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नोएडा में नवविवाहिता की मौत से सनसनी, छत से कूदने के मामले में पति और ससुर पर कार्रवाई

 ग्रेटर नोएडा  ग्रेटर नोएडा के जलपुरा गांव में एक विवाहिता की मौत ने सभी को झकझोर कर रख दिया है. करीब 14 महीने पहले 1 करोड़ से भी ज्यादा के खर्च से हुई धूमधाम वाली शादी अब एक दर्दनाक अंत की कहानी बन गई. आरोप है कि दहेज की मांग और लगातार प्रताड़ना से परेशान होकर विवाहिता ने छत से कूदकर जान दे दी. घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया, जबकि पुलिस ने पति और ससुर को गिरफ्तार कर लिया है।  घटना थाना ईकोटेक-3 के जलालपुर गांव की है. मृतका की पहचान दीपिका के रूप में हुई है. वह मूल रूप से कुड़ी खेड़ा गांव की रहने वाली थी. उसकी शादी करीब डेढ़ साल पहले जलपुरा निवासी ऋतिक के साथ हुई थी. परिवार का कहना है कि शादी में करीब एक करोड़ रुपये खर्च किए गए थे और हैसियत से बढ़कर दान-दहेज दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद ससुराल पक्ष की मांगें खत्म नहीं हुईं।  शादी के कुछ महीनों बाद बदल गया माहौल परिजनों के मुताबिक शुरुआती कुछ महीने सब सामान्य रहा, लेकिन धीरे-धीरे दीपिका पर दबाव बढ़ने लगा. परिवार का आरोप है कि उसे दहेज के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान किया जाता था. कई बार मारपीट भी हुई. दीपिका के मायके वालों का कहना है कि बेटी अक्सर परेशान रहती थी, लेकिन समाज और रिश्तों को बचाने की कोशिश में वह सब सहती रही. परिजनों के अनुसार, कई बार समझौते की कोशिश भी हुई, मगर हालात नहीं बदले. फिर एक रात जो खबर आई, उसने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया. सूचना मिली कि दीपिका ने मकान की छत से नीचे कूदकर जान दे दी।  रात में मची अफरा-तफरी घटना की जानकारी मिलते ही थाना ईकोटेक-3 पुलिस मौके पर पहुंची. पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. देर रात तक मौके पर लोगों की भीड़ जमा रही. स्थानीय लोगों के मुताबिक घटना के बाद घर के बाहर भारी तनाव का माहौल था. परिवार वालों का रो-रोकर बुरा हाल था. पड़ोसियों के बीच भी इस घटना को लेकर चर्चा बनी रही. मृतका के पिता संजय ने पुलिस को दी गई तहरीर में आरोप लगाया है कि उनकी बेटी को लगातार दहेज के लिए प्रताड़ित किया जा रहा था. उनका कहना है कि शादी में सबकुछ देने के बावजूद ससुराल पक्ष की मांगें खत्म नहीं हुई थीं।  पुलिस ने तुरंत की कार्रवाई सेंट्रल नोएडा के डीसीपी शैलेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि शनिवार रात सूचना मिली थी कि जलपुरा में एक महिला की छत से गिरने के बाद मौत हो गई है. सूचना पर तत्काल पुलिस टीम मौके पर पहुंची और आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू की गई. पुलिस के मुताबिक मृतका के परिजनों की शिकायत के आधार पर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है. मामले में पति ऋतिक और ससुर मनोज को गिरफ्तार कर लिया गया है. अधिकारियों का कहना है कि मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है. पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है और अन्य साक्ष्य भी जुटाए जा रहे हैं।  14 महीने पहले खुशियों से भरा था घर परिवार के लोगों के मुताबिक शादी बहुत ही धूमधाम से हुई थी. रिश्तेदारों और गांव के लोगों की मौजूदगी में समारोह आयोजित किया गया था. उस वक्त किसी ने नहीं सोचा था कि इतनी जल्दी यह रिश्ता दर्दनाक मोड़ ले लेगा. दीपिका की तस्वीरें और शादी के वीडियो अब परिवार के लिए सिर्फ यादें बनकर रह गए हैं. मायके वालों का कहना है कि बेटी ने नए जीवन के कई सपने देखे थे, लेकिन लगातार बढ़ते दबाव ने उसे अंदर से तोड़ दिया. घटना के बाद गांव में भी तरह-तरह की चर्चाएं हैं. लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर शादी के नाम पर बढ़ती मांगें कब रुकेंगी।  पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार जांच अधिकारी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि घटना से पहले घर में क्या हुआ था. मोबाइल कॉल डिटेल, बातचीत और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच की जा सकती है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. जलपुरा और आसपास के क्षेत्रों में यह घटना पूरे दिन चर्चा का विषय बनी रही. लोग अलग-अलग तरह की बातें करते नजर आए. कई लोगों का कहना था कि अगर समय रहते शिकायतों को गंभीरता से लिया जाता तो शायद हालात यहां तक नहीं पहुंचते. वहीं, कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि शादी के बाद बढ़ते घरेलू विवाद अब तेजी से गंभीर घटनाओं में बदल रहे हैं। 

