॉस डाइट पर हैं तो मसाला छाछ आपके लिए बेस्ट है. लेकिन अगर आप एक मील रिप्लेसमेंट या भारी वर्कआउट के बाद कुछ हेल्दी चाहते हैं तो लस्सी एक शानदार चॉइस हो सकती है. कुल मिलाकर हाइड्रेशन के लिए छाछ और पोषण के लिए लस्सी का अपना-अपना महत्व है.

देर रात एनकाउंटर से दहशत, पुलिस जांच में जुटी

नई दिल्ली दिल्ली में देर रात उस वक्त सनसनी फैल गई, जब सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट पुलिस की स्पेशल स्टाफ टीम और बदमाशों के बीच मुठभेड़ हो गई. पुलिस को सूचना मिली थी कि आपराधिक मामलों में शामिल दो आरोपी इलाके में आने वाले हैं. इसी इनपुट के आधार पर स्पेशल स्टाफ की टीम ने जाल बिछाया और संदिग्धों को घेरने की कोशिश की. पुलिस के मुताबिक, जैसे ही टीम ने दोनों आरोपियों को रोकने का इशारा किया, बदमाशों ने फायरिंग शुरू कर दी. इसके बाद पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई की. कुछ देर तक चली गोलीबारी के दौरान दोनों आरोपियों के पैर में गोली लगी और वे घायल हो गए. पुलिस ने मौके पर ही दोनों को पकड़ लिया. घायल आरोपियों को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है. पुलिस का कहना है कि दोनों आरोपी पहले से कई आपराधिक मामलों में शामिल रहे हैं. फिलहाल उनकी पहचान और आपराधिक रिकॉर्ड की जांच की जा रही है. सूत्रों के अनुसार, पुलिस को इन आरोपियों की लंबे समय से तलाश थी और उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी. मुठभेड़ के बाद इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई. मौके से हथियार और अन्य संदिग्ध सामान भी बरामद किए जाने की बात कही जा रही है. दिल्ली पुलिस की स्पेशल स्टाफ टीम अब दोनों आरोपियों से पूछताछ कर रही है. जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आरोपी किसी बड़े गैंग से जुड़े हैं या नहीं और हाल के दिनों में हुई किसी वारदात में उनकी भूमिका रही है या नहीं. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच जारी है और पूछताछ के बाद कई अहम खुलासे हो सकते हैं. वहीं इस मुठभेड़ के बाद इलाके में दहशत का माहौल हो गया. फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है.

तृषा कृष्णन ने विजय को दी बधाई, कहा- उनकी जीत पर बहुत खुश हूं

साउथ सिनेमा के सुपरस्टार थलपति विजय तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री बन गए हैं. 10 मई को उन्होंने शपथ लेकर अपनी राजनीतिक पारी का आगाज कर दिया है. चेन्नई के नेहरू स्टेडियम में हुए इस ऐतिहासिक शपथ ग्रहण समारोह में उनकी को-स्टार और करीबी दोस्त तृषा कृष्णन भी मौजूद रहीं. तृषा ने अपने खास अंदाज से हर किसी का ध्यान खींचा. थलपति विजय के मुख्यमंत्री बनने पर अब तृषा ने अपना पहला रिएक्शन दिया है. तृषा कृष्णन का पहला रिएक्शन आया सामने तमिलनाडु सीएम के शपथ समारोह के बाद तृषा कृष्णन ने मीडिया संग बातचीत की और विजय की जीत पर अपनी खुशी जाहिर की. टाइम्स नाऊ संग बातचीत के दौरान तृषा ने थलपति विजय को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बनने पर बधाई भी दी. तृषा कृष्णन बोलीं- बहुत-बहुत बधाई हो. मैं बहुत ज्यादा खुश हूं. बता दें कि थलपति विजय जब तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद के लिए शपथ ले रहे थे, तब तृषा भी उनके साथ समारोह में मौजूद रहीं. वो खुशी से चहकती नजर आईं. दोस्त विजय की जिंदगी के सबसे अहम और ऐतिहासिक पल में तृषा ने सच्चे दोस्त की तरह उनका साथ दिया और उनकी जीत का जश्न मनाया. इतना ही नहीं शपथ समारोह में तृषा कृष्णन ने थलपति विजय की मां और बहनों को गले लगकर बधाई दी. विजय के परिवार संग तृषा का खास बॉन्ड देखकर फैंस भी खुशी से गदगद नजर आए. परिवार संग दिखा तृषा का बॉन्ड थलपति विजय के सीएम शपथ समारोह में तृषा कृष्णन ने अपनी एंट्री के साथ ही हर किसी का ध्यान खींच लिया था. तृषा पाउडर ब्लू साड़ी में ट्रेडिशनल लुक में नजर आईं. उन्होंने डायमंड चोकर नेकलेस और मैचिंग ईयररिंग्स को साड़ी संग टीमअप किया. बिंदी और गजरा लगाकर अपने ट्रेडिशनल लुक को फाइनल टच दिया. इस लुक में वो काफी खूबसूरत लगीं. तृषा और थलपति विजय की बात करें तो दोनों दोस्त होने के साथ को-एक्टर्स भी हैं. दोनों कई फिल्मों में साथ काम कर चुके हैं, जिनमें 'तिरुपाची' , 'आथी', 'कुरुवी', 'लियो'  हैं. इन सभी फिल्मों में तृषा और थलपति की जोड़ी को फैंस का बेशुमार प्यार मिला है.  

