samacharsecretary.com

मोस्ट वांटेड महिला माओवादी नेता बेला को कोलकाता पुलिस ने गिरफ्तार किया

रांची  झारखंड के सारंडा जंगल में एक करोड़ के इनामी माओवादी मिसिर बेसरा को पुलिस और सुरक्षाबलों ने चारों ओर से घेर लिया है। जिसके बाद मिसिर बेसरा दस्ते के 15 सदस्यों ने पुलिस के सामने सरेंडर करने का मन बना लिया है। वहीं मिसिर बेसरा की करीबी और मोस्ट वांटेड महिला माओवादी नेता श्रद्धा विश्वास उर्फ बेला को कोलकाता पुलिस ने मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया। जबकि माधई पात्रा ने कोलकाता में सरेंडर कर दिया। कोलकाता पुलिस ने उसे उत्तर काशीपुर थाना क्षेत्र के एक गुप्त स्थान से पकड़ा। गिरफ्तार माओवादी नेता बेला नदिया जिले के चकदह की रहने वाली है। बेला के खिलाफ झारखंड में दर्ज हैं 23 मामले बेला के खिलाफ झारखंड में कम से कम 23 मामले लंबित हैं। झारखंड पुलिस ने उस पर 15 लाख रुपए का इनाम रखा था। मंगलवार को गुप्त सूचना के आधार पर उत्तर काशीपुर थाने की पुलिस ने कार्रवाई की और उसे गिरफ्तार कर लिया। बेला झारखंड और पश्चिम बंगाल में माओवादी गतिविधियों के लिए समन्वयक (कोऑर्डिनेटर) का करती थी। सारंडा में घिरे मिसिर बेसरा गुट के नक्सली पुलिस शरण में वहीं मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सारंडा के मंकी फॉरेस्ट में घिरे मिसिर बेसरा दस्ते के 53 नक्सलियों में से 15 झारखंड पुलिस के शरण में पहुंच गये हैं। सुरक्षा बलों की लगातार घेराबंदी, दबिश और वार्ता की पहल के बाद यह सफलता हाथ लगी है। कई इनामी नक्सली भी पुलिस के संपर्क में इन नक्सलियों में माओवादी पोलित ब्यूरो सदस्य एक करोड़ के इनामी मिसिर बेसरा का खासमखास 10 लाख का इनामी जोनल कमांडर अश्विन भी शामिल है। इसके साथ ही 10 लाख का इनामी जोनल कमांडर चंदन लोहरा, पांच लाख का इनामी सबजोनल कमांडर सोहन पुनेई उर्फ रंगा, सबजोनल कमांडर माधई पात्रा, एरिया कमांडर दो लाख की इनामी रजनी मुदगम, एरिया कमांडर सलोनी मुंडा उर्फ पारूल और दस्ता सदस्यों में अनीशा, जेलानी और सपना सहित अन्य नक्सली शामिल हैं। माधई पात्रा ने किया आत्मसमर्पण उधर, माधई पात्रा ने समाज की मुख्य धारा में लौटने का फैसला करते हुए कोलकाता पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। वह लंबे समय से बीमार चल रहा था। दावा किया जा रहा है कि वह मिसिर बेसरा से अनुमति लेकर पुलिस की शरण में आया है। पुलिस अधिकारी नक्सलियों के शरण में आने की खबर पर सीधे तौर पर कुछ भी कहने से बच रहे हैं। संभावना जतायी जा रही है कि इन नक्सलियों से सूचना एकत्र कर पुलिस आगे कुछ और कार्रवाई करे।  