भारत में D2D सैटेलाइट टेक्नोलॉजी पर बड़ा कदम, लेकिन ऐपल-गूगल ने उठाए नियमों और बैटरी खपत पर सवाल

भारत डायरेक्ट-टू-डिवाइस (D2D) सैटेलाइट कनेक्टिविटी लाने पर काम कर रहा है। बता दें कि यह एक ऐसी टेक्नोलॉजी है, जिसके जरिए स्मार्टफोन उन इलाकों में सीधा सैटेलाइट से जुड़ सकेंगे, जहां मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं होते हैं। लेकिन जैसे-जैसे सरकार इस टेक्नोलॉजी की ओर बढ़ रही है ऐपल और गूगल ने इस बारे में सरकार से और क्लियरिटी यानी स्पष्टता मांगी है। कंपनियों ने इसके लिए कई चिताएं जताई हैं। कंपनियों के अनुसार, इस तकनीकी के लिए डिवाइस को अधिक बैटरी या पावर की जरूरत होती है। रिपोर्ट की मानें तो कंपनियों का मानना है कि भारत के नियमों के तहत ये सेवाएं कैसे काम करेंगी। आइये, पूरी खबर डिटेल में जानते हैं। क्या होंगे नियम? इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, कुछ महीने पहले सैटेलाइट कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी पर चर्चा हुई थी। इस दौरान ऐपल ने दूरसंचार विभाग (DoT) के साथ अपने विचार शेयर किए थे। गूगल और कई अन्य शेयरहोल्डर्स ने भी नियामक को अपनी प्रतिक्रिया दी है। कंपनियां जानना चाहती हैं कि भारत में सैटेलाइट के जरिए मैसेज भेजने और मुसीबत के समय इमरजेंसी कॉल या मैसेज करने वाली तकनीक किस तरह काम करेगी और इसके नियम क्या होंगे। क्या है D2D? यह टेक्नोलॉजी भारत में उन जगहों के लिए बहुत उपयोगी है, जहां पहाड़ी राज्यों, घने जंगलों और सीमावर्ती जिलों में मोबाइल कवरेज अभी भी पूरी तरह से उपलब्ध नहीं है। कई दूरदराज के इलाकों में, टेलीकॉम टावर लगाना या तो मुश्किल है या फिर आर्थिक रूप से फायदेमंद नहीं है। कंपनियों द्वारा उठाई गई तकनीकी सवाल रिपोर्ट की मानें तो टेक कंपनियों ने कई तकनीकी और इंजीनियरिंग चुनौतियों के बारे में बताया है। इन्हें सैटेलाइट कनेक्टिविटी को आम स्मार्टफोन पर सैटेलाइट कनेक्टिविटी वाले से पहले हल करना अभी भी बाकी है। सबसे बड़ी चिंताओं में से एक बैटरी का जल्दी खत्म होना है। ट्रेडिशनल मोबाइल नेटवर्क की तुलना में, लो-अर्थ-ऑर्बिट सैटेलाइट से सीधे जुड़ने के लिए काफी ज्यादा बिजली और पावर की जरूरत होती है। दूसरी परेशानी एंटीना की सीमाएं हैं। स्मार्टफोन को पतला और कॉम्पैक्ट डिजाइन के साथ लाया जाता है। इस कारण इनमें स्थिर सैटेलाइट कम्युनिकेशन बनाए रखने के लिए जरूरी हार्डवेयर फिट करने के लिए जगह कम होती है। अन्य चिंताएं इसके अलावा कंपनियों ने देश की कुछ वास्तविक स्थितियां जैसे मुश्किल इलाके और पर्यावरणीय कारकों को भी बाधा बताया है। ऐसे इलाकों में भरोसेमंद कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने में आने वाली कठिनाइयों की ओर भी ध्यान देने को कहा है। इसके अलावा, मौजूदा 4G और 5G मोबाइल नेटवर्क के साथ सैटेलाइट कम्युनिकेशन को इस तरह से जोड़ना कि यूजर्स के अनुभव पर कोई बुरा असर ना पड़े, अभी भी एक और बड़ी चुनौती बनी हुई है।​ TRAI ने भी मांगी राय टेलीकम्युनिकेशन विभाग अभी इंडस्ट्री के लोगों के साथ इनफॉर्मल बातचीत कर रहा है, ताकि आधाकारिक नियम बनाने से पहले D2D सैटेलाइट टेक्नोलॉजी की संभावनाओं और सीमाओं को बेहतर ढंग से समझा जा सके। इसके साथ ही, भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने भी एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया है, जिसमें यह राय मांगी गई है कि क्या ऐसी सेवाओं के लिए डेडिकेटेड सैटेलाइट स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल किया जाना चाहिए या मौजूदा मोबाइल नेटवर्क एयरवेव्स का। इन चर्चाओं से समझ आ रहा कि जहां एक तरफ भारत सरकार अमेरिका की तरह डॉयरेक्ट टू डिवाइस टेक्नोलॉजी की ओर बढ़ रही। वहीं, टेक कंपनियों को अभी कई चिताएं हैं।  

