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दिल्ली में बस्तर विकास मॉडल पर मंथन : केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अहम मुलाकात

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री  अमित शाह से मुलाकात कर बस्तर में तेजी से बदल रहे हालात और विकास कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। इस दौरान उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा उपस्थित थे। बैठक में विशेष रूप से बस्तर में चल रहे ‘मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान’ पर चर्चा हुई।मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने केंद्रीय गृहमंत्री  अमित शाह को बताया कि जिन इलाकों में कभी एम्बुलेंस पहुंचना भी मुश्किल माना जाता था, वहां अब डॉक्टर, दवाइयां और स्वास्थ्य टीमें नियमित रूप से पहुंच रही हैं। दूरस्थ गांवों में पैदल जाकर लोगों की जांच की जा रही है और गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान कर निःशुल्क इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। मात्र एक महीने में 21.86 लाख से ज्यादा लोगों की स्वास्थ्य जांच हो चुकी है और उनके डिजिटल स्वास्थ्य प्रोफाइल तैयार कर लिए गए हैं। हजारों मरीजों को समय पर उपचार और उच्च अस्पतालों में रेफर किया गया है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि बस्तर में अब पुराने सुरक्षा शिविर केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं रह गए हैं। इन्हें धीरे-धीरे “जन सुविधा केंद्र” के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां गांव के लोगों को स्वास्थ्य, शिक्षा, बैंकिंग और सरकारी योजनाओं से जुड़ी जरूरी सुविधाएं एक ही स्थान पर मिल रही हैं। इन केंद्रों के जरिए दूरस्थ  क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को पहली बार कई बुनियादी सेवाएं आसानी से उपलब्ध हो रही हैं। ग्रामीण अब इलाज, बैंक खाते, दस्तावेज और सरकारी योजनाओं की जानकारी के लिए दूर-दूर तक भटकने को मजबूर नहीं हैं। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान की शुरुआत 13 अप्रैल 2026 से सुकमा से हुई है। इस अभियान में 36 लाख लोगों को लक्षित किया गया है। इसके अलावा बस्तर मुन्ने ( अग्रणी बस्तर) अभियान के जरिए 31 महत्वपूर्ण योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का काम तेजी से चल रहा है। जगदलपुर में नया सुपर स्पेशलिटी अस्पताल शुरू हो गया है, जहां अब बस्तर के लोगों को महंगे इलाज के लिए रायपुर या बिलासपुर नहीं जाना पड़ेगा। डायल-112 की नेक्स्ट जेन सेवा का विस्तार और पुराने सुरक्षा शिविरों को “जन सुविधा केंद्र” में बदलने की योजना भी बस्तर के स्थायी विकास की दिशा में अहम कदम हैं।  मुख्यमंत्री ने कहा कि जो इलाके कभी नक्सल प्रभाव के कारण मुख्यधारा से कटे हुए थे, वहां आज सरकारी योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंच रहा है। हाल ही में सुकमा के एक अत्यंत दुर्गम गांव से गंभीर मरीज को सैकड़ों किलोमीटर दूर अस्पताल पहुंचाकर उपचार दिलाना इस बदलाव का बड़ा उदाहरण बना है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने केंद्रीय गृहमंत्री  अमित शाह को बस्तर के लिए तैयार विकास रोडमैप की जानकारी दी। इसमें सड़क, शिक्षा, रोजगार, कौशल विकास और निवेश को बढ़ावा देने पर विशेष फोकस रखा गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री  अमित शाह के मार्गदर्शन से बस्तर में तेजी से सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। केंद्रीय गृहमंत्री  अमित शाह ने बस्तर में हो रहे विकास कार्यों और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की सराहना की। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर यह सुनिश्चित कर रही है कि विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उल्लेखनीय है कि केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह का 18 और 19 मई को बस्तर प्रवास  संभावित है।