बाराबंकी: गैस सिलेंडर न मिलने पर युवक गिरफ्तार

बाराबंकी बाराबंकी के रामनगर तहसील में मंगलवार को एसडीएम आनंद तिवारी ने अपनी भतीजी की शादी के लिए गैस सिलेंडर मांगने आए युवक शिवमोहन को पुलिस से गिरफ्तार करवा दिया. बढ़नपुरवा निवासी शिवमोहन एक हफ्ते से गैस एजेंसी के चक्कर काट रहा था और बुकिंग नंबर होने के बावजूद उसे सिलेंडर नहीं मिल रहा था. बुधवार को होने वाली शादी की तैयारी के लिए जब वह फरियाद लेकर तहसील पहुंचा, तो एसडीएम ने उसे अराजकता फैलाने के आरोप में हिरासत में भिजवा दिया. हालांकि, पुलिस ने दो घंटे बाद उसे छोड़ दिया, लेकिन पीड़ित को सिलेंडर नहीं मिला और घर में लकड़ियों पर खाना बनाना पड़ रहा है. शादी का घर और सिलेंडर की किल्लत रामनगर क्षेत्र के शिवमोहन की भतीजी अनीता की आज बुधवार को शादी है. घर में बारात आनी है, लेकिन रसोई के लिए गैस का संकट खड़ा हो गया. शिवमोहन ने श्री लोधेश्वर इंडियन गैस एजेंसी में सिलेंडर बुक कराया था और उसे DAC नंबर भी मिल चुका था. नियमों के मुताबिक नंबर मिलने के बाद गैस मिल जानी चाहिए, लेकिन एजेंसी संचालक उसे हफ्ते भर से टाल रहा था. थक-हारकर पीड़ित न्याय की उम्मीद में तहसील के आला अधिकारी के पास पहुंचा था. एसडीएम का पारा हुआ हाई, मिली जेल पीड़ित शिवमोहन के अनुसार, मंगलवार सुबह जैसे ही एसडीएम आनंद तिवारी अपनी गाड़ी से उतरे, उसने अपनी समस्या बतानी शुरू कर दी. अपनी व्यथा सुनाना ही उसे भारी पड़ गया. एसडीएम साहब बात सुनते ही आगबबूला हो गए और उन्होंने तुरंत मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों को बुलाकर शिवमोहन को गिरफ्तार कर जेल भेजने का निर्देश दे दिया. पुलिस उसे पकड़कर थाने ले गई, जिससे शादी वाले घर में हड़कंप मच गया और प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल उठने लगे. अराजकता का आरोप और मजबूर परिवार इस मामले पर सफाई देते हुए एसडीएम आनंद तिवारी ने कहा कि कुछ लोग गैस सिलेंडर के नाम पर आकर अराजकता और 'न्यूसेंस' क्रिएट कर रहे थे, इसलिए उन्हें पुलिस के हवाले किया गया था. हालांकि, शिवमोहन को दो घंटे बाद छोड़ दिया गया, लेकिन उसकी समस्या का समाधान नहीं हुआ. आज शादी के दिन भी परिवार गैस के लिए भटक रहा है और घर के आंगन में लकड़ियों के चूल्हे पर खाना बनाया जा रहा है.

पेट्रोल-डीजल बचाने की पहल: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जारी किए कई सख्त निर्देश

पटना ईरान-अमेरिका युद्ध की वजह से उपजे वैश्विक संकट और ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के बीच देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में लोगों से अपील की थी कि वो पेट्रोल-डीजल बचाने की दिशा में पहल करें। इसी कड़ी में बिहार सरकार ने कुछ अहम फैसले लिए हैं। इसकी शुरुआत मुख्यमंत्री के काफिले में वाहनों की संख्या घटा कर की गई है। सीएम ने इसके अलावा कई पदाधिकारियों तथा जनप्रतिनिधि से भी अतिरिक्त वाहन नहीं इस्तेमाल करने की अपील भी की है। खुद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने एक्स हैंडल पर इस दिशा में राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी दी है। सीएम सम्राट चौधरी ने एक्स पर बताया, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डीजल, पेट्रोल की बचत के लिए वाहनों के कम से कम उपयोग करने की अपील की है। इसे लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। • मुख्यमंत्री कारकेड में वाहनों की संख्या कम अथवा न्यूनतम करने का निर्णय लिया है। • माननीय मंत्री गण, निगम बोर्ड के माननीय अध्यक्ष गण एवं सदस्य गण, सभी पदाधिकारी गण एवं जनप्रतिनिधि गण से बिना अतिरिक्त वाहन के सार्वजनिक कार्यक्रमों में आने की अपील की गई है। • राज्य की जनता से मेट्रो, बस, ऑटो अथवा अन्य पब्लिक ट्रांसपोर्ट के प्रयोग पर जोर देने का आग्रह किया गया है। • राज्य सरकार के सभी विभागों को सभी प्रकार के कॉन्फ्रेंस अथवा सरकारी बैठकों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। • प्रदेश के सरकारी दफ्तरों में संचालित होने वाले कैंटीन में पाम ऑयल के कम से कम प्रयोग का निर्देश दिया गया है। • सरकारी तथा निजी दफ्तरों में वर्क फ्रॉम होम की संस्कृति को बढ़ावा देने की सलाह दी गई है। • सप्ताह में एक दिन सभी लोगों से 'नो व्हीकल डे' के आयोजन का आग्रह किया गया है।' साइकिल से अदालत पहुंचे औरंगाबाद के प्रधान जिला जज पीएम नरेंद्र मोदी की अपील के बाद इधर बिहार के औरंगाबाद जिले से भी एक खास तस्वीर नजर आई। औरंगाबाद जिले के प्रधान जिला जज राजीव रंजन कुमार बुधवार की सुबह साइकिल से अदालत पहुंचे। जिला जज राजीव रंजन कुमार ने यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस अपील के समर्थन में उठाया, जिसमें लोगों से इस वैश्विक ऊर्जा संकट और अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते बढ़ती ईंधन कीमतों के बीच पेट्रोल-डीजल बचाने का आग्रह किया गया है। जिला जज राजीव रंजन कुमार अपने दानी बिगहा स्थित सरकारी आवास से पुरानी जीटी रोड, समाहरणालय के मुख्य द्वार होते करीब दो किलोमीटर की दूरी तय करते हुए व्यवहार न्यायालय स्थित अपने कार्यालय पहुंचे और न्यायालय के काम में जुट गए। प्रधान जिला जज के साथ उनके अंगरक्षक भी साइकिल से उनके साथ अदालत पहुंचे। प्रधान जिला जज ने आम लोगों को संदेश देने के लिए यह कदम उठाया है कि ईंधन बचाने की जिम्मेदारी केवल जनता की नहीं, बल्कि न्यायाधीशों की भी है।न्यायाधीश की इस पहल की शहर में मुक्त कंठ से प्रशंसा हो रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी अपील बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हैदराबाद में अपने एक दौरे के दौरान देश की जनता से ईंधन और सोने की खपत को कम करने की अपील की थी। पीएम नरेंद्र मोदी ने वर्क फ्रॉम होम कल्चर को भी बढ़ावा देने की अपील की थी। बताया जा रहा है कि खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस दिशा में बड़ा कदम उठाया है। पीएम के पहल पर उनके आधिकारिक काफिले को छोटा कर दिया गया है। इसके साथ ही उनकी सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाले एसपीजी को निर्देश दिया गया है कि वो उनके काफिले में शामिल कारों की संख्या में 50 प्रतिशत कटौती करने का प्रयास करें।