रेत माफियाओं पर प्रशासन का शिकंजा, भारी मात्रा में अवैध रेत जप्त

अवैध रेत भंडारण और परिवहन पर बड़ी कार्रवाई, 1740 घनमीटर रेत जप्त खनिज विभाग के लगातार कार्रवाई से अवैध खनन और परिवहन पर लग रही लगाम प्रशासन की सक्रियता से अवैध गतिविधियों में संलिप्त लोगों को मिल रहा कड़ा संदेश रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कड़े निर्देशों के तहत प्रदेश में रेत के अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण के खिलाफ खनिज विभाग द्वारा लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। राज्य शासन की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत विभागीय अमला दिन-रात सक्रिय रहकर अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित कर रहा है। इसके लिए रात्रिकालीन गश्त, सघन निगरानी, औचक निरीक्षण और छापेमार कार्रवाई के साथ-साथ ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीकों का भी उपयोग किया जा रहा है।         सचिव खनिज साधन विभाग तथा संचालक के निर्देशानुसार केंद्रीय खनि उड़नदस्ता एवं जिला स्तरीय संयुक्त टीम ने जिले के आरंग तहसील अंतर्गत ग्राम कागदेही में औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान समोदा-कागदेही मार्ग तथा आर्या पेट्रोल पंप के दक्षिण दिशा में फॉरेस्ट नर्सरी के पास बिना वैध अनुमति के गौण खनिज साधारण रेत का अवैध भंडारण पाया गया। जांच में छत्तीसगढ़ खनिज (खनन, परिवहन तथा भंडारण) नियम 2009 के उल्लंघन की पुष्टि होने पर खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम 1957 की धारा 21 के तहत कार्रवाई करते हुए लगभग 1740 घनमीटर रेत जप्त की गई।                  जप्त रेत को नगर पंचायत समोदा के पार्षद देवेंद्र कुमार साहू के सुपुर्द किया गया। वहीं सघन जांच के दौरान ग्राम समोदा के पास अवैध रेत परिवहन में संलग्न दो हाईवा वाहनों को भी जप्त कर आरंग थाना परिसर में खड़ा कराया गया।

अब सीमित मिलेगा तेल! चंडीगढ़ में बाइक को ₹500 और कार को ₹1500 तक पेट्रोल-डीजल

चंडीगढ़. शहर में पेट्रोल और डीजल की सप्लाई को लेकर एहतियात बरतते हुए कुछ पेट्रोल पंपों पर वाहनों में तेल भरवाने की सीमा तय कर दी गई है। नई व्यवस्था के तहत अब टू-व्हीलर में एक बार में अधिकतम 500 रुपये और फोर-व्हीलर में 1500 रुपये तक का ही पेट्रोल या डीजल दिया जा रहा है। हालांकि, प्रशासन की ओर से इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया है, लेकिन सेक्टर-17 स्थित पेट्रोल पंप पर इस संबंध में पोस्टर लगाए गए हैं। पंप कर्मियों के अनुसार पिछले कुछ दिनों से पेट्रोल की सप्लाई सामान्य से कम मिल रही है। ऐसे में यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक ईंधन पहुंच सके और किसी को परेशानी का सामना न करना पड़े। पंप पर रविवार से ही नई व्यवस्था लागू कर दी गई है और उसी हिसाब से ग्राहकों को पेट्रोल-डीजल दिया जा रहा है। मधुमक्खी पिछले सप्ताह ही पेट्रोल और डीजल के रेट भी बढ़े हैं। पेट्रोल पंप ने अब बोतल में भी पेट्रोल और डीजल देना मना कर दिया है।