मातृत्व का गहरा अर्थ: शरीर से परे एकत्व और चेतना का अनुभव

भारतीय संस्कृति ने हमेशा मां को दिव्यता से और दिव्यता को मां से जोड़ा है. ऐसा इसलिए है,  क्योंकि मातृत्व का संबंध हमारे अस्तित्व के स्रोत से है. आज भी पूरी दुनिया में लोग 'धरती मां', 'मातृभूमि' और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स में 'मदर बोर्ड' की बात करते हैं. मातृत्व की महिमा में बहुत कुछ कहा गया है. फिर भी इस अवधारणा को बहुत गलत समझा गया है. मातृत्व, 'थाईमाई' या 'मदरहुड' का असल में क्या मतलब है? जब हम 'मां' शब्द कहते हैं तो हमारा मतलब ऐसे व्यक्ति से होता है जिसने कम से कम एक पल के लिए ही सही, किसी दूसरे जीवन के प्रति पूरी तरह से समर्पित होने का अनुभव किया हो. जब बच्चे बड़े हो जाते हैं तो मां के उनके साथ कुछ मुद्दे हो सकते हैं. लेकिन नई पीढ़ी का अस्तित्व मां के अपने शिशु के साथ गहरे एकत्व के अनुभव पर निर्भर करता है. मां के शरीर की हर कोशिका इस नए जीवन की जरूरतों के प्रति रिस्पॉन्ड करती है. यही बात मातृत्व को इतना अनोखा मानवीय अनुभव बनाती है. मातृत्व की पवित्रता इस बात में निहित है कि प्रकृति व्यक्ति को यह एहसास कराने में सहयोग करती है कि उसके अपने शरीर की संकीर्ण सीमाओं से परे कुछ अधिक मौजूद है. यह बात मातृत्व को अद्भुत स्वाभाविक संभावना बनाती है और 'परे' तक पहुंचने का माध्यम बनाती है. मां के रूप में आप अपनी निजी इच्छाओं और नापसंदों से ऊपर उठ जाती हैं और स्वयं से अधिक किसी चीज के साथ एकत्व का अनुभव करती हैं. इस उपहार का 'योग' या एकत्व के रूप में और भी विस्तार किया जा सकता है, जिसका अर्थ है संपूर्ण अस्तित्व के साथ अनुभवजन्य एकत्व की अवस्था. मातृत्व केवल एक जैविक स्थिति होना जरूरी नहीं है. केवल एक बच्चे को जन्म देना कोई महान उपलब्धि नहीं है. कई संस्कृतियों में उन महिलाओं को कलंकित किया गया है जिन्होंने बच्चों को जन्म नहीं दिया. यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है. मातृत्व के जादू को नकारा नहीं जा सकता. लेकिन इसकी पवित्रता केवल प्रजनन की प्रक्रिया में निहित नहीं है. योग विज्ञान, लिंग-भेद से परे प्रत्येक मनुष्य के लिए मां बनने के इस सौभाग्य को सुलभ बनाता है. दुनिया की मां होना एक जैविक मां और बच्चे के बीच का जुड़ाव प्रजाति के कायम रहने को सुनिश्चित करता है. लेकिन यह सरल प्रजनन प्रक्रिया परे जाने का द्वार भी बन सकती है. समावेश की जिस चुनिंदा भावना से कोई मां अपने बच्चे को देखती है, उसे विस्तृत करके पूरी दुनिया को उसमें शामिल किया जा सकता है. एक ऐसा समावेश जो संपूर्ण और शर्त-रहित हो. यही एक योगी का आंतरिक अनुभव होता है. दुर्भाग्य से, कई माताएं पालन-पोषण को स्वामित्व मान बैठती हैं. हालांकि मैं परिवार में सबसे छोटा था, फिर भी मेरी अपनी मां अक्सर