सर्राफा बाजार में आग! इंदौर में सोने-चांदी की कीमतों में बड़ी छलांग

इंदौर   घरेलू बुलियन बाजार में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, भारतीय तो रुपए में लगातार कमजोरी और आयात ड्यूटी में भारी बढ़ोतरी के चलते सोने-चांदी की कीमतों में जोरदार उछाल आया है। इंदौर बाजार में सोने की कीमतों में करीब 6 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई, जबकि चांदी ने लगभग 6.5 प्रतिशत की बढ़त के साथ बेहतर प्रदर्शन किया। बाजार में आरटीजीएस पर सोना 8000 रुपए महंगा होकर 1,59,000 ने रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। वहीं चांदी 9000 रुपए उछलकर न 2,78,000 रुपए प्रति किलो रही। अंतरराष्ट्रीय बाजार कॉमेक्स पर सोना 4701.20 डॉलर प्रति औंस और चांदी 87.04 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंच गई। उतार-चढ़ाव रहने की संभावना विशेषज्ञों के अनुसार कच्चे तेल की कीमतों का 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर जाना, अमरीका-ईरान संघर्ष को लेकर बढ़ती अनिश्चितता और वैश्विक मुद्रास्फीति (महंगाई) की चिंताओं ने कीमती धातुओं में सुरक्षित निवेश (सेफ हेवन) की मांग बढ़ा दी है। बाजार के कारोबारी हाल ही में आयात शुल्क में किए गए बदलावों असर का भी आकलन कर रहे है, जिससे सोने की कीमतों को और समर्थन मिल सकता है।  टैक्स बढ़ने से तस्करी को मिल सकता बढ़ावा वैश्विक स्तर पर बनी अनिश्चितताओं के कारण आने वाले कारोबारी सत्रों में बुलियन बाजार में उतार-चढ़ाव (वोलाटिलिटी) अधिक रहने की संभावना जताई जा रही है। केंद्र सरकार ने सोना और चांदी के आयात पर लगने वाली ड्यूटी 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दी है। सरकार का उद्देश्य विदेशी खरीद कम करना और देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ रहे दबाव को घटाना बताया जा रहा है। अमेरिका-ईरान तनाव के बीच सरकार के इस फैसले को अहम माना जा रहा है। हालांकि, सराफा कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि टैक्स बढ़ने से तस्करी को बढ़ावा मिल सकता है। उनका इस संबंध में तर्क है कि पहले जब आयात शुल्क कम किया गया था, तब सोने की स्मगलिंग में कमी आई थी। भारतीय ज्वैलरी के निर्यात को बढ़ावा देने की मांग मध्यप्रदेश सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष अविनाश शास्त्री ने कहा कि आयात ड्यूटी बढ़ोतरी से सोने की तस्करी को ड्यूटी में भारी बढ़ावा मिल सकता है। 15 प्रतिशत आयात शुल्क और 3 प्रतिशत जीएसटी मिलाकर सोने पर कुल 18 प्रतिशत का सरकार ने सोने की खरीद कम अतिरिक्त भार पड़ रहा है। करने की अपील भी की है। सरकार को भारतीय कारीगरों और ज्वैलरी उद्योग को बढ़ावा देना चाहिए, ताकि बेहतर ज्वैलरी का निर्यात बढ़ सके।  

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, मध्यप्रदेश में बिना TET योग्यता के शिक्षक नियुक्ति पर रोक

भोपाल   मध्यप्रदेश के करीब 1.5 लाख शिक्षकों को देश की सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) के मामले पर सुनवाई करते हुए एक स्पष्ट निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि- पात्रता परीक्षा के नियमों में जो भी ढील दी जानी थी, वह पहले ही दी जा चुकी है, ऐसे में अब बिना परीक्षा पास किए कोई भी शिक्षक नहीं बन सकता है। बता दें कि साल 1998 से 2009 के बीच नियुक्त किए गए शिक्षकों को पात्रता परीक्षा से छूट देने की मांग करते हुए याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई थीं। 'बिना परीक्षा पास किए कोई टीचर नहीं बन सकता' बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में मध्यप्रदेश में शिक्षकों की पात्रता परीक्षा में छूट दिए जाने की मांग को लेकर दायर की गई पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई हुई। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि पात्रता परीक्षा के नियमों में जो भी ढील दी जानी थी, वह पहले दी जा चुकी है। अब इसमें कोई छूट की गुंजाइश नहीं है और शिक्षक बनने के लिए टीईटी पास करना होगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2017 में जब नियम लागू हुए थे, उसके बाद 5 साल की रियायत दी गई थी, जो अब समाप्त हो चुकी है। हालांकि इस मामले में अभी कोर्ट का अंतिम फैसला आना बाकी है। सुप्रीम कोर्ट का पुराना आदेश सुप्रीम कोर्ट ने 1998-2009 के बीच नियुक्त शिक्षकों के TET एक्जाम को लेकर 1 सितंबर 2025 को कहा था कि 1998 से 2009 के बीच नियुक्त शिक्षक जो मेरिट के आधार पर भर्ती हुए थे उनके लिए भी TET अनिवार्य है। इसके बाद मध्य प्रदेश सरकार और विभिन्न शिक्षक संगठनों ने पुनर्विचार याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर कर मांग की थी कि पुराने शिक्षकों को उनके अनुभव के आधार पर छूट दी जाए। पूर्व में कोर्ट ने चेतावनी दी थी कि जो शिक्षक इस परीक्षा को पास करने में विफल रहेंगे, उनकी सेवा समाप्त की जा सकती है। क्या है TET परीक्षा ? शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) एक अनिवार्य योग्यता है जिसे NCTE ने 2010 में लागू किया था। यह सुनिश्चित करता है कि कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले शिक्षकों में न्यूनतम शैक्षणिक स्तर और कौशल मौजूद है। मध्य प्रदेश में वर्तमान में स्थिति यह है कि अगर कोर्ट राहत नहीं देता है, तो करीब 1.5 लाख अनुभवी शिक्षकों को फिर से छात्र बनकर परीक्षा देनी होगी। TET परीक्षा में दो पेपर होते हैं जिनमें से एक में पहली से पांचवी और दूसरे में पांचवी से आठवीं तक के लिए परीक्षा होती है। जातीय और श्रेणीवार विवरण की मांग सुनवाई के दौरान न्यायालय ने मध्य प्रदेश सरकार से शिक्षकों का विस्तृत डेटा मांगा है। अधिवक्ता पृथ्वीराज सिंह के अनुसार, कोर्ट ने निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई से पूर्व शिक्षकों की एक श्रेणीवार (Category-wise) सूची प्रस्तुत की जाए। इसमें सामान्य, ओबीसी, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के शिक्षकों की सटीक संख्या स्पष्ट होनी चाहिए। बता दें कि मध्य प्रदेश में लगभग 1.50 लाख शिक्षक ऐसे हैं जिन्होंने अब तक टीईटी पास नहीं की है, उनके भविष्य के लिए यह फैसला निर्णायक साबित होगा। सुप्रीम कोर्ट के पहले का क्या था आदेश?-सुप्रीम कोर्ट ने 1998-2009 के बीच नियुक्त शिक्षकों के TET एक्जाम को लेकर 1 सितंबर 2025 को कहा था कि 1998 से 2009 के बीच नियुक्त शिक्षक जो मेरिट के आधार पर भर्ती हुए थे उनके लिए भी TET अनिवार्य है। इसके बाद मध्य प्रदेश सरकार और विभिन्न शिक्षक संगठनों ने पुनर्विचार याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर कर मांग की थी कि पुराने शिक्षकों को उनके अनुभव के आधार पर छूट दी जाए। पूर्व में कोर्ट ने चेतावनी दी थी कि जो शिक्षक इस परीक्षा को पास करने में विफल रहेंगे, उनकी सेवा समाप्त की जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद मध्यप्रदेश के 1.50 लाख शिक्षकों की नौकरी पर संकट आ गया था। गौरतलब है कि TET परीक्षा में दो पेपर होते हैं जिनमें से एक में पहली से पांचवी और दूसरे में पांचवी से आठवीं तक के लिए परीक्षा होती है।  