मनी लॉन्ड्रिंग केस में मंत्री संजीव अरोड़ा न्यायिक हिरासत में, अदालत में भावुक हुए

  चंडीगढ़ पंजाब सरकार के उद्योग मंत्री संजीव अरोड़ा को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सोमवार को बड़ा झटका लगा. स्पेशल पीएमएलए कोर्ट ने उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. अब इस मामले में उनकी अगली पेशी 1 जून को होगी. प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दो दिन की रिमांड समाप्त होने के बाद संजीव अरोड़ा को कोर्ट में पेश किया था।  कोर्ट परिसर में पेशी के दौरान संजीव अरोड़ा भावुक नजर आए. जैसे ही उनकी मुलाकात परिवार के सदस्यों से हुई, वह उन्हें गले लगाकर फफक कर रो पड़े. गिरफ्तारी के बाद यह पहला मौका था जब उनके परिजन उनसे मिल पाए. कोर्ट परिसर में मौजूद लोगों ने भी इस भावुक पल को देखा. ईडी ने संजीव अरोड़ा को 9 मई की देर शाम चंडीगढ़ स्थित उनके सरकारी आवास से गिरफ्तार किया था।  जांच एजेंसी का आरोप है कि वह 100 करोड़ रुपये से ज्यादा के फर्जी GST बिलिंग और मनी लॉन्ड्रिंग रैकेट से जुड़े हुए हैं. ईडी के मुताबिक मोबाइल फोन ट्रेडिंग के नाम पर कई शेल कंपनियों का इस्तेमाल कर फर्जी बिल तैयार किए गए और हवाला जैसे नेटवर्क के जरिए रकम को इधर-उधर किया गया. जांच एजेंसी का दावा है कि दिल्ली स्थित बोगस कंपनियों के माध्यम से संदिग्ध लेनदेन किए गए।  इसी मामले में ईडी ने दिल्ली, चंडीगढ़ और गुरुग्राम समेत कई स्थानों पर छापेमारी भी की थी. छापेमारी के दौरान कई अहम दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड मिलने का दावा किया गया है, जिनकी जांच अभी जारी है. सुनवाई के दौरान संजीव अरोड़ा की ओर से कोर्ट में आवेदन दाखिल कर अपनी पसंद का वकील नियुक्त करने और वकालतनामा पर हस्ताक्षर करने की अनुमति मांगी गई. ईडी के स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर साइमन बेंजामिन ने इस पर कोई आपत्ति नहीं जताई।  इसके बाद कोर्ट ने संजीव अरोड़ा को वकील नियुक्त करने की अनुमति दे दी और जांच अधिकारी को निर्देश दिया कि वकालतनामा से जुड़े दस्तावेज उनके वकील या परिवार के सदस्य को बिना देरी उपलब्ध कराए जाएं. इसके अलावा कोर्ट ने ईडी को यह भी निर्देश दिया कि संजीव अरोड़ा को रोजाना सुबह 10 बजे से 11 बजे तक अपने वकील से मिलने दिया जाए. साथ ही उनकी सेहत को देखते हुए सभी जरूरी मेडिकल सुविधाएं और दवाइयां उपलब्ध कराने के आदेश भी दिए गए हैं। 

