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मासिक दुर्गाष्टमी 2026: 23 मई को बनेगा शुभ योग, जानें पूजा विधि और महत्व

हिंदू धर्म में हर महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मासिक दुर्गाष्टमी मनाई जाती है. इस दिन मां दुर्गा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है. इस बार ज्येष्ठ पुरुषोत्तम मास में यह पर्व पड़ने के कारण इसका महत्व और भी बढ़ गया है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और श्रद्धापूर्वक मां दुर्गा की पूजा करने से भक्तों के जीवन से नकारात्मक ऊर्जा, भय और शत्रुओं का नाश होता है. साथ ही जीवन में सुख-शांति और समृद्धि का आगमन होता है. मासिक दुर्गाष्टमी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त     अष्टमी तिथि प्रारंभ: 23 मई 2026, सुबह 05:04 बजे से     अष्टमी तिथि समाप्त: 24 मई 2026, सुबह 04:27 बजे तक उदयातिथि के अनुसार, मासिक दुर्गाष्टमी का व्रत और पूजन 23 मई 2026, शनिवार को ही किया जाएगा. शनिवार के दिन दुर्गाष्टमी पड़ने के कारण इसका महत्व और भी बढ़ जाता है, क्योंकि शनिवार का संबंध शनि देव से माना जाता है. मान्यता है कि मां दुर्गा की पूजा करने से शनि जनित दोषों से भी राहत मिलती है. मासिक दुर्गाष्टमी की पूजा विधि  पूजा के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें. घर के मंदिर की सफाई करें और गंगाजल का छिड़काव करें. इसके बाद हाथ में जल लेकर मां दुर्गा के सामने व्रत का संकल्प लें. एक लकड़ी की चौकी पर लाल रंग का कपड़ा बिछाएं और उस पर मां दुर्गा की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें. मां दुर्गा को कुमकुम, अक्षत, लाल चंदन और लाल चुनरी अर्पित करें. मां को लाल रंग के फूल अत्यंत प्रिय हैं, इसलिए उन्हें अवश्य चढ़ाएं.  माता रानी को सुहाग की सामग्री जैसे सिंदूर, चूड़ियां और बिंदी अर्पित करें. मां के सामने घी का दीपक और धूप जलाएं. इसके बाद दुर्गा चालीसा और दुर्गा सप्तशती का पाठ करें. फिर मां दुर्गा के मंत्रों का जाप करें. अंत में कपूर से मां दुर्गा की आरती करें और अनजाने में हुई भूल-चूक के लिए क्षमा याचना करें.  