इंडियन शिप पर हमले से बढ़ा तनाव, भारत बोला- ऐसी हरकत बिल्कुल बर्दाश्त नहीं

बेंगलुरु  ओमान तट के पास एक भारतीय ध्वज वाले जहाज पर हुए मिसाइल हमले को लेकर भारत ने कड़ी नाराजगी जताई है. विदेश मंत्रालय ने इस घटना को अस्वीकार्य बताते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और सिविलियन नाविकों को निशाना बनाना किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जा सकता. यह हमला ऐसे समय हुआ है जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और आसपास के अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ा हुआ है. अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम भले ही फिलहाल लागू हो, लेकिन दोनों देशों के बीच समझौते को लेकर स्थिति अभी भी बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है।  विदेश मंत्रालय ने क्या कहा? विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने गुरुवार को जारी बयान में कहा कि ओमान तट के पास भारतीय ध्वज वाले जहाज पर हुआ हमला अस्वीकार्य है. हम इस बात की निंदा करते हैं कि लगातार कमर्शियल शिपिंग और नागरिक नाविकों को निशाना बनाया जा रहा है. मंत्रालय ने यह भी साफ किया कि जहाज पर मौजूद सभी भारतीय चालक दल के सदस्य सुरक्षित हैं. भारत ने बचाव अभियान चलाने के लिए ओमान प्रशासन का धन्यवाद भी किया. बयान में कहा गया कि भारत दोहराता है कि कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाना, निर्दोष नागरिक क्रू मेंबर्स की जान खतरे में डालना और समुद्री व्यापार व नेविगेशन की स्वतंत्रता में बाधा डालने जैसी घटनाओं से बचा जाना चाहिए. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में इससे पहले भी भारतीय हजार पर हमले हुए हैं।  किसने किया हमला? अभी साफ नहीं हालांकि भारत सरकार ने अपने बयान में यह स्पष्ट नहीं किया कि जहाज पर हमला किसने किया. लेकिन यह घटना ऐसे समय हुई है जब होर्मुज स्ट्रेट के आसपास हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं. पश्चिम एशिया में जारी तनाव, ईरान-अमेरिका टकराव और समुद्री मार्गों पर बढ़ते खतरे के कारण इस इलाके में वैश्विक चिंता लगातार बढ़ रही है।  क्यों अहम है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज? स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक माना जाता है. दुनिया के बड़े हिस्से का तेल और गैस सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है. भारत समेत कई एशियाई देशों की ऊर्जा जरूरतें इस समुद्री मार्ग पर काफी हद तक निर्भर हैं. ऐसे में यहां किसी भी तरह का हमला या अस्थिरता सीधे वैश्विक व्यापार और तेल बाजार को प्रभावित कर सकती है. जानकारों का कहना है कि हाल के महीनों में इस क्षेत्र में कमर्शियल जहाजों पर खतरा तेजी से बढ़ा है. यही वजह है कि भारत ने इस हमले को केवल एक सुरक्षा घटना नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया है।  भारत की बढ़ी चिंता भारत लंबे समय से समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा और फ्रीडम ऑफ नेविगेशन की वकालत करता रहा है. भारतीय जहाज पर हुए इस हमले के बाद यह साफ हो गया है कि पश्चिम एशिया का तनाव अब सीधे भारत के रणनीतिक और आर्थिक हितों को भी प्रभावित करने लगा है. हालांकि सभी भारतीय नाविक सुरक्षित बताए गए हैं, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि अगर होर्मुज क्षेत्र में तनाव और बढ़ा, तो उसका असर वैश्विक सप्लाई चेन और भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर कितना गंभीर हो सकता है।   