CCTV से बढ़ी निगरानी, पंचकूला में ई-चालान सिस्टम का दायरा हुआ और मजबूत

 पंचकूला  पंचकूला में ट्रैफिक नियमों की अनदेखी वाहन चालकों पर भारी पड़ रही है। नियमों को तोड़ने वाले वाहन चालकों के खिलाफ ट्रैफिक पुलिस सख्ती से निपट रही है। ट्रैफिक पुलिस के अलावा तीसरी आंख सीसीटीवी से भी ज्यादा चालान काटे जा रहे हैं। ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर काटे गए चालानों के आंकड़ों में पिछले दो वर्षों के दौरान बड़ा बदलाव देखने को मिला है। वर्ष 2024 और 2025 में हुए चालानों का आंकड़ों में खासा अंतर हैं। वर्ष 2025 में हर महीने औसतन सात हजार से ज्यादा चालान हुए हैं। आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2024 में कुल 87,618 चालान किए गए थे। इनमें 74,635 सीसीटीवी चालान और 12,983 ट्रैफिक पुलिस द्वारा किए गए (आफलाइन) चालान भी शामिल हैं। औसतन हर महीने औसतन 7301 चालान हुए हैं। वहीं वर्ष 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 91,709 पहुंच गया। इसमें 72,294 सीसीटीवी और 19,415 आफलाइन चालान हैं। मार्च में सबसे ज्यादा चालान वर्ष 2025 में मार्च माह में सबसे अधिक 10,301 चालान हुए थे। इनमें सीसीटीवी से 8912 और आफलाइन 1389 चालान शामिल हैं। वहीं दिसंबर में सबसे कम 4927 चालान हुए थे। फरवरी में 9,975 और जनवरी में 9,911 चालान हुए थे।   वर्ष 2026 में 31 मार्च तक कुल तीन महीनों में कुल 11,750 चालान किए गए हैं। इनमें 7,819 सीसीटीवी और 3,928 आफलाइन चालान शामिल हैं। जनवरी 2026 में सबसे अधिक 5,756 चालान हुए थे, जबकि फरवरी में यह संख्या घटकर 2,566 रह गई। मार्च में 3,428 चालान किए गए हैं। आंकड़ों से स्पष्ट है कि ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन करने वाल वाहन चालकों पर पुलिस सीसीटीवी और सड़कों पर उतरकर निगरानी कर रही है। सीसीटीवी के जरिये ई-चालान प्रणाली का दायरा लगातार बढ़ा है। महीना       सीसीटीवी (CCTV)     ऑफलाइन (Offline)     कुल चालान (Total) जनवरी         7,430                         2,481                 9,911 फरवरी         8,218                           1,757                  9,975 मार्च            8,912                          1,389                  10,301 अप्रैल          8,104                            1,556                 9,660 मई           7,570                              370                   7,940 जून         4,590                               696                   5,286 जुलाई       6,104                                2,195                8,299 अगस्त     5,311                                1,794                   7,105 सितंबर     5,323                                  1,435              6,758 अक्टूबर    4,291                                 1,426                5,717 नवंबर      4,080                                  1,750                 5,830 दिसंबर     2,361                                2,566                   4,927 महीना     सीसीटीवी (CCTV)     ऑफलाइन (Offline)     कुल चालान (Total) जनवरी     4,192                           1,564                        5,756 फरवरी     1,249                            1,317                        2,566 मार्च     2,378                                1,047                      3,428      पंचकूला शहर में 473 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। हालांकि इनमें से 200 से ज्यादा कैमरे खराब पड़े हैं। सीसीटीवी कैमरों के रखरखाव की जिम्मेदारी नगर निगम के पास है। खराब कैमरों को लेकर बीते महीने हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लेते हुए रिपोर्ट मांगी थी। वहीं कैमरों को ठीक करवाने के निर्देश दिए गए थे।  