मुझे एक बड़े भाई जैसा मानती थीं. एक बार जब उन्होंने अपनी भावनाएं मुझसे थोड़ी कोमलता से व्यक्त कीं तो मैंने उनसे बहुत ही सीधे-सादे अंदाज में पूछा, 'अगर मेरा जन्म पड़ोस वाले घर में हुआ होता तो क्या तब भी आप मेरे बारे में ऐसा ही महसूस करतीं?' वह फूट-फूटकर रो पड़ीं और चली गईं. लेकिन बाद में आंखों में आंसू लिए वापस आईं और मेरे पैर छू लिए. उस दिन उनके भीतर एक तरह का वैराग्य जाग उठा. जब उन्हें यह एहसास हुआ कि हम सबने कितनी पहचान जोड़ रखी है. चाहे वह हमारा शरीर हो, हमारा वंश, हमारा परिवार, हमारा घर या हमारा समुदाय हो. जब मैं लोगों को आध्यात्मिक प्रक्रिया में दीक्षित करता हूं तो सबसे पहले उनसे पूछता हूं कि क्या वे 'पूरी दुनिया की मां' बनने के लिए तैयार हैं. ऐसा इसलिए है, क्योंकि मातृत्व की सच्ची भावना का मतलब किसी एक व्यक्ति को महज एक वस्तु, अपनी निजी संपत्ति या अपना जुनून बना लेना नहीं है. इसके विपरीत, यह चरम प्रेम और शर्त-रहित समावेश की अवस्था है. जहां आप न सिर्फ अपने सगे बच्चे को, बल्कि हर किसी को अपना एक हिस्सा मानते हैं. ऐसी अवस्था में आपके कार्य आपकी निजी इच्छाओं से तय नहीं होते, बल्कि आप बस वही करते हैं जिसकी उस पल जरूरत होती है. यदि मां आपको सृष्टि की गोद में सौंपती है तो योग विज्ञान आपको सीधे सृष्टिकर्ता की गोद में पहुंचाने में सक्षम है. मातृत्व का यह कहीं अधिक गहरा अनुभव एक जबरदस्त उपहार और संभावना है, जो हर किसी के लिए खुली है. चेतना को ऊंचा उठाने का एक सरल तरीका अभी आपके शरीर में जो कुछ भी है उसमें से आपकी मां के गर्भ से आया हुआ अंश अब शायद ही बचा हो. वह ज्यादातर खत्म हो चुका है. आज आपके शरीर का वजन जितने भी किलोग्राम हो, वह सब कुछ 'धरती मां' से आया है. हमें अपनी जन्म देने वाली मां और धरती मां दोनों की सराहना करनी चाहिए और उनके प्रति कृतज्ञ होना चाहिए. हम यहां इस मां और उस मां के कारण हैं. आपको अपने जीवन में योगदान देने वाली हर चीज, हर इंसान की सराहना करनी चाहिए. अगर आप इस बात पर थोड़ी गहराई से गौर करें तो इस पूरी सृष्टि में ऐसी कोई एक भी चीज नहीं है, जिसके बिना आपका अस्तित्व संभव हो. तो मैं चाहता हूं कि आप हर चीज को 'मां' के रूप में देखें. आज 'वृक्ष-मां' का दिन है, तो कल 'पर्वत-मां' का दिन होगा. उसके अगले दिन आपकी जन्म देने वाली मां का दिन होगा. इन दिनों को इस तरह तय किए जाने का मुख्य कारण यह है कि अगर ऐसा न किया जाए, तो लोग शायद कभी अपनी मां के बारे में नहीं सोचेंगे. संस्कृतियां ऐसी ही बन गई हैं. लेकिन अगर आप थोड़े ज्यादा सचेतन हैं, अगर आप खुद को यह याद दिलाते रहें कि 'अरे! ये पेड़ मुझे ऑक्सीजन दे रहे हैं, ये हर पल मुझे सहारा दे रहे हैं.' अगर आप हर चीज में, हर जगह जहां आप घूमते हैं, वहां इस बात को महसूस करें तो आप सचेतन बन जाएंगे.