भिंड मामले के बाद KP यादव सतर्क, बड़ा काफिला कैंसिल; सादगी से गुना जाने का ऐलान

भोपाल/गुना  मध्य प्रदेश भाजपा में इन दिनों शक्ति प्रदर्शन और बड़े वाहन काफिलों को लेकर संगठन का रुख बेहद सख्त नजर आ रहा है। इसी सख्ती का असर अब गुना के पूर्व सांसद केपी यादव पर भी दिखाई दिया है। भोपाल में 500 से अधिक गाड़ियों के काफिले के साथ शक्ति प्रदर्शन करने के बाद अब केपी यादव ने अपना प्रस्तावित रोड शो कैंसिल कर दिया है। दरअसल, राज्य खाद्य आपूर्ति निगम के अध्यक्ष पद का कार्यभार ग्रहण करने भोपाल पहुंचे केपी यादव का भव्य स्वागत हुआ था। राजधानी की सड़कों पर करीब 500 वाहनों का लंबा काफिला, जगह-जगह स्वागत मंच और समर्थकों की भारी भीड़ ने इसे एक बड़े राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन में बदल दिया था। इस पूरे घटनाक्रम ने भाजपा की अंदरूनी राजनीति में भी चर्चाओं को तेज कर दिया था। लेकिन अब पार्टी के सख्त रुख के बाद केपी यादव ने खुद कदम पीछे खींच लिए हैं। उन्होंने साफ कहा है कि वे गुना में काफिले के साथ नहीं बल्कि एक वाहन से जाएंगे। साथ ही कार्यकर्ताओं से भी अपील की है कि सीमित संख्या में ही उनसे मिलने पहुंचें। सूत्रों की मानें तो भाजपा संगठन भिंड में हुई कार्रवाई के बाद किसी भी तरह के शक्ति प्रदर्शन को लेकर बेहद गंभीर है। दरअसल, भिंड में 100 से अधिक गाड़ियों के काफिले के साथ निकाली गई रैली के मामले में भाजपा ने किसान मोर्चा जिलाध्यक्ष सज्जन सिंह यादव की नियुक्ति तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दी थी। प्रदेश नेतृत्व द्वारा जारी पत्र में कहा गया था कि इस तरह के बड़े काफिले प्रधानमंत्री Narendra Modi की “ईंधन बचत और सादगीपूर्ण जीवनशैली” की अपील के विपरीत हैं। संगठन ने इसे अनुशासनहीनता मानते हुए सख्त कार्रवाई की थी। इतना ही नहीं, काफिले के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात बाधित होने और आम लोगों को परेशानी होने का भी उल्लेख किया गया था। अब माना जा रहा है कि उसी कार्रवाई और संगठन के कड़े संदेश को देखते हुए केपी यादव ने समय रहते अपना रोड शो रद्द कर दिया। राजनीतिक गलियारों में इसे भाजपा के “नो पावर शो” संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं सोशल मीडिया पर भी यह मामला तेजी से चर्चा में बना हुआ है।

प्राइवेट स्कूलों को पछाड़ सरकारी स्कूल आगे, CBSE 12वीं में भोपाल रीजन देशभर में 19वें स्थान पर