पंचायत चुनाव से पहले OBC आरक्षण पर होगा ट्रिपल टेस्ट, आयोग गठन की तैयारी तेज

लखनऊ यूपी में पंचायत चुनाव समय पर न होने से ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई को खत्म हो जाएगा। ऐसे में प्रशासक समिति के माध्यम से ग्राम प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। पंचायती राज विभाग की ओर से शासन को प्रशासक समिति के माध्यम से पंचायत प्रतिनिधियों को ही बागडोर सौंपने का प्रस्ताव भेजा गया है। ग्राम प्रधान के साथ ही ब्लॉक प्रमुख व जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल भी प्रशासक समिति के माध्यम से बढ़ाया जाएगा। प्रधानों और अध्यक्षों कार्यकाल बढ़ाकर भाजपा सरकार की कोशिश उनकी हमदर्दी हासिल करने की है। माना जा रहा है कि अब पंचायत चुनाव विधानसभा चुनाव के बाद ही होंगे। ऐसे में कार्यकाल बढ़ाए गए प्रधान और अध्यक्ष विधानसभा चुनाव में भाजपा के काम आ सकते हैं। हालांकि प्रधानी की तैयारी में लगे लोगों को इस फैसले से झटका भी लगेगा। ऐसे में यह लोग नुकसान भी पहुंचा सकते हैं। पहली बार ट्रिपल टेस्ट से ओबीसी आरक्षण होगा तय वहीं, पंचायत चुनावों में पहली बार समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग गठित कर ट्रिपल टेस्ट के आधार पर ओबीसी का आरक्षण तय किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर वर्ष 2023 में नगर निकाय चुनावों में पहली बार इसे लागू कर आयोग गठित किया गया था। वर्ष 2021 के पंचायत चुनाव में रैपिड सर्वे से आरक्षण तय किया गया था। समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का कार्यकाल छह महीने का तय किया गया है। अध्यक्ष व सदस्यों की नियुक्ति की प्रक्रिया इस महीने के अंत तक या जून के प्रथम सप्ताह में होने की उम्मीद है। यह आयोग पिछड़नेपन की प्रकृति व प्रभावों की समकालीन, सतत व अनुभवजन्य जांच और अध्ययन, पिछड़ा वर्ग के आंकड़े न होने पर सर्वे और फिर आरक्षण तय करेगा। वर्ष 2021 में पंचायत चुनाव रैपिड सर्वे से हुआ था और वर्ष 2015 के ओबीसी आंकड़े भी रखे गए थे। क्योंकि उत्तराखंड, मध्य प्रदेश व राजस्थान की तर्ज पर यूपी में भी पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल बढ़ाने की मांग जोर-शोर से उठाई जा रही है। वर्ष 2021 में पंचायत चुनाव चार चरणों में अप्रैल-मई में हुए थे। दूसरी ओर अब राज्य निर्वाचन आयोग भी अपना काम तेजी से करेगा। लगातार पांचवीं बार अंतिम मतदाता सूची जारी करने की तारीख बढ़ाकर 10 जून की गई है। अब 10 जून को पंचायत चुनाव की अंतिम मतदाता सूची जारी होने की उम्मीदें हैं। विस चुनाव से पहले पंचायत चुनाव की संभावना कम विधानसभा चुनाव से पहले पंचायत चुनाव होना आसान नहीं होगा। क्योंकि समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का कार्यकाल जून से अगर शुरू हुआ तो यह नवंबर तक रहेगा। वहीं आयोग ने रिपोर्ट देने में समय लगाया तो शासन इसका कार्यकाल बढ़ा सकता है। फिलहाल, सत्तापक्ष ही नहीं विपक्षी दल भी पंचायत चुनाव समय पर कराए जाने को लेकर शांत हैं। ऐसे में ज्यादा उम्मीदें विधानसभा चुनाव के बाद हों। मामला न्यायालय में विचाराधीन है, ऐसे में वहां से जो दिशा-निर्देश मिलेंगे उसका सरकार पालन करेगी।

तबादलों की नई लिस्ट जारी, पुलिस विभाग में बदली गई कई अधिकारियों की जिम्मेदारियां

रायपुर  छत्तीसगढ़ के पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल की सूचना मिली है। यहां बेमेतरा जिले में ASI, प्रधान आरक्षकों और आरक्षकों के तबादले किए गए है। एक साथ 140 पुलिसकर्मियों के तबादले हुए हैं। डीआईजी रामकृष्ण साहू के निर्देश के बाद ट्रांसफर आदेश जारी किया गया है। इस बदलाव को कानून व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। जारी सूची के मुताबिक, कई ASI, प्रधान आरक्षकों और आरक्षकों के तबादले और नई पदस्थापनाएं की गई हैं। करीब 140 पुलिसकर्मियों का एक साथ ट्रांसफर किया गया है। उन्हें वर्तमान पदस्थापना स्थान से हटाकर नई जगह पर तैनात किया गया है। पुलिस विभाग में यह बड़ा फेरबदल प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी और सुचारू बनाने के उद्देश्य से किया गया है। ट्रांसफर आदेश के साथ विस्तृत सूची भी जारी की गई है, जिसमें प्रत्येक कर्मचारी का पदनाम, नाम, वर्तमान पदस्थापना और नई पदस्थापना स्पष्ट रूप से दर्शाई गई है। पुलिसकर्मियों को जल्द ही अपने-अपने कार्यभार संभालने के निर्देश दिए गए हैं। इस प्रशासनिक बदलाव के बाद अब लोगों को उम्मीद है कि जिले में पुलिस व्यवस्था और अधिक सक्रिय होगी। साथ ही अपराधों पर नियंत्रण और जनता की शिकायतों के त्वरित समाधान में भी सुधार देखने को मिलेगा।