वकीलों का बड़ा फैसला: दिल्ली जिला अदालतों में पूर्ण न्यायिक बहिष्कार का ऐलान

नई दिल्ली  दिल्ली की सभी जिला अदालतों में 14 मई को न्यायिक कामकाज प्रभावित रहेगा। सभी जिला अदालत बार एसोसिएशन की कोऑर्डिनेशन कमिटी ने गुरुवार को पूरी तरह से न्यायिक काम का बहिष्कार करने का फैसला लिया है। 10 मई को हुई आपात बैठक में सर्वसम्मति से यह तय किया गया। 10 मई को हुई आपात बैठक में लिया गया फैसला समिति ने दिल्ली हाई कोर्ट पर जिला अदालत प्रशासन से जुड़े अहम फैसले ‘मनमाने तरीके’ से लेने का आरोप लगाया है। समिति के महासचिव विजय बिश्नोई द्वारा जारी बयान में कहा गया कि बार एसोसिएशनों को नीति निर्माण प्रक्रिया से बाहर रखना न्याय व्यवस्था की भावना के खिलाफ है। कोऑर्डिनेशन कमिटी ने सभी बार सदस्यों से हड़ताल में पूरी भागीदारी की अपील की है। हड़ताल के चलते दिल्ली की जिला अदालतों में जमानत, सिविल और पारिवारिक मामलों सहित नियमित सुनवाई प्रभावित होने की संभावना है। क्या है मामला     14 मई को दिल्ली की सभी जिला अदालतों में वकीलों की हड़ताल     दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा 'मनमाने तरीके' से फैसले लेने का विरोध     नीति निर्माण में बार एसोसिएशन की अनदेखी पर नाराजगी     10 मई को हुई आपात बैठक में काम के बहिष्कार का निर्णय     जमानत, सिविल और पारिवारिक मामलों की सुनवाई पर पड़ेगा असर     कोऑर्डिनेशन कमिटी द्वारा न्यायिक कार्य के पूर्ण बहिष्कार का आह्वान     महासचिव विजय बिश्नोई ने जारी किया आधिकारिक बयान     बार एसोसिएशन को प्रक्रिया से बाहर रखना न्याय व्यवस्था के खिलाफ बताया गया

गोपालगंज रेस्क्यू ऑपरेशन: ट्रैफिकिंग गिरोह से 44 लड़कियां छुड़ाईं, कई राज्यों से जुड़ा नेटवर्क उजागर