सिंचाई सुविधा से बदल रही तस्वीर, जिले में 3674 हेक्टेयर में गरमा खेती

सरायकेला सरायकेला खरसावां जिले में पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष गरमा खेती का दायरा बढ़ा है. गरमा खेती को लेकर किसान भी खासा उत्साहित है. किसानो का रुझान गरमा धान की ओर देखा जा रहा है. जिले में गरमा धान की खेती का लक्ष्य के अनुसार हो रहा है. 1022 हेक्टेयर में गरमा धान की खेती हो रही है. जिले में पिछले वर्ष 955 हेक्येटर में गरमा धान की खेती हुई थी. गरमा धान की खेती में हुई लाभ से उत्साहित किसान इस साल ओर भी वृहद पैमाने पर खेती कर रहे हैं. धान में आने लगी है बालिया, 15-20 में होगी कटाई खेतों तैयार धान के बालियों आने लगी है. फसल भी पकने को तैयार हैं. इससे किसानों के चेहरे खिल उठे हैं. अगले दो-तीन सप्ताह में गरमा धान पूरी तरह से तैयार हो जाएगा. इससे किसानों को अच्छी आमदानी भी होगी. किसानों ने बताया कि गरमा धान तीन से चार माह में तैयार हो जाता है. चांडिल और चौका क्षेत्र में सर्वाधिक हुई है खेती गरमा धान की खेती सबसे अधिक चांडिल व चौका क्षेत्र में हुई है. चौका के पालना डैम से सिंचाई नहर के कीनारे स्थित पालना, मुसरीबेडा, खूंटी, कुरली, दिरलोंग, झाबरी खेतों के साथ साथ तथा चांडिल डैम से निकलने वाली नहर के स्थित दालग्राम, गांगुडीह, रिमली, रुचाव, पाटा आदि गांवों में गरमा धान की अच्छी खेती हुई है. इसके अलावे खरसावां व कुचाई के पाहाड़ी क्षेत्र में कुछ कुछ स्थानों पर लोग नदी नाला के पानी से गरमा धान की खेती कर रहे है. राजनगर में भी जल संरक्षित कर गरमा धान की खेती की जा रही है. सिंचाई की व्यवस्था हुई तो बढ़ेगा खेती का दायरा जिले में गरमा धान समेत अन्य गरमा फसलों की खेती सिर्फ सिंचाई सुविधा उपलब्ध वाले क्षेत्रों में ही हो रही है. पालना व चांडिल डैम के अलावे पाहाड़ी क्षेत्रों में स्थित छोटे छोटे चैक डैम  ग्रामीण क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होने पर गरमा धान की खेती का दायरा बढ़ सकता है. किसान उद्वह सिंचाई योजना की मांग कर रहे है, ताकि खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंच सके. सुरु डैम पुरा होते ही खरसावां में बढ़ेगी गरमा खेती खरसावां में निर्माणाधीन सुरु जलाशय योजना का कार्य पुरा होते ही क्षेत्र में खेती गरमा की खेती हो पाएगी. डैम का निर्माण कार्य जोरों पर चल रही है. निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद नहर के जरीये करीब एक दर्जन गांवों तक सिंचाई का पानी पहुंचेगा. इससे गरमा धान की खेती भी हो सकेगी. इस वर्ष जिले में 3674 हेक्टेयर में गरमा की खेती सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो इस वर्ष जिले में 3674 हेक्टेयर में गरमा की खेती हो रही है. गरमा फसल में अब तक लक्ष्य का 70 फीसदी आच्छादन हो चुका है. जिले में 5190 हेक्टेयर में गरमा की खेती का लक्ष्य रखा गया था.  1022 हेक्टेयर में गरमा धान, 360 हेक्टेयर में गरमा मक्का, 2175 हेक्टेयर में गरमा मुंग की खेती हो रही है. क्षेत्र के किसान गरमा सूर्यमुखी की खेती में दिलचस्पी नहीं ले रहे है. 850 हेक्टेयर में गरमा सूर्यमुखी की खेती का लक्ष्य था, परंतु सिर्फ 117 हेक्टेयर में ही गरमा सूर्यमुखी की खेती हो रही है. सरायकेला-खरसावां जिले में इस वर्ष हुई गरमा धान की खेती की स्थिति फसल : लक्ष्य (हेक्टयर) : अच्छादन : अच्छादन प्रतिशत     धान : 1025 : 1022 : 99.71     मक्का : 565 : 360 : 63.72     मुंग : 2750 : 2175 : 79.09     सूर्यमुखी : 850 : 117 : 1376     कुल : 5190 : 3674 : 70.79 क्या कहते हैं किसान? पालना के किसान पंचानन महतो कहते हैं कि इस वर्ष जिले में गरमा धान की अच्छी खेती हुई है. धान के बाली आने लगे हैं. अगले 15-20 दिनों में धान की कटाई की जाएगी. किसानों से सरकारी स्तर पर धान खरीद की व्यवस्था हो. धुनाडीह (कुचाई) के किसान गुरुलाल मुंडा कहते हैं कि सिंचाई की व्यवस्था हो तो जिले में गरमा फसल का दायरा भी बढ़ेगा. सिंचाई के अभाव में किसान गरमा धान समेत अन्य फसल उगा नहीं पा रहे हैं. सरकार छोटे-छोटे योजनाओं के माध्यम से सिंचाई की व्यवस्था करें.

बैंक घोटाले में ED की कार्रवाई तेज, AAP नेता दीपक सिंगला हिरासत में; आतिशी का BJP पर हमला