बंगाल की राजनीति में नया विवाद, अभिषेक बनर्जी के साइन वाला MLA पत्र रिजेक्ट

कलकत्ता पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष कौन होगा? यह अब तक साफ नहीं हो सका है। इसी बीच खबर है कि विधानसभा सचिवालय ने तृणमूल कांग्रेस की तरफ से नामित विधायक सोहनदेव चट्टोपाध्याय से 80 सदस्यों का समर्थन पत्र मांगा है। वहीं, पार्टी के महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी की तरफ से साइन किए लेटर को खारिज कर दिया है। ऐसे में विधायक ने RTI यानी सूचना का अधिकार दाखिल किया है। क्या है विवाद दरअसल, टीएमसी की तरफ से चट्टोपाध्याय को नामित किया गया है। टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने इस संबंध में सचिवालय में लेटर भेजा था, जिसमें उन्हें विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता देने की मांग की गई थी। अब इस पत्र पर अभिषेक बनर्जी ने साइन किए थे। जबकि, सचिवालय का कहना है कि 80 विधायकों के साइन किया हुआ पत्र लाया जाए। इसके बाद बालीगंज विधायक ने RTI दाखिल की है। इसमें मांग की गई है कि 2011, 2016 और 2021 में विपक्ष के नेता को चुनने के लिए किन नियमों का पालन किया गया था। दफ्तर पर लगा है ताला रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा, 'विधानसभा में विपक्ष का नेता चुनने के लिए आमतौर पर ऐसी कोई चिट्ठी नहीं भेजी जाती। विधानसभा का सचिवालय सीधे उस व्यक्ति को बता देता है कि उन्हें विपक्ष का नेता चुन लिया गया है। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। यहां तक कि विपक्ष के नेता के दफ्तर में भी ताला लटका हुआ है।' सचिवालय भड़का रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रेजरी बेंच के एक सदस्य ने कहा, 'वह (अभिषेक) यह पत्र जारी करने वाले कौन होते हैं? वह सांसद हैं और तथाकथित महासचिव हैं। उनके पास तृणमूल विधायक दल में औपचारिक रूप से कोई पद नहीं है। इस मामले में उनके साइन क्यों चलेंगे।' साथ ही कहा, 'ये बकवास अब रुकनी ही चाहिए।' पत्र में क्या 13 मई को तृणमूल की तरफ से विधानसभा सचिव समरेंद्र नाथ दास को पत्र सौंपा गया था। इस पत्र पर अभिषेक बनर्जी ने साइन किए थे। साथ ही फिरहाद हाकिम को विपक्ष का चीफ व्हिप बनाया गया था। जबकि, नयन बंदोपाध्याय और आशिमा पात्रा को उपनेता बनाने की बात कही गई थी। चट्टोपाध्याय का कहना है, 'मैं आरटीआई दाखिल करने के लिए मजबूर हो गया था। उसमें मैंने पूछा है कि बीते तीन सालों में सचिवालय ने नेता प्रतिपक्ष की भूमिका के लिए किन नियमों का पालन किया है।' उन्होंने नियमों का पालन करने की बात कही है। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया विपक्ष में सबसे बड़े दल को महज 30 सीटों की जरूरत होती है। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि सचिवालय ने चट्टोपाध्याय की नियुक्ति के तरीके पर सवाल उठाए हैं। इसमें कहा गया है कि विधायकों एक आंतरिक मीटिंग में अपना नेता चुनना चाहिए। सूत्रों ने यह भी कहा कि सचिवालय ने बैठक के नतीजों का ब्योरा मांगा है।

पेट्रोल बचाने की पहल, हरियाणा के मंत्री साइकिल चलाकर पहुंचे कैबिनेट मीटिंग में

चंडीगढ़. हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक से पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ईंधन बचत के आह्वान का असर देखने को मिला। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी समेत कई मंत्री जहां अपने काफिले में गाड़ियोंकी संख्या कम कर चुके हैं, वहीं सोमवार को कैबिनेट मंत्री डा. अरविंद शर्मा और कृष्ण कुमार बेदी तथा राज्य मंत्री गौरव गौतम साइकिल चलाकर मंत्रिमंडल की बैठक में शामिल होने के लिए हरियाणा सचिवालय पहुंचे। सहकारिता व पर्यटन मंत्री डा. अरविंद शर्मा पहले भी साइकिल चलाकर सचिवालय पहुंच चुके हैं। सोमवार को हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में शामिल होने के लिए अरविंद शर्मा अपने घर से साइकिल से निकले और सचिवालय पहुंचे। इसी तरह, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री कृष्ण कुमार बेदी ने भी साइकिल चलाई और मंत्रिमंडल की बैठक में पहुंचे। खेल एवं युवा सशक्तीकरण राज्य मंत्री गौरव गौतम ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के फोटो वाली सफेद रंग की टीशर्ट पहुंची हुई थी, जिसके माध्यम से वे ईंधन बचाने का संदेश दे रहे थे। गौरव गौतम भी साइकिल से कैबिनेट की मीटिंग में भागीदारी करने पहुंचे। हरियाणा सरकार के दो मंत्री रणबीर गंगवा और कृष्ण पंवार अपने काफिले को छोड़ने की घोषणा पहले ही कर चुके हैं। उनके हाल ही में रेल में यात्रा करते हुए फोटो सामने आए थे। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल रेलगाड़ी से दिल्ली से चंडीगढ़ पहुंचे थे। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी भी अधिकारियों से आह्वान कर चुके हैं कि वे ईंधन की बचत के लिए कारों की पूलिंग करें तथा वर्चुअल बैठकों का आयोजन करें।  