गोपालगंज बिहार के गोपालगंज जिले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। गोपालगंज जिले के कुचायकोट थाना क्षेत्र में मंगलवार को आर्केस्ट्रा समूहों के खिलाफ अभियान चलाकर 44 से अधिक नाबालिग लड़कियों को मुक्त कराया गया है। 15 से अधिक आर्केस्ट्रा समूहों पर छापेमारी में पांच महिला सहित 21 संदिग्धों को ट्रैफिकिंग और बच्चियों के शोषण के आरोप में गिरफ्तार कर पुलिस पूछताछ कर रही है। अपर पुलिस महानिदेशक ,कमजोर वर्ग अमित जैन और एसपी विनय तिवारी की देखरेख चलाए गए इस अभियान में कुचायकोट पुलिस, एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन, नारायणी सेवा संस्थान और बिहार पुलिस मुख्यालय की संयुक्त टीम शामिल थी। पुलिस के अनुसार मुक्त कराई गई लड़कियों की उम्र 10 से 17 वर्ष के बीच है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि बच्चियों को पश्चिम बंगाल, असम, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान और छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों से झांसा देकर लाया गया था। काउंसलिंग के बाद सभी बच्चियों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया है। उनकी मेडिकल जांच,उम्र सत्यापन और अन्य कानूनी प्रक्रिया जारी है। ये हुए गिरफ्तार पश्चिम बंगाल के पूर्वी मेदिनीपुर जिले के गुरुसदे रजना, उत्तर प्रदेश के बनारस जिले के मनोज सोनार, पश्चिम बंगाल के झाड़ग्राम जिले के सुमित गोरे, गोपालगंज जिले के कुशौंधी बाजार निवासी विकास कुमार सिंह, पश्चिम बंगाल के कूचबिहार जिले के ओमिर बाग सोम, गोपालगंज जिले के विशम्भरपुर निवासी पिंटू साह, पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के राहुल मंडल, पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के सेफुल्लाह रसखोर को पकड़ा गया है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के सुब्रतो साधक, पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के राजू पासवान, गोपालगंज जिले के कुचायकोट निवासी जीत कुमार सिंह, गोपालगंज जिले के मठवा परसुराम निवासी अनुप कुमार कुशवाहा, झारखंड के गिरिडीह जिले के शंकर कुमार, उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर निवासी आलोक श्रीवास्तव, पश्चिम बंगाल के नोदिया जिले के रजक मंडल तथा गोपालगंज जिले के कुचायकोट निवासी नीरज कुमार को गिरफ्तार किया गया है। कराया जा रहा था अश्लील नृत्य जांच में सामने आया कि शादी-विवाह के मौसम में आर्केस्ट्रा समूहों द्वारा ट्रैफिकिंग के जरिए नाबालिग लड़कियों को बुलाया जाता था। उनसे भोजपुरी गीतों पर अश्लील नृत्य कराया जाता था। कई लड़कियों ने काउंसलिंग के दौरान बताया कि उन्हें बेहतर जिंदगी, फिल्मों में काम और रुपये का लालच देकर इस धंधे में धकेला गया। कुछ ने यह भी बताया कि कथित प्रेमियों ने उन्हें बेच दिया। एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन के वरिष्ठ निदेशक मनीष शर्मा ने कहा कि कार्रवाई से ट्रैफिकिंग गिरोहों और आर्केस्ट्रा समूहों की मिलीभगत उजागर हुई है। राजस्थान से लापता किशोरी भी मिली पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि बरामद किशोरियों में एक किशोरी राजस्थान की रहने वाली है। वह पिछले पांच वर्षों से लापता थी और उसके गायब होने की रिपोर्ट वहां के स्थानीय थाने में दर्ज कराई गई थी। पूछताछ के बाद गोपालगंज पुलिस ने उसके परिजनों को सूचना दे दी है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, बरामद की गई लड़कियों में सबसे अधिक संख्या पश्चिम बंगाल की किशोरियों की है। दलालों द्वारा पैसा की लालच देकर डांस कराया जाता है। पहले भी दस किशोरियों को कराया गया था मुक्त बता दें कि इससे पहले 18 मार्च 2026 को गोपालगंज जिले के बैकुंठपुर थाना क्षेत्र में गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की थी। सूचना मिली थी कि ऑर्केस्ट्रा एवं डांस ग्रुप के नाम पर बाहर से लाई गई किशोरियों से जबरन डांस कराया जा रहा है तथा उनका शोषण किया जा रहा है।सूचना के बाद पुलिस ने एसोसिएशन फॉर वोलंटरी एक्शन, पटना, नारायणी सेवा संस्थान, गोपालगंज तथा बैकुंठपुर थाना की महिला पुलिस पदाधिकारियों और पुलिसकर्मियों के साथ संयुक्त विशेष टीम बनाकर छापेमारी की थी। कार्रवाई के दौरान कुल 10 किशोरियों को बरामद कर मुक्त कराया गया था। एक ऑर्केस्ट्रा संचालक और दो संचालिकाओं को गिरफ्तार किया गया था।

ऊर्जा संरक्षण की दिशा में उठाया गया हर कदम राष्ट्रनिर्माण में योगदान है – मुख्यमंत्री साय

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया ईंधन संरक्षण और संसाधनों के संयमित उपयोग का आह्वान ऊर्जा संरक्षण की दिशा में उठाया गया हर कदम राष्ट्रनिर्माण में योगदान है – मुख्यमंत्री साय सरकारी वाहनों को चरणबद्ध तरीके से ईवी में बदलने की दिशा में होगी कार्रवाई- मुख्यमंत्री साय राष्ट्रहित में ईंधन बचत को जन-आंदोलन बनाने की अपील रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्रहित में ईंधन संरक्षण एवं संसाधनों के संयमित उपयोग को लेकर किए गए आह्वान का समर्थन करते हुए कहा है कि वैश्विक ऊर्जा संकट और पर्यावरणीय चुनौतियों के इस दौर में पेट्रोल-डीजल जैसे मूल्यवान संसाधनों का जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग करना हम सभी का राष्ट्रीय दायित्व है।  मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ऊर्जा संरक्षण केवल आर्थिक आवश्यकता नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा एक महत्वपूर्ण विषय है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इसी भावना से प्रेरित होकर राज्य शासन द्वारा शासकीय स्तर पर ईंधन की खपत कम करने और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग की दिशा में ठोस पहल की जा रही है।  उन्होंने कहा की कि उनके आधिकारिक भ्रमणों के दौरान अब केवल अत्यावश्यक वाहनों को ही कारकेड में शामिल किया जाएगा। साथ ही मंत्रीगणों तथा विभिन्न निगम-मंडलों के पदाधिकारियों से भी वाहनों एवं अन्य सरकारी संसाधनों के संयमित उपयोग का आग्रह किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार शासकीय परिवहन व्यवस्था को अधिक पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में भी कार्य करेगी। इसके तहत समस्त शासकीय वाहनों को चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) में परिवर्तित करने की दिशा में ठोस कार्यवाही प्रारंभ की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह कदम न केवल ईंधन की बचत करेगा, बल्कि प्रदूषण नियंत्रण और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मुख्यमंत्री साय ने प्रदेशवासियों से सार्वजनिक परिवहन का अधिकाधिक उपयोग करने, कारपूलिंग अपनाने तथा अनावश्यक निजी वाहनों के उपयोग से बचने की अपील की। उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी आदतों में बदलाव लाकर हम बड़े सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं। यदि प्रत्येक नागरिक ईंधन बचत को अपनी जिम्मेदारी माने, तो यह अभियान एक व्यापक जन-आंदोलन का रूप ले सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 'नेशन फर्स्ट' की भावना के साथ ईंधन संरक्षण को जनभागीदारी का अभियान बनाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने प्रदेशवासियों से राष्ट्रहित में जिम्मेदार नागरिक की भूमिका निभाने का आह्वान करते हुए कहा कि प्रत्येक जागरूक कदम देश की ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक मजबूती में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