भोपाल  केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) 12वीं परीक्षा 2026 के नतीजों ने मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा की वास्तविक तस्वीर सामने ला दी है। जहां सरकारी मॉडल पर संचालित जवाहर नवोदय विद्यालय (JNV) और केंद्रीय विद्यालय (KV) ने शानदार परिणाम देकर बेहतर शैक्षणिक योग्यता दिखाई।  खास बात यह है कि इन निजी स्कूलों की फीस आमतौर पर JNV और KV की तुलना में कहीं अधिक होती है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि निजी स्कूलों के कमजोर प्रदर्शन का असर भोपाल रीजन की रैंकिंग पर भी पड़ा है। इसी कारण मध्य प्रदेश का भोपाल रीजन देश के 22 सीबीएसई रीजन में 19वें स्थान पर पहुंच गया। वहीं हर श्रेणी में छात्राओं ने छात्रों से बेहतर प्रदर्शन किया और भोपाल रीजन में लड़कियां करीब पांच प्रतिशत अंकों से आगे रहीं। नवोदय विद्यालय सबसे आगे सीबीएसई के आंकड़ों के मुताबिक, मध्य प्रदेश में सबसे बेहतर प्रदर्शन जवाहर नवोदय विद्यालयों का रहा। JNV का कुल पास प्रतिशत 98.16% दर्ज किया गया। लड़कों का परिणाम 97.81% और लड़कियों का 98.73% रहा। विशेषज्ञों के अनुसार, नवोदय विद्यालयों की रेजिडेंशियल व्यवस्था, अनुशासित माहौल और नियमित अकादमिक मॉनिटरिंग इसकी बड़ी वजह है। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने वाला यह मॉडल लगातार सफल साबित हो रहा है। केंद्रीय विद्यालयों ने भी कायम रखी बढ़त केंद्रीय विद्यालयों का प्रदर्शन भी मजबूत रहा। इनका कुल पास प्रतिशत 97.90% दर्ज किया गया। लड़कों का परिणाम 97.66% और लड़कियों का 98.11% रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रशिक्षित शिक्षक, राष्ट्रीय स्तर का पाठ्यक्रम और नियमित मूल्यांकन केंद्रीय विद्यालयों की सफलता का आधार हैं। यही वजह है कि इनके परिणाम लगातार राष्ट्रीय औसत से बेहतर बने रहते हैं। आदिवासी छात्रों के स्कूलों ने भी किया बेहतर प्रदर्शन एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल (EMRS) का कुल पास प्रतिशत 85.47% रहा। लड़कों का परिणाम 83.46% और लड़कियों का 86.89% दर्ज किया गया। सीमित संसाधनों और सामाजिक चुनौतियों के बावजूद यह प्रदर्शन सकारात्मक माना जा रहा है। यहां भी छात्राओं ने छात्रों से बेहतर परिणाम देकर बढ़ती शैक्षणिक जागरूकता का संकेत दिया। सरकारी स्कूलों के सामने संसाधनों की चुनौती सरकारी स्कूलों का कुल पास प्रतिशत 80.60% रहा। लड़कों का रिजल्ट 79.86% और लड़कियों का 80.88% दर्ज किया गया। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षकों की कमी और बुनियादी संसाधनों की चुनौतियों के बावजूद यह प्रदर्शन संतोषजनक है। हालांकि, इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल संसाधनों में सुधार से परिणाम बेहतर हो सकते हैं। सबसे ज्यादा छात्र, फिर भी सबसे कमजोर निजी स्कूल सबसे चिंताजनक तस्वीर निजी स्कूलों की रही। सीबीएसई से संबद्ध इंडिपेंडेंट स्कूलों में सबसे अधिक 61,419 छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया था और 61,242 छात्र परीक्षा में शामिल हुए। इसके बावजूद इन स्कूलों का कुल पास प्रतिशत केवल 76.85% रहा, जो सभी श्रेणियों में सबसे कम है। लड़कों का परिणाम 74.12% और लड़कियों का 80.02% दर्ज किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि व्यावसायिक दबाव, बोर्ड परीक्षा की अपर्याप्त तैयारी और छात्रों पर बढ़ता मानसिक तनाव निजी स्कूलों के कमजोर प्रदर्शन के कारण हो सकते हैं। इससे शिक्षा की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े हुए हैं। लड़कों का पास प्रतिशत 76.87, लड़कियों का 82.19 पूरे परिणाम में एक समान ट्रेंड देखने को मिला हर श्रेणी में छात्राओं ने छात्रों को पीछे छोड़ा। भोपाल रीजन में लड़कों का पास प्रतिशत 76.87% रहा, जबकि लड़कियों का परिणाम 82.19% दर्ज किया गया। विशेषज्ञों के मुताबिक, नियमित अध्ययन, परीक्षा के प्रति गंभीरता और करियर को लेकर बढ़ती जागरूकता छात्राओं की सफलता के प्रमुख कारण हैं। 12% से ज्यादा छात्र सभी विषयों में फेल भोपाल रीजन के नतीजों में एक गंभीर तथ्य भी सामने आया। कुल परीक्षार्थियों में 12.14% छात्र ऐसे रहे, जो सभी विषयों में असफल हो गए। शिक्षा विशेषज्ञ इसे केवल छात्रों की तैयारी का नहीं, बल्कि स्कूलों की अकादमिक निगरानी और सीखने की गुणवत्ता से जुड़ा मुद्दा मानते हैं। कोविड के बाद सीखने के स्तर में आई गिरावट, डिजिटल डिस्ट्रैक्शन और नियमित पढ़ाई में कमी को भी इसकी वजह माना जा रहा है। देश का दूसरा सबसे बड़ा सीबीएसई रीजन भोपाल रीजन देश के सबसे बड़े सीबीएसई रीजन में शामिल है। यहां सीबीएसई से संबद्ध 1291 स्कूल संचालित हैं। स्कूलों की संख्या के लिहाज से यह 1483 स्कूलों वाले लुधियाना रीजन के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा रीजन है। इतने बड़े स्तर पर परीक्षा संचालन और परिणाम प्रबंधन को बड़ी प्रशासनिक चुनौती माना जाता है।