ट्रेन के शौचालय में मिला जवान का शव, पंजाब से ड्यूटी पर जा रहे लांस नायक की मौत से सनसनी

कलानौर. ऐतिहासिक कस्बा कलानौर के रिटायर्ड सैनिक और खालसा पंचायत के अध्यक्ष भाई राजिंदर सिंह भंगू के बेटे लांस नायक प्रभशरण सिंह की ड्यूटी पर लौटते समय ट्रेन में मौत की खबर से इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। राजिंदर सिंह भंगू ने बताया कि उनका बेटा प्रभशरण सिंह, जो 9 पंजाब सिख रेजिमेंट जम्मू में तैनात था और अब मेरठ में ट्रांसफर हो गया था। कुछ दिन घर पर बिताने के बाद वह ट्रेन से ड्यूटी पर मेरठ के लिए निकला था कि उसके बेटे की ट्रेन में संदिग्ध परिस्थिति में मौत हो गई और उसका शव ट्रेन के शौचालय से बरामद हुआ। राजिंदर सिंह भंगू ने बताया कि शनिवार शाम को उनका बेटा प्रभशरण सिंह अपनी पत्नी और भाई अमृत और अपने परिवार वालों के साथ मुकेरियां रेलवे स्टेशन से ट्रेन से लौटा था और इस दौरान उसने स्टेशन पर अपने परिवार वालों के साथ मोबाइल से फोटो भी खींचे। उन्होंने बताया कि प्रभशरण ने कहा था कि वह मेरठ पहुंच कर सुबह आठ बजे फोन करेगा। उन्होंने बताया कि रविवार सुबह जब फोन नहीं आया तो उसने कई बार फोन किया लेकिन उसके फोन पर सिर्फ घंटी बजती रही। राजिंदर सिंह ने बताया कि फोन न उठने की चिंता के चलते रविवार दोपहर को कलानौर थाने के एसएचओ जतिंदर पाल सिंह को इस बारे में बताया गया। जहां पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए फौजी प्रभशरण सिंह का मोबाइल फोन ढूंढ निकाला और मोबाइल फोन जोधपुर के पास मिलने के बाद पुलिस ने रेलवे पुलिस के साथ मिलकर जोधपुर रेलवे स्टेशन पर शालीमार ट्रेन की जांच की तो उसके बेटे फौजी प्रभशरण सिंह का शव ट्रेन के शौचालय से बरामद हुआ। उसकी सात साल की बेटी और पांच साल का बेटा है। गौरतलब है कि प्रभ शरण सिंह 2013 में आर्मी में भर्ती हुए थे। इस मौके पर पंजाब के पूर्व मंत्री सुच्चा सिंह छोटेपुर ने राजिंदर सिंह भंगू से फोन पर बात करके सैनिक प्रभशरण सिंह की असमय मौत पर गहरा दुख जताया। इस मौके पर शिरोमणि अकाली दल पंथक लहर के भाई रणजीत सिंह खालसा, दल खालसा के भाई बिक्रमजीत सिंह भट्टी, गुरुद्वारा बाबा बंदा सिंह बहादुर लोकल कमेटी के पूर्व अध्यक्ष भाई दलविंदर सिंह बिट्टू, पूर्व सैनिक यूनियन के चैन सिंह, नरिंदर सिंह खैहरा, राजकुमार, बलविंदर सिंह काहलों, राजिंदर सिंह, सचिव जतिंदर सिंह सिद्धू, लखविंदर सिंह, गुरमुख सिंह , जतिंदर सिंह, सरपंच महकप्रीत बाजवा, सरपंच हरदीप सिंह मठारू, कुलवंत राय, महिंदर सिंह, मास्टर रणजोध सिंह मस्तकोट, सुरिंदर पाल सिंह भंगवान आदि ने प्रभशरण की मौत पर रजिंदर सिंह भंगू के साथ गहरा दुख व्यक्त किया।