PM मोदी की अपील का असर: विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने घटाया अपना काफिला

विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह ने घटाया अपना काफिला, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ईंधन संरक्षण की अपील से प्रेरित होकर लिया फैसला अब डॉ रमन सिंह केवल अत्यावश्यक वाहनों का करेंगे उपयोग, प्रदेश की जनता से भी संयम और सहयोग की अपील रायपुर छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए देशवासियों से की गई अपील का सम्मान करते हुए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। डॉ रमन सिंह ने अपने प्रोटोकॉल काफिले से 4 वाहनों का उपयोग कम करने का फैसला लिया है। डॉ रमन सिंह ने कहा कि यह राष्ट्रहित में संसाधनों के संरक्षण और जिम्मेदार नागरिक कर्तव्य की भावना से जुड़ा एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि जब वैश्विक परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण हैं, तब परिवार के मुखिया के रूप में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा संसाधनों के संरक्षण का संदेश हम सभी भारतवासियों के लिए अनुकरणीय है और ऐसे समय में प्रत्येक जनप्रतिनिधि और नागरिक का दायित्व बनता है कि वह संयम, सादगी और जिम्मेदारी का परिचय दे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमेशा देशवासियों को राष्ट्रहित सर्वोपरि रखने की प्रेरणा दी है और उसी भावना के अनुरूप यह निर्णय लिया गया है। इसके साथ ही, डॉ रमन सिंह ने प्रदेशवासियों से भी अपील की कि वे वर्तमान परिस्थितियों को गंभीरता से समझें तथा आवश्यकता अनुसार संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करें और जहाँ तक संभव हो सार्वजनिक परिवहन का उपयोग कर सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए राष्ट्रहित में सहयोग की भावना के साथ आगे आएं।

अब आसान होगा चंडीगढ़ का सफर, लंबे इंतजार के बाद ट्रिब्यून चौक प्रोजेक्ट को मिली मंजूरी