नई दिल्ली प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता दीपक सिंगला को गिरफ्तार कर लिया है. ईडी ने सोमवार सुबह सिंगला सहित कुछ अन्य लोगों से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की. यह कार्रवाई कथित बैंक लोन फ्रॉड और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई।  सूत्रों के अनुसार, एजेंसी कथित वित्तीय अनियमितताओं और संदिग्ध बैंक लोन ट्रांजैक्शन की जांच कर रही है. हालांकि इस मामले में अभी तक ED की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।  बताया जा रहा है कि कार्रवाई के दौरान कई दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन से जुड़े अहम सबूत खंगाले जा रहे हैं. फिलहाल दीपक सिंगला की ओर से इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।  वहीं दीपक सिंगला के ठिकानों पर ED की तलाशी पर AAP नेता और गोवा प्रभारी आतिशी ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, ‘गोवा में आप की बढ़ती लोकप्रियता के चलते बीजेपी के गोवा के सह प्रभारी दीपक सिंगला के यहां ED को भेजा है. ये ना सिर्फ वालेंटियर्स को डराने, बल्कि गोवा AAP संगठन के डाटा को हथियाने का प्रयास है।  दीपक सिंगला के आवास पर 2024 में भी हुई थी छापेमारी दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के ठीक बाद, 27 मार्च 2024 को मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में मधु विहार (दिल्ली) स्थित उनके आवास और अन्य ठिकानों पर ईडी ने छापेमारी की थी। राम सिंह कौन हैं राम सिंह बाबा जी फाइनेंस एक वित्तीय मध्यस्थ बताए जा रहे हैं जिससे लोग बैंकिंग लेनदेन के रूप में अल्पकालिक ऋण लेते थे और एक निश्चित पूर्व-निर्धारित अवधि के बाद उसे बैंकिंग लेनदेन के रूप में ही लौटा देते थे। ईडी अब इस बात की जांच कर रही है कि लोगों से जुटाए गए पैसे का इस्तेमाल कहां और कैसे किया गया। मामले में मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय गड़बड़ी की जांच की जा रही है। सिंगला आम आदमी पार्टी (AAP) की ओर से विश्वास नगर विधानसभा सीट से उम्मीदवार रह चुके हैं. वर्ष 2024 में भी एक जांच के सिलसिले में ED ने उनके ठिकानों पर छापा मारा था। इसी बीच ED ने एक अलग मामले में भी छापेमारी की है. यह मामला करीब 180 करोड़ रुपये के कथित निवेश घोटाले से जुड़ा है, जिसमें लोगों को निवेश के नाम पर ठगी का शिकार बनाया गया। अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली के सुभाष नगर स्थित बाबाजी फाइनेंस ग्रुप से जुड़े राम सिंह नामक व्यक्ति के परिसरों पर भी ED ने तलाशी ली. एजेंसी इस मामले में कथित धोखाधड़ी और मनी ट्रेल की जांच कर रही है. सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और लोगों से पूछताछ हो सकती है तथा जांच का दायरा बढ़ाया जा सकता है। 

30 दिन में फाइल निपटाओ वरना सस्पेंशन तय: बिहार सरकार का सख्त संदेश

पटना बिहार में जनता की समस्याओं के समाधान का फाइल लटकाने वालों अफसरों पर कार्रवाई शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अफसरों को दो टूक शब्दों में संदेश था कि कि हर हाल में जनता की समस्याओं का समाधान कम से कम समय में करना पड़ेगा। सीएम के ऐलान के बाद पहला विकेट मुजफ्फरपुर में गिरा। जिले में एक राजस्व अधिकारी को लापरवाही के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। भूमि सुधार एवं राजस्व मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा है कि इस तरह की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। मंत्री ठीक से काम करेगा तो अधिकाकारियों और कर्मचारियों को भी अपने दायित्यव का समय से पालन करना पड़ेगा। भूमि सुधार मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू हो गई है। इसी के तहत मुजफ्फरपुर के कुढनी में पदस्थापित राजस्व अधिकारी धर्मेंद्र कुमार को सस्पेंड कर दिया गया है। इस विभाग पर भ्रष्टाचार का सबसे अधिक आरोप लगता है। इसने कैंसर रोग की तरह विभाग को जकड़ लिया है। इसलिए एंटिबायोटिक से इलाज शुरू हो गया है। धर्मेंद्र कुमार पर कई बार काम में लापरवाही के आरोप लगे। यह सभी अधिकारियों के लिए एक मैसेज है। तीन महीनों तक हड़ताल के कारण काम काफी पीछे पड़ गया है। अधिकारियों को दिन रात एक करके इमानदारी के साथ काम करना पड़ेगा। जब मंत्री इमानदारी से काम करेंगे तो अधिकारियों और कर्मियों को भी अपने कार्य व्यवहार में सुधार लाना पड़ेगा। दिलीप जायसवाल ने कहा कि लापरवारी पर कार्रवाई यहीं नहीं रुकेगी। माननीय मुख्यमंत्री ने भी साफ कर दिया है कि जनता का काम सफर नहीं करना चाहिए। इसके लिए तीस दिनों का समय भी तय कर दिया गया है। इस समय सीमा का पालन होना चाहिए। जो कोताही बरतेंगे वे नप जाएंगे। उन्हें कोई नहीं बचा पाएगा। मुख्यमंत्री के निर्देश को जमीन पर उतारा जाएगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बीते 11 मई को ही साफ कर दिया था कि किसी भी फाइल को 30 दिनों में निष्पादित कर देना पड़ेगा। ऐसा नहीं करने पर 31वें दिन अधिकारी सस्पेंड हो जाएंगे। मुख्यमंत्री ने सहयोग पोर्टल और सहयोग हेल्पलाइन नंबर 1100 का भी शुभारंभ किया था। सोमवार को उन्होंने फिर से यह बात दोहराई। कहा कि फाइलों को अटकाना और भटकाना नहीं है। जो मामले न्यायालय से संबंधित हैं उनमें भी तीस दिनों के अंदर कोई ना कोई ऐक्शन दिखना चाहिए। अंतिम नहीं तो अंतरिम आदेश तो होना ही चाहिए। ऐसे मामलों में अधिकारियों को 10 दिन और 20 दिनों पर नोटिस दी जाएगी। 25वें दिन की नोटिस के बाद ऐसे अधिकारी खुद को निलंबित समझें।