27 जुलाई 2026 को शनि होंगे वक्री, वृषभ से वृश्चिक तक इन राशियों को मिलेगा बड़ा लाभ

ज्योतिष शास्त्र में शनिदेव को न्याय, कर्म और अनुशासन का देवता माना जाता है. शनिग्रह का किसी भी राशि में मार्गी या वक्री (उल्टी चाल) होना देश-दुनिया और सभी 12 राशियों के जीवन पर गहरा और दूरगामी प्रभाव डालता है. साल 2026 में न्याय के देवता शनि एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रहे हैं. 27 जुलाई 2026 को शनिदेव गुरु की राशि मीन में वक्री होने जा रहे हैं. सामान्यतः शनि की उल्टी चाल या वक्री अवस्था को कष्टकारी माना जाता है, लेकिन ज्योतिषीय गणना के अनुसार जब क्रूर या पापी ग्रह वक्री होते हैं, तो वे चेष्टा बल प्राप्त कर लेते हैं. ऐसे में कुछ विशेष राशियों के लिए शनि की यह वक्री अवस्था भारी नुकसान के बजाय अप्रत्याशित लाभ और बड़ी सफलता के रास्ते खोलने वाली साबित होगी. आइए जानते हैं कि 27 जुलाई से शनिदेव की उल्टी चाल किन 4 राशियों के लिए सबसे ज्यादा लाभकारी रहने वाली है. 1. वृषभ राशि (Taurus) वृषभ राशि के जातकों के लिए शनिदेव का वक्री होना किसी वरदान से कम नहीं रहेगा. शनि आपकी राशि के लिए राजयोग कारक ग्रह माने जाते हैं. इस अवधि में आपके लिए आय के नए और मजबूत स्रोत बनेंगे. लंबे समय से अटका हुआ या डूबा हुआ पैसा अचानक वापस मिल सकता है. नौकरीपेशा लोगों को मनमुताबिक इंक्रीमेंट या प्रमोशन मिल सकता है. जो लोग नई नौकरी की तलाश में हैं, उन्हें बड़े पैकेज का ऑफर मिल सकता है. आपकी रुकी हुई योजनाएं दोबारा गति पकड़ेंगी और आपकी बड़ी महत्वाकांक्षाएं इस दौरान पूरी हो सकती हैं. 2. मिथुन राशि (Gemini) मिथुन राशि के जातकों के लिए शनिदेव का मीन राशि में वक्री होना आपके दशम भाव यानी कर्म और बिजनेस के क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाएगा. यदि आप कोई नया स्टार्टअप या व्यापार शुरू करना चाहते हैं, तो यह समय बहुत अनुकूल है. मार्केट में आपकी साख बढ़ेगी और प्रतिद्वंद्वी शांत रहेंगे. इस दौरान आपको पैतृक संपत्ति से कोई बड़ा लाभ हो सकता है. जमीन, मकान या वाहन खरीदने के योग बेहद मजबूत हैं. कार्यस्थल पर आपकी पुरानी मेहनत का फल अब आपको बोनस या सम्मान के रूप में मिलने लगेगा. 3. तुला राशि (Libra) तुला राशि के स्वामी शुक्र देव हैं, जो शनिदेव के परम मित्र हैं. इसलिए शनि की उल्टी चाल आपके लिए कोर्ट-कचहरी और स्वास्थ्य के मामलों में राहत लेकर आएगी. ऑफिस या सामाजिक जीवन में आपके गुप्त शत्रु आपके सामने टिक नहीं पाएंगे. कोर्ट-कचहरी के किसी पुराने मामले में फैसला आपके पक्ष में आ सकता है. यदि आप पिछले काफी समय से किसी पुरानी या पुरानी बीमारी से परेशान थे, तो 27 जुलाई के बाद आपकी सेहत में तेजी से सुधार होने लगेगा. यदि आपके सिर पर कोई पुराना कर्ज या लोन था, तो इस अवधि में आप उसे चुकाने की स्थिति में आ जाएंगे, जिससे मानसिक तनाव दूर होगा. 4. वृश्चिक राशि (Scorpio) वृश्चिक राशि के जातकों के लिए शनि की वक्री चाल पंचम और नवम भाव से जुड़े शुभ फलों को बढ़ाने वाली साबित होगी. प्रतियोगी परीक्षाओं (Competitive Exams) या उच्च शिक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों को इस दौरान अपनी मेहनत के बेहतरीन परिणाम मिलेंगे. एकाग्रता में वृद्धि होगी. जो लोग शिक्षा या नौकरी के सिलसिले में लंबे समय से विदेश जाने का प्रयास कर रहे हैं, उनके वीजा और यात्रा से जुड़ी रुकावटें दूर होंगी. आपका रुझान धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यों की तरफ बढ़ेगा, जिससे आपको आंतरिक शांति और मानसिक संतुष्टि का अनुभव होगा. शनिदेव के अशुभ प्रभावों से बचने और शुभता बढ़ाने के उपाय शनि की वक्री अवधि के दौरान शुभ फलों को और अधिक मजबूत करने के लिए शनिवार के दिन शनि मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जलाएं. इसके अलावा, गरीब व जरूरतमंद लोगों को काली उड़द की दाल, काले तिल या छतरी का दान करें. हनुमान चालीसा का नियमित पाठ करना भी इस समय आपके भाग्य को बल देगा.  