 चंडीगढ़ ट्रिब्यून चौक पर बनने वाले फ्लाईओवर और अंडरपास प्रोजेक्ट को लेकर सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने महत्वपूर्ण मंजूरी दे दी है। मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय, चंडीगढ़ द्वारा यूटी इंजीनियरिंग विभाग को भेजे गए पत्र में एल-1 बोलीदाता से अतिरिक्त परफिर्मेंस सिक्योरिटी जमा कराने की अनुमति प्रदान की गई है। मालूम होगी पिछले महीने प्रशासन ने टेंडर प्रक्रिया को पूरा कर लिया है। जिस कंपनी ने सबसे कम बोली दी थी उसे अब टेंडर अलाट कर दिया जाएगा। मंत्रालय के अनुसार, परियोजना के लिए एल-1 कंपनी ने निर्धारित लागत से 31.06 प्रतिशत कम दर पर बोली लगाई है। इसी कारण नियमों के तहत कंपनी से 4 करोड़ 73 लाख 53 हजार 652 रुपये की अतिरिक्त परफार्मेंस सिक्योरिटी मांगी जाएगी। यह राशि आरएफपी के तहत लागू सामान्य परफॉर्मेंस सिक्योरिटी के अतिरिक्त होगी। यह परियोजना एनएच-05 पर एनएच (ओ) योजना के तहत ईपीसी मोड पर बनाई जानी है। इसमें ट्रिब्यून चौक पर फ्लाईओवर, रोटरी और अंडरपास का निर्माण किया जाएगा, जिससे शहर में ट्रैफिक दबाव कम होने और आवागमन सुगम होने की उम्मीद है। मंत्रालय ने परियोजना की स्वीकृति की वैधता को 31 मई 2026 तक बढ़ा दिया है और यूटी इंजीनियरिंग विभाग को प्राथमिकता के आधार पर एलओए (लेटर इफ अवार्ड) जारी करने के निर्देश दिए हैं। इस संबंध में मंत्रालय की ओर से जारी पत्र की प्रति यूटी चंडीगढ़ के सीपी डिवीजन नंबर-1 के कार्यकारी अभियंता को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है। मालूम हो कि पिछले 7 साल से इस प्रोजेक्ट का इंतजार किया जा रहा है। प्रशासन का लक्ष्य फ्लाईओवर निर्माण कार्य जल्द शुरू कर दो वर्षों के भीतर पूरा करना है। करीब 1.6 किलोमीटर लंबे प्रस्तावित फ्लाईओवर से ट्रिब्यून चौक पर लगने वाले भारी ट्रैफिक जाम से राहत मिलने की उम्मीद है। मूल ट्रैफिक आकलन के अनुसार इस चौक से प्रतिदिन लगभग 1.43 लाख वाहन गुजरते हैं, जिनमें करीब 1.35 लाख यात्री वाहन शामिल हैं। केंद्र सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से जुलाई 2025 में मंजूरी मिलने के बावजूद प्रशासन ने करीब सात महीने बाद इस वर्ष फरवरी में टेंडर प्रक्रिया शुरू की थी। ‘ओवरलूप’ विकल्प क्या है? शहर के वास्तुकार और शहरी योजनाकार पर्ल अहलूवालिया और आश्रय आहूजा की संस्था यूआरएपी (Urban Research and Architecture Practice) ने “द ओवरलूप” नामक वैकल्पिक डिजाइन पेश किया है। यह मौजूदा ट्रिब्यून चौक राउंडअबाउट के ऊपर एक एलिवेटेड रोटरी का प्रस्ताव है, जिससे ट्रैफिक को दो स्तरों पर विभाजित कर सिग्नल-फ्री आवाजाही सुनिश्चित की जा सकती है। डिजाइनरों का दावा है कि इससे ट्रैफिक क्षमता करीब 50 प्रतिशत तक बढ़ेगी और मौजूदा फ्लाईओवर योजना के तहत प्रस्तावित लगभग 700 पेड़ों की जगह केवल 65 पेड़ों की कटाई करनी पड़ेगी। वास्तुकारों का कहना है कि “शहरी गतिशीलता का उद्देश्य कारों को नहीं, बल्कि लोगों को सुचारु रूप से आगे बढ़ाना होना चाहिए।” उनका आरोप है कि मौजूदा फ्लाईओवर योजना पुरानी सोच पर आधारित है और दुनिया भर के अनुभव बताते हैं कि शहरों के भीतर बने फ्लाईओवर अक्सर ट्रैफिक कम करने के बजाय बढ़ा देते हैं। यूआरएपी ने दावा किया कि उन्होंने चंडीगढ़ के अगले 50 वर्षों के लिए मास्टर प्लान तैयार करने में तीन साल लगाए। “द ओवरलूप” उसी योजना का हिस्सा है, जिसे 2019 में यूटी प्रशासन के सामने प्रस्तुत किया गया था और दो अंतिम डिजाइनों में शामिल किया गया था। हालांकि उनका आरोप है कि बाद में मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं रही।  700 पेड़ों की कटाई पर विवाद परियोजना के विरोध का सबसे बड़ा कारण ट्रिब्यून चौक कॉरिडोर में लगभग 700 परिपक्व पेड़ों की प्रस्तावित कटाई है। हाई कोर्ट में दायर हलफनामों में कहा गया है कि जिन 17 आम के पेड़ों को काटा जाना है, वे हेरिटेज ग्रेड-1 श्रेणी वाले बाग का हिस्सा हैं। वास्तुकारों का कहना है कि नए पौधे लगाना पर्याप्त मुआवजा नहीं हो सकता। उनके अनुसार, “यह ऐसा है जैसे गोली के घाव पर सिर्फ बैंड-एड लगा दिया जाए।” उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ की हरियाली और वृक्ष-पंक्तियां शहर की मूल पहचान का हिस्सा हैं, जिन्हें ली कार्बुजिए की मूल योजना में विशेष महत्व दिया गया था। मास्टर प्लान उल्लंघन का आरोप याचिकाकर्ताओं का दावा है कि यह परियोजना चंडीगढ़ मास्टर प्लान-2031 के खिलाफ है। मास्टर प्लान शहर के भीतर फ्लाईओवर निर्माण की अनुशंसा नहीं करता और हरित क्षेत्र संरक्षण को प्राथमिकता देता है। अमिकस क्यूरी तनु बेदी ने अदालत में दलील दी कि 1.6 किलोमीटर लंबा फ्लाईओवर मास्टर प्लान की मूल अवधारणा के अनुरूप नहीं है। पूर्व मुख्य वास्तुकार भी विरोध में चंडीगढ़ की पूर्व मुख्य वास्तुकार सुमित कौर लगातार इस परियोजना का विरोध कर रही हैं। उन्होंने इसे “अल्पदृष्टि और अस्थायी समाधान” बताते हुए कहा कि यह शहर की विशिष्ट शहरी पहचान को नुकसान पहुंचाएगा और ट्रैफिक जाम को केवल एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करेगा। उन्होंने सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने, मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (MRTS) विकसित करने और रिंग रोड बनाने जैसे विकल्प सुझाए हैं। प्रशासन का पक्ष यूटी प्रशासन का कहना है कि ट्रिब्यून चौक पर प्रतिदिन 1.5 लाख से अधिक वाहन गुजरते हैं और फ्लाईओवर ट्रैफिक जाम कम करने के लिए बेहद जरूरी है। प्रशासन ने बताया कि अप्रैल 2024 में हाईकोर्ट द्वारा पेड़ों की कटाई पर लगी रोक हटाई जा चुकी है और सितंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट में दायर चुनौतियां भी खारिज हो चुकी हैं। प्रशासन ने सिंगला कंस्ट्रक्शन लिमिटेड (Singla Constructions Limited) को 147.98 करोड़ की सबसे कम बोली (L1) देने वाली कंपनी के रूप में चुना है। अब सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की अंतिम मंजूरी का इंतजार है। Tribune Flyover Project: परियोजना से जुड़े प्रमुख तथ्य     कुल लागत: 247.07 करोड़ रुपये     अनुमानित लागत: 214.66 करोड़ रुपये     एल1 बोली: 147.98 करोड़ रुपये     लंबाई: 1.65 किलोमीटर     फ्लाईओवर लंबाई: 1,442 मीटर     अंडरपास लंबाई: 519 मीटर     निर्माण अवधि: 30 महीने     प्रतिदिन ट्रैफिक: 1.5 लाख वाहन  