योगी कैबिनेट में बड़ा फेरबदल: 8 नेताओं को मिला मंत्री पद, जातीय संतुलन पर फोकस

 लखनऊ  योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल का दूसरा विस्तार दोपहर 3.30 बजे से जन भवन में हुआ। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने आठ मंत्रियों पद की शपथ दिलाई। भूपेन्द्र चौधरी और मनोज कुमार पाण्डेय ने कैबिनेट मंत्री और डॉ. सोमेंद्र तोमर व अजीत पाल ने राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार के पद की शपथ ली। इनके साथ कृष्णा पासवान, कैलाश सिंह राजपूत, सुरेन्द्र दिलेर व हंसराज विश्वकर्मा ने राज्यमंत्री के पद की शपथ ली। योगी आदित्यनाथ सरकार 2.0 में अभी मुख्यमंत्री, दो उपमुख्यमंत्री समेत 21 कैबिनेट मंत्री हैं। इनके साथ 14 राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और 18 राज्य मंत्री हैं। सरकार में 54 मंत्री हैं तो अधिकतम 60 मंत्री ही बनाये जा सकते है। बिना किसी को मंत्रिमंडल से हटाए आठ को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई। योगी आदित्यनाथ सरकार एक में कैबिनेट मंत्री रहे पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेन्द्र चौधरी व रायबरेली के ऊंचाहार से विधायक समाजवादी पार्टी से बगावत करने वाले मनोज कुमार पाण्डेय ने कैबिनेट मंत्री के पद की शपथ ली। इनके साथ अति पिछड़ी जाति से आने वाले वाराणसी के विधान परिषद सदस्य हंसराज विश्वकर्मा, फतहेपुर की खागा सीट से विधायक अनुसूचित जाति की कृष्णा पासवान, अलीगढ़ के खैर से विधायक सुरेन्द्र दिलेर और कन्नौज के तिर्वा से विधायक कैलाश सिंह राजपूत ने पहली बार राज्यमंत्री के पद की शपथ ली। इन मंत्रियों ने ली पद की शपथ उत्तर प्रदेश जन भवन में आज आठ मंत्रियों को शपथ दिलाई गई। इनमें दो राज्यमंत्रियों के कद में बढ़ोतरी गई है। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन्द्र सिंह चौधरी व मनोज कुमार पाण्डेय ने कैबिनेट मंत्री पद की शपथ ली। चौधरी इससे पहले योगी आदित्यनाथ की पहली सरकार (2017-2022) में  पंचायती राज मंत्री  रह चुके हैं। रायबरेली के ऊंचाहार से विधायक और अखिलेश यादव सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे मनोज कुमार पाण्डेय ने योगी आदित्यनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री पद शपथ ली। लेंगे। कन्नौज के तिर्वा से विधायक विधायक कैलाश सिंह राजपूत मंत्रिपद की शपथ लेंगे। वाराणसी में भाजपा के जिलाध्यक्ष और विधान परिषद सदस्य हंसराज विश्वकर्मा अलीगढ़ के खैर से भाजपा के विधायक सुरेंद्र दिलेर फतेहपुर के खागा से भाजपा की विधायक कृष्णा पासवान मेरठ दक्षिण विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के विधायक डॉ. सोमेंद्र तोमर का कद बढ़ाया गया है। वह सरकार में राज्य मंत्री ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत हैं, अब इनको राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार के रूप में शपथ दिलाई जाएगी। कानपुर देहात के सिकंदरा से भाजपा के विधायक अजीत