हुड्डा को हाई कोर्ट से बड़ा झटका, AJL प्लॉट मामले में ED की अर्जी पर जारी हुआ नोटिस

चंडीगढ़. हरियाणा के बहुचर्चित एजेएल (एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड) प्लाट आवंटन मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा व अन्य आरोपितों की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती दिखाई दे रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पंचकूला की विशेष पीएमएलए अदालत द्वारा मनी लान्ड्रिंग मामले की कार्यवाही बंद करने के आदेश को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में चुनौती दी है। ईडी की ओर से दायर आपराधिक पुनरीक्षण याचिका में न केवल निचली अदालत के 3 अप्रैल 2026 के आदेश को रद्द करने की मांग की गई है, बल्कि उस पर तत्काल अंतरिम रोक लगाने की भी अपील की गई है। पूरा मामला पंचकूला सेक्टर-6 स्थित प्लाट नंबर सी-17 से जुड़ा है, जिसे वर्ष 2005 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के दौरान एजेएल को दोबारा आवंटित किया गया था। आरोप है कि यह बहुमूल्य भूखंड वर्ष 1982 की पुरानी दरों करीब 91 रुपये प्रति वर्ग मीटर पर दिया गया, जबकि उस समय बाजार मूल्य कहीं अधिक था। जांच एजेंसियों के अनुसार इस निर्णय से सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचा। इसी आधार पर ईडी ने वर्ष 2016 में धनशोधन निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया और वर्ष 2018 में लगभग 64 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति को कुर्क कर लिया था। मामले में महत्वपूर्ण मोड़ 25 फरवरी 2026 को आया, जब पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने मूल आपराधिक मामले में आरोपितों को राहत प्रदान की। इसके बाद पंचकूला की विशेष पीएमएलए अदालत ने यह कहते हुए ईडी की कार्यवाही समाप्त कर दी कि जब मूल अपराध ही समाप्त हो गया तो मनी लॉन्ड्रिंग की कार्यवाही स्वत टिक नहीं सकती। हालांकि अदालत ने यह छूट दी थी कि यदि भविष्य में सुप्रीम कोर्ट मूल मामले को बहाल करता है तो ईडी पुन कार्रवाई शुरू कर सकती है। अब ईडी ने हाई कोर्ट में दलील दी है कि पीएमएलए अदालत ने कानून की गलत व्याख्या की। एजेंसी के अनुसार मनी लॉन्ड्रिंग एक स्वतंत्र अपराध है और ‘विजय मदनलाल चौधरी’ मामले में सुप्रीम कोर्ट स्पष्ट कर चुका है कि अपराध से अर्जित संपत्ति की जांच केवल मूल एफआईआर पर निर्भर नहीं रहती। ईडी ने यह भी बताया कि सीबीआई पहले ही हाई कोर्ट के फरवरी फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे चुकी है, जहां नोटिस जारी हो चुका है। ऐसे में कार्यवाही बंद रहने से कुर्क संपत्ति मुक्त कराने की कोशिशें जांच को अपूरणीय क्षति पहुंचा सकती हैं। सोमवार को हाई कोर्ट के जस्टिस त्रिभुवन दहिया ने याचिका पर सुनवाई करते हुए भूपेंद्र सिंह हुड्डा व अन्य आरोपितों को आठ जुलाई के लिए नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।