NEET घोटाले की जांच में नया मोड़: सीहोर से जुड़ा निकला मास्टमाइंड शुभम का कनेक्शन

सीहोर NEET 2026 पेपर लीक मामले की जांच लगातार नए खुलासे कर रही है. अब इस हाई-प्रोफाइल मामले में मध्य प्रदेश के सीहोर जिले का कनेक्शन सामने आया है. राजस्थान पुलिस ने महाराष्ट्र के नासिक से डॉक्टर शुभम खैरनार को गिरफ्तार किया है, जो कभी सीहोर स्थित श्री सत्यसाई यूनिवर्सिटी में बीएएमएस का छात्र रह चुका है. इस गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियां पेपर लीक नेटवर्क के तार मध्य प्रदेश तक जुड़े होने की आशंका पर भी जांच कर रही हैं।  3 मई को हुई थी शुभम की गिरफ्तारी जानकारी के मुताबिक राजस्थान पुलिस ने 3 मई 2026 को शुभम खैरनार को हिरासत में लिया था. तब से उससे लगातार पूछताछ की जा रही है. जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि शुभम का सीहोर की श्री सत्यसाई यूनिवर्सिटी से संबंध रहा है. इसके बाद पुलिस ने यूनिवर्सिटी से भी संपर्क कर आरोपी के शैक्षणिक रिकॉर्ड और गतिविधियों की जानकारी जुटाई।  सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या शुभम किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा था और क्या उसने मेडिकल शिक्षा संस्थानों के माध्यम से किसी तरह का संपर्क या नेटवर्क तैयार किया था. पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है कि पेपर लीक से जुड़े अन्य आरोपियों के साथ उसका कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध था या नहीं।  हालांकि इस पूरे मामले में श्री सत्यसाई यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने आरोपी शुभम खैरनार से खुद को अलग कर लिया है. यूनिवर्सिटी के कुलपति मुकेश तिवारी ने स्पष्ट कहा कि शुभम ने वर्ष 2021 में बीएएमएस पाठ्यक्रम में प्रवेश जरूर लिया था, लेकिन प्रवेश के बाद वह कभी नियमित रूप से यूनिवर्सिटी नहीं आया. कुलपति के मुताबिक उसने न तो किसी परीक्षा में हिस्सा लिया और न ही किसी शैक्षणिक या अन्य गतिविधि में भागीदारी की।  यूनिवर्सिटी का दावा, कभी क्लास में नहीं आया था आरोपी यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि आरोपी का संस्थान से केवल नाममात्र का संबंध था और उसका कैंपस गतिविधियों से कोई जुड़ाव नहीं रहा. इसके बावजूद पुलिस सभी संभावित पहलुओं की जांच कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आरोपी की भूमिका केवल सीमित थी या वह बड़े संगठित गिरोह का हिस्सा था।  गौरतलब है कि NEET 2026 पेपर लीक मामले में राजस्थान, हरियाणा, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में लगातार छापेमारी और गिरफ्तारियां हो रही हैं. जांच एजेंसियों का दावा है कि पेपर लीक का नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ था और इसमें बड़ी रकम के लेनदेन के जरिए अभ्यर्थियों तक परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र पहुंचाए गए।  अब सीहोर कनेक्शन सामने आने के बाद जांच और तेज हो गई है. राजस्थान पुलिस आरोपी शुभम खैरनार से पूछताछ के आधार पर उसके संपर्कों, आर्थिक लेनदेन और शैक्षणिक नेटवर्क की पड़ताल कर रही है. आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। 

वीआईपी कल्चर छोड़ बस में सफर: सिंहस्थ कार्यों के निरीक्षण के लिए अधिकारियों ने अपनाई सादगी