पाल योगी आदित्यनाथ सरकार में राज्य मंत्री विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग है। इनको प्रोन्नत किया गया है। अब यह राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार के पद की शपथ लेंगे। दो वर्ष पहले हुआ था पहला विस्तार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल का पहला विस्तार लोकसभा चुनाव से पहले पांच मार्च 2024 को हुआ था। तब सामाजिक समीकरण को ध्यान में रखते हुए पिछड़े, दलित, अगड़े के साथ ही पूरब से पश्चिम को साधते हुए चार नए कैबिनेट मंत्री बनाए गए थे। इनमें सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर, भाजपा एमएलसी दारा सिंह चौहान, मुजफ्फरनगर की पुरकाजी सीट से रालोद विधायक अनिल कुमार और गाजियाबाद की साहिबाबाद सीट से भाजपा विधायक सुनील कुमार शर्मा मंत्री बने थे। इसके साथ कैबिनेट मंत्रियों की संख्या मुख्यमंत्री योगी सहित 22 हो गई, लेकिन लोकसभा चुनाव के बाद जितिन प्रसाद केंद्रीय मंत्री बन गए थे। इस तरह से वर्तमान में 21 कैबिनेट मंत्री हैं। मौजूदा मंत्रिमंडल का जातीय समीकरण योगी आदित्यनाथ 2.0 सरकार जब गठित हुई उस समय पिछड़ा वर्ग के 20, आठ दलित, सात ब्राह्मण, छह राजपूत, चार वैश्य, दो भूमिहार मंत्री बनाय गये थे। पहले विस्तार में दो पिछड़े वर्ग मंत्रियों में बढ़ोत्तरी हुई, जिससे मंत्री पिछड़े वर्ग के मंत्रियों की संख्या 22 हो गई। इसके अतिरिक्त एक सुनील शर्मा ब्राह्मण को मंत्रिमंडल में स्थान मिला, लेकिन जितिन प्रसाद केंद्रीय मंत्री बन गये, जिससे ब्राहमण मंत्रियों की संख्या सात ही रही। अलबत्ता अनिल कुमार के रूप में दलित मंत्रियों की संख्या बढ़कर नौ हो गई थी। भाजपा विधायकों का जातीय समीकरण वर्तमान में भाजपा के पास 258 विधायक हैं। इनमें से 45 राजपूत, 42 ब्राह्णण, ओबीसी के 84, एससी के 59 और अन्य सवर्ण विधायक की संख्या 28 हैं। इसी तरह 100 सदस्यों वाली विधान परिषद में भाजपा के 79 सदस्य हैं। इनमें राजपूत 23, ब्राहम्ण 14, ओबीसी 26, मुस्लिम 02 और अन्य सवर्ण 12 और एससी वर्ग के दो सदस्य हैं। जातीय व क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में अब सिर्फ आठ महीने ही है। इसको देखते हुए भाजपा यूपी में योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए जातीय व क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश करेगी। जहां छह और मंत्री बनाए जा सकते हैं वहीं मौजूदा राज्यमंत्रियों में से कुछ को कैबिनेट मंत्री बनाया जाएगा। राज्यसभा चुनाव में सपा से बगावत करने वाले विधायकों में से दो को मंत्री पद का पुरस्कार मिल सकता है। वर्तमान में मुख्यमंत्री योगी, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य व ब्रजेश पाठक सहित कुल 54 मंत्री। राज्य में अधिकतम 60 मंत्री बन सकते हैं। जातीय व क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए मंत्रियों के छह रिक्त पदों को भरा जाएगा।  

ED एक्शन पर गरमाई सियासत, AAP नेताओं ने भाजपा महासचिव के निवास के बाहर किया विरोध