छिपकली गिरने के संकेत: शरीर के अलग-अलग अंगों पर मिलते हैं शुभ-अशुभ फल

 जब भी घर में छिपकली दिख जाए तो हर इंसान डरने लगता है. लेकिन, अगर वहीं छिपकली किसी शरीर के अंग पर गिर जाए तो मन में ओर ज्यादा खौंफ पैदा हो जाता है. लेकिन, कई लोग शरीर के अंग पर छिपकली गिरने को अच्छा मानते हैं. शरीर के अंग पर छिपकली गिरने से जुड़े तथ्य का जिक्र सामुद्रिक शास्त्र में मिलता है. दरअसल, सामुद्रिक शास्त्र में अलग-अलग अंगों पर छिपकली गिरने के अलग-अलग फल बताए गए हैं. किसी अंग पर छिपकली का गिरना धन, सफलता और शुभ समाचार देता है. तो कहीं इसे सावधानी या बाधाओं से जोड़कर देखा जाता है. तो आइए जानते हैं कि शरीर के किस छिपकली का गिरना शुभ और अशुभ कहलाता है. 1. सिर पर छिपकली गिरना इसे बहुत शुभ माना जाता है. माना जाता है कि व्यक्ति को धन, सम्मान या किसी बड़े अवसर की प्राप्ति हो सकती है. 2. माथे पर छिपकली गिरना यह संकेत देता है कि जल्द ही किसी रिश्तेदार या पुराने दोस्त से मुलाकात हो सकती है. यह समाज में मान-सम्मान भी दिला सकता है. 3. नाक पर छिपकली गिरना इसे सेहत से जोड़ा जाता है. मान्यता है कि कोई पुरानी बीमारी ठीक हो सकती है या राहत मिल सकती है. 4. कान पर छिपकली गिरना यह शुभ समाचार या लाभ मिलने का संकेत माना जाता है. कहीं से अच्छी खबर मिलने की संभावना जताई जाती है. 5. आंख पर छिपकली गिरना इसे मानसिक सेहत से जोड़ा जाता है. मान्यता है कि व्यक्ति किसी बंधन या तनाव से मुक्त हो सकता है. 6. होंठ पर छिपकली गिरना ऊपर के होंठ पर छिपकली का गिरना आर्थिक नुकसान का संकेत माना जाता है. नीचे के होंठ पर छिपकली का गिरना धन लाभ या फायदा होने की संभावना बताई जाती है. 7. हाथ पर छिपकली गिरना दाहिने हाथ पर: सम्मान और सफलता मिलने का संकेत. बाएं हाथ पर: नुकसान या सावधानी बरतने का संकेत. 8. गला और कंधा गले पर गिरना: शत्रुओं से छुटकारा या बाधाओं का अंत. कंधे पर गिरना: किसी काम में सफलता मिलने का संकेत. 9. पेट और नाभि क्षेत्र इसे सुख, समृद्धि और संतान से जुड़ा शुभ संकेत माना जाता है. 10. पीठ पर छिपकली गिरना इसे आमतौर पर अशुभ माना जाता है और यह किसी परेशानी या रुकावट का संकेत हो सकता है. 11. पैर से जुड़े संकेत जांघ, घुटने या पिंडली पर गिरना यात्रा, वाहन सुख या स्थान परिवर्तन का संकेत माना जाता है. 