उज्जैन  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'ईंधन बचाओ' अपील और मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देशों के बाद प्रशासन ने काम करने का तरीका भी बदल दिया है। अब अधिकारी अलग-अलग गाड़ियों के बजाय एक ही बस में बैठकर सिंहस्थ कार्यों का निरीक्षण कर रहे हैं। करोड़ों रुपए के विकास कार्यों के बीच प्रशासन का यह कदम चर्चा का विषय बन गया है। जानकारी के अनुसार, कमिश्नर – अधिकारी निरिक्षण के लिए अलग वाहन नहीं बल्कि ट्रेवलर से पहुंचे। अपनी यात्रा के दौरान, आशीष सिंह ने मितव्ययिता के नियमों के अनुरूप, अन्य अधिकारियों के साथ एक ही बस में यात्रा करके सिंहस्थ से संबंधित कार्यों का नियमित निरीक्षण शुरू किया। इससे पहले, अधिकारी अलग-अलग वाहनों का उपयोग करते थे। नियमित दौरे के हिस्से के रूप में, व्यवस्थाओं की समीक्षा करने और नए घाटों पर श्रद्धालुओं के लिए सुगम पहुंच मार्गों के विकास की निगरानी करने हेतु गौ घाट से अन्य घाटों तक निरीक्षण किए गए। सिंहस्थ के कार्यों का पिछले एक सप्ताह से अधिकारी नियमित निरीक्षण कर रहे हैं। रोज कमिश्नर, कलेक्टर, अपर कलेक्टर, एसडीएम, तहसीलदार, एसडीओ, पीडब्ल्यूडी और जल संसाधन विभाग सहित अन्य विभागों के अधिकारी अलग-अलग 15 वाहनों से पहुंचते थे। वे करीब 16 किमी का सफर करते हैं। अब समझिए कैसे हुई खर्च में कटौती 15 अधिकारी रोज सिंहस्थ क्षेत्र के 16 किमी का सफर तय करते हैं। उससे पहले अपने बंगले से घाट तक पहुंचते हैं, यह भी पांच से सात किमी होता है। ज्यादातर इनोवा कार हैं, जिनका एवरेज 10 किमी प्रति लीटर होता है। वहीं जब अधिकारी निरीक्षण करते हैं, वाहनों के एसी चालू रहते हैं। इस हिसाब से देखें तो प्रत्येक वाहन पर चार लीटर पेट्रोल या डीजल खर्च होता है। 450 रुपए प्रति कार के हिसाब से मानें तो 6750 रुपए प्रतिदिन खर्च होते थे। अधिकारियों ने बुधवार से ट्रैवलर बस से सफर शुरू किया है। इस बस में पहले दिन वे 12 किमी गए। जिसमें ढाई लीटर डीजल खर्च हुआ, जो करीब 250 रुपए से भी कम का होता है। हालांकि ट्रैवलर बस 4100 रुपए प्रतिदिन के किराए पर ली गई है। रोज सुबह किया जा रहा निरीक्षण सिंहस्थ में आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रशासनिक अमला लगातार सक्रिय है। घाटों से जुड़ने वाले प्रस्तावित एप्रोच रोड के स्थान चिन्हित करने के लिए अधिकारी रोज सुबह 6 बजे से निरीक्षण कर रहे हैं। इस दौरान वे करीब 6 किलोमीटर क्षेत्र में पैदल भ्रमण कर व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दे रहे हैं। टीम भावना भी मजबूत होगी मेला अधिकारी आशीष सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए यह बदलाव किया गया है। उन्होंने कहा कि पहले अलग-अलग विभागों के अधिकारी अपनी-अपनी गाड़ियों से आते थे, जिससे अनावश्यक ईंधन और शासकीय धन का अपव्यय होता था। अब सभी अधिकारी एक साथ यात्रा करेंगे, जिससे टीम भावना भी मजबूत होगी और ईंधन की खपत में भी भारी कमी आएगी। कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने कहा कि अलग-अलग गाड़ियों का काफिला बनने से ट्रैफिक पर भी असर पड़ता था। अब एक बस में सभी अधिकारियों के साथ जाने से ईंधन की बचत के साथ जाम जैसी समस्याओं में भी कमी आएगी। उन्होंने इसे बेहतर और अनुकरणीय पहल बताया। सिंहस्थ के लिए इतना बजट है प्रस्तावित बता दें कि, आगामी सिंहस्थ के लिए, ₹3,060 करोड़ के विकास कार्यों का प्रस्ताव किया गया है। कंठल चौराहे से सती गेट तक सड़क चौड़ीकरण का काम पहले ही शुरू हो चुका है। निर्माण कार्य की समय सीमा मुख्यमंत्री मोहन यादव ने निर्देश दिया कि सभी निर्माण कार्य 2027 तक, यानी सिंहस्थ आयोजन से 6 महीने पहले ही पूरे कर लिए जाएं, ताकि आखिरी समय में कोई समस्या न हो। 90 प्रवेश द्वारों से जुड़ेगा घाट क्षेत्र शिप्रा नदी के बाएं तट पर निर्मित हो रहे 14.5 किमी लंबे नवीन घाटों पर श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन हेतु 65 प्रवेश-निर्गम मार्ग चिन्हित किए गए हैं। कुल 90 प्रवेश द्वारों को एप्रोच मार्गों और पार्किंग से जोड़ा जाएगा।