अधिकारियों और निर्माण एजेंसी को जल्द से जल्द काम पूर्ण करने के दिए निर्देश

रायपुर उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री  अरुण साव ने आज रायपुर में  खम्हारडीह-कचना रेल्वे क्रॉसिंग पर निर्माणाधीन रेलवे ओवर-ब्रिज के अंतिम चरण के कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने मौके पर मौजूद लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों और निर्माण एजेंसी को ओवर-ब्रिज का काम जल्द से जल्द पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने ओवर-ब्रिज पर पैदल चलकर अधिकारियों से इसके तकनीकी मानकों की जानकारी ली। उन्होंने यहां लाइटिंग के लिए अच्छी गुणवत्ता के पोल्स और लाइट्स का उपयोग करने को कहा। लोक निर्माण विभाग के सचिव  मुकेश कुमार बंसल, प्रमुख अभियंता  वी.के. भतपहरी और सेतु संभाग के मुख्य अभियंता  एस.के. कोरी भी इस दौरान मौजूद थे। उप मुख्यमंत्री  साव ने कचना ओवर-ब्रिज के निरीक्षण के बाद कहा कि इसका 96 प्रतिशत काम पूर्ण कर लिया गया है। थोड़े से बचे कार्यों को जल्द से जल्द पूर्ण कर इसे यातायात के लिए खोल दिया जाएगा। इस ओवर-ब्रिज के चालू होने से रायपुर शहर और आसपास के गांवों के हजारों लोगों को ट्रैफिक-जॉम और रेलवे फाटक के बंद होने के कारण यातायात बाधित होने की समस्या से मुक्ति मिलेगी।  साव ने कहा कि राज्य शासन लगातार राजधानी के यातायात को सुदृढ़, व्यवस्थित और तेज करने में लगी हुई है। कचना का यह ओवर-ब्रिज भी इसमें काफी महत्वपूर्ण है, जो अब लगभग पूर्णता की ओर है। इस सड़क से आना-जाना करने वालों के लिए यह बहुप्रतीक्षित ओवर-ब्रिज जल्द ही खोल दिया जाएगा। 49 करोड़ की लागत से बन रहा ओवर-ब्रिज इस रूट के यातायात को करेगा व्यवस्थित और तेज लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने बताया कि रायपुर-वाल्टेयर रेलवे लाइन पर खम्हारडीह और कचना के बीच करीब 49 करोड़ रुपए की लागत से निर्माणाधीन इस रेलवे ओवर-ब्रिज का 96 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। पुल के मध्य के रेलवे वाले भाग के साथ ही दोनों छोरों पर पुल एवं पहुंच मार्ग का काम पूर्ण कर लिया गया है। अभी पेंटिंग एवं फिनिशिंग का कार्य प्रगति पर है। इनके पूर्ण होते ही नाली निर्माण और लाइटिंग का काम तत्परता से प्रारंभ किया जाएगा। इस ओवर-ब्रिज के शुरू हो जाने से इस रूट का यातायात व्यवस्थित और तेज होगा।

UP में सरकारी योजना पर सख्ती, बिजनेस शुरू नहीं करने वालों से होगी रकम की रिकवरी

 लखनऊ  सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) विभाग ने मुख्यमंत्री युवा उद्यमी अभियान योजना के तहत ऋण लेने वाले युवाओं का सत्यापन का कार्य शुरू किया है। विभाग ने इसके लिए मोबाइल एप्लीकेशन (एप) तैयार किया है। इस एप के जरिए योजना के तहत ऋण लेने वाले युवाओं का स्थलीय सत्यापन किया जा रहा है। सत्यापन की जिम्मेदारी एमएसएमई विभाग ने सीएम फेलो को दी है। सीएम फेलो अपने-अपने क्षेत्रों में ऋण लेने वाले युवा की जानकारी देंगे कि संबंधित युवा ने ऋण लेने के बाद काम शुरू किया या नहीं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश दिवस के अवसर पर 24 जनवरी 2025 को योजना का शुभारंभ किया था। योजना के तहत राज्य के युवाओं को बिना गारंटी व ब्याज के अपना उद्यम शुरू करने के लिए पांच लाख रुपये तक का ऋण प्रदान किया जा रहा है। ऋण लेने के बाद शुरू नहीं किया कारोबार अभी तक 1,69,271 युवाओं को 6955 करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया जा चुका है। एमएसएमई विभाग की जानकारी इस प्रकार के कई मामले आए हैं जिनमें युवाओं ने ऋण लेने के बाद कारोबार शुरू नहीं किया है। नतीजतन अब विभाग ने ऋण लेने वाले सभी युवाओं का सत्यापन शुरू कराया है। सत्यापन के कार्य में जुटे कर्मी युवाओं की उनके उद्यम के साथ फोटो और वीडियो के साथ गूगल के जरिए मोबाइल एप पर लोकेशन भी अपडेट कर रहे हैं। सत्यापन के समय इस बात की भी जानकारी एकत्र की जा रही है कि संबंधित युवा ने अपना कारोबार शुरू करने के बाद कितने लोगों को रोजगार दिया है। किस प्रकार का कारोबार शुरू किया है, ऋण लेते समय जिस उद्यम को स्थापित किए जाने की सहमति संबंधित युवा ने दी थी उसने वही उद्यम स्थापित किया है या नहीं। माह में कितनी कमाई हो रही है, जैसी जानकारियां भी एप पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। अगर किसी युवा ने ऋण ले लिया और कारोबार शुरू नहीं किया है तो उससे ऋण की राशि की वसूली की जाएगी।  