सौतेली बहन की याचिका खारिज, बच्चों ने कोर्ट में कहा- हमें संप्रेक्षण गृह में कोई डर नहीं

बिलासपुर. बच्चों की मार्मिक कहानी सुनने के बाद चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने दोनों बच्चों को फिलहाल बाल संप्रेक्षण गृह में ही कड़े विधिक संरक्षण में रखने का अंतरिम आदेश दिया है। कोर्ट के समक्ष उपस्थित होकर मासूम बच्चों ने अपनी मर्मस्पर्शी व्यथा सुनाई। बच्चों ने कोर्ट से कहा कि हम बंदी नहीं हैं, बल्कि बाल संप्रेक्षण गृह में पूरी तरह सुरक्षित हैं। याचिकाकर्ता के पति ने बच्ची के साथ तीन बार दुष्कर्म किया था। बच्चों के इस चौंकाने वाले बयान और विधिक तथ्यों की पुष्टि के बाद कोर्ट ने आदेश दिया। दरअसल, सरगुजा क्षेत्र की रहने वाली एक महिला ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि उसकी नाबालिग सौतेली बहन और भाई को कुछ लोगों ने अवैध रूप से बंदी बनाकर रखा है। याचिकाकर्ता महिला ने बच्चों को अपने साथ रखने की मांग करते हुए उनकी सुरक्षा करने वाली एक समाज सेविका, महिला एवं बाल संप्रेक्षण गृह के अधिकारियों सहित अन्य को पक्षकार बनाया था। चीफ जस्टिस की डीबी में मामले की प्रारंभिक सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से कोर्ट को अवगत कराया गया कि बच्चों को बंदी नहीं बनाया गया है, बल्कि उनकी सुरक्षा और विधिक संरक्षण के दृष्टिगत उन्हें बाल संप्रेक्षण गृह में रखा गया है। इस पर वस्तुस्थिति स्पष्ट करने के लिए न्यायालय ने बच्चों को कोर्ट में प्रस्तुत करने कहा। कोर्ट के निर्देशानुसार, पुलिस सुरक्षा में दोनों बच्चों को चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा, जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल के समक्ष प्रस्तुत किया गया। भाई-बहन ने कोर्ट में बताई पूरी सच्चाई न्यायालय के समक्ष दोनों भाई-बहन ने पूरी सच्चाई बताई। बच्चों ने बताया कि याचिकाकर्ता सौतेली बहन के पति ने नाबालिग बच्ची से तीन बार दुष्कर्म जैसी घिनौनी वारदात को अंजाम दिया था। इस गंभीर अपराध की प्राथमिकी पुलिस थाने में दर्ज कराई जा चुकी है और आरोपी फरार है। कोर्ट ने मासूम बच्चों द्वारा दी गई इस बेहद गंभीर जानकारी को प्रशासनिक और विधिक स्तर पर तत्काल सत्यापित कराया। तथ्यों की पुष्टि होने के बाद कोर्ट ने याचिकाकर्ता महिला की नीयत को भांपते हुए बच्चों को उसकी सुपुर्दगी में देने से साफ इंकार कर दिया और उन्हें संप्रेक्षण गृह में ही रखने का आदेश दिया। कोर्ट ने मामले के समस्त विधिक तथ्यों को रिकार्ड पर लेते हुए प्रतिवादी समाज सेविका को अपना पक्ष व जवाब प्रस्तुत करने का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 29 जून को निर्धारित की गई है।

भोपाल के रिटायर्ड जज की बहू केस में सास का बड़ा बयान, ‘अलग कमरे में सोने लगी थी ट्विशा’