अमृतसर. पंजाब के अमृतसर में केंद्र सरकार और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई के विरोध में रविवार को आम आदमी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग के निवास स्थान के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान पार्टी नेताओं ने केंद्र सरकार पर केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन में पंजाब सरकार के मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ, विधायक जसबीर सिंह, आम आदमी पार्टी के जिला अध्यक्ष प्रभबीर सिंह बराड़, विधायक डाॅ. इंदर बीर सिंह निज्जर, विधायक डाॅ. अजय गुप्ता सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार विपक्षी दलों की आवाज दबाने के लिए जांच एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है। आप नेताओं ने आरोप लगाया कि बीते दिनों पंजाब मंत्रिमंडल के मंत्री संजीव अरोड़ा की गिरफ्तारी पूरी तरह राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है। उनका कहना था कि आम आदमी पार्टी लगातार जनहित के मुद्दे उठा रही है और इसी कारण पार्टी नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है। लोकतंत्र के लिए बताया खतरा मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ ने कहा कि आम आदमी पार्टी डरने वाली नहीं है और पार्टी का प्रत्येक कार्यकर्ता जनता की आवाज उठाता रहेगा। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार यह सोचती है कि गिरफ्तारियों और दबाव की राजनीति से विपक्ष को चुप कराया जा सकता है तो यह उसकी गलतफहमी है। विधायक डाॅ. इंदर बीर सिंह निज्जर ने कहा कि पंजाब की जनता सब कुछ देख रही है और आने वाले समय में इसका जवाब लोकतांत्रिक तरीके से दिया जाएगा। वहीं विधायक डाॅ. अजय गुप्ता ने कहा कि जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों को निशाना बनाना लोकतंत्र के लिए ठीक संकेत नहीं है। चुग के घर के बाहर बनाया सुरक्षा घेरा प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस बल भी बड़ी संख्या में तैनात रहा। पुलिस प्रशासन ने प्रदर्शन को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न करवाने के लिए इलाके में निगरानी बढ़ाई हुई थी। प्रदर्शन के दौरान आप कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारे लगाए और संजीव अरोड़ा की गिरफ्तारी वापस लेने की मांग की। आम आदमी पार्टी नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि इसी तरह विपक्षी नेताओं पर कार्रवाई जारी रही तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

RCB टीम का छत्तीसगढ़ पहुंचने पर भव्य स्वागत, खिलाड़ियों ने की कला, संस्कृति और खानपान की जमकर तारीफ

रायपुर  आईपीएल के रोमांच के बीच आरसीबी की टीम के छत्तीसगढ़ पहुँचने पर खिलाड़ियों का छत्तीसगढ़ की पारंपरिक संस्कृति और लोककलाओं के साथ भव्य स्वागत किया गया। टीम 10 मई को रायपुर में Mumbai Indians के खिलाफ मुकाबला खेलेगी। रायपुर स्थित रिसॉर्ट में टीम के पहुँचते ही पारंपरिक तिलक, आरती और लोकनृत्य के माध्यम से खिलाड़ियों का स्वागत किया गया। इस दौरान छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति की रंगत और पारंपरिक संगीत ने खिलाड़ियों का ध्यान आकर्षित किया। कई खिलाड़ी लोककलाकारों के प्रदर्शन को अपने मोबाइल कैमरों में कैद करते नजर आए। इस वीडियो को आरसीबी ने अपने ऑफिसियल इंस्टा हैंडल पर शेयर किया है जिसे अब तक 50 लाख से भी ज्यादा लोग देख चुके हैं। वहीं इस मुकाबले को देखने मुकेश अम्बानी के बेटे आकाश अम्बानी भी रायपुर आ सकते हैं । वहीं 13 मई को होने वाले आरसीबी और केकेआर मैच देखने के लिए सुपरस्टार शाहरुख खान भी रायपुर आ सकते हैं। खिलाड़ियों को छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक खानपान के बारे में भी जानकारी दी गई। उन्हें प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों से परिचित कराया गया, जिसकी खिलाड़ियों ने सराहना की। आईपीएल मुकाबले को लेकर रायपुर में क्रिकेट प्रेमियों के बीच खासा उत्साह देखा जा रहा है। वहीं, खिलाड़ियों के पारंपरिक स्वागत ने खेल के साथ-साथ छत्तीसगढ़ की संस्कृति और मेहमाननवाज़ी की भी अलग पहचान प्रस्तुत की है।