मध्यप्रदेश में हीट वेव का कहर: मंदसौर में ट्रांसफॉर्मर ठंडा रखने के लिए लगाए गए कूलर

भोपाल  देश के अधिकांश राज्यों में भीषण गर्मी का दौर चल रहा है। इसमें मध्य प्रदेश भी शामिल है। प्रदेश के कुछ इलाकों में पारा 45 पार तक जा रहा है। मालवा में दो दिन पहले जहां पारा 46 डिग्री से अधिक दर्ज किया गया था, वहीं अब बुंदेलखंड में सबसे अधिक पारा दर्ज किया गया है। बता दें कि लगभग पूरा प्रदेश गर्मी की चपेट में है और अधिकांश इलाकों में भीषण लू झुलसा रही है। मौसम विभाग के अनुसार यह दौरान मई से जून तक चलेगा। फिलहाल 4 दिन प्रदेश में पारा और चढ़ने व रात में भी गर्म हवाओं का दौर चलेगा। कूलर-एसी भी राहत नहीं दे पाएंगे। इंदौर, उज्जैन-धार में वॉर्म नाइट की चेतावनी है। इस दौरान गर्म हवाएं चलेंगी। झाबुआ, आलीराजपुर, बड़वानी, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर, हरदा, नर्मदापुरम, देवास, सीहोर, शाजापुर, आगर-मालवा और राजगढ़ में भी लू चलेगी। मंदसौर में तेज गर्मी और बढ़ते बिजली लोड के कारण ट्रांसफॉर्मरों पर दबाव बढ़ गया है। हालात ऐसे हैं कि बिजली सप्लाई सुचारू रखने के लिए बड़े ट्रांसफॉर्मरों को कूलर लगाकर ठंडा रखना पड़ रहा है। मध्य प्रदेश में 15 मई से 18 मई तक प्रदेश के कई जिलों में लू चलने की संभावना जताई गई है। सूरज की सीधी किरणों और पड़ोसी राज्यों से सीधी रेगिस्तानी गर्म हवाएं एमपी में आने के कारण यहां भीषण गर्मी का दौर चल रहा है। आगामी दिनों में तापमान और ऊपर जाने की संभावना है। आईएमडी बुलेटिन के अनुसार अगले 4 दिन प्रदेश में मौसम इस तरह रहेगा। प्रदेश में कहां कितना तापमान     खजुराहो – 45.4°C     रतलाम – 45.2°C     धार – 45.0°C     नौगांव – 44.9°C     विदिशा – 44.8°C सबसे कम न्यूनतम तापमान     पचमढ़ी – 19.4°C     अमरकंटक – 20.7°C     मंडला – 23.2°C 15 मई को भोपाल, धार, रतलाम, उज्जैन, देवास में तीव्र लू का अलर्ट है। इसी प्रकार विदिशा, राजगढ़, रीवा, सतना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, नर्मदापुरम, हरदा, बुरहानपुर खंडवा, शिपुरी, अशोकनगर, गुना, नीमच, मंदसौर, आगर, शाजापुर, झाबुआ, श्योपुरकला, सिंगरौली, सीधी, रीवा, गवालियर, दतिया, भिंड, मुरैना सहित प्रदेश के अधिकांश जिलों में हीट वेव का यलो अलर्ट है।     16 से 18 मई तक कैसे रहेंगे हाल ग्वालियर-चंबल, बुंदेलखंड और मालवा क्षेत्र में तेज गर्म हवाओं का असर कई जिलों में तापमान 44 से 46 डिग्री तक पहुंचने की संभावना। इसमें सबसे ज्यादा गर्म क्षेत्रों में धार, इंदौर, रतलाम, उज्जैन सहित आसपास के इलाके में भीषण लू का अलर्ट रहेगा। वहीं पूरे प्रदेश में गर्म हवाएं और हीटवेव का असर दिखेगा।     बारिश की संभावना नहीं, तापमान बढ़ेगा मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक पश्चिमी और उत्तरी हवाओं के प्रभाव से प्रदेश में शुष्क और गर्म मौसम बना हुआ है। फिलहाल बारिश की संभावना बेहद कम है, जबकि अगले कुछ दिनों तक तापमान में और बढ़ोतरी हो सकती है।     वार्म नाइट का इन जिलों में अलर्ट है आईएमडी बुलेटिन के अनुसार प्रदेश के धार, इंदौर, उज्जैन, रतलाम, देवास और गुना में रात में भी गर्म हवाओं का प्रकोप रहेगा। यहां वार्म नाइट का अलर्ट भी दिया गया है।

ट्रैफिक और ईंधन बचाने की नई पहल, सरकार ने लागू किया ऑनलाइन क्लास और वर्क फ्रॉम होम मॉडल