 भोपाल मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में रिटायर्ड जज की बहू ट्विशा शर्मा की मौत का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है. कथित तौर पर ससुराल की प्रताड़ना की वजह से मौत के इस मामले में जहां एक तरफ पुलिस ने जांच के लिए विशेष जांच टीम (SIT) बनाई है, वहीं हर दिन कई नए खुलासे सामने आ रहे हैं. बीते सोमवार को आरोपों में घिरी ट्विशा की सास ने मीडिया से बातचीत की. आरोपों में घिरी गिरबाला ने कहा कि मेरे बेटे समर्थ ट्विशा ने एक-दूसरे को पसंद किया था. सबसे पहले ट्विशा ही हमारे घर पर आई थी, उसके बाद उसके माता-पिता आए थे. उसके परिवार और हमारे परिवार में काफी अंतर था, फिर भी हमने शादी करवाई।  'दवा लेकर एक दो दिन ठीक रहती थी ट्विशा' उन्होंने कहा- वह बहुत कम उम्र में ही ग्लैमर वर्ल्ड में आ गई थी. उसका जाना हमारे लिए भी बहुत बड़ा झटका है. उसकी जो दवाई चल रही थी, उससे वह एक-दो दिन ठीक रहती थी, लेकिन फिर उसकी हालत पहले जैसी हो जाती थी. समर्थ कोर्ट में था, तभी ट्विशा ने उसे फोन कर बताया कि उसने MTP (मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी) पिल ले ली है।  'प्रेग्नेंट हुई तो उसने पिल खा ली' गिरबाला ने कहा -पहला बच्चा परिवार के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है, लेकिन उसने हमें एक पल की भी खुशी महसूस नहीं होने दी. 7 मई को उसने पिल्स ले ली थीं. मैं खुद उसका सिर गोद में लेकर बैठती थी. ट्विशा के पिता का व्यवहार अजीब रहता है. वह 20 साल तक उज्बेकिस्तान में फार्मा सेक्टर में रहे हैं और मुझे लगता है कि वह इसका संभावित स्रोत हो सकते हैं. मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है।  'समर्थ उसे देखकर लगातार रो रहा था' उन्होंने कहा-  ये लोग फौज की बात करते हैं, लेकिन हमारी तो पीढ़ियां सेना में रही हैं. मेरे पति ने देश के लिए अपनी जान दी है. मुझे जांच एजेंसियों पर भरोसा है. ऐसा नहीं है कि मुझे सिर्फ इसलिए जमानत मिल गई क्योंकि मैं जिला जज रह चुकी हूं. कोई आम इंसान भी होता, तो उसे भी जमानत मिल जाती. मेरे बेटे को भी बेल मिल जाती।  ट्विशा की मौत हुई तो समर्थ तो AIIMS में नंगे पैर, बिना चप्पल के दौड़ रहा था और ये लोग कह रहे हैं कि AIIMS में हमारी सेटिंग है. समर्थ उसे देखकर लगातार रो रहा था. ड्रग्स के आरोपों पर ट्विशा ने खुद स्वीकार किया था कि उसने भारी मात्रा में मारिजुआना का सेवन किया था. वह बार-बार ज़िद करती थी कि उसे बच्चा नहीं चाहिए था. डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी से ट्विशा का इलाज चल रहा था. दवाइयां उसे प्रेस्क्राइब की गई थीं, लेकिन उसने उन्हें लिया नहीं था।  'ट्विशा के पिता ने मेरे बेटे पर आरोप लगाए' गिरबाला ने बताया कि ट्विशा के पिता ने मेरे बेटे पर ड्रग्स लेने के आरोप लगाए थे, लेकिन वह झूठ था. बाद में उनके पिता ने मुझसे माफी भी मांगी थी. वह ड्रग्स नहीं लेता. ट्विशा के परिवार वाले उल्टा हमें मारने दौड़े और हमें पुलिस बुलानी पड़ी. उसी दिन मैंने अपनी सुरक्षा को लेकर पुलिस को पत्र लिखा था।  'ट्विशा और समर्थ में लड़ाई नहीं होती थी' उन्होंने कहा कि- ट्विशा और समर्थ के बीच कभी लड़ाई नहीं होती थी, लेकिन जब भी वह दिल्ली से लौटकर आती थी तो उसका व्यवहार बदल जाता था. MTP (मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी) के बाद ट्विशा ने समर्थ से कहा था कि उसे स्पेस चाहिए और वह अलग कमरे में सोने लगी थी. ट्विशा कहती थी कि उसके परिवार ने उसे बहुत छोटी उम्र से ही ग्लैमर वर्ल्ड में डाल दिया था. वह 17 तारीख को दिल्ली गई थी, लेकिन वह घर नहीं गई और पूरी रात कहां रही, यह उसने नहीं बताया. उसने पहले भी ऐसा कुछ किया था, जिसकी वजह से उबर ने ट्विशा को ब्लैकलिस्ट कर रखा था।  बता दें कि  बीते 12 मई को छत के सरिये से फांसी पर लटकी मिली ट्विशा शर्मा के केस में रोज नई परतें खुल रही हैं. वहीं ट्विशा के माता पिता का इसे मर्डर बता रहे हैं।