ऐतिहासिक नैनीताल ट्रेड्स कप हॉकी टूर्नामेंट में 32 टीमों की होगी रोमांचक भिड़ंत

नैनीताल उत्तराखंड में झीलों की नगरी नैनीताल में एक बार फिर हॉकी का रोमांच लौटने जा रहा है। लंबे अंतराल और व्यवधानों के बाद अखिल भारतीय ट्रेड्स कप हॉकी प्रतियोगिता का आयोजन इस वर्ष भव्य अंदाज में किया जाएगा। खास बात यह है कि इस बार प्रतिष्ठित टूर्नामेंट अपना 100वां वर्ष मना रहा है, जिसे यादगार बनाने के लिए आयोजक संस्था जिला क्रीड़ा एसोसिएशन (डीएसए) ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। शनिवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में डीएसए महासचिव मनोज जोशी ने बताया कि प्रतियोगिता का शुभारंभ आगामी 04 जून से होगा जबकि फाइनल मुकाबला 24 जून को खेला जाएगा। अभी तक देशभर की 32 टीमों ने प्रतियोगिता में भाग लेने की सहमति दे दी है, जबकि अभी और टीमों की आने की संभावना है। प्रतियोगिता के लिए पंजीकरण की अंतिम तिथि 20 मई निर्धारित की गई है। उन्होंने बताया कि इस बार विजेता टीम को पुरस्कार के रूप में 1.50 लाख रुपये और उपविजेता टीम को एक लाख रुपये की नकद राशि प्रदान की जाएगी। इसके अलावा अन्य पुरस्कारों की राशि में भी वृद्धि की गई है। हॉकी सचिव चंद्र लाल साह ने जानकारी दी कि प्रतियोगिता में पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, केरल सहित उत्तर प्रदेश के रामपुर, पीलीभीत और लखनऊ की नामी टीमें भाग लेंगी। उन्होंने बताया कि हॉकी एसोसिएशन ऑफ इंडिया से प्रतियोगिता के आयोजन की आधिकारिक अनुमति भी प्राप्त हो चुकी है। प्रतियोगिता के प्रारूप के अनुसार 04 जून से 17 जून तक नॉकआउट मुकाबले खेले जाएंगे जबकि 18 जून से लीग चरण के मैच शुरू होंगे। महासचिव के अनुसार प्रतियोगिता के लिए तैयारियां युद्ध स्तर पर की जा रही हैं। प्रतियोगिता के शताब्दी वर्ष को देखते हुए टूर्नामेंट को भव्य रूप से मनाया जायेगा।  

9वीं में एडमिशन के लिए चयन परीक्षा आज, आवासीय विद्यालयों में मिलेगी प्रतियोगी एग्जाम की खास तैयारी

जांजगीर-चांपा/अम्बिकापुर. आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त ने बताया कि आयुक्त, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास रायपुर के द्वारा जारी पत्र के निर्देशानुसार मुख्यमंत्री बाल भविष्य सुरक्षा योजना अंतर्गत संचालित प्रयास आवासीय विद्यालयों में शिक्षण सत्र 2025-26 कक्षा 9वीं में प्रवेश हेतु चयन परीक्षा का आयोजन 20 अप्रैल 2025 को प्रातः 10:00 बजे से 01:00 बजे अपरान्ह तक जिला स्तर पर आयोजित है। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन फार्म भरने वाले सभी पात्र परीक्षार्थी विभागीय वेबसाईट www.eklavya.cg.nic.in पर विद्यार्थी का आवेदन क्रमांक व विद्यार्थी के पिता का मोबाईल नम्बर अंकित कर 03 अप्रैल 2025 से 20 अप्रैल 2025 तक ऑनलाइन प्रवेश पत्र डाउनलोड कर सकते हैं। किसी प्रकार की कठिनाई होने पर कलेक्टरेट कैम्पस अंबिकापुर में कार्यालय सहायक आयुक्त आदिवासी विकास अथवा संबंधित विकासखण्ड के मण्डल संयोजक से सम्पर्क कर सकते हैं। अम्बिकापुर के मंण्डल संयोजक का मो. नम्बर 9009627222, लखनपुर के मंण्डल संयोजक का मो. नम्बर 9753946553, उदयपुर के मंण्डल संयोजक को मो. नम्बर 9406130942, लुंण्ड्रा के मंण्डल संयोजक का मो. नम्बर 7999566767, बतौली के मंण्डल संयोजक का मो. नम्बर 7000452965, सीतापुर के मंण्डल संयोजक का मो. नम्बर 7240825482 एवं मैंनपाट के मंण्डल संयोजक का मो. नम्बर 9098979738 है।