नई दिल्ली दिल्ली सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अपील को लागू करने का फैसला किया है. इसमें रेखा सरकार के आदेश के अनुसार, स्कूल-कॉलेज को ऑनलाइन जारी करने का आदेश दिया गया है. दरअसल, रेखा गुप्ता सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर पेट्रोल-डीजल की बेतहाशा खपत और ऊर्जा संकट से निपटने के लिए कड़े कदम उठाए हैं. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने ‘मेरा भारत, मेरा योगदान’ नाम के एक अभियान का घोषणा किया है. इस अभियान में कई बड़े और चौंकाने वाले प्रशासनिक बदलावों की घोषणा की गई है. इन फैसलों का सीधा असर दिल्ली की सरकारी कार्यप्रणाली, यातायात और आम जनता के रूटीन पर पड़ेगा। सरकारी और प्राइवेट दफ्तरों की टाइमिंग में बदलाव और साथ ही हफ्ते में कुछ दिन वर्क फ्रॉम होम करने की सलाह दी गई है. उन्होंने कॉलेज स्कूलों को ऑनलाइन मोड में चलाने की अपील की है. साथ ही कोर्ट से भी ऑनलाइन सुनवाई के लिए निवेदन किया है. सरकार का मुख्य फोकस ईंधन की बचत और बिजली की खपत को कम करने पर है।  आइए जानते हैं सरकार द्वारा लिए गए अहम फैसले क्या हैं: दिल्ली की सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव कम करने के लिए सरकार ने दफ्तरों के समय में बड़ा बदलाव किया है- नया समय: दिल्ली सरकार के दफ्तर अब सुबह 10:30 बजे से शाम 7:00 बजे तक खुलेंगे. वहीं, MCD के दफ्तरों का समय सुबह 7:30 बजे से शाम 5:00 बजे तक रहेगा. वर्क फ्रॉम होम: दिल्ली सरकार के सभी कर्मचारियों के लिए हफ्ते में 2 दिन ‘वर्क फ्रॉम होम’ (WFH) अनिवार्य कर दिया गया है. प्राइवेट कंपनियों को भी ‘वर्क फ्रॉम होम’ लागू करने के लिए सरकार की तरफ से समान एडवाइजरी (Advisory) जारी की जाएगी।  ऑनलाइन ही होगी मीटिंग: सरकार की 50 प्रतिशत आधिकारिक बैठकें अब सिर्फ ऑनलाइन माध्यम से ही आयोजित की जाएंगी।  ‘मेट्रो मंडे’ और पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा: पेट्रोल-डीजल की खपत घटाने के लिए मुख्यमंत्री ने एक नई पहल शुरू की है. सप्ताह के पहले दिन यानी सोमवार को ‘मेट्रो मंडे’ (Metro Monday) घोषित किया गया है, जहां लोगों से मेट्रो का इस्तेमाल करने की अपील की गई है. जो सरकारी कर्मचारी ऑफिस आने-जाने के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करेंगे, उनके ‘ट्रांसपोर्ट अलाउंस’ में 10% की बढ़ोतरी की जाएगी. सरकारी कॉलोनियों में कनेक्टिविटी बेहतर करने के लिए 29 कॉलोनियों में 58 फीडर बसें (Feeder Buses) चलाई जाएंगी।  नो व्हीकल डे: जनता से अपील की गई है कि वे हफ्ते में कम से कम एक दिन ‘नो व्हीकल डे’ मनाएं और माल ढुलाई के लिए ट्रकों की जगह ट्रेनों का इस्तेमाल करें।  सरकारी खर्चे और VVIP कल्चर पर लगाम विदेश यात्राओं पर बैन: मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सख्त निर्देश दिया है कि अगले एक साल तक दिल्ली सरकार का कोई भी मंत्री या अधिकारी किसी भी आधिकारिक (Official) विदेश यात्रा पर नहीं जाएगा. आम जनता से भी विदेशी यात्राएं कम करने की अपील की गई है।      अगले 3 महीनों तक सरकार द्वारा आयोजित होने वाले सभी बड़े इवेंट्स कैंसिल कर दिए गए हैं.     अधिकारियों के पेट्रोल कोटे (लिमिट) में 20 प्रतिशत और डोमेस्टिक अलाउंस (घरेलू भत्ते) में भी 20% की कटौती की गई है.     अगले 6 महीनों तक सरकार के किसी भी विभाग में कोई नया वाहन नहीं खरीदा जाएगा. वाहनों का इस्तेमाल ‘न्यूनतम जरूरत’ के हिसाब से ही होगा. ऊर्जा बचत और EV पॉलिसी बिजली की खपत को नियंत्रित करने के लिए सरकारी दफ्तरों में AC का तापमान 24 से 26 डिग्री के बीच रखना अनिवार्य कर दिया गया है. बिजली की बर्बादी रोकने के लिए हर कॉरिडोर में एक ‘मास्टर स्विच’ लगाया जाएगा. इसके अलावा, सीएम ने जानकारी दी है कि अदालतों से भी निवेदन किया गया है कि वे ज्यादा से ज्यादा ‘ऑनलाइन हियरिंग’ (Online Hearing) करें।